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Bihar News in Hindi: The BiharNews Post - Bihar No.1 News Portal

बिहार पंचायत चुनाव 2021 तीसरे चरण के चुनाव का प्रचार अभियान आज शाम पांच बजे समाप्त

बिहार पंचायत चुनाव 2021 तीसरे चरण के चुनाव का प्रचार अभियान आज शाम पांच बजे समाप्त हो गया। तीसरे चरण में 35 जिलों के 50 प्रखंडो में 8 अक्टूबर को मतदान होना है। वहीं पांचवें चरण के लिए आज नामांकन का आखिरी दिन है।
हलाकि जैसे जैसे पंचायत चुनाव का चरण आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे पंचायत चुनाव के दौरान प्रचार के अलग अलग अंदाज देखने को मिल रहा है कही बार बाला के सहारे मुखिया जी प्रचार कर रहे हैं तो कही खुली जिप्सी ,कही बैलगांड़ी से ,तो कही घोड़ा पर सवार होकर उम्मीदवार नामंकन करने पहुंच रहे हैं ।

तीसरे चरण में पटना के नौबतपुर के 19 पंचायत और विक्रम प्रखंड 17 पंचायत में। सिवान जिले के हुसैनागंज प्रखंड 15 पंचायत में हसनपुरा प्रखंड के 12 में। बक्सर जिले के डुमरॉव प्रखंड में 14 पंचायत में। भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड के 20 पंचायतों में। कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड में 16 पंचायतों में। रोहतास जिले के काराकाट प्रखंड के 19 पंचायतों में। नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड के 11 पंचायतों, नगरनौसा प्रखंड के 9 पंचायतों में। गया जिले के मोहड़ा प्रखंड के 9 पंचायतों में, अतरी प्रखंड के 8 पंचायतों , नीमचक बथानी प्रखंड के 8 पंचायतों में चुनाव होंगे।

नवादा जिले के रजौली प्रखंड के 15 पंचायतों में। औरंगाबाद जिले के बारूण प्रखंड के 16 पंचायतों में। जहानाबाद जिले के रतनीफरीदपुर प्रखंड के 14 पंचायतों में। अरवल जिले के कुर्था प्रखंड के 10 पंचायतों में। सारण जिले के गड़खा प्रखंड के 23 पंचायतों में। गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड के 17 पंचायतों में। मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड के 27 पंचायतों में, मुरौल प्रखंड के 9 पंचायतों में। पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया प्रखंड के 14 पंचायतों में, घोड़ासहन प्रखंड के 14 पंचायतों में। पंश्चिमी चंपारण जिले के नरकटियागंज प्रखंड के 27 पंचायतों में। सीतामढ़ी जिले के बोखड़ा प्रखंड के 11 पंचायतों, बथनाहा प्रखंड के 21 पंचायतों में। दरभंगा जिले के बहेडी प्रखंड के 25 पंचायतों में। मधुबनी जिले के फुलपरास प्रखंड के 12 पंचायतो में, खुटौना प्रखंड के 18 पंचायतो में चुनाव होंगे।

समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड के 28 पंचायतों में, दलसिंहसराय के 14 पंचायतों में। सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड के 23 पंचायतों में। सहरसा जिले के पतरघट प्रखंड के 11 पंचायतों में। मधेपुरा जिले के गम्हरिया प्रखंड 8 पंचायतों में, घैलाढ़ प्रखंड 9 पंचायतों में। पूर्णिया जिले के बी कोठी प्रखंड के 19 पंचायतों में, भवानीपुर प्रखंड 12 पंचायतों में। कटिहार जिले के कोढा प्रखंड के 23 पंचायतों में। अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड के 30 पंचायतों में। लखीसराय जिले के हलसी प्रखंड के 10 पंचायतों में। बेगूसराय जिले के वीरपुर प्रखंड के 8 पंचायतों में, डंडारी प्रखंड के 8 पंचायतों में। खगड़िया के परबत्ता 17-18 प्रखंड के 10 पंचायतों में। मुंगेर जिला के संग्रामपुर प्रखंड के 10 पंचायतों में। जमूई जिले के ई अलीगंज प्रखंड के 13 पंचायतों में। भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड के 18 पंचायतों में। बांका जिला के रजौन प्रखंड के 18 पंचायतों में चुनाव होना है।

पटना हाई कोर्ट ने राज्य के ट्रिब्यूनल्स में खाली पड़े पदों को लेकर राज्य सरकार को जमकर लगायी फटकार

पटना हाई कोर्ट ने राज्य के ट्रिब्यूनल्स में खाली पड़े पदों के मामले पर सुनवाई करते हुए भारत सरकार से डी आर टी के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजय करोल खंडपीठ को राज्य में ट्रिब्यूनल्स में रिक्त पड़े पदों को भरे जाने के सम्बन्ध में महाधिवक्ता ने बताया कि दो सप्ताह में सभी रिक्त पदों को भर दिया जाएगा।

इस मामले में कोर्ट का सहयोग देने के लिए कोर्ट ने आशीष गिरि को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया हैं। आशीष गिरि ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की ओर से यह बताया गया है कि राज्य सरकार ट्रिब्यूनल्स में सभी खाली पड़े पदों को शीघ्र भर दिया जाएगा

इसके पूर्व 20 सितंबर, 2021 के कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि पब्लिक वर्क्स कॉट्रेक्ट डिस्प्यूट्स आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के बारे में बताया गया था कि इस ट्रिब्यूनल में चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया प्रगति पर है।
इसे सकारात्मक रूप से 30 सितंबर तक पूरा कर लिया जायेगा।

debt रिकवरी ट्रिब्यूनल (डी आर टी) के बारे में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल द्वारा जानकारी दी गई थी कि debt रिकवरी ट्रिब्यूनल के लिए पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति हेतु चयन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
इसी प्रकार से कमर्शियल टैक्स ट्रिब्यूनल को लेकर ट्रिब्यूनल के अधिवक्ता द्वारा जानकारी दी गई थी कि इस ट्रिब्यूनल के लिए सरकार द्वारा आवश्यक रिक्त पदों को सूचित कर दिया गया है और अब ट्रिब्यूनल पूरी तौर से काम कर रहा है।

लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलेमेंट ऑथोरिटी, पटना, दरभंगा व भागलपुर के बारे में जानकारी दी गई थी कि हाई कोर्ट के स्तर पर चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और मामला अभी राज्य सरकार के समक्ष लंबित है।
बिहार लैंड ट्रिब्यूनल, पटना के बारे में जानकारी दी गई थी कि नियुक्ति हेतु चयन की प्रक्रिया प्रगति पर है और सकारात्मक रूप से 30 सितंबर, 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा।

बिहार स्टेट स्कूल टीचर्स एंड एम्प्लाइज डिस्प्यूट्स रिड्रेसल रूल्स, 2015 के तहत गठित डिस्ट्रीक्ट अपीलेट अथॉरिटीज को लेकर जानकारी दी गई थी कि नियुक्ति हेतु चयन की प्रक्रिया प्रगति पर है और इसे अगले हफ्ते पूरा कर लिया जाएगा।
अब इस मामले पर आगे की सुनवाई आगामी 15 नवंबर को की जाएगी।

आखिरी घंटों की बिकवाली से निफ्टी 17,650 के नीचे, सेंसेक्स 555 अंक गिरा; मेटल, बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित

बुधवार को कमजोर वैश्विक संकेतों से सेंसेक्स 555.15 अंक की गिरावट के साथ 59,189.73 पर बंद हुआ; निफ्टी 176.30 अंक की गिरावट के साथ 17,646.00 पर बंद हुआ।

आज कारोबारी हफ्ते के तीसरे दिन यानी बुधवार को बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन के उच्चतम स्तर से सेंसेक्स 850 अंक से अधिक गिर गया और निफ्टी 50 इंडेक्स 17,884.60 के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद 17,650 से नीचे गिर गया। व्यापार के अंतिम घंटों में जबरदस्त बिकवाली हुई और बाजार के सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई और यह लाल रंग में समाप्त हुआ।

सेंसेक्स चार्ट (06.10.21) एक नजर में

एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस एकमात्र लाभार्थी थे, जबकि बाकी शेयर लाल रंग में थे। इंडसइंड बैंक, टाटा स्टील और बजाज ऑटो शीर्ष हारे हुए थे।

सेंसेक्स के शेयर एक नजर में

सभी सेक्टोरियल इंडेक्स कैपिटल गुड्स, आईटी, मेटल, फार्मा, ऑटो, रियल्टी और पीएसयू बैंक इंडेक्स में 1-3 फीसदी की गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5-1.2 फीसदी गिरे।

निफ्टी मेटल इंडेक्स में करीब 3 फीसदी की गिरावट। निफ्टी ऑटो, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, फार्मा, पीएसयू बैंक, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडेक्स भी 1-2 फीसदी गिरे।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

जलापूर्ति योजना को समय सीमा के अंदर पूरा करने को लेकर सरकार ने लिया बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री के निर्देश :

• राजगीर, गया, बोधगया एवं नवादा में गंगा जल उवह योजना के तहत सभी लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने को लेकर तेजी से काम करें।

• जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग तथा

नगर विकास एवं आवास विभाग आपस में समन्वय बनाकर इस पर काम करें। बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए जलापूर्ति हेतु योजना

बनाकर काम करें। भू-जल स्तर को मेंटेन रखना है, इसके लिए लोगों को प्रेरित करते रहें।

पटना, 06 अक्टूबर 2021 :- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने 1, अणे मार्ग स्थित संकल्प में जल- जीवन- हरियाली अभियान अंतर्गत पेयजल हेतु गंगा जल उवह योजना के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री संजीव हंस ने जल-जीवन- हरियाली अभियान अंतर्गत पेयजल हेतु गंगा जल उद्वह योजना के कार्य की प्रगति के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने हथीदह-मोकामा में इन्टेक वेल-सह-पंप हाउस, मोतनाजे स्थित डिटेंशन टैंक-सह-पंप हाउस, मोतनाजे स्थित जल शोधन संयंत्र, राजगीर जलाशय अर्दन डैम, तेतर जलाशय अर्दन डैम एवं अबगिल्ला मानपुर स्थित जल शोधन संयंत्र के कार्य की भौतिक प्रगति की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में राजगीर, गया एवं बोधगया में तथा द्वितीय चरण में नवादा शहर के लिए इस जलापूर्ति योजना पर काम किया जा रहा है। हथीदह-मोतनाजे तेतर अबगिल्ला तक कुल 150 किलोमीटर की पाइप लाईन में से लगभग 118 किलोमीटर पाईप बिछाने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

जल संसाधन विभाग के सचिव ने बताया कि मूल योजना का कार्य मार्च 2022 तक पूर्ण हो जाएगा और जल वितरण का कार्य जून 2022 तक आरंभ करने का लक्ष्य रखा गया है।

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर, गया, बोधगया एवं नवादा में गंगा जल उद्वह योजना के तहत सभी लोगों को शुद्ध पेय जल उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना को पूर्ण करने को लेकर जो समय सीमा निर्धारित की गई है उस लक्ष्य पर तेजी से काम करें। स्पॉट पर जाकर एक-एक चीज का आकलन करें ताकि सभी लोगों को जलापूर्ति

सुनिश्चित हो सके। जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग आपस में समन्वय बनाकर इस पर काम करें। नवादा में भी जलापूर्ति योजना का काम तेजी से शुरु करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर में विकास के कई कार्य किए गए हैं। वहां आबादी तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए जलापूर्ति हेतु योजना बनाकर काम करें। भू-जल स्तर को मेंटेन रखना है, इसके लिए लोगों को प्रेरित करते रहें।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री संजीव हंस, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित वरीय अभियंतागण उपस्थित थे।

बिहार में तीसरा मोर्चा के लिए कोई जगह नहीं है

देश में फिलहाल जो राजनीतिक मिजाज है इस मिजाज की वजह से क्षेत्रीय दलों के लिए कुछ ज्यादा स्पेस नहीं रह गया है।आप मोदी के साथ रहे या फिर मोदी के विरोध में रहे बीच का रास्ता लगभग खत्म हो चुका है । बिहार की राजनीति पर भी कमोबेश इसी लाइन पर चल रहा है मांझी और सहनी एनडीए के साथ हैं तो राजद के साथ कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां हैं ।उपेन्द्र कुशवाहा इस हकीकत को समझ गये और वो जदयू में आ गये।ऐसे में देश स्तर पर भी और बिहार में भी फिलहाल कोई तीसरे विकल्प की कोई गुंजाइश नहीं दिख रहा है।

1–आनंद मोहन ,नागमणि जैसे नेता अकेला चलो के नारे की वजह से हासिए पर चले गये

कल कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने कहा कि पप्पू यादव जेल से रिहा हो गए हैं। कांग्रेस उनके संपर्क में है, लेकिन शर्त यही है कि पप्पू यादव कांग्रेस के सिंबल पर ही तारापुर से चुनाव लड़ें। अगर वे सहमति व्यक्त करते हैं तो पार्टी इस पर विचार करेगी कांग्रेस के इस बयान के बाद पप्पू यादव का बयान आया मेरी कुछ शर्तें हैं कांग्रेस पहले राजद का साथ छोड़े ,दूसरा कांग्रेस अपने पुराने विचारधारा की और लौटे ।

पप्पू यादव के इस बयान के 15 मिनट बाद कांग्रेस ने तारापुर से अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दिया वैसे रिहा होने की सूचना के बाद से ही कांग्रेस पप्पू यादव की पत्नी के सहारे बात चला रही थी लेकिन पप्पू यादव के शर्त की वजह से बात आगे नहीं बढ़ी।

राजनीति में महत्वाकांक्षा जरूरी है लेकिन अति महत्वाकांक्षा हमेशा नुकसानदायक रहा है बिहार कि राजनीति की बात करे तो 90 के दशक में दो नाम बड़ी सुर्खियों में था एक आनंद मोहन और दूसरा पप्पू यादव दोनों की शैली और मिजाज एक ही तरह का था । बिरादरी में दोनों की छवि राँबिन हुड जैसी थी आनंद मोहन के नेतृत्व में पहली बार बिहार का सवर्ण एक साथ एक मंच पर आया था सवर्ण यूथ में आनंद मोहन की छवि नायक वाली थी ।

पूरे बिहार में राजपूत का एक भी ऐसा गांव नहीं था जहां आनंद मोहन का कट्टर समर्थक मौजूद नहीं था राजपूत लीडरशिप का सिरमौर कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की पत्नी किशोरी सिन्हा को निर्दलीय वैशाली से लोकसभा चुनाव लवली आनंद ने हरा दी थी। आज भी बिहार में राजपूत पर किसी एक नेता के पकड़ की बात कहे तो आनंद मोहन के सामने दूर दूर तक कोई नहीं है ।जदयू हो ,भाजपा हो या फिर राजद हो सीनियर राजपूत नेता को छोड़ दे तो यंग जितने भी नेता हैं वो कही ना कही आनंद मोहन के टीम का सदस्य रहा है।

लेकिन जोश भरने वाली भाषण शैली ,संगठन की समझ और राजपूत जैसे जाति को साथ लेकर चलने की ताकत रहने के बावजूद आज आनंद मोहन हाशिए पर है वजह अति महत्वाकांक्षा और राजनीतिक समझदारी का अभाव रहा राजनीति कुछ भी हो वैचारिक प्रतिबद्धता बहुत मायने रखता है लेकिन आनंद मोहन इससे समझौता करते रहे और फिर 1999 में राजद में शामिल हो गये जो इनके राजनीतिक जीवन के लिए वाटरलू साबित हुआ और उसके बाद वो फिर वो उबर नहीं पाये । आनंद मोहन एक बार विधायक और दो बार सांसद रहे हैं लवली आनंद एक बार सांसद रही है । 1995 से 2021 तक आनंद मोहन और उसका परिवार ऐसी कौन सी पार्टी नहीं है जिससे लवली आनंद चुनाव नहीं लड़ी ।

2– फिलहाल कांग्रेस में जाने के अलावे पप्पू यादव के पास कोई विकल्प नहीं है

यही समस्या पप्पू यादव के साथ भी है उस दौर में जब लालू प्रसाद एरा चरम पर था उस समय आनंद मोहन और पप्पू यादव के बीच आमने सामने की लड़ाई चल रहा था उस दौरान पप्पू यादव यादव युवा के हृदय सम्राट बन गये थे और उसी दौर में वो पूर्णिया से निर्दलीय सांसद बने थे ।

1996 के चुनाव में बिहार से बाहर की पार्टी सपा ने उन्हें पूर्णिया सीट से अपना उम्मीदवार बनाया और एक बार फिर पप्पू यादव को जीत हासिल हुई । 1999 के लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव फिर से निर्दलीय चुनाव लड़े और पूर्णिया सीट से तीसरी बार सांसद चुने गए लेकिन 2000 लोकसभा चुनाव वो हार गये फिर पप्पू यादव 2004 में मधेपुरा सीट पर हुए उपचुनाव में आरजेडी के टिकट पर जीत हासिल की वो बाद में फिर राह जुदा कर लिये और उसके बाद फिर 2014 में राजद के टिकट पर मधेपुरा से चुनाव जीते लेकिन एक वर्ष बाद ही लालू से अलग हो गये इस दौरान पप्पू यादव अपनी अपराधिक छवि से बाहर आने के लिए क्या क्या नहीं किया दिल्ली स्थित आवास को इन्होंने ऐसे बिहारी जिनका इलाज एम्स में चल रहा था ऐसे मरीज और उसके परिजनों के लिए दोनों शाम मुफ्त भोजन और रहने की व्यवस्था कर रखा था इसके अलावे व्यक्तिगत तौर पर ना जाने कितने लोगों को मदद पहुंचाया।

पटना में बारिश के कारण हुई तबाही का मंजर हो या फिर बाढ़ ,अपराध ,कोरोना हर जगह पप्पू यादव खड़ा रहा लेकिन चुनाव हुआ तो 2019 का लोकसभा चुनाव बुरी तरह हारे मधेपुरा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का असर सुपौल पर पड़ा और पत्नी भी चुनाव हार गयी ।

2020 के चुनाव में वो खुद मधेपुरा जैसे विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गये मतलब राजनीति में इस तरह के काम के साथ साथ चुनावी गठजोड़ भी महत्व रखता है 2020 के चुनाव में ऐसा लग रहा था कि पप्पू यादव बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं इस छवि ने इनकी पूरी राजनीति की हवा निकाल दी ये भी आनंद मोहन की तरह अति महत्वाकांक्षा के शिकार हैं और राजनीति को आप जितना गाली दे दे लेकिन वैचारिक प्रतिबद्धता मायने रखता है वो भी तब जब देश दो विचारधाराओं में विभक्त है ऐसे में तीसरे विकल्प के लिए जगह जहां है लेकिन ये दोनों नेता हमेशा तीसरे विकल्प के चक्कर में राजनीति के हाशिए पर चले गये ।

कौन किसको नचा रहा है आज भी इस सवाल का हल नहीं मिला है – अभयानंद

कौन किसको खेला रहा है?

