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बंगाल की ‘वैलेंटाइन दीदी’: चुनाव से पहले भावनात्मक वीडियो के जरिए तृणमूल का सॉफ्ट कैंपेन

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल तेजी से बदल रहा है। इसी बीच सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress (एआईटीसी) ने वैलेंटाइन डे के अवसर पर एक 59 सेकेंड का भावनात्मक वीडियो जारी कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने आधिकारिक हैंडल से यह वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को “बंगाल की वैलेंटाइन दीदी” बताया।

वीडियो का केंद्रीय संदेश यह है कि प्यार केवल गुलाब के फूलों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि मुश्किल समय में साथ खड़े होने का नाम है। तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रतीकात्मक संदेश के माध्यम से मुख्यमंत्री की छवि एक संवेदनशील, स्नेही और संरक्षक नेता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वीडियो केवल एक भावनात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि चुनाव से पहले मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

वैलेंटाइन डे का नया राजनीतिक अर्थ

वीडियो की शुरुआत में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाथ में गुलाब लिए नजर आती हैं। वह बच्चियों से मिलती हैं, उन्हें दुलार करती हैं, उनके माथे को चूमती हैं और स्नेह जताती हैं। बैकग्राउंड में एक आवाज सुनाई देती है—“वैलेंटाइन डे का मतलब सिर्फ गुलाब फूल का एक्सचेंज नहीं होता, प्यार का मतलब है आफत-विपत्ति में साथ खड़े होना।”

यह संदेश स्पष्ट रूप से पारंपरिक रोमांटिक अवधारणा से हटकर सामाजिक और राजनीतिक अर्थ गढ़ने की कोशिश करता है। वीडियो में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि मुख्यमंत्री का प्रेम व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक और जन-केन्द्रित है।

मुश्किल घड़ी में साथ: सच्चे प्यार की परिभाषा

वीडियो में अलग-अलग अवसरों के फुटेज शामिल किए गए हैं। कहीं ममता बनर्जी बच्चों को गले लगाती दिखती हैं, तो कहीं किसी महिला के आंसू पोंछती नजर आती हैं। बुजुर्ग महिलाओं के बीच बैठकर संवाद करती हुई उनकी छवियां भी शामिल हैं।

बैकग्राउंड वॉयस कहती है—“मुश्किल घड़ी में किसी का हाथ थाम लेना ही सच्चा प्यार है।” इस कथन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मुख्यमंत्री केवल प्रशासनिक प्रमुख नहीं, बल्कि एक संवेदनशील अभिभावक की तरह जनता के साथ खड़ी रहती हैं।

एक महिला बांग्ला में कहती सुनाई देती है कि “दीदी हमें प्यार करती हैं, वही हमारे बारे में सोचती हैं, और कोई नहीं सोचता।” इस संवाद के माध्यम से वीडियो भावनात्मक जुड़ाव को और गहरा बनाने का प्रयास करता है।

अभिभावक की छवि को मजबूत करने की रणनीति

वीडियो में ममता बनर्जी को सफेद रंग की नीली पाड़ वाली साड़ी में दिखाया गया है—जो उनकी पहचान का स्थायी हिस्सा बन चुकी है। वह लोगों का अभिवादन करती हैं, बच्चों को गोद में उठाती हैं और सहजता से संवाद करती दिखती हैं।

बैकग्राउंड में आवाज आती है कि वह “ऐसी मुख्यमंत्री हैं, जो किसी अभिभावक की तरह हैं।” इस वाक्य के जरिए नेतृत्व को मातृत्व और संरक्षण की भावना से जोड़ा गया है। तृणमूल कांग्रेस ने लंबे समय से “दीदी” की छवि को एक भावनात्मक ब्रांड के रूप में स्थापित किया है, और यह वीडियो उसी ब्रांडिंग को और सुदृढ़ करता है।

परिवार जैसा रिश्ता: राजनीतिक संदेश का विस्तार

वीडियो के अगले हिस्से में कहा गया है कि ममता बनर्जी बंगाल के लोगों को अपने परिवार की तरह प्यार करती हैं। जब भी राज्य पर कोई संकट आता है, वह सबसे पहले लोगों के बीच पहुंचती हैं। प्राकृतिक आपदा हो, सामाजिक संकट हो या व्यक्तिगत त्रासदी—वीडियो यह दिखाने की कोशिश करता है कि मुख्यमंत्री हर परिस्थिति में मौजूद रहती हैं।

तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि यह रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि दिल का रिश्ता है—निःस्वार्थ और अटूट। अंत में वीडियो में संदेश दिया जाता है कि वैलेंटाइन डे के अवसर पर यह बंधन और मजबूत हो।

चुनावी संदर्भ में भावनात्मक अपील

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वीडियो आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बंगाल की राजनीति में व्यक्तित्व-आधारित प्रचार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। तृणमूल कांग्रेस अक्सर ममता बनर्जी की व्यक्तिगत छवि—संघर्षशील, सादगीपूर्ण और जनता के करीब—को अपने अभियान का केंद्र बनाती रही है।

वैलेंटाइन डे जैसे अवसर का इस्तेमाल कर पार्टी ने एक सॉफ्ट इमोशनल कैंपेन की शुरुआत की है। इसमें आक्रामक राजनीतिक भाषणों या विरोधियों पर हमले की जगह भावनात्मक जुड़ाव और संवेदनशीलता पर जोर दिया गया है।

ICC Men’s T20 World Cup 2026: एडेन मार्करम की विस्फोटक पारी से South Africa national cricket team ने New Zealand national cricket team को 7 विकेट से हराया

टी20 विश्व कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका ने एक बार फिर अपने शानदार फॉर्म का प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। पहले गेंदबाजी करते हुए अफ्रीकी टीम ने न्यूजीलैंड को 20 ओवर में 7 विकेट पर 175 रन पर रोक दिया टी20 विश्व कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका ने एक बार फिर अपने शानदार फॉर्म का प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। पहले गेंदबाजी करते हुए अफ्रीकी टीम ने न्यूजीलैंड को 20 ओवर में 7 विकेट पर 175 रन पर रोक दिया और फिर लक्ष्य का पीछा करते हुए महज 17.1 ओवर में तीन विकेट खोकर 178 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के नायक रहे कप्तान Aiden Markram, जिन्होंने नाबाद 86 रन की मैच जिताऊ पारी खेली।


दक्षिण अफ्रीका की लगातार तीसरी जीत

इस जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने टूर्नामेंट में अपनी लगातार तीसरी जीत दर्ज की और सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला कप्तान एडेन मार्करम के लिए बिल्कुल सही साबित हुआ।

न्यूजीलैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम को 33 रन के स्कोर पर पहला झटका लगा, जब Tim Seifert 13 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद कीवी बल्लेबाजी नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही, जिससे वे बड़े स्कोर की ओर मजबूती से बढ़ नहीं सके।


न्यूजीलैंड की पारी: कुछ उपयोगी पारियां, लेकिन ठोस साझेदारी का अभाव

मध्यक्रम में Mark Chapman ने 48 रन की जुझारू पारी खेली और टीम को संभालने की कोशिश की। उनके अलावा Daryl Mitchell ने 32 रन, Finn Allen ने 31 रन और James Neesham ने 23 रन का योगदान दिया। हालांकि इन पारियों के बावजूद न्यूजीलैंड की टीम कोई बड़ी साझेदारी नहीं बना सकी, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

दक्षिण अफ्रीका की ओर से गेंदबाजी में Marco Jansen ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट झटके और कीवी बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। उनके अलावा Lungi Ngidi, Keshav Maharaj और Corbin Bosch ने एक-एक विकेट हासिल किया। अफ्रीकी गेंदबाजों ने सटीक लाइन-लेंथ और नियंत्रित गेंदबाजी से न्यूजीलैंड को 175 रन तक ही सीमित रखा।


लक्ष्य का पीछा: मार्करम का तूफान

176 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम ने आक्रामक शुरुआत की। हालांकि शुरुआती झटकों के बावजूद कप्तान एडेन मार्करम ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने 44 गेंदों पर नाबाद 86 रन बनाए, जिसमें 8 चौके और 4 छक्के शामिल थे। उनकी पारी में संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला।

ओपनर Quinton de Kock ने 20 रन बनाए, जबकि Ryan Rickelton और Dewald Brevis ने 21-21 रन का योगदान दिया। अंत में David Miller ने नाबाद 24 रन बनाकर टीम को जीत की दहलीज पार कराई।

मार्करम और मिलर के बीच हुई साझेदारी ने मैच का रुख पूरी तरह दक्षिण अफ्रीका की ओर मोड़ दिया। दोनों बल्लेबाजों ने संयमित लेकिन तेज रनगति बनाए रखी और 17.1 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया।


मैच का टर्निंग प्वाइंट

मार्को जानसेन की शुरुआती सफलताएं और मध्य ओवरों में कसी हुई गेंदबाजी मैच का अहम मोड़ साबित हुई। न्यूजीलैंड की टीम 190 के पार जाने की स्थिति में दिख रही थी, लेकिन नियमित अंतराल पर गिरते विकेटों ने उन्हें बड़ा स्कोर खड़ा करने से रोक दिया। जवाब में मार्करम की कप्तानी पारी ने अफ्रीकी टीम को दबाव में आने नहीं दिया।


अंक तालिका में मजबूती

लगातार तीसरी जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने अंक तालिका में मजबूत स्थिति बना ली है। टीम का आत्मविश्वास चरम पर है और बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी भी संतुलित नजर आ रही है। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड को इस हार के बाद अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा, खासकर मध्यक्रम की स्थिरता और डेथ ओवरों की गेंदबाजी को लेकर।

नवादा दौरे पर ड्रीम प्रोजेक्ट ‘गंगाजल उद्वह योजना’ का निरीक्षण किया नीतीश कुमार ने, दक्षिण बिहार के जल संकट समाधान की दिशा में बड़ा कदम

बिहार की राजनीति और विकास यात्रा में जल प्रबंधन हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। खासकर दक्षिण बिहार के जिलों—नवादा, गया और राजगीर—में वर्षों से पेयजल संकट एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में शनिवार की सुबह जब Nitish Kumar नवादा जिले के मोतनाजे डैम पहुंचे, तो यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि राज्य की एक महत्वाकांक्षी योजना की प्रगति का निर्णायक आकलन था।

मुख्यमंत्री ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘गंगाजल उद्वह योजना’ की बारीकी से समीक्षा की और स्पष्ट संदेश दिया कि अब नवादा के हर घर तक गंगा जल पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के सख्त निर्देश दिए और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न करने की चेतावनी भी दी।

