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भोजपुर के नए SP अवधेश दीक्षित क्यों हैं चर्चा में? जानिए IPS काम्या मिश्रा से उनकी खास प्रेम कहानी

भोजपुर जिले में नई नियुक्त पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित के आधिकारिक कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही उनके व्यक्तिगत जीवन की कहानी ने जनसंचार में हलचल मचा दी है। इस समय, दीक्षित ने अपने कर्तव्यनिष्ठा को सिद्ध करने के साथ-साथ अपने वैवाहिक संबंधों को भी सार्वजनिक मंच पर लाया है, जिससे उनके कार्यकाल के प्रारम्भिक दिनों में ही सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गए हैं। इस लेख में हम उनकी पेशेवर पृष्ठभूमि, वैवाहिक साथी काम्या मिश्रा के साथ उनका मिलन, तथा इस गठबंधन का क्षेत्रीय प्रशासन पर संभावित प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।अवधेश दीक्षित भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 2019 बैच के अधिकारी हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों से गुज़रते हुए अपने करियर की नींव रखी। उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड उत्तीर्ण होते ही कई कठिन असाइनमेंट्स पर काम करने का अवसर प्रदान करता रहा, जिसमें विभिन्न जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखना और विशेष सुरक्षा अभियानों का संचालन शामिल है। दीक्षित ने अपने प्रारम्भिक वर्ष में कई प्रमुख ऑपरेशन में भाग लेकर अपने नेतृत्व कौशल को परखाया, जिससे उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों का विश्वास प्राप्त हुआ।

वहीं, काम्या मिश्रा भी IPS की वही बैच से निकलने वाली अधिकारी हैं, जिनका प्रशासनिक कार्यकाल विभिन्न राज्यों में विविध भूमिकाओं में रहा है। मिश्रा ने अपने करियर में सामाजिक न्याय, महिला सुरक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान दिया है। उनका पेशेवर प्रोफ़ाइल न केवल उनके कार्यकुशलता को दर्शाता है, बल्कि उनके नेतृत्व में किए गए कई सफल परियोजनाओं से भी प्रमाणित होता है। दोनों अधिकारी अपने-अपने विभागों में सम्मानित थे, जिससे उनका मिलन केवल व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि पेशेवर दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

इन दोनों का पहला मिलन राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूर में आयोजित सिविल सर्विस ट्रेनिंग के दौरान हुआ, जहाँ विभिन्न सेवा वर्गों के अधिकारियों को एक साथ लाया जाता है। प्रशिक्षण सत्र में विभिन्न समूह कार्यों और केस स्टडीज के माध्यम से सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया गया, और इसी दौरान दीक्षित और मिश्रा ने एक-दूसरे के विचारों और कार्यशैली को करीब से देखा। इस मुलाकात ने दोनों के बीच एक गहरी दोस्ती की नींव रखी, जो बाद में एक रोमांटिक संबंध में विकसित हुई।

ट्रेनिंग के बाद, दोनों ने विभिन्न राज्य सेवा में विभिन्न पदों को संभाला, परंतु नियमित संपर्क और सामाजिक मंचों पर चर्चा के माध्यम से उनका रिश्ता बना रहा। 2021 में, जब दोनों एक राष्ट्रीय सम्मेलन में एक ही सत्र में भाग ले रहे थे, तो उनके बीच संवाद अधिक गहरा हुआ, जिससे व्यक्तिगत रुचियों और पेशेवर उद्देश्यों का संगम स्पष्ट हुआ। इस अवधि में, दीक्षित और मिश्रा ने एक-दूसरे के कार्यशैली में सहानुभूति और समर्थन की भावना विकसित की, जो अंततः विवाह में परिणत हुई।

विवाह के बाद भी, दोनों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे उनके पेशेवर दायित्व कभी कम नहीं हुए। दीक्षित ने भोजपुर में नई नियुक्ति के बाद कई प्रमुख अपराधी गिरोहों को तोड़ने के लिए विशेष ऑपरेशन शुरू किए, जबकि मिश्रा ने महिला सशक्तिकरण और बाल संरक्षण के लिए कई नीतिगत पहलें प्रस्तावित कीं। उनका सहयोग केवल पारिवारिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई बार उन्होंने सामूहिक रूप से सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक सुधार के कार्यक्रमों में भाग लिया।

भोजपुर में नई नियुक्ति के बाद, दीक्षित की पहली प्रमुख कार्रवाई में एक बड़े घोटाले की जांच का आदेश दिया गया, जिसके तहत कई स्थानीय राजनैतिक दांव-पेंच उजागर हुए। इस जांच के दौरान, उन्होंने अपने कार्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों को दृढ़ता से लागू किया, जिससे जनता में प्रशासनिक भरोसा पुनः स्थापित हुआ। इसके साथ ही, उन्होंने स्थानीय पुलिस बल को आधुनिक तकनीकी साधनों से लैस करने के लिए विशेष बजट आवंटित किया, जो क्षेत्रीय अपराध दर को घटाने में सहायक सिद्ध हुआ।

समुदाय के विभिन्न वर्गों ने दीक्षित के इन कदमों को सकारात्मक रूप से सराहा, जबकि कुछ राजनीतिक समूहों ने इस तीव्र कदम को अपने विरोध के रूप में प्रस्तुत किया। इस विवादास्पद माहौल में, काम्या मिश्रा ने सार्वजनिक मंच पर अपने पति के निर्णयों का समर्थन किया, यह स्पष्ट करते हुए कि प्रशासनिक निर्णयों को व्यक्तिगत संबंधों से अलग नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान ने कई नागरिक समूहों को आश्वस्त किया, जिन्होंने कहा कि अधिकारी के व्यक्तिगत जीवन का सार्वजनिक नीति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होना चाहिए।

राजनीतिक दलों ने इस अवसर का उपयोग अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिये किया, कुछ ने दीक्षित के प्रशासनिक कदमों को भ्रष्टाचार विरोधी कदम बताया, तो कुछ ने इसे व्यक्तिगत लाभ के रूप में देख कर सवाल उठाए। इस बीच, स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि पुलिस के सक्रिय कदमों से व्यावसायिक माहौल में सुधार आया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हुई। सामाजिक कार्यकर्ता समूहों ने भी इस स्थिति पर टिप्पणी की, यह संकेत देते हुए कि पुलिस और सामाजिक संस्थानों के सहयोग से ही स्थायी बदलाव संभव है।

 


IPS officer Avdesh Dixit, newly posted as Superintendent of Police in Bhojpur, has drawn public attention by foregrounding his marriage to fellow officer Kamya Mishra as he launches high‑profile anti‑crime operations. Their joint professional stature and personal partnership are now being scrutinized for potential impact on regional administration and local politics.

