पटना हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची से रेप के बाद प्राथमिकी दर्ज करने में कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई नहीं किये जाने को लेकर राज्य सरकार से जबाब तलब किया है। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जबाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने साथ ही अब तक की गई कार्रवाई का पूरा रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि यूनिसेफ के एक कार्यकर्ता ने हाई कोर्ट को एक पत्र भेज मुजफ्फरपुर में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ रेप के बाद उसकी हत्या किये जाने के दस दिनों के बाद प्राधमिकी दर्ज करने के बारे में जानकारी भेजी।इसके अलावा मधुबनी जिला में गूंगी बहरी 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ रेप किये जाने के बाद उसकी दोनों आंखे फोड़े जाने की घटना के बारे में भी हाई कोर्ट को जानकारी दी थी।
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इस जानकारी पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले कार्रवाई प्रारम्भ की।कोर्ट का कहना था कि रेप की घटना के बाद तुरंत प्राथमिकी दर्ज किया जाना चाहिए।लेकिन पुलिस दस दिनों के बाद प्राथमिकी दर्ज की।कोर्ट का कहना था कि आखिर किस परिस्थिति में प्राथमिकी देर से दर्ज की गई।
कोर्ट ने ये जानना चाहा कि देर से प्राथमिकी दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 4 मई,2023 की तिथि निर्धारित की है।
पटना हाईकोर्ट में पटना के एमपी/ एमएलए कोर्ट द्वारा कांग्रेस के पूर्व एमपी और पूर्व सांसद राहुल गांधी को एक परिवाद पत्र मामले में उपस्थित होने के लिए भेजे गए नोटिस को चुनौती देने वाली अपराधिक याचिका पर हाईकोर्ट में 24 अप्रैल,2023 को सुनवाई होने की संभावना है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी द्वारा दायर यह आपराधिक याचिका जस्टिस संदीप कुमार के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
राहुल गांधी के अधिवक्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई 25 अप्रैल के पहले की जाए। कोर्ट को बताया गया की पटना के एमपी/ एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी को 25 अप्रैल,2023 को एक परिवाद पत्र में उपस्थित होने के लिए नोटिस भेजा है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने एक सभा के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी करते हुए यह कहा था कि जितने भी मोदी हैं ,वे चोर हैं। इसी टिप्पणी को आधार बनाते हुए देश के कई हिस्सों में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ परिवाद पत्र दाखिल किया गया था।
इसी मामलें में गुजरात की एक कोर्ट द्वारा इसी परिवाद पत्र पर राहुल गांधी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है। इसके बाद उनकी संसद की सदस्यता समाप्त कर दी गई है।
अगर हाई कोर्ट द्वारा निचली अदालत के इस आदेश पर रोक लगा दिया जाता है ,तो राहुल गांधी को 25 अप्रैल को पटना के एमपी /एमएलए कोर्ट में उपस्थित नहीं होना पड़ेगा।
पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी है। जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ द्वारा इस मामलें पर सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित हो कर तथ्यों की जानकारी दी थी।
इससे पहले अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया था कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने जानकारी दी थी कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी खराब है।
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पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट भी तलब किया था।
पटना हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।
राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर पटना हाइकोर्ट में 4 मई, 2023 को सुनवाई की जाएगी।अखिलेश कुमार की याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होंने कहा कि ये सर्वेक्षण कराने का अधिकार राज्य सरकार को नही है।
उन्होंने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि ये राज्य सरकार के क्षेत्रधिकार में नहीं आता है।
उन्होंने कहा कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।
उन्होंने बताया था कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल ने इसकी सुनवाई की योग्यता पर बुनियादी आपत्ति की थी।उन्होंने कहा कि ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।कोर्ट ने इस अमान्य करते हुए कहा था कि ये प्रावधानों के उल्लंघन और पाँच सौ करोड़ रुपए से सम्बंधित मामला है।
कोर्ट ने इस मामलें पर 4 मई,2023 को सुनवाई की नई तिथि निर्धारित की है।इस याचिकाकर्ता की ओर से दीनू कुमार व ऋतु राज और राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत कर रहे हैं।
लोहार,कमर (लोहार और कर्मकार), लोहरा और लोहारा जाति को जाति आधारित गणना में अलग से जाति कोड जारी करने के लिए लोहार कल्याण समिति ने पटना हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस रिट याचिका में इन सभी जातियों को अलग अलग जाति कोड जारी करने की मांग कोर्ट से की गई है।
आवेदक की ओर से अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह का कहना है कि बिहार सरकार ने जाति सर्वेक्षण के दूसरे चरण के लिए गत पहली मार्च को अधिसूचना है। जिसके तहत जाति सर्वेक्षण का दूसरा चरण का काम 15 अप्रैल से शुरू कर 15 मई तक पूरा करना है।
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उनका कहना है कि 1941 की जनगणना में लोहार जाति को अलग जाति के रूप में मान्यता दी गई थी। लेकिन इस जातिये जनगणना में इस जाति को अपना कोई जाति कोड नहीं दिया गया।जबकि राज्य में लोहार जाति सबसे कमजोर जातियों में से एक है।
इसी कारण राज्य सरकार ने 25 जनवरी 2017 को लोहार जाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में शामिल करने की सिफारिश केंद्र से की थी।
बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में सही तौर से काम- काज किये जाने को लेकर तदर्थ कमेटी बनाने हेतु एक जनहित याचिका पर पटना हाई कोर्ट में एक सप्ताह सुनवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता अजय नारायण शर्मा की जनहित याचिका दायर पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
इस जनहित याचिका में चयनकर्ताओं/ सपोर्ट स्टाफ व बी सी सी आई द्वारा संचालित घरेलू टूर्नामेंट में विभिन्न उम्र के राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडियों को सही तौर से चयन करने को लेकर आदेश देने की माँग की गई है। इसमें में यह आरोप लगाया गया है कि प्रबंधन कमेटी में अवैध रूप से कुर्सी पर काबिज लोगों द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि कुर्सी पर कथित रूप से अवैध तौर पर बैठे लोग प्रतिभावान क्रिकेट खिलाड़ियों के दावों को हतोत्साहित कर रहे हैं। खिलाड़ियों के मनमाने औऱ अनुचित तौर से चयन कर क्रिकेट को बेचने पर उतारू हैं।
इसलिए राज्य में खिलाड़ियों की स्थिति और भी खराब होते जा रही है। साथ ही इस से खिलाड़ी घरेलू टूर्नामेंट में भी कामयाब नहीं हो रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा बोर्ड ऑफ कंट्रोल फोर क्रिकेट इन इंडिया एंड अदर्स बनाम क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार व अन्य के मामले में सिविल अपील संख्या – 4235 में 9 अगस्त, 2018 को दिये गए फैसले दिया गया था।
इसके अनुसार जस्टिस आर एम लोढ़ा कमेटी द्वारा की गई अनुशंसा के आलोक में खिलाड़ियों का सही तौर से चयन करने हेतु क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के गठन करने को लेकर आदेश देने का अनुरोध किया गया है।
इस मामलें पर अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट में बिहार के सहरसा में स्थापित किये जाने वाले एम्स अस्पताल स्थापित किये जाने के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई 20 अप्रैल, 2023 को की जाएगी। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने कोशी विकास संघर्ष मोर्चा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 17अप्रैल,2023 तक मोहलत दी थी।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया था कि विभिन्न राज्यों में एम्स के स्तर के अस्पताल स्थापित करने की योजना तैयार की गई।
बिहार के सहरसा में एम्स के तर्ज पर अस्पताल बनाए जाने का प्रस्ताव था।कोर्ट को बताया गया था कि इस अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि सहरसा में उपलब्ध है।2017 में सहरसा के जिलाधिकारी ने इस अस्पताल के लिए आवश्यक 217.74 एकड़ भूमि की उपलब्धता की जानकारी विभाग को दी थी।
कोर्ट को ये बताया था कि इस क्षेत्र में एम्स स्तर का अस्पताल नहीं है।गंभीर बीमारियों के ईलाज के लिए इस क्षेत्र के लोगों को या तो पटना जाना पड़ता है या सिलिगुडी जाना पड़ता है।इसमें न सिर्फ लोगों को आने जाने में कठिनाई होती है,बल्कि आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
कोर्ट को एम्स अस्पताल के निर्माण के मानकों पर सहरसा ज्यादा खरा था,लेकिन राज्य सरकार ने 2020 में दरभंगा में एम्स अस्पताल स्थापित किये जाने की अनुशंसा कर दी थी।यह इस क्षेत्र लोगों के साथ अन्याय किया गया।
कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि सहरसा,पूर्णियां,कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले इस क्षेत्र में आते है।इस क्षेत्र की जनसंख्या के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एम्स अस्पताल स्थापित की जानी चाहिए।
कोर्ट को बताया गया कि इस क्षेत्र के बहुत सारे लोग कैंसर समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।आमलोग को बेहतर ईलाज के लिए इस क्षेत्र में एम्स स्तर के अस्पताल की सख्त आवश्यकता है।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 20अप्रैल,2023 के बाद की जाएगी।
पटना हाइकोर्ट में राज्य में एयरपोर्ट के स्थापित करने,विकास,विस्तार और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तीन एयरपोर्ट और पूर्णियां एयरपोर्ट के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से ये बताने को कहा था कि राज्य में नए एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें क्या कार्रवाई की गई है।दोनों सरकारों को बताने को कहा गया था कि वे बताए कि इनके सम्बन्ध में क्या योजनाएं बना रहे है।
कोर्ट ने उन्हें ये भी बताने को कहा था कि क्या वे नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उन्हें चिन्हित करने की कार्रवाई की है।कोर्ट ने ये जानना चाहा कि इन नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उनकी क्या योजना है।
पूर्व की सुनवाई में कार्यरत एयरपोर्ट पटना,गया,बिहटा और दरभंगा के एयरपोर्ट के विकास,विस्तार और सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं के बारे में बताने को कहा था।
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कोर्ट को बताया गया कि राज्य के अधिकतर हवाई अड्डों पर सुविधाओं की काफी कमी है।इन्हें बेहतर बनाने के क्या कार्रवाई की जा रही है।
इससे पूर्व कोर्ट ने राज्य में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा था कि कई अन्य राज्यों में कई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, लेकिन बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य की जनता को विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा की सुविधा दिया जाना मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।केंद्र और राज्य सरकार इन्हें विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद से जहरीली शराब पीने की घटनाओं में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। यह हादसा नहीं, दलितों-गरीबों की हत्या का मामला है और इसकी जिम्मेदारी लेकर नीतीश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए।