मोतनाजे डैम पर मुख्यमंत्री का सख्त रुख

नवादा के मोतनाजे डैम पर पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने निर्माण स्थल का व्यापक निरीक्षण किया। पाइपलाइन बिछाने, जल भंडारण, पंपिंग स्टेशन और शोधन इकाई से जुड़े कार्यों की जानकारी अधिकारियों से ली गई। तकनीकी विशेषज्ञों ने उन्हें तीसरे चरण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन से जुड़ा मिशन है। उन्होंने पूछा कि किस चरण में कितना काम पूरा हुआ है, किन स्थानों पर देरी हो रही है और उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

जिलाधिकारी रवि प्रकाश और एसपी अभिनव धीमान ने सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि निर्माण कार्य के दौरान पारदर्शिता बनी रहे और स्थानीय जनता को भी इसकी प्रगति से अवगत कराया जाए।

सात निश्चय योजना के तीसरे चरण की समीक्षा

यह दौरा ‘सात निश्चय योजना’ के तीसरे चरण की समीक्षा से भी जुड़ा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं की सफलता का मूल्यांकन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले परिणामों से होना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि समय-समय पर फील्ड विजिट कर प्रगति का आकलन करें। जहां भी तकनीकी या प्रशासनिक अड़चनें हों, उन्हें तत्काल दूर किया जाए।

नवादा से पहले राजगीर का दौरा

नवादा पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री का काफिला Rajgir पहुंचा था। राजगीर, जो ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, राज्य सरकार की पर्यटन विकास नीति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

राजगीर में मुख्यमंत्री ने गिरियक स्थित घोड़ा कटोरा जलाशय का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए क्या दीर्घकालिक योजना बनाई गई है।

इसके बाद उन्होंने वेणुवन परिसर में आधुनिक ‘साउंड एंड लाइट सिस्टम’ की आधारशिला रखी। इस परियोजना का उद्देश्य राजगीर के ऐतिहासिक महत्व को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करना है।

पर्यटन और बुनियादी विकास का संतुलन

राजगीर में साउंड एंड लाइट सिस्टम की स्थापना को सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का अर्थ केवल सड़क और पुल बनाना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित और सशक्त करना है। राजगीर, बोधगया और गया जैसे क्षेत्रों में पर्यटन को नई पहचान देने के लिए आधारभूत संरचना मजबूत की जा रही है।

गंगाजल उद्वह योजना: एक तकनीकी चमत्कार

‘गंगाजल उद्वह योजना’ दक्षिण बिहार के लिए एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। इस योजना के तहत Mokama (हथिदह) से गंगा नदी का पानी पंप कर लगभग 151 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए गया, बोधगया, राजगीर और नवादा तक पहुंचाया जा रहा है।

यह परियोजना केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है। इसमें उच्च क्षमता के पंपिंग स्टेशन, जल शोधन संयंत्र, भंडारण टैंक और वितरण नेटवर्क शामिल हैं।

मोतनाजे डैम इस परियोजना का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां पानी का भंडारण कर उसे शोधन के बाद घर-घर तक पहुंचाया जाएगा।

भूजल संकट से राहत की उम्मीद

दक्षिण बिहार के जिलों में वर्षों से भूजल स्तर गिरता जा रहा है। गर्मियों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब हैंडपंप और कुएं सूखने लगते हैं।

गंगाजल उद्वह योजना के माध्यम से सतही जल स्रोत को प्राथमिकता देकर भूजल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संतुलन भी बना रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधन सुरक्षित रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना पूरी होने के बाद नवादा शहर में हर नल से शुद्ध गंगाजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही

मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट कर दिया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन हो और नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि स्थानीय लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए। परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में समुचित संवाद बनाए रखने पर जोर दिया गया।

स्थानीय प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात

नवादा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय सांसदों, मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ तभी सार्थक है जब वह आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सरकार की योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाएं और लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने में सेतु की भूमिका निभाएं।

दक्षिण बिहार के लिए ‘वरदान’ साबित होगी योजना

नवादा, गया और राजगीर जैसे शहर दशकों से जल संकट का सामना कर रहे थे। ‘हर घर गंगाजल’ पहल को इन जिलों के लिए जीवनरेखा के रूप में देखा जा रहा है।

तकनीकी दृष्टि से यह परियोजना देश की अनूठी जल आपूर्ति योजनाओं में गिनी जा रही है। लंबी दूरी तक पानी पहुंचाने की यह व्यवस्था ऊर्जा, इंजीनियरिंग और प्रबंधन का समन्वित उदाहरण है।

पटना: फिल्मी अंदाज में ज्वेलरी शॉप में सेंधमारी, दीवार तोड़ी, लॉकर काटा और 60 लाख के गहने ले उड़े चोर

PATNA: बिहार की राजधानी Patna के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर अपराधियों ने दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देकर पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था को खुली चुनौती दी है। पालीगंज अनुमंडल के रानीतालाब थाना क्षेत्र स्थित पततू बाजार में स्थित ‘रजनीश ज्वेलर्स’ नामक आभूषण दुकान में चोरों ने बेहद सुनियोजित और फिल्मी अंदाज में सेंधमारी कर लाखों रुपये के गहनों पर हाथ साफ कर दिया। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय व्यापारियों को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

सुबह दीवार में छेद और सीढ़ी देख उड़ गए होश

घटना का खुलासा उस समय हुआ जब सुबह-सुबह बाजार के कुछ लोग अपनी-अपनी दुकानें खोलने पहुंचे। रजनीश ज्वेलर्स की दुकान के पीछे की ओर दीवार में बड़ा सा छेद और वहां टिकाई गई एक सीढ़ी देखकर लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। तत्काल दुकान मालिक रजनीश कुमार को सूचना दी गई। जब तक वे मौके पर पहुंचे, आसपास भीड़ जुट चुकी थी।

दुकान के सामने का शटर पूरी तरह सुरक्षित और बंद था। ताला भी टूटा नहीं था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि चोरों ने सामने से नहीं, बल्कि पीछे की दीवार काटकर दुकान में प्रवेश किया। जिस तरीके से दीवार को काटा गया, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि चोरों के पास पेशेवर उपकरण थे और उन्होंने काफी समय लेकर पूरी तैयारी के साथ वारदात को अंजाम दिया।

अंदर का मंजर देख दंग रह गए मालिक

रजनीश कुमार ने जैसे ही दुकान का शटर खोलकर अंदर कदम रखा, वे सन्न रह गए। पूरा सामान बिखरा हुआ था। अलमारियां खुली थीं, शोकेस के शीशे हटाए गए थे और सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उन्होंने देखा कि दुकान का मुख्य लॉकर गैस कटर जैसे औजार से काट दिया गया है।

प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 25 से 30 किलो चांदी के आभूषण, लगभग 150 ग्राम सोने के गहने और करीब 67 हजार रुपये नकद चोरी हो चुके थे। कुल नुकसान का अनुमान 50 से 60 लाख रुपये के बीच लगाया जा रहा है। हालांकि अंतिम आंकड़ा लिखित आवेदन और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पूरी प्लानिंग के साथ हुई वारदात

जिस तरीके से दीवार काटी गई, सीढ़ी लगाई गई और सीधे लॉकर तक पहुंच बनाई गई, उससे साफ है कि चोरों ने पहले दुकान की रेकी की थी। उन्हें दुकान के अंदरूनी ढांचे, लॉकर की स्थिति और बाजार की गतिविधियों की पूरी जानकारी थी। आशंका जताई जा रही है कि वारदात में तीन से पांच लोगों का गिरोह शामिल हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चोरी में आमतौर पर दो तरह के लोग शामिल होते हैं—एक जो बाहर निगरानी करते हैं और दूसरे जो अंदर जाकर चोरी को अंजाम देते हैं। दुकान के भीतर मिले खाली गहनों के डिब्बे और फैला सामान इस बात का संकेत देते हैं कि चोरों ने पर्याप्त समय लेकर चयनित गहनों को समेटा।

CCTV का DVR भी ले गए साथ

सबूत मिटाने के उद्देश्य से चोर दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर भी साथ ले गए। इससे जांच में शुरुआती स्तर पर कठिनाई आ सकती है। हालांकि पुलिस आसपास की अन्य दुकानों और मुख्य सड़क पर लगे कैमरों के फुटेज खंगाल रही है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

सीसीटीवी का डीवीआर ले जाना इस बात का संकेत है कि अपराधी तकनीकी रूप से भी सतर्क थे और वे पहचान से बचने की पूरी तैयारी करके आए थे। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह पहले भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका हो सकता है।

मुख्य सड़क से सटा बाजार, फिर भी वारदात

पततू बाजार मुख्य सड़क से सटा हुआ है और यहां रात के समय भी कभी-कभार आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में इतनी बड़ी चोरी का बिना किसी शोर-शराबे के हो जाना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर रात में नियमित गश्त होती, तो शायद इस तरह की घटना टाली जा सकती थी।

कुछ व्यापारियों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से इलाके में छोटी-मोटी चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन इस स्तर की वारदात पहली बार सामने आई है। इससे व्यापारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।

पुलिस, FSL और डॉग स्क्वॉड की जांच

सूचना मिलते ही रानीतालाब थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को बुलाया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने दीवार, लॉकर और दुकान के भीतर से फिंगरप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया।

डॉग स्क्वॉड की मदद भी ली गई, ताकि चोरों के भागने की दिशा का पता चल सके। हालांकि भीड़ और सुबह की गतिविधियों के कारण साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

थानाध्यक्ष ने बताया कि दुकान मालिक से लिखित आवेदन प्राप्त होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर ली जाएगी और तकनीकी तथा मानवीय दोनों आधारों पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी। आसपास के मोबाइल टावर से कॉल डिटेल्स और संदिग्ध नंबरों की भी जांच की जा सकती है।

व्यापारियों में आक्रोश, बढ़ी गश्त की मांग

घटना के बाद पततू बाजार के व्यापारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने एकजुट होकर पुलिस प्रशासन से रात में गश्त बढ़ाने, बाजार क्षेत्र में स्थायी पुलिस पिकेट स्थापित करने और सीसीटीवी निगरानी को मजबूत करने की मांग की है।

