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गुजरात के गोपालगंज में NIA ने साइबर धोखाधड़ी जाल पर छापेमारी, 6 लैपटॉप और 2 मोबाइल जब्त, मुख्य संदिग्ध मोहम्मद कैफ

गुजरात के गोपालगंज में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संभावित मामले की जाँच में आज सुबह एक व्यापक छापेमारी की, जिसके बाद छह लैपटॉप और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए; मुख्य संदिग्ध मोहम्मद कैफ को अहमदाबाद में पूछताछ के लिए उपस्थित होने का नोटिस जारी किया गया।

छापेमारी से पहले, NIA ने

कई महीनों तक इस मामले की जाँच को तेज़ किया था। राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते साइबर अपराध के प्रवाह के मद्देनज़र, एजेंसी ने सूचना सुरक्षा विभाग और राज्य पुलिस के साथ मिलकर संभावित नेटवर्क का पता लगाया था। प्रारम्भिक जांच में यह संकेत मिला था कि अपराधियों ने एक व्यवस्थित रूप से चल रहे ऑनलाइन फंड

ट्रांसफर स्कीम के माध्यम से लाखों रुपये की चोरी की है। इस स्कीम में कई छोटे शहरों के व्यापारी और डिजिटल भुगतान प्लेटफ़ॉर्म का दुरुपयोग किया गया था, जिससे जांच को कई राज्य सीमाओं तक विस्तारित होना पड़ा।

पिछले वर्ष के अंत में, वित्तीय संस्थानों ने इस धोखाधड़ी के संबंध में कई अनियमित लेन‑देन की रिपोर्ट की

थी। इस दौरान, कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें फर्जी ई‑मेल और मैसेज के माध्यम से वैध व्यापारिक सौदे के बहाने बड़े पैमाने पर पैसे ट्रांसफ़र करने के लिए प्रेरित किया गया था। इन रिपोर्टों ने केंद्रीय वित्तीय अपराध शाखा को इस मामले की गंभीरता को पहचानने पर मजबूर किया, जिसके बाद NIA को विशेष रूप

से इस साइबर जाल को तोड़ने का कार्य सौंपा गया।

आज की छापेमारी के दौरान, NIA की टीम ने थावे रोड, तुरकाहां गांव के नजमुल होदा उर्फ लाल बाबू के निवास पर लगभग सात घंटे तक विस्तृत तलाशी ली। तलाशी में प्राप्त हुई डिजिटल डिवाइसों की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाया गया, जिससे यह स्पष्ट

हो सकता है कि इन उपकरणों पर कौन‑कौन से डेटा और संचार रिकॉर्ड मौजूद थे। छापेमारी के दौरान, एजेंसी ने घर के बाहर स्थित छोटे स्टोरेज कमरे को भी बरामद किया, जहाँ से अतिरिक्त साक्ष्य मिलने की संभावना है।

छापेमारी के दौरान बरामद किए गए छह लैपटॉप और दो मोबाइल फोन का तत्काल फॉरेंसिक परीक्षण शुरू किया

गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन उपकरणों में कई एन्क्रिप्टेड फ़ाइलें और एंटी‑वायरस सॉफ्टवेयर के निशान मौजूद थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि अपराधियों ने अपनी पहचान को छुपाने के लिये उन्नत तकनीकी उपाय अपनाए थे। साथ ही, इन डिवाइसों में कई अनजाने IP पतों और VPN सर्वरों के लॉग भी मिले, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर

पर संचालित नेटवर्क के संकेत हो सकते हैं।

छापेमारी के बाद, NIA ने आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि मोहम्मद कैफ को आज तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका, क्योंकि वह अपने आवास से अनुपलब्ध था। एजेंसी ने कैफ को अहमदाबाद में पूछताछ के लिए उपस्थित होने का नोटिस जारी किया और कहा कि वह

नोटिस प्राप्त करने के पाँच कार्यदिवस के भीतर अपना जवाब देगा। यह नोटिस स्थानीय पुलिस के सहयोग से जारी किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामले की जाँच में राज्य और केंद्र दोनों के एजेंट सक्रिय रूप से शामिल हैं।

संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया विविध रही। स्थानीय पुलिस ने कहा कि यह छापेमारी न केवल

स्थानीय स्तर पर साइबर अपराध को रोकने में मदद करेगी, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की जाँच को तेज़ करने की राह प्रशस्त करेगी। वहीं, व्यापारियों का एक समूह इस कार्रवाई को सराहते हुए कहा कि ऐसे कदम डिजिटल लेन‑देन की सुरक्षा को बढ़ावा देंगे और उपभोक्ताओं के विश्वास को पुनर्स्थापित करेंगे।

हालांकि, कुछ तकनीकी विशेषज्ञों ने यह संकेत दिया कि बिना व्यापक सार्वजनिक जागरूकता के केवल छापेमारी से समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

विपरीत पक्ष से, मोहम्मद कैफ के परिवार के spokesperson ने कहा कि उनके क्लाइंट को अभी तक किसी भी आरोप में दोषी नहीं ठहराया गया है और वह सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि कैफ ने हमेशा वैध व्यापारिक गतिविधियों में भाग लिया है और अब तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जो उसे अपराधी सिद्ध करे। इस बीच, कुछ साइबर सुरक्षा कंपनियों ने यह कहा कि इस मामले में तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण रही है और भविष्य में इसी तरह के

मामलों को रोकने के लिये अधिक मजबूत एन्क्रिप्शन और दो‑स्तरीय सत्यापन आवश्यक होगा।

राजनीतिक रूप से, यह छापेमारी केंद्र और राज्य सरकार दोनों के बीच सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण प्रस्तुत करती है। केंद्र सरकार ने हाल ही में डिजिटल इंडिया पहल के तहत साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देने की घोषणा की थी, और इस कार्रवाई को

इस नीति के कार्यान्वयन के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। गुजरात की राज्य सरकार ने कहा कि वह NIA के साथ मिलकर इस तरह की जाँच को तेज़ करने के लिये विशेष टास्क फोर्स स्थापित करेगी, जिससे भविष्य में साइबर अपराध के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी

Updated: August 24, 2026

NIA’s raid reveals that the fraudsters were not just local scammers but part of a trans‑regional, VPN‑shielded network—showing how cybercrime now blurs state borders.
The operation underscores a broader shift: government agencies are moving from reactive arrests to proactive, tech‑driven

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