पटना । भाजपा ने अपनी प्रदेश कार्यसमिति में प्रस्ताव पारित कर ये फैसला लिया कि अब आगे किसी सूरत में नीतीश कुमार से कोई समझौता नहीं किया जायेगा।

बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस फैसले पर सहमति जतायी है।
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बोधगया के कालचक्र मैदान में तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव कार्यक्रम का आगाज किया गया है। इस कार्यक्रम में बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी सहित कई नेता और अधिकार शामिल हुए।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री व हम पार्टी के प्रमुख जीतनराम मांझी ने एक बार फिर निशाना साधागे। बोधगया में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के सामने ही जीतन राम मांझी ने खुले मंच से फिर बिहार में शराबबंदी समाप्त करने की मांग उठाई। मांझी ने मगही भाषा में कहा, “तेजस्वी बाबू बिहार में फेर से शराब चालू करवा देहू, एकरा बारे में मुख्यमंत्री जी से भी बात करहु।”
जीतन राम मांझी ने कहा कि जब बाहर के पर्यटक रुकेंगे ही नहीं तो विदेशी मुद्रा से राजस्व कैसे बढ़ेगा? जीतन राम मांझी ने कहा कि अगर शराबबंदी समाप्त हो जाती है तो पर्यटन में 10 गुना वृद्धि होगी। इसलिए हम मुख्यमंत्री नीतीश जी से शराबबंदी को समाप्त करने के लिए मांग करेंगे।

बोधगया अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल कहने से नहीं बल्कि विदेशी मेहमानों को खाने-पीने के चीजों के प्रबंध करने से कहलाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। लेकिन वह रुकते नहीं हैं। यहां कुछ घंटे समय बिताने के बाद वे बनारस और पड़ोसी राज्य झारखंड के हजारीबाग जा रहे हैं। इससे राज्य के राजस्व का नुकसान होगा।
दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार कहते रहे हैं कि शराबबंदी कानून को वापस नहीं लिया जाएगा। लेकिन दूसरी तरफ उनके ही गठबंधन में शामिल दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी लगातार शराब चालू करवाने की मांग कर रहे हैं।
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पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सत्ता में आते ही राजद “भूरा बाल साफ करो” के लालू-मंत्र पर खुल कर काम करने लगा। सरकार के एक मंत्री ने रामचरित मानस की निंदा की और दूसरे मंत्री पूरे सवर्ण समाज को अंग्रेजों का दलाल बता कर समाज को अगड़े-पिछड़े में बाँटने का एजेंडा चला रहे हैं। राजद कभी “माई ” से बाहर आकर “ए-टू-जेड” की पार्टी नहीं बन सकता।
श्री मोदी ने कहा कि स्वाधीनता की लड़ाई में बाबू कुँवर सिंह से लेकर जयप्रकाश नारायण तक सवर्ण समाज की अनेक विभूतियों ने संघर्ष किया, जेल गए और नये भारत के निर्माण में योगदान किया। इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने जब सवर्ण समाज के गरीब लोगों को 10 फीसद आरक्षण दिया, तब राजद ने इसका भी विरोध किया।

श्री मोदी ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” लेकर देश की सबसे बड़ी पार्टी
भाजपा में आज मंडल और कमंडल पूरी एकजुटता से साथ हैं। हम उन ताकतों से लड़ रहे हैं, जो देश की अखंडता और समाज की एकता पर आघात करते हैं।
उन्होंने कहा कि राजद खुद अंग्रेजों की ” फूट डालो-राज करो” की कुटिल नीति का गुलाम है। इस मंशा को भाजपा कभी सफल नहीं होने देगी।
श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार का जदयू जब लालू प्रसाद के गोड़ पर गिर चुका है और उसके विद्वेष फैलाने वाले मंत्रियों के आगे मुख्यमंत्री बेचारे हैं, तब नफरती राजनीति का जवाब सिर्फ भाजपा ही दे सकती है।
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पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जदयू- राजद के नेताओं में जातीय-धार्मिक उन्माद भड़काने वाले बयान देने की होड़ लगी है। पूरे देश को कर्बला की युद्ध भूमि बना देने की जद यू के गुलाम रसूल बलियावी की धमकी इसकी ताजा मिसाल है। नीतीश कुमार को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजद कोटे के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर रामचरित मानस की निंदा कर जातीय विद्वेष फैला रहे हैं और सहकारिता मंत्री सुरेंद्र यादव भारतीय सेना के पराक्रम को चुनाव से जोड़ कर उसका अपमान कर रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि दुर्भाग्यवश, ऐसे जहरीले बयान देने वालों पर नीतीश कुमार का न कोई नियंत्रण है , न उन्हें कुछ पता रहता है। वे एक कमजोर-बेचारे मुख्यमंत्री की तरह समय काट रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक तरफ बलियावी देश को गृहयुद्ध में झोकने की धमकी दे रहे हैं और दूसरी तरफ उसी समुदाय से आने वाले राजद के अब्दुल बारी सिद्दिकी को भारत में डर लग रहा है। धमकाने वाला समुदाय डरा हुआ कैसे हो सकता है?

श्री मोदी ने कहा कि जैसे भाजपा ने नूपुर शर्मा पर कार्रवाई की वैसे ही नीतीश कुमार को बलियावी के बयान पर कार्रवाई करने की हिम्मत दिखानी चाहिए।
दिल्ली/पटना । Supreme Court ने शुक्रवार को राज्य में जाति सर्वेक्षण कराने के बिहार सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली विभिन्न दलीलों/याचिकाओं के एक बैच पर विचार करने से इनकार कर दिया।
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि याचिकाओं में कोई योग्यता नहीं है और याचिकाकर्ताओं को संबंधित उच्च न्यायालय (Patna High Court) का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता के साथ उन्हें खारिज कर दिया।
“यह तो एक जनहित याचिका है। फलां जाति को कितना आरक्षण दिया जाए, इस पर हम कैसे निर्देश जारी कर सकते हैं। क्षमा करें, हम इस तरह के निर्देश जारी नहीं कर सकते हैं और इन याचिकाओं पर विचार नहीं कर सकते हैं”, पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा।

Supreme Court, एक NGO द्वारा दायर एक सहित इस मुद्दे पर 3 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, ने कहा कि याचिकाकर्ता उचित उपाय के लिए Patna High Court का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
पीठ ने अपने आदेश दिया, सभी याचिकाओं को वापस ले लिया गया मानकर खारिज किया जाता है और कानून में उचित उपाय खोजने की स्वतंत्रता दी जाती है।
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पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि श्रीरामचरित मानस की निंदा करने वाले शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के बयान का बचाव कर राजद ने हिंदू समाज को आहत किया और अब वह इसे अगड़े-पिछड़े की लड़ाई बताने की साजिश में लग गया है।
-चंद्रशेखर के बयान को अगड़े-पिछड़े की लड़ाई बनाना चाहता है राजद
-लालू प्रसाद बिहार को अब 1990 के दौर में नहीं लौटा सकेंगे
-शिक्षा मंत्री के विरुद्ध 30 जिलों मे दायर हुए मुकदमे
श्री मोदी ने कहा कि ‘मानस’ में सभी हिंदुओं की आस्था है और आज मंडल-कमंडल दोनों भाजपा के साथ हैं। अब लालू प्रसाद बिहार को 1990 के दौर में नहीं लौटा सकेंगे। वह जमाना लद चुका है।

उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर के विरुद्ध 30 से अधिक जिलों की सीजेएम अदालत में धारा 153-ए, 153-बी, 205-ए और 505 के तहत मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
श्री मोदी ने कहा कि आइपीसी की इन धाराओं के अन्तर्गत बोल कर या लिख कर धार्मिक भावनाएँ आहत करने, समाज में धर्म-जाति के आधार नफरत फैलाने और राष्ट्रीय अखंडता पर चोट करने जैसे अपराध में तीन साल तक के कारावास , जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर के विरुद्ध दायर ये मुकदमें कई संवेदनशील व्यक्तियों एवं सामाजिक संगठनों की ओर से दायर किये गए हैं। पूरे हिंदू समाज में रोष है, लेकिन नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने ऐसे बयान की निंदा तक नहीं की।
श्री मोदी ने कहा कि भाजपा महिला मोर्चा की ओर से हर जिले में मानस पाठ कर मानस-विरोधी शिक्षा मंत्री के लिए सद्बुद्धि की कामनाएँ की जा रही हैं।
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पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जब भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की टिप्पणी से एक समुदाय की भावनाएँ आहत हुईं, तब पार्टी ने तुरंत उनके खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन जब शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने श्रीरामचरित मानस की निंदा कर हिंदू समाज की भावनाओं को आहत किया, तब उनके खिलाफ कार्रवाई करने में नीतीश कुमार अपनी बेचारगी जाहिर कर रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री इतने कमजोर हो चुके हैं कि चंद्रशेखर को बर्खास्त करना तो दूर, उनसे लिखित स्पष्टीकरण तक नहीं मांगा।
उन्होंने कहा कि अगर चंद्रशेखर ने नीतीश कुमार के “समझाने” पर भी अपना बयान वापस नहीं लिया, बल्कि उस पर अड़े हुए हैं, तो जाहिर है कि मुख्यमंत्री कितने कमजोर हो चुके हैं। वे अब केवल राजद की कृपा से कुर्सी पर बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि नूपुर शर्मा ने किसी सरकारी कार्यक्रम में नहीं, बल्कि एक निजी टीवी चैनल पर बहस के दौरान भगवान शंकर पर अभद्र टिप्पणी करने के जवाब में अपनी बात इस्लामी किताबों के हवाले से कही थी, फिर भी उन्हें दंडित किया गया।
श्री मोदी ने कहा कि राजद कोटे के मंत्री चंद्रशेखर ने तो दीक्षांत समारोह जैसे सरकारी और गरिमामय कार्यक्रम में बिना किसी उकसाने के मानस को “नफरत फैलाने वाला ग्रंथ” बताकर करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर आघात किया, फिर भी उनके विरुद्ध सरकार और उनकी पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह रवैया महागठबंधन के हिंदू-विरोधी दुराग्रह की पराकाष्ठा है।

श्री मोदी ने कहा कि चंद्रशेखर और सुधाकर सिंह के बयान नीतीश कुमार को लगातार कमजोर बना रहे हैं। इन दोनों पर लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव का वरदहस्त है।
उन्होंने कहा कि राजद ने पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह को नोटिस देने में 15 दिन देर की और जवाब देने के लिए भी 15 दिन का लंबा समय दे दिया। नोटिस केवल दिखावा है।
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13 जनवरी को पीएम मोदी ने गंगा विलास क्रूज को हरी झंडी दिखाते हुए कहा था कि ‘भारत में पर्यटन का बुलंद दौर शुरू हुआ और गंगा विलास क्रूज की शुरुआत होना साधारण घटना नहीं है ये सफर भारत में इनलैंड वाटर वे के विकास का उदाहरण हैं।
फिर क्या था इस योजना को लेकर मीडिया ने पुल बांधना शुरू कर दिया और अपने रिपोर्टर की पूरी फौज उतार दिया पीपली लाइव की तरह ।
शत्रुघ्न सिन्हा जिस समय जहाजरानी मंत्री थे उस समय ही इस प्रोजेक्ट पर काम होना शुरु हुआ था और कई वर्षो से बनारस और कोलकाता के बीच क्रूज चल रहा है।
मुझे याद है कि बनारस से कोलकाता तक जाने वाले इस क्रूज को लेकर मैंने दो तीन बार स्टोरी किया था लेकिन फाइल मेंं मिल नहीं रहा था, तभी देर रात मुझे याद आया कि इस क्रूज का तो पटना में दुर्घटना भी हो चुकी है जिसमें कई विदेशी यात्रा घायल हुए थे ।

इतनी बड़ी खबर लेकिन कलाकारी देखिए गूगल पर से ये स्टोरी भी गायब करवा दिया था
लेकिन पूरी घटना मेरी आंखों के समाने तैर रहा था,तब मैं अपना फेसबुक पोस्ट पलटना शुरु किया क्यों कि मुझे याद था कि ऐसी घटना घटी थी और इसकी सूचना घटना के चंद मिनट बाद ही किसी व्यक्ति ने फोन करके दिया था और सबसे पहले मैंने ही खबर ब्रेक किया था ।
और उसके बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में कोहराम मच गया था इतना ही नहीं कल पटना में मीडिया के हमारे कई बंधु तो तारीफ के पुल बॉध रहे थे ।



इस क्रूज से जुड़ी जो दुर्घटना हुई थी उसका वीडियो लेने मेरे दफ्तर में आये थे ।
3 दिसंबर 2019 को पटना के गंगा नदी में पीपा पुल से टकराया सैलानियों से भरा जहाज, कई घायल; बड़ा हादसा टला।
पूरी खबर ये था कि यही क्रूज विदेशी सैलानियों को बनारस से कोलकत्ता ले गये थे और फिर कोलकत्ता से बनारस लौट रहा था इसी दौरान कच्ची दरगाह के पास सैलानियों का जहाज गंगा नदी में पीपा पुल से टकरा गया।जहाज पर सवार लोग दहशत में आ गए। कई सैलानियों को चोट लगी है। तैराकों का दल पहुंच गया है। तैराकों ने रेस्क्यू कर जहाज पर सवार यात्रियों की जान बचाई।
इन घायल सैनानी से जो बात हुई तो उन्होंने कहा था इस क्रूज पर य़ात्रा को लेकर विदेशी सैलानी इन्तजार करते हैं दिसम्बर माह का और इसमें कई ऐसे यात्रा भी मिले जो पांच वर्षो से लगातार आ रहे थे ।
देखिए उस दिन की वो तस्वीरें कैसा अफरातफरी का माहौल था।
पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर बिहार के युवाओं को क्या तेजस्वी यादव की तरह नॉन-मैटिक छात्र और माता-पिता की सत्ता का दुरुपयोग कर 22 साल की उम्र में अरबों रुपये की 53 सम्पत्ति का मालिक बनने की नसीहत दे रहे हैं?
क्या नॉन-मैट्रिक और बेनामी सम्पत्ति बनाने वाला ” तेजस्वी” होना चाहिए बिहारी युवा ?
Should the Bihari youth be “Tejasvi” who creates non-matriculation and benami property?
श्री मोदी ने कहा कि श्रीराम का नायकत्व स्थापित करने वाले धर्मग्रंथ मानस की निंदा कर चंद्रशेखर अब अपने ट्वीट से तेजस्वी यादव को समाज का नायक बनाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि हिंदू भावनाओं का अपमान करने के कारण जिस मंत्री को पार्टी से निष्कासित और मंत्री-पद से बर्खास्त करना चाहिए था, उसे अपनी प्रशंसा पर मुग्ध तेजस्वी यादव बचाब कर रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि जब नीतीश कुमार मानस-निंदक शिक्षा मंत्री से बयान वापस लेने का आग्रह करने की बात कह रहे हैं और उनके डिप्टी सीएम उसी मंत्री का बचाव कर रहे हैं, तब जाहिर है कि महागठबंधन में दरार अब शिखर तक चौड़ी हो गई है।
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छपरा/पटना । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाने के कुछ दिनों बाद ही Ganga Vilas Cruise अपनी 51 दिनों की यात्रा के तीसरे दिन सोमवार को बिहार के छपरा में उथले पानी के कारण फंस गया।
क्रूज के फंसने की खबर के बाद, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम ने चिरांद सरन की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए एक छोटी नाव में पर्यटकों को बचाया।

