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10 वें चरण की मतगणना में भी पूराने चेहरे को मतदाताओ ने नकारा

पंचायत चुनाव के 10वें चरण की मतगणना शुक्रवार सुबह 8 बजे शुरु हुआ और शनिवार को भी जारी रहेगी। 93725 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला दो दिनों में होना है। 817 पंचायतों में बुधवार को मतदान हुआ था। मतदान के लिए 7,257 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जिनमें से 509 नक्सल प्रभावित थे। अभी तक के परिणामों में गांव में बदलाव की बयार दिख रही है। वहीं, RJD की प्रदेश प्रवक्ता रितु जायसवाल के पति सिंहवासिनी पंचायत से मुखिया का चुनाव जीत गए हैं। वहीं, औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड से किरण सिंह ने जिला परिषद क्षेत्र संख्या 24 से 16159 वोट से जीतकर रिकॉर्ड बना दिया।

1. किशनगंज में काठामाठा के साथ ही कोचाधामन में बदलाव की बयार दिखाई दी है। तीनों जिला परिषद में नए चेहरों ने जीत दर्ज की है। निवर्तमान जिला परिषद अध्यक्ष फरहत फात्मा भी चुनाव हार गई हैं। कोचाधामन प्रखंड में तीन जिला परिषद की सीट है तीनों पर निर्वतमान जिला परिषद सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा। तीनों सीटों पर जनता ने नए चेहरों को मौका दिया है।
-बक्सर के बलिहार पंचायत में घर्मराज चौरसिया 1522 मत पाकर 287 मतों से जीत गए। निकटतम उम्मीदवार भीम रवाना को 1235 मत मिले। निवर्तमान मुखिया संजू शर्मा पति भरत शर्मा व्यास को 661 मत मिले। दुल्लहपुर पंचायत में देवन्ती देवी ने 1740 मत पाकर फूलादेवी को 935 वोटों से हरा दिया। फूलादेवी को 805 मत मिले। यहां निवर्तमान मुखिया चुनाव मैदान से बाहर रहीं।
-किशनगंज के कोचाधामन प्रखंड क्षेत्र में एआईएमआईएम विधायक मो. इजहार अस्फी की पुत्रवधू सुहाना अस्फी मुखिया का चुनाव हार गई हैं। वह काठामाठा पंचायत से मैदान में थीं।

2. बक्सर के सिमरी पंचायत में राजकुमारी देवी 2035 मत पाकर जीत गई हैं। उन्होंने निकटतम प्रत्याशी सावित्री देवी को 531 मतों से हराया। सावित्री को 1504 मत मिले। यहां निवर्तमान  मुखिया चुनाव मैदान से बाहर रहे।
-अररिया में ग़ैरकी मसूरिया से शाहजहां, सिमरिया से गजाला प्रवीण, भंसिया से शबाना प्रवीण, प्रसादपुर से एहतेशाम व गिरदा पंचायत से उम्मी हनी मुखिया बने हैं।
-समस्तीपुर के बिथान प्रखण्ड के सलहा बुजुर्ग पंचायत से दुर्दाना परवीन उर्फ चांदनी, सलहा चंदन पंचायत से राजेश कुमार और जगमोहरा से रुकसाना परवीन ने मुखिया पद जीत लिया है।

3. पटना के मोकामा की हाथीदह पंचायत से मुखिया पद पर  शशिशंकर सिंह पहली दफा जीते।औंटा पंचायत से देवी देवी, दरियापुर पंचायत से शैलेंद्र प्रताप, मरांची उतरी पंचायत से गौरव कुमार, बरहपुर पंचायत से दुनिया देवी, घोसवरी प्रखंड की त्रिमुहान पंचायत से कौशल किशोर, सम्यागढ़ पंचायत से कुसुम देवी पहली बार मुखिया निर्वाचित। घोसवरी प्रखंड की गोसाईंगांव पंचायत से मुखिया पद पर पिंकी देवी निर्वाचित घोषित। पयजुना पंचायत से दिनेश गोप दूसरी बार मुखिया बने।

4. शिवहर जिले की सर्वाधिक प्रतिष्ठित सीटों में से एक जिला परिषद क्षेत्र संख्या सात से राम कृष्ण कुमार ने जीत दर्ज की है। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी संजय साहनी रहे। जबकि, निवर्तमान जिला पार्षद भोला साह को चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। नवनिर्वाचित जिला पार्षद रामकृष्ण कुमार भाजपा के नेता हैं। शिवहर में जिला परिषद की सात सीटें है। इस बार सात में से एक जिला पार्षद मनीष कुमार ने अपनी जीत का क्रम बरकरार रखा। शेष छह  जिला पार्षदों को अपनी सीट गंवानी पड़ी।

मधुबनी पंचायत चुनाव अपडेट: मधेपुर से जिला परिषद क्षेत्र संख्या 54 से कुमारी मिन्टी जीतीं। ये हैं अभी तक के निर्वाचित मुखिया:
मधेपुर की सुन्दर बिराजीत पंचायत से गणेश कुमार यादव
मधेपुर की मटरस  पंचायत से गौड़ी देवी
मधेपुर की महिसाम  पंचायत से निसात निजामी
मधेपुर की मधेपुर पूर्वी पंचायत से आशा देवी
घोघरडीहा की बिशनपुर पंचायत से किरण मिश्रा
घोघरडीहा की सुदैरतौली पंचायत से कुसुम सिंह
घोघरडीहा की सांगी पंचायत से अरहुलिया देवी

मानवाधिकार दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

आज अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर अधिवक्ताओं, आर टी आई कार्यकर्ताओं व समाजसेवियों के संयुक्त तत्वाधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम का आयोजन पटना हाई कोर्ट के नजदीक स्थित बिहार स्टेट बार कॉउन्सिल परिसर में अपराह्न चार बजे किया गया।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस की स्थापना 10 दिसंबर, 1948 को यू एन ओ द्वारा की गई थी।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध समाजसेवी, गंगा बचाओ अभियान के अध्यक्ष विकास चंद्र उर्फ गुड्डु बाबा ने कहा कि अब आगे से और भी जोश – खरोश के साथ काम करूंगा।उन्होंने कहा कि उन्हें यह पता चला है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज होते है। यह एक उत्साह बर्धक बात है।

उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकार के क्षेत्र में काम किये जाने से न्यायालयों में मुकदमों की संख्या में भी कमी आएगी। इससे लोगों के बीच जागरूकता बढ़ेगी और लोगों का शोषण भी रुकेगा।
लोगों के जागरूक होने से अधिकारी भी कानून का दुरुपयोग नहीं कर पाएंगे, जोकि आम जन के लिए मददगार साबित होगा।
यह एक ऐसा कानून है जो जाति और धर्म को नहीं देखते हुए समान रूप से न्याय करता है। इस मौके पर अधिवक्ता अरुण कुमार ने बताया कि मानवाधिकार एक्ट वर्ष 1993 में आया और 1994 में लागू हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि लोग कुछ मामलों को हाई कोर्ट और सुप्रीम के समक्ष ले जाते हैं, जबकि वही काम मानवाधिकार में आसानी से हो जाएगा।लेकिन जागरूकता की कमी होने की वजह से मानवाधिकार में पहुँच नहीं पाते हैं।

हाईकोर्ट जज के तबादले का सिलसिला जारी जस्टिस वीरेन्द्र कुमार का तबादला राजस्थान हाईकोर्ट हुआ

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 अक्टुबर,2021 एक प्रस्ताव में पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस बीरेंद्र कुमार का स्थानांतरण पटना हाई कोर्ट से राजस्थान हाईकोर्ट किये जाने की अनुशंसा केन्द्र सरकार से की।लेकिन केंद्र सरकार ने इस सम्बन्ध मे अबतक कोई कार्रवाई नहीं की।
जस्टिस बीरेंद्र कुमार की पटना हाई कोर्ट से राजस्थान हाईकोर्ट के स्थानांतरण सम्बन्धी अधिसूचना अब तक केंद्र सरकार ने जारी नहीं की हैं।
अगर एक सप्ताह के भीतर जस्टिस बीरेंद्र कुमार के पटना हाई कोर्ट से राजस्थान हाईकोर्ट स्थानांतरित करने के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के सम्बन्ध में केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी नहीं कि तो पटना में ये जनहित का मामला होगा।अतः केंद्र सरकार को इस सम्बन्ध में शीघ्र अधिसूचना जारी करनी चाहिए, ताकि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के अनुसार जस्टिस बीरेंद्र कुमार का तबादला राजस्थान हाईकोर्ट हो सके।

पंचायत चुनाव के 10वें चरण की मतगणना शुरु

पंचायत चुनाव के 10वें चरण की मतगणना आज सुबह 8 बजे से शुरू हो गई। यह शनिवार को भी जारी रहेगी। सुबह से ही मतगणना केंद्र के बाहर भीड़ लग गई है। बहुत जल्द परिणाम आने लगेंगे।
34 जिलों की 817 पंचायतों में बुधवार को मतदान हुआ था। मतदान के लिए 7,257 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जिनमें से 509 नक्सल प्रभावित थे। 10वां चरण 18 जिलों के लिए चुनाव का अंतिम चरण है। 11 चरणों में हो रहे पंचायत चुनाव में आखिरी चरण में 20 जिलों के 38 प्रखंडों में चुनाव होगा। इस तरह से 10वें चरण के साथ 18 जिलों में चुनाव संपन्न हो जाएगा। इन जिलों में 10वें चरण के बाद चुनाव संपन्न हो जाएंगे। वो हैं बक्सर, रोहतास, कैमूर, गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, शिवहर, किशनगंज, शेखपुरा, लखीसराय, अररिया, कटिहार, बांका, जमूई, मुंगेर और खगड़िया।

हेलिकॉप्टर की सवारी सबसे असुरक्षित

आज सुबह अमरीका के नेशनल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी बोर्ड की वेबसाइट पर हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं के बारे में पढ़ रहा था। इसकी कई रिपोर्ट बताती है कि यातायात परिवहन के जितने भी माध्यम हैं उनमें तुलनात्मक रुप से हेलिकॉप्टर सबसे असुरक्षित वाहन है।

इसके बाद भी हेलिकॉप्टर का प्रयोग करते ही हैं और अन्य कारणों से भी इसका इस्तेमाल होता है।इन रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कार से होने वाली दुर्घटनाओं से तुलना करें तो यह कम असुरक्षित है लेकिन लेकिन अन्य विमानों की तुलना में सबसे अधिक असुरक्षित है

अमरीका में 1999 से 2019 तक यानी 20 साल में 3000 से अधिक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं। इनमें से बड़ी संख्या एयर एंबुलेंस की है। इन्हें हेलिकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज़ HEMS कहा जाता है।

तमाम रिपोर्ट में हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं को HEMS और non HEMS में बांटा गया है। इन अध्ययनों के नतीजे बताते हैं कि एबुलेंस वाले हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की संख्या ज़्यादा है लेकिन दूसरे हेलिकॉप्टर की संख्या भी कुछ कम नहीं है।

अमरिका में हर साल चार लाख मरीज़ HEMS के ज़रिए अस्पताल पहुंचाए जाते हैं। एक रिपोर्टर से पता चला कि जर्मनी में हेलिकॉप्टर वाले एयर एंबुलेंस का रिकार्ड ज़्यादा सुरक्षित है। ।

नेशनल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी बोर्ड NTSB की साइट पर और गूगल में हेलिकॉप्टर को लेकर कई गंभीर रिपोर्ट हैं। मुझमें उनकी तकनीकि बारीकियों को समझने की क्षमता नहीं है फिर भी सरसरी तौर पर पढ़ने से यही समझ आया कि जिन कारणों से हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होते हैं उनमें मानवीय भूल की भी बड़ी भूमिका है।

जैसे पायलट पर पूरी तरह से निर्णय का अधिकार नहीं छोड़ा जाता है कि इस समय हेलिकॉप्टर उड़ेगा या नहीं। कमर्शियल कंपनियां उन पर दबाव डालती हैं कि उड़ा जा सकता है।

मौसम भी एक कारण और तकनीकि तो है ही। रात में उड़ने के वक्त भी हेलिकॉप्टर काफी दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। एक रिपोर्ट में पढ़ने को मिला कि रात में होने वाली दुर्घटना में तकनीकि का कम रोल पाया गया है, नाइट विज़न का बड़ा रोल होता है।

यहां तो बहुत से लोग तकनीकि मामलों में दक्ष हैं, वही अगर इन रिपोर्ट को पढ़ें तो आम पाठकों को बेहतर तरीके से बता सकते हैं। कम जानने के कारण मुझसे चूक हो सकती है। मैंने इस मकसद से भी लिखा है कि किसी में जिज्ञासा उत्पन्न हो और वह बेहतर तरीके से सारी रिपोर्ट पढ़ कर लिखे जिससे सभी को फायदा पहुंचे।

लेखक —-रवीश कुमार

तेजस्वी के शादी की अटकलो पर लगा विराम बचपन की मित्र रेचल से रचाई शादी

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सिर आज सेहरा सज गया है। गुरुवार सुबह से ही दिल्ली के साकेत स्थित मीसा भारती के सैनिक फार्म हाउस पर समारोह हो रहा है। सगाई के बाद जयमाला हो चुका है।

तेजस्वी की शादी पर राजद कार्यालय में जश्न का माहौल

अब तेजस्वी यादव अपनी होने वाली अर्धांगिनी रेचल के साथ सात फेरे लेंगे। कार्यक्रम की तस्वीर जारी हो चुकी है। तेजस्वी और रेचल के साथ स्टेज पर बहन मीसा भारती भी दिख रही हैं।

तेजस्वी यादव और उनकी होने वाली दुल्हन रेचल की दोस्ती 7 साल पुरानी है। वह चंडीगढ़ के व्यवसायी की बेटी हैं और हरियाणा की रहने वाली हैं।

तेजस्वी यादव और उनकी प्रेमिका की दोस्ती बचपन की है। दोनों साथ में DPS, आरके पुरम में पढ़ते थे। वहीं, 2014 से करीब आ गए थे। दोस्ती प्यार में बदल गयी ।

प्रदेश अध्यक्ष ने तेजस्वी को इस अंदाज में दी बधाई

हाईकोर्ट ने अवमानना मामले में सीतामढ़ी डीएम को उपस्थित होने का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने दो बार आदेश होने के बावजूद राज्य सरकार की तरफ से जवाब दायर नही होने पर सीतामढ़ी के डीएम के खिलाफ प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला करार देते हुए कोर्ट में हाज़िर होने का निर्देश दिया है । संजय कुमार झा याचिका पर जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह ने सुनवाई की।

कोर्ट ने सीतामढ़ी डीएम को कोर्ट की अवमानना मामले में अपने जवाब के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है ।याचिकाकर्ता के बाढ़ राहत कार्यों के सिलसिले में राज्य सरकार की तरफ से भुगतान लम्बित रखने के खिलाफ यह याचिका को दायर किया है ।

हाई कोर्ट ने पिछले तीन सुनवाई को बार बार जवाब तलब किया था ,लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब दायर नही हुआ था ।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीतामढ़ी डीएम को स्पष्ट निर्देश दिया था कि यदि अगली सुनवाई तक जवाब नही दायर हुआ, तो डीएम को खुद कोर्ट में हाज़िर रहना होगा ।

आज सुनवाई में न तो जवाब दायर किया गया और न ही डीएम,सीतामढी कोर्ट में उपस्थित रहे। हाई कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला करार देते हुए यह आदेश दिया । मामले की अगली सुनवाई 15 दिसम्बर को होगी।

छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्वक ढ़ग से चल रहा है

पंचायत चुनाव के 10वें चरण का मतदान जारी है। 34 जिलों की 817 पंचायतों में चुनाव है। सुबह 6 बजे ही मतदाताओं की भीड़ लगनी शुरू हो चुकी है। मतदान के लिए 7257 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, इनमें से 509 नक्सल प्रभावित हैं। शांतिपूर्ण मतदान के लिए पुलिस मुख्यालय की तरफ से लगभग 38 हजार पुलिस पदाधिकारियों और सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।

10वें चरण में कुल 63 लाख 24 हजार 714 मतदाता वोट करने वाले हैं। इनमें 33 लाख 29 हजार 858 पुरुष मतदाता हैं, जबकि 29 लाख 94 हजार 648 महिला मतदाता हैं। वहीं, बांका से वोट करने पहुंचे 70 साल के सुखदेव यादव की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह सीढ़ी पर चढ़ रहे थे। तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ गया।

वहीं, नवादा में महिला वोटर व महिला पुलिसकर्मी के बीच झड़प हो गई। घटना में महिला पुलिसकर्मी का सिर फट गया। मौके से 4 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। वहीं, गया में मतदान कर्मी को शराब के नशे में धुत होकर महिला पुलिस कर्मी से बदतमीजी करना भारी पड़ा। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

नवादा में महिला वोटर्स से झड़प में घायल महिला पुलिसकर्मी का इलाज करतीं डॉक्टर।

मतदान लाइव अपडेट्स

भोजपुर के बड़हरा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, नूरपुर में मतदान केंद्र के बाहर हंगामा। प्रत्याशी के समर्थक व प्रत्याशी और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच नोकझोंक हो गई। एक दूसरे पर लगा रहे दूसरे को समर्थन करने का आरोप लगाया

गया के मोहनपुर प्रखंड के बैद्यनाथपुर बूथ पर तैनात नशे में धुत दो चुनाव कर्मी गिरफ्तार किए गए। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में शराब पीने की पुष्टि हुई है। हालांकि, चर्चा यह है कि नशे में धुत शराब कर्मी महिला पुलिसकर्मी के कमरे में घुसने की कोशिश कर रहे थे।

लेकिन, इस बात से पुलिस प्रशासन इनकार कर रहा है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि पकड़े गए दोनों चुनाव कर्मी नशे में थे और हंगामा कर रहे थे।

नवादा के रोह इंटर स्कूल मतदान केंद्र पर फोन से वीडियो बनाने से मना करने पर महिला मतदाता और पुलिसकर्मी के बीच झड़प हो गई। घटना में महिला पुलिस कर्मी सुमन कुमारी का सिर फट गया। घायल महिला सिपाही को रोह पीएससी में इलाज कराया गया। मौके से कुल 4 महिला मतदाता को हिरासत में लिया गया।

बांका में मतदान केंद्र पर 70 साल के सुखदेव यादव की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह सीढ़ी पर चढ़ रहे थे। तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ गया।

नालंदा के मिल्कीपर गांव में एक युवक दर्जनों वोटर आई कार्ड के साथ पहुंचा था। त्वरित कार्रवाई में सोहसराय थाना क्षेत्र के महुआ टोला निवासी गुलाम मुस्तफा का पुत्र आदि आलम को 42 वोटर आई कार्ड के साथ हिरासत में लिया गया।

औरंगाबाद में देव प्रखंड के मलहरा गांव के बूथ संख्या 76 पर ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। बूथ पर तनाव बढ़ गया है।

