बिहार के राज्यमंत्री ने इस परियोजना के लिए विशेष कार्यसमिति का गठन किया, जिसमें नियोजन, अभियांत्रिकी, पर्यावरण और वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ शामिल हैं। कार्यसमिति ने प्रारम्भिक सर्वेक्षण में 5,000 हेक्टेयर भूमि का चयन किया, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार की संपत्तियों का समावेश है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए विशेष अधिनियम की प्रस्तावना की गई है, जिससे न्यायिक अड़चनें कम हो सकें। साथ ही, परियोजना के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अपनाया जाएगा, जिससे निजी निवेशकों को भी आकर्षित किया जा सके।
परियोजना की रूपरेखा के अनुसार, गंगा मारिन ड्राइव को तीन मुख्य खंडों में विभाजित किया जाएगा: प्रारम्भिक खंड, मध्यवर्ती खंड और अंतिम खंड। प्रत्येक खंड में विस्तृत सड़कों, पैदल पथ, साइकिल लेन, जलकुंभी और पर्यटक सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। विशेष रूप से, प्रारम्भिक खंड में पटना, बोधगया और वैशाली को जोड़ते हुए कई पुल और जलमार्गों का निर्माण किया जाएगा। इस दौरान, जल प्रदूषण नियंत्रण और जलजीव संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे गंगा की स्वच्छता में भी सुधार हो सके।
स्थानीय उद्योगों ने इस परियोजना को आर्थिक अवसरों के रूप में देखा है। निर्माण सामग्री, पर्यटन सेवाओं और छोटे उद्योगों के लिए नई बाजार संभावनाएँ खुलेंगी, जिससे रोजगार सृजन की आशा है। बिहार के औद्योगिक विकास निगम (BIDCO) ने इस परियोजना को लेकर कई सप्लायरों को आमंत्रित किया है, जिससे राज्य के भीतर स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इस ड्राइव के माध्यम से कृषि उत्पादों की त्वरित आवाजाही संभव होगी, जिससे किसान लाभान्वित होंगे।
पर्यावरणीय संगठनों ने गंगा किनारे के बड़े पैमाने पर निर्माण पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक वनस्पति और जलजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) को कठोरता से लागू किया जाना चाहिए। राज्य ने इन संगठनों को परियोजना के नियोजन चरण में शामिल करने का वादा किया है, जिससे सतत विकास के सिद्धांतों का पालन हो सके। इस पहल के तहत, ग्रीन बैंफ़ और जलसंरक्षण क्षेत्र भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहे।
राज्य के प्रमुख राजनेताओं ने इस परियोजना को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा मारिन ड्राइव बिहार को ‘नया भारत’ के रूप में प्रस्तुत करेगा, जिससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेश आकर्षित होगा।
विपक्षी दल के नेताओं ने कहा कि इस बड़े निवेश को सामाजिक कल्याण और स्वास्थ्य सेवाओं के बजट से नहीं काटा जाना चाहिए। इस बीच, स्थानीय नगरपालिकाओं ने कहा कि उन्हें उचित बजट आवंटन और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी, ताकि परियोजना के कार्यान्वयन में कोई देरी न हो।
वित्तीय विशेषज्ञों ने कहा कि सात करोड़ रुपये का निवेश अत्यधिक बड़े पैमाने पर है, और इसके लिए वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों की आवश्यकता होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य बंधक जारी करके या बहुराष्ट्रीय बैंकों से ऋण लेकर इस परियोजना को वित्तीय रूप से सुदृढ़ बना सकता है। साथ ही, पर्यटन कर और उपयोग शुल्क के माध्यम से दीर्घकालिक राजस्व उत्पन्न किया जा सकता है। आर्थिक विश्लेषकों ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि यदि परियोजना सफल रहती है, तो यह राज्य के जीडीपी में 1.5 प्रतिशत तक का योगदान दे सकती है।
Updated: August 24, 2026
The Ganga Marine Drive project mobilizes roughly ₹7 crore to link key riverfront cities, aiming to boost tourism and regional commerce. Its implementation involves extensive land acquisition and a public‑private partnership model, affecting infrastructure and local economies.
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