व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उनका तर्क है कि लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाएं व्यापार के माहौल को प्रभावित कर रही हैं और ग्राहक भी असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बाजारों में अक्सर सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जाती है। कई दुकानों में आधुनिक अलार्म सिस्टम या मजबूत सुरक्षा इंतजाम नहीं होते, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि व्यापारियों को भी अपने स्तर पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करना चाहिए, जैसे—उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे, क्लाउड बैकअप, अलार्म सिस्टम और मजबूत लॉकर की व्यवस्था।

बंगाल : कोलकाता में शुभेंदु अधिकारी का ममता सरकार पर बड़ा हमला; 2.15 करोड़ बेरोजगारी, 51 परियोजनाएं ठप और 10 लाख पद खाली होने का दावा

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उस समय गर्मा गई जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने राजधानी Kolkata में आयोजित एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बेरोजगारी, उद्योगों की स्थिति, महिला सुरक्षा, सरकारी रिक्त पदों, युवाओं की योजनाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे कई मुद्दों को एक साथ उठाते हुए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। यह प्रेस वार्ता राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।

महाशिवरात्रि की शुभकामनाओं से शुरुआत

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत शुभेंदु अधिकारी ने राज्यवासियों को महाशिवरात्रि की अग्रिम शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने कहा कि यह पर्व भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और सनातन परंपराओं का प्रतीक है। इसके बाद उन्होंने सीधे राज्य की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से इतर राज्य के युवाओं और आम नागरिकों के सामने गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां खड़ी हैं, जिन पर सरकार ध्यान नहीं दे रही।

2.15 करोड़ बेरोजगारी का दावा

सबसे बड़ा आरोप उन्होंने बेरोजगारी को लेकर लगाया। उनका दावा था कि पश्चिम बंगाल में 2 करोड़ 15 लाख लोग बेरोजगार हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल पंजीकृत बेरोजगारों का नहीं बल्कि वास्तविक स्थिति को दर्शाता है, जिसमें शिक्षित युवा, तकनीकी डिग्रीधारी छात्र, पारंपरिक उद्योगों से जुड़े श्रमिक और ग्रामीण क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार सृजन की गति बेहद धीमी है और निजी निवेश लगभग ठप पड़ चुका है। अधिकारी के अनुसार, रोजगार के अवसरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा राज्य छोड़कर अन्य राज्यों में काम की तलाश में जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग एक करोड़ लोग पिछले वर्षों में काम के लिए राज्य से बाहर गए हैं।

51 औद्योगिक परियोजनाएं ठप

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में 51 औद्योगिक और निवेश परियोजनाएं फिलहाल बंद या ठप स्थिति में हैं। उनके अनुसार, निवेशकों का भरोसा सरकार की नीतियों, प्रशासनिक अस्थिरता और कथित भ्रष्टाचार के कारण कमजोर हुआ है।

उन्होंने कहा कि एक समय पश्चिम बंगाल उद्योगों का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज स्थिति यह है कि नई कंपनियां निवेश करने से हिचक रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योगपतियों को अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

युवश्री योजना पर गंभीर सवाल

विपक्ष के नेता ने वर्ष 2013 में शुरू की गई ‘युवा उत्साह परियोजना’, जिसे बाद में ‘युवश्री’ नाम दिया गया, पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि इस योजना के तहत 17 लाख युवाओं ने आवेदन किया था, लेकिन केवल लगभग एक लाख युवाओं को सीमित समय के लिए भत्ता मिला।

उन्होंने कहा कि शेष 16 लाख से अधिक युवा आज भी किसी सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अधिकारी ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया गया और बाद में इसे प्रभावी रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इन 17 लाख आवेदकों की वर्तमान स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे और स्पष्ट करे कि योजना का वास्तविक लाभ किसे मिला।

सरकारी पदों में भारी रिक्तियां

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में सरकारी पदों की स्थिति को भी गंभीर बताया। उनका आरोप था कि लगभग 6 लाख सरकारी पद समाप्त कर दिए गए हैं और करीब 10 लाख पद वर्तमान में खाली हैं।

उन्होंने कहा कि इनमें 3.30 लाख शिक्षक और गैर-शिक्षक पद शामिल हैं। इसके अलावा 1.50 लाख पुलिस कांस्टेबल पदों पर भी नियुक्तियां नहीं की गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

उनके अनुसार, स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि पुलिस बल की कमी के कारण अपराध नियंत्रण पर असर पड़ रहा है।

महिला सुरक्षा का मुद्दा

महिला सुरक्षा के सवाल पर भी उन्होंने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार इन्हें रोकने में असफल रही है।

उन्होंने कुछ हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय मामलों को दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने विशेष रूप से सत्ताधारी दल All India Trinamool Congress के एक कथित मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आरोप गंभीर हैं तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही है। उन्होंने बेरोजगारी, सरकारी भर्तियों और उद्योग निवेश से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के दावे सही हैं तो उसे डेटा के साथ जनता के सामने आना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए आंकड़ों को अस्पष्ट रखा जाता है।

‘चाकरी मांगे बांग्ला’ अभियान

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा के ‘चाकरी मांगे बांग्ला’ अभियान में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अभियान युवाओं की आवाज को मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां रोजगार के अवसर अधिक हैं और निवेश का माहौल बेहतर है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भी बदलाव की जरूरत है ताकि युवाओं को राज्य छोड़कर बाहर न जाना पड़े।

एंटी-इन्कम्बेंसी का दावा

शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि राज्य में एंटी-इन्कम्बेंसी की भावना तेजी से बढ़ रही है। उनके अनुसार, लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही है।

उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनावों में जनता बदलाव का मन बना चुकी है और विपक्ष इस जनभावना को संगठित करने का प्रयास करेगा।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है। विधानसभा चुनावों के बाद भी दोनों दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

विपक्ष का आरोप है कि राज्य में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए राज्य की छवि खराब कर रहा है।

राज्य सरकार की संभावित प्रतिक्रिया

हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए गए आरोपों पर तत्काल सरकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, लेकिन आम तौर पर सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को निराधार बताता रहा है। सरकार का दावा है कि उसने उद्योग, बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण योजनाओं और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है।

राज्य सरकार अक्सर यह भी कहती है कि बेरोजगारी राष्ट्रीय स्तर की समस्या है और केंद्र सरकार की नीतियों का भी राज्यों पर प्रभाव पड़ता है।

जेल से बाहर आते ही आक्रामक दिखे पप्पू यादव, बोले- बेटियों के लिए 100 बार मरना मंजूर

Pappu Yadav बेउर जेल से रिहा होते ही पहले से अधिक आक्रामक अंदाज में नजर आए। मीडिया से बातचीत में पूर्णिया सांसद ने अपनी गिरफ्तारी को ‘अन्याय’ करार दिया और बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि “बिहार की गिरती व्यवस्था” के खिलाफ है।

बिहार की मौजूदा राजनीति पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज की राजनीति बदले की भावना से संचालित हो रही है। उन्होंने इसे अंग्रेजी हुकूमत से भी बदतर बताते हुए कहा कि उस समय कम से कम संघर्ष का स्पष्ट मोर्चा था, लेकिन आज “दोस्त और दुश्मन की पहचान मुश्किल हो गई है।” उन्होंने सत्ता पक्ष पर ‘चरित्रहीन राजनीति’ करने का आरोप लगाया।

पप्पू यादव ने दावा किया कि बिहार में हर दिन 100 से 150 बच्चियां लापता हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यह आंकड़ा 53 तक पहुंचा है, लेकिन बिहार में स्थिति कहीं अधिक भयावह है।

दरभंगा में 6 साल की बच्ची और गया में 14 साल की किशोरी के साथ हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने नेताओं और समाज की चुप्पी पर सवाल उठाए। भावुक होते हुए सांसद ने कहा, “बेटियों की इज्जत की रक्षा के लिए मैं 100 बार भी मरना पसंद करूंगा।”

अपनी सेहत और जेल के अनुभव साझा करते हुए सांसद ने प्रशासन की संवेदनहीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान Patna Medical College and Hospital (PMCH) में उन्हें 24 घंटे में एक बोतल पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि जेल के भीतर उनकी जान को खतरा था और पूरे मामले की शिकायत वे विधानसभा अध्यक्ष से करेंगे। उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जांच की मांग करने की बात कही।

पप्पू यादव के इन बयानों से स्पष्ट है कि जेल से बाहर आने के बाद वे बिहार की राजनीति में आक्रामक तेवर के साथ सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज होने के आसार हैं।

होली पर घर जाना हुआ आसान: दिल्ली-कोलकाता से बिहार के लिए 26 स्पेशल ट्रेनें

नई दिल्ली: होली के मद्देनजर यात्रियों की भारी भीड़ को संभालने के लिए Indian Railways ने बड़ा फैसला लिया है। East Central Railway ने दिल्ली और कोलकाता रूट से बिहार के विभिन्न शहरों के लिए 13 जोड़ी यानी कुल 26 होली स्पेशल ट्रेनों की समय-सारणी जारी की है।

इस फैसले से त्योहार पर घर लौटने वाले लाखों यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी और यात्रा अधिक सुगम हो सकेगी।

नई दिल्ली और आनंद विहार से स्पेशल ट्रेनें

रेलवे ने Anand Vihar Terminal और New Delhi Railway Station से बिहार के प्रमुख शहरों के लिए विशेष गाड़ियां चलाने की घोषणा की है।

प्रमुख ट्रेनें और तिथियां:

  • 04070 आनंद विहार–शेखपुरा: 20, 24, 27 फरवरी और 03, 06 मार्च
    वापसी: 04069 शेखपुरा–आनंद विहार समान तिथियों पर
  • 04054 नई दिल्ली–बरौनी: 20 फरवरी से 06 मार्च
    वापसी: 04053 बरौनी–नई दिल्ली 22 फरवरी से 08 मार्च
  • 04060 नई दिल्ली–सुपौल: 20 फरवरी से 06 मार्च
    वापसी: 04059 सुपौल–नई दिल्ली 22 फरवरी से 08 मार्च
  • 04010 दिल्ली–सीतामढ़ी: 26 फरवरी, 05 मार्च
    वापसी: 04009 सीतामढ़ी–दिल्ली 27 फरवरी, 06 मार्च
  • 04014 आनंद विहार–लौकहा बाजार: 27 फरवरी, 06 मार्च
    वापसी: 04013 लौकहा बाजार–आनंद विहार 28 फरवरी, 07 मार्च
  • 04066 आनंद विहार–खोरधा रोड जं.: 27 फरवरी से 03 मार्च
    वापसी: 04065 खोरधा रोड जं.–आनंद विहार 28 फरवरी से 04 मार्च

