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गाजियाबाद डंपिंग ग्राउंड विवाद: मीरपुर में किसानों पर लाठीचार्ज का आरोप, 25 से अधिक घायल; पुलिस बोली– हल्का बल प्रयोग, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के मीरपुर गांव में डंपिंग ग्राउंड को लेकर चल रहा विवाद रविवार को हिंसक झड़प में बदल गया। करीब दो महीने से नगर निगम द्वारा यमुना खादर क्षेत्र के किनारे बनाए गए कचरा निस्तारण स्थल के विरोध में धरना दे रहे किसानों और पुलिस के बीच उस समय टकराव हो गया, जब प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने जबरन धरना स्थल खाली कराया, लाठीचार्ज किया और महिलाओं तक को नहीं बख्शा। वहीं पुलिस का कहना है कि लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि केवल “हल्का बल प्रयोग” कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

यह पूरा मामला मीरपुर, पचायरा और बदरपुर गांवों के किसानों से जुड़ा है, जो पिछले दो महीनों से डंपिंग ग्राउंड को हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस कचरा स्थल से पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है, लोग बीमार हो रहे हैं और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि इस जमीन पर स्कूल या अस्पताल बनाया जाना चाहिए, न कि कूड़ाघर।

दो महीने से जारी है विरोध

मीरपुर गांव के बाहरी इलाके में नगर निगम द्वारा यमुना नदी के खादर क्षेत्र के पास डंपिंग ग्राउंड विकसित किया गया है। यहां शहर का ठोस कचरा लाकर डाला जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से यहां कूड़ा डाला जाने लगा है, तब से आसपास के खेतों, घरों और जल स्रोतों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

गांववालों के अनुसार, दुर्गंध के कारण सांस लेने में परेशानी होती है, बच्चों और बुजुर्गों में त्वचा रोग और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं। किसानों का दावा है कि कचरे से निकलने वाला दूषित पानी जमीन में रिसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे पिछले दो महीने से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

रविवार को अचानक बढ़ा तनाव

रविवार दोपहर करीब 2 बजे स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारी किसान बड़ी संख्या में डंपिंग ग्राउंड स्थल पर पहुंच गए। इसी दौरान यह सूचना फैली कि पुलिस गिरफ्तारी के लिए ट्रक और वैन लेकर पहुंच रही है। देखते ही देखते वहां भीड़ बढ़ने लगी और नारेबाजी शुरू हो गई।

किसानों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें समझाने के बजाय बलपूर्वक हटाने की कोशिश की। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वाहनों में बैठाकर ले जाना शुरू किया, तो भीड़ उग्र हो गई। कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

महिलाओं का आरोप– खेतों में दौड़ाकर पीटा

घटना के दौरान मौजूद महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वे विरोध कर रही थीं, तब पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की। विरोध करने पर उन्हें खेतों की ओर दौड़ा लिया गया। कई महिलाएं भागते-भागते गिर गईं, जिसके बाद उन्हें घसीटकर पीटा गया।

एक बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाएं हाथ जोड़कर रहम की गुहार लगाती रहीं, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। इस दौरान कई महिलाएं घायल हो गईं। कुछ को सिर और कमर में गंभीर चोटें आई हैं।

25 से अधिक घायल होने का दावा

किसानों का दावा है कि लाठीचार्ज में करीब 25 लोग घायल हुए हैं। एक महिला के सिर में गंभीर चोट आई है, जबकि एक ग्रामीण का कूल्हा टूट गया। 70 वर्षीय किसान धन सिंह ने कहा कि उन्हें कई जगह चोट लगी है और हाथ की एक उंगली टूट गई है।

मीरपुर निवासी विनीत शर्मा का कहना है कि किसानों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि पुलिस का कोई भी कर्मचारी घायल नहीं हुआ। हालांकि पुलिस का दावा इससे अलग है।

एक अन्य किसान भूरा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने गाली-गलौज की और मारपीट की। उन्होंने अपने शरीर पर चोट के निशान भी दिखाए। सोनू नामक किसान ने कहा कि उन्होंने तो हाथ बांध रखे थे, फिर भी पुलिस ने बेरहमी से लाठियां बरसाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मां तक को नहीं छोड़ा गया।

