Press "Enter" to skip to content

Posts published in “देश – भारत”

Red Fort Blast Case: NIA की बड़ी कार्रवाई, 2 और आतंकी गिरफ्तार, कुल 11 आरोपी हिरासत में; साजिश की परतें खुलीं

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक लाल किला के पास हुए चर्चित बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ताजा गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। एजेंसी का दावा है कि जांच में एक सुनियोजित आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें लॉजिस्टिक सपोर्ट, हथियारों की आपूर्ति और विदेशी संपर्कों की भूमिका सामने आ रही है।

यह मामला नवंबर 2025 में लाल किला क्षेत्र में हुए विस्फोट से जुड़ा है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया था। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच NIA को सौंप दी थी।

ताजा गिरफ्तारी: कौन हैं आरोपी?

NIA ने जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान जमीर अहमद अहंगर और तौफैल अहमद भट के रूप में हुई है। दोनों जम्मू-कश्मीर के निवासी बताए जा रहे हैं। एजेंसी के अनुसार, ये दोनों प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े ‘ओवर ग्राउंड वर्कर’ (OGW) के तौर पर काम कर रहे थे।

जांच एजेंसी का कहना है कि ये आरोपी मुख्य साजिशकर्ता को हथियार और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में शामिल थे। प्रारंभिक पूछताछ में यह संकेत मिला है कि इन्होंने विस्फोट में इस्तेमाल हुए नेटवर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

दोनों आरोपियों को दिल्ली की विशेष NIA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए एजेंसी की रिमांड पर भेज दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

नवंबर 2025 में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक कार में हुए धमाके से पूरा इलाका दहल गया था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास खड़ी कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं और कई लोग घायल हो गए। इस हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें मुख्य आरोपी भी शामिल था।

जांच में सामने आया कि विस्फोटक से लदी कार को एक संदिग्ध ने मौके पर खड़ा किया था। सुरक्षा एजेंसियों ने मौके से मिले डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर कई राज्यों में छापेमारी की।

साजिश की परतें: ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल’ का खुलासा

NIA की जांच में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। एजेंसी का दावा है कि इस हमले के पीछे एक तथाकथित ‘व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल’ सक्रिय था। यानी ऐसे लोग, जो पेशे से शिक्षित और पेशेवर पृष्ठभूमि रखते हैं, लेकिन गुप्त रूप से आतंकी गतिविधियों में संलिप्त थे।

इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कुछ डॉक्टर और धार्मिक कार्यकर्ता भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये लोग सीधे तौर पर विस्फोट को अंजाम देने में शामिल नहीं थे, बल्कि साजिश रचने, फंडिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट और छिपने की जगह उपलब्ध कराने में भूमिका निभा रहे थे।

विदेशी कनेक्शन की जांच

NIA इस मामले में विदेशी लिंक की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ संदिग्धों के संपर्क पाकिस्तान और खाड़ी देशों में बैठे हैंडलर्स से हो सकते हैं। हालांकि, एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया है।

जांच टीम डिजिटल चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और हवाला ट्रांजैक्शन की गहन पड़ताल कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, फंडिंग का नेटवर्क बहुस्तरीय और जटिल था, जिसे ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण है।

सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती

लाल किला जैसे राष्ट्रीय प्रतीक स्थल के पास हुए विस्फोट ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में हाई अलर्ट घोषित किया गया था। संवेदनशील इलाकों, मेट्रो स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में सुरक्षा बढ़ा दी गई।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताते हुए जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। NIA के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी मिलकर काम कर रही हैं।

कानूनी कार्रवाई और आगे की रणनीति

NIA ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। एजेंसी जल्द ही आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है।

विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह एक सुनियोजित आतंकी साजिश थी, जिसका मकसद देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देना और दहशत फैलाना था।

NCERT की कक्षा 8 की विवादित सामाजिक विज्ञान पुस्तक: सीजेआई की आपत्ति के बाद पुनः समीक्षा, बिक्री रोक और बिके 38 प्रतियों की वापसी की कोशिश

नई दिल्ली – राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की सोशल साइंस भाग-2 की पाठ्यपुस्तक को विवाद का विषय बनने के बाद वापस बुला लिया है। इसका कारण एक अध्याय था जिसमें न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों, विशेषकर ‘भ्रष्टाचार’ पर चर्चा की गई थी। इस अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने कड़ी आपत्ति जताई, जिस पर NCERT ने वितरण रोक दिया और पुस्तक को बाजार से हटा लिया।