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मांग बढ़ने पर अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों की घोषणा भी की जा सकती है।

कोलकाता और हावड़ा से भी विशेष इंतजाम

पश्चिम बंगाल में रहने वाले बिहारियों के लिए भी खास व्यवस्था की गई है। Howrah Junction railway station, Sealdah railway station और Kolkata से रक्सौल, मधुबनी और अन्य स्टेशनों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी।

प्रमुख ट्रेनें:

  • 03043 हावड़ा–रक्सौल: 28 फरवरी, 07 एवं 14 मार्च
    वापसी: 03044 रक्सौल–हावड़ा 01, 08 एवं 15 मार्च
  • 03045 हावड़ा–रक्सौल: 01, 02 मार्च
    वापसी: 03046 रक्सौल–हावड़ा 02, 03 मार्च
  • 03183 सियालदह–मधुबनी: 28 फरवरी, 07 मार्च
    वापसी: 03184 मधुबनी–सियालदह 01, 08 मार्च
  • 03185 कोलकाता–मधुबनी: 27 फरवरी
    वापसी: 03186 मधुबनी–लौकहा बाजार 27 फरवरी, 06 मार्च
  • 08753 दुर्ग–मधुबनी: 01 मार्च
    वापसी: 08754 मधुबनी–दुर्ग 02 मार्च
  • 03007 हावड़ा–खातीपुरा (जयपुर): 25 फरवरी, 11 मार्च
    वापसी: 03008 खातीपुरा–हावड़ा 27 फरवरी, 13 मार्च

क्लोन हमसफर एक्सप्रेस के फेरों में विस्तार

जयनगर और अमृतसर के बीच चलने वाली लोकप्रिय हमसफर क्लोन एक्सप्रेस (04651/04652) की परिचालन अवधि भी बढ़ा दी गई है। अब यह ट्रेन 1 मार्च से 31 मार्च तक चलेगी। इससे लंबी दूरी के यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा और भीड़ का दबाव कम होगा।

टिकट बुकिंग और सुविधाएं

इन स्पेशल ट्रेनों में स्लीपर और एसी कोच दोनों की व्यवस्था की गई है। यात्री टिकट की बुकिंग IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकते हैं।

रेलवे का कहना है कि जरूरत पड़ने पर और भी स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। इस पहल से खासकर प्रवासी मजदूरों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

होली के इस खास मौके पर रेलवे की यह पहल बिहार के यात्रियों के लिए बड़ी सौगात साबित हो सकती है।

बदला प्रधानमंत्री कार्यालय का पता – सेवा तीर्थ से चलेगी सरकार

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 13 फरवरी 2026 को राजधानी नई दिल्ली में अपने नए प्रधानमंत्री कार्यालय ’सेवा तीर्थ’ (Seva Teerth) का शानदार उद्घाटन किया, जिससे देश के प्रशासनिक ढांचे में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यह ऐतिहासिक बदलाव दशकों से चली आ रही परंपरा को तोड़कर ब्रिटिश-कालीन ‘साउथ ब्लॉक’ से प्रधान कार्यालय को नई, आधुनिक और सुविधाओं से लैस इमारत में स्थानांतरित कर रहा है।

’सेवा तीर्थ’ क्या है?

‘सेवा तीर्थ’ अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय को एक ही परिसर में रखता है। इससे पहले ये संस्थान अलग-अलग पुराने भवनों में फैले हुए थे, जिससे समन्वय और गति की परेशानी होती थी। नए परिसर का नाम “सेवा तीर्थ” इसलिए रखा गया है कि यह सेवा और जनहित की भावना को दर्शाता है।

यह अत्याधुनिक परिसर दारा शिकोह रोड पर स्थित है और इसे मोर्डन डिज़ाइन, डिजिटल कार्यप्रणाली, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, ऊर्जा दक्षता तथा सुरक्षा सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है।

कर्तव्य भवन 1 और 2 भी उद्घाटित

उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री ने कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी लोकार्पण किया। इन भवनों में कई प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को स्थान दिया गया है, जिनमें वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, कृषि एवं किसान कल्याण, शिक्षा, सूचना और प्रसारण, कानून और न्याय, रसायन और उर्वरक, तथा जनजातीय मामलों जैसे विभाग शामिल हैं।

पुराने कार्यालय का भविष्य

PMO के पुराने भवन साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक अब सरकार के प्रशासनिक केंद्र के रूप में उपयोग नहीं होंगे। सरकार ने बताया है कि पुराने इमारतों को संग्रहालय और सांस्कृतिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि उनकी ऐतिहासिक महत्ता को संरक्षित रखा जा सके।

प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के मौके पर कहा कि यह कदम नयी भारत की सेवा-oriented प्रशासनिक संरचना का प्रतीक है। इससे सरकार की कार्यकुशलता बढ़ेगी, निर्णय लेने में तेजी आएगी और नागरिकों के साथ जुड़ाव बेहतर होगा। उन्होंने यह भी बताया कि ‘सेवा तीर्थ’ भारत की जनभावना और विकास की ऊर्जा का प्रतीक है।

हजारीबाग में हाथियों का तांडव जारी: 24 घंटे में 8 की मौत, गांवों में दहशत

Hazaribagh : हजारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गोंदवार गांव में छह लोगों की जान लेने के 24 घंटे के भीतर ही हाथियों ने दो और लोगों को मौत के घाट उतार दिया। लगातार हो रही घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

भुरकुंडा टोला में महिला को कुचला

गोंदवार गांव से सटे बहेरा पंचायत के कजरी गांव के भुरकुंडा टोला में शुक्रवार रात पांच हाथियों के झुंड ने राजेश मुर्मु के घर पर हमला कर दिया। घर में सो रही उनकी पत्नी फुलमुनी देवी को हाथियों ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हमले के दौरान राजेश मुर्मु किसी तरह दीवार फांदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। ग्रामीणों ने शोर मचाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक महिला की जान जा चुकी थी।

गुरुवार को 6 लोगों की गई थी जान

इससे एक दिन पहले, गुरुवार देर रात आंगो थाना क्षेत्र और चुरचू प्रखंड के गोंदवार गांव में हाथियों ने तांडव मचाया था। पांच हाथियों के झुंड ने घरों के गेट उखाड़ दिए और अंदर घुसकर सो रहे लोगों को कुचल दिया।

मृतकों में सुमन कुमारी (26), धनेश्वर राम (52), सूरज राम (50), सविता देवी (25), अनुराग राम (1 वर्ष) और संजना कुमारी (3 माह) शामिल हैं। इनमें सूरज राम, सविता देवी और दोनों मासूम बच्चे एक ही परिवार के थे। घटना के वक्त सभी लोग अपने घरों में सो रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई आपबीती

हमले में बचे रोहित राम ने बताया कि रात में पहले हाथियों ने घर का दरवाजा तोड़ा। बाहर निकलने पर सामने हाथी दिखा। उन्होंने घर में रखी कढ़ाही से हाथी को मारकर खुद को बचाया और खिड़की से कूदकर बाहर भागे। इसके बाद शोर मचाकर अन्य लोगों को जगाया।

वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

घटनाओं की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में हाथियों की लगातार मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई होती तो इतने लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

पंचायत भवन में शरण ले रहे ग्रामीण

लगातार हमलों से भयभीत ग्रामीणों ने रात पंचायत भवन में गुजारी। गांव में लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों में विशेष रूप से भय का माहौल है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाथियों को सुरक्षित जंगल क्षेत्र में खदेड़ने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष के गंभीर स्वरूप को उजागर कर दिया है।

बंगाल में SIR: पश्चिम बंगाल में SIR अंतिम चरण में, 32 लाख ‘अनमैप्ड’ नामों की सुनवाई से बढ़ी चुनौती

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। चुनाव आयोग ने 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का लक्ष्य तय किया है, जबकि 21 फरवरी तक सभी आपत्तियों और दावों की सुनवाई पूरी करनी अनिवार्य है।

आयोग के अनुमान के मुताबिक राज्य में करीब 32 लाख नाम ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में हैं, जिनकी जांच और सुनवाई की जानी है। इन मामलों के निस्तारण के लिए ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को दस्तावेजों की गहन पड़ताल करनी पड़ रही है। कई मामलों में दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

एक महीने के भीतर दो बच्चों का जन्म?

अंग्रेजी दैनिक The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके Metiabruz में एक परिवार के दस्तावेजों में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

एसके इरशाद और शेख नौसेद नाम के दो भाइयों की जन्मतिथि में एक महीने से भी कम का अंतर दर्ज है।

  • बड़े भाई की जन्मतिथि: 5 दिसंबर 1990
  • छोटे भाई की जन्मतिथि: 1 जनवरी 1991

SIR के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों में दोनों की उम्र में यह बेहद कम अंतर पाया गया। जांच में परिवार के कुल दस सदस्यों की पहचान हुई है। सभी दस्तावेजों में पिता के रूप में एसके अब्दुल और मां के रूप में मनोवारा बीबी का नाम दर्ज है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि दस बच्चों में से चार की जन्मतिथि 1 जनवरी दर्ज की गई है, जिसने अधिकारियों की शंका और बढ़ा दी है।

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की गहन जांच की जा रही है और संबंधित रिकॉर्ड की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।

जन्म से दो दिन पहले जारी हुआ प्रमाणपत्र

इसी तरह का एक मामला Baranagar (उत्तर 24 परगना) में सामने आया है। यहां एक व्यक्ति का जन्म प्रमाणपत्र उसके जन्म से दो दिन पहले जारी होने का मामला दर्ज हुआ।

जांच में पाया गया कि पपील सरकार द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 6 मार्च 1993 लिखी है, जबकि रजिस्ट्रेशन की तारीख 4 मार्च 1993 दर्ज है — यानी जन्म से दो दिन पहले प्रमाणपत्र जारी हो गया।

इसके अलावा, एक मतदाता को SIR 2002 में पांच वर्ष की आयु में मैप किया गया था, जबकि दूसरा रिकॉर्ड में 13 वर्ष का पाया गया। इस तरह की विसंगतियां सत्यापन प्रक्रिया को और लंबा कर रही हैं।

सत्यापन में लग रहा अतिरिक्त समय

SIR कार्य से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, ऐसे मामलों को सत्यापन के लिए संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के पास भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर अस्पताल अथॉरिटी और अन्य सरकारी अभिलेखों से भी पुष्टि की जाती है।