The appointment of the new police superintendent in Bhojpur marks a new phase in local law‑and‑order management, potentially affecting crime prevention and administrative transparency. The personal union of two senior IPS officers may influence collaborative initiatives between law enforcement and social welfare programs.

चोरी छुपे प्रेमिका से मिलने पहुंचता था प्रेमी, गांव वालों को जब पता चला तो दोनों की करा दी शादी

स्मार्टफोन और सोशल साइट्स प्रेम में पींगे बढ़ाने के लिए मौका उपलब्ध कराते हैं। इन्हीं चीजों का प्रभाव जहानाबाद के हुलासगंज परखंड में दिखा। जहां एक अनोखी घटना लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां छुप-छुपकर मिलने की सजा एक प्रेमी जोड़े को गांव वालों ने दी और वह यह कि दोनों की शादी करा दी।

मामला सुकियावा गांव का है। प्रेमी गया जिले के मानपुर का रहने वाला है, जबकि प्रेमिका सुकियावा गांव की। प्रेमी बहाने बना कर अकसर गांव अपने दूर के रिश्तेदार के यहां आया करता था। फोन और सोशल साइट से मन नहीं भरता तो प्रेमी प्रेमिका के गांव पहुंच जाता था।

प्रेमी और प्रेमिका दोनों के चोरी चोरी मिलने की खबर पूरे गांव को हो गई। शुक्रवार को जब प्रेमी मिलने पंहुचा तो गांव वालों ने प्रेमी को प्रेमिका के साथ ही पकड़ लिया। गांव घर के लोग जुट गए और फिर ग्रामीणों ने यह फैसला लिया कि दोनों की शादी करा दी जाए।

फिर क्या था चट मंगनी और पट ब्याह की तर्ज पर गांव के ही मंदिर में शादी की रस्में पूरी कर ली गई। गांव भर के लोग इस अनोखी शादी का गवाह बने।

घरवालों से परेशान होकर प्रेमी के घर पहुंची प्रेमिका, प्रेमी के घर रहने की जिद पर अडी

सीवान के मैरवा की घटना है, जहां प्रेमिका अपने घर वालो से परेसान होकर प्रेमी के घर पहुंच गई और प्रेमी के साथ रहने की जिद करने लगी। यह हम नहीं कह रहे हैं जबकि यह कहना है प्रेमिका का।

दरअसल मामला मैरवा थाना क्षेत्र का है। प्रेमी मैरवा थाना क्षेत्र के उपाध्याय छापर गांव के रहने वाला राम लखन है जिसके घर पहुंच गई प्रेमिका। बताया जा रहा है कि इन दोनों में काफी दिनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था और लड़की के घर वाले को यह बात मंजूर नहीं थी।

बताया जा रहा है कि लड़की पक्ष वाले द्वरा थाना में आवेदन दीया है।तो वह अब लड़की लड़के के साथ रहने की जिद कर रही है और लड़के के घर पहुची हुई है।अब ये बात चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब देखना है कि लड़की अपने घर जाती है या प्रेमी के घर ही रहती है।

विदेशी दुलहिनिया ने रचाई दूल्हे से शादी, गर्व महसूस कर रहे है दुलहिनिया देख गाँव के लोग

बक्सर । प्यार में दिल दे बैठी ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली विक्टोरिया सूबे के बक्सर जिले के इटाढ़ी प्रखंड अंतर्गत कुकुढा गांव के रहने वाले जयप्रकाश से शादी रचा अपने आप को काफी खुश नसीब समझ रही हैं। विक्टोरिया की शादी बक्सर के एक मैरिज हॉल में 20 अप्रैल की रात हिंदू रीति रिवाज से हुई। उनके पति जयप्रकाश यादव कुकुढा पंचायत के पूर्व मुखिया नंदलाल सिंह यादव के बड़े पुत्र हैं, जो ऑस्ट्रेलिया में रहकर पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करते हैं। इस शादी से दोनों ही परिवार के लोग काफी खुश हैं।

2019 में आस्ट्रेलिया गया था जयप्रकाश

जयप्रकाश ने 2019 से 2021 तक ऑस्ट्रेलिया में रहकर पढ़ाई की। वह एमएस सिविल इंजीनियर के पद पर ऑस्ट्रेलिया में पदस्थापित है। पढ़ाई के दौरान ही जयप्रकाश को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर के जीलॉन्ग की रहने वाली इस लड़की से प्यार हुआ। उसके पिता स्टीवन टॉकेट एवं माता अमेंडा टॉकेट भी अपनी बेटी विक्टोरिया के साथ इटाढ़ी के कुकुढा आए हैं। इन्होंने हिंदू रीति रिवाज से 20 अप्रैल की रात अपनी बेटी विक्टोरिया की शादी कुकुढा के पूर्व मुखिया नंदलाल सिंह के बड़े पुत्र जयप्रकाश यादव से कराई।

भारतीय संस्कृति को देखकर खुश हैं दुल्हन के माता- पिता

विक्टोरिया के पिता स्टीवन टॉकेट ने बिहारी संस्कृति के सवाल पर बताया कि मुझे इस कल्चर को देखकर काफी खुशी हुई। बेटी के हाथ में मेहंदी देखकर वे काफी खुश हैं। विक्टोरिया के पिता होने के नाते कन्यादान की रस्म अदायगी के लिए पैर में महावर को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि काफी अच्छा लगा। बिहार के इटाढ़ी में बेटी के ससुराल में आकर काफी खुश हूं। मुझे आशा है कि मेरी बेटी इस बिहारी दामाद के साथ काफी खुशहाल रहेगी।

