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दरभंगा के सांसद डां गोपाल जी ठाकुर ने गृहमंत्री से की मुलाकात

आज दरभंगा सांसद डॉ गोपाल जी ठाकुर, राष्ट्रीय कार्यसमिति विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में मनोनित होने के पश्चात पहली बार देश के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी से नई दिल्ली स्थित लोकसभा कार्यालय में मुलाकात किए।

इस दौरान सांसद डॉ ठाकुर ने गृहमंत्री अमित शाह जी को मिथिला परंपरा अनुसार पाग, चादर, मखान माला एवं मछली के चित्रयुक्त मिथिला पेंटिंग देकर भव्य स्वागत किया।

सांसद डॉ ठाकुर ने पार्टी द्वारा उनको राष्ट्रीय कार्यसमिति विशेष आमंत्रित सदस्य मनोनित करने एवं रेल संबंधी स्थाई समिति में पुनः सदस्य मनोनित करने के लिए गृह मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुलाकात के क्रम सांसद डॉ ठाकुर ने गृह मंत्री जी को मिथिला के केंद्र दरभंगा आने का निमंत्रण दिया जिसे गृहमंत्री जी द्वारा स्वीकार किया गया।

सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि नवभारत के विश्वकर्मा, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी एवं देश के यशस्वी गृह एवं सहकारिता मंत्री आदरणीय श्री अमित शाह जी दरभंगा सहित संपूर्ण मिथिला एवं देश के विकास के प्रति काफी गंभीर हैं।

इसी के तहत केंद्र सरकार द्वारा दरभंगा को एक के बाद एक कई जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण परियोजना दिया गया है। सांसद डॉ ठाकुर ने मिथिला के केंद्र दरभंगा में एम्स, उडान योजना से दरभंगा एयरपोर्ट को जोड़ने, आईटी पार्क, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, तारामंडल,दरभंगा- समस्तीपुर दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण,दरभंगा-आमस एक्सप्रेस-वे, कोसी रेल महासेतु, कचरा निस्तारण प्लांट, पाग पर डाक टिकट जारी करने, मैथिली को सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल करने, दरभंगा रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय स्टेशन बनाने, दरभंगा में दस आरओबी देने, काकरघाटी-शीशो बायपास रेललाइन, मखाना के विकास हेतु दस हजार करोड़ रुपए देने, पूसा एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा सहित दर्जनों विकास परियोजना देने हेतु आदरणीय प्रधानमंत्री जी एवं आदरणीय गृहमंत्री जी के प्रति आभार जताया।

सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि आने वाले दिनों में दरभंगा एक स्वर्णिम इतिहास को लिखेगा। मुलाकात के दौरान डॉ ठाकुर ने गृह मंत्री जी को क्षेत्र की प्रमुख समस्या बाढ़ से स्थाई निदान, दरभंगा में सीआईएसएफ बेस कैंप की स्थापना, दरभंगा स्थित दरभंगा एयरपोर्ट का सुरक्षा सीआईएसएफ से कराने, दरभंगा एयरपोर्ट का नामकरण कवि कोकिल बाबा विद्यापति जी के नाम पर करने एवं दरभंगा जिला को-ऑपरेटिव बैंक को पुनः प्रारंभ करने सहित विभिन्न मुद्दों को माननीय मंत्री जी के समीप रखा।

उन्होंने बाढ़ से संबंधित विस्तृत जानकारी गृह मंत्री जी के समीप रखते हुए इसके जल्द स्थाई समाधान का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष बारिश के समय नेपाल से निकलने वाली प्रमुख नदी और उसके सहायक नदी मिथिला सहित पूरे उत्तर बिहार में भारी विनाश और तबाही मचाती है।

जिस कारण प्रत्येक वर्ष करोड़ों की आबादी इससे प्रभावित होती है। सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि मिथिला क्षेत्र मुख्यत: कृषि पर आधारित है। क्षेत्र की अधिकतर आबादी के जीविकोपार्जन का मुख्य साधन कृषि है। बाढ़ और सुखाड़ के कारण प्रतिवर्ष लाखों हेक्टेयर फसलें बर्बाद होती आ रही है।

जिस कारण क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो जाती है वहीं बाढ़ की विभीषिका की वजह से प्रत्येक वर्ष हजारों लोग काल के गाल में समाहित हो जाते हैं और लाखों लोग बेघर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपए की सड़कें एवं सरकारी भवन भी ध्वस्त हो जाती है और इसके पश्चात सरकार द्वारा एक बड़ी राशि इनके पुनर्वासन में खर्च किया जाता है।

उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण उत्तर बिहार वह मिथिला क्षेत्र के करोड़ों लोग एवं युवा मजबूरन पलायन करते हैं। सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि बाढ़ क्षेत्र के लिए एक स्थाई अभिशाप बन गया है और इसके स्थाई निदान के लिए पूर्व की सरकार द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया।

जिस कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में नदी से नदी जोड़ने की कल्पना कर बाढ़ से स्थाई निदान की परिकल्पना की गई थी। इसके अलावा सांसद डॉ ठाकुर ने मिथिला के केंद्र दरभंगा में दशकों से बंद दरभंगा जिला सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक को पुनः प्रारंभ करने का भी अनुरोध किया है।

सांसद डॉ ठाकुर ने कहा कि इस बैंक के पुनः प्रारंभ हो जाने से जिले के किसान भाइयों के साथ-साथ आम लोगों को काफी सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि इस को-ऑपरेटिव बैंक के स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शीर्ष बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराना, सहकारी गतिविधियों को बढ़ावा देना एवं सहकारी समितियों के लिए ऋण की व्यवस्था करना इत्यादि था।

इसके बंद हो जाने से क्षेत्र के लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है खासकर किसान भाइयों को । सांसद डॉ ठाकुर ने दरभंगा एयरपोर्ट का सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के हाथ देने में अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि दरभंगा का अतीत काफी गौरवशाली है। यह विद्वानों की पावन भूमि रही है।

परंतु विगत कुछ दशकों में आंतरिक सुरक्षा दरभंगा के लिए एक चिंता का विषय बन गया है। चूंकि यह क्षेत्र काफी शांति प्रिय एवं मृदुभाषी है। इसी का फायदा उठाकर आतंकी संगठन इस क्षेत्र को अपना सुरक्षित पनाह बनाने की कोशिश करते रहते हैं और कई मामलों में यहां के तार पाकिस्तान एवं दूसरे आतंकी संगठनों से जुड़ा पाया गया है।

ऐसे में दरभंगा स्थित महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल द्वारा ही की जानी चाहिए। सांसद डॉ ठाकुर ने दरभंगा एयरपोर्ट का नामकरण कवि कोकिल बाबा विद्यापति जी के नाम पर करने का भी अनुरोध माननीय गृह मंत्री जी से किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों से इस एयरपोर्ट का नामकरण कवि कोकिल बाबा विद्यापति के नाम पर करने हेतु प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है।

कोरोना को देखते हुए बिहार में हाई अलर्ट जारी अंतर्राष्ट्रीय उड़ान से आने वाले यात्री होगे क्वारैंटाइन।

अंतर्राष्ट्रीय यात्रा को लेकर बिहार में हाई अलर्ट
कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट के बाद भी 10 दिनों तक रहना होगा क्वारैंटाइन।

कोरोना को लेकर देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग व मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण के निर्देश के बाद बिहार में भी अलर्ट कर दिया गया है।

मुख्य सचिव को भेजे गए दिशा निर्देश में सचिव राजेश भूषण ने इंटरनेशनल यात्रियों को लेकर चौकसी बढ़ाने को कहा है। अब विदेश से आने वालों को कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद भी 10 दिनों तक क्वारैंटाइन होना पड़ेगा।

रेलवे स्टेशन से लेकर एयरपोर्ट पर जांच को लेकर सख्ती बढ़ाने का आदेश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि विदेश से आने वालों का सर्च ऑपरेशन तेज किया जाए और जांच में सख्ती की जाए।

पटना एयरपोर्ट पर जांच में जुटी एजेंसी को पटना एयरपोर्ट अथॉरिटी से मिलकर जांच और तेज करने को कहा गया है। जांच में कोई भी यात्री नहीं छुटे इसे लेकर आदेश दिया गया है।

इसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कड़ी निगरानी का आदेश दिया गया।बिहार में इस तरह के दो से अधिक यात्री को चिंहित किया गया है जो हाल ही में विदेश से बिहार लौटे हैं लेकिन सूचना के बावजूद अधिकांश यात्रियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है इसी बीच पटना और दरभंगा हवाई अंड्डा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है

छिटपुट हिंसा को छोड़ 9 वे चरण का पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण ढ़ग से सम्पन्न

छिटपुट हिंसा को छोड़कर 9 वे चरण का चुनाव सम्पन्न।बिहार में पंचायत चुनाव के 9वें चरण के लिए 35 जिलों की 875 पंचायतों में वोटिंग हुई। सोमवार सुबह 6 बजे से ही मतदाता बूथों पर पहुंचने लगे।

मतदान केंद्र के अंदर और बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुबह 7 बजे से 5 बजे तक 61.15% मतदान हुआ। 64.38% महिलाओं और 57.91% पुरुषों ने वोटिंग की। वोटिंग के लिए 12341 बूथ बनाए गए थे।

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया मतदान शांतिपूर्ण रहा। कुल 37 शिकायत प्राप्त हुए थे। कुल 609 EVM को बदला गया। कुल 18729 बोगस वोटर्स को चिह्नित किया गया। सभी पर उचित करवाई की जाएगी।

मधुबनी में बोगस वोटिंग को लेकर पुलिस के साथ लोगों की झड़प हो गई। वहीं, मधुबनी के बेनीपट्‌टी प्रखंड में मुखिया प्रत्याशी पति को गोली मार दी गई।

गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। वहीं, सीवान में भी मुखिया प्रत्याशी के रिश्तेदार को जांघ में बूथ पर गोली मार दी। सीतामढ़ी में पंचायत चुनाव के दौरान भीड़ को हटाने गई पुलिस पर लोगों ने हमला कर दिया। पुलिस पर लोगों ने पथराव किया ।

जमीनी विवाद मामले में पुलिस की रवैये से हाईकोर्ट नराज

पटना हाईकोर्ट ने जमीनी विवाद में प्राथमिक दर्ज नही किये जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट किया कि जमीनी विवाद में पुलिस को प्राथमिक दर्ज करना होगा।अमरजीत राय एवं अन्य की ओर से दायर अर्जी पर जस्टिस संदीप कुमार ने सुनवाई करने के बाद यह निर्देश दिया।

कोर्ट का मानना था कि जमीनी विवाद की बात कह राज्य की पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने से इंकार कर देती है,जबकि पुलिस का पहला दायित्व प्राथमिकी दर्ज करना है। प्राथमिकी दर्ज नहीं करना एक तरह से अपराधियों को सीधा संरक्षण देने के समान है।

कोर्ट का कहना था कि जब कोई भी व्यक्ति थाने में शिकायत लेकर आता है ,तो सबसे पहले पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करना चाहिए, न कि पहले शिकायत की जांच करने और शिकायत सही होने पर प्राथमिकी दर्ज करना।

पुलिस को चाहिए कि शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर अपनी जांच प्रारम्भ करे। जांच में सही पाए जाने पर अभियुक्तों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें।

कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने देश के पुलिस को कई महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किया है।लेकिन प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है।

कोर्ट ने पूर्वी चंपारण के एसपी को सुप्रीम कोर्ट की ओर जारी दिशानिर्देश का पालन करने के बारे में जिला के सभी थानेदारों को निर्देश जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन राज्य में पुलिस नहीं कर रही है। इस मामले पर अगली सुनवाई की 15 दिसंबर, 2021को होगी।

झंझारपुर जज़ पर हमला मामले में हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी नियुक्त किया

पटना हाई कोर्ट में झंझारपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार – I पर किये गए कथित आक्रमण और मारपीट की घटना के मामले पर सुनवाई हुई। जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान रिपोर्ट बंद लिफाफे में सौंपी गई।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि आखिर पुलिस अधिकारियों ने लोडेड हथियार के साथ एक जज के चैम्बर में कैसे प्रवेश किया ? कोर्ट ने इस मामले में सहयोग करने हेतु एमिकस क्यूरी नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

इस मामलें पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य की पुलिस दोनों पक्षों के मामलों को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से अनुसंधान करने में सक्षम है। दोनों पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

एड्वोकेट जनरल ने कहा कि यदि चाहे तो कोर्ट सी बी आई समेत किसी भी एजेंसी से मामले की जांच करवा सकता है।
उल्लेखनीय है कि मधुबनी के डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज द्वारा 18 नवंबर, 2021 को भेजे गए पत्र पर हाई कोर्ट ने 18 नवंबर को ही स्वतः संज्ञान लिया है।

साथ ही साथ कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के डी जी पी, राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव और मधुबनी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया था।

मधुबनी के प्रभारी डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज द्वारा अभूतपूर्व और चौंका देने वाली इस घटना के संबंध में भेजे गए रिपोर्ट के मद्देनजर राजन गुप्ता की खंडपीठ ने 18 नवंबर, 2021 को सुनवाई की।

ज़िला जज ,मधुबनी के द्वारा भेजे गए रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दिन तकरीबन 2 बजे दिन में एस एच ओ गोपाल कृष्ण और घोघरडीहा के पुलिस सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा ने जज अविनाश कुमार के चैम्बर में जबरन घुसकर गाली दिया था।

उनके द्वारा विरोध किये जाने पर दोनों पुलिस अधिकारियों ने दुर्व्यवहार करने और हाथापाई करने का काम किया था।
इतना ही नहीं, दोनों पुलिस अधिकारियों ने उनपर हमला किया और मारपीट करने का काम किया था। पुलिस अधिकारियों ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकालकर आक्रमण करना चाहा।

पटना हाई कोर्ट ने 18 नवंबर को कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह प्रकरण न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डालता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के डी जी पी को अगली।सुनवाई में भी उपस्थित रहने को कहा गया ।
इस मामले पर आगे की सुनवाई अब 1दिसम्बर,2021 को की जाएगी।

कोरोना को लेकर हाईकोर्ट सख्त कहाँ बेड से लेकर आँक्सीजन तक का हिसाब दे सरकार

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना महामारी से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए करोना के नए वेरिएंट को काफी गम्भीरता से लिया। शिवानी कौशिक व अन्य की जनहित याचिकाओं पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए करोना के इस नए वेरिएंट से अधिकतम सतर्कता बरतने को सभी से अनुरोध किया।

हाईकोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को राज्य में उपलब्ध मेडिकल सुविधाओं के सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह बताने को कहा है कि राज्य में अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति की क्या स्थिति है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा कि ऑक्सीजन उत्पादन व आपूर्ति की क्या स्थिति है।साथ ही ऑक्सीजन के भण्डार करने की क्या व्यवस्था हैं।

कोर्ट ने कहा कि ये करोना का नया वेरिएंट पिछले अन्य करोना वेरिएंट से ज्यादा।खतरनाक है।इसलिए सभी को पूरी सतर्कता और सावधानी बरतने की सख्त जरूरत हैं।

2020 के मार्च माह पूरे देश समेत बिहार में भी करोना महामारी ने दुष्प्रभाव दिखाया था।इसके कारण पूरे देश में बड़ी तादाद में लोगों को अपने जान से हाथ धोना पड़ा।

फिर मार्च अप्रैल 2021 में इस महामारी ने खतरनाक रूप धारण किया।इस दौरान बड़ी संख्या लोगों की जाने गई थी।
कोर्ट ने कहा कि इस परिस्थिति के लिए राज्य में चिकित्सा अधारभूत संरचना की कमी भी जिम्मेदार रही।
बेड,दवा,एम्बुलेंस,ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।

इस परिस्थिति में राज्य सरकार को नए कोरोंना वेरिएंट से निपटने के अभी से युद्ध स्तर पर कार्रवाई आरम्भ कर देनी चाहिए।
इस मामले पर अब अगली सुनवाई छह दिसंबर 2021,को फिर की जाएगी।

पंचायत चुनाव के 9वे चरण का मतदान शुरु सुबह 6 बजे से जारी है मतदान

पंचायत चुनाव के 9वें चरण का मतदान आज सुबह 6बजे से शुरु हो गया है। राज्‍य के 35 जिलों की 875 पंचायतों में वोटिंग हो रही है। इस चरण में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए 42 हजार पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। इसमें जिला पुलिस बल, गृह रक्षक बल, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस और सैप बलों की तैनाती की गई है। सोमवार सुबह 6 बजे से ही मतदाता बूथों पर पहुंचने लगे। मतदान केंद्र के अंदर और बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

वोटिंग अपडेट्स…

  • भागलपुर में पीरपैंती में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान शुरू।
  • मुजफ्फरपुर के पारू प्रखंड की 34 पंचायतों में मतदान हो रहा है।
  • खगड़िया के अलौली की 12 पंचायतों में मतदान, सुबह से वोटिंग के लिए कतार में मतदाता लग चुके हैं।
  • औरंगाबाद के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र हसपुरा प्रखंड में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान जारी।
  • भोजपुर के कोईलवर प्रखंड में सुबह ही मतदाताओं की भीड़ लगी।
  • मधुबनी के बेनीपट्टी के रामनगर गांव में बूथ संख्या 403 पर वोट एमएलसी घनश्याम ठाकुर ने वोट डाला। बेनीपट्टी के आहपुर में बूथ संख्या 196 पर एक बूढ़ी महिला कौशल्या देवी ने भी मतदान किया। मधुबनी सहित नवादा, औरंगाबाद, बेगूसराय व पूर्वी चंपारण आदि सभी 35 जिलों में मतदान तेज हो चुका है।
  • कड़ी सुरक्षा के बीच मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) के अरेराज, पहाड़पुर व हरसिद्धि के 685 बूथों पर मतदान जारी है। मतदान की पूर्व संध्या पर हरसिद्धि की हसुआहां मानिकपुर में मुखिया के भाई ने की मारपीट व बंधक बनाने की कोशिश। हरसिद्धि के बूथ संख्या 240 और 258 पर ईवीएम में खराबी के कारण मतदान में विलंब हो रहा है।

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बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुक्रवार तक चलेगा सत्र

बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। सत्र शुक्रवार तक चलेगा। पहले दिन सोमवार यानी 29 नवंबर को तारापुर से चुनकर आए राजीव कुमार सिंह और कुशेश्वरस्थान से चुनकर आए अमन हजारी का शपथ ग्रहण होगा , फिर शोक संदेश के साथ विधानसभा की आज की कार्रवाही कल दिन के 11 बजे तक के लिए स्थगित हो जायेगा ।

दूसरे दिन मंगलवार यानी 30 नवंबर और बुधवार 1 दिसंबर को राजकीय विधायक और अन्य राजकीय कार्य पर चर्चा की जाएगी। यह दोनों दिन काफी महत्वपूर्ण माने जाएंगे। गुरुवार यानी 2 दिसंबर को वित्तीय वर्ष 2021-22 के दूसरे अनुपूरक व्यय विवरणी पर वाद-विवाद, मतदान और विनियोग विधेयक पास किए जाएंगे।

