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पटना हाईकोर्ट ने मगध विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर (वीसी) राजेन्द्र प्रसाद उर्फ डॉ राजेन्द्र प्रसाद की गिरफ्तारी पर 9 मई,2022 तक रोक लगा कर राहत दी है

जस्टिस आशुतोष कुमार ने प्राथमिकी रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य निगरानी विभाग से जवाबतलब किया हैं।

इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट को तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई करने का आग्रह किया था।साथ उनकी गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगा दिया था।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डा रणजीत कुमार ने बताया कि साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजेन्द्र प्रसाद द्वारा पटना हाई कोर्ट में दायर अग्रिम जमानत व कार्यवाही को रद्द करने हेतु दायर अर्जियों पर सुनवाई की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस बीच याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश को पारित किया था।

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राजेन्द्र प्रसाद के विरुद्ध आई पी सी की धारा 120 बी (अपराध करने के लिए रची गई आपराधिक साजिश) / 420(जालसाजी) व भ्रष्टाचार निवारण एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

इसके पूर्व याचिकाकर्ता ने पटना हाई कोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत हेतु याचिका भी दायर किया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए अर्जी भी दायर किया है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की दलील थी कि उनकी अर्जियों पर सुनवाई बड़े पैमाने पर मुकदमों के लंबित रहने की वजह से नहीं सुना जा रहा है।

इस मामलें पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई 9 मई,2022 को होगी।

चौकीदार की मिली पेड़ पर फंदे से लटकी लाश, हत्या या आत्महत्या?

सुपौल । सुपौल में सदर थाना स्थित बकौर के चौकीदार विनोद शर्मा की पेड़ के फंदे से लटकी हुई लाश मिली है। जिसके बाद सदर पुलिस शव को कब्जे में लेकर जांच में जुट गई। मृतक की मई में शादी होनी थी।

आज दोपहर में फोन पर पिता से उसकी बात भी हुई थी। उस वक्त उसने घटना स्थल से काफी दूर एक मंदिर में होने की बात अपने पिता को बताई थी ।लेकिन दोपहर मेंvखेत पर काम करने जा रही महिलाओं ने रामदत्तपट्टी पंचायत के वार्ड नंबर 4 में कोसी तटबंध से कुछ ही दूर एक पेड़ पर चौकीदार की लाश को देखा।

जिसके बाद पहुँची पुलिस ने उसकी पहचान बकौर के चौकीदार विनोद शर्मा के रूप में की। हालांकि चौकीदार ने आत्महत्या की है या उसकी हत्या हुई है ये अब तक अनसुलझा है। पुलिस मामले कि जांच में जुटी है।

आयुक्त ने खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी का किया भ्रमण; दुर्लभ पांडुलिपियों को देखकर हुए सम्मोहित

लाइब्रेरी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत स्थल: आयुक्त

सदस्य, खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी बोर्ड-सह-आयुक्त, पटना प्रमंडल श्री कुमार रवि ने कहा है कि खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की एक अद्भुत संस्था है। वे आज खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी का भ्रमण कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह लाइब्रेरी राष्ट्रीय महत्व का एक अनूठा संग्रहालय है। यहाँ आकर हमारे देश की उत्तम संस्कृति एवं विविधता में एकता का सर्वोत्तम उदाहरण मिलता है।

आयुक्त श्री रवि ने यहाँ प्रशासनिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों को देखा। म्यूजियम हॉल एवं दुर्लभ पांडुलिपि कक्ष में घूमे । उपलब्ध पुस्तकों और पांडुलिपियों का अवलोकन किया। संस्थान के निदेशक डॉ0 शाइस्ता बेदर ने आयुक्त के समक्ष तैमूरनामा, बादशाहनामा, सिरात-ए-फिरोजशाही, दिवान-ए-हाफिज, अरबी पांडुलिपियाँ, 19वीं शताब्दी में पटना, हिन्दु पांडुलिपियाँ, हिन्दी की सबसे पुरानी डिक्शनरी, प्रख्यात आगन्तुक पुस्तिका सहित विभिन्न पुस्तकों को अवलोकन हेतु रखा। निदेशक ने बताया कि 12 लाख दुर्लभ पुस्तकों एवं पांडुलिपियों की प्रतियों को डिजिटाइज किया गया है। आयुक्त पुस्तकों एवं पांडुलिपियों को देखकर भावविह्वल हो गए। उन्होंने संस्थान के निदेशक एवं कर्मियों को इन अमूल्य धरोहरों का संरक्षण करने के लिए धन्यवाद दिया।

आयुक्त श्री रवि ने कहा कि यह लाइब्रेरी शोधार्थियों, शिक्षकों, प्राध्यापकों एवं इतिहास में रूचि रखने वाले विद्यार्थियों लिए एक सर्वोत्कृष्ट संस्था है। उन्होंने आगन्तुक पुस्तिका में लिखा कि पटना के जिलाधिकारी के तौर पर वह यहाँ आने के लिए काफी इच्छुक थे परन्तु उनका यह सपना आयुक्त के तौर पर आज सच हुआ। उन्होंने कहा कि यह लाइब्रेरी ज्ञान का बहुत बड़ा भण्डार है। आनेवाली पीढ़ी के लिए इसका संवर्द्धन एवं संरक्षण करना अत्यावश्यक है।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के रजिस्ट्रार के पद से सेवानिवृत होने के बाद भी कार्य करते रहने के मामलें पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने उमा शंकर शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चौबीस घंटे के भीतर नए रजिस्ट्रार का नाम तय करने का निर्देश दिया।

कोर्ट को राज्य सरकार ने बताया कि बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के पूर्व रजिस्ट्रार को पद से हटा दिया गया है।कोर्ट ने अगली सुनवाई में बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के अध्यक्ष को कोर्ट में तलब किया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को रजिस्ट्रार के पद पर नए अधिकारी को अविलम्ब नियुक्त करने का निर्देश दिया था।

इससे पूर्व में कोर्ट ने सेवानिवृत रजिस्ट्रार द्वारा लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दिया था। कथित तौर पर सेवानिवृत्ति के बाद भी बिहार फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार के पद पर बने रहने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।

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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने कोर्ट को बताया कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति स्थाई तौर पर पटना हाई कोर्ट द्वारा एक अवमानना मामले में 19 अगस्त, 2011 को दिए गए आदेश को गलत तरीके से परिभाषित करते हुए बगैर किसी विज्ञापन, साक्षात्कार किया गया।

साथ ही बिहार फार्मेसी एक्ट 1948 के सेक्शन 26 (ए) और बिहार सर्विस कोड के नियम 67 (ख) तथा सी सी ए रूल्स के नियम 16 का उल्लंघन कर के कर दी गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने बताया था कि बिहार फार्मेसी कॉउन्सिल के रजिस्ट्रार सेवा निवृत्त हो चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें इस पद पर रखकर काम कराया जा रहा है, जोकि गैर कानूनी है। इस मामले में अभी आगे भी सुनवाई होनी है।

गलत नियत से घर में घुसा सख्स, पुलिस गिरफ्त में

जहानाबाद में रिटायर्ड स्वास्थ्य कर्मी के घर मे गलत नियत व चोरी करने के उद्देश्य से घुसे एक युवक को लोगो ने पकड़ कर पिटाई कर दी, बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

मामला नगर थाना क्षेत्र के प्रखंड कॉलोनी का है। जहां मंगलवार की रात नारायण नामक युवक एक घर मे घुस गया और रिटायर्ड स्वास्थ्य कर्मी के मानशिक रूप विक्षिप्त व दिव्यांग नाबालिग नतनी के साथ गलत हरकत करने लगा जिस पर उसकी मां की नजर चली गयी।

बच्ची की मां ने बिना समय गबाये उसे पकड़ कर हो शोर मचाने लगी। इतने में मोहल्ले के लोग जुट गए और उसकी खबर ली बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

पकड़ा गया युवक से पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसके पास से चोरी के टीवी,गैस सिलेंडर, टॉर्च सहित कई अन्य सामान भी बरामद किए गए है।

पीड़ित परिवार ने बताया कि मंगलवार की रात दीवार तड़पकर घर मे घुसे युवक ने दिव्यांग एवं मानशिक रूप विक्षिप्त बच्ची के साथ गलत हरकत कर रहा था इतने में कुछ आवाज आने पर बच्ची की मां जाग गयी और उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

शोर मचाने पर मोहल्लेवासी मौके पर जुट गए और उसकी पिटाई कर पुलिस के हवाले कर दिया। इधर पुलिस ने आरोपी युवक पर प्राथमिकी दर्ज कर उसे जेल भेजने की तैयारी में जुटा है। हालांकि इस बाबत कोई भी पुलिस अधिकारी बोलने से बचते दिखे।

पटना हाईकोर्ट ने सहारा ग्रुप के संस्थापक सुब्रतो रॉय को तलब किया

पटना हाईकोर्ट ने सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में उपभोक्ताओं द्वारा जमा किये गए पैसे का भुगतान को लेकर दायर की हस्तक्षेप याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सहारा ग्रुप ऑफ़ कंपनीज के संस्थापक सुब्रतो रॉय को अगली सुनवाई में तलब किया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सहारा कंपनी को यह बताने का निर्देश दिया था कि बिहार की गरीब जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा, जो सहारा कंपनी के विभिन्न स्कीमों में निवेशकों द्वारा जमा किया गया है, उसे उन्हें किस तरह से जल्द से जल्द लौटाया जाएगा।

सुनवाई के दौरान सहारा का पक्ष वरीय अधिवक्ता उमेश प्रसाद सिंह ने ने रखा ।इससे पहले कोर्ट ने कहा था यदि आगामी 27 अप्रैल तक सहारा कंपनी द्वारा स्पष्ट रूप से कोर्ट को इस बात की जानकारी नही दी जाती है, तो हाईकोर्ट इस मामले में उचित आदेश उस पारित करेगा, ताकि निवेशकों का पैसा उन्हें लौटाया जा सके।

इस मामले पर अगली सुनवाई आगामी 11 मई को की होगी।

जहानाबाद जिले में घोड़ रेस प्रतियोगिता का आयोजन, 100 घोड़े ने लिया भाग

जहानाबाद जिले की घोसी थाना क्षेत्र के शर्मा गांव में घोड़ा रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश के नामी ग्रामीण व्यक्तियों का घोड़ा भाग लिया।

विवेका पहलवान से लेकर हरि मुखिया के घोड़ा इस प्रतियोगिता में भाग लिया। इस प्रतियोगिता का आयोजन शर्मा गांव निवासी उपेंद्र शर्मा द्वारा किया गया इस रेस प्रतियोगिता में आरा के हरेराम सिंह मुखिया के घोड़ा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

और एक मोटरसाइकिल जीतकर अति प्रसन्न होकर कहा कि इस प्रतियोगिता में आकर मुझे बहुत खुशी हो रहा है। उन्होंने कहा कि मेरे पूर्वजों से लेकर आज तक घोड़ा रखने की परंपरा रही है। जिसका मैं निर्वहन कर रहा हूं ।और जहां भी घोड़ा रेस का प्रतियोगिता होता है मैं जरूर इस प्रतियोगिता में भाग लेता हूं।

इसके आयोजन करता उपेंद्र शर्मा ने बताया कि फर्स्ट प्राइज जीतने वाले को मोटरसाइकिल दूसरे को फ्रिज और तीसरे को कलर टीवी से सम्मानित किया। गया इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग दर्शक भी मौजूद थे आयोजन कर्ता का कहना है कि मेरा मुख्य उद्देश घोड़ा रेस प्रतियोगिता का आयोजन इसलिए किया गया है कि दूरदराज से लोग यहां पहुंच कर घोड़े के क्षमता को देखा जा सकता है ।

आज मॉडल के जमाने में हमारे पुरानी परंपरा लुप्त होती जा रही है। इस को बचाने के लिए हम घोड़ा रेस प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे हैं। और कुछ दिनों के बाद इस जगह पर घोड़ा मेले का आयोजन किया जाएगा जहां से लोग दूरदराज से आकर घोड़े के खरीदारी भी कर सकेंगे ।उन्होंने कहा कि हर साल घोड़ा रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में जनजातीय शोध संस्थान बनाने का निर्देश केंद्र व राज्य सरकार को दिया

चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस. कुमार की खण्डपीठ ने बिहार आदिवासी अधिकार फोरम की ओर से दायर लोकहित याचिका को सुनते हुए यह निर्देशदिया।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को बताया कि टीआरआई (ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट)की स्थापना के संबंध में बिहार के मुख्य सचिव द्वारा गहन जांच की गई। टीआरआई की स्थापना के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के लिए सहमति दे दी गई हैं।

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उन्होंने बताया कि जल्द ही बिहार में टीआरआई स्थापित करने का प्रस्ताव भारत सरकार के समक्ष रखा जाएगा, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

केंद्र सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता के एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि यदि राज्य प्रस्ताव भेजेगा, तो केंद्र सरकार उस पर तेजी से कार्रवाई करेगी।जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने बताया कि आदिवासी संस्कृति की विशिष्टता को संरक्षित करने हेतु 19 राज्यों में टीआरआई क्रियाशील है ।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 28 जून, 2022 को की जाएगी।

बास्केटबॉल की राष्ट्रीय खिलाड़ी लतीरा ने सुसाइड कर लिया है

पटना । बास्केटबॉल की राष्ट्रीय खिलाड़ी लतीरा पटना ने सुसाइड कर लिया है। घटना राजीव नगर थाना क्षेत्र के गांधीनगर की है, जहां किराए के मकान में उसका शव बरामद किया गया है । मकान मालिक ने बताया कि कल देर शाम हुई थी और आने के बाद रात से ही जब उसके परिजनों से फोन कर रहे थे वह फोन पिक नहीं कर रही थी।

उसके बाद उसके साथ काम करने वाले एक कर्मचारी ने भी उसे फोन किया वह फोन नहीं उठा पा रही थी, तब जाकर के पूरे मामले की जानकारी मकान मालिक को दी गई और जब मकान मालिक और उसके साथ काम करने वाले लोगों ने देखा उसका सब रूम में लटका मिला था।

रूम अंदर से बंद था पुलिस मौके पर पहुंच गई शव को बरामद कर के पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उसके परिजन बैंगलोर के रहने वाले हैं फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, आखिर उसने आत्महत्या क्यों की?