वहीं, दूल्हे के पिता और पूर्व मुखिया नंदलाल सिंह ने बताया कि मेरे परिवार के लोग जब बेटे की पसंद जाने तो हम लोग ना नहीं कर पाए पर हमने कहा कि शादी गांव पर ही हिंदू रीति रिवाज के साथ होगी तो वह लोग भी मान गए। अब शादी करके जहां वह लोग काफी खुश दिख रहे हैं, वहीं हमारा परिवार भी इन लोगों की शादी से काफी खुश है। रिश्ते नातेदार भी हम लोगों को बधाइयां दे रहे हैं। गांव सहित आसपास के लोग दुल्हन व उसके परिजनों को देखने के लिए घर पर पहुंच रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया में शिक्षिका है विक्टोरिया

सात समंदर पार से अपने प्यार को शादी का अमलीजामा पहनाने बक्सर के कुकुढा पहुंची विक्टोरिया अपने शहर जिला में बतौर शिक्षिका के पद पर कार्यरत है। विक्टोरिया अपने पांच भाई और दो बहनों में सबसे छोटी है। जिसने सात समंदर पार से बिहार बक्सर के इटाढ़ी में आकर शादी की। विक्टोरिया के माता-पिता भी इस शादी व बिहारी कल्चर के साथ ही हिंदू रीति-रिवाज से शादी पर फूले नहीं समा रहे हैं।

आजकल के प्रेमी जोड़े नए-नए फिल्मों को देख कर घर से भागकर शादी करने से पीछे नहीं हट रहे हैं

हर रोज ऐसी घटनाएंद सुर्खियों में रहती है । कुछ इसी प्रकार का ताजा मामला बिहार के जहानाबाद का है। जहां एक प्रेमीयुगल अपने माता-पिता से बिना पूछे ही घर से भागकर स्टेशन स्थित बराह भगवान के मंदिर में शादी रचा ली। इधर, लड़की के परिजनों को पता चला तो ढूंढते हुए मंदिर पहुंच गए जहां काफी मान मनाऊअल के बाद राजी हुए और फिर शादी में शरीक हुए।

दरअसल शहर के रामगढ़ मोहल्ले के रंजय कुमार को दो साल पहले कड़ौना गांव के उषा कुमारी के साथ आंखे चार हुई। धीरे धीरे दोनो की फोन पर बातें होने लगी। बाते होते होते प्यार का परवान इतना चढ़ गया कि दोनो ने शादी करने का फैसला कर लिया।जिसके बाद इसकी जानकारी घर वालों को दी।

जिसके बाद लड़की वाले शादी के लिए राजी नही हुए। आज दोनो कोर्ट मैरेज करने के ख्याल से पूरी प्लानिंग के तहत घर से भाग गए। इधर लड़की के घर वाले लड़की को घर मे न पाकर इधर उधर खोजबीन शुरू कर दी। इसी दरम्यान पता चला कि रंजय और उषा दोनो स्टेशन परिसर स्थित बराह भगवान के मंदिर में शादी करने पहुंचे है।

जानकारी मिलते ही लड़का और लड़की के परिवार भी पहुंच गए। काफी देर तक दोनो में मान मैन्यूअल का दौर चला जिसके बाद दोनो की शादी मंदिर में रचाई गयी। शादी देखने को लेकर मंदिर में लोगो की भीड़ लग गयी।
Byte – उषा कुमारी,युवती
रंजय कुमार,युवक

प्रेम एक सुखद अहसास है

प्रेम
एक सुखद अहसास, पर
जिस तक पहुँचने के लिए
पीड़ा एवं वेदना की घाटियों से पड़ता है गुजरना;
फिर भी मुमकिन है
कि यात्रा अधूरी रह जाए,
जिसके अधूरेपन में ही है
उसकी पराकाष्ठा,
उसका उत्कर्ष।

प्रेम नहीं है परीक्षा;
प्रेम है
सम्पूर्ण आनत समर्पण,
सन्देह से परे।

प्रेम नहीं है
पाने का नाम,
प्रेम है
सब कुछ की तथता,
और सब कुछ की तथता का
सम्पूर्ण समर्पण,
उसे दे देने का नाम।

प्रेम है
वेदना की अनुभूति,
उस अनुभूति को भी बार-बार जीने की चाह,
और उन अनुभूतियों को बार-बार जीते हुए
सुख एवं संतुष्टि का अहसास।

प्रेम नहीं है शरीर की चाह,
प्रेम नहीं है उन्नत उरोजों का आकर्षण, और
प्रेम नहीं है
योनि की गहराइयों को मापने वाली कामजन्य वासना!

प्रेम है मस्तक पर चुम्बन,
हाँ, निर्द्वन्द्व, वरद, दीर्घ चुम्बन
जो हमें आश्वस्त करता है!

प्रेम है उरोजों की थाप,
जो बहा ले जाती है हमें
माँ की थपकियों की तरह,
वर्तमान के उस विषम ताप से कहीं दूर
उस दुनिया की ओर,
जिसमें हम विचरण करना चाहते हैं,
जिसमें हम खोना चाहते हैं,
जिसमें हम समा जाना चाहते हैं।

प्रेम है
अपनी सुध-बुध को खोना,
प्रेम है
मुश्किल से मिलने वाला खिलौना।

प्रेम है
खुद को परखना,
प्रेम है
खुद को सिरजना।

प्रेम है
म्यान की तलवार,
प्रेम है
अवलम्ब की पुकार।

प्रेम है
आश्रय की तलाश, और
प्रेम है
आश्रय बन जाने की चाह!

प्रेम है
आँखों के रास्ते दिल में उतर जाना,
प्रेम है
खुरदरे हाथों को सहलाना।

प्रेम है
नि:शब्द होंठों का कम्पन,
प्रेम है
अस्तित्व का विसर्जन।

प्रेम है
असीम में विलीन होने की चाह,
प्रेम है
सामने वाले की परवाह!

