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आधी आबादी का सच’ हम जानकर भी हैं क्यों अनजान है

महिलाएं आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। समाज का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा त्रासदी का शिकार रहा है, चाहे वह पहचान के संकट के रूप में हो या हिंसा झेलने की विवशता।वह भी उस समाज में जहां कहा जाता है कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता’। यह समाज का दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है! हमारे यहां पुरुष-प्रधान समाज की ऐसी रचना की गई है कि ये सब कई लोगों को सामान्य लगता है। अखबारों में बलात्कार, दहेज-हत्या आदि समाचारों को हम छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं।
बहू के रूप में नौकरानी ढूंढी जाती है। बेटा सेवा करें या ना करें, बहू (कभी) ना करे तो उसे (और उसके पूरे खानदान तक को) ताना दिया जाता है या फिर उसके साथ घरेलू हिंसा तक की जाती है। बाहर काम करने वाली महिलाओं के साथ तो दोहरा शोषण है, घर के अंदर भी काम करने की उम्मीद और बाहर भी। क्या खूब समाज की रचना की गई है कि लड़के वाले को पैसे के साथ-साथ उल्टे में लड़की भी मिलती है और वह उनसे दबी रहने को मजबूर भी है! और लड़की भी कैसी, सुंदरता के मानकों पर खरी उतरने वाली जिसे देखने वक्त वस्तु की तरह टटोला जाता है, कई सवाल किए जाते हैं आदि, आदि। इसके बाद लड़की का पिता अपने जीवन भर की कमाई, यहां तक कि कर्ज लेकर भी शादी के एक रात में उड़ेल देता है, और फिर भी लोग संतुष्ट नहीं होते हैं।

उसके बाद ससुराल आने पर शुरू होता है ताना देने का दौर। उनकी पसंद कौन पूछता है, बस थोप दिया जाता है, चाहे वह कैरियर की बात हो या बच्चा पैदा करने का मामला। यहां भी समाज ने महिला को महिला के विरुद्ध सामने खड़ा कर दिया है। सोचने का तो सवाल ही नहीं है कि वह महिला ऐसा क्यों कर रही है, बस करना है! फिर ससुराल को अपना घर भी मानने नहीं दिया जाता है और मायके में तो लड़की पराई धन थी।

फिर, ससुराल के लोग, रिश्तेदार आदि शादी के दो-तीन साल के अंदर बहू से बच्चे की उम्मीद करने लगते हैं, उसमें भी होने वाली संतान लड़का हो तो और अच्छा। हिंदुस्तान में संतान पैदा करना/न करना अभी भी औरत के लिए ‘choice’ नहीं है, भले ही देश की आबादी कितनी भी बढ़ती जा रही हो। पर नहीं, समाज ने ऐसी व्यूह- रचना कर रखी है कि औरत आमतौर पर unconventional choices का सोचने से भी डरती है।तदोपरांत जिम्मेदारी बढ़ जाने के बाद अगर जरूरत हो नौकरी छोड़ने की तो मान कर चला जाता है कि लड़की ही छोड़ेगी, चाहे लड़की ने करियर बनाने के लिए लड़के जितना ही मेहनत क्यों न की हो।

आगे, औरत की अपनी जिंदगी कहां, वह तो बस बच्चों और परिवार के लिए अपनी ख्वाहिशो का त्याग कर जीने लगती है और हमारा समाज उसे त्याग की मूर्ति का बस तमगा देकर खुश हो जाता है! इन सब के बीच कोई समाज से यह क्यों नहीं पूछता कि भले ही हम चांद पर पहुंच गए हो, लेकिन इस धरती पर दहेज जैसी मामूली चीज के लिए क्यों किसी की जान ले ली जाती है? उस परिवार को सामाजिक से बहिष्कृत होने का भय क्यों नहीं?

तत्पश्चात बच्चे बड़े होकर अपने कैरियर में व्यस्त हो जाते हैं और पुरुष अपनी दुनिया में, पर औरत monopause, फिर mid-life crisis से जूझते हुए जब तन्हाई में पीछे मुड़कर देखती है तो सब कुछ खाली-खाली सा लगता है। और शायद जिंदगी का लेखा जोखा करते उस वक्त लगता हो कि क्या पाया, क्या खोया। शायद थोड़ा अपने लिए भी जिया होता!

समाधान:
• महिलाओं को अपने हक के लिए assertive होना पड़ेगा।
•पढ़ना और अपने पैरों पर खड़ा होने का हुनर महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है।
•संपत्ति का अधिकार लेना होगा (इसके बारे में विस्तृत कभी आगे लिखूंगी)।
•जरूरत पड़ने पर ना कहना सीखना होगा।
• अपने लिए भी सोचना होगा, superwoman बनने का लक्ष्य unrealistic है।
•पितृ-सत्तात्मक समाज का structure समझना होगा और जो चीजें महिला-विरोधी हैं, उसको सही करने के लिए काम करना होगा।

लेखिका — लक्ष्मी कुमारी (शिक्षक राजनीति शास्त्र ,वीर कुंउस सिंह विश्वविधालय)

बिहार में कोरोना के तीसरे लहर की हुई शुरुआत कई बच्चे पाये गये हैं कोरोना पाँजिटिव

पटना एम्स में 24 घंटे के अंदर शहर के गोसांई टोला की रहने वाली कोरोना संक्रमित बच्ची की मौत हो गयी है वही चार साल की कोरोना संक्रमित एक दूसरी बच्ची भर्ती हुई है । सिया कुमारी नाम की यह बच्ची सारण जिले के मिर्जापुर गांव की रहने वाली है।

एम्स में इलाज करे रहे डां कि माने यो सिया तीसरा बच्ची हो कोरोना संक्रमित पायी गयी ,बिहटा के दिलवारापुर के सात वर्षीय कोरोना संक्रमित शिवांशु कुमार का भी इलाज चल रहा है।

एम्स के डॉक्टर बच्चों में मिल रहे कोरोना के मामलों को लेकर गंभीर हैं. बिहटा के शिवांशु को बुखार और दूसरी परेशानियों के बाद एम्स में 31 अगस्त को दाखिल कराया गया था. यहां भर्ती सिया कुमारी का इलाज छपरा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था. वहां से उसे रेफर कर दिया गया. जांच में वह कोरोना पॉजिटिव पायी गयी.बच्ची में कोरोना का कौन-सा वेरिएंट है, इसकी जांच के लिए अभी सैंपल लिया गया है. कोरोना की तीसरी लहर के खतरे के बीच अस्पताल प्रशासन इसे संभावित केस मान रहा है. गुरुवार को पटना एम्स में भर्ती गोसांईं टोला पाटलिपुत्र निवासी 11 वर्षीय आरोही कुमारी की कोविड से मौत हो गयी थी.

परिजनों का भी लिया गया सैंपल
डॉक्टरों ने पीड़ित बच्ची का रिपीट सैंपल लेने के साथ ही उसके परिजनों का सैंपल भी आरटी-पीसीआर जांच के लिए भेजा है. वहीं, पटना एम्स के कोविड वार्ड के नोडल पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार ने बताया कि बच्ची को तेज बुखार, खांसी-जुकाम के साथ पेट में पानी भरने की परेशानी है. हालांकि, ऑक्सीजन सैचुरेशन नियंत्रण में है.

बच्ची की देखभाल के लिए विशेष टीम लगायी गयी है. वायरस के वेरिएंट का पता लगाने के लिए सैंपल लिया गया है. उम्मीद है कि इसे आइसीएमआर भी भेजा जायेगा. उन्होंने कहा कि अभी दो बच्चे संक्रमित मिले हैं और इस आधार पर इसे तीसरी लहर की आहट कहना जल्दीबाजी होगी. विशेषज्ञ डॉक्टर बच्चों के मामलों को देख रहे हैं और सभी तरह की रिपोर्ट मिलने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचना बेहतर होगा.

पंचायत चुनाव को लेकर आयोग ने उठाये कठोर कदम आचार संहिता के उल्लंधन मामले में जा सकते हैं जेल

निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न कराने को लेकर आयोग नित नये आदेश जारी कर रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई करने का कानूनी प्रावधान तय किया है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में सजा का प्रावधान किया गया है. अगर कोई प्रत्याशी धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता या घृणा फैलाता है, तो उसको तीन से पांच वर्ष की सजा मिलेगी. यह गैर जमानतीय व संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है.

इसी प्रकार से कोई भी प्रत्याशी किसी अन्य प्रत्याशी किसी के जीवन के ऐसे पहलुओं की आलोचना करता है, जिसकी सत्यता साबित नहीं हो, तो उसको भी आइपीसी की धारा 171(जी) के तहत सजा होगी. यह जमानतीय अपराध है, जिसकी सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के समक्ष होगी.

