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HPV वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत के साथ PM मोदी का कांग्रेस पर तीखा प्रहार, बोले – ‘मुस्लिम लीग–माओवादी कांग्रेस देश को बदनाम करने में लगी’

अजमेर से राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत, साथ ही गरमाई सियासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के अजमेर से देशव्यापी एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। यह कार्यक्रम एक ऐतिहासिक सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा कैंसर) से बचाना है।

हालांकि यह कार्यक्रम स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण था, लेकिन इस मंच से प्रधानमंत्री ने विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला भी बोला। उन्होंने कांग्रेस को “मुस्लिम लीग–माओवादी कांग्रेस” करार देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी देश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बदनाम करने की कोशिश कर रही है।

इस कार्यक्रम में जहां एक ओर करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी।

क्या है HPV वैक्सीनेशन अभियान?

प्रधानमंत्री मोदी ने 14 वर्ष की बालिकाओं के लिए देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत की। यह टीका ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) से बचाव के लिए दिया जाता है, जो सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है।

सर्वाइकल कैंसर क्यों गंभीर है?

  • भारत में महिलाओं में होने वाले कैंसर में सर्वाइकल कैंसर प्रमुख कारणों में से एक है।
  • ग्रामीण और निम्न आय वर्ग की महिलाओं में इसकी पहचान अक्सर देर से होती है।
  • समय पर टीकाकरण से भविष्य में इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सरकार का लक्ष्य है कि देशभर में 14 वर्ष की बालिकाओं को यह टीका मुफ्त में उपलब्ध कराया जाए। इसे सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से लागू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

₹16,680 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन

स्वास्थ्य अभियान के साथ प्रधानमंत्री ने राजस्थान में ₹16,680 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। इनमें शामिल हैं:

  • सड़क और राजमार्ग परियोजनाएं
  • पेयजल योजनाएं
  • ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाएं
  • सिंचाई और औद्योगिक विकास कार्य
  • शहरी विकास से संबंधित योजनाएं

सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से राजस्थान की आर्थिक प्रगति को गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी।

AI समिट में विरोध प्रदर्शन बना राजनीतिक मुद्दा

हाल ही में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक घटना ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। इस कार्यक्रम में दुनिया भर से तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल के अंदर प्रधानमंत्री की तस्वीर वाले टी-शर्ट पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। टी-शर्ट पर कथित तौर पर “PM is compromised”, “India-US Trade Deal” और “Epstein Files” जैसे नारे लिखे थे।

सुरक्षा एजेंसियों ने इस विरोध को कार्यक्रम की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया। बाद में कुछ को जमानत भी मिली।

PM मोदी का कांग्रेस पर हमला

अजमेर के मंच से प्रधानमंत्री ने इस घटना का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए।

“कांग्रेस अब पुरानी कांग्रेस नहीं”

उन्होंने कहा कि आज की कांग्रेस वही पार्टी नहीं रही जिसने स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका निभाई थी। उनके अनुसार, कांग्रेस अब “मुस्लिम लीग–माओवादी कांग्रेस” बन चुकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • कांग्रेस देश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
  • विदेशी मेहमानों के सामने भारत की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • जब दुनिया भारत की प्रगति की सराहना करती है, तब कांग्रेस उसे कमजोर करने का काम करती है।

ऐतिहासिक संदर्भ

प्रधानमंत्री ने “मुस्लिम लीग” का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह मुस्लिम लीग ने विभाजन की राजनीति की, उसी मानसिकता के साथ आज कांग्रेस काम कर रही है।

उन्होंने “माओवादी” शब्द का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।

रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर आरोप-प्रत्यारोप

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि:

  • उनके शासनकाल में सेना को पर्याप्त संसाधन नहीं मिले।
  • वन रैंक वन पेंशन (OROP) को लागू करने में देरी की गई।
  • रक्षा सौदों में घोटाले हुए।

इसके विपरीत, उन्होंने अपनी सरकार के कार्यकाल में की गई सर्जिकल स्ट्राइक और अन्य सैन्य कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने सेना को मजबूत किया है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री के इन बयानों पर कांग्रेस नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी नेताओं का कहना है कि:

  • सरकार आलोचना को देशविरोधी करार दे रही है।
  • लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सवाल पूछना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
  • राजनीतिक असहमति को देशद्रोह या राष्ट्रविरोध से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

कांग्रेस ने कहा कि वह राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखना जारी रखेगी।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

देश में आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक माहौल पहले से ही गरम है। ऐसे में:

  • सत्तारूढ़ दल विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बना रहा है।
  • विपक्ष सरकार की नीतियों और निर्णयों पर सवाल उठा रहा है।

अजमेर का यह कार्यक्रम एक उदाहरण है कि किस तरह सरकारी योजनाओं के शुभारंभ के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी दिया जाता है।

अमेरिका-भारत व्यापार समझौता: पीयूष गोयल ने कहा- देशहित को प्राथमिकता, टैरिफ दरों में बदलाव की संभावनाएं

अमेरिका में टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद वैश्विक व्यापार माहौल में नई हलचल पैदा हो गई है। इस बदलती स्थिति के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ किया है कि भारत फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार और निगरानी की रणनीति अपना रहा है। सरकार का कहना है कि हर कदम देश के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर उठाया जाएगा।

मंत्री ने एक कार्यक्रम में कहा कि यह स्थिति लगातार बदल रही है और भारत घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ संवाद जारी है और आंतरिक स्तर पर भी व्यापक विचार-विमर्श हो रहा है। उनका कहना था कि जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा, क्योंकि परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।

