बिहार के बिहार राज्य में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले एक मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। दरभंगा जिले में कथित ‘लव जिहाद’ प्रकरण में फरार चल रहे मुख्य आरोपी की संपत्ति को पुलिस ने कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई तब की गई जब आरोपी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पुलिस को खुली चुनौती दी और गिरफ्तारी से बचता रहा। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत आरोपी के घर से दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर, चारपाई, अलमारी समेत अन्य घरेलू सामान जब्त कर थाने में जमा कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला दरभंगा जिले के कमटौल थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां एक नाबालिग लड़की के अपहरण और कथित धर्मांतरण से संबंधित प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया कि आरोपी ने प्रेम संबंध के बहाने लड़की को बहलाया-फुसलाया और उसे अपने साथ ले गया।
एफआईआर में मुख्य आरोपी के रूप में मोहम्मद सितारे नदाफ का नाम दर्ज है। परिजनों का आरोप है कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं। साथ ही उस पर पूर्व में भी आपराधिक मामले दर्ज होने की बात कही गई है।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू किए। लेकिन आरोपी लगातार फरार रहा।
गिरफ्तारी से बचता रहा आरोपी
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश में कई जगहों पर छापेमारी की। स्थानीय स्तर पर दबिश दी गई, रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ की गई, लेकिन आरोपी हाथ नहीं आया।
पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी के घर पर इश्तेहार चिपकाया और उसे आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी। सामान्यतः ऐसी कार्रवाई के बाद आरोपी अदालत में पेश हो जाता है या पुलिस के सामने सरेंडर कर देता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई चुनौती
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब सोशल मीडिया पर आरोपी का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में वह कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई का मजाक उड़ाता दिखाई दिया। वीडियो में उसने संकेत दिया कि पुलिस उसे पकड़ नहीं पाएगी और वह कानून से नहीं डरता।
यह वीडियो तेजी से व्हाट्सऐप, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर फैल गया। इससे न केवल पुलिस की छवि को चुनौती मिली बल्कि स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति भी बनने लगी।
पुलिस अधिकारियों ने इसे कानून के प्रति खुली अवमानना माना। उनका कहना था कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।
पुलिस की सख्त कार्रवाई: संपत्ति कुर्क
आखिरकार, पुलिस ने अदालत से आदेश प्राप्त कर आरोपी की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की। इस कार्रवाई की निगरानी शुभेंद्र कुमार सुमन ने की।
पुलिस टीम ने आरोपी के घर पहुंचकर वहां मौजूद घरेलू सामान जब्त किया। कुर्की के दौरान दरवाजे, खिड़कियां, बिस्तर, कुर्सियां, मेज, अलमारी आदि सामान जब्त कर थाने में जमा किया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की संबंधित धाराओं के तहत की गई है, जो फरार अभियुक्त की संपत्ति कुर्क करने की अनुमति देती हैं, यदि वह बार-बार नोटिस के बावजूद आत्मसमर्पण नहीं करता।
क्यों जरूरी समझी गई यह कार्रवाई?
पुलिस का तर्क है कि:
- आरोपी लगातार गिरफ्तारी से बच रहा था।
- उसे कई बार आत्मसमर्पण के लिए कहा गया।
- उसने सोशल मीडिया पर पुलिस को चुनौती दी।
- मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सार्वजनिक शांति बनाए रखना जरूरी था।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल आरोपी को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से की गई है और कानून के दायरे में रहकर की गई है।
सामाजिक और राजनीतिक असर
‘लव जिहाद’ शब्द अपने आप में बेहद संवेदनशील और विवादास्पद है। ऐसे मामलों में अक्सर सामाजिक तनाव बढ़ जाता है। दरभंगा में भी घटना के बाद दोनों समुदायों के बीच चर्चा और तनाव की स्थिति देखी गई।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इलाके में पुलिस बल बढ़ाया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक नेताओं से भी शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति कुर्क करना एक असाधारण कदम है, जिसे सामान्यतः तब अपनाया जाता है जब आरोपी लगातार फरार रहे और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग न करे।
हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब तक अदालत दोष सिद्ध न कर दे, तब तक इस तरह की कार्रवाई पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कुर्की दोष सिद्धि नहीं है, बल्कि आरोपी को कानून के दायरे में लाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
डिजिटल युग में अपराध और चुनौती
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आज कानून-व्यवस्था के मामलों में किस तरह भूमिका निभा रहे हैं।
पहले जहां आरोपी छिपकर रहता था, अब वह सोशल मीडिया के माध्यम से बयान जारी कर सकता है, वीडियो अपलोड कर सकता है और सार्वजनिक धारणा को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है।
इस मामले में भी वायरल वीडियो ने पुलिस की रणनीति को बदलने में अहम भूमिका निभाई।
पीड़िता और परिवार की स्थिति
पीड़िता के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आरोपी के खुलेआम वीडियो जारी करने से वे मानसिक रूप से आहत थे।
परिवार का आरोप है कि आरोपी ने उनकी बेटी को बहकाया और सामाजिक बदनामी का भय दिखाया। उन्होंने प्रशासन से न्याय की मांग की है।