सुबह 6 बजे से ही मतदान केंद्रों पर वोटर्स पहुंचने लगे।

मुजफ्फरपुर के औराई में चौर मे टेंट में बना चलंत बूथ।

10वें चरण के मतदान के साथ इन 18 जिलों में खत्म होगा चुनाव
बिहार पंचायत चुनाव का दसवां चरण का बिहार के 18 जिलों के लिए चुनाव का अंतिम चरण है। 11 चरणों में हो रहे पंचायत चुनाव में आखिरी चरण में 20 जिलों 38 प्रखंड़ों में चुनाव है। इस तरह से दसवें चरण के साथ 18 जिलों में चुनाव होगा। जिन जिलों में 10वें चरण के बाद चुनाव संपन्न होगा।

ये जिले बक्सर, रोहतास, कैमूर, गया, नवादा, औरंगाबाद, जाहानाबाद, अरवल, शिवहर, किशनगंज, शेखपुरा, लखीसराय, अररिया, कटिहार, बांका, जमूई, मुंगेर और खगड़िया हैं।

भोजपुर के बड़हरा प्रखंड की ख्वासपुर में नाव से गंगा नदी पर कर मतदान करने जाते लोग।

वोटिंग के लिए नाव पर पार कर रहे गंगा नदी
10वें चरण का मतदान जारी है। भोजपुर के बड़हरा प्रखंड की ख्वासपुर पंचायत में मतदान केंद्र जाने के लिए ख्वासपुर गांव के लोगों को गंगा नदी पार करना है।

हालांकि, इसको लेकर लोगों में सुबह से ही उत्साह देखा जा रहा है। मतदान केंद्र पहुंचने के लिए नाव पर सवार होकर जा रहे हैं।

भोजपुर में मतदान केंद्र के बाहर लाइन में लगीं महिला मतदाता।

10वें चरण की सीटों पर एक हजार से अधिक अवैध हथियार जब्‍त
मतदान वाले जिलों में पुलिस की सख्ती जारी है। पुलिस मुख्यालय के मुताबिक चुनावी आचार संहिता लगाए जाने के बाद से अभी तक इन जिलों से एक हजार से अधिक अवैध हथियार पकड़े गए हैं।

5322 व्यक्तियों पर सीसीए के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव दिया गया है वही 3408 के खिलाफ निरोधात्मक प्रस्ताव पारित हुआ है। वाहन चेकिंग के दौरान 10 करोड़ 99 लाख से अधिक जुर्माना वसूला गया है।

12 लाख 61 हजार लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला पुलिस बल के साथ ही होमगार्ड, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस और सैप जवान लगाए गए हैं।

आपको बता दें कि कई जिलों में यह पंचायत चुनाव का आखिरी चरण होगा। राज्‍य के कुछ जिलों में 11वें चरण में भी चुनाव कराए जाएंगे।

अभी तक क्या खास रहा है
1–जमुई के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत दिग्घी पंचायत के बेलाटांड मध्य विद्यालय के प्रांगण में अज्ञात युवक द्वारा बम फोड़ा गया। घटना में किसी प्रकार के जान माल के नुकसान की खबर नहीं है।

जमुई में ही वार्ड सदस्य के पति की हत्या के विरोध में लक्ष्मीपुर बाजार के करीब कोहबरबा मोड़ पर जाम करने की कोशिश में पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हाथापाई होने की सूचना है।

स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। फिलहाल मुखिया सुलेखा देवी के नेतृत्व में एनएच 333 को कोहबरबा मोड़ के समीप जाम कर दिया गया है।

2—-अररिया के मध्य विद्यालय भगवानपुर के बूथ 184, 185  पर मारपीट व हंगामा को लेकर कुछ देर के लिए मतदान बाधित रहा। एसडीपीओ पुष्कर कुमार, जोनल मजिस्ट्रेट ने जाकर हंगामा शांत किया। कुछ लोग चोटिल हुए हैं।

3— नवादा के रोह इंटर विद्यालय बूथ पर महिला मतदाता और महिला पुलिसकर्मी के बीच झड़प हो गई. इस दौरान महिला पुलिसकर्मी घायल हो गई. जानकारी के अनुसार महिल बूथ पर मोबाइल फोन से वीडियो बना रही थी, मना करने पर महिला पुलिस से उलझ गयी. पुलिस ने मौके से चार महिला मतदाताओं को हिरासत में लिया है

4—आरा के नरगदा में मतदान बूथों पर दो गुटों में झड़प होने की खबर सामने आ रही है. मतदान केंद्र पर जमकर हंगामा हुआ. मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गयी. एक पक्ष का आरोप है कि पुलिस पक्षपात कर रही है।

आज हाईकोर्ट में झंझारपुर जज के साथ मारपीट मामले की ह़ुई सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में झंझारपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार – I पर किये गए कथित आक्रमण और मारपीट की घटना के मामले पर सुनवाई की।

राज्य की सी आई डी को अगली सुनवाई में जांच कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा पेश करने का निर्देश जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए दिया।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामले की जांच का सी आई डी को सौंपा था। कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए बिहार पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि मधुबनी के एस पी क्यों नहीं स्थानांतरित किया गया।कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या पुलिस अधिकारी मनमानी कार्रवाई करेंगे।

कोर्ट ने सी आई डी को जांच का जिम्मा सौपा था और कहा कि इस मामले की जांच एस पी स्तर के अधिकारी करेंगे।साथ ही इस मामले की निगरानी सी आई डी के ए डी जी खुद करेंगे।

कोर्ट ने इस मामले मे सुनवाई में मदद करने के लिए वरीय अधिवक्ता मृगांक मौली को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने के दौरान मौखिक रूप से कहा कि आखिर पुलिस अधिकारियों ने लोडेड हथियार के साथ एक जज के चैम्बर में कैसे प्रवेश किया ?

इस मामलें पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट किया था कि राज्य की पुलिस दोनों पक्षों के मामलों को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से अनुसंधान करने में सक्षम है।

एड्वोकेट जनरल ने कहा कि यदि चाहे तो कोर्ट सी बी आई समेत किसी भी एजेंसी से मामले की जांच करवा सकता है। उल्लेखनीय है कि मधुबनी के डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज द्वारा 18 नवंबर, 2021 को भेजे गए पत्र पर हाई कोर्ट ने 18 नवंबर को ही स्वतः संज्ञान लिया है।

साथ ही साथ कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के डी जी पी, राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव और मधुबनी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया था।

मधुबनी के प्रभारी डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज द्वारा इस घटना के संबंध में भेजे गए रिपोर्ट के मद्देनजर राजन गुप्ता की खंडपीठ ने 18 नवंबर, 2021 को सुनवाई की।

ज़िला जज ,मधुबनी के द्वारा भेजे गए रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दिन तकरीबन 2 बजे दिन में एस एच ओ गोपाल कृष्ण और घोघरडीहा के पुलिस सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा ने जज अविनाश के चैम्बर में जबरन घुसकर अभद्र व्यवहार किया था।

उनके द्वारा विरोध किये जाने पर दोनों पुलिस अधिकारियों ने दुर्व्यवहार करने और हाथापाई की।
दोनों पुलिस अधिकारियों ने उनपर हमला किया और मारपीट भी किया था। पुलिस अधिकारियों ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकालकर आक्रमण करना चाहा।

इस मामले पर अगली सुनवाई ,10 जनवरी,2022 को होगी।

कल तेजस्वी की होगी शादी

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की शादी को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है।

तेजस्वी यादव की बहन रोहिणी आचार्य ने अब यह कन्फर्म कर दिया है ।

तेजस्वी यादव की शादी होने वाली है।

रोहिणी ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस शादी की पुष्टि की है।

तेजस्वी यादव की होने वाली दुल्हन का नाम भी सामने आ गया है। लड़की का नाम राजश्री है और हरियाणा के रेवाड़ी जिले के रहनेवाली है। 

कल दिल्ली के सैनिक फॉर्म हॉउस में शादी है।

लड़की ईसाई धर्म की है।

शिवहर डीएम को बच्ची के साथ कोर्ट में दाखिल होने का आदेश

पटना हाई कोर्ट ने शिवहर के जिलाधिकारी की बच्ची की कस्टडी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए 20 दिसंबर 2021को तीन वर्ष की बच्ची को पेश करने का आदेश शिवहर के डी एम को दिया है।

जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की खंडपीठ ने शिवहर के जिलाधिकारी की पत्नी जी एस एस सितारा की हैबियस कॉरपस आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई की।

कोट ने डी एम की याचिकाकर्ता पत्नी और डी एम सज्जन राज शेखर को भी को उपस्थित रहने को कहा है। याचिका में जिलाधिकारी पर याचिकाकर्ता पर मारपीट का आरोप भी लगाया गया है।

याचिकाकर्ता की मां ने मारपीट की घटना को लेकर पुलिस में शिकायत भी की थी। कुछ आला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद याचिकाकर्ता को मुजफ्फरपुर स्थित सर्किट हाउस में रखा गया।

इसके बाद शिवहर के जिलाधिकारी सर्किट हाउस आकर अपनी माँ के साथ रह रही दोनों नाबालिग बच्चों को ले गए। इसमें एक इनका डेढ़ – दो वर्ष का बेटा भी शामिल है।

याचिकाकर्ता को यह कहकर बच्ची को जिलाधिकारी ले गए थे कि बच्ची को कुछ दिनों के बाद वापस लौटा देंगे, लेकिन अभी तक वापस नहीं किये।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सरोज कुमार शर्मा का कहना था कि हिन्दू गार्जियनशिप एक्ट की धारा 6 के अनुसार 5 वर्ष तक के बच्चे को कस्टडी का अधिकार मां को होता है।

इसी एक्ट की धारा 13 के अनुसार बच्चे का हित ही सर्वश्रेष्ठ सोच होगा। बच्ची को अभी देखभाल और स्नेह की आवश्यकता है।
माँ का प्यार सबसे ऊपर माना जाता है।

एक लेखिका अगाथा क्रिस्टी को उद्धरित करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि एक मां अपने बच्चे के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं का डटकर सामना करती है और बाधाओं को दूर कर देती है।

जिलाधिकारी का पक्ष अदालत के समक्ष वरीय अधिवक्ता अशोक चौधरी ने रखा।
इस मामले पर अगली सुनवाई 20 दिसंबर,2021,को होगी।

बिहार में डीएपी और यूरिया खाद की कमी का मामला उठा लोकसभा में

आज लोकसभा में शून्य काल के दौरान दरभंगा सांसद गोपाल जी ठाकुर ने दरभंगा सहित पूरे मिथिला क्षेत्र में डीएपी एवं यूरिया खाद की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया जी से आग्रह किया।

इस दौरान सांसद डॉ गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि दरभंगा सहित सम्पूर्ण मिथिला पूर्णतः बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। यहां उद्योग एवं कल – कारखानों के अभाव के कारण बरसात के समय बड़ी संख्या में लोग जीविकोपार्जन हेतु यहां से दूसरे राज्यों और महानगरों को पलायन कर जाते है।

बिहार में खाद के किल्लत का मामला उठा ससंद में

सांसद श्री ठाकुर ने कहा कि मिथिला क्षेत्र में प्रमुख रूप से गेहूं, मक्का, तिलहन, दलहन आदि फसलों की खेती होती है और इस फसल की बुवाई में किसानों को डीएपी एवं यूरिया खाद की आवश्यकता विशेष रूप से होती है।

विदित हो कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान सांसद को किसानों ने डीएपी(D.A.P) एवं यूरिया खाद की अनुपलब्धता दूर करने का मांग की थी। खाद की अनुपलब्धता के कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिस कारण किसानों को कृषि कार्य मे नुकसान का भी सामना करना पर सकता है।

उन्होंने कहा कि दरभंगा सहित मिथिला क्षेत्र में अधिकांश किसान लघु और सीमांत किसान हैं और यदि समय रहते डीएपी(D.A.P) एवं खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नही की गई तो उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

सांसद ने लोकसभा के माध्यम से विभागीय मंत्री से डीएपी (D.A.P) एवं यूरिया खाद की अनुपलब्धता को दूर करते हुए पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया ताकि किसान अपनी फसल बुवाई निर्बाध रूप से कर सके।

जहरीली शराब पीने से रोसड़ा में तीन लोगों की हुई मौत

बिहार में जहरीली शराब से मौत का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है ।आज समस्तीपुर जिले के शिवाजीनगर थाना क्षेत्र के बल्लीपुर गांव में शराब पीने से तीन लोगों के मरने की खबर आ रही है।

गाॉव वाले घटना की जानकारी देते हुए

जिला प्रशासन का कहना है पोस्टमार्टम के बाद बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पायेंगी की मौत का कारण क्या है हालांकि मौत की खबर से पूरे इलाके में सनसनी फैल गयी है क्यों कि जिसकी भी मौत हुई है वो सभी एक शादी समारोह में शामिल हुआ थे और वही शराब का सेवन किया था ।

गॉव में पहुँची प्रशासन की टीम

बिहार के आठ मेडिकल कांलेज के निर्माण में केन्द्र सरकार कर रही है सहयोग–सुशील मोदी

बिहार के 8 मेडिकल कॉलेजों के लिए केंद्र 1090 करोड़ बिहार को उपलब्ध करा चुकी है
• पूर्णिया, छपरा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सीवान, बक्सर, जमुई में मेडिकल कॉलेज केंद्र के सहयोग से
• राज्यसभा में सुशील कुमार मोदी के प्रश्न पर सरकार का जवाब

राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी के एक प्रश्न के उत्तर में भारत सरकार की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डाक्टर भारती प्रविण पवार ने बताया कि बिहार में कुल 8 मेडिकल कॉलेज पूर्णिया, छपरा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, झंझारपुर, सीवान, बक्सर, जमुई में केंद्र की सहायता से खोलने की स्वीकृति दी गई है।

इसमें प्रथम चरण में पूर्णिया, छपरा एवं समस्तीपुर हेतु 189 करोड़ प्रति मेडिकल कॉलेज की दर से कुल 567 करोड़ की स्वीकृति दी गई है जिसमें 340 करोड़ केंद्र ने अपना हिस्सा बिहार सरकार को उपलब्ध करा दिया है।

दूसरे चरण में सीतामढ़ी, झंझारपुर, सीवान, बक्सर, जमुई हेतु प्रति मेडिकल कॉलेज 250 करोड़ की लागत से कुल 1250 करोड़ की स्वीकृति दी गई है जिसमें से 750 करोड़ केंद्रीय हिस्सा राज्य को उपलब्ध करा दिया गया है।

यानी कुल 8 मेडिकल कॉलेज हेतु केंद्र ने अपना हिस्सा 1090 करोड़ राज्य को दे दिया गया है। निर्माण का कार्य राज्य सरकार को कराना है।

बिहारियों के उत्थान के बगैर देश के उत्थान की बात करना बेमानी –राजीव प्रताप रुढ़ी

बिहारियों की उपेक्षा नहीं, 14 करोड़ की आबादी को लेकर चलना होगा साथ, तभी होगा नये भारत का निर्माण

· लोकसभा में सांसद रुडी ने शून्यकाल के जोरदार तरीके से उठाया राज्य के पिछड़ेपन का मुद्दा

· नीति आयोग द्वारा जारी देश का पहला मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (बहुआयामी गरीबी सूचकांक-MPI) में बाल एवं किशोर मृत्यु दर सबसे अधिक, स्कूली शिक्षा, स्कूल में उपस्थिति और सेनिटेशन में भी बिहार का सबसे खराब स्थान

· बिहार में कुपोषितों की संख्या भी सबसे ज्यादा है, मातृत्व स्वास्थ्य से वंचित आबादी का प्रतिशत अधिक, कैसे बनेगा विकसित बिहार

· रुडी ने कहा कि मेरा राज्य पिछड़ा तो मैं भी पिछड़ा, 14 करोड़ की आबादी की नहीं की जा सकती उपेक्षा

नई दिल्ली, 07 दिसम्बर 2021 । बिहार भारत का अभिन्न अंग है। इसकी प्रगति देश की प्रगति है। 14 करोड़ बिहारियों के विकास को नजर अंदाज कर भारत को कभी विकसित नहीं माना जा सकता। नये भारत के निर्माण में बिहार की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

उक्त बात आज लोकसभा में बिहार के सारण से लोकसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रुडी ने लोकसभा में कही। उन्होंने इस दौरान नीति आयोग के आंकड़े का हवाला देते हुए बिहारियों के पिछड़ेपन पर सवाल उठाया। भाजपा सांसद रूडी ने नीति आयोग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गरीबी सूचकांक में बिहार सबसे नीचे है, तमिलनाडु सबसे ऊपर है।

उन्होंने कहा कि बिहार काफी पिछड़ गया है। देश तब तक नहीं बढ़ सकता है जब तक बिहार आगे नहीं बढ़ पाएगा। रूडी ने कहा कि एक पिछड़े राज्य का पिछड़ा व्यक्ति होने के नाते मै सरकार से मांग करता हूँ कि बिहार की इस स्थिति को लेकर जरूरी कदम उठाने चाहिए।

बता दें कि पिछले दिनों सदन में ही रुडी ने बिहार के पिछड़ेपन का मुद्दा उठाया था और कहा था कि यदि मेरा राज्य बिहार पिछड़ा है तो वहां का नागरिक होने के नाते मैं भी पिछड़ा हूँ।

सांसद रुडी ने सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। रुडी ने कहा कि पिछड़े राज्य के पिछड़ा व्यक्ति होने के नाते मैं राज्य के पिछड़ेपन का मुद्दा उठा रहा हूँ। तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के माध्यम से सरकार को कहा कि सभी को यह जानकर आश्चर्य होगा कि बिहार राज्य की आबादी में गरीबी का अनुपात सबसे अधिक है। पूरे देश में सबसे गरीब हम हैं।

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 28 राज्यों में राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक बिहार का 51.91 प्रतिशत है जबकि वहीं तमिलनाडु 4 प्रतिशत के अंदर है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार में कुपोषित लोगों की संख्या सबसे अधिक है, पोषण के मामले में हम 52 प्रतिशत कम है।

रुडी ने सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि बिहार की प्रगति के बिना देश की प्रगति संभव नहीं है। लगभग 14 करोड की आबादी की उपेक्षा कर देश आगे नहीं बढ़ सकता।

सदन के बार मीडिया से बात करते हुए सांसद रुडी ने कहा कि इतनी योजनाओं-परियोजनाओं के बावजूद आखिर क्या कारण है कि बिहार विकसित नहीं हो पा रहा है। बिहार में कुपोषितों की संख्या भी सबसे ज्यादा है।

मातृत्व स्वास्थ्य से वंचित आबादी का प्रतिशत, बाल एवं किशोर मृत्यु दर सबसे अधिक, स्कूली शिक्षा से वंचित आबादी, स्कूल में उपस्थिति और खाना पकाने के ईंधन तथा बिजली से वंचित आबादी के प्रतिशत के मामले में भी बिहार का सबसे खराब स्थान है। विदित हो कि 01 जनवरी 2015 को नीति आयोग का गठन वर्तमान राजग सरकार ने किया है।

नीति आयोग देश की नीति निर्धारण करने वाली सबसे बड़ी सरकार संस्था है। इसके अध्यक्ष पदेन प्रधानमंत्री होते है और उपाध्यक्ष नियुक्त किये जाते है। वर्तमान में राजीव कुमार उपाध्यक्ष है जिनके नाम का उल्लेख रुडी ने अपने वक्तव्य के दौरान किया।

नीति आयोग ने देश का पहला मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (बहुआयामी गरीबी सूचकांक-MPI) जारी किया है जिसके आंकड़ों के आधार पर सदन में सांसद रुडी ने उक्त बाते कही।

दादाजी ने प्रण तोड़ी और दरोगा जी को पूरी नौकरी भरना पड़ा पैसा

  • दादाजी ने प्रण तोड़ी *

मेरे दादाजी गया के ख्यातिप्राप्त वकील थे। उन्होंने प्रण लिया था कि वे फौजदारी मुकदमा की प्रैक्टिस कभी नहीं करेंगे। उन्हें ऐसा लगता था कि फौजदारी मुकदमों में कानून से अधिक “लफ़्फ़ाज़ी” होती है। फलतः, वे केवल दीवानी मुकदमा ही करते थे।

एक दिन, उनका एक प्रिय मुवक्किल सुबह-सुबह, रोते-बिलखते उनके घर आया। “थानेदार ने मेरी पूरी इज़्ज़त गाँव के सामने उतार दी। वकील साहब कुछ कीजिए।”

दादाजी ने उसकी पूरी कहानी सुनी। थानेदार महोदय ने बिना वजह उसके घर की तलाशी ले ली थी। सारे ग्रामीण देखते रहे। बरामद कुछ हुआ नहीं। दरोगाजी अपना डंडा पटकते, मुस्कराते हुए चल दिए। उनका खुन्नस उतर चुका था।

ऐसी घटनाएँ तो आए दिन होती हैं, कौन सी बड़ी बात हो गई? यह क्या कम है कि दरोगाजी ने घर में कुछ ग़ैर कानूनी सामान रखकर उसे गिरफ़्तार नहीं कर लिया?