चम्पारण में मरने वालों के आश्रितों को भी मिले 4-4 लाख का मुआवजा
जहरीली शराब से मौत हादसा नहीं, दलित नरसंहार
जिन्हें जहरीली शराब से मौत पर हमदर्दी नहीं, वे माफिया की हत्या पर आँसू बहा रहे
श्री मोदी ने कहा कि जहरीली शराब से मरने वालों और उनके आश्रितों के प्रति नीतीश कुमार की कोई सहानुभूति नहीं है।
उन्होंने कहा कि पूर्वी चम्पारण में जहरीली शराब से जिनकी मृत्यु हुई, उनके आश्रितों को भी उत्पाद कानून के अनुसार 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मिलनी चाहिए। खजूरबन्ना (गोपालगंज) में जहरीली शराब से मरने वाले 30 लोगों को मुआवजा दिया गया गया था।
श्री मोदी ने कहा कि जदयू-राजद सहित जिन सात दलों के राज में दो दिन के भीतर जहरीली शराब से दलित-आदिवासी समुदाय के 30 से ज्यादा लोगों की जान गई, वे यूपी के एक माफिया के गैंगवार में मारे जाने पर आँसू बहा रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि माफिया अतीक और उसके गुर्गों के मारे जाने से उत्तर प्रदेश की जनता खुश है, लेकिन जिन्होंने बिहार में शहाबुद्दीन को माफिया बनाया, वे पड़ोसी राज्य के एक दुर्दांत माफिया का मजहब देख कर उसकी मौत पर छाती पीट रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी राज में मंत्री वृजबिहारी प्रसाद को पुलिस सुरक्षा में रहते हुए अस्पताल परिसर में गोलियों से भून दिया गया था। अजित सरकार, अशोक सिंह सहित आधा दर्जन विधायकों की हत्या भी उसी दौर में हुई, लेकिन राजद से मिल कर सत्ता पाने वाले लोग यह सब भूल गए।
श्री मोदी ने कहा कि राजद शासन में दलित-पिछड़े हत्या-नरसंहार का शिकार होते थे, आज चाचा-भतीजा राज में जहरीली शराब के जरिये दलित-आदिवासी नरसंहार हो रहा है।
पटना । बिहार मौसम सेवा केंद्र, पटना के अनुसार अगले तीन-चार दिनों में बिहार में भीषण गर्मी की स्थिति रहने की संभावना है। बिहार में लगातार बढ़ती गर्मी से लोग परेशान हो रहे है । राजधानी पटना समेत कई जिलों में पारा 40 के पार चला गया है । ऐसे में भीषण गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है ।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में और अधिक वृद्धि होगी और पारा 44 डिग्री तक पहुंच सकता है। पछुआ हवा के कारण लू चलने की स्थिति बनी रहेगी।
सबसे अधिक औरंगाबाद में दिन का अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बिहार के अधिकांश जिलों में 15 अप्रैल को दिन का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया।
शनिवार को 42 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक तापमान दर्ज करने वाले जिलों में डेहरी (42.8 डिग्री सेल्सियस), पटना (42.4 डिग्री सेल्सियस), जमुई (42.3 डिग्री सेल्सियस), खगड़िया (42.2 डिग्री सेल्सियस) और शेखपुरा (42.1 डिग्री सेल्सियस) शामिल हैं।
पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्वानुमान व्यक्त किया है कि अप्रैल महीने में तपती गर्मी का असर मध्य और दक्षिण बिहार के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक होगी। वहीं, आईएमडी के अनुसार, बिहार में सोमवार यानी 17 अप्रैल तक लू की स्थिति रहेगी। पटना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 20 अप्रैल तक राज्य में हीटवेव की स्थिति रह सकती है।
पटना मौसम केंद्र के अनुसार बिहार के 13 जिलों में 16 से 18 अप्रैल तक हिट वेव को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। रविवार को राज्य के पूर्व और दक्षिण-मध्य हिस्सों में लू का अलर्ट जारी किया है. वहीं, सोमवार को राज्य के दक्षिणी हिस्सों में लू की स्थिति को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। बिहार के पटना, जहानाबाद, गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, खगड़िया में 20 अप्रैल तक हीट वेव चलने की आशंका है।
भीषण गर्मी के बीच लोगों को तपती धूप से बचने की सलाह दी गई हैं। इसके अलावा, जिला अधिकारियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने-अपने जिलों में स्थिति की निगरानी करें।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि छपरा के बाद अब पूर्वी चम्पारण में जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की जान गई, दो दर्जन से ज्यादा पीड़ितों का इलाज चल रहा है और कई आँखों की रोशनी खो चुके हैं, लेकिन सरकार आँकड़े छिपाने में लगी है।
मृतकों में दलित और पिछड़े समाज के लोग, कई ने खोयी नेत्र ज्योति
पुलिस के डर से बिना पोस्टमार्टम के जलाये जा रहे शव
मृतक-आश्रितों को मिले 4-4 लाख का मुआवजा, नीति तय करे सरकार
श्री मोदी ने कहा कि सरकार मौत का कारण डायरिया या अज्ञात बीमारी बता रही है। पुलिस के डर से बिना पोस्टमार्टम के भुटन मांझी सहित कई मृतकों के शव जला दिये गए। मृतकों में अधिकतर दलित और पिछड़ी जातियों के थे।
उन्होंने कहा कि जहरीली शराब से मरने वालों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने की स्पष्ट नीति बनाने के लिए मुख्यमंत्री को सर्वदलीय बैठक जल्द बुलानी चाहिए। छपरा में ऐसी घटना के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की गई थी।
श्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छपरा की घटना के बाद राज्य सरकार पर आँकड़े छिपाने का आरोप लगाया था। अब पूर्वी चपारण में भी यही हो रहा है।
उन्होंने कहा कि आयोग नेजहरीली शराब पीने से मरने वालों के आश्रितों को अनुग्रह राशि देने की अनुशंसा की थी, लेकिन अब तक उसका पालन नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि पटना हाई कोर्ट ने जहरीली शराब पीने से बीमार होने वालों की चिकित्सा के लिए मानक प्रक्रिया (SOP) तय करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार यह भी नहीं बना सकी।
श्री मोदी ने कहा कि यदि सरकार ने हाई कोर्ट के निर्देश और आयोग की अनुशंसाओं को गंभीरता से लिया होता,तो पीड़ितों और उनके परिवारों को कठिन समय में बड़ी राहत मिलती।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि संसद और विधान मंडलों में आरक्षण बाबा साहब अम्बेडकर और गांधी जी की देन है। इसे कोई छीन नहीं सकता, बल्कि जरूरत पड़ी तो यह 100 साल तक लागू रहेगा।
भाजपा के सहयोग से बाबा साहब को मिला भारत-रत्न, मोदी सरकार ने बनाये पंचतीर्थ
पीएम ने दलित ऐक्ट को शिथिल होने से बचाया
नीतीश उस कांग्रेस के साथ, जिसने अम्बेडकर का अपमान किया
लालू-राबड़ी राज में हुए दर्जन भर नरसंहार
श्री मोदी ने अम्बेडकर जयंती समारोह में कहा कि जब तक समाज में असमानता रहेगी, तब तक आरक्षण रहेगा। इसकी कोई समय सीमा तय नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने दलित उत्पीड़न निवारण कानून को शिथिल करना चाहा, तब केंद्र की भाजपा सरकार ने उस कानून में 23 नई धाराएँ जोड़ कर इसे और मजबूत बना दिया।
श्री मोदी ने कहा कि बाबा साहेब को जिस कांग्रेस ने लगातार अपमानित किया, उसी की गोद में बैठ कर नीतीश कुमार और लालू प्रसाद देश पर राज करने के सपने देख रहे हैं।
उन्होंने कहा भाजपा के समर्थन से बनी वीपी सिंह की सरकार ने बाबा साहब की मृ्त्यु के 37 साल बाद उन्हें भारत रत्न प्रदान किया, जबकि नेहरू-गांधी परिवार के लोग मृत्यु के कुछ ही महीने बाद भारत रत्न से सम्मानित होते रहे।
श्री मोदी ने कहा जब नरेंद्र भाई मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, तब अम्बेडकर के जन्म, शिक्षा, संसदीय जीवन और देहावसान से जुड़े पांच महत्वपूर्ण स्थलों पर भव्य स्मारक बना कर उन्हें पंचतीर्थ घोषित किया गया।
उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी राज में बिहार के लक्ष्मणपुर बाधे, मियांपुर, नारायणपुर सहित दर्जन भर स्थानों पर दलितों का सामूहिक संहार हुआ। इनमें 200 से ज्यादा स्री-पुरुष बच्चे लाइन में खड़े कर मारे गये या उनके घरों में ही जिंदा जला दिया गया था।
श्री मोदी ने कहा कि 2001 में राबड़ी सरकार ने पंचायत और निकायों में एकल पदों पर दलितों को आरक्षण दिये बिना चुनाव करा लिये थे।
उन्होंने कहा कि जब भाजपा के सहयोग से एनडीए सरकार बनी, तभी पंचायत और निकायों में दलितों-पिछड़ों और महिलाओं को आरक्षण देकर बिहार में बाबा साहब के सपने को सार्थक किया जा सका।
श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार आज उस कांग्रेस के दरवाजे पर हैं, जिसने 1952 के पहले संसदीय चुनाव और 1954 के उपचुनाव में अम्बेडकर को हराने का षड्यंत्र रचा था। कांग्रेस बाबा साहब को संसद में नहीं घुसने देना चाहती थी।
वैशाली/हाजीपुर । भीम आर्मी के जिला संयोजक राकेश पासवान की बदमाशों ने गुरुवार की शाम गोली मारकर हत्या कर दी । इनके मौत के बाद वैशाली में भारी बबाल जारी है। इनके समर्थकों द्वारा जिले में कई जगहों पर भारी बबाल काटा गया है। वहीं, राकेश पासवान की शव यात्रा के दौरान समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया।
राकेश पासवान को यहां दलित का बड़ा नेता माना जाता था। बदमाशों ने सीने में 4 गोली मारी है। दलित नेता राकेश पासवान की शव यात्रा के दौरान समर्थकों ने लालगंज बाजार में तोड़फोड़ की। लालगंज के तीनपुलवा चौक पर दुकान में तोड़फोड़ और जमकर उत्पात करते हुए आक्रोशित लोग गांधी चौक की तरफ बढ़ गए। आक्रोशितों ने हाथ में भीम आर्मी का झंडा थाम रखा है। शव यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल रहे।
समर्थकों ने लालगंज थाना में घुसने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने दर्जनों राउंड हवाई फायरिंग की। आक्रोशित लोगों ने तीनपुलवा के निकट एक गुमटी को भी आग के हवाले कर दिया।
वहीं, नगर परिषद के कार्यालय में तोड़फोड़ की। लालगंज में पूरा माहौल तनावपूर्ण है। लोग अपने-अपने घरों में बंद है। आक्रोशित लोग जमकर तोड़फोड़ और उत्पात मचा रहे हैं।
गुरुवार को दलित नेता राकेश पासवान की बदमाशों ने गोलियों से छलनी कर दिया था। दरअसल, यह घटना हाजीपुर के लालगंज थाना क्षेत्र के पंचदमिया गांव की है। बदमाशों ने घर में घुस कर राकेश पासवान की गोली मारकर हत्या की है। बाइक से चार की संख्या में आए बदमाशों ने घटना को अंजाम दिया और फरार हो गए। बदमाशों ने दलित नेता पर 20 राउंड से अधिक फायरिंग की, यह बात कही जा रही है।
हालांकि, इस पर अभी पुलिस कुछ कहने से बच रही है। वारदात वाली जगह से दर्जन भर खोखा बरामद किया गया है। वहीं, मौत के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों ने जमकर बवाल काटा।
गोली लगने के बाद खून से लथपथ हालत में समर्थक जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन देखते ही डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। भीम आर्मी नेता की हत्या की खबर जैसे ही समर्थकों को लगी, जिला अस्पताल में भीड़ लग गई । उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की। घटना के बाद मौके पर पुलिस पहुंची। अस्पताल में भी पुलिस बल को तैनात करना पड़ा।
बिहार में मौसम का मिजाज और तल्ख हो गया है। बिहार के कई जिलों में हर दिन तापमान में वृद्धि हो रही है। गुरुवार (13 अप्रैल) को पूरे बिहार के तापमान में वृद्धि देखी गई, लेकिन सबसे अधिक तापमान राजधानी पटना में रहा. यहां का तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया ।
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार अगले चार दिनों में गर्मी में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है। 14 अप्रैल से बिहार के सभी जिलों में तापमान में बढ़ोतरी के आसार हैं। साथ ही गर्माहट वाली हवा 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है।
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार अगले चार दिनों में गर्मी में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है। शनिवार को जमुई और बांका जिले के एक-दो स्थानों पर लू चलने की संभावना जताई गई है।