इन बहु-स्तरीय जांच प्रक्रियाओं के कारण सुनवाई में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। प्रशासन का कहना है कि अंतिम मतदाता सूची जारी करने से पहले सभी संदिग्ध प्रविष्टियों की जांच पूरी करना आवश्यक है, ताकि सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

राज्य में SIR की प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में है। आयोग के सामने चुनौती यह है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी अनमैप्ड नामों और दस्तावेजी विसंगतियों का समाधान कर पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची प्रकाशित की जाए।

अमेरिका की 93 रन से धमाकेदार जीत, हरमीत सिंह की फिरकी में फंसा नीदरलैंड्स

चेन्नई के ऐतिहासिक M. A. Chidambaram Stadium में खेले गए ग्रुप-A मुकाबले में ICC Men’s T20 World Cup के तहत अमेरिका ने नीदरलैंड्स पर एकतरफा जीत दर्ज की।

पहले बल्लेबाजी करते हुए अमेरिका ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 196 रन बनाए और 197 रन का विशाल लक्ष्य दिया। जवाब में नीदरलैंड्स की पूरी टीम 103 रन पर सिमट गई। अमेरिका ने यह मुकाबला 93 रन से जीत लिया।


🔥 सैतेजा और शुभम की विस्फोटक पारियां

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी अमेरिकी टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया।

  • सैतेजा मुक्कमल्ला ने 51 गेंदों पर 79 रन की शानदार पारी खेली।
    • उनकी पारी में कई दमदार चौके-छक्के शामिल रहे।
    • उन्होंने पावरप्ले के बाद भी रन गति को कम नहीं होने दिया।
  • शुभम रंजने ने भी तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 24 गेंदों पर 48 रन ठोके।
    • उन्होंने मिडिल ओवर्स में तेजी से रन जोड़कर स्कोर को 190 के पार पहुंचाया।

दोनों बल्लेबाजों की साझेदारी ने अमेरिकी पारी की नींव मजबूत कर दी।


🎯 एडवर्ड्स का टॉस फैसला पड़ा भारी

नीदरलैंड्स के कप्तान Scott Edwards ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी थी। चेन्नई में ओस को ध्यान में रखते हुए यह रणनीति बनाई गई थी, लेकिन अमेरिकी बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाकर इस फैसले को गलत साबित कर दिया।

नीदरलैंड्स की ओर से Bas de Leede ने तीन अहम विकेट लेकर कुछ हद तक नियंत्रण बनाने की कोशिश की, लेकिन दूसरे छोर से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।


😞 लक्ष्य का पीछा करते ही बिखर गई डच टीम

197 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी नीदरलैंड्स की टीम शुरुआत से दबाव में दिखी।

  • पहला विकेट सिर्फ 9 रन पर गिर गया।
  • दूसरे विकेट के लिए 32 रन की साझेदारी हुई, लेकिन इसके बाद विकेटों का पतन जारी रहा।
  • 75 रन तक पहुंचते-पहुंचते आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी।

कोई भी बल्लेबाज लंबी पारी नहीं खेल सका और पूरी टीम 103 रन पर ऑलआउट हो गई।


🌀 हरमीत और वैन शाल्कविक का कहर

अमेरिका की जीत के नायक रहे स्पिनर हरमीत सिंह

  • 4 ओवर में 21 रन देकर 4 विकेट
  • मिडिल ओवर्स में लगातार झटके देकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया

वहीं तेज गेंदबाज शेडली वैन शाल्कविक ने भी शानदार गेंदबाजी की।

  • 2.5 ओवर में 21 रन देकर 3 विकेट
  • निचले क्रम को जल्दी समेटकर मैच खत्म किया

दोनों गेंदबाजों के सामने डच बल्लेबाज पूरी तरह असहाय नजर आए।


📊 मैच का सार

टीमस्कोर
अमेरिका196/6 (20 ओवर)
नीदरलैंड्स103 ऑलआउट
परिणामअमेरिका 93 रन से विजयी

बिहार बजट सत्र: महिला शिक्षकों के ट्रांसफर से लेकर टीआरई-4 तक गूंजा सदन

पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शिक्षकों से जुड़े मुद्दों ने जोर पकड़ लिया है। शुक्रवार को बिहार विधान परिषद में पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi ने महिला शिक्षकों के ट्रांसफर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया, जिससे सदन में व्यापक चर्चा हुई।

👩‍🏫 महिला शिक्षकों को गृह जिले में पोस्टिंग की मांग

राबड़ी देवी ने सदन में कहा कि महिला शिक्षकों को उनके गृह जिले में ही पदस्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि दूर-दराज जिलों में पोस्टिंग होने के कारण महिला शिक्षकों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला शिक्षकों को अपने परिवार, बच्चों और घरेलू जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखना होता है। ऐसे में अगर उनकी पोस्टिंग गृह जिले में हो, तो वे बेहतर ढंग से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगी।

राबड़ी देवी ने सरकार से इस दिशा में नीतिगत निर्णय लेने की मांग की।

📚 शिक्षा मंत्री का जवाब

राबड़ी देवी की मांग पर शिक्षा मंत्री Sunil Kumar ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सदन में कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करेगी और जो भी संभव होगा, वह किया जाएगा।

हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ट्रांसफर नीति से जुड़े कई प्रशासनिक और तकनीकी पहलू होते हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाता है।

🚨 लॉ एंड ऑर्डर पर भी घिरी सरकार

महिला शिक्षकों के मुद्दे के साथ-साथ राबड़ी देवी ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रही है।

उन्होंने गृह मंत्री Samrat Choudhary से इस्तीफे की मांग भी की। सदन के बाहर विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा किया, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया।

📝 सीएल (Casual Leave) को लेकर उठी तकनीकी समस्या

बिहार विधान परिषद में एमएलसी Sanjeev Kumar Singh ने शिक्षकों की छुट्टियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया।

उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार, यदि कोई शिक्षक सीएल (Casual Leave) लेता है, तो उसके आगे-पीछे या बीच में पड़ने वाले रविवार या अन्य निर्धारित अवकाश को सीएल में नहीं जोड़ा जाता।

लेकिन जब शिक्षक ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से आवेदन करते हैं, तो सिस्टम रविवार या अवकाश को भी सीएल में जोड़ देता है। इससे शिक्षकों की छुट्टियां अनावश्यक रूप से कम हो जाती हैं और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीकी खामियों की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

🎓 टीआरई-4 को लेकर बढ़ा असंतोष

शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई-4) को लेकर भी राज्य में असंतोष देखा जा रहा है। बीपीएससी के जारी कैलेंडर में टीआरई-4 का कोई स्पष्ट शेड्यूल नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों में नाराजगी है।

पटना में कई अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन कर सरकार से स्पष्ट समय-सीमा घोषित करने की मांग की है।

सरकार की ओर से यह कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया के लिए आवश्यक रोस्टर भेजा जा चुका है और आगे की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। हालांकि अभ्यर्थी जल्द अधिसूचना जारी करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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Pappu Yadav को कोर्ट से मिली जमानत; तीनों केस में कोर्ट से मिली बेल

पटना : पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव को शुक्रवार को बड़ी राहत मिली है। पटना की अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज तीनों मामलों में जमानत दे दी है। वे पिछले एक सप्ताह से बेऊर जेल में बंद थे और जमानत का इंतजार कर रहे थे। अब वे किसी भी वक्त जेल से बाहर आ सकते हैं।

कोर्ट ने जमानत देते हुए यह शर्त भी रखी है कि जब भी मामले की सुनवाई होगी, उन्हें सशरीर उपस्थित होना होगा।

📌 31 साल पुराने मामले में हुई थी गिरफ्तारी

पप्पू यादव की गिरफ्तारी 6 फरवरी को 31 साल पुराने एक मामले में हुई थी। इस केस में उन्हें पहले जमानत मिल चुकी थी, लेकिन बाद में दो अन्य मामले जोड़ दिए गए, जिसके बाद अदालत ने उन्हें दोबारा जेल भेज दिया था।

⚖️ लगातार चल रही थी सुनवाई

  • 9 जनवरी से पटना सिविल कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी। हर तारीख पर बहस होती रही, लेकिन राहत नहीं मिल पा रही थी। उनके समर्थकों की नजर भी फैसले पर टिकी हुई थी। आखिरकार शुक्रवार को अदालत ने उन्हें राहत दे दी।

🚨 दो नए मामलों से बढ़ी थी मुश्किल

गुरुवार को पुलिस ने उनके खिलाफ दो और पुराने मामले जोड़ दिए थे। ये दोनों केस कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं।

  • एक मामला वर्ष 2017 का
  • दूसरा वर्ष 2019 में दर्ज

इन मामलों के जुड़ने से कानूनी स्थिति और जटिल हो गई थी। हालांकि अब जमानत मिलने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

🗣️ Rahul Gandhi ने उठाए थे सवाल

पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सरकार पर सवाल उठाए थे।

पप्पू यादव लगातार NEET छात्रा मौत मामले में सरकार की भूमिका पर भी आरोप लगाते रहे हैं।

अब आगे की सुनवाई और उनकी रिहाई को लेकर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

पश्चिम बंगाल में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; बांग्लादेश में BNP की जीत से सीमा सीटों पर बढ़ी हलचल

पश्चिम बंगाल: भारत–बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में हालिया चुनावी नतीजों के बाद सियासी और सुरक्षा हलकों में हलचल तेज हो गई है। बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी Bangladesh Nationalist Party (BNP) की सीमा से लगे निर्वाचन क्षेत्रों में जीत को लेकर पश्चिम बंगाल में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

राज्य के सीमावर्ती जिलों—जैसे North 24 Parganas, Nadia district, Murshidabad district और Malda district—में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां विशेष निगरानी रख रही हैं।

🔎 क्यों बढ़ी चिंता?