दादाजी के मुवक्किल ने ज़िद पकड़ ली कि उन्हें आज तो उनकी प्रतिष्ठा के लिए अपना कानून का अस्त्र उठाना ही होगा। उन्हें अपना प्रण तोड़ना ही होगा। दादाजी ने अपनी प्रतिज्ञा तोड़ी। इस फौजदारी मामले को उन्होंने दीवानी चोंगा पहनाया।

धारा 165 Cr.P.C. में दी गई प्रक्रिया, जिसके अनुसार पुलिस को बिना वारंट के घर सर्च करने का प्रावधान है, उसकी प्रक्रिया को पूरी तरह पुलिस कभी नहीं अपनाती। यह प्रक्रिया कानून में इसलिए दी गई है ताकि पुलिस नागरिक की निजता के अधिकार का हनन बिना वजह नहीं करें।

तलाशी से पूर्व, पुलिस को लिखना पड़ता है कि बिना वारंट के यह तलाशी क्यों ली जा रही है। यह कारण जस्टिसियेबल होते हैं। पुलिस बिना वारंट के सर्च करने को अपना कानूनी अधिकार मानती है। उसमें निहित शर्तों का पालन करने को अपना कर्त्तव्य नहीं।

दादाजी ने जिला जज के सामने, नागरिक की निजता के अधिकार के हनन का मामला, दीवानी चोंगे में रखा। न फौजदारी, न प्रशासनिक, न ही रिट के रूप में। तथ्य ऐसे थे कि दरोगाजी अपना बचाव नहीं कर पाए। दादाजी ने रिलीफ़ में माँगा कि दरोगाजी के वेतन से एक रुपया प्रति माह काट कर उनके मुवक्किल के खाते में कंपनसेशन के रूप में डाल दिया जाए।

ऐसा ही हुआ। पूरी नौकरी दरोगाजी को बिना कारण बताए, बिना वारंट के तलाशी लेना कचोटता रहा।

लेखक –अभयानंद पूर्व डीजीपी बिहार

हाईकोर्ट ने अमीन बहाली के विज्ञापण को किया रद्द

पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के राजस्व विभाग द्वारा राज्य में 1767 रिक्त अमीन पदों पर बहाली के लिए जनवरी,2020 में निकाले गए विज्ञापन को रद्द कर दिया।जस्टिस पी बी बजन्थरी ने याचिकाकर्ता राम बाबू आजाद व् अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की।

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस विज्ञापन को रद्द कर तीन महीने के भीतर अमीन के रिक्त पदों को भरने के लिए नए सिरे से विज्ञापन प्रकाशित करें।

याचिकाकर्ता के ओर से कोर्ट में पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया कि अमीन पद पर बहाली के लिए शैक्षणिक योग्यता के लिए जो योग्यता राज्य सरकार ने विज्ञापन में प्रकाशित किया था, वह प्रावधानों के अनुरूप नहीं था।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि बिहार अमीन cadre रूल के अनुसार उम्मीदवार +2 उत्तीर्ण होने के साथ अमानत की डिग्री या आई टी आई द्वारा सर्वेयर की डिग्री प्राप्त होना चाहिए।

राज्य सरकार के राजस्व विभाग में जो विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता रखी थी,उसके अनुसार उम्मीदवार को मात्र +2 ही उत्तीर्ण होना ही पर्याप्त हैं।

उम्मीद्वारों ने राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित इस विज्ञापन को पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने चैलेंज किया।कोर्ट ने आज सभी पक्षों को सुनने के बाद इस विज्ञापन को रद्द करते हुए राज्य सरकार को नए सिरे अमीनो के रिक्त 1767 पर बहाली के लिए तीन माह नए सिरे से विज्ञापन प्रकाशित करने का आदेश दिया।

बिहार की एक बर्थडे पार्टी क्यों चर्चा में है

परिवारिक शादी के हैंगओवर से अभी ठीक से बाहर निकले भी नहीं है की एक खबर कल देर रात से ही नींद और चैन दोनों हराम किये हुए हैं वैसे खबर इसलिए महत्वपूर्ण है कि राज्य सरकार इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर काफी संवेदनशील है ऐसे में कुछ ऐसी बातें सामने आती है तो स्वाभाविक है तो सवाल नैतिकता का उठेगा ही ।

तीन दिन पहले पटना के होटल चाणाक्य में एक बर्थडे पार्टी का आयोजन हुआ था उस बर्थडे पार्टी में राज्य सरकार के कई मंत्री ,पूर्व मंत्री ,विधायक और आईएएस अधिकारी शामिल हुए थे,बर्थडे किसी बच्चे का नहीं था जीवन कुमार नाम के एक व्यक्ति का था जिसके फेसबुक प्रोफाइल पर लिखा है प्रदेश संयोजक हिन्दू जागरण मंच और उनके प्रोफाइल पर मौजूद फोटो से साथ लगता है कि बीजेपी नेताओं के इनके बेहतर रिश्ते रहे हैं और ये किसी ना किसी रूप में बीजेपी से जुड़े रहे हैं।इनका दूसरा परिचय है ये बालू खनन करने वाली कंपनी ब्रॉडसन के एमडी डॉ अशोक कुमार के बेटे हैं ।

ऐसा क्या खास है मंत्री से लेकर संतरी तक बर्थडे का केक खाने लाइन में खड़े हैं ।

लेकिन इस बर्थडे पार्टी की और मीडिया का ध्यान इसलिए केन्द्रित हुआ कि इस पार्टी में दल की कोई सीमा नहीं थी सभी दल के विधायक,मंत्री और बड़े नेता इनके जन्मदिन पार्टी से शामिल हुए थे ,कई आईएएस अधिकारी और बिहार के अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग भी मौजूद थे और दूसरी बात इस पार्टी की सूचना के बाद आर्थिक अपराध से जुड़ी सरकार की सभी ऐन्जसी के साथ सक्रिय हो गयी है ऐसे में स्वाभाविक है मीडिया का ध्यान उस पार्टी की और आकृष्ट होगा ही ।

हलांकि यह सूचना जैसे ही बाहर आयी जीवन कुमार अपने फेसबुक प्रोफाइल से बर्थडे पार्टी से जुड़ी तमाम वीडियो और फोटो को डिलीट कर दिया है।

वैसे जीवन कुमार के बारे में जो जानकारी प्राप्त हो रही है वो चौकाने वाली है इनकी पत्नी पटना जिला के जिला परिषद अध्यक्ष थी इस बार वो चुनाव हार गयी है । जहां के रहने वाले हैं उस इलाके के हर किसी के जुवान पर इनके परिवार के 15 वर्षो में अरबपति बनने की खबर जुवाने आम है ।

ऐसे में इनके जन्मदिन के मौके पर आयोजित पार्टी में जिस आत्मीयता के साथ मंत्री ,विधायक और आईएएस अधिकारी शामिल हो रहे हैं उसके सहारे बहुत कुछ समझा जा सकता है ।

पटना पुलिस की कार्यशैली पर हाईकोर्ट ने जतायी नराजगी

पटना हाई कोर्ट ने ग्यारह महीने पहले मांगी गई केस डायरी व विसरा रिपोर्ट अभी तक नहीं प्रस्तुत करने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए फतुहां के डी एस पी को अगली सुनवाई में तलब किया है। पिछले एक वर्ष से लंबित एक अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह जानकर आश्चर्य व्यक्त किया कि केस डायरी और विसरा रिपोर्ट इतने दिनों बाद भी अबतक नहीं पेश किया गया।

पुलिस की कार्यशैली पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए जस्टिस संदीप कुमार ने फतुहां के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को आगामी 8 दिसम्बर को पेश होने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता गजेंद्र कुमार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि विगत जनवरी माह में ही हाई कोर्ट ने केस डायरी पेश करने का आदेश दिया था।

इसके बाद विगत फरवरी माह में पुनः हाई कोर्ट ने पटना पुलिस को एक रिमाइंडर देते हुए केस डायरी और विसरा रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था, लेकिन 11 महीने बीत जाने के बावजूद हाई कोर्ट के आदेश का पुलिस ने अनुपालन नहीं किया।
इस मामले पर अगली सुनवाई अब 8 दिसम्बर को की जाएगी।

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान सीएम ने पदाधिकारियों को लगायी क्लास

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, 200 फरियादियों की सुनी फरियाद, अधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा निर्देश

पटना, 06 दिसम्बर 2021 :- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज 4 देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे 200 लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के लिए समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए।

आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, निगरानी विभाग, खान एवं भूतत्व विभाग के मामलों पर सुनवाई हुयी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ठीक 10.30 बजे जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में पहुॅचकर विभिन्न जिलों से आये 200 लोगों की शिकायतें सुनीं। नालंदा जिले की रहनेवाली एक महिला ने गुहार लगाते हुए कहा कि उनकी शादी पटना के गुलजारबाग के मेंहदीगंज में हुई है।

जातीय जनगणना को लेकर शीघ्र बुलायी जायेगी सर्वदलीय बैठक

मुझे दो बेटी है उसके बाद भी मेरे पति ने दूसरी शादी कर ली है। जब पुलिस से इसकी शिकायत की तो पटना पुलिस ने कहा कि वह इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करेंगे क्योंकि आप नालंदा की रहनेवाली हैं इसलिए नालंदा में ही कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को इस पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

जनता दरबार में एक महिला ने गुहार लगाते हुए कहा कि उसका पति पंजाब में काम करता है। गांव के युवक पर जबरन गलत काम करने और वीडियो बनाने का महिला ने आरोप लगाया और कहा कि वह वीडियो बनाकर वह जबरदस्ती शादी करने की बात कह रहा है। इस मामले की जानकारी पुलिस को देने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को इस पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

मधेपुरा से आए युवक बताया कि उसे अपराधियों ने चार गोलियां मारी एफ0आई0आर0 भी हुई लेकिन अपराधी खुलेआम घूम रहा है, वह धमकाता है। एस०पी० के रीडर पर • युवक ने मामले को दबाने का आरोप लगाया। इस पर मुख्यमंत्री ने पुलिस • महानिदेश को समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

अरवल से आए एक फरियादी ने शिकायत करते हुए कहा कि फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति मामले में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। वहीं एक फरियादी ने बताया कि कब्रिस्तान के साथ ही निजी जमीन को भूमि माफिया ने बेच दिया है। उसके बाद उसे धमकी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इस पर समुचित कार्रवाई का निर्देश दिया। एस0टी0एफ0 में कार्यरत एक सिपाही की पत्नी ने मुख्यमंत्री से शिकायत करते हुए कहा कि उनकी शादी को तीन साल हो गए। पति एस0टी0एफ0 में है लेकिन सर्विस बुक पर उनका नाम नहीं चढ़ा है।

अब वह दूसरी शादी करने की धमकी दे रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। गया के एक जे०पी० सेनानी ने अपनी शिकायत करते हुए मुख्यमंत्री से कहा कि बिहार सरकार जे०पी० मूवमेंट में सभी आंदोलनकारियों को पेंशन देती है लेकिन मेरा पेंशन तक शुरू नहीं हो सका है।

कोरोना को लेकर बिहार सरकार सर्तक है

मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा कि आपने अब तक आवेदन क्यों नहीं किया। जे०पी० सेनानी ने बताया कि छह साल पहले उन्होंने पेंशन के लिए आवेदन दिया था लेकिन यह कहा गया कि कमेटी का गठन किया जाएगा, तब फैसला लिया जाएगा। इस पर जे०पी० सेनानी ने कहा कि वह सरकारी नौकरी में थे इसलिए पेंशन के लिए आवेदन नहीं किया। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

गोपालगंज के एक व्यक्ति ने सरकारी गैरमजरुआ जमीन से होकर गुजरनेवाली सड़क को अतिक्रमणमुक्त कराने की शिकायत की तो वहीं भागलपुर के एक व्यक्ति ने कब्रिस्तान की घेराबंदी के संबंध में शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को समस्याओं के समाधान के लिए उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया नवादा निवासी खुशबू कुमारी ने फरियाद करते हुए मुख्यमंत्री से कहा कि वो हैंडबॉल खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं इस आधार पर सिपाही के पद से अन्य पद पर उन्हें पदोन्नति दी जाए।

वहीं अररिया जिले के एक युवक ने स्वतंत्रता सेनानियों के नाती-पोता को आरक्षण दिए जाने की अपनी शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मुजफ्फरपुर के एक युवक ने शिकायत करते हुए कहा कि दबंगों ने उनके घर को तोड़कर घर से बेघर कर दिया है और घर के सामान की लूटपाट भी की है लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा रही है। वहीं मुजफ्फरपुर के एक व्यक्ति ने सेवानिवृति के उपरांत सेवांत लाभ नहीं मिलने के संबंध में अपनी शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इस पर समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

बिहारशरीफ के एक व्यक्ति ने एस०सी० / एस०टी० अधिनियम के अंतर्गत एक मामले में पुलिस द्वारा उन पर गलत कार्रवाई की जा रही है। वहीं किशनगंज के एक व्यक्ति ने मू अर्जन की जमीन का मुआवजा व्यवसायिक प्रकृति के आधार पर दिलाने के संबंध में मांग की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

शराबबंदी पर खुलकर बोले नीतीश

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम की समाप्ति के पश्चात् मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत की। शराबबंदी के बावजूद बिहार में शराब की खाली बोतलें मिलने को लेकर पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है।

जांच की रिपोर्ट आने के बाद सभी बातों का पता चल जायेगा। प्रशासन इस पर अलर्ट है। इस बात को देखना पड़ेगा कि क्या सही मायने में वहां पर किसी ने शराब का सेवन किया था या फिर कहीं से बोतल लाकर वहां पर फेंक दिया है। इस मामले की पूरी गहराई से जांच चल रही है।

इस मामले पर अभी मेरा कुछ भी बोलना उचित नहीं है। इसको लेकर हमने सभी को अलर्ट कर दिया है। कई बार शराब की खाली बोतलें को फेंक दी जाती है ताकि यह चर्चा में आये। दोनों दृष्टिकोण से इस पर काम करना है। एक बार फिर से कड़े एक्शन की शुरुआत हुई है।

उन्होंने कहा कि आज भी इस कार्यक्रम में लोगों ने शराब के धंधेबाजों को लेकर सूचना दी है। हमने उस पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। शराब को लेकर प्रशासन के लोग अब काफी सतर्कता बरत रहे हैं। पटना को लेकर हमने पहले ही कह दिया है कि शराब को लेकर राजधानी में कड़ी कार्रवाई कीजिए।

जब तक पटना में नियंत्रित नहीं कीजिएगा तो बिहार में नियंत्रण कैसे होगा। उन्होंने कहा कि शराबबंदी को लेकर पटना के लोगों में कितनी जागरुकता है यह इस बात से पता चलता है कि वर्ष 2016 में शराबबंदी लागू करते समय शुरु में जब हमलोगों ने तय किया था बड़े शहरों में विदेशी शराब को अभी बंद नहीं करेंगे तो पटना में लोगों ने शराब की बिक्री का विरोध करना शुरु किया।

इसे देखते हुए 5 दिनों के अंदर ही सभी जगहों पर पूर्ण शराबबंदी को लागू करना पड़ा। इससे यह साबित होता है कि सभी लोग चाहते हैं कि पूरी तौर पर शराबबंदी सफल हो लेकिन कुछ लोग गड़बड़ करने वाले होते हैं, ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के अच्छे कामों की चर्चा दिल्ली के अंग्रेजी अखबारों में नहीं रहती है लेकिन इन सब घटनाओं की खबरें दिल्ली के अखबारों में छपी है। यह सब देखकर हम कुछ बोलते नहीं हैं लेकिन समझ जाते हैं कि कोई न कोई मामला जरुर होगा।

सरकार पूरे मामले की गंभीरता से जांच करा रही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शंका पर ध्यान नहीं देना है बल्कि इस बात को देखना है कि कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं कर रहा है। जांच के बाद गड़बड़ी करने वाले और शराब की खाली बोतलें को फेंकने वालों की पहचान हो जायेगी। ऐसे लोग पकड़े जायेंगे। गड़बड़ी करने वालों पर कड़े एक्शन की शुरुआत अब काफी तेजी से हुई है।

बिहार में खाद की किल्लत के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद की कुछ दिक्कत है। इसको लेकर बिहार के कृषि मंत्री ने भी केंद्र सरकार से भी बात की है। कृषि मंत्री और मुख्य सचिव ने पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर कल हमने केंद्रीय मंत्री से बात की है।