विवाद का मूल — ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाला अध्याय

पुस्तक का चैप्टर 4, जिसका शीर्षक था “The Role of Judiciary in Our Society”, इसमें न्यायपालिका की भूमिका के साथ न्यायिक प्रणाली द्वारा सामना किए जाने वाले चुनौतियों जैसे लंबित मामलों और भ्रष्टाचार पर भी सामग्री शामिल थी। इस खंड में अदालतों के सामने ठोस मुद्दों के रूप में न्यायाधीशों की संख्या की कमी, प्रक्रियात्मक जटिलताएं और भ्रष्टाचार की बात की गई थी, जिसे पढ़ाने का उद्देश्य था छात्रों को वास्तविकता-आधारित दृष्टिकोण देना।

एनसीईआरटी की इस नई पाठ्यपुस्तक का लक्ष्य था रिमूव प्रभावित सामग्री और स्कूल पाठ्यक्रम को नया रूप देना, लेकिन कोर्ट की आपत्ति के चलते इस प्रक्रिया को रोकना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट में मामला और कड़ी प्रतिक्रिया

इस विवाद ने सुप्रीम कोर्ट तक ध्यान आकर्षित किया, जब वरिष्ठ वकीलों ने इस मुद्दे को कोर्ट में उठाया और सीजेआई सूर्यकांत ने खुद इस पर गंभीर आपत्ति जताई। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि वह “किसी भी व्यक्ति या संस्थान को न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे”। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को ऐसे आरोपों से बचाना आवश्यक है जो उसके प्रति आम जनता का विश्वास प्रभावित कर सकते हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि “संस्था को बदनाम नहीं करने देंगे और न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा करेंगे”, और इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की।

NCERT की प्रतिक्रिया और माफी

NCERT ने कोर्ट की प्रतिक्रिया के तुरंत बाद इस विवादित पाठ्यपुस्तक को बाजार से हटा दिया और एक बयान जारी कर “भूल और अनुचित सामग्री” की पहचान करने की बात कही। संस्थान ने कहा कि यह गलती “पूरी तरह से अनजाने में हुई थी” और उसने जनता से क्षमा भी मांगी। NCERT ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका लक्ष्य किसी संवैधानिक संस्था का अपमान करना नहीं था और वह न्यायपालिका के प्रति सम्मान रखता है।

NCERT ने यह भी कहा कि अब यह अध्याय समीक्षा और पुनर्लेखन के बाद 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि पाठ्यक्रम में संतुलित और उपयुक्त सामग्री शामिल की जा सके।

बिके 38 कॉपियों की वापसी की कोशिश

कुल मिलाकर इस किताब की 2.25 लाख प्रतियां छापी गई थीं, लेकिन वितरण के तुरंत बाद ही NCERT ने किताब को वापस बुला लिया। उनमें से केवल 38 प्रतियां ही खरीदी गईं थीं, और एनसीईआरटी अब उन सभी को वापस लेने की कोशिश में है।

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अब तक 16 प्रतियां वापिस आ चुकी हैं, जबकि अन्य खरीदारों से संपर्क करके किताबें वापस लेने की प्रक्रिया जारी है। उन खरीदारों से संपर्क नहीं हो पाने पर बैंक विवरण और यूपीआई आईडी के आधार पर प्रयास किया जा रहा है।

निष्कर्ष और व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह विवाद न केवल स्कूल पाठ्यक्रमों में सामग्री के चयन पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि यह शिक्षा, संवैधानिक संस्थाओं के प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति सम्मान जैसे विषयों पर भी बहस का कारण बन रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा में वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा होना आवश्यक है, लेकिन साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि संवैधानिक संस्थानों की भूमिका और प्रतिष्ठा का संतुलित और सम्मानजनक तरीके से वर्णन किया जाए, खासकर जब यह आकांक्षी युवा छात्र पीढ़ी को तैयार कर रहा हो।

प्रधानमंत्री मोदी को इजराइल की संसद नेसेट द्वारा सर्वोच्च सम्मान, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में योगदान के लिए सम्मानित

इजराइल की पार्लियामेंट नेसेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल से सम्मानित किया है, जो नेसेट का सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी के असाधारण योगदान के लिए दिया गया है, जिन्होंने भारत और इजराइल के बीच स्ट्रेटेजिक रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने नेसेट को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी है और जल्द ही दुनिया की टॉप तीन इकॉनमी में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ महत्वपूर्ण ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं और एक बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा पीस इनिशिएटिव को भारत का समर्थन देने की बात कही और कहा कि यह पहल एक रास्ता दिखाता है जो शांति और स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा कि भारत इस इलाके में बातचीत, शांति और स्थिरता के लिए आपके और दुनिया के साथ है।

नेसेट के सदस्यों ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ तस्वीरें लीं और उन्हें सम्मानित किया। यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और भारत-इजराइल संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को दर्शाता है।

मार्च 2026 में बैंक अवकाश: होली और रामनवमी समेत 18 दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें ऑनलाइन सेवाओं का लाभ