उम्र रही होगी 5 साल की। रहता था बिहार के छपरा शहर में जो पूरे सारण जिले का मुख्यालय हुआ करता था। मेरे पिताजी जिले के पुलिस कप्तान थे। छुट्टी का दिन था। कप्तान साहब का बेटा होने के नाते घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। बाहर से पहरा होता था।

रिश्ते के एक बड़े भाई हमारे यहाँ आए हुए थे। उम्र में मुझसे काफ़ी बड़े थे। भोजन पश्चात उन्होंने मुझे बताया कि वे घूमने निकल रहे हैं, मैं भी चल सकता हूँ। घर की सुरक्षा में रहते रहते ऊब गया था सो बिना सोचे ही हामी भर दी। दोनों पैदल निकल पड़े। कुछ ही दूरी पर, उन्होंने मुझे एक बड़े मैदान में लोगों के बीच बैठा दिया। हम एक फुटबॉल मैच देखने लगे। मैं ज़िन्दगी में पहली बार यह देख रहा था। समझने की कोशिश कर रहा था। कुछ सवाल बड़े भाई से करता, तो वे अधिक नहीं बताते क्यूंकि स्वयं तल्लीन थे। कुछ देर बाद, समझ आया कि लोग बॉल को पैर से मार कर, एक-दूसरे से छीनने का प्रयास कर रहे हैं। मैं देख पा रहा था कि बॉल के हिसाब से खिलाड़ी भागते और बॉल भी खिलाड़ियों के अनुसार मारा जाता। खेल समाप्त हुआ। कुछ लोग खुश नज़र आ रहे थे, तो कुछ दुखी।

लौटते समय, प्रश्न बराबर आ रहा था – इस खेल में बॉल खिलाड़ियों को नचा रहा था या खिलाड़ी बॉल को नचा रहे थे? घर पहुँच गया पर उत्तर नहीं मिला। अभी तक इस उत्तर की तलाश में हूँ।

बीजेपी ने बिहार में जनसंख्या नियंत्रण पर उठाया सवाल कहां जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं हुआ तो विकास के पैमाने पर कभी भी बिहार खड़ा नहीं उतर सकता है ।

बिहार में नीति आयोग और जातीय जनगणना को लेकर जारी सियासत के बीच बीजेपी ने जनसंख्या नियंत्रण के सहारे बड़ा राजनैतिक दाव खेला है ।BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा है कि नीति आयोग के पैमाने पर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं है बिहार में सबसे बड़ी चुनौती जनसंख्या नियंत्रण है और उस पर गंभीरता से विचार करेने की जरुरत है।
बिहार को बचाना है तो बांग्लादेश जैसा काम करना होगा। बांग्लादेश में नमाज के बाद नमाजियों को छोटा परिवार रखने की सलाह दी जाती है। 2 ही बच्चे रखने को कहा जाता है।

जायसवाल ने कहा – नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था का जो हाल दिखाया गया है, वो बढ़ती जनसंख्या का नतीजा है। रिपोर्ट पर सवाल उठाना गलत है। आयोग सभी राज्यों को एक पैमाने पर मानते हुए रिपोर्ट बनाता है। आज से 4 साल पहले बिहार और उत्तर प्रदेश लगभग बराबर थे। आज उत्तर प्रदेश की जनसंख्या वृद्धि दर 3.6 से घटकर 2.5 हो गई है। बिहार में 3.5 से घटकर 3.2 पर है। दक्षिण के राज्यों ने भी जनसंख्या नियंत्रित किया है, जिसका फायदा उन्हें आगे बढ़ने में मिल रहा है। बिहार में ऐसा नहीं हो सका है। बिहार को जनसंख्या नियंत्रण पर काम करना होगा। नहीं तो विकास की गांड़ी कभी भी पटरी पर नहीं आएगी ।

रेलवे को हाईकोर्ट की फटकार कहा रेलवे कोई चैरेटिवल संस्था नहीं है।

पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन को सभी ओर से जोड़ने के लिए बनाये जाने वाली सड़कों के निर्माण मामले पर सुनवाई की। इस दौरान रेलवे की ओर से सड़क निर्माण में आने वाले खर्च का हिस्सा देने में आनाकानी किये जाने पर कोर्ट ने रेलवे को कहा कि जब सुविधा नहीं दे सकते तो स्टेशन बंद कर दे।कोर्ट ने कहा कि रेलवे कोई चैरिटी नहीं कर रहा है। बिहार विकास की राह पर है।

कोर्ट के कड़ा रुख को देखते हुए रेलवे के वकील ने कोर्ट से एक समय की मांग की। ताकि कोर्ट के रुख से रेलवे के अधिकारियों को अवगत कराया जा सके। उनका कहना था कि सड़क निर्माण पर करीब एक सौ करोड़ रुपये की लागत आएगी। वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के पूर्व के निर्देश के अनुसार राज्य सरकार आधा पैसा देने को तैयार है। कोर्ट ने कहा कि रेलवे को पूरा पैसा देना चाहिए। जब रेलवे ने स्टेशन बनाया है तो वहां पहुंचने के लिए रास्ता बनाने का काम उसे ही करना चाहिए।

डबल इंजन में दो अलग-अलग इंजन हैं, मालगाड़ी वाला और इलेक्ट्रिक। कब छितरा जाएगा, किसी को नहीं मालूम लालू प्रसाद

लालू यादव पर अब बिमारी भारी पड़ने लगा है आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए तेजस्वी यादव के सरकारी आवास में आयोजित प्रशिक्षण शिविर को संबोधित कर रहे थे ।

इस दौरान लालू प्रसाद में वो बात नहीं दिखी जिसको लेकर लालू प्रसाद जाने जाते हैं 20 मिनट के संबोधन के दौरान उनकी वो अदा और संवाद को वो तरीका भी नहीं दिखा जिसके लिए लालू प्रसाद जाने जाते हलाकि नीतीश कुमार और बीजेपी को लेकर उसी अंदाज में दिखे लेकिन वो धार नहीं था ।

क्या खास रहा लालू प्रसाद के संबोधन में

1—जेल जाने के लिए तैयार रहो
जेल से डरो नहीं
उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण ने कहा था कि जेल से ही स्वराज मिला है। इसलिए मित्रों, जेल भरो। जेल से नहीं डरो, पर सत्याग्रह से लोग डरते हैं। प्रदर्शन में मुकदमा हो जाता है, तो सभी कहते हैं मुकदमा हो गया। चुनाव के समय 107 होने पर डर जाते हैं। यह तो शांति व्यवस्था के लिए लगाया जाता है। जगदानंद सिंह को इश्यू पर या समस्या पर जेल भरो अभियान लाना चाहिए। इससे पार्टी में और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा ।

2—जाति जनगणना करा कर रहेंगे
लालू प्रसाद ने कहा कि जाति जनगणना नहीं होने से समाज के अंतिम पायदान के लोग पीछे छूट रहे हैं। हम लोग जाति जनगणना करा कर रहेंगे। देश का बजट इसी के हिसाब से बनेगा। गैर बराबरी की खाई इसी से खत्म होगी।

3—–तेजस्वी को सराहा
हमारी अनुपस्थिति में तेजस्वी के नेतृत्व में मामूली सीट नहीं आई है। हमारी सरकार तो जनता ने बना ही दी थी। अफसोस कि मैं जेल से बाहर नहीं था, नहीं तो बेईमानी को एक्सपोज करता। जो कम मार्जिन से हमारे लोग जीत रहे थे उनको हरवा दिया गया, लेकिन बिहार की जनता हमको फिर से राज देगी, इनके रोकने से नहीं रुकेगा। हमारी पार्टी लार्जेस्ट पार्टी है। डबल इंजन में दो अलग-अलग इंजन हैं, मालगाड़ी वाला और इलेक्ट्रिक। कब छितरा जाएगा, किसी को नहीं मालूम।

4–डां बाहर निकलने से मना कर रहे हैं —
अपनी बीमारी और बिहार आने पर लालू प्रसाद ने कहा कि डॉ राकेश यादव से हम आग्रह करते हैं कि हम बिहार जाएंगे, लेकिन ज्यादा पानी पीने पर रोक लगा दी गई है। एक लीटर पानी में ही जीना है। बिना पानी के हमको बर्दाश्त नहीं होता। कभी-कभी ज्यादा हो जाता है। इस बीच समय निकालकर हम बिहार आएंगे।

5–कुशेश्वरस्थान से चुनाव लड़ने को लेकर लालू ने खोला पत्ता
कुशेश्वरस्थान में मुसहरों का उदय हुआ है। गणेश भारती वहां से उम्मीदवार हैं। वहां यादव, बिंद, मुस्लिम, मल्लाह हैं, पर मुसहरों की संख्या सबसे ज्यादा है। मुसहरों को मुख्य धारा में लाने के लिए मैंने काफी काम किया। डोम, हलखोर सबको मुख्य धारा में लाया। भोला राम तूफानी को मंत्री बनाया था।

उनसे हमने एक दिन पूछा कि हेलीकाप्टर पर चढ़े हैं कि नहीं? बोले – नहीं चढ़े हैं, चढ़वा दीजिए। हमने हेलिकॉप्टर दिया कार्यक्रम में जाने के लिए। वहां जाकर चारों तरफ ऊपर से घूमने लगे और लौट कर आए तो हंस कर बताया कि ‘लोग कहता कि ललुआ तो मंत्री बनवाइए दिहलन, अब ऊपर से मूतवावता।।।’ समाज के हर तबका को हमने टिकट दिया।

बीमार-थके, सजायाफ्ता लालू प्रसाद का अब कोई असर नहीं – सुशील कुमार मोदी

2010 में उनके धुआंधार प्रचार के बावजूद पार्टी 22 पर सिमट गई थी

बीमार, सजायाफ्ता और थके हुए लालू प्रसाद अब बिहार की राजनीति का इतिहास बन चुके हैं।
उनके सोशल मीडिया पर लिखने-बोलने या सीधे प्रचार में उतरने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता।
जब उनका परिवार ही उनकी बात नहीं सुन रहा और पार्टी पर पकड़ ढीली हो चुकी है, तब समझदार मतदाता उन्हें क्यों गंभीरता से लेंगे?

बिहार की पहली एनडीए सरकार का कार्यकाल पूरा होने पर जब 2010 में विधानसभा के चुनाव हुए थे,तब सरकार तीन चौथाई बहुमत से सत्ता में लौटी थी। राजद मात्र 22 सीटों पर सिमट गया था।
तब लालू प्रसाद जेल में नहीं थे। उनके धुआंधार प्रचार रूई के बादल की तरह उड़ गए थे।
लोगों ने लालू राज की वापसी रोकने और एनडीए के काम को फिर मौका देने के लिए जमकर वोट दिया था।
एनडीए पर आज भी जनता का भरोसा अटूट है।

डॉल्फिन दिवस पर डॉल्फिन के संरक्षण का लिया संकल्प ।

‘‘डाल्फिन दिवस – 2021’’ के अवसर पर ‘एशिया के मृदुजल सिटैसियन (डाल्फिन) के संरक्षण पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी’ का आयोजन संजय सभागार, अरण्य भवन, पीर अली खान मार्ग, पटना से हाईब्रिड मोड में किया गया। इसका उद्घाटन ‘‘श्री नीरज कुमार सिंह’’, माननीय मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार के कर-कमलों द्वारा किया गया।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता प्रो॰ गिरीश कुमार चैधरी, कुलपति, पटना विश्वविद्यालय द्वारा की गयी। उक्त अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डाॅल्फिन मैन के नाम से विख्यात एवं पद्मश्री प्रो॰ आर॰ के॰ सिन्हा, कुलपति, माता वैष्णों देवी विश्वविद्यालय, जम्मू, श्री दीपक कुमार सिंह, प्रधान सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार एवं प्रो॰ ए॰ के॰ घोष, अध्यक्ष, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, पटना उपस्थित थे।

उद्घाटन समारोह में श्री राजीव रंजन मिश्र, भा.प्र.से., महानिदेशक, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, नई दिल्ली एवं डा॰ धृति बनर्जी, निदेशक, भारतीय प्राणिशास्त्र सर्वेक्षण, कोलकता द्वारा आॅनलाईन संबोधित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा इस अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल वक्ताओं के वक्तव्य के सार-संग्रह की ‘स्मारिका’ का विमोचन किया गया, जिसमें माननीय मुख्य मंत्री, बिहार द्वारा शुभकामना संदेश दिया गया।

साथ ही, कोसी-महानन्दा में डाॅल्फिन एवं उसकी पारिस्थितिकी पर एक वृतचित्र भी मुख्य अतिथि द्वारा रिलीज किया गया। इस पूरे कार्यक्रम को सोशल मीडिया यथा यू-टयूब, ट्विटर एवं फेसबुक पर लाईभ प्रसारित किया गया। इस एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार में उद्घाटन कार्यक्रम के उपरान्त दो तकनीकी सत्र संचालित किये गये जिसमें देश-विदेश से डाॅल्फिन संरक्षण पर कार्य करने वाले नामचीन वैज्ञानिकों, शोधकत्र्ताओं, भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून, आई॰यू॰सी॰एन॰, भारत, राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण, चेन्नई एवं भारतीय प्राणिशास्त्र सर्वेक्षण के प्रतिनिधियों द्वारा संबोधन किया गया।

श्री प्रभात कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)-सह-मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक, बिहार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
उद्घाटन समारोह के उपरान्त प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता पद्मश्री प्रो॰ आर॰ के॰ सिन्हा द्वारा करते हुए गांगेय डाॅल्फिन के संरक्षण एवं प्रबंधन पर प्रारम्भिक संबोधन दिया गया।

उनके द्वारा गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना-सांगू-कर्णफुली नदियों को प्रवाह में बसने वाली गांगेय डाॅल्फिन के व्यवहार, उनकी संख्या स्वरूप एवं डाॅल्फिन पारिस्थितिकी पर निर्भर समुदायों तथा मानवीय गतिविधियों से डाॅल्फिन अधिवास को होने वाली क्षति पर विस्तृत रूप से चर्चा की गयी। डा॰ गिल टी॰ ब्राॅलिक, युनिवर्सिटी आॅफ सेंट एन्ड्रयू (स्काॅटलैंड), यू॰के॰ द्वारा गंगा एवं सिंधु नदियों की डाॅल्फिन पर अपने दो दशकों के शोध का सार आॅनलाईन प्रस्तुत किया गया।

डा॰ नचिकेत केलकर, वन्यप्राणी संरक्षण ट्रस्ट, मुम्बई द्वारा नदियों में मछली प्रबंधन की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किये गये। प्रो॰ बेनाजीर अहमद, बंगलादेश द्वारा बंगलादेश में सिटैसियन के संरक्षण पर वार्ता की गयी। डा॰ कमर कुरेशी, भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा डाॅल्फिन के जाल में फँसने से मृत्यु तथा तेल हेतु उनके शिकार पर चर्चा करते हुए उसके निराकरण के उपायों पर वक्तव्य दिया गया।

प्रो॰ सुनील कुमार चैधरी, तिलकामांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर द्वारा दक्षिण एशिया जलीय डाॅल्फिन हेतु संभावित खतरे एवं उनके निराकरण की आवश्यकता पर चर्चा की गयी। डा॰ समीर कुमार सिन्हा, भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट द्वारा सांेस (डाॅल्फिन) के संरक्षण हेतु पर्यावरणीय एवं वन्यप्राणी संरक्षण नियमों को लागू करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गयी। श्री संदीप कुमार बहेरा, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नदी पारिस्थितिकी तंत्र में गांगेय डाॅल्फिन की पर्यावरणीय भूमिका पर चर्चा करते हुए उसके संरक्षण पर बल दिया गया।

डा॰ दीप नारायण साह, नेपाल द्वारा नेपाल में गांगेय डाॅल्फिन की वर्तमान स्थिति, संभावित खतरे एवं संरक्षण-प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया गया। डा॰ विवेक सक्सेना, पूर्व भारतीय प्रतिनिधि, आई॰यू॰सी॰एन॰ द्वारा सिटैसियन स्पेशलिस्ट ग्रुप के कार्यों की जानकारी दी गयी तथा जलीय जैव-विवधता संरक्षण पर चर्चा की गयी। श्री जस्टिन मोहन, निदेशक, भारतीय जैव-विविधता प्राधिकरण द्वारा भारत में मृदुजल जैव-विविधता के संरक्षण पर संबोधन किया गया।

श्री सुनील कुमार, सहायक महानिदेशक, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रोजेक्ट डाॅल्फिन के लक्ष्यांे एवं डाॅल्फिन संरक्षण हेतु उसकी प्रतिबद्धता पर विस्तृत रूप से चर्चा की गयी। डा॰ अब्दूल वाकिड, भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली में डाॅल्फिन की पारिस्थितिकी एवं उनके संरक्षण पर विचार प्रस्तुत किये गये। डा॰ गोपाल शर्मा, भारतीय प्राणिशास्त्र सर्वेक्षण, पटना द्वारा गंगा एवं कोसी में डाॅल्फिन एवं उसके अधिवास से संबंधित अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के विषय में विस्तार से चर्चा की गयी।

डा॰ अनुपमा कुमारी, प्राणिशास्त्र विभाग, पटना विश्वविद्यालय द्वारा डाॅल्फिन पर जहरीले जलीय पदार्थों से होने वाले प्रभाव पर विस्तृत वक्तव्य दिया गया। इसके अतिरिक्त अन्य वैज्ञानिकों एवं शोधकत्र्ताओं द्वारा भी संगोष्ठी के मुद्दे पर अपने विचार प्रस्तुत किये।