उसके मोबाइल को जब कर लिया गया है और जांच के लिए दिया गया है उसके साथ काम करने वाले ऑफिस के कई लोगों से पुलिस पूछताछ कर रही है। मकान मालिक का कहना है कि वह बहुत कम यहां रहती थी हमेशा बुक नेशनल गेम में खेलने के लिए ही बाहर रहती थी।

बिहार बीजेपी में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है

नरेन्द्र मोदी 2014में देश के प्रधानमंत्री बने और साथ में अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इसके बावजूद भी बिहार बीजेपी मोदी और शाह के एजेंडे के साथ खड़ा नहीं था।

2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में मोदी और शाह पूरी ताकत लगा दिये बिहार बीजेपी पर कब्जा करने के लिए लेकिन इतनी बूरी हार हुई की दोनों को समझ में आ गया कि बिहार को साधना इनके बस में नहीं है,और फिर सुशील मोदी के हाथ बिहार बीजेपी का कमान सौप दोनों शांत बैठ गये।

सुशील मोदी अरुण जेटली के साथ मिलकर 2017 में नीतीश कुमार को फिर से अपने साथ लाने में कामयाब हो गये और 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 के लोकसभा में जीती हुई पाँच सीट देकर नीतीश कुमार के साथ गठबंधन करने को मजबूर हुए ।
मतलब भारत की राजनीति में आप दोनों की जोड़ी भले ही महानायक वाली क्यों ना हो बिहार में चलेगी तो नीतीश और सुशील मोदी की ही चलेगी ।

ऐसा ही 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी हुआ नीतीश बिहार में मोदी और शाह किस लाइन पर बोलेगे ये भी नीतीश तय किये।
चिराग के साथ गठबंधन टूटने की वजह नीतीश खुद थे या फिर चिराग के पीछे बीजेपी खड़ी थी इसलिए गठबंधन नहीं हो सका यह अभी भी स्पष्ट नहीं है ।

लेकिन गठबंधन टूटने के बाद बीजेपी जिस तरीके से चिराग को मदद कर रहा था उससे यह संदेश जाने लगा था कि जदयू को कमजोर करने में बीजेपी शामिल है। हालांकि दूसरे चरण के बाद बीजेपी को लगा की यह दाव उलटा पड़ सकता है और राजद की सरकार बन जायेंगी तो फिर तीसरे चरण में चिराग को जो मदद मिल रहा था वह बंद हुआ और फिर पीएम मोदी चिराग के खिलाफ पहली बार दरभंगा की सभा में बोले तब तक बहुत देर हो चुकी थी,और फिर जो परिणाम आया उसमें पहली बार नीतीश बिहार में तीसरे नम्बर पर पहुँच गये ।

मोदी और शाह को जैसे ही मौका मिला सबसे पहले सुशील मोदी को बिहार से बाहर का रास्ता दिखाया, संगठन मंत्री नागेन्द्र जी को बिहार से बाहर किया और ऐसे विधायक को मंत्री बनाया जो नीतीश और सुशील मोदी के गुड बुक में नहीं थे और समय आने पर इन दोनों पर हमला भी कर सके ,उसी कड़ी में नितिन नवीन,सम्राट चौधरी और शहनवाज जैसे को मंत्री बनाया और प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल को नीतीश के खिलाफ बयान देने की खुली छुट दी गयी ।

बिहार विधानसभा के अध्यक्ष को सरकार को नीचे दिखाने को लेकर प्रेरित किया गया और संघ के एजेंडे को लागू करने को लेकर नीतीश पर दबाव बनाने को कहॉ गया।
पहली बार विधानसभा सत्र के दौरान जन गन मन की जगह वंदे मातरम गाया गया,विधानसभा के स्मृति स्तम्भ से अशोक चक्र को हटाया गया, इस तरह के कई काम हुए जो नीतीश को पसंद नहीं था।
2021में यानी 7 वर्ष बाद मोदी और शाह का बिहार भाजपा पर पूरी तरह कब्जा हो गया ।

वही नीतीश मोदी और शाह के रणनीति को भाप गये और चुनाव परिणाम आने के एक माह बाद ही वो चुपचाप पार्टी को मजबूत करने में लग गये गाँव गाँव तक संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश शुरु हुई ,उपेन्द्र कुशवाहा को पार्टी में शामिल कर कुर्मी कोयरी गठजोड़ को मजबूत किया फिर नाराज सवर्ण नेता को मिलाना शुरु किया।

दोनों उप चुनाव जीते फिर विधान परिषद के सीट बटवारे में भी बड़े भाई की भूमिका में बने रहे विधान परिषद चुनाव में मधुबनी में बीजेपी वाले साथ नहीं दिये तो बेगूसराय में बदला ले लिये और बोचहा का रिजल्ट तो बता दिया कि बिहार में मोदी शाह की जोड़ी चलने वाला नहीं है।

यह बात जैसे ही सामने आया सुशील मोदी अपने अंदाज में हमला शुरु कर दिये और संकेत भी दे दिये कि नीतीश कमजोर होगे तो फिर 2024 का लोकसभा चुनाव में बिहार में हाल बूरा हो सकता है ।

ऐसे में आने वाले समय में नीतीश गठबंधन का साथ कब छोड़ते हैं ये तो नीतीश तय करेंगे लेकिन बिहार बीजेपी मोदी और शाह के नीति के साथ सहज नहीं है ये साफ दिखने लगा है और 60 से अधिक ऐसे बीजेपी विधायक है जो किसी भी समय चुनौती दे सकते हैं,ऐसे में वीर कुंवर सिंह के विज्योउत्सव कार्यक्रम की सफलता से मोदी और शाह के चेहते खुश हैं लेकिन सुशील मोदी की ट्टीट ने पलीता लगाने का काम कर दिया है यह साफ दिखने लगा है ।

पटना हाईकोर्ट में बिहार नगरपालिका एक्ट, 2007 के चेप्टर 5 व 31 मार्च, 2021 को राज्य सरकार द्वारा किए गए संशोधन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कल भी जारी रहेगी

पटना हाईकोर्ट में बिहार नगरपालिका एक्ट, 2007 के चेप्टर 5 व 31 मार्च, 2021 को राज्य सरकार द्वारा किए गए संशोधन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कल भी जारी रहेगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की डिवीजन ने डा आशीष कुमार सिन्हा की याचिका पर सुनवाई कर रही हैं।

यह मामला नगरपालिका में संवर्ग की स्वायत्तता से जुड़ा हुआ है।कोर्ट को अधिवक्ता मयूरी ने बताया कि इस संशोधन के तहत नियुक्ति और तबादला को सशक्त स्थाई समिति में निहित अधिकार को ले लिया गया है और यह अधिकार अब राज्य सरकार में निहित हो गया है।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मयूरी ने कोर्ट को बताया था कि अन्य सभी राज्यों में नगर निगम के कर्मियों की नियुक्ति नियमानुसार निगम द्वारा ही की जाती है।

उनका कहना था कि नगर निगम एक स्वायत्त निकाय है, इसलिए इसे दैनिक क्रियाकलापों में स्वयं काम करने देना चाहिए।

कोर्ट को आगे यह भी बताया गया की चेप्टर 5 में दिए गए प्रावधान के मुताबिक निगम में ए और बी केटेगरी में नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार को है, जबकि सी और डी केटेगरी में नियुक्ति के मामले में निगम को बहुत थोड़ा सा नियंत्रण दिया गया है।

31 मार्च को किये गए संशोधन से सी और डी केटेगरी के मामले में भी निगम के ये सीमित अधिकार को भी मनमाने ढंग से ले लिये गए है।

अब इस मामले पर अगली सुनवाई 27अप्रैल 2022 को होगी।

उड़ता बिहार या उजड़ता बिहार

किसी दिन सुबह उठकर एक बार इसका जायज़ा लीजियेगा कि कितने घरों में अगली पीढ़ी के बच्चे रह रहे हैं ? कितने बाहर निकलकर नोएडा, गुड़गांव, पूना, बेंगलुरु, चंडीगढ़,बॉम्बे, कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद, बड़ौदा जैसे बड़े शहरों में जाकर बस गये हैं?

कल आप एक बार उन गली मोहल्लों से पैदल निकलिएगा जहां से आप बचपन में स्कूल जाते समय या दोस्तों के संग मस्ती करते हुए निकलते थे।

तिरछी नज़रों से झांकिए.. हर घर की ओर आपको एक चुपचाप सी सुनसानियत मिलेगी, न कोई आवाज़, न बच्चों का शोर, बस किसी किसी घर के बाहर या खिड़की में आते जाते लोगों को ताकते बूढ़े जरूर मिल जायेंगे।

आखिर इन सूने होते घरों और खाली होते मुहल्लों के कारण क्या हैं ?
भौतिकवादी युग में हर व्यक्ति चाहता है कि उसके एक बच्चा और ज्यादा से ज्यादा दो बच्चे हों और बेहतर से बेहतर पढ़ें लिखें।
उनको लगता है या फिर दूसरे लोग उसको ऐसा महसूस कराने लगते हैं कि छोटे शहर या कस्बे में पढ़ने से उनके बच्चे का कैरियर खराब हो जायेगा या फिर बच्चा बिगड़ जायेगा। बस यहीं से बच्चे निकल जाते हैं बड़े शहरों के होस्टलों में।

अब भले ही दिल्ली और उस छोटे शहर में उसी क्लास का सिलेबस और किताबें वही हों मगर मानसिक दबाव सा आ जाता है बड़े शहर में पढ़ने भेजने का।

हालांकि इतना बाहर भेजने पर भी मुश्किल से 1% बच्चे IIT, PMT या CLAT वगैरह में निकाल पाते हैं…। फिर वही मां बाप बाकी बच्चों का पेमेंट सीट पर इंजीनियरिंग, मेडिकल या फिर बिज़नेस मैनेजमेंट में दाखिला कराते हैं।

4 साल बाहर पढ़ते पढ़ते बच्चे बड़े शहरों के माहौल में रच बस जाते हैं। फिर वहीं नौकरी ढूंढ लेते हैं । सहपाठियों से शादी भी कर लेते हैं।आपको तो शादी के लिए हां करना ही है ,अपनी इज्जत बचानी है तो, अन्यथा शादी वह करेंगे ही अपने इच्छित साथी से।

अब त्यौहारों पर घर आते हैं माँ बाप के पास सिर्फ रस्म अदायगी हेतु।
माँ बाप भी सभी को अपने बच्चों के बारे में गर्व से बताते हैं । दो तीन साल तक उनके पैकेज के बारे में बताते हैं। एक साल, दो साल, कुछ साल बीत गये । मां बाप बूढ़े हो रहे हैं । बच्चों ने लोन लेकर बड़े शहरों में फ्लैट ले लिये हैं।
अब अपना फ्लैट है तो त्योहारों पर भी जाना बंद।

अब तो कोई जरूरी शादी ब्याह में ही आते जाते हैं। अब शादी ब्याह तो बेंकट हाल में होते हैं तो मुहल्ले में और घर जाने की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है। होटल में ही रह लेते हैं।

हाँ शादी ब्याह में कोई मुहल्ले वाला पूछ भी ले कि भाई अब कम आते जाते हो तो छोटे शहर, छोटे माहौल और बच्चों की पढ़ाई का उलाहना देकर बोल देते हैं कि अब यहां रखा ही क्या है?
खैर, बेटे बहुओं के साथ फ्लैट में शहर में रहने लगे हैं । अब फ्लैट में तो इतनी जगह होती नहीं कि बूढ़े खांसते बीमार माँ बाप को साथ में रखा जाये। बेचारे पड़े रहते हैं अपने बनाये या पैतृक मकानों में।

कोई बच्चा बागवान पिक्चर की तरह मां बाप को आधा – आधा रखने को भी तैयार नहीं।
अब साहब, घर खाली खाली, मकान खाली खाली और धीरे धीरे मुहल्ला खाली हो रहा है। अब ऐसे में छोटे शहरों में कुकुरमुत्तों की तरह उग आये “प्रॉपर्टी डीलरों” की गिद्ध जैसी निगाह इन खाली होते मकानों पर पड़ती है । वो इन बच्चों को घुमा फिरा कर उनके मकान के रेट समझाने शुरू करते हैं । उनको गणित समझाते हैं कि कैसे घर बेचकर फ्लैट का लोन खत्म किया जा सकता है । एक प्लाट भी लिया जा सकता है।

साथ ही ये किसी बड़े लाला को इन खाली होते मकानों में मार्केट और गोदामों का सुनहरा भविष्य दिखाने लगते हैं।
बाबू जी और अम्मा जी को भी बेटे बहू के साथ बड़े शहर में रहकर आराम से मज़ा लेने के सपने दिखाकर मकान बेचने को तैयार कर लेते हैं।

आप स्वयं खुद अपने ऐसे पड़ोसी के मकान पर नज़र रखते हैं । खरीद कर डाल देते हैं कि कब मार्केट बनाएंगे या गोदाम, जबकि आपका खुद का बेटा छोड़कर पूना की IT कंपनी में काम कर रहा है इसलिए आप खुद भी इसमें नहीं बस पायेंगे।
हर दूसरा घर, हर तीसरा परिवार सभी के बच्चे बाहर निकल गये हैं।

वही बड़े शहर में मकान ले लिया है, बच्चे पढ़ रहे हैं,अब वो वापस नहीं आयेंगे। छोटे शहर में रखा ही क्या है । इंग्लिश मीडियम स्कूल नहीं है, हॉबी क्लासेज नहीं है, IIT/PMT की कोचिंग नहीं है, मॉल नहीं है, माहौल नहीं है, कुछ नहीं है साहब, आखिर इनके बिना जीवन कैसे चलेगा?

भाईसाब ये खाली होते मकान, ये सूने होते मुहल्ले, इन्हें सिर्फ प्रोपेर्टी की नज़र से मत देखिए, बल्कि जीवन की खोती जीवंतता की नज़र से देखिए। आप पड़ोसी विहीन हो रहे हैं। आप वीरान हो रहे हैं।
आज गांव सूने हो चुके हैं
शहर कराह रहे हैं |
सूने घर आज भी राह देखते हैं.. बंद दरवाजे बुलाते हैं पर कोई नहीं आता !

बिहार का जहानाबाद और पटना जिले का मसौढ़ी मंगलवार की सुबह दोहरे हत्या से दहल उठा

शहर के नामचीन स्वीट्स कारोबारी अभिराम शर्मा और उनके भतीजे दिनेश शर्मा का अपराधियों ने गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया।

मृतकों में अभिराम शर्मा चाचा और दिनेश शर्मा भतीजा है। अभिराम शर्मा को अपराधियों ने जहानाबाद में उनके आवास पर गोली मारी जबकि भतीजे को मसौढ़ी गांधी मैदान गेट के समीप गोलियों से छलनी कर दिया।जहानाबाद में अभिराम शर्मा की हत्यारो की तस्वीरे सीसीटीवी कमरे में कैद हो गई है।सबसे हैरान करने वाली बात है कि जहानाबाद में जिस जगह पर स्वीट्स कारोबारी को गोली मारी गई उससे चंद कदम के फासले पर जिले के डीएम और एसपी का आवास है।

इधर शहर के चर्चित स्वीट्स कारोबारी की सुबह सुबह हुई हत्या से शहर में सनसनी फैल गई । घटना की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल घटना सथल पर पहुंच गए।लोग शव को डीएम आवास से थोड़ी दूर आगे रखकर विरोध प्रदर्शन करते रहे और NH83 को जाम कर दिया । विरोध ऒर तनाव के माहौल में कोई भी पुलिस अधिकारी कुछ बोलने से परहेज करते दिखे ।

इधर घटना के संबंध में बताया जारहा है जहानाबाद की वारदात को अपराधियों ने बड़े ही शातिर तरीके अंजाम दिया। वे मृतक के घर मे शादी का कार्ड देंने के बहाने से घुसे और गोली मारकर चलते बने। हत्यारो की तसवीर सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।

वही पटना के मसौढ़ी में मृतक के भतीजे को गांधी मैदान के गेट के समीप गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया है। बाद में जहानाबाद के डीएम और एसपी घटना स्थल पर पहुंचे और लोगों को समझाया तब जाकर लोग हटे।

दुनिया भटियारखाना बन जायेगा

स्वस्थ बहस आमंत्रित..अनर्गल पर भुभुन फोड़ा जाएगा..जो नये जुड़े हैं विशेष ध्यान रखें..
पिछले दो दिनों से यह देख रही..एक बार मन किया कि नज़रंदाज़ कर दूँ..फिर सोचा इसी विषय से अखबारों में वापसी करूँ..चूंकि पहले से ही व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को मजबूत आयाम देकर अगस्त माह से लौटना तय किया था तो इसी निर्णय पर टिके रहने का सोचा..

अब जब अखबारों में दर्जनों लेख यौन शिक्षा को सिलेबस में शामिल करने के लिए लिख चुकी हूँ तो नज़र चुराना ठीक नहीं लगा।।आइये अब बात करते हैं..

यह एक पंक्ति मात्र पंक्ति भर नहीं है…यह एक कुठाराघात है..कुंठा भी है..प्रश्न भी है और विकृति भी है..आंकड़ों को सच मान लेती हूँ क्योंकि मेरे स्वयं के जुटाये आंकड़ें भी लगभग यही है को विभिन्न स्टडीज से समझ आये..पंक्ति का पूर्वार्ध पूर्णरूपेण सत्य है.उत्तरार्ध भी सही है..परन्तु इस विषय के सम्बन्ध में कत्तई नहीं..

ओर्गास्म जिस्मानी ताल्लुकात के चरम सुख को कहते हैं..अब स्त्रियों में यह मात्र शारीरिक नहीं होती..यह मानसिक और सबसे बढ़कर भावनात्मक होती है..एक स्त्री को बिना छुए हुए ओर्गास्म तक पहुंचाया जा सकता है..स्त्री एक साथ 10 सम्बन्ध बनाते हुए या एक दिन में 10 लोगों से सम्बन्ध बनाकर भी ऑर्गेज़्म से कोसों दूर रह सकती हैं..और यह कोई स्टेटमेंट नहीं बल्कि स्टडी और यथार्थ है जिसे आप कामसूत्र के समय से पा सकते हैं..कामसूत्र क्यों लिखा गया जिनको जानकारी है वो इस बात से सहमति रखेंगे..ये बात हुई ऑर्गेज़्म की।। यह कड़वी सच्चाई है कि अधिकांश स्त्रियों को यह पता भी नहीं होता कि यह क्या बला है..पति या पार्टनर का ध्यान भी ना के बराबर ही इस बात पर होता है कि उनकी पत्नी या पार्टनर संतुष्ट हुई या नहीं..इसके कई कारण हैं जिन पर कभी और बात होगी..

