पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में देरी के कारण चुनाव में देरी होने की संभावना बढ़ गई है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही राष्ट्रपति शासन के तहत चुनाव कराने की मांग की थी, और अब एसआईआर प्रक्रिया में देरी के कारण यह मांग और भी मजबूत हो गई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है, और यदि नई सरकार का गठन नहीं होता है तो राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। एसआईआर प्रक्रिया में देरी के कारण चुनाव आयोग को मतदाता सूची को अद्यतन करने में परेशानी हो रही है, जिससे चुनाव में देरी हो सकती है।
राज्यपाल सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद राज्यपाल के नए नाम की घोषणा हुई है, जो आरएन रवि हैं। यह बदलाव एसआईआर प्रक्रिया में देरी के कारण हुआ है, और इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ गई है।
तृणमूल नेता जयप्रकाश मजूमदार का कहना है कि यह स्थिति आयोग की वजह से उत्पन्न हुई है, और आयोग को एक तटस्थ निकाय कहा जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि अगर 7 मई तक नई सरकार का गठन नहीं होता है तो बंगाल में राष्ट्रपति शासन तय है।
इस स्थिति में कार्यवाहक सरकार की उम्मीद कम है, और राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ गई है। एसआईआर प्रक्रिया में देरी के कारण चुनाव में देरी होने की संभावना बढ़ गई है, और इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है।