इसी प्रकार से निर्वाचन प्रचार के लिए मस्जिदों, गिरजाघरों, मंदिरों या अन्य पूजा स्थलों का प्रचार मंच के रूप में करना और जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं की दुहाई देना भी गैर जमानतीय अपराध की श्रेणी में शामिल है.
अगर कोई प्रत्याशी भ्रष्ट आचरण करते हुए मतदाताओं को रिश्वत देता है , तो उसके लिए पंचायती राज अधिनियम के साथ आइपीसी की धारा में सजा का प्रावधान हैं. मतदाताओं को भयभीत करना, बूथ के 100 मीटर के भीतर वोट मांगना भी अपराध की श्रेणी में शामिल हैं. कोई प्रत्याशी अगर किसी व्यक्ति के शांतिपूर्ण जीवन में उनके घर के सामने प्रदर्शन आयोजित करता है, तो उसको सजा मिलेगी.

किसी भी व्यक्ति के बिना अनुमति के उसके मकान पर झंडा टांगने, उसकी भूमि का उपयोग करना भी अपराध की श्रेणी में आता है. कोई भी प्रत्याशी या उसके समर्थक अन्य प्रत्याशी के द्वारा आयोजित जुलूस या सभा में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके सजा का प्रावधान किया गया है.

बिना लाइसेंस प्राप्त किये किसी भी प्रत्याशी द्वारा प्रस्तावित सभा व जुलूस में लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जायेगा. ऐसा करने पर उसके लाउडस्पीकर एक्ट के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. वोटिंग के दिन भी शांतिपूर्ण मतदान में बाधा करने पर कार्रवाई का प्रावधान है.

सरकारी गांड़ी पर हाईकोर्ट का चला डंडा बगैर निबंधन के सड़क पर उतरा तो होगा जप्त

पटना हाई कोर्ट ने बगैर निबंधन के ही सड़कों पर घूम रही पटना नगर निगम की गाड़ियों के मामले को निष्पादित कर दिया।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने आदेश जारी किया है कि कोई भी सरकारी या अन्य सरकारी निकाय की गाड़ी बगैर निबंधन के सड़क पर खड़ी नहीं रह सकती।

पटना नगर निगम के मामले में कोर्ट ने इस लापरवाही पर अपनी नाराज़गी जताते हुए नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को चार महीने के भीतर जिम्मेदार अफसरों पर कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने निर्भय प्रशांत की जनहित याचिका को निष्पादित करते हुए ये आदेश दिया।

कोर्ट ने कड़ी टिपण्णी करते हुए कहा कि देश मे कानून से ऊपर कोई नही है।
जब मोटर वाहन कानून में कोई गाड़ी को निबंधन से छूट नही है, तो नगर निगम की गाड़ियां एक दिन भी आखिर बगैर निबंधन के कैसे सड़कों पर खड़ी रहती थी ? खण्डपीठ ने यह स्पष्ट आदेश जारी किया कि बगैर निबंधन के कोई भी सरकारी व निगम की गाड़ी एक दिन भी सड़कों पर खड़ी नही रहेगी।

कोर्ट में दायर हलफनामे को माने, तो पटना नगर निगम ने 925 गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन के लिए तकरीबन 2 करोड़ रुपये जमा किया।

वर्ष 2019 में राजधानी की सड़कों पर नगर निगम की करीब 925 गाड़ियां बगैर निबंधन व् बीमा के ही घूम रही थी।।

अपराधियों की अब खैर नहीं जनामत तभी मिलेगी जब आपके ऊपर अपराधिक मामला नहीं होगा दर्ज

पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह तय किया है कि प्रत्येक निचली अदालत को किसी आरोपी की जमानत अर्जी को निष्पादित करने से पूर्व लोक अभियोजक या अनुसंधान पदाधिकारी से यह जानकारी लेनी होगी कि उस आरोपी के विरुद्ध पूर्व में कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि संबंधित अनुसंधानकर्ता या लोक अभियोजक के लिए यह ज़रूरी है कि वह ज़मानत की अर्ज़ीदार के पिछले सभी आपराधिक मामलों का इतिहास अदालत के समक्ष पेश करे।

आरोपी के आपराधिक इतिहास पर पुलिस और अभियोजक से मिली जानकारी को हर निचली अदालत को आदेश में उल्लेख करना होगा, जिससे वो किसी ज़मानत अर्ज़ी को मंज़ूर या खारिज करेंगे। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की एकलपीठ ने अनिल बैठा की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश को पारित किया।

अदालतों से पूर्व के आपराधिक मामलों को छुपा कर ज़मानत लेने की गलत तरीको पर रोकथाम लगाने के लिए हाई कोर्ट ने ऐसा आदेश जारी किया है। इस आदेश की प्रति सभी जिला न्यायाधीश को देने का भी निर्देश हाई कोर्ट ने दिया है। विदित हो कि अनिल बैठा के मामले में जमानत अर्ज़ीदर पर 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे, लेकिन उसने अपनी किसी भी ज़मानत अर्ज़ी में स्पष्ट तौर पर पूर्व के सभी आपराधिक मामलों के बारे में जानकारी नहीं दी थी। पिछला आपराधिक इतिहास को छुपा कर ज़मानत लेने के इस प्रयास को कोर्ट के साथ धोखाधड़ी करार देते हुए हाई कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने के लिए भी राज्य सरकार को आदेश दिया है और हाई कोर्ट के महानिबंधक कार्यालय को निर्देश दिया है कि हाई कोर्ट के साथ इस तरह की धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज की जाए।

पंचायत चुनाव के दौरान नामांकन में गड़बड़ी पायी गयी तो चुनाव से आप हो सकते हैं बाहर

पंचायत चुनाव के प्रथम चरण के नामंकन का आज दूसरा दिन है अभी तक 900 सौ से अधिक प्रत्याशी नामांकन का पर्चा भर चुका हैं हलाकि आयोग ने इस नामांकन के दौरान कई तरह के गाइड लाइन जारी किया है जिसका अनुपालन नहीं करने पर प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो सकता है ।

राज्य चुनाव आयोग के गाइडलाइन के मुताबिक नामांकन के दौरान कई जरूरी काजगात भी जमा करने होंगे।. नामांकन पत्र के साथ जरूरी कागजात नहीं रहने तथा कागजात में किसी तरह की त्रुटि होने पर अभ्यर्थी का नाम नामांकन पत्र रद्द कर दिया जा सकता है ।

आयोग के द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाची पदाधिकारी नामांकन पत्र की बारिकी से जांच करेंगे.
अभ्यर्थी व प्रस्तावक के मतदाता क्रमांक में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर निर्वाची पदाधिकारी उसे ठीक करायेंगे. लेकिन जरूरी कागजातों में किसी तरह की त्रुटि होने पर तथा कागजात नामांकन पत्र के साथ संलग्न नहीं रहने पर नामांकन पत्र रद्द हो जायेगा़ ।

. आयोग के द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक नाम निर्देशन पत्र प्रपत्र 6, शपत्र पत्र, अनुसूची-1(बिहार पंचायत राज अनिधियम 2006 की धारा 136 के संबंध में), अनुसूची-2(मतदाता सूची में अभ्यर्थी व प्रस्तावक के नाम दर्ज होने से संबंधित घोषणा), अनुसूची-3 (शपथ पत्र व एनेक्शचर को दी जाने वाली सूचनाओं का प्रपत्र), अनुसूची 3 क (अपराध, संपत्ति व शैक्षणिक योग्यता के संबंध में), अनुसूची 3 ख (अभ्यर्थी का बायोडाटा) देना जरूरी है़ इसके साथ नाम निर्देशन शुल्क, चालान या नाजिर रसीद की मूल कॉपी नामांकन पत्र के साथ संलग्न करना जरूरी है.

