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उप चुनाव नीतीश ,तेजस्वी ,चिराग और कन्हैया के लिए अग्नि परीक्षा है

हालांकि बिहार विधानसभा का उपचुनाव मात्र दो सीटों पर है लेकिन उपचुनाव के परिणाम का प्रभाव बिहार की राजनीति में दूरगामी पड़ेगा यह तय है। नीतीश का साख दाव पर है, वहीं तेजस्वी के तेज का भी परीक्षा है, चिराग बुझेगा या जलेगा यह भी तय हो जायेगा, वही कन्हैया कांग्रेस के लिए तुरुप का एक्का साबित होगा कि नहीं यह भी तय होगा। उप चुनाव में जिस तरीके से धनबल का इस्तेमाल शुरू हुआ है ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह उप चुनाव बिहार के चुनावी इतिहास में सबसे महंगा लड़े जाने वाला चुनाव होगा ।

1उप चुनाव नीतीश ,तेजस्वी ,चिराग और कन्हैया के लिए अग्नि परीक्षा है 
  चुनाव तो मात्र दो सीटों के लिए हैं लेकिन इन दो सीटों के परिणाम का बिहार की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा  नीतीश कुमार के लिए दोनों सीट जीतना बाढ़ के लोकसभा चुनाव जीतने से कम महत्वपूर्ण नहीं है. इसी तरह राजद अगर ये दोनों सीट जाता है तो बिहार में तख्तापलट की गुंजाइश बढ़ सकती है .वही चिराग दोनों सीटों पर जदयू को हराने में कामयाब हो गया तो फिर आने वाले समय में चिराग बिहार की राजनीति में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभर कर सामने आ सकता है ।

यही स्थिति कन्हैया की भी है बिहार में कांग्रेस और राजद के बीच जो तल्खी देखी जा रही है उसकी वजह कही ना कही कन्हैया है ऐसे में कन्हैया के सामने चुनौती है कि वह राजद के एम समीकरण में सेंध लगाने में कामयाब रहा तो आने वाले समय में कांग्रेस राजद के साथ आमने सामने बैठ कर बात कर सकती है।

2–बिहार का सबसे महंगा चुनाव लड़ा जा रहा है 
 बिहार के चुनावी इतिहास में यह सबसे महंगा चुनाव है जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है खर्च की सीमाएँ टूटती जा रही है ।   राज्य सरकार का पूरा मंत्रिमंडल तारापुर और कुशेश्वर स्थान में कैप किये हुए हैं ,सारा विधायक ,पूर्व विधायक और पार्टी के पदाधिकारी मोर्चा में डटे हुए हैं. दोनों क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल है। तारापुर तो आँनरोड है और पास में रहने की बेहतर व्यवस्था भी उपलब्ध है,लेकिन कुशेश्वर स्थान जहां आज भी रहने खाने का बेहतर व्यवस्था उपलब्ध नहीं है और बाजार 500 मीटर में सिमटा हुआ है वहां का नजारा देखने वाला है शाम के समय बाजार में सोमवारी पर्व जैसा माहौल दिखता है जिधर देखिए पजामा कुर्ता वाले ही दिखायी देगें 

 हर ब्रांड उपलब्ध है और ब्रांड बेचने वालो की तो चांदी है समस्तीपुर ,दरभंगा ,खगड़िया ,सहरसा और मधुबनी से जुड़े बड़े कारोबारी कुशेश्वरस्थान में ही कैप कर रहा है ,माल पहुंच गया है पार्टी के झंडा के आर में बहुत खेला हुआ है ,अब माल को गांव गांव में पहुंचाया जा रहा है। हालांकि ये इलाका पहले से ही इस मिजाज का रहा है हां ये सही है कि देशी वाला भी आज कल विदेशी ब्रांड से कम पड़ बैठने को तैयार नहीं है।   बाढ़ के फिर से लौट आने के कारण मछली की कोई कमी नहीं है हर घर में व्यवस्था पूरा टाइट है।  

 कल कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास से मिलने कांग्रेस के एक विधायक कुशेश्वर स्थान चले आए थे उनकी ड्यूटी तिलकेश्वर थाना क्षेत्र के एक पंचायत में लगाया गया था जैसे ही प्रभारी का ध्यान उस विधायक पर पड़ा गरज पड़े अरे आप पंचायत छोड़ कर यहां क्या कर रहे हैं ,सर नाव के अलावे वहां कोई और साधन उपलब्ध नहीं है दो दो घंटा नाव पर ही आना जाना होता है अब छोड़ दिया जाये सर, ठीक है तो आप विधायकी से रिजाइन दीजिए।ये स्थिति कांग्रेस का है हर पंचायत में कांग्रेस के विधायक ,पूर्व विधायक और पार्टी के सांसद ,पूर्व सांसद और पार्टी पदाधिकारी कैंप कर रहे हैं ।

 कांग्रेस की ये स्थिति है तो आप अंदाजा कर लीजिए जदयू और राजद के कैंप में क्या स्थिति होगी जदयू और राजद का कुशेश्वर स्थान में दो सौ से अधिक विधायक ,पूर्व विधायक ,विधान पार्षद और पूर्व विधान पार्षद के साथ साथ पार्टी के पदाधिकारी मौजूद है। इस चुनाव में सबसे कमजोर उम्मीदवार वाली पार्टी भी अपने उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए 50 लाख रुपया दिया है।तारापुर में राजद प्रत्याशी के लिए पूरे बिहार से वैश्य समाज का चंदा पहुंचना शुरू हो गया है ,इस बार जदयू भी किसी मौर्चे पर  पीछे नहीं है दोनों जगह एक एक मंत्री को विशेष तौर पर प्रभार दिया गया है ।  

 अभी जो चर्चा है इस बार एक बूथ पर दस हजार रुपया चुनाव के दिन खर्च के लिए दिया जायेगा तीनों दलों में कम्पीटीसन शुरू है कुशेश्वर स्थान विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी में एक प्रत्याशी  आर्थिक रूप से बहुत कमजोर है लेकिन पैसे की कोई कमी ना हो इसके लिए  पार्टी ने दो बड़े कारोबारी को कुशेश्वर स्थान में चुनाव तक बिठा दिया है कल से वो भी बोरा खोलना शुरु कर दिये हैं।  इतने बड़े स्तर पर विधानसभा चुनाव में वोट खरीद की तैयारी पहले कभी देखने को नहीं मिला है सबका फोकस कुशेश्वर स्थान ही है जहां तैयारी यह चल रही है कि इतना जाम छलके की लोग वोट देना ही भूल जाये ।

 3क्यों सभी राजनीतिक दल अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया है 
 इसकी बड़ी वजह यह है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में जिस तरह का मैन डेड जनता ने दिया है उस वजह से एक एक विधायक महत्वपूर्ण हो गया है दोनों सीट पर जदयू चुनाव लड़ रहा है और दोनों सीट पर पहले जदयू का कब्जा भी था जदयू इस बार तीसरे नम्बर पर चली गयी है ऐसे में ये दोनों सीट उनके लिए काफी महत्वपूर्ण है हार हुई तो सरकार गिरे ना गिरे नीतीश और कमजोर होगा इसलिए पार्टी अपना सब कुछ दाव पर लगा दी है ।

 यही स्थिति राजद का है राजद अगर दोनों सीट जीत जाती है तो राजद नीतीश पर और हमलावर हो जाएगा और इस स्थिति में सरकार अस्थिर भी सकती है इसलिए राजद अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया है यहां तक कि बीमार चल रहे लालू प्रसाद भी 27 को चुनाव प्रचार में तारापुर और कुशेश्वर स्थान जा रहे हैं ।

कांग्रेस राजद से अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया है और इस फैसले को मजबूती कैसे मिले इसके लिए 1989 के बाद पहली बार कांग्रेस अपने पूरे संसाधन को झोंक दिया है हालांकि बिहार प्रदेश कांग्रेस के अधिकांश नेता कांग्रेस आलाकमान के इस फैसले में पलीता लगाने की पूरी कोशिश में लगा है लेकिन तारापुर और कुशेश्वर स्थान में कांग्रेस के जो प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं उसमें खास करके अशोक राम का पूरा राजनीतिक करियर दाव पर लगा हुआ है सम्मान जनक वोट नहीं आया तो फिर 1980 से जो उनकी राजनीति चली आ रही है उस पर विराम लग जाएगा इसलिए वो भी पूरे संसाधनों के साथ मैदान में डटे हुए हैं ।

 तारापुर से जो कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रहा है वो भी अपने काम के बल पर 2020 के विधानसभा चुनाव में 12 हजार से अधिक वोट निर्दलीय ले आया था इस बार कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे हैं संसाधन की कोई कमी नहीं है और पार्टी भी मदद में खड़ी है झारखंड के एक मंत्री को विशेष तौर पर जिम्मेवारी दी गयी है ।

चिराग  बिहार की राजनीति में बने रहे इसके लिए ये दोनों चुनाव बहुत महत्व रखता है तारापुर में उसके उम्मीदवार राजपूत और पासवान वोटर के सहारे मजबूती जताने कि कोशिश में लगा है पिछले चुनाव में भी सात हजार से ज्यादा वोट लोजपा को आया था उस बार वोट बढ़ सकता है इस सम्भावना को देखते हुए यहां लोजपा सब कुछ झोक दिया है कुशेश्वर स्थान तो रामविलास पासवान का ननिहाल ही है लेकिन जदयू से जो खड़ा है वो भी रामविलास पासवान का रिश्तेदार ही है ऐसे में चिराग के सामने बड़ी चुनौती यह है कि यहां ज्यादा से ज्यादा पासवान वोट में डीभीजन करा दे 2020 के चुनाव में भी लोजपा प्रत्य़ाशी को 12 हजार से ज्यादा वोट आया था इसलिए यहां चिराग लगातार कैंप कर रहे हैं ।  मतलब यह उप चुनाव बिहार की राजनीति किस करवट लेगी उसका भविष्य तय कर सकता है कन्हैया की भी प्रतिष्ठा दाव पर है इसलिए हर पार्टी अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया है।

कांग्रेस के साथ मेरा रिश्ता अटूट है कांग्रेस के बगैर विपक्षी एकता संभव नहीं

पटना आने के बाद पहली बार मीडिया से बात करते हुए लालू यादव ने नीतीश कुमार,केन्द्र की मोदी सरकार और कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते को लेकर खुल कर बात किया । लालू यादव ने अपने इंटरव्यू में तेजस्वी यादव की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव संगठन और पार्टी को बेहतर तरीके से चला रहे हैं, वह एक कुशल नेतृत्वकर्ता है। लेकिन परिवार में चल रहे विवाद को लेकर लालू यादव ने कोई टिप्पणी नहीं कि है ।

कांग्रेस से मेरा रिश्ता अटूट है
हाल के दिनों में बिहार विधानसभा उप चुनाव को लेकर कांग्रेस और राजद के बीच गठबंधन टूटने कि बात पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का वजूद है। कांग्रेस के लिए हमने जितना किया है, उतना किसने किया? कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को यह बात पता है, लेकिन कांग्रेस की नौकरी करने वाले छुटभैये नेता इस बात को नहीं समझते। लालू ने यह भी कहा कि आज भी देश में विपक्षी एकजुटता का नेतृत्व कांग्रेस ही कर सकती है
उपचुनाव में पार्टी की जीत का दावा किया

लालू यादव ने मौजूदा विधानसभा उपचुनाव में अपनी पार्टी की जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि RJD के उम्मीदवार दोनों सीटों पर चुनाव जीतेंगा। कहा कि तेजस्वी यादव ने पहले ही विरोधियों की हवा निकाल दी है और जो थोड़ा बहुत बचा है, उसका विसर्जन करने मैं खुद आ गया हूं। लालू यादव ने कहा कि वे 27 अक्टूबर को दोनों विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करेंगे।

नीतीश कुमार अहंकारी है
लालू यादव ने कहा कि राजनीति में नीतीश कुमार जैसा अहंकारी दूसरा कोई नहीं है नीतीश खुद को प्रधानमंत्री के तौर पर देख रहे थे। हर तरफ से उन्हें PM मैटेरियल बताया जा रहा था। नीतीश कुमार जैसा अहंकारी व्यक्ति कोई नहीं हो सकता। नीतीश जब PM बनने में असफल रहे तब वह BJP की गोद में बैठ गए। BJP और PM नरेंद्र मोदी को भी भली-भांति पता है कि नीतीश कुमार क्या चीज है। वे जुगाड़ के सहारे बिहार में सत्ता पर बने हुए हैं।

केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया
लालू ने BJP और केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया। कहा कि देश में महंगाई अब कमरतोड़ स्थिति से भी ऊपर जा पहुंची है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। आम लोगों के लिए जीना मुश्किल हो गया है। BJP जब विपक्ष में थी तो महंगाई को मुद्दा बनाती थी, लेकिन आज देश में महंगाई की चर्चा तक नहीं होने दी जा रही है। आम आदमी परेशान है और सरकार को इसकी परवाह नहीं।

भक्तचरण पर टिप्पणी के बाद राजद से नाता तोड़ने की घोषणा करें सोनिया–सुशील कुमार मोदी

भक्तचरण पर टिप्पणी के बाद राजद से नाता तोड़ने की घोषणा करें सोनिया

  • सुशील कुमार मोदी

लालू प्रसाद के प्रचार करने से एनडीए को होगा फायदा

लोगों को याद है राजद का लंबा कुशासन, जिन्न निकलने वाला नहीं

1.कांग्रेस में यदि हिम्मत है तो सोनिया गांधी पार्टी के दलित नेता भक्तचरण दास पर लालू प्रसाद की भद्दी टिप्पणी के बाद राजद से संबंध तोड़ने की घोषणा करें।
पार्टी के राज्य प्रभारी पर टिप्पणी सीधे सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के नेतृत्व का अपमान है।
कांग्रेस को लालू प्रसाद से अपमान सहने की सीमा खुद तय करनी होगी।

  1. बीमारी की दलील देकर बेल पर छूटे लालू प्रसाद यदि आराम करने के बजाय चुनाव प्रचार के जरिये सक्रिय राजनीति में लौट रहे हैं, तो इससे एनडीए को लाभ ही होगा।
    जब वे सीधे जनता के सामने होंगे, तब उनके राज में हुए नरसंहार, अपहरण, लूटपाट, घोटाले और गाड़ी की खिड़की से बंदूक की नाल निकाल कर चलने वालों के डरावने दौर की याद दिलाने के लिए किसी को कुछ कहना नहीं पड़ेगा।

3 . लालू प्रसाद बिहार में लंबे कुशासन, सामूहिक पलायन और भ्रष्टाचार के जीवंत आइकॉन हैं, इसलिए लोगों की नाराजगी के डर से राजद ने पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी के पोस्टर से उन्हें गायब कर दिया था।
अब उपचुनाव में उनके प्रचार करने से कोई जिन्न निकलने वाला नहीं।

कांग्रेस राजद के बीच विवाद बढ़ा मीरा कुमार का बड़ा बयान लालू प्रसाद को डां से दिखाने कि जरुरत है

कांग्रेस और राजद के बीच जारी तनाव अब थमने का नाम नहीं ले रहा है ,लालू प्रसाद के बयान पर कांग्रेस की सीनियर नेता मीरा कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लालू जी को इलाज कराने की जरुरत है अभी भी वो स्वस्थ्य नहीं दिख रहे हैं भक्त चरण दास जी के बारे में लालू जी ने मर्यादा तोड़ा है।

मीरा कुमार के पटना पहुंचने से यह संकेत साफ है कि भक्त चरण दास को लेकर लालू प्रसाद का जो बयान आया है उसको लेकर कांग्रेस आलाकमान ने गंभीरता से लिया है वही आज कांग्रेस बिहार प्रभारी को लेकर पर दिये गये बयान को लेकर लालू प्रसाद का पुतला दहन किया है ।

कोरोना से हुई मौत मामले में सरकार पीड़ित परिवार को शीघ्र मुआवजा भुगतान करे –हाईकोर्ट

पटना हाई कोर्ट ने Covid 19 महामारी के कारण हुए मृत लोगों के परिवारों को चार लाख रुपये या अधिसूचित मुआवजा की राशि मुहैया कराने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता कुणाल की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष अभ्यावेदन दायर करने को कहा है।

याचिका में Covid 19 के कारण मृत लोगों की सही – सही आंकड़ा उपलब्ध करवाने हेतु आदेश देने का आग्रह किया गया था। वरीय अधिवक्ता बसंत कुमार चौधरी ने बताया कि आपदा प्रबंधन एक्ट, 2005 की धारा 12 के तहत निर्देश देने को लेकर याचिका दायर की गई थी।

याचिका में कोरोना के कारण मृत लोगों की सही – सही आंकड़ा उपलब्ध करवाने व मृतक के परिवार को मृत्यु का कारण बताते हुए आधिकारिक कागज उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया गया था।

याचिका में कहा गया है कि मार्च, 2020 में कोरोना का संक्रमण भारत में देखा गया। मार्च, 2021 में कोविड का दूसरा लहर भारत में आया। अप्रैल, 2021 से राज्यभार में बडी तादाद में लोगों की कोविड की वजह से मौत हुई।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में बेड की कमी, अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी, दवाओं की कमी, डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ की सरकारी अस्पताल में अनुपलब्धता व एम्बुलेंस की कमी सहित कई अन्य कारणों की वजह से भी कोविड के रोगियों की मौत राज्य में हुई। याचिकाकर्ता का कहना था कि एक सर्वे में पाया गया है कि कोविड की वजह से बड़ी तादाद में लोगों की मौत हुई है।

लेकिन राज्य सरकार का आंकड़ा विश्वास के योग्य नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया आंकड़ा वास्तविक आंकड़ा से बहुत कम है। राज्य सरकार द्वारा कोविड से मृत परिवार को 4 लाख रुपये मुआवजा की राशि उपलब्ध करवाने की घोषणा की जा चुकी है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा मुआवजा की राशि अभी तक नहीं दी गई है।

याचिकाकर्ता द्वारा याचिका में 1 अप्रेल, 2021 से 31 मई, 2021 तक कोविड कि वजह से राज्य के तेरह जिलों में मृतकों की एक सूची भी लगाई गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया।

तेज प्रताप के राजद से विदाई का वक्त आ गया है ।

तेज प्रताप को लेकर लालू परिवार अब सख्त होने लगा है और इस तरह के संकेत मिलने लगे हैं कि तेज प्रताप की राजद से किसी भी समय विदाई हो सकती है ।कल शाम लालू प्रसाद के पटना पहुंचने के बाद तेज प्रताप ने मीडिया से बात करते हुए जिस तरीके से राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर अपमानजनक टिप्पणी किया था उसको लेकर आज लालू प्रसाद की बेटी डां रोहिणी आचार्य ने अपने ट्विटर पर एक फोटो जारी कर जगदानंद सिंह और लालू यादव को सुख और दुख का साथी बताया है।

इस तस्वीर में लालू यादव व्हीलचेयर पर बैठे हैं और उनके बगल में जगदानंद सिंह खड़े हैं। रोहिणी आचार्य इस तस्वीर कैप्शन में लिखती है कि यह दोनों सुख दुख के साथी हैं।

इस ट्वीट के सामने आने के बाद यह साफ दिखने लगा है कि लालू प्रसाद के अधिकांश सदस्य तेज प्रताप के व्यवहार से नाराज है क्यों मीसा और तेजस्वी पर पहले से ही तेज प्रताप आरोप लगाते रहे हैं और लालू प्रसाद के दिल्ली प्रवास पर तेज प्रताप यहां तक कह दिया था कि लालू प्रसाद को लोग बंधक बना कर रखे हुए हैं तेज प्रताप के इस बयान से बिहार का सियासी पारा चढ़ गया है और तेज प्रताप के इस बयान पर लालू प्रसाद को खुद सफाई देनी पड़ी थी ।