वहीं, इस सत्र के अंतिम दिन यानी शुक्रवार 3 दिसंबर को गैर सरकारी सदस्यों के कार्य यानी गैर सरकारी संकल्प पेश किए जाएंगे। इसके बाद सदन की कार्यवाही अगले आदेश तक स्थगित कर दी जाएगी।

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भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आज भी जारी है अभियान सासाराम नगर आयुक्त के ठिकाने पर चल रही है छापामारी।

भ्रष्टाचार को लेकर राज्य सरकार का विशेष अभियान आज भी जारी है सासाराम के जिला भूअर्जन पदाधिकारी सह नगर आयुक्त राजेश गुप्ता के घर शनिवार तड़के सुबह से विजिलेंस का छापा चल रहा है अभी तक जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार अभी तक 1500000 कैश बरामद हो चुका है वही सोने की बिस्किट मिले हैं कई अपार्टमेंट फ्लैट के बारे में भी जानकारी मिल रही है यहां छापेमारी की जा रही है निगरानी डीएसपी ने बताया कि रांची में भी संपत्ति के बारे में कागजात मिले हैं ।

वही माइनिंग एवं जियोलॉजी डिपार्टमेंट के मंत्री जनक राम के OSD मृत्युंजय कुमार और उनकी महिला मित्र रत्ना चटर्जी पति-पत्नी के ठिकाने पर छापामारी समाप्त हो चुकी है स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) के अधिकारियों की माने तो मृत्युंजय कुमार, इनके सगे भाई धनंजय कुमार और रत्ना चटर्जी के पटना, अररिया और कटिहार स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। रत्ना चटर्जी के कटिहार स्थित आवास से पोर्न वीडियो का CD भी बरामद हुआ।

इसके अलावा 30 लाख रुपए कैश, सोने की 30 बिस्किट, 44 लाख रुपए की ज्वेलरी, पश्चिम बंगाल के सिल्लीगुड़ी में 33 लाख रुपए में खरीदे गए फ्लैट के पेपर, सिल्लीगुड़ी के ही प्लैनेट मॉल में दुकान, 3 लाख रुपए में कटिहार में जमीन खरीदने का पेपर, पटना में लोयला स्कूल के पास 32 लाख रुपए में खरीदी गई प्रॉपर्टी के पेपर बरामद हुए। इनके अलावा LIC के 3 अलग-अलग स्कीम के पेपर मिले। हर एक स्कीम में 40 हजार रुपए के हिसाब से 1 लाख 20 हजार रुपए महीने का प्रीमियम भरा जा रहा था।

1.73 करोड़ से अधिक की काली कमाई आई सामने
SVU ने अपनी पड़ताल के बाद दावा किया है कि OSD मृत्युंजय कुमार ने जमकर काली कमाई की है, जो सरकार की तरफ से मिलने वाली सैलरी से काफी अधिक है। अब तक 1 करोड़ 73 लाख 4 हजार 922 रुपए की चल-अचल संपत्ति का पता चला है। रत्ना चटर्जी और धनंजय कुमार के पास से जो कैश, संपत्ति या जेवर मिला है, वो सब अर्जित करने में मंत्री के OSD मृत्युंजय कुमार का हाथ रहा है। काली कमाई के जरिए अर्जित की गई संपत्ति को इन्होंने अपने नाम पर न खरीद कर भाई धनंजय कुमार और मित्र रत्ना चटर्जी के नाम पर खरीदा। मनी लॉड्रिंग के जरिए मृत्युंजय ने ब्लैक मनी को व्हाइट किया। इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं।

साढ़े छह लाख रुपए के 500 व 1000 के पुराने नोट भी मिले
खनन मंत्री के आप्त सचिव मृत्युंजय कुमार और उनकी महिला मित्र रत्ना चटर्जी के पास कालेधन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने नोटबंदी के पहले वाले लाखों के पुराने नोट भी नहीं बदले। रत्ना चटर्जी के कटिहार स्थित ठिकाने से SVU ने लाखों के पुराने नोट भी जब्त किए हैं। सूत्रों के अनुसार, करीब साढ़े छह लाख के रुपए के पुराने नोट मिले हैं। ये नोट 500 और 1 हजार रुपए के हैं। SVU इस मामले में मुकदमा करेगी। मृत्युंजय कुमार खान अवं भूत्तव विभाग में पदस्थापित हैं। हाल के दिनों में यह महकमा बालू के अवैध खनन को लेकर सुर्खियों में रहा है। चूंकि बालू के खनन की जिम्मेवारी भी इसी महकमे के तहत है, लेकिन उसी विभाग के मंत्री के आप्त सचिव के ठिकाने पर छापेमारी के बाद अकूत संपत्ति के खुलासे से SVU भी चौकन्नी हो गई है।

SVU ने भी कहा है कि मत्युंजय कुमार उनके भाई व रेलकर्मी धनंजय कुमार और मत्युंजय की महिला मित्र रत्ना चटर्जी के खाते से मोटी रकम के ट्रांजेक्शन हो रहे थे। आखिर ये पैसे कहां से आ रहे थे? जाहिर तौर पर एसवीयू के पास यह सवाल भी है कि महकमा बालू का है तो स्रोत भी कहीं बालू ही तो नहीं? SVU के सूत्रों के अनुसार आगे की तफ्तीश में इस एंगल से भी जांच होगी।

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मंत्री के आप्त सचिव के महिला मित्र के घर से 30 लाख नगद और करोड़ों की अवैध संपत्ति बरामद।

स्पेशल विजिलेंस टीम ने खनन मंत्री जनक चमार के ओएसडी मृत्यंजय कुमार और उनके दो मित्र के घर आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापामारी चल रही है मृत्यंजय कुमार के अररिया स्थित पैतृक आवास और कटिहार में उनके भाई और महिला मित्र किशनगंज की पूर्व सीडीपीओ के आवास पर छापेमारी की। टीम को अररिया में कुछ हाथ नहीं लगा। जबकि, कटिहार में पूर्व सीडीपीओ के आवास से 30 लाख नगद, 50 से 60 लाख रुपये के जेवरात और बड़ी संख्या में सोने की बिस्किट टीम को हाथ लगी है। इसके अलावा महिला के घर से जमीन के कागजात और चल-अचल संपत्ति भी बरामद की गयी है। मृत्युंजय कुमार के भाई धनंजय कुमार के आवास पर देर शाम छापेमारी जारी थी। धनंजय कुमार रेलकर्मी है।

अररिया स्थित मंत्री के ओएसडी के घर विशेष निगरानी का छापा


विजिलेंस टीम के डीएसपी चन्द्रभूषण ने बताया कि कटिहार में ऑफिसर कॉलोनी में ओएसडी के महिला मित्र रत्ना चटर्जी के आवासीय परिसर से करोड़ों की चल और अचल सम्पत्ति बरामद की गयी है। फिलहाल जांच चल रही है।

कई बेनामी संपत्ति के कागजात भी बरामद किये गये हैं। उन्होंने बताया कि मृत्युंजय कुमार की एक अलमारी भी यहां मिली है। जिसकी जांच पड़ताल की जा रही है। रत्ना चटर्जी के पति ने उन्हें जानकारी दी कि ओएसडी मृत्युंजय कुमार का यहां आना-जाना होता था। डीएसपी चन्द्रभूषण ने बताया कि रत्ना चटर्जी पूर्व में किशनगंज में सीडीपीओ के पद पर तैनात थी। 2011 में विजिलेंस की टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया था। उसके बाद इस मामले में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। यह छापेमारी अभियान दो डीएसपी जफर व चन्द्रभूषण के नेतृत्व में विशेष निगरानी पटना के द्वारा किया गया।
अररिया में ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया

कटिहार मंत्री के आप्तसचिव के महिला मित्र के घर हुई छापेमारी


स्पेशल विजिलेंस टीम के एएसपी सुधीर कुमार के नेतृत्व में डीएससी विपिन कुमार व इंस्पेक्टर अजय कुमार के साथ स्थानीय थाना पुलिस ने अररिया के रहिका टोला स्थित मृत्युंजय कुमार के पैतृक आवास पर सघन छापेमारी की। छापेमारी के दौरान आवास पर कोई नहीं था। लिहाजा स्पेशल विजिलेंस यूनिट के अधिकारियों ने ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया और फिर कमरों की तलाशी ली। छापेमारी के बाद एएसपी ने बताया कि मृत्युंजय कुमार के पैतृक आवास से निगरानी टीम को कुछ हाथ नहीं लगी। उन्होंने बताया कि निगरानी विभाग ओएसडी के अररिया आवास सहित कटिहार व पटना के दो ठिकानों पर एक साथ छापेमारी चल रही है। एएसपी ने बताया कि खनन विभाग के ओएसडी मृत्युंजय कुमार उनके भाई धनंजय कुमार व उनके महिला मित्र रत्ना चटर्जी के खिलाफ 25 नवंबर को विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आय से अधिक संपत्ति मामले में एक करोड़ 73 लाख से अधिक की संपत्ति अवैध तरीके से अर्जित करने का आरोप है। इसके बाद 26 तारीख को कोर्ट से सर्च वारंट लेने के बाद टीम शुक्रवार सुबह से छापेमारी चल रही है और अभी तक करोड़ो रुपये की अवैध सम्पत्ति का खुलासा हो चुका है ।

हलांकि मंत्री के ओएसडी पर छापे को लेकर बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गयी है और यह चर्चा तेज हो गयी है कि नीतीश इस बार बीजेपी से दो दो हाथ के मूड में वैसे अभी तक इस छापे पर बीजेपी के किसी नेता की कोई प्रतिक्रिया नहीं है ।

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पंचायत चुनाव के 8वें चरण की मतगणना जारी पूराने जनप्रतिनिधियों को जनता ने इस बार भी नकारा

बिहार में पंचायत चुनाव के अंतर्गत 8वें चरण में मतगणना जारी है आज देर शाम तक जो परिणाम सामने आया है उसमें भी पहले की तरह पूराने जनप्रतिनिधियों को जनता ने नकार दिया है ।वही कई ऐसे प्रतिनिधि भी चुन कर आये हैं जो लगातार चौथी बार चुनाव जीत कर आयी है ।
भाजपा विधायक मंटू सिंह की पत्नी सविता देवी पंचायत -बनौता प्रखंड -परसा ज़िला – छपरा ,सारण से लगातार चौथी बार चुनाव जीत कर आय़ी है ,2006 -पंचायत समिति जीत कर आयी और प्रमुख बनी ,2011- पंचायत समिति सदस्य बनी और फिर प्रमुख बनी,2016 -पंचायत समिति सदस्य बनी फिर प्रमुख,बनी इस बार 2021में निर्विरोध पंचायत समिति चुनी गयी है
क्या खास रहा है आज के मतगणना में

सविता देवी लगातार चौथी बार पंचायत समिति की सदस्य चुनी गयी


सहरसा जिला के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 3 से रेणु देवी (विजेता) 7277
शिवहर जिला के तरियानी प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 6 से मनीष कुमार (विजेता) 9008
मुंगेर जिला के बरियारपुर प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 6 से सरिता कुमारी (विजेता) 4350
भोजपुर जिला के आरा प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 23 से भीम कुमार (विजेता) 5609
भागलपुर जिला के नाथनगर प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 15 से मिथुन कुमार (विजेता) 13994
बांका जिला के कटोरिया प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 22 से अंजना देवी (विजेता) 9448
बेगूसराय जिला के छौड़ाही प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 7 से पुष्पा देवी (विजेता) 5226
बेगूसराय जिला के मटिहानी प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 34 से झुना सिंह (विजेता) 15904
बक्सर जिला के चौसा प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 1 से पुजा देवी (विजेता) 16443
पूर्वी चम्पारण जिला के कोटवा प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 13 से मनोज पासवान (विजेता) 6142
पूर्वी चम्पारण जिला के मोतिहारी प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 26 से मुनी देवी (विजेता) 4376
पटना जिला के बाढ़ प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 40 से विजय कुमार (विजेता) 15453
नालन्दा जिला के सरमेरा प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 25 से नरोतम (विजेता) 8311
दरभंगा जिला के बिरौल प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 27 से सुलेखा देवी (विजेता) 8132
औरंगाबाद जिला के ओबरा प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 14 से सुधा देवी (विजेता) 11327
औरंगाबाद जिला के ओबरा प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 15 से रुपांजली कुमारी (विजेता) 15408
अररिया जिला के पलासी प्रखंड के जिला परिषद् संख्या 25 से शब्बीर अहमद (विजेता) 18460
बिहार पंचायत चुनाव के 8वें चरण की सीटों पर मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू हो गई। शुक्रवार को 36 जिलों के 55 प्रखंडों की 822 पंचायतों के प्रतिनिधियों के किस्मत का पिटारा खुलेगा। मतगणना शनिवार को भी जारी रहेगी। यहां 24 नवंबर को वोटिंग हुई थी। इस चरण के 3,356 पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। वहीं, 166 पदों पर किसी भी प्रत्याशी के नामांकन नहीं करने की वजह से यह पद खाली रह गए हैं।
सीवान के सिवान के रघुनाथपुर से राजद के विधायक हरिशंकर यादव के बेटे और रिश्तेदार मुखिया का पद नहीं बचा सके हैं। विधायक हरिशंकर के बेटे सुरेंद्र यादव कुशहरा पंचायत से मुखिया का चुनाव हार गए हैं। सीतामढ़ी के रीगा के भाजपा विधायक मोतीलाल साह की समधन सुरती देवी मुखिया की चुनाव हारी गई है। सुरती देवी रीगा के गणेशपुर बभनगामा से मुखिया पद से प्रत्याशी थीं। यहां सेआशा सिंह मुखिया बनी हैं। विधायक की समधन तीसरे स्थान पर रहीं। कटिहार आजमनगर प्रखंड की मर्वतपुर पंचायत वार्ड संख्या 01 से वार्ड सदस्य पद के लिए महज 21 साल की खुशबू कुमारी चुनाव जीतीं।

नशा मुक्ति दिवस के मौके पर सीएम ने नशा सेवन नहीं करने का दिलाया शपथ

नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, नशा मुक्ति को लेकर दिलायी शपथ
पटना, 26 नवम्बर 2021:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज सम्राट अशोक कंवेन्शन केंद्र के ज्ञान भवन में नशा मुक्ति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम के शुरुआत के पूर्व सम्राट अशोक कंवेन्शन केंद्र परिसर में मुख्यमंत्री ने मद्य निषेध प्रचार-प्रसार अभियान हेतु मद्य निषेध रथ एवं प्रचार बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने ज्ञान भवन के निचले तल्ले में नशा मुक्ति पर पेंटिंग, कोलॉर्ज एवं टेराकोटा प्रदर्शनी का उद्घाटन तथा अवलोकन किया। अवलोकन के पश्चात मुख्यमंत्री के समक्ष ‘नशा मुक्त परिवार खुशहाल परिवार’ पर आधारित शैडो डांस लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

नशा मुक्ति दिवस पर जमकर गरजे नीतीश


कार्यक्रम की शुरुआत में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री के0के0 पाठक ने मुख्यमंत्री का स्वागत पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नशा मुक्ति को लेकर खुद शपथ लेते हुए वहां
उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई कि सत्य निष्ठा के साथ यह शपथ लेता हूं कि मैं आजीवन शराब का सेवन नहीं करुंगा। मैं कर्तव्य पर उपस्थित रहूं या न रहूं, अपने दैनिक जीवन में भी शराब से संबंधित गतिविधियों में किसी प्रकार से शामिल नहीं होऊंगा। शराबबंदी को लागू करने के लिए जो भी विधि सम्मत कार्रवाई अपेक्षित है उसे करुंगा। यदि शराब से संबंधित
किसी भी गतिविधि में शामिल पाया जाऊंगा तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई का भागीदार बनूंगा।

कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्ति पर आधारित गीत की प्रस्तुति की गई। साथ ही नशा मुक्ति के प्रचार-प्रसार हेतु जिंगल्स, वीडियो, ऑडियो संदेश का प्रदर्शन तथा जीविका द्वारा नशा मुक्ति पर तैयार की गई लघु फिल्म, जहरीली शराब के नुकसान पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