पीएम से मिलकर स्वास्थ्य मंत्री ने भेंट की नये बन रहे पीएमसीएच की आकृति

पीएम से मिलकर स्वास्थ्य मंत्री ने भेंट की नये बन रहे पीएमसीएच की आकृति

पटना, 3 सितंबर। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में मिलकर बिहार में लगातार हो रही बड़ी संख्या में कोरोना जांच और टीकाकरण की विस्तृत जानकारी दी। खास कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टीका वाली नाव के द्वारा किये जा रहे टीकाकरण के संबंध में बताया गया। साथ ही माननीय प्रधानमंत्री का इमरजेंसी कोविड रिसपोंस पैकेज-2 के तहत केंद्र से मिलने वाले सहयोग के लिए श्री पांडेय ने आभार भी व्यक्त किया। श्री पांडेय ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री ने बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने एवं कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए राज्य सरकार को हर स्तर पर तैयारी करने की बात कही।

श्री पांडेय ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री को बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और बेहतर बनाने के उद्देश्य से किये जा रहे राज्य सरकार के प्रयासों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया। इसके अलावे कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर आधारभूत संरचनाओं का विस्तार के अलावे डाॅक्टर्स, नर्स एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की हो रही नियुक्ति के संबंध में भी जानकारी दी गई। श्री पांडेय ने बताया कि प्रधानमंत्री जी को दुनिया का दूसरा और देश के सबसे बड़े बन रहे 5 हजार 462 बेड के अस्पताल पीएमसीएच की आकृति भेंट की। माननीय प्रधानमंत्री ने इस कार्य के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की प्रशंसा भी की। श्री पांडेय ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बनाये जा रहे लगभग 16 सौ नये अस्पताल के भवनों (स्वास्थ्य उपकेंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) के निर्माण की जानकारी भी माननीय प्रधानमंत्री को दी गई।

मंत्री जी के क्षेत्र भ्रमण पर लगी रोक चुनाव प्रचार करते दिखे तो होगी कारवाई

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव को देखते हुए मंत्री ,विधायक और सांसद के क्षेत्र भ्रमण पर रोक लगा दिया है इस आदेश का ाअनुपालन नहीं करने वाले मंत्री ,विधायक और सांसद के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के तहत मामला दर्ज में ।आयोग के निर्देश के अनुसार केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री ही नहीं विधायक, विधान पार्षद और सांसद भी अपने सरकारी यात्रा को चुनावी यात्रा से बिल्कुल अलग रखेंगे। दोनों यात्राओं को एक साथ नहीं किया जाएगा।

मंत्री यदि जिला मुख्यालय या क्षेत्रीय स्तर के कार्यालयों तक सरकारी कार्यों के सिलसिले में जाते हैं और उसके बाद निजी वाहन के माध्यम से चुनावी यात्रा करते हैं तब भी पूरे दौरे को चुनावी दौरा माना जाएगा।

साथ ही वो उम्मीदवार जिनके साथ मंत्री देखे जाएंगे उसके चुनावी खर्चे में मंत्री के पूरे दौरे का खर्च जोड़ दिया जाएगा। सरकारी वाहन से लेकर सरकारी भवन के चुनाव कार्यों के लिए उपयोग पर भारतीय दंड संहिता की धारा 171 (c) के तहत कार्रवाई होगी। इसके तहत दोष सिद्ध होने पर तीन महीने कारावास की सजा या दो सौ रुपए आर्थिक दंड हो सकता है या दोनों ही हो सकता है। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है। इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट करेंगे।

रिकॉर्ड ऊंचाई पर शेयर बाजार; पहली बार सेंसेक्स 58100 के ऊपर, निफ्टी 17,300 के ऊपर बंद, रिलायंस सबसे आगे

हफ्ते के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 157 अंक या 0.3 फीसदी उछलकर 58140.33 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 87 अंक या 0.5 फीसदी बढ़कर 17321 पर पहुंच गया। मिडकैप इंडेक्स भी शुक्रवार को 104 अंक या 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 29,021 के स्तर पर पहुंच गया।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के शेयर 4 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ शीर्ष सूचकांक योगदानकर्ता थे। टाइटन कंपनी, बजाज-ऑटो, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज, एशियन पेंट्स शीर्ष सूचकांक प्राप्त करने वालों में से थे। इसके विपरीत, भारती एयरटेल का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिसमें 1.20 प्रतिशत की गिरावट आई। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल), एचडीएफसी बैंक, हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस लिमिटेड (एचडीएफसी), इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक सेंसेक्स में गिरावट में शामिल थे।

सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयर्स तेजी के साथ जबकि 11 शेयर्स कमजोरी के साथ बंद हुए। बीएसई पर कारोबार के दौरान 225 शेयर्स 52 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर और 16 शेयर्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

भारत में भी लोकतंत्र को बचाये रखना एक बड़ी चुनौती है

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया को लेकर बेहद कठोर टिप्पणी की है और कहा है कि ये कोर्ट के बारे में भी ताकतवर लोगों के इशारे पर लिखता रहता है ऐसे में इस पर कड़े कानून बनाये जाने कि जरुरत है।

सुप्रीम कोर्ट के इस ऑब्जरवेशन की तारीफ होनी चाहिए लेकिन सवाल यह है कि जिस तरीके से कोर्ट काम कर रही है, उसको लेकर कोर्ट खुद खमोश क्यों है कोर्ट में भ्रष्टाचार चरम पर है ,न्याय की खुल्लम खुल्ला बोली लगती है सब जानता है क्या ये बात कोर्ट को पता नहीं है ऐसे में सवाल करने पर भी रोक लगा दी जायेंगी तो फिर इसे क्या कहेंगे ये हिपोक्रेसी नहीं होगा ।
हाल ही पटना हाईकोर्ट ने सरकार से पुछा है कि ऐसे कितने सरकारी अधिकारी हैं जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं यही सवाल तो जज से भी होनी चाहिए थी कि कितने जज हैं जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। इसलिए सिर्फ सवाल करने और नसीहत देने से कोई भी संस्था ज्यादा दिनों तक चल नहीं सकती है ।

अफगानिस्तान इसका सबसे लेटेस्ट उदाहरण है चंद मिनट में ही चंद बंदूकधारी के सामने कोर्ट, सांसद ,पुलिस ,सेना और ब्यूोरोक्रेसी ताश की पत्तों की तरह बिखर गया क्यों? 20 वर्षो के दौरान लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था,सैन्य ताकत ,स्त्री स्वतंत्रता और मानवाधिकार के नाम पर जो संस्थान खड़े हुए उस संस्थान में नियुक्ति की जो प्रक्रिया रही वो जनता को रास नहीं आया।
आज ही भारतीय मीडिया में लीड खबर है जेेईई मेंस की परीक्षा में जबरदस्त खेला हुआ है आज की तारीख में गौर करे तो कोई भी ऐसी परीक्षा है जहां आप भरोसे के साथ कह सकते हैं कि सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है वैसे भारत में अभी भी परीक्षा में थोड़ी ईमानदारी बची हुई है इसलिए लोगों को सिस्टम पर भरोसा बचा हुआ है लेकिन यह भरोसा भी धीरे धीरे खत्म होता जा रहा है ।

मीडिया पर से भरोसा उठ ही गया है ,ब्यूरोक्रेसी हाफ ही रहा है ,न्याय व्यवस्था अपनी अंतिम सांस बचाये रखने के लिए संर्घष कर रहा है।

हमारे यहां सांसद और विधायक और मुखिया चुनने को लेकर जो संवैधिनाक प्रक्रिया है उसमें अब अच्छे लोगों के सांसद ,विधायक और मुखिया बनने की सम्भावना लगातार क्षीण होती जा रही है आने वाली राजनीति में लोहिया ,जेपी ,अटल बिहारी ,कर्पूरी ठाकुर, ,लालू ,नीतीश जैसे नेता पैदा होने की सम्भावना अब नहीं बची है।

ऐसे में आपके पास दुनिया का दूसरा तालीबान देश घोषित होने के लिए तैयार रहिए क्यों कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी लोकतंत्र को बने रहने के लिए जिस तरीके से संस्थान को मजबूत होना चाहिए था वो नहीं हो पाया ऐसे में पांच वर्ष में एक वोट के सहारे आप लोकतंत्र को बचाये नहीं रख सकते हैं यह यक्ष सवाल हमारे आपके सामने मुंह बाये खड़ा है ।

पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर सरकार का तेवर तल्ख कहा जेपी और लोहिया से समझौते का सवाल नहीं

जेपी और लोहिया के विचारों को बिहार के विश्वविधालय के पाठ्यक्रम से बाहर करने के मामले में राज्य सरकार राजभवन से दो दो हाथ करने के मूड में दिख रहा है आज राज्य के शिक्षा मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि इस मामले में महामहिम से मिलने का समय मांगा गया था लेकिन वो बिहार से बाहर है फिर उनसे मैंने फोन पर बात किया और एमए के पाठ्यक्रम में जो बदलाव हुआ है उससे सरकार के मंशा से अवगत करा दिया है और उम्मीद है कि राजभवन एमए के पाठ्यक्रम में जो बदलाव हुआ है उसको वापस ले लेगा ।

यह मामला बिहार के सारण स्थित जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय में जेपी और राममनोहर लोहिया के विचारों को पीजी के पाठ्यक्रम से हटाने की खबर के बाद सुर्खियों में था जिसको देखते हुए सरकार ने जेपी विश्वविधालय के कुलपति और रजिष्ट्रार को तलब किया था। कुलपति और रजिष्ट्रार से बातचीत के बाद शिक्षामंत्री विजय चौधरी सामने आए और सरकार का रुख साफ किया। शिक्षामंत्री ने कहा कि जयप्रकाश और लोहिया के विचारों की पढ़ाई जारी रहेगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार दूसरे विश्वविद्यालयों में भी ऐसे मामलों की जानकारी लेगी।