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार की राजनीतिक परिस्थितियों का असर सीमावर्ती भारतीय जिलों पर पड़ सकता है। इन क्षेत्रों में:

  • अवैध घुसपैठ
  • तस्करी (पशु, मादक पदार्थ, नकली नोट)
  • कट्टरपंथी गतिविधियों की आशंका
  • साम्प्रदायिक संवेदनशीलता

जैसे मुद्दे पहले से ही चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक बदलाव के बाद संभावित गतिविधियों को लेकर खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं।

🚨 सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी निगरानी

सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली Border Security Force (BSF) ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गश्त और चौकसी बढ़ा दी है।

सूत्रों के अनुसार:

  • संवेदनशील बॉर्डर पोस्ट पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं
  • नाइट पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है
  • संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं

राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां भी स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में काम कर रही हैं।

🏛️ सियासी प्रतिक्रिया

राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर ठोस रणनीति बनानी चाहिए। वहीं सत्ताधारी दल ने कहा है कि स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है और किसी भी प्रकार की अस्थिरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

📊 सामाजिक और आर्थिक असर

सीमा से जुड़े जिलों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक छोटे व्यापार, कृषि और सीमावर्ती गतिविधियों पर निर्भर करती है। अगर तनाव बढ़ता है तो:

  • स्थानीय व्यापार प्रभावित हो सकता है
  • आवाजाही पर प्रतिबंध लग सकता है
  • सुरक्षा जांच सख्त होने से आम नागरिकों को असुविधा हो सकती है

हालांकि फिलहाल किसी बड़े घटनाक्रम की सूचना नहीं है, लेकिन प्रशासन एहतियाती कदम उठा रहा है।

🔮 आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समन्वय अहम होगा।

पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार की एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, यह राजनीतिक और सुरक्षा समीकरणों पर निर्भर करेगा।

बिहार में अब सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ सख्ती, जीरो टॉलरेंस नीति लागू

पटना: बिहार में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। राज्य में अब जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई तेज की जा रही है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री Vijay Kumar Sinha ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारी जमीन के मामलों में अब किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

📢 विजय सिन्हा ने अपने पोस्ट में क्या कहा?

विजय कुमार सिन्हा ने अपने पोस्ट में लिखा:

“सरकारी भूमि राज्य की अमूल्य संपत्ति है। इस पर अवैध कब्जा न स्वीकार्य है, न सहनीय। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में अब सरकारी जमीन संरक्षण पर कार्रवाई और तेज की जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि सरकारी जमीन के मामलों में अब कोई ढिलाई नहीं चलेगी। NDA सरकार का संकल्प—कानून का राज, कब्जामुक्त बिहार।”

सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सख्ती

सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में Supreme Court of India के निर्देश के बाद प्रशासन और सक्रिय हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकारी जमीन के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। अधिकारियों की चूक से राज्य के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।

इसके बाद बिहार सरकार ने सभी जिलों को तेजी से कार्रवाई करने और लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया है।

🗂️ जिलों में तैयार होगा लैंड बैंक

सरकार ने जिलों को लैंड बैंक तैयार करने का भी आदेश दिया है। इसके तहत:

  • अंचल स्तर पर सरकारी जमीन की पहचान की जाएगी
  • अवैध कब्जे वाली जमीन पर वाद दायर किया जाएगा
  • कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन को रिकवर कराया जाएगा
  • नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी

लैंड बैंक बनने से राज्य में औद्योगिकीकरण (Industrialization) को बढ़ावा मिलेगा, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास संभव होगा और सरकारी योजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

📍 किन जमीनों पर पहले होगी कार्रवाई?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता के आधार पर निम्न प्रकार की जमीनों को मुक्त कराया जाएगा:

  • कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज सरकारी जमीन
  • ऐसी जमीन जिसका विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुआ हो
  • निजी व्यक्तियों के अवैध कब्जे में पड़ी सरकारी भूमि

इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए जमीन को कब्जामुक्त कराया जाएगा।

इस नई सख्ती के तहत मुख्य कदम और नियम निम्नलिखित हैं:

राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही: अंचलाधिकारियों (CO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में सरकारी जमीन की पहचान कर उसे सुरक्षित करें। किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

लैंड बैंक का निर्माण: सरकार राज्य में अंचलवार (Circle-wise) खाली और कब्जा मुक्त कराई गई जमीनों का एक लैंड बैंक बनाएगी। इसका उपयोग भविष्य में औद्योगीकरण और विकास परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।

दंडात्मक कार्रवाई: “बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया वसूली एवं बेदखली) अधिनियम 2024” के तहत अवैध कब्जा करने वालों पर ₹10,000 तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल या दोनों का प्रावधान किया गया है।

पुलिस की भूमिका सीमित: 1 फरवरी 2026 से लागू नए नियमों के अनुसार, पुलिस अब सीधे तौर पर भूमि विवादों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। पुलिस का काम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना होगा; जमीन का कब्जा दिलाने या हटाने का कार्य राजस्व प्रशासन और अदालती आदेशों के तहत ही होगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन: सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आलोक में तेज की जा रही है, ताकि सार्वजनिक भूमि का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

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2026 में पोस्ट ऑफिस की FD स्कीम बनी लोगों की पसंद, जानिए कैसे बढ़ेगा आपका निवेश

Post Office FD Scheme 2026: बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और बैंकों की बदलती ब्याज दरों के बीच निवेशक अब सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे माहौल में पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (FD) स्कीम एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है। सरकारी गारंटी के साथ यह योजना सुरक्षा और स्थिर रिटर्न का संतुलित संयोजन प्रदान करती है। आइए विस्तार से जानते हैं इस स्कीम की खास बातें।

क्या पोस्ट ऑफिस FD में पैसा पूरी तरह सुरक्षित है?

निवेश से पहले सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि पैसा कितना सुरक्षित रहेगा। पोस्ट ऑफिस एफडी की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरकारी गारंटी है। यह योजना भारत सरकार द्वारा संचालित होती है, इसलिए निवेश और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों सुरक्षित माने जाते हैं। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई सीधा असर नहीं पड़ता, जिससे जोखिम काफी कम हो जाता है।

ब्याज दर और टैक्स लाभ की जानकारी

वर्ष 2026 में पोस्ट ऑफिस एफडी पर अधिकतम 9% तक का निश्चित रिटर्न दिया जा रहा है (अवधि के अनुसार दर अलग हो सकती है)। निवेशक 1 साल, 2 साल, 3 साल या 5 साल की अवधि चुन सकते हैं।

यदि आप 5 साल की एफडी चुनते हैं, तो आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। इससे यह योजना टैक्स सेविंग के नजरिए से भी आकर्षक बन जाती है।

किन निवेशकों के लिए है उपयुक्त?

पोस्ट ऑफिस एफडी योजना अलग-अलग वर्ग के लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है:

  • वरिष्ठ नागरिक: सुरक्षित और तय रिटर्न के लिए।
  • नौकरीपेशा व्यक्ति: बच्चों की शिक्षा, शादी या भविष्य की योजनाओं के लिए सुरक्षित निवेश।
  • युवा निवेशक: कम जोखिम के साथ बचत और इमरजेंसी फंड तैयार करने के लिए।

बैंक एफडी से अलग क्या है?

बैंकों की एफडी दरें समय-समय पर बदलती रहती हैं, जबकि पोस्ट ऑफिस में निवेश के समय जो ब्याज दर तय होती है, वह पूरी अवधि के दौरान समान रहती है। इससे निवेशक को पहले से ही अपने रिटर्न का स्पष्ट अनुमान मिल जाता है।

कुल मिलाकर, यदि आप सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहते हैं तो 2026 में पोस्ट ऑफिस एफडी एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।

SIP और शेयरों पर बढ़ा भरोसा: NSE पर ट्रेडिंग अकाउंट्स अब 25 करोड़ पार

Indian Share Market Growth: भारतीय शेयर बाजार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मुताबिक, भारत में कुल ट्रेडिंग अकाउंट्स (UCCs) की संख्या 25 करोड़ (250 मिलियन) के आंकड़े को पार कर गई है। यह दिखाता है कि अब आम भारतीय नागरिक बचत के पारंपरिक तरीकों को छोड़कर शेयर बाजार पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।

Indian Share Market Growth: इतनी तेजी से कैसे बढ़े निवेशक?

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में निवेशकों की एंट्री अब और भी तेज हो गई है। पिछले एक करोड़ अकाउंट सिर्फ दो महीनों में जुड़े हैं। वहीं, कुल खातों का 20% हिस्सा यानी 5 करोड़ अकाउंट तो पिछले महज 16 महीनों में खुले हैं। इसका मुख्य कारण मोबाइल ऐप के जरिए आसान ट्रेडिंग, कम फीस और बढ़ता डिजिटल इंडिया है। आज एक मिडिल क्लास व्यक्ति भी अपने फोन से सीधे शेयर बाजार में निवेश कर पा रहा है।

Indian Share Market Growth: कौन से राज्य हैं सबसे आगे?

निवेश के मामले में महाराष्ट्र अभी भी नंबर वन बना हुआ है। यहां राज्यों की हिस्सेदारी कुछ इस प्रकार है:

  • महाराष्ट्र: 4.2 करोड़ अकाउंट (सबसे ज्यादा 17% हिस्सा)
  • उत्तर प्रदेश: 2.8 करोड़ अकाउंट (दूसरे स्थान पर)
  • गुजरात: 2.2 करोड़ अकाउंट
  • पश्चिम बंगाल और राजस्थान: 1.4 करोड़ अकाउंट प्रत्येक

हैरानी की बात यह है कि देश के टॉप 5 राज्य ही मिलकर लगभग आधा (49%) शेयर बाजार संभाल रहे हैं।

क्या SIP के जरिए भी बढ़ रहा है निवेश?

जी हां, लोग अब सिर्फ सीधे शेयर ही नहीं खरीद रहे, बल्कि म्यूचुअल फंड (SIP) के जरिए भी बाजार में पैसा लगा रहे हैं। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच करीब 6 करोड़ नए SIP अकाउंट खुले हैं। हर महीने औसतन 28,766 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि SIP के जरिए बाजार में आ रही है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है।

क्या निवेशकों का पैसा सुरक्षित है?

NSE ने निवेशकों की सुरक्षा और जागरूकता पर भी जोर दिया है। साल 2025 में लगभग 23,000 जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। साथ ही, ‘इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड’ (IPF) भी 18.5% बढ़कर 2,791 करोड़ रुपये हो गया है, ताकि किसी गड़बड़ी या धोखाधड़ी होने पर छोटे निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे।

सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट: जानिए क्यों औंधे मुंह गिरे आज भारतीय बाजार

Indian Stock Market 13 February 2026: भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद भारी रहा है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार खुलते ही निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई है। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही भारी गिरावट के साथ लाल निशान में खुले हैं। निफ्टी 236 अंक गिरकर 25,571 पर आ गया, वहीं सेंसेक्स में 772 अंकों की बड़ी गिरावट देखी गई है।

Indian Stock Market: क्यों टूटा बाजार और क्या है बड़ी वजह?

