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दिल्ली में 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजना की होगी समीक्षा, हाईकोर्ट ने नमामि गंगे को दिए निर्देश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय मिशन फॉर क्लीन गंगा (Namami Gange) को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली जल बोर्ड की 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTP) परियोजना की पुनरावलोकन करे। यह आदेश अदालत में पेश किए गए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्टों के बाद आया, जिसमें नई सुविधाओं के निर्माण, लागत संरचना और पर्यावरणीय मानकों का विस्तृत विवरण था। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस दिशा‑निर्देश के तहत परियोजना के सभी तकनीकी और आर्थिक पहलुओं की गहन जांच आवश्यक है, ताकि गंगा नदी के शुद्धिकरण के लक्ष्यों के साथ संरेखण सुनिश्चित हो सके।दिल्ली जल बोर्ड ने पिछले दो वर्षों में गंगा के जल गुणवत्ता सुधार हेतु 13 नई ट्रीटमेंट प्लांटों की योजना तैयार की। इन प्लांटों का कुल निवेश लगभग 2,400 करोड़ रुपये बताया गया है, जिसमें प्राथमिक उपचार, द्वितीयक उपचार और उन्नत नाइट्रोजन‑फॉस्फोरस हटाने की तकनीकें शामिल होंगी। प्रस्तावित साइटों में दिल्ली के विभिन्न नदियों के किनारे स्थित प्रमुख जल निकाय शामिल हैं, जो मौजूदा जल उपचार नेटवर्क में महत्वपूर्ण जोड़ बनेंगे।

Namami Gange परियोजना प्राधिकरण ने इस योजना को 2023 में तैयार किए गए राष्ट्रीय जल शुद्धिकरण रणनीति के तहत संकलित किया था। इस रणनीति में गंगा के विभिन्न खंडों में औद्योगिक एवं घरेलू अपशिष्ट के प्रभाव को कम करने के लिए कई चरणों में ट्रीटमेंट सुविधाओं का निर्माण शामिल है। पिछले वर्षों में गंगा में प्रदूषण स्तर में गिरावट लाने के प्रयासों में कई ट्रीटमेंट प्लांटों का संचालन शुरू हो चुका है, परन्तु दिल्ली के जल निकायों में अभी भी उच्च स्तर की जैविक और रासायनिक प्रदूषण मौजूद है।

न्यायालय ने निर्देश दिया कि NMCG के निदेशक जनरल को प्रस्तावित 13 DSTP के तकनीकी विनिर्देश, वित्तीय मॉडल और समय‑सीमा की विस्तृत जांच करनी होगी। इस जांच में परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) रिपोर्ट, जल पुन: उपयोग की संभावनाएं और स्थानीय समुदायों पर संभावित प्रभावों को भी शामिल किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो तो स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की समिति का गठन किया जा सकता है।

दिल्ली जल बोर्ड ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया परियोजना की पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाएगी। उन्होंने बताया कि सभी 13 प्लांटों के लिए पहले से ही भूमि अधिग्रहण, अनुबंध कार्य और तकनीकी चयन पूरा हो चुका है, और अब केवल नियामक स्वीकृति की प्रतीक्षा है। बोर्ड ने यह भी उजागर किया कि नई सुविधाओं से लगभग 1.5 लाख क्यूबिक मीटर अपशिष्ट जल प्रतिदिन शुद्ध किया जा सकेगा, जिससे गंगा में प्रदूषण घटाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

राज्य सरकार ने कहा कि जल बोर्ड की योजना को राष्ट्रीय मिशन के साथ समन्वयित करना आवश्यक है, ताकि वित्तीय संसाधनों का दोहराव न हो और परियोजना समय पर पूर्ण हो सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्रीय सरकार ने पिछले वर्ष गंगा शुद्धिकरण के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना जारी की थी, जिसमें दिल्ली के जल शुद्धिकरण प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी गई थी।

पर्यावरण मंत्रालय ने इस विकास को सकारात्मक रूप से देखा और कहा कि नई ट्रीटमेंट प्लांटों से गंगा के जैविक कार्बनिक पदार्थ (BOD) और रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) में उल्लेखनीय कमी आएगी। मंत्रालय ने यह भी बताया कि ट्रीटमेंट के बाद शुद्ध जल को पुनः उपयोग में लाया जाएगा, जिससे शहर की जल आपूर्ति में भी सुधार होगा।

दिल्ली के प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस आदेश पर विविध प्रतिक्रिया दी। विपक्षी दलों ने कहा कि जल बोर्ड की योजना में देरी से जल प्रदूषण की समस्या बढ़ेगी, और उन्होंने सरकार से तेज़ कार्यवाही की मांग की। वहीं, शासकीय पक्ष ने कहा कि न्यायालय के निर्देशों का पालन कर परियोजना को शीघ्रता से आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे गंगा शुद्धिकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को समर्थन मिलेगा।

संबंधित उद्योग संघों ने भी इस पहल का स्वागत किया, क्योंकि शुद्ध जल की उपलब्धता से औद्योगिक प्रक्रिया में सुधार और जल शुल्क में कमी की संभावना है। उन्होंने कहा कि ट्रीटमेंट प्लांटों की तकनीकी मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य मानकों के अनुरूप रखा गया है, जिससे जल गुणवत्ता में स्थायी सुधार होगा।

आर्थिक विश्लेषकों ने बताया कि 13 नई ट्रीटमेंट प्लांटों के निर्माण से निर्माण क्षेत्र में निकट अवधि में लगभग 5,000 सीधी और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा। इसके अलावा, शुद्ध जल की उपलब्धता से कृषि एवं औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि की आशा है, जिससे दिल्ली की आर्थिक वृद्धि दर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में, स्थानीय समुदायों ने कहा कि ट्रीटमेंट प्लांटों के निकट रहने से जल स्रोतों की स्वच्छता में सुधार होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य में भी सुधार की उम्मीद है।

Updated: August 27, 2026

The court‑ordered audit could turn Delhi’s massive 2,400‑crore DSTP rollout into a litmus test for India’s ability to fuse legal oversight with climate ambition—any slip may stall the broader Namami Gange timeline.
If the review validates the projects’ financial and tech claims,

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