51 दिनों में, विदेशी पर्यटकों के साथ लक्जरी Ganga Vilas Cruise गंगा-भागीरथी-हुगली, ब्रह्मपुत्र और वेस्ट कोस्ट नहर सहित भारत में लगभग 3,200 किलोमीटर की 27 नदी प्रणालियों को कवर करेगा।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी से शुरू हुआ Ganga Vilas Cruise वाराणसी की प्रसिद्ध गंगा आरती जैसे विरासत स्थलों और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और सुंदरबन डेल्टा जैसे अभयारण्यों सहित 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा करेंगे। बांग्लादेश में, क्रूज लगभग 1,100 किलोमीटर की यात्रा करेगा।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि श्रीरामचरित मानस की निंदा करने वाले मंत्री चंद्रशेखर का बचाव करने वाले RJD में यदि हिम्मत है तो वह कुरआन की विवादास्पद आयतों और मुस्लिम समाज में प्रचलित बहु-विवाह, तीन तलाक, निकाह हलाला, हिजाब और 15 साल की रजस्वला नाबालिक बेटियों के विवाह को जायज ठहराने जैसे मुद्दों पर टिप्पणी करे।
श्री मोदी ने कहा कि RJD बताये कि वह सभी भारतीय नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता के विरुद्ध क्यों है, जबकि बाबा साहब रचित संविधान में इस संहिता को लागू करने का मतव्य दिया गया है?
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सभी धर्मों की लड़कियों के लिए विवाह की वैधानिक आयु समान रखने के पक्ष में है, लेकिन लालू प्रसाद की पार्टी नाबालिग मुस्लिम लड़कियों की शादी के मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दकियानूसी राय के साथ क्यों खड़ी है?

उन्होंने कहा कि फौरी तीन तलाक को अवैध घोषित करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजद ने चुप्पी क्यों साध ली?
श्री मोदी ने कहा कि RJD वोट बैंक के लिए तीन तलाक का समर्थन करता है और इसी मंशा से मुस्लिम महिलाओं के लैंगिक समानता के अधिकार का विरोध करता है।
उन्होंने कहा कि RJD मुस्लिम समाज की भावनाओं के आगे घुटने टेक कर उनकी मध्यकालीन कुरीतिओं तक का विरोध नहीं करता,जबकि राम मंदिर और हिंदू धर्मग्रंथ के विरुद्ध जहर उगलने वाले जगदानंद और चंद्रशेखर का बचाव करता है।

श्री मोदी ने कहा कि जब BJP की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की टिप्पणी से एक समुदाय की भावनाएँ आहत हुईं, तब पार्टी ने तुरंत उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। अब तेजस्वी यादव बतायें कि मानस-निंदक चंद्रशेखर के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या राजद के लिए बहुसंखयक हिंदुओं की भावनाओं का कोई मोल नहीं है? यह अहंकार पार्टी पर भारी पड़ेगा।
तेजस्वी सत्ता, संगठन और विचारधारा के बीच इस तरह उलझता जा रहा है कि वो तय नहीं कर पा रहा है कि करना क्या है और इस वजह से उनके पार्टी के अंदर भी और बाहर भी ऐसे लोग जिनको किसी से किसी विषय को लेकर व्यक्तिगत खुंदक रहा है वो साधना शुरु कर दिये हैं। और इसका असर यह हो रहा है कि सरकार अस्थिर होने वाली है ऐसा इमेज लगातार बढ़ता जा रहा है ऐसे में तेजस्वी को पार्टी के तमाम बड़े नेता और विधायक सांसद से मिल बैठ कर बात करनी चाहिए।
यही स्थिति रही तो आने वाले समय में विवाद कम ने के बजाय बढ़ेगा और इसका असर पार्टी के जनाधार पर भी पड़ेगा,क्योंकि सरकार चलाने का जो नीतीश फार्मूला है उससे ना तो राजद के मंत्री संतुष्ट है और ना ही विधायक और ना ही गांव में मौजूद पार्टी का कार्यकर्ता। ऐसे में मिशन 2024 के सहारे लोकसभा चुनाव में बहुत बड़े बदलाव की जो बात महागठबंधन सोच रही है उसकी हवा निकल जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्योंकि गवर्नेंस को लेकर गांव स्तर पर नाराजगी बढ़ती जा रही है जिसमें शराबबंदी कानून एक बड़ी वजह है बिहार के लगभग हर गांव में आठ से दस परिवार इस कानून से किसी ना किसी रूप में प्रभावित है जो वोट में परिणत होगा ये साफ दिख रहा है । वही ब्लांक और थाना स्तर पर जो खेल चल रहा है उससे सबसे अधिक प्रभावित लालू और नीतीश का ही वोटर है।
गठबंधन बदलने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है ऐसे में सरकार गठन के पांच माह ही हुए हैं राजद सहित महागठबंधन के तमाम विधायक ,मंत्री और कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ना शुरु हो गया है मंत्री को सचिव चलने नहीं देता है, विधायक का कोई सुनने वाला नहीं है, पार्टी कार्यकर्ताओं का हाल तो और भी बुरा है विपक्ष में था तो धरना प्रदर्शन भी कर लेता था अब तो कुछ कर भी नहीं पा रहा है।
संकट इतना ही नहीं है तेजस्वी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जदयू राजद नहीं है और फिर योजनाओं के सहारे सत्ता में बने रहने का थ्योरी पूरे देश में एक समय बाद फेल हुआ है यह भी सत्य है ।

क्यों कि बीजेपी,वामपंथी और कांग्रेस के पास कार्यकर्ताओं को जोड़े रखने का एक अपना तरीका रहा है समय समय पर कार्यक्रमों के सहारे उसको मजबूती देता रहता है लेकिन क्षेत्रीय दलों के साथ यह बड़ी समस्या है ।
आज जदयू का क्या हश्र है पोलिंग एजेंट नहीं मिल रहा है कई गांव ऐसा मिल जाएगा जहां जदयू का कार्यकर्ता बचा ही नहीं है। स्थिति तो यह है कि पार्टी चलाने के लिए प्रखंड अध्यक्ष नहीं मिल रहा है समता पार्टी के समय के जो लोग बचे हुए है काम चलाने के लिए उनको पार्टी की जिम्मेवारी दे दी जा रही है हाल यह है कि कई जिलों में तो जिला अध्यक्ष विधायक या पूर्व सांसद है। यू कहे तो जदयू का पार्टी संगठन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है सरकार में रहने के कारण कही कही टिमटिमा रहा है। वजह नीतीश कुमार कि यह सोच योजनाओं और गवर्नेंस के सहारे पार्टी चला लेंगे । तेजस्वी राजद का जो टीम दिल्ली है उसके झांसे में आ गये हैं कि बस सरकार में बने रहना है और चुनाव के दौरान जो वादा किये थे उसको पूरा करते हुए दिखना है इसी के सहारे चुनाव निकाल लेगे।
आज की राजनीति यही है इस टीम दिल्ली को यह भी देखना चाहिए कि 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान जो जीत हुई है उसमें चिराग की पार्टी का क्या योगदान रहा है क्यों कि लोकसभा चुनाव में शून्य पर आउट होने वाली पार्टी रातो रात कैसे बिहार का नम्बर वन पार्टी बन गया।