इस अवसर पर श्री आशुतोष, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (Hoff) बिहार, श्री प्रभात कुमार गुप्ता, श्री राकेश कुमार एवं श्री ए॰ के॰ प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, श्री अरविन्दर सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा), बिहार, श्री सुरेन्द्र सिंह, निदेशक, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण, पटना, श्री गोपाल शर्मा, अंतरिम प्रभारी, राष्ट्रीय डाॅल्फिन शोध केन्द्र, पटना, वन विभागीय पदाधिकारीगण, पटना विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, छात्र-छात्रायें एवं मीडियाकर्मी उपस्थित थे।

दिल्ली में बिहार लोक सेवा केंद्र की हुई शुरुआत

बिहार सदन द्वारका में लोक सेवा केंद्र की शुरुआत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार ने किया लोकार्पण

“लोक सेवा प्रदान करने वाला बिहार भवन दिल्ली में देश का पहला राज्य भवन”: प्रधान सचिव

नई दिल्ली, मंगलवार, 5 अक्टूबर

मंगलवार को नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर-19 स्थित बिहार सदन में ‘बिहार लोक सेवाओं का अधिकार’ केंद्र की शुरुआत की गई। माननीय मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार ने पटना से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से लोक सेवा केंद्र का लोकार्पण किया। इस अवसर पर पटना से डॉ. प्रतिमा (भा.प्र. से), अपर मिशन निदेशक, बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार एवं दिल्ली में श्रीमती पलका साहनी (भा.प्र.से), स्थानिक आयुक्त, बिहार भवन, मौजूद थीं।

ग़ौरतलब है कि राजधानी दिल्ली में स्थित बिहारवासी वर्ष 2012 से चाणक्यपुरी स्थित बिहार भवन लोक सेवा केंद्र में ई-सेवाओं के माध्यम से विभिन्न सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। ई सेवाओं के माध्यम से दिल्ली स्थित बिहार के लोगों ने आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, समेत अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ उठाया है। यहाँ मौजूद प्लॉटर मशीन की सहायता से अब तक 500 राजस्व मानचित्र निर्गत किये जा चुके हैं।

सरकारी सेवाओं को नियत समय सीमा में पारदर्शी एवं सुलभ तरीके से ऑनलाइन ई-सेवा पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराने हेतु बिहार सदन द्वारका में भी लोक सेवाओं की पहल की गई है।

सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से यहाँ ‘मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता राशि’ के लिए आवेदन भी किये जा सकेंगे। बिहार भवन के तर्ज पर बिहार सदन, द्वारका में भी प्लॉटर मशीन की सुविधा बहाल की जाएगी। बिहार सदन लोक सेवा केंद्र में आईटी प्रबंधक और आईटी सहायक लोगों की सेवा में मौजूद रहेंगे।

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार ने अपने संबोधन में कहा, ‘ये बहुत ख़ुशी की बात है कि इतने कम समय मे बिहार सदन की लोक सेवा केंद्र की शुरुआत की गई है। बिहार भवन में सफलतापूर्वक इस सेवा का क्रियान्वयन किया जा रहा है। अन्य किसी राज्य के मुक़ाबले दिल्ली में ऐसी सुविधा प्रदान करने वाला बिहार भवन पहला राज्य भवन है। मुझे विश्वास है कि बिहारवासियों को लोक सेवाओं की सुविधा का लाभ मिलेगा। मैं स्थानिक आयुक्त को धन्यवाद देता हूँ।”

डॉ. प्रतिमा (भा.प्र. से), अपर मिशन निदेशक, बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार ने अपने संबोधन में कहा, “बिहार सदन में लोक सेवा केंद्र की शुरुआत एक प्रशंसनीय क़दम है। इससे बिहार के लोग जो दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में रहते हैं उन्हें कई आवश्यक प्रमाणपत्र हासिल करने में आसानी होगी।”

स्थानिक आयुक्त श्रीमती पलका साहनी (भा.प्र.से) ने अपने संबोधन में कहा, ”माननीय मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार का बहुत-बहुत धन्यवाद कि उन्होंने बिहार सदन में लोक सेवा केंद्र का लोकार्पण किया। लोक सेवा केंद्र की बिहार भवन इकाई के द्वारा अब तक 1.5 लाख से ज़्यादा सर्टिफिकेट निर्गत किये जा चुके हैं। वहीं, वर्ष 2012 से अब तक मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता योजना के तहत लगभग 45 करोड़ की राशि का भुगतान 5600 मरीजों को किया जा चुका है। भौगोलिक रूप से बिहार सदन, द्वारका बहुत ही महत्वपूर्ण जगह है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में बिहार सदन का लोक सेवा केंद्र बिहारवासियों को बहुत सहूलियत प्रदान करेगा।”

इस लोक सेवा केंद्र का समय सभी कार्यदिवसों को प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा। बिहार सदन लोक सेवा केंद्र लोकार्पण के अवसर पर बिहार सरकार के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

उतार-चढ़ाव के बीच बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए सेंसेक्स, निफ्टी; तेल और गैस शेयरों में तेजी।

लगातार दूसरे दिन मंगलवार को इक्विटी बाजारों ने दिन की शुरुआत नकारात्मक पूर्वाग्रह के साथ की, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया बुल्स ने बाजारों पर नियंत्रण किया, जिससे इंडेक्स में तेजी आई। बीएसई सेंसेक्स 445 अंक बढ़कर 59,744 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 131 अंक उछलकर 17,822 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स चार्ट (05.10.21) एक नजर में

पीएसयू बैंक, रियल्टी और फार्मा को छोड़कर, अन्य सभी क्षेत्रीय सूचकांक तेल और गैस, बिजली और आईटी सूचकांकों में 1-3 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे रंग में समाप्त हुए। बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए।

इंडसइंड बैंक 5% की बढ़त के साथ सेंसेक्स में शीर्ष पर रहा, इसके बाद भारती एयरटेल, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और रिलायंस इंडस्ट्रीज का स्थान रहा।
लाल रंग में नीचे, सन फार्मा सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सेंसेक्स स्टॉक के रूप में 1.33% गिरा, इसके बाद आईटीसी, पावर ग्रिड और अल्ट्राटेक सीमेंट का स्थान रहा।

सेंसेक्स के शेयर एक नजर में

बैंक निफ्टी 0.43% बढ़कर 37,741 पर बंद हुआ, निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 2.8 फीसदी की बढ़त, आईटी इंडेक्स 1.19% की तेजी के साथ बंद हुए।

निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.4 फीसदी चढ़े। आईटी, मीडिया, निजी बैंक, हेल्थकेयर और ऑटो शेयरों में भी खरीदारी में दिलचस्पी देखी गई।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ने का फैसला तेजस्वी के लिए आत्मधाती हो सकता है

बिहार विधानसभा के दो सीटों पर होने वाली उप चुनाव को लेकर बिहार में सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है ।जदयू के लिए इन दोनों  सीटों पर चुनाव जीतना पार्टी के जीवन और मरण से जुड़ा हुआ है। वही राजद इस चुनाव के सहारे यह तय करना चाह रही है कि आने वाले समय में महागठबंधन का स्वरूप क्या होगा।

जदयू उप चुनाव में दोनों सीट पर जीत हासिल करे इसके लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया है और पार्टी में चल रहे अंतर्विरोध पर विराम लगाते हुए नीतीश कुमार ने कुशेश्वर स्थान विधानसभा उप चुनाव का कमान आरसीपी सिंह को दिया है और तारापुर का कमान ललन सिंह को दिया है।

वही ऐसा लगा रहा है जैसे राजद 2024 के लोकसभा और 2025 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के अंदर कांग्रेस की क्या हैसियत रहेंगी इसको लेकर लड़ाई लड़ रहा है।बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि अभी तेजस्वी के सामने प्राथमिकता मिल कर चुनाव लड़ने की होनी चाहिए थी क्यों कि उपचुनाव में जदयू दोनों सीट हार जाती है तो तेजस्वी और मजबूत होंगे।

लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में जिस तरीके से तेजस्वी के साथ बिहार के युवा जुड़े उससे तेजस्वी का विश्वास चरम पर है ऐसे में तेजस्वी बिहार विधानसभा के इस उप चुनाव के सहारे कांग्रेस के कन्हैया फैक्टर और चाचा नीतीश से एक साथ दो दो हाथ करने की तैयारी कर ली हालांकि जानकार कहते हैं तेजस्वी का यह फैसला आत्मघाती भी साबित हो सकता है और इस बात को लालू प्रसाद बखूबी समझ भी रहे हैं और यही वजह है कि लालू प्रसाद पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में बीमार रहने के बावजूद प्रचार करने का फैसला लिया है।

1–नीतीश कुमार का राह आसान हो गया  
2020 के विधानसभा चुनाव का जो परिणाम सामने आया था उससे नीतीश को काफी धक्का लगा भले ही नीतीश के उस हार का सेहरा चिराग के सिर बंधा था लेकिन सच्चाई ये भी था कि बिहार की जनता नीतीश से उब चुकी थी और कुछ नया करना चाह रही थी अभी भी नीतीश कुमार को लेकर जमीन पर अभी भी नजरिया नहीं बदला है लेकिन जिस तरीके से तेजस्वी कांग्रेस को अलग करके महागठबंधन को तोड़ा है उससे नीतीश कुमार की राह आसान हो गयी ।

क्यों कि कांग्रेस से अलग होने की स्थिति में इन दोनों विधानसभा क्षेत्र में चिराग फैक्टर कमजोर पड़ जायेगा क्यों कि नीतीश विरोधी वोट उस तरह के आक्रमक नहीं हो पाएगा जैसा 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान देखने को मिला था ।ऐसा इसलिए होगा कि 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग के साथ पासवान छोड़कर जो भी वोटर जुड़े थे उनकी एक ही मंशा था नीतीश को हराना है लेकिन इस उप चुनाव में कांग्रेस के अलग होने से नीतीश से नाराज वोटर चिराग के साथ पूरी तौर चला जायेगा ऐसा होता दिख नहीं रहा है क्यों कि नाराज वोटर के चिराग के साथ जाने के बावजूद नीतीश कुमार हारते हुए नहीं दिख रहे हैं ऐसे में बिहार को कोई वोटर अपना वोट बर्वाद नहीं करना चाहेगा क्यों कि बिहार के वोटरों का लक्ष्य स्पष्ट रहता है ।

 वैसे महागठबंधन साथ चुनाव लड़ता तो कुशेश्वर स्थान जहां कांग्रेस के प्रत्याशी अशोक राम का अपना व्यक्तिगत संबंध 1980 से है जब उनके पिता बालेश्वर राम रोसड़ा से लोकसभा चुनाव लड़े थे और वो संबंध पीढ़ी दर पीढ़ी से चला आ रहा है ।इसलिए राजद पूरी ताकत भी झौक देगी तब भी यादव और मुस्लिम वोट में 20से 30 प्रतिशत डिवीजन कराने में कामयाब हो जायेंगे इसके अलावा दलित में राम जाति का भी वोट वहां है।

वही बात चिराग की करे तो 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनका उम्मीदवार 13 हजार से अधिक वोट लाया था फिर भी जदयू सात हजार से अधिक वोट से जीत गया था इस बार अगर महागठबंधन साथ रहता तो चिराग यहां करिश्मा कर सकता था क्यों कि रामविलास पासवान का ननिहाल कुशेश्वर स्थान ही है और रामविलास पासवान और रामचंद्र पासवान रोसड़ा लोकसभा से जब चुनाव लड़ते थे उस समय कुशेश्वर स्थान विधानसभा क्षेत्र रोसड़ा लोकसभा क्षेत्र में ही पड़ता था इसलिए रामविलास पासवान का भी इस इलाके से घरेलू रिश्ता रहा है और इस इलाके के ब्राह्मण और राजपूत वोटर से इनका व्यक्तिगत रिश्ता रहा है लेकिन महागठबंधन टूटने से चिराग खास करके सवर्ण वोटर जो जदयू प्रत्याशी शशी हजारी से खासा नाराज है ऐसे में चाह करके भी वोट नहीं दे पाएंगा क्यों कि इस स्थिति में राजद उम्मीदवार चुनाव जीत सकता है अगर कांग्रेस रहता तो यहां को सवर्ण वोटर यह दांव खेल सकता था।

ऐसी ही स्थिति तारापुर विधानसभा में भी उत्पन्न हो सकती है चिराग के प्रत्याशी को  2020 के चुनाव में यहां सात हजार के करीब वोट आया था इस बार सात हजार वोट भी आ जाये तो बड़ी बात होगी क्योंकि यहां भी गठबंधन टूटने का असर दिखेगा अगर पप्पू यादव कांग्रेस से लड़ गया तो फिर राजद का हार निश्चित है ।

 2– अब उपचुनाव में तेजस्वी का साख दाव पर लग गया है 
हालांकि महागठबंधन साथ साथ चुनाव लड़ता और जदयू चुनाव जीत भी जाती तो राजद के सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन अब अगर राजद दोनों सीट हार जाती है और कांग्रेस मुस्लिम वोट में डिवीजन कराने में कामयाब हो जाती है तो फिर 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव में चुनाव में राजद उस हैसियत में चुनाव नहीं लड़ पायेंगी जिस हैसियत राजद 2019 का लोकसभा और 2020 का विधानसभा चुनाव लड़ा था वही दूसरी और जिस तरीके से कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा सहित कई विधायक राजद से दो दो हाथ करने की बात रह रहे हैं ऐसे में कांग्रेस आलाकमान थोड़ा कमजोर पड़े तो उप चुनाव बाद कांग्रेस के विधायकों में बड़ी टूट हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

 इसलिए तेजस्वी का यह दाव आत्मघाती साबित हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्योंकि कांग्रेस के अलग होने से नीतीश कुमार एक बार फिर मजबूत हो सकते हैं और ऐसे में नीतीश कुमार बीजेपी से और अधिक से अधिक मोलजोल करने की स्थिति में आ जायेंगे ।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी व निजी 27 लॉ कालेजों की संबद्धता के मामले की सुनवाई की।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी व निजी 27 लॉ कालेजों की संबद्धता के मामले की सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया को inspection रिपोर्ट तीन सप्ताह में पेश करने का निर्देश दिया।

साथ ही कोर्ट ने कॉउन्सिल को जिन कॉलेजो को पढ़ाई जारी करने की अनुमति दी है, वहां व्यवस्था सम्बन्ध व सुविधाओं के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने को कहा है।

पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट ने सभी लॉ कालेजों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष एक सप्ताह में निरीक्षण हेतु आवेदन देने का निर्देश दिया था। साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया इन कालेजों का वर्चुअल या फिजिकल निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निरीक्षण कमेटी का रिपोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया के संबंधित कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था। यह कमेटी इनके रिपोर्ट पर निर्णय लेगी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया यह देखेगी कि विधि शिक्षा, 2008 के नियमों का पालन इन शिक्षण संस्थानों में किया जा रहा है या नहीं। इन लॉ कालेजों को पुनः चालू करने के लिए अस्थाई अनुमति देते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया किसी प्रकार के नियमों में ढील नहीं देगी।

पिछली सुनवाई में पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी व निजी लॉ कालेजों में नामांकन पर रोक लगा दिया था। इससे पूर्व चांसलर कार्यालय, राज्य सरकार, संबंधित विश्वविद्यालय व अन्य से जवाब तलब किया गया था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश किया था, जिसमें यह कहा गया था कि राज्य में जो लॉ कालेज हैं, उनमें समुचित व्यवस्था नहीं है। योग्य शिक्षकों व प्रशासनिक अधिकारियों की भी काफी कमी हैं। इसका असर लॉ की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

साथ ही साथ बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। याचिकाकर्ता के वकील दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य के किसी भी सरकारी व निजी लॉ कालेजों में रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन, 2008 के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है।

राज्य में सरकारी व निजी लॉ कालेज 27 हैं, लेकिन कहीं भी पढ़ाई की पूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण लॉ की पढ़ाई का स्तर लगातार गिर ही जा रहा है।इस मामले पर 3 सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

पटना हाई कोर्ट सेवानिवृत जजों को मकान खाली करना पड़ सकता है हाईकोर्ट में याचिका दायर

पटना हाई कोर्ट के जजों के सेवानिवृत होने के कई महीनों बाद भी अपने सरकारी आवास खाली नहीं करने के मामलें में पटना हाई कोर्ट ने सुनवाई की। अधिवक्ता दिनेश कुमार की जनहित याचिका चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ मे सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल ने राज्य सरकार से निर्देश लेने के लिए 15 नवंबर,2021 तक की मोहलत ली।

अधिवक्ता दिनेश कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया गया है कि सेवानिवृत जज जस्टिस दिनेश कुमार सिंह, जस्टिस अंजना मिश्रा,जस्टिस पी सी जायसवाल और जस्टिस ए के त्रिवेदी कई माह पहले सेवा निवृत हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने अब तक सरकारी आवास खाली नहीं किया है।


उन्होंने बताया कि जस्टिस दिनेश कुमार सिंह अक्टूबर, 2020,जस्टिस पी सी जायसवाल दिसम्बर, 2019 और जस्टिस ए के त्रिवेदी अगस्त,2020ं में अपने पद से सेवानिवृत हो चुके हैं। पर वे अभी भी सरकारी आवास में बने हुए हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जजों के सेवानिवृत होने के एक महीने के भीतर उन्हें सरकारी आवास खाली करने का प्रावधान है।अगर वे एक महीने के बाद भी सरकारी आवास में रहते हैं,तो उन्हें आवास में रहने के लिए प्रावधान के अनुसार किराया देना होगा।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि अगर कोई राजनीतिज्ञ या नौकरशाह अपना सरकारी आवास खाली नहीं करते है, तो कोर्ट उन्हें सरकारी आवास खाली करने का आदेश देता है। लेकिन उनके द्वारा सेवानिवृत होने के बाद सरकारी आवास खाली नहीं किया जाना गंभीर मामला है।

उन्होंने कोर्ट से इस सम्बन्ध में उचित आदेश पारित करने का अनुरोध किया है, ताकि सेवानिवृत जज अपने सरकारी आवास को खाली कर दे।इस मामले पर 15 नवंबर, 2021 को फिर सुनवाई होगी।