पुलिस का पक्ष– लाठीचार्ज नहीं, हल्का बल प्रयोग

घटना को लेकर पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने कहा कि किसानों को अधिकारियों को ज्ञापन देना था, लेकिन वे डंपिंग ग्राउंड का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। उन्हें हटाने के दौरान दो पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें अस्पताल भेजा गया है।

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किया गया, जिसकी वीडियो फुटेज भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया गया।

घटना के दौरान डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात था। चार थानों से 100 से अधिक पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। स्थिति बिगड़ने पर नगर निगम के अधिकारी और मजिस्ट्रेट मौके से चले गए।

धरना स्थल बदला, आंदोलन जारी

पुलिस द्वारा डंपिंग ग्राउंड स्थल खाली कराने के बाद ग्रामीण करीब 100 मीटर दूर स्थित मंदिर परिसर में धरने पर बैठ गए। सोमवार को भी किसान मीरपुर गांव के बाहर धरना दे रहे थे। हालांकि प्रदर्शनकारियों की संख्या घटकर 10-15 रह गई है, क्योंकि कई लोग घर लौट चुके हैं।

किसानों का कहना है कि जब तक डंपिंग ग्राउंड हटाया नहीं जाएगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे प्रशासन से लिखित आश्वासन चाहते हैं।

विधायक का बयान– सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

लोनी विधानसभा से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि वे इस समय लखनऊ में हैं, जहां विधानसभा सत्र चल रहा है। उन्होंने कहा कि डंपिंग ग्राउंड सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया है, इसलिए वे इस पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था किसी भी हाल में नहीं बिगड़नी चाहिए और पुलिस व किसानों दोनों से बातचीत की जाएगी।

पर्यावरण बनाम विकास की बहस

यह विवाद केवल एक स्थानीय धरना नहीं, बल्कि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की बहस को भी सामने लाता है। शहरों के बढ़ते कचरे के निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड आवश्यक माने जाते हैं, लेकिन उनके स्थान चयन और प्रबंधन को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते हैं।

मीरपुर के किसान सवाल उठा रहे हैं कि क्या आबादी और कृषि भूमि के पास कचरा स्थल बनाना उचित है? उनका कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह स्थल बनाया गया है, तो भी स्थानीय लोगों की सहमति और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

प्रशासन के सामने चुनौती

प्रशासन के लिए यह मामला कानून-व्यवस्था और जनभावनाओं के बीच संतुलन साधने की चुनौती बन गया है। एक ओर नगर निगम के लिए कचरा निस्तारण जरूरी है, तो दूसरी ओर ग्रामीणों की सेहत और आजीविका का सवाल भी महत्वपूर्ण है।

यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो यह विवाद आगे और गहरा सकता है। फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है।

UP Codeine Cough Syrup Case: वाराणसी से पूर्व सपा युवा नेता गिरफ्तार, 2000 करोड़ के अवैध नेटवर्क की जांच तेज

उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ यूनिट ने वाराणसी के हरहुआ रिंग रोड के पास से अमित यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में पहले से मुकदमा दर्ज है।

गिरफ्तार अमित यादव वाराणसी के मैदागिन क्षेत्र का निवासी है। पूछताछ में उसने बताया कि वह हरिश्चंद्र पोस्टग्रेजुएट कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुका है और समाजवादी पार्टी की युवा सभा में राज्य सचिव की जिम्मेदारी भी निभा चुका है।

कैसे जुड़ा नेटवर्क से नाम?

एसटीएफ के अनुसार, कॉलेज के दिनों में उसकी मुलाकात शुभम जायसवाल से हुई थी। जांच में सामने आया है कि शुभम के पिता भोला प्रसाद की कंपनी ‘शैली ट्रेडर्स’ पर एबॉट कंपनी की ‘फेंसेडिल’ कफ सिरप की अवैध सप्लाई और तस्करी का आरोप है। कोडीनयुक्त कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है, जिसकी मांग पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक बताई जा रही है।

पुलिस का दावा है कि अधिक मुनाफे के लालच में अमित यादव ने अपनी कंपनी ‘जीएल सर्जिकल’ के नाम से एक लाख से ज्यादा बोतलें खरीदीं। बाद में फर्जी कागजों के जरिए इन्हें दूसरी कंपनी के नाम पर ऊंची कीमत पर बेचा गया।