संगठन की बात करे तो राजद की स्थिति बिहार में इस वक्त कुल मतदान केन्द्रों में मात्र 40 प्रतिशत मतदान केन्द्र तक ही सीमित है यह सच्चाई है ऐसे मेंं बिना विचार के सहारे मोदी को परास्त करना दिन में सपने देखने जैसा है क्यों कि विचार ही एक ऐसी कड़ी है जो जाति धर्म,मजहब और पार्टी सबके दायरे को तोड़ कर लोग मतदान केन्द्रों पर पहुंचते ही नहीं है लोगों को प्रेरित भी करते हैं, और उसमें सरकार की योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंच गयी तो जीत का राह और आसान हो जाता है।
ऐसे में सिर्फ सत्ता में बने रहने से मोदी को हराना संभव नहीं है राहुल की तरह विचार के साथ सड़क पर उतरना होगा लोगों के बीच जाना होगा तेजस्वी इस दुविधा में फँस गये हैं करे तो करे क्या संगठन का अलग मांग है ,विचारधारा एक अलग तरह का तनाव दे रहा है विधायक और पार्टी के नेता एक अलग समस्या है वैसे राजनीति में जो विवादों का बेहतर समन्वय करता है वही आगे बढ़ता है ।
पटना । बिहार में बर्फीली हवाओं से पारा 6 डिग्री तक पहुंच गया । मौसम विभाग के अनुसार बिहार में ठंड ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए है। आने वाले 3-4 दिनों में ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है।
बिहार के पटना,भागलपुर,पश्चिम चंपारण,मुजफ्फरपुर,छपरा,सबौर समेत 20 जिलों के अंदर दिल्ली और जम्मू से भी ज्यादा ठंड पड़ रही है। बिहार में अभी ठंड से राहत के आसार नहीं हैं, घने कोहरे ने प्रदेश को पूरी तरह ढक दिया है। वहीं मौसम विभाग ने नया पूर्वानुमान जारी किया है की बिहार में मकर संक्रांति के बाद फिर बढ़ेगी ठंड, कश्मीर व हिमाचल में बर्फबारी का दिखेगा असर।
रविवार को मकर संक्रांति के दिन दोपहर में धूप खिली, लेकिन कुछ ही घंटे के बाद अचानक से मौसम का रुख बदल गया और ठंड बढ़ती चली गई। मौसम विभाग के अनुसार, 16 जनवरी के बाद प्रदेश में कड़ाके की ठंड को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग की मानें तो प्रदेश में बर्फीली पछुआ हवा का प्रभाव अधिक होने के कारण पटना समेत मध्य व दक्षिण बिहार में कड़ाके की ठंड का खास असर देखने को मिल सकता है।
बिहार में सर्दी का कहर निरंतर बढ़ता जा रहा है। हाड़ कंपाने वाली सर्दी से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। हालात यह है कि ठंड से बचने के लिए लोग घरों से निकलने से गुरेज ही कर रहे हैं। हालत यह रही कि बर्फीली हवाओं से हाथ-पांव सुन्न हो रहे हैं। लोग जगह-जगह अलाव तापकर राहत पाने की कोशिश करते रहे।

घने कोहरे के कारण पटना में ट्रेनों और विमानों का संचालन बाधित; कई रद्द, कई देरी से चल रहे हैं। दिल्ली समेत उत्तर भारत से आने वाली ट्रेनें अधिक देर से आईं। यात्री परिजनों के साथ नया साल नहीं मना सके। दिल्ली समेत उत्तर भारत से आने वाली ट्रेनें अधिक देर से आईं।

बिहार में कोहरे-धुंध से फ्लाइट्स देरी से चल रही है । घने कोहरे और विजिबिलिटी कम होने के कारण पटना एयरपोर्ट पर विमानों का परिचालन प्रभावित हुआ है ।
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पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि श्रीरामचरित मानस पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर पर जगह-जगह मुकदमे दर्ज होने चाहिए और उनका ऐसा विरोध किया जाना चाहिए कि वे किसी कॉलेज में न घुसने पाएँ।
श्री मोदी ने कहा कि जदयू के एक विधायक ने प्रोसेसर चंद्रशेखर का मानसिक संतुलन ठीक न होने की बात कह कर उन्हें हिंदू धर्म छोड़ने और इस्लाम या ईसाई पंथ में मतान्तरण कर लेने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि राजद से हाथ मिलाने के बाद मंत्रियों पर नीतीश कुमार का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि जिन्हें शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई , वे छात्रों-शिक्षकों की समस्याएँ हल करने के बजाय लोकप्रिय हिंदू धर्म ग्रंथ रामचरित मानस की निंदा कर समाज में कटुता पैदा करने पर उतर आए।

श्री मोदी ने कहा कि सत्तारूढ़ महागठबंधन में पूरी अराजक स्थिति है। मानस-निंदा प्रकरण में जदयू और राजद के बड़े नेता परस्पर-विरोधी बयान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राजद में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी और विधायक विजय मंडल शिक्षा मंत्री के बयान को गलत मानते हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद मानस-निंदक मंत्री के विचारों के साथ खड़े हैं।

श्री सुशील मोदी ने कहा कि जदयू अध्यक्ष ललन सिंह के मुताबिक उनकी पार्टी मजबूत हुई है, लेकिन संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को संगठन में कमजोरी महसूस हो रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार और महागठबंधन में तीखे मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं, जबकि नीतीश कुमार, लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव चुप्पी साधकर तमाशा देख रहे हैं।
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बक्सर । बिहार के बक्सर में बुधवार को चौसा पावर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों का एक समूह हिंसक हो गया था । भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया था । आरोप था कि किसानों के घर घुसकर पुलिस ने टॉर्चर किया था , जिसके बाद आक्रोशित किसान ने कई गाड़ियों को जला दिया था ।
बिहार पुलिस ने बुधवार को बक्सर में आगजनी और हिंसा के सिलसिले में 1,159 अज्ञात और 66 नामजद लोगों के खिलाफ पांच प्राथमिकी दर्ज की है।
इस बीच, एक किसान ने बक्सर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 2009 बैच के तत्कालीन थाना प्रभारी (SHO)-सह-उप-निरीक्षक अमित कुमार, उप-निरीक्षक चंद्रशेखर आजाद, अंचल अधिकारी सहित चार नामजद लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

ADG (मुख्यालय) जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और इलाके में मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। उन्होंने कहा, “स्थिति नियंत्रण में है और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दिन-प्रतिदिन के घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहे हैं।”
री बात ये है की, चौसा पॉवर प्लांट के लिए किसानों की जमीन सरकार ने अधिग्रहित की है। किसान अपनी जमीनों का बेहतर दाम चाहते हैं। किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, उन्हीं किसानों को पुलिस ने कथित तौर पर टॉर्चर किया है, जिसके बाद बवाल भड़का है।
चौसा प्लांट शुरू से विवादों के केंद्र में रहा है। किसानों की उचित मुआवजे की मांग पूरी करने के लिए शांतिपूर्ण वार्ता के बजाय पुलिस-प्रशासन द्वारा किसानों पर दमनकारी नीति अपनाई गई। मांगों को लेकर पिछले 17 अक्टूबर से स्थानीय किसान शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे। मंगलवार को पावर प्लांट का मुख्य गेट बंद कर काम रोक दिए जाने से पुलिस और प्रशासन का पारा गरम हो गया।

मंगलवार को काफी संख्या में पुलिस बल रात 11 बजे के बाद बनारपुर गांव में पहुंच कर किसानों के घर में घुसकर जुल्म ढाना शुरू कर दिया। इस क्रम में पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में ले लिया है। लोगों का कहना है कि पुलिस ने घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों तक को नहीं छोड़ा और कई लोगों की पिटाई कर दी है। लोगों ने बताया कि पुलिस की इस कार्रवाई में महिला पुलिस साथ में नहीं थी।
इस घटना के बाद ग्रामीण आक्रोशित हैं। बुधवार सुबह किसानों ने पावर प्लांट में तोड़फोड़ कर वाहनों में आग लगा दी। मौके पर हालात बेकाबू हो गए हैं।
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बिहार सरकार के पूर्व मंत्री व वरीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार शाही राज्य के एडवोकेट जनरल बनाए गए। वरीय अधिवक्ता ललित किशोर ने एडवोकेट जनरल के पद से त्यागपत्र दे दिया था।
वरीय अधिवक्ता पी के शाही इससे पूर्व 2005 से 2010 बिहार सरकार के एडवोकेट जनरल रहे।उसके बाद बिहार सरकार में उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद पर कार्य किया।