बाजार गिरने के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल मार्केट से मिल रहे खराब संकेत हैं। अमेरिकी बाजार में मंदी की आहट और टेक कंपनियों के गिरते शेयरों ने भारतीय बाजार का मूड बिगाड़ दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुनिया भर में निवेशक अब जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत के ‘आईटी सेक्टर’ पर पड़ा है।

sharemarket

Indian Stock Market: आईटी शेयरों में भारी गिरावट क्यों आई?

आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मार आईटी सेक्टर (Nifty IT) पर पड़ी है, जो करीब 5.5% तक टूट गया। दरअसल, दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर मची हलचल और बड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन में हो रहे बदलाव ने निवेशकों को डरा दिया है। इसके अलावा ऑटो, रियल्टी और ऑयल सेक्टर के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली है।

क्या सोने-चांदी में निवेश करना अब सुरक्षित है?

जब शेयर बाजार गिरता है, तो निवेशक अक्सर सोने और चांदी का रुख करते हैं। आज भी यही हुआ है। जहां एक तरफ शेयर औंधे मुंह गिरे, वहीं सोने की कीमत में 1% और चांदी में करीब 1.66% की बढ़त देखी गई है। सोना 1,54,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो साफ दिखाता है कि लोग अब सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं।

आगे क्या होगा और आपकी क्या होनी चाहिए रणनीति?

बाजार की नजर अब अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़ों (CPI Data) पर है। अगर वहां के हालात नहीं सुधरे, तो भारतीय बाजार में कुछ और दिन दबाव रह सकता है। जानकारों की सलाह है कि ऐसे उतार-चढ़ाव वाले समय में जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें।

रामगढ़ की चूटूपालू घाटी में भीषण सड़क हादसा, ड्राइवर की जिंदा जलकर मौत

झारखंड : झारखंड के Ramgarh district स्थित चूटूपालू घाटी में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हादसे में एक कंटेनर ड्राइवर की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि ट्रेलर चालक मौके से फरार हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया।

🔥 ब्रेक फेल होने से हुआ हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, कंटेनर रांची से रामगढ़ की ओर आ रहा था। इसी दौरान चूटूपालू घाटी के तीखे मोड़ पर अचानक ब्रेक फेल हो गया और कंटेनर ने आगे चल रहे ट्रेलर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि कंटेनर का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें तुरंत आग लग गई। ड्राइवर केबिन में बुरी तरह फंस गया और बाहर नहीं निकल सका। देखते ही देखते आग ने पूरी केबिन को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे चालक की जलकर मौके पर ही मौत हो गई।

फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है।

🚓 पुलिस और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

हादसे के कारण घाटी में करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को काफी देर तक परेशानी झेलनी पड़ी। पुलिस ने यातायात को धीरे-धीरे सामान्य कराया।

⚠️ खतरनाक मोड़ों के कारण अक्सर होते हैं हादसे

स्थानीय लोगों का कहना है कि चूटूपालू घाटी में तीखे और खतरनाक मोड़ होने के कारण अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है।

घाटी का यह इलाका दुर्घटनाओं के लिए पहले से ही संवेदनशील माना जाता है। लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा उपाय बढ़ाने और यातायात नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

📌 प्रशासन की अपील

पुलिस ने वाहन चालकों से घाटी क्षेत्र में सावधानीपूर्वक और नियंत्रित गति से वाहन चलाने की अपील की है, खासकर भारी वाहनों के चालकों को ब्रेक और अन्य तकनीकी स्थिति की नियमित जांच करने की सलाह दी गई है।

23 सेकेंड में 10 वार… पटना में भांजे ने दिनदहाड़े बीच सड़क पर मामा की हत्या

सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि आरोपी अपने मामा के साथ सामान्य तरीके से सड़क पर चल रहा था। दोनों के बीच किसी तरह का विवाद या बहस नजर नहीं आती। करीब 10 सेकेंड तक वे साथ-साथ चलते रहे। मामा को जरा भी अंदाजा नहीं था कि अगले ही पल उन पर जानलेवा हमला होने वाला है।

अचानक युवक ने चाकू निकाला और सीधे गर्दन पर वार कर दिया। पहला वार इतना तेज था कि बुजुर्ग संभल भी नहीं पाए।

23 सेकेंड में किए कई वार

पहले वार के बाद आरोपी रुका नहीं। करीब 20 से 25 सेकेंड के भीतर उसने ताबड़तोड़ कई वार किए। बुजुर्ग लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग घबरा गए।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वारदात के बाद आरोपी में कोई घबराहट नहीं दिखी। वह कुछ कदम पीछे लौटा, अपने बाल ठीक किए और फिर आराम से टहलते हुए मौके से निकल गया, मानो कुछ हुआ ही न हो।

आरोपी की तलाश में छापेमारी जारी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। घायल बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने आरोपी की पहचान कर ली है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। दिनदहाड़े हुई इस हत्या से इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और हत्या के पीछे की वजहों का पता लगाया जा रहा है।

बिहार में शिक्षा विभाग का 2024 छुट्टी कैलेंडर जारी; इस बार कई बदलाव किये गये हैं

सोमवार को बिहार के शिक्षा विभाग ने 2024 वर्ष के लिए स्कूलों की छुट्टी तालिका जारी कर दी । 2024 छुट्टी कैलेंडर में इस बार कई बदलाव किये गये हैं। BJP नेताओं ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार पर हिंदू त्योहारों के लिए छुट्टियां कम करने और मुस्लिम त्योहारों के लिए छुट्टियां बढ़ाने का आरोप लगाया।

बिहार शिक्षा विभाग ने सोमवार को 2024 के लिए अवकाश कैलेंडर जारी किया और कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत कम से कम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के लिए चार्ट बनाया गया है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने नीतीश कुमार को “तुष्टिकरण का मुखिया” बताते हुए दावा किया कि महागठबंधन का “हिंदू विरोधी चेहरा” फिर से सामने आ गया है, उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार “वोट बैंक के लिए सनातन से नफरत करती है।”

उन्होंने X पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा “एक बार फिर चाचा-भतीजा सरकार का हिंदू विरोधी चेहरा सामने आया। एक तरफ, स्कूलों में मुस्लिम त्योहारों की छुट्टियां बढ़ाई जा रही हैं, जबकि हिंदू त्योहारों की छुट्टियां खत्म की जा रही हैं, ।

छुट्टी कैलेंडर में रक्षाबंधन की छुट्टी को खत्म कर दिया गया है। वहीं, गर्मी की छुट्टी 15 अप्रैल से 15 मई तक केवल छात्र-छात्राओं के लिए रहेगी। शिक्षक और कर्मी अन्य शैक्षणिक, प्रशासनिक कार्य करेंगे।

दिवाली में एक दिन और छठ में तीन दिनों की छुट्टी रहेगी। तीज और जिउतिया की छुट्टी खत्म कर दी गई है। ईद व बकरीद के मौके पर तीन-तीन दिनों की छुट्टी रहेगी। होली पर दो व दुर्गापूजा में 3 दिनों की छुट्टी रहेगी।

विभाग ने जारी आदेश में कहा है कि किसी जिले में विशेष अवसर पर यदि जिला पदाधिकारी किसी प्रकार का अवकाश घोषित करना चाहें तो उन्हें मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। किसी भी स्कूल में प्रधानाध्यापक अपने स्तर से स्कूल में अवकाश की घोषणा नहीं करेंगे, अन्यता उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी। सभी स्कूलों में वार्षिकोत्सव, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती तथा अन्य महापुरुषों की जयंती मनाई जाएगी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हिंदू त्योहारों के दौरान राज्य के स्कूलों में छुट्टियों की संख्या कथित तौर पर कम करने और मुस्लिम त्योहारों के लिए इसे बढ़ाने के लिए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार के खिलाफ एक और आक्रामक हमला किया।

Bihar News Live Updates: पटना : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 26 वीं बैठक

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  • Bihar News: बिहार सरकार ने 2021 में देश के IAS टॉपर शुभम कुमार की पोस्टिंग कर दी ।
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बिहार कैबिनेट की बैठक में 35 एजेंडे पर मुहर; फ्री बिजली कनेक्शन पेंशनरों का DA 4% बढ़ा

शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल की बैठक में 35 प्रस्तावों पर स्वीकृति दी गई। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के विदेश दौरे से लौटने के बाद यह बैठक हुई । कैबिनेट की बैठक में 35 एजेंडे पर मुहर, किसानों की योजना के लिए दो हजार करोड़ रुपए से ज्यादा स्वीकृत। दिवाली से पहले पेंशनरों के लिए खुशखबरी, उनका डीए 4% प्रतिशत बढ़ा दिया गया है ।

मुख्यमंत्री कृषि विद्युत संबंध योजना के दूसरे चरण में इच्छुक किसानों के लिए योजना हर खेत को जल के तहत निशुल्क कृषि विद्युत कनेक्शन प्रदान करने के साथ-साथ आवश्यक विद्युत संरचना के निर्माण के लिए 2190 करोड रुपए की नई योजना की स्वीकृति प्रदान की गई। यह जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री एस. सिद्धार्थ ने मीडिया से बात करते हुए दी।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के लिए 1063 करोड़ 46 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई। इस राशि से जलापूर्ति संबंधित पूरी व्यवस्था का निर्माण होगा तथा 5 वर्षों तक इसके परिचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी।

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डायल 112 योजना का विस्तारीकरण – अब 112 नंबर पर कॉल करके राज्य के ग्रामीण इलाके के लोग भी आकस्मिक सेवा का लाभ उठा सकेंगे। इसके जरिये पुलिस, एंबुलेंस और आगलगी की घटना की जानकारी इस नंबर पर देकर सरकारी सहयोग पाया जा सकता है। इस नंबर से इंट्रीगेटेड सर्विस मिलेगी। इस योजना पर द्वितीय चरण के लिए 766 करोड़ 71 लाख 35 हजार रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

बिहार कैबिनेट ने चालक भर्ती नियमावली में भी बदलाव किया है। राज्य में हर विभाग में वाहन चालक की बहाली अब तकनीकी चयन आयोग करेगा।

जल संसाधन विभाग के 9 एजेंडों पर कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में ऊर्जा विभाग के तहत न्यू पुनाईचक स्थित आवासीय क्षेत्र में खेल परिसर का निर्माण होगा, जिसके लिए कैबिनेट ने 42.10 करोड़ रुपए स्वीकृत किए।

BPSC 67th final results 2023: पटना के अमन आनंद ने परीक्षा में किया टॉप, जहानाबाद की निकिता को दूसरा रैंक