गंभीर आपराधिक मामले पहले से दर्ज

अधिकारियों के मुताबिक अमित यादव पर दंगा, हत्या के प्रयास और धोखाधड़ी जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस पूरे प्रदेश में कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधानसभा में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सरकार के पास नकली दवाओं या कोडीन सिरप से मौत की कोई ठोस जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि मामले में शामिल कुछ आरोपियों के संबंध समाजवादी पार्टी से जुड़े पाए गए हैं।

सीएम योगी ने दावा किया था कि आरोपी अमित यादव की तस्वीर Akhilesh Yadav के साथ देखी गई है और कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल भी सपा से जुड़ा रहा है।

वहीं, अखिलेश यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष पर आरोप मढ़ रही है और निष्पक्ष जांच नहीं हो रही।

क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश में कथित तौर पर कफ सिरप के सेवन से 20 बच्चों की मौत के बाद यह मामला सुर्खियों में आया। जांच में खुलासा हुआ कि करीब 57 करोड़ रुपये की 37 लाख से ज्यादा कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें फर्जी दस्तावेजों और लाइसेंस के जरिए बेची गईं। यूपी पुलिस के अनुसार यह पूरा सिंडिकेट करीब 2,000 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार से जुड़ा हो सकता है।

18 अक्टूबर को सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज में आबकारी विभाग ने दो संदिग्ध कंटेनरों से 11,967 बोतलें कोडीन कफ सिरप बरामद की थीं। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है। कई जिलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 77 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

सरकार का कहना है कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। वहीं विपक्ष प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं।

उत्तर प्रदेश में देश का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय स्थापित किया जाएगा; परंपरा, विज्ञान और पर्यटन का अनूठा संगम

मथुरा, उत्तर प्रदेश: ब्रजभूमि की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश में देश का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय स्थापित किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना मथुरा स्थित Pandit Deen Dayal Upadhyay Pashuchikitsa Vigyan Vishwavidyalaya के परिसर में विकसित की जाएगी। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की पहल पर तैयार हो रही इस योजना को राज्य सरकार का विशेष समर्थन प्राप्त है।

अधिकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर के भीतर संग्रहालय निर्माण के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है और प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। यह संग्रहालय न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से गाय और उससे जुड़े उत्पादों की उपयोगिता को भी व्यापक रूप से प्रस्तुत करेगा।

परंपरा और विज्ञान का सेतु

आगरा मंडल के आयुक्त नगेंद्र प्रताप ने जानकारी देते हुए कहा कि यह संग्रहालय आमजन को भारतीय परंपरा में गाय के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराएगा। साथ ही, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गाय के दूध, गोबर, गोमूत्र तथा अन्य उत्पादों की उपयोगिता को सरल और प्रमाणिक तरीके से समझाया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना अंधविश्वास नहीं, बल्कि परंपरा और विज्ञान के संतुलित समन्वय पर आधारित होगी। उद्देश्य यह है कि गो-संरक्षण, गो-पालन और गो-आधारित जीवनशैली को लेकर लोगों में व्यावहारिक और तार्किक समझ विकसित हो। भविष्य की पीढ़ियों को भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जैविक जीवनशैली से जोड़ना भी इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

निरीक्षण और प्रशासनिक सक्रियता

शनिवार को प्रस्तावित स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, मथुरा के जिलाधिकारी सीपी सिंह, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन, परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सूरज पटेल, पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा तथा विश्वविद्यालय के डॉ. अमित शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

निरीक्षण के दौरान संग्रहालय की संरचना, थीम, प्रदर्शनी की रूपरेखा और पर्यटक सुविधाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने इस परियोजना को राष्ट्रीय स्तर का मानक देने पर बल दिया, ताकि यह केवल एक संग्रहालय न होकर ज्ञान, शोध और पर्यटन का केंद्र बन सके।

क्या होगा इस संग्रहालय में खास?

1. सौ से अधिक गोवंश नस्लों के मॉडल

संग्रहालय में लगभग 100 प्रकार के गोवंश के प्रतिरूप (मॉडल) प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें देश की प्रमुख गायों की नस्लें—जैसे गिर, साहीवाल, थारपारकर, हरियाणा आदि—के साथ-साथ कुछ दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों को भी शामिल किया जाएगा। इससे आगंतुक एक ही स्थान पर भारत की समृद्ध गो-परंपरा का समग्र परिचय प्राप्त कर सकेंगे।