उसके बाद उन्होंने पुनः पटना हाईकोर्ट में वकालत फिर से शुरू की। एडवोकेट जनरल ललित किशोर के पद से इस्तीफा देने के बाद वरीय अधिवक्ता पी के शाही को राज्य सरकार का कोर्ट में पक्ष प्रस्तुत करने के लिए एडवोकेट जनरल के पद नियुक्त किया गया है।
बिहार सरकार के एडवोकेट जनरल श्री ललित किशोर ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया हैं । उन्होने इस सन्दर्भ मे अपनी भावनाओं से राज्य सरकार को पहले ही अवगत करा दिया था। मिली जानकारियों के अनुसार उन्होंने अब वे इस पद पर रह कर काम करना नहीं चाहते हैं ।
श्री किशोर पिछले करीब 17 वर्षों से किसी न किसी रूप में सरकार का पक्ष पटना हाईकोर्ट में रखते आए हैं। लगभग पिछले 5 वर्षों से वे लगातार बिहार सरकार के एडवोकेट जनरल के पद पर कार्यरत रहे है।

राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल की नियुक्ति से संबंधित फैसला राज्य की कैबिनेट के द्वारा किया जाता है।कैबिनेट की बैठक में ही एडवोकेट जनरल के नियुक्ति पर निर्णय होता है।
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पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से किसी अपील या अन्य मामले को विलंबित दायर करना राजकोष की बर्बादी या करदाताओं के मिले राजस्व का दुरुपयोग है। जस्टिस पी बी बजनथ्री और जस्टिस अरुण कुमार झा की खंडपीठ विश्वविद्यालय सेवा से जुडी एक अपील पर सुनवाई कर रही थी।
इस अपील को राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की एकलपीठ के आदेश के 823 दिनों बाद दायर किया था।कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए मुख्य सचिव को आदेश दिया कि राज्य में सरकार के मुकदमें को समय सीमा के अंतर्गत दायर करना सुनिश्चित करने हेतु एक मॉनिटरिंग प्रणाली विकसित करें ।
इस मामलें मे कोर्ट ने राज्य सरकार को 14 सूत्री दिशा निर्देश दिया, जिसकेअन्तर्गत हाई कोर्ट के किसी भी आदेश का अनुपालन दो सप्ताह में करने या उस आदेश के खिलाफ अपील दायर करने हेतु एक प्रस्ताव 4 हफ्ते में अग्रसारित करने का निर्देश है।
इस मॉनिटरिंग सिस्टम के अंतर्गत सरकार के अन्य बोर्ड , व कॉरपोरेशन व अनुषांगिक संस्थानों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर होने वाले मुकदमे के हर चरण की मॉनिटरिंग होगी।
इसके लिए एक रजिस्टर रखा जाएगा।इस रजिस्टर में किस दिन हाई कोर्ट आदेश की जानकारी मिली, किस दिन कोर्ट आदेश कि अभी प्रमाणित प्रतिलिपि निकाली गई।

साथ ही इसके विरुद्ध अपील दायर करने या आदेश का अनुपालन करने का विचार कितने दिनों के अंदर किया गया, वह किस किस अधिकारियों के जरिए किया गया सब बात की जानकारी उस रजिस्टर में रहेगी।
इस तरह से खंडपीठ ने मुख्य सचिव को मॉनिटरिंग रजिस्टर के जरिए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सरकार के मुकदमे को देर से दायर करने के लिए कौन अफसर या कौन सरकारी वकील जिम्मेदार है, उसकी भी जवाबदेही तय हो।
कोर्ट ने कहा कि यदि जरूरत पड़े ,तो सरकारी अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को निर्धारित करने वाली नियमावली में भी संशोधन करें। इससे विलंबित मुकदमे दायर करने के आरोपी अफसरों के खिलाफ भी समय अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सके।
गौरतलब है कि इस 14 सूत्री दिशा निर्देश में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को यह भी आदेश दिया है कि हर सरकारी विभाग के पास विभागीय कार्य को संचालित करने वाली संबंधित नियम नियमावली और कानून का एक विधि कोष (रिपोजिटरी) विभागीय वेब पोर्टल पर हो, ताकि हाईकोर्ट के आदेश से क्षुब्ध होकर यदि कोई विभाग हाईकोर्ट में ही यह सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का प्रस्ताव दे ,तो संबंधित कानून की विवेचना भी उसी प्रस्ताव में कर दे ।

साथ ही साथ कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी सरकारी अपील अथवा याचिका को दायर करने से पहले सरकारी वकील को एफिडेविट करने वास्ते एडवांस कॉपी अग्रसारित करें।
इन सभी दिशा निर्देशों का अनुपालन करने और समय पर मुकदमा दायर हो,इसकी मॉनिटरिंग प्रणाली प्रारम्भ करने के लिए कोर्ट ने मुख्य सचिव को 2 हफ्ते का समय दिया है।
भारतीय लोकतंत्र में नीतीश कुमार को सबसे क्रूर और सिद्धांत विहीन शासक के रूप में याद किया जाएगा । उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में एक-एक भरोसेमंद लोगों को राजनीति में मौत मुकर्रर किया है। वही हाल उनके राजनीतिक शैली की भी रही कभी कोई सिद्धांत नहीं बस सत्ता में बने रहने के लिए जो सिद्धांत रास आया उसको अमल में लाया।
ताजा उदाहरण उपेन्द्र कुशवाहा का है,ज्यादा दिन नहीं हुआ है जब उपेन्द्र कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय कर नीतीश के साथ आए थे और नीतीश कुमार ने इन्हें पार्टी को मजबूत करने के लिए बिहार यात्रा पर निकलने को कहां था उस समय आरसीपी सिंह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे ।
उपेन्द्र कुशवाहा वाल्मीकि नगर से यात्रा की शुरुआत किये थे और लगभग दो माह तक पूरे बिहार के दौरे पर रहे इस दौरान उपेन्द्र कुशवाहा जिस जिले में गये वहां के जदयू के विधायक,पार्टी कार्यकर्ता के साथ साथ जिले के सीनियर अधिकारी उनके स्वागत में खड़े रहते थे जैसे नीतीश ही यात्रा में निकले हो । ऐसा भी नहीं है कि उपेन्द्र कुशवाहा के स्वागत में पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता वैसे ही खड़े रहते थे बाजाब्ता जदयू के प्रदेश कार्यालय के साथ साथ सीएम हाउस से विधायक और जिले के वरिष्ठ नेता को फोन जाता था ।
यात्रा के दौरान यह साफ हो गया था कि उपेन्द्र कुशवाहा आरसीपी की जगह ले सकते हैं हुआ भी ऐसा ही जब आरसीपी सिंह को पार्टी से बाहर निकालने की रणनीति पर अमल करने का समय आया तो उपेन्द्र कुशवाहा को सामने खड़ा किया इस दौरान आये दिन ललन सिंह उपेंद्र कुशवाहा के घर मिलने जाते थे। उस समय आरसीपी सिंह जिस हैसियत में थे उस स्थिति में आरसीपी सिंह को हटाना ललन सिंह के बस में नहीं था लेकिन जैसे ही मिशन आरसीपी सिंह पूरा हुआ उपेन्द्र कुशवाहा को ठिकाने पर पहुंचाने का खेला शुरू हो गया। मुझे अच्छी तरह से याद है जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री के रूप में पूरे फर्म में थे नीतीश कुमार का हाल यह हो गया था कि विधायक की कौन कहे अधिकारी भी छुप छुपा कर मिलने आते थे संयोग से किसी बात को लेकर इनसे मुझे मिलना पड़ा ।