यह स्थिति अच्छी तो नहीं कही जा सकती परन्तु मुझे आपत्ति है ‘कहीं और तलाशने’ और इस संदर्भ में नैतिकता का ठेका स्त्रियों को ना लेने की बात पर..कहीं और क्यों तलाशा जाए? अपने पति से बात क्यों न कि जाए? यह एक टैबू जो मर्द समाज बना चुका है उसकव तोड़ने के लिए दूसरे मर्द के पास क्यों जाना? क्या गैरन्टी है आपको ऑर्गेज़्म दूसरे मर्द के पास मिल ही जायेगा..नहीं मिला तो तीसरे फिर चौथे के पास जाएंगी?

स्त्री में हार्मोन्स की वजह से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की इच्छा मर्दों से ज्यादा होती है यह भी रिसर्च कहता है..पर वो इसको नियंत्रित करना जानती है..तभी स्त्रियां बलात्कार नहीं करती🙂

नैतिकता कोई ठेका नहीं है जो आज इसको मिलना चाहिए कल उसको..विवाहित या प्रेम में पड़ा पुरुष भी जब किसी अन्य स्त्री से उसकी सहमति से सम्बन्ध बनाता है ना तो वह अन्य स्त्री स्त्री ही होती है और उसका नैतिक पतन भी वही हो जाता है..फिर चाहे उस अन्य स्त्री को ऑर्गेज़्म से मतलब हो या ना🙂

जब ये 70% स्त्री भी सर्वस्व ताक पर रख तलाशने निकल जाएंगी ना तो यह दुनिया भटियारखाना बन जायेगा..और सबसे अहम बात उन 70% में 95% को ऑर्गेज़्म चहिये ही नहीं होता..दिल से नहीं चाहिए होता है क्योंकि उनका चरम सुख उनका परिवार, प्रेम और अपना चरित्र होता है जो जन्मों के खुशी के लिए 2 पल के सुख को तुच्छ समझती हैं..

लेखक —-स्वाति खुश्बू

नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी रहेगी सरकार – सुशील मोदी

पटना, सोमवार, दिनांक 25.04.2022 : नीतीश कुमार को जनादेश 2025 तक, सरकार पूरा करेगी कार्यकाल – सुशील कुमार मोदी

1.बिहार में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने में लगा हताश विपक्षजब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि बिहार में एनडीए सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही कार्यकाल पूरा करेगी, तब भी यह झूठ फैलाते रहना थेथरोलाजी है कि भाजपा बीच में ही अपना मुख्यमंत्री बनवाना चाहती है।

मुख्यमंत्री को लेकर निराधार अटकलबाजी जारी रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस शरारत का कुछ असर विधानसभा के बोचहां उपचुनाव पर भी पड़ा होगा।

2.बिहार विधानसभा का 2020 का चुनाव एनडीए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट मांगते हुए लड़ा था। लोगों ने इस पर भरोसा किया।

जब एनडीए को नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने का जनादेश 2025 तक के लिए है, तब किसी किंतु-परंतु के साथ बीच में बदलाव का कोई सवाल ही नहीं है।

3.विपक्ष के पास नीतीश सरकार के विरुद्ध न कोई ठोस मुद्दा है, न सदन में संख्या बल है और न लालू-राबड़ी राज की विफलताओं के कारण उनके पास आलोचना का कोई नैतिक बल ही है।

ऐसे में वे नीतीश कुमार के पद से हटने की तरह-तरह की बेततुकी अटकलों को हवा देकर सिर्फ राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं।

गर्मी को देखते हुए 10.45 तक स्कूल बंद करने का निर्देश

पटना, सोमवार, दिनांक 25.04.2022: जिला दण्डाधिकारी, पटना डॉ0 चन्द्रशेखर सिंह ने जिले के सभी विद्यालयों में पूर्वाह्न 10:45 बजे के बाद सभी कक्षाओं के लिए शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने यह आदेश दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 144 के तहत जिले में अधिक तापमान और विशेष रूप से दोपहर के समय भीषण गर्मी के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना के मद्देनजर दिया है।

पौने ग्यारह बजे पूर्वाह्न के बाद सभी कक्षाओं के लिए शैक्षणिक गतिविधियों पर डीएम ने लगाया प्रतिबंध।

उपर्युक्त प्रतिबंध प्री-स्कूल एवं आँगनबाड़ी केन्द्रों सहित जिले के सभी विद्यालयों पर लागू होगा। यह आदेश दिनांक-27.04.2022 से लागू होगा। डीएम ने तदनुरूप विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों को पुनर्निर्धारित करने का आदेश दिया है।

डीएम ने जिला शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आईसीडीएस सहित सभी अनुमंडल दंडाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी एवं थानाध्यक्ष को उपर्युक्त आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने का निदेश दिया है।

डीएम डॉ0 सिंह ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इसके लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है।

पटना हाईकोर्ट ने हत्या का प्रयास के मामले में गलत इंजुरी रिपोर्ट कोर्ट को दिखाकर अग्रिम जमानत लेने का प्रयास कर रहे तीन अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया

पटना हाईकोर्ट ने हत्या का प्रयास के मामले में गलत इंजुरी रिपोर्ट कोर्ट को दिखाकर अग्रिम जमानत लेने का प्रयास कर रहे तीन अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही सभी अभियुक्तों पर पच्चास हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

कोर्ट ने तीनो अभियुक्तों को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के अंदर निचली अदालत में सरेण्डर कर दे। कोर्ट ने जहानाबाद के पुलिस अधीक्षक को भी कहा कि अगर ये सभी अभियुक्त दो सप्ताह में निचली अदालत में सरेण्डर नही करते हैं ,तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर हाई कोर्ट को इसकी जानकारी दी जाए।

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ये मामला जहानाबाद जिला के शकुरबाद थाना अंतर्गत रुस्तमचक गांव का है ।हत्या के प्रयास के मामले में शकुरबाद थाना कांड संख्या 95 /2020 इन सभी अभियुक्तों के खिलाफ दर्ज कराया गया था। इसी मामले में इन अभियुक्तों ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।

हाई कोर्ट की एक एकलपीठ ने धर्मेन्द्र कुमार एवम अन्य के अधिवक्ता और ए पी पी झारखंडी उपाध्याय को सुनने के बाद यह निर्देश दिया। कोर्ट के निर्देश पर जहानाबाद के सिविल सर्जन द्वारा सही इंजुरी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया।

शादी समारोह में तमंचे पर नर्तकियों का डिस्को का वीडियो हुआ वायरल, युवक की तलाश शुरु

शादी समारोह में तमंचे पर नर्तकियों का डिस्को का वीडियो हुआ वायरल , साइबर सेल के हाथ लगा वीडियो, युवक की तलाश शुरु।

बक्सर में एक तरफ जहां पुलिस लगातार अपराध कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई कर उन्हें सलाखों के पीछे भेज रही है वहीं अब भी कानून के प्रति भय देखने को नहीं मिल रहा ।

ऐसे ही एक मामले में जिले में तमंचे पर डिस्को का एक वीडियो वायरल हो रहा है ।

बताया जा रहा है कि वीडियो जिले के ही एक थाना क्षेत्र का है जहां शादी समारोह के दौरान एक युवक नर्तकियों के जम कर ठुमके लगा रहा है ।दोनों नर्तकियों के हाथ में एक-एक पिस्टल है बताया जा रहा है कि ये पिस्टल उस युवक के ही हैं जो कि नर्तकियों के साथ नाच रहा है. यह वीडियो विभिन्न सोशल साइट्स पर लगातार वायरल हो रहा है ।

घटना के संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक यह वीडियो 23 अप्रैल की रात को एक वैवाहिक समारोह के दौरान बनाया गया था जिसके कुछ ही देर के बाद इसे सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर दिया गया । देखते ही देखते वीडियो वायरल होने लगा जिसके बाद यह वीडियो पुलिस तक भी पहुंचा. एसपी नीरज कुमार सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर घूम रहा यह वीडियो बक्सर पुलिस की साइबर सेल के हाथ लगा है ।

तमंचे पर नर्तकियों का डिस्को

जिसके बाद वीडियो की जांच की जा रही है साथ ही संबंधित युवक की तलाश भी की जा रही है. जांच पूरी होने के पश्चात प्राथमिकी दर्ज कराते हुए अग्रिम कार्रवाई की जाएगी ।

तेज प्रताप ने इस्तीफा का किया पेशकश

अपने पिता के नक्शे कदम पर चलने का काम किया । सभी कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया जल्द अपने पिता से मिलकर अपना इस्तीफा दूंगा ।

जो हमें सम्मान देगा, हम उसका साथ देंगे-भूमिहार ब्राह्मण सामाजिक फ्रंट

जहानाबाद। स्थानीय स्वामी सहजानंद संग्रहालय में भूमिहार ब्राह्मण सामाजिक फ्रंट की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में फ्रंट के अध्यक्ष व बिहार सरकार के पूर्व मंत्री श्री सुरेश शर्मा, पूर्व मंत्री व फ्रंट के कार्यकारी अध्यक्ष श्री अजीत कुमार एवं कार्यकारी अध्यक्ष श्री सुधीर शर्मा ने उक्त बैठक में शिरकत की।

बैठक के दौरान फ्रंट के अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने समाज के लोगों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारी नीति ना काहू से दोस्ती, ना काहू से वैर वाली है। इस दौरान फ्रंट के कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री श्री अजीत कुमार ने संगठन की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बोचहा चुनाव एक पार्टी के खिलाफ नाराजगी की स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। इस दौरान कार्यकारी अध्यक्ष सुधीर शर्मा ने कहा कि भूमिहार समाज किसी का बंधुआ मजदूर नहीं है।

जो हमें सम्मान देगा , हम उसका सम्मान करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप शामिल जिले के प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं प्रतिभा पल्लवन एजुकेशनल सोसायटी के चेयरमैन डॉ अभिराम सिंह जी ने कहा कि हमें अपने कार्यों से अपना खोया हुआ सम्मान पुनः प्राप्त करना होगा। हम किसी के भी सम्मान देने के मोहताज नहीं हैं।

अपने नीतियों और कामों से समाज में हम सम्मान खुद व खुद प्राप्त करेंगे। उक्त बैठक में संगठन विस्तार पर भी चर्चा की गई। और एक बार फिर से समाज अपनी खोई हुई गौरवशाली स्थिति को पुनः प्राप्त करेगा।

चिराग पासवान बाघोपुर गांव पहुंचकर पंजाब के लुधियाना में हुए अगलगी की घटना में मृतक के पड़ोसी एवं परिवार से मिले

रोसड़ा । पंजाब के लुधियाना में हुए अगलगी की घटना में बाघोपुर गांव के रहने बाले एक ही परिवार के 7 लोगों की दर्दनाक मौत की सूचना मिलते ही लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान बाघोपुर गांव पहुंचकर मृतक के पड़ोसी एवं परिवार के सदस्यों से घटना के बारे में पूरी जानकारी लिया ।

जानकारी देते हुए लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने बताया कि परिवार के लोगों से बातचीत दौरान जैसे लोगो ने बताया है उससे तो लगता है कि एक ही परिबार के सात लोगो की मौत कोई हादसा नहीं है बल्कि साजिस के तहत घटना को अंजाम देने का शंका है ।

लोगों ने बताया कि घटना के पास से पेट्रोल की डिब्बे भी बरामद किए गए , पेट्रोल छिड़ककर घटना को अंजाम दिया गया, पास से एक लावारिस बाइक भी बरामद किया गया है। चिराग पासवान ने बताया कि परिबार के लोगो ने बताया कि मृतक सुरेश साहनी को पूर्व में भी धमकी दिया गया था, परिवार के लोगों को अगर लगता है की साजिश के तहत इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया गया है तो निश्चित तौर से इस घटना की जांच होनी चाहिए।

इस घटना को लेकर क्यों नहीं अब तक बिहार सरकार पंजाब की सरकार से वार्ता किया है, चिराग ने कहा कि अब तक बिहार सरकार पंजाब सरकार से इस घटना को लेकर अब तक क्यों नहीं पूछा गया कि अगर घटना घटी है तो कैसे घटी है और इस पर अब तक क्या हुआ है स्थानीय प्रशासन क्यों नहीं आश्रित परिवार को सहयोग कर रही है।

चिराग पासवान ने बताया कि परिवार के लोगों से जानकारी मिलने के बाद वह खुद पंजाब के मुख्यमंत्री एवं लुधियाना के एसपी से बात कर जानकारी लेंगे और आश्रित परिवार को सहायता दिलाने की मांग करेंगे , मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी, लोजपा नेत्री डॉ उर्मिला सिन्हा संतोष कुमार सिंह विद्यासागर सिंह अखिलेश कुमार सिंह वंधार पंचायत पैक्स अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार महतो, सरपंच मिथिलेश कुमार साहनी, वार्ड सदस्य रंजीत साहनी, रामा साहनी, मुखिया चंदन देवी, वीडिओ हरि ओम शरण सहित सैकड़ों ग्रामीण व कार्यकर्ता मौजूद थे।

पटना शहर में सड़कों की खुदाई के समय सतर्कता हेतु बैठक, कार्यकारी एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक: आयुक्त

पटना, सोमवार, दिनांक 25.04.2022: आयुक्त, पटना प्रमंडल श्री कुमार रवि ने कार्यकारी एजेंसियों द्वारा पटना शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निर्माण कराये जाने के दौरान आपसी समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया है जिससे सड़कों की खुदाई से आम जनता को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े। वे आज आयुक्त कार्यालय स्थित सभाकक्ष में इस विषय पर आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। आयुक्त श्री रवि ने कहा कि एजेंसियों द्वारा सुरक्षात्मक मापदंडों का अनुपालन अनिवार्य है। उनके द्वारा सभी भागीदारों ( स्टेकहोल्डर्स) को सूचित करना एवं स्थानीय प्रशासन को विश्वास में लेना आवश्यक है अन्यथा उनके विरुद्ध जिम्मेदारी निर्धारित कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

इस बैठक में आयुक्त श्री रवि ने जिला पदाधिकारी, पटना, नगर आयुक्त, यातायात पुलिस अधीक्षक, प्रबंध निदेशक, बुडको, महाप्रबंधक, पेसू, उप महाप्रबंधक बीएसएनएल, प्रबंधक, गेल, अधीक्षण अभियंता, केंद्रीय पथ अंचल एवं अधीक्षण अभियंता, पीएचईडी से एक-एक कर उनके विचारों को सुना।

आयुक्त श्री रवि ने कहा कि एजेंसियों द्वारा किये जाने वाले कार्यों के शर्त में ही सुरक्षात्मक मानकों का अनुपालन उल्लिखित रहता है। इसका प्रवर्तन (इन्फोर्समेन्ट) अत्यावश्यक है। ससमय सूचनाओं का सम्प्रेषण एवं सुनियोजित कार्य प्रणाली अहम भूमिका निभा सकती है। जन सुविधाओं- यथा जलापूर्ति, दूरसंचार, विद्युत आपूर्ति, यातायात-में किसी भी तरह का व्यवधान नहीं आना चाहिए। जो एजेंसी प्रभावित हो रही है उसे पूर्व से सूचित करने से वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है।

आयुक्त श्री रवि ने कहा कि एजेंसियों को सावधानी एवं सतर्कता के साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने एजेंसियों के पदाधिकारियों को पेशेवर ढंग से कार्य करने का निर्देश दिया।

आयुक्त श्री रवि ने कहा कि एजेंसियों के प्रभारियों के बीच समुचित एवं सार्थक समन्वय से समस्याओं को रोका जा सकता है।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के राजस्व विभाग के विशेष सचिव द्वारा जारी विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाबी हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है

राज्य सरकार द्वारा 2 जनवरी, 2021 को जारी विज्ञापन को रद्द करने और 9 फरवरी, 2022 को राज्य सरकार के कर्मियों की तरह आरक्षण देते हुए नियुक्त किए जाने को चुनौती दी गई थी।

जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा की ने बलराज किशोर की याचिका पर सुनवाई करते उक्त आदेश को सोमवार को पारित किया। इस मामले में राज्य सरकार द्वारा विज्ञापन 2 जनवरी, 2021 को जारी किया गया था।