2. दुग्ध उत्पादों की आधुनिक प्रदर्शनी

यहां दूध और उससे बनने वाले उत्पाद—दही, पनीर, घी, मक्खन आदि—की विशेष प्रदर्शनी होगी। इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से इनके पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और आयुर्वेदिक महत्व को सरल भाषा में समझाया जाएगा। बच्चों और विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे।

3. गो-आधारित उत्पादों का लाइव अनुभव

संग्रहालय परिसर में एक दुग्ध उत्पाद बूथ स्थापित किया जाएगा, जहां शुद्ध दूध और उससे बने उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। इसके अतिरिक्त जैविक खाद, पंचगव्य आधारित उत्पाद और ग्रामीण उद्योग से जुड़े सामानों को भी प्रदर्शित किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्व-रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

4. आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयाम

भारतीय सनातन परंपरा में गाय को ‘गौमाता’ के रूप में सम्मानित किया गया है। संग्रहालय में वेदों, पुराणों और लोक परंपराओं में वर्णित गाय के महत्व को ऑडियो-विजुअल माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और गो-संस्कृति के ऐतिहासिक संबंध को भी विशेष रूप से दर्शाया जाएगा।

ब्रज क्षेत्र की पहचान को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किए जा रहे इस संग्रहालय से ब्रज क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। मथुरा-वृंदावन पहले से ही देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का केंद्र है। ऐसे में गो-संस्कृति संग्रहालय धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ शैक्षणिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे सकती है। होटल, परिवहन, गाइड सेवा और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

शिक्षा और शोध का केंद्र

चूंकि यह संग्रहालय पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय परिसर में बनाया जाएगा, इसलिए शोध और अकादमिक गतिविधियों को भी इससे जोड़ा जा सकता है। पशुपालन, डेयरी विज्ञान और जैविक कृषि पर अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अध्ययन का अवसर मिलेगा। भविष्य में यहां गो-संरक्षण पर सेमिनार, कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।

अलीगढ़ में दामाद से शादी करने वाली महिला थाने पहुंची, बोली- अब अपने तरीके से जीना चाहती हूं

अलीगढ़ में चर्चित मामले में नया मोड़ सामने आया है। करीब 10 महीने पहले बेटी की शादी से पहले दामाद के साथ चली गई महिला अब फिर से थाने पहुंची। दामाद ने आरोप लगाया कि महिला उसे छोड़कर अपने जीजा के साथ चली गई है। हालांकि महिला ने इन आरोपों को गलत बताया है।

दामाद ने थाने में दी शिकायत

दादों थाने में दी गई शिकायत में राहुल (दामाद) ने कहा कि उसकी पत्नी अनीता का अपने जीजा से संपर्क था और दोनों के बीच फोन पर बातचीत होती थी। उसने आरोप लगाया कि 6 फरवरी को अनीता उसे छोड़कर चली गई और साथ में नकदी व जेवर भी ले गई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद मामले को दूसरे राज्य से जुड़ा बताते हुए स्थानीय स्तर पर कार्रवाई से इनकार किया।

महिला ने आरोपों को बताया गलत

मामला मीडिया में आने के बाद अनीता स्वयं थाने पहुंची। उसने कहा कि दामाद के साथ रहने का उसका फैसला गलत था और अब वह स्वतंत्र रूप से जीवन जीना चाहती है। उसने राहुल पर मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए। महिला का कहना है कि वह अब मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों के पास रहना चाहती है।

पूरा मामला कैसे शुरू हुआ

बताया जाता है कि अप्रैल 2025 में बेटी की शादी तय होने के कुछ दिन पहले महिला घर से गायब हो गई थी। उसी समय होने वाला दामाद भी अपने घर से निकल गया। बाद में दोनों ने थाने में पेश होकर साथ रहने की इच्छा जताई थी। काउंसिलिंग के बाद महिला ने अपने पहले पति के साथ जाने से इनकार कर दिया था और दामाद के साथ रहने लगी थी।

पारिवारिक स्थिति

महिला के पहले पति ने बाद में दूसरी शादी कर ली। बेटी की शादी फिलहाल तय नहीं हो सकी है। परिवार ने महिला से दूरी बना ली है।

नोट: मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि के बाद ही तथ्यों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

सपा विधायक से खन्ना बोले- मंत्रीजी से कुश्ती लड़ लो: महाना ने कहा- सदन में नहीं होगी; रागिनी-नंदी में तीखी बहस