बिहार के अस्पतालों के हाल पर तेजस्वी ने नीतीश पर बोला हमला कहां नीतीश जी भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह है ।

नीति आयोग के रिपोर्ट को लेकर घमासान शुरु हो गया है नीतीश कुमार ने कल मीडिया से बात करते हुए कहा था कि देश के सभी राज्यों को मापने का एक आधार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो विकसित राज्य हैं और जो पिछड़े हैं, इन्हें अलग-अलग करके देखा जाना चाहिए। इससे पिछड़े राज्यों को आगे लाने में सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि बिहार आबादी के हिसाब से देश में तीसरे नंबर पर है, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद बिहार है लेकिन क्षेत्रफल के हिसाब से 12वें स्थान पर है।

1—नीति आयोग ने बिहार के साथ भेदभाव किया है

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों पर बड़े पैमाने पर काम हुए हैं। याद करिए बिहार के अस्पतालों में कुत्ता सोया करता था उस दौर ये बिहार यहां पहुंचा आईजीआईएमएस काम नहीं कर रहा था। अब कितना अच्छा काम कर रहा है। नीति आयोग को पता है कि हमलोग पीएमसीएच को कितने बड़े अस्पताल के रूप में कन्वर्ट कर रहे हैं। देश में ऐसा अस्पताल नहीं है। 5400 बेड का अस्पताल बन रहा है, जिसका काम शुरू हो गया है।
तय कर दिया की चार साल के अन्दर यह काम पूरा होगा। प्रधानमन्त्री के जन्मदिन पर 33 लाख टीकाकरण किया। बापू के जन्मदिन पर 30 लाख का टीकाकरण किया गया, लेकिन काम भी देखना चाहिए। स्वास्थ्य मामलों को लेकर जो रिपोर्ट आई है, उस पर हम लोग अपनी बात नीति आयोग को भेजेंगे और अगली बार मैं खुद नीति आयोग के बैठक में शामिल होंगे ।

2– तेजस्वी का नीतीश कुमार पर बड़ा हमला

आज इसको लेकर तेजस्वी ने नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला है और बिहार के अस्पतालों का क्या हाल है उससे जुड़ी तस्वीरे जारी करके नीतीश कुमार से सवाल किया है कि भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह और बिहार के एडिटर इन चीफ़ श्री नीतीश कुमार जी कल कह रहे थे कि 30 बरस पहले बिहार के अस्पतालों में कुत्ते बैठते थे।

लगता है आदरणीय नीतीश कुमार जी को थकने के अलावा अब आँखों से दिखना और कानों से सुनना भी बंद हो गया है।

हाल की ही कुछ खबरें साँझा कर रहा हूँ ये उन तक पहुँचा देना, दिखा व सुना देना।

  1. ऑपरेशन थिएटर से इलाज के दौरान काटा हुआ पैर लेकर कुत्ता भागा।
  2. नवादा के अस्पताल में बेड पर बैठे कुत्ते
  3. नवजात की उँगलियाँ खा गए चूहे

यह सच्चाई देखने के बाद क्या नीति आयोग की रिपोर्ट की तरह वो यहाँ भी बोल देंगे कि यह सब झूठ है। उनकी इसी खुशफहमी ने बिहार को बर्बाद किया है।

पप्पू यादव के जेल से बाहर आने से राजद की बैचेनी बढ़ी

जेल से बाहर निकलते हैं पूर्व सांसद और जाप नेता राजद और भाजपा पर जमकर निशाना साधा है मीडिया से बात करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि राजद भाजपा दोनों मिला हुआ है ईडी सीबीआई की छापेमारी हुई क्या हुआ सबके सब मिले हुए हैं।
जल्द ही इस खेल का खुलासा करेंगे

राजद बीजेपी की बी टीम पप्पू यादव

तेजस्वी चाहते हैं, बिहार फिरौती के लिए डाक्टरों के अपहरण का दौर भुला दे — सुशील कुमार मोदी

तेजस्वी प्रसाद यादव “डायलॉग विद डाक्टर्स ” में अपनी पार्टी के शासन काल की अराजकता, फिरौती के लिए डाक्टरों के अपहरण और अस्पतालों को दुर्दशा की कड़वी सच्चाइयों को भुला देने की बात करते हैं।

ये बातें न लोग भूले हैं और न कोई प्रबुद्ध समाज राजद के राजनीतिक अपराधों को कभी भुला ही सकता है।
जो अतीत से सबक लेकर वर्तमान को नहीं सुधारते, वे पीछे रह जाते हैं। तेजस्वी पिछली सरकारों के अपराध भुलाने की घुट्टी पिलाना चाहते हैं।

तेजस्वी यादव बतायें कि उनके माता-पिता के राज में एक भी नया मेडिकल कालेज क्यों नहीं खुला?
राजद के शासन में नर्सें केरल से आती थीं, क्योंकि राज्य में नर्सिंग ट्रेनिंग के संस्थान नहीं खुले।
एनडीए सरकार ने न केवल नये मेडिकल कॉलेज खुलवाये, बल्कि उनमें नर्सिंग की पढाई की भी व्यवस्था की।
एनडीए सरकार में चिकित्सा व्यवस्था बेहतर हुई, जिससे अस्पतालों में मरीजों का फुट फॉल कई गुना बढा।

अमीन बहाली में धांधली को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में अमीन के पद पर की जाने वाली नियुक्ति के लिये बनाये गए सूची को निरस्त करने के लिये दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने नारायण चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के साथ साथ राजस्व एवम भूमि सुधार बिभाग के प्रधान सचिव और बिहार संयुक्त तकनीकी परीक्षा सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जबाब देने के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राज कुमार राजेश ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने सूबे में अमीनों के 1767 पदों पर नियुक्ति के लिए 21 दिसंबर 2019 को एक विज्ञापन निकाला था। विज्ञापन के बाद इस पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों ने अपना आवेदन जमा किया।

सरकार द्वारा नियुक्ति के हेतु आवेदनों की छंटनी कर एक सूची वेवसाईट पर डाली गई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि जो सूची वेवसाईट पर अपलोड किया गया, उसमे ज्यादातर वैसे लोगों का नाम शामिल था, जिनके पस इस पद पर नियुक्त होने के लिए निर्धारित तकनीकी योग्यता नही थी।

जिन लोगों के पास इस पद के लिये निर्धारित तकनीकी योग्यता था ,उनका नाम इस सूची में शामिल नही था।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि इस तरह के गैर तकनीकी लोगों की नियुक्ति करने के लिये सरकार ने पहले भी प्रयास किया था। इसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था।।
इसके बाद भी फिर उसी प्रकार का लिस्ट सरकार बना रही है ,जो कि गलत और प्रावधानों का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि सरकार द्वारा बनाये गए सूची को निरस्त कर अमीन पद पर नियुक्ति के लिए तकनीकी योग्यता रखने वाले लोगों की सूची बनाने का निर्देश राज्य सरकार को दे।

उनकी योग्यता और सर्वे सेटलमेंट एक्ट में निर्धारित योग्यता के अनुसार बनाने का निर्देश सरकार को दिया जाय।इस मामले पर अगली सुनवाई फिर चार सप्ताह बाद होगी।

नीति आयोग ने बिहार के साथ न्याय नहीं किया है — नीतीश कुमार

सीएम नीतीश कुमार जातीय जनगणना और नीति आयोग के रिपोर्ट पर जमकर बोले उन्होंने कहा कि विधानसभा उपचुनाव के बाद सभी दल बैठेंगे। मुझे भरोसा है की जातीय जनगणना पर बिहार में सर्वसम्मति से कोई निर्णय लिया जाएगा फिर आगे क्या करना है इस पर विचार किया जायेंगा।


वही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नीति आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि देश के सभी राज्यों को मापने का एक आधार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो विकसित राज्य हैं और जो पिछड़े हैं, इन्हें अलग-अलग करके देखा जाना चाहिए। इससे पिछड़े राज्यों को आगे लाने में सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि बिहार आबादी के हिसाब से देश में तीसरे नंबर पर है, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद बिहार है लेकिन क्षेत्रफल के हिसाब से 12वें स्थान पर है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों पर बड़े पैमाने पर काम हुए हैं। याद करिए बिहार के अस्पतालों में कुत्ता सोया करता था उस दौर ये बिहार यहां पहुंचा आईजीआईएमएस काम नहीं कर रहा था। अब कितना अच्छा काम कर रहा है। नीति आयोग को पता है कि हमलोग पीएमसीएच को कितने बड़े अस्पताल के रूप में कन्वर्ट कर रहे हैं। देश में ऐसा अस्पताल नहीं है। 5400 बेड का अस्पताल बन रहा है, जिसका काम शुरू हो गया है।

तय कर दिया की चार साल के अन्दर यह काम पूरा होगा। प्रधानमन्त्री के जन्मदिन पर 33 लाख टीकाकरण किया। बापू के जन्मदिन पर 30 लाख का टीकाकरण किया गया, लेकिन काम भी देखना चाहिए। स्वास्थ्य मामलों को लेकर जो रिपोर्ट आई है, उस पर हम लोग अपनी बात नीति आयोग को भेजेंगे और अगली बार मैं खुद नीति आयोग के बैठक में शामिल होंगे ।

चार दिन की गिरावट को तोड़, सेंसेक्स 534 और निफ्टी 159 अंक चढ़ा; धातु, फार्मा, बैंकों में चमक।

सोमवार को सेंसेक्स 533.74 अंक ऊपर 59,299.32 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 159.20 अंक ऊपर 17,691.25 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स चार्ट (04.10.21) एक नजर में

एनएसई पर सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.99 फीसदी चढ़ा। निफ्टी फार्मा 1.54 फीसदी चढ़ा।
बैंक निफ्टी भी 0.95 फीसदी चढ़ा।

एनटीपीसी सेंसेक्स के शीर्ष लाभ के रूप में 4.25% ऊपर था, इसके बाद बजाज फिनसर्व, भारतीय स्टेट बैंक और बजाज फाइनेंस थे। बजाज ऑटो सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला स्टॉक था, जो 0.78% नीचे था, उसके बाद एचयूएल और नेस्ले इंडिया थे।

सेंसेक्स के शेयर एक नजर में

बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में 1.5-1.5 फीसदी की तेजी रही। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 25,603.88 पर बंद हुआ, बीएसई स्मॉलकैप 28,696.72 पर बंद हुआ।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

बिहार स्टेट फूड कमीशन के चेयरमैन की नियुक्ति पर उठा सवाल हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस

पटना हाई कोर्ट ने बिहार स्टेट फूड कमीशन के चेयरमैन की नियुक्ति मामले पर सुनवाई करते हुए कमीशन के चेयरमैन को नोटिस जारी किया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की संजय करोल की खंडपीठ ने वेटरन्स फोरम फोर ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक लाइफ की जनहित याचिका पर सुनवाई की।कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए याचिका को स्वीकार कर लिया।

याचिका में राज्य सरकार के खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी के हस्ताक्षर से जारी उस अधिसूचना को रद्द करने का आग्रह किया गया है।इसके तहत ही राज्यपाल के आदेश से चेयरमैन के पद पर नियुक्त किया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार का उक्त मामले में कहना है कि बिहार स्टेट फूड कमीशन रूल, 2014 के सेक्शन 7 के तहत की गई नियुक्ति नेशनल फूड कमीशन एक्ट, 2013 के सेक्शन 16 और बिहार स्टेट फ़ूड कमीशन रूल, 2014 के सेक्शन 7 की पूरी तरह से उपेक्षा करके किया गया है।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने कहा कि इस प्रकार से नियुक्ति करना सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा दिये गए निर्णयों के विपरीत भी है। इसलिए चेयरमैन के पद पर की गई नियुक्ति गैरकानूनी, अनुचित और मनमाना है। चेयरमैन की नियुक्ति के लिए राज्यपाल के आदेश से राज्य सरकार के विशेष सचिव के हस्ताक्षर से 6 अप्रेल, 2017 को जारी अधिसूचना किया गया।

जबकि इसे अमल में लाने के लिए तीन सदस्यीय चयन कमेटी को बिहार स्टेट फ़ूड कमीशन के चेयरमैन मेम्बर की नियुक्ति हेतु अनुशंसा करनी थी। इस तरह ये नियुक्ति प्रावधान के विरूद्ध हैं।इस मामले पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।

बिहार में महागठबंधन टूटा राजद और कांग्रेस हुए जुदा जुदा

राहुल गांधी अभिमन्यु की तरह भारतीय राजनीति के चक्रव्यूह में फंसते जा रहे हैं अभी पंजाब,राजस्थान और छत्तीसगढ़ से बाहर निकल भी नही पाये थे कि बिहार में राजद वर्षो पूरानी गठबंधन को नजरअंदाज करते हुए कांग्रेस के परम्परागत सीट कुशेश्वरअस्थान से अपना प्रत्याशी उतार दिया है ।

कहां ये जा रहा है कि राजद कन्हैया को लेकर सहज नहीं है इसलिए उप चुनाव में राजद कांग्रेस के परम्परागत सीट पर उम्मीदवार उतार दिया है हलाकि कल से लगातार दोनों दलों के नेताओं के बीच बातचीत चल रही है लेकिन राजद कांग्रेस से आश्वासन चाहती है कि कन्हैया बिहार की राजनीति में दखल ना दे ।

1–सुविधाभोगी कांग्रेसी सकते में

वैसे बिहार के जो सुविधाभोगी राजनीति करने वाले कांग्रेसी हैं कन्हैया के आने से पहले से ही असहज थे ऐसे में राजद के इस रुख से उनकी बाँछें खिल गयी है, और अब वो मजा ले रहे हैं क्यों कि ऐसा पहली बार हुआ है जब बिहार कांग्रेस के प्रभारी गठबंधन को लेकर लालू प्रसाद से बात करने के बजाय राजद के श्याम रजक जैसे नेता से सीट को लेकर बात कर रहे थे जबकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है बिहार प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेता बिहार उप चुनाव को लेकर संगठन के शीर्ष पर बैठे नेता और बिहार प्रभारी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं ।

2—राहुल आर पार के मूड में है

ऐसे में राहुल के सामने बिहार को लेकर सिर मुड़ाते ही ओले पड़े वाली स्थिति उत्पन्न हो गयी है लेकिन आज सुबह राहुल ने स्पष्ट कर दिया है कि राजद कुशेश्वरअस्थान से उम्मीदवार वापस नहीं लेती है तो दोनों जगह से कांग्रेस चुनाव लड़ेंगी ।राहुल के संकेत के बाद बिहार कांग्रेस के नेता तेजस्वी पर सीधे सीधे हमला शुरु कर दिया है ।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक शकील अहमद शाह ने कहा कि बिहार उपचुनाव में महागठबंधन टूट चुका है तेजस्वी मनमानी पर उतर आये हैं उन्होंने कहा कि बिना पूछें घोषणा कर देने का मतलब है राजद भाजपा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई से भाग रही है और कहीं ना कहीं उसे समर्थन दे रही है।

शकील अहमद खां यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि हम दोनों जगह से चुनाव लड़ेंगे और इसकी घोषणा बहुत जल्द करेंगे उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन बना था तब उस समय स्थिति ज्यादा अच्छी थी और हमारा वोटिंग का स्ट्राइक रेट भी बहुत अच्छा था राजद अपने गिरेबान में झाके क्यों जीतते जीतते हार गये ।

वही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा है कि तारापुर और कुशेश्वरस्थान के लिए कांग्रेस अपना उम्मीदवार की घोषणा कल करेंगी राजद ने गठबंधन धर्म नहीं निभाया और हमसे बिना पूछे राजद ने दोनों सीटों पर कैंडिडेट की घोषणा कर दी है ।

राजद के विधान पार्षद रामबली चंद्रवंशी ने कहा कि कांग्रेस के जीत का स्ट्राइक रेट कमजोर है इसलिए राजद चुनाव लड़ने का फैसला लिया है ताकि साम्प्रदायिक शक्तियां को रोक सके अब कांग्रेस पर निर्भर करता है कि वो किसके साथ खड़ी रहती हैं।

देखिए आगे आगे होता है क्या लेकिन यह तय हो गया है कि आने वाले समय में अब राजद और कांग्रेस इस उप चुनाव में अलग अलग राह पकड़ लिये तो फिर बिहार की राजनीति की दिशा बदल जायेंगी । हो ना हो विधानसभा उप चुनाव में राजद कही दोनों सीट हार गया तो फिर तेजस्वी चक्रव्यूह में फंस जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी इसलिए लालू प्रसाद किसी भी स्थिति में चुनाव प्रचार अभियान में शामिल होना चाह रहे हैं क्यों कि उन्हें भी पता है कि कांग्रेस से रिश्ता टूटा तो फिर तेजस्वी तभी मजबूत रहेगा जब उप चुनाव का दोनों सीट राजद जीत जाये ।

पप्पू यादव के रिहा होने से बिहार की सियासत गरमाई

32 साल पुराने अपहरण एक मामले में पिछले पॉच माह से न्यायिक हिरासत में रहे पप्पू यादव को अदालत ने आज रिहा कर दिया है ।

मधेपुरा व्यवहार न्यायालय के विशेष अदालत ने 32 साल पुराने अपहरण के एक मामले में जाप सुप्रीमो सह पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव को रिहा करने के आदेश दे दिए हैं ।

आज अंतिम फैसला सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष अदालत (MP/MLA cases) मधेपुरा निशिकांत ठाकुर ने पप्पू यादव को साक्ष्य के अभाव में रिहा करने के आदेश दिए हैं ।

गरीबों के लिए अब समाज में कही भी जगह नहीं बचेगी क्या ?