राबड़ी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में लगी हुई है

राबड़ी देवी तेज प्रताप के व्यवहार से आहत जरुर हैं लेकिन पुत्र मोह से अभी भी बाहर नहीं निकल पाई है अभी भी राबड़ी चाह रही है कि दोनों भाई में सुलह हो जाये और इसी कोशिश में कल देर रात लालू प्रसाद तेज प्रताप के घर गये और आज दिन में घर बुला कर काफी देर तक समझाने की कोशिश किए हैं हालांकि लालू प्रसाद से मिलने के बाद थोड़ा नरम जरूर दिखा लेकिन शाम होते होते राहुल गांधी का पुतला दहन कर एक नये विवाद को जन्म दे दिया है ।

वैसे राबड़ी की कोशिश रंग लाता नहीं दिख रहा है लालू प्रसाद भी तेज प्रताप को लेकर सहज नहीं है फिर वो बीमार भी है ऐसे में तेज प्रताप के इस तरह के व्यवहार से पूरा परिवार आहत है और खतरा भी है कि इसका असर लालू के सेहत पर बुरा पड़ सकता है ।

बिहार में शीघ्र बनेगा चार नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ भायरोलॉजि

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 64 हजार करोड़ के प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के लोकार्पण से हेल्थकेयर सिस्टम का संपूर्ण विकास होगा।

इसके लिए राज्यवासियों की ओर से माननीय प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का आभार जताते हुए श्री पांडेय ने कहा कि इससे न सिर्फ करोड़ों गरीबों, दलितों, पिछड़ों शोषितों, वंचितों जैसे समाज के सब वर्गों को बहुत फायदा मिलेगा, बल्कि यह योजना आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बनेगा।

श्री पांडेय ने कहा कि बीते 7 वर्षों में देश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 60 हजार नई सीटें जोड़ी गई हैं। गांवों और शहरों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले जा रहे हैं, जहां बीमारियों को शुरुआत में ही डिटेक्ट करने की सुविधा होगी। इन सेंटरों में फ्री मेडिकल कंसलटेशन, फ्री टेस्ट, फ्री दवा जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

देश में करीब 600 जिलों के क्रिटिकल केयर यूनिट में 35 हजार से ज्यादा बेड बनना है। 125 जिलों में रेफरल सुविधा उपलब्ध होगा। साथ ही टेस्टिंग और सर्जरी सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है। पूरे सात दिन 24 घंटे 15 इमरजेंसी ऑपरेटिंग सिस्टम काम करेगा। डाइग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ 730 जिलों में पब्लिक हेल्थ लैब और 20 मेट्रोपॉलिटन यूनिट बनाये जाएंगे।

श्री पांडेय ने कहा कि महामारी से जुड़े रिसर्च इंस्टीट्यूट और चार नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ भायरोलॉजि बनेगा। होलिस्टिक हेल्थ केयर द्वारा लोगों को सस्ता और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं पहुचाने का लक्ष्य है। मेडिकल सुविधा बढ़ाने के लिए डॉक्टर्स एवं स्वास्थ्य कर्मियों की कमी को भी दूर किया जा रहा है।

अतिक्रमणकारियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले याचिकाकर्ता को सुरक्षा मुहैया कराने का हाईकोर्ट ने दिया आदेश

पटना हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अतिक्रमणकारियों से मिल रही धमकी के मद्देनजर राज्य के डीजीपी को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए मौखिक आदेश दिया है। राजधानी के बुद्धा कॉलोनी क्षेत्र के दुज़रा में सरकारी जमीन पर स्थित तालाब के रूप में चिन्हित स्थान को विकसित करने के लिए दायर जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

याचिककर्ता के अधिवक्ता सुमित कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में अतिक्रमणकारियों द्वारा याचिकाकर्ता को फ़ोन पर धमकियां दी जा रही है।

कोर्ट ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए वहां उपस्थित राज्य सरकार के अधिवक्ता को कहा कि याचिकाकर्ता को सुरक्षा मुहैया कराने को लेकर राज्य के डीजीपी को कहें।

इसके साथ ही खंडपीठ ने एक सप्ताह में राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है। पटना के जिलाधिकारी और पटना नगर निगम को जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है। इसके पूर्व अदालत ने पटना के जिलाधिकारी को तीन सदस्यीय एक कमेटी का गठन करने को कहा है, ताकि कमेटी पूरी स्थिति का पता चल सके।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि 5 एकड़ 17 कट्ठा में सरकारी जमीन पर थाना नंबर 4 , प्लॉट नंबर – 613 पर स्थित उक्त तालाब पर अतिक्रमण कर लिया गया है। जमीन का अधिग्रहण राजेन्द्र स्मारक के नाम पर तालाब के निर्माण के लिए किया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा इस पर अतिक्रमण कर लिया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने आगे बताया कि इस जनहित याचिका के जरिये चहारदीवारी बनाने का भी आग्रह किया हैं, क्योंकि स्थानीय लोगों द्वारा तालाब क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता द्वारा 6 सितंबर, 2021 को पटना के जिलाधिकारी को स्पीड पोस्ट के माध्यम से उक्त मामले को लेकर पत्र भी लिखा गया है, जिसके जरिये तालाब से अतिक्रमण हटाने और चहारदीवारी का निर्माण करने की बात कही गई है।

प्लॉट संख्या 613 के पूरे जमीन औऱ इस प्लॉट तक पहुचने के लिए लिंक रोड को अतिक्रमण मुक्त करने व चहारदीवारी के निर्माण का आग्रह किया गया है।याचिकाकर्ता ने तालाब के स्थल का पर जाकर कुछ फोटो लेने का काम भी किया है, जिसे याचिका के साथ कोर्ट की सहायता हेतु लगाया गया है। उक्त मामले में पटना नगर निगम की ओर से अधिवक्ता प्रसून सिन्हा उपस्थित थे।इस मामले पर एक सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

राजनीति में अक्सर दो दुना चार नहीं होता है

राजनीति में अक्सर दो दुना चार नहीं होता है ,वही कागज पर जो गणित दिखता है वही जमीन पर भी दिखाई दे ये कोई जरूरी नहीं है बिहार विधानसभा के उपचुनाव में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है जिस कुशेश्वर स्थान विधानसभा क्षेत्र को लेकर कांग्रेस और राजद में विवाद हुआ उस विधानसभा को लेकर राजद का मानना है कि वहां सबसे अधिक वोटर मुसहर जाति का है उसके साथ यादव और मुसलमान आ जाएगा तो फिर राजद प्रत्याशी को जीत से कोई रोक नहीं सकता है ये राजनीतिक गणित सौ फीसदी सही भी है ये तीनों एक साथ आ जाये तो फिर बहुत मुश्किल है नहीं है राजद का चुनाव जीतना ।

1—यादव और मुसहर के बीच दो दशक से हिंसक संघर्ष चल रहा है कुशेश्वर स्थान में
कुशेश्वर स्थान बिहार का सबसे पिछड़ा प्रखंड है जहां अभी भी अधिकांश गांव में सड़क नहीं पहुंचा है वजह बाढ़ है , दरभंगा से कुशेश्वर स्थान पहुंचने के बाद आज भी अधिकांश गांव में जाने के लिए बस नाव ही एक सहारा है। कुशेश्वर स्थान विधानसभा क्षेत्र समस्तीपुर ,खगड़िया और सहरसा बॉर्डर से जुड़ा हुआ यह स्थान कोसी,कमला और अधवारा समूह के नदियों का कीड़ा स्थल है और यह इलाका कभी अपराधियों का गढ़ माना जाता था एक दौर था जब कारी पासवान और अशोक यादव गैंग के बीच वर्चस्व को लेकर खूनी संघर्ष चलता था कारी पासवान के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के बाद यह पूरा दियरा इलाका अशोक यादव और रामानंद यादव के कब्जे में आ गया लेकिन 2005 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में सरकार बनी तो मुहसर जाति के लोग यादव के आतंक के खिलाफ गोलबंद होने लगे और इसी दौरान 2008 में गई जोड़ी गांव में दो मुसहर की हत्या कर दी गयी और इस घटना में कई मुसहर घायल हो गये थे इस घटना के बाद इस इलाके में यादव के खिलाफ नक्सली संगठन तैयार होने लगा और उसके बाद हत्या को सिलसिला दोनों और से शुरू हुआ वो अभी तक जारी है दो दर्जन से अधिक हत्याएं इन इलाकों में हो चुकी है और एक वर्ष पहले ही कुख्यात रामानंद यादव की हत्या मुसहर जाति के लोगों ने कर दिया था।

कुशेश्वर स्थान विधानसभा क्षेत्र में तिलकेश्वर थाना क्षेत्र स्थित गईजोड़ी ,रक्डी ,झाझा सहित एक दर्जन से अधिक गांव है जहां हर वर्ष कास की खेती पर कब्जा करने को लेकर यादव और मुसहर के बीच हथियार निकलता है जानकार बताते हैं कि 2005 के बाद से मुसहर पिछले विधानसभा चुनाव तक एनडीए के साथ यानी यादव जिसके साथ रहता था उसके खिलाफ वोट करता था जीतनराम मांझी के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद मांझी का पार्टी के द्वारा माहौल बनाने की कोशिश हुई लेकिन मुसहर जदयू के साथ रहा और 2015 के चुनाव में जदयू ने एलजेपी के प्रत्याशी को 18 हजार वोट से चुनाव हार दिया।

यहां मुसहर जाति का वोट 35 हजार के करीब वोट है 2008 से जब से नये परिसीमन में इस विधानसभा सीट का गठन हुआ है तब से लेकर 2020 के विधानसभा चुनाव तक हुए वोटिंग ट्रेंड पर गौर करेंगे तो सबसे कम वोटिंग प्रतिशत मुसहर जाति का ही रहा है हालांकि पहली बार किसी दल ने मुसहर को टिकट दिया है और उसको लेकर मुसहर जाति में उत्साह भी है लेकिन दो बड़ी समस्या है जो राजद के गणित को प्रभावित कर रहा है ।

पहला है जिस गांव में मुसहर और यादव की आबादी है वहां मुसहर यादव के साथ वोट नहीं कर रहा है ऐसा साफ दिख रहा है उसकी वजह आये दिन फसल पर कब्जा करने को लेकर चला आ रहा है विवाद है हालांकि जिस गांव में मुसहर यादव के साथ नहीं रह रहा है वहां के मुसहर का वोट शत प्रतिशत राजद उम्मीदवार के साथ है वैसे 27 को जीतन राम मांझी तिलकेश्वर में आ रहे हैं उनकी सभा में मुसहर की उप स्थिति कैसी रहती है उस पर साफ हो जाएगा क्यों कि यहां अभी भी ट्रेंड है जिसको वोट करेगा उसी के सभा में जायेंगा सभा में मौजूद भीड के उत्साह से समझ में आ जाता है ।

दूसरी सबसे बड़ी समस्या पंचायत चुनाव है यहां 12 दिसंबर को वोट पड़ना है इस वजह से मुसहर और यादव दोनों खुलकर राजनीति करने से परहेज कर रहे हैं क्यों कि कई पंचायच ऐसा है जहां यादव को अतिपिछड़ा के वोट का जरुरत है इसी तरह कई आरक्षित सीट ऐसा है जहां मुसहर उम्मीदवार को कुर्मी वोटर के मदद की जरूरत है इस विधानसभा में 20 से 25 हजार कुर्मी (धानुक) का भी वोट है इसलिए इस विधानसभा में कई ऐसे फेक्टर है जो कागज पर खींची लकीर से मेल नहीं खा रहा है ।

बिहार विधानसभा उपचुनाव के प्रचार अभियान में आयी तेजी एनडीए के सभी बड़े नेता जुटे एक मंच पर

आगामी 30 अक्टूबर को तारापुर विधानसभा क्षेत्र के लिए उप चुनाव होना है। संग्रामपुर के रानी प्रभावती उच्च विद्यालय के मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि परिवारवाद की पोषक पार्टियां सत्ता की छटपटाहट में है। इन्हें बिहार के विकास से कुछ भी लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता जानती है कि इन लोगों ने अब तक सिर्फ अपने परिवार का ही विकास किया है। अब तो इन पार्टियों के अंदर वर्चस्व की लड़ाई भी चल रही है, ऐसे लोग बिहार का क्या भला करेंगे।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में एक मजबूत सरकार काम कर रही है, वहीं बिहार में लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय के तहत बिहार को विकसित राज्य बनाने की दिशा में प्रतिबद्धता से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2005 के पहले का बिहार जर्जर बिहार था। आज समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और उत्थान के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेकर उन योजनाओं को धरातल पर उतारा है।

उपमुख्यमंत्री चुनावी सभा को संबोधित करते हुए

आधारभूत संरचना निर्माण से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, वंचित वर्गों के कल्याण, महिला सशक्तिकरण, युवा शक्ति के विकास के साथ-साथ रोजगार और उद्यमिता को बढ़ाने के संस्थागत प्रयास किए गये हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रह रहे लोगों के घर तक बिजली, शुद्ध पेयजल, गैस कनेक्शन, गरीबों को अनाज और उनके लिए घर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रधानमंत्री जी ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के माध्यम से देश को समृद्ध किया है। शहरों में नगरीय सुविधाओं के विकास, कोरोना की वैश्विक महामारी के दौरान देश के लोगों की जान की रक्षा के साथ-साथ दुनिया के कई देशों को कोरोना के टीके उपलब्ध कराकर मानवता की रक्षा की है। बिहार सरकार ने छह माह में छह करोड़ टीकाकरण के लक्ष्य को समय सीमा के पहले पूरा कर अपनी प्रतिबद्धताओं को साबित किया है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार प्रतिबद्धताओं और विकास के प्रति दृढ़ संकल्पित सरकार है। हमारी प्रतिबद्धताएं जनता के साथ हैं। उन्होंने तारापुर विधानसभा क्षेत्र की जनता का आह्वान करते हुए कहा कि 30 अक्टूबर को होने वाले उप चुनाव में परिवारवाद की समर्थक पार्टियों के झांसे में न आएं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार को भारी मतों से विजयी बनावें।

रानी प्रभावती उच्च विद्यालय संग्रामपुर के प्रांगण में आयोजित जनसभा को पूर्व मुख्यमंत्री श्री जीतन राम मांझी, केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री श्री मुकेश साहनी, सांसद एवं पूर्व मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर, विधायक श्री प्रणव कुमार यादव, विधायक श्री प्रफुल्ल मांझी, मंजीत कुमार सिंह, जिला अध्यक्ष संतोष साहनी, अरुण मांझी सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के वरिष्ठ नेतागण, कार्यकर्तागण एवं भारी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।

पांचवे चरण का पंचायत चुनाव सम्पन्न 61 प्रतिशत के करीब हुई है वोटिंग

पांचवे चरण का पंचायत चुनाव छिटपुट घटनाओं को छोड़ दे तो शांतिपूर्ण संपन्‍न हो गया। राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद के अनुसार अभी तक 61 प्रतिशत वोटिंग हुई है औरअभी भी कई जगहों पर वोटिंग चल ही रही है चुनाव के दौरान गड़बड़ी के 36 मामले आये हैं और उस पर आयोग कार्यवाही कर रही है ।

आज वैशाली में एक प्रत्‍याशी को चाकू मार दिया गया। अरवल, वैशाली व शेखपुरा सहित कई जगह हंगामा हुआ। शेखपुरा में एक बूथ पर सरपंच व पंच के चुनाव को रद करने की सिफारिश चुनाव आयोग से की गई। उधर, सीतामढ़ी में एक फर्जी महिला वोटर पकड़ी गई। मुंगेर को दो मुखिया के समर्थक आपस में लड़ गये पुलिस के साथ भी धक्का मुक्की की गयी
आज जिला परिषद सदस्‍य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्‍य, वार्ड सदस्‍य, सरपंच व पंच के 26091 पदों के लिए 6746545 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।पांचवें चरण के मतों की गिनती 26 और 27 अक्टूबर को होगी।

दोपहर बाद क्या खास रहा पंचायत चुनाव के दौरान

1—वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड में मतदान के दौरान मतदान केंद्र संख्या 234 पर ईवीएम का बटन टूट जाने के कारण मतदान प्रभावित हुआ है। कुछ देर के लिए जिला परिषद का मतदान प्रभावित हुआ।

2–अरवल के करपी स्थित बसन बिगहा के बूथ 138 पर दो गुटों में झड़प हुई है। घटना के बाद डीएम व एसपी मौके पर पहुंचे हैं।

3—मुई में नक्सलियों के लिए सेफ जोन माना जाने वाले बरहट प्रखंड के जंगल में अवस्थित गुरमाहा, चोरमारा के मतदाताओं ने जमकर मतदान किया। गांव की सरकार चुनने को लेकर पांच पहाड़ पार कर लगभग 35 किलोमीटर पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बूथों तक पहुंच रहे हैं।

4—सीतामढ़ी में पंचायत चुनाव के दौरान फर्जी महिला वोटर पकड़ी गई। मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड के सोनबरसा साह में प्रत्याशी के समर्थक आपस मे भिड़ गए। एक युवक बूथ के बाहर बैठकर वोटरों को अपने पक्ष में वोट डालने के लिए रिझा रहा था। एक कागज पर अपने पक्ष के प्रत्याशी का चुनाव चिह्न लिखकर वोटरों को अपने पक्ष में वोट डालने के लिए कह रहा था। इसी बात को लेकर जमकर हंगामा होने लगा। वहीं, मुंगेर में दो मुखिया प्रत्याशी आपस में भिड़ गए।

पटना–पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने दी चुनाव की जानकारी…..अभी भी कई जगहों पर वोटिंग हो रही है ।

पांचवे चरण में अभी तक 61% मतदाता ने अपने मतदान का प्रयोग किया
वोटिंग को। लेकर कुल 36जगहों से चुनाव को लेकर मामले आये

लालू ने बिहार कांग्रेस प्रभारी को लिया आड़े हाथ

लालू प्रसाद पटना रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए कहाँ कि गठबंधन क्या होता है कांग्रेस को जमानत जप्त कराने के लिए टिकट नहीं दे देते ।
बिहात कांग्रेस प्रभारी को जमीनी हकीकत पता नहीं ।
परिवार के टूट पर कहाँ ऐसा कुछ भी नहीं है ।

लालू प्रसाद ने कहाँ जमानत जप्त कराने के लिए कांग्रेस को टिकट दे देते

बिहार में बनिया बीजेपी का साथ क्यों छोड़ रहा है

बिहार विधानसभा के उपचुनाव में जिन दो सीटों पर चुनाव हो रहा है वहां एक बार फिर बीजेपी के कोड़ वोटर बनिया किस ओर करवट लेता है उस पर सबकी नजर है क्यों कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में बड़े स्तर पर बनिया वोटर बीजेपी का साथ छोड़ दिया था और इस वजह से राजद के टिकट पर मुजफ्फरपुर,शेरघाटी,सासाराम मोरवा ,मधुबनी से बनिया विधायक बना इतना ही नहीं कई सीटों पर निर्दलीय खड़े होकर एनडीए को नुकसान भी पहुंचाया। सुशील मोदी,संजय जयसवाल और तारकेश्वर प्रसाद की प्रतिष्ठा दांव पर

बिहार विधानसभा के उपचुनाव में जिन दो सीटों पर मतदान हो रहा है वहां एनडीए और राजद दोनों के लिए करो या मरो वाली स्थिति है दोनों दल अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया है फिर भी बीजेपी का कोर वोटर बनिया तारापुर और कुशेश्वर स्थान में एनडीए के साथ नहीं है, तारापुर में राजद तो बनिया जाति के उम्मीदवार को टिकट देकर एनडीए को पसीना छुड़ा दिया है और अभी तक जो स्थिति है जिसमें जदयू काफी पीछे चल रहा है।