मुख्यमंत्री ने मोबाइल पर जनता के नाम संदेश का लोकार्पण किया तथा नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर सभी नगर निकाय प्रतिनिधियों को भेजे जानेवाले संदेश का अनावरण किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मद्य निषेध को लेकर उत्कृष्ट कार्य करने वाले किशनगंज के पुलिस अधीक्षक श्री कुमार आशीष सहित अन्य पुलिस पदाधिकारियों, मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर मैं सभी का अभिनंदन और स्वागत करता हूं। पूर्व के वक्ताओं ने सभी बातों की चर्चा विस्तार से कर दी है। 9 जुलाई 2015 को पटना के एक कार्यक्रम में मैं जब संबोधन समाप्त करके वापस गया तो वहां बैठी महिलाओं ने शराबबंदी की मांग की। मैंने उस वक्त ही वापस लौटकर कह दिया था कि अगर लोगों ने मुझे अगली बार फिर से काम करने का मौका दिया तो हम बिहार में शराबबंदी लागू कर देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार आने के बाद 1 अप्रैल 2016 को हमने नगर निगम और नगर परिषद को छोड़कर सभी जगहों पर शराबबंदी लागू कर दी। नगर निगम और नगर परिषद में विदेशी शराब बिक्री करने की अनुमति थी। उस समय शहरों में विदेशी शराब की दुकान को खोलने का लोगों ने भारी विरोध करना शुरू किया तो हमलोगों ने 5 अप्रैल से पूरे बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी। उन्होंने कहा कि बिहार में वर्ष 2011 से हमने 26 नवम्बर को मद्य निषेध दिवस मनाना
शुरू किया और शराबबंदी के बाद वर्ष 2017 में इसका नाम नशा मुक्ति दिवस कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी काम कीजियेगा तो चंद लोग गड़बड़ करने वाले हमेशा रहते हैं, शत प्रतिशत लोग किसी भी चीज को स्वीकार नहीं करते हैं। शराबबंदी को लेकर हमने 9 बार समीक्षा बैठक की है। हाल ही में शराबबंदी को लेकर 7 घंटे लगातार समीक्षा बैठक की गयी थी और उसमें एक-एक बिंदुओं पर चर्चा हुयी थी। इस बैठक में सभी चीजों की समीक्षा की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में जहरीली शराब से हुई मौत के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई भी की गई। हाल ही में जहरीली शराब पीने से हुई मौत के दोषियों पर भी कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब पीने से होने वाली हानि को लेकर डब्लू०एच0ओ0 ने वर्ष 2016 में दुनिया भर में एक सर्वे कराया था जिसकी रिपोर्ट वर्ष 2018 में प्रकाशित की गयी। दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों में 6.3 प्रतिशत मृत्यु यानि करीब 30 लाख लोगों की मौत शराब पीने से हुई। 20 से 30 आयु वर्ग के युवक/युवतियों में होने वाली मृत्यु का 13.5 प्रतिशत शराब पीने से होती है। 18 प्रतिशत लोग शराब पीने के कारण आत्महत्या करते हैं। आपसी झगड़े का 18 प्रतिशत कारण शराब पीना होता है। विश्व में जितनी सड़क दुर्घटनायें होती है उसमें 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटनायें शराब पीने की वजह से होती है। शराब पीने की
वजह से होने वाली गंभीर बीमारियों में से लीवर की गंभीर बीमारी 48 प्रतिशत, मुंह के कैंसर का 26 प्रतिशत, पैनक्रियाज की गंभीर बीमारी 26 प्रतिशत तथा टी0बी0 की गंभीर बीमारी 20 प्रतिशत के आस-पास शराब पीने के कारण होती है। यह रिपोर्ट बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद आयी है। डब्लू0एच0ओ0 की इस रिपोर्ट में शराब के सेवन के दुष्परिणामों को
लेकर व्यापक चर्चा की गई है। हमें खुशी है कि जिस कारण से हमलोगों ने राज्य में शराबबंदी लागू किया डब्लू०एच०ओ० की यह रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती है। इस रिपोर्ट में शराब से होने वाली हानियों के बारे में लोगों को सचेत करने के लिए पर्याप्त आंकड़ें दिये गये हैं। लोगों को हमेशा सचेत करने के लिए हम इस रिपोर्ट के बारे में बताते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट का लोगों के बीच में और प्रचार-प्रसार करायें ताकि वे शराब सेवन से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में जागरुक रहें। इसका प्रचार प्रसार करना जरूरी है ताकि लोग समझ सकें कि शराब कितनी बुरी चीज है। लोगों के हित में बिहार में शराबबंदी लागू
की गयी है। बापू ने भी कहा था कि शराब बुरी चीज है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधान सभा और विधान परिषद् में सर्व सम्मति से शराबबंदी का प्रस्ताव पास किया गया। उस समय सरकार में जो थे और जो विपक्ष में थे, सभी ने शराबबंदी का समर्थन किया। शराबबंदी के खिलाफ बोलने वाले कुछ लोग भूल जाते हैं कि शराबबंदी लागू करने के वक्त मद्य निषेध विभाग के मंत्री किस पार्टी के थे। उन्होंने कहा कि बिहार में
शराबबंदी का अध्ययन करने कई राज्यों के लोग आये हैं। कई राज्यों ने इसको लेकर मुझे अपने राज्यों में बुलाया भी था। केरल के लोग पिछले 22 साल से शराबबंदी के लिये अभियान चला रहे है। शराबबंदी लागू होने से पर्यटकों की संख्या घट जाती है, यह एक भ्रम है। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद पर्यटकों की संख्या और बढ़ी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी कानून को मजबूती से लागू करने के लिये एक बार फिर से शपथ दिलायी जा रही है। शपथ लेने से मन फिर से मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि बाएं-दाएं करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई करें। सरकारी तंत्र में भी जो गड़बड़ करने वाले हैं उन पर भी नियमानुसार कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि पटना शहर पर विशेष नजर रखें। पटना के कंट्रोल होने से पूरा बिहार कंट्रोल हो जायेगा। उन्होंने कहा कि शराब की सूचना मिलने पर पुलिस का छापेमारी करने जाना कोई गुनाह नहीं है। शादी समारोह हो या और कोई समारोह जब भी सूचना मिलेगी तो पुलिस जायेगी। नियमानुसार कार्रवाई हो, इसका ख्याल रखना जरूरी है। कुछ लोग ऐसे बयान दे रहे हैं कि बाहर से आने वालों को शराब पीने की छूट देनी चाहिये। ऐसे बयान देने वालों के मन में जरूर कोई गड़बड़ करने वाली बात है। पहले लोग कहते थे कि शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार की आमदनी घट गयी है लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है। पहले वर्ष 5000 करोड़ रूपये के राजस्व का घाटा हुआ था।
उसके अगले वर्ष 1200 करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा हुआ लेकिन अगले साल से शराबबंदी से कोई राजस्व की हानि नहीं होने लगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में फल, सब्जी और दूध की खपत बढ़ गयी है। फल, सब्जी और दूध का उत्पादन भी बढ़ा है और बिक्री भी बढ़ी है। शराबबंदी के बाद शराब का सेवन नहीं करने के कारण बचे पैसे से लोग फल, सब्जी और दूध खरीद रहे हैं। शहरों में वातावरण बेहतर हुआ है। शराबबंदी के बाद एक महिला ने आप बीती सुनाते हुए कहा था कि शराबबंदी के पहले पति शराब पीकर रोज झगड़ा करते थे। घर में बच्चे एवं बच्चियां परेशान रहती थी, खाने के लिए पैसे नहीं रहते थे लेकिन शराबबंदी के बाद अब वे शाम में घर आते हैं तो बाजार से सब्जी लेकर आते हैं, मुस्कुराते हैं और अब
देखने में भी अच्छे लगते हैं। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से समाज में बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी को पूरी मजबूती से लागू करना होगा। सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक / पुलिस अधीक्षक, उत्पाद अधीक्षक और लोक अभियोजक के साथ 15 दिनों में एक बार शराबबंदी को लेकर जरुर समीक्षा बैठक करें। मुख्यालय स्तर पर वरीय अधिकारी हर दूसरे दिन बैठक कर पूरे राज्य के शराबबंदी की अद्यतन स्थिति की
समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि शराब की सूचना देने को लेकर केंद्रीय आसूचना केंद्र बनाया गया है। बिजली के खंभों पर नंबर अंकित किया गया है जिससे लोग आसानी से सूचना दे सकें। सूचना देने वालों का नाम गुप्त रखा जाता है। अधिकारियों ने बताया है कि अब काफी तादाद में लोग शिकायत कर रहे हैं। बीच में लोगों का भरोसा घट गया था, ले रहा था कि शिकायत करने पर भी उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है लेकिन से हो रही है। उन्होंने कहा कि शराब पीना अच्छी बात नहीं है। शराब बुरी चीज शराब पियोगे तो मरोगे, इसे प्रचारित करने की जरूरत है। छात्र जीवन से ही हम खिलाफ रहे हैं। उस समय से ही मेरी इच्छा थी कि जब हमें काम करने का मौका मिलेगा तो शराबबंदी लागू करेंगे। बिहार में स्व० कर्पूरी ठाकुर जी ने शराबबंदी लागू किया था लेकिन बाद में उसे खत्म कर दिया गया। जब महिलाओं ने शराबबंदी की मांग की तो मेरा मन पाराबबंदी को लेकर दृढ़ हुआ और राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की। शराबबंदी के प्रति हम सबों को जागृत रहना है और शराब के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरुक करते रहना है। शराबबंदी लोगों के हित में है। इससे राज्य और देश का भला होगा। बिहार में शराबबंदी के सफल होने से दूसरे राज्य भी इसे लागू करने को लेकर प्रेरित होंगे। वर्ष 2017 में 21 जनवरी को शराबबंदी को लेकर मानव श्रृंखला बनायी गयी थी। इसमें अन्य लोगों के साथ-साथ पत्रकारों ने भी शराबबंदी की शपथ ली थी। शराबबंदी को लेकर सभी लोगों ने अपना सहयोग और समर्थन दिया है। हमें भरोसा है कि आगे भी सभी लोग इस अभियान को
अपना समर्थन देंगे। आज सभी लोगों ने शपथ ली है। मुख्य सचिव और डी0जी0पी0 सभी सरकारी तंत्र के लोगों की शपथ लेने की पुष्टि कर लें।

कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद, उप मुख्यमंत्री श्रीमती रेणु देवी, शिक्षा मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री के0के0 पाठक ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, खाद्य एवं उपभोक्त संरक्षण मंत्री श्रीमती लेशी सिंह, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री श्री संतोष कुमार सुमन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री रामप्रीत पासवान, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी, अपर मुख्य सचिव गृह श्री चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव / प्रधान सचिव/सचिव, वरीय पुलिस अधिकारीगण, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित अन्य अधिकारीगण, जीविका की दीदियां, किलकारी के बच्चे उपस्थित थे जबकि अन्य जगहों से वेबकास्टिंग के
माध्यम से अन्य जनप्रतिनिधिगण, पदाधिकारीगण तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति जुड़े हुए थे।

नशा मुक्ति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के बाद पारिवारिक पार्टियों पर उठे सवाल पर पत्रकारों द्वारा पूछे गये प्रश्न का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पारिवारिक पार्टियां देश को नुकसान पहुंचा रही हैं ये बिल्कुल सही है। हमलोग तो शुरू ये मानकर चल रहे हैं कि पारिवारिक पार्टियों का कोई मतलब नहीं है। आजकल लोग खुद को, अपने परिवार को, बाल बच्चे को राजनीति में जगह देना चाहते हैं। राजनीति में परिवारवाद का कोई मतलब नहीं होना चहिये लेकिन आजकल कई दल इसी राह पर चल रहे हैं। कुछ दिनों के लिये भले ही परिवारवाद चल जाये लेकिन कुछ समय के बाद उनका सर्वाइवल संभव नहीं होगा।

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नशा मुक्त बिहार के लिए सीएम ने राज्यवासियों को दिलायी शपथ

नशा मुक्ति दिवस के मौके पर आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आजीवन शराब सहित किसी तरह के नशे का सेवन नहीं करने के लिए पूरे बिहार वासियों को शपथ दिलाया।

उन्‍होंने इस खास मौके पर जागरुकता रथों को रवाना किया, जो आम लोगों के नशे की बुराई के बारे में बताएंगे। सीएम ने कहा कि दूसरों को भी शराब के सेवन के लिए प्रेरित नहीं करना है।

शराब से जुड़ी गतिविधियों से अपने को अलग रखना है। राज्य सरकार के सभी कर्मचारी व अफसरों को अपने-अपने सरकारी कार्यालयों में इसकी शपथ लेने की हिदायत दी गई है।

सभी को इससे जुड़ा शपथ-पत्र भरकर उस पर हस्ताक्षर करना है, जिसकी प्रति डीएम के माध्यम से मुख्यालय तक पहुँचना है ।
इस मौके पर अधिकांश मंत्री और अधिकारी मौजूद है और मुख्यकार्यक्रम ज्ञाण भवन में आयोजित है

मंत्री के ओएसडी के घर छापा करोड़ो की सम्पति बरामद

बिहार सरकार के मंत्री जनक राम (माइंस और जियोलॉजी डिपार्टमेंट) के OSD मृत्युंजय कुमार और धनंजय कुमार और रत्ना चटर्जी के ठिकानों पर SVU ने शुक्रवार सुबह रेड मारी।

दोनों पर सरकारी पद पर काम करते हुए भ्रष्टाचार करने का आरोप है । OSD मृत्युंजय कुमार समेत 3 लोगों के घर पर रेड पड़ी है।

आरोप है कि तीन ने मिलकर खूब काली कमाई की है। इनके काले कारनामों के बारे में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) को कंप्लेन मिली थी। इसके बाद आरोपों की जांच की गई।

रिपोर्ट आने पर मामला सही पाया गया। इसके बाद टीम ने आज सुबह पटना, अररिया और कटिहार में नगद 15 लाख सहित करोड़ों रुपये की अवैध सम्पत्ति बरामद हो चुका है ।

हाईकोर्ट ने बेगूसराय एसपी पर लगाया अर्थदंङ

पटना हाई कोर्ट ने बेगूसराय के एस पी पर 25 हज़ार रुपये का अर्थदंड लगाया है। जस्टिस पी बी बजन्थरी ने याचिकाकर्ता मोहम्मद एहतेशाम खान की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश को पारित किया।

दरअसल, सिपाही बहाली करने वाली केंद्रीय चयन परिषद को गुप्त सूचना मिली थी कि याचिकाकर्ता ने दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बिठाकर सिपाही की परीक्षा पास की है। इसके बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोप गठित हुआ।

कार्यवाही चली, लेकिन कार्यवाह की इन्क्वायरी रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता को नहीं दी गई थी। 18 अक्टूबर, 2021 को उक्त मामले पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने बेगूसराय के पुलिस अधीक्षक को इन्क्वायरी रिपोर्ट और सेकंड शो – कॉज की प्रति विभागीय कार्यवाही में याचिकाकर्ता को मुहैया कराइ गई थी कि नही ,ये शपथ पर बताने को कहा था।

इसके बावजूद ये शपथ पर नही आ सकी। इसी को लेकर कोर्ट ने 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।

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तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई शुरु

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सह विधायक तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को चुनोती देने वाली चुनाव याचिका पर सुनवाई की।विजय कुमार यादव की चुनाव याचिका जस्टिस वीरेंद्र कुमार ने सुनवाई की।

तेज प्रताप यादव के
हसनपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन को विजय कुमार यादव ने चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दी। आज याचिकाकर्ता की गवाही हुई।

तेजप्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने याचिकाकर्ता से जिरह किया। उसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उन्मुक्त कर दिया।

इसके पूर्व दोनों पक्षों की ओर से अदालत में पक्षकारों के बीच, जिन विवादित बिंदुओं पर भी अदालत अपना निर्णय दे सकता है, उसे दाखिल किया गया था।

तेज प्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने आगे बताया कि याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि एक्ट, 1951 का हवाला देते हुए तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को अमान्य करार देने के लिए चुनाव याचिका दायर किया है।

मामला वर्ष 2020 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। याचिका दायर करने का आधार श्री यादव द्वारा जानबूझकर अपनी संपत्ति के संबंध में नामांकन पत्र के साथ संपत्ति को लेकर हलफनामा में जानकारी छुपाना बताया गया है।

याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि क़ानून की धारा 123(2) के अनुसार इसे भ्रष्ट आचरण बताया है।

इस विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन 16 अक्टूबर, 2020 को दाखिल किया गया था।
3 नवंबर, 2020 को विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ था। 10 नवंबर, 2020 को चुनाव परिणाम घोषित किया गया था, जिसमें तेज प्रताप यादव हसनपुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र से विजयी हुए थे।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

पंचायत चुनाव का आठवां चरण की वोटिंग समाप्त

बिहार पंचायत चुनाव का आठवां चरण का मतदान संम्पन ।

आठवें चरण में 36 जिलो के 55 प्रखंडों के 834 पंचायतों में हुआ मतदान ।

वोटिंग के लिये 7398 भवनों में 11527 बूथ बनाये थे ।

614 बूथ नक्सली प्रभावित थे ।

66 लाख 55 हजार 233 वोटर थे वोटर ।

वोटिंग के लिये तकरीबन 40 हजार पुलिस अधिकारी व जवानों की गई थी तैनाती ।

कुल मतदान 61.95 प्रतिशत

महिला 65.24
पुरुष 58.65।

शांतिपूर्ण रहा मतदान ।

रघुनाथ पुर में हवाई फायरिग की घटना हुई लेकिन बूथ के आसपास नही हुआ।

कुल 705 evm बदले गए ।

आज के चुनाव में क्या खास रहा

जमुई में नक्सली बंद बेअसर, मतदाताओं ने जमकर डाले वोट, जमुई के खैरा में हुई 70% वोटिंग, हर बूथ पर महिलाओं की भीड़, 8 किमी पैदल चल कर वोट देने पहुंची महिलाएं। पहली बार कई लड़कियों ने किया मतदान।

बिहार पंचायत, मुखिया चुनाव: बांका में एक लाख रुपये के साथ मुखिया प्रत्‍याशी गिरफ्तार, सिवान व बक्‍सर में फायरिंग

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बिहार नगरपालिका एक्ट 2007 की वैधता को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर

पटना हाईकोर्ट में बिहार नगरपालिका एक्ट,2007 के Chapter 5 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टली।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष डा. आशीष कुमार सिन्हा व अन्य द्वारा दायर याचिका पर एडवोकेट जनरल ने हलफनामा दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय लिया।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता मयूरी ने बताया कि यह नगरपालिका संगठनात्मक संरचना से सम्बंधित कानून हैं।नगरपालिका के इस कानून में श्रेणी ए और बी पदों पर नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार करती हैं।जबकि श्रेणी सी और डी के पदों पर नियुक्ति पर नगरपालिका का बहुत सीमित अधिकार था।

लेकिन 31 मार्च,2021 को कानून में संशोधन कर श्रेणी सी और डी के पदों पर नियुक्ति के सीमित अधिकार को राज्य सरकार ने नगरपालिका से ले लिया है।


ये याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार द्वारा इस कानून में किये गए संशोधन को पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर किया।
चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने 31 मार्च,2021 को कानून में संशोधन कर राज्य सरकार द्वारा मनमाने ढंग से नगरपालिका के शक्ति प्राप्त कमिटी के नियुक्ति सम्बन्धी अधिकार को लिए जाने को गम्भीरता से लिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मयूरी ने कोर्ट को बताया कि कानून के तहत अन्य राज्यों में नगरपालिका के कर्माचारियों की नियुक्ति नगर निगम करती हैं।

उन्होंने कहा कि नगर निगम स्वायत्तशासी संस्था है।इसके लिए जरूरी है कि नित प्रति दिन के कार्य में सरकारी हस्तक्षेप नहीं हो और ये इकाई स्वायत्तशासी संस्था के रूप में कार्य कर सके।

कोर्ट को बताया गया कि नगर निगम के कर्मचारियों के वेतन और अन्य लाभों पर राज्य सरकार का नियंत्रण है,जबकि ये पैसा निगम के फंड से दिया जाता है ।

निगम के कर्मचारियों के cadre का केंद्रीयकृत होना नगरपालिका संस्थाओ के स्वायतता के मूल भावना के विरूद्ध है।इस मामले पर अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद होगी।

ऐतिसाहिक धरोहर को लेकर सरकार गंभीर नहीं

पटना हाईकोर्ट ने विनय कुमार सिंह की जनहित याचिका को सुनते हुए केंद्र सरकार व राज्य सरकार को लोमस और यज्ञबल्कय ऋषि के गुफाओं व पहाड़ियों का फोटो दो सप्ताह में कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। इस जनहित याचिका पर जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने सुनवाई की।

हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने माना कि इन पहाड़ियों का धार्मिक महत्त्व है और वहां पूजा अर्चना होती हैं।लेकिन ये पुरातत्व महत्व का स्थल नहीं है।

याचिका में ये कहा गया कि लोमस और याज्ञवल्कय ऋषि की गुफाएं केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नही, बल्कि जैव विविधता के दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है । ऐसे स्थानों को संरक्षित करने की बजाए समाप्त किया जा रहा है।इसके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई हैं।

राज्य सरकार के खनन व पर्यावरण विभाग के अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि ये गुफाएं व पहाड़ी पर्यटन स्थल या ऐतिहासिक महत्व की नहीं हैं।लेकिन राज्य सरकार इसे संरक्षित रखेंगी और इसे नष्ट नहीं होने देगी।

इन पहाड़ के जंगल व आस पास होने वाले खनन कार्य पर पटना हाईकोर्ट ने 20 जुलाई, 2021 को रोक लगा दी थी। यह रोक को अगली सुनवाई तक जारी रखने का कोर्ट ने निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान कुछ लोगों ने हस्तक्षेप अर्जी के जरिये खनन कार्य पर से रोक हटाने का अनुरोध किया, जिसे हाई कोर्ट ने नामंजूर कर दिया ।

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि 1906 में प्रकाशित तत्कालीन गया जिले के गज़ट में दोनों पहाड़ियों का सिर्फ पुरातात्विक महत्त्व ही नही बताया गया हैं, बल्कि वहां की जैव विविधता के बारे में भी अंग्रजों ने लिखा है।

उन पहाड़ियों के 500 मीटर के दायरे में झरना , बरसाती नदी और एक फैला हुआ वन क्षेत्र है। उस जंगल को अवैध खनन कर बर्बाद किया जा रहा है।