2021 के NEET और JEE Mains के परीक्षाफल अभी प्रकाशित हुए। साथ में यह खबर भी कि दोनों परीक्षाओं में भ्रष्टाचार हुआ। पैसों पर सीट खरीदे और बेचे गए।

मैं करीब 20 वर्षों से गरीब मेधावी बच्चों को इन प्रतियोगिताओं में सफल होने के लिए पढ़ाता आया हूँ। मेरे लिए यह मात्र “स्वान्तः सुखाय” के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। ऐसे बच्चों की संख्या कई हज़ारों में है जिनके जीवन में आर्थिक बदलाव भी आया।

इस त्रासदी को देखकर मन मलीन एवं दुःखी हो गया। इच्छा हुई कि अब अपने प्रयास को विराम दे दूँ। मन को समझाया कि ऐसे भी उम्र बढ़ रही है। गरीबों के लिए इस तरह का प्रयास अगर व्यवस्था को मान्य नहीं है तो किस हद तक लड़ाई लड़ी जा सकती है? गरीबों के लिए प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता पाकर आगे बढ़ना ही एकमात्र विकल्प बच गया था। वहाँ भी अमीरों के द्वारा उस रास्ते को घेरने की कोशिश की जा रही है।

अंदर से आवाज़ आई – “हथियार मत डालो”। अर्थ इतना ही निकला कि भ्रष्टाचार से इन प्रतियोगिताओं में गरीबों के लिए सीट की संख्या कम ज़रूर हो जाएगी, फ़िर भी कुछ गरीबों को तो लाभ मिलेगा।

प्रयास जारी रहेगा जबतक अमीर लोग गरीबों के सभी रास्ते बंद नहीं कर देते।

कन्हैया को बीजेपी पोलिटिकल पंचिंग बैग के रूप में तैयार किया है।

कन्हैया कुमार कम्युनिस्टों की प्याली में तूफान पैदा करने वाले पहले युवा नेता नहीं हैं। मुझे इस संदर्भ में देवी प्रसाद त्रिपाठी (डीपीटी) की याद आती है, जो 1975 से 1976 तक एसएफआई की ओर से जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। जेएनयू जब मैं आया, डीपीटी हम छात्रों के बीच आइकॉन थे। 1983 में ख़बर मिली कि डीपीटी तत्कालीन कांग्रेस महासचिव राजीव गांधी के सलाहकार हो गये। डीपीटी की क्रांतिकारी-वैचारिक छवि ऐसी भरभरा कर गिरी कि छात्रों का किसी भी आइकॉन पर से भरोसा उठ गया। मगर, डीपीटी की महत्वाकांक्षा 1999 में एनसीपी में आने के बाद पूरी हुई। 3 अप्रैल 2012 से 2 अप्रैल 2018 तक डीपीटी राज्यसभा सदस्य रहे।

लोक सभा के पूर्व सदस्य रामराज (अब डॉ. उदितराज) जेएनयू में एसएफआई राजनीति से निकले थे. इनकम टैक्स के एडिशनल कमिश्नर थे, 24 नवम्बर 2003 को पद से इस्तीफा देकर इंडियन जस्टिस पार्टी खड़ी की, फ़रवरी 2014 में बीजेपी ज्वाइन किया, और चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. 2019 में बीजेपी से टिकट मिलने की मनाही के बाद उदित राज ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. प्रश्न है, कांग्रेस में जाकर उदित राज अखिल भारतीय दलित चेहरा क्यों नहीं बन पा रहे? बिहार-बंगाल के चुनावों में पिछड़ों, अनुसूचितों के बीच उन्हें प्रोजेक्ट नहीं किया जा सका, पंजाब, यूपी के दलित पॉकेट में उदित राज का यदि इस्तेमाल नहीं हो रहा, तो कहीं न कहीं पार्टी के भीतर बाधा दौड़ है ।

शकील अहमद ख़ान एसएफआई के छात्र नेता थे जो 1992-93 में जेएनयूएसयू के अध्यक्ष बने, उनका भी राजनीतिक कायान्तरण हुआ और कांग्रेस के एमएलए बन गये। एक और एसएफआई नेता, जेएनयूएसयू के दो बार प्रेसिडेंट रहे बत्ती लाल बैरवा ने कांग्रेस ज्वाइन कर लिया। सैयद नासिर अहमद एसएफआई से 1999 में जेएनयूएसयू के अध्यक्ष थे। नासिर अहमद फिलहाल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सदस्य है। संदीप सिंह अल्ट्रा लेफ्ट सोच वाली आइसा को प्रतिनिधित्व देते हुए 2007-2008 में जेएनयूएसयू के प्रेसिडेंट चुने गये। क्रांतिकारी भाषण देते थे, अब सुना कि प्रियंका गांधी के भाषण लेखक संदीप सिंह ही हैं। आइसा के ही मोहित के पांडे ने ‘कांग्रेस शरणम गच्छामि’ का रास्ता चुना और प्रियंका के क़रीबी नेताओं में से एक हो गये।

मैं केवल जेएनयू का उदाहरण दे रहा हूँ, जहाँ से इतने सारे लेफ्ट छात्र नेता कांग्रेस में गये, क्या इससे कांग्रेस में ढांचागत परिवर्तन हो गया, या कांग्रेस मज़बूत हो गई? केवल महत्वाकांक्षा की मृगमरीचिका इन्हें मूल विचारधारा से बाहर की ओर खींच ले आती है। यदि डी. राजा, विनय विश्वम, अतुल अंजान या फिर अमरजीत कौर को ये भ्रम है कि कन्हैया कुमार को इन लोगों ने तैयार किया, तो उसका कुछ नहीं किया जा सकता। दरअसल, कन्हैया कुमार को बीजेपी ने एक ऐसे ‘पोलिटिकल पंचिंग बैग’ के रूप में तैयार किया, जिसे तथाकथित राष्ट्रवादी जब चाहें टुकड़े-टुकड़े गैंग बोलकर घूंसे लगा सकते हैं। इससे कन्हैया कुमार का क़द बढ़ता है। जिस दिन ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ बोलना बंद हो जाएगा, कन्हैया की ब्रांडिंग धुमिल पड़ जाएगी। डीपी त्रिपाठी की तरह कन्हैया कुमार का लक्ष्य भी राज्यसभा है, या शायद उससे भी कहीं ज़्यादा. महत्वपूर्ण यह नहीं कि कन्हैया कांग्रेस में आ गये, महत्वपूर्ण यह है कि वहां कितने दिन टिक कर रहते हैं !

( पुष्पमित्र)
ईयू-एशिया न्यूज़ के नई दिल्ली संपादक.)

लालू प्रसाद को बंधक बनाने का आरोप गंभीर, सीबीआई संज्ञान ले – सुशील कुमार मोदी

लालू प्रसाद चारा घोटाला मामले में जमानत पर हैं, इसलिए उन्हें बंधक बनाये जाने के परिवार के बड़े बेटे के आरोप को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

लालू प्रसाद को बंधक बनाने का आरोप गंभीर, सीबीआई संज्ञान ले – सुशील कुमार मोदी

लालू को बंधक बनाये जाने वाले बयान को लेकर बिहार की राजनीति गरमाई

लालू के लाल तेज प्रताप द्वारा लालू के बंधक वाला दिए गए बयान के बाद बिहार के राजनितिक गलियारों में भूचाल आ गया है । इस बयान के बाद एनडीए को एक नया मुद्दा मिल गया है । तेज प्रताप के बयान देने के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष् डॉ संजय जायसवाल ने एक बड़ा बयान दिया है ।

संजय जायसवाल ने कहा कि राजद अब औरंगजेब कि पार्टी बन गई है । क्योकि तेजस्वी यादव अपने पुरे परिवार को समाप्त कर राजद का मालिक बनना चाहते हैं । और आने वाले वक्त में दूसरा कोई नहीं बल्कि तेजस्वी के शादी के बाद उनका जो पुत्र जन्म लेगा वही राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष् बनेगा ।

क्या कहा संजय जयसवाल ने जरा सुनीय …..

लालू के लाल तेज प्रताप द्वारा लालू के बंधक बनाये जाने के बयान को लेकर बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है।तेज प्रताप कल छात्र संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि कुछ लोग राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहते हैं और इसके लिए मेरे पिता लालू जी को बंधक बनाये हुए हैं ।

जरा आप भी लालू प्रसाद को लेकर क्या कहा रहा है तेज प्रताप…

हलाकि तेज प्रताप का बयान सीधे तौर पर तेजस्वी पर हमला माना जा रहा है दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी ने कहा कि लालू को बंधक बनाये जाने पर कहा कि
लालू प्रसाद यादव को बंधक बनाने की बात उनके व्यक्तित्व से नहीं मिलता है। लालू प्रसाद यादव ने कई ऐसे कार्य किए हैं जिससे देश और बिहार के लोगों ने पहचानते हैं, लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे, रेल मंत्री रहे दो प्रधानमंत्री बनाया आडवानी को जेल भेजा है ऐसे विराट व्यक्तित्व को कौन बंधक बना कर रख सकता है

आप भी सुनिए लालू प्रसाद को बंधक बनाये जाने पर क्या कहां तेजस्वी…

बिहार में बाढ़ ने फिर दी दस्तक

मुख्यमंत्री ने चक्रवाती तूफान के कारण बाढ़ जैसे हालात को देखते हुये पटना, नालंदा एवं नवादा जिले के प्रभावित कई इलाकों का सड़क मार्ग से जायजा लिया, राहत कार्य को लेकर अधिकारियों को दिये आवश्यक निर्देश ।

पटना 02 अक्टूबर 2021 :- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने चक्रवाती तूफान के कारण बाढ़ जैसे हालात को देखते हुये पटना, नालंदा एवं नवादा जिले के प्रभावित कई इलाकों का सड़क मार्ग से जायजा लिया। लगभग छह घंटे तक मुख्यमंत्री ने प्रभावित इलाकों दौरा किया और ग्रामीणों से स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने नालंदा जिले के बेलछी प्रखण्ड के भीखोचक दरियापुर गांव में पैदल जाकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बात कर उनके सुझाव भी लिये और अधिकारियों को गांव के पास जलजमाव की स्थिति का स्थायी समाधान हेतु आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने बिंद के पास जिराइन और कुम्हरी नदी में आई उफान के कारण टूटे हुए तटबंध का स्थल पर पैदल जाकर निरीक्षण किया। वहां के ग्रामीणों की समस्याओं को भी मुख्यमंत्री ने गौर से सुना और इसके तत्काल समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कतरीसराय में सकरी नदी के कारण आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान हेतु समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के अंतर्गत पंचाने / धनार्जय नदी के बढ़े ।

हुये जलस्तर का भी जायजा लिया। पटना लौटने के क्रम में मुख्यमंत्री ने रहुई प्रखण्ड अन्तर्गत डिहरा पुल से पंचाने नदी के बढ़ते जलस्तर को देखा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि यहाँ चार-पाँच गाँव नदी के बढ़े जलस्तर के ।

कारण पूरी तरह प्रभावित हुये हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी नालंदा को अविलम्ब सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे नालंदा एवं नवादा के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने आये हैं। इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद के लिए जो भी जरुरी इंतजाम हैं, वे सभी किये जायेंगे।

निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, सांसद श्री कौशलेन्द्र कुमार, विधायक श्री जीतेन्द्र कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री संजीव हंस, पटना प्रमंडल आयुक्त श्री संजय कुमार अग्रवाल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, नालंदा के जिलाधिकारी श्री योगेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री हरि प्रसाथ एस० सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण एवं अभियंतागण उपस्थित थे।

तीनकठिया आन्दोलन से जुड़े लोकगीत

तीनकठिया स दियेलहुं मुक्ति आबि अहां यउ गाँधी जी

कहिया धरि हम गहुंम उगेबै आब अहां आउ गाँधी जी

आरि कटैये, धुरि कटैये, कटैये पूरजी गांधी जी
हडपि खेत सरकार कहैये, चलयनै मरजी गांधी जी
कोना हम अपन खेत लुटेबै, आब अहां आउ गांधी जी
तीनकठिया स दियेलहुं मुक्ति आबि अहां यउ गांधी जी

कहिया धरि हम गहुंम उगेबै आब अहां आउ गाँधी जी

माछ ये उपटल, पान ये उपटल, उपटल मखान ये गाँधी
पोखरिक ठेकेदार कहैये, चुका लगान ये गाँधी जी
कथी स अपन खेत पटेबै, आब अहां आउ गाँधी जी
तीनकठिया स दियेलहुं मुक्ति आबि अहां यउ गाँधी जी

कहिया धरि हम गहुंम उगेबै आब अहां आउ गाँधी जी

कार्ड ये भेटल, वार्ड ये भेटल, भेटल आधार ये गाँधी जी
देशक सब अखबार कहैये, छै रोजगार ये गाँधी छी
कतए हम अपन पेट नुकेबै, आब अहां आउ गाँधी जी
तीनकठिया स दियेलहुं मुक्ति आबि अहां यउ गाँधी जी
कहिया धरि हम गहुंम उगेबै आब अहां आउ गाँधी जी

कवि : भवेशनाथ

प्रजातंत्र क़ा आधार है मतदाता सूची की शुद्वाता

वर्ष 2005 में, बिहार में दो बार विधानसभा के चुनाव हुए। एक फरवरी और दूसरा अक्टूबर में। बीच में राष्ट्रपति शासन का दौर रहा। केंद्रीय चुनाव आयोग ने बिहार के दुसरे चुनाव को बहुत गंभीरता से लिया था। पिछले करीब एक दशक से बिहार के चुनावी परिणामों पर आम आदमी का भरोसा उठ सा गया था जिस वजह से हर चुनाव के समाप्त होते ही आरोप-प्रत्यारोप के दौर शुरू हो जाते थे। किसी भी प्रजातंत्रीय व्यवस्था की सेहत के लिए यह स्थिति अनुकूल नहीं होती है।

तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त अत्यंत गंभीर स्वभाव के व्यक्ति थे। यद्यपि कि मैं मात्र IG रैंक का पदाधिकारी था और उनसे मेरा कोई व्यक्तिगत सम्बन्ध भी नहीं था, तथापि उन्होंने मुझे अलग से अपने कार्यालय में तलब किया यह समझने के लिए कि बिहार में स्वच्छ चुनाव कैसे कराया जा सकता है? उनके समक्ष बैठते ही उनका यह सीधा और स्पष्ट प्रश्न मेरे कानों में पड़ा। मैंने उत्तर दिया , “श्रीमान, कोई भी चुनाव उतना ही स्वच्छ होगा जितना कि उसका वोटर लिस्ट। अगर वोटर लिस्ट भ्रष्ट हुआ तो चुनाव स्वच्छ हो ही नहीं सकता।”

अक्टूबर 2005 के बिहार चुनाव का मूल मन्त्र मानो वोटर लिस्ट की शुद्धता बन गया था। एक विधानसभा क्षेत्र में जहाँ गंगा नदी के कटाव के कारण कई पंचायत लाचीरगी हो गए थे, वहाँ के लोगों का नाम विस्थापित होने के बाद भी वोटर लिस्ट में रखा जा रहा था। इसका चुनाव परिणाम पर अस्वस्थ प्रभाव पड़ता था। उस चुनाव में वोटर लिस्ट को “साफ़” करने के अभियान में बड़ी संख्या में बोगस वोटर्स को लिस्ट से निकाला गया।

चुनाव के परिणाम चौंकाने वाले आए। जो पार्टी हारी वह भी अपनी हार स्वीकार कर रही थी।

लम्बे समय तक किसी एक राजनीतिक व्यवस्था का रहना चुनावी प्रक्रिया को “सब्वर्ट” अर्थात विकृत कर देता है। “सबवर्ज़न” की शुरुआत होती है वोटर लिस्ट को भ्रष्ट कर देने से और फ़िर हर कदम पर भ्रष्ट तरीका अपनाया जाता है। इस चुनाव ने दिखा दिया था कि सिर्फ़ एक वोटर लिस्ट को ठीक करने से ही सबवर्ज़न का प्रायः पूरा विष निष्क्रीय हो जाता है।

वोटर लिस्ट की व्यापकता और शुद्धता, दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं।

लेखक — अभयानंद पूर्व आईपीएस अधिकारी

शुभ हो यह दिवस

2अक्तूबर, 2021.
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अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस की बधाइयाँ!
गांधी जयंती के दिन सत्यानुसरण का संकल्प !

शुभ हो यह दिवस !
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मैं स्वीकार करता हूँ ,
गांधी अतीत नहीं, भविष्य हो हमारा!
क्यों कि,
जहर घोलते उद्योग,
विषैली हो चुकी मिट्टी,
विषाक्त वायुमंडल का समाधान है गाँधी !

दूषित राजनीति,
आसुरी तंत्र,
काटने-बाँटने के,
लूटने-कूटने के कारोबार से,
हृदय हीन व्यवसाय से,
निर्मम आचरण और
तद्जन्य घृणा,कटुता,विभेद
भय,संत्रास,कुण्ठा, अवसाद से
मुक्ति का मार्ग है, गाँधी!

सियासत में मनुष्यता,
कारोबार में शुचिता,
समाज में समंजन,
व्यवहार में शील, संयम, परोपकार,
कामना में शांति सद्भाव, समरसता की राह है, गाँधी!

तनाव-दुराव की महामारी,
कट्टरता की व्याधि,
कुटिल, दुष्ट, आसुरी दुष्चक्र से
परित्राण का पथ है, गाँधी !
राजनीति का,
और धर्म का,
और, धर्म-निष्ठ राजनीति का
मंत्र है, गांधी!

सोचो ना,
और कौन कर सकता था, कीर्त्तन-
“अल्लाह-ईश्वर तेरो नाम”
तब,
शैतानी सेकुलर और सिरफिरे कम्यूनल की
औषधि है, गाँधी !
भारत देश की सूरत से एकाकार होता
एक आकार है, गाँधी!
++
जब,
अनेक राष्ट्रों की गुंथी एक माला है भारत,
सुमनोहर सुमनों का
एक हार भारत,
रंग-बिरंगे सुवास की
क्यारियाँ है, भारत
तब , इसका
निर्माता-पिता-जनक हो नहीं सकता कोई एक-

युक्तिसंगत नहीं कदाचित,
मानना किसी एक को “राष्ट्र-पिता”!

वाल्मीकि और कृष्ण द्वैपायन वेद-व्यास के,
महावीर और बुद्ध के,
पतंजलि और शंकराचार्य के,
आचार्य शुक्र और अशोक के,
राजेन्द्र चोल और कृष्ण देव राय के,
अथवा,
नानक, कबीर, कम्बन के,
कृत्तिवास, रामानुज , रैदास के,
तुलसी, जायसी रस-खान के
निर्मित-पोषित-विकसित
राष्ट्र का पिता
नहीं है, गांधी !

किंतु,
अवश्य ही
उन अनेक आदर्शो का
वाहक,दण्डधर,ध्वजाधारी है, गाँधी !

