बिहार सरकार ने अवैध खनन और टैक्स चोरी पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे राज्य में खनिजों की आवाजाही करना अब पहले से ज्यादा महंगा हो जाएगा। यह निर्णय न केवल राजस्व में वृद्धि करेगा, बल्कि अवैध खनन और टैक्स चोरी के माध्यम से होने वाली काली कमाई को भी रोकेगा।
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके तहत, बिहार की सीमा में प्रवेश करने वाले सभी खनिज लदे वाहनों को अब ट्रांजिट पास दिखाना अनिवार्य होगा। यह पास वाहनों को सीमा पर ही जारी किया जाएगा और इसके लिए वाहन मालिकों को एक निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।
इस शुल्क की दरें वाहनों में लदे खनिजों की मात्रा और प्रकार पर आधारित होंगी। अगर वाहन में वजन के हिसाब से खनिज लादे गए हैं, तो प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से 60 रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं, अगर आयतन के हिसाब से खनिज लादे गए हैं, तो प्रति घनमीटर के हिसाब से 85 रुपये का भुगतान करना होगा।
बिहार में खनिजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सीमा पर हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो सीधे मुख्यालय के कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे। यह व्यवस्था न केवल अवैध खनन और टैक्स चोरी को रोकेगी, बल्कि राजस्व में भी वृद्धि करेगी।
बिहार में बालू, स्टोन चिप्स, मोरम और स्टोन डस्ट जैसे लघु खनिजों का परिवहन अक्सर विवादों और अवैध वसूली के घेरे में रहता है। लेकिन अब, सीमावर्ती जिलों के प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बिना वैध ट्रांजिट पास के एक भी वाहन को सीमा पार नहीं करने दिया जाए।
इस नई व्यवस्था से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि खनिज परिवहन भी पारदर्शी और जवाबदेह होगा। जो खनिज पहले चोरी-छिपे बिहार में खपा दिए जाते थे, अब उनका एक-एक पैसा सरकारी खाते में जमा होगा। यह व्यवस्था निर्माण कार्यों के लिए दूसरे राज्यों से सामग्री मंगवाने वाले लोगों और ठेकेदारों के लिए भी फायदेमंद होगी, क्योंकि अब उन्हें अपने कागज पक्के रखने होंगे, वरना सीमा पर ही उनकी गाड़ी जब्त हो जाएगी।