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कैलेंडर के अनुसार, मार्च 2026 में कुल 18 दिन बैंकों में अवकाश रहेगा। इसमें साप्ताहिक छुट्टियों (5 रविवार और 2 शनिवार) के अलावा, विभिन्न राज्यों के स्थानीय त्योहारों और राष्ट्रीय अवकाशों के कारण 11 दिन बैंक बंद रहेंगे।

मार्च महीने में होली, रामनवमी, और अन्य महत्वपूर्ण त्योहारों के कारण बैंकों में अवकाश रहेगा। इसके अलावा, साप्ताहिक अवकाशों के कारण भी बैंक बंद रहेंगे। यदि आपका बैंक से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण काम है, तो योजना पहले ही बना लें और अपने जरूरी कामों को समय पर निपटाने के लिए ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाएं।

बैंकों की शाखाएं बंद होने के बावजूद, आप ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल ऐप, और एटीएम के जरिए अपना लेनदेन बिना किसी रुकावट के कर सकते हैं। इसके अलावा, शेयर बाजार में इस महीने कुल 12 दिन ट्रेडिंग नहीं होगी, जिसमें साप्ताहिक अवकाश और त्योहारों की छुट्टियां शामिल हैं।

मार्च 2026 में बैंक अवकाश की सूची इस प्रकार है:

* 1 मार्च: रविवार
* 2 मार्च: होलिका दहन (उत्तर प्रदेश)
* 3 मार्च: होली (15 राज्यों में)
* 4 मार्च: अलग-अलग राज्यों में त्योहार (17 राज्यों में)
* 8 मार्च: रविवार
* 13 मार्च: चापचर कुट (मिजोरम)
* 14 मार्च: दूसरा शनिवार
* 15 मार्च: रविवार
* 17 मार्च: शब-ए-कद्र (जम्मू और श्रीनगर)
* 19 मार्च: गुड़ी पड़वा, उगादी और नवरात्र की शुरुआत (11 राज्यों में)
* 20 मार्च: ईद-उल-फितर और जुमात-उल-विदा (5 राज्यों में)
* 21 मार्च: रमजान ईद और सरहुल
* 22 मार्च: रविवार
* 26 मार्च: श्री रामनवमी (13 राज्यों में)
* 27 मार्च: श्री राम नवमी (6 राज्यों में)
* 28 मार्च: दूसरा शनिवार
* 29 मार्च: रविवार
* 31 मार्च: श्री महावीर जयंती (15 राज्यों में)

इसलिए, यदि आपका बैंक से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण काम है, तो योजना पहले ही बना लें और अपने जरूरी कामों को समय पर निपटाने के लिए ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाएं।

भारतीय वायु सेना ने अग्निवीर भर्ती के लिए आयु सीमा बढ़ाई, युवाओं के लिए नए अवसर!

भारतीय वायु सेना ने अग्निवीर भर्ती के लिए आयु सीमा बढ़ाने की घोषणा की है, जिससे युवाओं के लिए नए अवसर खुल गए हैं। पहले अग्निवीर वायु भर्ती के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा 21 वर्ष थी, लेकिन अब 22 वर्ष तक के युवक आवेदन कर सकते हैं। यह निर्णय युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है, जो भारतीय वायु सेना में शामिल होने का सपना देखते हैं।

आवेदन करने की समय सीमा क्या है?
सभी पात्र उम्मीदवार 3 मार्च 2026 से 10 मार्च 2026 के बीच iafrecruitment.edcil.co.in/agniveervayu पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पहले यह आवेदन प्रक्रिया 8 फरवरी 2026 तक चली थी, लेकिन अब आयु सीमा बढ़ाने के साथ एक बार फिर आवेदन विंडो खोली जा रही है।

शैक्षणिक योग्यता क्या है?
अग्निवीर वायु भर्ती के लिए उम्मीदवारों को 10+2 (इंटरमीडिएट) परीक्षा फिजिक्स, मैथ्स और इंग्लिश विषयों के साथ पास करनी होगी। कुल अंक कम से कम 50% और इंग्लिश में कम से कम 50% अंक होने चाहिए। यह योग्यता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से होनी चाहिए।

चयन प्रक्रिया क्या है?
अग्निवीर वायु में चयन कई चरणों में होता है:

लिखित परीक्षा (सीधा कंप्यूटर-आधारित टेस्ट)
फिजिकल फिटनेस टेस्ट (पीएफटी) – दौड़, पुश-अप्स, सीटी टेस्ट आदि
मेडिकल परीक्षा – भारतीय वायु सेना के तय मानकों के अनुरूप फिटनेस
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

सैलरी और अन्य लाभ क्या हैं?
अग्निवीर वायु को चार साल की सेवा अवधि के लिए भर्ती किया जाता है। पहले साल उन्हें लगभग 30,000 रुपये की सैलरी मिलेगी, दूसरे साल 33,000 रुपये, तीसरे साल 36,500 रुपये और चौथे साल 40,000 रुपये की सैलरी मिलेगी।