जब आँखें बोलने लगतीं,
तो प्रेम है;
जब नज़रें झुकने लगतीं,
तो प्रेम है।

प्रेम है
शून्य में खो जाना,
प्रेम है
आहों में रो जाना।

प्रेम है
आकर्षण में खिंचता चला जाना,
प्रेम है
बँधता चला जाना।

जो बाँध ले
वो प्रेम है,
जो मुक्त कर दे,
वो प्रेम है।

प्रेम है
अनन्त में लीन हो जाना,
प्रेम है
भावों, अनुभूतियों और शब्दों में लीयमान हो जाना;
प्रेम है
नि:शब्द समर्पण,
प्रेम है
नि:शर्त समर्पण!

निःशब्द हो जाना ही
प्रेम है,
निर्वाक हो जाना ही
प्रेम है।

प्रेम है
‘प्रेम’ का मान,
प्रेम है
प्रेमिका का सम्मान!

अगर ऐसा नहीं, तो
प्रेम अधूरा है।

प्रेम #Prem

प्यार तो बस एक एहसास है

इसे कहते है कसक ओर चाहत

ट्रेन चलने को ही थी कि अचानक कोई जाना पहचाना सा चेहरा जर्नल बोगी में आ गया। मैं अकेली सफर पर थी। सब अजनबी चेहरे थे। स्लीपर का टिकिट नही मिला तो जर्नल डिब्बे में ही बैठना पड़ा। मगर यहां ऐसे हालात में उस शख्स से मिलना। जिंदगी के लिए एक संजीवनी के समान था।

जिंदगी भी कमबख्त कभी कभी अजीब से मोड़ पर ले आती है। ऐसे हालातों से सामना करवा देती है जिसकी कल्पना तो क्या कभी ख्याल भी नही कर सकते ।

वो आया और मेरे पास ही खाली जगह पर बैठ गया। ना मेरी तरफ देखा। ना पहचानने की कोशिश की। कुछ इंच की दूरी बना कर चुप चाप पास आकर बैठ गया। बाहर सावन की रिमझिम लगी थी। इस कारण वो कुछ भीग गया था। मैने कनखियों से नजर बचा कर उसे देखा। उम्र के इस मोड़ पर भी कमबख्त वैसा का वैसा ही था। हां कुछ भारी हो गया था। मगर इतना ज्यादा भी नही।
फिर उसने जेब से चश्मा निकाला और मोबाइल में लग गया।

चश्मा देख कर मुझे कुछ आश्चर्य हुआ। उम्र का यही एक निशान उस पर नजर आया था कि आंखों पर चश्मा चढ़ गया था। चेहरे पर और सर पे मैने सफेद बाल खोजने की कोशिश की मग़र मुझे नही दिखे।

मैंने जल्दी से सर पर साड़ी का पल्लू डाल लिया। बालो को डाई किए काफी दिन हो गए थे मुझे। ज्यादा तो नही थे सफेद बाल मेरे सर पे। मगर इतने जरूर थे कि गौर से देखो तो नजर आ जाए।

मैं उठकर बाथरूम गई। हैंड बैग से फेसवाश निकाला चेहरे को ढंग से धोया फिर शीशे में चेहरे को गौर से देखा। पसंद तो नही आया मगर अजीब सा मुँह बना कर मैने शीशा वापस बैग में डाला और वापस अपनी जगह पर आ गई।

मग़र वो साहब तो खिड़की की तरफ से मेरा बैग सरकाकर खुद खिड़की के पास बैठ गए थे।
मुझे पूरी तरह देखा भी नही बस बिना देखे ही कहा, ” सॉरी, भाग कर चढ़ा तो पसीना आ गया था । थोड़ा सुख जाए फिर अपनी जगह बैठ जाऊंगा।” फिर वह अपने मोबाइल में लग गया। मेरी इच्छा जानने की कोशिश भी नही की। उसकी यही बात हमेशा मुझे बुरी लगती थी। फिर भी ना जाने उसमे ऐसा क्या था कि आज तक मैंने उसे नही भुलाया। एक वो था कि दस सालों में ही भूल गया। मैंने सोचा शायद अभी तक गौर नही किया। पहचान लेगा। थोड़ी मोटी हो गई हूँ। शायद इसलिए नही पहचाना। मैं उदास हो गई।

जिस शख्स को जीवन मे कभी भुला ही नही पाई उसको मेरा चेहरा ही याद नही😔

माना कि ये औरतों और लड़कियों को ताड़ने की इसकी आदत नही मग़र पहचाने भी नही😔

शादीशुदा है। मैं भी शादीशुदा हुँ जानती थी इसके साथ रहना मुश्किल है मग़र इसका मतलब यह तो नही कि अपने खयालो को अपने सपनो को जीना छोड़ दूं।
एक तमन्ना थी कि कुछ पल खुल के उसके साथ गुजारूं। माहौल दोस्ताना ही हो मग़र हो तो सही😔

आज वही शख्स पास बैठा था जिसे स्कूल टाइम से मैने दिल मे बसा रखा था। सोसल मीडिया पर उसके सारे एकाउंट चोरी छुपे देखा करती थी। उसकी हर कविता, हर शायरी में खुद को खोजा करती थी। वह तो आज पहचान ही नही रहा😔

माना कि हम लोगों में कभी प्यार की पींगे नही चली। ना कभी इजहार हुआ। हां वो हमेशा मेरी केयर करता था, और मैं उसकी केयर करती थी। कॉलेज छुटा तो मेरी शादी हो गई और वो फ़ौज में चला गया। फिर उसकी शादी हुई। जब भी गांव गई उसकी सारी खबर ले आती थी।

बस ऐसे ही जिंदगी गुजर गई।

आधे घण्टे से ऊपर हो गया। वो आराम से खिड़की के पास बैठा मोबाइल में लगा था। देखना तो दूर चेहरा भी ऊपर नही किया😔

मैं कभी मोबाइल में देखती कभी उसकी तरफ। सोसल मीडिया पर उसके एकाउंट खोल कर देखे। तस्वीर मिलाई। वही था। पक्का वही। कोई शक नही था। वैसे भी हम महिलाएं पहचानने में कभी भी धोखा नही खा सकती। 20 साल बाद भी सिर्फ आंखों से पहचान ले☺️
फिर और कुछ वक्त गुजरा। माहौल वैसा का वैसा था। मैं बस पहलू बदलती रही।

फिर अचानक टीटी आ गया। सबसे टिकिट पूछ रहा था।
मैंने अपना टिकिट दिखा दिया। उससे पूछा तो उसने कहा नही है।

टीटी बोला, “फाइन लगेगा”
वह बोला, “लगा दो”
टीटी, ” कहाँ का टिकिट बनाऊं?”