उन्होंने मुझे आश्वस्त किया है कि 7 दिनों के अंदर बिहार में खाद की पर्याप्त खेप पहुंच जायेगी। इसको लेकर हमने अपने मंत्री और अधिकारियों को कनसस रहने को कहा है। एक दो दिनों के बाद हम फिर से बिहार में खाद की उपलब्धता को लेकर समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि खाद की उपलब्धता में कुछ कमी आई थी, इसको लेकर केंद्र सरकार प्रयास कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने मुझे आश्वस्त किया है कि कुछ दिनों में समस्या का हल निकल जायेगा।

कोरोना के नये वेरिएंट ओमिक्रॉन के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना का • खतरा अभी टला नहीं है। एक बार फिर से दुनियाभर में यह फैल रहा है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर बिहार सरकार पूरी तरह से अलर्ट है। इसको लेकर गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है।

स्वास्थ्य मंत्री ने भी इसको लेकर पूरी जानकारी दे दी है। इसको लेकर हमलोगों ने समीक्षा बैठक की है। सभी लोग इसको लेकर सजग हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की जांच भी तेजी से हो रही है। कोरोना की जांच में पॉजिटिव आने के बाद वह व्यक्ति ओमिक्रॉन से संक्रमित है कि नहीं यह पता लगने में अभी 5-7 दिन का समय लग जाता है।

बिहार में अभी तक ओमिक्रॉन का कोई केस सामने नहीं आया है। विदेश से बिहार लौटे कुछ लोगों के ट्रेस नहीं होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसको लेकर सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। ऐसे लोगों का पता लगाकर उनकी कोरोना जांच कराना जरुरी है।

प्रशासन के लोग इस काम में लगे हैं। इसको लेकर सभी को सजग रहने की जरूरत है। दुनिया के साथ ही अपने देश में भी ओमिक्रॉन के कुछ सामने सामने आये हैं। इसको लेकर हम सभी को पूरी तौर पर सजग और सतर्क रहना है। हमलोग इसको लेकर पूरी तौर पर सजग हैं। 

सी०ए०जी० की रिपोर्ट पर पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उसकी जो रिपार्ट आती है वो कैबिनेट से होकर सीधे विधानसभा और विधान परिषद में सबमिट हो जाता है। उसके बाद वह प्रकाशित होता है। प्रकाशित होने के बाद उस पर हमलोग कोई कमेन्ट नहीं करते हैं।

किसी भी रिपोर्ट को हमलोग रोकते नहीं हैं। अगर कोई बात आयेगी तो उसको जांच करने के लिये देखने के लिये हाउस में भी कमेटी बनती है, इसलिये मेरे लिये इन सब पर कमेंट करना उचित नहीं होगा। अगर आपलोग इसके बारे में कुछ विशेष जानना चाहते हैं तो हमारे अधिकारीगण स्थिति को बता देंगे।

बिहार सरकार के ऊपर इस रिपोर्ट में डैमेजिंग कमेंट के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार के ऊपर डैमेजिंग कमेंट देने में पब्लिसिटी मिलेगी। आपलोग जानते हैं कि बिहार में कितना काम हुआ है इसलिये उन सब चीजों पर हम कोई कमेंट नहीं करेंगे।

किसी भी क्षेत्र में आप देख लीजिये कि 2005 में बिहार की क्या स्थिति थी। जब से हमलोग ने काम करना शुरू किया तो आज बिहार कहां से कहां पहुंचा है। हमलोग जो यहां काम कर रहे हैं वो पब्लिसिटी के लिये नहीं कर रहे हैं। लेकिन इस तरह की चीज कोई लिखेगा तो उसको पब्लिसिटी मिलेगी ये स्वभाविक है। इसमें हमलोग कुछ नहीं कहते हैं। अगर कहीं से भी कोई चूक है तो उस पर पूरी नजर रखी जाती है और तत्काल अधिकारियों को इसको लेकर निर्देश दिये जाते हैं।

जातीय जनगणना को लेकर सर्वदलीय बैठक के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा है कि हमलोग इसे करना चाह रहे हैं, हमने बात कर ली है। उप मुख्यमंत्री को भी अपनी पार्टी के लोगों से बात करने के लिये कहा है। बाकी सब लोगों से बातचीत हो गई है। जब वे बातचीत कर लेंगे और इसके बारे में बतायेंगे, उसके बाद ऑल पार्टी मीटिंग की जायेगी।

इन प्रीसिपल हम पहले ही से जातीय जनगणना को लेकर बार बार कह रहे हैं। हम इसलिये ऑल पार्टी मीटिंग करना चाह रहे हैं कि इसके बारे में सब लोगों की समझ बहुत साफ होनी चाहिये। जनगणना हम किस तरह से करायेंगे, उस पर सब लोगों की एक राय होनी चाहिये।

इसके बारे में कैसे करेंगे, किस प्रकार से करेंगे किस माध्यम से करेंगे, इस सब पर पूरी तैयारी करवा रहे हैं। जब इस पर सबकी राय बन जायेगी तो सारी चीजों को मीटिंग में फाइनल करेंगे। सभी पार्टी की मीटिंग में एक राय होगी उसी के आधार पर निर्णय लेकर सरकार उसका ऐलान करेगी।

उन्होंने कहा कि हमलोग जातीय जनगणना के पक्ष में हैं, इससे सबको फायदा होगा, ये बहुत ठीक चीज है। हमलोग इसे ठीक ढंग से करवायेंगे ताकि कोई मिस नहीं करे। बहुत लोग सब कास्ट ही बोलेंगे, कास्ट नहीं बोलेंगे इसलिये सब कास्ट और कास्ट को हर तरह से देखना है।

एक-एक चीज के लिये हमने लोगों को कहा भी है, बात भी की है। क्या-क्या किया जायेगा, इन सब चीजों के बारे में अभी कुछ नहीं कहेंगे। जब मीटिंग होगी उसी समय कुछ बात को रखेंगे। सबकी सहमति से जो बात निकलेगी उसी के आधार पर सरकार की तरफ से कास्ट बेस्ड सेंशस का जो तरीका होगा, उसके बारे में ऐलान किया जायेगा। जैसे ही सबकी सहमति आयेगी उसके बाद एक डेट तय करेंगे और पूरे डिटेल में हमलोग बातचीत करेंगे। हमको नहीं लगता है किसी तरह की असहमति की कोई गुंजाइश है।

बिहार में पीएम मोदी अमित शाह और सोनिया गाँधी कोरोना जॉच हुई है

बिहार के अरवल जिले में कोरोना टेस्ट में फर्जीवाड़ा का अजीब मामला सामने आया है। यहां के करपी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, बॉलीवुड एक्टर प्रियंका चोपड़ा की कोरोना जांच कर दी गई है।

यह खुलासा तब हुआ जब स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने घर-घर जाकर सर्वे किया। बताया जा रहा है कि करपी CHC में मिले रैपिड एंटीजन टेस्ट किट से जांच के नाम पर सैकड़ों लोगों का नाम फर्जी तरीके से डाल दिया गया है। इनके नाम और मोबाइल नंबर पूरी तरीके से गलत हैं।

वहीं, 27 अक्टूबर को RT-PCR जांच के नाम पर कई बड़े दिग्गजों का नाम शामिल कर दिया गया है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, सोनिया गांधी का नाम अहम हैं।

विनोद दुआ का जाना एक युग का अंत —-रवीश कुमार

विनोद दुआ का बिना देखे गुज़र जाना भी याद है और देख कर तृप्त कर देना भी याद रहेगा।

जब आप बहुत नए होते हैं तो किसी बहुत पुराने को बहुत उम्मीद और घबराहट से देखते हैं। उसके देख लिए जाने के लिए तरसते हैं और उससे नज़रें चुराकर देखते रहते हैं। उसके जैसा होने या उससे अच्छा होने का जुनून पाल लेते हैं। वो तो नहीं हो पाते लेकिन उसी की तरह का कुछ और हो जाते हैं।

विनोद दुआ को हमने इन्हीं सब उम्मीदों और निराशाओं की अदला-बदली के साथ देखा। बहुत लंबा साथ रहा। व्यक्तिगत तो नहीं, पेशेवर ज़्यादा रहा। पेशेवर संबंधों की स्मृतियां व्यक्तिगत संबंधों से बहुत अलग होती हैं। हमेशा उन्हें नज़र उठा कर सीधे चलते देखा।

मैं हैरान होता था कि कोई हमेशा ऐसे कैसे चल सकता है। बहुत आसानी से नज़र नहीं मोड़ते थे। चलते थे तो सीधा चलते थे। ऐसे में बहुत कम संभावना थी कि उनकी नज़र आपकी तरफ़ मुड़ जाए। एक ही रास्ता बचता था कि आप उनके सामने आ जाएं लेकिन बिना कुछ किए उनके सामने आना आसान नहीं था।

महफ़िलबाज़ थे लेकिन दफ़्तर से चेले बनाकर महफ़िलें नहीं सजाते थे। उनके अपने दोस्त यार थे जिनके साथ महफ़िलें सजाते थे। हर समय कुछ गुनगुनाते हुए उनका आना राहत देता था। वर्ना ऐसी ठसक वाला व्यक्ति बहुतों की हालत ख़राब कर सकता है। विनोद का गुनगुनाना उनके आस-पास विनोद का वातावरण बना देता था।

आप सहज़ हो जाते थे। कुछ लापरवाहियां और बेपरवाहियां थीं मगर वो उनके जीने के अंदाज़ का हिस्सा था और कई बार इसकी वजह से उन सीमाओं को भी लांघ जाते थे जिसे ख़ुद अपने और सबके लिए बनाया था। उन्हें अच्छा लगता था कि कोई उनसे ठसक से मिल रहा है। उन्हें किसी में लिजलिजापन पसंद नहीं आता था।

काम करने की जगह पर उनकी मौजूदगी सबको बराबर होने का मौका देती थी। लोग आसानी से उन्हें टोक आते थे और कई बार उनकी ग़लतियों पर हाथ रख देते थे। लेकिन जब वे किसी की ग़लती पर हाथ रख देते तो हालत ख़राब हो जाती। विनोद के पास जानकारियों का खज़ाना था। उनकी स्मृति ग़ज़ब की थी।

किसी शायर का पूरा शेर, तुलसी की चौपाई और कबीर के दोहे यूं ज़ुबान पर आ जाया करते थे। यकीन करना मुश्किल हो जाता था कि उन्हें इतना सब कुछ याद कैसे हो सकता है। इससे अंदाज़ा होता था कि पब्लिक के बीच आने के पहले के विनोद दुआ हम सभी से अनजान किसी कमरे में अपनी तैयारियों में बहुत व्यस्त रहते होंगे।

साहित्य और शास्त्रीय संगीत की जानकारी पर कोई चलते फिरते इतना अधिकार नहीं रख सकता था। यही कहना चाहता हूं कि हम सबने विनोद दुआ को काम करने की जगह पर तो देखा लेकिन वहां आने से पहले विनोद दुआ ख़ुद को विनोद दुआ कैसे बनाते थे, नहीं देखा।

गणेश जी के दीवाने थे। उनके घर में गणेश की अनगिनत आकृतियां थीं। मूर्तियां थीं। शायद गणेश से उन्होंने परिक्रमा उधार ली और भारत की ख़ूब परिक्रमा की। हर दिशा में कई बार गए। कई तरह के फार्मेट के कार्यक्रम के लिए गए। कैमरे के सामने उनकी उपस्थिति अपने आप में एक नई भाषा बनाती थी।

उनकी भाषा में एक ख़ास किस्म की दृश्यता थी। किसी बेहतरीन नक्शानवीस की तरह ख़ाका खींच देते थे। बहुत मुश्किल है इतने लंबे जीवन में आप केवल शतकीय पारी ही खेलते रह जाएं। बहुत सी पारियां शून्य की भी रहीं और रन बनने से पहले ही आउट होकर पवेलियन लौट आने के भी किस्से हैं।

विनोद के हाथ से बल्ला छूटा भी है और विनोद ने ऐसी गेंद पर रन बनाए हैं जिस पर सटीक नज़र उन्हीं की पड़ सकती थी। उन्हें विनोद कहलाना पसंद था।

काफी लंबा साथ रहा है। उन्होंने कभी हाथ पकड़ा तो कभी केवल रास्ता दिखाया। गुड़गांव में मज़दूरों पर पुलिस ने लाठी चार्ज की थी। उसका लाइव कवरेज़ कर रहा था। शाम को दफ्तर लौटा तो सीढ़िओं पर मिल गए। मुझे रोक लिया, कहने लगे कि एकदम वर्ल्ड क्लास टेलिविज़न था।

ऐसा दुनिया के टेलिविज़न में भी नहीं होता होगा जो तुमने किया। उस वक्त हमें नहीं पता था और आज भी नहीं पता कि वर्ल्ड क्लास क्या होता है, पर विनोद ने इस तरह ज़ोर दिया कि अपने काम के प्रति विश्वास बढ़ गया। कई मौक़े आए जब उन्होंने उदारता के साथ फोन कर कहा कि ये वर्ल्ड क्लास है।

मैं सोचता रहा कि विनोद दुआ के लिए वर्ल्ड क्लास क्या है। मैं कभी पूछ नहीं सका क्योंकि सिर्फ इतना भर कह देने से लाजवंती की तरह ख़ुशी के मारे सिमट जाता था। उनकी तारीफों का मेरे पास पूरा हिसाब नहीं है मगर उन तारीफों ने मुझे बेहिसाब ख़ुशियां दी हैं। हौसला दिया है।

आज़ादी के पचास साल हो रहे थे। मैं नहीं चाहता था कि शो बन जाने से पहले कोई मेरी स्क्रिप्ट देखे। मैंने यह बात विनोद से कह दी। विनोद ने कहा कि कुछ शरारत कर रहे होगे। मैंने कहा नहीं सर। कुछ लिखने और बनाने से पहले क्या किसी को दिखाना।

तो उन्होंने कहा कोई नहीं, कह देना कि विनोद दुआ ने देख लिया है और क्लियर कर लिया है। विनोद दुआ ने जब पेश किया तो उस कार्यक्रम में उन पर भी टिप्पणी थी। उन्होंने सोचा नहीं होगा कि जिस विनोद दुआ के दम पर इसने कार्यक्रम बनाया है उसमें विनोद दुआ पर भी टिप्पणी थी।

अचानक आई उस टिप्पणी से विनोद दुआ जैसा सधा हुआ बल्लेबाज़ सकपका गया लेकिन उन्होंने बुरा नहीं माना। पूरे कार्यक्रम में हर हिस्से के बाद वे तारीफ ही करते रहे कि ये सिर्फ रवीश कर सकता है। मैं दूसरे छोर पर एक नए पेशेवर की तरह सकुचाया खड़ा रहता था।

हर दिन अपना आत्मविश्वास खोता रहता था और हर दिन पाता रहता था। उनके प्रति सम्मान इसलिए था कि वे माध्यम का हुनर रखते थे। वे माध्यम के हिसाब से मेरी तारीफ़ करते थे। मेरे अंदर माध्यम के प्रति मोहब्बत भर देते थे। उनसे इतना मिला, वो काफी था।

इसके बाद भी हम व्यक्तिगत रुप से क़रीब नहीं थे लेकिन मेरी यादों में वे किसी करीबी से कम नहीं हैं। उनका बिना देखे गुज़र जाना भी याद है और देख कर तृप्त कर देना भी याद रहेगा। उनसे ख़ूब दाद मिली और और कभी दाद नहीं भी मिली। एक अच्छा उस्ताद यही करता है।

अपना हक अदाकर हिस्सा नहीं मांगता है। वो किसी और रास्ते चला जाता है और हम किसी और रास्ते चले गए। जिसने जो दिया उसके प्रति हमेशा शुक्रगुज़ार होना चाहिए। विनोद दुआ का दिया हुआ आत्मविश्वास आगे की यात्राओं में बहुत काम आया।

जिससे आप ड्राइविंग सीखते हैं, हर मोड़ पर उसे याद नहीं करते हैं लेकिन सफ़र में किसी मोड़ पर उसकी कुछ बातें याद आ जाती हैं। आपकी रफ़्तार बदल जाती है। सफ़र का अंदाज़ बदल जाता है। विनोद दुआ, दुआ साहब, विनोद, आप ज़िंदगी के बदलते गियर के साथ याद आते रहेंगे।

लेखक –रवीश कुमार

महिलाओं से जुड़े अपराध को लेकर हाईकोर्ट का दो टूक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का सरकार क़रे पालन

उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्देश व उसी कड़ी मै पटना हाई कोर्ट द्वारा पारित न्यायिक आदेश के तहत राज्य में सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए व्यवस्था पुख्ता करने कार्रवाई की जा रही है।

इसके लिए थानाध्यक्ष, अंचल पुलिस निरीक्षक, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को जैसे सभी क्षेत्रीय पदाधिकारियों को शिक्षण संस्थानों, बालिका व महिला होस्टल, बाजारों, सार्वजनिक वाहन आदि स्थानों पर महिला पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति करने का निर्देश दिया गया है।

महिलाओं पर होने वाले अपराध की दृष्टि से भेद्य स्थानों पर थाना/ पुलिस अधिकारियों का दूरभाष/ मोबाईल फोन नम्बर का होर्डिंग्स, पर्चा, ब्रोचर व बुकलेट आदि से प्रचार प्रसार करने के लिए निर्देश दिया गया है।

साथ ही इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया के जरिए जन जागरूकता का प्रसार करने को लेकर निदेश दिया गया है।

इन निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए यह आदेश बिहार पुलिस मुख्यालय के कार्मिक व कल्याण प्रभाग द्वारा राज्य के पुलिस उप महानिरीक्षक (कार्मिक ) द्वारा दिया गया है।

इस आदेश की प्रति याचिकाकर्ता वकील ओम प्रकाश को भी प्रेषित किया है।

राज्य सरकार के कार्यशैली पर एक बार फिर हाईकोर्ट ने जतायी नराजगी

पटना हाईकोर्ट ने एक मामले पर सुनवाई के दौरान पटना हाई कोर्ट द्वारा पूछे गए प्रश्न का राज्य सरकार के अधिवक्ता द्वारा कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिए जाने पर राज्य सरकार के किसी जिम्मेदार अधिकारी को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने का आदेश ने दिया है। ये आदेश कमल किशोर प्रसाद की अपील पर जस्टिस राजन गुप्ता की डिवीजन बेंच सुनवाई की।

कोर्ट ने पूर्व में पारित किये गए अदालती आदेश के संबंध में राज्य सरकार का पक्ष रख रहे अधिवक्ता से प्रश्न किया था। कोर्ट ने राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को वैसे अधिकारी को अगली सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया,जो उप सचिव से नीचे का रैंक का न हो।

अपीलार्थी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में विगत 12 अक्टूबर, 2017 को पटना हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की खंडपीठ ने राज्य के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के निदेशक को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने बी आर अम्बेडकर बिहार यूनिवर्सिटी के 14 फिजिकल ट्रैनिंग इन्स्ट्रक्टर को वाइस चांसलर द्वारा 8000 रुपये से 13,500 रुपये वाला पे स्केल दिए जाने सम्बन्ध में जवाब देने का निर्देश दिया।