hot weather
मौसम विज्ञान केंद्र ने गर्मी में और वृद्धि होने की चेतावनी दी है। रविवार को राजधानी पटना समेत दक्षिण बिहार और मध्य बिहार के कई जिलों में उष्ण गर्मी और लू चलने की संभावना की चेतावनी दी गई है। इससे बचने की सलाह भी दी है।
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार बिहार में उत्तर पछुआ हवा का प्रवाह सतह से 4.5 किलोमीटर ऊपर बना हुआ है। साथ ही एक चक्रवातीय परिसंचरण का क्षेत्र उत्तरी बांग्लादेश एवं आसपास के क्षेत्रों में समुद्र तल से 0.9 किलोमीटर ऊपर तक बना हुआ है, जिसके प्रभाव से अगले 5 दिनों तक मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहेगा और तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ को बताया गया कि पुलिस विभाग स्टेशन भवनों के निर्माण व सुधार के लिए उपलब्ध फंड के सम्बन्ध में पंद्रह दिनों में डीजीपी, बिहार के समक्ष विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत कर देगा।
पिछली सुनवाई में Patna High Court ने राज्य सरकार को मॉडल पुलिस थाने के निर्माण पर विचार करने के लिए राज्य के विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमिटी गठित करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से बिहार व अन्य राज्यों के मॉडल पुलिस थाने के सम्बन्ध में जानकारी दी गई।
कोर्ट ने जानना चाहा कि पुलिस स्टेशनों के निर्माण व सुधार के लिए उपलब्ध फंड के सम्बन्ध में कितने दिनों में जानकारी दी जा सकती है। पुलिस विभाग ने Patna High Court को बताया कि पंद्रह दिनों में इस सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा डीजीपी, बिहार के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाएगा।
Patna High Court द्वारा सहायता करने के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी सोनी श्रीवास्तव ने बताया कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फंड की उपलब्धता के सम्बन्ध में ब्यौरा देने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक ये ब्यौरा कोर्ट में प्रस्तुत नहीं हुआ।
Patna High Court ने बिहार राज्य पुलिस भवन निर्माण निगम में काफी पद के रिक्त होने को काफी गम्भीरता से लिया।उन्होंने राज्य सरकार को इन रिक्त पदों को शीघ्र भरने को कहा,ताकि पुलिस थाना भवनों का निर्माण कार्य तेजी से हो सके।
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पिछली सुनवाई में पुलिस थाना भवनों के निर्माण के लिए उपलब्ध फंड के उपयोग और वितरण पर भी कोर्ट में चर्चा हुई।कोर्ट ने अगली सुनवाई में इस बारे में जानकारी देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था।
पूर्व की सुनवाई में Patna High Court ने राज्य सरकार को कॉर्डिनेटर के रूप में कार्य करने के वरीय पुलिस अधिकारी का नाम का सुझाव देने को कहा था। राज्य सरकार ने एडीजी कमल किशोर सिंह का नाम कॉर्डिनेटर के रूप में दिया था।
एमिकस क्यूरी सोनी श्रीवास्तव ने Patna High Court को बताया था कि राज्य में 1263 थाना है,जिनमें 471 पुलिस स्टेशन के अपने भवन नहीं है।इन्हें किराये के भवन में काम करना पड़ता है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य में पुलिस स्टेशन भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण का कार्य समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
जब तक दूसरे भवन में चल रहे पुलिस स्टेशन के लिए सरकारी भवन नहीं बन जाते,तब तक पुलिस अधिकारी कमल किशोर सिंह कॉर्डिनेटर के रूप में कॉर्डिनेट करेंगे।
इससे पहले भी पुलिस स्टेशन की दयनीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का मामला Patna High Court में उठाया गया था।राज्य सरकार ने इन्हें सुधार लाने का वादा किया था,लेकिन ठोस परिणाम नहीं दिया था।
Patna High Court में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अधिवक्ता सोनी श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि जो थाने सरकारी भवन में चल रहे हैं, उनकी भी हालत अच्छी नहीं है।उनमें भी बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है।
उन्होंने बताया कि पुलिस स्टेशन में बिजली,पेय जल,शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं है। लगभग आठ सौ थाने ऐसे है, सरकारी भवनों में चल रहे है,लेकिन उनकी भी स्थिति अच्छी नहीं है।
उन्होंने Patna High Court को बताया कि जो थाना सरकारी भवन में है,उनमें भी निर्माण और मरम्मती की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि कई पुलिस स्टेशन के भवन की स्थिति खराब है।
पुलिसकर्मियों को काफी कठिन परिस्थितियों में और कई सुविधाओं के अभाव में कार्य करना पड़ता है।इस मामलें पर अगली सुनवाई एक माह बाद होगी।
Bihar News: चारा घोटाले में फिर बढ़ी लालू की मुश्किलें, CBI ने की लालू यादव की सजा बढ़ाने की मांग । झारखंड हाईकोर्ट में दायर की याचिका।
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वैशाली: बदमाशों ने भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश पासवान की गोली मारकर हत्या कर दी ।
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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी दिल्ली में अमित शाह से मिलें।
नौकरी के बदले जमीन घोटाले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद की बेटी चंदा यादव ने बयान दर्ज किया है।
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बिहार में Corona के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, पटना बन रहा है कोरोना का हब।
बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप की याचिका पर SC 21 अप्रैल को सुनवाई करेगा; केंद्र, बिहार और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी। मनीष कश्यप ने रासुका हटाने और सभी मामलों की सुनवाई एक जगह करने की याचिका दे रखी है।
पटना हाइकोर्ट में सासाराम के ऐतिहासिक महत्व के धरोहर शेरशाह के मकबरे के आसपास बड़े तालाब में स्वच्छ और ताज़ा पानी आने के लिए बनाया गए नाले बंद होने के मामलें पर सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने अधिवक्ता कन्हैया लाल भास्कर की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के अधिवक्ता को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों से विचार विमर्श करने का निर्देश दिया था।
इससे पूर्व कोर्ट ने रोहतास के डी एम, डीसीएलआर,सासाराम नगर निकाय के अधिकारियो समेत केंद्र सरकार के अधिकारी और एएसआई की बैठक कर विस्तृत कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने प्राची पल्लवी को इस जनहित की सुनवाई में कोर्ट की मदद करने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था।कोर्ट ने कहा कि ये ऐतिहासिक धरोहर है,जिसकी सुरक्षा और देखभाल करना आवश्यक हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कन्हैया लाल भास्कर ने कोर्ट को बताया था कि सासाराम स्थित शेरशाह का मकबरा राष्ट्रीय धरोहर हैं।इसके तालाब में साफ और ताज़ा के लिए वहां तक नाले का निर्माण किया गया था।
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उन्होंने कोर्ट को बताया था कि 2018 से 2020 तक सिर्फ पचास फी सदी नाले का काम हुआ।इसे बाद में खराब माना गया।इसमें लगभग आठ करोड़ रुपए खर्च हुए थे।
उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी थी कि इसमें काफी अनियमितताएं बरती गई, जिसकी जांच स्वतन्त्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।उन्होंने बताया था कि ये नाला कूड़ा से भरा पड़ा है,जिस कारण शेरशाह के मकबरे के तालाब में साफ पानी नहीं पहुँच पाता है।
उन्होंने कोर्ट को बताया था कि वह तालाब गंदा और कचडे से भरा हुआ है।वहां जो पर्यटक आते है,उन्हें ऐसी हालत देख कर निराशा होती है।
पिछले एक मार्च,2023 से लापता एनएमसीएच के डॉक्टर संजय कुमार की बरामदगी को लेकर पटना हाई कोर्ट में एक आपराधिक रिट याचिका दायर की गई हैं। गायब डॉक्टर की पत्नी की ओर से अधिवक्ता हर्ष सिंह ने दायर की है।
दायर याचिका में डॉक्टर की सकुशल बरामदगी की गुहार कोर्ट से लगाई गई हैं।याचिका में ये कहा गया है कि 1 मार्च,2023 से लापता डॉक्टर का मोबाईल फोन 2 मार्च,2023 को इस्तेमाल किया गया है।लेकिन पुलिस इसको नजरअंदाज कर रही हैं।
उनका कहना है कि पुलिस सही तरीके से खोजने का काम नहीं कर रही हैं। लापता होने के बाद सुराग पाने के लिए खोजी कुत्ता को नहीं लगाया गया।यहाँ तक कि गांधी सेतु सीसीटीवी फुटेज की फोरेंसिक जांच अब तक नहीं कराई गई हैं।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया हैं कि राज्य के सभी स्कूलों में छात्राओं की संख्या के समुचित अनुपात में शौचालय एवं सैनिटरी नैपकिन को नष्ट करने वाली मशीनों की व्यवस्था हेतु एक जरूरी दिशानिर्देश तैयार करें।
चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने इस मामलें पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को यह भी निर्देश दिया इस सम्बन्ध में एक कमिटी गठित करने का निर्देश दिया।
पटना जिले में राजकीय एवं राजकीयकृत बालिका विद्यालयों ( प्राथमिक मध्य एवं उच्च विद्यालय) में शौचालयों की दयनीय अवस्था पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले कर सुनवाई कर रही है।
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पूर्व की सुनवाई में पटना हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का दायरा पटना जिला से बढ़ाकर पूरे राज्य के लिए कर दिया था।साथ ही कोर्ट ने सरकार से सभी स्कूलों के अंदर छात्राओं के लिए समुचित और स्वच्छ शौचालय सहित सैनिटरी नैपकिन को नष्ट करने वाली मशीनों के बारे में जानकारी मांगी थी ।
राज्य सरकार की तरफ से दायर हुए जवाबी हलफनामा पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि पटना हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में एक निश्चित दिशा निर्देश बनाए।और
पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी, जो बैंक के पैसे के संरक्षक हैं, उनसे निवेशकों / जमाकर्ताओं के पैसे से इस तरह की अनियमितता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। ये अनियमितताएं कर्तव्य में चूक नहीं , बल्कि जानबूझकर किए गए कार्य हैं, जिनसे बैंक को गंभीर नुकसान हुआ है और अपीलकर्ता को व्यक्तिगत लाभ हुआ है।
जस्टिस आशुतोष कुमार एवं जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने अशोक कुमार सिन्हा की अपील याचिका को खारिज करते हुए उक्त टिप्पणी की । अपीलकर्ता भारतीय स्टेट बैंक की एक शाखा में प्रोबेशनरी अधिकारी के रूप में नियुक्ति की गई थी।
सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 409, 467, 468 और 471 और पीसी अधिनियम, 1988 की धारा 13 (2) ,13 (1) (सी) (डी) के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने निवास पर कई ऋण दस्तावेज रखे थे और कर्ज लेने वालों की व्यक्तिगत ऋणों को मंजूरी देने हेतु उनके वेतन पर्ची में हेरफेर किया था।
उनके खिलाफ अन्य आरोप यह थे कि उन्होंने कई व्यक्तिगत ऋण खाते कम सीमा के साथ खोले गए थे। केवल कुछ महीनों के बाद, उच्च सीमा के लिए ऋण मंजूर किए गए थे ।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर, अपीलकर्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया और उसकी पूरी ग्रेच्युटी राशि बैंक को हुई वास्तविक हानि को ध्यान में रखते हुए साढ़े तीन लाख रुपये जब्त कर लिए गए।
अपीलकर्ता के वकील अरविंद कुमार तिवारी ने एकलपीठ के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि बैंक के नियमों के नियम 68(6) के अनुसार, एक संयुक्त जांच की जानी चाहिए थी,क्योंकि दो अन्य अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही में समान आरोप लगे थे।लेकिन अलग-अलग पूछताछ की गई और उन्हें बिना किसी औचित्य के कम सजा दी गई।
