- घर में खाना नहीं मिलता था *
श्री जी. कृष्णैय्या पश्चिम चम्पारण के जिला पदाधिकारी थे और मैं पुलिस अधीक्षक। एक दिन हम दोनों बगहा क्षेत्र में नहर की कच्ची सड़क पर चले जा रहे थे। बातों-बातों में अचानक उन्होंने मुझे अपनी ज़िन्दगी के कुछ किस्से सुनाए।
उनके पिता रेलवे के क्लास 4 कर्मचारी थे। उनकी माँ और पिता के पास बासगित के पर्चे पर बनी एक झोंपड़ी थी। दोनों शिक्षित नहीं थे। वे स्वयं पढ़ने में अच्छे थे तो उनको हरिजन छात्रवृति मिली और वे चौथी कक्षा में हरिजन क्षत्रावास चले गए। उनके गाँव में भी एक नहर था। जब हॉस्टल से मन ऊब जाता तब वे नहर में तैरते हुए घर आ जाते परन्तु किसी दिन भी घर के हड़िया में खाना नहीं मिलता। वे फिर भाग कर हॉस्टल चले जाते। कम से कम वहाँ उन्हें खाना तो मिल जाता था।
यह एक छोटा सा परिचय है उस IAS DM का जिसने कभी जाति के आधार पर भेद-भाव नहीं किया। अगर वो अंतर करते भी थे, तो गरीब-अमीर पर, जाति पर कभी नहीं।
जिले का कोई व्यक्ति चाहे कितना भी धनाढ्य क्यों न हो, यह नहीं कह पाया कि कृष्णैय्या जी को उसने छोटा या बड़ा कुछ भी दिया हो। दूसरी ओर ऐसा भी कोई व्यक्ति नहीं था जो यह कह सके कि वह उनसे मिलने उनके घर गया हो और उसे एक प्याला चाय नहीं मिला हो।
जिले में कई अमीर घराने हैं जिनके घर महलों की भांति हैं। एक आम सभा आयोजित की गई थी जिसका स्थान एक महल के बगल में था। लंच का समय हुआ तो उन जमींदार साहब ने DM और SP साहब को अपने महल में स्वागत का प्रस्ताव दिया। मैंने तुरंत जवाब दिया कि घर से टिफ़िन लाया हूँ। DM साहब ने भी यही जवाब दिया। मुझे अत्यंत खुशी हुई। हम दोनों ने अपनी गाड़ी में साथ में बैठ कर घर से लाया टिफ़िन खाया।
आम लोगों के बीच यह चर्चा थी कि इससे पहले DM और SP की ऐसी कोई जोड़ी नहीं आई जिसने ज़मींदारों के स्वागत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया हो।
जिले का आम आदमी उनसे बेहद प्यार करता था, उनकी इज़्ज़त करता था। वे उस जिले में किसी भी भीड़ में घुस जाते तो लोग सम्मान से उनके लिए रास्ता बना देते थे। दुर्भाग्य था कि जिस घटना में उनकी हत्या हुई, वह मुजफ्फरपुर जिले में घटित हुई थी। पश्चिम चम्पारण में यह घटना हो ही नहीं सकती थी। - लेखक–अभयानंद पूर्व डीजीपी बिहार
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बिहार में कोरोना का कहर जारी है और अब हर घंटे 100 से अधिक कोरोना पाँजिटिव मरीज सामने आने लगा है ।आज बेगूसराय जिले में कोरोना के 103 नये मरीज सामने आये हैं इस तरह बेगूसराय में मरीजों की संख्या 197 पंहुची गयी है वही पटना अभी भी कोरोना का हॉटस्पॉट बना हुआ है डॉक्टरों से लेकर नेता तक कोरोना की चपेट में आ गये हैंमुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सेक्रेटरी अनुपम कुमार व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा भी कोरोना पॉजिटिव हो गये हैं वही दरभंगा के एसएसपी अवकाश कुमार के कोरोना संक्रमित होने की सूचना आ रही है ।
वहीं दरभंगा व्यवहार न्यायालय के 4 अधिकारी समेत कई कर्मियों के कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना आ रही है. इधर शुक्रवार को यह जानकारी सामने आई है कि जदयू कार्यालय में 5 और लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।
बात पटना की करे तो AIIMS के कोरोना नोडल डॉ. सजीव कुमार का कहना है कि पिछले 24 घंटे में 2 मौतें हुई है। पटना के दीदारगंज के बांका गांव के रहने वाले एक 25 साल के मरीज का एम्स में आंत का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के पहले कोरोना की जांच में पुष्टि नहीं हुई। ऑपरेशन के बाद कोरोना की पुष्टि हुई और तब हालात काफी गंभीर हो गई। आपात स्थिति में ऑपरेशन के बाद कोरोना से मरीज की मौत हो गई है। दूसरी मौत एक 85 वर्षीय महिला की हुई है, जो पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर थी और उसके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। कोरोना नोडल का कहना है कि 24 घंटे में डॉ. अनिल कुमार, HOD, ट्रॉमा और इमरजेंसी के साथ 14 डॉक्टर संक्रमित हुए हैं। पैरामेडिक्स स्टाफ भी अधिक संख्या में संक्रमित हुए हैं।
पटना सिविल कोर्ट में भी एक न्यायिक पदाधिकारी, 12 कर्मचारी समेत 19 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इनमें वकील हैं।
इस बीच बिहार सरकार ने कोरोना को लेकर नया गाइड लाइन जारी किया है कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार ने थोड़ी सी सख्ती और बढ़ा दी है। सभी स्कूल, कॉलेज, शिक्षण, प्रशिक्षण संस्थान व कोचिंग को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी कर दिया। सभी छात्रावास भी बंद रहेंगे, लेकिन स्कूल, कॉलेज, शिक्षण, प्रशिक्षण व कोचिंग संस्थान के कार्यालय 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलेंगे। ऑनलाइन शिक्षण कार्य संचालित होंगे। केन्द्र तथा राज्य आयोग द्वारा आयोजित नियोजन संबंधी परीक्षाएं तथा विभिन्न विद्यालय बोर्डों द्वारा आयोजित परीक्षाएं होंगी। पुलिस व होमगार्ड प्रशिक्षण संस्थान तथा चिकित्सा से संबंधित शिक्षण, प्रशिक्षण संस्थान(छात्रावास सहित) खुले रहेंगे। अन्य सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के संबंध में संबंधित विभागाध्यक्ष निर्णय लेंगे। मुख्य सचिव आमिर सुबहानी के आदेश से गृह विभाग ने यह आदेश जारी कर दिया है। सभी इंडोर व आउटडोर स्टेडियम में होने वाले खेल से संबंधित गतिविधियां स्थगित होंगी। राज्य में गुरुवार से नया गाइड लाइन जारी किया है। इसके तहत कई तरह के प्रतिबंध लागू किए गए हैं जो 21 जनवरी तक प्रभावी रहेंगे।