कुशेश्वर स्थान विधानसभा में भी पहली बार कुशेश्वर स्थान बाजार के साथ साथ जो दो तीन गांव बनिया का है वो दो भागों में बंटा हुआ है ,एक बड़ा हिस्सा राजद के साथ भी है,कुछ कांग्रेस के साथ भी है बिखराव साफ दिख रहा है हालांकि बीजेपी अपने तमाम बड़े बनिया नेता को तारापुर और कुशेश्वर स्थान में कैप कराये हुए हैं लेकिन बहुत कुछ प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

एनडीए के सरकार में भी बिहार में बनिया सुरक्षित नहीं है बिहार बीजेपी की बात करे तो बनिया जाति का इससे पहले इतने बड़े पद पर एक साथ इस तरह का प्रतिनिधित्व पहले कभी नहीं मिला प्रदेश अध्यक्ष बनिया ,उप मुख्यमंत्री बनिया ,इसके अलावा दो दो मंत्री प्रमोद कुमार और श्री नारायण के साथ सुशील मोदी फिर भी बनिया क्यों बीजेपी से दूरी बनाने लगे हैं इन सवालों का जवाब आपको उन इलाकों में जाने के बाद मिलेगा जहां बनिया एनडीए का साथ छोड़कर महागठबंधन के साथ जुड़ा है ।

बिहार में एनडीए का कोर वोटर बनिया क्यों बीजेपी का साथ छोड़ रहा है इस पर जब बात शुरू हुई तो उन्होंने कहा कि अब हम लोग भी मुसलमान हो गये हैं एनडीए की सरकार बिहार में है देख लीजिए हर दिन बिहार में बनिया के साथ किस तरह की घटनाएं घट रही है आज भी हत्याएं हो रही है. अपहरण हो रहा है ,रंगदारी मांगी जाती है ,लूट हो रही है ।

लेकिन पुलिस के पास जाइए कोई मदद नहीं मिलता है ऐसे में बिहार का व्यापारी वर्ग को लग रहा है कि एनडीए के साथ रहने से कोई सुरक्षा नहीं है इसलिए जैसे 30 वर्षो से बिहार में जिस वोटिंग समीकरण के सहारे मुसलमान सुरक्षित हैं उसी तरह जहां जहां का व्यापारी समुदाय एनडीए से दूरी बनाया है वहां उसी समीकरण के सहारे सुरक्षित महसूस कर रहा है और शांति से अपना काम धंधा चला रहा है ।देख लीजिए 2020 चुनाव में जहां जहां बनिया एनडीए का साथ छोड़ा है उन इलाकों में बनिया कितना अमन शांति के साथ जी रहा है इसलिए अब हम लोग बिहार में एनडीए से दूरी बढ़ते जा रहे हैं फिर राजद हमलोगों के समाज से जुड़े लोगों को टिकट भी दे रहा है ।

छिटपुट घटनाओं को छोड़कर पंचायत चुनाव का पांचवा चरण शांतिपूर्वक ढंग से चल रहा है

छिटपुट घटनाओं को छोड़ कर बिहार पंचायत चुनाव के पांचवे चरण का मतदान शांतिपूर्ण ढंग चल रहा है दोपहर एक बजे तक 30 से 35 प्रतिशत वोटिंग की खबर है । इस चरण में 38 जिलों के 58 प्रखंडों में मतदान हो रहा है। इसके लिए 12056 मतदान केंद्रों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। पांचवे चरण में 67 लाख 46 हजार 545 मतदाता अपना वोट डालेंगे। इनमें 35 लाख 38 हजार 500 पुरुष, 32 लाख 07 हजार 791 महिला एवं 254 अन्य मतदाता शामिल हैं।

शेखपुरा में मतपत्र लूट की घटना के बाद आक्रोशित हुए मतदाता

26091 सीटों पर हो रहे हैं चुनाव
पांचवें चरण में कुल 26091 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इनमें ग्राम पंचायत सदस्य के 11,553, मुखिया के 845, पंचायत समिति सदस्य के 1171, जिला परिषद सदस्य के 124, ग्राम कचहरी पंच के 11,553 एवं ग्राम कचहरी सरपंच के 845 सीटें शामिल हैं। इस चरण में 92 हजार 972 उम्मीदवार मैदान में हैं।

खगड़िया की तस्वीर है जहां मतदान केन्द्रों पर जाने कि व्यवस्था नहीं है

मतदाताओं की संख्या
पांचवे चरण में 35 लाख 38 हजार 500 पुरुष , जबकि 32 लाख सात हजार 791 महिला मतदाता शामिल हैं. कुल 67 लाख 46 हजार 545 मतदाता वोट करेंगे.
67 लाख 46 हजार 545 मतदाता
निर्वाचन आयोग की ओर से 7,810 भवनों में 12,056 बूथों की स्थापना की गयी है. इस चरण के मतदान में 67 लाख 46 हजार 545 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.

अररिया की तस्वीर है देखिए किस हाल में चुनाव कराने जा रहे हैं अधिकारी

पंचायत चुनाव के दौरान क्या खास रहा
दिन के एक बजे तक 35 से 40 प्रतिशत वोटिंग होने की सूचना है ।
1—बगहा में बूथ संख्या तीन पर ईवीएम खराब होने के कारण 1 घंटे की देरी से वोटिंग शुरू हुई।

2—शेखपुरा में एक बूथ की लूट की घटना के बाद सरपंच व पंच के चुनाव को रद्द करने की सिफारिश चुनाव आयोग से की गई है।

3—रोसड़ा में मतदान शांतिपूर्वक चल रहा है। भिरहा पूरब पंचायत स्थित मतदान केंद्र संख्या 118 पर सीयू में खराबी के कारण करीब डेढ़ घंटा विलंब से मतदान प्रारंभ हो सका।

4—-मोतिहारी के पताही में एक बूथ पर ड्यूटी कर रहे एक मतदान कर्मी की हृदय गति रूकने से मौत हो गई। घटना पताही प्रखंड क्षेत्र की बखरी पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय चम्पापर के मतदान केंद्र संख्या 159 पर हुई। मृत मतदान कर्मी वंशीधर राम (56) था। उधर, भभुआ के बूथ 117 पर एक वृद्ध महिला वोटर की मौत हो गई।

5— अररिया के कई बूथों पर कीचड़ व जल जमाव होने के बावजूद बड़ी संख्यां में मतदाता मतदान करने पहुंचे। इसमें महिलाओं की भी अच्छी खासी संख्या थी।

6—वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड अंतर्गत सैदपुर गणेश पंचायत के मुखिया प्रत्याशी अभिषेक कुमार को चाकू मारकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया गया है। उनका इलाज हाजीपुर सदर अस्पताल में चल रहा है।

7—वैशाली जिले में पुलिस और समर्थकों के बीच कहासुनी हो गयी. बिदुपुर प्रखंड के शीतलपुर कमालपुर पंचायत में मतदान केंद्र संख्या 176 पर पोलिंग एजेंट का मोबाइल पुलिस ने जब्त कर लिया जिसे लेकर विवाद छिड़ गया और वोट बहिष्कार किया जाने लगा.

8—मोतिहारी: पताही प्रखंड क्षेत्र के जिहुली पंचायत स्थित उच्च विद्यालय जंगली दक्षिणी भाग के मतदान केंद्र संख्या 133 बूथ संख्या 6 पर वार्ड सदस्य के ईवीएम का बदलाव हो गया है. वार्ड नंबर 6 के वार्ड सदस्य पद के लिए 4 अभ्यर्थी है जबकि ईवीएम में 3 अभ्यर्थी का नाम अंकित है. वार्ड नंबर 6 के वार्ड सदस्य के किसी भी अभ्यर्थी के नाम उस ईवीएम में अंकित नहीं है. यहां वोटिंग शुरू होने में देरी हो सकती है.

राम मोहम्मद सिंह आज़ाद और शहीद उधम सिंह का आज का भारत

राम मोहम्मद सिंह आज़ाद और शहीद उधम सिंह का आज का भारत

जिस समय शूजीत सरकार की फ़िल्म उधम सिंह देखी जा रही है, वह समय उन आदर्शों के ख़िलाफ़ हो चुका है जिसमें कोई क्रांतिकारी अपने हाथ पर गुदवा ले कि उसका नाम राम मोहम्मद सिंह आज़ाद है। सिर्फ़ इस एक बात से न्यूज़ चैनल और आई टी सेल हमला कर देते कि यह क्रांतिकारी झूठा है। हिन्दू मुस्लिम खाँचे में जनता के सोचने की शक्ति का इस तरह विभाजन कर दिया गया है कि मैं बार बार उसी दृश्य पर अटका रहा जब शहीद उधम सिंह अपनी क़मीज़ की बाँह खींच कर राम मोहम्मद सिंह आज़ाद लिखा दिखाते हैं।

मेरा सवाल इस फ़िल्म से बाहर का है। अपने अपने लैपटॉप पर देख रहे दर्शकों ने इस एक दृश्य को कैसे देखा होगा। क्या उनके भीतर कुछ कौंधा होगा? इस दृश्य को देखते समय क्या वे उधम सिंह से नज़र मिला पाए होंगे, क्या ख़ुद से नज़र मिला सके होंगे? बेहद ईमानदारी से बनाई गई इस फ़िल्म को देखते वक़्त दर्शकों ने अपनी राजनीतिक बेईमानी को किस तरह ढाँका होगा? क्या उन्हें किसी तरह का नैतिक संकट नहीं हुआ होगा?

जिस वक़्त में प्यार लव जिहाद हो गया हो, प्रेम करने वाले जोड़ों के बीच एक ख़ास मज़हब के प्रेमी की पहचान के लिए एंटी रोमियो दस्ता बनाने की बात हुई हो उस वक़्त में लंदन की अदालत में हीर-रांझा किताब पर हाथ रख कर शपथ लेते हुए उधम सिंह को देख कर क्या लोग उसका मतलब समझ पा रहे थे? प्रेम की महानगाथा की यह किताब उधम सिंह के जीवन के केंद्र में हैं जिसमें वे मज़दूर से लेकर मालिक तक के डर को एक व्यापक नज़रिए से देखते हैं जिसे आज कल कम्युनिस्ट कह कर दुत्कारा जाता है। प्रेम के तमाम प्रसंगों को निकाल दिए जाएँ तो उधम सिंह की कहानी में कुछ नहीं बचता है।

सवाल है कि उधम सिंह के जीवन से जुड़ी जो मान्यताएँ थीं, वो सारी की सारी कुचली जा चुकी हैं। आज का समाज और नौजवान उससे मुक्त हो चुका है। उसके भीतर राम मोहम्मद सिंह आज़ाद की कल्पना हो ही नहीं सकती। उस दृश्य को देखते हुए क्या उसकी कल्पनाएँ कौंध गई होंगी, क्या उसे शर्म आई होगी? हर फ़िल्म और फ़िल्म का कोई दृश्य लंबे समय तक दिमाग़ पर छाया रहता है। देखने वालों की कल्पनाओं का विस्तार करता रहता है।सांप्रदायिक नफ़रत से भरी जनता ने उधम सिंह को देखते हुए ख़ुद को कैसे देखे होगा? एक बेहद बेईमान समय में बेहद ईमानदारी से बनी फ़िल्म की बात इसीलिए इतनी कम हो रही है।

हमने शहीदों को मूर्तियों में बदल दिया है। दिवसों के नाम पर कर्मकांड विकसित कर लिए हैं। दिन गुज़रता नहीं है कि हम दूसरे की जयंती मनाने की तैयारी करने लग जाते हैं। याद करना भी भूलना जैसा ही है। एक दर्शक उधम सिंह की ज़िंदगी को फ़िल्म से पहले जितना कम जानता होगा, फ़िल्म देखने के दौरान और उसके बाद और अनजान हो गया होगा। दिन भर वह व्हाट्स एप में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत की बातें करते हैं, वह उधम सिंह के जीवन की गाथा को कैसे समझ पाएगा।

शूजीत सरकार ने एक अच्छी फ़िल्म बनाई है। किसी भी संकट के समय यह बात होती है कि बॉलीवुड चुप है। ठीक बात भी है। लेकिन यह भी देखना चाहिए कि कोई सचेत फ़िल्मकार इसी घुटन भरे वक़्त में किस तरह की फ़िल्म बना रहा है। कैसी कहानियों को दर्शकों के बीच रखता है। उधम सिंह बनाकर शूजीत सरकार ने यही काम किया है। बोला है। यह जानते हुए कि आज के नौजवानों की जवानी की कोई कहानी नहीं हैं, उनके बस की बात नहीं है उधम सिंह के जीवन के मर्म को समझना, फिर भी शूजीत ने यह फ़िल्म बनाई है। विक्की कौशल को उनके जीवन का शानदार अभिनय का अवसर दिया। एक ऐसे शहीद के जीवन के बारे में विस्तार से और बिना किसी नाटकीय और फ़िल्मी गीतों के हमारे सामने रखने के लिए शूजीत का शुक्रिया।

जलियाँवाला बाग़ की घटना फ़िल्म के पर्दे पर विस्तार पा रही है। इसके पहले की फ़िल्मों में इस घटना को संक्षेप में ही रखा गया है। फ़िल्म का हिस्सा बनाकर लेकिन इस फ़िल्म में जलियाँवाला बाग़ एक फ़िल्म के बराबर का हिस्सा पाती है। जिस घटना ने इस महान शख़्स को प्रभावित किया, जिसके कारण वे कई साल का सब्र करते हैं और ड्वायर को मार देते हैं। मारने से पहले लंदन में तरह तरह के काम करते हैं, ड्वायर के घर में काम करते हैं। बिना जलियाँवाला बाग़ को विस्तार से दिखाए शूजीत सरकार कोई रोचक फ़िल्म बना सकते थे मगर वह फ़िल्म नहीं होती। जलियाँवाला बाग़ की कहानी अब भी अधूरी है। एक पूरी फ़िल्म का इंतज़ार कर रही है।

ऐनी फारुकी और महमूद फारुकी की दास्तानगोई में जलियाँवाला बाग़ का एक प्रसंग है। कुचा रामदास की चार महिलाएं जलियाँवाला बाग़ से होकर गुज़रना चाहती थीं।इनमें से दो मुसलमान थीं, एक सिख और एक हिन्दू।भत्तल बेगम, पारो, शाम कौर, ज़ैनब। चारों ने डायर के सिपाहियों के आदेश को मानने से इंकार कर दिया और उनकी गोली से शहीद हो गईं। भत्तल बेगम, पारो, शाम कौर और ज़ैनब का हिन्दुस्तान कितना बदल गया है। उसे अब ये गली सेल्फी स्पाट नज़र आने लगी है। काश यह प्रसंग इस फ़िल्म का हिस्सा होता जो शहीद उधम सिंह के राम मोहम्मद सिंह आज़ाद के मर्म को और विस्तार मिलता।
शहीद उधम सिंह फ़िल्म देखिएगा। वैसे देखने की योग्यता तो तय नहीं की जा सकती लेकिन आपको पता चलेगा कि आप फ़िल्म से नज़र मिलाने के लायक़ हैं या नहीं। बोल कर देखिएगा, शहीद उधम सिंह ज़िंदाबाद। शहीद उधम सिंह ज़िंदाबाद फिर पूछिएगा कि ईमानदारी से निकला या कर्मकांड की तरह निकल गया।

आज के सांप्रदायिक और डरपोक नौजवानों तुम्हारी कोई कहानी नहीं है तुम उधम सिंह की कहानी को कैसे देखोगे। यही सोचता रहा और फ़िल्म देख गया।

लेखक–रवीश कुमार

बिहार में अब मरीजों को सप्ताह में छह दिन मिलेगी ई-संजीवनी टेलीमेडिसीन की सेवाएं

अब मरीजों को सप्ताह में छह दिन मिलेगी ई-संजीवनी टेलीमेडिसीन की सेवाएं । पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा का विस्तार कर दिया गया है। अब eSanjeevani.in और eSanjeevani OPD की सेवाएं सप्ताह में छह दिन उपलब्ध रहेंगी।

    श्री पांडेय ने कहा कि पहले ई-संजीवनी इन के माध्यम से सोमवार, गुरुवार एवं शनिवार तथा  ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से प्रत्येक मंगलवार, बुधवार एवं शुक्रवार को मिलती थी। अब दोनों माध्यम से सेवा  सोमवार से शनिवार तक मिलेगी। इसके साथ ही सेवा की कार्यावधि को सुबह 9 बजे से बढ़ाकर 4 बजे तक कर दी गयी है, जबकि पहले सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक यह सेवाएं मिल रही थी।

    श्री पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले वाले लोगों को टेलीमेडिसीन ( eSanjeevani.in और eSanjeevani OPD) के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। ई-संजीवनी समग्र रूप से जमीनी स्तर पर डाक्टरों और चिकित्‍सा विशेषज्ञों की कमी को दूर कर रही है। यही नहीं माध्यमिक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों पर मरीजों का बोझ भी कम पड़ रहा है।  

श्री पांडेय ने कहा कि  इस सेवा का लाभ अधिक से अधिक लोगों उपलब्ध हो सके, इसके लिए विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। इसके लिए जिलों के सभी प्रखण्डों में कम से कम दो स्पोक्स स्थापित किये जाएंगे।

लीज्ड रेलवे पार्सल वैन के माध्यम से अवैध रूप से मालों के परिवहन मामले में वाणिज्य कर विभाग ने की बड़ी कारवाई

लीज्ड रेलवे पार्सल वैन के माध्यम से अवैध रूप से मालों के परिवहन तथा गया में फर्निशिंग हाउस के एक बड़े व्यापारी के विरुद्ध वाणिज्य कर विभाग की बड़ी कार्रवाई

वाणिज्य कर विभाग, बिहार डाटा एनालिटिक्स एवं ह्यूमन/मार्केट इंटेलिजेंस के आधार पर कर अपवंचना की रोकथाम हेतु लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में विभाग की आयुक्त-सह-सचिव के निदेशानुसार शनिवार को कर अपवंचकों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की गयी ।

गया के फर्निशिंग मेटेरियल के एक बड़े व्यापारी के यहां दिनांक २३.१०.२१ को निरीक्षण किया गया। व्यवसाई मुख्यतः पर्दा, mattress, doormat, बेडशीट, तिरपाल इत्यादि का व्यापार करते हैं। उनके खिलाफ लगातार शिकायत प्राप्त हो रही थी कि उनके
द्वारा बड़े पैमाने पर कर की चोरी की जा रही है। निरीक्षण के क्रम में कई प्रकार की अनियमितता प्रकाश में आई। फर्निशिंग शॉप के द्वारा ना तो किसी प्रकार का इनवॉयस/बिल निर्गत किया जा रहा है, ना हीं कोई लेखापुस्त संधारित पाया गया। साथ हीं इस प्रतिष्ठान के एक undeclared godown का भी पता चला जो इस फर्म के निबंधन में कहीं दर्ज नहीं है। इन अनिमितताओं के आधार पर इनके लाखों के माल को जब्त भी किया गया है।

विभाग द्वारा मालों के परिवहन के क्रम में हो रही कर-अपवंचना को रोकने हेतु परिवहन के विभिन्न स्थानों पर पैनी नज़र रखी जा रही है। विश्वसनीय स्रोंतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर दिनांक 23.10.21 को राजेंद्र नगर टर्मिनल पर बिना वैध दस्तावेजों के करोड़ों के माल को ले जा रहे रेलवे वीपी का पता लगाया गया।

जांच के क्रम में परिवहन हेतु वांछनीय कागजात प्रस्तुत नहीं किये गए। चूंकि इन मालों को जीएसटी प्रावधानों का अनुपालन किए बिना परिवहित किया जा रहा था, अतः इन मालों को तत्काल स्तंभित किया गया है। जब्त मालों में बड़ी संख्या में readymade garments, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स इत्यादि मौजूद हैं। यह रेलवे वीपी दिल्ली से पटना आ रही थी।