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जारी विज्ञापन के अनुसार बिहार लैंड ट्रिब्यूनल (बीएलटी ) के लिए विशेष सरकारी वकील व 25 अपर सरकारी वकील की नियुक्ति समेत अन्य विभागों तथा दो विशेष सरकारी वकीलों और 25 अपर सरकारी वकीलों की नियुक्ति आरक्षण के आधार पर की गई थी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि कोर्ट ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर राज्य सरकार से छह सप्ताह में पूछा है कि किस नियम के तहत आरक्षण का लाभ देते हुए उक्त नियुक्तियों को किया गया है।

उन्होंने बताया कि उक्त नियुक्ति हेतु कोई आरक्षण का नियय नहीं है और न ही कोई सर्च कमेटी और चयन कमेटी है।मामलें पर 6 सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राजीव रंजन सिंह की बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की खस्ताहाल स्थिति से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की।

पटना हाईकोर्ट ने राजीव रंजन सिंह की बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की खस्ताहाल स्थिति से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस मामलें पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुल निर्माण करने वाली कंपनी के प्रबंध निदेशक ने वादा किया है कि समय सीमा के भीतर सारे परियोजनाएं पूरी कर ली जाएँगी।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गंडक नदी पर पुल समेत अन्य योजनाओं के पूरा में बिलम्ब होने पर नाराजगी जाहिर की थी।
कोर्ट ने वैशाली के डी एम और एन एच ए आई के क्षेत्रीय पदाधिकारी को निर्देश दिया कि कंपनी द्वारा किये जा रहे कार्यों की लगातार समीक्षा कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

पुल निर्माण करने वाली कंपनी के प्रबंध निदेशक ने कोर्ट को बताया कि सभी परियोजनाएं समय सीमा में पूरी की जाएँगी।साथ ही गंडक नदी पर पुल का निर्माण तीन माह में पूरा कर लिया जाएगा।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गंडक नदी पर पुल,हाजीपुर के रामाशीष चौक, अजानपीर ओवर ब्रिज,बी एस एन एल गोलम्बर आदि योजनाओं का मौके पर जायजा लेने के एक टीम गठित की है।

इस टीम में सारण और वैशाली के डी एम, एन एच ए आई के अधिकारी,सड़क व पुल निर्माण करने वाली कंपनी के प्रबन्ध निदेशक और अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद शामिल थे।

कोर्ट ने इन्हें इन योजनाओं के अलावे अन्य अधूरे बने सड़कों का जायजा ले कर रिपोर्ट अगले सप्ताह में पेश करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने इस बात पर सख्त नाराजगी जाहिर की कि कोई भी परियोजना निर्धारित समय में पूरा नहीं हो रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड रहा है। गंडक नदी पर पुल पूरा होने की निर्धारित समय सीमा 2013 ही थी,लेकिन वह अबतक पूरा नहीं हुआ।

निर्माण कंपनी के अधिवक्ता सिद्धार्थ प्रसाद ने कोर्ट को बताय था कि हाई वॉल्टेज ट्रांसमीटर टावर स्थानांतरित करने का कार्य होने बाद सड़क निर्माण का कार्य तत्काल शुरू हो जाएगा।वैशाली की डी एम ने कोर्ट को बताया कि हाजीपुर आरओबी बनाने का काम चल रहा और निर्धारित समय में काम पूरा हो जाएगा।

अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने बताया की अजान पीर में जहां ओवरब्रिज बनना था, अभी तक नहीं बना हैं।यही नहीं,अभी एक ही लेन चालू हुआ है,जबकि दूसरे लेन का काम 12 वर्षो से लंबित हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के नेशनल हाई वे और स्टेट हाईवे पर पर्याप्त संख्या में पेट्रोल पंप नहीं होने के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए विकास आयुक्त को निर्देश दिया कि वे राज्य के सभी जिलाधिकारी की बैठक बुलाए।

कोर्ट को बताया गया कि पेट्रोल पम्प लगाने के लिए विभिन्न जिलों में डी एम के पास बड़ी तादाद में आवेदन लंबित हैं, जबकि राज्य के क्षेत्रफल और जनसंख्या के में पेट्रोल पम्प की संख्या बहुत कम है। कोर्ट ने विकास आयुक्त को इन मामलों पर सभी जिलों के डी एम से विचार कर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने को कहा।

कोर्ट ने राज्य के नेशनल व स्टेट हाईवे पर जनसंख्या और वाहनों की संख्या के तुलना में पेट्रोल पम्प की संख्या पर सख्त रुख अपनाया था।

कोर्ट ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए जानना चाहा कि राज्य नेशनल हाइवे पर कितने पेट्रोल पम्प खोलने की अनुमति दी गई है।

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कोर्ट ने इस बात को भी गम्भीरता से लिया था कि 2018 से पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए लगभग एक हज़ार आवेदन कार्रवाई नहीं होने के कारण ज़िला प्रशासन के समक्ष पड़ा हुआ हैं।इन मामलों मे ज़िला के डी एम की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण मामला अधर में पड़ा हुआ हैं।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जानना चाहा था कि अबतक नेशनल और स्टेट हाईवे में कितने पेट्रोल पम्प चालू हैं।साथ ही राज्य के विस्तार,जनसंख्या और वाहनों की संख्या के मद्देनजर और कितने पेट्रोल पम्प खोले जाने की जरूरत है।इस बारे में हाल में सर्वे किया गया हैं या नहीं।उसके क्या परिणाम रहे।

कोर्ट ने इस बात पर भी टिप्पणी की थी कि राज्य के इन पेट्रोल पंप पर आम लोगों के लिए बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी हैं।पेय जल,मेडिकल किट,शौचालय आदि बुनियादी सुविधाओं की काफी अभाव हैं।

इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अगली सुनवाई में जानकारी उपलब्ध कराने का कोर्ट ने आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के राष्ट्रीय राज मार्ग तथा स्टेट हाईवे पर पेट्रोल पंप सहित अन्य नागरिक सुविधाओं की काफी कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकारों ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं किया है।

इस मामलें पर फिर 5 मई,2022 को सुनवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ पूर्व की तैयारियों की समीक्षा

पटना, 25 अप्रैल 2022 : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ में जल संसाधन विभाग की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में बाढ़ पूर्व की तैयारियों एवं गंगा जल आपूर्ति योजना की विस्तृत समीक्षा की गई।मुख्यमंत्री ने बाढ़ पूर्व की तैयारियों एवं गंगा जल आपूर्ति योजना की समीक्षा की

मुख्य बिन्दु :

• गंगा जल आपूर्ति योजना को जल्द से जल्द पूर्ण करें।

• राजगीर, गया, बोधगया एवं नवादा में गंगा का जल शुद्ध पेयजल के रूप में पहुंचने से लोगों को काफी सुविधा होगी और भूजल स्तर भी मेंटेन रहेगा।

• सात निश्चय – 2 के अंतर्गत हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करें।

• छोटी-छोटी नदियों को जोड़ने की योजना बनाएं। छोटी

नदियों के आपस में जुड़ने से जल संरक्षित रहेगा और इससे

सिंचाई कार्य में भी सुविधा होगी।

• नदियों के गाद एवं सिल्ट प्रबंधन को लेकर अध्ययन और आकलन करायें ।

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री संजय कुमार अग्रवाल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जल संसाधन विभाग की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की कार्य प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने गंगा जल आपूर्ति योजना के तहत इंटेक बेल सह पंप हाऊस, डिटेंशन टैंक सह पंप हाऊस की भौतिक कार्य प्रगति की अद्यतन स्थिति की जानकारी दी तथा बताया कि पाइप लाइन का 97 प्रतिशत काम पूर्ण हो गया है। उन्होंने बताया कि गंगाजल आपूर्ति योजना के तहत राजगीर, गया, बोधगया एवं नवादा में सभी लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है।

सचिव जल संसाधन विभाग ने बाढ़ पूर्व तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य को तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। • समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा जल आपूर्ति योजना को जल्द से जल्द पूर्ण करें। गंगा जल के स्टोरेज, शुद्धिकरण एवं सप्लाई कार्य प्रगति की निरंतर निगरानी करें। पदाधिकारी एवं अभियंता जमीनी स्तर पर इसे देखें पाइप लाइन की सुरक्षा की भी पूरी व्यवस्था रखें। जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग आपस में समन्वय बनाकर तेजी से कार्य पूर्ण करें। गंगा जल आपूर्ति योजना के क्रियान्वयन में आम लोगों का काफी सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि राजगीर, गया, बोधगया एवं नवादा में

गंगा के जल को शुद्ध कर पेयजल के रूप में जल्द से जल्द सभी लोगों तक पहुंचाने के लिए कार्य करें। इससे लोगों को सुविधा होगी और भू-जल स्तर भी मेंटेन रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ससमय बाढ़ पूर्व सुरक्षात्मक कार्यों को पूर्ण करें। बाढ़ अवधि में

कराए जानेवाले कार्यों की पूरी तैयारी रखें। उन्होंने कहा कि सात निश्चय-2 के अंतर्गत हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करें। छोटी-छोटी नदियों को जोड़ने की योजना बनाएं, इसको लेकर व्यावहारिक आकलन कराएं। छोटी नदियों के आपस में जुड़ने से जल संरक्षित रहेगा और इससे लोगों को सिंचाई कार्य में भी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि कृषि रोड मैप बनाया गया और कृषि के क्षेत्र में कई कार्य किए गए हैं जिससे फसलों का उत्पादन दुगुना हुआ है। हर खेत तक सिंचाई उपलब्ध हो जाने पर किसानों को कृषि कार्यों में और सहूलियत होगी। नदियों के गाद एवं सिल्ट प्रबंधन को लेकर अध्ययन और आकलन करायें।

बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री आमिर सुबहानी मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री संजय कुमार अग्रवाल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार एवं मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, अभियंता प्रमुख (बाढ़) श्री शैलेंद्र कुमार तथा अभियंता प्रमुख (सिंचाई) श्री आई०सी० ठाकुर उपस्थित थे।

बिहार की राजनीति किस करवट लेगी कहना मुश्किल है लेकिन बीजेपी और जदयू के बीच तल्खी बढ़ती ही जा रही है

कॉमन सिविल कोड मसले पर जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है। हमारा देश विभिन्नताओं से भरा हुआ है। ऐसे में यहां कॉमन सिविल कोड की जरूरत नहीं है।

यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने सीबीएसई के पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त किया है और कहां है कि इस तरह इतिहास से आने वाले पीढ़ी को अलग करना कही से भी सही नहीं है और बिहार सरकार इसके पक्षधर नहीं है ।

सीबीएसई से पहले बिहार के कई विश्वविद्यालय में इसी तरह पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया था जिसको लेकर बड़ा बवाल मचा था ।वही कहा ये जा रहा है कि मॉनसून सत्र में नीतीश कुमार जातीय जनगणना को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव लाने वाले हैं मतलब तकरार जारी रहेगा ऐसा साफ दिख रहा है ऐसे में गठबंधन कब तक बना रहेगा कयास लगाना मुश्किल है वैसे यह तय है कि नीतीश बीजेपी का साथ छोड़ेंगे समय और तारीख नीतीश को तय करना है बीजेपी भी यह समझ रही है लेकिन बीजेपी के अंदर बिहार के नेतृत्व को लेकर जो खेला शुरु हुआ है वो नीतीश को मजबूती प्रदान करने लगा है ।

पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार द्वारा 16 चक्के वाले ट्रकों के जरिये गिट्टी,बालू आदि के ढुलाई पर लगाए गए प्रतिबन्ध को रद्द कर दिया

बिहार सरकार ने 16 दिसम्बर, 2020 द्वारा जारी अधिसूचना जारी कर इन वाहनों द्वारा गिट्टी, बालू ढुलाई पर रोक लगा दिया था।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने बिहार ट्रक ऑनर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर 7 अप्रैल, 2022 को सुरक्षित रखा था, जिसे आज सुनाया गया।

बिहार सरकार ने इन भारी वाहनों द्वारा गिट्टी,बालू आदि की ढुलाई पर 16 दिसम्बर, 2020 को एक अधिसूचना जारी कर रोक लगा दिया था।

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बिहार सरकार द्वारा रोक के आदेश के विरुद्ध याचिकाकर्ताओं ने ये मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया।लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें की सुनवाई 3 जनवरी,2022 को की।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें को सुनवाई करते हुए इसे वापस पटना हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट को 8 सप्ताह के भीतर सुनवाई कर मामलें का निपटारा करने को कहा।

इन याचिकाओं में बिहार सरकार द्वारा 16 चक्कों के ट्रक के जरिये गिट्टी व बालू आदि की ढुलाई पर 16 दिसंबर, 2020 को ही एक अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध को challenge किया गया है।

इन मामलों पर पटना हाई कोर्ट में फिजिकल कोर्ट शुरू होने के बाद सुनवाई शुरू हुई थी।इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य सम्बंधित सभी पक्षों को अपना अपना पक्ष लिखित तौर पर कोर्ट के समक्ष दायर करने का निर्देश दिया था।

पटना हाईकोर्ट के इस निर्णय से उन वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिली,जिनके भारी वाहनों द्वारा गिट्टी,बालू आदि की ढुलाई पर राज्य सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था।

आपसी विवाद में एक पति ने अपनी पत्नी की धारदार चाकू से गला रेत दिया और खुद अपना भी गला काट लिया

जहानाबाद में आपसी विवाद में एक पति ने अपनी पत्नी की धारदार चाकू से गला रेत दिया और खुद अपना भी गला काट लिया। गंभीर हालत में दोनो को पीएमसीएच रेफर किया गया परन्तु रास्ते मे ही दोनो की मौत हो गयी।

घटना शकुराबाद थाना क्षेत्र के बन्धुबीघा गांव की है। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि पिछले सात दिनों से पतिपत्नी के बीच विवाद चल रहा था। जिसे लेकर पति अजीत ने अपनी पत्नी संगीता देवी की घरेलू चाकू से गला काट दिया और खुद भी अपना गला काट ली।

घटना के बाद दोनो लहूलुहान हो गया। शोरगुल होने पर ग्रामीणों ने आनन फानन में उसे सदर अस्पताल लाया जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनो की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने पीएमसीएच रेफर कर दिया। जहां बीच रास्ते मे ही पहले पति की मौत हो गई जबकि पत्नी संगीता की मौत पटना पहुंच कर हो गयी।

ग्रामीणों ने बताया इन दोनों के अलावा घर मे कोई और नही था।पिछले सात दिनों से पति-पत्नी में विवाद चल रहा था। इसके कारण पति ने अपनी पत्नी की गला काट दिया और वह खुद भी अपना गला काट लिया। जिससे दोनो की मौत हो गयी।

इधर घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मामले की छानबीन करने में जुटी है।

क्रिसलय शर्मा ने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा कर जहानाबाद जिले का नाम रोशन किया

जहानाबाद जिले के पितांबरपुर निवासी क्रिसलय शर्मा ने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड मैं अपना नाम दर्ज करा कर जहानाबाद जिले का नाम रोशन किया है।

दरअसल क्रिसलय शर्मा पेशे से गणित के एक शिक्षक है और गणित से इनका इस कदर लगाव था कि गणित के सवाल को हल करने के लिए 5067 फॉर्मूला संकलित कर लिम्का बुक में नाम दर्ज कराया ।

हालांकि लिम्का बुक के द्वारा उन्हें मेल के माध्यम से अक्टूबर नवंबर के नाम दर्ज होने की सूचना दे दी गई थी लेकिन बीते 3 दिन पूर्व लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के द्वारा उन्हें प्रमाण पत्र और बुक भेजा गया है।

इसको लेकर क्रिसलय शर्मा खुशी का इजहार करते हुए कहा कि कुछ कर गुजरने की तमन्ना ने उन्हें यहां लाकर पहुंचाया है। इस रिकॉर्ड से पूर्व गोल्डन बुक में नाम दर्ज हुआ था।

उन्होंने कहा की उनका अगला लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में रिकॉर्ड दर्ज कराना है, इस खुशी को उन्होंने अपने छात्रों के साथ शेयर करते हुए केक काटकर सेलिब्रेट किया है क्रिसलय शर्मा के छात्रों ने कहा कि उन्हें काफी गर्व होता है कि ऐसे शिक्षक से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जिन्होंने लक्ष्य को पाने के लिए काफी मेहनत किया।

