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अशोक स्तम्भ का विरोध दुर्भाग्यपूर्ण, हर काम में खोट देखना ही अब विपक्ष की राजनीति – सुशील मोदी

सौ साल में देश को सेंट्रल विस्टा के रूप में जब नया संसद भवन मिल रहा है, तब उसका स्वागत करने के बजाय कांग्रेस वहाँ बने अशोक स्तम्भ और शेरों की आकृति पर भी बेवजह विवाद खड़ा कर रही है।

स्तम्भ के मूर्तिकार ने सारनाथ में स्थापित अशोक स्तम्भ की बड़ी प्रतिकृति तैयार करने में कोई गलती नहीं की, लेकिन विपक्ष सरकार के हर काम में खोट निकालने और विघ्न डालने की मानसिकता से उबर नहीं पाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाहे करोड़ों गरीबों का जन-धन खाता खोलवाया, चाहे देश की सुरक्षा के लिए 36 राफेल विमानों की खरीद की या बुलेट ट्रेन योजना लागू की, कांग्रेस और राजद ने हर बात का विरोध किया।

इस विघ्न-संतोषी विपक्ष ने तो कोरोना की उस स्वदेशी कोवैक्सीन तक का विरोध किया, जो प्रधानमंत्री मोदी की तत्परता की वजह से मात्र 11 माह में विकसित हुई।

शताब्दी समारोह के समापन पर पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने बिहार विधानमंडल के सदस्यों को संबोधित किया,यह गौरव की बात थी।

दुर्भाग्यवश, राजद और कांग्रेस ने इस अवसर को भी विरोध, दुर्भाव, उपहास और राजनीति से मुक्त नहीं रहने दिया।

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