उसने जल्दी से जवाब नही दिया। मेरी तरफ देखने लगा। मैं कुछ समझी नही।
उसने मेरे हाथ मे थमी टिकिट को गौर से देखा फिर टीटी से बोला, ” कानपुर।”
टीटी ने कानपुर की टिकिट बना कर दी। और पैसे लेकर चला गया।
वह फिर से मोबाइल में तल्लीन हो गया।

आखिर मुझसे रहा नही गया। मैंने पूछ ही लिया,”कानपुर में कहाँ रहते हो?”
वह मोबाइल में नजरें गढ़ाए हुए ही बोला, ” कहीँ नही”
वह चुप हो गया तो मैं फिर बोली, “किसी काम से जा रहे हो”
वह बोला, “हाँ”

अब मै चुप हो गई। वह अजनबी की तरह बात कर रहा था और अजनबी से कैसे पूछ लूँ किस काम से जा रहे हो।
कुछ देर चुप रहने के बाद फिर मैंने पूछ ही लिया, “वहां शायद आप नौकरी करते हो?”
उसने कहा,”नही”

मैंने फिर हिम्मत कर के पूछा “तो किसी से मिलने जा रहे हो?”
वही संक्षिप्त उत्तर ,”नही”
आखरी जवाब सुनकर मेरी हिम्मत नही हुई कि और भी कुछ पूछूँ। अजीब आदमी था । बिना काम सफर कर रहा था।
मैं मुँह फेर कर अपने मोबाइल में लग गई।
कुछ देर बाद खुद ही बोला, ” ये भी पूछ लो क्यों जा रहा हूँ कानपुर?”

मेरे मुंह से जल्दी में निकला,” बताओ, क्यों जा रहे हो?”
फिर अपने ही उतावलेपन पर मुझे शर्म सी आ गई।
उसने थोड़ा सा मुस्कराते हुवे कहा, ” एक पुरानी दोस्त मिल गई। जो आज अकेले सफर पर जा रही थी। फौजी आदमी हूँ। सुरक्षा करना मेरा कर्तव्य है । अकेले कैसे जाने देता। इसलिए उसे कानपुर तक छोड़ने जा रहा हूँ। ” इतना सुनकर मेरा दिल जोर से धड़का। नॉर्मल नही रह सकी मैं।

मग़र मन के भावों को दबाने का असफल प्रयत्न करते हुए मैने हिम्मत कर के फिर पूछा, ” कहाँ है वो दोस्त?”
कमबख्त फिर मुस्कराता हुआ बोला,” यहीं मेरे पास बैठी है ना”

इतना सुनकर मेरे सब कुछ समझ मे आ गया। कि क्यों उसने टिकिट नही लिया। क्योंकि उसे तो पता ही नही था मैं कहाँ जा रही हूं। सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए वह दिल्ली से कानपुर का सफर कर रहा था। जान कर इतनी खुशी मिली कि आंखों में आंसू आ गए।

दिल के भीतर एक गोला सा बना और फट गया। परिणाम में आंखे तो भिगनी ही थी।
बोला, “रो क्यों रही हो?”

मै बस इतना ही कह पाई,” तुम मर्द हो नही समझ सकते”
वह बोला, ” क्योंकि थोड़ा बहुत लिख लेता हूँ इसलिए एक कवि और लेखक भी हूँ। सब समझ सकता हूँ।”
मैंने खुद को संभालते हुए कहा “शुक्रिया, मुझे पहचानने के लिए और मेरे लिए इतना टाइम निकालने के लिए”
वह बोला, “प्लेटफार्म पर अकेली घूम रही थी। कोई साथ नही दिखा तो आना पड़ा। कल ही रक्षा बंधन था। इसलिए बहुत भीड़ है। तुमको यूँ अकेले सफर नही करना चाहिए।”

“क्या करती, उनको छुट्टी नही मिल रही थी। और भाई यहां दिल्ली में आकर बस गए। राखी बांधने तो आना ही था।” मैंने मजबूरी बताई।

“ऐसे भाइयों को राखी बांधने आई हो जिनको ये भी फिक्र नही कि बहिन इतना लंबा सफर अकेले कैसे करेगी?”

“भाई शादी के बाद भाई रहे ही नही। भाभियों के हो गए। मम्मी पापा रहे नही।”

कह कर मैं उदास हो गई।
वह फिर बोला, “तो पति को तो समझना चाहिए।”
“उनकी बहुत बिजी लाइफ है मैं ज्यादा डिस्टर्ब नही करती। और आजकल इतना खतरा नही रहा। कर लेती हुँ मैं अकेले सफर। तुम अपनी सुनाओ कैसे हो?”

“अच्छा हूँ, कट रही है जिंदगी”
“मेरी याद आती थी क्या?” मैंने हिम्मत कर के पूछा।
वो चुप हो गया।

कुछ नही बोला तो मैं फिर बोली, “सॉरी, यूँ ही पूछ लिया। अब तो परिपक्व हो गए हैं। कर सकते है ऐसी बात।”
उसने शर्ट की बाजू की बटन खोल कर हाथ मे पहना वो तांबे का कड़ा दिखाया जो मैंने ही फ्रेंडशिप डे पर उसे दिया था। बोला, ” याद तो नही आती पर कमबख्त ये तेरी याद दिला देता था।”

कड़ा देख कर दिल को बहुत शुकुन मिला। मैं बोली “कभी सम्पर्क क्यों नही किया?”

