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नेपाल में बाढ़ से 939 मृतकों की पुष्टि, 4,000 से अधिक लोग अभी भी लापता।

नेपाल में अचानक आई बाढ़ से 939 मृतकों की पुष्टि, 4,000 से अधिक लोग अभी भी लापता

पहली रिपोर्ट के बाद से नेपाल के उत्तरपूर्वी भाग में बाढ़ के कारण हुई तबाही का आँकलन लगातार बदल रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया प्राधिकरण (NDRRMA) ने 1 सितंबर को बताया कि अब तक 939 शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 4,000 से अधिक व्यक्तियों को अभी तक नहीं ढूँढा जा सका है। बाढ़ ने मुख्यतः काठमांडू के निकट स्थित कई छोटे नगरों को प्रभावित किया, जहाँ जल स्तर दो सप्ताह से अधिक समय तक स्थिर रहा। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेज़ करने और बचे हुए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

बाढ़ का कारण मुख्य रूप से दक्षिण एशिया के मौसमी मानसून के साथ-साथ हिमालयी जलधारा में तेज़ी से पिघलते बर्फ के कारण जलसंकट बताया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले दो हफ़्तों में हिमालयी क्षेत्रों में औसत से 30 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई, जिससे नदियों की धारा तेज़ हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से इस तरह की तीव्र बाढ़ घटनाएं भविष्य में अधिक बार हो सकती हैं।

पहले से चल रही जलसंकट प्रतिक्रिया में अंतर्राष्ट्रीय सहायता भी शामिल है। विश्व बैंक, एशियन डेवेलपमेंट बैंक और कई गैर‑सरकारी संगठनों ने त्वरित राहत सामग्री, चिकित्सा किट और जल शुद्धिकरण उपकरण भेजने की घोषणा की है। नेपाल सरकार ने इन संगठनों के साथ मिलकर 1 सितंबर से चल रहे आपातकालीन शिविरों में भोजन, साफ़ पानी और आश्रय प्रदान करने की व्यवस्था की है।

बाढ़ के दौरान कई प्रमुख सड़कों और पुलों का ढह जाना, ग्रामीण इलाकों में संचार को बाधित करना, तथा स्थानीय बाजारों की क्षति ने आर्थिक नुकसान को बढ़ा दिया है। वित्त मंत्रालय ने प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस आपदा से कृषि उत्पादन में 15 प्रतिशत तक की गिरावट और व्यापारिक गतिविधियों में 20 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान लगाया है। इससे देश के जीडीपी वृद्धि दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई गई है।

इस बीच, नेपाल के प्रमुख राजनीतिक दलों ने आपदा प्रबंधन में सुधार की मांग की है। विपक्षी दलों ने सरकार की आपदा तैयारी और पूर्व चेतावनी प्रणाली में खामियों को उजागर किया, जबकि ruling coalition ने तत्काल राहत कार्य को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया। संसद में आपदा प्रबंधन अधिनियम को संशोधित करने के लिए एक विशेष समिति का गठन प्रस्तावित किया गया है।

स्थानीय नागरिकों ने भी राहत कार्य में सहयोग करने का इरादा जताया। कई गांवों में स्वयंसेवी समूहों ने बाढ़ से बचाव कार्य में मदद के लिए नावें, रस्सी और भोजन सामग्री उपलब्ध कराई। महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष शिविर स्थापित किए गए हैं, जहाँ उन्हें अस्थायी आवास, स्वास्थ्य जांच और मनोवैज्ञानिक समर्थन प्रदान किया जा रहा है।

संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया में, नेपाल के प्रधान मंत्री ने 1 सितंबर को राष्ट्रीय टेलीविजन पर आपदा की गंभीरता को स्वीकार किया और सभी सरकारी विभागों से तत्काल कार्यवाही की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार बाढ़‑पीड़ित क्षेत्रों में निरंतर जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। साथ ही, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आर्थिक और मानवीय सहायता की अपील भी की।