लोमस और याज्ञवल्कय पहाड़ियों को आर्कियोलॉजिकल एवं हेरिटेज साइट बनाने का कोर्ट से आग्रह किया गया। कोर्ट ने दोनों पहाड़ियों के वन क्षेत्र विस्तार और रिहाइशी बस्तियों के बिंदु पर राज्य व केंद्र सरकार से जवाब मांगा था । इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

बिहार पंचायत चुनाव का 8 चरण छिटपुट हिंसा को छोड़कर शातिपूर्वक चल रहा है चुनाव

बिहार पंचायत चुनाव में 8वें चरण की सीटों पर मतदान जारी है दोपहर एक बजे तक 35 से 40 प्रतिशत मतदान की खबर है हलांकि नक्सली के बंद की वजह से नक्सल प्रभावित जिलों में मतदानकर्मी थोड़े दहशत में जरुर है लेकिन मतदाताओं के उत्साह में कोई कमी नहीं है ।
8वें चरण में 36 जिलों के 55 प्रखंडों की 822 पंचायतों में चुनाव हो रहा है। इस चरण के 3356 पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है।
92 हजार 376 उम्मीदवार मैदान में
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक कुल 92 हजार 376 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चरण में कुल 66 लाख 55 हजार 233 मतदाता मतदान करेंगे। इनमें 31 लाख 52 हजार 763 महिला मतदाता जबकि 35 लाख 2 हजार 260 पुरुष मतदाता हैं। इस चरण में वोटरों के लिए कुल 11 हजार 527 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
आठवें चरण में कुल पदों की संख्या 25 हजार 561 है। इनमें ग्राम पंचायत सदस्य पद की संख्या 11 हजार 173 है। ग्राम पंचायत मुखिया के 1135 पद, पंचायत समिति सदस्य के लिए 821, जिला परिषद सदस्य के 124 पद, ग्राम कचहरी सरपंच के 1135 पद और ग्राम कचहरी पंच के 11 हजार 173 पदों के लिए चुनाव होंगे। वहीं, 92 हजार 376 उम्मीदवारों में से 42 हजार 803 पुरुष और 49 हजार 573 महिला उम्मीदवार शामिल हैं।

3356 पदों पर निर्विरोध हो चुका है निर्वाचन
8वें चरण की सीटों पर 3356 पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। इनमें ग्राम पंचायत सदस्य के 148, पंचायत समिति सदस्य के 3, ग्राम कचहरी सरपंच के 2, मुखिया के 1 और ग्राम कचहरी पंच के 3202 पद शामिल हैं। इस चरण के 166 पद खाली रह गए हैं। इसकी वजह ये है कि इन 166 पदों पर किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन नहीं किया है। इनमें 4 ग्राम पंचायत सदस्य के, 1 पंचायत समिति सदस्य और 161 ग्राम कचहरी सदस्य के पद शामिल हैं।

आज के चुनाव में क्या खास है
1—सीवान के रघुनाथपुर प्रखंड मुख्यालय के मुस्लिम टोला में मस्जिद के समीप दो राउंड फायरिंग हुई है। पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, एक समुदाय विशेष ने वोट को लेकर फायरिंग की है।
2—नालंदा के हरनौत के दैली में चुनाव से पहले युवक को मारी गोली। हरनौत थाना क्षेत्र के दैली गांव में पंचायत चुनाव की रंजिश में 32 वर्षीय मुन्ना कुमार को गोली मार दी गई। बताया जा रहा है कि मंगलवार रात गांव में घूम कर कुछ लोग कह रहे थे कि गांव के ही मुखिया उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करना है। इसी दौरान मुन्ना कुमार ने कहा कि वह किसी के दबाव में मतदान नहीं करेगा। आरोप है घटना के पीछे यही विवाद है।
3–नालंदा में चुनाव ड्यूटी में तैनात ईवीएम के मास्टर ट्रेनर की मौत। ईवीएम की गड़बड़ी दूर करने के लिए हरनौत के चौरिया पंचायत सेक्टर में तैनात मास्टर ट्रेनर 55 वर्षीय रविचंद्र किरण की मौत हो गई। वे नूरसराय प्रखंड के नीरपुर के निवासी थे तथा नूरसराय के उत्क्रमित मध्य विद्यालय पपरनौसा में सहायक शिक्षक के तौर पर पदस्थापित थे। निर्वाची पदाधिकारी रवि कुमार ने बताया कि ड्यूटी पर आने के दौरान वे बाइक से गिर गए और उनकी मौत हो गई।
4–गया के अतिनक्सल प्रभावित इमामगंज विधानसभा क्षेत्र के इमाम गर्लफ्रे आदर्श राजकीय मध्य विद्यालय में मतदान जारी है। नक्सली बंदी के बावजूद लोग वोट करने के लिए आ रहे हैं। लोगों में वोट के प्रति उत्साह, अपने नेता को चुनने के प्रति उनका जोश बना हुआ है। स्कूल में दो बूथ हैं। एक बूथ पर 320 और दूसरे बूथ पर 600 से अधिक मतदाता हैं। यहां 3:00 बजे तक मतदान होगा। यहां बायोमेट्रिक के उपकरण तो हैं पर वह काम नहीं कर रहे। वोटिंग प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही मशीन काम करना बंद कर दिया।
5–सीतामढ़ी के रीगा प्रखंड अंतर्गत बूथ संख्या 5 पर EVM में आई गड़बड़ी, तकरीबन एक घंटे से बाधित है मतदान, कई मतदाता बिना वोटिंग किए लौटे घर।
6—मुजफ्फरपुर के गायघाट की 23 पंचायतों के 329 बूथों पर मतदान जारी है। बूथ संख्या 142,143, और 144 पर भारी संख्या में मतदाताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लेकिन, वोटिंग की गति काफी धीमी थी। इस कारण सभी मतदाता जमीन पर ही बैठ गए। काफी देर बाद भी जब उनकी बारी नहीं आयी तो सभी ऊब गए और हंगामा करने लगे।

दरोगा बहाली की प्रक्रिया पर उठा सवाल हाईकोर्ट ने बोर्ड से माँगी रिपोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में हो रहे दारोगा भर्ती परीक्षाओं में शारीरिक दक्षता जांच में हुई गड़बड़ी के आरोपों के मामलें पर बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा भर्ती आयोग को दारोगा भर्ती से जुड़े मूल कागजात व रिकॉर्ड कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है । अखिलेश कुमार व अन्य की ओर से दायर रिट याचिका जस्टिस पी बी बजनथ्री ने सुनवाई की।

याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट को बताया कि दारोगा भर्ती हेतु पीटी व मेंस परीक्षाओं में ये सभी याचिकाकर्ता सफल हुए । उन्हें बोर्ड ने शारीरिक दक्षता जांच के लिए बुलाया था , जो विगत 22 मार्च से 12 अप्रैल 2021 के बीच अलग जगह अलग समय पर होनी थी ।

चूंकि उस वक्त कोरोना की दूसरी लहर फैलने का खतरा मंडरा रहा था , इसलिए कई अभ्यर्थियों ने (जिनमे याचिकाकर्ता भी थे ) शारीरिक दक्षता जांच की तारीख आगे बढ़ाने के लिए अनुरोध किया।इसे आयोग ने स्वीकार करते हुए नया एडमिट कार्ड भी जारी किया।

शारीरिक दक्षता जांच की नई तारीख और नए एडमिट कार्ड जारी होने के बाद अचानक आयोग ने नया जारी हुआ एडमिट कार्ड को रद्द कर दिया । परिणामस्वरुप सभी याचिकाकर्ता शारीरिक दक्षता जांच के मौके से वंचित कर दिए गए । हाई कोर्ट ने इसे मनमानापन मानते हुए आयोग से भर्ती प्रक्रिया के मूल अभिलेखों को प्रस्तुत करने का आदेश आयोग को दिया।इस मामले की अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होनी है।

वकील और उनकी नौकरानी की हत्या मामले में हाईकोर्ट में आज हुई सुनवाई

पटना हाई कोर्ट ने बिहार स्टेट बार काउंसिल के उपाध्यक्ष व अधिवक्ता कामेश्वर पांडेय और उनकी नौकरानी की हत्या मामलें में अभियुक्त गोपाल भारती की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए केस डायरी तलब किया। जस्टिस प्रभात कुमार सिंह ने मुख्य अभियुक्त गोपाल भारती द्वारा दायर नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई की।

अधिवक्ता कामेश्वर पांडेय के भतीजे अभिजीत कुमार द्वारा 6 मार्च, 2020 को स्थानीय पुलिस को दी गई लिखित सूचना के आधार पर आई पी सी की धारा 302, 380, 120(बी) व 34 के तहत भागलपुर जिले मेंं कोतवाली (तिलकामांझी) प्राथमिकी संख्या 72/ 2020 दर्ज की गई थी।

इस तिथि को अधिवक्ता पाण्डेय के ड्राइवर द्वारा कांड के सूचक को फोन पर सूचना दी गई थी कि वे तुरंत घर आ जाइये। वकील साहब की हत्या हो गई है।हत्या के बाद कामेश्वर पांडेय के घर के मुख्य द्वार के पास कुछ खून के धब्बे पाए गए थे और वे अपने बेडरूम में अस्त व्यस्त हालात में अचेत पड़े हुए थे।

उनके चेहरे पर खून लगा हुआ तकिया रखा हुआ पाया गया था। कमरे में रखा हुआ आलमारी टूटा हुआ था और उसमें रखा हुआ सामान गायब था।

मुख्य द्वार के निकट पोर्टिको में जेनेरेटर के बगल में रखा हुआ ड्राम में नौकरानी का शव पाया गया था। घर से सारे नकदी, कागजात, एक स्मार्ट फोन और कामेश्वर पांडेय के कार को लेकर आरोपी अपने साथियों के साथ भाग गया था।

कोर्ट को बताया गया कि दर्ज प्राथमिकी के अनुसार मृत कामेश्वर पांडेय का किराएदार गोपाल भारती से आये दिन मकान खाली करने को लेकर विवाद होता रहता था।नौकरानी से भी वह उलझा करता था और धमकी भी देता था कि तुमलोगों को देख लेंगे।

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि याचिकाकर्ता अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्याकांड को अंजाम दिया था। इस बात की जानकारी मोहल्ले वालों परिवार वाले और कचहरी के कुछ लोगों की भी थी की गोपाल भारती का विचार और व्यवहार अच्छा नहीं था।

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सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में अभ्यर्थी पहुंचा हाईकोर्ट विभाग पर बहाली में लगाया धांधली का आरोप

पटना हाई कोर्ट ने सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एस टी एस) के पद पर नियुक्ति सुनवाई करते हुए स्टेट हेल्थ सोसाइटी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस पी बी बजन्थरी ने सोनु कुमार व अन्य द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल इन पदों पर नियुक्ति पर रोक लगा दी है।

याचिकाकर्ता ने इस पद पर नियुक्ति हेतु सेनेटरी इंस्पेक्टर कोर्स को भी शामिल करने हेतु आदेश देने का आग्रह किया गया है। इसको लेकर राज्य के स्टेट हेल्थ सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक के हस्ताक्षर से विज्ञापन जारी किया गया था।

इस मामले में नेशनल tubercolosis संशोधित प्रोग्राम, स्टेट हेल्थ सोसाइटी व केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस और पूर्व में नियुक्ति के लिए मान्यता प्राप्त सेनेटरी इंस्पेक्टर कोर्स की योग्यता रखने वाले भी एस टी एस के पद पर नियुक्ति के योग्य होंगे।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने बताया कि मान्यता प्राप्त सेनेटरी इंस्पेक्टर कोर्स की योग्यता रखने उम्मीदवारों समेत याचिकाकर्ता को सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर के पद पर नियुक्ति हेतु ऑनलाइन आवेदन करने के लिए अनुमति देने के लिए कोर्ट से अनुरोध किया।

इन सभी याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के बिहार पैरा मेडिकल / पैरा डेंटल एग्जामिनेशन कमेटी द्वारा संचालित की गई सेनेटरी इंस्पेक्टर कोर्स को पास किया है।
इस मामलें पर आगे भी सुनवाई होगी।

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लालू यादव को सदेह उपस्थिति से मिली छूट

लालू यादव को पटना सीबीआई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है कोर्ट ने लालू यादव के उस याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें बीमारी को देखते हुए सदेह उपस्थिति से छूट का आग्रह किया गया था।कोर्ट से सुनवाई के बाद उनके संदेह पेशी से छूट दे दिया ।

बांका कोषागार से 46 लाख रुपए की अवैध निकासी मामले में लालू मंगलवार को पटना के CBI की विशेष अदालत MP-MLA कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से सशरीर पेशी से राहत देने की मांग की। इस पर कोर्ट राजी हो गया।

RJD सुप्रीमो ने कहा, “हुजूर… मैं अक्सर बीमार रहता हूं। ऐसे में मुझे पेश होने से राहत दीजिए। मेरे वकील इस मामले को देखेंगे।’ उनकी इस मांग पर कोर्ट ने कहा, “ठीक है अब से आप अपने वकील को तारीख पर भेज दीजिएगा।’

1996 से चल रहा मामला

बांका उपकोषागार से फर्जी विपत्र के सहारे 46 लाख रुपए की अवैध निकासी का मामला 1996 से चल रहा है। इसमें शुरू में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव के अलावा 44 आरोपी थे। फिलहाल 28 लोगों पर केस चल रहा है। आधा दर्जन आरोपियों की मौत हो चुकी है। इसकी सूचना कोर्ट को दी गई है।

शराबबंदी कानून को लेकर पुलिस का आया अमानवीय चेहारा

शराब की तलाश में अब पुलिस दुलहन को भी नहीं छोड़ रही है मामला राजधानी पटना के रामकृष्णा नगर थाना से जुड़ा है जहाँ थानेदार अपनी टीम के साथ बोधि बिहार कम्यूनिटी हॉल में घुस गए। वहां शादी हो रही थी।

शराब की खोज में दुलहन के घर घुसा पटना पुलिस

जिस वक्त पुलिस पहुंची थी, उस वक्त वहां लड़की पक्ष के लोग थे। सबसे आश्चर्य वाली बात यह है कि पुलिस टीम में एक भी महिला अफसर या सिपाही शामिल नहीं थी। टीम में सभी पुरूष थे। शादी वाली जगह पर हर एक कमरे को खुलवाकर इन लोगों ने देखा, उसे खंगाला। कमरों में मौजूद लोगों के सामानों को चेक किया गया।

हद तो तब हो गई, जब पुलिस टीम दुल्हन के कमरे में घुस गई। वहां दुल्हन के साथ परिवार की कुछ महिलाएं थीं। जो अचानक से पुलिस को कमरे में देख असहज हो गईं। उस वक्त दुल्हन के श्रृंगार का सामान, ज्वेलरी और कपड़े, कमरे के अंदर बिखरे पड़े थे।

इस छापेमारी से जुड़े वीडियो के सामने आने से बिहार में सियासी पारा चढ़ गया है , पुलिस के इस कार्रवाही से मुख्यमंत्री भी सकते हैं ।

शराबबंदी को लेकर नीतीश की नसीहत

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शराबबंदी को लेकर विपक्ष हुआ हमलावर

जगदानंद सिंह ने कहां है कि महागठबंधन के दबाव में नीतीश कुमार ने शराबबंदी का फैसला लिया और शराब जहां से आ रही है

शराबबंदी कानून को लेकर जगतानंद सिंह ने नीतीश पर साधा निशाना

उन राज्यों में पुलिस जाकर छापेमारी क्यों नहीं कर रही है पुलिस छापेमारी शादी समारोह में कर रही है और शराब के नशे से हमारे नौजवान बर्बाद हो रहे हैं

कांग्रेस ने शराबबंदी को लेकर नीतीश पर साधा निशान

कोरोना को लेकर सरकार फिर सख्त।

राज सरकार ने अनलॉक 9 की घोषणा की है 23 नवंबर से लेकर 30 नवंबर तक राज्य में विवाह समारोह और बरात के दौरान डीजे बजाने की इजाजत नहीं होगी

शादी के तारीख से 3 दिन पहले स्थानीय थाने को सूचना देनी होगी श्राद्ध कर्म में भी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा जिन राज्यों में शंकर मन अधिक है वहां से आने वाले लोगों को कोरोना जांच अनिवार्य कर दिया गया है

क्लब जीमस्विमिंग पूल 50% उपस्थिति के साथ खुलेंगे यहां सिर्फ को भी टीका पर आप लोगों का आना अनुमान होगा

जिन जिलों में अभी भी संक्रमण ज्यादा है वहां से फ्लाइट रेल ट्रक अन्य वाहनों से राज्य से आने वाली यात्रियों की जांच कराई जाएगी जांच कराने में उन्हें ही छूट मिलेगी जो 72 घंटा पहले का आरती पीसीआर टेस्ट लेकर आएंगे

सिनेमा हॉल पहले की तरह 50% उपयोग के साथ ही खुलेंगे शॉपिंग मॉल में प्रोटोकॉल का प्रक्रिया अनिवार्य है

सार्वजनिक स्थानों पर किसी प्रकार का आयोजन जिला प्रशासन की अनुमति के अनुरोध होगा साथ ही 3 दिन पहले इसकी सूचना देनी होगी दुकानों में सिर्फ को भी टीका प्राप्त व्यक्ति ही कार्य करेंगे

पूर्व डीजीपी अभयानंद ने नीतीश कुमार के शराबबंदी कानून पर खड़े किये सवाल

शराबबंदी को लेकर सीएम समीक्षा बैठक करने वाले हैं ये खबर जैसे ही मीडिया आयी उसी दिन से ही  पुलिस शराब कारोबारी के खिलाफ हल्ला बोले हुए है राजधानी पटना में पिछले 48 घंटे में 100 से अधिक शराब पीने वाला और होटल से जुड़े कर्मी गिरफ्तार हो चुके हैं ,बिहार की पूरी पुलिस शराब सूंघने में लग गयी है ऐसे में बिहार पुलिस के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने शराबबंदी कानून को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर किया है  पुलिस को शक्ति कहाँ से मिलती है?

**सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थापित था। पिताजी के एक IPS मित्र ने मुझसे एक सवाल पूछ दिया – “यह बताओ कि पुलिस की शक्तियाँ तुम्हें कहाँ से मिलती हैं?”पिछले एक साल में कानून की जितनी पढ़ाई की थी उन सब को बारी-बारी से उनको बता दिया, इस विश्वास के साथ कि किसी एक उत्तर से वे खुश होकर मेरी पीठ थपथपा देंगे।

लेकिन वैसा हुआ नहीं।वे मुस्कराते हुए मेरे उत्तर धैर्य से सुनते रहे। अंत में उन्होंने कहा, “तुम्हारी शक्ति उन लोगों की स्वीकारिता से आती है जिनपर तुम अपना हुक़्म चलाना चाहते हो।”यह सीख मेरे ज़हन में घर कर गई। समझ गया कि कानूनी रूप से जितना भी सही आदेश हो, अगर उसकी आम स्वीकार्यता नहीं हो, तो कानूनी शक्ति कानून की किताबों में बंद रह जाती है।     “तुम्हारी शक्ति उन लोगों की स्वीकारिता से आती है जिनपर तुम अपना हुक़्म चलाना चाहते हो।”यह पंक्ति ही बहुत कुछ कह गया ।

मधुबनी की घटना संवैधानिक संस्थाओं के बीच बढ़ती दूरियों का नतीजा है

मधुबनी के झंझारपुर कोर्ट में जो कुछ भी हुआ उसको लेकर पुलिस अपनी पुलिस के साथ खड़ी है वही जज के साथ न्यायपालिका और वकील खड़ा हैं ।बात पत्रकारिता की करे तो अभी तक तो बस इतना ही है कि हम लोग दोनों का बयान छाप रहे हैं ।वही बात आम लोगों की करे तो स्वाभाविक है हर कोई पुलिस के अमानवीय व्यवहार से त्रस्त है ऐसे में मास जज साहब के साथ खड़ा है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस के जिस गुंडागर्दी से आम लोग परेशान है उसके लिए जिम्मेवार कौन है, पुलिस झुठे मुकदमे में फंसा कर आम लोगों को तबाह कर रहा है इसके लिए जिम्मेदार कौन है,पुलिस,सीबीआई और ईडी जैसी संस्थान सरकार की रखैल बन गयी है इसके लिए जिम्मेदार कौन है।इस पर जब बहस होगी तो चीजें बहुत कुछ स्पष्ट हो जायेंगी क्यों दोनों मिल कर जनता को किस तरह से लूट रहा यह तस्वीर जब तक सामने नहीं आयेगा खेल चलता रहेगा क्यों कि यो जो लड़ाई है ना वो हिस्सेदारी की लड़ाई है और कौन श्रेष्ठ है इसकी लड़ाई है।

भारतीय लोकतंत्र क्या कहता है जिस तीन स्तम्भ की हमारे संविधान में चर्चा है उसकी क्या जिम्मेवारी है कोर्ट का गठन क्यों किया गया था ।आज जज साहब की पिटाई पर हंगामा बरपा हुआ है आम लोग रोज पीटता रहता है कोर्ट स्वत संज्ञान लेती है।

इस गठजोड़ को समझिए अंग्रेज तो चला गया लेकिन सत्ता और सरकार अभी भी अंग्रेज वाली मानसिकता से बाहर नहीं निकल पायी है पुलिस अभी भी उसी मानसिकता में काम कर रही है जिस मानसिकता में अंग्रेज की पुलिस काम कर रही थी, और यही नजरिया कोर्ट का भी कोर्ट में भी कुछ नहीं बदला है जज साहब उपर बैठे रहते हैं और तारीख देने के लिए कर्मचारी जो पैसा लेता है वो भी अंग्रेज के समय से ही चला आ रहा है ।

अभी भी कोर्ट का नजरिया शासक के साथ खड़े रहने वाला ही है और यही वजह है कि कोर्ट का नजरिया आज भी पुलिस को लेकर वैसा ही है जैसे 1947 से पहले था ऐसा नहीं है कि बदलाव नहीं आया है लेकिन तमाम बदलाव के बावजूद चरित्र वही है।

दिल्ली दंगा को लेकर जमानत पर सुनवाई करने के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की दिल्ली पुलिस को लेकर क्या प्रतिक्रिया थी ,याद है या भुल गये ।कोर्ट टिप्पणी करने के बजाय दिल्ली पुलिस के जिस अफसर ने निर्दोष लोगों को दंगा में जेल भेजा उस पुलिस अफसर को चिन्हित करके कार्रवाई क्यों नहीं किया जिस दिन कोर्ट ये करना शुरू कर दे स्थिति पूरी तरह से बदल जायेंगी ।

जय भीम फिल्म इन दिनों काफी चर्चा में है वकील ने जिस स्वतंत्र विटनेस (गवाह)को कोर्ट में खड़ा करके पूरे मुकदमे का चरित्र बदल दिया वो कभी कभी होता है फिर सूर्या जैसा वकील भी होना चाहिए ।

कोर्ट में न्याय कैसे मिलता है इससे आप परिचित नहीं है अभी भी देश की 95 प्रतिशत आबादी कोर्ट कचहरी से बाहर है जो कोर्ट के चक्कर में पड़ा है जरा उनसे पूछिए न्याय का क्या मतलब है इस देश में सबसे ज्यादा दबाव में पुलिस है उसका इस्तेमाल सरकार भी करती है और कोर्ट भी करता है और पीसती जनता है इसलिए इस घटना को लेकर समग्र तरीके से सोचने कि जरूरत है

क्यों कि जो पुलिस वाले जनता के साथ खड़ी होती है उसके साथ ना तो सरकार खड़ी रहती है और ना ही कोर्ट हजारों ऐसे उदाहरण है फिर व्यवस्था तो ऐसे ही चलेंगी एक बार बिहार के पूर्व डीजीपी डीएन गौतम से बात हो रही थी मैंने उनसे पूछा सर आपके पूरे करियर किस तरह का पैरवी आपको सबसे ज्यादा परेशान किया उन्होंने कहा संतोष जी नेता बदनाम है, नेता पैरवी भी करते हैं तो कहते हैं गलती हो गया है जरा देख लीजिए या फिर गलत फंसाया गया है जरा देख लीजिए ।लेकिन हमारे सीनियर अधिकारी कहते हैं इसको बचाना है या फिर उसको फंसाना है सीधा आदेश ।

नेता की बात नहीं माने चलेगा लेकिन अधिकारी की बात नहीं माने नहीं चलेगा आपका कैरियर उसी दिन से दाऊ पर लगा जायेंगा।बात मधुबनी की करे तो यह तो अभी शुरुआत है बिहार में इस तरह की घटनाओं का प्रचलन नहीं रहा है इससे पहले भागलपुर में इस तरह की घटना घटी थी ।

लेकिन जिस तरीके से संस्थानों के बीच दूरियां बढ़ रही है आने वाले दिनों में इससे भी बड़ी घटनाएं घट जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्योंकि जिला में अधिकारियों के बीच आपसी रिश्ते इतने खराब रहते हैं कि आप सोच नहीं सकते हैं ।एसपी की डीएम से रिश्ता सही नहीं रहता है ,जज से प्रशासन ऐसी दूरी बना कर रखता है जैसे अछूत हो ।आज भी जिस जिले में डीएम ,एसपी और जिला जज के बीच बेहतर समन्वय है उस जिले में अपराध के साथ साथ पूरी व्यवस्था नियंत्रण में रहती है।

याद करिए यही पुलिस थी, यही कोर्ट था 6 दिन के अंदर बलात्कार जैसे अपराध में सजा दिया है।ऐसा कैसे हो गया हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से डीजीपी और मुख्य सचिव इसको लेकर मिलते थे बात होती थी बहस होता था फिर एक दिशा तय होती थी जो एसपी डीएम से थाने तक और जिला जज से लेकर लोअर जुडिसियर तक पहुंच जाता था ।

यही बिहार था ना जहां बड़े से बड़े अपराधी आर्म्स लेकर घूमना बंद कर दिया था लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है इसलिए सही समय आ गया है बदलाव नहीं हुआ तो फिर अराजकता के लिए तैयार रहिए कुछ दिन पहले सेना से भी इसी तरह की खबरे आयी थी जवान सेना के अधिकारी के घर में घुस कर मारपीट किया है। बाकी देख ही रहे हैं सीबीआई और ईडी के निदेशक का पद पांच वर्ष के लिए हो दिल्ली पुलिस का आयुक्त कि नियुक्ति के लिए क्या क्या किया गया है सीबीआई .ईडी जैसे विभाग किस तरीके से अपना भरोसा खोते जा रहा है ।

किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत अहिंसात्मक आंदोलन की जीत है

लगभग सालभर से चल रहे किसान -आंदोलन की मुख्य मांग सरकार ने मांन ली , तीनों कृषि कानूनों की वापसी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी जी ने की है ।

मोदी जी को साधुवाद । देर से ही सही वे और उनकी सरकार यह समझ पायी कि जिन कानूनों को वे किसान के हित मे समझते थे ,किसान अपने हित मे नही समझती है और वे ,उनकी सरकार और उनकी पार्टी (दुनिया की कथित सबसे बड़ी सदस्यता वाली पार्टी ) भारतीय जनता पार्टी की पूरी फौज किसानों को यह समझाने में नाकाम रही कि ,तीनो कृषि कानून किसानों के हित में है । इसलिए तीनो कृषि विल वापस लेने की सरकार की मजबूरी ,भारतीय जनता पार्टी की असफलता मानी जानी चाहिए क्योंकि पार्टी के नीतियों के अनुरूप बने विधेयक के फायदे ,जनता को बताने की जिम्मेवारी पार्टी की होती है ।

इसलिए पार्टी को आत्ममंथन करना चाहिए कि चूक कहाँ हुई ?
यहां यह जोर देना आवश्यक है कि भारतीय जनता पार्टी के उन सारे भाषणवीरों /प्रवक्ताओं/सोसालमीडिया के रणबांकुरे जो इस किसान आंदोलन के लिए क्या -क्या नही उद्गार व्यक्त किये …..के लिए मोदी जी का यह निर्णय एक जवाब है और मैसेज भी कि “अंध भक्ति ” का जो टैग आप पर लगा है वह विल्कुल सही है । पार्टी कार्यकर्ता के रूप में गांवों में किसानों के बीच जाएंगे नहीं ,उन्हें कानून के पक्ष के तर्क (जो वे खुद से जानते नही) समझाएँगे नही तो अंधभक्ति से पार्टी और सरकार चलने वाला नही ,मोदी जी को भी आपकी ऐसी “अंधभक्ति” की जरूरत नहीं । पार्टी और साकार नीतियों से चलती है ,नीतियां जनता के लिए फायदेमंद है यह जनता को बताने की जिम्मेवारी पार्टी कार्यकर्ता की है ,अगर आप ऐसे कार्यकर्ता नही तो ऐसे अंधभक्ति से आपका पार्टी में कोई भविष्य नही ,यही संदेश मोदी जी ने पार्टी को भी दिया है । आप अपना भविष्य देख लें ।ऐसे छोटे -बड़े अंधभक्तों के पर कतरने की शुरुआत आनेवाले दिनों में होने वाला है ।

“अहिंसात्मक आंदोलन “की जीत
से मेरा तात्पर्य यह है कि

अपने खुद के ७४छात्र आंदोलन (जेपी आंदोलन) से हमने यही सिखा था कि हमारा आंदोलन जितना ही अहिंसात्मक होगा जनता की भागीदारी उतनीही बढ़ेगी ,आंदोलन के मांगों के प्रति जागरूकता उनकी उतनी ही बढ़ेगी ,आंदोलन के कामयाब होने संभावना उतनी ही बढ़ेगी । अहिंसात्मक आंदोलन में भी अनेक रूपों में कष्ट भोगने होते है ,पुलिश की लाठियां खानी होती है ,जेल जाने होते है और शहादत भी देने होते हैं ।सरकार /सत्ता-प्रतिष्ठान आंदोलन हिंसात्मक हो जाए इसकी भरपूर कोशिश करेगी और आंदोलनकारी अगर सरकार के झांसे में आ गयी और थोड़ी भी हिंसा की तो सरकार खुद बड़ी हिंसा करेगी बिभिन्न दंडात्मक करवाई कर आंदोलन को कुचल देगी। आज़ादी के पूर्व और आज़ादी के बाद भी हिंसक आंदोलनों के नतीजे हमारे सामने है।

किसान आंदोलन शुरू से गैर राजनैतिक रहा ,राजनैतिक दल के नेताओं से दुरियां बना कर रखा , किसी भी राजनैतिक दल के नेता को अपने मंच का इस्तेमाल नही करने दिया ।

किसान संगठनों के सामूहिक नेतृत्त्व से संचालित रहा , अहिंसात्मक रहा,ढेर सारे (लगभग चालीस)किसान संगठनों के नेताओं का सामूहिक नेतृत्त्व टिकाऊ रहा यह अपनेआप में महत्त्वपूर्ण था आपसी वर्चस्व की लड़ाई की कोई खबर नही ,सामूहिक निर्णय पर सब की एक ही भाषा रही वो भी तब जब इनके पास गांधी/जेपी/अन्ना हज़ारे और चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत (किसान नेता ) जैसा बड़ा नाम आंदोलन के नेतृत्त्व करने को नही था ।

फिर भी कोई बस नही जलाए गए , कोई सरकारी प्रतिष्ठान या संस्थान लुटे नहीं गए /जलाए नही गए ,किसी व्यापारिक प्रतिष्ठान को कोई क्षति नही पहुंचाई गई ।ठंढ में गर्मी में धरने पर बैठे रहे ,कुर्वानी देते रहे लगभग ७००किसानों ने शहादत दी ।
सभी तरह के उकसावे और भड़कावे के बावजूद अपना धैर्य बनाए रखा ,हिंसा पर उतारू नही हुए/हिंसा नही की । इसलिए किसानों की भागीदारी बढ़ती गयी ,पंजाब/हरियाणा से आगे बढ़कर किसान आन्दोलन पुरे देश के किसानों का आंदोलन बन गया । आंदोलन तोड़ने के सरकारी/गैर सरकारी प्रयास निष्फल हुए ।इन सभी अर्थों में यह आंदोलन और इसका नेतृत्त्व इतिहास बना गया जो भविष्य के जन आंदोलनों के लिए मील का पत्थर साबित होगा ।

अंततः किसानआ आंदोलन की जीत हुई ,शहादत देनेवाले किसान भाइयों को नमन पूर्वक श्रद्धांजलि और सभी किसान भाइयों को बधाई ।

हम अपने प्रधानमंत्री ” मोदी “जी से ही उम्मीद बांध रहे हैं कि एमएसपी( न्यूनतम समर्थन मूल्य ) पर खरीद की गारंटी वाला कानून भी बनाकर लागू कर दें । बिहार के संदर्भ में इसके व्यापक लाभ हमे समझना होगा ……..
हमें उचित मूल्य मिलेंगे ,हम खेतिहर मजदूर को उचित और सम्मानपूर्वक मजदूर दे पाएंगे ,उनका पलायन( माइग्रेसन) रुकेगा ,हमारी उपज बढ़ेगी ,हमारी आमदनी बढ़ेगी ,हम खेती दिल से करेंगे । हमारी पूंजी बनेगी तो खेती से जुड़ा उद्योग खड़ा कर पाएंगे । रोजगार के अवसर पैदा कर सकेंगे ।

खेती में बचत नही है या खेती में फायदा नही है यह बिहार के हर घर की कहानी है ,उन्हें खेती करने की दिशा में जाने नही देना है यह हमारी सोच बन गयी है। परिवार के जो बच्चे पढ़ने में अच्छा नही कर रहे हैं उनपर भी हम अपनी जमीन -जायदाद बेचकर ( अगर सरकारी नौकरी में हैं तो भ्रष्टाचार में शामिल होकर) लाखों खर्च कर ,बाहर कोचिंग करवा रहे हैं ,इंजिनीरिंग /मेडिकल में डोनेशन देकर नामांकन करवा रहे हैं या फिर घुस देकर किसी सरकारी नौकरी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं और इन सब जगह लूट के शिकार हो रहे हैं । अंचल कार्यालय से लेकर सचिवालय तक भ्रस्टाचार का बोलबाला इसलिए भी है कि हमारा बच्चा खेती नही करेगा (इसलिए घुस लेना उनकी मजबूरी है) भले ही हमारे पास कितनी भी जमीन हो ।यह सिर्फ इसलिए कि खेती से गुजारा नही होगा । हमारे पूर्वजों का “उत्तम खेती “वाला सूत्र अब “निकृष्ट खेती “वाला सूत्र बनगया है । ऐसे ही बच्चे अपने लाइफ स्टाइल को बनाए रखने के लिए सभी तरह के क्राइम में संलिप्त हो रहे हैं । देश के लिए समस्या बन रहे हैं ।

हमे खेती को लाभकारी बनाकर इन सब समस्याओं से निदान पाने के दिशा में सोचना चाहिए । अभी एमएसपी देंगे तो ऐसे लोग खेती के तरफ आएंगे ,खुदका रोजगार पाएंगे ही अनेकों को रोजगार देंगे ।

लेखक –फूलेन्द्र कुमार सिंह पेशे से इंजीनियर रहे हैं

नक्सली के भारत बंद का रेलवे सेवा पर पड़ा असर कई ट्रेने रद्द कई का रुट बदला गया ।

भाकपा माओवादियों द्वारा बुलाये गये भारत बंद का झारखंड में असर देखने को मिल रहा है कई इलाकों में नक्सलियों ने रेलवे ट्रेक को नुकसान पहुंचाया है जो खबर आ रही उसके अनुसार देर रात नक्सलियों ने —

चक्रधरपुर रेल मंडल के अंतर्गत लोटा पहाड़ और सोनुआ स्टेशन के बीच माओवादी नक्सलियों ने रेल पटरी उड़ाने की कोशिश की। रेल पटरी नहीं उड़ पाई लेकिन कंक्रीट स्लीपर डैमेज हो गए । मरम्मत कार्य जारी है जिसके कारण मुंबई हावड़ा रूट पर ट्रेनों का परिचालन बाधित हो गया है वही नक्सलियों ने लातेहार और टोरी स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक को उड़ा दिया है बम ब्लास्ट के कारण रेलवे का ट्रॉली क्षतिग्रस्त हो गया है ।

नक्सलियों के भारत बंद का रेलवे सेवा पर पड़ा असर

रेलवे ट्रेक के नुकसान होने से रेलवे सेवा पर प्रभाव पड़ा है और कई ट्रनों का मार्ग बदल दिया गया है या फिर रद्द कर दिया है रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट के कारण कई ट्रेन का रूट डाइवर्ट,18636 सासाराम-रांची और 08310 जम्मू तवी एक्स. डाइवर्ट भाया गया-कोडरमा-मुरी होकर चलेगी वही रेलवे ने 2 ट्रेन के परिचालन को आज के लिए किया रद्द कर दिया है

03364 डिहरी ऑन सोन – बरवाडीह स्पेशल रदद्
03362 बरवाडीह- नेसुबोगोमो स्पेशल ट्रेन भी कैंसिल।

भाकपा माओवादियों ने अपने केन्द्रीय कमेटी के सदस्य प्रशांत बोस और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के विरोध में आज भारत बंद का एलान किया है ।

धनबाद मंडल के टोरी-लातेहार रेलखंड पर रेलवे ट्रैक पर बम विस्फोट, परिचालन बाधित

धनबाद मंडल के टोरी-लातेहार रेलखंड पर रिचुगुटा-डेमू स्टेशनों के बीच किमी 206/25-27 के बीच रात्रि लगभग 12.50 बजे अप एवं डाउन लाइन पर तथाकथित बम विस्फोट के कारण रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया । इस घटना की जाँच की जा रही है।

🔸अप एवं डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन बाधित है जिसके कारण यात्री सुरक्षा एवं संरक्षा के दृष्टिकोण से इस रेलखंड से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है ।

🔸 02 पैसेंजर ट्रेन का परिचालन रद्द किया गया है तथा कुछ ट्रेनें परिवर्तित मार्ग से चलायी जा रही हैं ।

🔸बरकाकाना से दुर्घटना राहत यान घटना स्थल पहुंच चुकी है ।

🔸परिचालन की पुनर्बहाली हेतु युद्धस्तर पर कार्य जारी है ।

🔸घटनास्थल पर धनबाद मंडल के उच्चाधिकारी, रेल सुरक्षा बल, स्थानीय पुलिस पहुंच चुकी हैं ।

