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JPSC CCE 2026: झारखंड सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, अब 20 फरवरी तक करें अप्लाई

झारखंड में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। Jharkhand Public Service Commission (जेपीएससी) ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब उम्मीदवार 20 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 21 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है।

पहले आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 फरवरी तय की गई थी, लेकिन अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने समयसीमा में विस्तार किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से राज्य की विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में कुल 103 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

103 पदों पर होगी भर्ती

इस परीक्षा के जरिए झारखंड सरकार की विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं में अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें डिप्टी कलेक्टर, पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी), वित्त एवं लेखा सेवा सहित अन्य प्रशासनिक पद शामिल हैं। राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन पदों पर चयन के लिए हजारों अभ्यर्थी हर वर्ष आवेदन करते हैं।

महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)

  • आवेदन की नई अंतिम तिथि: 20 फरवरी 2026
  • परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि: 21 फरवरी 2026
  • कुल पदों की संख्या: 103

कैसे करें आवेदन?

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) प्रणाली के तहत संपन्न होगी। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:

  1. सबसे पहले जेपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  2. Civil Services Examination 2026 से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना डाउनलोड करें और पात्रता, आयु सीमा व पदों की जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ें।
  3. नया रजिस्ट्रेशन करें (यदि पहले से OTR नहीं किया है)।
  4. लॉगिन कर आवेदन फॉर्म सावधानीपूर्वक भरें।
  5. आवश्यक दस्तावेज, हालिया पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर और शैक्षणिक प्रमाणपत्र अपलोड करें।
  6. निर्धारित आवेदन शुल्क ऑनलाइन माध्यम से जमा करें।
  7. फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन फॉर्म भरते समय किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचें, क्योंकि गलत जानकारी देने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।

वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) अनिवार्य

आवेदन प्रक्रिया वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) प्रणाली के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों की मूल जानकारी को एक बार दर्ज कर भविष्य की परीक्षाओं के लिए संरक्षित रखना है। इससे बार-बार व्यक्तिगत विवरण भरने की आवश्यकता नहीं पड़ती और आवेदन प्रक्रिया सरल हो जाती है।

जेपीएससी ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे आवेदन करने से पहले विस्तृत विज्ञापन और दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। किसी भी प्रकार की तकनीकी या अन्य जानकारी के लिए आयोग द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 9431301636 और 9431301419 पर कार्य दिवसों में संपर्क किया जा सकता है।


चयन प्रक्रिया: तीन चरणों में होगी परीक्षा

झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाएगी:

  • प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)
  • मुख्य परीक्षा (Mains)
  • साक्षात्कार (Interview)

1. प्रारंभिक परीक्षा

यह वस्तुनिष्ठ (Objective) प्रकार की परीक्षा होती है, जिसमें सामान्य अध्ययन से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा केवल क्वालिफाइंग प्रकृति की होती है और इसके आधार पर मुख्य परीक्षा के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाता है।

2. मुख्य परीक्षा

मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक (Descriptive) होती है, जिसमें उम्मीदवार की विश्लेषण क्षमता, विषय की गहराई और अभिव्यक्ति कौशल का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें विभिन्न विषयों पर विस्तृत उत्तर लिखने होते हैं।

3. साक्षात्कार

मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। इस चरण में उम्मीदवार के व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और प्रशासनिक समझ का आकलन किया जाता है।

अंतिम चयन मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की गई मेरिट सूची के अनुसार किया जाता है।

Railway Protection Force की बड़ी कार्रवाई: Indian flapshell turtle के 16 जिंदा कछुए बरामद, वन्यजीव तस्करी पर कसा शिकंजा

धनबाद | पूर्व मध्य रेल के धनबाद मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक अहम कार्रवाई करते हुए 16 जीवित कछुओं को बरामद किया है। यह कार्रवाई आरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन WILEP के तहत की गई। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस सटीक कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रेल मार्गों के जरिए हो रही अवैध वन्यजीव तस्करी पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।