विपक्षी नेता ने सरकार की तैयारी में चूक को लेकर कड़ा विरोध किया और कहा कि “बाढ़ की चेतावनी मिलने के बाद भी पर्याप्त उपाय नहीं किए गए, जिससे लाखों लोगों की जान जोखिम में पड़ी।” उन्होंने आपदा प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने की मांग की। कई सांसदों ने विशेष प्रश्न सत्र में आपदा निधियों के आवंटन, राहत वितरण की प्रक्रिया और पुनर्निर्माण योजना पर सवाल उठाए।

अंतर्राष्ट्रीय दूतावासों ने भी नेपाल में चल रहे आपदा राहत प्रयासों में सहयोग का इरादा जताया। संयुक्त राष्ट्र मानविकी सहयोग कार्यालय ने तत्काल 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता का प्रस्ताव रखा, जबकि अमेरिकी दूतावास ने 2 मिलियन डॉलर की आपातकालीन निधि प्रदान करने की घोषणा की। यूरोपीय संघ ने भी जल शुद्धिकरण और स्वास्थ्य देखभाल के लिए आवश्यक उपकरण भेजने का वादा किया।

राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों को देखते हुए, अर्थशास्त्री मानते हैं कि इस बाढ़

Updated: September 1, 2026

Insight: The flood’s death toll and large number of missing persons highlight a severe humanitarian crisis requiring coordinated relief.
The extensive damage to infrastructure and agriculture threatens Nepal’s economic growth and underscores the need for enhanced disaster preparedness.

भारत ने नेपाल में बाढ़‑ग्रस्त लोगों को 10 टन मानवीय सहायता भेजी, वायुसेना के C‑130J विमान से रवाना की गई पहली खेप काठमांडू में पहुँची।

नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद भारत ने राहत और बचाव कार्य तेज़ कर दिया है। भारतीय वायुसेना के C‑130J परिवहन विमान ने काठमांडू के हवाई अड्डे से 10 टन मानवीय सहायता सामग्री की पहली खेप रवाना की, जिसमें बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक वस्तुएँ और दवाइयाँ शामिल हैं। यह कदम दो देशों के पारस्परिक सहयोग के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है, जहाँ भारत ने आपदा के समय तुरंत मदद की पेशकश की है।

बाढ़ का प्रकोप पिछले दो हफ्तों में नेपाल के कई जिलों में धारा‑भरी नदियों के जल स्तर में अचानक वृद्धि के कारण हुआ। हिमालयी पहाड़ों से बहते पिघले हुए हिम के साथ भारी वर्षा ने जलस्रोतों को अतिप्रवाहित कर दिया, जिससे काली नदी, नारायणी और बर्दिया जैसे प्रमुख नदियों के किनारे बस्ती‑बिजली कट गई। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, अब तक 2,500 से अधिक लोग बाढ़ में फँसे और 150 से अधिक घर बर्बाद हो चुके हैं।

नेपाल सरकार ने आपदा प्रबंधन विभाग को आपातकालीन स्थिति घोषित कर दिया, और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया टीम को तैनात कर दिया। विभिन्न प्रदेशों में राहत शिविर स्थापित किए गए, जहाँ आश्रित लोगों को तात्कालिक भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने बाढ़‑ग्रस्त क्षेत्रों में निकासी कार्य तेज़ी से करने के लिए सेना, पुलिस और स्वयंसेवकों को मिलाकर एक संयुक्त दल बनाया।

भारत ने इस आपदा के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए, विदेश मंत्रालय के माध्यम से सहायता का संकल्प प्रकाशित किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने पहले ही 10 टन मानवीय सामग्री की पहली खेप भेजी है, जिसमें टेंट, कंबल, सैंटिन बिस्तर, साफ़ पानी के कंटेनर और आवश्यक दवाइयाँ शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आगे और अधिक सामग्री और विशेषज्ञ टीमों को बाढ़‑ग्रस्त क्षेत्रों में भेजने की तैयारी चल रही है।

भेजे गए सामग्री में विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए आवश्यक पोषण सप्लीमेंट, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाइयाँ, साथ ही प्राथमिक चिकित्सा किटें भी शामिल हैं। इस सामग्री का उद्देश्य तत्काल स्वास्थ्य जोखिम को कम करना और पीड़ित परिवारों को बुनियादी जीवन‑स्तर प्रदान करना है। भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता ने बताया कि C‑130J विमान ने सुरक्षित रूप से काठमांडू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर कर, स्थानीय अधिकारियों को सौंप दिया।