इतना निराश, उदास और हताश मैंने कभी नीतीश कुमार को नहीं दिखा और जहां तक मुझे याद है शरद यादव और लालू प्रसाद नहीं होते तो इनसे जीतन राम मांझी हटने वाले नहीं थे ।
इसी तरह आरसीपी सिंह को हटाने के लिए एक वर्ष से कोशिश कर रहे थे उपेन्द्र कुशवाहा नहीं होते तो आरसीपी सिंह को भी निकालना इनके लिए आसान नहीं होता।
नीतीश के राजनीतिक जीवन में उपेंद्र कुशवाहा कोई पहला व्यक्ति नहीं है जिसके साथ नीतीश का ये व्यवहार रहा है लम्बी सूची है दिग्विजय सिंह,प्रभुनाथ सिंह,जार्ज ,शरद,आरसीपी ,लालू प्रसाद।
लेकिन इन सबसे इतर जो बड़ा सवाल है इस बार नीतीश बीजेपी का साथ क्यों छोड़े क्या कह कर के छोड़े थे और चार माह बाद वो कहां खड़े हैं। बिहार की राजनीति का ककहरा समझने वाला भी जानता है कि ललन सिंह ,संजय झा और विजय चौधरी से कही अधिक मजबूत और वोट को प्रभावित करने की क्षमता उपेन्द्र कुशवाहा रखते हैं लेकिन उनको आप बाहर निकलने को मजबूर कर रहे हैं ।

ऐसा नहीं है आरसीपी सिंह के जाने से जदयू कमजोर नहीं हुआ है कमजोर हुआ है और जो खबर आ रही है कि फरवरी में नालंदा में ही अमित शाह के मौजूदगी में आरसीपी सिंह भाजपा का दामन थाम सकते हैं मतलब बीजेपी इनको नालंदा में ही घेरने की रणनीति पर काम शुरु कर दिया है इतना ही नहीं आज भी आरसीपी सिंह का जदयू से जुड़े हुए अति पिछड़ा समाज के कार्यकर्ताओं में पकड़ बनी हुई है और आरसीपी मजबूत हुए तो नीतीश के कोर वोटर में भी सेंधमारी होगी ये तय है लेकिन आप बीजेपी का एजेंट घोषित करके उसे पार्टी से निकाल दिए लेकिन जिस व्यक्ति को लेकर घूम रहे हैं उनकी छवि तो सर्वविदित है कि वो बीजेपी के साथ ज्यादा कम्फर्ट महसूस करते हैं ।
देखिए आगे आगे होता है क्या लेकिन नीतीश जिस राह पर जा रहे हैं उससे उनका मिशन 2024 कमजोर पड़ रहा है ये अब साफ दिखने लगा है ।
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बक्सर । बिहार के बक्सर जिले में बन रहे एक पावर प्लांट को गुस्साए स्थानीय लोगों ने उखाड़ फेंका। आरोप है कि किसानों के घर घुसकर पुलिस ने टॉर्चर किया, जिसके बाद किसान आक्रोशित हुए. कई गाड़ियों को नाराज किसानों ने जला दिया है।
पूरी बात ये है की, चौसा पॉवर प्लांट के लिए किसानों की जमीन सरकार ने अधिग्रहित की है। किसान अपनी जमीनों का बेहतर दाम चाहते हैं। किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, उन्हीं किसानों को पुलिस ने कथित तौर पर टॉर्चर किया है, जिसके बाद बवाल भड़का है।
चौसा प्लांट शुरू से विवादों के केंद्र में रहा है। किसानों की उचित मुआवजे की मांग पूरी करने के लिए शांतिपूर्ण वार्ता के बजाय पुलिस-प्रशासन द्वारा किसानों पर दमनकारी नीति अपनाई गई। मांगों को लेकर पिछले 17 अक्टूबर से स्थानीय किसान शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे। मंगलवार को पावर प्लांट का मुख्य गेट बंद कर काम रोक दिए जाने से पुलिस और प्रशासन का पारा गरम हो गया।


मंगलवार को काफी संख्या में पुलिस बल रात 11 बजे के बाद बनारपुर गांव में पहुंच कर किसानों के घर में घुसकर जुल्म ढाना शुरू कर दिया। इस क्रम में पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में ले लिया है। लोगों का कहना है कि पुलिस ने घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों तक को नहीं छोड़ा और कई लोगों की पिटाई कर दी है। लोगों ने बताया कि पुलिस की इस कार्रवाई में महिला पुलिस साथ में नहीं थी।
इस घटना के बाद ग्रामीण आक्रोशित हैं। बुधवार सुबह किसानों ने पावर प्लांट में तोड़फोड़ कर वाहनों में आग लगा दी। मौके पर हालात बेकाबू हो गए हैं।
बक्सर में किसानों के ऊपर लाठीचार्ज मामले पर बक्सर के सांसद अश्विनी चौबे की प्रतिक्रिया…
उन्होंने ट्वीट कर लिखा..
बक्सर में किसानों के घर में घुसकर पुलिस ने जो गुंडागर्दी की है, यह घोर निंदनीय है। क्या किसान अपराधी थे, वारंटी थे, जो रात में उनके घर में घुस कर मारपीट की गई। महिलाओं के साथ गाली गलौज और अमानवीय व्यवहार किया गया। महागठबंधन की सरकार किसान विरोधी है। (1/2)
— Ashwini Kr. Choubey(मोदी का परिवार) (@AshwiniKChoubey) January 11, 2023
बक्सर में किसानों के घर में घुसकर पुलिस ने जो गुंडागर्दी की है, यह घोर निंदनीय है। क्या किसान अपराधी थे, वारंटी थे, जो रात में उनके घर में घुस कर मारपीट की गई। महिलाओं के साथ गाली गलौज और अमानवीय व्यवहार किया गया। महागठबंधन की सरकार किसान विरोधी है। (1/2)
— Ashwini Kr. Choubey(मोदी का परिवार) (@AshwiniKChoubey) January 11, 2023
दिल्ली/पटना । बिहार में जातिगत जनगणना का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बिहार निवासी अखिलेश कुमार ने याचिका में जातिगत जनगणना के नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि जातिगत जनगणना का नोटिफिकेशन संविधान की मूल भावना के खिलाफ है ।
पिछले साल 6 जून को राज्य सरकार द्वारा जातिगत जनगणना कराने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था । याचिका में कहा गया है कि जातिगत जनगणना का नोटिफिकेशन संविधान की मूल भावना के खिलाफ है, लिहाजा अधिसूचना को ही रद्द किया जाना चाहिए ।

याचिका में ये भी कहा गया है कि जणगणना अधिनियम के तहत सरकार को जणगणना का अधिकार नहीं है। विधानसभा से कानून पास किए बगैर इस करवाया जा रहा है।
बिहार में शनिवार, 7 जनवरी 2023 से जाति आधारित सर्वेक्षण शुरू किया गया था। पहला चरण 7 जनवरी 2023 से शुरू होगी, जो 21 जनवरी को समाप्त होगा। पहले चरण में बिहार में सभी घरों की संख्या की गणना की जाएगी और इसे दर्ज किया जाएगा। जबकि दूसरे चरण के सर्वेक्षण में जो 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक होना है, घरों में रहने वाले लोगों, उनकी जाति, उप-जातियों, सामाजिक-आर्थिक स्थिति आदि को एकत्र किया जाएगा। सर्वेक्षण 31 मई, 2023 को समाप्त होगा।
पढ़ें पूरी खबर जातिगत जनगणना के बारे में…
पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार के विकास का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नहीं मिले, केवल इसलिए नीतीश कुमार दरभंगा में एम्स की स्थापना और सड़क निर्माण की बड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे विकास कार्यों पर भी राजनीति कर रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने जमीन उपलब्ध करायी होती , तो 1200 करोड़ की लागत से दरभंगा में एम्स की स्थापना हो गई होती और जम्मू-कश्मीर के बाद बिहार दूसरा राज्य होता, जहाँ दो आयुर्विज्ञान संस्थान होते।
उन्होंने कहा कि दरभंगा और महाराष्ट्र के नागपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बनाने के लिए शिलान्यास एक साथ हुआ था। नागपुर एम्स तैयार हो गया, लेकिन दरभंगा एम्स के लिए 200 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने में राज्य सरकार 6 साल से टालमटोल कर रही है।
श्री मोदी ने कहा कि पटना के बाद राज्य का दूसरा एम्स दरभंगा में होता, जिससे उत्तर बिहार की बड़ी आबादी को बाहर जाने की जहमत नहीं उठानी पड़ती।