अमेरिका के साथ संवाद जारी है, और दोनों देशों के बीच हुए संयुक्त वक्तव्य में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि हालात बदलते हैं तो समझौते को दोबारा संतुलित किया जा सकता है। मंत्री ने संकेत दिया कि अमेरिकी सरकार के पास नीतिगत फैसलों के कई विकल्प हैं, इसलिए अंतिम तस्वीर साफ होने में समय लग सकता है। ऐसे में भारत का रुख संतुलित और व्यावहारिक है।

टैरिफ दरों में बदलाव का क्या मतलब है? मंत्री ने “तुलनात्मक लाभ” की बात कही। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बहुत मायने रखती है। यदि भारत पर लागू टैरिफ दर प्रतिस्पर्धी देशों से कम होती है, तो भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिल सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 50 प्रतिशत जैसी ऊंची टैरिफ दर भारतीय निर्यात को नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं, यदि दर कम होकर 15 प्रतिशत जैसी हो जाए और यह अन्य देशों से कम हो, तो भारत को स्पष्ट लाभ मिल सकता है।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यापार समझौते को केवल टैरिफ के आंकड़ों से नहीं आंका जा सकता। इसमें बाजार तक पहुंच, निवेश के अवसर, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी शामिल होती हैं। हालांकि अंतिम समझौते के पूरे विवरण साझा नहीं किए जा सकते, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि समझौते में भारत के लिए कई सकारात्मक पहलू शामिल हैं। सरकार ने उद्योग जगत और निर्यातकों को आश्वस्त किया है कि भारत वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप रणनीतिक फैसले लेगा। उद्देश्य यह है कि भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिले और नए अवसरों के द्वार खुलें।

ICC Men’s T20 World Cup, 2026 IND vs ZIM: भारत की 72 रन की धमाकेदार जीत, अब 1 मार्च को वेस्टइंडीज से सेमीफाइनल की निर्णायक जंग

ICC Men’s T20 World Cup, 2026 के सुपर-8 चरण में भारत ने जिंबाब्वे को 72 रन से करारी शिकस्त देकर टूर्नामेंट में अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा है। इस जीत के साथ ग्रुप-1 का समीकरण और भी रोमांचक हो गया है। भारत की जीत से जहां दक्षिण अफ्रीका ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली, वहीं अब भारतीय टीम के लिए 1 मार्च को वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाला मुकाबला ‘करो या मरो’ की स्थिति में बदल गया है। जो भी टीम इस मैच में जीत दर्ज करेगी, वही सेमीफाइनल में कदम रखेगी।

यह मुकाबला सिर्फ दो टीमों के बीच की भिड़ंत नहीं, बल्कि रणनीति, दबाव और प्रदर्शन की असली परीक्षा होगा। भारत ने जिंबाब्वे के खिलाफ जिस तरह से बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में संतुलित प्रदर्शन किया, उसने टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है।

भारत का विस्फोटक प्रदर्शन: 256 रन का विशाल स्कोर

पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने टी20 विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया। निर्धारित 20 ओवरों में भारत ने 4 विकेट के नुकसान पर 256 रन बनाए। यह स्कोर न केवल मैच की दिशा तय करने वाला था, बल्कि विपक्षी टीम पर मानसिक दबाव बनाने के लिए भी काफी था।

अभिषेक शर्मा की आक्रामक वापसी

सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने फॉर्म में दमदार वापसी की। उन्होंने महज 30 गेंदों में 55 रन बनाए, जिसमें चार चौके और चार छक्के शामिल थे। उनकी पारी की खासियत थी बेखौफ बल्लेबाजी और पावरप्ले का भरपूर इस्तेमाल। उन्होंने शुरुआत से ही जिंबाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बनाया और रन गति को कभी धीमा नहीं होने दिया।

अभिषेक की यह पारी इसलिए भी अहम रही क्योंकि पिछले कुछ मैचों में वे बड़े स्कोर नहीं बना पा रहे थे। इस मैच में उन्होंने दिखा दिया कि वे बड़े मंच पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।

हार्दिक पंड्या की कप्तानी पारी

मध्यक्रम में हार्दिक पंड्या ने विस्फोटक अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने 23 गेंदों पर नाबाद 50 रन बनाए, जिसमें चार छक्के और दो चौके शामिल थे। उनकी स्ट्राइक रेट 200 से ज्यादा रही, जिसने भारतीय पारी को आखिरी ओवरों में नई ऊंचाई दी।

हार्दिक ने न सिर्फ तेजी से रन बनाए, बल्कि दूसरे छोर पर बल्लेबाजों को संभलकर खेलने की आजादी भी दी। डेथ ओवर्स में उनके आक्रमण ने जिंबाब्वे की गेंदबाजी को पूरी तरह बिखेर दिया।

संतुलित बल्लेबाजी क्रम

भारत की बल्लेबाजी की खास बात यह रही कि शीर्ष और मध्यक्रम दोनों ने योगदान दिया। टीम ने जोखिम उठाते हुए रन बनाने की रणनीति अपनाई, जिसका परिणाम 256 रन के विशाल स्कोर के रूप में सामने आया। यह स्कोर सुपर-8 जैसे दबाव वाले चरण में बनाना भारतीय बल्लेबाजी की गहराई और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

जिंबाब्वे की संघर्षपूर्ण पारी: 184 रन पर थमी उम्मीद

257 रन के लक्ष्य का पीछा करना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होता, और जिंबाब्वे के लिए तो यह पहाड़ जैसा लक्ष्य था। हालांकि टीम ने कोशिश की, लेकिन निर्धारित 20 ओवरों में 6 विकेट खोकर 184 रन ही बना सकी।