गुप्त सूचना के आधार पर सक्रिय हुई टीम

आरपीएफ को विश्वसनीय स्रोतों से सूचना मिली थी कि ट्रेन संख्या 13010, Yog Nagari Rishikesh–Howrah Doon Express के माध्यम से कछुओं की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही आरपीएफ पोस्ट और अपराध अनुसंधान शाखा (सीआईबी) की संयुक्त टीम को सतर्क कर दिया गया।

जैसे ही ट्रेन धनबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या दो पर पहुंची, टीम ने बिना समय गंवाए जांच अभियान शुरू कर दिया। अधिकारियों ने विशेष रूप से सामान्य श्रेणी (जनरल कोच) के डिब्बों की गहन तलाशी ली, क्योंकि मिली सूचना इन्हीं कोचों से संबंधित थी।

लावारिस नीले थैले में मिला जूट का बोरा

तलाशी के दौरान इंजन की ओर से दूसरे जनरल कोच में एक सीट के नीचे नीले रंग का कपड़े का लावारिस थैला संदिग्ध अवस्था में मिला। मौके पर मौजूद यात्रियों से पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने भी उस थैले पर अपना दावा नहीं किया।

संदेह गहराने पर ट्रेन के प्रस्थान से पहले थैले को प्लेटफॉर्म पर उतार लिया गया। गवाहों की उपस्थिति में जब थैले को खोला गया, तो उसके भीतर जूट के बोरे में रखे 16 जीवित कछुए बरामद हुए। सभी कछुए इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति के थे, जिन्हें बेहद संकुचित और असुविधाजनक स्थिति में रखा गया था। इस तरह की पैकिंग से उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति

आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार बरामद कछुए Wildlife Protection Act, 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति में आते हैं। इस अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित जीवों की तस्करी, अवैध परिवहन या व्यापार गंभीर दंडनीय अपराध है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इंडियन फ्लैपशेल कछुए अक्सर अवैध व्यापार का शिकार होते हैं। इन्हें मांस, पालतू व्यापार या पारंपरिक मान्यताओं के कारण तस्करी के जरिए विभिन्न राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है।

वन विभाग को सौंपे जाएंगे कछुए

बरामदगी के तुरंत बाद आरपीएफ ने जब्ती सूची तैयार की और सभी कछुओं को अपने कब्जे में लेकर पोस्ट लाया। प्राथमिक जांच और आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई पूरी करने के बाद इन्हें वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वन विभाग द्वारा कछुओं की चिकित्सकीय जांच कराई जाएगी और उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पुनर्वासित करने की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जीवित अवस्था में बरामदगी होना एक सकारात्मक पहलू है, क्योंकि समय रहते कार्रवाई से इनकी जान बचाई जा सकी।

ऑपरेशन WILEP के तहत लगातार कार्रवाई

ऑपरेशन WILEP के तहत रेलवे नेटवर्क के जरिए हो रही वन्यजीव तस्करी पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आरपीएफ और खुफिया इकाइयों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है।

इस कार्रवाई में आरपीएफ के चितरंजन सिंह, शशिकांत तिवारी, बबुलेश कुमार, प्रमोद कुमार, संजीव कुमार और अमित कुमार वर्मा की अहम भूमिका रही। टीम की तत्परता और सूझबूझ के कारण यह बड़ी बरामदगी संभव हो सकी।

तस्करों की पहचान के लिए जांच तेज

हालांकि थैला लावारिस मिला, लेकिन आरपीएफ ने इस मामले में तस्करों की पहचान के लिए जांच तेज कर दी है। सीसीटीवी फुटेज, टिकट विवरण और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश की जा रही है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पंचशूलों की विशेष पूजा, शिखरों पर पुनर्स्थापना के साथ बाबा-पार्वती का पारंपरिक गठबंधन सम्पन्न