विभाग की आयुक्त-सह-सचिव द्वारा बताया गया कि दोनों ही मामलों में विस्तृत अन्वेषण के उपरांत कर अपवंचकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी तथा उनसे टैक्स एवं शास्ति की राशि वसूली जाएगी।

बिहार विधानसभा उपचुनाव में एनडीए नेता पहुँचे प्रचार में

बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद आज तारापुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत संग्रामपुर इलाके में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संग्रामपुर की जनता राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ है। 30 अक्टूबर को होने वाले उप चुनाव के मतदान में डपोरशंखी विपक्ष को सबक सिखाएगी।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता कहते हैं कि उपचुनाव जीतकर खेला करेंगे, मुझे तो समझ में नहीं आता कि जिसके घर में खेला हो रहा हो, कोई मछली मार रहा हो, कोई बांसुरी बजा रहा हो, इन सब चीजों को तारापुर की जनता देख रही है। उन्होंने कहा कि जिससे अपना परिवार नहीं संभल सकता वे क्षेत्र और राज्य को क्या संभालेंगे ? विपक्ष को सिर्फ सत्ता की भूख है, उन्हें सिर्फ परिवारवाद की चिंता है। जनता से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इस बात को समझने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि 2005 के पहले के बिहार को जिन लोगों ने देखा है, उन्हें आज के बिहार और बिहार सरकार के कामों को देखने पर सब कुछ स्पष्ट दिखता है। 2005 के पहले तारापुर और संग्रामपुर से पटना पहुंचना कितना दूभर था, जर्जर सड़कें बिहार की पहचान थी, परन्तु आज स्थिति बदल चुकी है।

भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को साबित किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना के निर्माण के साथ-साथ आम जनमानस की कठिनाइयों को दूर करने के संस्थागत प्रयास सुनिश्चित किए गए हैं, जिसके अच्छे परिणाम दिख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जहां एक ओर केंद्र सरकार ने माताओं एवं बहनों को उज्जवला योजना के अंतर्गत एल.पी.जी. के कनेक्शन मुहैया कराए गये, स्वच्छ जल, बिजली सहित अन्य मूलभूत सुविधा को मुहैया कराया गया, कोरोना की वैश्विक परिस्थिति के दौरान गरीबों की भूख की चिंता करते हुए नरेंद्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत दो चरणों में नि:शुल्क अनाज की व्यवस्था सुनिश्चित कराई, जो आगामी नवंबर माह तक दी जा रही है।

कोरोना संकट के दौरान देश के लोगों की जान की रक्षा हेतु प्रधानमंत्री जी की सूझबूझ से भारत ने दो स्वदेशी टीके का निर्माण कर नि:शुल्क टीकाकरण का कार्य प्रारंभ कराया। जहां संसाधन संपन्न देश कोरोना के समक्ष घुटने टेकते नजर आए, वहीं नरेंद्र मोदी जी ने देश के लोगों के साथ-साथ मानवता की रक्षा हेतु दुनिया के कई देशों को टीका उपलब्ध कराए गए। आज भारत में कोरोना टीका का आंकड़ा 100 करोड़ के पार चला गया है।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय के अंतर्गत युवा उद्यमिता एवं महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख रुपये अनुदान एवं 5 लाख रुपये ऋण के रूप में उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। महिला उद्यमियों के लिए इस योजना के अंतर्गत ब्याज मुक्त ऋण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार ने व्यवसायियों के हितों का खासतौर पर ध्यान रखा है। व्यवसायी किसी भी सामाजिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। करोना काल के दौरान व्यवसायियों की हित रक्षा हेतु विशेष प्रबंध सुनिश्चित किए गए है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन परिवारवाद पर काम नहीं करता।

हमारी प्रतिबद्धताएं जनता के प्रति हैं। उन्होंने जनसभा के दौरान लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि महागठबंधन बिखर चुका है। विपक्ष को सत्ता की भूख सता रही है। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि चुनाव के समय जिन्हें विकास की याद आती हो, ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।

उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि आगामी 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार को भारी बहुमत से विजयी बनावें। जनता के आशीर्वाद से कुशेश्वरस्थान और तारापुर विधानसभा की दोनों सीटें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन जीतेगा।

जनसभा के दौरान मुंगेर के विधायक प्रणव कुमार यादव, पूर्व मंत्री श्री श्याम बिहारी प्रसाद भगत, शंभू प्रसाद गुप्ता, अजय कुमार, एस.सी. एवं एस.टी. मोर्चा के अध्यक्ष संजय रजक, उमाकांत जी, चेंबर ऑफ कॉमर्स के मनोज कुमार सहित भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, हम एवं विकासशील इंसान पार्टी के कार्यकर्तागण और भारी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।

पप्पू यादव कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करने से पहले राहुल गांधी से मिलकर कोई बड़ा डील करना चाहते हैं

पप्पू यादव कांग्रेस उम्मीदवार का प्रचार करने के बजाय आज अचानक कांग्रेस मुख्यालय दिल्ली पहुंच गए, वहां उनकी मुलाकात झारखंड के कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह से हुई लेकिन बिहार को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है।

कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं पप्पू यादव

हालांकि कांग्रेस पप्पू यादव की जो छवि है और राजद को लेकर जिस तरह के बयान दे रहे हैं उसको लेकर फिलहाल पप्पू यादव के कांग्रेस में एंट्री की सम्भावना कम है ।

इसी को देखते हुए पप्पू यादव किसी भी तरह से राहुल गांधी से मिलकर कोई ठोस आश्वासन लेना चाह रहा है जिसकी सम्भावना फिलहाल नहीं दिख रही है ।

ऐसे में पप्पू यादव क्या करते हैं इस पर सबकी नजर है क्यों कि बिहार विधानसभा के उपचुनाव का प्रचार अभियान 28 अक्टूबर को खत्म होने वाली है ।

कन्हैया के आने के साथ ही बिहार की राजनीति गरमाई

कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने का कितना फायदा कांग्रेस को मिलेगा ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन जिस तरीके से बिहार की राजनीति 30 वर्षों से एक खास मुहाने पर रुक सा गया था उसमें हलचल तो दिखाई देने लगा है।

जरा इन ट्वीट और बयानों पर गौर करिए

तेज प्रताप — ट्वीट कर कहा है- “जब से आए हो, अक्कड़-बक्कड़, कुच्छो बोलते जा रहे हो…! गैंग वाले थे, अब नेता बनने का शौक पाले हो का…? याद रखो कि अगर लालू यादव जी ना होते तो शायद तुम भी ना होते…

डाॅ रोहिणी—-लालू प्रसाद की पुत्री डॉ. रोहिणी जो इन दिनों अपने ट्विटर हैंडल के सहारे बिहार की राजनीति में फिरकी लेती रही है उन्होंने कन्हैया को लेकर एक ट्वीट किया है “बड़ी-बड़ी बातें जो बोलता है, एसी भी उखाड़ कर जो बेचता है..’। रोहिणी ने यह भी कहा है- “सिद्धांत का जो धनी नहीं, वो नेता तो क्या इंसान बनने के लायक नहीं।

सुशील मोदी —कांग्रेस और राजद के जूदा जूदा होने पर सुशील मोदी का बयान आया है ,एनडीए के वोट बैंक में सेंधमारी करने के लिए अलग अलग चुनाव लड़ रहा है ,राजद की पालकी को ढोने का काम कांग्रेस कर रही है और आगे भी करेगी,चुनाव बाद दोनों दल एक बार फिर एक हो जाएगा,जनता को भ्रम में रखने के लिए राजद कांग्रेस की रणनीति है ।

मनोज झा–(राजद प्रवक्ता )—-कन्हैया के बयान पर मनोज झा की बहुत ही सधी हुई प्रतिक्रिया आयी है मैं उनको शुभकामना देता हूं और मैं क्या हूं मैं क्या नहीं हूं इसका मूल्यांकन बिहार और देश के लोग करेंगे मैं राजनीति में भाषा की गरिमा का बहुत ध्यान रखता हूं हां उन्हें बहुत बहुत शुभकामना देता हूं और तरक्की करे और उच्चे जाये ।

सुशील मोदी और मनोज झा का यह बयान और लालू प्रसाद के परिवार का ट्वीट अपने आप में बहुत कुछ बया कर रही है, देखिए आगे आगे होता है क्या।

वैसे बिहार विधानसभा उपचुनाव का परिणाम जिसके भी पक्ष में हो बिहार की सियासत पर दूरगामी प्रभाव छोड़ेगा यह तय दिख रहा है ।

चुनाव ठेकेदारी है क्या –अभयानंद

चुनाव ठेकेदारी है क्या? **
विद्यार्थी जीवन में कानून से पाला नहीं पड़ा। विज्ञान एवं गणित से पड़ा था। नौकरी में फौजदारी कानून से वास्ता पड़ा, पुलिस की नौकरी जो कर ली थी।

वर्ष 2001 – 2003 के बीच IG (Provision) के रूप में टेंडर, कॉन्ट्रैक्ट, एग्रीमेंट, आदि शब्दों से रू-ब-रू हुआ। आदत के अनुसार हर चीज़ का कानूनी पहलू समझने के लिए “लॉ ऑफ़ कॉन्ट्रैक्ट” का अध्यययन भी यथासंभव कर लिया।

सहसा ध्यान आया कि चुनाव में भी तो राजनीतिक पार्टियाँ अपने मैनिफेस्टो के माध्यम से चुनाव आयोग के द्वारा निकाली गई अधिसूचना, जो टेंडर के समतुल्य मानी जा सकती है, अपना-अपना “कोटेशन” आम आदमी के सामने रखती हैं।

टेंडर नेगोशिएशन परचेज़ समिति के सामने होती है, जिसमें आजकल टेक्निकल और कमर्शियल बिड अलग-अलग फाइल की जाती है। उसी प्रकार चुनाव प्रचार और मीडिया के द्वारा स्थापित मंच पर बहस होती है, जो “टेंडर नेगोशिएशन” के सपेक्ष है।

अंततः जिस पार्टी का “बिड” आम आदमी अर्थात वोटर को सबसे अच्छा लगता है, उस पार्टी को “वर्क आर्डर” मिल जाता है। चुनाव आयोग उस विजयी पार्टी के उम्मीदवार को औपचारिक रूप से प्रमाण पत्र देकर पार्टी और आम आदमी के बीच “कॉन्ट्रैक्ट” साइन होने का एलान कर देता है।

चुनाव और उसमें अपनाई गई प्रक्रिया से अधिक मौलिक, संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया शायद ही कोई हो। ऐसी परिस्थिति में चुनावी वादों को कानून के माध्यम से “एनफोर्स” कराने की व्यवस्था होनी ही चाहिए।
मुझे तो दीवानी तथा फौजदारी, दोनों आयाम दिख रहे हैं। समाज (सरकार नहीं) में कानूनविद इस विचार पर सोच कर देखना चाहेंगे?

लालू के प्रचार अभियान में शामिल होने पर नीतीश हुए खामोश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रबी महाभियान (2021-22) का शुभारंभ एवं प्रसार रथों को हरी झंडी दिखाकर कर मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूरे देश में 100 करोड़ लोगों को कोविड-19 के टीके दिए जाने पर खुशी जताई है और कहां कि बिहार में भी वैक्सीनेशन के इस मिशन को लेकर काफी बेहतर काम हो रहा है वहीं तमाम लोगों को अब दूसरे डोज के टीके भी लग रहे हैं सरकार लगातार इसको लेकर समीक्षा भी कर रही है और सभी लोगों को दूसरा डोज का टिका मिले इस पर काम भी कर रही है

कोरोना के दूसरे टीका को लेकर सरकार गम्भीर है।

वही उत्तराखंड त्रासदी में मारे गए लोगों को मुख्यमंत्री राहत कोष से दो ₹200000 दिए जाने की घोषणा भी की है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उत्तराखंड के त्रासदी को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पश्चिमी चंपारण जिले के कई लोगों की मौत हुई है जिसको लेकर सरकार काफी चिंतित है और तमाम अधिकारियों को भी सरकारी सहायता मुहैया कराय।

कांग्रेस और राजद के रिश्ते पर क्या बोले नीतीश जरा आप भी सुनिए

साथ ही महागठबंधन के बिखराव पर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुप्पी तोडी…… बोले सीएम नीतीश कुमार ….यह महागठबंधन का अंदरूनी मामला है वे लोग जाने हम लोग महा गठबंधन वाले मामले पर ध्यान नहीं देते हैं

क्या बिहार की राजनीति में तरुप का इक्का साबित होगा कन्हैया

क्या बिहार की राजनीति में तुरुप का इक्का साबित होगा कन्हैया

कांग्रेस में शामिल होने के बाद पहली बार पटना पहुंचे कन्हैया का जिस अंदाज में कांग्रेस के नेताओं ने स्वागत किया उससे संकेत साफ है कि आने वाले समय में गुजरात की तरह बिहार में भी कांग्रेस कन्हैया को बड़ी जिम्मेवारी दे सकती है।

वही कन्हैया जिस अंदाज में जातिवाद ,परिवारवाद और राजद के दिल्ली वाले एक नेता पर जिस तरीके से सीधा हमला बोला है उससे यह तय हो गया कि बिहार में अब कांग्रेस फ्रंटफुट पर खेलने का निर्णय ले लिया है। और इसका असर है कि लालू प्रसाद रविवार को पटना पहुंच रहे हैं।

1–कन्हैया को पहले कांग्रेसियों से लड़ना होगा
कन्हैया भले ही कांग्रेस में शामिल हुआ है लेकिन बिहार कांग्रेस के जो मठाधीश हैं उसको जब तक वो साथ लाने में कामयाब नहीं होंगे तब तक कन्हैया को बिहार की राजनीति में स्थापित होना बहुत ही मुश्किल है ।

कल सदाकत आश्रम में साफ दिख रहा था कि मंच पर बैठे अधिकांश नेता कन्हैया को लेकर असहज थे, इतना ही नहीं कई नेता तो इस काम में लगे हुए थे कि सदाकत आश्रम में कुछ ऐसा करा दिया जाये ताकि मीडिया में कन्हैया के स्वागत की खबर दब जाये ।

लेकिन कन्हैया के समर्थक को देख कर वो लोग साहस नहीं जुटा पाये फिर भी राहुल गांधी जिस तरीके से गुजरात में हार्दिक पटेल के साथ खड़े हैं ठीक उसी तरह से कन्हैया के साथ भी खड़े रहेंगे तभी कन्हैया कांग्रेस में कुछ जान फुक पायेगा ।

हालांकि बिहार कांग्रेस पूरी तौर पर टेबल पॉलिटिक्स तक सिमट कर रहा गया है साथ ही कोई भी ऐसा नेता नहीं बचा है जिससे कोई बड़ी उम्मीद लगायी जा सके, लेकिन ये सारे कांग्रेस के अंदर काफी प्रभावशाली हैं और तोड़ जोड़ के माहिर खिलाड़ी भी है साथ ही बिहार की राजनीति की समझ भी रखते हैं। ऐसे में कन्हैया के सामने पहली चुनौती है यही है कि ऐसे कांग्रेसियों का आर्शीवाद उन्हें कैसे प्राप्त हो।

क्यों कि सीपीआई में भी कन्हैया पार्टी के मठाधीश को साथ जोड़ने में कामयाब नहीं हुए थे और इस वजह से उन्हें लोकसभा चुनाव में बेगूसराय में पार्टी का उस तरह से साथ नहीं मिला,अगर साथ मिलता तो लड़ाई दिलचस्प हो जाता। हालांकि कन्हैया के साथ राहुल का आर्शीवाद है इसलिए मठाधीश को मनाना मुश्किल नहीं है फिर भी बड़ी चुनौती है क्यों कि कांग्रेस का जो भी संगठन बचा हुआ है उसमें नये लोगों को जोड़ कर ही कन्हैया बिहार कांग्रेस में धार पैदा कर सकता है ।

2–राजद के साथ कैसे रिश्ता रहता है इस पर भी कन्हैया का राजनीतिक भविष्य निर्भर करता है

कन्हैया के आने से बिहार कांग्रेस की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव आ जाएगा ऐसा सम्भव नहीं है, बिहार में कांग्रेस को राजद या जदयू का साथ चाहिए ही तभी वह बिहार की राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
कन्हैया के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती यही है।

राजद के अंदर कन्हैया को लेकर जो छवि बनायी गयी है उससे तेजस्वी असहज है और यही वजह है कि राजद बिहार विधानसभा के उपचुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं देकर हैसियत दिखाना चाह रही है ताकि आने वाले चुनाव में कन्हैया का दबाव ना रहे साथ ही जैसे पहले कांग्रेस को हाथ उठा कर सीट दे देते थे वैसे ही दे दें।

लेकिन राजद के इस व्यवहार पर पहली बार आलाकमान ने लालू प्रसाद के परिवार को लेकर अपना रुख बदलते हुए पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरने का कहा ,इतना ही नहीं कांग्रेस लालू प्रसाद के परिवार को हैसियत दिखाने के लिए पप्पू यादव तक को साथ आने का न्यौता दे दिया वही कन्हैया को आते आते मैदान में उतर दिया और इतना ही नहीं पहली बार कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दिया कि राजद से मेरा रिश्ता समाप्त हो गया ।

हालांकि कांग्रेस ऐसा रुख अख्तियार कर लेगा इसकी उम्मीद राजद के सलाहकार को नहीं था और कहां जा रहा है कि कांग्रेस को लेकर राजद प्रवक्ता मनोज झा का जो बयान आया है उससे लालू प्रसाद खासे नाराज है और यही वजह है कि लालू प्रसाद जो पूरी तौर पर अभी भी स्वस्थ नहीं है भागे भागे रविवार को पटना पहुंच रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि कांग्रेस के साथ छुटने से राष्ट्रीय स्तर पर जो नुकसान होगा सो होगा ही बिहार में भी एक नये तरीके का गठबंधन बन सकता है जिसका नुकसान राजद को होगा।क्यों कि राजद की ताकत अब सिर्फ मुस्लिम वोटर रहा है एमवाई समीकरण दरका तो फिर राजद की वापसी बेहद मुश्किल हो जायेंगी ।

वही कन्हैया के आने से जदयू और कांग्रेस के बीच नजदीकियां बढ़ सकती है क्यों कि कन्हैया का नीतीश से बहुत ही अंतरंग रिश्ता है और नीतीश भी चाह रहे थे कि कांग्रेस में ऐसा कोई नेता हो जिसके सहारे सीधे राहुल तक पहुंचा जा सके। क्यों कि जदयू पिछली बार भी जब राजद से नाता तोड़ रहा था उस समय अंतिम क्षण तक नीतीश का यह प्रयास जारी रहा कि कांग्रेस लालू प्रसाद पर दबाव बनाये और तेजस्वी पद छोड़ दे राहुल उस समय भी नीतीश के साथ खड़े थे लेकिन अहमद पटेल लालू प्रसाद की बात में आ गये और फिर राहुल चुप हो गया ।

लेकिन कन्हैया के आने से इस बार स्थिति भिन्न है कमान राहुल के हाथ में है, वही देश की राजनीति जिस दिशा में बढ़ रही है ऐसे में नीतीश बीजेपी के साथ सहज नहीं है ।

ऐसे में कन्हैया के आने से नीतीश का गठबंधन से अलग होने का रास्ता मिल गया है क्यों कि कन्हैया जिस तरीके से राजद और लालू प्रसाद को लेकर हमलावर है ऐसे में कांग्रेस अगर कन्हैया को बिहार की जिम्मेवारी सौपता है तो नीतीश को राजद से साथ हाथ मिलाने में कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि इस बार कांग्रेस पहले कि स्थिति में ज्यादा मजबूत और निर्णय लेने की स्थिति में है इसलिए आने वाले समय में बिहार की राजनीति में कन्हैया तुरुप का इक्का साबित हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