साथ ही वाइस चांसलर द्वारा की गई कार्रवाई का राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किये जाने व रिट याचिका में रिट कोर्ट द्वारा पारित किये गए आदेश के आलोक में राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के सम्बन्ध में जवाब देने का निर्देश दिया था।

साथ ही राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में फिजिकल ट्रेनिंग इन्स्ट्रक्टर के लिए निर्धारित पे स्केल को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इस मामले पर अगली सुनवाई 13 जनवरी, 2022 को होगी।

महिलाओं को लेकर पुरुषों के नजरिया में कोई बदलाव नहीं आया है

महिलाओं को लेकर कितना संवेदनशून्य है मेरा समाज इसका एहसास मुझे बीजेपी विधायक निक्की हेंब्रममामले में एक बार फिर देखने को मिला ।बिहार विधानसभा सत्र को लेकर आयोजित बैठक के दौरान राज्य की एकमात्र आदिवासी विधायिका निक्की हेम्ब्रम ने आदिवासी समाज में महुआ शराब के प्रचलन और उससे जुड़े रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कुछ कहना चाह रही थी उसी दौरान मुख्यमंत्री ने कहा आप इतनी सुंदर हैं, लेकिन आपको मालूम है कि आदिवासियों के लिए हमने क्या-क्या किया है आप जैसे देखने में हैं उसके ठीक उलट आपका विचार है।

कहने को तो यह सामान्य सी बात है लेकिन मुख्यमंत्री के पद पर बैठे लोगों से ये उम्मीद नहीं कि जा सकती है वैसे नीतीश कुमार को पश्चाताप जरुर हो रहा होगा लेकिन निक्की हेंब्रम को लेकर उन्होंने जो कहां उससे महिलाओं को लेकर उनकी क्या नजरिया है ये जरुर सामने आ गया ।                

उस बैठक में एनडीए के सारे विधायक मौजूद थे लेकिन किसी ने इस बात को लेकर प्रतिकार नहीं किया सब चुप रह गये महिला विधायक को थोड़ा नागवार जरुर गुजरा लेकिन किसी ने भी इस बात को लेकर आवाज उठाना तो दूर काना फूसी से भी बचते नजर आयी।                

लेकिन जैसे ही यह जानकारी मुझे मिली मैं समझ सकता था कि निक्की हेंब्रम किस मानसिक व्यथा से गुजर रही होगी,जब वो राज्य महिला आयोग की सदस्य थी उस वक्त से मेरा इनसे रिश्ता रहा है और मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में सरकार और पार्टी के दबाव के बावजूद जिस तरीके से ये उन लड़कियों के साथ अंतिम क्षण तक खड़ी रही उस दौरान मुझे महसूस हुआ था ये अंदर से कितनी मजबूत है और महिलाओं के अधिकार को लेकर कितनी संवेदनशील है ।                 

लेकिन मैं खुद अंदर से इतना शर्मिदा था कि नजर मिलाना तो दूर बात करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे इस घटना की जब हम अपने मीडिया से जुड़े मित्रों के बीच चर्चा किया और इस खबर को कैसे किया जाए इस पर जब बात करनी चाही तो पता है क्या प्रतिक्रिया आयी निक्की हेंब्रम का खेला लगता है आपको पता नहीं है बहुत घाट की पानी पीये हुए है गुस्सा भी आया लेकिन मैं भी पुरुष हूं महिलाओं को कमजोर करने के लिए बस उसके चरित्र पर सवाल खड़ा हमलोगों की  फ़ितरत है ।           

जिस तरीके से मेरी घेराबंदी की गयी है इसके बावजूद मैंने इस खबर को सबसे पहले सामने लाया नीतीश को गुस्सा क्यों आता है ,नीतीश महिलाओं को लेकर इतने संवेदनहीन कैसे हो सकते ।खैर कल मेरी एक मित्र निक्की हेंब्रम से मिली और मिलने के बाद जैसे ही बाहर आयी मुझे फोन की तुमको मिलना चाहिए वो अंदर से टूट चुकी है और अकेला महसूस कर रही है ।                

मैं विधानसभा में ही हूं लेकिन मुझे साहस ही नहीं हो रहा है वो महिला जो महिला के अधिकार को लेकर खुद सजग रहती है आज वो खुद इसकी शिकार हो गयी  क्या बात करें कैसे शुरुआत करें मुझे पता है वो अंदर से टूट चुकी होगी खैर तुम बढ़िया से खबर चलाई हो शाम होते होते कुछ ना कुछ होगा जरूर ,फिर भी संतोष एक बार तुम फोन से भी बात कर लो उनको भी मजबूती मिलेगी मैं फोन लगा दिया वो फोन काट दी पता किए जो जानकारी मिली कि उपमुख्यमंत्री और भवन निर्माण मंत्री उनसे बात कर रहे हैं  फिर थोड़ी देर बाद निक्की हेंब्रम का बयान आया कि नीतीश कुमार हमारे गार्जियन हैं. दोनों के बीच गलतफहमी पैदा हो गई थी. मिलकर समाधान कर लेंगे. उन्होंने एक गार्जियन रूप में जो भी मुझे समझाने का प्रयास किया, उस चीज से मैं थोड़ी आहत हूं. लेकिन इस इश्यू को लेकर हम लोग जल्द ही बैठेंगे और मसले को बातचीत के माध्यम से निपटा लेंगे।              

इस तरह का बयान आना स्वाभाविक था क्या कर सकती है पार्टी भी इनके साथ खड़ी नहीं है। विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री के काफिला को लेकर मंत्री की गाड़ी को पुलिस ने रोक दिया तो मंत्री जो किये सारी दुनिया देखा बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष जो दिल्ली में हैं और संसद की कार्रवाई भाग ले रहे हैं उनकी प्रतिक्रिया बस चंद मिनटों में उनके फेसबुक वाल पर आ गया मंत्री के साथ यह व्यवहार अफरशाही की प्रकाष्ठा है दोषी अधिकारियों पर तुरंत कारवाई होनी चाहिए लेकिन उनके ही पार्टी की महिला विधायक पर इस तरह कि टिप्पणी के बावजूद अभी तक उनका कोई बयान नहीं आया कोई ट्वीट नहीं आया  खैर थोड़ी देर बाद उनसे बातचीत हुई और लम्बी बातचीत हुई बातचीत के दौरान मुझे महसूस हुआ कि वो अब भी आहत है और उनके शब्द अभी भी लड़खड़ा रहा था ।

हमारे आपके लिए ये छोटी बात हो सकती है अरे ये क्या है किसी सुंदर महिला को सुंदर कह ही दिये तो क्या हुआ ये तो कॉम्प्लीमेंट है ।लेकिन कहने का अंदाज और सदर्भ काफी मायने रखता है ये अलग बात है कि आज की राजनीति में निक्की हेंब्रम जैसी संवेदनशील महिलाएं राजनीति में बहुत कम है या यू कहे तो वो अभी राजनीति को समझ नहीं पाई है नहीं तो मुख्यमंत्री का किसी महिला को लेकर इस तरह की प्रतिक्रिया उस महिला को राजनीति की शिखर पर पहुंचा सकती है लेकिन निक्की हेंब्रम ने जिस तरीके से प्रतिवाद की है राजनीति में कदम रखने वाली महिलाओं को सीख लेनी चाहिए ।

मान गये मंत्री जी

कल तक बिना कारवाई के सदन में नहीं जाने की बात करने वाले बिहार सरकार के श्रम संशाधन मंत्री जीवेश मिश्रा सुबह होते ही क्यों नरम पड़ गये यह सवाल आज सुबह से ही राजनीति के गलियारे में घूम रहा है।

हुआ ऐसा था कि कल विधानसभा सत्र की शुरुआत होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री के सुरक्षा कारकेट जाने के दौरान मंत्री जीवेश मिश्रा के गांड़ी को पुलिस ने रोक दिया था इसको लेकर मंत्री सड़क से लेकर सदन तक हंगामा खड़ा कर दिये विधानसभा अध्यक्ष इस मामले की जांच अपर मुख्यसचिव गृह और डीजीपी को सौप दिया और इस आदेश के आलोक में अपर मुख्यसचिव गृह और डीजीपी कल शाम विधानसभा परिसर में पहुंच कर जांच शुरु कर दिये थे लेकिन जांच रिपोर्ट अभी आयी भी नहीं है उससे पहले ही जीवेश मिश्रा ने कहा कि किसी अधिकारियों के प्रति मेरी नाराजगी न थी, न है. मैंने तो बस जो सम्मान को लेकर मुद्दा है, उसे उठाया है. उम्मीद करता हूं कि किसी प्रकार की कोई नाराजगी आगे होगी भी नहीं।

हलांकि कल देर रात को पटना के डीएम और एसएसपी मंत्री से मिलने उनके आवास गये थे पटना डीएम इससे पहले दरभंगा का डीएम रह चुके हैं और मंत्री दरभंगा जिले से ही विधायक है इसलिए दोनों में पूराना रिश्ता रहा है डीएम के पहल पर रात में ही मंत्री मान गये थे ऐसा कहां जा रहा है ।

पुलिस कर्मियों प्रोन्नति मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

पटना हाई कोर्ट ने बीस सालों से लंबित एक पुलिस कर्मी के प्रोन्नति मामले में जवाबी हलफनामा दायर नहीं करने पर राज्य सरकार पर दस हज़ार रुपये का अर्थदंड लगाया। जस्टिस पी बी बजन्थरी ने रमा कांत राम की याचिका पर यह आदेश दिया।

कोर्ट ने 18 नवंबर को डी जी पी सह विभागीय प्रोन्नति कमेटी के अध्यक्ष को हलफनामा दायर करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दिया था।

इस हलफनामा में यह बताने कहा था कि 23 सितंबर, 1998 के प्रभाव से सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नत हुए याचिकाकर्ता 26 सितंबर, 1995 के प्रभाव से प्रोन्नति के योग्य थे कि नहीं।

साथ ही डी जी पी,बिहार को यह भी बतलाने को कहा गया था कि यदि याचिकाकर्ता द्वारा किये गए दावे के अनुसार प्रोन्नति नहीं दी गई तो, इसकी वजह क्या थी।

याचिकाकर्ता ने 11 दिसंबर, 1998 को पटना हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर अपनी याचिका में कहा था कि वह 26 सितंबर, 1995 के प्रभाव से प्रोन्नति के योग्य हैं।

इस तिथि से अनुसूचित जाति में आने वाले इसके जूनियरों की प्रोन्नति दी गई थी,जबकि याचिकाकर्ता को तीन वर्षों के विलंब के बाद प्रोन्नति दी गई थी।

याचिकाकर्ता बिहार के बंटवारे के बाद झारखंड कैडर का चुनाव किया था और इस तरह से याचिकाकर्ता झारखंड पुलिस का अधिकारी हो गया था।

राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने हलफनामा दाखिल करने के लिए कोर्ट से चार सप्ताह अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया था, इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए अर्थदंड लगाया।

इस मामले में अभी आगे भी सुनवाई की जाएगी।

मंत्री जीवेश मिश्रा को शिवानंद की खरी खरी

जीवेश मिश्रा मंत्री हैं. दूसरी दफ़ा चुनाव जीते हैं. और मंत्री बन गए. यह सौभाग्य सब को नहीं मिलता है. बहुत लोगों की ज़िंदगी राजनीति में गुज़र जाती है. कुछ नहीं मिलता है. सबका सौभाग्य जीवेश जी जैसा कहाँ होता है!

पहली मर्तबा मंत्री बनने वालों में ताव ज़्यादा होता है. उनको लगता है हम सरकार हैं. सरकार तो सरकार है. उसके ऊपर कौन! भला देखिए ! ट्रैफ़िक सिपाही की जुर्रत. सरकार की गाड़ी को रोक दिया ! और सरकार के मुलाजिम कलक्टर और एसपी की गाड़ी को आगे बढ़ा दिया. यह तो सरासर सरकार का अपमान है !

इसी भावना से जीवेश जी ने बहुत रोष में इस मामले को विधानसभा में उठाया. विरोधी पक्ष के विधायकों को बढ़िया मौक़ा मिल गया. उन्होंने भी इस पर खूब लहर काटा. जो पुराने लोग हैं उनके साथ अगर इस तरह की घटना हुई होती तो शायद उसको पचा गए होते.

अब क्या होगा ? गौर से देखिए. कलक्टर और एसपी इस मामले में कहाँ क़सूरवार ठहरते हैं. ट्रैफ़िक के सिपाही ने उनको आगे बढ़ने का सिग्नल दिया और वे बढ़ गए. इस पूरे प्रकरण में जीवेश के रोष का शिकार तो गरीब ट्रैफ़िक का सिपाही बन रहा है.

जबकि जीवेश जी को ताव आया होगा कलक्टर और एसपी के लिए उनकी गाड़ी को रोक दिये जाने पर.
जीवेश जी धीरे धीरे पकठा जाएँगे. उनको समझ में आ जाएगा कि वे तो टेम्परोरी हैं. कलक्टर, एसपी परमानेन्ट हैं. इसलिए बेचारा सिपाही टेम्परोरी को देखे या परमानेन्ट को !

राजनीति में बहुत दिनों से सत्ता के केंद्र को लेकर इंदिरा जी के नाम से एक कहावत चलती है. कहा जाता है कि कभी उन्होंने कहा था कि इस सिस्टम में सत्ता के तीन ही केंद्र हैं. पीएम, सीएम और डीएम. पता नहीं इंदिरा जी ने सचमुच कभी ऐसा कहा था या नहीं. लेकिन बात तो सत्य है.

मंत्री जीवेश मिश्रा की शिकायत की जांच करने अपर मुख्य सचिव गृह और डीजीपी विधानसभा परिसर पहुंचे

मंत्री जीवेश मिश्रा की शिकायत की जांच करने अपर मुख्य सचिव गृह और डीजीपी विधानसभा परिसर पहुंचे जांच के बाद मीडिया से बात करते हुए अपर मुख्य सचिव गृह चैतन्य प्रसाद ने कहा कि ऐसा हो नहीं सकता कि कोई भी पदाधिकारी पुलिस पदाधिकारी माननीय मंत्री जी इज्जत ना करें लेकिन कुछ दिक्कतें हुई है इस पूरे मामले को देखा जा रहा है जा रहा है जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है वही डीजीपी संजीव कुमार सिंघल ने कहा कि वीडियो फुटेज देखा जा रहा है और जांच शुरू कर दी गई है उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

मंत्री को अपमानित करने के मामले में जॉच शुरु

बिहार में डीएपी खाद को लेकर हहाकार सांसद पहुंचे मंत्री के घर

आज पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री और भाजपा सांसद राम कृपाल यादव ने केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ मनसुख लक्ष्मणभाई मांडविया के लोकसभा स्थित संसदीय कार्यालय में मिलकर बिहार में DAP की भारी किल्लत को देखते हुए बिहार सरकार द्वारा वांछित 4 लाख मेट्रिक टन DAP खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु मांग पत्र सौंपा।

मंत्री से मुलाकात के दौरान सांसद राम कृपाल यादव ने कहा कि मेरे संसदीय क्षेत्र पाटलीपुत्र के पालीगंज, दुल्हिन बाजार, बिक्रम, नौबतपुर, मसौढ़ी, धनरुआ, पुनपुन, बिहटा, मनेर, दानापुर और फुलवारीशरीफ प्रखंडों में काफी मात्रा में रबी की खेती होती है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान किसानों ने DAP के अनुपलब्धता के बारे में ध्यान आकृष्ट कराया है।

जब कृषि विभाग बिहार सरकार से इस संबंध में जानकारी ली तो बताया गया कि बिहार सरकार ने रबी सीजन के लिए 4 लाख मीट्रिक टन DAP का डिमांड केन्द्र सरकार को भेजा है।

लेकिन सप्लाई बाधित है। बिहार सरकार द्वारा किसानों को DAP के बदले SSP और यूरिया के कॉम्बिनेशन के प्रयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है।

परंतु किसान भाइयों के तरफ से लगातार दूरभाष पर संदेश प्राप्त हो रहा है कि DAP का भारी संकट है। यह संकट सिर्फ मेरे संसदीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे बिहार में बरकरार है।

ऐसे में बिहार में DAP की भारी किल्लत को देखते हुए बिहार सरकार द्वारा बांछित 4 लाख मीट्रिक टन DAP खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु त्वरित कार्रवाई करने की कृपा की जाय।

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन का विवाद पहुंचा हाईकोर्ट

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में सही तौर से काम- काज किये जाने को लेकर तदर्थ कमेटी बनाने हेतु एक जनहित याचिका पटना हाई कोर्ट में दायर की गई है।यह याचिकाकर्ता अजय नारायण शर्मा ने याचिका दायर की है।

चयनकर्ताओं/ सपोर्ट स्टाफ व बी सी सी आई द्वारा संचालित घरेलू टूर्नामेंट में विभिन्न उम्र के राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडियों को सही तौर से चयन करने को लेकर आदेश देने की माँग भी इस याचिका में किया गया।

याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि प्रबंधन कमेटी में अवैध रूप से कुर्सी पर काबिज लोगों द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है। यह भी आरोप लगाया गया है कि कुर्सी पर कथित रूप से अवैध तौर पर बैठे लोग प्रतिभावान क्रिकेट खिलाड़ियों के दावों को हतोत्साहित कर रहे हैं।

खिलाड़ियों के मनमाने औऱ अनुचित तौर से चयन कर क्रिकेट को बेचने पर उतारू हैं।इसलिए राज्य में खिलाड़ियों की स्थिति और भी खराब होते जा रही है।

इस कारण से खिलाड़ी घरेलू टूर्नामेंट में भी कामयाब नहीं हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बोर्ड ऑफ कंट्रोल फोर क्रिकेट इन इंडिया एंड अदर्स बनाम क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार व अन्य के मामले में सिविल अपील संख्या – 4235 में 9 अगस्त, 2018 को दिये गए फैसले के अनुसार जस्टिस आर एम लोढ़ा कमेटी द्वारा की गई अनुशंसा के आलोक में खिलाड़ियों का सही तौर से चयन करने हेतु क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के गठन करने को लेकर आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

बिहार विधानसभा में गाड़ी रोकने पर भड़के मंत्री कहाँ कौन बड़ा है सदन तय करे

पीने वाले को पीने का बहाना चाहिए जी है आजकल बिहार में बीजेपी और जदयू के बीच कुछ ऐसा ही चल रहा है। बुधवार को सदन में बीजेपी विधायक अफसरशाही को लेकर अपनी सरकार को कटघरे में खड़े कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सफाई देने पर मजबूर किया था और आज मंत्री बड़ा की डीएम बड़ा इसको लेकर सड़क से लेकर सदन तक बीजेपी के मंत्री जीवेश मिश्रा ने ऐसा बवाल काटा कि बिहार विधानसभा अध्यक्ष को इस मामले में डीजीपी और गृह सचिव को सदन में उपस्थित होने का निर्देश जारी किया है ।