शतशः प्रणाम उस गांधी को!
विषाक्त इस संसार के
“वांछित भविष्य” को
सादर नमन !

लेखक –नेतरहाट स्कूल के छात्र

गाँधी और चंपारण

आज महात्मा गाँधी की जयंती पर मैं थोड़ी-सी चर्चा उस एक शख्स की करना चाहता हूं जो अगर न होता तो न गाँधी नहीं होते और न हमारे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास वैसा होता जैसा आज हम जानते हैं। वे एक शख्स थे चंपारण के बतख मियां। बात 1917 की है जब दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद चंपारण के किसान और स्वतंत्रता सेनानी राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर गाँधी डॉ राजेन्द्र प्रसाद तथा अन्य लोगों के साथ अंग्रेजों के हाथों नीलहे किसानों की दुर्दशा का ज़ायज़ा लेने चंपारण आए थे। चंपारण प्रवास के दौरान उन्हें जनता का अपार समर्थन मिला था।

लोगों के आंदोलित होने से जिले में विद्रोह और विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की प्रबल आशंका थी। वार्ता के उद्देश्य से नील के खेतों के तत्कालीन अंग्रेज मैनेजर इरविन ने मोतिहारी में गांधी जी को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया। बतख मियां इरविन के ख़ास रसोईया हुआ करते थे।

इरविन ने गाँधी की हत्या के के उद्देश्य से बतख मियां को जहर मिला दूध का गिलास देने का आदेश दिया। निलहे किसानों की दुर्दशा से व्यथित बतख मियां को गांधी में उम्मीद की किरण नज़र आई थी। उनकी अंतरात्मा को इरविन का यह आदेश कबूल नहीं हुआ। उन्होंने गांधी जी को दूध का ग्लास देते हुए वहां उपस्थित राजेन्द्र प्रसाद के कानों में यह बात डाल दी।

उस दिन गाँधी की जान तो बच गई लेकिन बतख मियां और उनके परिवार को बाद में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। अंग्रेजों ने उन्हें बेरहमी से पीटा, सलाखों के पीछे डाला और उनके छोटे-से घर को ध्वस्त कर कब्रिस्तान बना दिया। देश की आज़ादी के बाद 1950 में मोतिहारी यात्रा के क्रम में देश के पहले राष्ट्रपति बने डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने बतख मियां की खोज खबर ली और प्रशासन को उन्हें कुछ एकड़ जमीन आबंटित करने का आदेश दिया।

बतख मियां की लाख भागदौड़ के बावजूद प्रशासनिक सुस्ती के कारण वह जमीन उन्हें नहीं मिल सकी। निर्धनता की हालत में ही 1957 में बतख मियां ने दम तोड़ दिया।चंपारण में उनकी स्मृति अब मोतिहारी रेल स्टेशन पर बतख मियां द्वार के रूप में ही सुरक्षित हैं !

आज गाँधी जयंती पर बापू के साथ बतख मियां की स्मृतियों को भी सलाम !

लेखक –ध्रुव गुप्ता पूर्व आईपीएस अधिकारी

गाँधी को कोई मार नहीं सकता है

मैं इतिहास का छात्र रहा हूँ और साहित्य में मेरी स्वाभाविक रूचि रही है। इस नाते इतिहास ने वस्तुनिष्ठता दी, तो साहित्य ने विषयनिष्ठ बनाया। इन सबके बीच मेरी संवेदनशील आलोचना-दृष्टि आकार ग्रहण करती चली गयी, और व्यावहारिक तक़ाज़ों के दबावों के बावजूद आज यही ‘संवेदनशील आलोचना-दृष्टि’ मेरे व्यक्तित्व की पहचान बन चुकी है।

मुझे लगता है कि इस ‘संवेदनशील आलोचना-दृष्टि’ के बिना गाँधी को जानना और समझना मुश्किल है। जब में इतिहास ऑनर्स का छात्र था, तो ग्रेजुएशन के उन दिनों गाँधी और गाँधीवाद की समझ न होने के कारण उसकी नकारात्मक आलोचना ऊर्जा और उत्साह का संचार करती रही, पर जैसे-जैसे गाँधी को जाना-समझा, उनसे प्यार होता चला गया। और अब तो इस प्यार का यह आलम है कि मेरी नज़रों में गाँधी और गाँधीवाद भारतीयता का पर्याय है।

गाँधी होने के मायने:
गाँधी से प्रेम का मतलब है भारत से प्रेम करना, भारतीयता से प्रेम करना। गाँधी से प्रेम किए बिना भारत से प्रेम नहीं किया जा सकता है और गाँधीवाद की समझ के बिना भारतीयता की समझ मुश्किल है। और, गाँधी से नफ़रत करके तो भारत से प्रेम किया ही नहीं जा सकता है। ऐसा कोई भी दावा ढ़कोसला है और ऐसा दावा करने वाले देश को खोखला कर रहे हैं।

इसलिए गोडसेवादियों को मेरा दो-टूक सन्देश है: “गाँधी को तुम मार न सकोगे, और गोडसे को तुम जिला न सकोगे। मारा व्यक्ति को जा सकता है, विचार को नहीं; और तुमने ‘गाँधी’ नाम के व्यक्ति को मारकर यह सुनिश्चित कर दिया कि विचार के रूप में गाँधी मरेगा नहीं, मर ही नहीं सकता, क्योंकि यह रामत्व और रावणत्व के प्रश्न से जाकर सम्बद्ध हो गया।

तुमने रावणत्व का पक्ष लेकर गाँधी को मजबूती से राम के पाले में ले जाकर खड़ा कर दिया। अगर गाँधी को मारना सम्भव होता, तो 30 जनवरी,1948 को गाँधी की हत्या के बावजूद गाँधी का भूत तुम्हें इस कदर डरा नहीं रहा होता और गाँधी तुम्हारी छाती पर चढ़कर मूँग नहीं दल रहे होते।”  

गाँधी भारतीयता के पर्याय:
गाँधी और गाँधीवाद को लेकर मेरी इस समझ को विकसित करने में इतिहास की भूमिका नहीं रही, ऐसा तो मैं नहीं कहूँगा क्योंकि गाँधी को समझने की यात्रा ही इतिहास से शुरू हुई; पर यह ज़रूर कहूँगा कि इस समझ को विकसित करने में साहित्य ने कहीं अधिक एवं निर्णायक भूमिका निभायी। मैंने गौतम बुद्ध, कबीर और तुलसी से लेकर मैथिली शरण गुप्त, प्रेमचन्द, प्रसाद, निराला, दिनकर, नागार्जुन और रेणु के साहित्य के ज़रिए भारतीय परम्परा, भारतीय समाज और भारतीय संस्कृति को भी समझने की कोशिश की तथा इसके सापेक्ष गाँधी और गाँधीवाद को रखकर देखा।

मुझे इनके बीच का फर्क मिटता हुआ दिखा, और फिर मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि इन सारे चिन्तकों ने युगीन चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में भारतीय सांस्कृतिक चिंतन परम्परा की पुनर्व्याख्या की। बुद्ध ने ‘मध्यमा प्रतिपदा’ के ज़रिये अपनी युगीन चिंताओं का समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास किया, तो तुलसी ने समन्वयवादी चेतना के धरातल पर।

गाँधी ने यही काम सर्वधर्मसमभाव और अहिंसक सत्याग्रह के ज़रिये किया। इसने मुझे इस निष्कर्ष पर पहुँचाया कि भारत की सामासिक संस्कृति के केन्द्र में वैष्णव धर्म और वैष्णव संस्कार मौजूद है, सहिष्णुता एवं समन्वय जिसके प्राण-तत्व हैं, लेकिन इसका दायरा यहीं तक सीमित नहीं है। इसीलिए न तो वैष्णव धर्म और वैष्णव संस्कारों तक सीमित रहकर भारत और भारतीयता को समझा जा सकता है और न ही इसको नकार कर।

द्वंद्व और तनाव:
न तो भारतीय समाज कोई समरूप समाज रहा हो और न ही भारतीय संस्कृति समरूप संस्कृति। विविधता से भरे समाज और संस्कृति में में समरूपता सम्भव भी नहीं है। स्वाभाविक है कि यह विविधता विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक समूहों के बीच हितों के टकराव को जन्म दे।

निश्चय ही यह स्थिति भारतीय समाज और संस्कृति में द्वंद्व एवं तनाव को जन्म देती है, और इस द्वंद्व एवं तनाव का लम्बा इतिहास रहा है। लेकिन, यह द्वंद्व और तनाव भारतीय समाज और संस्कृति का अंतिम सत्य कभी नहीं रहा।


द्वंद्व और तनाव: अंतिम सत्य नहीं:

कबीर ने इस बात को समझा, इसीलिए वे असहमति एवं विरोध तक ही सीमित नहीं रहे, वरन् उन्होंने अपने असहमति एवं विरोध को एक न्यायपूर्ण मानवीय समाज के निर्माण के साधन में तब्दील कर दिया। इसीलिए वे घृणा और विध्वंस तक नहीं रुके, वरन् प्रेम की बात करते हुए समन्वय के ज़रिये सृजन की प्रस्तावना की और इसी के कारण दुनिया ने उन्हें युगान्तर की क्षमता से लैस युग-प्रवर्तक एवं क्रान्तिकारी के रूप में सैल्यूट किया।

तुलसी ने तो उनकी इसी समन्वयवादी चेतना को अपनी रचना-दृष्टि के केन्द्र में रखा। इस बात को गाँधी ने भी समझा, और उनके युग के साहित्यकारों ने भी। इसी समझ ने उन्हें तुलसी के करीब लाने का काम किया, और इसी समझ के कारण रूसी क्रान्ति, मार्क्स और मार्क्सवाद के प्रति तमाम आकर्षण के बावजूद प्रेमचन्द गाँधी और गाँधीवाद के प्रति अपने मोह को अन्त-अन्त तक छोड़ नहीं पाए।

इसी मोह ने साम्यवाद के प्रति आकर्षण के बावजूद प्रसाद को भारतीय परम्परा एवं संस्कृति से दृढ़तापूर्वक जोड़े रखा। इसी मोह के कारण रेणु को भी समाजवाद और साम्यवाद भारतीय मसलों का हल दे पाने में असमर्थ लगा और इसकी क्रान्तिधर्मी चेतना के प्रति तमाम आकर्षण के बावजूद इसके लिए उन्हें गाँधी और गाँधीवाद की शरण लेनी पड़ी। और, इसी मोह के कारण राष्ट्रकवि दिनकर को यह कहना पड़ा:

अच्छे लगते हैं मार्क्स, किन्तु प्रेम अधिक है गाँधी से!
दरअसल गाँधी को कहावतों में तब्दील करते हुए भले ही हम कहते रहे हों कि ‘मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी’, पर वास्तविकता यह है कि गाँधी हमारी मजबूरी भी हैं और मजबूती भी।

यह गाँधी और गाँधीवाद की मजबूती है जो उन्हें हमारी मजबूरी में तब्दील कर देती है और इसी मजबूती के कारण दक्षिणपंथियों के खिलाफ अपनी लड़ाई में वामपंथ भी गाँधी की शरण में जाने के लिए विवश होता है, और दक्षिणपंथियों को भी भारत के भीतर से लेकर भारत के बाहर तक अपनी स्वीकार्यता सुनिश्चित करने के लिए गाँधी के दरवाज़े पर मत्थे टेकने होते हैं। पर, गाँधी और गाँधीवाद की विडंबना यह है कि उनके समर्थकों से लेकर उनके विरोधियों तक में उन्हें भुनाने और बेचने की होड़ लगी हुई है, और यही उसकी त्रासदी है।


गाँधीवाद: अपार धैर्य की माँग:
दरअसल गाँधी में कुछ ऐसा है जो हमें गाँधी से पूरी तरह से जुड़ने नहीं देता है। मार्क्स और मार्क्सवाद में जो क्षणिक आकर्षण है, उस क्षणिक आकर्षण का गाँधी और गाँधीवाद में अभाव है। कारण यह कि गाँधीवाद बदलाव की जिस प्रक्रिया की प्रस्तावना करता है, बदलाव की वह प्रक्रिया अत्यन्त धीमी एवं क्रमिक है, और इसीलिए थकाऊ एवं उबाऊ भी। और, उसकी यह कमी कई बार हमें विचलित करती है क्योंकि हममें इतना धैर्य नहीं होता है, बदलाव के लिए जितने धैर्य की अपेक्षा गाँधी और गाँधीवाद हमसे करता है।

यह स्थिति हमें मोहभंग की ओर ले जाती है और यह मोहभंग वैकल्पिक संभावनाओं की तलाश की ओर। इसके विपरीत, मार्क्सवाद में गजब का आकर्षण है। यह क्रान्ति के ज़रिये त्वरित बदलाव की बात करता है जिसकी परिकल्पना मात्र हमें रोमांचित करती है। इसीलिए गाँधी एवं गाँधीवाद से मोहभंग ने अक्सर भारतीय साहित्यकारों एवं चिन्तकों को मार्क्सवाद की ओर धकेलने का काम किया।

मार्क्सवाद की खामियाँ:
तमाम खूबियों के बावजूद मार्क्सवाद के प्रति आकर्षण टिक नहीं पाया। दरअसल, मार्क्स से भारतीय समाज एवं संस्कृति, या फिर भारतीय की सोच एवं मानसिकता को समझने की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। तब तो और भी नहीं, जब एशियाई समाज को लेकर मार्क्स के अपने पूर्वाग्रह हैं, और अधिकांश भारतीय वामपन्थी तक इसे समझ पाने में असफल रहे।

राम विलास शर्मा, नामवर सिंह से लेकर मुक्तिबोध और बाबा नागार्जुन तक जिन वामपंथियों ने इसे समझने की कोशिश की, उन्हें ‘अपनों’ के बीच ही उपेक्षा एवं तिरस्कार का सामना करना पड़ा। कभी उन्हें समग्रता में नहीं अपनाया गया, अपनी सुविधा के हिसाब से उन्हें टुकड़ों में लेने और समझने की कोशिश की गयी।

इसीलिये मार्क्सवाद का भारतीय परम्परा और संस्कृति से मेल नहीं है। इसके विपरीत, गाँधी का शनै:-शनै बदलाव परम्परा और संस्कृति की अवहेलना नहीं करता, वरन् उसके दायरे में रहते हुए ही बदलाव की प्रस्तावना करता है और व्यवस्था को मानवीय रूप प्रदान करता हुआ उन तमाम मसलों का हल सुझाता है जिनसे हमारा युग, समय, समाज और परिवेश जूझ रहा है।

इसके विपरीत, मार्क्स और मार्क्सवाद आमूलचूल बदलाव की बात करता है और बदलाव की इस प्रक्रिया में समाज एवं संस्कृति की अवहेलना छुपी हुई है। साथ ही, गाँधी और गाँधीवाद समझने की ज़रूरत पर बल देता है, जबकि मार्क्स एवं मार्क्सवाद समझाने की ज़रूरत पर बल। एक स्वत:स्फूर्त चेतना की परिस्थितियों को निर्मित करने में विश्वास करता है, तो दूसरा उस चेतना को आरोपित करने में।

यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें इसीलिये मैं यह महसूस करता हूँ कि गाँधी को तुम मार नहीं सकोगे:

लेखक– सर्वेश कुमार

सारे जहां के गाँधी

सारे जहां के गाँधी –ओम थानवी

आज की राजनीति में अमेरिका गोया भगवान बन गया है। वाइट हाउस में पाँव धरना, आने-जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति से झूठे-सच्चे संबंधों पर इतराना, बार-बार उस दूरी को नापना।

गाँधीजी कभी अमेरिका नहीं गए। लेकिन अमेरिका में छाए रहे। कई सुविख्यात पत्रिकाओं में गाँधीजी छवि को आवरण पर दिया गया। बारम्बार।

अपनी अटलांटा यात्रा में मैंने मार्टिन लूथर किंग जू. गाँधी स्मृति घर में गाँधीजी की अनेक तसवीरें और किताबें देखीं, जो किंग ने ख़ुद जमा की थीं। बाद में तो ख़ुद किंग “अमेरिकी गाँधी” कहलाए।

उनकी हत्या भी किसी सिरफिरे ने उसी घृणा के चलते की, जो हमारे यहाँ गोडसे और उसके आराध्य संगठनों में गहरे पैठी हुई थी।

गाँधी जयंती पर खास रिपोर्ट

गाँधी जी ने कहा था निकम्मे अख़बार फेंक दो
“मैं कहूँगा कि ऐसे निकम्मे अख़बारों को आप फेंक दें। कुछ ख़बर सुननी हो तो दूसरों से जान-पूछ लें। अख़बार न पढ़ेंगे तो आपका कोई नुक़सान होनेवाला नहीं है। अगर पढ़ना ही चाहें तो सोच-समझकर ऐसे अख़बार चुन लें जो हिन्दुस्तान की सेवा के लिए चलाए जा रहे हों, जो हिन्दू-मुसलमानों को मिल-जुलकर रहना सिखाते हों। फिर ऐसे अख़बारवालों को भी इतनी धांधली में पड़ने की ज़रूरत नहीं रहेगी कि उन्हें रातभर जागते रहना पड़े और दिन में भी चैन न ले सकें। और ऐसी बेबुनियाद ख़बरें छापने की दौड़ भी नहीं लगानी पड़ेगी। “

महात्मा गाँधी, 12 अप्रैल 1947, ( प्रार्थना-प्रवचन, राजकुल प्रकाशन)
मैं हमेशा मानता हूँ कि आज न कल, भारत की जनता को ग़ुलाम मीडिया के ख़िलाफ़ उठना ही होगा। संघर्ष का रास्ता गांधी का ही होगा। राजनीतिक दल संघर्ष करने का जितना भी अभ्यास कर लें, सारे अभ्यास आभासी साबित होंगे। लोकतंत्र के पुनर्जीवन की सच्ची लड़ाई गोदी मीडिया के ख़िलाफ़ होने वाली लड़ाई से ही शुरू होगी।

गाँधी जयंती पर खास रिपोर्ट

महात्मा गाँधी अमेरिका कभी नहीं गए लेकिन भारत के बाद उनकी सबसे ज्यादा मूर्तियां, स्मारक और संस्थायें अमेरिका में ही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिका में गांधी जी की दो दर्जन से ज्यादा से प्रतिमाएं और एक दर्जन से ज्यादा सोसाइटी और संगठन हैं।

