सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान तब आया जब अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने एनसीईआरटी की एक किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित विषय की जानकारी दी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और वे किसी भी हाल में इसकी रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश नहीं होने दी जाएगी।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है और कहा है कि कानून अपना काम करेगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ना है तो इसमें प्रशासनिक अधिकारियों का जिक्र क्यों नहीं है, सिर्फ न्यायपालिका की चर्चा क्यों?
एनसीईआरटी की सोशल स्टडी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी को न्यायिक प्रणाली के सामने चुनौतियों के रूप में पढ़ाया जा रहा है। इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विवाद हुआ है और चीफ जस्टिस ने कहा है कि न्यायपालिका को बदनाम नहीं होने दिया जाएगा।
यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता के मुद्दे से जुड़ा हुआ है और सुप्रीम कोर्ट ने इसकी रक्षा का संकल्प लिया है।