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केरल के किनारे दो ट्रकों के टकराव में दो यंत्रकारियों की मौत, ब्रेक फेल हुआ बुल्क कैरियर.

कैननूर के किनारे पर दो ट्रकों के टकराने और आग लगने की घटना में दो यंत्रकारियों की मौत हो गई, यह समाचार आज सुबह स्थानीय पुलिस ने पुष्टि की। दुर्घटना रात के लगभग नौ बजे घटी, जब दो भारी ट्रक एक दूसरे से टकराए और तुरंत ही आग का शृंगार हुआ। दोनों यंत्रकारियों, जो उस समय टिम्बर लोरी की मरम्मत कर रहे थे, वे धधकते शोर से बच नहीं सके और उनके जीवन को झटका लगा। मृतकों की पहचान पुलिस ने अभी तक नहीं की है, लेकिन स्थानीय स्रोतों के अनुसार वे दोनों ही अनुभवी यंत्रकारियों में से थे। यह घटना केरल के किनारे पर भारी ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा के मुद्दों को फिर से उभारी है।

घटना के कुछ घंटे पहले, टिम्बर लोरी, जो दो-दिन से सड़क किनारे रुक कर रखी थी, में यांत्रिक खराबी के कारण रुकावट हुई थी। लोरी के चालक ने लोरी को हटाने के लिए दो यंत्रकारियों को बुलाया, जो तुरंत ही लोरी के इंजन और ब्रेक प्रणाली की जांच करने लगे। इस बीच, उसी मार्ग पर एक सीमेंट बुल्क कैरियर, जिसमें भारी मात्रा में सीमेंट लादा हुआ था, ने अपने ब्रेक फेल होने की सूचना दी थी। यह बुल्क कैरियर, जो सामान्यतः तेज गति से चलने वाला बड़ा वाहन है, अचानक नियंत्रण से बाहर हो गया और सीधे टिम्बर लोरी की ओर बढ़ा।

पिछले दो वर्षों में केरल में ट्रक दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। राज्य के परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच बड़े वाहनों के साथ हुई टक्करों की संख्या में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण सड़कों की क्षीणता, अपर्याप्त ब्रेक सिस्टम, और ड्राइवरों की थकान है। इसके अलावा, कई बार लोडिंग और अनलोडिंग की प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन भी दुर्घटनाओं का कारण बनता है।

दुर्घटना स्थल पर पहुंचे पुलिस अधिकारी और फायर ब्रिगेड ने तुरंत आग बुझाने के प्रयास शुरू किए। फायर फाइटर्स को कई एलीवेटर लादकर आग को नियंत्रित करने में दो घंटे से अधिक समय लगा। दुर्घटना स्थल पर मौजूद गवाहों के अनुसार, टिम्बर लोरी में दो यंत्रकारियों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति नहीं था। जब बुल्क कैरियर ने टकराव किया, तो लोरी के दोनों किनारों से धधकती हुई लपटें निकल आईं, जिससे आसपास की सड़कों पर धुआँ भर गया।

स्थानीय अस्पताल में पहुंचाए गए घायल लोगों को तत्काल उपचार दिया गया। हालांकि, दो यंत्रकारियों की चोटें अत्यधिक गंभीर थीं और उनका जीवन बचाना असंभव साबित हो गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि आग की तीव्रता और धुएँ की वजह से उनके श्वसन तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ा। इस बीच, अन्य एक ट्रक चालक को हल्की चोटें आईं, जिन्हें अब भी अस्पताल में निगरानी में रखा गया है।

पुलिस ने कहा कि प्रारम्भिक जांच में यह स्पष्ट हो रहा है कि बुल्क कैरियर के ब्रेक फेल होने के साथ ही यह दुर्घटना घटित हुई। पुलिस ने घटना के तुरंत बाद बुल्क कैरियर के चालक और लोरी के मालिक को हिरासत में लिया है। पुलिस ने कहा कि आगे की जांच में यह पता चलने की संभावना है कि बुल्क कैरियर में रखे गए सीमेंट के वजन और लोरी की स्थिति ने दुर्घटना को बढ़ावा दिया।

स्थानीय प्रशासन ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की। केरल के परिवहन मंत्री ने कहा, “हम इस त्रासदी से गहरा दुख महसूस करते हैं और मृतकों के परिवारों को हमारा संवेदना है। हमें इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तुरंत उपाय करने होंगे।” उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में सड़कों की मरम्मत, ट्रकों के नियमित निरीक्षण और ड्राइवरों के स्वास्थ्य परीक्षण को कड़ाई से लागू करेगी।

दुर्घटना के बाद, केरल में कई ट्रक ड्राइवरों और यंत्रकारियों ने सड़क किनारे सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर विरोध प्रदर्शन किया। वे मांग कर रहे थे कि सरकार सड़कों की नियमित सफाई, ब्रेक सिस्टम की जांच और लोडिंग प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों को सख्त करे। इस आंदोलन में स्थानीय व्यापारियों और लोजिस्टिक कंपनियों ने भी समर्थन दिखाया, जिससे इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखे तो इस प्रकार की दुर्घटनाएं राज्य के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती हैं। केरल में ट्रांसपोर्ट उद्योग राज्य के जीडीपी में लगभग 8 प्रतिशत योगदान देता है, और ऐसी दुर्घटनाओं से न केवल माल की हानि होती है, बल्कि श्रम बाजार में भी अस्थिरता उत्पन्न होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त निवेश नहीं किया गया, तो आर्थिक नुकसान में वृद्धि होगी।

सामाजिक रूप से, इस दुर्घटना ने श्रमिक सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर किया है। कई सामाजिक संगठनों

Updated: August 24, 2026

The fatal clash on Kerala’s coastal road exposes a systemic blind spot: the rush to keep goods moving overrides basic safety checks, turning routine repairs into death traps. Unless policymakers treat brake failures and overloaded rigs as economic liabilities rather than inevitable costs, the state’s logistics boom will continue to bleed both lives and profit.

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