झारखंड के देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध Baidyanath Temple में महाशिवरात्रि के पावन पर्व से पूर्व आस्था, परंपरा और वैदिक अनुष्ठानों का भव्य दृश्य देखने को मिला। रविवार को महाशिवरात्रि मनाई जानी है, लेकिन उससे एक दिन पहले शनिवार को मंदिर प्रांगण में वह विशेष धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुआ, जिसका इंतजार भक्त पूरे वर्ष करते हैं। बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती मंदिरों के शिखरों पर स्थापित पंचशूलों को परंपरानुसार शुद्धिकरण, पूजन और पुनर्स्थापना की प्रक्रिया से गुजारा गया। इसके साथ ही बाबा और माता पार्वती के बीच पारंपरिक ‘गठबंधन’ की रस्म अदा की गई, जिसे इस धाम की अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट परंपरा माना जाता है।

यह अनुष्ठान केवल धार्मिक क्रिया भर नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीकात्मक उत्सव है। देवघर धाम में महाशिवरात्रि से पूर्व पंचशूल उतारने, उनका पूजन करने और पुनः स्थापित करने की परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे और पंचशूलों के दर्शन एवं स्पर्श कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

पंचशूलों का महत्व और धार्मिक मान्यता

पंचशूल का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह त्रिशूल की ही एक विशेष संरचना मानी जाती है, जिसमें पाँच शूल होते हैं। शिव मंदिरों के शिखरों पर स्थापित पंचशूल दैवीय ऊर्जा, संरक्षण और आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में यह परंपरा विशेष महत्व रखती है।

मान्यता है कि पंचशूल मंदिर और आसपास के क्षेत्र की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं और भक्तों के जीवन में शुभता लाते हैं। इसी कारण महाशिवरात्रि से पूर्व इन पंचशूलों का विधिवत शुद्धिकरण और पुनर्पूजन अनिवार्य माना जाता है।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुद्धिकरण और पूजन

शनिवार को मंदिर के प्रधान पुजारी सह सरदार पंडा गुलाबनंद ओझा के नेतृत्व में षोडषोपचार विधि से पंचशूलों का पूजन सम्पन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, धूप-दीप, पुष्प, चंदन और पवित्र जल से इनका शुद्धिकरण किया गया।

यह पूजा केवल मुख्य मंदिर तक सीमित नहीं रही। बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती मंदिर के अलावा मंदिर परिसर के अन्य 22 मंदिरों के शिखरों से उतारे गए पंचशूलों का भी सामूहिक पूजन किया गया। यह दृश्य अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण था।

शिखरों से उतारने की प्राचीन परंपरा

महाशिवरात्रि से एक या दो दिन पूर्व मंदिर परिसर के सभी मंदिरों के शिखरों से पंचशूलों को उतारने की परंपरा है। शुक्रवार को बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती मंदिर के शिखरों से पंचशूल उतारे गए थे, जबकि अन्य मंदिरों के पंचशूल पहले ही नीचे लाए जा चुके थे।

भंडारी परिवार की देखरेख में भंडारियों की टीम ने दोपहर के समय वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सावधानीपूर्वक पंचशूलों को शिखरों से उतारा। यह प्रक्रिया अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न की जाती है।

पंचशूलों का पारंपरिक मिलन

पंचशूलों के उतारने के बाद बाबा और पार्वती मंदिर के पंचशूलों का पारंपरिक मिलन कराया गया। यह मिलन शिव और शक्ति के दिव्य संगम का प्रतीक माना जाता है।

इस अनुष्ठान को देखने के लिए मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बनने के लिए घंटों पहले से कतार में खड़े थे। जब पंचशूलों का मिलन हुआ, तो “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

पुनर्स्थापना की वैदिक प्रक्रिया

विशेष पूजा के बाद सभी 22 मंदिरों के शिखरों पर पंचशूलों को पुनर्स्थापित किया गया। यह प्रक्रिया भी वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न हुई।

पंचशूलों को पुनः स्थापित करते समय मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और आशीर्वचन का क्रम चला। मान्यता है कि पुनर्स्थापना के साथ मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और अधिक सशक्त हो जाती है।

बाबा और मैया पार्वती का ‘गठबंधन’

