आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जुलाई‑अगस्त में राज्य में कुल 1 हजार मिमी की वर्षा हुई, जबकि पिछले पाँच वर्षों की समान अवधि में औसत 1 हजार ७०० मिमी की वर्षा होती थी। इस असमानता के बीच, नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि ने किसानों, व्यापारियों और स्थानीय प्रशासन को घबराहट में डाल दिया है।
बिहार की जलवायु विज्ञानियों का
मानना है कि इस विषमता के मूल में जलवायू परिवर्तन के साथ साथ पूर्वी भारत की जल-धारा प्रणाली में हुए बदलाव छिपे हैं। पिछले दो दशकों में हिमालय की बर्फ़ीली चोटियों में जलस्राव की दर में वृद्धि हुई, जिससे गंगा के मुख्य जलस्रोतों से निकली बाढ़ की धारा पहले से अधिक तीव्रता
से बह रही है। इसके अतिरिक्त, उत्तराखण्ड और झारखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में तीव्र वर्षा की घटनाएँ, जो अक्सर गंगा के कई सहायक नदियों में जलभराव का कारण बनती हैं, इस वर्ष भी जारी रही। इन जलस्रोतों से बाढ़ के जल बहने पर, बिहार के निचले सतह वाले क्षेत्रों में जलस्तर तेजी
से बढ़ रहा है।
ऐतिहासिक डेटा यह दर्शाता है कि 2015 में गंडक और कोसी की सतह में समान स्तर की बाढ़ तब देखी गई थी, जब राज्य में भी सामान्य वर्षा हुई थी। परंतु इस बार, जब बिहार में कृषि योग्य जल की कमी महसूस की जा रही है, तब
भी नदियों में जल का स्तर अत्यधिक उछाल ले रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा-गंडक-कोसी जलसंधि की जटिलता, जिसमें बहु-राज्यीय जलसंरक्षण परियोजनाएँ, बांध एवं जलाशयों का संचालन शामिल है, इस असंतुलन को और जटिल बनाता है।
बाढ़ की शुरुआती चेतावनियों को लेकर पटना के जल प्राधिकरण ने 27 अगस्त को
बाढ़ चेतावनी जारी की, जिसमें बताया गया कि गंगा का जलस्तर 207 सेमी तक पहुंच सकता है। इस चेतावनी के बाद, पटना शहर में तटबंधों की मजबूती का सर्वेक्षण तुरंत किया गया, और कई कमजोर हिस्सों को तत्काल मरम्मत के लिए सूचीबद्ध किया गया। इसी बीच, हाथीदह में स्थित जलाशय के जलस्तर में
अचानक 3 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे स्थानीय प्रशासन ने निकटवर्ती बस्तियों को खाली करने का आदेश जारी किया।
बच्चों के स्कूल और बाजारों को बंद करने के अलावा, सुल्तानगंज में गंगा के किनारे स्थित एक प्रमुख पुल पर सुरक्षा जाँच करवाई गई, जहाँ से कुछ घंटे पहले जलस्तर में
अचानक गिरावट ने पुल के आधार को अस्थिर कर दिया था। इस घटना ने स्थानीय मीडिया को सतर्क किया, और सड़कों के पुनर्विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया गया। बेगूसराय के बछवाड़ा और भागलपुर के खरीक में तटबंध टूटने की खबरें भी इस सप्ताह सामने आईं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में
जलरोधी दीवारों को सुदृढ़ करने के लिए तत्काल कार्यवाही का आदेश जारी किया गया।
इन घटनाओं के बाद, बिहार सरकार ने आपातकालीन प्रबंधन टीम को सक्रिय कर, विभिन्न जिलों में जल नियंत्रण उपायों को तेज किया। मुख्यमंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य में बाढ़ के जोखिम को कम
करने के लिए ‘जल सुरक्षा योजना’ को प्राथमिकता दी जाएगी और सभी संबंधित विभागों को समन्वयित रूप से कार्य करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, जल संसाधन विभाग ने कहा कि गंगा के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए बांधों के जल निकासी को संतुलित किया जा रहा है, जिससे निचले
इलाकों में बाढ़ के खतरे को न्यूनतम रखा जा सके।
बाढ़ से प्रभावित किसानों ने अपने खेतों में पानी की भरमार के कारण फसल नष्ट होने का डर जताया। विशेषकर धान की बुवाई की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने के कारण कई किसानों ने अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित होने
की बात कही। दूसरी ओर, जल से लाभ उठाने वाले मत्स्य पकड़ वाले समूहों ने बताया कि जलस्तर में वृद्धि के कारण मछलियों की पकड़ में अस्थायी वृद्धि हुई है, परंतु दीर्घकालिक नुकसान को लेकर उनका भी भय है।
वाणिज्यिक वर्ग ने बताया कि जलस्तर में अचानक वृद्धि के कारण बाजारों
में सामान की आपूर्ति में बाधा आई है, जिससे वस्तु कीमतों में उतार-चढ़ाव देखी जा रही है। स्थानीय व्यापारी संघ ने अनुरोध किया कि सरकार तटबंधों की मरम्मत और जल निकासी के उपायों को शीघ्रता से लागू करे, ताकि व्यापार
Updated: August 24, 2026
Despite a 42 % drop in monsoon rainfall across many districts, the Ganga, Gandak and Kosi rivers have surged, prompting flood warnings for Patna, Hazaribagh, Sultanpur and Bhagalpur. Climate‑driven melt and heavy upstream rains are driving the rise, forcing authorities to tighten embankments, evacuate villages and accelerate emergency flood‑control measures.
Insight: The paradox of scant monsoon yet surging river levels points to a systemic shift in Himalayan meltwater pulses, turning Bihar’s low‑lying plains into a tinderbox where every drop feels like a flood. Local governments must pivot from reactive repairs to a coordinated basin‑wide water‑budget strategy, lest
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