गोरखपुर में चल रहे डबलिंग कार्य का मुख्य उद्देश्य ट्रैक क्षमता बढ़ाना और माल एवं यात्री परिवहन की गति में सुधार करना है। इस परियोजना में दो अतिरिक्त पटरियों का निर्माण शामिल है, जिससे एक ही मार्ग पर अधिक ट्रेनें चल सकेंगी। कार्य की शुरुआत पिछले महीने हुई थी और इसे 15 सितंबर तक पूरा करने की योजना है। इस दौरान कुछ मौजूदा ट्रैक को बंद करना आवश्यक हो रहा है, जिससे ट्रेनें वैकल्पिक मार्गों पर रूट बदल रही हैं।
बिहार के रेल नेटवर्क में बाराबंकी को नई कड़ी जोड़ते हुए कई ट्रेनें अब इस स्टेशन से गुजरेंगी। विशेष रूप से ललितग्राम, कटिहार और खातीपुरा से चलने वाली कई प्रमुख एक्सप्रेस और सुपरफ़ास्ट ट्रेनों को बाराबंकी के रास्ते से रूट बदलने का निर्देश दिया गया है। इस बदलाव से इन क्षेत्रों में यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे, परन्तु कुछ छोटे स्टेशनों पर ठहराव समाप्त हो जाने से स्थानीय यात्रियों को वैकल्पिक साधन अपनाना पड़ेगा।
नवीनतम समय-सारणी के अनुसार, 15565 ललितग्राम‑नई दिल्ली एक्सप्रेस 3 सितंबर को ललितग्राम से निकलते ही सीधे बाराबंकी की ओर बढ़ेगी, जहाँ से वह नई ट्रैक पर चलते हुए पूर्व निर्धारित समय पर नई दिल्ली पहुँचने की कोशिश करेगी। इसी तरह 15602 पटना‑जम्मू शरणा एक्सप्रेस और 15055 गोरखपुर‑कुशीनगर एक्सप्रेस भी बाराबंकी से गुजरते हुए अपने मूल मार्ग पर लौटेंगी। इन परिवर्तनों से ट्रेन के कुल यात्रा समय में लगभग 15‑20 मिनट की वृद्धि हो सकती है।
बाराबंकी के अलावा, कुछ ट्रेनें कटिहार‑जयनगर मार्ग से हटकर खातीपुरा‑गया मार्ग पर रूट बदलेंगी। इस बदलाव से खातीपुरा के यात्रियों को अतिरिक्त ट्रेन सेवा मिल जाएगी, परन्तु कटिहार के कुछ छोटे स्टेशनों पर अस्थायी रूप से कोई ठहराव नहीं रहेगा। रेलवे ने कहा है कि यह अस्थायी उपाय है और कार्य समाप्त होने के बाद मूल रूट पुनर्स्थापित किया जाएगा।
बदलाव की सूचना के बाद, भारतीय रेल के उत्तराखंड‑पश्चिमी रेलवे क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक बुस या स्थानीय ट्रांसपोर्ट के माध्यम से कनेक्शन की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि टिकट काउंटरों पर नई समय-सारणी के अनुसार रिफंड और पुनः बुकिंग की प्रक्रिया तेज़ी से चलाई जाएगी।
रेलवे बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा कि इस प्रकार के रूट परिवर्तन अक्सर बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दौरान आवश्यक होते हैं और यात्रियों को न्यूनतम असुविधा पहुँचाने के लिए सभी संभावित उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सभी बदलावों की सूचना पहले से ही स्टेशन बोर्ड, आधिकारिक ऐप और सोशल मीडिया चैनलों पर दी जा चुकी है, जिससे यात्रियों को समय से पहले जानकारी मिल सके।
राज्य सरकार ने भी इस परिवर्तन को लेकर स्पष्टता प्रदान की है। बिहार के रेल विभाग के प्रमुख ने कहा कि गोरखपुर में डबलिंग कार्य राष्ट्रीय आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इसे जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस अवधि में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
स्थानीय व्यापारियों और यात्रियों ने भी इस बदलाव के बारे में अपनी चिंताएँ व्यक्त कीं। बाराबंकी के कुछ व्यापारी यह मानते हैं कि अतिरिक्त ट्रेनें उनके व्यापार में बढ़ोतरी कर सकती हैं, जबकि कटिहार के छोटे स्टेशन पर यात्रियों ने बताया कि उन्हें अब अतिरिक्त बस या टैक्सी सेवाओं की आवश्यकता पड़ेगी। इन प्रतिक्रियाओं को देखते हुए रेल विभाग ने स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त सूचना बिंदु स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।
आर्थिक दृष्टिकोण से इस रूट परिवर्तन का असर सीमित रहेगा, क्योंकि अधिकांश ट्रेनों का मुख्य मार्ग वही रहेगा और केवल कुछ स्टेशनों पर ठहराव बदलेंगे। हालांकि, वस्तु परिवहन में संभावित देरी से कुछ उद्योगों को अल्पकालिक व्यवधान का सामना करना पड़ सकता है। इस कारण से, रेल विभाग ने लॉजिस्टिक्स कंपनियों को अग्रिम सूचना देने और वैकल्पिक शिपिंग विकल्प तैयार रखने का निर्देश दिया है।
सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में, यह परिवर्तन स्थानीय यात्रियों को अस्थायी असुविधा दे सकता है, परन्तु लंबी अवधि में डबलिंग कार्य से रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, जिससे भविष्य में तेज़ और अधिक भरोसे
Updated: August 24, 2026
Insight: The temporary detours are a painful reminder that infrastructure upgrades often leave small‑town passengers on the back foot, forcing them to juggle bus rides and missed stops while the rails grow stronger.
In the long run, however, the doubled track could mean more reliable freight flows and higher‑frequency services that lift
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