मंत्री जी को गुस्सा क्यों आया

मंत्री जीवेश मिश्रा का कहना है कि एसपी और डीएम की गाड़ी के कारण मंत्री की गाड़ी रोकना कहां का कानून है? जिस अधिकारी ने गाड़ी रोकी है उसका सस्पेंशन नहीं होगा मैं सदन के अंदर नहीं जाऊंगा हालांकि पार्टी के वरिष्ट मंत्री के हस्तक्षेप के बाद मंत्री सदन के अंदर तो आये लेकिन इस मसले को लेकर जमकर भड़ास निकाला इस दौरान सत्ता पक्ष के विधायक के साथ साथ विपक्ष के विधायक भी मंत्री के पीड़ा के साथ खड़े दिखे ।

विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ लेकिन बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की जो प्रतिक्रिया फेसबुक पर आयी है उससे एक बार फिर मामला गरमा गया है।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पर लिखा है कि माननीय मंत्री श्री जीवेश मिश्रा जी के साथ विधानसभा प्रांगण में जो भी घटना घटी है उस पर मुझे पूरा विश्वास है की विधानसभा अध्यक्ष अवश्य ही संज्ञान लेंगे।

मंत्री जी सदन में क्यों आपा खो दिये

मुख्य सचिव द्वारा यह कहा जाता है कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान जिलाधिकारी और आरक्षी अधीक्षक को करना है। पर जो अफसर सामान्य शिष्टाचार का भी पालन नहीं करते हैं उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती है।

आईएएस और आईपीएस अधिकारी पूरे भारत में जनता एवं जनप्रतिनिधियों के साथ हर तरह के शिष्टाचार का पालन करते हैं पर बिहार में कुछ अफसर पब्लिक सर्वेंट अर्थात जनता के सेवक के बदले राजतंत्र की तरह व्यवहार करते हैं।

कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री जी ने भी आईपीएस प्रशिक्षुओं को यह बताया था कि उनका व्यवहार जनता एवं जनप्रतिनिधियों के प्रति कैसा होना चाहिए। संजय जायसवाल के इस पोस्ट के बाद बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गयी है ।

पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के निर्वाचन की वैधता को लेकर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

पटना हाई कोर्ट ने राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सह विधायक तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस बीरेंद्र कुमार ने इस चुनाव याचिका पर सुनवाई की।

विधायक तेज प्रताप यादव के हसनपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उनके निर्वाचन को विजय कुमार यादव ने चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दी है।

आज गवाह गरीब मालाकार की गवाही हुई। गरीब मालाकार का सभी संबंधित पक्षों द्वारा परीक्षण और जिरह किया गया।
तेजप्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने जिरह किया।

तेज प्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने आगे बताया कि याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि एक्ट, 1951 की धारा 100 का हवाला देते हुए तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को अमान्य करार देने के लिए चुनाव याचिका दायर किया है।

याचिकाकर्ता ने श्री यादव के निर्वाचन को अमान्य करार देकर हारे हुए जद यू के उम्मीदवार राज कुमार राय को विजयी घोषित करने की माँग इस चुनाव याचिका में की हैं।

यह मामला वर्ष 2020 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव से सम्बंधित है। याचिका दायर करने का आधार श्री यादव द्वारा जानबूझकर अपनी संपत्ति के संबंध में नामांकन पत्र के साथ संपत्ति को लेकर हलफनामा में जानकारी छुपाना बताया गया है।
याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि क़ानून की धारा 123(2) के अनुसार इसे भ्रष्ट आचरण बताया है।

इस विधानसभा में चुनाव 3 नवंबर, 2020 को विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ था। 10 नवंबर, 2020 को चुनाव परिणाम घोषित किया गया था, जिसमें तेज प्रताप यादव हसनपुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र से विजयी हुए थे।

अब इस मामले पर अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।

फ्टना में कचड़ा प्रबंधन को लेकर हुई सुनवाई

पटना हाई कोर्ट ने पटना के संपतचक बैरिया में स्थापित किये जाने वाले कचड़ा प्रबंधन प्रोजेक्ट को हटाने के मामलें पर सुनवाई करते हुए बिहार स्टेट पॉल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया है। जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने सुरेश प्रसाद यादव व अन्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान पटना नगर निगम अधिवक्ता प्रसून सिन्हा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में किसी प्रकार की अनियमितता या विधि विरुद्ध कार्य नहीं किया गया है।

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता का कहना था कि इस प्रोजेक्ट के लिए कोई न तो आवेदन दिया गया है और न ही अनुमति ली गई है। कोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड के अधिवक्ता से मौखिक रूप से कहा कि आपको कार्रवाई करने से कौन रोक रहा ? कार्रवाई कीजिये।

पूर्व की सुनवाई में ही याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्रीप्रकाश श्रीवास्तव ने खंडपीठ को बताया था कि उक्त प्रोजेक्ट को स्थापित करने के लिए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण से सहमति भी नहीं लिया गया है। इस वजह से एक ओर वायु प्रदूषण फैल रहा है तो दूसरी ओर कृषि योग्य भूमि पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

याचिका में कहा गया है कि आखिर किस कानूनी अधिकार के तहत पंचायत क्षेत्र में पड़ने वाले इस जगह का चयन कचड़ा प्रबंधन प्रोजेक्ट के लिए किया गया है ? याचिका में यह भी प्रश्न खड़ा किया गया है कि क्या कृषि भूमि पर स्थापित किये जाने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए बैरिया कर्णपुरा पंचायत राज से किसी भी प्रकार की अनुमति ली गई है ?

नगर विकास व आवास विभाग के कमिश्नर, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व पटना नगर निगम से स्पष्टीकरण पूछने सह शो – कॉज करने का आग्रह भी इस याचिका के जरिये किया गया है।

प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण किये जाने के पूर्व पंचायत राज बैरिया के ग्राम सभा द्वारा एक बैठक भी 29 दिसंबर, 2006 को बुलाई गई थी, जिसमें इस प्रोजेक्ट को लेकर विरोध किया गया था।

इस मामले पर आगे की सुनवाई अब अगले वर्ष जनवरी माह में की जाएगी।

लोकसभा में मखाना का जीआई टैग मिथिला मखाना के नाम करने का मुद्वा उठा

लोकसभा में दरभंगा सांसद गोपाल जी ठाकुर ने शून्यकाल के दौरान “मखाना” का जीआई टैग “मिथिला मखाना” के नाम पर करने का मुद्दा उठाया*

आज लोकसभा में शून्यकाल के दौरान दरभंगा सांसद डॉ गोपाल जी ठाकुर ने मिथिला और मैथिल की पहचान “मखाना” का जीआई टैग “मिथिला मखाना” के नाम से करने के विषय को सदन के पटल जोरदार तरीके से रखा। उन्होंने कहा कि बीते बजट सत्र में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से भी मखाना का जी.आई. टैग ‘मिथिला मखाना’ किये जाने हेतु प्रश्न किया था, जिसके उत्तर में विभागीय राज्यमंत्री सोम प्रकाश जी ने कहा कि बिहार मखाना के प्रस्ताव को आवेदक ने संशोधित कर मिथिला मखाना का प्रस्ताव जी आई टैग के लिए दिया है।

मखाना के जीआई टैग का मामला संसद में उठा

विदित हो कि मखान व मखाना का जियोग्राफिकल इंडिकेशंस(जी.आई.) टैग मिथिला मखाना के नाम से किये जाने हेतु सांसद श्री ठाकुर ने पूर्व में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल जी को दिनांक 24 अगस्त 2020 को पत्र लिखा एवं दिनांक 29 अगस्त 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग(वर्चुअल) के माध्यम से भी आग्रह किया था, जिस पर मंत्री ने सकारात्मक संदेश भी दिया था। इसके अलावा मखाना के जियोग्राफिकल इंडिकेशंस (जी.आई.) टैग को लेकर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के विभिन्न अधिकारियों से भी दूरभाष पर बात कर चुके है।
विदित हो कि सांसद गोपाल जी ठाकुर पहले भी इस विषय को लोकसभा में शून्य काल में उठा चुके है।

सांसद ने कहा कि मिथिला की पहचान व प्रमुख फसल मखाना की उपज मुख्य रूप से सिर्फ मिथिला क्षेत्र में ही होती है, पूरे देश के उत्पादन का लगभग 80 से 90 फीसद उपज मिथिला के इस विशाल क्षेत्र में होती है। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से मिथिला क्षेत्र में उपजने वाले मखाना का जीआई टैग मिथिला मखाना के नाम से ही होना उचित है।

सांसद गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि मखाना की महत्ता को देखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार द्वारा 28 फरवरी 2002 को मिथिला के केंद्र दरभंगा में राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई थी, ताकि मखाना का विकास उच्च स्तर पर हो सके। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने मिथिला क्षेत्र के इस प्रमुख फसल मखाना के वैश्विक मांग को देखते हुए इसके व्यापार को अंतराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की बात भी कही है तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त करते हुए आर्थिक मजबूती प्रदान करने हेतु वोकल फॉर लोकल का आवाह्न किया ताकि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिले।

श्री ठाकुर ने कहा कि मखाना मिथिला व 8 करोड़ मिथिलावासियों की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, इसीलिए मखाना का जी.आई. टैग मिथिला मखाना के नाम से होने पर आठ करोड़ मिथिलावासी गौरवान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से मिथिला क्षेत्र में उपजने वाले ‘मखाना’ का जी.आई. टैग ‘मिथिला मखाना’ के नाम से ही होना उचित है, ताकि मिथिला क्षेत्र की संस्कृति और पहचान बनीं रहे।

हाईकोर्ट ने दरोगा बहाली पर लगाया रोक़

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में 2446 दारोगा की बहाली पर रोक लगा दी है, यदि उनकी बहाली नहीं हुई हैं।जस्टिस पी बी बजन्थरी ने सुधीर कुमार गुप्ता व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार व बिहार राज्य सब ordinate पुलिस सर्विस कमीशन से जवाबतलब किया है।कोर्ट को बताया गया कि 268 ऐसे उम्मीदवार हैं,जो प्रारंभिक,मुख्य व शारीरिक परीक्षा में सफल घोषित हुए,लेकिन बाद में उन्हें सफल उम्मीदवार की सूची से बाहर कर दिया गया।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि 1 अगस्त,2021 प्रकाशित मेरिट लिस्ट में इन 268।उम्मीद्वारों का नाम था।उस समय कट ऑफ मार्क्स 75.8 रहा।उसके बाद जो सूची जारी हुई,उसमें कट ऑफ मार्क्स 75 था,लेकिन इन 268 उम्मीदवार के नाम सफल अभ्यर्थियों की सूची में नहीं थे।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि जब इन उम्मीद्वारों को 75.8 के कट ऑफ मार्क्स पर सफल उम्मीद्वारों की सूची में शामिल थे,लेकिन जब कट ऑफ मार्क्स 75 हो गया,तो इन्हें सफल अभ्यर्थियों की सूची में नहीं शामिल किया गया।
इस मामलें पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।

सरकार के कामकाज पर हाईकोर्ट ने जतायी नराजगी

पटना हाई कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन कर आदेश पारित करने के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के चीफ सेक्रेट्री को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जस्टिस पी बी बजन्थरी ने अनिल कुमार शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की।।

नवादा में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित रहे याचिकाकर्ता अनिल कुमार शर्मा के ट्रैप केस में पकड़े जाने पर निगरानी विभाग द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई थी।उसी प्राथमिकी को आधार बनाते हुए विभागीय कार्रवाई की गई। लेकिन, चार्ज मेमो के साथ न ही गवाहों की सूची दी गई और न ही कागजातों की सूची आवेदक को दी गई थी।

याचिकाकर्ता के वकील अशोक कुमार ने बताया कि यह बिहार क्लासिफिकेशन कंट्रोल अपील रूल की धारा 17(3) और 17(4) का स्पष्ट रूप से उल्लंघन है। बगैर नियम का पालन किए ही याचिकाकर्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

इतना ही नहीं, अपीलीय अधिकारी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के द्वारा भी अनिल कुमार शर्मा की बर्खास्तगी के खिलाफ दायर अपीलवाद में उठाए गए बिंदुओं की समीक्षा किए बगैर ही निरस्त कर दिया।
यह बिहार क्लासिफिकेशन कंट्रोल अपील रूल 24 का स्पष्ट रूप से उल्लंघन है।

इसलिए, कोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश और अपील के आदेश को अवैध करार देते हुए याचिकाकर्ता को तत्काल प्रभाव से सेवा में वापसी का आदेश पारित किया।

साथ ही अवैध आदेश पारित करने वाले पदाधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने का आदेश राज्य सरकार के मुख्य सचिव को दिया हैै। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया।

विचाराधीन कैदी की जेल से शीघ्र रिहाई को लेकर सदन में उठा सवाल

औरंगाबाद सांसद सुशील कुमार सिंह आज जीरो ऑवर में लोकसभा में देश भर के लोगो के से जुड़े महत्वपूर्ण मामला को उठाया सांसद ने कहा कि देश भर के विभिन्न जेलों में लाखों की संख्या में ऐसे बंदी है जिनके ऊपर जो मुकदमे हैं उन मुकदमों के आधार पर उनको जो अधिकतम सजा मिल सकती है

औरंगाबाद सांसद सुशील सिंह ने सदन में विचाराधीन कैदी का मामला उठाया

चाहे वह दो साल का हो या पाँच साल या सात साल का हो या तो मुकदमों की सुनवाई नहीं हुई या उसके फैसले नहीं आए फिर सुनवाई भी हो गई और उनको छुड़ाने वाला कोई नहीं है उनका जमानतदार बनने के लिए कोई तैयार नहीं है ऐसे लोग उनके विरूद्ध मुकदमा के निर्धारित सजा से अधिक दिनों से जेल में है

मेरा आपके माध्यम से इस सर्वोच्च सदन के माध्यम से भारत सरकार से यह निवेदन आग्रह है कि ऐसे लाखों की जेलों में बंद बंदियों को भारत सरकार विभिन्न अवसरों पर चाहे वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी,एवं डॉ० श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जयंती या पुण्यतिथि या किसी ऐसे विशेष अवसर पर ऐसे बंदियों को रिहा किया जाए

मेरा सरकार से आग्रह होगा कि देश भर से ऐसे कैदियों की सूची बना कर विशेष अवसरों पर क्रमवार तरीके से ऐसे कैदियों की रिहाई सुनिश्चित की जाए सांसद लगातार देश भर के लोगो के हित से जुड़े महत्वपूर्ण मामले को सदन में उठाते रहते है और सदन के माध्यम से भारत सरकार को अवगत कराते रहते है।

एनएच 107 का काम 2022 में पूरा हो जायेगा मंत्री गडकरी ने राज्यसभा में की घोषणा

भारतीय जनता पार्टी के सांसद एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी के राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि एन.एच.107 महेशखूंट (खगड़िया) से मारंगा (पूर्णिया) 177.96 कि.मी. जो 1115.23 करोड़ की लागत से बन रहा है वह एक साल विलंब हो गया है और अब दिसंबर 2022 तक पूरा हो सकेगा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि एन.एच.107 के पैकेज 1 जो महेशखूंट- चौथम- सोनवर्षा-सिमरी बख्तियारपुर- सहरसा-मधेपुरा 90 कि.मी. है जिसपर 949.26 करोड़ व्यय होना था अभी तक मात्र 17.70 प्रतिशत कार्य हुआ है तथा 152.17 करोड़ व्यय हुए हैं।

पैकेज 2 के अंतर्गत मधेपुरा- मुरलीगंज- जानकीनगर- बनमनखी- बनिया पट्टी-मारंगा (पूर्णिया) 87.96 कि.मी. है में मात्र 16.03 प्रतिशत कार्य हुआ है तथा 1165.97 लागत के विरुद्ध 156.47 करोड़ व्यय हुआ है।

श्री गडकरी ने मोदी को बताया कि ठेकेदार की खराब स्थिति, अभूतपूर्व वर्षा, भूमि अधिग्रहण में विलंब, कोबिड आदि के कारण जो कार्य दिसंबर 2021 में पूरा होना था वह अब एक वर्ष बाद दिसंबर 2022 में पूरा हो सकेगा।

शराब माफिया से सांठगांठ के आरोपी थाना अध्यक्ष के पास करोड़ो की सम्पत्ति EOU के छापेमारी में हुआ खुलासा

आर्थिक अपराध शाखा (EOU) की टीम ने शराब कारोबारी से मिली भगत के आरोप में वैशाली जिले में लालगंज के थानेदार चंद्रभूषण शुक्ला के ऊपर अपना शिकंजा कस दिया है। इनके 3 ठिकानों पर एक साथ रेड की गई है। EOU की एक टीम लालगंज में है, जो थाने के ऑफिस और वहां के घर को खंगाल रही है।

दूसरी टीम छपरा के घर पर मौजूद है। वहीं, तीसरी टीम सीवान जिले के रघुनाथपुर स्थित पुश्तैनी घर पर छापेमारी कर रही है। लालगंज के थानेदार चंद्रभूषण शुक्ला पर शराब माफियाओं से साठगांठ का आरोप है।

EOU के ADG नैयर हसनैन खान के अनुसार थानेदार चंद्रभूषण शुक्ला लगातार शराब का अवैध धंधा करने वालों की मदद कर रहा था। सरकारी पद पर बैठ कर भ्रष्टाचार में लिप्त था। मदद करने के एवज में उसने मोटी कमाई की है। ब्लैक मनी में जरिए बड़े स्तर पर चल-अचल संपत्ति बनाई है।

इसके कारनामों की जानकारी पुलिस मुख्यालय तक पहुंची। जिसके बाद मामला EOU को सौंपा गया। फिर अंदरूनी तरीके से थानेदार गतिविधियों की जांच कराई गई। इसमें मामला सही पाया गया।

छापेमारी में थानेदार की पत्नी के नाम से बेतिया में एक आवासीय भूखंड एक कृषि भूखंड और पिता के नाम से छपरा में एक आवासीय मकान पाया है जिन्हें खरीदने में 42 लाख से ज्यादा खर्च किया है ।

पत्नी के नाम से बैंक खातों में 11 लाख से ज्यादा जमा किए गए हैं इनके पास से छापेमारी में बीमा पॉलिसियों का प्रीमियम म्यूच्यूअल फंड तथा वाहन क्रय में 34 लाख रुपये से ज्यादा ब्यय किए गए हैं