पंचशूल पुनर्स्थापना के उपरांत बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती मंदिर के बीच पारंपरिक ‘गठबंधन’ की रस्म अदा की गई। यह देवघर धाम की अत्यंत विशिष्ट और प्राचीन परंपरा है।

गठबंधन शिव और शक्ति के अविभाज्य संबंध का प्रतीक है। भक्त इसे अत्यंत शुभ मानते हैं और मान्यता है कि इस अवसर पर दर्शन करने से दांपत्य सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़

पंचशूलों के दर्शन और स्पर्श के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े। भक्तों ने मस्तक सटाकर पंचशूलों को नमन किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था लागू की गई और पुलिस बल तैनात रहा।

महाशिवरात्रि की चार प्रहर पूजा

मंदिर प्रशासन ने बताया कि महाशिवरात्रि की चार प्रहर की पूजा रात्रि में सम्पन्न होगी। तड़के सुबह 3:15 बजे मंदिर का पट खुलेगा। विशेष पूजा-अर्चना के बाद लगभग 4:25 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए पट खोल दिए जाएंगे।

अनुमान है कि दो लाख से अधिक श्रद्धालु इस अवसर पर जलार्पण करेंगे। सुबह 4 बजे से 6 बजे तक जल चढ़ाने का विशेष क्रम चलेगा। इसके बाद अगले दिन सुबह 8 बजे पुनः पट खोलकर नियमित पूजा प्रारंभ होगी।

आस्था का महासागर

महाशिवरात्रि के अवसर पर देवघर धाम आस्था के महासागर में बदल जाता है। देश के विभिन्न राज्यों से शिवभक्त यहां पहुंचते हैं। “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है।

पंचशूलों की पूजा और गठबंधन की रस्म ने इस आध्यात्मिक उत्सव की शुरुआत को और भी भव्य बना दिया है। श्रद्धालु इसे शुभ संकेत मानते हैं कि बाबा बैद्यनाथ और मैया पार्वती की कृपा पूरे वर्ष बनी रहेगी।

प्रशासनिक तैयारी

भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने व्यापक तैयारी की है। सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

जलार्पण के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं। महिला, वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत स्वरूप

देवघर में महाशिवरात्रि से पूर्व पंचशूल उतारने और पुनर्स्थापित करने की परंपरा सदियों से जीवंत है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

हर वर्ष यह अनुष्ठान नई ऊर्जा और आस्था के साथ सम्पन्न होता है। पंचशूलों का स्पर्श कर भक्त अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

हजारीबाग में हाथियों का तांडव जारी: 24 घंटे में 8 की मौत, गांवों में दहशत

Hazaribagh : हजारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गोंदवार गांव में छह लोगों की जान लेने के 24 घंटे के भीतर ही हाथियों ने दो और लोगों को मौत के घाट उतार दिया। लगातार हो रही घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

भुरकुंडा टोला में महिला को कुचला

गोंदवार गांव से सटे बहेरा पंचायत के कजरी गांव के भुरकुंडा टोला में शुक्रवार रात पांच हाथियों के झुंड ने राजेश मुर्मु के घर पर हमला कर दिया। घर में सो रही उनकी पत्नी फुलमुनी देवी को हाथियों ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हमले के दौरान राजेश मुर्मु किसी तरह दीवार फांदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। ग्रामीणों ने शोर मचाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक महिला की जान जा चुकी थी।

गुरुवार को 6 लोगों की गई थी जान

इससे एक दिन पहले, गुरुवार देर रात आंगो थाना क्षेत्र और चुरचू प्रखंड के गोंदवार गांव में हाथियों ने तांडव मचाया था। पांच हाथियों के झुंड ने घरों के गेट उखाड़ दिए और अंदर घुसकर सो रहे लोगों को कुचल दिया।

मृतकों में सुमन कुमारी (26), धनेश्वर राम (52), सूरज राम (50), सविता देवी (25), अनुराग राम (1 वर्ष) और संजना कुमारी (3 माह) शामिल हैं। इनमें सूरज राम, सविता देवी और दोनों मासूम बच्चे एक ही परिवार के थे। घटना के वक्त सभी लोग अपने घरों में सो रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई आपबीती