बिहार लोक सेवा आयोग ने बीपीएससी 67वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (सीसीई) के अंतिम परिणाम 2023 घोषित कर दिए हैं। बीपीएससी 67वीं मुख्य परीक्षा 2023 में उत्तीर्ण होने वाले 2,104 उम्मीदवारों में से कुल 2,090 उम्मीदवार व्यक्तिगत साक्षात्कार में उपस्थित हुए। फाइनल दौर के उम्मीदवार बीपीएससी 67वीं के परिणाम आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in से देख सकते हैं।

BPSC 67वीं मेन्स कट-ऑफ: कुल 802 रिक्तियों के विरुद्ध 799 उम्मीदवारों का चयन किया गया है।

आयोग ने कहा कि साक्षात्कार में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संयुक्त मेरिट सूची बीपीएससी 67वीं मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त कुल अंकों को जोड़कर तैयार की गई थी।

bpsc
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आयोग द्वारा अधिसूचित कुल 802 रिक्तियों के विरुद्ध 799 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। बीपीएससी 67वीं टॉपर्स सूची के अनुसार, छह महिला उम्मीदवारों ने शीर्ष 10 में स्थान हासिल किया है।

BPSC 67th final results 2023 Topper list : बीपीएससी 67वीं टॉपर्स सूची

1 अमन आनंद
2 निकिता कुमारी
3 अंकिता चौधरी
4 अपेक्षा मोदी
5 सोनल सिंह
6 मुकेश कुमार यादव
7 उज्जवल कुमार
8 शालू कुमारी
9 रूपेश कुमार
10 सोनाली

सुपौल में हाइड्रा क्रेन पलटने से हुई मौत, दुर्घटना में एक की हुई मौत

PRL कम्पनी के प्लांट में हाइड्रा से मशीन हटाने के क्रम में हाइड्रा पलट गया और उसके अंदर दबने से एक सुपरवाइजर की मौत हो गयी

राघोपुर थाना क्षेत्र के फिंगलास पंचायत के नरहा वार्ड नम्बर 05 की घटना

HYIDRA-CRANE

Bihar BPSC TRE Result 2023 : बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी; हिंदी में 3221 पद के लिए सिर्फ 525 उम्मीदवार सफल हुए

BPSC TRE Result 2023 । बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने अभी 11वीं 12वीं उच्चतर माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम की घोषणा की है। BPSC ने उच्च माध्यमिक के लिए हिंदी विषय के शिक्षकों का रिजल्ट जारी किया गया है । हिंदी में 3221 पद के लिए सिर्फ 525 उम्मीदवार सफल हुए हैं।

BPSC ने अभी हिंदी विषय का परिणाम अपने ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड किया है। हिंदी विषय में शशिकांत पाण्डेय टॉपर बने हैं। रविशंकर दूसरे और राकेश कुमार पाण्डेय को तीसरा स्थान मिला है। चौथे स्थान पर ऋषिकेश तिवारी हैं और पांचवें परआभास कुमार हैं।

बिहार  शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट bpsc.bih.nic.in पर चेक किया जा सकता है। बिहार लोक प्रशासनिक सेवा ने अगस्त में 1.70 लाख सीट पर शिक्षकों की भर्ती परीक्षा की परीक्षा ली थी जिसके बाद से ही राज्य में परीक्षा के रिजल्ट को लेकर इंतजार था। 

BPSC
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बिहार में उच्च माध्यमिक शिक्षक के पदों की कुल संख्या 57,616 है जिसके लिए 39 हज़ार उमीदवारों ने फॉर्म भरा था। हिंदी में 3221 पद के लिए सिर्फ 525 उम्मीदवार सफल हुए हैं।

BPSC बिहार टीचर भर्ती परीक्षा में पास होने के लिए जनरल कैंडिडेट्स को कम से कम 40 फीसदी मार्क्स, ओबीसी को 36.5 फीसदी, एससी व एसटी को 34 फीसदी और दिव्यांग कैंडिडेट्स को 32 फीसदी मार्क्स लाने जरूरी हैं।

BPSC बिहार टीचर भर्ती 2023 की लिखित परीक्षा पास करने के बाद अब काउंसलिंग होगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आयोग ने कहा है कि काउंसलिंग के समय बीपीएससी के वाटरमार्क के बिना कोई प्रमाण पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन की प्रकिया के बाद कैंडिडेट्स का मेडिकल टेस्ट होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना को लेकर बिहार सरकार को भेजा नोटिस, आंकड़ों पर रोक लगाने से किया इनकार

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह बिहार सरकार को जाति जनगणना का विवरण प्रकाशित करने से नहीं रोकेगा, यह कहते हुए कि वह राज्य के नीति निर्धारण निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

बिहार में जाति जनगणना को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने पटना उच्च न्यायालय के 1 अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसमें बिहार में जाति सर्वेक्षण को मंजूरी दी गई थी। इसने मामले को जनवरी 2024 में सूचीबद्ध किया।

याचिकाकर्ताओं के वकील के अनुसार, जाति जनगणना के आंकड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार एकत्र नहीं किए गए थे और सर्वेक्षण के लिए विवरण एकत्र करने का कोई वैध उद्देश्य नहीं था।

SC ने याचिकाकर्ताओं की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि राज्य सरकार आगे और आंकड़े जारी न करे। पीठ ने कहा, ‘हम इस समय कुछ भी नहीं रोक रहे हैं। हम राज्य सरकार या किसी भी सरकार को नीतिगत निर्णय लेने से नहीं रोक सकते। यह गलत होगा।’

Supreme-court-on-Bihar-caste-based-survey
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याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि मामले में गोपनीयता का उल्लंघन है और हाईकोर्ट का आदेश गलत है। इस पर पीठ ने कहा कि चूंकि किसी भी व्यक्ति का नाम और अन्य पहचान प्रकाशित नहीं की गई है, इसलिए यह तर्क कि गोपनीयता का उल्लंघन हुआ है, सही नहीं हो सकता है।

2 अक्टूबर को, बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले अपनी जाति जनगणना के निष्कर्ष जारी किए। आंकड़ों से पता चला कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) राज्य की कुल आबादी का 63 प्रतिशत हिस्सा हैं।

बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की जल्द रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर SC ने सुनवाई नवंबर तक स्थगित कर दी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई नवंबर तक स्थगित कर दी । पूर्व IAS अधिकारी जी. कृष्णैया की पत्नी की याचिका पर SC ने सुनवाई 3 नवंबर तक के लिए टाल दी ।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ समय की कमी के कारण मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई नहीं कर सकी क्योंकि यह बोर्ड में शीर्ष पर सूचीबद्ध नहीं था और अब इस पर 3 नवंबर को सुनवाई करेगी।

यह याचिका गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी.कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की ओर से दायर की गई है। उमा कृष्णैया की याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार सरकार ने 10 अप्रैल 2023 के संशोधन के जरिए पूर्व व्यापी प्रभाव से बिहार जेल नियमावली 2012 में संशोधन किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोषी आनंद मोहन को छूट का लाभ दिया जाए।

AnandMohan in SC

इससे पहले अगस्त में सुनवाई के दौरान SC ने बिहार सरकार से पूर्व सांसद की रिहाई पर जवाब मांगा था। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जेल मैनुअल में संशोधन के बाद सजा पाने वाले कितने दोषियों को पूर्व सांसद आनंद मोहन के साथ इस साल अप्रैल में रिहा किया गया, इस पर जवाब देते हुए बिहार सरकार ने कोर्ट को बताया कि आनंद मोहन सहित 97 दोषियों को सजा में छूट देकर जेल से रिहा किया गया था। 11 अगस्त को शीर्ष अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी थी और इसे सितंबर के आखिरी सप्ताह में पोस्ट किया था।

1994 में, गोपालगंज के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट कृष्णैया को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था, जब उनके वाहन ने गैंगस्टर छोटन शुक्ला के अंतिम संस्कार के जुलूस को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। भीड़ को आनंद मोहन सिंह ने उकसाया था। इस मामले मे आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा मिली थी।

Land For Job Scam: दिल्ली कोर्ट ने लालू, राबड़ी, तेजस्वी समेत 14 अन्य आरोपियों को समन जारी किया; 4 अक्तूबर को हाेंगे पेश

नई दिल्ली । शुक्रवार को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और 14 अन्य आरोपियों को नौकरी के लिए भूमि घोटाला ( Land For Job Scam ) मामले में नए आरोप पत्र के संबंध में समन जारी किया। सभी राउज एवेन्यू कोर्ट में 4 अक्तूबर को पेश हाेंगे ।

इस मामले में लालू यादव के बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की 21 सितंबर को दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन सुनवाई टल गई और अब यह सुनवाई आज यानी की 22 सितंबर हुई है । इससे पहले इस मामले की सुनवाई 8 अगस्त को होनी थी, जो टल गई थी, इसके बाद सुनवाई को बढ़ाकर 12 सितंबर तक किया गया था, जिसे कोर्ट 21 सितंबर तक टाल दिया था ।

CBI ने 3 जुलाई को कथित भूमि-नौकरी घोटाले में RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 14 अन्य को नामित करते हुए आरोप पत्र दायर किया था। एजेंसी ने अदालत को सूचित किया था कि लालू और 3 रेलवे अधिकारियों – महीप कपूर, मनोज पांडे और पीएल बनकर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी की आवश्यकता होगी।

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गुरुवार को, CBI ने अदालत को सूचित किया कि उन्हें इस सप्ताह की शुरुआत में कपूर, पांडे और बनकर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई है। एजेंसी ने पहले अदालत को सूचित किया था कि लालू के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी भी इस महीने की शुरुआत में गृह मंत्रालय से मिल गई थी।

विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने 3 जुलाई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर एक नए आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को समन जारी करते हुए 4 अक्टूबर को उसके सामने पेश होने के लिए कहा है।

Land For Job Scam उस समय का है जब RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव साल 2004 से 2009 के बीच UPA सरकार में रेल मंत्री थे। CBI ने आरोप लगाया है कि 2004 से 2009 के बीच भारतीय रेलवे के विभिन्न जोन में ग्रुप D के पदों पर कई लोगों की नियुक्ति की गई, जिन्होंने अपनी जमीन तत्कालीन रेल मंत्री के परिवार के सदस्यों के नाम कर दी ।

इस मामले में CBI जांच के बाद लालू प्रसाद यादव और उनकी बेटी मीसा भारती के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अब आरोप है कि जो जमीनें ली गईं थी, वो लालू यादव ने पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती के नाम पर ली थी।