मौसम विज्ञान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल के गैंगटोक क्षेत्र से निकली लो‑प्रेशर प्रणाली उत्तरी भारत में उत्तर‑पश्चिमी दिशा में बढ़ रही है। इस प्रणाली के प्रभाव से झारखंड में 24 अगस्त को कई स्थानों पर ‘बहुत भारी बारिश’ का अलर्ट जारी किया गया। उसी समय, बihar, उड़ीसा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी समान दबाव के कारण वर्षा की संभावनाएं बढ़ी हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस प्रणाली का निर्माण हिमालयी बर्फ‑पिघलन और समुद्री तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण हुआ है।
झारखंड में पिछले सप्ताह के दौरान बाढ़ के बाद जल‑संकट का इतिहास बना है। विशेषकर रांची, जमुना और दहिया जैसे प्रमुख नदियों के किनारे स्थित गाँवों में जल‑स्तर तेज़ी से बढ़ने की आशंका है। जल विज्ञान विशेषज्ञों ने बताया कि इस वर्ष की मौसमी वर्षा पहले से 15 % अधिक दर्ज की गई है, जिससे जल निकायों का जल‑स्तर सामान्य से अधिक रहेगा। इस स्थिति में नदियों के किनारे बुनियादी ढाँचा, जैसे पुल, सड़क और जल‑शोधन संयंत्र, क्षति के जोखिम में हैं।
बिहा में भी समान स्थितियों की सूचना मिली है। पटना, गया और भागलपुर के आसपास के क्षेत्रों में तेज़ बारिश के कारण जल‑संकट की आशंका है। स्थानीय प्रशासन ने 24‑30 अगस्त तक के लिए आपातकालीन बचाव टीमों को तैनात करने का आदेश दिया। इस बीच, उड़ीसा में 27‑30 अगस्त के दौरान भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जहाँ मूसलाधार वर्षा के साथ तेज़ हवाओं की संभावना है। ओडिशा के मुख्य नगर कोलकाता के निकटस्थ क्षेत्रों में भी जल‑संकट की संभावनाएँ बढ़ी हैं।
झारखंड में मौसम विभाग ने अगले चार दिनों में 30‑40 किमी/घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाओं की भविष्यवाणी की है। इस प्रकार की तेज़ हवा के साथ निरंतर बारिश होने पर वृक्ष गिरने, छतों का ढहना और विद्युत लाइनों का नुकसान आम हो सकता है। बिजली गिरने की आशंका के मद्देनज़र, स्थानीय बिजली विभाग ने जनसंपर्क केंद्रों को सक्रिय कर दिया है और आपातकालीन कटऑफ़ की तैयारियों को तेज किया है।
बिहार में जल‑संकट को रोकने के लिये कई जलाशयों को खाली करने की योजना बनायी़ गई है। सरकार ने कहा कि गंगा और उसकी शाखाओं के जल‑स्तर को नियंत्रित करने हेतु बाँधों की जल‑रिलीज़ को तेज़ किया जाएगा। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में जल‑निकासी के लिये अतिरिक्त पम्पों की तैनाती की जाएगी, जिससे बाढ़ की गंभीरता को कम किया जा सके।
ओडिशा में 27‑30 अगस्त के दौरान भारी वर्षा की चेतावनी के साथ, राज्य के प्रमुख पोर्ट शहर पुरी और कटक में समुद्र‑तट के पास उच्च लहरों की संभावना है। इस कारण, पोर्ट अथॉरिटी ने जहाजों को बंदरगाह में सुरक्षित रखने का आदेश दिया और मछुआरों को समुद्र में प्रवेश न करने का निर्देश दिया।
राज्य सरकारों ने इस मौसम में प्रभावित क्षेत्रों के लिए आपातकालीन राहत निधि का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा है। झारखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि जल‑संकट से प्रभावित लोगों को तत्काल खाद्य, जल और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाएगी। बिहार के प्रमुख अधिकारियों ने भी प्रभावित जिलों में राहत शिविरों की स्थापना की घोषणा की।
प्रमुख राष्ट्रीय मीडिया ने इस चेतावनी को बड़े स्तर पर कवर किया है और विभिन्न राज्यों में जल‑संकट के जोखिम को उजागर किया है। दूरसंचार कंपनियों ने भी आपातकालीन स्थितियों में नेटवर्क की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिये अतिरिक्त टावर स्थापित करने का काम तेज़ कर दिया है।
केंद्रीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि इस वर्ष की मौसमी परिस्थितियाँ अनियमित हो रही हैं और जल‑विज्ञान विभाग को त्वरित कदम उठाने की जरूरत है। इस दिशा में, केंद्र ने जल‑संकट प्रबंधन के लिए विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
आर्थिक दृष्टिकोण से, निरंतर बारिश से कृषि उत्पादन में नुकसान की संभावना है। विशेषकर धान, गन्ना और दलहन की फसलें जल‑जमाव के कारण प्रभावित हो सकती हैं। इससे बाजार में कीमतों में अस्थिरता आ सकती
Weather forecasts predict heavy rainfall across seven states, triggering government emergency response protocols. Authorities are deploying relief teams and managing water levels to mitigate infrastructure damage and agricultural risks.
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