(राजेश कुमार)
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी

मधुबनी जज हमला मामले में पुलिस ने जज पर लगाया गंभीर आरोप

मधुबनी – झंझारपुर व्यवहार न्यायालय के ADJ अविनाश कुमार पर जानलेवा हमला करने वाले दोनों पुलिसकर्मियों ने दरभंगा पुलिस के सामने अपना फर्द बयान दर्ज कराया है। दोनों ही पुलिसकर्मी दरभंगा DMCH में भर्ती हैं। अपने बयान में घोघरडीहा थानाध्यक्ष गोपाल कृष्ण ने ADJ अविनाश कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पहले अभद्र टिप्पणी की थी। कई मामलों में आरोपित व्यक्ति को ‘सर’ कहकर संबोधित करने का निर्देश दिया था। ऐसा नहीं करने पर मुझे जूते से मारा और फिर मौजूद कर्मियों को निर्देश दिया कि मेरे गले में रस्सी लगाकर टांग दिया जाए।

पुलिस एसोसिएशन ने निष्पक्ष जाँच की मांग

गोपाल कृष्ण के बयान के अनुसार, ‘ झंझारपुर व्यवहार न्यायालय के कर्मी अवकाश मिश्रा ने 17 नवंबर को मुझे कॉल कर कहा कि आपके विरुद्ध विधिक सेवा प्राधिकार में दीपक राज नाम के व्यक्ति ने शिकायत की है। इसपर सुनवाई के लिए उपस्थित होना है। मुझे शराब के खिलाफ कार्रवाई में जाना था, इसलिए मैंने अगले दिन का समय मांगा। पूरी कार्रवाई में देर होने की वजह से अगले दिन 18 नवंबर को निर्धारित 11 बजे की बजाय दोपहर दो बजे के करीब न्यायालय पहुंचा। वहां अपने साथ गए SI अभिमन्यु कुमार शर्मा को जज के केबिन के बाहर छोड़कर अंदर गया तो उन्होंने (ADJ अविनाश कुमार) सीधे कहा कि तुमको टांग देंगे।

फिर मुझे वहां मौजूद एक इंजीनियर दीपक राज को ‘सर’ कहकर संबोधित करने को कहा। उनपर कई थानों में कई मामले लंबित हैं। जज ने कहा कि इनसे कई काम करवाना है। तुम बहुत मगरूर हो गए हो। मुझसे डरते क्यों नहीं हो, तुमको जूता से मारेंगे। इसपर मैंने उन्हें कहा कि आप माननीय जज हैं, कृप्या गाली न दें। तब उनके इशारे पर वहां मौजूद दीपक राज, अवकाश मिश्रा आदि लोगों ने मुझे पकड़ लिया और मारने लगे।

मधुबनी जज पिटाई मामला घायल पुलिसकर्मियों को DMCH में भर्ती कराया गया ।

इसी बीच 15-20 वकील और अंदर आ गए। सभी मुझसे मारपीट करने लगे। इतना होने पर बाहर खड़े SI अभिमन्यु कुमार शर्मा जब जज के केबिन में आए तो उनके साथ भी मारपीट की गई। भीड़ ने अभिमन्यु से उनका सर्विस पिस्टल छीन लिया। मुझे जान से मारने की कोशिश की तो मैंने किसी तरह कमरे में बने टॉयलेट में छिपकर अपनी जान बचाई। बाद में जब स्थानीय पुलिस के लोग पहुंचे तो मुझे सुरक्षा के साथ बाहर निकाला गया। इस दौरान मैंने देखा कि अभिमन्यु कुमार शर्मा घायल हैं और उनके मुंह और सिर से खून निकल रहा है।

जज के चेम्बर एवं न्यायालय परिसर में लगे CCTV कैमरे की बिना छेड़छाड किए जाँच हो।
पीड़ित थाना अध्यक्ष अपने अध्यक्ष से बोले की वे पूरी घटना पर पॉलीग्राफ़ मशीन ( झूठ पकड़ने वाली मशीन ) से जाँच कराने के लिए तैयार है। ताकि इससे भी सत्य सामने आ सकता है।— मृत्युंजय कु सिंह

पीड़ित घायल थानाध्यक्ष गोपाल कृष्ण से प्रदेश अध्यक्ष मृत्युंजय कु सिंह फ़ोन से बात कर सारी जानकारी लिए।बात करते समय पीड़ित दरोग़ा रोने लगा और घटना की जानकारी दिया। एसोसिएशन के महामंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष पीड़ित थानाध्यक्ष से मुलाक़ात किए। न्यायालय आस्था और न्याय का मंदिर है।न्यायालय का सभी पुलिस वाले सम्मान करते है और हर न्यायोचित आदेश का पालन करते है और करते रहेंगे।झंझारपुर में घटित पूरी घटना की निष्पक्ष जाँच की माँग बिहार पुलिस एसोसिएशन करता है–मृत्युंजय कु सिंह

बालू माफिया से सांठगांठ के आरोप में ईओयू ने कोइलवर के तत्कालीन अंचलाधिकारी अनुज कुमार के ठीकाने पर मारा छापा आय से अधिक सम्पत्ति का हुआ खुलासा।

पटना । बालू माफियाओं से सांठगांठ कर अकूत संपत्ति अर्जित करने के मामले में आज निलंबित भोजपुर के कोइलवर के तत्कालीन अंचलाधिकारी अनुज कुमार के पटना स्थित आवास, नवादा स्थित पैतृक आवास और गया स्थित ससुराल में एक साथ छापेमारी की गयी है। ईओयू की टीम इस छापेमारी में सुबह से ही लगी हुई थी । तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है साथ ही अनुज कुमार के द्वारा अर्जित अन्य परिसंपत्तियों की भी जांच की जा रही है। आर्थिक अपराध इकाई को इस बात की भी आशंका है कि आज की छापेमारी में अनुज कुमार के ठिकानों से नगद और अन्य सामान नहीं पाया जाना यह दर्शाता है कि बालू माफियाओं से अवैध परिसंपत्तियों को हटाया गया है और इस पर अनुसंधान चल रहा है। अनुज कुमार के द्वारा अर्जित परिसंपत्तियों इनके वास्तविक आय से लगभग 52% अधिक पाया गया है।

कृषि कानून वापस लेने का फैसला अन्नदाता का दिल जीतने वाला सुशील कुमार मोदी

कृषि कानून वापस लेने का फैसला अन्नदाता का दिल जीतने वाला

  • सुशील कुमार मोदी
  • प्रधानमंत्री के बड़प्पन ने उन्हें स्टेट्समैन बनाया
  • विपक्ष इसे हार-जीत के
    क्षुद्र नजरिये से न देखे
  • दिल्ली में बिना शर्त धरना
    समाप्त कर घर लौटें किसान
  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब,हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों के एक वर्ग की भावना का सम्मान करते हुए संसद से पारित कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर बड़प्पन दिखाया।
    यह गुरु परब पर सद्भाव का प्रकाश फैलाने वाला ऐसा निर्णय है, जो प्रधानमंत्री मोदी को चुनावी राजनीति से ऊपर उठता हुआ कद्दावर स्टेट्समैन सिद्ध करता है।
    इस ऐतिहासिक पहल को किसी की जीत-हार के रूप में लेने की क्षुद्रता नहीं होनी चाहिए।
  2. हालांकि तीनों कृषि कानून किसानों के हित में थे, सरकार किसान प्रतिनिधियों से 11 चक्र में बातचीत कर इसमें और सुधार करने पर सहमत थी और सुप्रीम कोर्ट ने इनके क्रियान्वयन को स्थगित भी कर दिया था, फिर भी इन कानूनों को एक झटके में वापस लेना राजनीतिक नफा-नुकासान, दलगत मान-अपमान और तर्क-वितर्क से ऊपर उठकर अन्नदाता का दिल जीतने वाला निष्कपट कदम है।
    अब आंदोलनकारियों को अपना हठ छोड़कर बिनाशर्त धरना समाप्त कर घर लौटना चाहिए।

यौन हिंसा पुरुष का सबसे डार्क स्पेस, इसके प्रति समाज की सामुहिक जिम्मेदारी है।

मेरी नजर में , पुरुष का होना

पुरूष के संदर्भ मे, जब मै किसी पुरुष को इंसान से आगे बढकर पुरुष समझकर देखुँ तो मुझे पौरुष के दर्प से भरे हुए पुरूष ही अच्छे लगते हैं।

पौरुष के दर्प से भरे हुए पुरूष का अर्थ ‘अमरीश पुरी या गुलशन ग्रोवर’ नहीं है… पोपुलर अर्थ में कहूँ तो ‘ बाहुबली’ टाइप। पौराणिक अर्थ में कहूँ तो ‘ आदियोगी शिव’ जैसा। जिसके साथ कैलाश के दुरूह शिखर पर भी जीवन आसान लगे ।

मेरे लिए इस बात का कोई महत्व नहीं है कि मेरा भाई, दोस्त, प्रेमी, पति, खाना बनाने मे मेरी मदद करता है कि नहीं, कपड़े धोता- सुखाता है कि नहीं, पोंछा लगाता है कि नहीं.. …हाँ, उसका होना मुझे कितना ‘अभय ‘ बनाता है, ये महत्वपूर्ण है। वो साथ रहे तो मै इस ब्रह्मांड मे डर के अस्तित्व को भूल जाऊँ ।

पुरुषवाद ने स्त्रियों से माॅडेस्टी छीन ली, उनकी उड़ान को कुंद कर दिया। उसकी कीमत समाज ने चुकायी और चुका रहा है।

उसी तरह, नारीवाद के नाम पर पुरूष से उसका पौरूष मत छीनिए। पुरूष से डरी हुई स्त्री और स्त्री से डरा हुआ पुरूष , दोनो ही समस्या है ।

यौन हिंसा पुरूष का सबसे डार्क स्पेस है, इस पर बचपन से ही काम किए जाने की जरूरत है । इसके प्रति समाज की सामुहिक ज़िम्मेदारी है । अध्ययन मे पाया गया है कि क्राॅनिक यौन अपराधी का बचपन, किसी न किसी वज़ह से माँ के स्नेह से वंचित रहा है या तो खुद शोषण का शिकार रहा है ।

तो पुरूष पोंछा लगाता है कि नहीं, सब्जी काटता है कि नहीं इससे ज्यादा जरूरी है कि, वो स्त्री को स्नेह और उसका सम्मान करे। उसे समझना चाहिए कि स्त्री को उसके सर्वोत्तम स्वरूप में प्यार – सम्मान और स्नेह से ही पाया जा सकता है।

स्त्री को भी ये समझना चाहिए की पुरूष भी उसका ही हिस्सा है , अलग स्वरूप । जब भी कोई पुरूष कटता है, मरता है, अपमानित होता है , तो साथ- साथ उसको जन्म देने वाली माँ भी उतना ही मरती है ।

प्रतियोगी के रूप मे पुरुष हमेशा क्रूर होता है , ये आदिम वृत्ति है , जब वो शिकारी था ।उसने हत्याएँ की , जंगल जलाएँ …!!! स्त्री और उसके बच्चे के लिए घर बनाये । फिर उसने दुसरे पुरूषों से लड़कर विजेता बन स्त्री और उसके बच्चे पर अपनी प्रभुता स्थापित की । अब वो निश्चिंत हुआ ,स्त्री का सहचर बना तो उसमे सौंदर्य और स्नेह जैसे मृदुभाव विकसित हुए।

समग्र कलाओं का विकास पुरूष ने किया , परन्तु उसका केन्द्र बिन्दु स्त्री रही है क्योंकि वो स्त्री के बिना युद्ध कर सकता है , संवेदनाएं नही जगा सकता । घर – परिवार बसाते हुए , कलाकार के रूप मे उसे अपने आदिम शिकार वृति के ह्यस का मलाल और असुरक्षा का एहसास रहा होगा तभी वो धर्म व्यवस्था मे पुरूषों को स्त्रियों से दुर रहने कि , उसे नकारने कि , उसे तुच्छ समझने की आह्वान करता है ।

पुरषों ने हमेशा अपना नायक एक युद्ध विजेता को चुना। कोई गायक , कोई नर्तक , कोई मूर्तिकार , कोई पेन्टर , कोई लेखक को पुरूषों ने कभी अपना नायक नही चुना ।

पुरुष प्रतियोगी बनकर टक्कर ही क्यों देना। पुरूष का दर्द भी आखिर एक स्त्री को ही सोखना है। स्त्री अपना दर्द धारण कर लेती है, पुरूष अपना दर्द धारण नहीं करता, वो सर्कुलेट करेगा जिसे अन्तत: किसी स्त्री में ही पनाह मिलना होता है।

लेखक —अनुमेहा पंडित

कृषि कानून, जातीय जनगणना और शराबबंदी पर खुलकर बोले नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नई दिल्ली प्रवास से वापसी के पश्चात् पटना हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत की। प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने के संबंध में पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून बनाये थे। यह केंद्र सरकार का निर्णय था ।

आज प्रधानमंत्री जी ने खुद ही अगले सत्र में इसे वापस लेने की घोषणा कर दी है। उन्होंने बहुत ही स्पष्टता के साथ अपनी बातें रख दी हैं। प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि उन्होंने किसानों के हित में ये तीनों कृषि कानून परित किये थे लेकिन लोगों को इस संबंध में समझा नहीं पाए। इसलिए इस

कृषि कानून की वापसी पर नीतीश का तंज

कानून को वापस लिया जा रहा है। इसमें कुछ ख़ास बोलने का कोई औचित्य नहीं है। उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में होने वाले चुनाव के मद्देनजर तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बारे में कौन, क्या बोलता है मालूम नहीं। सब अपनी-अपनी बातें बोलते रहते हैं लेकिन आज तीनों कृषि कानूनों के बारे में प्रधानमंत्री जी ने स्वयं अपनी बातें रख दी हैं। सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। विपक्ष को भी अपनी बातें रखने का अधिकार है।

दिल्ली में श्री लालू प्रसाद यादव के जातीय जनगणना के वक्तव्य पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने क्या कहा हमें मालूम नहीं है। उनसे अभी हमारी कोई बातचीत नहीं होती है। जातीय जनगणना को लेकर उनकी पार्टी के नेता और उनके पुत्र श्री तेजस्वी यादव समेत अन्य दूसरे लोगों ने हमसे मुलाकात की थी।

प्रधानमंत्री जी से भी हमलोगों ने इस मुद्दे पर मुलाकात की थी। जातीय जनगणना के मुद्दे पर केन्द्र ने निर्णय स्पष्ट कर दिया है। उसके बाद हमलोगों ने भी बहुत साफ साफ कह दिया है कि आपस में हम सब बैठक कर इस पर निर्णय लेंगे। श्री तेजस्वी यादव ने जो चिट्ठी लिखी थी, वह उनकी पार्टी की तरफ से आया हुआ है और वह चिट्ठी रखी हुई है। हम सब एक साथ सर्वसम्मति से इस पर निर्णय लेंगे।

बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लेकर पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग मेरे इस फैसले के खिलाफ हैं और धंधेबाज चाहते हैं कि शराबबंदी कानून विफल हो जाए। हम तो प्रारंभ से ही कहते रहे हैं कि हर आदमी एक विचार का होगा, यह संभव नही । मनुष्य का जो स्वभाव होता है, यह सभी को मालूम हमलोग यह मानकर चलते हैं कि कुछ लोग मेरे खिलाफ रहेंगे। इसके लिए पूरा का पूरा प्रयास करना चाहिए, सबको समझाना चाहिए।

शराबबंदी कानून के वापसी का सवाल ही पैदा नहीं होता है ।

गड़बड़ी करने वालों पर कानून के मुताबिक एक्शन होना चाहिए। हमलोगों ने सात घंटे तक बैठक कर एक-एक चीजों पर चर्चा की। हमलोगों ने शुरूआती दौर में इसके लिए जो नियम-कानून बनाये हैं इसके अलावा लगातार अभियान भी चलाते रहे हैं। हमलोगों ने अलग-अलग समय पर नौ बार इसकी समीक्षा भी की है और जितनी बातें कही गयीं उन सब चीजों पर चर्चा की गयी। इसके बारे में हमने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पूरे तौर पर आप काम करिए। लॉ एंड आर्डर और अपराध के खिलाफ जैसी कार्रवाई होती है उसी तरह इसपर भी पूरी सक्रियता के साथ कार्रवाई करनी है। इसके लिए फिर से व्यापक अभियान चलाएंगे।

मधुमेह की रोकथाम को लेकर सूबे में मरीजो की हो रही स्वास्थ्य जांचः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग मधुमेह (डायबटीज) की रोकथाम के लिए सतत प्रयत्नशील है। मधुमेह रोगियों को उचित इलाज की सुविधा प्रदान हो और उन्हें मुफ्त सलाह दी जाए। स्वास्थ्य विभाग 14 नवंबर से सभी सरकारी अस्पतालों (एनसीडी क्लिनिक एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर समेत) में मुफ्त जांच सह चिकित्सा परामर्श शिविर लगा रहा है, जो 21 नवंबर तक चलेगा।

श्री पांडेय ने कहा कि मुफ्त जांच सह चिकित्सा परामर्श शिविर में अपने ड्रेस कोड में उपस्थित चिकित्सा दल के द्वारा मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि की स्क्रीनिंग कराकर आवश्यक औषधियां उपलब्ध करवाई जा रही है। इनसे बचाव के उपायों के साथ ही खान-पान संबंधित उचित सलाह दी जा रही है। शिविर के आयोजन के लिए निर्धारित तिथि के पूर्व से ही प्रभात फेरी, जागरुकता रैली, हैंडबिल वितरण, पोस्टर बैनर, माइकिंग की व्यवस्था की गयी थी।

जिलों के सभी अस्पताल परिसर में जीविका के कार्यालय पर एवं शहर के 10 अन्य उपयुक्त स्थलों पर मधुमेह से संबंधित होर्डिंग की व्यवस्था भी की गयी। इस दौरान मधुमेह होने से पूर्व की रोकथाम के उपाय व उनके कारणों व बचाव को प्रमुखता से बताया जा रहा है।

 श्री पांडेय ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम से लोगों में इस बीमारी से सतर्क किया जा रहा है। हर जगह चिकित्सों की टीम लोगों को बीमारी से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा उपाय बता रही है। उन्होंने कहा कि मधुमेह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। सही खान-पान, व्यायाम एवं उचित किकित्सकीय सलाह से इससे बचा सकता है।

कृषि कानूनों पर माफी मांगी जाने पर आंदोलनकारी किसान ने कहा MSP लागू होने तक आन्दोलन जारी रहेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन तीन कृषि कानूनों पर माफी मांगी है, जिन पर सरकार एक साल से अधिक समय तक किसानों को उन्हें स्वीकार करने के लिए “समझाने में विफल” रही।

पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं देश की जनता से सच्चे और नेक दिल से माफी मांगता हूं। हम किसानों को नहीं समझा पाए। हमारे प्रयासों में कुछ कमी रही होगी कि हम कुछ किसानों को मना नहीं पाए।

पीएम मोदी ने कृषि कानून वापस लेने की घोषणा


पीएम मोदी की इस घोषणा के साथ ही सिंघु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने जश्न मनाया है। किसान नेताओं का कहना है कि वे प्रधानमंत्री के बयान को अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं। हालांकि किसान आंदोलन समाप्त करने की घोषणा अभी नहीं की गई है।