वह बोला,” डिस्टर्ब नही करना चाहता था। तुम्हारी अपनी जिंदगी है और मेरी अपनी जिंदगी है।”
मैंने डरते डरते पूछा,” तुम्हे छू लुँ”

वह बोला, ” पाप नही लगेगा?”
मै बोली,” नही छू ने से नही लगता।”
और फिर मैं कानपुर तक उसका हाथ पकड़ कर बैठी रही।।

बहुत सी बातें हुईं।

जिंदगी का एक ऐसा यादगार दिन था जिसे आखरी सांस तक नही बुला पाऊंगी।
वह मुझे सुरक्षित घर छोड़ कर गया। रुका नही। बाहर से ही चला गया।

जम्मू थी उसकी ड्यूटी । चला गया।

उसके बाद उससे कभी बात नही हुई । क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे के फोन नम्बर नही लिए।

हांलांकि हमारे बीच कभी भी नापाक कुछ भी नही हुआ। एक पवित्र सा रिश्ता था। मगर रिश्तो की गरिमा बनाए रखना जरूरी था।

फिर ठीक एक महीने बाद मैंने अखबार में पढ़ा कि वो देश के लिए शहीद हो गया। क्या गुजरी होगी मुझ पर वर्णन नही कर सकती। उसके परिवार पर क्या गुजरी होगी। पता नही😔

लोक लाज के डर से मैं उसके अंतिम दर्शन भी नही कर सकी।

आज उससे मीले एक साल हो गया है आज भी रखबन्धन का दूसरा दिन है आज भी सफर कर रही हूँ। दिल्ली से कानपुर जा रही हूं। जानबूझकर जर्नल डिब्बे का टिकिट लिया है मैंने।
अकेली हूँ। न जाने दिल क्यों आस पाले बैठा है कि आज फिर आएगा और पसीना सुखाने के लिए उसी खिड़की के पास बैठेगा।
एक सफर वो था जिसमे कोई #हमसफ़र था।
एक सफर आज है जिसमे उसकी यादें हमसफ़र है। बाकी जिंदगी का सफर जारी है देखते है कौन मिलता है कौन साथ छोड़ता है…!!!

महिलाओं के बीच क्यों लोकप्रिय है शशि थरूर

सलमान खान सुंदर और आकर्षक आदमी है मगर अक्सर उसकी बातें बचकानी और मूर्खतापूर्ण होती हैं |

अक्षय कुमार एक हैंडसम आदमी है मगर उसकी भाषा में देहाती लहज़ा और बदतमीजी दिखाई देती है |

एखटाइगर श्रौफ सुंदर शरीर और चहरे का मालिक है, वह मृदुभाषी, सौम्य और तमीज से बातचीत भी करता है मगर उसकी बातें जिम, बॉडी बिलडिंग, डांस और मार्शल आर्टस तक सीमित हैं | कोई बहुत ज्ञान की बातें वह नहीं बता सकता |

आमिर खान सुन्दर, सरल, सौम्य है मगर वह भी बहुत ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है |

शाहरुख खान पढ़ा लिखा भी है, हाजिर जवाब भी है, हैंडसम भी कहा जा सकता है, अंग्रेजी या हिन्दी दोनों भाषा अच्छे से बोल सकता है |

आयुष्मान खुराना भी सुन्दर, आकर्षक और सौम्य है | कविताएँ लिख लेता है, किताबें पसंद करता है और स्क्रिप्ट की जो बेहतर समझ रखता है उसे देख के लगता है वह आदमी बुद्धिमान भी है|

सचिन तेंदुलकर भले ही वह मृदुभाषी, सौम्य और तमीजदार आदमी है मगर वह बहुत पढ़ा लिखा नहीं है और शायद सुंदरता के पैमाने पे फिट नहीं बैठता |

युवराज सिंह सुन्दर है मगर वह भी शिष्ट, सौम्य और बुद्धिमान नहीं है |

राहुल द्रविड सुंदर है, शिष्ट है, शालीन है और शायद पढ़ा लिखा भी है मगर वह अंतरमुखी है और लोगों से ज्यादा घूलना मिलना पसंद नहीं करता |

मेरी पोस्ट का मूलभूत मुद्दा यह है कि बहुत कम भारतीय मर्द ऐसे हैं जिनको ईश्वर ने सुन्दरता, शिष्टाचार, बुद्धि, शालीनता, ज्ञान और आकर्षक व्यक्तित्व दिया हो ! बहुत कम भारतीय मर्द ऐसे हैं जो अपने व्यक्तित्व से औरतों को आकर्षित कर सकते हैं | बहुत कम मर्द ऐसे हैं जिन के आस पास औरतें सुरक्षित महसूस करती हैं | बॉलीवुड में ऐसा आदमी शाहरुख है, क्रिकेट में राहुल द्रविड है जिसमें उपरोक्त ज्यादातर खूबियाँ हैं !

राजनीति में यदि आज की तारीख में कोई पढ़ा लिखा, सुन्दर, आकर्षक, सौम्य, शिष्ट, ज्ञानी, साहित्य की समझ रखने वाला, लिखने पढने वाला, हाजिर जवाब और भाषाओं में अच्छा नियंत्रण रखने वाला आदमी है तो वह सिर्फ शशि थरूर है !

हाफ चड्डी पहनने वाले, बलात्कारियों का समर्थन करने वाले, संस्कार के नाम पे पार्क में बैठे प्रेमियों को पीटने वाले यौन कुंठित लोग यह कभी नहीं समझ पाएँगे कि शशि थरूर में वह सब कुछ है जो एक औरत एक मर्द में चाहती है !

आपने पिछले कई साल गुजार दिए सिर्फ इसी जलन में कि महिलाएँ नेहरू के आसपास क्यों दिखाई देती हैं? और अब आप अगले कई साल सिर्फ इस जलन में गुजार दोगे कि महिलाएँ थरुर के आसपास क्यों दिखाई देती है?