ब्रायन बेनेट की जुझारू पारी

जिंबाब्वे के सलामी बल्लेबाज ब्रायन बेनेट ने शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने 59 गेंदों पर नाबाद 97 रन बनाए, जिसमें छह छक्के और आठ चौके शामिल थे। बेनेट ने अंत तक संघर्ष किया और शतक से मात्र तीन रन दूर रह गए।

उनकी पारी ने मैच को पूरी तरह एकतरफा होने से बचाया। हालांकि दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। यदि कोई और बल्लेबाज लंबी पारी खेलता, तो मुकाबला थोड़ा और रोमांचक हो सकता था।

सिकंदर रजा का योगदान

कप्तान सिकंदर रजा ने 31 रन की पारी खेली, लेकिन वे भी रन गति को लगातार बनाए रखने में सफल नहीं हो सके। भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर जिंबाब्वे को मैच से दूर रखा।

भारतीय गेंदबाजी का कमाल

256 रन बनाने के बाद भी भारतीय टीम ढीली नहीं पड़ी। गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन-लेंथ के साथ गेंदबाजी की और विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

अर्शदीप सिंह बने हीरो

भारत की ओर से सबसे सफल गेंदबाज अर्शदीप सिंह रहे। उन्होंने 4 ओवर में 24 रन देकर 3 विकेट झटके। अर्शदीप ने पावरप्ले और डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर और बदलाव के साथ गेंदबाजी की, जिससे जिंबाब्वे की रन गति पर अंकुश लगा।

अन्य गेंदबाजों का सहयोग

अक्षर पटेल ने 35 रन देकर 1 विकेट लिया। वरुण चक्रवर्ती ने भी 35 रन खर्च कर 1 विकेट झटका। शिवम दुबे ने 46 रन देकर एक सफलता हासिल की। सभी गेंदबाजों ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई और टीम की जीत सुनिश्चित की।

ग्रुप-1 का समीकरण और सेमीफाइनल की जंग

सुपर-8 के ग्रुप-1 में अब स्थिति बेहद रोचक हो गई है। दक्षिण अफ्रीका लगातार दो मैच जीतकर 4 अंकों के साथ शीर्ष पर है और सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। वेस्टइंडीज 2 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि भारत भी 2 अंक लेकर तीसरे स्थान पर है।

हालांकि नेट रन रेट के मामले में वेस्टइंडीज (+1.791) भारत (-0.100) से आगे है। ऐसे में 1 मार्च को भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाला मुकाबला निर्णायक होगा। जो भी टीम इस मैच में जीत दर्ज करेगी, वही सेमीफाइनल का टिकट हासिल करेगी।

1 मार्च: भारत बनाम वेस्टइंडीज – आर-पार की टक्कर

अब सभी निगाहें 1 मार्च के मुकाबले पर टिकी हैं। यह मैच किसी फाइनल से कम नहीं होगा। भारत के लिए यह मैच सिर्फ जीत का नहीं, बल्कि नेट रन रेट और रणनीति का भी खेल होगा।

भारतीय टीम को बल्लेबाजी में इसी तरह आक्रामक शुरुआत की जरूरत होगी। साथ ही गेंदबाजों को पावरप्ले में विकेट निकालकर दबाव बनाना होगा। वेस्टइंडीज की टीम अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जानी जाती है, इसलिए भारतीय गेंदबाजों को सटीक रणनीति के साथ उतरना होगा।

जेएनयू में छात्रों का विरोध प्रदर्शन: वाइस-चांसलर के इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र, जानें पूरी खबर

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है, जिसमें वे वाइस-चांसलर शांतिश्री डी पंडित के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि वाइस-चांसलर ने हाल ही में एक इंटरव्यू में जातिवादी और हाशिये पर पड़े समुदायों के प्रति असंवेदनशील टिप्पणियां की थीं।

जेएनयू के छात्र संगठनों ने वाइस-चांसलर की टिप्पणियों की निंदा की है और उनके इस्तीफे की मांग की है। छात्रों ने विश्वविद्यालय के गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जिसे देखते हुए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी थी। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने का भी प्रयास किया, जिसका उन्होंने विरोध किया।

रविवार देर रात भी जेएनयू में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें कुछ छात्र घायल हुए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में किसी भी तरह के अराजक व्यवहार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी।

छात्रों का कहना है कि वे वाइस-चांसलर के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं और अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे जब तक कि उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती। जेएनयू में छात्रों का विरोध प्रदर्शन एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिसमें छात्रों की मांगों को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।

Sunetra Pawar बनीं NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष: अजित पवार के निधन के बाद सर्वसम्मति से मिली कमान, महाराष्ट्र की राजनीति में नए दौर की शुरुआत

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा और भावनात्मक मोड़ उस समय आया जब सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। यह फैसला पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया, जो मुंबई में आयोजित हुई। यह चुनाव पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन के लगभग एक महीने बाद हुआ है।

अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में जो शून्य उत्पन्न हुआ था, उसे भरने के लिए पार्टी ने तेज़ी से नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी की। सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना जाना इस बात का संकेत है कि पार्टी एकजुट है और नेतृत्व के सवाल पर किसी प्रकार का मतभेद नहीं है।

अजित पवार का निधन और राजनीतिक शून्य

महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार एक प्रभावशाली और रणनीतिक नेता के रूप में जाने जाते थे। बारामती से कई बार विधायक चुने गए अजित पवार ने राज्य की सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर मजबूत पकड़ बनाई थी। उनके अचानक निधन (बारामती के पास विमान हादसे में) ने न केवल एनसीपी बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को झकझोर दिया।