एसबीआई की ओर से वरीय अधिवक्ता चितरंजन सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि अपीलकर्ता एक उच्च पद पर था और उसके कब्जे से बरामद ऋण दस्तावेजों के साथ वह वित्तीय कदाचार में फंसा हुआ था।उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता को अनुशासनात्मक कार्यवाही में अपना बचाव करने का उचित अवसर दिया गया था।
मामले का अवलोकन कर खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को यह कहते हुए सही करार दिया कि ये अनियमितताएं केवल कर्तव्य में चूक नहीं हैं, बल्कि जानबूझकर किए गए कार्य हैं ,जिसके परिणामस्वरूप बैंक को भारी नुकसान हुआ है।सार्वजनिक धन का लूट किया गया है।
पटना । बिहार में कोरोना के मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना संक्रमितों की संख्या सबसे अधिक फिलहाल पटना में ही है। ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट XBB1.16 वायरस के मामले भी मिले हैं।
पिछले 24 घंटे में बिहार में 52 नए Corona केस मिले। वहीं पटना में 29 नए केस मिले। मरीजों के गले में खरास, खांसी सर्दी, बुखार लक्षण मिल रहे हैं। बिहार स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से कोविड गाइडलाइन का पालन करने की अपील कर रही है।
बिहार में अब Corona के 214 केस एक्टिव हैं। इधर, राजधानी पटना में पिछले 24 घंटे में 29 नए केस सामने आए हैं। पटना में फिलहाल 114, गया में 21, भागलपुर में 13 और मुंगेर में 10 केस एक्टिव हैं। ऐसे कई केस सामने आए हैं जिनमें टीका के दोनों डोज लेने वाले भी कोविड पॉजिटिव हो गए। डॉक्टर की मानें तो वैक्सीन लेने के बाद कोरोना का खतरा कम हो जाता है लेकिन इससे ऐसा नहीं है कि संक्रमण आपको नहीं हो सकता है। इसलिए अलर्ट रहें।
बिहार सरकार ने बढ़ते Corona को लेकर अलर्ट जारी किया है। बिहार सरकार लोगों से मास्क लगाने की अपील कर रही है। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए भी कहा है। बिहार स्वास्थ्य विभागलगातार कोविड गाइडलाइन का पालन करने की अपील कर रहा है।
Corona में थोड़ी सी भी लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। ट्रेवल हिस्ट्री नहीं रहने के बावजूद लोग कोरोना पॉजिटिव हुए। ताजा रिसर्च के अनुसार गर्भ में पल रहे बच्चों के लिए भी Corona खतरनाक है, कोरोना से बच्चे के दिमाग को नुकसान पहुंच सकता है।
मोतिहारी। बिहार में अपराधियों के हौसले बढ़ते ही जा रहे हैं। नया मामला पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से सामने आई है। जहां अपराधियों ने एक बैंक को अपना निशाना बनाया है। दिनदहाड़े अपराधियों ने ICICI बैंक में लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। बैंक से करीब 40 लाख रुपये की लूट हुई है। ICICI बैंक से लाखों की लूट कर अपराधी फरार हो गए है।
ये घटना मोतिहारी के चकिया बाजार इलाके का बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि बैंक से 40 लाख रूपये लेकर बाइक सवार 5 अपराधी फरार हो गए। अपरधियों ने हथियार दिखाकर बैंक के कर्मियों और ग्राहकों को डराया और सारे पैसे लेकर फरार हो गए। इस दौरान बैंक में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।
बैंक के मैनेजर ने बताया कि ब्रांच में करीब 40 लाख रुपये थे। लूट की ये वारदात चकिया इलाके की है। मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस बैंक में लगे CCTV को खंगाल रही है। साथ ही पुलिस बैंक के मैनेजर और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
दिनदहाड़े हुई बैंक लूट की इस बड़ी घटना से पूरे शहर में हड़कंप मच गया। मोतिहारी एसपी कान्तेश कुमार मिश्रा भी घटना वाली जगह पहुंचे और मामले की जांच करने में जुट गए है। साथ ही पुलिस द्वारा सीसीटीवी भी खंगाला जा रहा है ताकि अपराधियों कि पहचान कि जा सके।
पटना । बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी के द्वारा माननीय श्री आदि देव, विशेष न्यायाधीश, एम.पी.एम.एल.ए. न्यायालय, पटना के समक्ष दायर परिवाद पत्र में न्यायालय के दिनांक 18.03.2023 के आदेश से कांग्रेस पार्टी के नेता श्री राहुल गाँधी को आज दिनांक 12.04.2023 को न्यायालय के समक्ष संदेह उपस्थित होने का आदेश दिया गया था ताकि श्री राहुल गाँधी का धारा 313 द०प्र०सं० के अंतर्गत बयान दर्ज किया जा सके।
परन्तु श्री गाँधी के द्वारा माननीय न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए आज उपस्थित नहीं हुए जबकि वे दिनांक 11.04.2023 को केरल के वाईनाड में एक राजनीतिक रोड शो कर रहे थे और यहाँ न्यायालय में आज उनके अधिवक्ता के द्वारा समयावेदन दिया गया है।
इसका श्री सुशील कुमार मोदी के अधिवक्ता श्री एस.डी. संजय वरीय अधिवक्ता के द्वारा पूर जोर विरोध किया गया तथा श्री राहुल गाँधी द्वारा न्यायालय के आदेश की अवहेलना करके इस मुकदमे को लम्बा खींचने के कारण उनकी जमानत को रद्द करते हुए उनके विरुद्ध गैरजमानतीय अधिपत्र जारी किये जाने का अनुरोध किया गया है।
उनके अधिवक्ता ने न्यायालय को यह बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय देश के एम.पी.एम.एल.ए. के खिलाफ मुकदमों को जल्द से जल्द निपटाने का आदेश अश्विनी उपाध्याय वनाम् भारत सरकार की एक लोकहित याचिका में दिया है, अतः इस मामले को अभियुक्त की उपस्थिति के लिए अधिक लंबित रखना न्यायोचित नहीं होगा।
अतः उनकी जमानत को रद्द करके उन्हें न्यायालय में सदेह उपस्थित कराने को सुनिश्चित करने के लिए उनके विरूद्ध गिरफ्तारी का वारंट निर्गत करने का आदेश जारी किया जाए। इस आशय का आवेदन उनके अधिवक्ता के द्वारा न्यायालय में दिया गया।
विदित हो कि वर्ष 2019 में श्री राहुल गाँधी द्वारा कर्नाटक के कोलार की सभा में यह बयान दिया गया था कि देश में सारे मोदी चीर हैं जिसपर गुजरात के अलावा पटना में भी उनके उपर मानहानी का आपराधिक मुकदमा तत्कालीन मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, पटना के न्यायालय में दर्ज किया गया था। इस मुकदमे में अब परिवादी का बयान पूरा हो चूका है और अभियुक्त के बयान के लिए लंबित है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 3 दिवसीय दौरे पर दिल्ली में हैं । 3 दिवसीय दौरे में कई विपक्षी नेताओं से करेंगे मुलाकात – मल्लिकार्जुन खरगे , सोनिया गांधी, लालू यादव, अरविंद केजरीवाल, सीताराम येचुरी और डी राजा से मिलेंगे नीतीश।
मंगलवार को सीएम नीतीश कुमार ने दिल्ली में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की। इस दौरान सीएम के साथ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और संजय झा भी मौजूद रहे। रिपोर्ट के अनुसार दोनों शीर्ष नेताओं की यह मुलाकात राज्यसभा सांसद मीसा भारती के आवास पर हुई है। सीएम नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव से उनकी तबीयत का हालचाल जाना है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आज कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात हो सकती है। नीतीश कुमार अपने 3 दिवसीय दिल्ली दौरे पर विपक्ष के नेताओं से मेल-मिलाप बढ़ा रहे हैं। नीतीश कुमार अन्य पार्टियों के नेताओं के साथ भी मुलाकात करेंगे।
विपक्षी नेताओं से सीएम नीतीश कुमार की यह मुलाकात 2024 के आम चुनाव को लेकर बेहद अहम मानी जा रही है। नीतीश कुमार जिन नेताओं से मुलाकात करने वाले हैं उनमें आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, सीताराम येचुरी और डी राजा का नाम भी शामिल है।
बिहार में भूकम्प के झटके पूर्णिया भागलपुर समेत कई इलाकों में महसूस किए गए हैं। अररिया जिले में भी बुधवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं हैं।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप के झटके सुबह करीब 5 बजकर 35 मिनट पर महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.3 मापी गई है।
बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। बुधवार की सुबह सिलीगुड़ी से 140 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 मापी गई थी।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कहा कि राज्य सरकार ने बजट में धनराशि का प्रावधान किये बिना बीपीएससी के माध्यम से एक नये संवर्ग में स्कूली शिक्षक नियुक्ति की जो घोषणा की है, वह लाखों शिक्षित युवाओं के साथ धोखा है।
नये शिक्षक संवर्ग के लिए चाहिए 5000 करोड़, बजट में प्रावधान नहीं
CTET/STET पास अभ्यर्थियों को पहले नियुक्ति पत्र दे सरकार
श्री मोदी ने कहा कि सबसे पहले सरकार उन को नियुक्ति पत्र दे, जो CTET/STET/TET की परीक्षाएं पास कर चार साल से नौकरी पाने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई भी, लेकिन शेष को केवल आश्वाशन दिया जाता रहा।
उन्होंने कहा कि ऐसे 1लाख से ज्यादा प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों और 4 लाख नियोजित शिक्षकों को भी अब नये संवर्ग वाला सरकारी शिक्षक बनने के लिए बीपीएससी की परीक्षा देनी पड़ेगी। यह नई नियमावली पात्रता सिद्ध कर चुके युवाओं के मनोबल पर बड़ा बज्रपात है।
श्री मोदी ने कहा कि नियोजित शिक्षकों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाना चाहिए और नये संवर्ग के लिए बजट प्रावधान में कम से कम 5000 करोड़ की वृद्धि करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के बजट में शिक्षकों के वेतन और स्थापना व्यय में मात्र 1200 करोड़ की वृद्धि की गई है। इससे साफ है कि अगले एक साल तक नये संवर्ग में शिक्षक भर्ती नहीं होने जा रही है।
श्री मोदी ने कहा कि यदि सरकार नई नियमावली लागू करती है, तो एक विद्यालय में एक ही पाठ्यक्रम के लिए दो तरह के शिक्षक होंगे- एक बीपीएससी से पास सरकारी टीचर और दूसरे नियोजित शिक्षक।
उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा को विसंगतियों और विफलताओं का ऐसा पिटारा बना दिया गया है कि बिहार से प्रतिभा पलायन तेज होगा ।
पटना । बिहार में एक बार फिर बड़े पैमाने पर अधिकारियों का तबादला किया गया है। 3 IPS अधिकारी सहित 30 डीएसपी तथा 22 अनुमंडल पदाधिकारी बदले गए।
बिहार प्रशासनिक सेवा के 64 अफसरों का तबादला किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। सत्य प्रकाश शर्मा और विनय कुमार बीपीएससी के संयुक्त सचिव बनाए गए। तकनीकी सेवा आयोग के उप सचिव अमित कुमार SC/ST कल्याण विभाग के उप सचिव मनन राम।
तीन IPS अफसरों का भी हआ तबादला, रोहतास के SDPO बने शुभांक मिश्रा, आरा के SDPO बने चंद प्रकाश, मोतिहारी के एसडीपीओ बने राज।
हाल में अधिकारियों का बड़े पैमाने पर यह दूसरा तबादला है। सरकार ने बिहार पुलिस सेवा के 30 अधिकारियों का ट्रांसफर किया है।
चंद्रप्रकाश आरा का डीएसपी बनाए गए हैं।
शुभांक मिश्र को फारबिसगंज अररिया से डेहरी रोहतास का डीएसपी बनाया गया है।
पंकज कुमार को रजौली नवादा का अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बनाया गया है।
पहले वे पुलिस उपाधीक्षक, रेल, मुजफ्फरपुर थे।
सत्येंद्र कुमार सिंह को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी चकिया मोतिहारी बनाया गया है।
पहले वे बेगूसराय में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे।
इसी प्रकार नंद जी प्रसाद पुलिस उपाधीक्षक अपराध अनुसंधान विभाग, पटना में थे।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में अभियोजन के निदेशक और उप निदेशक की नियुक्ति में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि इन पदों पर वे ही नियुक्त हो सकते है, जिन्होंने दस या उससे अधिक वर्षों तक कानूनी प्रैक्टिस की हो। सुशील कुमार चौधरी की याचिका पर जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने 2003 के बिहार अभियोजन मेनुएल के रूल 5 में 2016 में लाए गए राज्य सरकार के संशोधन को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने संघीय कानून अनुरूप रूल बनाने का निर्देश राज्य सरकार को दिया।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने कानून में संशोधन किया, उसके अनुसार अभियोजन कैडर के अधिकारी अभियोजन के निदेशक और उप निदेशक के पदों पर नियुक्त होंगे।