आर्थिक अपराध इकाई ने छापेमारी में अन्य मदों में 13 लाख रुपये से ज्यादा का ब्यय का सबूत भी पाया है श्री शुक्ला का वेतन अनुसूत्र से करीब 64 लाख की आय है कुल अर्जित परिसंपत्ति 89 लाख 46 हजार पाई गई है शुक्ला की आय से अधिक स्रोतों से करीब 93% अधिक संपत्ति पाई गई है तलाशी में 9 बैंक खातों से संबंधित कागजात दो लॉकर जमीन का दस्तावेज नगद 92 हजार रुपये और कई निवेश के कागजात मिले हैं ।

बीजेपी और जदयू के बीच खटास खुल कर सामने आये हैं

बिहार में बीजेपी और जदयू के बीच सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है यह विधानसभा सत्र के दौरान खुलकर सामने आ गया आज सदन में जिस तरीके से भ्रष्टाचार और अफरशाही को लेकर बीजेपी विधायक के निशाने पर नीतीश थे उससे यह साफ हो गया कि आने वाले समय में तल्खी और बढ़ेगी।          

नीतीश कुमार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे पर सवाल खड़े करते हुए दरभंगा से बीजेपी के विधायक संजय सरावगी ने सवाल किया कि ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता के पास से 70 लाख से अधिक रुपये बरामद होता है लेकिन उस पर कार्यवाही करना तो दूर उसे छुट्टी पर जाने कि इजाजत दे दी जाती है ।                            

विधायक के इस सवाल पर बिहार विधानसभा के अध्यक्ष ने भी कहा कि ये तो सरकार के साख का सवाल है फिर क्या था सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया और राजद और भाजपा एक साथ भ्रष्ट अभियंता के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग करने लगे।                  

अभी तक अभियंता पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई इसको लेकर विभागीय मंत्री सदन को संतुष्ट नहीं कर पाये और अंत में विधानसभा अध्यक्ष ने एक जांच कमिटी गठित करने की घोषणा कर दी। इसी तरह अफरशाही को लेकर बीजेपी विधायक हमलावर दिखे स्थिति यह हो गयी कि मुख्यमंत्री को खुद आकर जवाब देना पड़ा हालांकि इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश मिश्रा पर काफी तल्ख टिप्पणी कर दिये ।                              

लेकिन इस सब से इतर कल बीजेपी विधायक दल की बैठक में खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम ने आप्त सचिव के यहां छापेमारी की वजह बताया उसको लेकर बैठक में मौजूद विधायक और मंत्री हैरान रह गये ।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी की और मंत्री जनक राम से पुछा गया कि आपके आप्त सचिव के यहां छापामारी हुई है भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं इस पर मंत्री ने कहा कि बालू टेंडर को लेकर विभाग के अधिकारी एक खास कंपनी को मदद करने को लेकर लगातार दबाव बना रहे थे मैं सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आलोक में टेंडर का दर पिछले टेंडर के दर से बढ़ाने का निर्देश दिया ।                     

लेकिन इसके लिए विभाग तैयार नहीं था और इसी विवाद की वजह से आप्त सचिव के यहां छापा मारा गया हालांकि मंत्री से जब अधिकारिक तौर पर सवाल किया गया तो यह कहते हुए निकल गये कि आप लोगों से बेहतर कौन जान सकता है वैसे इस मामले में सच्चाई क्या है उससे पार्टी को अवगत करा दिये हैं ।

बिहार में बोतल है और बोतल में बिहार है-रवीश कुमार

बिहार में बोतल है और बोतल में बिहार है-रवीश कुमार
बिहार एक अदृश्य बोतल के आतंक की गिरफ़्त में है। हर कोई सतर्क है कि कहीं बोतल न दिख जाए। बोतल मिल जाने की आशंका में हर किसी को हर जगह बोतल नज़र आ रहा है। हर कोई एक दूसरे के बग़ल में झांक रहा है कि कहीं उसके पास बोतल तो नहीं है।

कोई मिलने आ रहा है तो लोगों की नज़र उसके हाथ और झोले पर है कि कहीं बोतल तो नहीं है। पार्किंग में खड़ी कार देखते ही लोग सहम जा रहे हैं कि डिक्की में बोतल तो नहीं है।

स्टेशन से रिश्तेदार अटैची लिए चले आ रहे हैं, लोग डरने लग जा रहे हैं कि कहीं बोतल तो नहीं है। एक ज़माना था जब दिल्ली में बस की सीट के पीछे लिखा था कि आपकी सीट के नीचे बम हो सकता है। बैठने वाला सीट के नीचे झांकने लगता था। बम देखने लगता था।

उसी तरह बिहार के लोग बोतल देखने लगे हैं। बोतल का नहीं मिलना अब अच्छा माना जा रहा है।
विधानसभा के प्रांगण में बोतल मिल गया। इस तरह से हंगामा हुआ, जैसे मंगल ग्रह का एक टुकड़ा आ गिरा हो। सदन के बाहर और भीतर हंगामा मच गया कि बोतल मिल गई है।

हालाँकि बोतल कई चीज़ों की होती है लेकिन बिहार में हर बोतल प्रथम दृष्टया शराब की बोतल ही समझी जा रही है। विधानसभा में बोलते मिलते ही तेजस्वी ट्वीट कर देते हैं कि शराबबंदी फेल हो गई है। किसी ने पी ली है। बस बोतल से सरकार को ठेस लग गई।

मुख्यमंत्री सबको हड़का रहे हैं कि मामूली बात नहीं है कि यहाँ बोतल मिली है। जाँच होगी।स्पीकर महोदय, इजाज़त दीजिए, जाँच करेंगे कि आपके परिसर में बोतल कैसे मिल गई है। ऐसे पूछने पर तो कोई भी ख़ुद पर ही शक करने लगेगा कि भाई कहीं मेरा ही नाम न आ जाए। सदस्य राम राम जपने लगेंगे कि स्पीकर जी इजाज़त मत दीजिए। बोतल मिल गई है तो मिल गई है।

बिहार में बोतल मिल रही है लेकिन विधानसभा में बोतल का मिल जाना, सारी कल्पनाओं की पराकाष्ठा है। कवि भी बोतल मिलने पर कविता लिख रहे हैं लेकिन विधानसभा में बोतल मिलेगी उनकी किसी कविता में नहीं आया है। मेरा यह लेख पढ़कर बिहार हंस रहा है।

घर-घर चोरी चुपके बोतल पहुँचाने वाले हंस रहे हैं। पीने वाले हंस रहे हैं। बोतल की तरह लुढ़क रहे हैं।लोट-पोट हो रहे हैं। कह रहे हैं कि बिहार में भगवान मिल जाएँ तो मिल जाएँ मगर बोतल नहीं मिलनी चाहिए।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी का ग़ुस्सा देखकर मैं भी सीरीयस हो गया हूँ। मैंने भी बोतलों से प्रार्थना की है कि भाई तुम कहीं दिखो लेकिन उनके सामने मत दिखो।

कुछ भी है हम लोगों के सीएम हैं, बोतल देखकर ग़ुस्सा जा रहे हैं। मुझे आशंका है कि किसी दिन बीजेपी ने जदयू से गठबंधन तोड़ा तो बोतल लेकर नीतीश जी को चिढ़ाने न आ जाए। ऐसा होगा तो मुझे बुरा लगेगा।

भाई आप गठबंधन तोड़िए, आपका हक़ है लेकिन बोतल से नीतीश जी का मज़ाक़ मत उड़ाइये। बीजेपी वालों से अनुरोध है कि राजनीति में गठबंधन तो बनते टूटते हैं लेकिन जब भी ऐसा हो बोतल लेकर कोई प्रदर्शन न करें।

क्या ऐसा हो सकता है कि बीजेपी के नेता ख़ुद बोतल लेकर न चिढ़ाए, किसी और संगठन को आगे कर नीतीश जी के घर के आगे बोतल फेंकवा दें। मन में तरह-तरह की आशंकाएँ पैदा होती रहती हैं।

शुभ-शुभ बोलिए रवीश कुमार। ऐसा मत कहिए। बोतल से कहिए कि बिहार में रहे लेकिन मुख्यमंत्री के आस-पास न रहे। अरे ये क्या कह दिया। बोतल से कहिए कि बिहार में भी न रहे।

ख़्याल तो ख़्याल है।पता चला हमारे सीएम दिल्ली में किसी बारात में आए हुए हैं और लोग बोतल लेकर फ़ोटो खिंचाने आ गए हैं। मैं तो सलाह दूँगा कि नीतीश जी साथ में एक हंटर लेकर भी चलें।

दिल्ली की शादी में जो भी बोतल लेकर फ़ोटो खिंचाने आए, मार हंटर, मार हंटर वहीं पर उसका हाथ बेहाल कर दें। दरअसल, राजनीति में बोतल इस तरह उपस्थित है कि उसकी अनुपस्थिति को लेकर आप आश्वस्त नहीं हो सकते हैं। बोतल ही है, कहीं से आ सकती है। किसी के पास से मिल सकती है।

मुझे आशा है कि आप बोतल का मतलब शराब की बोतल ही समझ रहे हैं। वैसे बिहार में बोतल का एक और मतलब होता है। बेवकूफ होता है। बिहार में लोग किसी को बोतल बुला दें तो उसे बुरा लग जाता है। दोस्तों के बीच बोतल समझा जाना बहुत बुरा माना जाता है। उस बिहार में जहां बोतल से इतनी विरक्ति हो, बोतल मिल जाए तो लोग बोतल हो जा रहे हैं। उछल-कूद मचाने लगे हैं।

बोतल दिखते ही मेरा बिहार बोतल हो जा रहा है। सहम जाता है। आप किसी चलती-फिरती सड़क पर जाइये। बीच सड़क पर बोतल रख दीजिए, देखिए अफ़रा-तफरी मचने लगेगी। लोग कार से कूद कर भाग जाएँगे कि कहीं पुलिस न देख ले कि उनकी कार के सामने बोतल रखी हुई है।

इससे शक हो सकता है कि कार वाले ने पीने के बाद बीच सड़क पर बोतल रख दी हो। लोग रात भर जाग रहे हैं कि कोई अहाते में बोतल न फेंक जाए। सुबह होते ही पता चला कि जेल चले गए। शादियों में जो लोग छिप कर बोतल पीते थे, वे अब बोतल देखते ही छिप जा रहे हैं।

हर कोई बोतल से छिप रहा है जबकि लोग पहले इस बोतल को बाज़ू में रखकर छिपा लेते थे।
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल। बिहार में उल्टा हो रहा है। बोतल नाच नहीं रही है। बोतल के पीछे बिहार नाच रहा है। शराब का नशा तो सीमा से लगे राज्यों में है।

केवल बोतल है जो बिहार में है। जहां बोतल नहीं है वहाँ भी लोग बोतल देख रहे हैं। बिहार में बोतल आ गया है और बोतल में बिहार समा गया है। नीतीश जी को बोतलों से बचाना है। हमने तो अब यही ठाना है।
अंत में, आदरणीय नीतीश जी, प्लीज़। अब आगे कुछ नहीं कहूँगा।

लेखक–रवीश कुमार

पंचायत चुनाव में उपमुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक के रिश्तेदारों को जनता ने नकारा

#बिहारपंचायतचुनाव के 9वें चरण की मतगणना का काम चल रहा है इस चरण में भी मतदाताओं ने पूराने चेहरे से दूरी बनाये रखा साथ ही विधायक और मंत्री के रिश्तेदार को भी हराने से परहेज नहीं किया ।

नौतन प्रखंड के बैकुंठवा पंचायत के बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद की पुत्रवधू रंजीता देवी मुखिया का चुनाव हार गई हैं। बैकुंठवा पंचायत से अफरोज आलम ने रंजीता देवी को हराकर जीत दर्ज की है।

नौतन के जिला परिषद क्षेत्र संख्या 35 से डिप्टी सीएम रेणू देवी के भाई अनिल कुमार उर्फ मंटू हार गए हैं। उन्हें बाल्मीकि नगर सांसद सुनील कुमार के बड़े भाई मनोज कुमार कुशवाहा ने हराया है।

भोजपुर जिले के कोइलवर ब्लॉक से कोइलवर दक्षिण के ब्लॉक संख्या 30 से जिप सदस्य के पद पर चुनाव लड़ रही 24 साल की युवा उम्मीदवार परिधि गुप्ता जिला परिषद के पोस्ट से जीत गई है. परिधि को 11870 वोट मिले है. वहीं दूसरे स्य्हां पर अंजू कुमारी है. जिनको 7151 वोट मिला है।

परिधि कोइलवर के चांदी गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता प्रदीप कुमार गुप्ता रेलवे में सेक्शन इंजीनियर हैं और फिलहाल वाराणसी में पोस्टेड हैं। उनकी मां रेखा देवी पहले जगदीशपुर से जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं।

परिधि ने तमिलनाडु से MBA किया है। इसके बाद साल 2018 में नीदरलैंड की एक कंपनी में बतौर बिजनेस एनालिस्ट काम किया। वो BYJU में भी असोसिएट के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। अब लाखों रुपए के पैकेज छोड़कर गांव की राजनीति में उतरी हैं।


चुनाव परिणाम का अपडेट–
1—-खगड़िया में 22 साल की आकांक्षा मुखिया बन गई हैं। वह बीपीएससी की तैयारी कर रही हैं। सहरसा के सोनबरसा राज विधानसभा के जदयू विधायक रत्नेश सादा के बेटे का मुखिया बनाने के सपना टूट गया। वह तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, मधेपुरा के बिहारीगंज से JDU विधायक निरंजन कुमार मेहता की पत्नी भी मुखिया का चुनाव हार गईं।

भोजपुर जिले के कोइलवर ब्लॉक से कोइलवर दक्षिण के ब्लॉक संख्या 30 से जिप सदस्य के पद पर चुनाव लड़ रही 24 साल की युवा उम्मीदवार परिधि गुप्ता जिला परिषद के पोस्ट से जीत गई है. परिधि को 11870 वोट मिले है. वहीं दूसरे स्य्हां पर अंजू कुमारी है. जिनको 7151 वोट मिला है।

2—सीवान से लकड़ीं नबीगंज प्रखंड की डुमरा पंचायत से ब्रजेश सिंह, ब्लडीहा पंचायत से रमेश राम, भादा खुर्द पंचायत से रिपु देवी, भोपतपुर पंचायत से सरवरी खातून, लखनौरा पंचायत से शहाबुन निशा मुखिया के पद पर विजयी।

3—गोपालगंज बिशुनपुर पक्ष्मी पंचायत के मुखिया प्रत्याशी मुकुंद पासवान विजयी।664 वोट से हुए विजयी।

4—सहरसा के सोनबरसा राज विधानसभा के जदयू विधायक रत्नेश सादा के बेटे का मुखिया बनाने के सपना टूट गया। वह भी खुद के गृह पंचायत से। चुनाव जीतना तो दूर वो मुख्य मुकाबले में भी नहीं आ सके। वह तीसरे स्थान पर रहे।

5—पश्चिम चंपारण के नौतन में बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद की पुत्रवधु रंजीता देवी मुखिया का चुनाव हार गईं हैं। वे बैकुंठवा से चुनाव मैदान में थीं। वहां अफरोज नैयर मुखिया बने हैं। उधर, समस्तीपुर के वारिसनगर की नियारपुर पंचायत के मुखिया प्रत्याशी अरविंद कुमार साह जीते। रहुआ पश्चिमी पंचायत से मुखिया प्रत्याशी वशिष्ठ राउत की जीत।

6—नवादा के हिसुआ की विधायक नीतू कुमारी की दो देवरानी पंचायत चुनाव हार गईं हैं। पूर्व जिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष आभा देवी हिसुआ पश्चिमी सीट से जिला परिषद का चुनाव हारीं।

वहीं छोटी देवरानी प्रियंका कुमारी नरहट पंचायत से मुखिया का चुनाव हारीं। पूर्व में विधायक की सास यहां से मुखिया थीं। मो. एहतेशाम गुड्डू मुखिया निर्वाचित हुए। हिसुआ पश्चिमी से उमेश यादव जीते। यहां से निवर्तमान पार्षद वीरेंद्र सिंह को भी हार का सामना करना पड़ा है।

भोजपुर जिले के कोइलवर ब्लॉक से कोइलवर दक्षिण के ब्लॉक संख्या 30 से जिप सदस्य के पद पर चुनाव लड़ रही 24 साल की युवा उम्मीदवार परिधि गुप्ता जिला परिषद के पोस्ट से जीत गई है. परिधि को 11870 वोट मिले है. वहीं दूसरे स्य्हां पर अंजू कुमारी है. जिनको 7151 वोट मिला है।

इंझारपुर जज मारपीट मामले की जॉच सीआईडी करेगी हाईकोर्ट का आदेश

पटना हाईकोर्ट ने झंझारपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार – I पर किये गए कथित आक्रमण और मारपीट की घटना के मामले की जांच का जिम्मा सी आई डी को सौंप दिया हैं। जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए बिहार पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि मधुबनी के एस पी क्यों नहीं स्थानांतरित किया गया।कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या पुलिस अधिकारी मनमानी कार्रवाई कर सकते हैं।

कोर्ट ने सी आई डी को जांच का जिम्मा सौपा और कहा कि इस मामले की जांच एस पी स्तर के अधिकारी करेंगे।साथ ही इस मामले की निगरानी सी आई चडी के ए डी जी खुद करेंगे।

कोर्ट ने अगली सुनवाई मे जांच का पूरा ब्यौरा सील लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश सी आई डी को दिया।

कोर्ट ने इस मामले मे सुनवाई में मदद करने के लिए वरीय अधिवक्ता मृगांक मौली को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। साथ ही कोर्ट मास्टर को आज ही इस मामले से सम्बन्धित कागजात समेत कोर्ट मे राज्य सरकार द्वारा पेश रिपोर्ट उन्हें देने का आदेश दिया है।

इस मामलें पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट किया था कि राज्य की पुलिस दोनों पक्षों के मामलों को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से अनुसंधान करने में सक्षम है। एड्वोकेट जनरल ने कहा कि यदि कोर्ट चाहे सी बी आई समेत किसी भी एजेंसी से मामले की जांच करवा सकता है।

उल्लेखनीय है कि मधुबनी के डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज द्वारा 18 नवंबर, 2021 को भेजे गए पत्र पर हाई कोर्ट ने 18 नवंबर को ही स्वतः संज्ञान लिया है। साथ ही साथ कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के डी जी पी, राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव और मधुबनी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया था।

मधुबनी के प्रभारी डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज द्वारा अभूतपूर्व और चौंका देने वाली इस घटना के संबंध में भेजे गए रिपोर्ट के मद्देनजर राजन गुप्ता की खंडपीठ ने 18 नवंबर, 2021 को सुनवाई की।

ज़िला जज ,मधुबनी के द्वारा भेजे गए रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दिन तकरीबन 2 बजे दिन में एस एच ओ गोपाल कृष्ण और घोघरडीहा के पुलिस सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा ने जज अविनाश के चैम्बर में जबरन घुसकर गाली दिया था।