हमले में बचे रोहित राम ने बताया कि रात में पहले हाथियों ने घर का दरवाजा तोड़ा। बाहर निकलने पर सामने हाथी दिखा। उन्होंने घर में रखी कढ़ाही से हाथी को मारकर खुद को बचाया और खिड़की से कूदकर बाहर भागे। इसके बाद शोर मचाकर अन्य लोगों को जगाया।

वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

घटनाओं की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में हाथियों की लगातार मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई होती तो इतने लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

पंचायत भवन में शरण ले रहे ग्रामीण

लगातार हमलों से भयभीत ग्रामीणों ने रात पंचायत भवन में गुजारी। गांव में लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों में विशेष रूप से भय का माहौल है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाथियों को सुरक्षित जंगल क्षेत्र में खदेड़ने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष के गंभीर स्वरूप को उजागर कर दिया है।

रामगढ़ की चूटूपालू घाटी में भीषण सड़क हादसा, ड्राइवर की जिंदा जलकर मौत

झारखंड : झारखंड के Ramgarh district स्थित चूटूपालू घाटी में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हादसे में एक कंटेनर ड्राइवर की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि ट्रेलर चालक मौके से फरार हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया।

🔥 ब्रेक फेल होने से हुआ हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, कंटेनर रांची से रामगढ़ की ओर आ रहा था। इसी दौरान चूटूपालू घाटी के तीखे मोड़ पर अचानक ब्रेक फेल हो गया और कंटेनर ने आगे चल रहे ट्रेलर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि कंटेनर का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें तुरंत आग लग गई। ड्राइवर केबिन में बुरी तरह फंस गया और बाहर नहीं निकल सका। देखते ही देखते आग ने पूरी केबिन को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे चालक की जलकर मौके पर ही मौत हो गई।

फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है।

🚓 पुलिस और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

हादसे के कारण घाटी में करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को काफी देर तक परेशानी झेलनी पड़ी। पुलिस ने यातायात को धीरे-धीरे सामान्य कराया।

⚠️ खतरनाक मोड़ों के कारण अक्सर होते हैं हादसे

स्थानीय लोगों का कहना है कि चूटूपालू घाटी में तीखे और खतरनाक मोड़ होने के कारण अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है।

घाटी का यह इलाका दुर्घटनाओं के लिए पहले से ही संवेदनशील माना जाता है। लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा उपाय बढ़ाने और यातायात नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

📌 प्रशासन की अपील

पुलिस ने वाहन चालकों से घाटी क्षेत्र में सावधानीपूर्वक और नियंत्रित गति से वाहन चलाने की अपील की है, खासकर भारी वाहनों के चालकों को ब्रेक और अन्य तकनीकी स्थिति की नियमित जांच करने की सलाह दी गई है।

झारखंड में तापमान 2–3°C तक कम होने का अनुमान: गुमला, हजारीबाग समेत 5 जिलों में ठंड, 24 घंटे में कई जिलों का न्यूनतम पारा 10 डिग्री से नीचे

राजधानी रांची समेत झारखंड के कई हिस्सों में गुरुवार को हल्के बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार इस बदलाव से मौसम में ज्यादा अंतर नहीं आएगा और फिलहाल बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि बादल हटने के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। शुक्रवार के बाद न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आने की संभावना जताई गई है। विभाग ने बताया कि उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण राज्य के मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। यह विक्षोभ कमजोर पड़ने के बाद 13 फरवरी तक एक नया पश्चिमी विक्षोभ देश के पश्चिमोत्तर भाग में दस्तक दे सकता है, जिससे एक बार फिर मौसम में बदलाव संभव है।

पिछले 24 घंटों में राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। सबसे कम न्यूनतम तापमान गुमला में 6.4 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, राजधानी रांची का न्यूनतम पारा 10.9 डिग्री दर्ज किया गया। राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग एक डिग्री अधिक है, जबकि अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1–3 डिग्री कम रहा। गुमला, हजारीबाग, लोहरदगा, सिमडेगा और मेदिनीनगर में रात के समय ठंड का असर अभी भी महसूस किया जा रहा है। इन जिलों में सुबह और देर रात कड़ाके की ठंड बनी हुई है।