मीडिया से बात करते हुए विजय चौधरी ने कहा कि सीएम नीतीश ने खुद मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि सीबीसीएस लागू होने से बदलाव की बात कही जा रही है। चांसलर के आफिस ने सभी वाइस चांसलर को इसे भेज दिया था। कहा कि विश्वविद्यालय के स्तर पर भी इन चीजों को देखा जाना चाहिए था, उसके बाद लागू करने की बात होनी चाहिए थी।
शिक्षामंत्री ने कहा कि हम लोगों के समझ में यह बात भी नहीं आ रही कि सीबीसीएस का पाठ्यक्रम में इस तरह के परिवर्तन से क्या लगाव है। कुछ लोगों के राजनीतिक विचार को पाठ्यक्रम से अलग क्यों किया गया, यह समझ से परे है। कहा कि छपरा के कुलपति ने भी अपनी तरफ से कोई आदेश दिया हो ऐसी बात नहीं है। यह जिस रूप में हुआ है, हम लोग इसे उचित नहीं मानते हैं। सरकार के दृष्टिकोण से भी यह बिल्कुल अनुचित और अनियमित है। अभी तक जो परंपरा और नियम रहे हैं, उसके अनुसार भी ठीक नहीं है। नई शिक्षा नीति को लेकर भी यह गलत है।

जेपी-लोहिया के विचार बिना भारतीयता की सोच ही संभव नहीं
उन्होंने कहा कि अगर कोई परिवर्तन हुए और चांसलर आफिस से दिये गए तो बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद को भी उसकी जानकारी होनी चाहिए, जो नहीं हुई है। कुलपति ने भी अपनी पूरी सहमति जताई है कि यह उचित नहीं है, हम लोग इसके निराकरण का उपाय करेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया की सोच और विचार के बिना भारतीय राजनीति के दर्शन से समाजवाद, साम्यवाद और जेपी लोहिया के विचारों को अलग कर दिया जाएगा तो भारतीयता की सोच ही अलग हो जाएगी। यह लोग तो खालिस भारतीय विचारों के प्रतिबिंब हैं। उनके विचारों को कैसे अलग किया जा सकता है। कहा कि अभी तक इससे जुड़े कागजातों की पड़ताल नहीं हुई है। अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अन्य विश्वविद्यालयों की भी पड़ताल करें। हो सकते हैं वहां भी इसी तरह की दिक्कतें हों।

निफ्टी नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा; 17,200 के ऊपर बंद, सेंसेक्स 500 अंक से अधिक चढ़ा

साप्ताहिक एफएंडओ एक्सपायरी के दिन बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 रिकॉर्ड-उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहे थे। बीएसई सेंसेक्स 458 अंक या 0.80 प्रतिशत बढ़कर 57,788 पर था, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 0.80 प्रतिशत ऊपर 17,200 से ऊपर चल रहा था। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 17,245 का नया रिकॉर्ड बनाया।

सेंसेक्स के 30 में से 22 शेयर्स तेजी के साथ जबकि 8 शेयर्स कमजोरी के साथ बंद हुए। टीसीएस 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर । आईटी, एफएमसीजी शेयरों के नेतृत्व में निफ्टी नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा ।

डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज, टाइटन कंपनी, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एचडीएफसी बीएसई सेंसेक्स में शीर्ष पर रहे। एचसीएल टेक, एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, इंफोसिस, मारुति सुजुकी शीर्ष सूचकांक में पिछड़ गए।

सेंसेक्स के 30 में से 22 शेयर्स तेजी के साथ जबकि 8 शेयर्स कमजोरी के साथ बंद हुए।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

हाईकोर्ट ने तेज प्रताप से चुनाव के दौरान साक्ष्य छुपाने को लेकर मांगा जबाव

पटना हाईकोर्ट में राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सह विधायक तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका पर सुनवाई शुरु कर दिया है। तेज प्रताप यादव के हसनपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन कोलेकर विजय कुमार यादव ने चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दिया है।

कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से विवादित बिंदुओं को दाखिल किया गया। जस्टिस विरेन्द्र कुमार ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए इसे रिकॉर्ड पर रखने का आदेश दिया।
अब इस मामलें पर 30 सितंबर को सेटलमेंट ऑफ इशू और गवाही पर सुनवाई की जाएगी। गवाही में संबंधित पक्षकारों द्वारा उन दस्तावेजों और गवाहों की सूची भी दी जाएगी ,जो इस मुकदमें से जुड़े हुए होंगे।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व् विधायक तेज प्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि एक्ट, 1951 की धारा 100 का हवाला देते हुए तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने के लिए यह चुनाव याचिका दायर की गई हैं।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने यादव के निर्वाचन को अमान्य करार देकर हारे हुए जद यू के उम्मीदवार राज कुमार राय को घोषित करने करने के लिए चुनाव याचिका दायर की है।
यह मामला वर्ष 2020 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। याचिका दायर करने का आधार यादव द्वारा जानबूझकर अपनी संपत्ति के संबंध में पूरा ब्यौरा नहीं देने का आरोप लगाया गया है

याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि क़ानून की धारा 123(2) के अनुसार इसे भ्रष्ट आचरण बताया है।

3 नवंबर, 2020 को विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ था। 10 नवंबर, 2020 को चुनाव परिणाम घोषित किया गया था, जिसमें तेज प्रताप यादव हसनपुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र से विजयी हुए थे। अब इस मामले में आगे की सुनवाई आगामी 30 सितंबर को की जाएगी।

बालू माफिया से सांठगांठ मामले में डीएसपी के घर छापेमारी

बालू माफिया से सांठगांठ मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने कारवाई तेज कर दिया है आज पटना पालीगंज के तत्कालीन एसडीपीओ तनवीर अहमद के ठिकानों पर आर्थिक अपराध शाखा (ईओयू) ने छापेमारी की है। वे बालू के अवैध खनन में संलिप्तता के आरोप में निलंबित हैं। उनके पटना स्थित फ्लैट के अलावा बेतिया जिला के पैतृक घर की भी तलाशी ली जा रही है। इसके अलावा उनके नरकटियागंज अनुमंडल के मैनाताड़ थाना क्षेत्र के पीडारी गाँव में भी छापामारी चल रही है अहमद के पास आय से 60 प्रतिशत अधिक संपति पाई गई है।

डीएसपी का घर भारत-नेपाल सीमा पर है। ईओयू की इस कार्रवाई से पहले उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। निलंबित किए गए डीएसपी के खिलाफ बालू माफियाओं संग सांठगांठ के सबूत मिले हैं।इससे पहले आर्थिक अपराध इकाई ने बालू माफिया से सांठगांठ मामले में निलंबित डेहरी के तत्कालीन एसडीओ सुनील कुमार सिंह के तीन ठिकानों पर एक साथ छापानारी किया था । ईओयू ने पटना और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित उनके पैतृक आवास पर भी छापेमारी किय था। वहां कमरे की तलाशी लेने के साथ ही घर पर मौजूद निलंबित एसडीओ से घंटों पूछताछ कि गयी थी ।

चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के खर्च का सीमा किया निर्धारित

बिहार में पंचायत चुनाव का बिगुल बच गया है आज प्रथम चरण के चुनाव को लेकर दस जिलों के 12 प्रखंडों में नामांकन का काम शुरु हो गया है ।

वही इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के अधिकतम खर्च की सीमा निर्घारित कर दिया है ।
आयोग ने सभी पदों के क्षेत्र व जनसंख्या के अनुसार चुनाव में खर्च की सीमा तय कर दी है। मुखिया और सरपंच प्रत्याशी अधिकतम 40 हजार ही खर्च कर पाएंगे वही वार्ड सदस्य और पंच पद के प्रत्याशी अधिकतम 20 हजार रुपए तक चुनाव में खर्च कर सकते हैं।

जिला परिषद प्रत्याशी को एक लाख रुपए तक खर्च करने की छूट दी गई है। वहीं आयोग ने पंचायत समिति सदस्य के पद पर चुनाव लड़ने वालों के लिए अधिकतम 30 हजार रुपया खर्च की सीमा तय कर दी है।

सभी प्रत्याशी को तय सीमा में ही खर्च करनी है साथ ही चुनाव में खर्च की गई राशि का हिसाब भी सभी को देना पड़ेगा। प्रत्याशियों को मतों की गणना का कार्य संपन्न होने के बाद चुनाव खर्च का ब्यौरा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। अगर इस बार कोई प्रत्याशी खर्च का हिसाब नहीं देते हैं तो अगले चुनाव में वैसे प्रत्याशी चुनाव से वंचित रह सकते हैं।

