कनाडा की सरकार ने कहा है कि वह अब यह नहीं मानती कि भारत कनाडा में हो रहे हिंसक अपराधों से जुड़ा हुआ है — यह जानकारी उस बयान में सामने आई है जो कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की भारत यात्रा से पहले दी गई।
इस बयान को द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पिछले कई वर्षों से भारत और कनाडा के बीच राजनयिक तनाव काफी बढ़ गया था।
🧭 क्या कहा गया?
एक वरिष्ठ कनाडाई अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अब कनाडाई सरकार को यह यकीन है कि भारत का किसी भी प्रकार के हिंसक गतिविधि या अपराधों से जुड़ाव नहीं है और वह इस बात पर आश्वस्त है कि ऐसी गतिविधियाँ संचालित नहीं हो रही हैं।
उन्होंने कहा:
“हम बहुत व्यापक राजनयिक संपर्क में हैं, और हमें विश्वास है कि यह गतिविधि अब जारी नहीं है। अगर यह जारी होती, तो यह यात्रा नहीं हो रही होती।”
कनाडा के इस रुख बदलाव से संकेत मिलता है कि दोनों देशों में राजनयिक और सुरक्षा संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
📍 पृष्ठभूमि — तनाव का इतिहास
भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में खटास तब आई जब 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में घायल हुई खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में तब की सरकार ने आरोप लगाया था कि भारत संभवत: इसमें शामिल था।
उस समय के प्रधानमंत्री Justin Trudeau ने कहा था कि उनके पास “विश्वसनीय सबूत” हैं कि भारत से जुड़े अधिकारियों का इस हत्या से संबंध हो सकता है — जिसे भारत ने पूरी तरह से नकार दिया था।
इसके बाद दोनों देशों ने अपने-अपने उच्चायुक्तों और राजनयिकों को वापस बुलाया या निकाल दिया, जिससे तनाव और बिगड़ा।
🤝 बदलते रिश्तों का नया चरण
अब, लगभग तीन साल बाद, नई सरकार के नेतृत्व में कनाडा ने अपना रुख नरम कर दिया है, और इस बयान से दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा और संवाद का मार्ग मिल सकता है।
कनाडा की तरफ से यह भी कहा गया है कि वह भारत के साथ सुरक्षा और आपराधिक न्याय सहयोग को मजबूत करना चाहता है, जिसमें दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच संवाद प्रमुख है।
📌 क्या आगे होने की संभावना है?
• गले मिले राजनयिक:
प्रधानमंत्री कार्नी की भारत यात्रा (मुंबई और नई दिल्ली) के दौरान दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठकें होने की संभावना है।
• व्यापार और ऊर्जा:
कार्नी और भारत के शीर्ष नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और शिक्षा क्षेत्रों को लेकर सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है।
• आर्थिक साझेदारी:
दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए संभावित समझौते, जैसे CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर चर्चा की उम्मीद जताई जा रही है।