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रौतास के मुंजी डीहरा में सीआरपीएफ जवान कंचन कुमार ठाकुर की टैंक टक्कर में मृत्यु, सुरक्षा मानकों पर नई जाँच शुरू हुई

रोहतास के मुंजी डीहरा गांव में शनिवार शाम को 87वीं बटालियन, सीआरपीएफ के जवान कंचन कुमार ठाकुर (उम्र 40 वर्ष) को तेज रफ्तार बोलेरो टैंकों की टक्कर में घायल होते हुए मृत घोषित किया गया, जिससे पूरे ग्रामीण समुदाय में गहरा शोक व्याप्त हो गया। स्थानीय प्रशासन ने मृत शरीर को देर रात गांव के स्कूल मैदान में लाकर अंतिम संस्कार की व्यवस्था की, जबकि पुलिस और सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की। शव पहुँचते ही गांव के कई घरों से निरंतर रोने की आवाजें सुनी गईं, और कंचन के परिवार के सदस्य, विशेषकर उसकी माँ और पत्नी, ने अत्यधिक भावनात्मक प्रतिक्रिया दी।

कंचन कुमार ठाकुर का जन्म 1984 में मुंजी डीहरा के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने 2005 में भारतीय सेना में भर्ती ली और बाद में 2012 में सीआरपीएफ में स्थानांतरित हो गए। पिछले दो दशकों में उन्होंने उत्तर पूर्वी भारत के विभिन्न आतंकवादी‑ग्रस्त क्षेत्रों में सक्रिय सेवा की, कई बार वीरता पदक और शौर्य सम्मान से सम्मानित हुए। परिवार के अनुसार, वह हमेशा अपने कंधे पर गाँव के बच्चों को खिलाते रहे, और अपने गाँव को अपनी पहली प्राथमिकता मानते थे।

कंचन की सैन्य करियर के दौरान कई बार उन्हें सीमित संसाधनों में कार्य करने के लिए कहा गया था। 2018 में उन्होंने झारखंड के एक बंजर इलाके में बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के लिए स्वयंसेवक टीम का नेतृत्व किया था, जिससे स्थानीय प्रशासन ने उसकी प्रशंसा की थी। उसके बेटे, अजय, ने अभी हाल ही में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी और पिता को अपना आदर्श मानता था। यह पृष्ठभूमि इस बात को स्पष्ट करती है कि कंचन न केवल एक सैनीक ही नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्वों को भी गंभीरता से निभाने वाले नागरिक थे।

शनिवार को सुबह 09:30 बजे, मुंजी डीहरा के पास स्थित राष्ट्रीय हाईवे पर दो बोलेरो टैंकों की तेज गति वाली टक्कर हुई, जिसमें कंचन और उनके दो सहयोगी शामिल थे। टैंक के टायर फटने के कारण अचानक नियंत्रण खो गया और वाहन बाएँ मोड़ पर टकरा गया। कंचन की टैंकर में लगी सुरक्षा कवच के बावजूद, टक्कर की तीव्रता ने उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। प्रथम उपचार टीम ने तुरंत मौके पर प्राथमिक देखभाल की, लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें निकटतम सैन्य अस्पताल में भेजा गया।

सांसारिक अस्पताल में भर्ती होने के बाद कंचन को कई घंटे तक जीवन रक्षक मशीनों से जोड़कर रखे गए, परन्तु अंततः उनका दिल रुक गया। अस्पताल की आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया कि टैंक की टक्कर में उत्पन्न हुई अत्यधिक शक्ति के कारण कंचन के कंधे, छाती और सिर में गंभीर चोटें आईं, जिससे जीवन रक्षक कार्य विफल हो गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि टैंकों का रखरखाव और गति सीमा के उल्लंघन के बारे में जांच शुरू कर दी गई है।

जैसे ही खबर गांव में पहुंची, लगभग दो हजार लोगों ने कंचन के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए एकत्रित हो गए। स्थानीय शैक्षिक संस्थानों, धार्मिक संगठनों और सामाजिक समूहों ने इस शोक में भागीदारी की पेशकश की, जबकि कई युवा स्वयंसेवकों ने कंचन की याद में फूल और धूप दीप जलाए। गांव की पंचायत ने तुरंत शोक सभा का आयोजन किया, जिसमें ग्रामीणों ने कंचन के योगदान को याद करते हुए कई भावनात्मक भाषण सुनाए।

जवाबदेही के तौर पर, भारतीय सेना और सीआरपीएफ ने टैंक टक्कर की जांच के लिए एक विशेष आयोग का गठन किया है। इस आयोग में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, टैंक विशेषज्ञ और स्वतंत्र जांचकर्ता शामिल हैं। उन्होंने प्रारम्भिक चरण में कहा है कि टैंकों की गति सीमा का उल्लंघन करने के कारण यह हादसा हुआ है, और आगे की रिपोर्ट में दोषी पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गांव के प्रमुख, राजेश्वर सिंह ने कहा कि कंचन का निधन केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की laxity का परिणाम है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से अनुरोध किया कि टैंकों के रखरखाव और चालक प्रशिक्षण को सख्त किया जाए, तथा भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएँ।

सीआरपीएफ के कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल अमरनाथ सिंह ने आधिकारिक बयानों में कहा कि कंचन का बलिदान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी क्षति है, और उनके परिजनों को सर्वोच्च सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि टैंक दुर्घटना की पूरी जाँच जल्द से जल्द पूरी की जाएगी, और दोषी को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दुर्घटना से सुरक्षा उपकरणों के रखरखाव और ऑपरेशन मानकों पर नई चर्चा उत्पन्न होगी। कई सांसदों ने प्रश्नावली में इस मुद्दे को उठाया है, और रक्षा विभाग से त्वरित जवाब मांगा है।

Updated: August 24, 2026

The incident has prompted a formal inquiry into tank speed limits and maintenance protocols. It also underscores the impact of the loss on the local community and CRPF personnel.

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