यूपी विधानमंडल में बजट सत्र का आज चौथा दिन है। स्पोर्ट्स पर चर्चा के दौरान सपा विधायक कमाल अख्तर ने कहा कि जैसे एक अच्छा डॉक्टर अच्छा स्वास्थ्य मंत्री हो सकता है, वैसे ही एक खिलाड़ी अच्छा स्पोर्ट्स मंत्री हो सकता है। मंत्री गिरीश यादव ने खड़े होकर कहा कि उन्होंने हर खेल में हिस्सा लिया है।

वित्त मंत्री ने खेल मंत्री का बचाव किया

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, “मंत्रीजी रेसलिंग करते हैं, किसी दिन यहां कुश्ती करवा देंगे।” इस पर सतीश महाना ने चुटकी लेते हुए कहा कि कुश्ती विधानसभा में नहीं होगी, बाहर ही होगी। वित्त मंत्री ने कहा, “बाहर ही सही, लेकिन कुश्ती करा देंगे।”

विधान परिषद में भी हंगामा

विधानपरिषद में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि इनकी गलती नहीं है, इनके नेता का यही कल्चर है। सिर्फ बिल्डिंग से अस्पताल नहीं चलता। उन्होंने कुकर्म का उदाहरण देते हुए बताया कि अगर अस्पताल बनाते तो ठेका चाचा और भतीजे को दे देते।

विधानसभा में रागिनी और मंत्री नंदी में बहस

प्रश्नकाल के दौरान मंत्री नंद गोपाल नंदी रागिनी सोनकर के सवाल का जवाब देते समय उलझन में पड़ गए। स्पीकर सतीश महाना ने टोका और कहा कि प्रश्न का जवाब दें। मंत्री ने कहा कि सवाल में आपने कुछ किया, और आगे बढ़ते हुए इन्वेस्टर समिट की जानकारी देने लगे। इसके दौरान हंगामा हुआ।

सपा विधायक अनिल प्रधान की शायरी

चित्रकूट के सपा विधायक अनिल प्रधान ने किसान पर शायरी पढ़ी:

कर्ज के बोझ और बेरुखी को सहता है।
अन्नदाता होकर भी भूखा सोता है।
मेहनत की लकीरें माथे पर गहरी हैं,
लेकिन उसकी मेहनत से दुनिया अनसुनी है।

इस पर स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि आजकल सबको शायरी का शौक चढ़ गया है।

मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का गुस्सा

मंत्री दिनेश प्रताप सिंह सपा विधायक आरके वर्मा के सवालों का जवाब देते हुए गुस्से में आ गए। उन्होंने कहा कि नो-नो करने से कुछ नहीं होगा, उनके पास सभी दस्तावेज हैं और छाती ठोंककर कहा कि सरकार को जनता की चिंता है।

अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ शिकायत करने वाले को धमकी:फोन पर कहा- गाड़ी में आग लगवा देने, बालकों की हत्या कराएंगे; आशुतोष ब्रह्मचारी की पुलिस से शिकायत

अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ शिकायत करने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी को मिली धमकी

प्रयागराज में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया और 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उन्हें धमकियां मिलीं, जिसमें उनके वाहन में आग लगाने और नाबालिग बालकों को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी गई।

धमकियों का विवरण

आशुतोष ब्रह्मचारी ने पुलिस को बताया कि 11 फरवरी 2026 की रात उन्हें फोन और वॉट्सऐप कॉल के माध्यम से धमकाया गया। वीडियो कॉल में हथियार दिखाकर डराया गया और अश्लील व आपत्तिजनक शब्द बोले गए। महाराज ने पुलिस से सुरक्षा सुनिश्चित करने और मामले की जांच की मांग की है।

शिकायत के आरोप

महाराज का आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद बच्चों को गुरुकुल में रखकर उनसे अवैध कार्य कराते थे और यौन शोषण की संभावना थी। उन्होंने कोर्ट में दो बच्चों को भी पेश किया। अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सभी साक्ष्य कोर्ट में पेश किए हैं और न्यायपालिका पर भरोसा रखते हैं।

माघ मेले का विवाद

18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर पालकी को रोकने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। इस घटना में पुलिस ने कई समर्थकों को हिरासत में लिया था।

आगे की कानूनी कार्रवाई

आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण उन्हें धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कोर्ट और पुलिस से सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। आगामी सुनवाई 20 फरवरी 2026 को तय है, जब दोनों पक्षों के वकील कोर्ट में पेश होंगे।