पटना: बिहार की राजधानी पटना की एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित बिहटा एयरपोर्ट परियोजना की रफ्तार पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की ओर से विकसित किए जा रहे नए सिविल एन्क्लेव के यात्री टर्मिनल का निर्माण बेहद धीमी गति से आगे बढ़ा है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक साल से निर्माण कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई और अब तक केवल लगभग 2 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। स्थिति को देखते हुए AAI ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ठेकेदार को हटाने की प्रक्रिया शुरू
बिहटा एयरपोर्ट टर्मिनल का निर्माण फरवरी 2025 में एक संयुक्त उद्यम को दिया गया था। परियोजना को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने की योजना थी, लेकिन निर्माण एजेंसी की ओर से संतोषजनक प्रगति नहीं होने के कारण AAI ने ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके बाद अनुबंध समाप्त करने का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी को भेजा गया है।
AAI के इस कदम से संकेत मिलता है कि अब परियोजना में देरी को लेकर एजेंसी गंभीर है। यदि मौजूदा ठेका समाप्त होता है, तो नई एजेंसी के चयन और दोबारा निर्माण प्रक्रिया शुरू करने में अतिरिक्त समय लग सकता है। इससे बिहटा एयरपोर्ट के परिचालन की निर्धारित समयसीमा पर भी असर पड़ने की आशंका है।
₹459.99 करोड़ का है टर्मिनल निर्माण पैकेज
बिहटा एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल का निर्माण ₹459.99 करोड़ की लागत से किया जाना है। इसमें करीब ₹438 करोड़ निर्माण कार्य और लगभग ₹21.99 करोड़ संचालन एवं रखरखाव से संबंधित खर्च के लिए निर्धारित किए गए थे। परियोजना के लिए निर्माण एजेंसी को दो साल की अवधि दी गई थी और टर्मिनल के अप्रैल 2027 तक तैयार होने का लक्ष्य रखा गया था।
2025 में निर्माण शुरू होने से पहले साइट पर मिट्टी की जांच और अन्य प्रारंभिक गतिविधियां शुरू की गई थीं। इसके बाद मुख्य निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी स्तर पर परियोजना अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सकी।
बिहटा एयरपोर्ट क्यों है महत्वपूर्ण?
बिहटा एयरपोर्ट को पटना की मौजूदा हवाई यातायात क्षमता पर बढ़ते दबाव को कम करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। पटना के जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन मई 2025 में हुआ था। इसके बावजूद भविष्य में बढ़ने वाली यात्री संख्या को देखते हुए बिहटा में अतिरिक्त एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना बनाई गई है।
बिहटा में नए सिविल एन्क्लेव के तहत यात्री टर्मिनल समेत अन्य सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। इससे पटना और आसपास के क्षेत्रों में हवाई यात्रा की क्षमता बढ़ने, विमान सेवाओं के विस्तार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
निर्माण में देरी से 2027 की समयसीमा पर सवाल
परियोजना के लिए अप्रैल 2027 तक टर्मिनल को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन निर्माण कार्य के बेहद धीमे होने और अब ठेकेदार को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने से इस समयसीमा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
अगर मौजूदा अनुबंध समाप्त किया जाता है तो नई एजेंसी के चयन, साइट हैंडओवर और निर्माण गतिविधियों को दोबारा व्यवस्थित करने में समय लग सकता है। ऐसे में परियोजना की लागत और समय दोनों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
सोनपुर में प्रस्तावित है बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
बिहटा परियोजना की धीमी गति के बीच बिहार सरकार ने सोनपुर में एक बड़े ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। फरवरी 2026 में बिहार कैबिनेट ने सारण जिले के सोनपुर में एयरपोर्ट के लिए करीब 4,228.61 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए लगभग ₹1,302.83 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी। परियोजना को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।
सरकारी दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट है कि सोनपुर और सुल्तानगंज ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका मतलब है कि सोनपुर परियोजना अभी विकास और योजना के चरण में है, जबकि बिहटा में निर्माण कार्य पहले से चल रहा है।
क्या सोनपुर से बदलेगी बिहार की एयर कनेक्टिविटी रणनीति?