किसलय आज जहानाबाद में मैथ्स गुरू के नाम से जाने जाते हैं। एक कोचिंग चला रहे हैं जहां छात्रों को मैथ्स पढ़ा रहे हैं। किसलय 9वीं, 10वीं और आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए छात्रों को मैथ्स पढ़ाते हैं। इस उपलब्धि पर कोचिंग के छात्र भी फूले नहीं समा रहे।।B अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक तक पहुंचने की तैयारी 5067 मैथ्स फार्मूले के साथ पहली बार किसलय ने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है और उनका सपना है कि वह और मेहनत करके ज्यादा फॉर्मूले के साथ गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराएंगे।

कभी क्रिकेट के क्षेत्र में तलाश रहे थे भविष्य, बिहार में क्रिकेट में नहि दिखा करियर, दूसरे प्यार मैथ्स से लगा लिया दिल। अब पूर्व क्रिकेटर किसलय मैथ्स को लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। गणितज्ञ के तौर पर वह बिहार से आगे अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाना चाहते है।

पूर्वआईएएस अधिकारी व्यास जी को सर्वसम्मति से चुना गया जनमुक्ति आंदोलन का राष्ट्रीय अध्यक्ष

जहानाबाद । जहानाबाद के नवादा स्थित जनमुक्ति आंदोलन के आश्रम में एक बैठक हुई जिसमें पूर्व आईएएस अधिकारी व्यास जी को सर्वसम्मति से जनमुक्ति आंदोलन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।

गांधी और मार्क्स के विचारों का समन्वय बनाकर संगठन को करेगे मजबूत – व्यास जी

इस मौके पर जन मुक्ति आंदोलन से जुड़े राज्य भर के लोग मौजूद रहे। अध्यक्ष चुने जाने के बाद व्यास जी ने कहा कि मुक्ति आंदोलन का संविधान है वह कहता है कि हम रचनात्मक आंदोलनों और शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से जो एक देश है जिसमें शोषण विहीन समाज का क्षमता पर आधारित समाज का जनतांत्रिक समाज और धर्मनिरपेक्ष समाज का स्थापना करेंगे।उन्होंने कहा कि गांधी और मार्क्स के विचारों का समन्वय बना कर संगठन को आगे ले जाने का प्रयास करेंगें। मुझे जो जवाबदेही आज लोगों ने दिया है उसका निर्वहन करूंगा।

साथ ही कहा कि सरकारी सेवा का मेरा अनुभव काम आयेगा। क्योंकि जो सरकार के स्तर पर जो छोटी-छोटी त्रुटियां होती है, जिससे मैं वाकिफ हूं शायद उसे दूर करने में मैं ज्यादा मददगार हो सकता हूं । साथ ही डॉ विनयन को याद करते हुए व्यास जी ने कहा कि डॉ विनयन बनना कोई आसान काम नही है वे उनके दिखाये रास्ते पर चलने की कोशिश करेंगे। व्यास जी ने कहा वे रचनात्मक कार्यक्रमों को शुरू करेगे। जन जन के सवाल को उठाना प्राथमिकता में शामिल होगा।

उन्होंने कहा शिक्षा ,मजदूरी ऒर आदिवासी क्षेत्रों में जल जंगल जमीन के सवालों को लेकर वे संविधान प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि रचनात्मक सरकारी कार्यक्रमों और नीतियों को लोगों तक पहुँचाने में अपने प्रशासनिक अनुभवों का उपयोग करने का प्रयास करेंगे।उन्होंने कहा कि संगठन ने जो जिम्मेदारी सौंपी है उसे मजबूत करने को लेकर वे गांव से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का प्रयास करेंगे।

जनमुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में व्यास जी के अलावे पूर्व आईजी उमेश सिंह, शिक्षा विद डॉ अंजीम शिवाजी राय, जनार्दन शाही विश्वनाथ प्रसाद राजकिशोर और कुलभूषण जी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे व्यास जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष शिक्षाविद अनिल राय ,संत जी को उपाध्यक्ष हरिलाल प्रसाद सिंह को महासचिव बनाया गया जबकि हीरा शर्मा, श्री राम यादव ,जीवित शाह,विश्वनाथ यादव और रामप्रवेश सिंह राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य बनाए गए।संगठन के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी वीरेन्द्र सिंह उर्फ भीम सिंह को सौंपी गई।

किसानों के विकास के बगैर देश और राज्य का विकास संभव नहीं है – रामबालक

संगठन को मजबूती के लिए बिहार दौर पर निक्के बिहार प्रदेश जदयू किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व विधायक रामबालक सिंह का जहानाबाद आगमन पर जदयू कार्यकर्ताओं ने किसान जिलाध्यक्ष चंद्रभानु प्रसाद उर्फ गुड्डू कुशवाहा के नेतृत्व में जोरदार स्वागत किया।

प्रदेश अध्यक्ष ने स्थानीय परिसदन में मुख्य प्रवक्ता दिलीप कुशवाहा के नेतृत्व में किसान प्रकोष्ठ के साथियों के साथ बैठक किया।बैठक का संचालन वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने किया। श्री रामबालक ने बैठक में किसानों के विकास एवं उत्थान पर जोर देते हुए कहा कि बिहार के माननीय मुख्यमंत्री किसानों के तरक्की के लिये सतत प्रयत्नशील हैं। उन्होंने कहा की किसानों को किसी तरह की आर्थिक परेशानी न हो इसके लिए सरकार ने कई तरह की योजनाओं को चालू कर इन्हें सुदृढ़ बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार किया है।

धान अधिप्राप्ति,सिचाई एवं बिजली की सुचारू व्यवस्था कर किसानों को लाभान्वित कराया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कार्यकर्ता चौपाल के माध्यम से एवं घर घर जाकर सरकार की योजनाओं के बारे में बताएं।


इस कार्यक्रम में बैठक प्रदेश उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह, बृजनंदन सैनी, विनोद कुशवाहा, पिंटू कुशवाहा, रामजी कुशवाहा, अनुपम सिंह कुशवाहा,मधेश्वर यादव, मुरारी यादव, मुकेश कुशवाहा, अरमान अहमद, धनंजय दास,संजय दाँगी, रमेश यादव, राजू प्रसाद, सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे।

NIT पटना ने साल 2022 में लगातार प्लेसमेंट के रिकॉर्ड ब्रेक किए हैं

पटना । फेसबुक, गूगल के बाद अब अमेजन, बर्लिन से सीएसई ब्रांच के छात्र अभिषेक कुमार(22) को 1.08 करोड़ का पैकेज मिला है। NIT पटना ने साल 2022 में लगातार प्लेसमेंट के रिकॉर्ड ब्रेक किए हैं।

अमेजन में इंटरनेशनल लेवल पर पहली बार किसी छात्र का प्लेसमेंट एनआईटी से हुआ है।

अभिषेक ने अमेजन के लिए 14 दिसंबर 2021 को कोडिंग टेस्ट दिया था। 13 अप्रैल को तीन राउंड में एक-एक घंटे के इंटरव्यू हुए। इसके बाद 21 अप्रैल को उन्हें अमेजन, जर्मनी से फाइनल सिलेक्शन का कनफर्मेशन आया।

जहानाबाद जिले के लिए रविवार का दिन रहा किसानों के लिए अशुभ

जहानाबाद । जिले में रविवार का आगो का प्रकोप किसानों के लगभग 200000 से अधिक रूपए के गेहूं के फसल को जलाकर कर दिया नष्ट।

कडौना गोपी मोकर दौलतपुर मैं लगभग 4 किसानों के गेहूं के फसल में लगी आग, इसकी सूचना ग्रामीणों द्वारा अग्निशामक विभाग को दिया गया। मौके पर अग्निशामक की वाहन पहुंच कर आग पर काबू पाया, किसानों का कहना है जिस तरह से अगलगी की घटना हुई है उसमें साल भर का उपजा हुआ सारा नवाज जलकर नष्ट हो गया।

वहीं दूसरी घटना घोसी थाना क्षेत्र के अरहीट गांव में पूर्व सांसद रामाश्रय प्रसाद सिंह के खेत में लगे गेहूं के फसल में लगी आग लगभग 2 खेत में लगी गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो गया । अग्निशामक की गाड़ी मौके पर पहुंचकर किसी तरह आग पर काबू पाया गया ।

वही आग की लपटें पूर्व सांसद रामाश्रय प्रसाद सिंह के खलिहान को भी अपने लपेटे में ले लिया और गेहूं के फसल जलकर नष्ट हो गया मौके पर अग्निशामक की गाड़ी पहुंच कर आग पर काबू पाया गया जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। वैसे वैसे जिला में आग लगी की घटना बढ़ती जा रही है ।

इस अगलगी की घटना में सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हो रहा है उपजा हुआ फसल जलकर नष्ट हो रहा है ।किसानों का कहना है कि जिस तरह से अगलगी की घटना हो रही है उससे किसानो अगर सरकार द्वारा मुआवजा उपलब्ध नहीं कराया गया तो किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे।

वीर कुंवर सिंह के किस रुप को याद किया है बीजेपी

बुद्धि बढ़ती है तो जात-धर्म सूझता है; आदमी रिवर्स गियर में है?
(संदर्भ : बाबू वीर कुंवर सिंह)

बाबू वीर कुंवर सिंह के बारे में सुनते-पढ़ते हुए, इन दोनों सवालों का जवाब ‘हां’ में मिलता है। पता चलता है कि वाकई आदमी क्या था और क्या हो गया; रिवर्स गियर में कहां से कहां पहुंच गया?

बेशक, कोई यूं ही महामानव/महानायक नहीं हो जाता। ऐसा बनना पड़ता है। खुद को बनाना पड़ता है।
और यह सिर्फ व्यक्तित्व के निर्माण की व्यक्तिगत बात भी नहीं है। इसमें पूरे समाज का, पूरे देश का योगदान होता है; सबकी सहमति होती है। हां, यह स्थिति भी निश्चित रूप से उसी विराट व्यक्तित्व के कार्यकलापों पर निर्भर करती है, जो अंततः महामानव कहलाता है।

बाबू वीर कुंवर सिंह के बारे में पढ़ रहा था। आप भी जानिए, सुनिए-“1857 की आजादी की पहली लड़ाई, हिन्दू-मुसलमानों ने एकसाथ मिलकर लड़ी। इसमें दलितों, पिछड़ों की भी खूब भागीदारी रही। दुसाध समाज के लोग बड़ी संख्या में बाबू वीर कुंवर सिंह की सेना में सिपाही थे। नाथू दुसाध, बाबू कुंवर सिंह के सिपहसालार थे। परछाई की तरह हमेशा उनके साथ रहते थे। बाबू कुंवर सिंह की अदालत में सवर्ण और अवर्णों के साथ सामान न्याय होता था। इसके कर्ताधर्ता द्वारिका माली थे। बगवां के 29 दुसाध, अंग्रेजों के साथ लड़ाई में शहीद हुए। दावां गांव के दरोगा नट, शिवपुर घाट पर, बाबू कुंवर सिंह को बचाने में मारे गए।
समाज के कमजोर वर्गों के प्रति बाबू कुंवर सिंह के लगाव का प्रतीक है देवचना गांव। यहां एक महिला को बहन मानकर उन्होंने उसे 251 बीघा जमीन खोंइचा में दिया। यह आज दुसाधी बघार कहलाता है। वे अपने सैनिकों की जान को अपने से ज्यादा कीमती मानते थे। अपने सभी सैनिकों को गंगा पार उतारने के बाद खुद अंतिम किश्ती पर सवार हुए। इसी कारण उन्हें अंग्रेजों की गोली का शिकार होना पड़ा।

बाबू कुंवर सिंह हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने शिवाला बनवाया, तो आरा, जगदीशपुर में मस्जिदें भी बनवाई। पीरो के नूर शाह फकीर को 5 बीघा, तो नोनउर के बकर शाह फकीर को 10 बीघा लगान मुक्त जमीन दी। धरमन बीबी की बहन करमन के नाम पर आरा में करमन टोला बसाया।”

वास्तव में, बाबू वीर कुंवर सिंह ने समाज के हर तबके को साथ लेकर ही विजय हासिल की थी। 80 वर्ष की उम्र में उनका जोश, उनकी हिम्मत, वस्तुतः समूह की ताकत थी। बड़ी जीत में सबका साथ होता है, सबकी सर्वानुमति होती है।

यह सब राजतंत्र/जमींदारी तंत्र के दौर की बात है। 160-70 साल पहले की बात।
तब, सीन-सिचुएशन “जस राजा, तस प्रजा” वाले भाव से तय होता था।
अभी हम दुनिया की सर्वोत्तम शासन व्यवस्था (संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली) को जी रहे हैं। इसके भागीदार/किरदार हैं। फिर भी इतनी विसंगतियां, संकट, समस्याएं?

तो क्या आधुनिकता ने, विकास ने, खासकर आदमी, उसकी आदमीयत को रिवर्स गियर में डाल दिया है?

बिहार का जहानाबाद जिला देश का पहला जिला बन गया जिसे पंचायती राज में बेहतर काम करने के लिए दो-दो पुरस्कार से नवाजा गया

जहानाबाद जिले के विकास को लेकर रविवार बड़ा दिन रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिहार के जहानाबाद सदर प्रखंड के मांदिल पंचायत के मुखिया श्री बबलू कुमार को दो दो पुरस्कार से सम्मानित किया।

पुरस्कार और सम्मान पत्र डीएम हिमांशु कुमार राय ने सौपी जबकि जिला प्रशासन और मुखिया वीडियों कॉन्फ्रेंस के जरिये जुड़े थे। दरअसल उन्हें दीनदयाल उपाध्याय सशक्तिकरण पुरस्कार कार्यक्रम जम्मू कश्मीर में आयोजित होना था लेकिन इधर कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए पूरा आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया।

इस बड़ी उपलब्धि से जिलेवासियों को गौरवान्वित करने वाला है। हालांकि विकास के रास्ते पर अग्रसर इस पंचायत को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार भी दिया गया। विकास के रफ्तार को आगे बढ़ाते हुए मुखिया द्वारा किए गए कार्यों का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान से गदगद है। सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं को जहां जमीन पर बेहतरीन तरीके से उतारने वायदा कर रहे है । मुखिया की पहल पर अब यहां पशु अस्पताल के निर्माण का कार्य भी प्रारंभ होने की कतार में है।

मांदिल पंचायत में 1100 वृद्ध जनों को पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है, वही 1500 लोग हाल के दिनों में राशन कार्ड योजना से लाभान्वित किए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना से भी लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है।

सरकार की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं से पंचायत की सूरत पूरी तरह बदल गई है। जिसके कारण पहले भी इस पंचायत को कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।जिले के डीएम ने भी सरकार की योजनाओं को सरजमीं पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।

नॉर्थ ईस्ट का होना पाप है क्या? नॉर्थ ईस्ट की हूं कालगर्ल,चाइनीज,प्रॉस्टिट्यूट नहीं

मेरा नाम शैरॉन लामारी है। नॉर्थ ईस्ट के खूबसूरत राज्य मेघालय के शिलॉन्ग में मेरा घर है। मैं हमेशा से आसमान में उड़ना चाहती थी। मेहनत से एयरहोस्टेज बन गई, लेकिन किस्मत को यह मंजूर नहीं था। मैं एयरलाइंस इंडस्ट्री से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आ गई। जहां भी काम करने के लिए गई, वहां मेरे लिए नॉर्थ ईस्ट का होना एक तरह से पाप हो गया।

लुक्स यानी मेरे नयन-नक्श आज तक मेरे हर काम में आड़े आते हैं। मुझे इस देश का नागरिक ही नहीं माना जाता है। मेरे पास अपने लुक्स को लेकर इतनी कहानियां हैं कि लिखने के लिए दीवारें कम पड़ जाएं। आप आम लोगों को छोड़ दीजिए। इस देश के पढ़े-लिखे जिम्मेदार लोग ही हमें इस देश का नहीं समझते। हमें कुछ भी बोल देते हैं।

2006 की बात है। मैं सहारा एयरलाइंस में एयरहोस्टेज थी। आज के सांसद रवि किशन तब सिर्फ भोजपुरी फिल्मों के एक्टर थे। दिल्ली से मुंबई जा रही हमारी फ्लाइट में वो भी सफर कर रहे थे। उन्होंने फ्लाइट के दौरान पूरे क्रू के सामने पूछा- तुम चाइनीज हो? मुझे बुरा तो बहुत लगा। उस वक्त तो मैंने उन्हें कुछ नहीं कहा, लेकिन पांच मिनट के बाद मैं उनके पास गई और कहा, सर मैंने साड़ी पहनी है, मैं अच्छी हिंदी बोल रही हूं तो आपको मैं कहां से चाइना की लग रही हूं?