उनके निधन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भावनात्मक माहौल था। ऐसे समय में नेतृत्व का सवाल बेहद महत्वपूर्ण हो गया था। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विचार-विमर्श के बाद सुनेत्रा पवार के नाम पर सहमति बनाई।

सर्वसम्मति से हुआ चयन

एनसीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी सदस्यों ने समर्थन दिया। इस प्रकार उन्हें सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।

यह निर्णय केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम पार्टी को एकजुट रखने और आगामी चुनावों की तैयारियों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक था।

सुनेत्रा पवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि

सुनेत्रा पवार पहले से ही सक्रिय राजनीति में रही हैं। वह राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं और सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। अजित पवार के साथ लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में सहयोगी रहीं सुनेत्रा पवार को जमीनी राजनीति की समझ रखने वाली नेता माना जाता है।

अजित पवार के निधन के बाद उन्हें महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री भी बनाया गया था, जिससे उनकी प्रशासनिक भूमिका और मजबूत हुई। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।

एनसीपी के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव?

1. संगठनात्मक स्थिरता

पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद संगठन में कोई बड़ा मतभेद सामने नहीं आया। इससे कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश गया है कि पार्टी नेतृत्व को लेकर एकजुट है।

2. महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण

सुनेत्रा पवार का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना पार्टी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह पहली बार है जब किसी महिला को एनसीपी की राष्ट्रीय कमान सौंपी गई है। इससे महिला नेतृत्व को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

3. आगामी चुनावों की तैयारी

महाराष्ट्र में आने वाले स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह फैसला रणनीतिक रूप से अहम है। पार्टी को नए सिरे से संगठित करने और गठबंधन राजनीति को संतुलित रखने की जिम्मेदारी अब सुनेत्रा पवार पर होगी।

बारामती पर सबकी नजर

बारामती विधानसभा क्षेत्र अजित पवार का गढ़ रहा है। उनके निधन के बाद यहां उपचुनाव की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुनेत्रा पवार यहां से चुनाव लड़ सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो यह मुकाबला बेहद दिलचस्प होगा और पूरे राज्य की निगाहें इस सीट पर टिकी रहेंगी।गठबंधन राजनीति पर प्रभाव

महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति गठबंधन समीकरणों पर आधारित है। एनसीपी की भूमिका राज्य सरकार में अहम है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सुनेत्रा पवार को न केवल संगठन बल्कि गठबंधन सहयोगियों के साथ तालमेल भी साधना होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि वह संगठन और सरकार दोनों में संतुलन बनाए रखने में सफल रहती हैं तो पार्टी की स्थिति और मजबूत हो सकती है।


पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष चुने जाने के बाद पार्टी कार्यालयों में कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे “नए युग की शुरुआत” बताया। सोशल मीडिया पर भी समर्थकों ने इसे स्थिरता और निरंतरता का प्रतीक बताया।

अमित शाह का सीमांचल दौरा: घुसपैठियों को चिह्नित कर बाहर निकालने का अभियान जल्द

गृह मंत्री अमित शाह ने सीमांचल में एक कार्यक्रम के दौरान घुसपैठियों को चिह्नित कर उन्हें देश से बाहर भेजने के लिए जल्द ही अभियान चलाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सीमांचल इलाके में घुसपैठियों की पहचान की जाएगी और फिर उन्हें देश से बाहर भेजने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि जिस देश की सीमाएं फेंसिंग से सुरक्षित हैं, वहां निगरानी अपेक्षाकृत आसान होती है, लेकिन खुली सीमा की सुरक्षा चैलेंजिंग होती है। उन्होंने सीमा सुरक्षा को लेकर मल्टी लेयर सुरक्षा व्यवस्था, मजबूत इंफॉर्मेशन सिस्टम के साथ स्थानीय लोगों से बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया।

गृह मंत्री ने यह भी बताया कि लगभग 554 किलोमीटर लंबी बॉर्डर रोड के निर्माण की भारत-नेपाल सीमा सड़क योजना के तहत स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि सीमा से करीब 10 किलोमीटर के अंदर जितने भी अवैध अतिक्रमण किए गए हैं, उसे हटाया जाएगा और घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर किया जाएगा।

अमित शाह ने सीमा पर तैनात जवानों को ट्रेनिंग देने की बात भी कही और बंगाल में बीजेपी की जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि बिहार में घुसपैठियों को बाहर का रास्ता दिखाने के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ा गया था और इसे जनता ने स्वीकार भी किया। अब बंगाल में चुनाव है और वहां भी बीजेपी जीतेगी। जीत के बाद सबसे पहले वहां सीमा वाले इलाके में बाड़ का काम किया जाएगा और चुन-चुन कर घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा।

पंचकूला प्लॉट मामले में बड़ी राहत: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भूपिंदर सिंह हुड्डा और एजेएल को दी क्लीन चिट, सभी आरोप रद्द

हरियाणा की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे पंचकूला प्लॉट पुनः आवंटन मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। Punjab and Haryana High Court ने पूर्व हरियाणा मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda और Associated Journals Limited (एजेएल) को सभी आपराधिक आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत ने न केवल ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों को रद्द किया, बल्कि जांच एजेंसी की कार्रवाई पर भी कड़ी टिप्पणी की।

यह फैसला राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला पिछले एक दशक से अधिक समय से विवादों में रहा है।

क्या है पूरा मामला?