पटना हाईकोर्ट ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा के मामलें पर सुनवाई करते हुए केंद्र ( आर्केलोजिकल् सर्वे ऑफ इंडिया) और बिहार सरकार को अगली सुनवाई में निश्चित रूप से हलफनामा करने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
इससे पहले हाईकोर्ट ने अधिवक्ता निवेदिता निर्विकार की अध्यक्षता में वकीलों की तीन सदस्यीय कमिटी गठित की थी।कोर्ट ने समिति को इन स्मारकों के हालात का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट करने का आदेश दिया था।
पिछली सुनवाई में वकीलों की समिति ने कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट रखी।
वकीलों की कमिटी ने जीरादेई के डा राजेंद्र प्रसाद की पुश्तैनी घर का जर्जर हालत, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में पीछे रह जाने की बात कहीं।साथ ही पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गन्दगी और रखरखाव की स्थिति भी असंतोषजनक पाया।वहाँ काफी गन्दगी पायी गई और सफाई व्यवस्था की खासी कमी थी।
साथ ही पटना के सदाकत आश्रम की दुर्दशा को भी वकीलों की कमिटी ने गम्भीरता से लिया।इस मामलें पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को 7 जनवरी,2022 तक जवाब देने का निर्देश दिया था।
जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया कि जीरादेई गांव व वहां डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है।याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं नहीं के बराबर है।न तो वहां पहुँचने के सड़क की हालत सही है।साथ ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति और भी खराब हैं,जिसकी लगातार उपेक्षा की जा रही है।
उन्होंने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार के इसी उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण लगातार हालत खराब होती जा रही है।कोर्ट को बताया गया कि पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित उनसे सम्बंधित स्मारकों की दुर्दशा भी साफ दिखती हैं।वहां सफाई,रोशनी और लगातार देख रेख नहीं होने के कारण ये स्मारक और ऐतिहासिक धरोहर अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
इस स्थिति में शीघ्र सुधार के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने की जरूरत हैं।
डा राजेंद्र प्रसाद न सिर्फ भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नेता रहे,बल्कि भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष भी रहे।तत्पश्चात् भारत के पहले राष्ट्रपति बने।इस पद पर उन्होंने मई,1962 तक कार्य किया।
बाद में राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद पटना के सदाकत आश्रम में रहे,जहां 28 फरवरी,1963 को उनकी मृत्यु हुई।
ऐसे महान नेता के स्मृतियों व् स्मारकों की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाना उचित नहीं हैं।इनके स्मृतियों और स्मारकों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 11 जनवरी,2022 को होगी।
एसपीजी से जुड़े एक अधिकारी हमारे अच्छे मित्र रहे हैं , कल सुबह से ही उन्हें ढूंढ रहा था लेकिन कोई लोकेशन नहीं मिल पा रहा था शाम चार बजे उनका मैसेज आया अभी अभी संतोष जी लैंड किये हैं कुछ खास है क्या मैंने कहां हां कुछ खास तो है कि लेकिन रात में आराम से बात करेंगे।
रात उनसे लम्बी बातचीत हुई स्वाभाविक था मसला पंजाब और पीएम की सुरक्षा से ही जुड़ा था बातचीत को मैंने प्रश्न और उत्तर सक्ल में करना शुरू किया मेरा पहला सवाल था पंजाब में जो कुछ भी हुआ उस पर आपका क्या कहना है।
संतोष जी मीडिया में जो खबरें आ रही है उसके आधार पर पीएम के यात्रा का मैं कमान इन चीफ रहता तो पीएम को इतनी दूर तलक सड़क मार्ग से जाने की कतई इजाजत नहीं देता वैसे कुछ वर्षो में पीएम की सुरक्षा को लेकर जो मानक निर्धारित उसको पीएम की और से कई बार तोड़ा गया है और यही वजह है कि पूराने लड़के इस सर्विस से अपने को अलग करने लगा है क्यों कि देश ने दो दो प्रधानमंत्री को खोया है और बहुत ही सोच विचार और मंथन के बाद एसपीजी का गठन किया गया एसपीजी में काम करने वालों के लिए एक ही मंत्र है अपनी जान चली जाये पीएम का बाल बांका भी नहीं होना चाहिए ।
मेरा दूसरा सवाल है एसपीजी इतनी लम्बी यात्रा को लेकर सहमत नहीं होगा तो फिर पीएम कैसे निकल गये
