राजस्थान में एलपीजी संकट के कारण होटल और रेस्तरां उद्योग में एक नए तरह का संकट पैदा हो गया है, जिसके कारण कई छोटे-बड़े भोजनालयों ने अपनी रसोई में कोयला और लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह बदलाव इसलिए आया है क्योंकि एलपीजी की आपूर्ति में कमी के कारण होटल मालिकों को अपने खाना पकाने के विकल्पों को बदलना पड़ा है।
कोयला और लकड़ी की मांग में अचानक वृद्धि के कारण इनकी कीमतें भी बढ़ने लगी हैं। कोयला व्यापारी अयूब ने बताया कि पहले होटल और सड़क किनारे ढाबे सीमित मात्रा में कोयला इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब कई व्यवसाय बड़ी मात्रा में इसकी खरीदारी कर रहे हैं। इससे कोयले की मांग में तेजी आई है और इसकी कीमतें भी बढ़ गई हैं। लकड़ी की दैनिक खपत लगभग 100 किलोग्राम से बढ़कर 200-250 किलोग्राम तक पहुंच गई है, जो कि एक बड़ा बदलाव है।
कोयला और लकड़ी की कीमत में इजाफा होने से होटल मालिकों को अपने खाना पकाने के खर्च में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। एक अन्य लकड़ी व्यापारी मान केवालरामानी ने बताया कि पहले 30 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला कोयला अब लगभग 35 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। इसी तरह लकड़ी की कीमत आठ रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 10 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। यह बढ़ती कीमतें होटल मालिकों के लिए एक बड़ा चुनौती है, क्योंकि उन्हें अपने ग्राहकों को उचित दर पर खाना उपलब्ध कराना होता है।
होटल मालिक भविष्य में एलपीजी की कमी से बचने के लिए थोक में कोयला और लकड़ी की बुकिंग कर रहे हैं। एक अन्य कोयला आपूर्तिकर्ता हीरा लाख्यानी ने बताया कि यदि एलपीजी की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो पारंपरिक ईंधनों की मांग और उनकी कीमतें दोनों और बढ़ सकती हैं। इससे होटल मालिकों को अपने व्यवसाय को संचालित करने में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
इस पूरे मामले में यह स्पष्ट है कि एलपीजी संकट के कारण होटल और रेस्तरां उद्योग में एक बड़ा बदलाव आया है। होटल मालिकों को अपनी रसोई में पारंपरिक ईंधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जो कि एक नए तरह की चुनौती है। सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि होटल मालिकों को अपने व्यवसाय को संचालित करने में परेशानी न हो।