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दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम पर प्रतिबंध पर सरकार से जवाब मांगा

दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें मंच पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती दी गई है। यह मामला जस्टिस तेजस करिया की पीठ में सुनवाई के लिए आया था, जिसे गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। टेलीग्राम के वकील ने अदालत में बताया कि सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेश से 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं।टेलीग्राम की ओर से पेश वकील ने कहा कि सरकार का यह कदम गैरकानूनी है और इससे बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने अदालत से इस प्रतिबंध को हटाने की मांग की। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि टेलीग्राम मंच का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसके कारण यह प्रतिबंध लगाया गया है।

सरकार ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि टेलीग्राम पर कई ऐसे समूह और चैनल हैं जो अवैध गतिविधियों में शामिल हैं और जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि इन गतिविधियों को रोकने के लिए यह प्रतिबंध आवश्यक था। लेकिन टेलीग्राम की ओर से कहा गया है कि सरकार के इस कदम से न केवल उपयोगकर्ता प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि यह मंच पर मौजूद व्यवसायिक गतिविधियों को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

टेलीग्राम के वकील ने अदालत में यह भी कहा कि सरकार के पास ऐसे कोई ठोस सबूत नहीं हैं जो यह साबित करें कि टेलीग्राम का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह साबित करना होगा कि यह प्रतिबंध लगाने के पीछे क्या तर्क है और यह कानूनी रूप से सही है या नहीं।

केंद्र सरकार ने कहा है कि वह अदालत के निर्देशों का पालन करेगी और आवश्यक जवाब देगी। सरकार की ओर से कहा गया है कि यह प्रतिबंध अस्थायी है और यह देश की सुरक्षा के लिए लगाया गया है। लेकिन टेलीग्राम की ओर से कहा गया है कि यह प्रतिबंध उपयोगकर्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है और इससे देश की आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अदालत ने मामले की सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी है और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत क्या निर्णय लेती है और यह प्रतिबंध हटाया जाता है या नहीं। इससे न केवल टेलीग्राम के उपयोगकर्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि यह देश की आर्थिक गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।

सरकार के इस कदम से कई вопрос उठ रहे हैं कि क्या यह प्रतिबंध वास्तव में देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है या यह कुछ और उद्देश्यों के लिए लगाया गया है। यह भी देखना होगा कि अदालत का निर्णय क्या होगा और इससे देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

इस मामले में कई विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अदालत के समक्ष अपने निर्णय के आधार, कानूनी प्रावधानों और उससे जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत का निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तुत किए गए तर्क और साक्ष्य कितने मजबूत हैं। साथ ही, यह मामला भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

यह मामला मंच पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देता है. इसका परिणाम संभावित रूप से उपयोगकर्ता अधिकारों पर प्रभाव डालेगा।

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