आवेदन शुल्क क्या है?
सभी उम्मीदवारों के लिए 550 रुपये + 18% जीएसटी आवेदन शुल्क होगा। यह शुल्क ऑनलाइन ही भुगतान करना होगा और जमा किया गया शुल्क वापस नहीं किया जाएगा।

मौसम अलर्ट: 26 फरवरी से 3 मार्च तक देश के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी की संभावना

मौसम विभाग ने 26 फरवरी से 3 मार्च तक देश के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तरी भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष रूप से इसका प्रभाव देखा जा सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार, 25 और 26 फरवरी को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान बिजली कड़कने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। 25 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश, सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, दक्षिण अंदरूनी कर्नाटक, केरल और माहे, लक्षद्वीप में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने की संभावना है। राजस्थान में दिन का तापमान बढ़ने लगा है, जहां बाड़मेर में अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, राज्य में आगामी दिनों में मौसम शुष्क रहेगा।

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 7 दिनों में उत्तर पश्चिम और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने की संभावना है। इस हफ्ते उत्तर पश्चिम भारत के कई इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह सकता है।

राहुल गांधी पर पीयूष गोयल का जोरदार हमला: नकारात्मक राजनीति के पोस्टर बॉय के रूप में उभरे

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी और गांधी परिवार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी नकारात्मक राजनीति के पोस्टर बॉय बन गए हैं और उन्होंने भारत विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाकर देश के हितों से समझौता किया है। पीयूष गोयल ने कहा कि गांधी परिवार ने हमेशा देश के हितों से समझौता किया है, जिसकी शुरुआत देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से ही हो गई थी।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार विदेश यात्राएं कर विभिन्न प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्थाओं से समझौता करते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी 247 बार विदेश यात्रा कर चुके हैं और इस दौरान उन्होंने कई बार येलो बुक प्रोटोकॉल की अनदेखी की। पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए सुरक्षा इंतजामों से समझौता करते हैं और विदेश जाकर भारत और भारतीयों के हितों के खिलाफ काम करते हैं।

पीयूष गोयल ने आगे कहा कि राहुल गांधी के संबंध देश विरोधी ताकतों से रहे हैं और उन्होंने सोरोस के साथ कथित गैर-कानूनी संबंधों के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लद्दाख के संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में गए और वहां भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाले विदेशी व्यक्तियों के साथ संपर्क बनाए। पीयूष गोयल ने कहा कि राहुल गांधी का संबंध चीन और पाकिस्तान से जुड़े लोगों से भी रहा है।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने संविधान से बाहर की शक्तियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उस समय कैबिनेट के फैसलों का सार्वजनिक रूप से विरोध किया गया और प्रधानमंत्री पद का भी अपमान हुआ। पीयूष गोयल ने कहा कि नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के माध्यम से सरकार को प्रभावित किया गया और वामपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी एक तरह से समानांतर कैबिनेट चलाते थे और सुपर प्रधानमंत्री की तरह फैसलों को प्रभावित करते थे। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार पर देश के हितों से समझौता करने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी अपने कार्यकाल के दौरान देश के हितों से समझौता करने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई।

पीयूष गोयल ने बोफोर्स मामले को लेकर आरोप लगाया कि राहुल गांधी के इशारे पर उस समय के विदेश मंत्री ने स्वीडिश अधिकारियों से बोफोर्स घोटाले की जांच रोकने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के मित्र ओटावियो क्वात्रोची को बचाने के लिए निष्पक्ष जांच को प्रभावित किया गया। पीयूष गोयल ने कहा कि बोफोर्स मामले में कांग्रेस और राजीव गांधी की भूमिका को लेकर लंबे समय तक सवाल उठते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाया और भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा का संकल्प: चीफ जस्टिस सूर्यकांत

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को धूमिल करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान तब आया जब अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने एनसीईआरटी की एक किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित विषय की जानकारी दी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और वे किसी भी हाल में इसकी रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश नहीं होने दी जाएगी।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है और कहा है कि कानून अपना काम करेगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ना है तो इसमें प्रशासनिक अधिकारियों का जिक्र क्यों नहीं है, सिर्फ न्यायपालिका की चर्चा क्यों?

एनसीईआरटी की सोशल स्टडी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी को न्यायिक प्रणाली के सामने चुनौतियों के रूप में पढ़ाया जा रहा है। इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विवाद हुआ है और चीफ जस्टिस ने कहा है कि न्यायपालिका को बदनाम नहीं होने दिया जाएगा।

यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता के मुद्दे से जुड़ा हुआ है और सुप्रीम कोर्ट ने इसकी रक्षा का संकल्प लिया है।