मैंने उनसे पूछा कि क्या आपके चाइना में दोस्त हैं, क्या आपने कभी चाइनीज देखें हैं? रवि किशन के पास मेरे सवालों का कोई जवाब नहीं था। जब रवि किशन जैसे लोग ही ऐसी बात करेंगे, हमें चाइनीज समझेंगे तो बाकी लोगों से क्या उम्मीद करें।

कोविड की दोनों लहरों में मैं मुंबई में जहां से भी गुजरती लोग मेरे पास से भाग जाते थे। कई लोग बोलते थे- चाइना..चाइना…चाइना।। ऐसे ही कोई हमें मोमोज बोलता है तो कोई कुछ और, लेकिन हमें कोई इस देश का हिस्सा नहीं मानता है।

मेरे नॉर्थ ईस्ट लुक्स के नुकसान की अति यह थी कि मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे पागलखाने में भर्ती करवा दिया था। मैं 21 दिन पागलखाने में भर्ती रही।

दरअसल, गुवाहाटी में रहने वाले एक पंजाबी लड़के के साथ मैं रिलेशन में थी। मैं उस वक्त सहारा एयरलाइंस में एयर हॉस्टेस थी।
जब कभी मुझे छुट्टी मिलती तो मैं उसके पास गुवाहाटी आ जाती। मेरा अपना भी एक घर गुवाहाटी में था। मेरे पेरेंट्स और भाई-बहन भी वहीं मेरे पास जा जाते थे। वो लड़का मेरे भाई का भी अच्छा दोस्त बन गया था।

उसका वहां एक रेस्त्रां था, मैं जब भी छुट्टी पर जाती थी तो मैं ही वहां बैठती थी। मैं वहां इतना मन लगाकर काम किया करती थी कि घाटे में चल रहा उसका रेस्त्रां प्रॉफिट में आ गया।

लेकिन फिर वही हुआ। वह धीरे- धीरे मुझसे किनारा करना चाहता था। मेरे लुक्स की वजह से वह मुझसे शादी नहीं करना चाहता था। उसका कहना था कि उसका परिवार इस शादी के लिए राजी नहीं है। उसकी इस बात पर मेरा मन था कि मान ही नहीं रहा था।

एक दिन हम दोनों कहीं जा रहे थे, उसने शराब पीकर तेज रफ्तार से गाड़ी चलाई और जानबूझकर ऐसे गाड़ी भिड़ा दी जिसमें मुझे ही चोट आई, उसे कोई चोट नहीं आई। मेरा सिर फट गया। शरीर के दूसरे हिस्सों में भी गहरी चोटें आईं।

मुझे गुवाहाटी के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया। मैं कुछ दिन आईसीयू में रही। आईसीयू से बाहर आने के बाद मैं तरह-तरह की दवाएं खा रही थी। भूख लगने की दवा, नींद आने की दवा यानी हर चीज की दवा। मैं बहुत हाइपर रहने लगी, डॉक्टर मुझसे परेशान हो गए।

नॉर्थ ईस्ट के पहाड़ों में रहने वाला मेरा सीधा-साधा सा परिवार है। बॉयफ्रेंड ने मेरे भाई से कहा कि मुझे पागलखाने में भर्ती करवा दिया जाना चाहिए। मेरी भलाई समझकर भाई मान गया। मेरे परिवार ने मुझे पागलखाने में भर्ती करवा दिया।

जब मुझे वहां ले जाया गया तो मैं नहीं जानती थी कि वह पागलखाना है। मुझे लगा कि मुझे चेकअप के लिए ले जाया जा रहा है। जब एक हॉल कमरे में मुझे धकेला गया। मोबाइल छीन लिया गया।

मैंने वहां से भागने की कोशिश की। भागकर उस हॉल के सामने वाली एक दीवार पर चढ़ गई। मैंने देखा कि दीवार के उस पार भी वैसे ही लोग थे। एक घंटे के बाद मुझे उस दीवार से नीचे उतारा गया और रस्सी से एक बेड के साथ बांध दिया गया।

मैं न चीखी और न चिल्लाई। मैं जानती थी कि मैं पागल नहीं हूं। अगर मैं चीखें मारूंगी तो यह लोग मेरी उल्टी-सीधी दवाएं शुरू कर देंगे। मैं किसी भी तरह से उस पागलखाने से भागना चाहती थी।

मैंने बहुत सूझ से काम लिया। कभी रोई या चीखी चिल्लाई नहीं। नॉर्मल बीहेव किया। ऐसे में तीन-चार घंटों के बाद मेरे हाथ-पांव खोल दिए गए। मैं नॉर्मल रहने लगी।

वहां अजीबोगरीब लोगों के साथ मुझे बहुत खराब लगता था। उनमें एक मैं ही नॉर्मल थी। आप खुद सोचिए कि एक ठीक-ठाक इंसान को पागलखाने में डाल दिया जाए तो उसकी क्या हालत होती होगी।

किसी तरह दिन बीतते रहे। पागलखाने में मौजूद मरीजों को सुबह-शाम आधे-आधे घंटे के लिए खाना खाने के लिए खोला जाता था। बाकी समय बंद रखा जाता था। लोग बिखरे बालों और गंदे कपड़ों में यहां-वहां घूमते रहते थे। लगभग 21 दिन बाद मैं उस पागलखाने से बाहर निकल सकी।

बाहर आकर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। दरअसल बारहवीं के बाद मैंने गुवाहाटी के एक टॉप इंस्टीट्यूट से एयर हॉस्टेस का कोर्स किया था। मैं पहले सहारा एयरलाइंस रही और बाद में कतर एयरलाइंस में।

मैंने पांच साल एयरलाइंस सेक्टर में जॉब किया, लेकिन इस एक्सीडेंट के बाद मेरी एक टांग में रॉड डाली गई, जिसके बाद मैं एयरलाइंस में नौकरी करने के लायक नहीं रही।

मुझे इंसोमेनिया की शिकायत हो चुकी थी। नींद नहीं आती थी। लेकिन मैंने अस्पताल की दवाएं और नींद न आने की दवाएं छोड़ने का फैसला किया। योग और साधना शुरू की। आखिरकार मैं उस मनोस्थिति से निकल ही आई।

अब मैं गुवाहाटी के एयरहोस्टेस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स में ट्रेनिंग देने लगी, लेकिन मुझे रात में मुंबई आने के सपने आते थे। इतने सपने आते थे कि मुझे लगा कि मुझे मुंबई चले जाना चाहिए।

एयरलाइंस सेक्टर की वजह से पहले से मेरे दोस्त मुंबई में रहते थे। मैं यहां चली आई। एक कास्टिंग डायरेक्टर ने मुझसे नाप-तोल में विज्ञापन का काम देने का कहा। एक विज्ञापन के 15 हजार रुपए मिलने थे। महीने में कुल तीन विज्ञापन शूट होने थे।

मुझे लगा कि मुंबई में मेरा गुजारा हो जाएगा। जब मुंबई आई तो महीने में सिर्फ एक ही विज्ञापन शूट करने के लिए मिला। कास्टिंग डायरेक्टर का कहना था कि मेरे लुक्स ऐसे हैं कि सभी राज्यों और इलाके के लोगों को ठीक नहीं लगेगा।

मैं काफी मायूस हुई, लेकिन मेरे अंदर बहुत हिम्मत थी। मैंने तय किया कि मैं मुंबई से जाउंगी तो नहीं। इंटनटेनमेंट इंडस्ट्री में लड़की होने की अपनी चुनौतियां हैं और नॉर्थ ईस्ट की लड़की होने की चुनौतियां तो खत्म ही नहीं होती हैं। मेरे लुक्स हर जगह आड़े आते हैं। मेरा काम मुश्किल कर देते हैं।

मैं सच बताऊं तो नॉर्थ ईस्ट का समाज महिला प्रधान है, बच्चे मां का सरनेम लगाते हैं। प्रॉप्रर्टी में लड़कियों को हिस्सा पहले दिया जाता है। मणिपुर और मेघालय जैसे राज्यों में घर औरतें ही चला रही हैं।

हमारा समाज प्रोग्रेसिव, पढ़ा-लिखा और बराबरी का समाज है। जैसे हमारे यहां बस में अगर मर्द बैठा है तो महिलाएं सीट नहीं मांगती हैं। औरतें वो सारे काम करती हैं, जो मर्द करते हैं। इसलिए वाइन पीना, पार्टी में नाचना या देर रात घर आना, मेकअप करना, फैशनेबल कपड़े पहनना हमारे समाज का हिस्सा हैं।

हम नॉर्थ ईस्ट की हैं इसलिए यहां किसी से अच्छे से बात कर लो तो उसे लगता है कि यह मेरे साथ सोएगी ही, किसी के साथ पार्टी में डांस कर लो तो उसे लगता है कि हम प्रॉस्टिट्यूट हैं, वाइन पी लो तो उसे लगता है कि हम आसानी से उनके लिए अवेलेबल हैं।

एक बार मेरी मुंबई के एक नामी वकील मुलाकात हुई। वह मुझसे कहने लगा कि मैंने नॉर्थ ईस्ट की लड़कियों की जिंदगी बना दी है, तुम्हारी भी बना दूंगा। तुम्हें चाहिए ही क्या अच्छा पैसा और अच्छा सेक्स ? यानी हम नॉर्थ ईस्ट की हैं तो हम सिर्फ सेक्स करने के लिए ही पैदा हुई हैं।

एक बार मुझे मेरा पासपोर्ट रिन्यू करवाना था तो पुलिस वाला मुझसे कालगर्ल की तरह बात करने लगा। अरे भाई मैं पढ़ी लिखी और आत्मनिर्भर हूं। एयरहोस्टेस रही हूं। कोई तवायफ नहीं।

यह तो कुछ भी नहीं। गुवाहटी के जिस इंस्टीट्यूट से मैंने एयरहोस्टेस का कोर्स किया था वह हमें एक एयरलाइंस में नौकरी के इंटरव्यू के लिए मुंबई लेकर आए। रात में इंस्टीट्यूट के एमडी ने मुझे जुहू अपने होटल के कमरे में बुलाया, मैं नहीं गई।

गुवाहाटी जाने के बाद वहां एमडी के साथ काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने मुझे बहुत लताड़ा। कहने लगी कि मैं एमडी के कमरे में क्यों नहीं गई। मैंने उनसे कहा कि मुझे कमरों में जाकर नौकरियां नहीं चाहिए, मैं खुद कर लूंगी।

मैं कहीं भी चली जांऊ, अलग दिखाई देती हूं। टीवी-फिल्म में मुझे काम इसलिए नहीं मिल रहा है कि मेरी शक्ल की किसी की बेटी नहीं हो सकती है। बहू नहीं हो सकती है यानी इंडस्ट्री में हमारे लिए कोई काम नहीं है।

मुझे यहां सब चाइनीज बोलते हैं। मेरे हाथों से बहुत से विज्ञापन निकल गए। ऑडिशन कॉल होते हैं, सिलेक्शन भी होता है। लेकिन बाद में कहा जाता है कि सेमीन्यूड कर लोगे। यानी हम नॉर्थ ईस्ट के हैं तो हम यही सब करेंगे। कई जगह तो मैंने मुंह पर बोल दिया कि नॉर्थ ईस्ट की हूं तो क्या नंगी हो जाऊं? मेरे लुक्स ने प्यार से लेकर करिअर तक में मुझे आगे नहीं बढ़ने दिया।

घरेलू समारोह में हर्ष फायरिंग, पति पत्नी को लगी गोली, मचा अफरातफरी

बक्सर । घरेलू समारोह में हर्ष फायरिंग , पति पत्नी को लगी गोली , घरेलू समारोह में मचा अफरातफरी , कृष्णा ब्रह्म थाना इलाके के दिया ढकाइच गाँव की घटना , मौके पर पहुँची पुलिस , सभी घायल बक्सर के निजी अस्पताल में इलाजरत।

बताया जा रहा है कि घर के बगल में कोई समारोह चल रहा था, जिसे ये लोग भी देख रहे थे कि अचानक गोली चली। जो पति और पत्नी को लग गई है। दोनों को इलाज के लिए बक्सर के एक निजी अस्पताल में लाया गया है।

इस मामले में पुलिस जांच करने की बात कह रही है। घटना बक्सर जिला के कृष्णाब्रह्मम थाना क्षेत्र के छोटका दिया गांव की है बताई जा रही है। पूरा मामला क्या है ये पुलिस जांच के बाद ही पता चल पाएगा।

दिल्ली दंगा मामले में दिल्ली पुलिस की टीम बिहार के जहानाबाद पहुंची

दिल्ली में पिछले दिनों दो गुटों के बीच हुयी मारपीट और दंगा मामले को लेकर दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड में दिख रही है। इसे लेकर शनिवार की रात दिल्ली पुलिस की टीम बिहार के जहानाबाद पहुंची।

जहां दंगा मामले में फरार चल रहे अभियुक्त के घर पर इश्तेहार चिपकाया। इश्तेहार चिपकाने के बाद फरार अभियुक्तों में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जाता है कि दिल्ली में हुए दंगा मामले में जहानाबाद का रजा अंसारी अभियुक्त है जो फरार चल रहा है।

फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली पुलिस आज जहानाबाद पहुंची और नगर थाना क्षेत्र के फिदा हुसैन रोड स्थित रजा अंसारी के घर इस्तेहार चिपकाया है। इस दौरान ऑफ कैमरा दिल्ली पुलिस ने बताया कि दिल्ली में हुए दंगा मामले में वह फरार चल रहा है। जिसकी गिरफ्तारी को लेकर यह कार्रवाई की जा रही है। इसके बाबजूद भी अभियुक्त सरेंडर नही करता तो घर की कुर्की जब्ती की कार्रवाई की जायेगी।

बताया जा रहा है कि जहानाबाद शहर के फिदा हुसैन रोड निवासी हासिम अंसारी का पुत्र रजा अंसारी पिछले कई वर्षों से दिल्ली में रह रहा है और वह दिल्ली में हुए दंगा का अभियुक्त है जिसे लेकर दिल्ली पुलिस जहानाबाद पहुंची और उसके घर पर इस्तेहार चिपकाया है। हालांकि इस मामले पर पुलिस प्रतिक्रिया देने से बचती नजर आई।

जहानाबाद में युवक को अपराधियों ने मारी गोली

जहानाबाद। बड़ी खबर जहानाबाद से हैं, जहां कोहरा गांव के पास मनोज कुमार यादव नामक युवक को अपराधियों ने गोली मार दी।

पीड़ित मनोज यादव मिश्र बिगहा गांव का का रहने वाला है जोकि परसबीघा थाना के अंतर्गत पड़ता है। जबकि गोली मारी गई वह जगह टेहटा ओपी क्षेत्र में है।

गोली लगने के बाद परिजनों ने आनन-फानन में युवक को सदर अस्पताल जहानाबाद पहुंचाया। डॉक्टर की माने तो गोली छाती में लगी है और वहीं पर फंसी हुई है।

प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत युवक को पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया गया है।

पटेल की तरह वीर कुंवर सिंह के सहारे राजपूत नेताओं को साधने की तैयारी में तो नहीं जुटा है बीजेपी

आरा में वीर कुंवर सिंह की जयंती के मौके पर 78 हजार 25 लोगों ने तिरंगा फहराकर पाकिस्तान के एक साथ 75 हजार लोगों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया है और अब जल्द ही यह रिकॉर्ड ग्रीनिज बुक में भारत के नाम दर्ज होगा ।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस आयोजन के सहारे बीजेपी राजनीति के किस नैरेटिव का साधना चाह रही है। हालांकि जो नैरेटिव दिख रहा है वो यह था कि वीर कुंवर सिंह को जाति से बाहर निकाला जाये और उन्हें राष्ट्रवाद के नैरेटिव में फिट किया जाये।

इसके पीछे मोदी और शाह की यह सोच है कि पटेल की तरह ही वीर कुंवर सिंह ऐसे स्वतंत्रता सेनानी है जिनका जातीय आधार राष्ट्रीय फलक पर काफी मजबूत है लेकिन इनके जाति के कई ऐसे नेता है जो उन्हें आने वाले समय में चुनौती दे सकते हैं ऐसे में वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व को राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह से स्थापित किया जाये जिससे उनके विरादरी के नेता का प्रभाव कम हो ।