सोनपुर एयरपोर्ट के प्रस्ताव ने बिहार की दीर्घकालिक विमानन रणनीति को नया आयाम दिया है। प्रस्तावित एयरपोर्ट को बड़े विमानों के संचालन के अनुरूप विकसित करने की योजना है और रिपोर्टों के अनुसार इसमें लंबी रनवे तथा आधुनिक यात्री सुविधाएं शामिल होंगी।
हालांकि, सोनपुर एयरपोर्ट का विकास अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में बिहटा एयरपोर्ट की मौजूदा परियोजना की देरी को सीधे सोनपुर परियोजना के कारण हुई प्राथमिकता में बदलाव बताना अभी जल्दबाजी होगी। दोनों परियोजनाओं की भूमिका और समयसीमा अलग-अलग हैं।
बिहटा की देरी बनी बड़ी चिंता
बिहटा एयरपोर्ट के मामले में फिलहाल सबसे बड़ी चिंता निर्माण की गति है। करीब 2 प्रतिशत प्रगति के बाद ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होना बताता है कि परियोजना को पटरी पर लाने के लिए AAI को अब ठोस कदम उठाने पड़ रहे हैं।
यदि जल्द नई कार्ययोजना लागू नहीं होती, तो बिहार की राजधानी क्षेत्र में भविष्य की हवाई यातायात जरूरतों को पूरा करने की योजना प्रभावित हो सकती है। खासकर तब, जब राज्य में नए एयरपोर्ट और मौजूदा हवाई अड्डों के विस्तार की योजनाएं समानांतर रूप से आगे बढ़ रही हैं।
बिहार के लिए एयरपोर्ट नेटवर्क का बढ़ता महत्व
बिहार में पिछले कुछ वर्षों में एयर कनेक्टिविटी को लेकर कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं सामने आई हैं। पटना एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के बाद बिहटा, सोनपुर और अन्य ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट योजनाएं राज्य की लंबी अवधि की विमानन क्षमता बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हैं।
इन परियोजनाओं की सफलता केवल एयरपोर्ट निर्माण तक सीमित नहीं होगी। बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी, एयरलाइन ऑपरेटरों की रुचि, कार्गो सुविधाएं और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों का विकास भी जरूरी होगा। इसी वजह से बिहटा जैसी परियोजना में देरी का असर व्यापक आर्थिक योजना पर पड़ सकता है।
अब AAI के अगले कदम पर नजर
बिहटा एयरपोर्ट टर्मिनल को लेकर अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि AAI मौजूदा ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के बाद आगे क्या कदम उठाता है। नई एजेंसी नियुक्त करने की स्थिति में निर्माण कितनी जल्दी दोबारा शुरू होता है और परियोजना की संशोधित समयसीमा क्या रहती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
बिहार के लिए बिहटा एयरपोर्ट निकट भविष्य की एयर कनेक्टिविटी जरूरतों से जुड़ी परियोजना है, जबकि सोनपुर एयरपोर्ट दीर्घकालिक और बड़े पैमाने की योजना के रूप में सामने आया है। इसलिए दोनों परियोजनाओं को एक-दूसरे का विकल्प मानने के बजाय बिहार के व्यापक एयरपोर्ट नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
बिहटा एयरपोर्ट की सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल परियोजना की धीमी निर्माण गति है, न कि सोनपुर एयरपोर्ट की घोषणा। लगभग 2 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू होना परियोजना प्रबंधन में गंभीर समस्या का संकेत है। वहीं सोनपुर एयरपोर्ट अभी भूमि अधिग्रहण और DPR जैसे शुरुआती चरणों में है। बिहार के लिए बेहतर रणनीति यही होगी कि बिहटा को निकट अवधि की क्षमता बढ़ाने वाली परियोजना के रूप में तेजी से पूरा किया जाए और सोनपुर को भविष्य की अंतरराष्ट्रीय एयर कनेक्टिविटी के लिए विकसित किया जाए।
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