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बिहार में मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर ने बाढ़‑प्रभावित भागलपुर में टर्बुलेंस से अस्थिरता झेली, पायलट की त्वरित कार्रवाई से दुर्घटना टली, सुरक्षित

भोजपुरी में बाढ़ के बाद भागलपुर के आकाश में असाधारण घटना घटी, जहाँ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक हेलीकॉप्टर ने टेक‑ऑफ़ के बाद अचानक अस्थिरता दिखाते हुए कई मिनटों के लिये लटकी हुई स्थिति बना ली। पायलट ने त्वरित निर्णय लेकर विमान को नियंत्रित किया

और अंततः सुरक्षित रूप से पटना की ओर लौटते हुए लैंडिंग पूरी की, जिससे दुर्घटना को टाला गया। इस घटना ने बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की तत्परता और सुरक्षा मानकों पर नई चर्चा को जन्म दिया।

घटना से पहले, मुख्यमंत्री ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त भागलपुर,

बक्सर और वैधिया जिलों का विस्तृत हवाई सर्वेक्षण किया था। यह सर्वेक्षण बाढ़ के जलस्तर, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे और पुनर्वास के प्रमुख बिंदुओं को समझने के लिये किया गया था। सर्वेक्षण के दौरान, हेलीकॉप्टर ने विक्रमशिला पुल के ऊपर से उड़ान भरते हुए कई महत्वपूर्ण

बिंदुओं की जाँच‑पड़ताल की, जिससे राहत कार्यों की दिशा स्पष्ट हुई। इस हवाई सर्वेक्षण में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी और स्थानीय प्रतिनिधि भी मौजूद थे, जो वास्तविक‑समय में डेटा एकत्र करने में सहयोग कर रहे थे।

विमान ने पटना से सुबह 08:30 बजे भागलपुर के

लिए टेक‑ऑफ़ किया, और लगभग पाँच मिनट बाद बाढ़‑प्रभावित क्षेत्र के ऊपर पहुँचते ही अचानक तेज़ हवाओं और असमान तापमान में परिवर्तन महसूस किया। पायलट ने बताया कि हेलीकॉप्टर ने क्षैतिज दिशा में झटके महसूस किए, जिससे विमान का संतुलन बिगड़ने का खतरा उत्पन्न हुआ।

इस क्षण में पायलट ने तुरंत एरोडायनामिक नियंत्रण लागू किया और विमान को स्थिर करने के लिये आवश्यक कदम उठाए। तकनीकी टीम ने बाद में बताया कि यह घटना तेज़ वायुमंडलीय परिवर्तन और बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में उत्पन्न टर्बुलेंस के कारण हुई।

विमान के अस्थिर होने के

बाद, हेलीकॉप्टर के भीतर उपस्थित अधिकारी और सचिवों ने स्थिति को गंभीरता से लिया और तुरंत आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किया। पायलट ने रडार और नेविगेशन उपकरणों का उपयोग करके सुरक्षित मार्ग की तलाश की, जबकि ऑन‑बोर्ड संचार प्रणाली के माध्यम से बेस को स्थिति की

सूचना दी। इस दौरान, हेलीकॉप्टर के सहायक पायलट ने अतिरिक्त स्थिरीकरण उपाय अपनाए, जिससे विमान को धीरे‑धीरे सामान्य गति पर लाया गया। इस प्रक्रिया में कुछ मिनटों के लिये विमान की ऊँचाई में हल्की गिरावट भी देखी गई, परन्तु कोई गंभीर क्षति नहीं हुई।

विमान को

सुरक्षित रूप से नियंत्रित करने के पश्चात, पायलट ने तुरंत पटना लौटने की योजना को दोहराया। इस दौरान, हेलीकॉप्टर ने बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर से फिर से उड़ान भरी, जिससे वह सभी आवश्यक बिंदुओं की पुनः जाँच कर सका। लैंडिंग के समय, पायलट ने सभी

मानकों का पालन किया और हेलीकॉप्टर को पटना हवाई अड्डे पर बिना किसी क्षति के उतारा गया। इस सफल लैंडिंग ने घटना के संभावित परिणामों को समाप्त कर दिया और अधिकारियों को राहत कार्यों की निरंतरता में विश्वास दिया।

घटना के बाद, राज्य के मुख्य सचिव

ने तुरंत स्थिति की जाँच के लिये एक आपातकालीन समिति का गठन किया। समिति ने घटना की तकनीकी जाँच, पायलट के कार्यों और हेलीकॉप्टर की रख‑रखाव स्थिति की समीक्षा करने का आदेश दिया। साथ ही, उन्होंने सभी सरकारी विमानों के मौजूदा सुरक्षा प्रोटोकॉल को पुनः

जांचने और बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में विशेष वायुमंडलीय स्थितियों के लिये अतिरिक्त मानक लागू करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रक्रिया में, राज्य के वायुमंडलीय विभाग और एयरोनॉटिक विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना की सूचना प्राप्त करने के बाद तत्काल एक प्रेस

ब्रीफिंग आयोजित की। उन्होंने बताया कि पायलट की तत्परता और पेशेवर कौशल ने इस संकट को टाला और कोई जनहानि नहीं हुई। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार बाढ़‑राहत कार्यों को जारी रखेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिये सुरक्षा उपायों

को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने सभी राहत कर्मियों को उनकी मेहनत के लिये सराहना व्यक्त की और नागरिकों से धैर्य रखने का आग्रह किया।

विपक्षी दल के प्रमुख नेता भी इस घटना पर टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने कहा

Updated: August 24, 2026

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