उनके द्वारा विरोध किये जाने पर दोनों पुलिस अधिकारियों ने दुर्व्यवहार करने और हाथापाई किया था। इतना ही नहीं, दोनों पुलिस अधिकारियों ने उनपर हमला किया और मारपीट भी किया था।

पुलिस अधिकारियों ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकालकर आक्रमण करना चाहा।
कोर्ट ने राज्य के डी जी पी को अगली सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित रहने से छूट दी है।
इस मामले पर अगली सुनवाई ,8 दिसम्बर,2021 को होगी।

नीतीश कुमार को गुस्सा क्यों आता है

भारतीय राजनीति में नीतीश कुमार की पहचान एक कुशल प्रशासक के साथ साथ सौम्य और मृदुभाषी स्वभाव के रूप में रही है लेकिन हाल के दिनों में नीतीश कुमार के स्वभाव में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है । विधानसभा सत्र को लेकर आयोजित एनडीए विधायक दल की बैठक में शराबबंदी को लेकर बीजेपी की एक महिला विधायक द्वारा सुक्षाव दिये जाने पर नीतीश कुमार जिस भाषा का इस्तेमाल किये वो कभी भी नीतीश कुमार के छवि के अनुरूप नहीं था।   ये अलग बात है कि नीतीश कुमार जिस अंदाज में महिला विधायक को अपमानित किये और बीजेपी के विधायक प्रतिकार नहीं कर पाये लेकिन नीतीश कुमार के इस आचरण को लेकर कल पूरे दिन विधानसभा में काना फूसी चलता रहा और नीतीश कुमार के आचरण में आये इस बदलाव को लेकर लोग हैरान थे ।        

नीतीश को गुस्सा क्यों आता है

             

वही विधानसभा परिसर से शराब की बोतल मिलने की खबर के बाद नीतीश कुमार की जो प्रतिक्रिया आयी वो भी हैरान करने वाली थी ।शराबबंदी को लेकर उस तरह का आन्दोलन देश स्तर पर कभी  नहीं हुआ जैसा आंदोलन दिल्ली में निर्भया के साथ बलात्कार की घटना के बाद हुई थी। पूरा देश सड़क पर था कड़े कानून बने क्या उसके बाद बलात्कार होना बंद हो गया या फिर बलात्कार की घटनाओं में कमी आ गयी नहीं ना,ये तो मसला शराबबंदी से जुड़ा हुआ है और यह अपराध भी बलात्कार और हत्या जैसी संगीन अपराध की श्रेणी में नहीं आता है तो फिर इतनी सक्रियता क्यों याद करिए शराब पीने से हुई मौत मामले में नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया कितनी आपत्ति जनक थी ।                      

ये सही है कि बिहार की महिलाएं अभी भी जाति ,धर्म और मजहब की दीवारों को तोड़कर नीतीश कुमार को वोट करती है लेकिन यह भी सच्चाई है कि तीसरे चरण के चुनाव में लालू के जंगलराज का भय नहीं दिखाते तो 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की हार तय थी ।    

वही 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण  में महिला वोटर भी नीतीश का साथ छोड़ दिया था वो भी साफ दिख रहा है नीतीश कुमार को उन वजहों पर मंथन करना चाहिए कि ऐसी कौन सी चूक हुई जो बिहार की सबसे बड़ी पार्टी होने के साथ साथ बिहार की जनता के दिल पर राज करने वाले नीतीश तीसरे नम्बर पर चले गये ।      

मसला शराब ही नहीं है, मसला भ्रष्टाचार है, मसला अफरशाही है ,मसला बेरोजगारी है ,मसला आपकी राजनीतिक शैली भी है आप पर से लोगों का भरोसा उठ गया है कब किसका साथ छोड़ देंगे कब किसके साथ चले जायेंगे कहना मुश्किल है ।                

राजनीति कितनी भी गद्दी क्यों ना हो आज भी विचारों का महत्व है जो आप खो चुके हैं ऐसे में आपकी ताकत सुशासन और विकास है जिसके सहारे आने वाले समय में बिहार की राजनीति में आप बने रह सकते हैं। इसके लिए आपको मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकलना होगा ।   आपके जो चहेते अधिकारी है उससे आपको बाहर निकलना होगा क्यों कि 15 वर्षो के दौरान वो सारे अधिकारी भी फील्ड से दूर है  जिस वजह से जमीन पर क्या बदलाव हो रहा है उसकी अब समझ नहीं रही इसका असर भी आपके कामकाज पर साफ दिख रहा । चंचल कुमार दिल्ली जा ही रहे हैं कुछ और अधिकारी जो लम्बे समय से आपके साथ है उनकी जगह जिले में तैनात यंग आईएएस अधिकारियों को मुख्यमंत्री सचिवालय में जगह दीजिए बहुत सारी बातें आपके समझ में भी आयेंगी क्यों कि बिहार के यूथ के स्वभाव और सोच में क्या बदलाव आया है उससे शायद आप भी परिचित नहीं है ।                       

आपकी राजनीतिक टीम भी 74 आन्दोलन से बाहर का नहीं है जबकि बिहार का यूथ भी अब 21 सदी का सोच रखने लगा है ऐसे में आप अपने टीम में युवा और महिलाओं को जगह दीजिए बहुत सारी चीजे बदलेगी और चलते चलते यह बिहार है और आपसे बेहतर कौन समझ सकता है ।            

विधानसभा परिसर में शराब की खाली बोतल मिलने के बाद जिस तरीके से तेजस्वी ने आपको चिढ़ाया और आप उसके झांसे में आ गये आने वाले समय में आप बिहार के दौरे पर निकलने वाले हैं बहुत परेशानी हो सकती है ।                     

वैसे शराबबंदी कानून में संशोधन हुआ उस पर पुलिस अमल क्यों नहीं कर रही है ये भी कही ना कही शराबबंदी को लेकर अति सक्रियता दिखायी जा रही है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराबबंदी को लेकर जो चल रहा है वो कितने दिनों तक चलेगा क्यों कि जैसे ही पुलिस सुस्त पड़ेगा इस धंधे में शामिल लोग फिर सक्रिय हो जायेंगे ऐसे में कानून को अपने तरीके से काम करने दीजिए नहीं तो सरकार को शासन चलाना मुश्किल हो जाएगा क्यों कि इसको लेकर अब प्रभावशाली वर्ग भी जो कभी शराब का सेवन भी नहीं किया है वैसे लोग सरकार की आलोचना करना शुरू कर दिये हैं।

कड़ी सुरक्षा के बीच पंचायत चुनाव के 9वें चरण की मतगणना शुरु

#बिहारपंचायतचुनाव – कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पंचायत चुनाव के 9वें चरण की मतगणना सभी 35 जिलों के जिला मुख्यालयों में शुरु हो गयी है । 9वें चरण में 35 जिलों के 875 पंचायतों में वोटिंग 29 नवंबर को हुई थी मतगणना का कार्य आज और कल दो दिनों तक चलेगा ।

97 हजार 878 प्रत्याशियों के भाग्य का होगा फैसला
इस चरण में 97 हजार 878 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। बिहार निर्वाचन आयोग के मुताबिक इस चरण में कुल 26,831 पदों के लिए चुनाव संपन्न हो चुका है।

इसमें ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए 11,883 सीट, ग्राम पंचायत मुखिया पद के लिए 871 सीट, पंचायत समिति सदस्य पद के लिए 1196 सीट, जिला परिषद सदस्य पद के लिए 127 सीट, ग्राम कचहरी पंच पद के लिए 11,883 सीट और ग्राम कचहरी सरपंच पद के लिए 871 सीट शामिल हैं।

9वें चरण में 46 हजार 164 पुरूष और 51 हजार 714 महिला प्रत्याशी हैं। वोटिंग की गणना 1 और 2 दिसंबर को होनी है।

जिला स्तर पर होगी विधायकों की बैठक

प्रमंडलीय एवं जिला स्तर पर होगी विधायकों की बैठक। क्षेत्रीय समस्याओं और प्राथमिकताओं पर होगा विचार… उपमुख्यमंत्री

भारतीय जनता पार्टी विधानमंडल दल की आयोजित हुई बैठक। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष एवं सांसद श्री संजय जायसवाल ने कहा… सरकार और संगठन की मजबूती के लिए काम करें विधान मंडल के सदस्य

पटना 30 नवंबर 2021
भारतीय जनता पार्टी विधानमंडल दल की बैठक आज 5, देशरत्न मार्ग स्थित उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के आवासीय परिसर में आयोजित हुई, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के सभी मंत्रीगण, विधायक, विधान पार्षदों ने भाग लिया।

बैठक में शीतकालीन सत्र के दौरान दोनों सदनों में चलने वाली कार्यवाही के व्यवस्थित एवं सुचारु संचालन पर चर्चा हुई।
बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र छोटा है, परंतु महत्वपूर्ण है।

सत्र के दौरान दोनों सदनों में द्वितीय अनुपूरक बजट एवं कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने एवं गैर-सरकारी संकल्पों पर भी विचार होना है। सत्रावधि में वाद-विवाद के दौरान विधान मंडल के सदस्यगण पूरी तैयारी के साथ चर्चा में भाग लें एवं सदन के समक्ष सरकार के अच्छे कामों को अपने संबोधन में रखें। उन्होंने कहा कि प्रमंडलीय एवं जिला स्तर पर विधायकों के साथ बैठक होगी, जिसमें क्षेत्रीय समस्याओं एवं प्राथमिकताओं पर विचार एवं चर्चाएं होंगी।

हमारा प्रयास है कि हमारे मंत्रिमंडल के साथी जिस भी जिले में दौरे पर जाएं, स्थानीय विधायकों के साथ बैठक अवश्य करें एवं उनके स्थानीय समस्याओं के निराकरण हेतु सकारात्मक पहल करें।

बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद डॉ० संजय जायसवाल ने कहा कि बिहार विधान मंडल के सभी सदस्य पार्टी की विचारधारा का अधिक- से-अधिक प्रसार करें तथा सरकार एवं संगठन को मजबूत करने के लिए दृढ़ता से काम करें तथा विधायी कार्यों के अलावा संगठन कार्यों में भी अधिक -से- अधिक उपस्थिति दर्ज करें।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री श्री भिखूभाई दलसानिया ने संविधान गौरव कार्यक्रम, सभी जिलों में प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन, कमल पुष्प कार्यक्रम, पन्ना प्रमुख, शेष बचे बूथ समितियों के गठन आदि विभिन्न कार्यक्रमों के विषय में विस्तार से चर्चा की।

भारतीय जनता पार्टी विधानमंडल दल की बैठक के दौरान पूर्व मंत्री श्री नीतीश मिश्रा, विधायक श्री संजय सरावगी, बिहार विधान पार्षद् श्री संजय मयूख ने पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों के क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। बैठक के दौरान कई विधायकों ने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में कुछ आवश्यक संशोधनों की ओर ध्यान आकृष्ट किया तथा मुख्यमंत्री नगर विकास योजना को शीघ्र प्रारंभ करने का अनुरोध किया।

बैठक के दौरान कटोरिया की विधायक श्रीमती निक्की हेंब्रम, विधायक श्री सुनील कुमार, वारसलीगंज की विधायक श्रीमती अरुणा देवी, सिकटी के विधायक श्री विजय कुमार मंडल, पीरपैंती के विधायक श्री ललन कुमार, नरपतगंज के विधायक श्री जयप्रकाश यादव, रामनगर की विधायक श्रीमती भागीरथी देवी, फारबिसगंज के विधायक श्री मंचन केसरी, मोहद्दीनगर के विधायक श्री राजेश सिंह, खजौली के विधायक श्री अरुण शंकर प्रसाद, बरौली विधायक श्री राम प्रवेश सिंह, बगहा के विधायक श्री राम सिंह, पारो के विधायक श्री अशोक सिंह, विधान पार्षद् श्री देवेश कुमार, लालगंज के विधायक श्री संजय कुमार, सीतामढ़ी के विधायक श्री मिथिलेश कुमार सहित अन्य विधायक, विधान पार्षदों ने अपनी कठिनाइयों एवं क्षेत्रीय समस्याओं के विषय में अपने विचार रखे।

पैक्स चुनाव को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला रूल 7(4) को किया रद्द

पटना हाई कोर्ट ने पैक्स का सदस्य बनाये जाने के संबंध में बिहार कोआपरेटिव सोसाइटी रूल्स, 1959 के रूल 7(4) को भारत के संविधान और कोआपरेटिव एक्ट के अल्ट्रा वायरस घोषित करने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करने फैसला सुनाया।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने रूल 7(4) को रद्द कर दिया। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने लक्ष्मीकांत शर्मा व अन्य के मामलों पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे आज सुनाया गया।

वर्ष 2008 में किये गए संशोधन के तहत रूल 7(4) के अनुसार किसी को पैक्स का सदस्य बनाने में बिलंब हो रहा है ,तो उस व्यक्ति के द्वारा पैसा जमा करने और शपथ पत्र दाखिल करने के बाद सदस्य बनाया जा सकता था।

याचिकाकर्ता ओं के अधिवक्ता तुहिन शंकर ने बताया कि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक संवैधानिक आदेश को अनाधिकृत तौर से हटाया नहीं किया जा सकता है।

अधिक से अधिक दायरे में रहकर नियंत्रण या पर्यवेक्षण किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में तो किसी से भी शपथ पत्र लेकर बगैर मैनेजिंग कमेटी गए या सुने ही पैक्स का सदस्य बनाया जा सकता है।

कोर्ट का यह भी मानना था कि संशोधित नियम में अपील का भी प्रावधान नहीं किया गया है और पीड़ित पक्ष बगैर किसी निवारण के नहीं रह सकता है।

अधिवक्ता तुहिन शंकर ने बताया कि यह संशोधन भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(सी), 43(बी) और 243(जेड एल) तथा बिहार कोआपरेटिव सोसाइटी एक्ट, 1935 का संशोधन के जरिये सदस्य बनाने का अधिकार प्रखंड विकास पदाधिकारी, कोऑपरेटिव सोसाइटी के असिस्टेंट रजिस्ट्रार व डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव ऑफिसर को दिया गया था।

शराबबंदी को लेकर नीतीश कुमार का हठ परेशानी का सबब बन सकता है

बात कोई आठ वर्ष पूरानी है सरकार ने पटना एसएसपी के पद पर अमृत राज को पोस्ट किया था ,अमृत राज ने पदभार संभालते ही पटना जिले के ऐसे थानेदार जिसका रिश्ता भूमाफिया और अपराधियों से था आते आते उनको निशाने पर लेना शुरु कर दिये ।

शराब विधानसभा परिसर में कैसे पहुंचा इसकी जॉच करने पहुंचे डीजीपी और मुख्यसचिव

पटना के लोगो को अमृत राज के बारे में ज्यादा पता नहीं था लेकिन अपराधियों के सिडिंकेट को पता था कि अमृत राज किस तरीके से अपराधियों से निपटते हैं ।पदभार संभालते ही अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन की शुरुआत करने ही वाले थे कि पटना सिटी के इलाके में लड़कियों और महिलाओं को ब्लेड मारने की घटना अचानक शुरु हो गयी ।

विधानसभा परिसर में शराब मिलने की सूचना पर बिफरे नीतीश दिया जॉच का आदेश

पूरा महकमा हिल गया लाख कोशिश के बावजूद एक माह तक एसएसपी से लेकर थानेदार तक परेशान रहा लेकिन शाम होते होते ब्लैड मारने की दो तीन घटनाये हो ही जाती है लेकिन एक अचानक बंद हो बंद कैसे हुआ उसकी एक कहानी है कभी मौका मिलेगा तो चर्चा करेगे ।

इस घटना की चर्चा क्यों किये शायद आपको समझ में आने लगा होगा शराबबंदी को लेकर जिस तरीके से नीतीश कुमार व्यवहार कर रहे हैं उससे आने वाले समय में सरकार के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है ।

विधानसभा परिसर में शराब की बोतल मिलने की सूचना पर जिस तरीके से मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया आयी है और डीजीपी और मुख्यसचिव घटना स्थल पर पहुंच कर जिस अंदाज में मामले की जांच कर रहे हैं बेहद हस्यापद है क्यों कि समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो प्रशासन को बेवजह तंग करने के लिए आये दिन इस तरह का हरकत ना करे ।

कोरोना से मौत मामले में अनुग्रह अनुदान का शीघ्र भुगतान का निर्देश

बिहार सरकार आपदा प्रबंधन विभाग

कोविड-19 से मृत सभी व्यक्तियों के आश्रितों को 4.00 लाख रुपये की दर से अनुग्रह अनुदान की राशि का भुगतान माह- मार्च, 2021 से बिहार सरकार द्वारा किया जा रहा है।

माननीय मुख्यमंत्री, बिहार द्वारा इस हेतु मुख्यमंत्री राहत कोष से राशि का भुगतान करने की शुरूआत की गयी थी तथा इससे कोविड-19 से मृत 3737 व्यक्तियों के आश्रितों हेतु कुल 149.48 करोड़ रूपये की राशि सभी जिलों में उपलब्ध करायी गयी।

इसके उपरान्त राज्य सरकार ने शेष मृतकों के आश्रितों को राज्य संसाधन से आपदा प्रबंधन विभाग के अधिसूचना संख्या 2098 दिनांक 09.06.2021 द्वारा राज्य के निवासी जिनकी मृत्यु कोविड-19 से राज्य के अन्दर हो गई है, उन्हें अनुग्रह अनुदान की राशि का भुगतान करने का निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री राहत कोष से अबतक कोविड-19 से 3704 मृत व्यक्तियों को 4.00 लाख की दर से कुल 148.16 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

इसके अतिरिक्त आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा कोविड-19 से अबतक 5111 मृत व्यक्तियों के आश्रितों को 4.00 लाख रुपये की दर से कुल 204.44 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है एवं शेष आश्रितों को भुगतान की कार्रवाई जिला स्तर से की जा रही है। इस प्रकार अबतक बिहार सरकार के द्वारा कुल 8815 लाभुको को 352.60 करोड़ रूपये की राशि उपलब्ध करायी जा चुकी है।

गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के आश्रितों को 50,000 रुपये की दर से अनुग्रह अनुदान का भुगतान राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त के आलोक में राज्य सरकार के द्वारा भी पूर्व में कोविड- 19 से मृत व्यक्तियों के आश्रितों को 4.00 लाख रुपये की दर से भुगतान की गई अनुग्रह अनुदान की राशि के अतिरिक्त 50,000 रुपये की राशि का भी भुगतान करने का निर्णय लिया गया है।

इसके अन्तर्गत सभी जिलों को 8815 कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के आश्रितों को भुगतान हेतु कुल 44.075 करोड़ रुपये आवंटित की गई है, जिसका भुगतान जिला पदाधिकारी के स्तर से किया जा रहा है।

सभी जिलों को जिला स्तर से ही कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान की राशि का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में अंतरित करने का निदेश दिया गया है। अब तक कुल भुगतान की गयी राशि 396.675 करोड़ हैं।