साइबर क्राइम मामले में हाईकोर्ट ने दिखाया सख्त रुख कहां ऐसे मामले में आरोपी को बेल नहीं दी जा सकती

पटना हाईकोर्ट ने आम लोगों ठगने के लिए 28 पृष्टों में मोबाइल फ़ोन नंबर पकड़े जाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए शिव कुमार को अग्रिम जमानत नहीं दिया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आज के दिनों में इस प्रकार का अपराध समाज में अनियंत्रित हो गया है, जब अपराधी लोगों को फ़ोन करके उनसे बैंक आदि के डिटेल्स ले कर ठग रहे हैं।

शिव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप कुमार ने याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने ससमय आत्मसमर्पण नहीं करने की स्थिति में नवादा के पुलिस अधीक्षक को इस मामले में याचिकाकर्ता समेत इस मामले के सभी अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का भी आदेश दिया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में नवादा के पुलिस अधीक्षक को केस के अनुसंधान अधिकारी (आई ओ )को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा है कि आखिर इस मामले के अभियुक्तों की गिरफ्तारी अभी तक क्यों नहीं कि गई है,जबकि यह मामला वर्ष 2020 का है।

कोर्ट ने इस बात की जानकारी मांगी है कि इनकी गिरफ्तारी को लेकर क्या कार्रवाई अभी तक कि गई है। इतने लंबे समय तक इनकी गिरफ्तारी पुलिस द्वारा क्यों नहीं कि गई है।

कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस तरह के अपराध वारीसलीगंज पुलिस थाना क्षेत्र में अनियंत्रित ढंग से फैला हुआ है। कोर्ट नवादा को दूसरा जामताड़ा होने की अनुमति नहीं देगा।

आदेश का अनुपालन को लेकर इस आदेश की प्रति को फौरन नवादा के पुलिस अधीक्षक को फैक्स के जरिये भेजने का आदेश कोर्ट द्वारा दिया गया है। कोर्ट के आदेश का अनुपालन रिपोर्ट नवादा के पुलिस अधीक्षक के व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ पेश करने को कहा गया है।

मामला वारीसलिगंज थाना कांड संख्या – 163 / 2020 से जुड़ा हुआ है, जिसमें आई पी सी की धारा 419/ 420 व आई टी एक्ट की धारा 66( बी) के तहत केस दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता के पास से कथित तौर पर 28 पृष्टों में आम लोगों को ठगने के लिए मोबाइल फ़ोन नंबर पाया गया था।
इस मामले पर आगे की सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

हाईकोर्ट ने 67 वीं बीपीएससी परीक्षा में अधिकतम उम्र सीमा में छूट दिए जाने के मामले पर सुनवाई पूरी निर्णय सुरक्षित ।

पटना हाईकोर्ट ने 67 वीं बीपीएससी परीक्षा में अधिकतम उम्र सीमा में छूट दिए जाने के मामले पर सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया है ।

जयदीप अभय व अन्य की ओर से दायर रिट याचिकाओं पर जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह ने सभी पक्षों का बहस सुनने के बाद सुरक्षित रखा। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य में पिछले 15 वर्षों से लोक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा को , हर साल लेने की जगह दो तीन वर्षों की परीक्षा एक साथ संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित किया जाता है।

हर वर्ष बहाली के लिए परीक्षा आयोजित नही होने के कारण अभ्यार्थियों को परीक्षा में बैठने का समान अवसर नही मिलता है।अगर हर वर्ष परीक्षा आयोजित किया जाता,तो उम्मीद्वार को पूरा अवसर मिलता।
साथ ही संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित करने पर अवसर कम मिल पाएंगे।

परीक्षा में शामिल होने की उम्र सीमा खत्म होने के बाद उन्हें परीक्षा में शामिल होने का अवसर नहीं प्राप्त होता है। उन्हें समान अवसर नहीं प्राप्त मिलने के कारण उनके साथ न्याय नहीं हो पाता है।

वहीं बीपीएससी की तरफ से इन याचिकाओं का विरोध करते हुए अधिवक्ता संजय पाण्डेय ने कोर्ट को बताया गया संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में अधिकतम उम्र में छूट दी जाती रही है ।

साथ ही उन परीक्षाओं में हर वर्ष की रिक्तियां भी एकसाथ सम्मिलित रहती है । अभ्यार्थियों को उचित अवसर मिलता मिलता है ।हाई कोर्ट ने सभी पक्षों का बहस सुनने के बाद इस मामले पर निर्णय सुरक्षित रख लिया ।

तीन दिवसीय दौरे से दिल्ली लौटे राष्ट्रपति जाते जाते हुए भावुक

बिहार विधानसभा भवन शताब्दी समारोह में भाग लेने आये राष्ट्रपति रामनाथ कोविद आज वापस दिल्ली लौट गये हलाकि लौटने के दौरान पटना एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति काफी भावुक हो गये थे और कुछ देर तक नीतीश कुमार का हाथ पकड़े रहे कल के संबोधन में भी उन्होंने कहा था कि बिहारी कहलाना मुझे अच्छा लगता है और बिहार के विरासत को ही मैं राष्ट्रपति भवन में आगे बढ़ा रहा हूं ।

राष्ट्रपति पटना छोड़ते छोड़ते भावुक हो गये

तीन दिनों के यात्रा पर आये थे राष्ट्रपति रामनाथ कोविद
यात्रा के समापन के बीच आज सुबह राष्ट्रपति रामनाथ कोविद 8:25 मत्था टेकने श्री हरमंदिर साहब पहुंचे थे। प्रबंधक समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह हित, वरीय उपाध्यक्ष जगजोत सिंह, कनीय उपाध्यक्ष लखविंदर सिंह, महासचिव इंद्रजीत सिंह तथा सचिव हरवंश सिंह ने उनका स्‍वागत किया।

20 मिनट से अधिक समय तक वो वहां रुके उसके बाद राष्ट्रपति महावीर मंदिर पहुंचे जहां स्वागत के लिए किशोर कुणाल खुद मौजूद थे महावीर मंदिर की और से उन्हें महावीर मंदिर का प्रतिक चिन्ह भेट किया गया और बाद राष्ट्रपति बुद्धा स्मृति पार्क गये और वहां से राष्ट्रपति रामनाथ कोविद 10.25 बजे गांधी मैदान स्थित खादी मॉल पहुंचे।

उन्होंने अपने लिए पैजामा-कुर्ता और पत्नी के लिए खादी की दो साड़ियां खरीदीं। राष्ट्रपति ने बिहार खादी ग्रामोद्योग द्वारा संचालित मॉल को देखने के बाद कहा कि ऐसा मॉल हर जगह होना चाहिए। मंत्री ने कहा कि इस दिशा में तेजी से काम चल रहा है। खादी के विस्तार के लिए वे प्रयासरत हैं।

राष्ट्रपति खादी के प्रति जतायी अस्था

बिहार विधानसभा उपचुनाव में पप्पू यादव ने कांग्रेस को समर्थन देने का किया एलान

उप चुनाव के बहाने ही सही कांग्रेस बिहार में राजद से दूरी बनाना शुरु कर दिया है और इसके लिए पार्टी उप चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दिया है और खबर आ रही है कि पप्पू यादव कन्हैया, हार्दिक और जिग्नेश तारापुर और कुशेश्वरस्थान में साथ मंच शेयर करेंगे वैसे कांग्रेस पहले ही पूर्व सांसद रंजीत रंजन को कुशेश्वरस्थान स्थान का पर्यवेक्षकों नियुक्त कर संकेत दे दिया था कि पप्पू और रंजीता वर्षो बाद एक साथ दिखेगी

1—कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे पप्पू यादवपप्पू यादव की छवि को देखते हुए टीम राहुल फिलहाल पप्पू यादव को पार्टी में शामिल करने से परहेज कर रही है लेकिन पप्पू यादव बिहार में कांग्रेस के लिए काम करे इसके लिए दिल्ली के निर्देश पर ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा ने पप्पू यादव से उप चुनाव में समर्थन मांगा था ।

पप्पू यादव कांग्रेस के लिए प्रचार करेगा ।

पप्पू यादव ने आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा के आग्रह को स्वीकार करते हुए दोनों सीटों पर कांग्रेस का समर्थन की घोषणा करते हुए कांग्रेस के लिए प्रचार करने की घोषणा की है।पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पप्पू यादव ने कहा कि बिहार और देश की जो वर्तमान स्थिति है, उससे कांग्रेस बेहतर तरीके से लड़ाई लड़ रही है। UP और बॉर्डर इलाके में भी कांग्रेस काफी मेहनत कर रही है, इसलिए देश हित और बिहार की स्थिति को देखते हुए, कांग्रेस का 100 प्रतिशत सहयोग करेंगे।

हमारी पार्टी के कार्यकर्ता कुशेश्वरस्थान में लगेंगे। मैं खुद कैम्प करूंगा। हमारी पार्टी ने निर्णय लिया है कि हर परिस्थिति में हम बिहार में कांग्रेस के साथ हैं।

2–तेजस्वी पर साधा निशानापप्पू ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतना कमजोर विपक्ष और बहुरूपिया हमने कहीं नहीं देखा है।

विपक्ष को मछली मारने और धान के खेत में जाने से फुर्सत नहीं है। वहीं, पूर्व सांसद ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार आड़े हाथों लिया और कहा कि कश्मीर मामले में केंद्र और बिहार सरकार चुप है।

पप्पू यादव ने बिहारियों को सुरक्षित बिहार लाने को लेकर सरकार को कोसा

3—पप्पू यादव ,कन्हैया, हार्दिक और जिग्नेश कई सभा साथ करेंगे कांग्रेस उप चुनाव को दिलचस्प बनाने के लिए अपनी पूरी युवा बिग्रेड को मैदान में उतार दिया है कल से कन्हैया, हार्दिक और जिग्नेश के साथ साथ पप्पू यादव भी कांग्रेस के लिए वोट मांगेंगे।

इस युवा बिग्रेड का तारापुर पर कितना प्रभाव पड़ेगा कहना मुश्किल है लेकिन इस टीम के मैदान में उतरने से कुशेश्वरस्थान में राजद की मुश्किलें बढ़ सकती है । हालांकि कांग्रेस की पूरी कोशिश चल रही है कि पप्पू यादव के सहारे यादव वोटर में और कन्हैया के सहारे मुस्लिम वोटर में इतना बड़ा डिभिजन करा दे कि राजद को कांग्रेस की शर्तों पर गठबंधन करने पर मजबूर होना पड़े ।

दशरथ मांझी का सपना, सपना ही रह गया

बिहार के विकास से जुड़ा एक किस्सा सुनाते हैं आपको ,बिहार के गया जिला में महादलित की एक बस्ती है गहलौर जहां 14 जनवरी 1929 को दशरथ मांझी का जन्म हुआ था , एक दिन की बात है दशरथ मांझी पहाड़ पर लकड़ी काट रहे थे ,दोपहर हुआ तो उनकी पत्नी मांझी के लिए खाना लेकर पहाड़ पर चढ़ने लगी उसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वो घायल हो गयी ।लेकिन समय पर दवा और अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गयी।

दशरथ मांझी का सपना सपना ही रह गया

मांझी को लगा कि गांव के सामने जो पहाड़ है वहां से अगर रास्ता होता तो मेरी पत्नी बच सकती थी बस क्या था एक हाथ में हथौड़ा और दूसरे हाथ में छेनी लेकर मांझी पहाड़ को काटने चल दिये और 22 वर्षो तक निरंतर काटते हुए रास्ता बना कर ही दम लिये ।

2005 के बाद बिहार की सियासत का मिजाज बदला और राजनीति दलित से महादलित पर पहुंच गया ऐसे में सरकार को महादलित में एक चेहरा चाहिए थे जिसके सहारे उस वक्त की राजनीति को साधा जा सकता था , बस फिर क्या था गुमनामी में जी रहे दशरथ मांझी रातो रात मसीहा बन गये और उन्हें एक नया नाम दिया गया ‘माउंटेन मैन’ ।

दशरथ मांझी का सपना आज भी अधूरा ही है

उनकी इस उपलब्धि के लिए बिहार सरकार ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में 2006 में पद्मश्री हेतु उनके नाम का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा। लेकिन वह सम्मान आज तक दशरथ मांझी को नहीं मिला।

नीतीश कुमार ने उन्हें पटना बुलाया और अपनी कुर्सी पर बिठा कर सम्मानित किया तो एक बार फिर दुनिया की नजर ‘माउंटेन मैन’ की और आकृष्ट हुआ ।

उनके जीवन पर आधारित फिल्में बननी शुरु हो गयी और फिर घोषणाओं का जो दौर शुरू हुआ वह उनके मरने के बाद ही थमा ,लेकिन आज भी मांझी का वो सपना अधूरा ही है, नीतीश कुमार से मिलने जब वो पटना आये थे तो मांझी ने नीतीश को कहां था पहाड़ काट करके सड़क तो बना दिये लेकिन अभी भी लोगों का आने जाने में बहुत परेशानी हो रही है। ऐसे में पहाड़ को काटकर गांव की सड़क जितनी ऊंची है उस लेवल पर सड़क बनवा दीजिए।

मांझी की इसी इच्छा की पूर्ति के लिए विकास का खेल शुरू हुआ, समाधि स्थल चार वर्ष पहले ही बना है किस हाल में है मांझी का समाधि स्थल जरा आप भी सुनिए समाधि का देखभाल कर रहे राम मांझी की जुवानी ,वही जहां तक पहाड़ की ऊंचाई को कम करने की बात है उसके लिए विकास किसी तरीके से रुप बदला जरा आप भी सुनिए मांझी के गांव वालों की जुबानी ।

दशरथ मांझी के समाधि स्थल का देख रेख करने वाला

यही बिहार के विकास की कहानी है दशरथ मांझी ने पहाड़ तोड़ कर अपनी फाल्गुनी के लिए ताजमहल से कम बड़ी निशानी छोड़कर नहीं गये हैं लेकिन राजनीतिक जरूरत थी तो हर किसी ने दशरथ को याद किया लेकिन जैसे ही राजनीतिक जरूरतें पूरी हुई विकास भी उन्हें भुल गया ।

चौथे चरण के पंचायत चुनाव के दौरान गड़बड़ी की शिकायत पर आयोग ने छह मतदान केन्दों पर फिर से चुनाव कराने का दिया आदेश

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के चौथे चरण के दौरान हुई गड़बड़ी को देखते हुए 6 मतदान केन्द्रों पर फिर से मतदान कराने का आदेश दिया है ।इसमें पश्चिम चंपारण जिले के बगहा-1 हरदी नदवा पंचायत के वार्ड संख्या 8 की बूथ संख्या 227 है।

यहां पंच पद के मतपत्र गलत छप जाने के कारण पुनर्मतदान होगा। पूर्वी चंपारण, ढाका के भगवानपुर में ग्राम पंचायत सदस्य के लिए वार्ड संख्या 3 के बूथ संख्या 179 पर ईवीएम कमीशनिंग में गलत मतपत्र लग जाने के कारण पुनर्मतदान होगा।

समस्तीपुर के विभुतिपुर में देशरी कर्रख पंचायत के वार्ड संख्या 21 की बूथ संख्या 226 पर पंचायत समिति सदस्य के लिए हुई वोटिंग में ईवीएम के त्रुटिपूर्ण कमीशनिंग के कारण पुनर्मतदान होगा।

वहीं, सारण जिले के पानापुर प्रखंड की धेनुकी पंचायत में पंचायत समिति सदस्य, वार्ड संख्या 8 की बूथ संख्या 63 ईवीएम में प्रा.नि.क्षे.सं. 7 का सदस्य मतपत्र लग जाने के कारण पुर्नमतदान होगा।

वही अररिया के नरपतगंज प्रखंड की फरही में बूथ संख्या 344- 345 पर असामाजिक तत्वों द्वारा बोगस मतदान करने एवं मतदान को प्रभावित किए जाने के कारण फिर से मतदान कराने का निर्देश आयोग द्वारा जारी किया है ।


जमीन पर ईवीएम रखने के मामले में दोषी पर आयोग ने कार्रवाई का दिया निर्देश
कटिहार के फलका प्रखंड की सालेहपुर पंचायत की बूथ संख्या 135 पर जमीन पर ईवीएम रखने मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने दोषियों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया।

आयोग के मुताबिक भवन की कुर्सियां और टेबल एक कमरे में बंद कर रख दी गई थीं। जिसकी वजह से ये परेशानी सामने आई थी। ईवीएम जमीन पर होने के कारण वोटर भी यहां मजबूरी में जमीन पर बैठ कर वोट डालते दिखे थे।

बिहार पंचायत चुनाव के चौथे चरण की मतगणना शुरु, मतगणना से पूर्व ही 3220 प्रत्याशी निर्विरोध हो चुके हैं निर्वाचित

बिहार पंचायत चुनाव के चौथे चरण की मतगणना शुरु हो गयी है हालांकि मतगणना से पहले ही 3,220 निर्विरोध निर्वाचित हो चुका है इनमें 3,104 पंच; 1 मुखिया और 115 पंचायत सदस्य भी शामिल है राज्य निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार सबसे अधिक 3,104 पंच निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। चौथे चरण में कुल 24 हजार 586 पदों के लिए चुनाव हुआ है ।

चौथे चरण के 147 पदों पर किसी ने नहीं किया नामांकन ।

चौथे चरण में जिन सीटों पर वोटिंग हुई है, उनमें से 147 पदों पर किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। कोई भी नामांकन दाखिल नहीं होने के कारण ये सीटें खाली रह गई हैं। इसमें सबसे अधिक 140 पद ग्राम कचहरी के पंच का है। इसके साथ ही 7 पद ग्राम पंचायत सदस्य का है।

जज की संख्या बढ़ने से हाई कोर्ट के कामकाज में आयी तेजी

पटना हाई कोर्ट में नए जजों के आने से अब लंबित पड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई रफ्तार पकड़ने संभावना को बल मिला है । पिछले कुछ दिनों मे स्थानांतरण व नई नियुक्तियों के होने से पटना हाई कोर्ट जजों की संख्या 17 से बढ़ कर 26 हो गई हैं।
पूजा अवकाश के बाद कोर्ट खुलते ही पटना हाई कोर्ट में वकीलों में उत्साह दिखाई देने लगा। लेकिन वे इस बात को लेकर चिन्तित दिखें कि एक लाख से अधिक लम्बित पड़े सिविल मामलों की सुनवाई के लिए केवल 5 एकलपीठ ही गठित हुए हैं।

गौरतलब हैं कि दूसरे हाई कोर्ट से स्थानांतरित होकर आए तीन जज जहां डिवीजन बेंच में बैठे ,वहीं नवनियुक्त छह जजों ने एकलपीठ में बैठकर पुराने लम्बित ज़मानत अर्ज़ियाँ पर सुनवाई किया।

वही दूसरी ओर रिट समेत सिविल मामलों पर सुनवाई करने के लिए बहुत कम जज होने के कारण वकीलों ने निराशा जताई ।
हाई कोर्ट में आपराधिक मामलों पर सुनवाई हेतु जहां एक ओर 16 एकलपीठ गठित हुई है।

वहीं रिट याचिकाओं समेत अन्य सिविल मामलों पर सुनवाई के लिए सिर्फ 5 जज ही हैं। इसमें भी अभी सिर्फ चार ही कार्यरत हैं । जस्टिस अनिल कुमार उपाध्याय की बीमारी की वजह से उनकी एकलपीठ फिलहाल सुनवाई नही कर रही है।

भागलपुर स्मार्ट सिटी के टेंडर को लेकर हाईकार्ट सख्त सरकार से मॉगी रिपोर्ट

पटना हाई कोर्ट ने भागलपुर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत इंटग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेन्टर के संबंध में टेंडर के कागजात को पेश करने समेत अन्य मुद्दों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की।जस्टिस मोहित कुमार शाह ने इस मामले पर सुनवाई करते मेसर्स भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड, भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक/ सी ई ओ, टेंडर कमेटी और मेसर्स शपूरजी पलोनजी एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया है।

