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असम का पहला राज्य‑स्वामित्व उपग्रह “AssamSAT” परियोजना के चयन चरण में, डेटा‑आधारित शासन व कृषि‑आधार के

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आज दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय अंतरिक्ष मंच के उपसमारोह में कहा कि राज्य अब उपग्रह डेटा के उपभोक्ता से एक सक्रिय भागीदार बन गया है; इस दिशा में पहला कदम ‘AssamSAT’ परियोजना है, जिसकी साझेदारी के लिये अब चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में प्रवेश किया गया है। उन्होंने बताया कि यह उपग्रह न केवल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में असम की स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि तेज़ एवं प्रमाण‑आधारित शासन में नई संभावनाएँ भी प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर का उपयोग असम के अंतरिक्ष‑तकनीक के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए किया। २०१० में असम ने पहली बार राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) के डेटा का उपयोग करके बाढ़ प्रबंधन प्रणाली स्थापित की थी, जिसके बाद विभिन्न कृषि‑संतुलन योजनाओं में उपग्रह‑चित्रण का उपयोग किया गया। हालांकि, अब तक असम ने केवल डेटा का उपभोग किया था; उपग्रह निर्माण में सीधे भागीदारी नहीं थी।

सरमा ने कहा कि ‘AssamSAT’ के माध्यम से असम अपनी जियोस्पेशियल आवश्यकताओं के अनुरूप एक स्वदेशी उपग्रह विकसित करेगा, जिससे राज्य के जल‑संसाधन, कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन में वास्तविक‑समय डेटा उपलब्ध होगा। इस उपग्रह का मुख्य उद्देश्य निचली स्तर की प्रशासनिक इकाइयों को सटीक जानकारी प्रदान कर निर्णय‑लेने की गति बढ़ाना है।

अभी तक चार संभावित साझेदारों को तकनीकी एवं वित्तीय प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिये आमंत्रित किया गया था। इनमें दो भारतीय निजी कंपनियां, एक अंतरराष्ट्रीय उपग्रह निर्माता और एक संयुक्त उद्यम शामिल थे। प्रस्तावों की समीक्षा एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा की जाएगी, जो तकनीकी क्षमता, लागत‑प्रभावशीलता और स्थानीय उद्योग के साथ सहयोग को प्रमुख मानदंड मानती है।

समिति ने पिछले दो महीनों में सभी दस्तावेज़ों का विस्तृत विश्लेषण किया और आज तक के सर्वेक्षण के आधार पर तीन कंपनियों को अंतिम चरण के लिए बुलाया गया है। इस चरण में प्रत्यक्ष प्रस्तुति, प्रोटोटाइप प्रदर्शन और वित्तीय मॉडल की गहन जांच शामिल होगी। चयन प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के लिये सभी चरणों की जानकारी सार्वजनिक वेबसाइट पर अद्यतन की जाएगी।

मुख्य निर्णय १५ अक्टूबर को असम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मुख्यालय में आयोजित विशेष सभा में लिया जाएगा। यदि चयनित भागीदार सफल रहा, तो अगले दो वर्षों में उपग्रह की डिज़ाइन और परीक्षण कार्य शुरू होगा, जिससे २०२७ के मध्य में प्रथम लॉन्च की योजना बन रही है।

मुख्य विपक्षी दल के नेता निरंजन दास ने इस परियोजना को ‘राज्य की तकनीकी महत्त्वाकांक्षा’ के रूप में सराहा, परन्तु उन्होंने वित्तीय जोखिमों और सार्वजनिक निधियों के उचित उपयोग पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “उपग्रह निर्माण में उच्च लागत और तकनीकी चुनौती दोनों हैं; सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि यह निवेश असम के सामान्य जनता को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचा सके।”

इसी बीच, असम के व्यापार मंडल के अध्यक्ष रजत भट्टाचार्य ने कहा कि ‘AssamSAT’ स्थानीय उद्योगों को नई तकनीकी श्रृंखला प्रदान करेगा, जिससे स्टार्ट‑अप्स और छोटे एवं मध्यम उद्यमों के लिये रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। उन्होंने कहा, “उपग्रह से प्राप्त डेटा से कृषि की उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे किसान की आय में सुधार होगा, और साथ ही डेटा‑सेवा कंपनियों के लिये नया बाज़ार तैयार होगा।”

राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. सविता कुमारी ने परियोजना के तकनीकी पहलुओं पर सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “अगर असम अपना स्वयं का उपग्रह लॉन्च कर सके, तो यह न केवल राज्य के लिए बल्कि देश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए एक मॉडल बन जाएगा, जिससे विकेंद्रीकृत उपग्रह सेवाओं की संभावना बढ़ेगी।”

राजनीतिक रूप से इस कदम को असम सरकार की विकास एजेंडा में एक प्रमुख मील का पत्थर माना जा रहा है। यदि सफल रहा, तो यह प्रदेश के तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा और केंद्र‑राज्य सहयोग को नई दिशा देगा। आर्थिक रूप से, उपग्रह की निर्माण और संचालन में अनुमानित निवेश लगभग ४०० करोड़ रुपये बताया गया है, जिसमें निजी साझेदारियों और विदेशी तकनीकी सहयोग के माध्यम से लागत‑साझाकरण की संभावना है।

सामाजिक दृष्टिकोण से, ‘AssamSAT’ का डेटा बाढ़‑प्रबंधन, जल‑संरक्षण और सटीक कृषि में उपयोग होने से ग्रामीण इलाकों में जीवन स्तर सुधरने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक‑समय मौसम पूर्वानुमान और जल‑स्तर निगरानी से बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता का वितरण तेज़ हो सकेगा, जिससे जीवन‑हानि में कमी आ सकती है।

विज्ञान नीति विशेषज्ञ प्रो. अरविंदन मोहन ने कहा, “इस प्रकार की राज्य‑स्तरीय उपग्रह पहल अंतरिक्ष नीति में विविधता लाती है और राष्ट्रीय स्तर पर डेटा सुरक्षा एवं स्वायत्तता के प्रश्न उठाती है। असम को तकनीकी मान

Updated: August 23, 2026


Assam’s chief minister announced that the state is moving from satellite data consumer to partner, with the AssamSAT project entering its final selection phase to develop a home‑grown satellite for real‑time water, agriculture and disaster management. The initiative, backed by a mix of Indian and foreign firms and slated for a mid‑2027 launch, aims to boost governance, local industry and farmer incomes while drawing scrutiny over costs and public‑fund usage.

Assam’s leap from data‑consumer to satellite‑builder signals a bold push for “data sovereignty” that could redefine rural governance, but it risks turning a developmental ambition into a costly tech‑venture if not tightly coupled with local industry and transparent budgeting. This move may set a precedent for

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