नेपाल के प्रमुख सरकारी अधिकारी, आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक ने भारत की मदद के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सामग्री बाढ़‑पीड़ित लोगों को शीघ्र राहत प्रदान करेगी और बचाव कार्य में सहयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत के साथ नियमित आपदा‑प्रतिक्रिया अभ्यास ने इस सहयोग को और प्रभावी बना दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ा है।

भारतीय राजदूत, नेपाल में स्थित दूतावास ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि भारत ने पहले भी नेपाल की कई आपदाओं में सहायता प्रदान की है, जैसे 2015 का भूकंप और 2021 की बाढ़। इस बार भी, भारत ने तुरंत सहायता भेज कर, दो देशों के बीच आपदा‑प्रबंधन सहयोग को नई दिशा दी है। दूतावास ने यह संकेत दिया कि भविष्य में भी समान स्थितियों में सहयोग जारी रहेगा।

नेपाली जनसंख्या के बीच इस सहायता को लेकर आशावाद का माहौल बन गया है। कई बाढ़‑पीड़ित परिवारों ने बताया कि भारत द्वारा भेजी गई सामग्री ने उनके जीवन को थोड़ा स्थिर किया है। स्थानीय स्वयंसेवक और NGOs ने भी इस मदद को सराहा, और कहा कि यह समय पर उपलब्ध सहायता से बचाव कार्य में गति आई है।

विपरीत रूप में, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल त्वरित सामग्री नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बाढ़‑ग्रस्त क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा, जल निकासी प्रणाली और स्वास्थ्य सुविधाओं को पुनः निर्मित करने के लिए बहुप्रमुख योजना बनानी चाहिए। इसके बिना भविष्य में समान आपदाओं से निपटना कठिन रहेगा।

राजनीतिक दृष्टिकोण से यह सहयोग दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करता है। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि मानवीय सहायता भारत‑नेपाल मित्रता का अभिन्न हिस्सा है और इस तरह के कदम दोनों राष्ट्रों के बीच विश्वास को गहरा करते हैं। नेपाल की सरकार ने भी इस सहायता को अंतरराष्ट्रीय सहयोग

Updated: August 27, 2026


India’s air force has dispatched 10 tonnes of emergency aid to Kathmandu after Nepal’s sudden floods, delivering tents, blankets, medicines and water to the affected population. The rapid response underscores the long‑standing disaster‑management partnership between the two Himalayan neighbours and bolsters confidence in their bilateral ties.

The Indian Air Force’s rapid delivery of 10 tonnes of humanitarian supplies to Nepal reduces immediate food, water and medical shortages in flood‑affected areas.
This assistance strengthens regional disaster‑management cooperation and supports ongoing rescue and recovery efforts.

“बिहार के सीतामढ़ी: नेपाल के भंसार टैक्स से बाजार की रौनक घट गई”

नेपाल की नई सरकार ने सीमा पार से लाए जाने वाले सामानों पर भंसार टैक्स लागू किया है, जिसका असर सीधे आम लोगों और कारोबार पर दिखने लगा है. बिहार के सीतामढ़ी जिले से सटे बाजार अब सूने पड़े हैं, जहां पहले नेपाली ग्राहक बड़ी संख्या में खरीदारी करते थे. यह बदलाव नेपाल के तराई इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो रोजमर्रा के सामान के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर रहे हैं।

सीतामढ़ी और आसपास के बाजार नेपाल के तराई इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सस्ते और सुविधाजनक विकल्प रहे हैं. लेकिन अब सीमा पर सख्ती और टैक्स के कारण नेपाली नागरिक कम खरीदारी कर रहे हैं या भारतीय बाजारों में आना ही कम कर दिया है. इससे सीमावर्ती बाजारों की रौनक घट गई है और दुकानदारों की आमदनी पर भी सीधा असर पड़ा है।

सीतामढ़ी से सटी करीब 84 किलोमीटर की सीमा पर 30 से ज्यादा बाजार हैं, जिनकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक नेपाली ग्राहकों पर निर्भर करती है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में छोटे