हाईकोर्ट ने टेलिकम्युनिकेशनस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि उक्त मामले में निविदा प्रक्रिया का अंतिम निष्कर्ष इस रिट याचिका के फलाफल पर निर्भर करेगा।

याचिका में 25 मार्च, 2021 के टेंडर नंबर – बी एस सी एल/ आई सी सी सी एस / 2024/48 से संबंधित सभी कागजातों को पेश करने को लेकर आदेश देने के लिए कोर्ट से आग्रह किया गया है।साथ ही याचिका में टेंडर देने के संबंध में टेंडर कमेटी द्वारा लिये गए निर्णय को रद्द करने का भी आग्रह किया गया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पूरी टेंडर प्रक्रिया को पक्षपात तरीके से मैनेज किया गया है और याचिकाकर्ता कंपनी को अयोग्य ठहराया गया है,जो संचार मंत्रालय के अधीन सेंट्रल गवर्नमेंट पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइजेज है।

देश में 100 करोड़ कोरोना के टीकाकरण में बिहार का रहा सबसे बड़ा सहयोग 8 करोड़ लोगों को लग चुका है टीका

टीकाकरण का ऐतिहासिक दिन सबों के सामूहिक प्रयास का नतीजाः मंगल पांडेय
31 दिसम्बर 2021 तक आठ करोड़ से अधिक टीकाकरण का आंकड़ा होगा पार
 
पटना। देश मे कोरोना टीकाकरण का आंकड़ा सौ करोड़ के पार होने पर स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने देशवासियों, राज्यवासियों समेत इससे जुड़े स्वास्थकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और कोरोना वारियर्स को शुभकामनाएं दी है। साथ ही इस ऐतिहासिक कार्य के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का आभार जताया है।

श्री पांडेय ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा इस टीकाकरण अभियान की सफलता का श्रेय माननीय प्रधानमंत्री को जाता है, जिनके कारण देशवासियों को मुफ्त में कोरोना का टीका उपलब्ध हो सका।

श्री पांडेय ने इस मौके पर गुरुवार को राजधानी के पाटलीपुत्रा कॉलोनी स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज टीकाकरण केन्द्र पहुंचकर स्वास्थ्य एवं टीकाकर्मियों की हौसला आफजाई की और टीका ले रहे लाभार्थियों से रू-ब-रू हुए। श्री पांडेय ने कहा कि आज का यह ऐतिहासिक दिन सबों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है, जो गर्व और गौरव को विषय है।

बिहार ने जहां अपने लक्ष्य के मुताबिक समय से पूर्व छह करोड़ टीकाकरण का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं 31 दिसम्बर, 2021 तक जनता के सहयोग से 8 करोड़ से अधिक टीकाकरण का आंकड़ा अवश्य पार कर लेगा। देश में टीकाकरण का आंकड़ा 100 करोड़ के पार होने पर राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर दिवाली जैसा दृश्य आयोजित किया जा रहा है।

सभी टीकाकरण केंद्रों पर इस विशेष उपलब्धि पर रोशनी से सजावट कर लोगों को जागरूक करने के लिए संदेश देने का निर्देश राज्य के सभी सिविल सर्जनों को दिया गया है।

श्री पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के निरंतर प्रयास और माननीय मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश पर राज्य में न सिर्फ कोरोना जांच, बल्कि टीकाकरण अभियान को भी गति दी जा रही है। इसका परिणाम है कि बिहार पिछले कई मौकों पर टीकाकरण के मामले में कई राज्यों को पछाड़ देश में सबसे आगे रहा। टीकाकरण अभियान 16 जनवरी 2021 से प्रारंभ हुआ था और करीब 9 माह में देश ने इस विशेष उपलब्धि को हासिल किया।

बिहारी राष्ट्रपति कहे जाना पर मुझे बहुत सकून देता है – राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने आज बिहार विधान भवन शताब्दी वर्ष समारोह का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम के शुभारंभ के पूर्व बिहार विधानसभा परिसर में महामहिम राष्ट्रपति ने शताब्दी स्मृति स्तंभ का शिलान्यास किया और पवित्र बोधि वृक्ष के शिशु पौधे का भी रोपण किया।

महामहिम राष्ट्रपति ने सामाजिक संकल्प अभियान के शिलापट्ट का भी रिमोट के माध्यम से शिलान्यास किया। महामहिम राज्यपाल श्री फागू चौहान ने बिहार विधानसभा की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पर आधारित एक स्मारिका का भी विमोचन किया जिसकी पहली प्रति महामहिम राष्ट्रपति को भेंट की गयी। बिहार विधान भवन शताब्दी वर्ष समारोह कार्यक्रम में सदन में विमर्श ही संसदीय

प्रणाली का मूल है’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महामहिम राष्ट्रपति ने बिहार के प्रति अपने लगाव को इंगित करते हुए यहां के गौरवशाली इतिहास की चर्चा की। उन्होंने यहां के लोगों की प्रशंसा करते हुये कहा कि बिहार प्रतिभावान लोगों की धरती है।

राष्ट्रपति महोदय ने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्यपाल रहने के दौरान मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का हमेशा सहयोग मिला और अब भी सहयोग मिल रहा है।

कार्यक्रम को महामहिम राज्यपाल श्री फागू चौहान ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बिहार विधान सभा भवन के 100 साल पूरा होने पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है इसके लिए विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजय कुमार सिन्हा को धन्यवाद देते हैं।

आदरणीय राष्ट्रपति महोदय ने इसके लिए जो समय दिया, सबलोगों के अनुरोध को स्वीकार किया उसके लिये मैं उन्हें हृदय से धन्यवाद देता हूं और अभिनंदन करता हूं। राष्ट्रपति महोदय का यहां से बहुत पुराना रिश्ता है। हमारे राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी के बारे में सबको मालूम है कि ये बिहार में लगभग 2 साल के लिए राज्यपाल रहे थे।

राज्यपाल के बाद पहली बार राष्ट्रपति बनने का इन्हें अवसर मिला। हम बिहारी लोग तो इनको बिहारी भी कहते हैं, क्योंकि ये बिहार के राज्यपाल रहते हुए राष्ट्रपति बने। इतनी बड़ी प्रतिष्ठा मिलने के बाद हमलोगों को बेहद खुशी हुई। उन्होंने कहा कि स्व० जाकिर हुसैन साहब पहले यहां के राज्यपाल थे, लेकिन पहले वे उपराष्ट्रपति बने और तब राष्ट्रपति बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद ये पहली बार तीसरा कृषि रोडमैप की शुरुआत करने के लिए 9 नवंबर 2017 को बिहार आए थे। इसके बाद 15 नवंबर 2018 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आए थे। 25 अक्टूबर 2019 को विश्व शांति स्तूप, राजगीर के 50 वें वार्षिकोत्सव में हमारे विशेष आग्रह पर ये यहां पधारे थे।

उन्होंने कहा कि जापान के फूजी गुरु जी ने विश्व शांति स्तूप का निर्माण कराया था। विश्व शांति स्तूप का शिलान्यास 06 मार्च 1965 को उस समय के राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने किया और 25 अक्टूबर 1969 को राष्ट्रपति श्री वी०वी०गिरी जी ने इसका उद्घाटन किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजय कुमार सिन्हा जी ने बहुत सारी बातों की जानकारी दी है। आप सबलोग जानते हैं कि बंगाल से 22 मार्च 1912 को बिहार अलग हुआ था। उसमें बिहार के साथ उड़ीसा भी उसका हिस्सा था। जब हमलोगों को काम करने का मौका मिला तो वर्ष 2009 से ही 22 मार्च को बिहार दिवस के रुप में मनाना शुरु किया। वर्ष 2012 में बिहार राज्य के 100 साल पूरा होने पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ था।

उस समय के सभापति स्व० ताराकांत झा जी द्वारा कार्यक्रम के लिए किए गए मेहनत को हमेशा याद किया जाना चाहिए। 22 मार्च 2011 से विधायी परिषद बनी थी, उसके लिए कार्यक्रम शुरु किया गया था। उस कार्यक्रम में उस समय की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल जी शामिल हुई थीं। पूरे एक साल तक कार्यक्रम चला था। 03 मई 2011 को पूर्व राष्ट्रपति आदरणीय डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम साहब को बुलाया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायी परिषद् की पहली बैठक पटना कॉलेज में 20 जनवरी 1913 को हुई थी। 100 वें साल में हमलोगों ने वर्ष 2012 में पटना कॉलेज में एक कार्यक्रम किया था। बिहार विधानसभा का भवन बना जिसमें 1920 में परिषद् भवन का निर्माण कराया गया। परिषद् भवन अब बिहार विधानसभा भवन कहलाता है। उसके 100 साल पूरा होने पर आज कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि उस समय के विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी ने 07 फरवरी 2016 से इसके लिए कार्यक्रम की शुरुआत की थी। वे भी इसके लिए बधाई के पात्र हैं। उस समय के नए 98 विधायकों को बहुत सारी चीजों की जानकारी दी गई थी। हमलोगों ने बिहार विधान सभा भवन का विस्तारीकरण भी कराया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज राष्ट्रपति जी ने शताब्दी स्मृति स्तंभ का शिलान्यास किया है। जब यह बनकर के तैयार होगा, तो बहुत सुंदर लगेगा। इस अवसर पर बोधगया से लाए गए शिशु बोधि वृक्ष का भी आज रोपण किया गया। उन्होंने कहा कि बोधि वृक्ष के पास भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बोधि वृक्ष के यहां रहने से यहां के जो प्रतिनिधि आएंगे, उन सबका ज्ञान और बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि हमलोगों ने बुद्ध स्मृति पार्क बनाया, जिसमें अनेक चीजों का निर्माण कराया गया। यहां पर बोधगया, श्रीलंका और अनुराधापुर का बोधि वृक्ष लगाया गया। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में 14 साल तक भगवान बुद्ध रहे थे। वहां से भी बोधि वृक्ष मंगवाकर यहां लगवाया गया। परम पावन दलाई लामा जी जब भी यहां आए उन्होंने बोधि वृक्ष का रोपण किया।

बुद्ध स्मृति पार्क में करुणा स्तूप का बुद्ध स्मृति संग्रहालय का निर्माण कराया गया। उसमें पहले हमलोगों ने मेडिटेशन केंद्र बनाया था। बुद्ध स्मृति पार्क में करुणा स्तूप बना है। करुणा स्तूप में 5 देशों से जापान, म्यांमार, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका एवं थाईलैंड से लाए गए भगवान बुद्ध के अवशेष को रखा गया है।

इसके अलावा परम पावन दलाई लामा जी द्वारा लाए गए बोधि वृक्ष भी यहां पर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर विपश्यना केंद्र भी बनाया गया है। मेडिटेशन केंद्र को ही एक्सटेंशन करके विपश्यना केंद्र बनाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि कल श्रद्धेय राष्ट्रपति जी बुद्ध स्मृति पार्क और विपश्यना केंद्र को देखने जाने वाले हैं। 03 जुलाई 2018 से विपश्यना केंद्र का नियमित संचालन हो रहा है। करीब-करीब 1200 लोग इसमें भाग ले चुके हैं। हमलोग चाहते हैं कि जितने भी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी हैं वे विपश्यना केंद्र में जाएं और उसका अनुभव प्राप्त कर लें। जो सरकारी कर्मचारी और अधिकारी वहां जाएंगे उनको 15 दिन का अवकाश दिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति महोदय वहां जाएंगे और कोई उनका सुझाव आएगा तो हमलोग उस पर काम करेंगे और इसे और बेहतर बनाएं। विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से यहां हर बार कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इनकी कोशिश है कि आगे आदरणीय प्रधानमंत्री जी को भी यहां लाएंगे, कार्यक्रम कराएंगे।

कार्यक्रम को बिहार विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार सिन्हा, बिहार विधान परिषद् के कार्यकारी सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह ने भी संबोधित किया।

चौथे चरण का चुनाव सम्पन्न

पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश के बावजूद मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला है आज चौथे चरण पंचायत चुनाव में 58.65 प्रतिशत वोटिंग हुई है महिला ने 63,05 प्रतिशत और पुरूष ने 54,26 प्रतिशत मतदान किया है।

हलाकि रोहतास .वैशाली ,सहित कई जिलों से छुटपुट हिस्सा की भी खबर आयी लेकिन समान्य तौर पर मतदान पूरी तरह शांतिपूर्वक रहा ।

1–वैशाली में लालगंज के घटारो में बूथ पर झड़प के बाद बर्चस्व को लेकर दो पक्षों में चली गोली। एक युवक घायल, हाजीपुर-लालगंज मुख्य मार्ग को भी किया गया जाम, बूथ नम्बर 196,197 पर चली गोली से पंकज कुमार नामक युवक घायल हुआ है।

2–गोपालगंज में पंचायत चुनाव के दौरान पंचदेवरी व कटेया प्रखंडों के विभिन्न मतदान केंद्रों से मारपीट करने व मतदाताओं को धमकाने के आरोप में पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। यहां दोपहर एक बजे तक करीब 29 फीसदी मतदान हुआ है।

3–रोहतास में शिवपुर के मुखिया प्रत्याशी श्वेता सिंह और उनके समर्थकों पर हमला हुआ है। मुखिया प्रत्याशी की गाड़ी को भी आग के हवाले कर दिया गया है। हमला का आरोप दूसरे पक्ष पर लगा है।

4— बक्सर के बड़का गांव में मतदान के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव किया है। ग्रामीणों ने पुलिस पर लाठियां भांजने का आरोप लगाया है।

5—सीतामढ़ी के मिर्जापुर पंचायत में EVM के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। यहां EVM से प्रत्याशी का चुनाव चिन्ह ही गायब हो गया है। पंचायत समिति के सदस्य के चुनाव चिन्ह में उलट-फेर किया गया है।

6—बिहटा प्रखंड के मूसेपुर पंचायत से पुलिस ने भारी मात्रा में वोटर आईडी कार्ड एवं दो डैमो ईवीएम को एक घर से किया बरामद. बोगस वोटिंग के लिए पंचायत में नहीं रहनेवाले लोगों का पहचान पत्र किया जा रहा था इस्तेमाल. दो लोग गिरफ्तार ।

बिहार में पर्यटन के क्षेत्र में अभी भी बहुत कुछ करने की जरुरत है

मैं पिछले तीन दिनों से नालंदा ,राजगीर और बोधगया घूम रहा हूं , मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह इलाका है और नीतीश कुमार पर्यटन और पर्यावरण में दिलचस्पी भी रखते हैं और पर्यटन के क्षेत्र में सबसे ज्यादा पैसे खर्च करने कि बात करे तो वो इलाका भी यही है फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर भी हम लोग कम्पीट नहीं कर सकते हैं।

तीन दिनों की यात्रा के दौरान मुझे महसूस हुआ कि नीतीश कुमार 2005 से लगातार बिहार के मुख्यमंत्री हैं जीतन राम मांझी का एक वर्ष से अधिक का कार्यकाल छोड़ दे तो फिर भी नालंदा ,राजगीर और बोधगया में पर्यटकों के लिए सामान्य सुविधा भी उपलब्ध नहीं है ।

राजगीर का जो पुराना रोपवे है उसका हाल यह है कि मेरे सामने दो व्यक्ति बाल बाल बच गये और मैं कैसे बच गया उपर वाले को ही पता है। इतना खतरनाक रोपवे मैंने नहीं देखा हरिद्वार का अनुभव था मुझे इसलिए परिवार और बच्चों के साथ चले गये ।

बिहार पर्यटन के क्षेत्र में बड़ी इकोनॉमी खड़ी कर सकता है

लेकिन रोपवे पर चढ़ने और उतरने के दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों से थोड़ी सी भी चूक हुई तो दुर्घटना तय है ।लम्बें लोगों के लिए तो और भी मुश्किल है देश का यह एकलौता रोपवे हैं जहां भागते हुए रोपवे पर आपको चढ़ना है और भागते हुए रोपवे पर से उतरना है ।यहां आप रोपवे पर चढ़ रहे हैं या फिर उतर रहे हैं रोपवे रुकता नहीं है उसी स्पीड से आपको उस पर बैठ जाना है और उसी स्पीड से आपको उतरना है थोड़ी सी भी चूक हुई तो चोट लगना तय है ।

जबकि 2005 से अभी तक राजगीर में भवन निर्माण विभाग हजारों करोड़ की लागत से इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर ,पुलिस एकेडमी भवन सहित दर्जनों भवनों का निर्माण सरकार ने कराई है ।राजगीर में कंक्रीट का जाल बिछा गया है लेकिन आपको राजगीर पहुंचने के लिए आज भी आपको उसी तरह जाम में घंटो फसना है जैसे पांच वर्ष पहले था ।पटना बाईपास से बिना जाम में फंसे निकल गये तो फतुहा वाली सड़क पर जो जाम मिलना तय है रेलवे का फ्लाईओवर अभी तक बन नहीं पाया है आगे बढ़ गये तो फिर बिहारशरीफ जाम से निकल गये तो आप भाग्यशाली है सड़क का हाल सामान्य स्तर का है ।

बिहार में पर्यटन क्षेत्र

हां कुछ अच्छे होटल जरुर बने हैं फिर भी खाने और रहने की कोई व्यवस्था नहीं है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की तो छोड़िए भारतीय स्तर का भी हो । मैं 2010 से राजगीर जा रहा हूं जहां तक मुझे लगा राज्य सरकार पर्यटन के क्षेत्र में 100 करोड़ का भी निवेश नहीं किया है , इसी वर्ष नए रोपवे के निर्माण में ₹ 20 करोड़ 18 लाख 57000 खर्च हुआ हैं। रोपवे में कुल 20 केबिन लगाए गए हैं, इनमें 18 केबिन पर्यटकों के लिए है लेकिन अभी चालू नहीं है ।वही एक सफारी पार्क बनाया गया है जिस पर कुल 19 करोड़ 2900000 रुपया खर्च हुआ है लेकिन कल बारिश हो गयी तो वहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया। एक पांडव पार्क बना है जहां बच्चों के साथ एक दो घंटा रह सकते हैं ।

नालंदा विश्वविद्यालय को सुरक्षित रखने के लिए जो नये स्ट्रक्चर बनाये गये हैं वो कब गिर जायेगा कहना मुश्किल है ,विश्वविद्यालय की जो दीवार बची है उस पर घास और कजरी जम गया है ,वही स्थिति जरासंध गुफा का भी है ऐसा नहीं है कि काम नहीं हुआ है लेकिन 15 -16 वर्षो में जो होना चाहिए था वो दूर दूर तक नहीं दिख रहा है, नीतीश कुमार के कार्यकाल में जितनी राशि भवन निर्माण में खर्च की गयी है मुझे नहीं लगता कि आजादी के बाद सरकार द्वारा अभी तक इतनी राशि खर्च हुई होगी भवन निर्माण के क्षेत्र में ।

गया और बोधगया का भी यही हाल है इस बार पिंडदान करने आये हजारों श्रद्धालुओं को होटल उपलब्ध नहीं रहने के कारण बस में रहने को मजबूर हुए ,गया में अभी तक बाईपास ठीक से नहीं बन पाया है जहां से आप सीधे बौद्ध गया या फिर शहर के बाहर बाहर आप निकल जाये। बौद्ध गया में इस बार संसद भवन जैसा एक मीटिंग हॉल बनते देखा और उसी कैम्पस में सरकार फाइव स्टार होटल बनवा रही है और पुलिस विभाग में करोड़ों का भवन बन रहा है। सामान्य सुविधा की ही बात करिए बौद्ध गया से लेकर मंदिर जाने के रास्ते में एक वास रुम और शौचालय नहीं है समझ में नहीं आता है सोच क्या है,राजगीर का भी यही हाल है परिवार साथ में हैं तो आप परेशान हो जायेंगे ।