महात्मा गाँधी भारत के अकेले ऐसे नेता रहे हैं, जिनकी भारत सहित 84 देशों में मूर्तियां लगी हैं। पाकिस्तान, कम्युनिस्ट देश चीन से लेकर छोटे-मोटे और बड़े-बड़े देशों तक में बापू की मूर्तियां स्थापित हैं।

उनके जन्मदिवस पर पूरी दुनिया अहिंसा दिवस मनाती है।

महात्मा गाँधी की हत्या के 21 साल बाद ब्रिटेन ने उनके नाम से डाक टिकट जारी किया। इसी ब्रिटेन से भारत ने गाँधी की अगुआई में आज़ादी हासिल की थी।

अलग-अलग देशों में कुल 48 सड़कों के नाम महात्मा गाँधी के नाम पर हैं। भारत में 53 मुख्य मार्ग गाँधी जी के नाम पर हैं।

गाँधी जी द्वारा शुरु किया गया सिविल राइट्स आंदोलन कुल 4 महाद्वीपों और 12 देशों तक पहुंचा था।

अपने वक़्त के महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था कि “कुछ सालों बाद लोग इस बात पर यकीन नहीं करेंगे कि महात्मा गाँधी जैसे सख्श कभी भी इस धरती पर हाड़ मांस का शरीर लेकर चलता था।”

अपने पूरे जीवन में महात्मा गाँधी ने कोई राजनीति पद नहीं लिया। इसीलिए आज़ादी की लड़ाई में उनके नेतृत्व पर कभी कोई सवाल नहीं उठा पाया, क्योंकि उनको न 8000 करोड़ का विमान चाहिए था, न ही 20000 करोड़ का बंगला।

नेल्सन मंडेला से लेकर मार्टिन लूथर किंग तक गाँधी के मुरीद थे, बराक ओबामा जैसे तमाम वर्ल्ड लीडर आज भी गाँधी के मुरीद हैं।

अफ्रीका जैसे कई देशों ने गांधी के आदर्शों और रास्तों से आंदोलन चलाया और आज़ादी हासिल की।

यहां तक कि दुनिया के कई हरामी देश भी गाँधी की इज्जत करते हैं। कई निकृष्ट नेता भी गाँधी का अपमान करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

इस पूरे ब्रम्हांड में एक भक्ताणु ही ऐसे वायरस हैं जिनको गाँधी से बड़ी समस्या है। समस्या भी ऐसी-ऐसी कि आप हैरान रह जाएंगे। भक्त की समस्या ये भी है कि अगर वह गांधी को महान मान ले तो।उसके लात खाने की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं जो उसे बर्दाश्त नहीं है।

संघियों और संघ के समर्थक चमनबहारों की कुंठा क्या है, ये समझ से परे है। जिस दिन मनुष्य के अंदर नफरत का इलाज हो जाएगा, उस दिन संघियों की कुंठा का भी इलाज संभव हो सकेगा। तब तक ये मनुष्यरूपी ये नफरती जंतु गांधी के प्रति नफरत लिए जीते रहेंगे।

गाँधी जयंती पर खास रिपोर्ट

2 अक्तूबर 1947 को गाँधी ने अपने जन्मदिन पर कहा था-
“आज तो मेरी जन्मतिथि है। मैं तो कोई अपनी जन्मतिथि इस तरह से मनाता नहीं हूँ। मैं तो कहता हूँ कि फाका करो, चरख़ा चलाओ, ईश्वर का भजन करो, यही जन्मतिथि मनाने का मेरे ख़्याल में सच्चा तरीक़ा है। मेरे लिए तो आज यह मातम मनाने का दिन है। मैं आजतक ज़िंदा पड़ा हूँ। इस पर मुझकों ख़ुद आश्चर्य होता है, शर्म लगती है, मैं वही शख़्स हूँ कि जिसकी ज़बान से एक चीज़ निकलती थी कि ऐसा करो तो करोड़ों उसको मानते थे। पर आज तो मेरी कोई सुनता ही नहीं है। मैं कहूँ कि तुम ऐसा करो ” नहीं, ऐसा नहीं करेंगे”- ऐसा कहते हैं। ” हम तो बस हिन्दुस्तान में हिन्दू ही रहने देंगे और बाक़ी किसी को पीछे रहने की ज़रूरत नहीं है।” आज तो ठीक है कि मुसलमानों को मार डालेंगे, कल पीछे क्या करोगे? पारसी का क्या होगा और क्रिस्टी का क्या होगा और पीछे कहो अंग्रेज़ों का क्या होगा? क्योंकि वह भी तो क्रिस्टी है? आख़िर वह भी क्राइस्ट को मानते हैं, वह हिन्दू थोड़े हैं? आज तो हमारे पास ऐसे मुसलमान पड़े हैं जो हमारे ही हैं, आज उनको भी मारने के लिए हम तैयार हो जाते हैं तो मैं यह कहूँगा कि मैं तो ऐसे बना नहीं हूँ। जबसे हिन्दुस्तान आया हूँ मैंने तो वही पेशा किया कि जिससे हिन्दू, मुसलमान सब एक बन जाएँ। धर्म से एक नहीं लेकिन सब मिलकर भाई-भाई होकर रहने लगें। लेकिन आज तो हम एक-दूसरे को दुश्मन की नज़र से देखते हैं। कोई मुसलमान कैसा भी शरीफ़ हो तो हम ऐसा समझते हैं कि कोई मुसलमान शरीफ़ हो ही नहीं सकता। वह तो हमेशा नालायक ही रहता है। ऐसी हालत में हिन्दुस्तान में मेरे लिए जगह कहां है और मैं उसमें ज़िंदा रहकर क्या करूँगा? आज मेरे से 125 वर्ष की बात छूट गई है। 100 वर्ष की भी छूट गई है और 90 वर्ष की भीख, आज मैं 79 वर्ष में तो पहुँच जाता हूँ लेकिन वह भी मुझको चुभता है। मैं तो आप लोगों को जो मुझको समझते हैं और मुझको समझनेवाले काफ़ी पड़े है, कहूँगा कि हम यह हैवानियत छोड़ दें। “

पुण्यतिथि पर याद किए गए दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह

आज कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० शशिनाथ झा जी की अध्यक्षता में उनके द्वारा प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। उन्हें याद करते हुए शशिनाथ झा ने कहा कि लक्ष्मीश्वर विलास पैलेस वह पुण्य स्थान है जहां महाराज ने जन्म लिया। शिक्षा ग्रहण किया,यज्ञोपवीत का संस्कार से लेकर विवाह संस्कार तक इसी भवन में हुआ। यह मनोरम स्थल बहुत ही महत्वपूर्ण है ।

1952 में जमींदारी प्रथा खत्म होने के बाद भी दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह द्वारा लोगों की भलाई के लिए यह भवन शैक्षणिक कार्यों के लिए आमजनमानस को दिया गया। इसी परिप्रेक्ष्य में 1960 संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में यह भवन महाराज के द्वारा स्थापित किया गया। संस्कृत शिक्षा के सर्वांगीण विकास हेतु उनके द्वारा यह कदम उठाया गया था।

संस्कृत के प्रति उनका समपर्ण इस बात का गवाह है कि लक्ष्मीश्वर विलास पैलेस जैसे भवन में आज संस्कृत विश्वविद्यालय संचालित है।ऐसे दानवीर, दूरगामी, सामाजिक अध्येयता, समाज के हितैषी जनमानस में इन्ही कारणों से सर्वदा लोकप्रिय थे और आज भी उनके विचार और कार्य लोगों के लिए कल्याणकारी और प्रेणादायक है।

सर कामेश्वर सिंह को याद करते हुए इसमाद के राहुल कुमार ने कहा कि कामेश्वर सिंह ने हमेशा लोगों के जीवनयापन को सुलभ बनाने के लिए समर्पित रहते थे।और यही वजह के इनके जीवन काल में मिथिला एक सम्पन्न क्षेत्र हुआ करता था।

इसमाद के न्यासी संतोष कुमार ने कहा सर कामेश्वर सिंह ने दरभंगा समेत मिथिला को विकसित करने के लिए सभी आधुनिक सुविधाओं से तराशा,जिसका सुख आज आमजनमानस को प्राप्त हो रहा है। लेकिन उनकी असमय मृत्यु से उनके कई कार्य निर्माणधीन ही रह गए जिसे पूरा करने में मिथिला के लोगों को मशक्कत करनी पड़ी।

इस अवसर पर उनसे स्नेह रखने वाले ने संतोष चौधरी, अभिनव सिन्हा, रवि प्रकाश,राजीव कुमार झा, सौरभ आदि ने भी अपने विचार रखे। और आज उनकी पुण्यतिथि पर सबने उन्हें याद कर नमन किया।

कन्हैया को लेकर राजद असहज कहां कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दे कन्हैया को

कन्हैया को लेकर असहज राजद की और से शिवानंद तिवारी ने आखिरकार मौर्चा खोल ही दिया ,कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने पर शिवानंद तिवारी ने कहा है कि कन्हैया कुमार भाषण देने की कला में माहिर है उनके जैसा भाषण कोई नहीं दे सकता।

कांग्रेस जॉइन करते समय कन्हैया कुमार ने कहा था कि कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है, जिसे बचाना है। अगर बड़ा जहाज नहीं बचेगा तो छोटी-छोटी कश्तियों का क्या होगा? इस बयान को उन्होंने ऐतिहासिक करार दिया है।

शिवानंद तिवारी ने कहा कि एक समय वामपंथी कन्हैया कुमार में अपना भविष्य देख रहे थे। अब कांग्रेस उनमें अपना भविष्य देख रही है। कन्हैया कुमार को ही कांग्रेस अपना अध्यक्ष बना दे। पिछले दो साल से ऐसे भी वहां कोई स्थायी अध्यक्ष नहीं है।

शिवानंद तिवारी यही नहीं रुके कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ मेरी पूरी सहानुभूति है। उन्होंने पंजाब का जिक्र करते हुए सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह की लड़ाई की बात कही शिवानंद तिवारी के इस बयान के बाद कांग्रेस भी शिवानंद तिवारी के सहारे राजद पर सीधे सीधे हमला शुरु कर दिया

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा राष्ट्रीय जनता दल का भविष्य ही इस बात पर निर्भर करता है कि कांग्रेस सहित तमाम सेकुलर पार्टियां कितना अधिक से अधिक कमजोर रहती हैं और खास तौर से कांग्रेस जैसी धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्ध पार्टी की मजबूती से राष्ट्रीय जनता दल ज्यादा भयभीत रहती है।

कन्हैया कुमार एक राजनीतिक रूप से समझदार नौजवान हैं और उसके कांग्रेस में आने से बिहार कांग्रेस और मजबूत हुआ है,कांग्रेस नेता आनंद माधव ने शिवानंद तिवारी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि शिवानंद जी सठिया गए हैं। कन्हैया के बारे में निर्णय कांग्रेस को लेना है, वे अपना खून क्यों जला रहे हैं।

हलाकि इस तरह का बयावबाजी आने वाले समय में और तेज होगी क्यों कि कन्हैया को लेकर राजद का जो कोर ग्रुप है वो सहज नहीं है और उस ग्रुप का मानना है कि कन्हैया के मजबूत होने से राजद और तेजस्वी के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है ।

केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री भारत व पाकिस्तान सीमा के लाइन ऑफ कंट्रोल का किया दौरा

देश के जवानों का साहस और मनोबल काफी ऊँचा है – नित्यानंद राय

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय जम्मू और कश्मीर के तीन दिवसीय प्रवास के क्रम में भारत-पाकिस्तान सीमा अर्थात लाइन ऑफ कंट्रोल का दौरा किया ।

एलओसी पर स्थित भारतीय सेना एवं सीमा सुरक्षा बल की फारकियन टॉप , पात्रा बेस कैंप , गुर्जरडोर एवं सुंदरमाली स्थित अलग-अलग चौकियों का दौरा कर केंद्रीय मंत्री श्री राय ने अधिकारियों और सैनिकों से संवाद किया तथा उनका मनोबल बढ़ाया ।

मंत्री श्री नित्यानंद राय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की सीमा और संप्रभुता पूरी तरह सुरक्षित है । देश के जवानों का साहस और मनोबल काफी ऊँचा है ।

उन्होंने कहा कि सीमा पर -30 से -35 डिग्री तापमान तक से लेकर किसी भी परिस्थिति से विजय पाने में देश के जवान सबल और सक्षम है । मंत्री श्री राय ने कठिन इलाकों में भी उच्च मनोबल और प्रेरणा बनाए रखने के लिए सैनिकों की सराहना किया ।

एलओसी के दौरा में मंत्री श्री नित्यानंद राय के साथ बीएसएफ के आईजी डॉ राजेश मिश्रा , डीआईजी एक के विद्यार्थी तथा कमांडेंट श्री संजय शर्मा सहित अन्य अधिकारी गण शामिल रहे ।

छपरा नगर निगम द्वारा आवंटित दुकानों को खाली करने के आदेश पर हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस

पटना हाई कोर्ट ने छपरा नगर निगम द्वारा आवंटित दुकानों के एग्रीमेंट को रद्द करने व दुकानों को खाली करने के निगम आयुक्त के आदेश को रद्द करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने छपरा के डी एम व निगम आयुक्त को नोटिस जारी किया। जिलाधिकारी और निगम के कमिश्नर को नोटिस जारी किया है।

साथ ही कोर्ट ने यथास्थिति बनाये रखने का आदेश देते हुए राज्य सरकार, निगम और जिलाधिकारी से जवाब तलब किया है। छपरा निगम क्षेत्र स्थित खनुआ ड्रेनेज को स्थानीय लोगों द्वारा ढकने का अनुरोध किया गया था।

उसके बाद ढके गए ड्रेनेज पर वर्ष 1997 में दुकान का निर्माण प्रारंभ किया गया, जो वर्ष 2000 में पूरा हुआ। याचिकाकर्ताओं को दुकान आवंटित किया गया और उनके साथ करार भी हुआ।

छपरा के नगरपालिका द्वारा द्वारा वर्ष 2011 में अखबार में यह समाचार प्रकाशित करवाया गया कि ड्रेनेज पर किये गए अवैध अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इसके बाद वर्ष 2011 में ही पटना हाई कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया। याचिका के निष्पादित होने की तिथि पांच दिन के भीतर दुकानदारों के अभ्यावेदन को निष्पादित करने का आदेश दिया।

वर्ष 2017 में फिर से दुकानों को खाली करने को लेकर समाचार प्रकाशित किया गया।
वर्ष 2017 में कुछ याचिकाकर्ताओं समेत अन्य लोगों ने पटना हाई कोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर किया, जोकि अभी भी लंबित है। याचिका के लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ताओं को परेशान नहीं किया गया।

वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि निगम आयुक्त के हस्ताक्षर से 25 अगस्त, 2021 को आवंटित किये गए दुकानों का करार को रद्द करते हुए नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर दुकानों खाली करने का आदेश दिया गया।
इसी मामले में कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए अधिकारियों को नोटिस जारी जवाब माँगा गया। इस मामले पर अब तीन सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

15 वर्षो के सुशासन में बिहर का स्वास्थ्य व्यवस्था देश में सबसे फिसड्डी– नीति आयोग

कोरोना काल के दौरान एक एक बेड और एक एक बूंद आक्सीजन के लिए जिस तरीके से तरप तरप कर लोगों की मौत हुई थी सारी दुनिया ने देखा ।लेकिन बाद में इसको लेकर सरकार के अलग अलग राय आने लगे और जिस मौत को नंगी आंखों पूरी दुनिया ने देखा उस सवाल खड़े होने लगे लेकिन नीति आयोग की रिपोर्ट ने देश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल करके रख दिया है ।

देश में एक लाख की आबादी में सबसे अधिक 20 बेड मध्यप्रदेश में है और सबसे कम बिहार में एक लाख आबादी में मात्र 06 है मतलब अस्पताल में बेड के मामले में बिहार देश का सबसे फिसड्डी राज्य है जब बेड नहीं है तो आप डाँ और अन्य संशाधनों के बारे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है हलाकि नीति आयोग के रिपोर्ट को लेकर जब स्वास्थ्यमंत्री से सवाल किया गया तो जबाव देना तो दूर मीडिया से बचते बचाते भागते दिखे।

हलाकि इसको लेकर नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 16 वर्षों के थकाऊ परिश्रम के बूते बिहार को नीचे से नंबर-1 बनाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को बधाई. 40 में से 39 लोकसभा MP और डबल इंजन सरकार का बिहार को अद्भुत फ़ायदा मिल रहा है. नीति आयोग की रिपोर्ट अनुसार देश के जिला अस्पतालों में सबसे कम बेड बिहार में हैं, 1 लाख की आबादी पर मात्र 6 बेड।

हलाकि नीति आयोग के रिपोर्ट को लेकर सरकार रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से पहले से ही सवाल खड़े कर रहे थे राज्य के योजना एंव विकास मंत्री विजेन्द्र यादव चार दिन पहले पीसी करके नीति आयोग के कार्यशैली पर जमकर भड़ास निकाला था ।

नीति आयोग देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जो रिपोर्ट जारी किया है उसके अनुसार नीति देश के जिला अस्पतालों में सबसे कम बेड बिहार में हैं, 1 लाख की आबादी पर मात्र 6 बेड.” जिला स्तर पर प्रति लाख आबादी अस्पतालों में बेड की उपलब्धता के मामले में सभी राज्यों से बिहार के सबसे खराब प्रदर्शन गुरुवार को जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जिला अस्पतालों में प्रति लाख आबादी बेड की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर है. यहां प्रति लाख आबादी 20 बेड हैं. जबकि पश्चिम बंगाल, राजस्थान और गुजरात में 19, पंजाब, आंध्रप्रदेश और असम में 18, जम्मू कश्मीर में 17, महाराष्ट्र में 14, हरयाणा और उत्तरप्रदेश में 13, तेलंगाना में 10, झारखंड में नौ और बिहार में केवल छह बेड प्रति लाख आबादी उपलब्ध हैं.

भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) 2012 के दिशानिर्देश के अनुसार जिला अस्पतालों को प्रति 1 लाख आबादी (2001 की जनगणना के जिला जनसंख्या औसत के आधार पर) कम से कम 22 बिस्तर बनाए रखने की सलाह दिया गया है. लेकिन गुरुवार नीति आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार कई राज्य ऐसे हैं जहां मानकों का पालन नहीं किया जा रहा. खासकर बिहार की स्थित बदतर है।
हलाकि यह रिपोर्ट काफी कुछ हकीकत बया कर रहा है बिहार के जिला अस्पताल का हाल सच में काफी बूरा है ।

लगातार चौथे दिन सेंसेक्स और निफ्टी आधा फीसदी से ज्यादा टूटकर लाल निशान में बंद हुए; एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक टॉप लूसर

कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भारतीय बाजार में भी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 360.78 अंक नीचे 58,765.58 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 86.10 अंक नीचे 17,532.05 पर बंद हुए। पूरे हफ्ते की बात करें तो इस पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 1282 पॉइंट और निफ्टी 321 पॉइंट टूटा है।

आज दिन के सबसे निचले स्तर पर सेंसेक्स 575 अंक तक गिरकर 58,551 के इंट्रा डे लो और निफ्टी 50 इंडेक्स अपने महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 17,500 से नीचे गिर गया।

सेंसेक्स चार्ट (01.10.21) एक नजर में

मिड और स्मॉल-कैप शेयर बड़े पैमाने पर फ्लैट नोट पर समाप्त हुए । बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स आज 0.48% चढ़ा, जबकि बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.11% नीचे बंद हुआ। फार्मा, मीडिया और मेटल हरे निशान में बंद हुए। बैंक, वित्तीय और आईटी शीर्ष ड्रैग थे।

सेक्टोरल मोर्चे पर, निफ्टी रियल्टी इंडेक्स करीब 2 फीसदी गिर गया और बैंक निफ्टी आधा फीसदी से अधिक नीचे था। जबकि निफ्टी फार्मा करीब एक फीसदी ऊपर था।

बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी), एनटीपीसी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) शीर्ष इंडेक्स ड्रैगर्स थे। दूसरी तरफ, एमएंडएम, डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल), बजाज-ऑटो सेंसेक्स के शीर्ष लाभार्थियों में से थे।

सेंसेक्स के शेयर एक नजर में

सेंसेक्स के 30 शेयर्स में से 19 शेयर्स कमजोरी के साथ और 11 शेयर्स बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई पर कारोबार के दौरान 226 शेयर्स 52 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर और 25 शेयर्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

पूर्णिया में खुलेगा बल्ड बैंक, चार जिलों के बल्ड बैंक के लाइसेंस का नवीनीकरणः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि पूर्णिया में सरकारी ब्लड बैंक खोलने के लिये लाइसेंस जारी कर दिया है। साथ ही मुंगेर, मधेपुरा, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और दरभंगा मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक के लाइसेंस का नवीनीकरण किया गया है। पूर्णिया और मुंगेर के लिए बल्ड कंपोनेंट सेपरेशन का भी लाइसेंस निर्गत किया गया है। शेष बचे जिलों में भी स्वास्थ्य विभाग बल्ड बैंक खोलने की दिशा में प्रयासरत है।

श्री पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने को लेकर निरंतर प्रयास कर रहा है। राज्य के सभी मरीजों को बल्ड की उपलब्घता सुनिश्चित कराने को लेकर हर जिला में सरकारी ब्लड बैंक खोलने की प्रक्रिया चल रही है। पूर्णिया में बल्ड बैंक खुलने के बाद अब प्रदेश में सरकारी ब्लड बैंक की संख्या 41 हो जायेगी, वहीं मुंगेर 12वां बल्ड कंपानेंट सेपरेशन यूनिट होगा। उन्होंने कहा कि हर साल समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण जरूरतमंद लोगों की असमय मौत हो जाती है। कोई भी स्वस्थ पुरुष तीन माह के बाद यानी साल में चार बार और कोई भी स्वस्थ महिला चार माह के बाद यानी साल में तीन बार रक्तदान कर सकती हैं।

बिहार के स्कूलों में शुरु होगा विशेष स्वच्छता अभियान यूनिसेफ से हुआ करार।

“हम सब जानते हैं कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है। इसके लिए स्कूलों में एक स्वस्थ वातावरण बनाने और उचित स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवहार विकसित करने की नितांत आवश्यक है ताकि हमारे बच्चे स्वस्थ रहकर पढ़ाई-लिखाई कर सकें। लड़कियों की ड्राप आउट रेट कम करने हेतु यह अत्यंत आवश्यक है। विद्यालयों में जल, सफ़ाई एवं स्वच्छता (WASH) मानकों को बेहतर करने में विद्यालय स्वच्छता पुरस्कार मील का पत्थर साबित होगा। ग्रामीण क्षेत्रों और दुर्गम स्थानों में स्थित स्कूलों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर हमें विशेष ध्यान देना होगा। इसके ज़रिए कोविड महामारी के संदर्भ में स्कूलों में स्वच्छता मानकों को सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। सरकार इसके सफल क्रियान्वयन हेतु हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है.” ये बातें शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने नया सचिवालय परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय बिहार स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार एवं स्कूलों में राज्य विशिष्ट WASH (Wins) बेंचमार्किंग सिस्टम के लॉन्चिंग समारोह के दौरान कहीं।

यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से शुरू किए जा रहे इस अनूठी पहल को संजय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग, श्रीकांत शास्त्री, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक, यासुमासा किमुरा, यूनिसेफ इंडिया के उप प्रतिनिधि, नफ़ीसा बिंते शफ़ीक़, यूनिसेफ बिहार प्रमुख, यूनिसेफ बिहार के WASH विशेषज्ञ डॉ. प्रभाकर सिन्हा, शिक्षा विभाग एवं यूनिसेफ़ के अन्य अधिकारीगण और मीडियाकर्मियों की उपस्थिति में लॉन्च किया गया।

शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार ने कहा कि बिहार में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु मुख्य रूप से निमोनिया और डायरिया के कारण होती है जो सीधे तौर पर WASH के प्रावधान की कमी से संबंधित है। हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करके इन बीमारियों, विशेष रूप से डायरिया को रोका जा सकता है. इसी तरह, स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की सतत उपलब्धता और रखरखाव बहुत ज़रूरी है। इस संदर्भ में राज्य सरकार के प्रमुख कार्यक्रम “हर घर, नल का जल” योजना की विशेष भूमिका है. स्कूलों में शौचालयों का रखरखाव और नियमित सफाई भी हमारी प्राथमिकता है। इस पुरस्कार के माध्यम से प्रत्येक स्कूल में इन सभी मुद्दों का निदान किया जाएगा. इसी वर्ष से हम पुरस्कार के लिए स्कूलों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने जा रहे हैं।

पुरस्कार की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि बिहार की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर 2016 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के अनुरूप इस पुरस्कार से संबंधित दिशानिर्देश विकसित किए गए हैं. इस संदर्भ में, स्कूलों में WASH के लिए राज्य विशिष्ट बेंचमार्किंग प्रणाली सभी संबंधित हितधारकों को स्कूल में WASH को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके अलावा, इससे स्कूल प्रशासन को WASH के बुनियादी ढांचे में सुधार करने और इसे बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके लिए एक परामर्शी प्रक्रिया के ज़रिए सात थीम और पचास संकेतकों की पहचान की गई है. राज्य सरकार की देखरेख मे स्कूलों के चयन से लेकर पुरस्कार वितरण प्रक्रिया संपन्न होगी. स्कूलों द्वारा स्व-नामांकन के लिए एक मोबाइल आधारित एप्लिकेशन विकसित किया जा रहा है। एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा सभी नामांकनों के सत्यापन की भी व्यवस्था है। 5 स्टार रेटिंग के तहत स्कूलों की रैंकिंग की जाएगी। इसके अलावा, सरकार राष्ट्रीय एसवीपी के विपरीत आवधिक मूल्यांकन प्रक्रिया को संस्थागत रूप दे सकती है।

लड़कियों की विशेष ज़रूरतों को रेखांकित करते हुए यूनिसेफ़ बिहार की राज्य प्रमुख नफ़ीसा बिन्ते शफ़ीक़ ने कहा कि लड़कियों के लिए पृथक शौचालयों के अलावा मासिक धर्म प्रबंधन हेतु स्कूलों में पर्याप्त और सुचारू स्वच्छता सुविधाओं का प्रावधान काफी अहम है. संवेदनशील स्वास्थ्य प्रोत्साहन लड़कियों को स्कूल में रहने और अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए एक ज़रूरी शर्त है. आरटीई अधिनियम 2009 के तहत सभी बच्चों को स्कूलों में सुरक्षित जल, शौचालय और स्वच्छता की सुविधा का सामान लाभ लेने का अधिकार है।

एक प्रभावी WASH कार्यक्रम के तहत बाल-अनुकूल सुविधाओं से लैस समावेशी डिजाइन के माध्यम से बाधाओं को दूर किया जा सकता है, जो किशोरियों, छोटे बच्चों और बीमार या दिव्यांग बच्चों के लिए लाभकारी है. इसके ज़रिए बच्चे अपने परिवार और समुदाय में WASH प्रथाओं में सुधार के लिए चेंज एजेंट के तौर पर विकसित हो सकते हैं. बिहार सरकार ने इस दिशा में यह महत्वपूर्ण क़दम उठायाहै और इसकी सफलता हेतु यूनिसेफ़ अपना हर संभव सहयोग देने के लिए तत्पर है।

विषयगत प्रावधानों की व्याख्या करते हुए, यूनिसेफ बिहार के WASH विशेषज्ञ डॉ. प्रभाकर सिन्हा ने कहा कि ‘स्कूलों में जल, सफ़ाई और स्वच्छता’ के संदर्भ में तकनीकी और मानव विकास घटक दोनों का महत्व है. जहां तकनीकी घटकों में पीने योग्य पानी, साबुन से हाथ धोना, लड़के-लड़कियों और शिक्षकों के लिए पृथक शौचालयों की सुविधा शामिल हैं, वहीं मानव विकास घटक के तहत स्कूल के भीतर अनुकूल स्थितियों और बच्चों के अंदर व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने वाली गतिविधियाँ आती हैं जो कई बीमारियों से बचाव में मदद करती हैं. उपरोक्त बिन्दुओं के अलावा स्कूलों में स्थायी WASH संरचना व मानकों के रखरखाव व संचालन, क्षमता निर्माण और सुदृढ़ करने हेतु समर्थन तंत्र विकसित करना एवं सामुदायिक स्वामित्व सुनिश्चित करना निर्धारित ‘सात थीम’ का हिस्सा हैं।

बिहार के स्कूलों में WASH सुविधाओं की स्थिति
यू-डाइस 2019-20 के मुताबिक़ बिहार के 72,517 स्कूलों में से 99.8 फ़ीसदी में पेयजल की सुविधा उपलब्ध है. इसी प्रकार, लगभग 98 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था है. अगर सभी WASH सुविधाओं (पृथक चलायमान शौचालय, पेयजल, हैण्ड वाशिंग) की बात करें, तो राज्य के कुल 17,329 प्राथमिक, 13,174 मिडिल, 2,055 हायर सेकण्ड्री और 1,210 सेकण्ड्री स्कूलों में ये उपलब्ध हैं।

प्रमुख मुद्दे/चुनौतियाँ
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में स्कूलों में पेयजल और शौचालय की सुविधा का प्रावधान लगातार बढ़ा है, लेकिन बुनियादी गुणवत्ता और पर्याप्तता संबंधी मानदंडों, संचालन और रखरखाव को पूरा करने और समान पहुंच में सुधार के लिए काफ़ी कुछ किए जाने की आवश्यकता है. सबसे बढ़कर, पानी और स्वच्छता सुविधाओं का हर दिन उपयोग किया जाना चाहिए और ऐसा होने के लिए ये सुविधाएं सुचारू होनी चाहिए. इसमें साबुन से हाथ धोने का प्रावधान और रखरखाव भी शामिल हैं. कई स्कूलों में WASH से जुड़ी बुनियादी ढांचागत कमियों के चलते स्वच्छता प्रथाओं का यथोचित प्रबंधन नहीं हो पाता है, जिससे कई ऐसी बीमारियां फैलती हैं जो बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 महामारी के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए स्कूल परिसर में स्वच्छता प्रथाओं का समुचित पालन एक बड़ी चुनौती है।

अपर मुख्य सचिव के विशेष कार्य पदाधिकारी, शिक्षा विभाग विनोदानंद झा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया. कार्यक्रम के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार और प्राथमिक शिक्षा निदेशक अमरेंद्र सिंह, यूनिसेफ बिहार के कार्यक्रम प्रबंधक शिवेंद्र पांडेय और WASH अधिकारी सुधाकर रेड्डी मौजूद रहे।

मुंगेर गोली कांड मामले की जांच एडीजी लां एंड आँर्डर विनय कुमार ही करेंगे।

पटना हाईकोर्ट ने मुंगेर में दुर्गा विसर्जन दौरान हुए गोलीकांड की सीआईडी जांच की मॉनिटरिंग कर रहे एडीजी के हुए स्थानांतरण को सशर्त मंजूरी दी है। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने अमरनाथ पोद्दार की आपराधिक रिट याचिका में राज्य सरकार की तरफ से दायर अर्ज़ी को मंज़ूर करते हुए यह आदेश दिया ।

कोर्ट ने यह अनुमति राज्य सरकार के इस आश्वासन पर दिया है कि एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के पद पर रहते हुए भी , एडीजी विनय कुमार इस स्थिति में रहेंगे कि वह इस गोलीकांड के जांच की निगरानी को देखते रहें । इस बारे में वे सीआईडी के नए एडीजी से आवश्यक सलाह मशविरा कर सकते हैं ।

गौरतलब है कि 7 अप्रैल 2021 को राज्य सरकार की तरफ से एड्वोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को यह आश्वासन दिया था कि बगैर हाई कोर्ट की अनुमति के विनय कुमार का बतौर एडीजी , सीआईडी के पद से कहीं भी स्थानांतरित नही किया जाएगा। चूंकि एडीजी विधि व्यवस्था केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए हैं और उस महत्वपूर्ण पद पर विनय कुमार का स्थानांतरण प्रशासनिक तौर पर आवश्यक था, इसलिए राज्य सरकार की तरफ से याचिका दायर की गई थी ।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के आश्वासन पर बाद इस स्थानांतरण की मंजूरी दी हैं।

बिहार सरकार न्यूनतम मजदूरी दर में की वृद्धि

बिहार राज्य में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत सभी 88 अधिसूचित नियोजनों में दिनांक 01.10.2021 से प्रभावी न्यूनतम मजदूरी की दरों हेतु अतिरिक्त परिवर्तनशील महंगाई भत्ता निर्धारित की गयी है|

प्रत्येक वर्ष अनुसूचित नियोजनों में नियोजित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए निर्धारित / पुनरीक्षित न्यूनतम मजदूरी के दरों पर परिवर्तनशील महंगाई भत्ता लागू करने हेतु श्रम संसाधन विभाग द्वारा वर्ष में 02 बार अर्थात 01अप्रैल एवं 01अक्टूबर से न्यूनतम मजदूरी के दरों को पुनरीक्षण किया जाता है|

न्यूनतम मजदूरी की दरों के निर्धारण/ पुनरीक्षण हेतु न्यूनतन मजदूरी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत अधिसूचित बिहार न्यूनतम मजदूरी परामर्शदात्रि पर्षद की बैठक में अनुशंसित किया गया है|

उक्त अनुशंसाओं के आलोक में सामान्य नियोजनों में कार्यरत अकुशल, अर्धकुशल, कुशल, अतिकुशल एवं पर्यवेक्षीय एवं लिपिकीय कामगारों को लाभ होगा एवं उन्हें देय मजदूरी क्रमश: 02 रूपया, 02 रूपया, 03 रूपया, 04 रुपया एवं 68 रूपया की बढ़ोतरी होगी| उक्त निर्णय से घरेलु कामगार नियोजन, कृषि नियोजन के कामगारों को भी लाभ होगा|

हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेन्द्र कुमार मिश्रा के सेवा काल का कल होगा आखरी दिन

पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेंद्र कुमार मिश्रा सेवानिवृत हो रहे हैं।इनके सेवानिवृत होने पर पटना हाईकोर्ट में विदाई समारोह आयोजित किया गया।इस अवसर पर चीफ जस्टिस व अन्य जज उपस्थित रहे।

इनके सेवानिवृत होने की बाद पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस समेत कुल जजों की अठारह रह जाएगी।पटना हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पदों की संख्या 53 है,लेकिन अब तक इस संख्या तक जजों के पद नहीं भरे जा सके है।

बिहार के जनसंख्या के अनुपात में जजों की वर्तमान जजों की स्वीकृत संख्या 53 की जगह कम से कम 75 जज होने चाहिए थे,परंतु अभी वर्तमान स्वीकृत जजों की संख्या के एक तिहाई जज ही कार्यरत हैं।

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने अभी हाल में पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस ए अमानुल्लाह को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की अनुशंसा की हैं।दूसरी ओर दूसरे हाईकोर्ट से चार जजों के पटना हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की भी अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कर दी है।

इनमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस राजन गुप्ता,कर्नाटक हाईकोर्ट से जस्टिस पी बी बजनथ्री,राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और केरल हाईकोर्ट से जस्टिस ए एम बदर के नाम शामिल हैं।

इनके अतिरिक्त पटना हाईकोर्ट के वकील कोटा से 6 वकीलों के नाम और बिहार न्यायिक सेवा से दो लोगों के नाम जज की बहाली के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अनुशंसित किया है।

वकील कोटा से पटना हाईकोर्ट के जज नियुक्त करने के लिए जिनकी अनुशंसा की गई है,उनके नाम खातीम रजा, संदीप कुमार,अंशुमान पांडे,पूर्णेंदु कुमार सिंह,सत्यव्रत वर्मा और राजेश कुमार वर्मा है।न्यायिक सेवा से पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल नवनीत कुमार पांडे और सुनील कुमार पंवार के नाम की अनुशंसा की गई है।

अगर ये सभी जज के रूप में अपना योगदान दे देते हैं, तो जजों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ेगी,लेकिन फिर भी जजों के स्वीकृत पदों की संख्या के लगभग आधे पद रिक्त पड़े रहेंगे।