उन्होंने बताया कि संसद द्वारा पारित कानून सीआरपीसी के 25 ए के तहत अभियोजन निदेशक और उप निदेशक के पदों पर उन्हें ही नियुक्त किया जा सकता है, जिन्होंने 10वर्षों या उससे अधिक वर्षों तक कानूनी प्रैक्टिस की हो।
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उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने जो 2016 में जो नियमों में संशोधन किया, उसके तहत अभियोजन कैडर के अधिकारी इन पदों पर नियुक्त किये जा सकते है।ये संसद द्वारा पारित कानून के विपरीत है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार और अधिवक्ता रितिका रानी व राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।
पटना हाइकोर्ट में राज्य के पश्चिम चम्पारण स्थित हारनाटांड में अनुसूचित जनजाति बालिकाओं के एकमात्र स्कूल की दयनीय हालत पर सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने बिहार आदिवासी अधिकार फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य में बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति के छात्रों द्वारा स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ दिए जाने के मामले को गम्भीरता से लिया था।।कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (बालसा) से रिपोर्ट तलब किया था।
कोर्ट ने बालसा को ये बताने को कहा था कि कितने बच्चों ने स्कूलों की पढ़ाई छोड़ दी है और कितने बच्चों ने दोबारा इन स्कूलों में जाना शुरू किया है ? बिहार आदिवासी अधिकार फोरम की लोकहित याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए चिंता जताते हुए ये जानना चाहा था कि इन बच्चों की पढ़ाई के लिए राज्य सरकार द्वारा क्या कार्रवाई की गई है।
इसके साथ साथ कोर्ट ने बालसा के एक सदस्य को लिए पश्चिम चम्पारण के हारनाटांड में स्थित स्कूल एवं कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के विकास से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। गौरतलब है कि हाईकोर्ट इस मामले में लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है ।
इस मामले में पहले भी हाईकोर्ट ने वकीलों की एक टीम गठित कर निरीक्षण करने का निर्देश दिया था । इस टीम में अधिवक्ता सूर्या नीलांबरी, अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय , अधिवक्ता आयुष अभिषेक एवं अन्य अधिवक्ता शामिल थे ।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि बिहार में अनुसूचित जनजाति के बालिकाओं के लिए पश्चिम चम्पारण के हारनाटांड एकमात्र स्कूल है।पहले यहाँ पर कक्षा एक से लेकर कक्षा दस तक की पढ़ाई होती थी।
लेकिन जबसे इस स्कूल का प्रबंधन राज्य सरकार के हाथ में आया तबसे इस स्कूल की स्थिति बदतर होती गई।कक्षा सात और आठ में छात्राओं का एडमिशन बन्द कर दिया गया।
साथ ही कक्षा नौ और दस में छात्राओं का एडमिशन पचास फीसदी ही रह गया।इस स्कूल में पर्याप्त संख्या में शिक्षक भी नहीं है।इस कारण छात्राओं की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।
Patna High Court ने राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों के स्थिति के सम्बन्ध दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
Patna High Court ने राज्य के अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। राज्य के सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों की स्थिति व किये गए सुधार का ब्यौरा देने का निर्देश दिया है।
पूर्व की सुनवाई में चान्सलर कार्यालय के हलफनामा में बताया गया था कि लॉ कालेजों में नेट/ पीएचडी डिग्रीधारी शिक्षक होने चाहिए।
पूर्व की सुनवाई में Patna High Court ने चान्सलर कार्यालय को हलफनामा दायर कर ये बताने को कहा था कि राज्य में लॉ की पढ़ाई के लिए क्या क्या सुधारात्मक कार्रवाई की गई।साथ ही ये भी बताने को कहा गया था कि इन लॉ कालेजों में छात्रों को पढ़ाने के लिए यूजीसी मानक के तहत नेट/पीएचडी डिग्री वाले शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है या नहीं।
चान्सलर ने राज्य के विश्वविद्यालयों के वाईस चान्सलर की बैठक 3अप्रैल,2023 को तय किया था।इस बैठक में असिस्टेंट प्रोफेसर, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्माचारियों की संख्या, बुनियादी सुविधाएँ, सम्बद्धता दिए जाने के सम्बन्ध विचार विमर्श किया जाना था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया था कि इन लॉ कालेजों में जो प्रिंसिपल और शिक्षक कार्य कर रहे है, वे यूजीसी के मानदंडों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते है।
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उन्होंने बताया कि ये शिक्षक यूजीसी द्वारा नेट की परीक्षा बिना पास किये पद पर बने हुए।इन लॉ कालेजों के प्रिंसिपल भी पीएचडी की डिग्री प्राप्त नहीं किया है।
पिछली सुनवाई में Patna High Court ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को यह बताने को कहा था कि राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में नेट की परीक्षा पास किए शिक्षकों को क्यों नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
राज्य में स्थित लॉ कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।
Patna High Court ने बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से ये जानना चाहा था कि राज्य के लॉ कॉलेज में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉ कालेजों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होना आवश्यक है।
कोर्ट को अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों की स्थिति बहुत दयनीय है।वहां बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है।
बीसीआई के निर्देश और जारी किए गए गाइड लाइन के बाद भी बहुत सुधार नहीं हुआ है।बीसीआई के निरीक्षण के बाद भी बहुत सारे कालेज निर्धारित मानकों को नहीं पूरा कर रहे है।
इससे पूर्व Patna High Court ने बीसीआई के अनुमति/ अनापत्ति प्रमाण मिलने के बाद ही सत्र 2021- 22 के लिए राज्य के 17 लॉ कालेजों को अपने यहां दाखिला लेने के लिए अनुमति दी थी।
सुनवाई के समय याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार एवं रितिका रानी, बीसीआई की ओर से अधिवक्ता विश्वजीत कुमार मिश्रा ने Patna High Court में अपने अपने पक्षों को प्रस्तुत किया।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 25अप्रैल,2023 को की जाएगी।
पटना । सोमवार को बिहार कैबिनेट की बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में उपमुख्मंत्री तेजस्वी यादव सहित अन्य नेता मौजूद थे। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण एजेंड़ों पर मोहर लगी ।
Bihar Cabinet Meeting : आज हुई बैठक में 7वें चरण की शिक्षक नियुक्ति के लिए नयी नियमावली को मंजूरी प्रदान कर दी गयी। नयी नियमावली में कई बदलाव किये गये हैं, अब सभी विषयों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत का आरक्षण का प्रावधान किया गया है। सभी शिक्षकों को महंगाई भत्ता भी मिलेगा। इसके साथ ही, अब शिक्षकोंकी नियुक्ति आयोग के माध्यम से होगी ।
Bihar में इस नियमावली के पास होने के बाद अब करीब 3 लाख पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति होगी। इसके लिए अब जल्द ही विज्ञापन जारी होगा।
नयी नियमावली में तीन परीक्षाओं का प्रावधान किया गया है। तीनों परीक्षा पास करने के बाद शिक्षक पूर्ण रूप से राज्यकर्मी के कैडर में आ जायेंगे।नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। पेंशन भोगियों को 1 जनवरी, 2023 के प्रभाव से 38% के स्थान पर 42% महंगाई भत्ता मिलेगा। इस प्रावधान से नियोजित शिक्षकों के सरकारी शिक्षक बनाने की पुरानी मांग भी पूरी हो गयी है।
JDU ने नीतीश सरकार के इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि शिक्षकों के लिए इसे बड़ी खुशखबरी नहीं हो सकती। Office of Tejashwi Yadav के ट्विटर हैंडल से…
शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी है।
आज कैबिनेट मीटिंग में बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक (नियुक्ति,स्थानांतरण, अनुशासनिक कार्रवाई) सेवा शर्त नियमावली 2023 को स्वीकृति दी गई है।
नए फैसले के अनुसार अब शिक्षक राज्य कर्मी होंगे। अब आयोग के माध्यम से लाखों शिक्षकों की बहाली होगी।
— Office of Tejashwi Yadav (@TejashwiOffice) April 10, 2023
पटना । बिहार में कोरोना के मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं । गया में एक मौत के बाद अब बिहार के कई जिलों में कोरोना संक्रमण ने पांव पसार लिए हैं। कोरोना संक्रमितों की संख्या सबसे अधिक फिलहाल पटना में ही है। ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट XBB1.16 वायरस के मामले भी मिले हैं।
बिहार में Corona के एक्टिव मरीजों की संख्या 109 हो गयी है। बीते 24घंटे के दौरान कोरोना के 46 नये संक्रमित मिले है। पटना में 27 नये मरीज मिले है, वहीं अन्य जिलों में भी कई मरीज पाए गए। नये संक्रमितों की संख्या में दोगुनी से अधिक वृद्धि दर्ज की गयी है।
बिहार के 10 जिलों में Corona केनये मरीज पाये गये हैं। बिहार के जिन जिलों में कोरोना के नये मरीज पाये गये हैं उनमें सबसेअधिक 27 संक्रमित सिर्फ पटना जिले में पाये गये हैं। इसके अलावा गया जिले में आठ,खगड़िया,सहरसा व मुंगेर जिले में दो-दो और भागलपुर, पूर्वी चंपारण, जहानाबाद,मधुबनी और सीवान जिले में एक-एक नये संक्रमित पाये गये हैं।
Corona में थोड़ी सी भी लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। मुंगेर में दो कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद हड़कंप है, ट्रेवल हिस्ट्री नहीं रहने के बावजूद हुए कोरोना पॉजिटिव। फुलवारीशरीफ के एक मरीज को तीसरे डोज लेने के बाद भी कोरोना हो गया है।
ताजा रिसर्च के अनुसार गर्भ में पल रहे बच्चों के लिए भी Corona खतरनाक है, कोरोना से बच्चे के दिमाग को नुकसान पहुंच सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने Corona के बढ़ते मामले को देखते हुए सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वह मरीजों का सैंपल लेकर इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान,पटना को भेजें। आइजीआइएमएस के लैब को भी निर्देश दिया गया है कि सोमवार से जीनोमसिक्वेंसिंग की जांच आरंभ कर दे।
बिहार सरकार ने शनिवार को 15 डीएम और 26 आईपीएस अधिकारियों सहित 37 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया।
गृह विभाग के आदेश के मुताबिक 36 आईएएस अधिकारी और 24 आईपीएस अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया है। कई अफसरों को नई जिम्मेदारी दी गई है जबकि कई अधिकारियों को दूसरे जिलों का प्रभार सौंपा गया है।
स्थानांतरित किए गए लोगों में एक वरिष्ठ एसपी और नौ एसपी रैंक के अधिकारी शामिल हैं। सहरसा एसपी लिपि सिंह को रोहतास जिले के डेहरी में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी) -2 इकाई के कमांडेंट के रूप में तैनात किया गया है।
जिन जिलों के डीएम का तबादला किया गया है उनमें पूर्वी चंपारण, खगड़िया, कटिहार, पश्चिमी चंपारण, सारण, कैमूर, सहरसा, सीवान, औरंगाबाद, मधेपुरा, पूर्णिया, बक्सर, शेखपुरा, अरवल और शिवहर शामिल हैं।
