बिहार में बच्चों की चोरी और तस्करी की घटनाओं पर नकेल कसने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सीआईडी (कमजोर वर्ग) के एडीजी डॉ. अमित जैन ने राज्य में 44 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) के गठन का ऐलान किया है, जो एयरपोर्ट से लेकर जिलों तक सुरक्षा का नया नेटवर्क तैयार करेंगी।
इन यूनिटों का नेतृत्व इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे, जबकि जिला स्तर पर नोडल पदाधिकारी पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) होंगे। एयरपोर्ट अक्सर तस्करी के संवेदनशील ट्रांजिट पॉइंट होते हैं, इसलिए यहां चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित की गई है। अब किसी भी बच्चे को संदिग्ध परिस्थितियों में ले जाने वाले व्यक्ति की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई होगी।
बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में अब जांच को लंबित नहीं रहने दिया जाएगा। बिहार में लागू नई व्यवस्था के तहत यदि कोई बच्चा चार महीने तक बरामद नहीं होता है, तो उसका केस स्वतः जिला स्तर की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सौंप दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ जांच तेज होगी, बल्कि संगठित तस्करी गिरोहों तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी।
राज्य के 1196 थानों को राष्ट्रीय स्तर के मिशन वात्सल्य पोर्टल से जोड़ दिया गया है, जिससे गुमशुदा और बरामद बच्चों का डाटा अपलोड किया जा सके और जानकारी देशभर में साझा हो सके। साल 2025 के आंकड़े बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं। बिहार में बीते वर्ष कुल 14,699 बच्चों की गुमशुदगी दर्ज की गई, जिनमें से 7,772 बच्चों को अब तक सुरक्षित बरामद किया जा चुका है। शेष 6,927 बच्चों की तलाश जारी है और पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को पुराने मामलों की गहन समीक्षा करने का निर्देश दिया है।