राजधानी रांची में दोपहर के समय गर्मी का असर भी दिखने लगा है। कई लोग बिना स्वेटर के नजर आ रहे हैं और हल्की धूप में खड़े होने पर पसीना महसूस कर रहे हैं। जमशेदपुर, सरायकेला-खरसावां, देवघर और गोड्डा समेत अन्य जिलों में भी दोपहर के समय यही स्थिति है। पूर्वी व पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में अधिकतम तापमान 32–33 डिग्री के बीच पहुंच गया है। इन क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान लगभग 14 डिग्री दर्ज किया गया है, जिससे सुबह-शाम हल्की ठंड के बावजूद दोपहर में स्वेटर की जरूरत नहीं पड़ रही।

जंगल और पठारी इलाकों में सुबह-शाम ठंड बरकरार है। हालांकि झारखंड में ठंड की विदाई धीरे-धीरे हो रही है, लेकिन जंगल और पठारी इलाकों में अब भी ठंड का असर बना हुआ है। गुमला, खूंटी, लोहरदगा, लातेहार, रांची, हजारीबाग और रामगढ़ में सुबह और शाम कंकनी महसूस की जा रही है। गुमला में न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री तक दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार इन जिलों में न्यूनतम तापमान 10–11 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। अन्य जिलों में मौसम सामान्य हो रहा है, लेकिन रात के समय ठंड का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

गुमला के टांगीनाथ से लौट रही बस पलटी, 2 की मौत; 5 साल के मासूम और महिला की गई जान, 40 से अधिक घायल

गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में मंगलवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में पांच वर्षीय मासूम शिवम केशरी और एक अज्ञात महिला की मौत हो गई, जबकि 40 से अधिक यात्री घायल हो गए। दुर्घटना चैनपुर–मांझाटोली मुख्य पथ पर कटकांया स्थित पुराने शंख घाट मोड़ के पास हुई। बताया जा रहा है कि डुमरी प्रखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल टांगीनाथ धाम से मुंडन संस्कार संपन्न कर लौट रही रिजर्व बस अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। हादसा इतना तेज हुआ कि यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला और बस में चीख-पुकार मच गई।

मुंडन कार्यक्रम से लौट रहा पूरा परिवार: जानकारी के अनुसार सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर निवासी मनीष केशरी के पुत्र का मुंडन संस्कार टांगीनाथ धाम में आयोजित किया गया था। इसमें सिमडेगा, ठेठईटांगर, तामड़ा और ओडिशा सहित विभिन्न स्थानों से परिवार के रिश्तेदार शामिल हुए थे। धार्मिक अनुष्ठान के बाद सभी श्रद्धालु मेहता नामक रिजर्व बस से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान शंखमोड़–मांझाटोली के संकरे और खतरनाक मोड़ पर चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा और बस पलट गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब 20 यात्री बस के नीचे दब गए, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया। घटना की सूचना मिलते ही मांझाटोली के उपप्रमुख दीपक कुजूर और स्थानीय समाजसेवी मौके पर पहुंचे और तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। घायलों को एंबुलेंस और निजी वाहनों से सदर अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मृतकों में पांच वर्षीय शिवम केशरी और बस में दब गई एक महिला शामिल हैं, जिसकी पहचान देर रात तक नहीं हो पाई थी। घायलों में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। हादसे में सरस्वती देवी (28), मनीषा कुमारी (15), संध्या देवी (30), ज्योति केशरी (42), संगीता देवी (35), आर्यन केशरी (18), प्रशांत कुमार (22), कृष्णा बड़ाईक (25), सोमरा सिंह (45), अयोध्या प्रसाद केशरी (70), मीरा देवी (55) समेत कृष्ण बड़ाइक, जसमनी देवी, पूजा देवी, शशि कुजूर, आरती कुमारी, अनिता देवी, सुरेंद्र ठाकुर, राहुल कुमार केसरी और अन्य लोग घायल हुए हैं। सभी का इलाज सदर अस्पताल में जारी है।