उन्होंने कहा कि पहले तो नीतीश सरकार नया एम्स बनाने के बजाय दरभंगा मैडिकल कालेज हॉस्पिटल (डीएमसीएच) को ही एम्स के रूप में अपग्रेड करने की दलील देकर जमीन देने से बचना चाहती थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे नीतिगत आधार पर अमान्य कर दिया।
श्री मोदी ने कहा कि महीनों बाद डीएमसीएच परिसर में ही एम्स के लिए मात्र 50 एकड़ भूमि दी गई। फिर अशोक पेपर मिल के विवादास्पद परिसर में 200 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया गया। अब कहीं और भूमि देने की बात है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जमीन देने का फैसला करने में ही इतनी देर कर दी कि एम्स की स्थापना का काम सालों पिछड़ गया।
श्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार की तत्परता से दरभंगा हवाई अड्डे से विमान सेवाएँ शुरू तो हो गईं, लेकिन इसके विस्तार के लिए जमीन देने में फिर राज्य सरकार हीला-हवाली कर रही है, ताकि इसका श्रेय केंद्र को न मिलने पाए।
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पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह का राजद से निष्कासन तय हो गया है और किसी भी समय इन्हें छह वर्षों के लिए पार्टी से बाहर करने कि घोषणा हो सकती है ।
–नीतीश अभी भी बीजेपी वाली मानसिकता से नहीं निकल पाये हैं बाहर
–प्रशासनिक अधिकारियों को पोस्टिंग में एक बार फिर आया सामने
—तेजस्वी का मिशन 2024 में कार्यकर्ता साथ छोड़ दे तो कोई बड़ी बात नही्
–सुधाकर का पार्टी से निकालना आत्मघाती हो सकता है राजद के लिए
–रघुवंश सिंह का नुकसान समझ नहीं पा रहा हैं तेजस्वी
–तेजस्वी राहुल नहीं है ये उन्हें समझना चाहिए
नीतीश कैम्प की इक्छा है कि सुधाकर सिंंह को पार्टी से निकालने कि घोषणा राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के माध्यम से ही करायी जाए इस वजह से जो देरी हो जाए वैसे तेजस्वी ने मन बना लिया है कि सुधाकर सिंह को लालू प्रसाद के बातचीत करने कि स्थिति में आने से पहले निपटा दिया जाए क्यों कि सिंगापुर से जो लालू प्रसाद के स्वास्थ्य को लेकर खबर आ रही है वह संतोषजनक नहीं है।
कल जब छपरा में तेजस्वी कह रहे थे कि सुधाकर सिंह बीजेपी के ऐजेंडे पर काम कर रहे हैं और महागठबंधन का लक्ष्य है मोदी को सत्ता से बेदखल करना और इसमें जो भी बाधक बनेगा उसको बर्दास्त नहीं किया जायेंगा। ठीक उसी समय राजद का एक और विधायक मीडिया से उसी अंदाज में बात कर रहा था जिस अंदाज में सुधाकर सिंह पिछले कई दिनोंं से कह रहा है।ऐसा भी नहीं है कि नीतीश की शैली से सिर्फ राजद के दो चार विधायक ही असहज नहीं है लाखो कार्यकर्ता भी असहज है और यही स्थिति बनी रही तो राजद को बड़ा नुकसान होगा यह अब दिखने लगा है क्योंं कि जिस तरीके की अफरशाही थाना और प्रखंड स्तर पर अभी भी लूट मचा रखा है उससे राजद के विधायक और कार्यकर्ता असहज है।
यही स्थिति बनी रही तो 2024 में राजद मोदी से लड़ने कि स्थिति मे रहेंगा भी या नहीं कहना मुश्किल है क्यों कि राजद के विधायक ही परेशान नहीं है कार्यकर्ता भी परेशान है और हाल के दिनों में अधिकारियों का जिस तरीके से पोस्टिंग किया गया है उसमें अधिकांश अधिकारी भाजपा माइंडसेट का है जिस वजह से राजद का कार्यकर्ता और भी असहज हो गया है क्यों कि ऐसे अधिकारी ईमानदारी से काम करते हैं ऐसा भी नहीं है बल्कि बीजेपी के लाइन के साथ खड़े रहते हैं समस्या यह भी है ।
2015 में भी महागठबंधन जब बना था नीतीश इसी शैली में काम करते रहे जिससे राजद और कमजोर हुआ और उसी का नतीजा था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में राजद का खाता तक नहीं खुला जो जनता दल और राजद के राजनीतिक सफर में कभी नहीं हुआ था.
ये कहने के लिए है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को ताकत मिलने से प्रशासनिक व्यवस्था धराशाही हो जाती है यह पूरी तौर पर सही नहीं है जबकि इसका असर यह पड़ता है कि स्थानीय प्रशासन पर दबाव रहता है कि गलत ना करे क्यों कि अधिकारी आते रहते हैं जाते रहते हैं लेकिन किसी भी पार्टी का कार्यकर्ता और नेता को हमेशा वही रहना होता है ऐसे में बहुत ज्यादा दाये बाये करने कि गुनजाइस कम रहती है ।

लालू के शासन काल को इसी आधार पर बदनाम किया जाता है कि राजद के कार्यकर्ता और नेता के कारण राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गया ।
हां नीतीश के शासन काल में किसी भी पार्टी के कार्यकर्ताओं का कुछ भी नहीं तो क्या सरकारी काम के गुनवत्ता में सुधार हो गया ,भ्रष्टाचार कम हो गया ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है अराजक स्थिति है अमीर को नीतीश के शासन काल में लाभ मिल रहा है लेकिन एक भी गरीब को न्याय नहीं मिलता है ।
बिना पैसा लिए थाना हो या फिर प्रखंड हो काम ही नहीं हो सकता है आज कोई भी नेता यह कहने कि स्थिति में नहीं है कि थाना या फिर प्रखंड में कहने वाला नहीं है कि यह गरीब है इससे घूस मत लीजिए।
अगर ऐसा नहीं होगा तो पार्टी 2005 से सरकार में है मुख्यमंत्री उसका है वो पार्टी लगातार कमजोर क्यों होती जा रही है उन्हें आज भी सत्ता में बने रहने के लिए बैसाखी की जरुरत क्यों पड़ रही है कारण ये भी है कि अफसर के सहारे जो सरकार चलाने कि कोशिश हुई उससे पार्टी के साथ साथ लोकतांत्रिक संस्थान भी कमजोर हुआ और धीरे धीरे पूरी प्रशासनिक व्यवस्था एक व्यक्ति पर केन्द्रीत हो कर रह गया जिसका खामियाजा राज्य भुगत रहा है ।

वैसे रघुवंश सिंह के जाने से गंगा के उस पार वाले इलाके में समाजवादी विचार से जुड़े लोग जो राजद के साथ खड़े थे वो राजद से दूर हुए और उसका नुकसान लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी राजद को भुगतना पड़ा और जगदानंद सिंंह कमजोर हुए तो शहाबाद और मगध के इलाके में जो गैर यादव और मुसलमान राजद से जुड़े हुए हैं राजद से दूर हो जाएगे ये खतरा है ।
नीतीश को सरकार चलाने कि जो जिद्द है वोट यादव और मुसलमान का लीजिएगा और सत्ता में भागादीरी बीजेपी मान्डसेट वाले लोगों को दीजिएगा 2024 तो छोड़िए 2023 का बजट वाला सत्र चलाना मुश्किल हो जाएगा यह दिखने लगा है ।
– संतोष सिंह के कलम से
पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वोट दिलाने की क्षमता खोकर अब राजद के लिए बोझ बन चुके हैं। पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह तो मुखर हैं, लेकिन उनकी पार्टी के अधिकतर विधायकों में नाराजगी है। विद्रोह की स्थिति है।
सीएम के विरुद्ध बोलने वालों को चेतावनी देना सिर्फ दिखावा
जो व्यक्ति सहयोगी दल के लिए बोझ, उसे पीएम- प्रत्याशी बता रहे ललन सिंह
श्री मोदी ने कहा कि सुधाकर सिंह सीएम के लिए लगातार ” शिखंडी, नाइट वॉचमैन, तानाशाह ” जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई करने के बजाय उन्हें केवल चेतावनी दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सुधाकर सिंह के विरुद्ध कार्रवाई करने में तेजस्वी यादव सक्षम हैं और यह कोई ऐसा काम भी नहीं कि खरमास बीतने की प्रतीक्षा की जाए।

