वर्ष 2025‑26 में राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक संस्थानों ने आयु‑सीमा में लचीलापन लाने की आवाज़ उठाई थी, परन्तु बिहार में इस दिशा में कोई स्पष्ट नीति नहीं बन पाई थी। इससे कई छात्रों ने अपनी थीसिस जमा करने में विलंब किया, जबकि कुछ ने विदेश में अवसर तलाशे। इस प्रक्रिया में, कई पीएचडी होल्डर्स को अस्थायी असाइनमेंट मिलने के बजाय अस्थायी अनिश्चितता का सामना करना पड़ा।
गर्दनीबाग परिसर में अनशन के दौरान छात्रों ने टेंट, पैनल और सूचना बोर्ड लगाकर अपनी माँगें स्पष्ट कीं। उन्होंने मुख्यतः पाँच मांगें रखीं: (१) सहायक‑प्राध्यापक भर्ती आयु‑सीमा को 55 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष करना, (२) चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, (३) रिज़ल्ट के बाद शीघ्र नियुक्ति, (४) शोध छात्रवृत्ति में वित्तीय सहायता को बढ़ाना, और (५) मौजूदा नियमावली में संशोधन हेतु एक निरंतर निगरानी समिति बनाना।
अनशन के पहले दो हफ्तों में छात्रों ने विभिन्न राष्ट्रीय समाचार माध्यमों में अपनी स्थिति को उजागर किया। इस दौरान, कई विश्वविद्यालय‑प्रशासनिक अधिकारी और शैक्षणिक विभाग के प्रमुख भी इस मुद्दे पर चर्चा में शामिल हुए। छात्रों ने स्थानीय राजनेताओं को भी अपने आंदोलन में सहयोग के लिए कहा, जिससे राजनीतिक दबाव बढ़ा।
राज्यपाल के साथ हुई चर्चा में इन पाँच बिंदुओं को क्रमशः विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया गया। प्रतिनिधि दल ने बताया कि आयु‑सीमा के संबंध में एक कार्यसमिति गठित की जाएगी, जिसमें छात्र प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के प्रबंधन और विशेषज्ञ शामिल होंगे। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिये डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग प्रस्तावित किया गया।
वार्ता के बाद छात्रों ने कहा कि वे अब अनशन समाप्त कर रहे हैं, परन्तु उन्होंने यह भी कहा कि यदि सहमत शर्तें पूरी नहीं होतीं तो वे पुनः आंदोलन को सक्रिय करेंगे। उन्होंने यह बात भी स्पष्ट की कि भविष्य में कोई भी परिवर्तन बिना स्पष्ट समय‑सीमा के लागू नहीं किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के प्रबंधन ने इस बैठक को सकारात्मक कदम बताया और कहा कि अब वे नियमावली में संशोधन करने के लिये आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएँ शीघ्र आरम्भ करेंगे। उन्होंने छात्रों से सहयोग का आग्रह किया और बताया कि नई नियुक्तियों के लिये एक विशेष पोर्टल तैयार किया जाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि यह वार्ता बिहार की शैक्षणिक नीति को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने कहा कि आयु‑सीमा में लचीलापन और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता से छात्रों के भविष्य में सकारात्मक बदलाव आएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि यह समझौता बिहार सरकार की शैक्षणिक सुधार नीति में एक नई दिशा दर्शाता है।
Updated: August 24, 2026
1. The agreement addresses the age‑limit, transparency, and financial support for assistant‑professor recruitment at Bihar University.
2. It establishes a monitoring committee and a digital portal, aiming to streamline hiring and improve academic career prospects for PhD holders.
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