‘गांव छोड़ो या गोली खाने को तैयार रहो’: चतरा में पूर्व TSPC कमांडर के घर माओवादी पोस्टर, पुलिस मुखबिरी का आरोप

चतरा जिले के कुंदा थाना क्षेत्र स्थित गेंदरा गांव में माओवादी संगठन ने एक बार फिर दहशत फैलाने की कोशिश की। बुधवार आधी रात पूर्व TSPC कमांडर श्याम भोक्ता के घर पर धमकी भरा पोस्टर चिपकाया गया। पोस्टर में उन्हें और उनके परिवार को गांव छोड़ने की चेतावनी दी गई थी। इसमें माओवादी संगठन की दक्षिणी जोनल कमेटी का नाम अंकित था और लिखा था: “SPO श्याम भोक्ता, गांव छोड़कर भाग जाओ, वरना गोली खाने के लिए तैयार रहो।” माओवादी संगठन ने उन्हें पुलिस का दलाल बताते हुए 28 दिसंबर की घटना का जिक्र किया और अगली बार मौका नहीं देने की चेतावनी दी। घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल फैल गया।

पिछले साल की मुठभेड़ का जिक्र भी किया गया है। 28-29 दिसंबर की रात गेंदरा गांव में वर्चस्व और जमीन विवाद को लेकर हिंसक मुठभेड़ हुई थी। उस समय लावालौंग निवासी देवेंद्र गंझू और चुरामन गंझू अपने साथियों के साथ श्याम भोक्ता पर हमला करने पहुंचे थे। ग्रामीणों की एकजुटता और जवाबी फायरिंग में दोनों हमलावर मारे गए थे। श्याम भोक्ता के साले गोपाल गंझू के सिर में गोली लगी थी, जबकि श्याम स्वयं भी घायल हुए थे। ताजा पोस्टर में देवेंद्र और चुरामन को ‘शहीद’ बताया गया और ‘लाल सलाम’ किया गया। साथ ही उन ग्रामीणों को भी चेतावनी दी गई, जिन्होंने उस मुठभेड़ में प्रतिरोध किया था।

श्याम भोक्ता की पत्नी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले में केवल मोहन कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जबकि अन्य हमलावरों को खुला छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि इसी लापरवाही के कारण आज उनका परिवार फिर से खतरे में है। पोस्टर में पुलिस प्रशासन को भी चुनौती दी गई और लिखा गया कि एसपीओ को प्रलोभन देना बंद करो। इस घटनाक्रम ने चतरा पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सिमरिया एसडीपीओ शुभम खंडेलवाल ने बताया कि पोस्टर बरामद कर लिया गया है और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जा रहा है कि पोस्टर वास्तव में नक्सलियों द्वारा लगाया गया था या किसी शरारती तत्व की साजिश थी। श्याम भोक्ता के परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

लेबर कोड के खिलाफ हड़ताल का असर, झारखंड में कोयलांचल में चक्का जाम; उत्पादन व बैंकिंग सेवाएं प्रभावित

केंद्र सरकार द्वारा लागू चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के विरोध में गुरुवार को देशभर के मजदूर संगठनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। इसका व्यापक असर झारखंड के कई जिलों में देखने को मिला। धनबाद के कोयलांचल क्षेत्र में मजदूर यूनियनों ने संयुक्त मोर्चा के बैनर तले चक्का जाम किया, जिससे बीसीसीएल और ईसीएल की कोलियरियों में कोयला उत्पादन और परिवहन कार्य पूरी तरह ठप हो गया।