श्री मोदी ने कहा कि राजद नेतृत्व एकतरफ नीतीश कुमार का अपमान करा रहा है, तो दूसरी तरफ ऐसा करने वालों को सिर्फ दिखावे के लिए कार्रवाई करने की धमकी दे रहा है। सब-कुछ सोची-समझी रणनीति है।
उन्होंने कहा कि सुधाकर सिंह को नोटिस तक नहीं दिया गया, इसलिए अब दूसरे विधायक भी मुख्यमंत्री के विरुद्ध बयान देने लगे।
श्री मोदी ने कहा कि जिस नीतीश कुमार को बिहार में जदयू का प्रमुख सहयोगी दल बोझ मानकर उनसे मुक्ति पाना चाहता है, उसे आत्ममुग्ध जदयू अध्यक्ष ललन सिंह प्रधानमंत्री-पद का दावेदार बता रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिस नीतीश कुमार के बूते जदयू विधानसभा की 45 सीट जीत नहीं सकता और 2014 में जो दल लोकसभा की केवल 2 सीट जीत सका था, उसे प्रधानमंत्री बनाने का सपना दिखाया जा रहा है।

श्री मोदी ने कहा कि केजरीवाल, ममता बनर्जी सहित कई मुख्यमंत्री अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र में सीमित राजनीतिक सफलता के मानकों पर प्रधानमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार से ज्यादा बड़े दावेदार हैं, लेकिन ये सभी किसी और को पीएम-प्रत्याशी स्वीकार करने को राजी भी नहीं ।
दिल्ली/पटना । बिहार में दिसंबर 2022 में हुई जहरीली शराब से मौत के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश(CJI) डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आप इस मामले को लेकर हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते?
CJI ने कहा कि आपने अपनी याचिका में जो भी 3 मांगें की है, उन सभी मांगों पर हाईकोर्ट के पास समुचित अधिकार है कि वहीं पर सुनवाई कर सकता है।
आपको बता दे की याचिकाकर्ता द्वारा बिहार के छपरा में हुई जहरीली शराब से मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की SIT से जांच की मांग और पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने की मांग की गई थी।

इसके अलावा देशभर में अवैध शराब के निमाण, व्यापार और बिक्री को काबू करने को लेकर नेशनल एक्शन प्लान बनाने की भी मांग की गई थी।
बिहार में जहरीली शराब के कारण दिसंबर में 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले ने जमकर तूल पकड़ा और विपक्ष ने बिहार सरकार को निशाना बनाया था। इसके बाद मामला Supreme Court में सुनवाई के लिए पहुंचा तो कोर्ट ने 9 जनवरी के लिए तारीख दी थी।
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पटना । बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) ने आज 10वीं कक्षा का एडमिट कार्ड जारी किया है । 10वीं कक्षा की प्रैक्टिकल परीक्षाएं 19 जनवरी से 21 जनवरी के बीच आयोजित होंगी । बिहार बोर्ड की ओर से हाईस्कूल की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड 8 जनवरी से 15 जनवरी तक वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगे ।
बिहार बोर्ड के अधीन संचालित स्कूलों के प्रिंसिपल आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in और secondary.biharboardonline.com से हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में इस बार शामिल होने वाले पंजीकृत स्टूडेंट का एडमिट कार्ड यानी हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं ।

Bihar Board Class 10th Exam full details of exam: बिहार स्कूल बोर्ड की ओर से हाईस्कूल का एनुअल एग्जाम दो पालियों में आयोजित किया जाना है। बोर्ड परीक्षा के शुरू होने वाले दिन पहली पाली सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक और दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 1:45 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। परीक्षा के आखिरी दिन मॉर्निंग शिफ्ट सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक और इवनिंग शिफ्ट दोपहर 1:45 बजे से शाम 4:30 बजे तक होगी।
वैशाली । वैशाली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शनिवार को नीतीश कुमार ने कहा – ‘बिहार में जनसंख्या नियंत्रण में नहीं आएगी क्योंकि पुरुष जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं’ ।
BJP बोली- बिहार की छवि खराब कर रहे।
वैशाली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शनिवार को नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में जनसंख्या नियंत्रण में नहीं आएगी क्योंकि पुरुष जिम्मेदारी नहीं लेते हैं जबकि महिलाएं अशिक्षित रहती हैं. नीतीश कुमार ने कहा कि ‘महिलाएं पढ़ लेंगी तभी प्रजनन दर घटेगा।

भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार को इस बयान के लिए फटकार लगाई है और कहा कि नीतीश ने बिहार की छवि को धुमिल किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने के रूप में सार्वजनिक रूप से अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
मुख्यमंत्री श्री कुशासन कुमार जी ने जिन अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया वह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। ऐसे शब्दों का प्रयोग कर वह मुख्यमंत्री पद की गरिमा को कलंकित कर रहे हैं। pic.twitter.com/d8hwU0KzkR
— Samrat Choudhary (Modi Ka Parivar) (@samrat4bjp) January 7, 2023
सम्राट चौधरी ने ट्वीट किया “मुख्यमंत्री श्री कुशासन कुमार जी ने जिन अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया वह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। ऐसे शब्दों का प्रयोग कर वह मुख्यमंत्री पद की गरिमा को कलंकित कर रहे हैं।”
बिहार में सर्दी का कहर निरंतर बढ़ता जा रहा है। हाड़ कंपाने वाली सर्दी से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। हालात यह है कि ठंड से बचने के लिए लोग घरों से निकलने से गुरेज ही कर रहे हैं। हालत यह रही कि बर्फीली हवाओं से हाथ-पांव सुन्न हो रहे हैं। लोग जगह-जगह अलाव तापकर राहत पाने की कोशिश करते रहे।
पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी और पछुआ के साथ उत्तर पछुआ हवा के प्रवाह की वजह से ठंड में कमी नहीं हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो अगले 72 घंटे तक बिहार में ठंड से राहत मिलने वाली नहीं है और न्यूनतम तापमान के साथ-साथ अधिकतम तापमान सामान्य से 7 डिग्री कम रहेगा। प्रदेश का औसत न्यूनतम तापमान अभी 7 से 9 डिग्री के बीच बना हुआ है और हाड़ मांस कपा देने वाली ठंड से लोगों का हाल बेहाल है।

ठंड को देखते हुए जिलाधिकारी पटना चंद्रशेखर सिंह ने फिर से 14 जनवरी तक जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक दसवीं क्लास तक की पढ़ाई पर अभी प्रतिबंध लगा रहेगा और 16 जनवरी से सभी स्कूल खोले जाएंगे।

घने कोहरे के कारण पटना में ट्रेनों और विमानों का संचालन बाधित; कई रद्द, कई देरी से चल रहे हैं। दिल्ली समेत उत्तर भारत से आने वाली ट्रेनें अधिक देर से आईं। यात्री परिजनों के साथ नया साल नहीं मना सके। दिल्ली समेत उत्तर भारत से आने वाली ट्रेनें अधिक देर से आईं।

बिहार में कोहरे-धुंध से फ्लाइट्स देरी से चल रही है । घने कोहरे और विजिबिलिटी कम होने के कारण पटना एयरपोर्ट पर विमानों का परिचालन प्रभावित हुआ है ।
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