उत्तर साफ है :
आज जो खूबियाँ थरूर में बिलकुल वही खूबियाँ नेहरू में थी ! बल्कि नेहरू में कुछ ज्यादा ही थी और शायद इसलिए वह भी महिलाओं में बेहद लोकप्रिय थे ।

दुल्हन को लेकर पटना पहुँचा तेजस्वी

नेता विरोधी दल तेजस्वी यादव शादी करने के बाद पहली बार लालू आवास पहुंचे और मीडिया कर्मियों से मुखातिब हुए उन्होंने कहा कि हमने बहुत ही सरल तरीके से शादी की और हम लोग 4 दिनों के अंदर बहुभोज के डेट को लेकर आप लोगों को बताएंगे।

शादी के बाद तेजस्वी लौटा पटना
पटना पहुंचे तो क्या बोला तेजस्वी

तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि उनका असल नाम राजश्री है और उन्होंने इस नाम को खुद चुना है कि लोगों को हमें भुलाने में दिक्कत ना हो।

शादी पर दिल खोल कर बोले तेजस्वी

तेजस्वी यादव ने कहा कि जिन लोगों ने भी उन्हें बधाई दी है हम सबका आप के माध्यम से धन्यवाद करते हैं तेजस्वी यादव ने कुछ लोगों की परिवारिक नाराजगी पर कहा कि हम सभी लोगों का सम्मान करते थे और सम्मान करते हैं।

तेजस्वी ने कहाँ शादी दो परिवारों का मिलन है

भारतीय सिनेमा का पहला गीत !

भारतीय सिनेमा का पहला गीत !

भारत की सबसे पहली बोलती फिल्म थी ‘आलम आरा’। वर्ष 1931 की इस फिल्म के निर्देशक थे अर्देशिर ईरानी। उन्होंने भारतीयों के बीच संगीत की लोकप्रियता को समझा और इस फिल्म में सात गाने डाले। उनमें से पहला गाना था ‘दे दे खुदा के नाम पे प्यारे’। यह एक प्रार्थना गीत था जिसके गायक थे अभिनेता वजीर मोहम्मद खान। वज़ीर खान ने फिल्म में एक फकीर का चरित्र निभाया था। ‘आलम आरा’ सिर्फ एक सवाक फिल्म नहीं थी बल्कि यह बोलने-गाने वाली फिल्म थी जिसमें बोलना कम और गाना ज्यादा था। इस फिल्म के संगीतकार थे फिरोजशाह मिस्त्री और बी ईरानी। इसी फिल्म के साथ हमारे यहां फिल्मी संगीत की नींव पड़ी। फिल्म के साथ इसके संगीत को भी व्यापक सफलता हासिल हुई। ‘दे दे खुदा के नाम पर प्यारे’ को भारतीय फिल्म के पहले गीत और वज़ीर खान को पहला गायक होने का गौरव प्राप्त हुआ। उस दौर में फिल्मों में पार्श्व गायन की परंपरा शुरु नहीं हुई थी। गीत को हारमोनियम और तबले के साथ सजीव रिकॉर्ड किया गया था।

दुर्भाग्य से भारत की पहली बोलती फिल्म का कोईभी प्रिंट अब उपलब्ध नहीं है। गीत की उपलब्ध रिकॉर्डिंग बेहद अस्पष्ट है । फिल्म शोधकर्ताओं ने इस ऐतिहासिक गीत को श्रीमती कृष्णा अटाडकर की आवाज़ में रिकॉर्ड कर भारतीय सिनेमा के पहले गीत के जादू को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है।

-लेखक ध्रुव गुप्ता (पूर्व आईपीएस अधिकारी )

आप भी सुनिए !

लड़के और लड़कियों के बीच रिश्तों को लेकर नये तरीके से सोचने कि जरुरत है

बात कोई तीन माह पूरानी है शाम के समय मैं और रंजू आपस में कुछ बात कर रहे थे उसी दौरान रंजू के मोबाइल पर फोन आया बातचीत से समझ में आ रहा था कि रंजू के कोई भाई साहब का फोन है बात चल ही रही थी कि रंजू कहती हैं लीजिए ना भैया यही सामने हैं मेहमान ।

प्रणाम पाती के बाद बात शुरु हुई तो पता चला पटना में कोई लड़की इनके बेटा पर शादी की नियत से बहला फुसला कर रेप करने का आरोप लगाते हुए केस किया है लड़का भारतीय सेना में है और छह माह पहले बहन के घर शादी में गया था वही उस लड़की से दोस्ती हो गयी फिर दोनों पटना के किसी होटल में दो तीन बार रुका भी है ।बातचीत चल ही रहा था कि उन्होंने कहा कि लीजिए ना रोशन पास ही में है,रोशन वे से मेरा सीधा सवाल था होटल में उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध भी बनाये थे जी फूफा जी लड़की फंसा करके ऐसा करवाई, अच्छा तुम बच्चा थे खैर शादी कर लो और तुम्हारे पास कोई विकल्प नहीं है।

खैर एक माह पहले ससुराल गये तो लड़का और उसके पिता जी मिलने आये और कहां मेहमान सब कुछ ठीक हो गया दोनों की शादी तय कर दिये हैं ।ये कोई एक मामला नहीं है रोजाना इस तरह के मामले हमलोगों के बीच आते रहता है कल सीएम के जनता दरबार में भी इस तरह के एक दर्जन से अधिक मामले आये जिसमें डीएसपी से लेकर दोरागा तक पर लड़कियों ने ये आरोप लगाया कि शादी का भरोसा दिला कर शारीरिक सम्बन्ध बनाया और अब शादी करने से इनकार कर रहा है।

इसी तरह का एक मामला सीएम के सामने आया जिसमें लां की छात्रा ने नीतीश कुमार के सामने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वह 5 महीनों से इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन शिकायत सुनने के बावजूद आरोपी DSP अमन कुमार के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।जब इसकी शिकायत आपके डीजीपी से किये तो डीजीपी कहते हैं लड़कियां पहले अपनी अदाओं से लड़कों को फंसाती हैं, फिर उनके ऊपर आरोप लगाती हैं।