ऐसा है संतोष जी एसपीजी के जो भी अधिकारी पीएम के साथ में होगे वो पीएम के इच्छा के बावजूद सड़क मार्ग से इतनी दूर तक ले चलने को तैयार नहीं हुए होंगे क्यों कि आज तक जब से एसपीजी का गठन हुआ है पांच से दस किलोमीटर सड़क मार्ग से चलने को लेकर सभी तरह की तैयारी रहती है लेकिन इतनी दूर 140 किलोमीटर सड़क मार्ग से पीएम को लेकर चलना सोच भी नहीं सकते हैं ।
अगर पीएम ने सड़क मार्ग से जाने का इच्छा व्यक्त किये होगे तो फिर एक पूरी प्रक्रिया है इसकी सूचना तुरंत डीजी एसपीजी को गया होगा डीजी एसपीजी इसकी सूचना कैबिनेट सेक्रेटरी को दिये होंगे और कैबिनेट सेक्रेटरी का काम है स्टेट के डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी से बात करके पीएम की यात्रा का रूट तय कराये और उसके बाद कैबिनेट सेक्रेटरी और उनका पूरा सचिवालय सक्रिय हो जाता है उनके सचिवालय में कई आईपीएस अधिकारी भी रहते हैं वो स्टेट पुलिस चीफ से कोडिनेट करके पीएम के लिए रास्ता तैयार कराते हैं हालांकि मीडिया में जो खबर आ रही है मुझे नहीं लगता है कि पंजाब का डीजीपी और मुख्य सचिव पीएम के सड़क मार्ग से जाने कि सहमति दिया होगा भले ही बातचीत के दौरान पीएम जाना चाहते हैं कुछ करो तो फिर ये दोनों अधिकारी तैयार हो गये होगे क्यों कि इतनी दूर सड़क मार्ग से जाने कि अनुमति कोई स्टेट नहीं दे सकता है ऐसा क्या था मौसम की खराबी की वजह से मोदी जी भी कई सभा को मोबाइल से संबोधित किये हैं वहां भी कर सकते थे ।
संतोष जी हुआ यही होगा कि कैबिनेट सैक्ट्री कह दिये होगे किसी तरह प्रतिष्ठा बचाओ पीएम जाना चाह रहे हैं तो ये लोग मान गये होगे क्यों कि सुरक्षा कारणों से राज्य के सीनियर अधिकारी ना कह दिये तो फिर सवाल ही नहीं है कि पीएम यात्रा पर निकल जाये ।
तब तो स्टेट का फेलियर है संतोष जी उपरी तौर पर आ कह सकते हैं लेकिन आईबी कहां सोयी हुई थी एसपीजी और आईबी के अधिकारी हर पल एक दूसरे से सूचना शेयर करते रहते हैं फ्लाई आभर पर पब्लिक पहुंच गयी है आईबी को रिपोर्ट करना चाहिए था ना वैसे हुआ यही होगा कि सभी तरह की जानकारी के बावजूद कैबिनेट सचिव पीएम की वजह से चुपी साध लिये होगे लेकिन जैसे ही थोड़ी सी समस्या सामने आयी तुरंत वापस करवा लिए ऐसा नहीं है एसपीजी इस तरह के मूभमेन्ट में भी पीएम को सुरक्षित निकालने में सक्षंम था वैसे इस मुद्दे को लेकर जो सियासत हो रही है उससे फोर्स का मनोबल गिरेगा क्यों कि पीएम की सुरक्षा से जुड़े अधिकारी हमेशा विवाद से बचना चाहता है ऐसे में इस बार जो हो रहा है आने वाले समय में पीएम की यात्रा को लेकर एक अलग तरह की समस्या उत्पन्न हो सकती है सरकार किसी भी पार्टी कि रहे पीएम की सुरक्षा को लेकर एक व्यवस्था बनी हुई है उसमें राज्य और केन्द्र की ऐजसी साथ काम करती है और दोनों एक दूसरे को सहयोग करती रहती है इसमें पार्टी और सरकार का कोई भी योगदान नहीं होता है सारे आईएस आईपीएस अधिकारी भले ही किसी स्टेट के कैडर के हो उनका विभागयी बांस कैबिनेट सैक्ट्री ही होता है और उनका इतना अधिकार है कि किसी भी अधिकारी की कैडर बदल सकते हैं और सीधे कार्यवाही भी कर सकते हैं इसलिए कोई पदाधिकारी जानबूझ कर इस तरह की गलती करने का साहस नहीं कर सकता है ।देखिएगा एक सप्ताह में मामला ठंडे बस्ता में चला जायेंगा क्यों कि ज्यादा खीचतान किये ना तो फिर आने वाले समय में पीएम के मूवमेंट को लेकर एक अलग तरह की परेशानी खड़ी हो सकती है आपात स्थिति में तब कोई भी अधिकारी रिक्स लेने से बचने लगेगा ।
पटना हाई कोर्ट ने सिवान जिले में स्थित अविभाजित बिहार के प्रथम हाई स्कूल के जीर्णोद्धार के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के सेकंडरी स्कूल के निदेशक से रिपोर्ट तलब किया है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास चन्द्र ऊर्फ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
खास बात यह है कि यह राज्य का पहला इंग्लिश स्कूल भी है, जिसे इंग्लिश स्कूल के रूप में जाना जाता है। किंतु नारायण सिंह द्वारा जमीन दान में दिए जाने के बाद यह जिला का पहला हाई स्कूल हो गया।
कोर्ट ने सेकंड्री स्कूल के निदेशक को स्वयं विद्यालय जाकर विद्यालय का आकलन करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा है। जनहित याचिका में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे जीर्ण शीर्ण स्थिति में सिवान जिले के गोरिया कोठी में मौजूद नारायण कर्मयोगी हाई स्कूल के जीर्णोद्धार हेतु आदेश देने की माँग की गई थी।
उक्त स्कूल की स्थापना वर्ष 1916 में की गई थी। स्कूल में अभी भी कुछ अनोखी वस्तुएं (एंटीकस) असुरक्षित रूप से पड़ी हुई है। इतना ही नहीं विद्यालय में चहारदीवारी भी नहीं है।
कई एकड़ जमीन में स्थित इस हाई स्कूल में लाईब्रेरी, लैब व खेल के सामान भी मौजूद हैं। चहारदीवारी के नहीं होने से सभी बहुमूल्य वस्तुएं असुरक्षित है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा सभी संबंधित प्रतिवादियों के समक्ष उक्त मामले में उचित कार्रवाई करने को लेकर स्पीड पोस्ट से अभ्यावेदन भी दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने यह जनहित याचिका दायर किया। अब इस मामले पर सुनवाई छह सप्ताह बाद कि जाएगी।