इसके लिए आने वाले समय बाबू साहब अंग्रेज के साथ लड़ाई के दौरान 22 अप्रैल 1858 को जब बलिया के शिवपुर घाट पर गंगा पार कर रहे थे तब उनकी भुजा में गोली लगी जिसे काटकर गंगा में फेंक दिया था उस स्थान पर पटेल से भी बड़ी मूर्ति और शौर्य पार्क बनाने की योजना है जिसकी चर्चा आज अमित शाह अपने भाषण के दौरान किये हैं ।

साथ ही वीर कुंवर सिंह के 80 वर्ष मे हथियार उठाने और अंग्रेज का हराने का जो शौर्यगाथा रहा है उसका इस्तमाल मोदी के लिए आने वाले समय में किया जा सका ये भी रणनीति का हिस्सा है ताकी मोदी ने मार्गदर्शक मंडल के सहारे जिस तरीके आडवाणी सहित बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं को एक साथ साध दिये थे वैसे कोई मोदी को ना साधे।

क्यों कि वीर कुंवर सिंह की जो छवि रही है वो कही से भी बीजेपी के नैरेटिव में फिट नहीं बैठता है ये अलग बात है कि आजादी के आन्दोलन के दौरान सावरकर कई बार वीर कुंवर सिंह को अंग्रेजों के खिलाफ हिन्दू चेहरा के रूप में स्थापित कोशिश की जरूर किया था लेकिन उस तरीके से आगे नहीं बढ़ पाया था वैसे आज शाह कह गये हैं कि वीर कुंवर सिंह के बारे में सही इतिहास नहीं लिखा गया है ऐसे में आने वाले समय में वीर कुंवर सिंह की अलग छवि देखने को मिले तो कोई बड़ी बात नहीं होगी देखिए आगे आगे होता है क्यों कि जाति इस देश का यथार्थ है और पटेल की तरह राजपूतों का शहरीकरण नहीं हो पाया है अभी भी बड़ी आबादी गांव में रहता है कृषि उसका मुख्य पेशा है ।

ऐसे में मोदी और शाह इस खेल में कहां तक कामयाब होते हैं कहना मुश्किल है लेकिन देश की राजनीति को बदलने की एक बड़ी कोशिश जरुर है।

बिहार व्यवहार न्यायालय अधिकारी व कर्मचारी नियमावली, 2022 की मंजूरी को अधिसूचित कर दिया गया है

काफी समय से इंतजार किये जा रहे बिहार व्यवहार न्यायालय अधिकारी व कर्मचारी (नियुक्ति, प्रोन्नति, तबादला व अन्य सेवा शर्तें) नियमावली, 2022 को मंजूरी देते हुए बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 19 अप्रेल, 2022 को अधिसूचित कर दिया गया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद – 309 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ये नियमावली बनाई और अधिसूचित की गई है।

नए नियम से कर्मियों की नियुक्ति, प्रोनत्ति, वित्तीय प्रगति, तबादला, अनुकंपा आधारित नियुक्ति व कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही की प्रक्रिया में तेजी आएगी। नए नियम के तहत अब जिला जज को नियुक्ति के साथ ही साथ अनुशासनात्मक अधिकारी बनाया गया है।

इस प्रकार के सभी मामले अब जिला जज के स्तर पर ही निपटाए जाएंगे। इसके पहले पटना हाई कोर्ट के महानिबंधक नियुक्ति औऱ अनुशासनात्मक अधिकारी थे ।

इस तरह के मामले पटना हाई कोर्ट के महानिबंधक द्वारा निपटाए जाते थे। ये नियमावली पटना हाई कोर्ट के अधीनस्थ बिहार राज्य के सभी व्यवहार न्यायालय में लागू होगी और बिहार सरकार के राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होगी।

नियमावली के तहत अपीलीय प्राधिकार से मतलब है हाई कोर्ट की स्थाई समिति। नियमावली के अध्याय – II में अन्य बातों के अलावा यह भी कहा गया है कि राज्य सिविल कोर्ट और अनुमंडलीय सिविल कोर्ट के प्रशासन हेतु इस नियमावली की आरंभ की तारीख से एक बिहार राज्य सिविल कोर्ट स्थापना सेवा प्रवृत्त होगी।

आरक्षण को लेकर राज्य सरकार (सामान्य प्रशासन विभाग) द्वारा लागू आरक्षण संबंधी नियम (समयानुसार संशोधित) ही न्यायालय कर्मियों की नियुक्ति / प्रोनत्ति में लागू होंगे। वही, नियमावली के तहत प्रशिक्षण को लेकर सीधी नियुक्ति अथवा समूह – ग पद की परीक्षा से नियुक्त कर्मचारी, जिसकी उम्र 55 वर्ष से कम होगी, उन्हें उच्च न्यायालय द्वारा विहित उस विनिर्दिष्ट पद के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।

कोई कर्मचारी अपने ऊपर अनुशासनात्मक प्राधिकार द्वारा अधिरोपित लघु या वृहत सजा के विरुद्ध, उक्त सजा की प्रति की प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में अपील कर सकता है।

गया के विष्णुपद मंदिर में की विशेष पूजा अर्चना केंद्रीय गृहमंत्री अमितशाह ने

मोक्ष की भूमि गया में देश के गृहमंत्री अमित शाह विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरण दर्शन करने के लिये पहुंचे , वंही अमित शाह के सुरक्षा को लेकर मंदिर और आस पास के क्षेत्रो में बड़ी शंख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ।

ज्ञात हो कि आज आरा के जगदीशपुर में वीर कुंवर सिंह जयंती में शामिल होने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आये हुए थे और उसी क्रम में आज अंतः सलिला फल्गु नदी तट पर स्थित विश्व प्रशिद्ध विष्णुपद मंदिर में विशेष पूजा अर्चना किये।

वंही विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में गृहमंत्री अमित शाह ने विशेष पूजा अर्चना किये वंही विष्णुपद मंदिर के अध्यक्ष शम्भू लाल विठल के द्वारा मंदिर के गर्भगृह में विशेष पूजा अर्चना कराया गया है।

खगड़िया में अपराधी और पुलिस के बीच हुए मुठभेड़ में 2 घायल समेत कुल 6 बदमाशो को गिरफ्तार किया

खगड़िया के मुफ्फसिल थाना इलाके के भदास गांव में अपराधी और पुलिस के बीच हुए मुठभेड़ में दो बदमाश घायल हुआ है।दोनो घायल पुलिस अभिरक्षा में सदर अस्प्ताल में ईलजरत है।पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान दो घायल समेत कुल 6 बदमाशो को हथियार और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है

।गिरफ्तार बदमाशो में से अजय महंत पुलिस टीम पर हमला करने के मामले वर्ष 2017 से फरार चल रहा था।पुलिस गिरफ्तार बदमाशो के पास से दो देशी कट्टा, 1 कारतूस, दो खोखा, 2.3 kg गांजा ,2 टांगी और चार सेट मोबाइल जप्त किया है।

एसपी अमितेश कुमार ने आज प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि गिरफ्तार बदमाश किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए जुटा था।लेकिन पुलिस समय पर पहुंचकर अपराधियों के मंसूबे पर पानी फेर दिया।बदमाशो ने पुलिस को देखकर फायरिंग किया।लिहाजा पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग किया।

मृतक सीआईएसएफ के परिजनों से मिले सांसद

अर्नाकुलम में ट्रेनिंग कर रहे जहानाबाद के किनारी निवासी सीआईएसएफ जवान जयप्रकाश उर्फ राजा बाबू की मौत की खबर से पूरा जिला आहत है। सीआईएसएफ का शव जब गांव पहुंचा उस दिन भी हजारों की संख्या में लोग उन्हें नमन करने पहुंचे थे।

आज जहानाबाद सांसद चंदेश्वर चंद्रवंशी ने भी शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की। सांसद ने घटना को लेकर संवेदना जताई साथ ही यह भरोसा जताया की मौत कैसे हुई इसका पता भी जल्द ही चल जाएगा।

बता दे कि 17 अप्रैल को राजा बाबू का शरीर उनके बैरक में मृत अवस्था में पड़ा मिला था। 6 महीने पहले ही उन्होंने सीआईएसएफ की नौकरी के लिए क्वालीफाई किया था। और 2 हफ्ते की ट्रेनिंग पूरी हुई थी। मुलाकत के दौरान जेडीयू नेता जेपी चंद्रवंशी और मनोज कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे।

क्यों याद किये जाते हैं वीर कुँवर सिंह को

बाबू कुँवर सिंह का विजयोत्सव — 23 अप्रैल

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में भाग लेकर बिहार सहित पूरे भारत के नाम को रौशन करने वाले जगदीशपुर के 80 वर्षीय राजा बाबू कुँवर सिंह थे। एक तरफ दिल्ली में अंतिम मुगल सम्राट 80 वर्षीय बहादुरशाह जफर अपने काँपते हुए हाथों से पत्र लिखकर समस्त भारत के देशी नरेशों को संग्राम में भाग लेने के लिए आह्वान कर रहे थे तो दूसरी तरफ करीब उसी उम्र के वीर बांकुरा बाबू कुँवर सिंह तलवार हाथ में लेकर राजपूती शान का प्रदर्शन करते हुए अपने जनपद सहित सभी देशवासियों को कुर्बानियों के लिए तैयार कर रहे थे।

मेरठ, दिल्ली एवं देश के अन्य भागों की क्रांति दानापुर छावनी में भी सुनाई पड़ रही थी। कमिश्नर टेलर दानापुर के सैनिकों को शस्त्र-विहीन करना चाहता था जिससे हिंदू-मुस्लिम सैनिक उत्तेजित हो उठे और 24 जुलाई 1857 को बगावत करते हुए अपनी वर्दी उतार कर आरा के लिए चल पड़े । दानापुर छावनी की तीन पालटनों (7, 8 एवं 40) का विद्रोह ब्रिटिश सत्ता के लिए खुली चुनौती थी । दानापुर के क्रांतिकारी सेना के जगदीशपुर पहुंचते ही बूढ़ कुँवर सिंह की रगों में जवानी का नशा चढ़ गया । अपने महल से निकलकर उन्होंने क्रांतिकारी सेना का नेतृत्व उसी तरह ग्रहण किया जैसे 11 मई 1857 को मेरठ से आए दो हजार घुड़सवार सैनिकों का नेतृत्व 80 वर्षीय मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर ने किया था । दानापुर छावनी के विद्रोही सेना के साथ कुँवर सिंह आरा पहुंचे और जेलखाने के कैदियों को रिहा कर अंग्रेजी दफ्तरों को ध्वस्त कर दिया ।

महाराजा कॉलेज परिसर में अवस्थित छोटे से किले- ‘आरा हाउस’ को घेरकर उसमें छिपे अंग्रेजों और सिक्ख सेनाओं को हथियार डालने के लिए उन्होंने बाध्य किया । तीन दिनों तक आरा हाउस का युद्ध चलते रहा । जब किले में पानी की कमी हुई तब सिक्ख सैनिकों ने 24 घंटे के अंदर एक नया कुंआ खोदकर तैयार कर लिया । उस समय आरा हाउस (ब्वायर कोठी) के अंदर आधुनिक हथियारों से सुसज्जित 50 सिक्ख एवं 16 अंग्रेज सैनिक थे जो इसमें शरण लिए अंग्रेजों एवं उनके परिवारों की रक्षा के लिए तैनात थे । आरा हाउस (ब्वायल कोठी) की लड़ाई ही बाबू साहेब की अंग्रेजी सल्तनत के साथ आरा की लड़ाई थी और यह लड़ाई करीब एक सप्ताह चली ।

वीर कुँवर सिंह
वीर कुँवर सिंह

अब पूरे आरा पर बाबू कुँवर सिंह का शासन हो गया और वे राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के 5000 क्रांतिकारी सिपाहियों के सर्वमान्य नेता तथा समस्त भोजपुरी भाषी जनता के कंठहार बन गए । जनता ने ‘तेगवा बहादुर’ की पदवी से उनका यशोगान किया । बसंतकाल में आज भी भोजपुरी भाषी अपने झोपड़ों-चौपालों और गांव के खेत-खलिहानों में गा उठते हैं–

“बाबू कुंवर सिंह ‘तेगवा बहादुर’
बंगला में उड़ेला अबीर”।

कुँवर सिंह के नेतृत्व में ब्रिटिश सल्तनत के विरूद्ध में आरा का यह विद्रोह अब पूरे शाहाबाद क्षेत्र में राष्ट्रीय क्रांति का रूप ले चुका था । अंग्रेजों के लिए आरा नगर सैनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थल था । वे हर हालत में आरा को बचाना चाहते थे । परिणामस्वरुप, आरा हाउस में घिरे अंग्रेजों की प्राण रक्षा के लिए 500 यूरोपियन गोरे सैनिकों एवं सिक्खों की एक टुकड़ी के साथ कैप्टन डनवर 29 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी से आरा के लिए रवाना हुआ । आरा पहुंचने से पूर्व ही रात में बाबू कुँवर सिंह के सैनिकों से डनवर की फौज का मुकाबला हुआ जिसमें 500 सैनिकों में से सिर्फ 50 घायल होकर और केवल तीन जीवित अधिकारी दानापुर पहुंचे। कैप्टन डनवर सहित अन्य सभी सैनिक मारे गए ।

कैप्टन डनवर की पराजय के बाद आरा पर पूर्ण रूप से बाबू कुँवर सिंह का अधिकार हो गया और पूरा शाहाबाद स्वतंत्र हो गया । अब बाबू कुँवर सिंह ने आरा में पूर्वी पश्चिमी थाना स्थापित कर गुलाम महिया को दोनों थाने का मजिस्ट्रेट नियुक्त किया । मिल्की मुहल्ले के शेख मुहम्मद अजीमुद्दीन पूर्वी थाने के जमादार नियुक्त किए गए। दीवान शेख अफजल के दोनों पुत्र तुराव अली एवं खादिम अली इन थानों के कोतवाल बनाए गए ।

बीबीगंज की लड़ाई– कैप्टन डनवर के मारे जाने के समाचार से मेजर विंसेंट आयर 2 अगस्त 1857 को आरा की ओर कूच कर ही रहा था कि बाबू कुँवर सिंह के सैनिकों के साथ बीबीगंज में उसका भीषण संग्राम हुआ। अंततः मेजर आयर 3 अगस्त 1857 को आरा पहुंचकर कुँवर सिंह के कब्जे से आरा को मुक्त कराया ।

उसके बाद मेजर आयर की विशाल सेना का मुकाबला दुलौर में बाबू कुँवर सिंह के सैनिकों के साथ हुआ । 12 अगस्त को मेजर आयर की सेना जगदीशपुर पहुंची जहाँ कुँवर सिंह के साथ कई दिनों तक संग्राम होता रहा। अंततः मेजर आयर ने 14 अगस्त को जगदीशपुर गढ़ में आग लगा दी, सामान्य लोगों के मकान ध्वस्त कर बड़े पैमाने पर जगदीशपुर के आम लोगों की हत्या कर दी । शिवमंदिर का भी विनाश करते हुए उसने गर्व से कहा, “मैंने नए हिंदू मंदिर को नष्ट इसलिए किया, क्योंकि ब्राह्मणों ने भी कुँवर सिंह को युद्ध के लिए प्रोत्साहित किया था” (जी. डब्ल्यू फॉरेस्ट, ए हिस्ट्री ऑफ इंडियन म्यूटिनी, भाग-3, पृष्ठ 455)। उल्लेखनीय है कि दुलौर से जगदीशपुर जाने के क्रम में मेजर आयर ने रास्ते में आतंक मचाते हुए मीलों तक घायल लोगों को सड़क के किनारे पेड़ों पर टांग-टांग कर फांसी देकर लटका दिया । जो भी विप्लवी दिखाई पड़ा, उसे मार डाला गया । कड़ी शराब पीकर अंग्रेजों ने एसे राक्षसी कार्य किया (मार्टिन, इंडियन एम्पायर, भाग-2, पृ 406)। इसके बाद कैप्टन लाॅ इस्ट्राजे ने बाबू कुँवर सिंह का जितौरा गढ़ नष्ट कर दिया । लेफ्टिनेंट सैक्सन ने कुँवर सिंह के दलीपपुर एवं मीठहां के मकानों को भी नष्ट कर दिया । दानापुर छावनी के 40 नंबर पल्टन के बचे 100 सैनिकों को संगीनों और गोलियों से उड़ा दिया गया। गुलाम महिया, अब्बास अली और वन्दे अली को क्रांति के असफल होने पर गोपाली चौक पर फांसी दी गई । भेखू जोलहा, चकवरी कहार भी कुँवर सिंह के समर्थक होने के चलते मारे गए ।