हलाकि डीजीपी का इस तरह से जबाव देना कोई अचरज की बात नहीं है सवाल मानसिकता का है भले ही लड़कियां सभी फिल्ड में आगे बढ़ रही है लेकिन लड़कियों को लेकर समाज का नजरिया अभी भी नहीं बदला है, फिर जिस तरीके से नौकरी और पढ़ाई के लिए लड़कियां घर से बाहर निकल रही है ऐसे में इस तरह के रिश्ते की गुंजाइश हजार गुना बढ़ गयी है।

क्यों कि आज के तारीख में भी कामकाजी महिला हो या फिर लड़कियां घर से बाहर वो अकेली रह रही है तकनीक का जवाना है हर किसी के हाथ में एंड्रॉयड फोन है जिस वजह से आपस में सम्पर्क करने में कोई अरचन भी नहीं है ।वही परिवेश का तानाबान आज भी ऐसा है कि बाहर रहने वाली लड़कियों को हमेशा एक पुरुष साथी की जरुरत महसूस होती रहती है और यही समस्या की वजह है ।

सरकारी नौकरियों में सरकार ने 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दे रही है लेकिन थाने लेकर डीजीपी के आंफिस तक स्कूल से लेकर शिक्षा विभाग के दफ्तर तक कही भी महिलाओं के लिए सही से एक वासरुम भी उपलब्ध नहीं है।

दरोगा से लेकर सिपाही तक में महिलाओं की संख्या हर थाने में लगभग आधी हो गयी है लेकिन आज भी उसके रहने कि व्यवस्था सही नहीं है ।एक बार मुझे सासाराम पुलिस लाइन जाने का मौका मिला देखते हैं एक बेड पर एक महिला दो बच्चों को लेकर किसी तरह से सोई है पता चला यह महिला महिला पुलिस की सास है रात में सास पुतहू और दोनों बच्चे को लेकर बारी बारी से सोती है ये किसी एक जिले का हाल नहीं है बिहार के अधिकांश जिलों का यही हाल है ऐसे में सहयोगी पुलिसकर्मियों से रिश्ता बनना स्वभाविक है लेकिन इसको लेकर ना तो परिवार ना ही समाज और ना ही सिस्टम तैयार है ।

ऐसे में फिलहाल इस समस्या को कोई हल निकलता दिख नहीं रहा है इस स्थिति में लड़कियों को इस तरह के रिश्ते को लेकर नये तरीके से सोचने कि जरुरत है क्यों कि आये दिन लड़के और लड़कियों के बीच रिश्तों को लेकर जो कानून बन रहे हैं या फिर सुप्रीम कोर्ट का समय समय पर जो जजमेंट आ रहा है उसमें अब लड़कियों को पहले जैसी कानूनी सुरक्षा प्राप्त नहीं है । वही समाज में भी पहले जैसी ताकत नहीं है वो अपने तरीके से इन चीजों को अभी भी देख रहाी है ऐसे में फिलहाल इस तरह की समस्याओं का क्या समाधान हो सकता है इस पर सोचने कि जरुरत है ।

पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट समा सिन्हा का कहना है कि आर्थिक समाजिक और मानसिक से रुप लड़कियों को मजबूत होने कि जरुरत है तभी आप स्वंतत्र निर्णय मजबूती के साथ ले सकते हैं ।वही लड़के और लड़कियों के रिश्तों को लेकर जो नये कानून बने हैं उस वजह से समाजिक सोच और कानूनी प्रावधानों के बीच दूरी बढ़ गयी है, ऐसे में आपको कानूनी प्रावधानों से पहले जैसे संरक्षण नहीं मिल सकता है, इस स्थिति में रिश्ते बनाने को लेकर नजरिया बदलने कि जरुरत है ।

वीर कुंवर सिंह के राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर लक्ष्मी कुमारी का मानना है कि महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार की और से जो पहल किया गया है उसका सकारात्मक असर आने वाले समय दिखेगा।

लेकिन फिलहाल सरकार को वर्किंग वुमन को लेकर सपोर्ट सिस्टम बनाने कि जरुरत है जैसे वर्किंग वुमन होस्टल हर जिला मुख्यालय में होनी चाहिए बच्चों के पढ़ाई के लिए बेहतर विकल्प होना चाहिए (क्रेच)
साथ ही स्वास्थ्य को लेकर बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।इससे बहुत सारी समस्याओं का समाधान निकल सकता है साथ ही इस तरह के सुधार से सिस्टम और पुरुष मानसिकता के प्रभाव से महिलाएँ बाहर आ सकती है।

20 वर्षो से पब्लिक फिल्ड में लगातार काम कर रही मधुमिता का कहना है कि लड़कियों में शॉर्ट टर्म में कुछ पाने कि जो लालसा बढ़ रही है समस्या की एक बड़ी वजह यही है इससे बाहर निकलने कि जरुरत है साथ ही लड़कियां मानसिक रुप से मजबूत कैसे हो इस पर सोचने कि जरुरत है ।

संभार–संतोष सिंह के वाल से

बोकारो में युवक ने ‘हीर-रांझा’ को छोड़ा पीछे, पत्नी से जुदाई के दर्द में दी जान, जाने क्या है पूरा मामला

Bokaro: बोकारो के सेक्टर 12 थाना क्षेत्र के सतनपुर गांव में युवक (27) आस्तिक महादानी ने अपने ही घर में पंखे के सहारे रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि युवक अपनी पत्नी से जुदा होने का दर्द सह नहीं पाया और आत्महत्या करने पर मजबूर हो गया. दरअसल, मृतक की पत्नी 7 माह की प्रेग्नेंट है. हाल ही में उसकी शादी हुई थी और 4 दिन पहले ही मायके वाले उसे अपने घर ले गए. पत्नी के मायके चले जाने के गम में युवक घुलता रहा, अंत में वह पत्नी वियोग में इस कदर तड़पा कि कुछ और ना सोचते हुए मौत को गले लगा लिया.