वैसे यह सब इसलिए सामने ला रहे हैं ताकि बिहार से जुड़े जो भी लोग इस फील्ड में काम कर रहे हैं वो इन इलाकों के बेहतरी के लिए क्या किया जा सकता है जिससे भारतीय और विदेशी पर्यटक ज्यादा से ज्यादा आ सके इस पर सोचे क्यों कि जहां तक मैं देख रहा हूं बिहार में जिस तरह से सभी धर्मों का मुख्य केन्द्र के साथ साथ ऐतिहासिक स्थल मौजूद है ऐसे में बिहार पर्यटन के क्षेत्र में बड़ी इकोनॉमी खड़ी कर सकता है ।

बाजार में गिरावट बढ़ी – सेंसेक्स 456 अंक, निफ्टी 152 गिरा; आईआरसीटीसी 19% गिरा

बीएसई सेंसेक्स 456.09 अंक टूटकर 61,259.96 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 50 152.20 अंक की गिरावट के साथ 18,266.60 पर बंद हुआ। इंट्राडे ट्रेड में सेंसेक्स ने 61,880 के इंट्रा-डे हाई और 61,109 के निचले स्तर के बीच कारोबार किया, निफ्टी ने 18,458 के इंट्रा-डे हाई और 18,209 के निचले स्तर के बीच कारोबार किया ।

सेंसेक्स चार्ट (20.10.21) एक नजर में

बीएसई मिडकैप 1.9% और स्मॉलकैप इंडेक्स 2.3% फिसले। सेंसेक्स पर भारती एयरटेल 4.03% की बढ़त के साथ शीर्ष पर रही, इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक, इंडसइंड बैंक और बजाज फाइनेंस का स्थान रहा।

टाइटन सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेंसेक्स स्टॉक था, जिसमें 2.97% की गिरावट आई, इसके बाद एचयूएल, एनटीपीसी और बजाज फिनसर्व का स्थान रहा।

सेंसेक्स के 30 शेयर्स में से 7 शेयर बढ़त के साथ और 23 शेयर कमजोरी के साथ बंद हुए।

सेंसेक्स के शेयर एक नजर में

घरेलू संस्थानों ने अपनी भारी बिकवाली जारी रखी। मंगलवार को उन्होंने 2,500 करोड़ मूल्य के शेयर बेचे जबकि एफपीआई ने 506 करोड़ मूल्य के शेयर बेचे।

निफ्टी मिडकैप 50 इंडेक्स 1.19% गिर गया जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 2.42% गिर गया। निफ्टी फार्मा इंडेक्स 1.44% गिरा ।

हिंडाल्को, टाइटन कंपनी, एचयूएल, बीपीसीएल और बजाज फिनसर्व निफ्टी के प्रमुख हारने वालों में से थे। लाभ में भारती एयरटेल, एसबीआई, टाटा मोटर्स, इंडसइंड बैंक और एक्सिस बैंक शामिल हैं।

निफ्टी इंडेक्स के 50 शेयरों में से 11 हरे निशान में बंद हुए, जबकि 39 लाल निशान में बंद हुए।

दरभंगा, भागलपुर और बक्सर आयुर्वेदिक कालेज फिर से होंगे शुरू

आयुष चिकित्सा के विकास को राज्य सरकार प्रतिबद्धः मंगल पांडेय
दरभंगा, भागलपुर और बक्सर आयुर्वेदिक कालेज फिर से होंगे शुरू

पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने को लेकर राज्य सरकार गंभीर है। दरभंगा, भागलपुर और बक्सर के आयुर्वेदिक कॉलेजों में फिर से पढ़ाई शुरू की जाएगी। इसके लिये प्रयास तेज कर दिए गये हैं। पटना और गोपालगंज में 50-50 बेड की क्षमता के आयुष अस्पताल स्थापित किये जाएंगे।

श्री पांडेय ने कहा कि पटना सिटी स्थित नवाब मंजिल में आयुष अस्पताल का निर्माण शुरू हो गया है। इसके डेढ़ साल में तैयार होने की संभावना है। यहां पर आयुर्वेद, होमियोपैथी, यूनानी और योगा पद्धति से इलाज किये जाएंगे। केंद्र सरकार के सहयोग से गोपालगंज में आयुष अस्पताल खोले जाएंगे।

आयुर्वेदिक, होमियोपैथी और यूनानी चिकित्सा कालेजों की शैक्षिक और आधारभूत संरचना की कमियां दूर की जाएगी। बेगूसराय और दरभंगा के राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालयों में दो नये भवन बनेंगे। मुजफ्फरपुर स्थित राय बहादुर टुंकी साह शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल के परिसर में भी एक नया भवन बनाया जाएगा।

श्री पांडेय ने कहा कि आयुर्वेद और यूनानी कॉलेजों में स्नातक (यूजी) सीटों की संख्या भी बढ़ाई गई है। राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज ने यूजी सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है और पांच अलग-अलग विषयों में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई शुरू की गई। स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष डॉक्टरों और जीएनएम की तैनाती की प्रक्रिया शुरू की गई। सूबे में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और वेलनेस सेंटर पर भी आयुर्वेदिक इलाज की सुविधा जनता को दी जाएगी।

बारिश से बेहाल बिहार ट्रेन परिचालन पर भी पड़ा असर गंडक कोसी सहित कई नदियों का जलस्तर बढ़ा

पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश के कारण नालंदा सहित उत्तर बिहार के कई जिलों बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है गंडक ,कोसी सहित कई नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया है ।वही अररिया:-जोगबनी रेलवे स्टेशन पर पानी भर जाने के कारण आनंद विहार -जोगबनी स्पेशल ट्रेन को फारबिसगंज में रोका गया। जोगबनी में बाढ़ जैसे हालात हो गये हैं ।मौसम विभाग की माने तो फिलहाल बारिश जारी रहेगी ।

बारिश से बेहाल बिहार

बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी समारोह में शिरकत करने पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पटना पहुंचे हैं

बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी समारोह में शिरकत करने के लिए भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पटना पहुंचे हैं, राष्ट्रपति तीन दिनों तक पटना में रहेंगे इस दौरान आज शाम पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीशों संग ‘हाई-टी’ की शोभा बढ़ायेंगे। 21 अक्टूबर को सुबह पटना साहिब और हनुमान मंदिर का दर्शन करेंगे उसके बाद बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी समारोह को लेकर सुबह 10.50 बजे विधानसभा परिसर पहुंचेंगे।

वे यहां शताब्दी स्तंभ का शिलान्यास करेंगे और इस परिसर में बोधिवृक्ष के शिशु पौधे लगाएंगे फिर समारोह को संबोधित करेंगे। वे ‘सदन में विमर्श ही संसदीय प्रणाली का मूल है’ विषय पर विधायकों को संबोधित करेंगे। शाम साढ़े सात बजे से महामहिम राष्ट्रपति के सम्मान में विस अध्यक्ष के सरकारी आवास पर रात्रि भोज रखा गया है। इस दौरान बिहार कोकिला शारदा सिन्हा समेत कुल 77 कलाकार राज्य की सांस्कृतिक खूबियों का प्रदर्शन उनके समक्ष करेंगे। 22 को सुबह पटना भ्रमण के बाद राजभवन से पटना एयरपोर्ट के लिए राष्ट्रपति सुबह 11 बजे रवाना होंगे।

राष्ट्रपति बनने के बाद चौथी बार पटना आ रहे हैं राष्ट्रपति कोविंद
राष्ट्रपति कोविंद का बिहार से विशेष लगाव है। 8 अगस्त 2015 को उन्होंने बिहार के राज्यपाल पद की शपथ ली और 19 जून 2017 को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बिहार के राजभवन से सीधे राष्ट्रपति भवन के लिए विदा हुए। राष्ट्रपति बनने के बाद वे चौथी बार बिहार के दौरे पर पहुंच रहे हैं।

पहली बार 9 नवंबर 2017 को तृतीय कृषि रोडमैप का शुभारंभ करने आये थे। 15 नवंबर 2018 को राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा तथा एनआईटी पटना के दीक्षांत समारोह में शामिल होने बिहार आए। तीसरी बार 25 अक्टूबर 2019 को महामहिम राजगीर परिभ्रमण पर पहुंचे थे।

राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली दो यात्राओं में वे एक-एक दिन राजभवन में रुके थे। अबकी चार साल बाद 22 और 23 की रात वे यहां विश्राम करेंगे। इसको लेकर राजभवन के राष्ट्रपति सूट को चकाचक किया जा चुका है। यहां के रसोइयों, खानसामों में भी महामहिम के आगमन को लेकर खासा उत्साह है।

राष्ट्रपति समेत छह वक्ता करेंगे समारोह को संबोधित
बिहार विधानसभा के शताब्दी समारोह को लेकर विधानसभा के बाहरी परिसर में बनाए गये भव्य पंडाल के मंच पर राष्ट्रपति श्री कोविंद समेत छह लोगों की ही कुर्सियां होंगी और इतने ही लोग समारोह को संबोधित भी करेंगे। स्वागत भाषण विस अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा करेंगे, उसके बाद विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल फागू चौहान का संबोधन होगा।

राष्ट्रपति के मुख्य संबोधन के बाद विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह धन्यवाद ज्ञापन करेंगे। मौके पर विधानसभा द्वारा तैयार स्मारिका का भी लोकार्पण होगा। राज्यपाल चौहान इसे लोकार्पित कर इसकी पहली प्रति राष्ट्रपति कोविंद को प्रदान करेंगे।

पंचायत चुनाव का चौथा चरण बारिश के बावजूद मतदाताओं में देखा जा रहा है खासा उत्साह

बिहार पंचायत चुनाव के चौथे चरण चरण की वोटिंग चल रही है हलाकि बारिश की वजह से वोटिंग प्रभावित हुई फिर लोगों में इतना जोश है कि बारिश में भी महिलाए भींग कर रही है ।आज 36 जिलों के 53 प्रखंडों में वोट डाले जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार, सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान को लेकर आयोग ने पूरी तैयारी की हुई है। इस चरण में 11,318 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 62 लाख 80 हजार 960 मतदाता अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। इनमें 32 लाख 96 हजार 329 पुरुष व 29 लाख 84 हजार 415 महिला मतदाता और अन्य 216 मतदाता शामिल हैं

ये तस्वीर बिहार के पंचायत चुनाव की है जहां बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएँ घर से निकली हैें।

इस चरण में ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए 41,120, ग्राम पंचायत मुखिया पद के लिए 5835, पंचायत समिति सदस्य पद के लिए 5979, ग्राम कचहरी पंच पद के लिए 17553, ग्राम कचहरी सरपंच पद के लिए 4190 और जिला परिषद सदस्य पद के लिए 1131 उम्मीदवार मैदान में हैं।

चौथे चरण में 799 ग्राम पंचायतों के मुखिया और सरपंच के लिए चुनाव होंगे। 10888 वार्डों में ग्राम पंचायत सदस्य और ग्राम कचहरी के पंच पर चुनाव हो रहा है। जिला परिषद की 119 सीटों पर, जबकि पंचायत समिति की 1093 पदों पर चुनाव के लिए चुनाव कराया जा रहा है।

——–आज के पंचायत चुनाव में क्या खास है——–
दोपहल के एक बजे तक बिहार में 30 से 35 प्रतिशत मतदान की खबर है वैसे इस बार बारिश की वजह से मतदाता और मतदानकर्मियों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है

मोतिहारी के ढाका के बूथ संख्या 179 पर पंचायत सदस्य के मतपत्र का त्रुटिपूर्ण प्रकाशन। इसे लेकर इस पद के लिए मतदान नहीं हो रहा है। शेष पदों पर मतदान चल रहा है। इस बूथ पर वार्ड सदस्य के लिए पुनर्मतदान के लिए चुनाव आयोग को अनुशंसा की जा रही है।

जमुई के कवाली गांव में बूथ नंबर 69 पर प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच झड़प।
पुलिस ने मामला शांत कराया। मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से फिर से शुरू।
गया जिले के गुरुआ के बूथ नंबर 111 में बोगस वोटिंग का आरोप।

सलमा खातून का वोट किसी दूसरे ने दिया, बायोमेट्रिक सिस्टम नहीं कर रहा काम।
मोतिहारी के ढाका प्रखंड के बूथ संख्या 179 पर वार्ड सदस्य पद का चुनाव स्थगित।
चुनाव लड़ रहे थे 11 लोग। EVM बैलेट में सिर्फ 7 प्रत्याशियों का नाम।

पटना के दुल्हिनबाजार के 17 मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक काम नहीं कर रहा।
पटना के बिहटा के 27 मतदान केंद्रों पर भी बायोमेट्रिक सिस्टम फेल।

नालंदा-इस्लामपुर प्रखंड के बड़ाय गांव में मतदान केंद्र के पास भौरा का हमला। कई मतदाता जख्मी।
बक्सर के बसुधर पंचायत के बूथ नं 1,2,3 पर सभी पोलिंग पार्टियों को बदला गया।

मुजफ्फरपुर में बूथ संख्या 101 पर मुखिया प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच विवाद।
कटिहार जिले के तीन प्रखंडों में बारिश के बावजूद मतदाताओं की दिख रही भीड़।

नवादा में एक बूथ पर दिव्यांग बहन को वोट दिलाने पहुंचा भाई। भाई ने कहा- बहन को नहीं दिखता है, इसलिए वोट दिलाने के लिए लाया हूं।

समस्तीपुर के विभूतिपुर पतैलिया में बूथ संख्या 3, 5, 15 में ईवीएम मशीन खराब।
मुजफ्फरपुर के रघुनाथपुर खुर्द पंचायत में बिना भवन वाला बूथ। यहां टेंट से बूथ बनाया गया है।

मधुबनी के राजनगर प्रखंड के रघुनी देहट पंचायत के बूथ नम्बर 2 पर बारिश के कारण मतदान बाधित रहा।
मुजफ्फरपुर– सरैया रामपुर विश्वनाथ पंचायत के पंचायत समिति सदस्य उम्मीदवार राजन चौधरी को निशाना बनाते हुए फायङ्क्षरग।

पटना– बिहटा प्रखंड में देकुली मतदान केंद्र पर शराब पीकर मतदान करने पहुंचे एक मतदाता को बिहटा पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

छपरा— मशरख प्रखंड के दुगौली गांव के दुमदुमा के बूथ पर रोशनी की व्‍यवस्‍था नहीं है। इस कारण वहां टार्च क रोशनी में मतदान कराया जा रहा है। सिवान के मैरवा प्रखंड में मतदान की गति धीरे-धीरे बढ़ रही है।

नालंदा के डुमरी गांव के बूथ संख्‍या दो पर 35 मिनट विलंब से मतदान शुरू हुआ। मुंगेर के असरगंज प्रखंड में तेज बारिश के बीच मतदाता छाता लेकर मतदान केंद्र पहुंचे हैं।

बिहार के लोक संगीत पर स्वरा भास्कर का परिवार हुआ दिवाना

अभिनेत्री स्वरा भास्कर अक्सर किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं. स्वरा को इंस्टाग्राम और ट्विटर पर भी काफी एक्टिव देखा जाता है. स्वरा कुछ भी पोस्ट क्यों न डालें, उसे लेकर बहस होना लाजमी है. स्वरा भास्कर का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें वे अपनी भतीजी के जन्म पर भोजपुरी में सोहर गाते हुए देखी जा सकती हैं. सोशल मीडिया पर स्वरा का यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिस पर लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

बिहार में ये गीत काफी प्रचलित है जब बच्चा जन्म लेता है ।

स्वरा भास्कर ने अपने इस वीडियो को इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. वीडियो में देखा जा सकता है कि स्वरा एक हॉल में बैठी हैं, जहां काफी सारे लोग हैं और वे सोहर गा रही हैं. बता दें, सोहर एक लोकगीत है, जिसे बच्चे के जन्म पर गाया जाता है. यह मुख्य रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश में गाया जाता है. स्वरा भास्कर के इस वीडियो को अब तक एक लाख से भी अधिक व्यूज आ गए हैं. इसे फैन्स से लेकर बॉलीवुड सेलेब तक लाइक कर रहे हैं. स्वरा ने वीडियो पोस्ट करते हुए बताया है कि वे सोहर गा रही हैं, जिसे अधिकतर लड़कों के जन्म पर गाया जाता है, लेकिन उन्होंने इसे अपनी भतीजी के जन्म पर मॉडिफाई कर दिया है.

पंचायत चुनाव में 7398 उम्मीदवार बिना चुनाव लड़े जीत गये

बिहार में तीन चरणों का पंचायत चुनाव संपन्न हो चुका है और चौथे चरण का चुनाव 20 अक्टूबर यानी कल होगी ।इन तीन चरणों में मतगणना को लेकर आयोग के पास कई तरह की शिकायतें आई हैं। जिसको देखते हुए आयोग ने चौथे चरण के मतगणना के दौरान कई तरह के नये निर्देश जारी किये गये हैं ।

1–मतगणना को लेकर आयोग ने नये निर्देश जारी किये

मतगणना के मामलों में गड़बड़ी करने के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर केस दर्ज किया जाए।
नियमों के मुताबिक, किसी सीट पर मतगणना शुरू करने की घोषणा लाउड स्पीकर से की जाती है। ऐसा इसलिए किया जाना है कि संबंधित सीट से जुड़े उम्मीदवार मतगणना के दौरान उपस्थित रहें, लेकिन आयोग को शिकायत मिली है कि मतगणना केन्द्र पर इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। आयोग ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। इसका पालन नहीं करनेवाले अधिकारियों को चिन्हित कर कार्रवाई का आदेश दिया है।

2-अभी तक 7398 उम्मीदवार बिना चुनाव लड़े चुनाव जीत चुके हैं

पंचायत आम चुनाव में तरह-तरह की तस्वीरें उभर रही हैं. अब तक तीन चरणों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं. तीनों चरण मिला कर कुल 7398 उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीत चुके हैं. इनमें मुखिया, सरपंच,पंच, वार्ड समिति और पंचायत समिति के सदस्य शामिल हैं. खास यह कि 593 पदों पर एक भी नामांकन नहीं हुआ ।

पहले चरण में 858 प्रत्याशी निर्विरोध चुने गये थे
राज्य में पहले चरण में 858 प्रत्याशियों का निर्वाचन निर्विरोध रूप से किया गया. दूसरे चरण में पदों की अधिक संख्या बढ़ी, तो निर्विरोध निर्वाचित होनेवाले प्रत्याशियों की संख्या में भी इजाफा हुआ।

दूसरे चरण में निर्विरोध निर्वाचित होने वालों की संख्या 3396 रही वही तीसरे चरण में 3144 पदों पर प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित कर दिये पहले चरण में 87 पदों के लिए दावेदार ही नहीं मिले, जबकि दूसरे चरण में 320 ऐसे पद थे, जिन पर भी किसी प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल नहीं किया

3–हर पद पर औसतन तीन उम्मीदवारों ने नामंकन दाखिल किया था
राज्य में पहले चरण में मुखिया, सरपंच, पंच , वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला पर्षद सदस्य के 4646 पदों के लिए निर्वाचन कराया गया. इन पदों के लिए कुल 15078 प्रत्याशियों ने दावेदारी की. इसी प्रकार से दूसरे चरण के पंचायत चुनाव में 21131 पदों के लिए चुनाव कराया गया, जिसमें 71467 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया. तीसरे चरण के चुनाव में 23128 पदों के लिए चुनाव कराया गया, जबकि इस चरण में कुल 81616 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया. अभी तक तीन चरणों के नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशियों की संख्या औसतन तीन से अधिक रही है. लोकतंत्र के इस पर्व में उन