पंचकूला के सेक्टर-6 में स्थित संस्थागत प्लॉट नंबर C-17 को मूल रूप से 1982 में एजेएल को आवंटित किया गया था। एजेएल ऐतिहासिक रूप से ‘नेशनल हेराल्ड’ जैसे प्रकाशनों से जुड़ी कंपनी रही है। उस समय प्लॉट का उद्देश्य समाचार पत्र प्रकाशन से संबंधित गतिविधियों के लिए भवन निर्माण था।

निर्धारित समयसीमा में निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण 1992 में तत्कालीन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) ने प्लॉट का आवंटन रद्द कर दिया। इसके बाद एजेएल ने अपील और पुनर्विचार याचिकाएं दायर कीं, लेकिन लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकला।

2005 में पुनः आवंटन और विवाद की शुरुआत

2005 में जब भूपिंदर सिंह हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने एजेएल को वही प्लॉट पुनः आवंटित करने का आदेश दिया। यह पुनः आवंटन मूल दर (1982 की कीमत) पर ब्याज सहित किया गया। एजेएल ने आवश्यक शुल्क और विस्तार शुल्क जमा कर निर्माण कार्य पूरा किया और बाद में उसे ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी मिल गया।

यहीं से विवाद शुरू हुआ। आरोप लगाए गए कि प्लॉट का पुनः आवंटन मौजूदा बाजार दरों के बजाय पुरानी दरों पर किया गया, जिससे राज्य सरकार को कथित वित्तीय नुकसान हुआ।

सरकार बदलने के बाद जांच

2014 में हरियाणा में सरकार बदलने के बाद इस मामले की विजिलेंस जांच शुरू हुई। बाद में मामला Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दिया गया। CBI ने 2018 में हुड्डा, एजेएल और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया।

CBI का आरोप था कि मुख्यमंत्री के रूप में हुड्डा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एजेएल को अनुचित लाभ पहुंचाया।

ट्रायल कोर्ट में आरोप तय

विशेष CBI अदालत ने 2021 में आरोप तय किए। इसके खिलाफ हुड्डा और एजेएल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप रद्द करने की मांग की। उनका तर्क था कि यह प्रशासनिक निर्णय था, न कि आपराधिक कृत्य।

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

फरवरी 2026 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा:

  • अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया जिससे आपराधिक साजिश साबित हो।
  • सरकारी खजाने को वास्तविक नुकसान हुआ, इसका प्रमाण नहीं दिया गया।
  • पुनः आवंटन का आदेश वैध प्रशासनिक निर्णय था, जिसे कभी रद्द नहीं किया गया।
  • भ्रष्टाचार के आरोपों के लिए आवश्यक तत्वों की कमी है।

अदालत ने कहा कि इस मामले में मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

अदालत की CBI पर टिप्पणी

हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों से प्रथम दृष्टया आपराधिक मामला नहीं बनता। इस प्रकार, आरोप तय करने का आदेश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।

राजनीतिक असर

यह फैसला भूपिंदर सिंह हुड्डा के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। विपक्ष के नेता के रूप में उनकी राजनीतिक छवि पर इस मामले का प्रभाव रहा था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे “सत्य की जीत” बताया।

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।

Red Fort Blast Case: NIA की बड़ी कार्रवाई, 2 और आतंकी गिरफ्तार, कुल 11 आरोपी हिरासत में; साजिश की परतें खुलीं

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक लाल किला के पास हुए चर्चित बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ताजा गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। एजेंसी का दावा है कि जांच में एक सुनियोजित आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें लॉजिस्टिक सपोर्ट, हथियारों की आपूर्ति और विदेशी संपर्कों की भूमिका सामने आ रही है।

यह मामला नवंबर 2025 में लाल किला क्षेत्र में हुए विस्फोट से जुड़ा है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया था। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच NIA को सौंप दी थी।

ताजा गिरफ्तारी: कौन हैं आरोपी?

NIA ने जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान जमीर अहमद अहंगर और तौफैल अहमद भट के रूप में हुई है। दोनों जम्मू-कश्मीर के निवासी बताए जा रहे हैं। एजेंसी के अनुसार, ये दोनों प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े ‘ओवर ग्राउंड वर्कर’ (OGW) के तौर पर काम कर रहे थे।

जांच एजेंसी का कहना है कि ये आरोपी मुख्य साजिशकर्ता को हथियार और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में शामिल थे। प्रारंभिक पूछताछ में यह संकेत मिला है कि इन्होंने विस्फोट में इस्तेमाल हुए नेटवर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

दोनों आरोपियों को दिल्ली की विशेष NIA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए एजेंसी की रिमांड पर भेज दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

नवंबर 2025 में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक कार में हुए धमाके से पूरा इलाका दहल गया था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास खड़ी कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं और कई लोग घायल हो गए। इस हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें मुख्य आरोपी भी शामिल था।

जांच में सामने आया कि विस्फोटक से लदी कार को एक संदिग्ध ने मौके पर खड़ा किया था। सुरक्षा एजेंसियों ने मौके से मिले डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर कई राज्यों में छापेमारी की।

साजिश की परतें: ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल’ का खुलासा

NIA की जांच में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। एजेंसी का दावा है कि इस हमले के पीछे एक तथाकथित ‘व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल’ सक्रिय था। यानी ऐसे लोग, जो पेशे से शिक्षित और पेशेवर पृष्ठभूमि रखते हैं, लेकिन गुप्त रूप से आतंकी गतिविधियों में संलिप्त थे।

इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कुछ डॉक्टर और धार्मिक कार्यकर्ता भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये लोग सीधे तौर पर विस्फोट को अंजाम देने में शामिल नहीं थे, बल्कि साजिश रचने, फंडिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट और छिपने की जगह उपलब्ध कराने में भूमिका निभा रहे थे।

विदेशी कनेक्शन की जांच

NIA इस मामले में विदेशी लिंक की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ संदिग्धों के संपर्क पाकिस्तान और खाड़ी देशों में बैठे हैंडलर्स से हो सकते हैं। हालांकि, एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया है।

जांच टीम डिजिटल चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और हवाला ट्रांजैक्शन की गहन पड़ताल कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, फंडिंग का नेटवर्क बहुस्तरीय और जटिल था, जिसे ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण है।

सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती

लाल किला जैसे राष्ट्रीय प्रतीक स्थल के पास हुए विस्फोट ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में हाई अलर्ट घोषित किया गया था। संवेदनशील इलाकों, मेट्रो स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में सुरक्षा बढ़ा दी गई।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताते हुए जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। NIA के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी मिलकर काम कर रही हैं।

कानूनी कार्रवाई और आगे की रणनीति

NIA ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। एजेंसी जल्द ही आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है।

विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह एक सुनियोजित आतंकी साजिश थी, जिसका मकसद देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देना और दहशत फैलाना था।

NCERT की कक्षा 8 की विवादित सामाजिक विज्ञान पुस्तक: सीजेआई की आपत्ति के बाद पुनः समीक्षा, बिक्री रोक और बिके 38 प्रतियों की वापसी की कोशिश

नई दिल्ली – राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की सोशल साइंस भाग-2 की पाठ्यपुस्तक को विवाद का विषय बनने के बाद वापस बुला लिया है। इसका कारण एक अध्याय था जिसमें न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों, विशेषकर ‘भ्रष्टाचार’ पर चर्चा की गई थी। इस अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने कड़ी आपत्ति जताई, जिस पर NCERT ने वितरण रोक दिया और पुस्तक को बाजार से हटा लिया।

विवाद का मूल — ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाला अध्याय

पुस्तक का चैप्टर 4, जिसका शीर्षक था “The Role of Judiciary in Our Society”, इसमें न्यायपालिका की भूमिका के साथ न्यायिक प्रणाली द्वारा सामना किए जाने वाले चुनौतियों जैसे लंबित मामलों और भ्रष्टाचार पर भी सामग्री शामिल थी। इस खंड में अदालतों के सामने ठोस मुद्दों के रूप में न्यायाधीशों की संख्या की कमी, प्रक्रियात्मक जटिलताएं और भ्रष्टाचार की बात की गई थी, जिसे पढ़ाने का उद्देश्य था छात्रों को वास्तविकता-आधारित दृष्टिकोण देना।

एनसीईआरटी की इस नई पाठ्यपुस्तक का लक्ष्य था रिमूव प्रभावित सामग्री और स्कूल पाठ्यक्रम को नया रूप देना, लेकिन कोर्ट की आपत्ति के चलते इस प्रक्रिया को रोकना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट में मामला और कड़ी प्रतिक्रिया

इस विवाद ने सुप्रीम कोर्ट तक ध्यान आकर्षित किया, जब वरिष्ठ वकीलों ने इस मुद्दे को कोर्ट में उठाया और सीजेआई सूर्यकांत ने खुद इस पर गंभीर आपत्ति जताई। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि वह “किसी भी व्यक्ति या संस्थान को न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे”। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को ऐसे आरोपों से बचाना आवश्यक है जो उसके प्रति आम जनता का विश्वास प्रभावित कर सकते हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि “संस्था को बदनाम नहीं करने देंगे और न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा करेंगे”, और इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की।

NCERT की प्रतिक्रिया और माफी

NCERT ने कोर्ट की प्रतिक्रिया के तुरंत बाद इस विवादित पाठ्यपुस्तक को बाजार से हटा दिया और एक बयान जारी कर “भूल और अनुचित सामग्री” की पहचान करने की बात कही। संस्थान ने कहा कि यह गलती “पूरी तरह से अनजाने में हुई थी” और उसने जनता से क्षमा भी मांगी। NCERT ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका लक्ष्य किसी संवैधानिक संस्था का अपमान करना नहीं था और वह न्यायपालिका के प्रति सम्मान रखता है।

NCERT ने यह भी कहा कि अब यह अध्याय समीक्षा और पुनर्लेखन के बाद 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि पाठ्यक्रम में संतुलित और उपयुक्त सामग्री शामिल की जा सके।

बिके 38 कॉपियों की वापसी की कोशिश

कुल मिलाकर इस किताब की 2.25 लाख प्रतियां छापी गई थीं, लेकिन वितरण के तुरंत बाद ही NCERT ने किताब को वापस बुला लिया। उनमें से केवल 38 प्रतियां ही खरीदी गईं थीं, और एनसीईआरटी अब उन सभी को वापस लेने की कोशिश में है।

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अब तक 16 प्रतियां वापिस आ चुकी हैं, जबकि अन्य खरीदारों से संपर्क करके किताबें वापस लेने की प्रक्रिया जारी है। उन खरीदारों से संपर्क नहीं हो पाने पर बैंक विवरण और यूपीआई आईडी के आधार पर प्रयास किया जा रहा है।