पूर्वी चंपारण के डीएम शीर्षत कपिल अशोक को आईजी (जेल) लगाया गया है, जबकि खगड़िया के डीएम आलोक रंजन घोष को निदेशक (कृषि) का प्रभार दिया गया है। कटिहार के डीएम उदयन मिश्रा को निदेशक (विज्ञान और प्रौद्योगिकी) के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया है, और पश्चिम चंपारण के डीएम कुंदन कुमार को सुहर्ष भगत की जगह पूर्णिया का डीएम बनाया गया है, जो औरंगाबाद के डीएम का पदभार संभालेंगे। सारण डीएम राजेश मीणा को सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि कैमूर के डीएम नवदीप शुक्ला को पशुपालन विभाग के निदेशक के पद पर स्थानांतरित किया गया है। सहरसा के डीएम आनंद शर्मा को पंचायती राज का निदेशक बनाया गया है और सीवान के डीएम अनिल कुमार पांडेय खगड़िया के डीएम का पदभार संभालेंगे।
पटना हाइकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के पद पर अधिवक्ता शैलेन्द्र कुमार सिंह चुनाव जीत गए है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजेंद्र नारायण को हराया।
महासचिव पद पर अधिवक्ता जय शंकर चुनाव जीत गए है। अधिवक्ता पुष्पा सिन्हा कोषाध्यक्ष के पद के लिए चुनाव जीत गई है।लेकिन इनके जीत की औपचरिक घोषणा होना बाकी है।
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उपाध्यक्ष के तीन पदों के लिए मतगणना चल रही है। अन्य पदों के लिए भी मतगणना जारी है।देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना है।
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता संघों में सबसे बड़े अधिवक्ता संघ एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष, महासचिव व कोषाध्यक्ष समेत विभिन्न पदों पर पदाधिकारियों के निर्वाचन के लिए मतदान शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गया।
मतदान पूर्वाह्न 10 बजे से अपराह्न 5 बजे तक हुआ। पटना हाई कोर्ट परिसर के ही दक्षिणी पार्किंग स्थल में मतदान केंद्र बनाए गए थे।
अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए कई मतदान केंद्र बनाए गए थे। खास बात यह थी कि मतपत्र में उम्मीदवारों के नाम के साथ ही साथ फ़ोटो भी छापे गए थे।
कल मतगणना का कार्य सुबह साढ़े नौ बजे से किया जाएगा। देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना है।
अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के सामने क्रॉस का चिन्ह लगाकर मतदाता को अपना मत देने का निर्देश रिटर्निंग अधिकारी द्वारा दिया गया था। मतदान देने के लिए मतदाताओं को एसोसिएशन द्वारा जारी पहचान पत्र के साथ ही साथ अन्य विकल्प के तौर पर लाइब्रेरी कार्ड, बार काउंसिल द्वारा जारी पहचान पत्र, आधार कार्ड/ पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस लाने को कहा गया था।
पटना । बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर पटना हाइकोर्ट में 18अप्रैल,2023 को सुनवाई की जाएगी। अखिलेश कुमार की याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होंने कहा कि ये सर्वेक्षण कराने का अधिकार राज्य सरकार को नही है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जातियों के आधार पर व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि ये राज्य सरकार के क्षेत्रधिकार में नहीं आता है।
उन्होंने कहा कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।
उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल ने इसकी सुनवाई की योग्यता पर बुनियादी आपत्ति की।उन्होंने कहा कि ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।कोर्ट ने इस अमान्य करते हुए कहा कि ये प्रावधानों के उल्लंघन और पाँच सौ करोड़ रुपए से सम्बंधित मामला है।
कोर्ट ने इस मामलें पर 18अप्रैल,2023 को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है।इस याचिकाकर्ता की ओर से दीनू कुमार व ऋतु राज और राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।
आज पटना हाइकोर्ट के सबसे बड़े अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष,महासचिव व अन्य पदों पर अधिकारियों के चुनाव के लिए मतदान होगा। मतदान आज सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक होगा।
इस चुनाव के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई।बड़ी तादाद में मतदान केंद्र बनाए गए,ताकि सभी अधिवक्तागण अपना मतदान का सुविधा से कर सके।
ये अधिवक्ता संघ काफी बड़ा है और इसके सदस्य भी लगभग तीन हज़ार है।इस मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा बल के जवान रहेंगे।
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एक बूथ पर लगभग दो सौ वकीलों के मतदान करने की व्यवस्था की गई है।सभी मतदाताओं को दस दस मतपत्र दिए जाएँगे,जो अलग अलग रंगों के होंगे।
कल 8 अप्रैल ,2023 को मतगणना की जाएगी।मतगणना का कार्य सुबह साढ़े नौ बजे प्रारम्भ होगा।देर रात तक परिणाम प्राप्त होने की संभावना है।
पटना हाइकोर्ट ने भाजपा सांसद के अंगरक्षक,उनके भाई एवं उनकी पत्नी को घर में घुसने नहीं दिये जाने के मामले में सीआरपीएफ के डीजी सहित राज्य के डीजीपी एवं सांसद से जबाब तलब किया है।
कोर्ट ने सभी को एक सप्ताह के भीतर जबाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है।जस्टिस डॉ अंशुमान ने भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी के भाई सेवानिवृत्त एयर कमांडर रणधीर प्रताप की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई की।
आवेदक की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आवेदक भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त है।इनकी बेहतर सेवा पर केंद्र सरकार ने विशिष्ट सेवा मेडल दिया।
लेकिन उनके माँ का देहांत होने के बाद भाईयो में सम्पति को लेकर विवाद होने लगा।आवेदक ने छपरा सिविल कोर्ट में बटवारा केस भी दायर किया है।
उनका कहना था कि सांसद के इशारे पर उनके सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के जवान उन्हें एवं उनकी पत्नी को पुस्तैनी घर में प्रवेश करने से रोक दिये।यही नहीं जवान उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किये।
इसकी शिकायत सीआरपीएफ के डीजी सहित राज्य के डीजीपी सारण के एसपी से जवाबतलब किया।
लेकिन कही से कोई कार्रवाई नहीं हुई।उनका कहना था कि आपसी विवाद की जानकारी होने के बाद भी सीआरपीएफ के आला अधिकारी कुछ नहीं किये।जबकि घटना की सूचना एवं शिकायत किये जाने के बाद भी कोई कार्रवाई की गई।
उन्होंने अपने पुस्तैनी घर में प्रवेश करने एवं शांतिपूर्ण तरीके से घर में रहने की गुहार कोर्ट से लगाई।कोर्ट ने सभी अधिकारियों सहित सांसद को जबाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया।इस मामलें पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह सहित बीस प्रोफेसरों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। जस्टिस संदीप कुमार ने आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के बाद दायर प्राथमिकी को रद्द कर दिया।
याचिकाकर्ताओं के वकील नवीन प्रसाद सिंह ने कोर्ट को बताया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वर्ष 2019 के इंटर परीक्षा की कॉपी जांचने के लिए मगध विश्वविद्यालय के शिक्षकों का लिस्ट तैयार कर भेज दिया।लेकिन विश्वविद्यालय में स्नातक की परीक्षा होने के कारण शिक्षक इंटर की कॉपी जाचने नहीं गये।
इंटर कॉपी नहीं जांचने के कारण को लेकर एक सूचना एएन कॉलेज के प्रिंसिपल ने उच्च माध्यमिक के परीक्षा नियंत्रक सह संयुक्त सचिव को पत्र भेज दिया।लेकिन इंटर कॉपी जांचने नहीं आने वाले शिक्षकों के खिलाफ पटना जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बहादुरपुर थाना को 72 शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
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डीईओ के चिठ्ठी पर बहादुरपुर थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।उनका कहना था कि जिस समय इंटर की कॉपी जांचने के लिए शिक्षकों को लगाया गया था उस समय विश्वविद्यालय स्नातक सहित स्नातकोत्तर एवं अन्य कई विषयों का परीक्षा कार्यक्रम जारी किया था।
यही नहीं कॉलेज के प्रिंसिपल ने शिक्षा विभाग के संयुक सचिव को पत्र भेज पूरी जानकारी भी दे दी।इसके बावजूद विभाग प्राथमिकी दर्ज करा दी।कोर्ट ने दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया।
पहली बार पटना हाई कोर्ट में अधिवक्ता संघ के चुनाव में मतपत्रों पर उम्मीदवारों के नाम के साथ उनका फोटो भी रहेगा। इसकी जानकारी चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी वरीय अधिवक्ता अंजनी कुमार ने दी।
उनका कहना था कि एडवोकेट एसोसिएशन के चुनाव में मतदाता को अपने मनपसंद उम्मीदवार के नाम के सामने क्रॉस का निशान लगाना होगा।क्रॉस निशान के बजाये कोई अन्य निशान लगाये जाने पर उस मतपत्र को रद्द कर दिया जायेगा।
उनका बताया कि पद से ज्यादा उम्मीदवारों को वोट दिए के स्थिति में भी मतपत्र को रद्द कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 7 अप्रैल,2023 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा।मतदान के बाद सभी पदों के उम्मीदवारों के मौजूदगी में मत पेटी को सील कर सुरक्षित स्थान पर रखा जायेगा।
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उन्होंने बताया कि कहना 8 अप्रैल को सुबह साढ़े नौ बजे से मतों की गिनती का काम शुरू किया जायेगा।चुनाव के लिए बीस बूथ बनाये गए है।
सभी बूथों पर चार चार वकील को पीठासीन अधिकारी बनाया गया है ।एक बूथ पर करीब दो सौ वकीलों को वोट देने की व्यवस्था की गई है।
सभी मतदाता को दस दस मतपत्र दिया जायेगा सभी मतपत्रों को अलग अलग रंग में रहेगा। शांतिपूर्ण मतदान के लिए पुलिस बल तैनात करने के लिए पटना डीएम को चिट्ठी भेजी गई है।
पटना हाइकोर्ट ने स्वीकृत नक्शे के बगैर हुए निर्माण को अवैध घोषित करने के बाद अपार्टमेंट के लोगों को जबरन निकालने हेतु उनका बिजली कनेक्शन काटे जाने पर नाराजगी जताई।कोर्ट ने पूर्णिया के डीएम, एसडीओ और नगर आयुक्त सहित वहां के उत्तर बिहार विद्युतआपूर्ति कंपनी के पूर्वी पश्चिमी प्रमंडल के कार्यपालक विद्युत अभियंता को अगली सुनवाई में कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।
जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने डॉक्टर संजीव कुमार की रिट याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिहार पावर होल्डिंग कंपनी के सीनियर एडवोकेट विनायक कीर्ति सिंह को कहा कि उनके मुवक्किल यह सुनिश्चित करें कि आज ही एक घंटे के अंदर पूर्णिया के इस अपार्टमेंट की विद्युत आपूर्ति को तुरंत चालू किया जाए ।
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया,तो सम्बंधित विद्युत कार्यपालक अभियंता हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना के लिए जिम्मेदार होंगे।
याचिकाकर्ता के वकील पुरुषोत्तम झा ने कोर्ट को बताया कि एक निगरानी जांच के मामले में नगर आयुक्त ने उस अपार्टमेंट के चौथे तल्ले का पूरा निर्माण को अवैध करार देते हुए वहां के निवासियों को भवन खाली कर आदेश दिया था । उस आदेश के को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता बिहार भवन निर्माण ट्रिब्यूनल में अपील दायर किया, लेकिन ट्रिब्यूनल में सदस्यों की संख्या पर्याप्त नहीं होने के कारण वहां सुनवाई नहीं हो पा रही है।
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अंततः कोई कानूनी निदान नहीं देखते हुए याचिकाकर्ता ने आनन-फानन में हाईकोर्ट का याचिका दायर की। हाई कोर्ट में रिट याचिका के दायर होने की जानकारी के बावजूद पूर्णिया के नगर आयुक्त ने वहां के अनुमंडल अधिकारी को नगर आयुक्त के कार्यालय से निगरानी वाद में पारित आदेश के अनुपालन करने का निर्देश दिया। अनुमंडल अधिकारी ने आनन-फानन में बिना मकान खाली करने का नोटिस और मौका दिए ही 1 दिन के अंदर ही अपार्टमेंट के चौथा तल्ला को खाली कर सील करने की कार्रवाई कर दी।
यही नहीं,जिला प्रशासन और नगर आयुक्त के इशारे पर ही बगैर किसी कानूनी सकती हो कहीं अनाधिकृत रूप से विद्युत कार्यपालक अभियंता ने पूरे चौथे तल्ले का विद्युत आपूर्ति भी काट दिया।
हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग खुलेआम करेंगे, तो कानून का राज कैसे स्थापित हो सकेगा?
