नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक लाल किला के पास हुए चर्चित बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ताजा गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। एजेंसी का दावा है कि जांच में एक सुनियोजित आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें लॉजिस्टिक सपोर्ट, हथियारों की आपूर्ति और विदेशी संपर्कों की भूमिका सामने आ रही है।
यह मामला नवंबर 2025 में लाल किला क्षेत्र में हुए विस्फोट से जुड़ा है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया था। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच NIA को सौंप दी थी।
ताजा गिरफ्तारी: कौन हैं आरोपी?
NIA ने जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान जमीर अहमद अहंगर और तौफैल अहमद भट के रूप में हुई है। दोनों जम्मू-कश्मीर के निवासी बताए जा रहे हैं। एजेंसी के अनुसार, ये दोनों प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े ‘ओवर ग्राउंड वर्कर’ (OGW) के तौर पर काम कर रहे थे।
जांच एजेंसी का कहना है कि ये आरोपी मुख्य साजिशकर्ता को हथियार और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में शामिल थे। प्रारंभिक पूछताछ में यह संकेत मिला है कि इन्होंने विस्फोट में इस्तेमाल हुए नेटवर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
दोनों आरोपियों को दिल्ली की विशेष NIA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए एजेंसी की रिमांड पर भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
नवंबर 2025 में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक कार में हुए धमाके से पूरा इलाका दहल गया था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास खड़ी कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं और कई लोग घायल हो गए। इस हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें मुख्य आरोपी भी शामिल था।
जांच में सामने आया कि विस्फोटक से लदी कार को एक संदिग्ध ने मौके पर खड़ा किया था। सुरक्षा एजेंसियों ने मौके से मिले डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर कई राज्यों में छापेमारी की।
साजिश की परतें: ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल’ का खुलासा
NIA की जांच में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। एजेंसी का दावा है कि इस हमले के पीछे एक तथाकथित ‘व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल’ सक्रिय था। यानी ऐसे लोग, जो पेशे से शिक्षित और पेशेवर पृष्ठभूमि रखते हैं, लेकिन गुप्त रूप से आतंकी गतिविधियों में संलिप्त थे।
इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कुछ डॉक्टर और धार्मिक कार्यकर्ता भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये लोग सीधे तौर पर विस्फोट को अंजाम देने में शामिल नहीं थे, बल्कि साजिश रचने, फंडिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट और छिपने की जगह उपलब्ध कराने में भूमिका निभा रहे थे।
विदेशी कनेक्शन की जांच
NIA इस मामले में विदेशी लिंक की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ संदिग्धों के संपर्क पाकिस्तान और खाड़ी देशों में बैठे हैंडलर्स से हो सकते हैं। हालांकि, एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया है।
जांच टीम डिजिटल चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और हवाला ट्रांजैक्शन की गहन पड़ताल कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, फंडिंग का नेटवर्क बहुस्तरीय और जटिल था, जिसे ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण है।
सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती
लाल किला जैसे राष्ट्रीय प्रतीक स्थल के पास हुए विस्फोट ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में हाई अलर्ट घोषित किया गया था। संवेदनशील इलाकों, मेट्रो स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताते हुए जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। NIA के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी मिलकर काम कर रही हैं।
कानूनी कार्रवाई और आगे की रणनीति
NIA ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। एजेंसी जल्द ही आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है।
विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह एक सुनियोजित आतंकी साजिश थी, जिसका मकसद देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देना और दहशत फैलाना था।