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बिहार में ग्रीन कॉरिडोर की शुरुआत: पटना से डोभी तक 130 किमी लंबे रास्ते पर लगेंगे आम और जामुन के पेड़; किसानों को मिलेगा अतिरिक्त आय का अवसर

बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाते हुए पटना से गयाजी जिले के डोभी तक करीब 130 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग को ग्रीन कॉरिडोर में बदलने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस परियोजना का उद्देश्य न केवल राज्य के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाना है। हाईवे के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर फलदार और छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे, जिससे यह मार्ग हरियाली से आच्छादित होकर एक आदर्श पर्यावरणीय मॉडल के रूप में विकसित हो सके।

इस महत्वपूर्ण परियोजना की जानकारी राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान दी। उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है, और यह ग्रीन कॉरिडोर योजना उसी दिशा में एक ठोस पहल है।

हाईवे के दोनों किनारों पर लगेगा हरियाली का घेरा

सरकार की योजना के अनुसार, पटना से डोभी तक के राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों किनारों पर सुनियोजित तरीके से वृक्षारोपण किया जाएगा। इसमें आम, जामुन, नींबू, आंवला, नीम, बरगद, पीपल और पाकड़ जैसे पेड़ शामिल होंगे। इन पेड़ों का चयन विशेष रूप से इस आधार पर किया गया है कि वे स्थानीय जलवायु के अनुकूल हैं, लंबी उम्र वाले हैं और पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं।

फलदार वृक्षों के माध्यम से जहां एक ओर हरियाली बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर किसानों और स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा। छायादार पेड़ यात्रियों को धूप और गर्मी से राहत देंगे, जिससे सफर अधिक सुखद और सुरक्षित बनेगा।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम

बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खतरे को देखते हुए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण होगा, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार आएगा। पेड़ न केवल ऑक्सीजन प्रदान करेंगे, बल्कि धूल और ध्वनि प्रदूषण को भी कम करने में सहायक होंगे।

राज्य में लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए भी यह ग्रीन कॉरिडोर कारगर साबित हो सकता है। सड़क किनारे घनी हरियाली से तापमान में कमी आएगी और स्थानीय सूक्ष्म जलवायु (माइक्रो क्लाइमेट) बेहतर होगी।

किसानों और स्थानीय लोगों की भागीदारी

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सरकार इसे केवल सरकारी परियोजना तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसमें स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगी। सरकार की मंशा है कि फलदार पेड़ लगाने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय किसानों को सौंपी जाए।

इससे दोहरा लाभ होगा—एक ओर वृक्षों की बेहतर देखभाल होगी, तो दूसरी ओर किसानों को भविष्य में फलों की बिक्री से अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए यह मॉडल अत्यंत प्रभावी साबित हो सकता है। यदि यह योजना सफल होती है, तो इसे राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।

मानसून से पहले शुरू होगा पौधारोपण

सरकार ने इस परियोजना को लेकर तैयारी शुरू कर दी है और लक्ष्य रखा गया है कि मानसून से पहले पौधारोपण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाए। मानसून का मौसम पौधों के विकास के लिए अनुकूल होता है, जिससे पौधों के जीवित रहने की संभावना अधिक रहती है।

वन विभाग और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे भूमि चिह्नांकन, पौधों की उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था जैसे सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करें। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी, ताकि पौधारोपण वैज्ञानिक पद्धति से हो सके।

सड़क सुरक्षा और सौंदर्य में वृद्धि

ग्रीन कॉरिडोर बनने के बाद यह राष्ट्रीय राजमार्ग केवल परिवहन का साधन नहीं रहेगा, बल्कि एक आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल मार्ग के रूप में विकसित होगा। सड़क किनारे हरियाली से न केवल दृश्य सौंदर्य बढ़ेगा, बल्कि ड्राइवरों को भी लंबे सफर में मानसिक सुकून मिलेगा।

छायादार वृक्ष धूप की तीव्रता को कम करेंगे, जिससे सड़क की सतह का तापमान भी नियंत्रित रहेगा। इससे सड़क की उम्र बढ़ने की संभावना भी है। साथ ही, व्यवस्थित वृक्षारोपण से मिट्टी का कटाव कम होगा और वर्षा जल का संरक्षण बेहतर तरीके से हो सकेगा।

भविष्य में अन्य हिस्सों में भी बनेगा ग्रीन कॉरिडोर

सरकार की योजना है कि इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद बिहार के अन्य प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को भी ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए। यदि पटना से गयाजी तक का यह मॉडल सफल रहता है, तो यह पूरे राज्य के लिए एक उदाहरण बनेगा।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर राज्य सरकार की यह पहल विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश देती है। यह परियोजना आने वाले वर्षों में बिहार की पहचान को नई दिशा दे सकती है—जहां आधुनिक सड़कें और हरियाली साथ-साथ चलें।

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