निष्कर्ष और व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह विवाद न केवल स्कूल पाठ्यक्रमों में सामग्री के चयन पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि यह शिक्षा, संवैधानिक संस्थाओं के प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति सम्मान जैसे विषयों पर भी बहस का कारण बन रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा में वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा होना आवश्यक है, लेकिन साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि संवैधानिक संस्थानों की भूमिका और प्रतिष्ठा का संतुलित और सम्मानजनक तरीके से वर्णन किया जाए, खासकर जब यह आकांक्षी युवा छात्र पीढ़ी को तैयार कर रहा हो।

प्रधानमंत्री मोदी को इजराइल की संसद नेसेट द्वारा सर्वोच्च सम्मान, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में योगदान के लिए सम्मानित

इजराइल की पार्लियामेंट नेसेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल से सम्मानित किया है, जो नेसेट का सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी के असाधारण योगदान के लिए दिया गया है, जिन्होंने भारत और इजराइल के बीच स्ट्रेटेजिक रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने नेसेट को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी है और जल्द ही दुनिया की टॉप तीन इकॉनमी में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ महत्वपूर्ण ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं और एक बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा पीस इनिशिएटिव को भारत का समर्थन देने की बात कही और कहा कि यह पहल एक रास्ता दिखाता है जो शांति और स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा कि भारत इस इलाके में बातचीत, शांति और स्थिरता के लिए आपके और दुनिया के साथ है।

नेसेट के सदस्यों ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ तस्वीरें लीं और उन्हें सम्मानित किया। यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और भारत-इजराइल संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को दर्शाता है।

मार्च 2026 में बैंक अवकाश: होली और रामनवमी समेत 18 दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें ऑनलाइन सेवाओं का लाभ

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कैलेंडर के अनुसार, मार्च 2026 में कुल 18 दिन बैंकों में अवकाश रहेगा। इसमें साप्ताहिक छुट्टियों (5 रविवार और 2 शनिवार) के अलावा, विभिन्न राज्यों के स्थानीय त्योहारों और राष्ट्रीय अवकाशों के कारण 11 दिन बैंक बंद रहेंगे।

मार्च महीने में होली, रामनवमी, और अन्य महत्वपूर्ण त्योहारों के कारण बैंकों में अवकाश रहेगा। इसके अलावा, साप्ताहिक अवकाशों के कारण भी बैंक बंद रहेंगे। यदि आपका बैंक से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण काम है, तो योजना पहले ही बना लें और अपने जरूरी कामों को समय पर निपटाने के लिए ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाएं।

बैंकों की शाखाएं बंद होने के बावजूद, आप ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल ऐप, और एटीएम के जरिए अपना लेनदेन बिना किसी रुकावट के कर सकते हैं। इसके अलावा, शेयर बाजार में इस महीने कुल 12 दिन ट्रेडिंग नहीं होगी, जिसमें साप्ताहिक अवकाश और त्योहारों की छुट्टियां शामिल हैं।

मार्च 2026 में बैंक अवकाश की सूची इस प्रकार है:

* 1 मार्च: रविवार
* 2 मार्च: होलिका दहन (उत्तर प्रदेश)
* 3 मार्च: होली (15 राज्यों में)
* 4 मार्च: अलग-अलग राज्यों में त्योहार (17 राज्यों में)
* 8 मार्च: रविवार
* 13 मार्च: चापचर कुट (मिजोरम)
* 14 मार्च: दूसरा शनिवार
* 15 मार्च: रविवार
* 17 मार्च: शब-ए-कद्र (जम्मू और श्रीनगर)
* 19 मार्च: गुड़ी पड़वा, उगादी और नवरात्र की शुरुआत (11 राज्यों में)
* 20 मार्च: ईद-उल-फितर और जुमात-उल-विदा (5 राज्यों में)
* 21 मार्च: रमजान ईद और सरहुल
* 22 मार्च: रविवार
* 26 मार्च: श्री रामनवमी (13 राज्यों में)
* 27 मार्च: श्री राम नवमी (6 राज्यों में)
* 28 मार्च: दूसरा शनिवार
* 29 मार्च: रविवार
* 31 मार्च: श्री महावीर जयंती (15 राज्यों में)

इसलिए, यदि आपका बैंक से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण काम है, तो योजना पहले ही बना लें और अपने जरूरी कामों को समय पर निपटाने के लिए ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाएं।

भारतीय वायु सेना ने अग्निवीर भर्ती के लिए आयु सीमा बढ़ाई, युवाओं के लिए नए अवसर!

भारतीय वायु सेना ने अग्निवीर भर्ती के लिए आयु सीमा बढ़ाने की घोषणा की है, जिससे युवाओं के लिए नए अवसर खुल गए हैं। पहले अग्निवीर वायु भर्ती के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा 21 वर्ष थी, लेकिन अब 22 वर्ष तक के युवक आवेदन कर सकते हैं। यह निर्णय युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है, जो भारतीय वायु सेना में शामिल होने का सपना देखते हैं।

आवेदन करने की समय सीमा क्या है?
सभी पात्र उम्मीदवार 3 मार्च 2026 से 10 मार्च 2026 के बीच iafrecruitment.edcil.co.in/agniveervayu पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पहले यह आवेदन प्रक्रिया 8 फरवरी 2026 तक चली थी, लेकिन अब आयु सीमा बढ़ाने के साथ एक बार फिर आवेदन विंडो खोली जा रही है।

शैक्षणिक योग्यता क्या है?
अग्निवीर वायु भर्ती के लिए उम्मीदवारों को 10+2 (इंटरमीडिएट) परीक्षा फिजिक्स, मैथ्स और इंग्लिश विषयों के साथ पास करनी होगी। कुल अंक कम से कम 50% और इंग्लिश में कम से कम 50% अंक होने चाहिए। यह योग्यता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से होनी चाहिए।