सभी प्रत्याशियों को मतगणना की समाप्ति के 15 दिन के अंदर अपने खर्च का ब्यौरा निर्वाची पदाधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य होगा। जांच में किसी प्रत्याशी के खर्च की राशि अधिक होती है तो ऐसे में उस प्रत्याशी पर चुनाव आयोग के फैसले का उल्लंघन करने के खिलाफ में कार्रवाई की जाएगी।

भ्रष्ट इंजीनियर के खिलाफ विभाग की चुप्पी से मंत्री और विभागीय अधिकारियों के कार्यशैली सवालों के घेरे में ।

दरभंगा ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता को थाने से ही छोड़ने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है वही अभी तक विभाग द्वारा अभियंता पर कोई कारवाई नहीं किये जाने पर मंत्री सहित विभाग के प्रधान सचिव के मंशा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं ।

डीजीपी ने पूरे मामले में एसएसपी मुजफ्फरपुर से इंजीनियर मामले में बरामद राशी और एफआईआर के साथ साथ थाने के स्टेशन डायरी तक की कांपी मांगी है। जो खबर आ रही है उसके अनुसार स्टेशन डायरी और एफआईआर दर्ज करने के समय को लेकर कई तरह की त्रृटि है जिसका लाभ अभियुक्त को मिल सकता है हलाकि अब इस पूरे मामले की जांच आईजी मुजफ्फरपुर खुद देख रहे हैं।
इस बीच मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली को लेकर बिहार के पूर्व डीजीपी और बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त अभियान चलाने वाले अभयानंद का कहना है कि जो मीडिया रिपोर्ट है उसके अनुसार मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में हैं।

सरकारी सेवक के पास से नगद पैसा बरामद होता है और उस पर आदर्श आचार संहिता का मामला दर्ज होता है जो समझ से पड़े है क्यों कि सरकारी सेवक के मामले में कानून पूरी तौर पर स्पष्ट है अगर किसी भी सरकारी कर्मी के पास से नगद पैसा बरामद होता है और उस पैसे का अगर हिसाब नहीं बता रहा है तो तुंरत उस पर पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज करना है ।
वही मुजफ्फरपुर पुलिस खुद कह रही है कि इंजीनियर के पास से बरामद लैपटांप और मोबाइल के डाटा मालूम करने में इंजीनियर सहयोग नहीं कर रहे हैं ऐसे में थाने से बेल देना समझ से पड़े है।

सीआरपीसी की धारा 41 के तहत नोटिस देने का प्रावधान है लेकिन वैसे स्थिति में ना जब अभियुक्त पुलिस को सहयोग कर रही है दूसरी बात अभियुक्त के बाहर रहने से साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है लेकिन इंजीनियर मामले में सब कुछ सामने है थाने में रहते हुए छेड़छाड़ कर रहा था ऐसे में मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी ही है।
इस बीच मुजफ्फरपुर एसएसपी जयकांत से जब थाने से छोड़ने को लेकर सवाल किया गया तो उनका कहना है कि इस तरह के मामले में थाने से बेल देने का प्रावधान है ,बिहार पुलिस इससे पहले भी इस तरह के मामले में बेल देती रही है ऐसे में इस तरह के सवाल का कोई मतलब नहीं है ।मुजफ्फरपुर पुलिस इस मामले की पूरी गहनता से छानबीन कर रही है और एएसपी स्तर के अधिकारी को इस कांड का अनुसंधानकर्ता बनाया गया है ।

इस बीच इस मामले को लेकर विभागीयमंत्री जयंत राज से जब यह पुंछा गया कि आपके विभाग के एक सीनियर इंजीनियर के पास से 67 लाख रुपया बरामद हुआ है और उस पर मुकदमा भी दर्ज हुआ है फिर भी अभी तक कोई कारवाई नहीं हुई है इस पर मंत्री का कहना है कि इस मामले में विभाग भी अपनी ओर से जांच कर रहा है और शीघ्र ही समुचित कार्रवाई की जाएगी।

बिहार सरकार शिक्षा दिवस के मौके पर राज्य के 20 शिक्षक को करेंगे सम्मानित

बिहार सरकार इस साल शिक्षक दिवस पर राज्य के 20 शिक्षकों को सम्मानित करेगी. इस संबंध में सरकार की ओर से सूची जारी कर दी गई है. शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि इन शिक्षकों को राजकीय सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
शिक्षा विभाग की ओर से सूची जारी- शिक्षक दिवस के मौके पर जिन शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा, उनका नाम जारी कर दिया गया है.

  • निशि कुमारी (पटना)
  • धनंजय आचार्य (पटना)
  • कुमारी विभा (मधुबनी)
  • जितेंद्र कुमार (औरंगाबाद)
  • कंचन कामिनी (भोजपुर)
  • मनोज निराला (गया)
  • नसीम अख्तर (सारण)
  • राम एकबाल राम (मुजफ्फरपुर)
  • अमित कुमार (समस्तीपुर)
  • शिव नारायण मिश्र (मधुबनी)
  • प्रमोद कुमार (जहानाबाद)
  • राजीव कुमार (चंपारण)
  • शशिभूषण शाही (सारण)
  • नम्रता मिश्रा (भागलपुर)
  • पूनम यादव (सुपौल)
  • सुनीता सिन्हा (नालंदा)
  • भारती रंजन (दरभंगा)
  • श्रुति कुमारी (दरभंगा)
  • मंजू कुमारी (नवादा)
  • विभा रानी (बेगूसराय)

बिहार का एक और अधिकारी आय से अधिक संपत्ति मामले में पकड़ा गया

बिहार में भ्रष्टाचार किस कदर व्याप्त है उसकी बानगी आज राज्य सरकार के स्पेशल विजिलेंस के छापा के दौरान सामने आयी है ।

जी है नगर विकास विभाग के 2013 बैच के पदाधिकारी जो हाजीपुर नगर परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के पद से हाल ही सस्पेंड हुए हैं अनुभूति श्रीवास्तव के फ्लैट पर बुधवार को छापेमारी हुई। एक DSP की अगुवाई में स्पेशल विजिलेंस के 10 लोगों की टीम ने सुबह 7 बजे से ही दबिश दे रही है। पूरा मामला आय से अधिक की संपत्ति का है।

आरोप है कि अनुभूति श्रीवास्तव ने सरकारी पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार से जुड़े कई कांडों को अंजाम दिया है। अब तक वह अवैध रूप से करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्ति के मालिक बन चुके हैं। इनके खिलाफ काफी शिकायतें सरकार को भेजी जा रही थी, जिसके बाद इंटरनल जांच हुई। 18 अगस्त को ही इन्हें हाजीपुर नगर परिषद के मुख्य कार्यपाल पदाधिकारी के पद से सस्पेंड कर दिया गया था। फिर पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित स्पेशल विजिलेंस ने इनके खिलाफ FIR दर्ज की।

इसके बाद आज टीम ने राजधानी के रूकनपुरा इलाके के तिलक नगर में स्थित अर्पणा मेंशन में छापेमारी की।अभी तक जांच के दौरान सात वर्ष के नौकरी में अकूत सम्पर्ति अर्जित करने के प्रमाण मिले हैं जिसमें पटना में दो फ्लैट एक इंदौर में फ्लैट के साथ साथ एक करोड़ से अधिक निवेश और लगभग 75 लाख रुपया विभिन्न बैक खाते में जमा मिला है फिलहाल सारे कागजात और बैक खाते को विशेष निगरानी की टीम ने जप्त कर लिया है और इनके खिलाफ आय़ से अधिक सम्पत्ति मामले में प्राथमिकी दर्ज किया गया है ।

बिहार की शिक्षा व्यवस्था का हुआ भगवाकरण लालू प्रसाद ने सरकार पर लगाया आरोप

जयप्रकाश विश्वविधालय के पीजी कोर्स से जयप्रकाश नारायण,राममोहर लोहिया, दयानंद सरस्वती, राजाराम मोहन राय, बाल गंगाधर तिलक और एमएन राय जैसे महापुरुषों के विचार से जुड़े कोर्स को हटाये जाने को लेकर बिहार की सियासत भूचाल आ गया है । एक और जहां राज्य सरकार सकते में है वही लालू प्रसाद ने ट्टीट करके नीतीश और सुशील मोदी से सीधा सवाल किया और कहां है कि मैंने जयप्रकाश जी के नाम पर अपनी कर्मभूमि छपरा में 30 वर्ष पूर्व जेपी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। अब उसी यूनिवर्सिटी के सिलेबस से संघी बिहार सरकार तथा संघी मानसिकता के पदाधिकारी महान समाजवादी नेताओं जेपी-लोहिया के विचार हटा रहे है। जेपी-लोहिया हमारी धरोहर है, उनके विचारों को हटाना बर्दाश्त से बाहर है। सरकार अविलंब संज्ञान लेकर आवश्यक कारवाई करें।