निर्विरोध जीत
पहला चरण- 858

दूसरा चरण- 3396

तीसरा चरण- 3144

कुल 7398

चौथे चरण के पंचायत चुनाव की तैयारी अंतिम चरण में 20 अक्टूबर को होगा मतदान

पंचायत चुनाव के चौथे चरण के लिए 20 अक्टूबर बुधवार को होने वाले मतदान को लेकर सभी प्रशासनिक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली गई है। चौथे चरण के मतदान को लेकर राज्य में 11,318 मतदान केंद्रों का गठन किया गया है। इन मतदान केंद्रों को 7729 मतदान भवनों में बनाया गया है। इस चरण में 36 जिलों के 53 प्रखंडों में चुनाव निर्धारित हैं।

1- 799 पंचायतों में उम्मीदवारों के भाग्य का होगा फैसला
चौथे चरण के चुनाव के दौरान 799 पंचायतों में विभिन्न पदों के उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार चौथे चरण में सभी छह पदों के लिए कुल 75,808 नामांकन पत्र दाखिल किए गए है। इनमें 35525 पुरुष एवं 40283 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। आयोग के अनुसार ग्राम कचहरी पंच के कुल 10888 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर 17,553 उम्मीदवार मैदान में हैं। जबकि सरपंच के 799 सीटों के विरुद्ध 4190, मुखिया के 799 सीटों के विरुद्ध 5835, पंचायत सदस्य के 10,888 सीटों के विरुद्ध 41,120, जिला परिषद सदस्य के 119 सीटों के विरुद्ध 1131 और पंचायत समिति सदस्य के 1093 सीटों के विरुद्ध 5979 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया है।

2- चुनाव आयोग ने की कार्यवाही
जमुई जिले के सोनो प्रखंड विकास पदाधिकारी को चुनाव कार्य से हटा दिया गया है निर्वाचन कार्य प्रबंधन में विफल सोनो प्रखंड विकास पदाधिकारी को चुनाव कार्य से हटा दिया गया है। उनकी जगह निर्वाचन पदाधिकारी की कमान वहां के अंचलाधिकारी राजेश कुमार को दी गई है। यह आदेश जिला पदाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी अवनीश कुमार सिंह ने जारी कर दिया है।

वही राज्य में छठे चरण के प्राथमिक शिक्षक नियोजन में 90 हजार 762 पदों पर, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक नियोजन में 32 हजार से ज्यादा पदों पर शिक्षक बहाली की प्रक्रिया चल रही है। निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव संपन्न होने तक शिक्षक नियोजन को जारी रखने की अनुमति देने से मना कर दिया है।

कश्मीर में आज फिर आतंकियों ने की दो बिहारी मजदूर की हत्या, एक घायल।

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने लगातार दूसरे दिन गैर कश्मीरी लोगों को निशाना बनाया है। रविवार को आतंकियों ने साउथ कश्मीर के कुलगाम में बिहार के 3 लोगों को गोली मार दी। इनमें से 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक घायल है।

जानकारी के मुताबिक, कुलगांव के लारन गंजीपोरा एरिया में जिन्हें गोली मारी गई, वे सभी मजदूर थे। घायल की पहचान चुनचुन रिषि देव के तौर पर हुई है। उसे अनंतनाग के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मारे गए 2 नागरिकों की पहचान राजा ऋषि देव और जोगिंदर ऋषि देव के तौर पर हुई है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार ने आतंकी हमलों की पुष्टि करते हुए दो मजदूरों की मौत की जानकारी दी है। जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान जोगिंदर ऋषिदेव और राजा ऋषिदेव के रूप में हुई है। वहीं घायल मजदूर का नाम चुनचुन ऋषिदेव है, जिसे अस्पताल में भर्ती किया गया है।

पटना हाईकोर्ट में सात जज लेगें शपथ

पटना हाई कोर्ट में सात जजों का शपथ ग्रहण 20 अक्टूबर,2021 को होगा । चीफ जस्टिस संजय करोल पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से स्थानांतरित जज जस्टिस राजन गुप्ता,कर्नाटक हाईकोर्ट से स्थानांतरित जज जस्टिस पी वी बजनथ्री और केरल हाईकोर्ट से स्थानांतरित जज जस्टिस ए एम बदर को 11 बजे दिन में शपथ दिलाएंगे।इसके साथ ही चार नवनियुक्त हुए जजों, संदीप कुमार, पूर्णेन्दु सिंह,सत्यव्रत वर्मा एवं राजेश कुमार वर्मा को पटना हाई कोर्ट के जज के रूप में शपथ दिलाएंगे।
दशहरा छुट्टी खत्म होने के बाद 21अक्तुबर,2021 को पटना हाई कोर्ट के खुलते ही ये सभी जज भी अपना कार्य प्रारंभ कर देंगे।

पटना हाई कोर्ट में पूजा अवकाश के ठीक पहले न्यायिक सेवा कोटे से दो जज पटना हाई कोर्ट में शपथ ग्रहण किये थे ।
इन चार इस सभी जजों के आने से पटना हाईकोर्ट में जजों की कुल संख्या 26 हो जाएगी,जबकि यहां जजों के स्वीकृत पदों की संख्या 53 हैं।इस तरह अभी भी 27 जजों के पद रिक्त पड़े रहेंगे।

संदीप कुमार जज बनने के पटना हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट थे एवम कुछ वर्षों तक बिहार सरकार के वकील के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

पूर्णेंदु सिंह जज बनने से पहले वे पटना हाई कोर्ट में बिहार सरकार, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ,नेशनल इंश्योरेंस कंपनी व सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वकील रहे।

सत्यव्रत वर्मा जज नियुक्त होने से पूर्व पटना हाई कोर्ट में झारखंड सरकार के रह चुके हैं ।

राजेश कुमार वर्मा जज बनने से पहले पटना हाई कोर्ट में बिहार एवं केंद्र सरकार दोनों के वकील रह चुके हैं।

कोरोना का असर राज्य के अदालतों में भी पड़ा है एक लाख से अधिक़ मामले हैं पेंडिंग।

कोरोना महामारी का असर राज्य के अदालतों के कामकाज स्पष्ट दिखने लगा है। पटना हाई प्रशासन ने पटना हाई कोर्ट में वर्ष 2018, 2019 और 2020 में दायर हुए व् निष्पादित हुए मुकदमों का केस क्लीयरेंस रेट (सी सी आर) अपने आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया है।

हाई कोर्ट प्रशासन द्वारा जारी सी सी आर के अनुसार वर्ष 2018 में कुल 130518 मुकदमें दर्ज हुए, जिसमें 117984 मुकदमें कोर्ट द्वारा सुनवाई के बाद निष्पादित किये गए। इस तरह से वर्ष 2018 का सी सी आर 90.39 फी सदी।

इसी प्रकार से वर्ष 2019 में पटना हाई कोर्ट में कुल 136401 मुकदमें दर्ज हुए, जिसमें हाई कोर्ट ने 117707 मुकदमों का निष्पादन किया। इस तरह से वर्ष 2019 का सी सी आर 86.29 रहा।

वर्ष 2020 में पटना हाई कोर्ट में 58674 मुकदमें ही दर्ज हुए, जिसमें हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए 51637 मुकदमों को निष्पादित किया। इस प्रकार से वर्ष 2020 का सी सी आर 88.00 रहा।

गौरतलब है कि दर्ज मुकदमों की संख्या व निष्पादित किये गए मुकदमों के प्रतिशत को यहां सी सी आर कहा गया है। इसी प्रकार से राज्य के निचली अदालतों में वर्ष 2018, वर्ष 2019 व वर्ष 2020 का सी सी आर भी हाई कोर्ट प्रशासन द्वारा आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया गया है।

राज्य के निचली अदालतों में वर्ष 2018 में कुल 493973 मुकदमें दर्ज किये गए, जिसमें 361063 मुकदमों को निचली अदालतों द्वारा निष्पादित किया गया। इस प्रकार से वर्ष 2018 का सी सी आर 73.09 रहा।

वर्ष 2019 में राज्य के निचली अदालतों में कुल 598462 मुकदमें दर्ज हुए, जिसमें 405347 मुकदमों को निचली अदालतों द्वारा निष्पादित किया गया। इस तरह से वर्ष 2019 का सी सी आर 67.73 रहा।

वर्ष 2020 में राज्य के निचली अदालतों में 476877 मुकदमें ही दर्ज हुए, जिसमें 174478 मुकदमों को सुनवाई के पश्चात निष्पादित किया गया। इस तरह से वर्ष 2020 का सी सी आर 36.58 रहा।

इस तरह से देखा जाए तो वर्ष 2018 और 2019 में मुकद्दमों की दायर संख्या और निष्पादित मामलों की संख्या सामान्य मानी जा सकती है।किंतु करोना महामारी वर्ष 2020 में दायर मुकद्दमों की संख्या तो कम रही ही, साथ निष्पादित मामलों का प्रतिशत भी नीचे रहा।

क्या बीजेपी असदुद्दीन ओवैसी को देश का दूसरा जिन्ना बनाने में लगा है?

क्या संघ और बीजेपी हिंदू महासभा की तरह असदुद्दीन ओवैसी को दूसरा जिन्ना बनाने में मदद कर रही है । सवाल उठना लाजमी है क्यों कि मीडिया में कवरेज को लेकर एक रिपोर्ट आयी है जिसमें पीएम मोदी के बाद सबसे अधिक किसी नेता को कवरेज मिल रहा है तो वो असदुद्दीन ओवैसी है । मीडिया ओवैसी को इस तरह से पेश कर रहा है जैसे देश के 25 करोड़ मुसलमान का वही एक आवाज है जैसे कभी ब्रिटिश सरकार उस दौर में जिन्ना को दिखाने की कोशिश कर रहा था।

1- क्या हैसियत है असदुद्दीन ओवैसी की 

देश के 545 लोकसभा सीट में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पार्टी का मात्र दो सांसद है एक खुद असदुद्दीन ओवैसी  है दूसरा महाराष्ट्र से गठबंधन में जीत करके आया है ।इसी तरह देश के 4126 विधानसभा सीटों में AIMIM के विधायकों की संख्या मात्र 14 है। तेलंगाना विधानसभा में विधायकों की संख्या सात है वो भी गठबंधन में, पांच बिहार में है और दो महाराष्ट्र में है।यही इसकी राजनीतिक हैसियत है ।  बात अगर वोट प्रतिशत की करे तो तेलंगाना विधानसभा चुनाव में  2.7 फीसदी वोट मिले थे AIMIM को ।बिहार में AIMIM को 1.24 फीसद वोट मिला है और इसी तरह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में AIMIM 1.34 प्रतिशत वोट मिला था ।और इस बार के बंगाल विधानसभा की बात करे तो AIMIM को 0.01%  वोट मिला था । मतलब पूरे देश में इसकी जमा पूंजी मात्र 4.66 प्रतिशत वोट का है और टीवी पर इसकी सभा और मुस्लिम विषय से जुड़े मामले में कुल समय की बात करे तो 99 प्रतिशत हिस्सा ओवैसी को मिलता है यह आंकड़ा हिंदी चैनल से जुड़ा है जहां इसकी जमा पूंजी 5 विधायक और 1.24 प्रतिशत वोटों का है ।

2- असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति को स्थापित करने की कोशिश क्यों चल रही है

ये सवाल लाजमी है और इसको समझने की भी जरूरत है क्यों कि एक ऐसा नेता जिसकी राष्ट्रीय फलक पर कोई हैसियत नहीं है उसको इतनी तब्बजों क्यों दी जा रही है ।चलिए आजादी के आंदोलन के दौर में चलते हैं जिन्ना जो सूअर का मांस खाता था ,शराब पीता था मतलब वो दूर दूर तक मुसलमान नहीं था ब्रिटिश सरकार ने उसको मुस्लिम नेता के रूप में आगे बढ़ाया जबकि उस समय खान गफ्फार खान मौलाना आजाद जैसे बड़े नेता देश में मौजूद थे लेकिन सारे नेता टू नेशन थ्योरी के खिलाफ थे। अंग्रेज भारत को कमजोर करना चाहते थे जिन्ना उसके लिए जरुरी था इसलिए जिन्ना को स्थापित करने के लिए उस समय की मीडिया और अन्य संसाधनों का पूरा उपयोग किया । यही राजनीति ओवैसी के सहारे  बीजेपी कर रही है ताकि हिन्दी पट्टी में मुस्लिम वोट का बटवारा हो और बीजेपी सरकार को सरकार बनाने में परेशानी नहीं हो।

3- ओवैसी की राजनीति देश को तालिबान की तरफ धकेल रहा है  

दुनिया में भारत दूसरे नम्बर का देश है जहां सबसे ज्यादा मुसलमान रहता है फिर भी हालात अधिकांश मुस्लिम राष्ट्र से बेहतर भारत का है इसकी वजह भारतीय मुसलमान धार्मिक रूप से उतने कट्टर नहीं है जितने अन्य देशों में है। ओवैसी कर किया रहा है या फिर ओवैसी के परिवार की राजनीति हैदराबाद में क्या रही है कहने की जरूरत नहीं है। इसलिए सत्ता के लिए राजनीतिक दल किसी भी स्तर तक जाकर खेल खेलता है।

आज ओवैसी के सहारे बीजेपी भले ही सत्ता पा ले जैसे बिहार में मिल गया लेकिन इसका दुरगामी प्रभाव जिन्ना के टू नेशन थ्योरी जैसा हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी । यही सियासत है आजादी के आंदोलन के दौरान हिन्दू महासभा मुस्लिम लिंग के साथ सरकार चला रही थी और 1942 के आंदोलनकारियों पर गोली चलाने का हुक्म दे रहा था और आज उसके सहारे सत्ता में बने रहने के लिए ओवैसी जैसे नेता को मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है ।

कश्मीर में हुए आतंकी हमले में एक सप्ताह के अंदर दो बिहारी की हुई मौत

कश्मीर के श्रीनगर के ईदगाह में शनिवार को हुए आतंकी हमले में बिहार के बांका जिले के बाराहाट निवासी अरविंद कुमार साव की भी मौत हो गई है।10 वर्ष से अरविंद कश्मीर में गोलगप्पा बेच रहा था और उससे जो आमदनी होती थी उससे बिहार में उसके परिवार का खर्च चला रहा था। घटना के बाद घर वालों का हाल बेहाल हो गया है। बूढ़े मां-बाप के साथ परिवार के अन्य सदस्यों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

छीन लिया बड़ा सहारा
बांका के बाराहाट थाना क्षेत्र के लखपुरा परघड़ी गांव के देंवेद्र साव और उनकी पत्नी सुनैना देवी को 5 बेटे और एक बेटी है। इसमें दो बेटों की मौत हो चुकी है। बड़ा बेटे बबलू साव की अभी 5 माह पहले ही गांव में मौत हो गई है। एक बेटे की मौत पहले हो चुकी है। दो बेटों की मौत से देवेंद्र और सुनैना पहले ही टूट गए थे। अरविंद ही घर का बड़ा सहारा था।

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एक माह पहले तय हुई थी शादी
अरविंद कुमार साव की शादी एक माह पहले तय हुई थी। शादी की डेट अभी फाइनल नहीं हुई थी लेकिन घर में तैयारी चल रही थी। घर वालों का कहना है कि अगले अग्न में घर वाले अरविंद की शादी को लेकर पूरी तरह से तैयारी कर चुके थे। अब घर वालों का यही कहकर रोना है कि वह बेटे की शादी भी नहीं देख पा और आतंकियों ने उसे मौत के घाट उतार दिया।

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गांव के 10 लोग कश्मीर में लगाते थे दुकान
परघड़ी गांव के 10 लोग कश्मीर के श्रीनगर में रहकर फुचका (गोलगप्पा ) व अन्य खाद्य पदार्थों की दुकान लगाते थे। अरविंद साव 10 साल से श्रीनगर में था और गांव के सभी लोग एक साथ ही रहते थे। बड़े भाई बबलू साव की मौत के बाद अरविंद गांव आया था। भाई क्रिया कर्म के बाद वह 3 माह पहले बिहार से श्रीनगर गया था।

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बड़े भाई की मौत के बाद परिवार की स्थिति को देखते हुए वह अपने भाई मंटू को भी साथ ले गया था। मंटू भी अरविंद के साथ गोलगप्पे का ठेला लगाता था। दोनों भाई के ठेला लगाने से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर रही थी, लेकिन आतंकी हमले में परिवार का बड़ा सहारा छीन लिया है।

इस बीच सुशील कुमार मोदी सांसद (राज्य सभा) एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री, बिहार ने बिहार के अरविन्द कुमार साह की श्रीनगर में आतंकवादियों द्वारा निर्मम हत्या पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ने इस सम्बन्ध में जम्मू कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर श्री मनोज सिन्हा से दूरभाष पर बातचीत की, सुशील कुमार मोदी को लेफ्टिनेंट गवर्नर श्री मनोज सिन्हा ने बताया कि स्वर्गीय साह के पार्थिव शरीर को बिहार भेजने की व्यवस्था की जा रही है एवं उनके परिजनों को तत्काल 11 लाख रुपए की मदद की घोषणा की गई है।

वही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस घटना की निंदा करते हुए तत्तकाल दो लाख रुपया देने की घोषणा की है ।
पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी इन हत्याओं की निंदा की है. उन्होंने ट्वीट किया, “आज श्रीनगर में रेहड़ी लगाने वाले अरविंद कुमार की आतंकी हमले में मौत की कड़ी निंदा करता हूं. यह आम नागरिकों को निशाना बनाने का एक और मामला है. अरविंद कुमार श्रीनगर कमाई और अवसर की तलाश में आए थे और यह अफसोसनाक है कि उनकी हत्या कर दी गई.”

एक सप्ताह के अंदर कश्मीर में हुए आंतकी हमले में ये दूसरा बिहारी है जिसकी हत्या हुई है इससे पहले भागलपुर के वीरेंद्र पासवान को आतंकी ने गोली मार कर हत्या कर दिया था वो भी वहां गोलगप्पा बेचने का काम करता था ।

सुपर 30 गरीबों के बीच स्वाभिमानों की रोजगार देने वाली फौज-अभयानंद

जेईई-एडवांस के रिज़ल्ट आ चुके हैं। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बेसब्र बैठा इस दिन का इंतज़ार कर रहा था।

एक बार पुनः बच्चों ने प्रमाण दिया है कि प्रतिभा को कोई भी परिस्थिति बाँध नहीं सकती। बीते वर्ष की विषमता को पराजित कर, सफलता प्राप्त करने वाले हर बच्चे पर मुझे गर्व है।

मेरे मन में संतोष इस बात से है कि यह मात्र उन छात्र-छात्राओं की किसी परीक्षा में सफलता नहीं, अपितु उनके परिवार की प्रगति का पहला कदम है। अभी तो लम्बा सफ़र तय करना है।

मेरे सारे सुपर 30 संस्थानों में कुल 394 बच्चे जेईई-एडवांस में उत्तीर्ण हुए हैं। रहमानी 30 से 50, विभिन्न CSRL सुपर 30 से 328, मगध सुपर 30 से 8 और संगम सुपर 15 भीलवाड़ा से 8 सफल छात्र-छात्राओं की सूची मेरे हाथों में है। सबों को मेरी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

इन परिणाम से साबित होता है कि बेरोज़गारी उन्मूलन का माध्यम शिक्षा से ज्यादा सशक्त और कोई नहीं है। मैंने 2002 में एक सपना देखा था कि गरीब मेधावी बच्चों की एक बड़ी फ़ौज बनेगी जो आने वाले समय में रोज़गार देने की स्थिति में होगी न कि सरकार के सामने याचक बन कर खड़ी, अपने स्वाभिमान को दरकिनार कर गिड़गिड़ाती रहेगी। उस स्वप्न की आकृति दिखने लगी है।