राजनीतिक द्वेष में प्रधानमंत्री की जान लेना चाहती है कांग्रेस, सुरक्षा में सेंधमारी संयोग नहीं – सुशील कुमार मोदी
- जो लोग राजनीतिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परास्त नहीं कर पाए, वे देश के दुश्मनों के साथ सांठगांठ कर उनकी हत्या की साजिश करने पर उतर आए हैं।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा में इरादतन की गई सेंधमारी पर पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा ने चिंता व्यक्त की, लेकिन सोनिया गाँधी ने एक शब्द नहीं कहा।
कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी खुद उस दल की मंशा बता रही है, जिसके नेता पाकिस्तान जाकर मोदी को हटाने की मदद मांग चुके हैं। - पंजाब के एडीजीपी ( कानून-व्यवस्था) ने कुछ संगठनों के रोड ब्लॉक करने के बारे में तीन बार राज्य की चन्नी सरकार को आगाह किया था।
क्या यह संयोग था कि 1,3,4 जनवरी को भेजे गए एहतियाती प्रशासनिक निर्देशों को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया? भिंडरावाला पैदा करने वाली कांग्रेस पंजाब को फिर से उग्रवाद में झोंकने की कोशिश कर रही है।
बिहार में कोरोना का हाल लगातार बिगड़ता जा रहा है पटना सबसे बड़ा हॉट स्पॉट बन गया है। आज दोपहर 12 बजे तक 1599 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसमें से 1203 मरीज पटना का है और 396 लोग पटना से बाहर के हैं।जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आया है उसमें 17 साल से कम उम्र के 18 बच्चे भी शामिल हैं।वही दूसरी और कोरोना को लेकर आ रही खबर को देखते हुए मुख्य सचिव अमीर सुबहानी बिहार के सभी जिले के डीएम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हलात का जायजा ले रहे हैं ।
इस बीच स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मीडिया को बताया है कि ‘बिहार में कोरोना मरीज 3 से 5 दिन में ठीक हो रहे हैं। घबराने की जरूरत नहीं है। सिर्फ 63 लोग अस्पताल में भर्ती हैं।
98% होम आइसोलेशन में ही ठीक हो रहे हैं। कोरोना का बढ़ता ट्रेंड इंडीकेट करता है कि यह कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन है। बिहार में डेल्टा व डेल्टा प्लस वैरिएंट के केस भी हैं। नए वैरिएंट की पहचान के लिए IGIMS में एक और मशीन लगेगी।
‘वहीं, BJP के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है, ‘कल जांच में कोरोना पॉजिटिव आया है। सम्पर्क में आए लोग जांच करा लें।’
एसपीजी चीफ को पद छोड़ देना चाहिए सवाल देश की सुरक्षा से जुड़ा है ।
ये बात वर्ष 2003 की है जब पहली बार एसपीजी सुरक्षा वाले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यक्रम को कवर करने का मौका मिला था । जहां तक मुझे याद है 6 जून को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कोसी नदी पर महासेतू के निर्माण की नींव रखने के लिए निर्मली आने वाले थे उनके आने को लेकर क्या क्या तैयारी चल रही है इसकी रिपोर्टिंग के लिए तीन बार दरभंगा से निर्मली जाना पड़ा था।
इसके लिए ट्रेन से सुबह निकलना पड़ता था और देर रात तक लौटना होता था ।इस दौरान कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा को लेकर एसपीजी कितना सजग था ये मैं देख चुका हूं । निर्मली नेपाल के सीमा के काफी करीब था और उस समय नेपाल में माओवादी हिंसा चरम पर था जैसे ही निर्मली पहुंचे कार्यक्रम स्थल के आसपास मौजूद पुलिसकर्मी कवर करने से रोक दिया बहुत वाद विवाद हुआ तो वो मुझे एसपीजी के अधिकारी के पास ले गये एसपीजी के अधिकारी बहुत ही कड़े लहजे में कहां अभी तुरंत आप निकल जाइए कार्यक्रम को लेकर कवर नहीं कर सकते बेहद संवेदनशील इलाका है।
मैं अड़ा हुआ था कवर ता करेंगे ही करेंगे इतनी दूर से आये हैं तैयारी को लेकर खबर करनी ही पड़ेगी क्यों कि चैनल हेड का आदेश है । बातचीत चल ही रही थी उसी दौरान एक अधिकारी मेरा पूरा पता पुछ लिया और चंद मिनटों में ही दरभंगा और समस्तीपुर एसपी से मेरे बारे में उस समय सेटेलाइट फोन से पूरी जानकारी ले लिया, जानकारी मिलने के बाद दोनों अधिकारियों के बीच आंखों आंखों में ही संवाद हुआ और फिर उन्होंने बैठने के लिए कुर्सी मंगवाया और फिर साथ भोजन नाश्ता और कार्यक्रम को कवर करने में पूरा सहयोग भी किया और इस दौरान एसपीजी के गठन से लेकर नेपाल के माओवादी आन्दोलन को लेकर लम्बी बातचीत हुई ।
दो दिन बाद फिर जाने का आदेश हुआ वही सुबह सुबह छुक छुक करती रेल की सवारी करके पहुंचे तो देखते हैं एनएसजी की पूरी नई टीम है फिर उसी प्रोसेस से गुजरना पड़ा मुश्किल हुआ कवर करने में और जब कार्यक्रम के दिन पहुंचे तो उस दिन एसपीजी का कोई तीसरी टीम पहुंच हुई थी ।