वैसे विश्वविधालय का जो नया सिलेबस आया है उसमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय, सुभाष चंद्र बोस और ज्योतिबा फुले के विचार को जोड़ा गया है यह बदलाव राजभवन के द्वारा किया है इस बदलाव से जुड़ी खबर के आने के बाद सरकार के सामने मुसिबत यह है कि बीजेपी में भी बहुत सारे नेता ऐसे हैं जो जेपी आंदोलन से जुड़े रहे हैं और बिहार में जेपी आंदोलन को लेकर छवि यह है कि कांग्रेस के खिलाफ वो आंदोलन था और इसका लाभ बीजेपी को भी बिहार में मिलता है ऐसे में जेपी और लोहिया को सिलेबस से हटाना एनडीए की सरकार के लिए मुसिबत खड़ी कर सकती है ।

सेंसेक्स 214 अंक गिरकर 57,338 पर और निफ्टी 56 अंक गिरकर 17,076 पर हुआ बंद

घरेलू इक्विटी बाजार बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने सुबह के सभी लाभ मिटा दिए और बुधवार को लाल रंग में बंद हुए।

बीएसई सेंसेक्स 215 अंक या 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,338 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 56 अंक या 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,076 पर बंद हुआ।

मेटल और आईटी इंडेक्स में 1-1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि कैपिटल गुड्स, पावर और रियल्टी इंडेक्स में 1-5 फीसदी की तेजी आई। बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए।

निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी आईटी, निफ्टी मेटल और निफ्टी फार्मा इंडेक्स को छोड़कर निफ्टी सेक्टोरल इंडेक्स ज्यादातर हरे रंग में बंद हुए। बैंक निफ्टी 0,4 फीसदी की बढ़त के साथ 36,574.30 पर बंद हुआ

इससे पहले दिन में, बेंचमार्क उच्च स्तर पर खुला, जिसमें सेंसेक्स 366 अंक बढ़कर 57,918.71 के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया और निफ्टी 50 इंडेक्स 17,225.75 के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गया।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

बिहार का एक बार फिर सपना टूटा इथेनाँल निर्माण के मामले में केन्द्र सरकार ने नहीं दी छूट

बिहार को इथेनॉल का हब बनाने का सपना टूटा गया केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर करते हुए तेल कंपनियों ने बिहार के लिए एक वर्ष में मात्र 14 करोड़ लीटर इथेनॉल क्रय की सीलिंग तय कर दी है। यह मात्रा बमुश्किल चार यूनिट के जरिए ही पूरी हो जाएगी जबकि राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (एसआइपीबी) ने 28 मई से छह जुलाई के बीच कुल बिहार में इथेनॉल बनाने की फैक्ट्री लगाने को इक्छुक 138 प्रस्तावों को स्टेज-1 क्लियरेंस दिए थे ।

बिहार में गन्ना और मक्का से इथेनॉल निकालने की सम्भावना है शुरुआती दिनों में गन्ना को लेकर यह कहा जा रहा था कि उत्तर बिहार में जिस स्तर पर गन्ना का पैदावार हो रहा है उससे काफी मात्रा में इथेनॉल बनाया जा सकता है अभी भी सुगरकेन से जुड़ी कई फैक्ट्री इथेनॉल बनाने का काम कर रही है लेकिन गन्ना उत्पादन को लेकर जब अध्ययन किया गया तो पता चला कि चीनी मिल के रैवेय के कारण किसान गन्ना उत्पादन में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं इस वजह से गन्ना से इथेनॉल बनाने का सपना टूट गया ।

बिहार के पास दूसरा प्रोडक्ट मक्का है जिससे इथेनाँल निकाला जा सकता है लेकिन देश के अंदर मुर्गी दाना और पॉपकॉर्न के उत्पादन में मक्का का इतना अधिक मांग है कि इथेनाँल बनाने के लिए बिहार को सरप्लस मक्का है ही नहीं वैसे भारत सरकार ने बिहार को मक्का से इथेनाँल बनाने के लिए जो कोटा निर्धारित किया है उसमें अन्य राज्यों से तुलना करे तो बिहार के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है

क्यों कि पेट्रोलियम कंपनियों ने मक्का से इथेनाँल बनाए जाने वाले राज्यों का जो कोटा तय किया है उसमें कई राज्य ऐसे हैैं, जहां मक्का का उत्पादन नहीं के बराबर है। बिहार से वहां मक्का जाता है। इसके बावजूद भी उनका कोटा बिहार से ज्यादा तय किया गया है। दिल्ली का कोटा 33 करोड़ लीटर, झारखंड का 18 करोड़ लीटर, बंगाल का 35 करोड़ लीटर, केरल का 55 करोड़ लीटर तय किया गया है। जहां मक्का नहीं होता उन राज्यों के लिए भी मक्का से इथेनाँल का कोटा तय किया गया। असम में दस करोड़ लीटर, मेघालय में चार करोड़, मणिपुर में ढाई करोड़, अरुणाचल प्रदेश में दो करोड़, मिजोरम में एक करोड़ और सिक्किम के लिए एक करोड़ लीटर का कोटा तय किया गया है।सौ फीसद बायबैक का मामला तय नहीं हुआ
इथेनाल बनाने के लिए जिन यूनिटों को एसआइपीबी से स्टेज-1 का क्लियरेंस मिला था, उन्हें बैैंकों ने इस वजह से ऋण देने से मना कर दिया था कि वे अपने उत्पाद के विपणन की गारंटी उपलब्ध कराएं। ऐसे में राज्य के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से बात कर बिहार से इथेनाल के सौ फीसद बायबैक को लेकर करार करने की मांग की थी। हालांकि, इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ।

वर्तमान में पेट्रोल में दस प्रतिशत तक इथेनाल मिलाए जाने की अनुमति है। बिहार में प्रतिवर्ष 145 करोड़ लीटर पेट्रोल की खपत है। इस लिहाज से राज्य का कोटा तय हुआ। बिहार की वर्तमान क्षमता नौ करोड़ लीटर की है। चार करोड़ लीटर की क्षमता प्रक्रिया में है।

इथेनाल के प्रस्तावों को इस वर्ष मिला स्टेज-1 क्लियरेंस
28 मई को एसआइपीबी की बैठक में 13 यूनिट को
28 जून को एसआइपीबी की बैठक में 55 यूनिट को
06 जुलाई को एसआइपीबी की बैठक में 70 यूनिट को

बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने कहा कि राज्‍य को कम से कम 60 हजार करोड़ लीटर का कोटा मिलना चाहिए। बंगाल, झारखंड व पूर्वोत्तर राज्यों के अतिरिक्त दिल्ली का कोटा भी हमें तब तक मिल जाए जब तक इन राज्यों में मक्के का उत्पादन नहीं होता है। मैंने इस संबंध में केंद्र में बात की है। कहा गया है कि ग्रुप आफ मिनिस्टर के समक्ष इस मामले को रखा जाएगा।

रोजगार को लेकर तेजस्वी ने नीतीश कुमार पर बोला हमला कहां नौकरी देने का वादा कहां गया

नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर रोजगार को लेकर नीतीश सरकार को घेरा साथियों, एक रिपोर्ट के अनुसार विगत एक वर्ष में बिहार में 15 लाख नौकरियाँ और रोजगार समाप्त हुए है बल्कि एनडीए सरकार का 19 लाख नौकरियाँ और रोजगार देने का वादा था।

युवा विरोधी एनडीए सरकार 16 वर्षों से बेरोजगारी मिटाने और नौकरी देने वाली एक सुदृढ़ नीति भी नहीं बना पाई है। नौकरी देना तो बहुत दूर की बात है अब ये नौकरी छिनने में लगे है।

प्रदेश में नियमित नौकरियों में इतना भ्रष्टाचार और घूसखोरी है कि कोई योग्य अभ्यर्थी इसमें अपनी जगह बना ही नहीं पाता है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार इतनी नाकारा हो चुकी है कि विगत 16 वर्षों में बिहार में कोई उद्योग-धंधे नहीं लगे, कोई पूंजी निवेश नहीं हुआ, संगठित-असंगठित क्षेत्र में रोजगार और नौकरियों के अवसर उत्पन्न हुए ही नहीं क्योंकि सरकार की तरफ़ से कोई सकारात्मक पहल नहीं की जा रही है।

कुटीर और घरेलू उद्योगों के लिए सरकारी अनुदान और प्रोत्साहन राशि पाने में घूसखोरी, अफसरशाही और लाल फीताशाही की इतनी दीवारें हैं कि बिना भाई भतीजावाद और रिश्वत के इसे पाना असंभव है।

मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल भ्रष्ट इंजीनियर को थाने से ही मिला बेल

बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर एक कहावत बहुत प्रचलित है खीरा चोर को जेल और हीरा चोर को बेल मुजफ्फरपुर पुलिस कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिस इंजीनियर के पास से 67 लाख रुपया केस बरामद हुआ है उसको थाने पर से ही बेल दे दिया गया है ,जबकि खुद थाना अध्यक्ष लिखित में स्वीकार किया है कि इंजीनियर अनुसंधान में सहयोग नहीं कर रहे हैं कोर्ट में पुलिस आवेदन दिया है कि लैपटांप और मोबाइल खोलने में इंजीनियर सहयोग नहीं कर रहे हैं इस वजह से इसमें क्या साक्ष्य है पता नहीं चल पा रहा है ऐसे में लैपटांप और मोबाइल की जांच के लिए एक्सपर्ट के पास भेजने की अनुमति दी जाये ,इंजीनियर पर अब जो मामला दर्ज हुआ है उसके तहत आईपीसी की धारा 424 और भ्रष्टाचार निवारण की धारा 13 (1बी) लगाया है हलाकि इसमें सात वर्ष के सजा का प्रावधान है ऐसे में आप थाना से जमानत दे सकते हैं लेकिन जो अपराधी आपको अनुसंधान में सहयोग नहीं कर रहा है उसको आप थाने से बेल कैसे दे दिए ये एक बड़ा सवाल मुजफ्फरपुर पुलिस से हैं क्यों कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अधिकांश मामले में पुलिस सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में थाने पर से बेल नहीं देता है फिर इस इंजीनियर से किस बात का मोहब्बत मुजफ्फरपुर पुलिस को सामने आकर कहना चाहिए वही पांच दिन बाद भी इस मामले को लेकर राज्य में भ्रष्टाचार को लेकर गठित कोई भी एजेंसी अभी तक इस मामले को टेक ओभर नहीं किया है ऐसे कई सवाल है जिसको लेकर पुलिस मुख्यालय से लेकर मुजफ्फरपुर पुलिस तक चुप्पी साधे हुए हैं ऐसे में संदेश और सवाल स्वभाविक है कौन है इंजीनियर का रहनुमा जिसके सामने पूरी सरकार मूक दर्शक बनी हुई है और इंजीनियर कह रहा है कि बिहार में वर्क कल्चर ऐसा है कि पैसा लेना पड़ता है इसलिए ज्यादा सवाल मत करिए मुंह खोल दूं तो पटना तक में भूचाल आ जाएगा ।

पंचायत चुनाव में इस बार जिला मुख्यालय में होगी मतगणना

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के मतगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया है इस बार मतगणना जिला मुख्यालय में होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने बिहार के सभी डीएम को पत्र जारी करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी परिस्थिति मतगणना प्रखंड या अनुमंडल स्तर पर नहीं होगा ।


आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि मतपेटियों को प्रखंड मुख्यालय की बजाय जिला स्तर पर ही संग्रहण केंद्र बनाएं। वहीं पर ईवीएम और बैलेट बॉक्स को रखने की व्यवस्था करें।


पंचायत चुनाव में पहले प्रखंड स्तर पर ही मतगणना होती थी लेकिन इस बार व्यवस्था बदल दी गई है। मतगणना स्थल पर बनाए जाने वाले संग्रहण केंद्र पर पंचायतवार रीसिविंग काउंटर बनाया जाएगा। दो या तीन पंचायत पर एक काउंटर की व्यवस्था की जाएगी। मुख्य काउंटर के पीछे पदवार ईवीएम एवं मतपेटिका को प्राप्त करने के लिए पांच सब काउंटर भी बनाए जाएंगे। सब काउंटर से पदवार चिन्हित ब्रजगृह में संबंधित पद के लिए ईवीएम एवं आवश्यक प्रपत्र(पीठासीन पदाधिकारी की घोषणा, मतपत्र लेखा एवं पेपरसिल लेखा) को पदवार चिन्हित वज्रगृह में रखा जाएगा।


मतगणना स्थल पर प्रत्येक पंचायत के लिए पांच व्रजगृह बनाए जाएंगे, जिसमें अलग-अलग पद के लिए जैसे ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य तथा जिला परिषद सदस्य के लिए होगा। पंच और सरपंच पद के लिए अलग से एक अतिरिक्त कक्ष बनाया जाएगा।

बाढ़ से बेहाल बिहार रेलवे पुल पर दवाब की वजह से मिथिलाचंल का देश से सम्पर्क टूटा

हायाघाट के पास रेलवे पुल पर पानी के दबाव के कारण जयनगर रेलखंड पर कई ट्रेनों का परिचालन ठप हो गया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से रेलवे प्रशासन ने जयनगर-भागलपुर एक्सप्रेस वे, जयनगर-समस्तीपुर पैसेंजर सहित कई ट्रेनों को रद कर दिया है।इसके साथ ही गंगासागर एक्सप्रेस सहित कुछ ट्रेनें समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और बरौनी से चलाए जाने की खबर है। पवन और शहीद एक्सप्रेस सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर के रास्ते चलेंगी। ट्रेनों के रद होने और रूट डायवर्जन के लिए रेल यात्रियों को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है।

01 सितंबर को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान करने वाली वैसी ट्रेनें जिनका परिचालन रद्द किया गया है-

  • 05549 जयनगर-पटना स्पेशल ट्रेन
  • 05550 पटना-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05553 भागलपुर-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05554 जयनगर-भागलपुर स्पेशल ट्रेन
  • 05589 समस्तीपुर-दरभंगा स्पेशल ट्रेन
  • 05590 दरभंगा-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन
  • 05593 समस्तीपुर-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05594 जयनगर-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन
  • 05283 मनिहारी-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05284 जयनगर-मनिहारी स्पेशल ट्रेन 03225 जयनगर-राजेंद्र नगर टर्मिनल स्पेशल ट्रेन
  • 03226 राजेंद्र नगर टर्मिनल-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 03227 सहरसा-राजेंद्र नगर टर्मिनल स्पेशल ट्रेन
  • 03228 राजेंद्र नगर टर्मिनल-सहरसा स्पेशल ट्रेन
  • 05559 दरभंगा-अहमदाबाद स्पेशल ट्रेन

सोशल मीडिया के सहारे पंचायत चुनाव पर आयोग की रहेगी नजर

बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर आयोग पहली बार सोशल मीडिया पर उम्मीदवारों की मॉनिटरिंग करेगा. चुनाव के दौरान किसी भी गड़बड़ी की शिकायत के लिए चुनाव आयोग के द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है.ऐप के माध्यम से मतदाता शिकायत दर्ज करा सकेंगे. आयोग ने शिकायत पर त्वरित कारवाई करने के लिए हेल्पलाइन नंबर18003457243 जारी किया है. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की ऑनलाइन निगरानी कि विभिन्न की सुविधाएं इस बार पंचायत चुनाव में देखने को मिलेगी.


जागरूकता के लिए सोशल मीडिया का सहारा- बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग (bihar state election commission) ने पंचायत चुनाव पर विशेष गीत भी लांच किया है. ये है बिहार जय जय बिहार गीत को कलर ट्यून के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा मतदाताओं से मतदाता सूची की तैयारी और मतदान केंद्रों की स्थापना को लेकर संवाद स्थापित किया जा रहा है.


बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल- बिहार के पंचायत चुनाव में पहली बार बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. राज्य में बोगस वोटिंग रोकने के लिए मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. बायोमेट्रिक के लगने से मतदाता दो बार मतदान नहीं कर सकेंगे. ईवीएम का प्रयोग- बिहार पंचायत चुनाव में पहली बार ईवीएम का प्रयोग किया जाएगा. राज्य में मुखिया (Mukhia), जिला परिषद, वार्ड सदस्य और पंचायत समिति पद के लिए मतदाता ईवीएम से वोट कर सकेंगे. वहीं पूरे चुनाव में ईवीएम मशीन और पोलिंग पार्टी को भी ऑनलाइन ट्रैकिंग की जायेगी. ईवीएम (EVM) मतदान केंद्र से कब निकली और मतगणना कक्ष तक कितनी देर में पहुचेगी इसकी जानकारी जीपीएस के माध्यम से मिल सकेगी.पोलिंग पार्टी भी मतगणना केंद्र पर कब पहुचेगी इसकी भी ऑनलाइन ट्रैकिंग की जायेगी

शताब्दी भवन के तोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग (शताब्दी भवन )के पास मजार से सटे एक बहुमंजिली इमारत के हुए अवैध निर्माण को तोड़ने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। जस्टिस यू यू ललित की पीठ ने राज्य सरकार व अन्य की अपील पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट के इस मामलें में बहाल amicus curie वरीय अधिवक्ता राजेंद्र नारायण को जारी किया हैं।

इससे पूर्व जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय जजों की बेंच ने इस मामलें पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। जजों की पाँच सदस्यीय बेन्च ने बहुमत के निर्णय से इस भवन निर्माण को अवैध करार देते हुए एक माह के भीतर तोड़ने का आदेश दिया था ।
इस भवन के निर्माण पर कोर्ट ने तत्काल रोक लगाते हुए राज्य सरकार से पूछा था कि क्या इसके निर्माण को लेकर पटना हाईकोर्ट और पटना नगर निगम से भी अनुमति ली गई थी ?

