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बिहार में अब सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ सख्ती, जीरो टॉलरेंस नीति लागू

पटना: बिहार में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। राज्य में अब जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई तेज की जा रही है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री Vijay Kumar Sinha ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारी जमीन के मामलों में अब किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

📢 विजय सिन्हा ने अपने पोस्ट में क्या कहा?

विजय कुमार सिन्हा ने अपने पोस्ट में लिखा:

“सरकारी भूमि राज्य की अमूल्य संपत्ति है। इस पर अवैध कब्जा न स्वीकार्य है, न सहनीय। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में अब सरकारी जमीन संरक्षण पर कार्रवाई और तेज की जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि सरकारी जमीन के मामलों में अब कोई ढिलाई नहीं चलेगी। NDA सरकार का संकल्प—कानून का राज, कब्जामुक्त बिहार।”

सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सख्ती

सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में Supreme Court of India के निर्देश के बाद प्रशासन और सक्रिय हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकारी जमीन के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। अधिकारियों की चूक से राज्य के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।

इसके बाद बिहार सरकार ने सभी जिलों को तेजी से कार्रवाई करने और लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया है।

🗂️ जिलों में तैयार होगा लैंड बैंक

सरकार ने जिलों को लैंड बैंक तैयार करने का भी आदेश दिया है। इसके तहत:

  • अंचल स्तर पर सरकारी जमीन की पहचान की जाएगी
  • अवैध कब्जे वाली जमीन पर वाद दायर किया जाएगा
  • कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन को रिकवर कराया जाएगा
  • नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी

लैंड बैंक बनने से राज्य में औद्योगिकीकरण (Industrialization) को बढ़ावा मिलेगा, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास संभव होगा और सरकारी योजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

📍 किन जमीनों पर पहले होगी कार्रवाई?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता के आधार पर निम्न प्रकार की जमीनों को मुक्त कराया जाएगा:

  • कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज सरकारी जमीन
  • ऐसी जमीन जिसका विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुआ हो
  • निजी व्यक्तियों के अवैध कब्जे में पड़ी सरकारी भूमि

इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए जमीन को कब्जामुक्त कराया जाएगा।

इस नई सख्ती के तहत मुख्य कदम और नियम निम्नलिखित हैं:

राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही: अंचलाधिकारियों (CO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में सरकारी जमीन की पहचान कर उसे सुरक्षित करें। किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

लैंड बैंक का निर्माण: सरकार राज्य में अंचलवार (Circle-wise) खाली और कब्जा मुक्त कराई गई जमीनों का एक लैंड बैंक बनाएगी। इसका उपयोग भविष्य में औद्योगीकरण और विकास परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।

दंडात्मक कार्रवाई: “बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया वसूली एवं बेदखली) अधिनियम 2024” के तहत अवैध कब्जा करने वालों पर ₹10,000 तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल या दोनों का प्रावधान किया गया है।

पुलिस की भूमिका सीमित: 1 फरवरी 2026 से लागू नए नियमों के अनुसार, पुलिस अब सीधे तौर पर भूमि विवादों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। पुलिस का काम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना होगा; जमीन का कब्जा दिलाने या हटाने का कार्य राजस्व प्रशासन और अदालती आदेशों के तहत ही होगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन: सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आलोक में तेज की जा रही है, ताकि सार्वजनिक भूमि का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

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