हड़ताल का प्रभाव धनबाद के बस्ताकोला क्षेत्र, गोल सिक्स, बीएनआर साइडिंग, 9 नंबर साइडिंग, केओसीपी, कंटाघर, हाजिरी घर, ब्लॉक-दो और शताब्दी कोलियरी सहित बीसीसीएल के अंतर्गत संचालित आउटसोर्सिंग इकाइयों में भी दिखा। सुबह से ही मजदूरों ने कोलियरियों और हाजिरी घरों के प्रवेश द्वारों पर प्रदर्शन कर कामकाज को पूरी तरह बाधित कर दिया। एटक, इंटक, जनता मजदूर संघ और आरसीएमएस सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों के नेता और कार्यकर्ता हड़ताल को सफल बनाने में सक्रिय रहे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लेबर कोड को मजदूर विरोधी तथा निजीकरण को बढ़ावा देने वाली नीति करार दिया।

मजदूर संगठनों का आरोप है कि चारों नए श्रम कानूनों से श्रमिकों के अधिकार कमजोर हुए हैं। स्थायी रोजगार की सुरक्षा प्रभावित हुई है और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर नकारात्मक असर पड़ा है। यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार की नीतियां बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जा रही हैं, जबकि श्रमिकों की समस्याओं की अनदेखी हो रही है।

हड़ताल का असर केवल कोयला उत्पादन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि बैंकिंग सेवाओं पर भी पड़ा। कई सरकारी बैंक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए, जिससे आम लोगों को लेन-देन और अन्य बैंकिंग कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इससे पहले भी 9 जुलाई 2025 को चारों लेबर कोड और कथित मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल हो चुकी है।

जमशेदपुर में भी संयुक्त ट्रेड यूनियन की हड़ताल का असर देखने को मिला। सभी ट्रेड यूनियन साकची आम बागान से जुलूस के रूप में जुबली पार्क गेट के पास एकत्रित होकर रोड को जाम रखा।

जामताड़ा जिले के पोसोई मोड़ पर वामपंथी दलों ने गोविंदपुर साहिबगंज नेशनल हाईवे को आधे घंटे तक जाम किया, जिससे वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतार लग गई। हालांकि यह प्रदर्शन केवल सांकेतिक रूप में किया गया।

दुबई में फंसे झारखंड के 11 मजदूरों की स्वदेश वापसी, कोलकाता एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत

दुबई में फंसे झारखंड के 11 प्रवासी मजदूर बुधवार को सुरक्षित वतन लौट आए। ये मजदूर दुबई में एक कंपनी में काम कर रहे थे। कुल 14 मजदूरों में से 11 की स्वदेश वापसी हुई है। सभी मजदूर कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां समाजसेवी सिकंदर अली ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्हें बस के माध्यम से हावड़ा स्टेशन के लिए रवाना किया गया।

मजदूरों ने बताया कि वे अक्टूबर 2025 में दुबई स्थित ईएमसी (EMC) कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन के काम के लिए गए थे। वहां उन्हें समय पर मजदूरी नहीं दी जा रही थी और निर्धारित समय से अधिक काम करवाया जा रहा था, जिससे रहने और खाने-पीने में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अपनी समस्याओं को लेकर मजदूरों ने एक वीडियो जारी कर सरकार से मदद की अपील की थी।

मामले की जानकारी मिलने के बाद झारखंड सरकार और केंद्र सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराई। लौटे मजदूरों के परिजनों ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार, मीडिया और समाजसेवी सिकंदर अली का आभार व्यक्त किया।

सिकंदर अली ने इस अवसर पर कहा कि रोज़ी-रोटी की तलाश में लोग विदेश जाते हैं, जहां वे कई बार शोषण का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने सरकार से प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और बेहतर रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।

वतन वापसी करने वाले मजदूरों में गिरिडीह जिले से राजेश महतो (तिरला, बगोदर) और अजय कुमार (मंडरो, डुमरडेली) शामिल हैं। बोकारो जिले से डालेश्वर महतो (कंजकीरो, नावाडीह) वापस लौटे हैं। हजारीबाग जिले से जागेश्वर महतो (खेदाडीह, बिष्णुगढ़), बैजनाथ महतो (सिरैय), दिलीप महतो, गंगाधर महतो, त्रिलोकी महतो (पारजोरिया), दीपक कुमार (चकचुको बसरिया), रोहित महतो और सेवा महतो (गोरहर, बरकट्ठा) की भी वापसी हुई है।