कोर्ट ने इन चारों अधिकारियों को अगली सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया। इस मामलें पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि रामनवमी पर बिहारशरीफ और सासाराम सहित चार शहरों में उपद्रव करना उनकी साजिश थी, जिन्होंने रामभक्तों पर पत्थरों से हमला किया और विस्फोट कराये।
हिम्मत है तो हाल के दंगों की न्यायिक जांच कराये सरकार
सरकारी जांच से पहले जब सीएम बता रहे हैं साजिश किसकी, तब नाटक क्यों ?
जान लें, राम भक्तों की प्रताड़ना नहीं है लाल किला पहुंचने का रास्ता
श्री मोदी ने कहा कि साजिश उनकी थी, जो सासाराम में सम्राट अशोक के शिलालेख पर मजहबी कब्जा हटाने के खिलाफ थे। साजिश उनकी थी, जो सम्राट अशोक की जयंती मनाने से भाजपा को रोकना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का यह कहना तो सही है कि माहौल खराब कराया गया, लेकिन वे लगे हाथ साजिश का आरोप उन्हीं राम भक्तों पर लगा रहे हैं, जिन पर हमले हुए, जिनके घर जले और जिस समुदाय के एक व्यक्ति की जान गई।
श्री मोदी ने कहा कि जब मुख्यमंत्री पहले ही तय कर रहे हैं कि दंगों की साजिश किन लोगों की, तब राज्य सरकार की जांच का कोई मतलब नहीं।
उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार साम्प्रदायिकता से समझौता नहीं करते तो उन्हें पूरे मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए।
श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने राम भक्तों को प्रतिड़ित करने और दंगाइयों को बचाने का मन बना लिया है। यही उन्हें लाल किले तक पहुँचने का रास्ता लगता है।
उन्होंने कहा कि संवेदनशील इलाकों में समय पर फ्लैग मार्च क्यों नहीं हुआ? कर्फ्यू लगाने में देर क्यों हुई? केंद्र से अर्धसैनिक बल की पर्याप्त टुकड़ी क्यों नहीं मांगी गई? शोभायात्रा के मार्ग में पड़ने वाले घरों और उनकी छतों की तलाशी पहले क्यों नहीं की गई?
श्री मोदी ने कहा रामनवमी पर चाक-चौबंद सुरक्षा देने में जो सरकार फेल रही और वह खुद ही अपनी जांच करेगी और खुद ही पास घोषित कर देगी।
पटना । बिहार में 15 अप्रैल से जाति गणना के दूसरे चरण की शुरुआत होने वाली है। इसके पहले चरण में मकानों को नंबर देने का काम किया गया था। दूसरे चरण में 215 जातियों और एक अन्य के साथ कुल 216 जातियों की गणना होगी। जातियों की सूची और उसकी श्रेणी भी तैयार कर ली गई है।
बिहार में अब अंकों से अलग-अलग जातियों की पहचान होगी। प्रदेश में 215 जातियों की गणना के लिए अलग-अलग कोड निर्धारित किए गए हैं। बिहार में जातियों के लिए कोड तय कर दिया गया है। किसकी कौन सी जाति, यह अंकों से पता चल जाएगा। Bihar Caste-based Survey के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। हर जाति का एक अलग कोड अंकों के रूप में होगा।
जाति पूछ कर गणनाकर्मी अंक अंकित करेंगे। 15 अप्रैल से होने वाली दूसरे चरण की गणना में 215 व एक अन्य मिलाकर कुल 216 जातियों की आबादी की गिनती होगी। 11 अप्रैल तक अधिकारियों से लेकर गणनाकर्मियों तक को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गणना के दौरान जातियों के नाम के साथ उस जाति के लिए निर्धारित कोड को लिखा जाएगा। एक व्यक्ति की गणना एक ही स्थान से होगी। अलग-अलग समुदाय के सामान्य से लेकर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग की जातियों के लिए कोड होगा। इस कोड या अंक का उपयोग भविष्य की योजनाएं तैयार करने, आवेदन व अन्य रिपोर्ट में किया जा सकेगा। एक उदाहरण बनिया जाति का लें तो कोड संख्या 124 है।
बनिया जाति के लिए 124 कोड संख्या निर्धारित किया गया है, जिसमें सूड़ी, गोदक, मायरा, रोनियार, पंसारी, मोदी, कसेरा, केसरवानी, ठठेरा, कलवार, कमलापुरी वैश्य, माहुरी वैश्य, बंगी वैश्य, वैश्य पोद्दार, बरनवाल, अग्रहरी वैश्य, कसौधन, गंधबनिक, बाथम वैश्य, गोलदार आदि शामिल हैं।
सवर्ण जातियों की बात करें तो कायस्थ का कोड 22, ब्राह्मण के लिए 128, राजपूत के लिए 171 तो भूमिहार के लिए 144 है। कुर्मी जाति का अंक 25 और कुशवाहा कोइरी का 27 है। यादव जाति में ग्वाला, अहीर, गोरा, घासी, मेहर, सदगोप, लक्ष्मीनारायण गोला के लिए कोड संख्या 167 है।
पटना हाईकोर्ट में एडवोकेट एसोसिएशन के 30 पदों के लिए 7 अप्रैल,2023 को होने वाले चुनाव में कुल 144 प्रत्याशियों ने अपनी पूरी शक्ति जीत के लिए लगा दी है। एडवोकेट एसोसिएशन के होने वाले इस चुनाव में अध्यक्ष के 1 पद के लिए 15 उम्मीदवार , उपाध्यक्ष के तीन पद के लिए 28 उम्मीदवार, महासचिव के 1 पद के लिए 13 उम्मीदवार, संयुक्त सचिव के 3 पद के लिए 25 उम्मीदवार है।
सहायक सचिव के 3 पद के लिए 16 उम्मीदवार , कोषाध्यक्ष के 1 पद के लिए 6 उम्मीदवार, ऑडिटर के 2 पद के लिए 2 दो उम्मीदवार, सीनियर एग्जीक्यूटिव के 5 पद के लिए 8 उम्मीदवार, एग्जीक्यूटिव के 7 पद के लिए 21 उम्मीदवार, निगरानी के 3 पद के लिए 7 उम्मीदवार और लाइब्रेरी कमेटी के 1 पद के लिए तीन उम्मीदवार हैं।
इस बार के चुनाव में सभी उम्मीदवार अपने अपने तरीके से मतदाताओं को रिझाने और अपने पक्ष में वोट देने के लिए लुभाने में लगे हैं।
इस बार के चुनाव मे चारों तरफ होर्डिंग, फलैक्स से पूरा हाई कोर्ट परिसर के साथ साथ बार कॉउंसिल भवन भी पट गया है।
अध्यक्ष पद के लिए वरीय अधिवक्ता राजेन्द्र नारायण , राजीव कु० वर्मा,विंध्यकेशरी कुमार, शैलेन्द्र कुमार सिंह,प्रेम कुमार झा, और अरुण कुशवाहा में मुकाबला है। उपाध्यक्ष पद के लिए प्रबल दावेदारों में द्विवेदी सुरेन्द्र,राम जीवन प्रसाद,शंभु शरण शर्मा,मनोज कुमार सिंह के बीच सीधी टक्कर है। इन्हीं में से कोई भी तीन व्यक्ति उपाध्यक्ष बन सकता है। वैसे द्विवेदी सुरेंद्र को सभी अधिवक्ताओं का समर्थन मिल रहा है ।
सेक्रेटरी जेनरल पद के लिए शारदानंद मिश्र,राम संदेश राय,पुनम कुमारी सिंह,पांडेय, और राकेश कुमार सिन्हा के बीच टक्कर है।
सहायक सचिव के लिए राजेश कुमार,चौबे, राकेश रंजन,राजनीश चंद्रा,नलिन कुमार,श्यामेशवर कुमार सिंह, और महिला उम्मीदवार श्वेता सिंह के बीच ही टक्कर है।
पटना हाईकोर्ट के दूसरे बड़े वकील संघ लायर्स एसोसिएशन का चुनाव 19 अप्रैल,2023 को होगा। शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सारी तैयारी की जा रही हैं। मतदान के लिए नये मतपेटी बनाई गई हैं।
निर्वाची पदाधिकारी वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मतपेटी ऐसा बनाया गया है, कि किसी भी हाल में मतपेटी से मतपत्र निकलना संभव नहीं है।मतदान के लिए सभी मतदाताओं को एसोसिएशन का पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य किया गया है।चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि सभी उम्मीदवारों से शांतिपूर्ण चुनाव सहयोग करने की अपील की है।
उन्होंने बताया कि चुनाव के पूर्व सभी उम्मीदवारों के साथ एक अहम बैठक की जायेगी।आरओ ने वरीय कार्यकरणी सदस्य के पांच पद,कार्यकरणी सदस्य के 7 पद,ऑडिटर के तीन पद, निगरानी सदस्य के तीन पद सहित लाइब्रेरी कमेटी के तीन पद पर उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये।
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इन सभी पदों पर जितना सीट था, उतने ही उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किये।अब अध्यक्ष पद के एक सीट के लिए चार उम्मीदवार चुनावी मैदान में है।वही उपाध्यक्ष पद के तीन सीट के लिए दस उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं।जबकि महासचिव के एक सीट के लिए पांच उम्मीदवार अपना किस्मत आजमा रहे हैं।
वही संयुक्त सचिव और सहायक सचिव के तीन तीन पद के लिए सात व छह उम्मीदवार तथा कोषध्यक्ष के एक पद के लिए तीन उम्मीदवार के बीच काटे का टक्कर हैं।19 अप्रैल,2023 को होने वाले चुनाव में सभी उम्मीदवारों जोर शौर से चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं।
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब देने के पुनः तीन सप्ताह का समय दिया है।चीफ जस्टिस के वी चंद्रन खंडपीठ ने मुकेश कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दिए गए जवाब पर असंतोष जाहिर किया था।कोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में राज्य सरकार को पुनः जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशान्त सिन्हा ने कोर्ट को बताया था कि डॉक्टरों द्वारा लिखें गए पर्ची पर निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा दवा नहीं दी जाती है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि बहुत सारे सरकारी अस्पतालों में अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क ही फार्मासिस्ट का कार्य करते है।वे बिना जानकारी और योग्यता के ही मरीजों को दवा बांटते है।जबकि ये कार्य निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा किया जाना है।
उन्होंने कोर्ट को बताया था कि इस तरह से अधिकारियों द्वारा अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क से काम लेना न केवल सम्बंधित कानून का उल्लंघन है,बल्कि आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
पिछली सुनवाई में उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी थी कि फार्मेसी एक्ट,1948 के तहत फार्मेसी से सम्बंधित विभिन्न प्रकार के कार्यों के अलग अलग पदों का सृजन किया जाना चाहिए।लेकिन बिहार सरकार ने इस सम्बन्ध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।इस आम लोगों का स्वास्थ्य और जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि फार्मेसी एक्ट,1948 के अंतर्गत बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल के क्रियाकलापों और भूमिका की जांच के लिए एक कमिटी गठित की जाए।ये कमिटी कॉउन्सिल की क्रियाकलापों की जांच करें,क्योंकि ये गलत तरीके से जाली डिग्री देती है।
उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी थी कि बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जी पंजीकरण किया गया है।राज्य में बड़ी संख्या मे फर्जी फार्मासिस्ट कार्य कर रहे है।इस मामलें पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सहरसा में स्थापित किये जाने वाले एम्स अस्पताल को दरभंगा स्थानांतरित किये जाने के मामलें पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने कोशी विकास संघर्ष मोर्चा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 17अप्रैल,2023 तक मोहलत दी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया था कि विभिन्न राज्यों में एम्स के स्तर के अस्पताल स्थापित करने की योजना तैयार की गई।बिहार के सहरसा में एम्स के तर्ज पर अस्पताल बनाए जाने का प्रस्ताव था।
कोर्ट को बताया गया था कि इस अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि सहरसा में उपलब्ध है।2017 में सहरसा के जिलाधिकारी ने इस अस्पताल के लिए आवश्यक 217.74 एकड़ भूमि की उपलब्धता की जानकारी विभाग को दी थी।
कोर्ट को ये बताया था कि इस क्षेत्र में एम्स स्तर का अस्पताल नहीं है।गंभीर बीमारियों के ईलाज के लिए इस क्षेत्र के लोगों को या तो पटना जाना पड़ता है या सिलिगुडी जाना पड़ता है।इसमें न सिर्फ लोगों को आने जाने में कठिनाई होती है,बल्कि आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सहरसा में एम्स अस्पताल के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है,जबकि दरभंगा में एम्स अस्पताल के लिए पर्याप्त भूमि की उपलब्ध नहीं है।
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कोर्ट को एम्स अस्पताल के निर्माण के मानकों पर सहरसा ज्यादा खरा था,लेकिन राज्य सरकार ने 2020 में दरभंगा में एम्स अस्पताल स्थापित किये जाने की अनुशंसा कर दी थी।यह इस क्षेत्र लोगों के साथ अन्याय किया गया।
कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि सहरसा,पूर्णियां,कटिहार, किशनगंज और अररिया जिले इस क्षेत्र में आते है।इस क्षेत्र की जनसंख्या के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एम्स अस्पताल स्थापित की जानी चाहिए।
कोर्ट को बताया गया कि इस क्षेत्र के बहुत सारे लोग कैंसर समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।आमलोग को बेहतर ईलाज के लिए इस क्षेत्र में एम्स स्तर के अस्पताल की सख्त आवश्यकता है।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 17अप्रैल,2023 के बाद की जाएगी।
पटना हाइकोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एन एच ए आई के क्षेत्रीय अधिकारी को हलफनामा दायर कर प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निर्माण कम्पनियों को बताने को कहा था कि निर्माण कार्य कब तक पूरा हो जाएगा। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र,राज्य सरकार,एनएचएआई और अन्य सम्बंधित पक्षों को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।
पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य कर रही कम्पनियों ने कोर्ट को बताया था कि 31मार्च,2023 तक फेज एक का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया जाएगा।साथ ही इस राजमार्ग के निर्माण कार्य को लगभग 30 जून, 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष कुमार ने कोर्ट को बताया था कि जिस गति से काम किया जा रहा है, ऐसे में तय समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा होना कठिन है।उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में कार्य पूरा करने के लिए संसाधनों और कार्य करने वाले लोगों की संख्या बढ़ाने की जरूरत हैं।
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इससे पूर्व अधिवक्ताओं की टीम ने खंडपीठ के समक्ष पटना गया डोभी एनएच का निरीक्षण कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की टीम को इस राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
पूर्व में भी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।साथ ही कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।
कोर्ट को पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने बताया था कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।
पटना/ नवादा । बिहार में रामनवमी पर भड़की हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार में दो दिवसीय दौरे पर हैं। गृह मंत्री अमित शाह के सशस्त्र सीमा बल के पटना फ्रंटियर का निर्धारित दौरा रद्द होने के कुछ घंटे बाद रविवार को नवादा जिले के हिसुआ में एक रैली को संबोधित किया। रैली में उन्होंने शनिवार को सासाराम में होने वाली जनसभा को रद्द करने की बात कही।
रविवार को उन्होंने नवादा में जनसभा को संबोधित करते हुए एक तरफ चुनावी शंखनाद किया, तो वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार और जेडीयू नेता ललन सिंह पर जमकर हमला बोला। साथ ही लालू यादव को भी नसीहत दे डाली।
उन्होंने सासाराम जाने को लेकर कहा कि, “आज मुझे सासाराम जाना था, वहां मुझे महान सम्राट अशोक के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होना था लेकिन सासाराम में तो बवाल मचा हुआ है, हिंसा फैली है। इसलिए मैं नहीं जा पाया, सासाराम के लोगों से यहीं से माफी मांगता हूं और मैं वहां पर जरूर आऊंगा।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सासाराम और नालंदा हिंसा पर कहा कि बिहार की जनता से यह कहना चाहता हूं कि 2024 में बिहार से बीजेपी को 40 सीट दीजिए और 2025 में बीजेपी की सरकार बनाइए। दंगा करने वालो को उलटा लटका कर सीधा करेंगे। हम तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करते हैं। सासाराम और नालंदा की घटना से मन दुखी होता है।
वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू नेता ललन सिंह पर हमला करते हुए अमित शाह ने कहा, “अगर आप लोग सोचते हैं कि आप लोगों को दोबारा बीजेपी का साथ मिलेगा तो ये भूल जाएं। आप लोगों के लिए बीजेपी के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं। अमित शाह ने आगे कहा, कि “मैं बिहार की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम लोग अब नीतीश कुमार के साथ गठबंधन नहीं करने वाले।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी कालाबजारी और भ्रष्टाचारियों से बिहार को मुक्त कराएंगे। वहीं, नीतीश कुमार के पीएम उम्मीदवारी पर तंज कसते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री की कुर्सी अभी खाली नहीं है। उन्होंने कहा कि लालू यादव गलतफहमी में हैं। तेजस्वी यादव सीएम नहीं बनेंगे। नीतीश कुमार तेजस्वी को कभी सीएम नहीं बनायेंगे।
अमित शाह ने कहा कि बिहार के हर एक पंचायत में कोऑपरेटिव डेयरी बनेगी। केंद्र ने बिहार को 1 लाख 9 हजार करोड़ रुपये दिए। पीएम मोदी 8 करोड़ 70 लाख लाभुकों को मुफ्त अनाज बिहार में दे रहे हैं। 85 लाख किसनों को सस्ती बिजली, 1.10 करोड़ महिला को केंद्र ने गैस दिया। नवादा में रेललाइन, एनएच बनाया। मंच के बगल में रेललाइन गुजरी है। नवादा में खेती हो रही है। बिजली सुधरी है, रजौली में परमाणु क्षमता यूनिट की योजना बन चुकी है।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि एक खास समुदाय के आपराधिक तत्वों के प्रति नरमी के कारण नीतीश सरकार बिहारशरीफ और सासाराम में रामनवमी शोभायात्राओं पर हमले नहीं रोक पायी, बल्कि आगजनी-पथराव की घटनाओं के बाद राम-भक्तों की ही धर-पकड़ हो रही है।
सख्ती से नहीं हुई उपद्रवी तत्वों की एहतियातन गिरफ्तारी
रामनवमी शोभायात्राओं पर हमले नहीं रोक पायी सरकार
खुफिया तंत्र नाकाम, डीएम-एसपी ने स्वयं निगरानी नहीं की
आगजनी-पथराव के बाद पीड़ित राम-भक्तों की ही धर-पकड़
श्री मोदी ने कहा कि अति संवेदनशील सासाराम में तो जानबूझ कर उपद्रवी तत्वों को छूट दी गई, ताकि वहाँ अशांति हो और गृह मंत्री अमित शाह की रैली न हो सके।
उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार नहीं चाहती थी कि भाजपा सासाराम में सम्राट अशोक की जयंती मनाये।
श्री मोदी ने कहा कि सासाराम में जिन तत्वों ने सम्राट अशोक के शिलालेख जैसे पुरातात्त्विक स्थल पर कब्जा कर उसे एक धर्म-विशेष की पहचान से जोड़ने की कोशिश की थी, वे अतिक्रमण हटाने में केंद्र सरकार की पहल से नाराज थे और बदला लेने के लिए मौके के इंतजार में थे।
उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन का खुफिया तंत्र कारगर होता और उपद्रवी तत्वों की एहतियातन गिरफ्तारी होती, तो रामनवमी शांतिपूर्ण सम्पन्न होती।
श्री मोदी ने कहा कि बिहारशरीफ और सासाराम के ये वही स्थान हैं, जहां पहले भी रामनवमी की शोभायात्राओं पर पत्थरबाजी हुई थी। इसके बावजूद वहाँ के एसपी-डीएम ने स्वयं निगरानी नहीं की और पुलिस बल की तैनाती भी सांकेतिक थी। कहीं-कहीं तो केवल होम गार्ड तैनात कर खानापूरी की गई थी।
उन्होंने कहा कि रामनवमी पर रामभक्तों को सुरक्षा देने में सरकार तो पूरी तरह विफल रही, लेकिन अब लोगों को शांति और संयम से काम लेना चाहिए।