किसान आंदोलन की अगुआई कर रहे राकेश टिकैत का कहना है कि एक साल बाद में सरकार की समझ में किसान शब्द आया है, हम इसे अपनी जीत मान रहे हैं। सरकार से बातचीत का रास्ता खुला है। सरकार जब संसद में कानून लेकर जाएगी, वहां क्या होगा, ये मायने रखता है। MSP हमारा मुद्दा है। सरकार MSP गारंटी कानून लेकर आए। जब तक सभी मुद्दों पर समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

वही इसको लेकर बिहार में भी सियासत चरम पर है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीनों कृषि बिल केंद्र सरकार द्वारा वापस लिए जाने पर कहा कि केंद्र सरकार का निर्णय पहले जो था वह भी केंद्र सरकार का निर्णय था अब उन्होंने जो निर्णय लिया वह भी केंद्र सरकार का निर्णय था इसलिए इस पर बहुत ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।

कृषि कानून के रद्द होने पर नीतीश ने पीएम मोदी पर फोड़ा ठीकरा

वही लालू प्रसाद ने कहा कि विश्व के सबसे लंबे,शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक किसान सत्याग्रह के सफल होने पर बधाई।पूँजीपरस्त अहंकारी सरकार व उसके मंत्रियों ने किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी, आढ़तिए, मुट्ठीभर लोग, देशद्रोही इत्यादि कहकर देश की एकता और सौहार्द को खंड-खंड कर बहुसंख्यक श्रमशील आबादी में एक अविश्वास पैदा किया।देश संयम, शालीनता और सहिष्णुता के साथ-साथ विवेकपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी निर्णयों से चलता है ना कि पहलवानी से बहुमत में अहंकार नहीं बल्कि विनम्रता होनी चाहिए।

राजद सासंद ने कृषि कानून के वापसी पर पीएम मोदी को लिया आड़े हाथ

तेजस्वी यादव ने कहा कि यह किसान की जीत है, देश की जीत है। यह पूँजीपतियों, उनके रखवालों, नीतीश-भाजपा सरकार और उनके अंहकार की हार है।विश्व के सबसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक किसान आंदोलन ने पूँजीपरस्त सरकार को झुकने पर मजबूर किया।आंदोलनजीवियों ने दिखाया कि एकता में शक्ति है। यह सबों की सामूहिक जीत है। बिहार और देश में व्याप्त बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण के ख़िलाफ हमारी जंग जारी रहेगी।भाजपाई उपचुनाव हारे तो इन्होंने पेट्रोल-डीज़ल पर दिखावटी ही सही लेकिन थोड़ा सा टैक्स कम किया।

कृषि बिल वापस लेने पर कांग्रेस नेता ने भी मोदी को लिया आड़े हाथ

उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड,पंजाब की हार के डर से तीनों काले कृषि क़ानून वापस लेने पड़ रहे है।विगत वर्ष 26 नवंबर से किसान आंदोलनरत थे। बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों के तुरंत पश्चात किसानहित में हम किसानों के समर्थन में सड़कों पर थे।इसी दिन किसान विरोधी नीतीश-भाजपा ने गाँधी मैदान में इन कृषि कानूनों का विरोध एवं किसानों का समर्थन करने पर मुझ सहित हमारे अनेक वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किया।अंततः सत्य और किसानों की जीत हुई।

मधुबनी की घटना दो संवैधानिक संस्थानों के बीच अहंकार का नतीजा है

जब दो संवैधानिक संस्था आपस में आमने सामने हो तो मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है ऐसे में रिपोर्टिंग करने में थोड़ी सावधानी बरतने की जरुरत है ।मधुबनी की घटना कुछ ऐसा ही है दोनों संस्थान अपने अंहकार में संस्थान के मर्यादाओं को तार तार करने में लगे हैं।

जज साहब ने जो लिख कर दिया उसके अनुसार पुलिस पर कार्रवाई हो गयी है दोनों पुलिस वाले जेल चले गये हैं, हाईकोर्ट जिनकी भूमिका अभिभावक की है क्यों कि पुलिस भी न्याय प्रणाली का ही हिस्सा है इसलिए हाईकोर्ट इस मामले में दोनों पक्ष को सूनने के बाद ऐसा निर्णय ले जिससे कि आगे इस तरह की घटनाए ना घटे

क्यों कि जिस जज के कार्यशैली को गलत मानते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें न्यायिक काम काज से अलग कर दिया था, उस जज के आरोप की पहले जांच होनी चाहिए थी क्यों कि जज साहब ने जो लिखित शिकायत किये हैं उसमें विवाद की जो वजह बताया है कि 16.11.21 को मुझे घोघरडीहा थानाध्यक्ष के खिलाफ घोघरडीहा प्रखंड की भोलीराही निवासी उषा देवी ने मुझे बीते मंगलवार को एक आवेदन दिया। जिसमें पीड़ित ने बताया था कि घोघरडीहा के थानाध्यक्ष ने उसके पति, ननद, वृद्ध सास व ससुर को झूठे मुकदमे में फंसा दिया गया है। साथ ही, पति के साथ दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत की।

शिकायत मिलने के बाद मैंने सत्यता जानने के लिए 16.11.21 को ही थानाध्यक्ष को पक्ष रखने की सूचना फोन पर दी। लेकिन, थानाध्यक्ष आने से टालमटोल करते रहे। इसके बाद थानाध्यक्ष को गुरुवार को 11 बजे आने का समय दिया गया। थानाध्यक्ष निर्धारित समय पर न आकर दोपहर 2 बजे मेरे चैंबर में पहुंचे। चैंबर में प्रवेश करते ही थानाध्यक्ष ऊंची आवाज में बात करने लगा। जब हमने शांति से बात करने को कहा तो उसने कहा कि हम इसी अंदाज में बात करेंगे। क्योंकि यही मेरा अंदाज है। इसी बीच थानाध्यक्ष ने गाली-गलौज शुरू करते हुए कहा कि तुम मेरे बॉस (एसपी साहब) को नोटिस देकर कोर्ट बुलाते हो।आज तुम्हारी औकात बता देता हूं।

जज साहब को हाईकोर्ट ने उनके अटपटे फैसले की वजह से न्याययिक कार्य से अलग कर दिया है तो जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार मधुबनी जिला जज ने लोकअदालत से जुड़े कार्यों को देखने का उन्हें जिम्मा दिया है ,ऐसे में किसी महिला द्वारा दिये गये आवेदन के आलोक में थाना अध्यक्ष को फोन करके बुलाने का अधिकार इनको किस न्याययिक अधिकार के तहत मिल गया ,इसका जबाव तो देना पड़ेगा ना क्यों कि यह खुद आवेदन में लिख रहे हैं कि बार बार बुलाने के बावजूद थाना प्रभारी उनके कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे थे ।

किसी भी मामले में कोर्ट को लगता है कि थाना अध्यक्ष को कोर्ट में पेश होना चाहिए तो इसके लिए एक वैधानिक प्रावधान बना हुआ है कोर्ट एसपी को लिखता है अगर एसपी थाना अध्यक्ष को कोर्ट में उपस्थिति होने का निर्देश नहीं देता है तो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डीजीपी कार्यालय में गठित सेल को सूचना देना है जिसका काम ही यही है कि अगर कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हो रहा है तो उनका अनुपालन सुनिश्चित कराये ऐसे में जज सहाब जिस तरीके से अधिकारियों को बार बार कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश जारी कर रहे थे यह अधिकार उनको है क्या ।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का इसको लेकर स्पष्ट आदेश है फिर जज साहब लगातार उस आदेश को नजरअंदाज क्यों कर रहे थे कई ऐसे सवाल है जो जज साहब के प्राथमिकी से ही स्पष्ट हो रहा है एसपी को क्यों वो बार बार कोर्ट में बुला रहे थे उनको एसपी को कोर्ट में बुलाने का कोई वाजिब वजह था क्या उनको तो अधिकार भी नहीं है ऐसे कई सवाल है जिस पर पूरी जुडिशरी को सोचना चाहिए बस यह कि हम सुप्रीम है इससे दोनों संस्थानों के बीच तनाव बढ़ेगा ।

कोरोना की वजह से इस बार भी सोनपुर मेला का आयोजन नहीं होगा

हरिहरक्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा
आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन एक माह तक चलने वाले बिहार के विश्वप्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र मेले या सोनपुर मेले की शुरुआत होती है। हालांकि कोविड के चलते सरकार द्वारा इस साल भी मेले की अनुमति नहीं दी गई है, मगर कोविड प्रोटोकॉल के तहत यहां श्रद्धालुओं को गंगा और गंडक नदियों में स्नान और हरिहरनाथ मंदिर में पूजा करने की अनुमति है। फलतः नदियों के किनारे और हरिहरनाथ मंदिर में जुटी साधु-संतों और आम श्रद्धालुओं की भीड़ ने यहां मेले जैसा दृश्य तो उपस्थित कर ही दिया है।

इस मेले के पीछे की पौराणिक कथा यह है कि प्राचीन काल में यहां गंडक के तट पर गज और ग्राह के बीच लंबी लड़ाई चली थी। गज की फ़रियाद पर विष्णु या हरि और शिव या हर ने बीच-बचाव कर इस लड़ाई का अंत कराया था। कथा प्रतीकात्मक है। प्राचीन भारत वैष्णवों और शैव भक्तों के बीच सदियों तक चलने वाली लड़ाई का साक्षी रहा था। अपने आराध्यों की श्रेष्ठता स्थापित करने के इस संघर्ष ने हजारों लोगों की बलि ली थी। इसकी समाप्ति के लिए गुप्त वंश के शासन काल में कार्तिक पूर्णिमा को वैष्णव और शैव आचार्यों का एक विराट सम्मेलन सोनपुर के गंडक तट पर आयोजित किया गया। यह सम्मेलन दोनों संप्रदायों के बीच समन्वय की विराट कोशिश साबित हुई जिसमें विष्णु और शिव दोनों को ईश्वर के ही दो रूप मानकर विवाद का सदा के लिए अंत कर दिया गया। उसी दिन की स्मृति में यहां पहली बार विष्णु और शिव की संयुक्त मूर्तियों के साथ हरिहर नाथ मंदिर की स्थापना हुई थी। उसी काल में यहां एशिया के सबसे बड़े पशु मेले की भी शुरुआत हुई थी जिसने कालांतर में एक बड़े व्यावसायिक मेले का भी रूप धर लिया।

पिछले लगभग डेढ़ हजार सालों से हरिहरक्षेत्र मेला एक ऐसी जगह रही है जहां ग्रामीण बिहार की सभ्यता और संस्कृति को निकट से देखा, जाना और महसूस किया जा सकता है।

मधुबनी जज मारपीट मामले में हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

पटना हाईकोर्ट ने मधुबनी के एडीजे अविनाश कुमार पर हुए हमले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के डीजीपी, गृह विभाग के प्रधान सचिव एवं मधुबनी के एसपी को नोटिस जारी किया है। जस्टिस राजन गुप्ता की डिवीजन बेंच ने इस मामले को काफी गम्भीरता से लेते हुए अगली सुनवाई में राज्य के डी जी पी को कोर्ट में उपस्थित हो कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। इसके साथ- साथ कोर्ट ने डीजीपी को अपनी रिपोर्ट के साथ 29 नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट मधुबनी के जिला जज से प्राप्त पत्रांक सं. 1993 पर स्वतः संज्ञान लेते हुए ये आदेश दिया।

इस पत्र के अनुसार झंझारपुर के डिस्ट्रिक्ट जज ने हाईकोर्ट को घटना की जानकारी देते हुए यह जानकारी दी है कि घोघरडीहा के थानाध्यक्ष गोपाल कृष्णा एवं सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा ने 18 नवंबर,2021 को दोपहर 2 बजे झंझारपुर के एडीजे अविनाश कुमार-1 के चैम्बर में घुस गए।

उन पर पिस्तौल तान दी और मारपीट के साथ बदसुलूकी की।ए डी जे अविनाश कुमार के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार पर झंझारपुर के वकीलों ने गहरा रोष जताया और कहा कि पहले अपराधियों से सुरक्षा की जरूरत होती थी।लेकिन अब पुलिस वालों से न्यायिक पदाधिकारी व वकीलों को सुरक्षा की आवश्यकता हो गई है।

पटना हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और गम्भीरता को देखते हुए बिहार के डीजीपी को स्वयं कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई 29 नवंबर को होगी।

शहाबुद्दीन के दामाद बेटी का रिसेप्शन आज

मोतिहारी —
शहाबुद्दीन के दामाद शादमान के ज्ञानबाबू चौक स्थित घर रानीकोठी में आज वलीमा (रिसेप्शन) है। जिसे लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। समारोह में पटना, सीवान, मुजफ्फरपुर, बेतिया, बगहा सहित विभिन्न जगहों से रिश्तेदारों सहित अन्य मेहमानों के आने का सिलसिला जारी है।

रिसेप्शन समारोह के लिए शादमान के पिता इफ्तेखार अहमद सह साहब के घर रानीकोठी में भव्य पंडाल बनाया गया। जहां पंडालों को कई तरह की आकर्षक डिजाइन देकर सजाया गया। जिससे पंडालों की खूबसूरती देखते बन रही है।

बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन एंप्लॉय फेडरेशन के द्वारा 9 सूत्री मांगों को लेकर दिया धरना

बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन एंप्लॉय फेडरेशन के द्वारा अपनी 9 सूत्री मांगों को लेकर बिहार सरकार के परिवहन निगम कार्यालय के मुख्य द्वार के बाहर एक दिवसीय धरना देकर सरकार और प्रशासनिक अधिकारी परिवहन निगम के खिलाफ नाराजगी जाहिर की बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन इंप्लाइज फेडरेशन के सचिव विश्वजीत कार्यकारी अध्यक्ष गजनबी नवाब महासचिव अजय कुमार समेत बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया इस मौके पर संगठन के महासचिव अजय कुमार ने बताया बिहार राज्य पथ परिवहन निगम राज्य सरकार का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी उपक्रम है केंद्रीय कानून के तहत वर्ष 1959 में संवैधानिक दायित्व के तहत राज्य सरकार ने परिवहन निगम की स्थापना की थी

लेकिन राज सरकार की निगम विरोधी और निजी बस मालिक पक्षी नीति अपनाने के वजह से आज परिवहन निगम के हालात काफी खराब हो चुके हैं समय-समय पर निगम बस बेड़े में नई गाड़ियां जोड़ने और नई नियुक्ति करने के बजाए पीपीपी मोड पर निजी बस परिचालकों को राष्ट्रीयकृत मार्गों पर निगम परमिट प्राप्त कर निजी बस मालिक पक्षी नीति चला रही है

,,,, निगम के कर्मचारियों पर राज सरकार और निगम प्रबंधन का हमला इसके बाद तेज हो गया है मजदूरों पर दमन उत्पीड़न बेतहाशा बढ़ गया है वेतन मानदेय सेवा शर्तों में कटौती की जा रही है मेहनत मजदूरी करने वालों की हालात बद से बदतर होती जा रही है श्रम कानून में मालिक पक्षीय सुधार के जरिए जहां एक और मालिकों को नौकरी पर रखने एवं उसे बाहर करने की छूट दी जा रही है

वही ट्रेड यूनियन के गतिविधियों पर तरह तरह की पाबंदियां लगाई जा रही है अस्थाई नियुक्ति के स्थान पर ठेका प्रथा बाहर की एजेंसियो से कार्य लीला अस्थाई एवं दैनिक मजदूरी के जरिए मजदूरों का भयंकर शोषण हो रहा है,,,, वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट कौन वर्ष 2017 में पटना उच्च न्यायालय ने कहा है कि राज्य में समान काम का समान वेतन देना होगा भारत सरकार और सरकार द्वारा निर्धारित ₹18000 मासिक मंजूरी होगी उससे कम किसी भी हालात में वेतन देना मंजूर नहीं होगा पद और योग्यता के अनुरूप इससे उनका वेतन निर्धारित की जानी चाहिए,,,

परिवहन निगम के कार्यरत अस्थाई कर्मचारियों का विशेषण और दो हट गया है 31 मार्च 2017 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जवान तलाव का भुगतान भी निगम ने नहीं किया राज्य सरकार से 7 वर्ष पूर्व राशि प्राप्त होने के बावजूद निगम ने उपलब्ध राशि से से वार्तालाप का भुगतान नहीं करना निगम प्रबंधन का सेवानिवृत्त कर्मचारियों विरोधी मानसिकता का परिचायक है केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत मंगाई भर्ती की लंबित दोस्तों को कर्मचारियों के वेतन में जोड़ने का आदेश निर्गत नहीं करना प्रबंधन का कुरुर मानसिकता है

संविदा पर बहाल कर्मचारी पदाधिकारियों से बंधुआ मजदूर की तरह व्यवहार किया जा रहा है पद और योग्यता के अनुरूप वेतन नहीं देकर आल्सो वेतन पर कार्य करने हेतु मजबूर किया जा रहा है अवकाश के दिनों में मनमाने तरीके से बिना किसी क्षतिपूर्ति का बराबर कार्यालय खोलकर कार्य करने को मजबूर किया जा रहा है

इस संदर्भ में पूर्व में भी निगम कर्मचारियों द्वारा अपने ज्वलंत समस्याओं के निराकरण हेतु निगम प्रशासक को पत्रांक संख्या 115 दिनांक 20 अक्टूबर 2021 एवं विकलांग संख्या 105 2 अक्टूबर 2021 के माध्यम से मांग की गई थी और प्रबंधन से द्विपक्षीय वार्ता मांग की पूर्ति हेतु अनुरोध किया गया था लेकिन अब तक प्रबंधन द्वारा इस पर किसी प्रकार का कोई विचार नहीं किया गया है प्रबंधन का यह रवैया निगम विरोधी निगम कर्मी विरोधी मानसिकता का परिचायक है यूनियन के द्वारा सरकार और निगम प्रबंधन के समक्ष उठाई गई मांगे

1 पूर्व के हड़ताल के दौरान संपन्न द्विपक्षीय समझौता की कंडिका तीन लागू की जाए

2 वेतन विसंगति के बकाए राशि का अविलंब भुगतान किया जाए

3 महंगाई भत्ते की किस्त को तत्काल निगम कर्मी के वेतन में जोड़ा जाए

4 समान काम का समान मंजूरी दी जाए

5 आउटसोर्सिंग और ठेका पर बहाली तथा मजदूरों का शोषण और दोहन करने की प्रथा है इसलिए इस पर बहाल सभी कर्मी को सेवा नियमित की जाए

6 संविदा, दैनिक वेतन मजदूरी , पचोर से मजदूर को न्यूनतम ₹21000 मासिक वेतन भुगतान किया जाए

7 निगम के अस्तित्व को बचाने के लिए 500 नई बसें क्रय कर निगम के बेड़े में जोड़ा जाए

8 निगम के बसों के अनुपात में शीघ्र कर्मचारी पदाधिकारियों के स्थाई नियुक्ति की जाए

9 निगम में कार्यरत कर्मचारी पदाधिकारियों को योग्यता एवं पद के अनुरूप वेतन तथा श्रम कानून के तहत सुविधा मुहैया कराई जाए

नीतीश जी मुझसे इतना ही घ्रृणा है तो मुझे गोली मारवा दें नहीं तो जेल के अंदर खाने में जहर मिला दें–आनंद मोहन

सहरसा: — जी.कृष्णैया हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व सांसद आनंद मोहन (Anand Mohan) सहरसा कोर्ट में पेशी के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुझसे इतना घ्रृणा है तो मुझे गोली मार दें या नहीं तो जेल के अंदर खाने में जहर मिला दें.”क्यों सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नजर अंदाज कर रहे हैं ।

आजीवन कारावास के 14 साल बीत जाने के साढ़े पांच महीने के बाद भी उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा रहा है वही बदले की भावना से जेल के वार्ड में छापामारी कराकर चार मोबाईल की बरामदगी दिखाकर मुझे बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं.”