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया था कि नई बिल्डिंग से सटे मजार के करीब वक्फ बोर्ड का चार मंजिला कार्यालय बन रहा है। कार्यालय के सबसे नीचे मुसाफ़िर खाना बन रहा है।
य़ह तिमंजिला भवन है एवं नए इमारत के निर्माण में किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी ।
इस पर जजों ने कहा था कि यह गलत तरीके से बना है।बिल्डिंग बाय लॉ की धारा 21 में स्पष्ट कहा गया है कि विधान सभा , राजभवन और हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील से सटे कोई दूसरी बिल्डिंग नहीं बनाई जा सकती है। साथ ही इसकी उँचाई 10 मीटर से अधिक नहीं हो सकती हैं।इस मामलें पर नोटिस का जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पुनः सुनवाई करेगा।

भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के जीरो टांलरेंस के दावे की खुली पोल इंजीनियर ने कहा मुंह खोलूंगा तो सरकार हिल जाएगी ।

सरकार भले ही भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात करता है लेकिन पिछले 72 घंटे से एक इंजीनियर जिस तरीके से पूरी सरकार को लील डाउन कराये हुए है यह देख कर मेरे जैसा पत्रकार भी हैरान है कि नीतीश कुमार के सीएम रहते हुए सिस्टम इतना लाचार बेवस और कमजोर कैसे हो सकता है ।


जी है मैं बात कर रहा हूं दरभंगा जिले में ग्रामीण कार्य विभाग में पदस्थापित अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार की जिन्हें मुजफ्फरपुर पुलिस ने तीन दिन पहले 18 लाख रुपया केस के साथ पकड़ा है हलाकि उसके पास दो करोड़ से ज्यादा पैसा था ऐसी खबरे हम लोग के पास आ रही थी ।


खैर मैंने जब मुजफ्फरपुर एसएसपी जयकांत से खुद बात किया तो इन्होंने कहा कि संतोष जी 30 लाख रुपया बरामद हुआ है हमलोग भी सून रहे हैं कि दो करोड़ इसके पास था लेकिन गांड़ी में इतना ही है आर्थिक अपराध इकाई और इनकमटैक्स को सूचना दे दिए हैं वो लोग आ रहे हैं जो कारवाई करे वो लोग। एसएसपी मुजफ्फरपुर से हमारी बात दोपहर दो बजे के करीब हुई थी शाम में एएसपी वेस्ट सैयद इमरान मसूद ने कहा कि इंजीनियर के पास से 18 लाख रुपया बरामद हुआ है और इंजीनियर पर पंचायत चुनाव को लेकर राज्य में जारी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी है जिसमें इस समय नगद पैसे लेकर चलने पर रोक है ।


ये समझ से पड़े कि बात है कि एक सरकारी इंजीनियर जिसके विभागीय गांड़ी से 18 लाख रुपया नगद पैसा बरामद होता है और उस पर मुखिया चुनाव वाले धारा के तहत मामला दर्ज होता है ,और इससेे बड़ी बात यह है कि एएसपी वेस्ट को जब मीडिया वाले ने इंजीनियर को मीडिया के सामने लाने को कहां तो इस तरह भड़क गये जैसे मीडिया वाले कोई अपराध कर दिया हो अभी तक इंजीनियर की तस्वीर किसी मीडिया के पास नहीं है।


खैर मुजफ्फरपुर पुलिस उसी दिन शाम में थाना पर से ही इंनजीयिर को जमानत दे दिया हलाकि इस मामले में एएसपी और एसएसपी दोनों से सवाल किया गया तो अधिकारिक तौर पर कोई जबाव नहीं दिया गया फिर दूसरे दिन खबर आती है कि इंजीनियर के दरभंगा और पटना स्थित आवास पर छापा मारा गया तो 49 लाख रुपया नगद उसके आवास से बरामद हुआ।
49 लाख रुपया की बरामदगी के बावजूद अभी तक पुलिस यह तय नहीं कर पा रही है कि इस इंजीनियर के साथ करे क्या ,वैसे खबर आ रही है कि इंजीनियर पुलिस को पुछताछ में सहयोग नहीं कर रही है इसलिए अब इनको बेल दे कर छोड़ दिया जाये अभी वो पुलिस हिरासत में है या फिर पुलिस उसको छोड़ दिया है हलाकि अधिकारिका तौर पर पूरा सिस्टम खामोश है कोई भी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है ।


बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री के अंदर तीन विभाग है विशेष निगरानी ,निगरानी और आर्थिक अपराध इकाई जिसके अधिकारी सीधे सीएम को रिपोर्ट करते हैं एक इंजीनियर के पास से 67 लाख रुपया कैस बरामद हो रहा है लेकिन ये सारी ऐजेंसी ऐसे खामोश है जैसे ये कोई साधारण बात है आर्थिक अपराध इकाई की एक टीम पहुंची हुई है लेकिन चार दिन होने को है लेकिन अभी तक कोई बड़ी कारवाई नहीं हुई है ।


ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि ये इंजीनियर कौन है क्यों कि चैन छिनतई में एक पूर्व विधायक के बेटा की गिरफ्तारी हुई तो पुलिस भी और हम मीडिया वाले भी बड़े बड़े अंक्षर में लिख रहे हैं दिखा रहे हैं लेकिन इस इंजीनियर को लेकर पूरा सिस्टम खामोश है कहां जा रहा है कि इस इंजीनियर का रिश्ता सत्ता में बैठे ऐसे लोगों से हैं जो इन दिनों सरकार के नाक के बाल बने हुए हैं इसलिए कारवाई करने से सब बच रहा है ।सबसे बड़ी बात है ग्रामीण कार्य विभाग के एक सीनियर इंजीनियर चार दिनों से पुलिस के हिरासत में है और विभाग ऐसे खामोश है जैसे कुछ हुआ ही नहीं है ।

पंचायत प्रतिनिधियों के असहज मौत पर राज्य सरकार देंगी मुआवजा

पंचायत चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों को लेकर कई तरह के फैसले लिए हैं जिसमें मुखिया ,सरपंच के क्षेत्राधिकारी के साथ साथ अब कार्यकाल के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों की मौत होने पर सरकार मुआवजा का भी प्रावधान किया है ।

राज्य निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, चुनावी व्यवस्था के तहत जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति प्रमुख, उप प्रमुख, पंचायत समिति के सदस्य, मुखिया, उप मुखिया, ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम कचहरी सरपंच, उप सरपंच और ग्राम कचहरी के पंच चुनाव जीतते हैं और कार्यकाल के दौरान उनकी आपराधिक घटना, प्राकृतिक आपदा या हिंसात्मक घटना और दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो उनके स्वजन को सरकार की ओर से पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। मृत्यु की स्थिति में राशि स्वीकृति का अधिकार सरकार ने जिलाधिकारी को दिया है।

चारा घोटाला से जुड़े जांच अधिकारी का हुआ तबादला

बहुचर्चित चारा घोटाला से जुड़े सीबीआई के दो जांच अधिकारी बीके सिंह और दशरथ मुर्मू का रांची से पटना एवं कोलकाता स्थानांतरण किया गया है। एसपी स्तर के दोनों सीबीआई अधिकारी वर्तमान में रांची सिविल कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित चारा घोटाला के दो मामले आरसी 47ए/ 1996 और आरसी 48 ए/1996 के जांच पदाधिकारी रहे हैं । पूर्व में पटना हाईकोर्ट और बाद में झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई के सीनियर अधिकारी चारा घोटाला मामले की सुनवाई में लगातार मॉनिटरिंग कर रहे थे। मामले की सुनवाई बाधित न हो इस वजह से झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों के तबादले पर रोक लगा रखी थी। 

मालूम हो कि रांची में चारा घोटाले से जुड़े कुल 53 मामलों को सुनवाई के लिए रांची सिविल कोर्ट भेजा गया था। जबकि  11 मामलों की सुनवाई पटना स्थित सिविल कोर्ट में चली। रांची सिविल कोर्ट के स्पेशल जज ने अभी तक 51 मामलों का निष्पादन कर अपना फैसला सुना दिए हैं। जबकि चारा घोटाला के दो बड़े मामले अभी भी सुनवाई के लिए लंबित है। सीबीआई अधिकारी बीके सिंह लालू प्रसाद से जु़ड़े चारा कांड संख्या आरसी 47 ए /1996 के जांच अधिकारी हैं। जबकि सीबीआई के दूसरे अधिकारी दशरथ मुर्मू आरसी 48 ए/1996 के जांच पदाधिकारी हैं।