मतलब इस स्तर पर पीएम के कार्यक्रम की तैयारी एसपीजी करती है ।हालांकि बाद के दिनों में एसपीजी सुरक्षा मानक वाले राहुल गांधी और सोनिया गांधी के कार्यक्रम को भी कवर करने का चार बार मौका मिला लेकिन मोदी के कार्यक्रम की बात करे तो एक दर्जन से अधिक कार्यक्रम को कवर कर चुके हैं इसलिए पीएम की सभा को कवर करने में किस तरह के सुरक्षा मानको से गुजरना पड़ता है मुझे भी पता है। पीएम के कार्यक्रम की बात करे तो पटना में अगर पीएम का कार्यक्रम रहता है तो पटना जिले में पहले पोस्टेड रहे ऐसे अधिकारी और पुलिसकर्मियों की पटना में कार्यक्रम से चार दिन पहले प्रतिनियुक्ति हो जाती है जिनकी जनता में छवि बेहतर रही है ,वही आठ से दस जिलों से पुलिस फोर्स बुलाया जाता है कार्यक्रम स्थल से लेकर जिस रास्ते से पीएम को गुजरना है उस रास्ते के सारे मकान के ऊपर पुलिस तैनात रहता है।
ऐसे में पीएम का हेलीकॉप्टर मौसम की खराबी के कारण नहीं उड़ पाया और पीएम 90 किलोमीटर सड़क मार्ग से चल दिये और एसपीजी जाने की अनुमति दे दिया यह पीएम के सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तौर पर उल्लंघन है । और ऐसे में पीएम को सड़क मार्ग से जाने कि अनुमति देने वाले अधिकारियों पर जरूर कार्यवाही होनी चाहिए क्यों कि पीएम अपनी सुरक्षा मानकों को लेकर अगर राजनीति करते हैं , पीएम सस्ती लोकप्रियता के लिए सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करते हैं और एसपीजी चुप रह जाता हैं तो यह देश की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है। रही बात रुट के लीक होने कि तो वही एएनआई जिसके हवाले से सारी मीडिया खबर चला रही है कि पीएम ने चलते चलते कहा कि मुख्यमंत्री को मेरा शुक्रिया कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा पहुंच सका।
उस मीडिया हाउस का ट्विटर हैडल देखिए पीएम की पंजाब यात्री से जुड़ी वो तमाम खबरे ट्वीट है पीएम सड़क मार्ग से जा रहे हैं इनका काफिला यहां से निकला और उसी के आधार पर सारे चैनल में खबर चल रही थी।ऐसे में पीएम के सड़क मार्ग से जाने को लेकर गोपनीय क्या रहा ।
आज तक किसी पीएम को इतनी लम्बी दूरी तक सड़क मार्ग से जाने कि अनुमति कहीं नहीं मिली है एसपीजी तैयार ही नहीं हो सकता है क्यों कि पीएम का जो सुरक्षा मानक है उसके अनुसार 90 किलोमीटर को कवर करने के लिए केंद्रीय फोर्स के साथ साथ कई राज्यों के पुलिस को तैनात करना पड़ेगा ।तब कही पीएम के सुरक्षा मानक का पालन हो सकता है ।
पंजाब में भी जिला को कितना फोर्स होगा बिहार में पांच सौ के करीब है तो वहां हजार होगा और ऐसे में अचानक फोर्स को कहा जाये कि आप एनएच पर पीएम के काफिले को सुरक्षित पास कराने के लिए थाने से निकले किसी भी स्थिति में संभव है क्या ।
राजनीति चलती रहे आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहे लेकिन पीएम की सुरक्षा को लेकर यह बहुत बड़ी चूक हुई है और इसके लिए जो भी अधिकारी पीएम के आदेश का अमल किया है उसको सेवा में बने रहने का अधिकार नहीं है। क्योंकि कि सबको पता है पंजाब में किसान पीएम से नराज है पीएम जिस रास्ते से जा रहे हैं वह रास्ता सामरिक रूप से संवेदनशील है फिर एसपीजी ने अनुमति कैसे दे दिया।
कोई भी स्टेट पुलिस ये रिस्क नहीं ले सकता है सवाल ही नहीं पैदा लेता है कि कोई डीजीपी अनुमति दे दे अगर डीजीपी ने अनुमति दिया है उस पर कार्यवाही होनी चाहिए ।
राजनीति सही है होती रहनी चाहिए लेकिन पीएम की सुरक्षा और देश की रक्षा को लेकर राजनीति हो ये सही नहीं है इससे देश कमजोर होगा संस्थान कमजोर होगी और उसका असर देश की अखंडता पर सकता है ।
बिहारवासियों को फिलहाल ठंड से राहत की उम्मीद नहीं है आठ जनवरी के बाद बिहार में छह जिलों विशेषकर वैशाली, सारण,सीवान, मुजफ्फरपुर , मधुबनी, सीतामढ़ी ओर शिवहर में पुरवैया बहने से बारिश होने का अनुमान है।
वही इस दौरान पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है जिस वजह से नौ से 10 जनवरी के बीच थोड़ी राहत रहेगा . उसके बाद फिर पूरे बिहार में शीतलहर चलनी शुरू हो जायेगी. मौसम विज्ञानियों का मत है कि पूरे जनवरी में इस बार रिकाॅर्ड तोड़ सर्दी पड़ने के आसार बन रहे हैं।
गया में कंपकंपाने वाली सर्दी से पूरा जन-जीवन अस्त-व्यस्त है. न केवल लोग बल्कि पशु-पक्षी भी परेशान हैं. पिछले दो दिनों में गया का न्यूनतम तापमान छह डिग्री लुढ़क कर मंगलवार को 6.2 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है. अधिकतम तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस रहा ।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ओमिक्रोन मरीजों के लिए होम आइसोलेशन में रहने की नई गाइडलाइन जारी की है।
आज बुधवार को होम आइसोलेशन के हल्के और बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों के लिए रिवाइज्ड गाइडलाइंस जारी की हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में दुनिया के अलावा यह भारत में भी देखा गया है कि कोविड-19 के अधिकतर मामले बिना लक्षण और हल्के होते हैं। ऐसे मामले आमतौर पर न्यूनतम दखलअंदाजी, सही मेडिकल गाइडेंस और मॉनिटरिंग के तहत मरीज घर पर ठीक हो जाते हैं।
इसलिए केंद्र सरकार ने अपनी गाइडलाइंस बदलाव की है।
कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव आने के 7 दिन बाद और लगातार 3 दिन तक बुखार नहीं आने के बाद होम आइसोलेशन खत्म हो जाएगा और मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
होम आइसोलेशन पीरियड खत्म होने के बाद मरीज को दोबारा टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा था कि करोना महामारी के तीसरे लहर के रोकथाम और स्वास्थ्य सेवा की क्या कदम उठाए जा रहे है।एडवोकेट जेनरल ने कोर्ट को बताया कि इस महामारी पर नियंत्रण के कई तरह के राज्य सरकार ने कदम उठाए हैं।करोना महामारी के रोक थाम के दिए गए दिशानिर्देशों का पालन सख्त तरीके किया जा रहा है।
सार्वजानिक स्थलों,सिनेमा,मॉल,पार्क आदि को फिलहाल बंद कर दिया गया।साथ ही 10 रात्रि से सुबह पाँच बजे तक curfew भी प्रशासन ने लागू कर दिया है।
सरकारी,निजी दफ्तरों में कर्मचारियों के पचास फी सदी उपस्थिति के साथ ही कार्य होगा।स्कूलों कॉलेजों में भी इसी तरह की व्यवस्था की गई हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवा को इसके महामारी से निबटने कार्रवाई करने को तैयार किया जा रहा।सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में करोना मरीज के ईलाज के पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि अभी दो लाख व्यक्तियों का प्रति दिन टेस्ट किया जा रहा है।ऑक्सीजन की आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त है और अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति के पूरी कार्रवाई हो रही है।
जो व्यक्ति करोना से पीड़ित हैं,उनके लिए ईलाज की व्यवस्था की गई है।उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।
अभी जो ओम्रिकोन नामक नए वेरिएंट के तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति में परिवर्तन हो रहा है।दिल्ली,मुंबई जैसे शहरों से ले कर देश के अन्य भागों में ओम्रिकोन बहुत तेजी से फैल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट व अन्य कई हाई कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई शुरू कर दी गई है।इस स्थिति को देखते हुए कल से ही पटना हाईकोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई प्रारम्भ हो चुका है।
इस मामले पर 12 जनवरी, 2022को सुनवाई होगी।
पटना हाई कोर्ट ने राज्य के राष्ट्रीयकृत प्राथमिक विद्यालयों में प्राइमरी स्कूल हेडमास्टर के पद पर भर्ती हेतु नियम के तहत निर्धारित शर्तो के मामले पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में विस्तृत हलफनामा दायर करने को कहा है।
पूर्व में कोर्ट ने याचिकाकर्ता एसोसिएशन के सदस्यों को शर्तों के साथ चयन, नियुक्ति व भर्ती में भाग लेने की अनुमति दी थी।
लेकिन कोर्ट ने इस मामले में कुछ शर्तों को भी रखा है था। इनके रिजल्ट की घोषणा की जाएगी ,लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं होगी। ये कोई राइट या इक्विटी का दावा नहीं करेंगे। इनकी बहाली के लिए परीक्षा में भाग लेना इस याचिका के फलाफल पर निर्भर करेगा।
कोर्ट ने इन दी मैटर ऑफ टीईटी – एस टी ई टी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ (टी एस यू एन एस एस) गोप गुट की याचिका पर सुनवाई की।
कोर्ट के समक्ष बिहार नेशनलाइज़ेड प्राइमरी स्कूल हेडमास्टर (अपॉइंटमेंट, ट्रांसफर, डिसिप्लिनरी एक्शन् एंड सर्विस कंडीशन)रूल्स, 2021 के संबंध में प्रकाशित किये गए अधिसूचना को रखा गया था। इसमें हेडमास्टर के पद हेतु योग्यता की शर्तों को निर्धारित किया गया था।
अधिवक्ता कुमार शानू ने बताया कि इस मामले पर अगली सुनवाई 10 फरवरी,2022 को होगी।
कोरोना प्रोटोकाँल में लापरवाही अब भारी पड़ने लगा है हलात सात माह पहले जैसे होती जा रही है इस बीच खबर आ रही है कि बिहार के दोनों डिप्टी CM समेत 4 मंत्री कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं सभी मंत्री होम आइसोलेशन में हैं वही कल जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह भी कोरोना पाँजिटिव पाये गये थे।
कोरोना संक्रमित मंत्रियों में डिप्टी CM रेणु देवी, डिप्टी CM तारिकशोर प्रसाद, मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार और भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी शामिल हैं।
एक्टिव मरीजों की संख्या 2222 पहुंची वहीं । आरा के नवोदय विद्यालय में 17 छात्र कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।
दुनिया का सबसे मेहनतकश क़ौम में एक ,दुनिया को गणित और साइंस के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला कौम ,दुनिया को शांति का संदेश देने वाला कौम,साहित्य, अर्थतंत्र और पढ़ाई के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखने वाला कौम आखिरकार इतना बदमिजाज , बदतमीज और उदंड कैसे हो गया । जी हैं हम बात कर रहे हैं बिहारी कौम की पिछले बीस वर्षो का मेरा अनुभव तो यही कह रहा है कि देश पर आतंकी हमले में मारे जाने का मामला हो या फिर गैर कानूनी काम करने की बात हो या फिर प्रतियोगी परीक्षा में सेटिंग करने का मामला हो, निर्भाया जैसी घटना हो,ट्रेन में विवाद हो, बस में विवाद हो, मकान मालिक से विवाद हो ,कॉलेज में विवाद हो या फिर लड़कियों और महिलाओं को परेशान करने का मामला हो इस तरह के विवादों में बिहारी कौम मिल ही जायेगा ।
