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खंडवा में आवारा कुत्तों के आतंक पर नागरिकों ने कलेक्टर का सामना किया, विधायक दीपक राठौर ने कुत्ते की पोशाक में युवक को बैठा कर विरोध किया

खंडवा, मध्य प्रदेश – जिले में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक से जूझते नागरिकों ने नगर निगम के प्रतिनिधि प्रतिपक्ष विधायक दीपक राठौर को अपने विरोध का मंच प्रदान किया। राठौर ने प्रशासनिक प्रतिक्रिया की अनिच्छा के सामने एक अनोखी रणनीति अपनाई: एक युवक को कुत्ते की पोशाक में तैयार कर, जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने बैठा दिया, जहाँ वह लगातार सिर हिलाते हुए अपने असंतोष को प्रदर्शित करता रहा। यह दृश्य स्थानीय मीडिया में वायरल हो गया और सामाजिक मंचों पर व्यापक चर्चा का विषय बना, जहाँ कई लोग इस प्रदर्शन को सत्ता के प्रति निराशा और वैकल्पिक विरोध के रूप में देख रहे हैं।आवारा कुत्तों का मुद्दा खंडवा में पिछले दो वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है। नगर निगम द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2022 में दर्ज 1,800 से 2024 में यह संख्या 2,750 तक पहुँच गई है। इस वृद्धि के कारण कई सड़कों, सार्वजनिक पार्कों और आवासीय क्षेत्रों में नागरिकों को डर और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय पशु कल्याण संगठनों ने भी इस समस्या को अनदेखा नहीं किया, परंतु वे अक्सर नगर निगम की अक्षम्य कार्रवाई का आरोप लगाते रहे हैं। इन संगठनों के अनुसार, कुत्तों का अनियंत्रित प्रजनन, कूड़े-करकट के ढेर और कचरे के अनुचित प्रबंधन मुख्य कारण हैं।

पिछले कई महीनों में नागरिकों ने विभिन्न चैनलों से शिकायतें दर्ज करवाईं। 2023 के मध्य में, खंडवा नगर निगम के प्रमुख अधिकारी ने एक बयान जारी कर कहा था कि कुत्तों के नियंत्रण के लिए विशेष कार्यदल बनाया गया है, परंतु व्यावहारिक कदमों की कमी के कारण स्थिति में सुधार नहीं आया। इस बीच, स्थानीय पुलिस ने कुत्तों के मामलों में शिकायतों की संख्या में 35 % की वृद्धि दर्ज की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समस्या की तीव्रता में कोई कमी नहीं आई। कई बार कलेक्टर कार्यालय में लिखित याचिकाएँ और मौखिक अपीलें की गईं, परंतु ठोस समाधान नहीं मिला।

दिसंबर 2023 में एक और प्रमुख घटना हुई, जब एक महिला को कुत्ते के झुंड ने टकरा कर गंभीर चोटें आईं। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई की मांग तेज़ हुई, और कई सामाजिक समूहों ने सार्वजनिक मंचों पर प्रदर्शन करने का इरादा जाहिर किया। उसी समय, नगर निगम ने एक बार फिर कहा कि वह कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने हेतु पशु नियंत्रण योजना तैयार कर रहा है, लेकिन इस योजना की कार्यान्वयन की समयसीमा स्पष्ट नहीं थी। इस अस्पष्टता ने नागरिकों में निराशा को और बढ़ा दिया।

इन पृष्ठभूमियों के प्रकाश में, दीपक राठौर ने अपने विरोध को एक प्रदर्शनात्मक रूप में तैयार किया। उन्होंने अपने दल के एक सदस्य को कुत्ते की पोशाक में सजाकर, जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने बैठाया, जहाँ वह निरंतर सिर हिलाते रहा। यह कृत्य न केवल प्रशासनिक असंतोष को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत करता है कि पारम्परिक शिकायत प्रक्रिया अब प्रभावी नहीं रही। इस प्रदर्शन को कई मीडिया आउटलेट्स ने डॉग-प्रोtest के रूप में नामांकित किया, और यह दर्शाता है कि स्थानीय राजनीति में नई अभिव्यक्ति विधियों का प्रयोग बढ़ रहा है।

जनसुनवाई के दौरान, कलेक्टर ने इस असामान्य स्थिति को शांतिपूर्वक संभालने की कोशिश की। उन्होंने युवक को विनम्रता से कहा कि वह अपनी बात लिखित रूप में प्रस्तुत करे, परंतु युवक ने अपनी पोशाक को नहीं उतारा और सिर हिलाते ही रहा। इस बीच, सभा में उपस्थित कई नागरिकों ने इस प्रदर्शन को देख कर आश्चर्य व्यक्त किया और कुछ ने कैमरा चालू कर इस दृश्य को रिकॉर्ड किया। इस वीडियो में युवक के सिर की निरंतर गति स्पष्ट रूप से दिखती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह अपने असंतोष को शारीरिक भाषा के माध्यम से व्यक्त कर रहा है।

कॉलैक्टरी कार्यालय के बाद के बयान में, कलेक्टर ने कहा कि नगर निगम ने कुत्तों के प्रबंधन हेतु एक विस्तृत योजना तैयार की है, जिसमें कुत्तों की पकड़, एंटी-रैबिट वैक्सीनिंग और पुनर्वास केंद्रों की स्थापना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के कार्यान्वयन में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता है, और नागरिकों से सहयोग की उम्मीद की जाती है। इसके साथ ही, उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा उठाए गए कदमों को समय पर लागू किया जाएगा, परंतु विशिष्ट समयसीमा अभी तय नहीं हुई है।

नगर निगम के प्रवक्ता ने भी इस घटना पर टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि कुत्तों के प्रजनन को रोकने के लिए एक आवासीय पशु नियंत्रण टीम का गठन किया गया है, जिसमें वन्यजीव अभियांत्रिकी, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस शामिल हैं। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इस टीम को मासिक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिससे प्रगति की निगरानी की जा सके। हालांकि, इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कितनी प्रभावी तरीके से काम करते हैं और आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए तय उपायों को जमीन पर कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है।

Updated: August 19, 2026

The “dog‑in‑a‑mask” protest exposes a deeper political calculus: citizens are turning absurdity into a bargaining chip, forcing the bureaucracy to confront its inertia. It signals that when conventional petitions evaporate, creative civil disobedience becomes the new loudspeaker for public discontent.