नियम-कानून सभी के लिए एक

उन्होंने कहा, ” बीते 23 अक्टूबर की देर शाम जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में मंडल कारा में औचक छापेमारी की गई थी. यह बदले की भावना और राजनीतिक साजिश के तहत की गई थी. इस दौरान मुझे बदनाम करने और मानसिक यातना पहुंचाने का पूरा प्रयास किया गया. लेकिन नियम, कानून और संविधान से सभी बंधे हैं. जेल एक संस्था है, सराय नहीं जहां कोई भी मुंह उठाकर चले जाए. तलाशी के दौरान वरीय पदाधिकारी बाहर मौजूद थे जबकि डीएसपी और एसडीओ ने जेल में छापामारी की थी. “
नीतीश कुमार पर साधा निशाना

पूर्व सांसद ने कहा, ” कायदे से जेल अधीक्षक छुट्टी में थे. लेकिन उनके ही आवेदन पर उन पर मामला दर्ज किया गया है. उनके पास चार मोबाइल दिखाए गए, जो सरासर झूठ है

कोरोना टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को ‘जश्न-ए-टीका पुरस्कार’ः मंगल पांडेय

कोरोना टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने
वालों को ‘जश्न-ए-टीका पुरस्कार’ः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि कोरोना टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक के डॉक्टर, नर्स समेत इससे जुड़े समाजसेवियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा समारोह आयोजित कर ‘जश्न-ए-टीका पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा रहा है।

टीकाकरण में उत्कृष्ट लोगों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में जहां कोरोना जांच और टीकाकरण तेजी से किया जा रहा है, वहीं टीकाकरण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भी सम्मानित किया जा रहा है।


श्री पांडेय ने कहा कि इसके तहत पहले चरण में 4 अक्टूबर को विभाग द्वारा जश्न-ए-टीका पुरस्कार समारोह आयोजित कर टीकाकरण में अह्म योगदान देने वाले पदाधिकारियों और टीकाकरण में सहयोग करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। सरकार के संकल्पित लक्ष्य पूरा होने के बाद पुरस्कार समारोह आयोजित कर टीकाकरण कार्य में सहयोग करने वाले सम्मानित किए जाएंगे। वैश्विक महामारी से बचाव को लेकर टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में डॉक्टर, नर्स के साथ साथ बड़ी संख्या में आमलोगों ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।

ऐसे लोगों के योगदान को उल्लेख करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जश्न ए पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इस पोर्टल पर कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण कार्य को सफल बनाने में व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से उत्कृष्ट योगदान देने वालों के कार्य प्रविष्ट की गई, ताकि दूसरे लोगों उनके कार्य और प्रयास को जान सकें।

श्री पांडेय ने कहा कि विभाग द्वारा कोरोना टीका का प्रथम डोज और दूसरी डोज लगवाने में सामूहिक और व्यक्तिगत तौर पर उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोग सम्मानित किए जा रहे हैं। इस तरह के आयोजन से अन्य लोगों में भी सेवा की भावना जागृत होगी, जिससे कोरोना से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान में तेजी आएगी।

झंझारपुर कोर्ट में जज और पुलिस वाले आपस में भीड़े थाना अध्यक्ष गिरफ्तार

झंझारपुर एडीजे कोर्ट के जज पर हमला ।।
थाना के एसएचओ और दरोगा ने की मारपीट।।
झंझारपुर एडीजे कोर्ट के जज अविनाश कुमार प्रथम पर घोघरडीहा थाना के SHO गोपाल कृष्ण और एक सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु शर्मा के द्वारा मारपीट करने कि खबर आ रही है ।

जज पर पुलिस वाला कोर्ट में ही ताना पिस्टल

इस हमले में ADJ अविनाश कुमार प्रथम घायल हो गए ।हमले की जानकारी पाकर कोर्ट के सभी कर्मी ADJ के चेंबर में दौड़े और दोनों को पकड़ लिया । ADJ की ओर से बताया गया कि सब इंस्पेक्टर ने उन पर पिस्टल तान दिया और एसएचओ ने उनके साथ मारपीट की जिसके बाद एसएचओ और एसआई को कोर्ट के कर्मियों ने बंधक बना लिया है एसपी सहित भारी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद है ।

न्याय व्यवस्था पर हमला है


इस बीच एसएचओ गोपाल कृष्ण और एसआई अभिमन्यु शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है । बताया जाता है कि एडीजे प्रथम अविनाश कुमार लोक अदालत के अध्यक्ष हैं और घोघरडीहा थाना क्षेत्र की किसी महिला के द्वारा लोक अदालत में आवेदन दिया गया था एसएचओ गोपाल कृष्ण और अभिमन्यु शर्मा को कोर्ट में समय पर नहीं पहुंचने पर ADJ ने जब फटकार लगाई तो उसके बाद इस तरह की घटना घटी है।

संपतचक बैरिया कचड़ा प्रबंधन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर

पटना हाई कोर्ट ने पटना के संपतचक बैरिया में स्थापित किये जाने वाले कचड़ा प्रबंधन प्रोजेक्ट (वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट ) को हटाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना नगर निगम को जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने सुरेश प्रसाद यादव व अन्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्रीप्रकाश श्रीवास्तव ने खंडपीठ को बताया कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जवाबी हलफनामा से यह प्रतीत होता है कि बगैर किसी भी प्रक्रिया का पालन करते हुए संपतचक बैरिया की जनता को गंभीर प्रदूषण झेलने के लिए छोड़ दिया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस प्रोजेक्ट को स्थापित करने के लिए बिहार स्टेट पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड की सहमति भी नहीं लिया गया है।
जिसकी वजह से एक ओर वायु प्रदूषण फैल रहा है, तो दूसरी ओर कृषि योग्य भूमि पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

याचिका में यह प्रश्न उठाया गया कि किस कानूनी अधिकार के तहत पंचायत क्षेत्र में पड़ने वाले इस जगह का चयन कचड़ा प्रबंधन प्रोजेक्ट के लिए किया गया है ? यह भी कहा गया कि कृषि भूमि पर स्थापित किये जाने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए बैरिया कर्णपुरा पंचायत राज से किसी भी प्रकार की अनुमति ली गई है ?

नगर विकास व आवास विभाग के कमिश्नर, बिहार स्टेट पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड व पटना नगर निगम से स्पष्टीकरण पूछने सह शो – कॉज करने का आग्रह भी इस याचिका में किया गया है।

प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण किये जाने के पूर्व पंचायत राज बैरिया के ग्राम सभा द्वारा एक बैठक भी 29 दिसंबर, 2006 को बुलाई गई थी, जिसमें इस प्रोजेक्ट को लेकर विरोध किया गया था।
इस मामले पर आगे भी सुनवाई होगी।

पत्रकार अविनाश हत्याकांड मामले में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने लिया स्वत संज्ञान

पत्रकार अविनाश झा हत्या मामले में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्वत संज्ञान लेते हुए राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब किया है इस संबंध में राज्य के डीजीपी मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब किया है।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने पत्रकार अविनाश हत्याकांड मामले में लिया संज्ञान

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने स्वत संज्ञान लेते हुए राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि मधुबनी के पत्रकार अविनाश झा की संदिग्ध स्थिति में मौत की खबर आ रहा है यह बहुत ही दुखद घटना है ।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के स्वत संज्ञान लेने की खबर के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों से एसपी मधुबनी को अवगत कराने का निर्देश दिया है साथ ही आईजी दरभंगा को पूरे मामले की जांच का आदेश डीजीपी द्वारा जारी किया गया है ।

बिहार के उच्च शिक्षा को कैंसर हो गया है वक्त आ गया है इसे काट करके अलग करने का

जहां तक मुझे याद है बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर अभी तक जितनी भी छापेमारी हुई है उनमें से किसी के पास से दो करोड़ रुपया कैश बरामद नहीं हुआ है जबकि बिहार में पूर्व डीजीपी से लेकर बड़े से बड़े अधिकारी और इंजीनियर के घर छापेमारी हो चुकी है।              

बरामद कहां से हो रहा है शिक्षा के मंदिर से जी है आपके लिए यह आश्चर्य की बात हो सकती है लेकिन मेरा अनुभव कहता है शिक्षा के मंदिर में जिस तरीके का भ्रष्टाचार है किसी और संस्थान में नहीं है खास करके उच्च शिक्षा के क्षेत्र में।       

 जब से मैं पत्रकार बना हूं दो विषय मेरे पसंद का रहा है पहला अपराध और दूसरा शिक्षा और यही वजह है कि आज मेरे मित्रों में सबसे अधिक पुलिस वाले हैं या फिर प्रोफेसर और सबसे ज्यादा मुझसे पीड़ित भी यही दो वर्ग है।बात उन दिनों की है जब मैं रोसड़ा अनुमंडल से दैनिक जागरण के लिए खबर भेजता था मेरे यहां एक संस्कृत कॉलेज है उसमें पढ़ाने वाले शिक्षक में एक हमारे पुरोहित भी थे एक दिन उनका बेटा मेरे पास आया  जजमान(हमारे घर पूजा कराते थे इसलिए मैं उनका जजमान हुए ) मेरे पापा के साथ बहुत अन्याय हो रहा है पांच वर्ष से वेतन नहीं मिल रहा है और फर्जी तरीके से बहाल प्रोफेसर जो दरभंगा में रहता है एक दिन भी रोसड़ा संस्कृत कॉलेज नहीं आते हैं और वो वहीं से वेतन उठा लेते हैं ।मैं संस्कृत कॉलेज में प्रोफेसर बहाली की पूरी फाइल को पढ़ा उसी दौरान एक प्रोफेसर की नियुक्ति 26 जनवरी को हुआ जबकि वह दिन राष्ट्रीय छुट्टी का होता है ।फिर पूरी बहाली प्रक्रिया से जुड़ी फाइल पढ़ने के बाद सीरीज में खबर चलाने लगे कैसे कैसे लोग प्रोफेसर बन रहे हैं पीजी बाद में पास किये प्रोफेसर पहले बन गये ।        

खुब हंगामा हुआ एक दिन दैनिक जागरण के पटना दफ्तर से फोन आया आप कल पटना पहुंचिए दो दिन बाद आफिस पहुंचे उस व्यक्ति का नाम याद नहीं है लेकिन वो प्रादेशिक डैक्स के प्रभारी थे काठ वाले कुर्सी पर वो बैठते थे जैसे मैंने कहां सर मैं संतोष रोसड़ा से आया हूं इतना सुनते ही वो भड़क गये और मेरा क्लास लगाना शुरु कर दिये मैं हैरान था आखिर इनको हो क्या गया ।खैर उसके कुछ दिनों बाद ही मेरा ईटीवी में हो गया और मैं जागरण छोड़ दिया। ईटीवी में मेरी पोस्टिंग दरभंगा हुई, दरभंगा में दो विश्वविद्यालय है एक ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और दूसरा महाराजा कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय और एक दरभंगा मेडिकल कॉलेज के साथ साथ तीन डेंटल कॉलेज था ।                               

उस समय के विधान पार्षद निलाम्बर चौधरी के इच्छा के विपरीत उन दोनों विश्वविद्यालय में पत्ता नहीं हिलता था, वही रंजीत डॉन जो दरभंगा मेडिकल कॉलेज का ही छात्र था और वह मेडिकल कॉलेज में नामांकन के ठेका वहीं से शुरू किया था ।वही डेंटल कॉलेज का कहना ही क्या था वहां तो कश्मीरी बच्चों का शारीरिक और मानसिक और आर्थिक शोषण का केंद्र बन गया था ये सारे कॉलेज ।            

ऐसे में मेरे लिए पर्याप्त मटेरियल मौजूद था बम फोड़ने के लिए इसी दौरान एक दिलचस्प खबर मेरे हाथ आ गया निलाम्बर चौधरी जी का एक रिश्तेदार विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर था उन्होंने पीएचडी राजेन्द्र प्रसाद पर किया था और उनसे जुड़े कई आर्टिकल प्रकाशित हो चुका था जिसके आधार पर उनका प्रमोशन हुआ था ,ये जनाब जिस आर्टिकल के प्रकाशन के सहारे प्रमोशन पाये थे वो आर्टिकल हुबहु दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी प्रोफेसर के आर्टिकल से चुरा कर अपने नाम से छपवा लिया थे इस खबर को मैं पूरी प्रमुखता से चलाया।                               

चलने के बाद बड़ा बवाल मचा और मेरे बारे में खोजबीन शुरू हुई यह कौन है इसी दौरान रंजीत डॉन के टीम पर भी हाथ डाल दिए वहां तो जान जाते जाते बची लेकिन हार नहीं माने दरभंगा मेडिकल कॉलेज कैम्पस में जो परीक्षा होती थी वह सेंटर टूट गया और डेंटल कॉलेज वाले को तो नानी याद आ गयी ।           

खैर इस दौरान पता चला कि बिहार के उच्च शिक्षा का हाल कितना बुरा है किस तरीके से अनपढ़ लोगों को प्रोफेसर बनाया गया आप सोच नहीं सकते हैं कई प्रोफेसर ऐसे मिले वो अपने विषय का नाम भी ठीक से नहीं लिख पा रहे थे जिस विषय से वो डॉक्टर किये हुए थे                            

 यह सब चल ही रहा था कि एक दिन माफिया तत्व मेरे संस्थान पर भारी पर गया और मेरा तबादला दरभंगा से शिवहर करवा दिया लेकिन संस्थान के किसी सीनियर अधिकारी को इस खेल की जानकारी मिल गयी और मेरा तबादला शिवहर को रद्द करते हुए पटना कर दिया ।पटना की कहानी कुछ और ही है इस बीच ईटीवी से कशिश में आ गये और आते ही एक अच्छा ब्रेक मिल गया 2014–2015 में जेपी विश्वविद्यालय के कुलपति हुआ करते थे डां द्विजेन्द्र कुमार गुप्ता ये  जनाब भी यूपी के रहने वाले थे उन्होंने भी मगध विश्वविद्यालय के कुलपति की तरह अपने रिश्तेदार के नाम फर्जी कंपनी बना कर उस परीक्षा की कॉपी सप्लाई करने का ठेका दे दिया और करोड़ों रुपया खा गया खबर चलाना शुरु किये निगरानी में केस हुआ अंत में राजभवन को हटाना पड़ा। इसके कुछ दिनों के बाद ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति साकेत कुशवाहा के  कारनामे सामने आने लगे हैं जहां देखिए फर्जी ही फर्जी है ।यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति अरविंद अग्रवाल के बारे में जानकारी मिली कि ये जनाब भी फर्जी डिग्री के सहारे भीसी बने हुए है चला सीरीज में खबर अंतत इनको रिजाइन देकर जाना पड़ा जांच में फर्जी डिग्री की बात सही साबित हुई ।           

वर्तमान में अभी जो भीसी हैं कहां जाता है कि ये कुमार विश्वास के भाई है इनकी डिग्री को लेकर भी रोजाना वहां से फोन आता है एक बार आकर इसका भी ऑपरेशन करिए इसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में एक शिक्षक की नियुक्ति हुई थी जब इनके भी डिग्री को लेकर बवेला मचना शुरू हुआ तो बिहार सरकार उनको पुरस्कार स्वरूप बीपीएससी का सदस्य बना दिया ।         

 मतलब उच्च शिक्षा में जहां आप हाथ डालिएगा वही आपको आकंठ भ्रष्टाचार मिलेगा मेरा अनुभव यही है कि उच्च शिक्षा से जुड़े भ्रष्ट लोग जितना दुस्साहसी होता है किसी दूसरे विभाग में आपको नहीं मिलेगा सब कुछ खुल्लम खुला चलता है और इस खेल में राजभवन से लेकर सरकार तक शामिल है                                      

 इसी सरकार में यूपी मांडल का प्रवेश हुआ और एक रणनीति के तरह बिहार के लोगों को कुलपति बनने से रोका गया ताकि हर पद पर बोली लगाने में कोई कठिनाई ना हो और इस मॉडल ने बिहार के उच्च शिक्षा को और भी गर्त में मिला दिया ।मगध विश्वविद्यालय के कुलपति के घर से दो करोड़ कैश के साथ साथ करोड़ो के निवेश का कागजात भी बरामद होता है और अभी छापामारी चल ही रही है ऐसे में सवाल उठना तो लाजमी है ना शिक्षा के मंदिर के पुजारी के घर लक्ष्मी क्या करने पहुंच गई ।            

 एक चोर रहे तब ना जेपी विश्वविद्यालय के जिस कुलपति के खिलाफ निगरानी जांच हुई जांच में कांपी घोटाले में जिस प्रोफेसर को दोषी पाया गया रवि प्रकाश बब्लू कोर्ट से जमानत पर है उसको राजभवन जेपी विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार बना दिया है ।’बर्बाद गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी है यहां तो हर शाख पे उल्लू बैठा है अंजाम ऐ गुलिस्तां क्या होगा।

पंचायत चुनाव में बैंककर्मियों के उपयोग पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पंचायती राज संस्थानों में कराए जा रहे पंचायत आम निर्वाचन 2021 के चुनाव कार्य मे बैंककर्मियों के साथ साथ केंद्रीय बोर्ड व निगम सहित पब्लिक सेक्टर में कार्यरत कर्मी को चुनाव ड्यूटी पर तैनात किए जाने के मामलें पर सुनवाई की।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग के साथ साथ राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार से जबाब तलब किया है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा बैंक कर्मियों को चुनाव कार्य मे लगाए जाने संबंधी चुनाव आयोग के अधिसूचना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत)- सह- जिला पदाधिकारी पटना के द्वारा दिनांक 12 अगस्त 2021 को चीफ मैनेजर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मुख्य कार्यालय पटना को लिखे उस पत्र को चुनौती दी है।

इसके माध्यम से पटना में कार्यरत सभी पदाधिकारियों एवम कर्मियों को चुनाव कार्य मे लगाए जाने के लिये नाम पद एवं उनका मोबाइल नंबर माँगा था, ताकि चुनाव कार्य के लिये उनका डाटा बेस तैयार किया जा सके।

कोर्ट को याचिकाकर्ता द्वारा बताया गया कि इससे बैंक का कार्य प्रभावित होता है।
एसबीआई पटना सर्किल ( बिहार व झारखंड क्षेत्र ) के अफसरों के संघ के महासचिव व अन्य अधिकारियों की तरफ से दायर इस याचिका में बिहार पंचायती राज कानून की संशोधित धारा 125 की संवैधानिकता को चुनौती दी गयी है।

इस धारा के तहत चुनाव ड्यूटी पर तैनात करने हेतु बैंक कर्मियों को भी राज्य सरकार के कर्मियों के समतुल्य माना गया है।
इस मामले पर फिर अगली सुनवाई 22 दिसम्बर को फिर होगी।