कल से बुली बाई एप बनाने वालों में को लेकर सोशल मीडिया में हंगामा खड़ा है विशाल झा और उसके परिवार की तलाश जारी है दरभंगा में वो कहां का रहने वाला है उसका परिवार मुंबई में क्या करता है सारा तंत्र उसके ओरिजन को ढूढने में लगा है कई उत्साहित मित्र विशाल झा को समाज से बदर करने तक की मांग कर दी है।वही एक तबका विशाल झा के काम से खुश भी है । हलांकि मुझे तो ऐसा कुछ भी अलग नहीं दिख रहा है जो विशाल झा ने किया है वो हम बिहारियों का चरित्र है लड़कियों और महिलाओं को लेकर यही हमारी सोच है बिहार के घर हो लड़कियां और महिलाएं रोजाना इस तरह की समस्या फेस करती रहती । विशाल झा के बहाने ही सही एक मौका है हम बिहारी लड़कियों और महिलाओं को लेकर जिस तरीके से सोचते हैं उसमें बदलाव कैसे आये क्यों कि ये बड़ी समस्या है और आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है क्यों कि बिहार में भी लड़कियों की मानसिकता अब बदलने लगी है ऐसे में उसे उस बदलाव पर ग्रहण का लगे इसके लिए पूरे बिहारी समाज को नये तरीके से सोचने कि जरूरत है ।
स्कूल जाने के दौरान, कोचिंग पढ़ने के दौरान ,कॉलेज जाने के दौरान रात में घर लौटने के दौरान लड़कियां अपने आपको असुरक्षित महसूस ना करे ये कैसे सम्भव है इस पर सोचने कि जरूरत हम बिहारी कौम के निर्माण में वो कौन सी त्रुटि रह गयी है जिस वजह से विशाल झा जैसी सोच वाला बच्चा पैदा ले रहा है इस सोच पर हमला करने कि जरूरत है।
यही सोच हम बिहारी को हिंसक बना रहा है बदमिजाज , बदतमीज और उदंड बना रहा है पढ़ाई से दूर कर रहा है ,लड़कियों और महिलाओं को लेकर एक अलग तरह की विकृत सोच पैदा कर रहा है ठंडे दिमाग से सोचिए क्या खोया है आपने ।
ये जो नफरत की राजनीति है ना इसका शिकार एक तरफा नहीं होता है उस नफरत की राजनीति का असर कुछ समय बाद आपके परिवार और समाज पर भी पड़ता है और अब हम लोग उस दौर में प्रवेश कर रहे हैं हो गया लव जिहाद ,हो गया गौ सेवा ,हो गया एनआरसी मुद्दा अब हमारी आपकी बारी है और इसका शिकार लड़कियां और महिलाएं होगी यह भी तय है ।
बिहार में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार (आपदा प्रबंधन समूह/Crisis Management Group) की बैठक में निम्नांकित निर्णय लिए गए है:-
- आवश्यक सेवाओ को छोड़ कर सभी दुकाने 8 बजे तक खुली रहेंगी।
- रात्रि 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नाईट कर्फ्यू जारी रहेगी।
- क्लास 9, 10, 11 एवम 12 की क्लास एवम सभी कॉलेज 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलेंगे।
ऑनलाइन क्लास को प्राथमिकता देंगे। - क्लास 8 तक के सभी क्लास ऑनलाइन ही चलेंगे।
- कोचिंग क्लास 9, 10, 11, 12 के लिए 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलेंगे।
- सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय 50 प्रतिशत उपस्थित के साथ खुलेंगे। किसी भी बाहरी व्यक्ति के कार्यालय में प्रवेश वर्जित रहेगा।
- सभी पूजा स्थल श्रद्धालुओं के लिए अगले आदेश तक बन्द रहेंगे। केवल पुजारी ही पूजा कर सकेंगे।
- सिनेमा हॉल/ जिम/पार्क/ क्लब/ स्टेडियम/ स्वीमिंग पूल पूर्णतः बन्द रहेंगे।
- रेस्टोरेंट/ ढाबे आदि 50% कैपेसिटी के साथ खुलेंगे।
- शादी विवाह में अधिकतम 50 व्यक्ति तथा अन्तिम संस्कार में 20 व्यक्ति की अनुमति होगी।
- सभी राजनीतिक/ सामुदायिक/ सांस्कृतिक सार्वजनिक आयोजनों में अधिकतम 50 व्यक्ति की अनुमति होगी। परंतु इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।
- शॉपिंग मॉल पूर्णतः बन्द रहेँगे।
मगध विश्वविद्यालय के दागी वीसी को अविलंब गिरफ्तार करे सरकार – सुशील कुमार मोदी
विश्वविद्यालयों में अनिश्चय का माहौल दुर्भाग्यपूर्ण
- निगरानी विभाग के छापे में मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डा. राजेंद्र प्रसाद के विभिन्न परिसरों से करोड़ रुपए नकद और अकूत सम्पत्ति के कागजात बरामद होने के बाद उन्हें बर्खास्त करने के लिए राज्य सरकार को पहल करनी चाहिए।
इस मुद्दे पर राजभवन से बेहतर तालमेल होना चाहिए।
आरोपी कुलपति यदि लगातार छुट्टी पर चल रहे हैं और जाँच में सहयोग नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ वारंट निकाल कर तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। - मगध विश्वविद्यालय के कुलपति के यहां छापा पड़ने के बाद भ्रष्टाचार के मामले में रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर, वीसी के पीए और चीफ लाइब्रेरियन की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जांच में तेजी लाने के लिए मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। - मगध, पाटलिपुत्र और मिथिला विश्वविद्यालयों के कुलपति जिस तरह के गंभीर आरोपों में घिरे हैं, उससे बिहार की उच्च शिक्षा के बारे में गलत संदेश जा रहा है।