बाबू कुँवर सिंह का जगदीशपुर महल सहित पूरा जगदीशपुर पूर्ण रूप से नष्ट हो गया । अंग्रेजों द्वारा जगदीशपुर गढ़ पर कब्जा के बाद बाबू कुँवर सिंह ने महल की स्त्रियों और 12 सौ सैनिकों के साथ जगदीशपुर से निकलकर अन्यत्र मोर्चाबंदी कर अंग्रेजों से बदला लेना चाहा । अंग्रेजों की विशाल सेना के चलते भले जगदीशपुर पर उनका कब्जा हुआ हो, लेकिन अत्यल्प साधनों के बावजूद मात्र जन-समर्थन के बल पर आधुनिक शस्त्रों से सुसज्जित ब्रिटिश सेना का मुकाबला जिस रूप में कुँवर सिंह ने किया, वह स्वाधीनता-संग्राम में स्वर्णाक्षरों में अंकित है । जगदीशपुर की पराजय के पश्चात बाबू कुँवर सिंह अपने समर्थकों एवं सिपाहियों के साथ सासाराम की पहाड़ियों की ओर चल पड़े, जहाँ उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ भावी संग्राम की योजना बनाकर स्वतंत्रता आंदोलन की चिंगारी को प्रज्वलित रखा । स्वतंत्रता आंदोलन के बाबू कुँवर सिंह प्रथम नायक बने जिन्होंने बहादुरशाह जफर के सपने को साकार किया । उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी सेना द्वारा गिरफ्तार हुए मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर ने मेजर हडसन को ललकारते हुए कहा था,

“ग़ज़ियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की,
तख्त ये लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की।”

आरा (जगदीशपुर) में अंग्रेजों के साथ बाबू कुँवर सिंह के युद्ध का प्रभाव मुजफ्फरपुर, गया, संथाल परगना, हजारीबाग, चतरा, सिंहभूमि, पलामू तथा छपरा में जबरदस्त दिखाई दिया ।

बाबू कुँवर सिंह का विजय-अभियान-‘विजयोत्सव’— अपने साथियों एवं समर्थकों के अदम्य उत्साह और शौर्य से उत्साहित बाबू कुँवर सिंह का नया विभामय रूप भारतीय इतिहास में प्रकट हुआ । जगदीशपुर के पतन के बाद उनका क्षात्र तेज उमड़ पड़ा और वे अब पूरी भारतीय राष्ट्रीयता के अग्रदूत बनकर विदेशी सत्ता को मिटाने के लिए कृतसंकल्प हो गए। सासाराम के शाह कबीरूद्दीन ने अंग्रेजों की सहायता में बाबू कुँवर सिंह का जबरदस्त विरोध करते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोकना चाहा । बाबू कुँवर सिंह 26 अगस्त 1857 को रोहतास छोड़ते हुए अपने हजारों अनुयायियों के साथ आगे बढ़ते रहे । मिर्जापुर जाने के क्रम में उन्होंने जी. टी. रोड पर अधिकार किया । मिर्जापुर में बाबू कुँवर सिंह का अधिक प्रभाव था। घोरावत, शाहरोत होते हुए 30 अगस्त 1857 को कुँवर सिंह नेवारी और 9 सितंबर को 600 सैनिक और 5000 लोगों के साथ कटरा पहुंचे । 10 सितंबर 1857 को कुँवर सिंह ने रीवां में प्रवेश किया जहाँ हस्मत अली एवं हरचन्द्र राय ने उनका भरपूर सहयोग किया । रीवां के बाद बाबू कुँवर सिंह बांदा गए जहाँ के नवाब ने उनकी भरपूर सहायता की । 20 अक्टूबर को उनकी सेना कालपी पहुंची । 21 नवम्बर को वे ग्वालियर की क्रांतिकारी सेना, देशी सेना तथा अपने समर्थकों के साथ कानपुर पहुँचे । कानपुर के बाद अपनी सेना के साथ वे लखनऊ के लिए रवाना हुए जहाँ उनका स्वागत किया गया । लखनऊ में अवध के नवाब ने उनकी सहायता करते हुए उन्हें आजमगढ़ की ओर जाने के लिए शाही फरमान दिया । 15 अगस्त 1857 से 10 फरवरी 1858 के दौरान बाबू कुँवर सिंह ने स्वाधीनता की लड़ाई जारी रखी।

मिलमैन तथा डेम्स की पराजय — 22 मार्च 1858 को आजमगढ़ से 25 मील दूर अतरौलिया नामक स्थान पर कुँवर सिंह ने मिलमैन की विशाल सेना को तथा 28 मार्च 1858 को कर्नल डेम्स को पराजित कर आजमगढ़ पर अधिकार किया ।

जगदीशपुर की ओर

अब वे अपनी पैतृक रियासत जगदीशपुर को भी स्वतंत्र करना चाहते थे । इसी बीच उन्होंने लुगार्ड एवं डगलस को पराजित करते हुए 22 अप्रैल 1858 को जब बलिया के शिवपुर घाट पर गंगा पार कर रहे थे तब उनकी भुजा में गोली लगी जिसे काटकर उन्होंने गंगा में फेंक दिया । सावरकर ने कहा है कि वीरत्व की यह चेतना स्वतंत्रता-संग्राम के इतिहास में अविस्मरणीय बनी रहेगी । 22 अप्रैल 1858 को बाबू कुँवर सिंह 1000 पैदल सैनिकों एवं घुड़सवारों के साथ जगदीशपुर महल पहुंच गए । अपनी कटी हुई बांह तथा चोटिल जांघ के बावजूद उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध कर अपनी मातृभूमि जगदीशपुर में अपने अपूर्व रण कौशल का प्रदर्शन किया । 23 अप्रैल को जगदीशपुर में कैप्टन लीग्रैण्ड की सेना से बाबू कुँवर सिंह की सेना का मुकाबला हुआ और अंग्रेजों की पराजय के साथ-साथ कैप्टन लीग्रण्ड भी युद्ध में मारा गया । युद्ध में अंग्रेजों की पराजय के बाद प्रसिद्ध इतिहासकार चार्ल्स बाल ने युद्ध में सम्मिलित एक अंग्रेज ऑफिसर के लेख को उद्धृत करते हुए लिखा है, “वास्तव में इसके बाद जो कुछ हुआ, उसे लिखते हुए मुझे अत्यंत लज्जा आती है । युद्ध का मैदान छोड़कर हमने जंगल में भागना शुरु किया…. अफसरों की आज्ञाओं की किसी ने परवाह नहीं की । चारों ओर आहों और रोने के सिवा कुछ नहीं था । मार्ग में अंग्रेजों के गिरोह के गिरोह गर्मी से गिरकर मर गए । अस्पताल पर कुँवर सिंह ने पहले ही कब्जा कर रखा था । 16 हाथियों पर सिर्फ हमारे घायल साथी लदे हुए थे….। हमारा इस जंगल में आना ऐसी ही हुआ जैसा पशुओं का कसाई खाना में जाना । हम वहाँ केवल बध होने के लिए गए थे।”

लीग्रैण्ड की पराजय के बाद 25 अप्रैल 1858 को वीर बांकुड़े बाबू कुँवर सिंह ने अपने ध्वस्त पैतृक महल में अंतिम सांस लेकर भारतीय स्वतंत्रता के लिए युवा पीढ़ी को बड़ा संदेश दिया । विनायक दामोदर सावरकर ने लिखा है, “क्या कोई इससे भी पावन मृत्यु है, जिसकी अपेक्षा कोई राजपूत करेगा ।” सुंदरलाल ने लिखा है, “वीर कुँवर सिंह की मृत्यु के समय स्वाधीनता का ‘हरा ध्वज’ उनकी राजधानी पर फहरा रहा था।”

पराधीन भारत को ब्रिटिश सत्ता के बंधन से मुक्त करने का जो अदम्य संकल्प वृद्धावस्था में बाबू कुँवर सिंह ने लिया था, वह भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है । 1857 के आंदोलन के अविस्मरणीय अनेक योद्धाओं में बहादुरशाह जफर, नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई आदि का अंत वीर बांकुड़े बाबू कुँवर सिंह जैसा सुखद नहीं था ।

23 अप्रैल 1858 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम ‘विजयोत्सव दिवस’ है जिसका उदाहरण विश्व इतिहास में नहीं है । अपना सर्वस्व बलिदान कर अंग्रेजों द्वारा ध्वस्त जगदीशपुर महल पर पुनः विजय पताका फहराकर उसमें अंतिम साँस लेना उनके अदम्य उत्साह एवं संकल्प का परिचायक है । आजमगढ़ से गंगा पार करने तक तथा लीग्रैण्ड के साथ उनकी युद्ध की समीक्षा करते हुए भले उन्हें ‘गुरिल्ला युद्ध का अप्रतिम योद्धा’, ‘शाहाबाद का शेर’, ‘बिहार का स्वाभिमान’ तथा ‘तेगवा बहादुर’ कहा गया हो, लेकिन सही अर्थ में वे समस्त भारतवासियों के लिए प्रेरणास्वरूप हैं । जहाँ बाबू कुँवर सिंह देश के स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं, वहाँ 23 अप्रैल का विजयोत्सव उनके शौर्य एवं बलिदान की गौरवमयी गाथा से देशवासियों को उत्प्रेरित कर रहा है । वे सिर्फ जगदीशपुर, बिहार के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए मान, अभिमान और स्वाभिमान के प्रतीक हैं । उन्होंने समाज के सभी वर्गों के साथ मिलकर 1857 में अंग्रेजों से युद्ध किया था । देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान देने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने आजादी के 75वें वर्ष को बाबू कुँवर सिंह के शौर्य के प्रतीक 23 अप्रैल को ‘अमृत महोत्सव’ के रूप में मना कर ‘तेगवा बहादुर’ बाबू कुँवर सिंह को सर्वोत्तम श्रद्धांजलि तो दिया ही है, वीरंगना रानी लक्ष्मीबाई की जयंती को ग्वालियर में ‘अमृत महोत्सव’ का दर्जा देकर अपने राजधर्म का अनुपालन भी किया है, जिनके बारे में सुभद्रा कुमारी चौहान ने लिखा है–

“बुंदेले हरबोलों के मुंह,
हमने सुनी कहानी थी ।
खुब लड़ी मर्दानी वह तो
झांसी वाली रानी थी ।”

नालंदा में एक महिला ने अपने दो बच्चों के साथ जहर खाकर आत्महत्या किया

नालंदा में शुक्रवार को एक महिला ने अपने दो बच्चों के साथ जहर खाकर आत्महत्या कर लिया। मामला जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र के अहियापुर गांव का है। स्थानीय लोगों के अनुसार, शुक्रवार को पति-पत्नी के बीच पांच रुपए को लेकर विवाद हुआ था। जिसके बाद महिला ने अपने दो बच्चों के साथ जहर खा लिया।

इलाज के दौरान 24 वर्षीया महिला, दो साल की बेटी और आठ साल के बेटे की मौत हो गई। घटना के बाद ससुराल के लोग शव जलाने का प्रयास कर रहे थे। मायकेवालों की सूचना पर पुलिस ने शवों को बरामद कर लिया है। ग्रामीणों की माने तो शव को कब्जे में लेकर पुलिस पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लेकर आ रही है।

जहानाबाद में दो जगहों पर बाबू कुंवर सिंह जयंती को लेकर कार्यक्रम अयोजित किए गए

आज जहानाबाद में दो जगहों पर बाबू कुंवर सिंह जयंती को लेकर कार्यक्रम अयोजित किए गए। क्षत्रिय सभा द्वारा ऊंटा मोहल्ले में , जहां वीर योद्धा के तैल चित्र पर डॉ विरेंद्र कुमार सिंह, कुंदन कुमार विमल, संजय सिंह समेत कई लोगों ने माल्यार्पण किया।

वहीं स्थानीय अनुग्रह नारायण स्मारक महाविद्यालय में बाबू वीर कुंवर सिंह जी की विजयोत्सव कार्यक्रम मनाया गया।इस अवसर पर कालेज कर्मी श्रद्धा पूर्वक तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। वक्ताओं ने बाबू वीर कुंवर सिंह जी से जुड़े स्वंतत्रता संग्राम की लड़ाइयों और युद्ध कौशल पर विस्तार से अपने अपने विचार रखे।

1857के महान योद्धा के विचार तथा अन्य कई तरह युद्ध कौशल पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इस युद्ध ने ही गुलामी में जी रहे भारतीयों को स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु एक संवेदना सम्प्रेषण किया।इस अवसर पर कालेज कर्मी में इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं उपप्राचार्य अरविंद कुमार सिंह,प्रों शिव शंकर सिंह सहित दर्जनों लोगों ने भाग लिया।

वीर कुंअर सिंह सिर्फ बिहार के लिए लड़े थे क्या राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम होनी चाहिए – नीतीश कुमार

पटना । वीर कुंअर सिंह के जंयती के मौके पर सीएम नीतीश ने कहाँ वीर कुंअर सिंह सिर्फ बिहार के लिए लड़े थे क्या राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम होनी चाहिए ।

वीर कुंवर सिंह की जंयती पर खास

कालिदास तुम सही थे ! तुम्हारा वह कथानक चित्र जिसमें तुम पेड़ के एक डाल पर बैठे हो और उसी डाल को काट रहे हो यह बिना सोचे कि डाली जब कट के गिरेगी तो तुम भी उसी डाली के साथ गिर जाओगे।

कालिदास तुम अलग नहीं हो । सदियों से मनुष्य जाति यही तो करती आई है ।
आज बुलडोजर चलाने पर जो खुश है वो तुम्हारे कथानक चित्र को वो पात्र है, जिसे यह समझ में नहीं आ रहा है कि कानून है तो तुम हो, संविधान है तो तुम हो ।शासन और सत्ता तो चाहती ही है कि कानून और संविधान पर से लोगों का भरोसा उठ जाये ।
आज जिस रहमान के घर बुलडोजर चलने पर खुश हो, वह सिर्फ रहमान का घर नहीं है वह घर भारतीय संविधान और न्याय संहिता का घर है जिसके बुनियाद पर भारत बसा हुआ है ।सत्ता और सरकार तो चाहती ही कि कभी धर्म के नाम पर तो कभी जाति के नाम पर कानून और संविधान को धत्ता बताते रहे । कल तुम रहमान का घर टूटने पर खुशी मना रहे थे आज रमन झा और विवेक गुप्ता के घर बुलडोजर चला तो कागज दिखा रहे हो ।

तेरी हंसी कब तरे घर मातम लेकर पहुंच जाये किसी ने नहीं देखा है सत्ता और सरकार को इतनी छूट दिये तो फिर बहु बेटी को घर से उठा कर ले जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

Editorial

देखो सत्ता का चरित्र आज जरुरत पड़ी तो वीर कुंउर सिंह के परिवार वाले की हत्या मामले में एक माह बाद डाँक्टर पर कार्यवाही हो रही है ।इससे पहले सूना था बिहार में इलाज में लापरवाही बरतने पर किसी डाँक्टर पर कार्यवाही हुई हो ।वैसे 23 अप्रैल के बाद डाँक्टर साहब को मनचाही जगह मिल जायेंगी ये भी तय है काली हो सकता है इस कथा में तुम्हारे नाम को जोड़कर उस ज़माने के तुझे नापसंद करने वालों ने तेरी फिरकी ली हो ।फिर भी एक बात तो है, तुम मिथक कथा के पात्र ही सही पर जीवंत बिंब हो मनुष्य जाति के एक पहलू के ।

भाई भाई को लड़ा रहा है सत्ता के लिए और ससुरे को समझ में नहीं आ रहा है नौकरी और रोजगार हाथ से जा रहा है शहर दर शहर उजर रहा है 35 रुपया का पेट्रोल 120 रुपया में बेच रहा है अपनी ऐयाशी के लिए फिर भी समझ में नहीं आ रहा है।
काली मेरा मानना है कि तुम ये कहानी मनुष्य को संचेत करने के लिए गढ़ा था लेकिन दुर्भाग्य है काली 1500 सौ वर्ष बाद भी समझ में नहीं आया है क्या करोगे मनुष्य समझदार ही हो जाता तो फिर ऐसे लोगों की दुकाने कैसे चलती है।