भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने कुल छह नेताओं को अलग-अलग राज्यों से राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। इस सूची में वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी और आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को दोबारा मौका दिया गया है। इसके अलावा तेलंगाना, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु से नए नाम भी शामिल किए गए हैं।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब 16 मार्च 2026 को राज्यसभा की कई सीटों के लिए चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों में कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और राजनीतिक दल अपनी रणनीति के अनुसार नए उम्मीदवार मैदान में उतार रहे हैं।
कांग्रेस की ओर से जारी सूची से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पार्टी अनुभवी नेताओं और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन कर रही है।
राज्यसभा चुनाव: क्यों अहम है यह सूची
भारत की संसद के उच्च सदन राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य चुनते हैं। हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं।
2026 में भी इसी प्रक्रिया के तहत कई राज्यों में चुनाव हो रहे हैं। इस बार करीब 37 सीटों पर मतदान होना है, जिनमें से कई सीटें कांग्रेस और अन्य दलों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
राज्यसभा में संख्या बल किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यही सदन कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
कांग्रेस की उम्मीदवारों की सूची
कांग्रेस ने जिन छह नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, उनमें कई अनुभवी और कुछ नए चेहरे शामिल हैं।
1. अभिषेक मनु सिंहवी – तेलंगाना
वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता रहे अभिषेक मनु सिंहवी को फिर से राज्यसभा भेजने का फैसला किया गया है। उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था और पार्टी ने उनकी संसदीय और कानूनी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें दोबारा मौका दिया है।
सिंहवी कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली बौद्धिक चेहरों में गिने जाते हैं। वे कई संवैधानिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं और संसद में भी पार्टी की आवाज बुलंद करते रहे हैं।
उनका राज्यसभा में यह पाँचवां कार्यकाल हो सकता है।
2. वेम नरेंद्र रेड्डी – तेलंगाना
कांग्रेस ने तेलंगाना से दूसरी सीट के लिए वेम नरेंद्र रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है। वे राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चयन तेलंगाना में कांग्रेस सरकार की मजबूती और क्षेत्रीय नेतृत्व को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
3. फूलो देवी नेताम – छत्तीसगढ़
कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ से आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को फिर से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। नेताम वर्तमान में भी राज्यसभा सदस्य हैं और पार्टी ने उनके अनुभव और जनाधार को देखते हुए उन्हें दोबारा मौका दिया है।
फूलो देवी नेताम छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय की मजबूत आवाज मानी जाती हैं। उनके पुनर्नामांकन को सामाजिक संतुलन और आदिवासी प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय माना जा रहा है।
4. करमवीर सिंह बौद्ध – हरियाणा
हरियाणा से कांग्रेस ने करमवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है। यह नाम राज्य की सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर तय किया गया माना जा रहा है।
हरियाणा में राज्यसभा की सीटों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है।
5. अनुराग शर्मा – हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस ने अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण पार्टी इस सीट को जीतने की स्थिति में मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस नाम के जरिए पार्टी संगठन और राज्य नेतृत्व को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।
6. एम. क्रिस्टोफर तिलक – तमिलनाडु
तमिलनाडु से कांग्रेस ने एम. क्रिस्टोफर तिलक को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। राज्य में कांग्रेस, द्रमुक के साथ गठबंधन में है और गठबंधन की सीट बंटवारे की रणनीति के तहत यह सीट कांग्रेस के हिस्से में आई है।

पार्टी नेतृत्व की बैठक के बाद हुआ फैसला
सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवारों के चयन को लेकर कांग्रेस नेतृत्व के बीच कई दौर की चर्चा हुई। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और कई वरिष्ठ नेताओं ने राज्यों से आए प्रस्तावों पर विचार किया।
तेलंगाना में तो लगभग 16 से ज्यादा नेताओं के नाम चर्चा में थे, लेकिन अंततः अनुभव और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अंतिम सूची तय की गई।
तेलंगाना पर कांग्रेस का खास फोकस
कांग्रेस के लिए तेलंगाना इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। राज्य में हाल ही में कांग्रेस सरकार बनने के बाद पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहती है।
राज्य विधानसभा में कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या है, इसलिए पार्टी दोनों सीटें जीतने का दावा कर रही है।
यदि दोनों उम्मीदवार जीतते हैं तो राज्यसभा में तेलंगाना से कांग्रेस की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति मजबूत होगी।
आदिवासी और सामाजिक संतुलन की रणनीति
कांग्रेस की इस सूची में सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा गया है।
- फूलो देवी नेताम के जरिए आदिवासी समुदाय
- करमवीर सिंह बौद्ध के जरिए सामाजिक संतुलन
- विभिन्न राज्यों से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है।
राज्यसभा चुनाव का पूरा परिदृश्य
2026 के राज्यसभा चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं। इस बार देश के विभिन्न राज्यों की कुल 37 सीटों के लिए चुनाव होने हैं।
इन चुनावों के परिणाम से संसद के उच्च सदन में राजनीतिक दलों का शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।
राज्यसभा का कार्यकाल छह साल का होता है और हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
भाजपा और अन्य दलों की रणनीति
जहां कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, वहीं भाजपा और अन्य दल भी अपनी सूची जारी कर रहे हैं।
कई राज्यों में मुकाबला सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यसभा के चुनाव अक्सर विधानसभा की संख्या पर निर्भर करते हैं, इसलिए जिन राज्यों में किसी दल की सरकार है, वहां उस दल की जीत की संभावना ज्यादा रहती है।
कांग्रेस के लिए क्या मायने रखता है यह चुनाव
राज्यसभा में कांग्रेस की संख्या पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है। ऐसे में यह चुनाव पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
यदि कांग्रेस इन सीटों में से अधिकांश जीतने में सफल रहती है तो संसद के उच्च सदन में उसकी ताकत बढ़ सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राज्यसभा में मजबूत उपस्थिति होने से विपक्षी दलों को सरकार के विधेयकों पर प्रभाव डालने का मौका मिलता है।