चयन प्रक्रिया क्या है?
अग्निवीर वायु में चयन कई चरणों में होता है:

लिखित परीक्षा (सीधा कंप्यूटर-आधारित टेस्ट)
फिजिकल फिटनेस टेस्ट (पीएफटी) – दौड़, पुश-अप्स, सीटी टेस्ट आदि
मेडिकल परीक्षा – भारतीय वायु सेना के तय मानकों के अनुरूप फिटनेस
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

सैलरी और अन्य लाभ क्या हैं?
अग्निवीर वायु को चार साल की सेवा अवधि के लिए भर्ती किया जाता है। पहले साल उन्हें लगभग 30,000 रुपये की सैलरी मिलेगी, दूसरे साल 33,000 रुपये, तीसरे साल 36,500 रुपये और चौथे साल 40,000 रुपये की सैलरी मिलेगी।

आवेदन शुल्क क्या है?
सभी उम्मीदवारों के लिए 550 रुपये + 18% जीएसटी आवेदन शुल्क होगा। यह शुल्क ऑनलाइन ही भुगतान करना होगा और जमा किया गया शुल्क वापस नहीं किया जाएगा।

मौसम अलर्ट: 26 फरवरी से 3 मार्च तक देश के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी की संभावना

मौसम विभाग ने 26 फरवरी से 3 मार्च तक देश के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तरी भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष रूप से इसका प्रभाव देखा जा सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार, 25 और 26 फरवरी को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान बिजली कड़कने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। 25 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश, सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, दक्षिण अंदरूनी कर्नाटक, केरल और माहे, लक्षद्वीप में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने की संभावना है। राजस्थान में दिन का तापमान बढ़ने लगा है, जहां बाड़मेर में अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, राज्य में आगामी दिनों में मौसम शुष्क रहेगा।

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 7 दिनों में उत्तर पश्चिम और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने की संभावना है। इस हफ्ते उत्तर पश्चिम भारत के कई इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह सकता है।

राहुल गांधी पर पीयूष गोयल का जोरदार हमला: नकारात्मक राजनीति के पोस्टर बॉय के रूप में उभरे

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी और गांधी परिवार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी नकारात्मक राजनीति के पोस्टर बॉय बन गए हैं और उन्होंने भारत विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाकर देश के हितों से समझौता किया है। पीयूष गोयल ने कहा कि गांधी परिवार ने हमेशा देश के हितों से समझौता किया है, जिसकी शुरुआत देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से ही हो गई थी।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार विदेश यात्राएं कर विभिन्न प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्थाओं से समझौता करते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी 247 बार विदेश यात्रा कर चुके हैं और इस दौरान उन्होंने कई बार येलो बुक प्रोटोकॉल की अनदेखी की। पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए सुरक्षा इंतजामों से समझौता करते हैं और विदेश जाकर भारत और भारतीयों के हितों के खिलाफ काम करते हैं।

पीयूष गोयल ने आगे कहा कि राहुल गांधी के संबंध देश विरोधी ताकतों से रहे हैं और उन्होंने सोरोस के साथ कथित गैर-कानूनी संबंधों के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लद्दाख के संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में गए और वहां भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाले विदेशी व्यक्तियों के साथ संपर्क बनाए। पीयूष गोयल ने कहा कि राहुल गांधी का संबंध चीन और पाकिस्तान से जुड़े लोगों से भी रहा है।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने संविधान से बाहर की शक्तियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उस समय कैबिनेट के फैसलों का सार्वजनिक रूप से विरोध किया गया और प्रधानमंत्री पद का भी अपमान हुआ। पीयूष गोयल ने कहा कि नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के माध्यम से सरकार को प्रभावित किया गया और वामपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी एक तरह से समानांतर कैबिनेट चलाते थे और सुपर प्रधानमंत्री की तरह फैसलों को प्रभावित करते थे। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार पर देश के हितों से समझौता करने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी अपने कार्यकाल के दौरान देश के हितों से समझौता करने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई।

पीयूष गोयल ने बोफोर्स मामले को लेकर आरोप लगाया कि राहुल गांधी के इशारे पर उस समय के विदेश मंत्री ने स्वीडिश अधिकारियों से बोफोर्स घोटाले की जांच रोकने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के मित्र ओटावियो क्वात्रोची को बचाने के लिए निष्पक्ष जांच को प्रभावित किया गया। पीयूष गोयल ने कहा कि बोफोर्स मामले में कांग्रेस और राजीव गांधी की भूमिका को लेकर लंबे समय तक सवाल उठते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाया और भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा का संकल्प: चीफ जस्टिस सूर्यकांत

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान तब आया जब अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने एनसीईआरटी की एक किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित विषय की जानकारी दी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और वे किसी भी हाल में इसकी रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश नहीं होने दी जाएगी।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है और कहा है कि कानून अपना काम करेगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ना है तो इसमें प्रशासनिक अधिकारियों का जिक्र क्यों नहीं है, सिर्फ न्यायपालिका की चर्चा क्यों?

एनसीईआरटी की सोशल स्टडी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी को न्यायिक प्रणाली के सामने चुनौतियों के रूप में पढ़ाया जा रहा है। इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विवाद हुआ है और चीफ जस्टिस ने कहा है कि न्यायपालिका को बदनाम नहीं होने दिया जाएगा।

यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता के मुद्दे से जुड़ा हुआ है और सुप्रीम कोर्ट ने इसकी रक्षा का संकल्प लिया है।