पाटलिपुत्र विवि के कुलपति आर के सिंह यदि नियुक्ति के 40 दिन बाद भी कार्यभार नहीं ग्रहण कर रहे हैं, तो चयनित पैनल के किसी दूसरे व्यक्ति को नियुक्त किया जाना चाहिए। - मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति एसपी सिंह पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इसके बावजूद उन्हें दो अन्य विश्वविद्यालयों का प्रभारी कुलपति बनाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजभवन और राज्य सरकार को विश्वविद्यालय परिसरों में अनिश्चितता की धुंध साफ करने के लिए कड़े फैसले लेने चाहिए।
पटना हाईकोर्ट में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेइ और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा पर वकीलों की समिति ने रिपोर्ट रखा।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी सम्बंधित पक्षों को इस रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने उन्हें इस रिपोर्ट पर टिप्पणियां और सुझाव अगली सुनवाई में देने को कहा।
वकीलों की कमिटी ने जीरादेई के डा राजेंद्र प्रसाद की पुश्तैनी घर का जर्जर हालत, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में पीछे रह जाने की बात कहीं।साथ पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गन्दगी और रखरखाव की स्थिति भी असंतोषजनक पाया।
साथ ही पटना के सदाकत आश्रम की दुर्दशा को भी वकीलों की कमिटी ने गम्भीरता से लिया।
इस मामलें पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हुए केंद्र व राज्य सरकार से 3 जनवरी,2022 तक जवाब देने का निर्देश दिया था।
साथ ही पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की एक तीन सदस्यीय टीम गठित किया था।इस टीम को जीरादेइ और वहां स्थित स्मारकों,पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित स्मारकों का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट इस सुनवाई में कोर्ट में प्रस्तुत करना था।
जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया कि जीरादेई गांव व वहां डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है।याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं नहीं के बराबर है।न तो वहां पहुँचने के सड़क की हालत सही है,न ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति ठीक है।
उन्होंने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण लगातार हालत खराब होती जा रही है।कोर्ट को बताया गया कि पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित उनसे सम्बंधित स्मारकों की दुर्दशा भी साफ दिखती हैं।इस स्थिति में शीघ्र सुधार के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा युद्ध स्तर पर कार्रवाई करने की जरूरत हैं
डा राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने।इस पद पर उन्होंने मई,1962 तक कार्य किया।बाद में राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद पटना के सदाकत आश्रम में रहे,जहां 28 फरवरी,1963 को उनकी मृत्यु हुई।
ऐसे महान नेता के स्मृतियों व् स्मारकों की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाना उचित नहीं हैं।इनके स्मृतियों और स्मारकों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 5 जनवरी,2022 को होगी।
सिविल इंजीनियर भर्ती प्रक्रिया की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी, जिन्हें शैक्षणिक तौर पर अयोग्य पाए जाने पर साक्षात्कार में नही बुलाया गया था , उन्हें पटना हाई कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी । हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ पीटी परीक्षा ही पास करने से चयन होने के दावे का कोई कानूनन अधिकार नही होता है ।
मामला 2017 में प्रकाशित सिविल इंजीनियर की भर्ती के विज्ञापन से सम्बंधित है । जस्टिस पी बी बजन्थरी ने एक रिट याचिका को खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि बीपीएससी ने 2017 में सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर बहाली के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया था।
आवेदक की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रकाशित विज्ञापन के समय आवेदक इंजीनियरिंग कोर्स के तीन वर्ष पूरा कर लिया था।उनका कहना था कि तीन वर्ष का कोर्स पूरा किये जाने पर डिप्लोमा कोर्स के समान हो जाता है।
उनका कहना था कि आवेदक ने सिविल इंजीनियर के पद के लिए आवेदन किया था।आयोग ने पीटी परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी किया।
आवेदक पीटी और मुख्य परीक्षा दी।लेकिन उसे साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया जाना को हाई कोर्ट ने सही माना ।
जनता के दरबार मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, 180 लोगों की सुनी समस्याएं, अधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा-निर्देश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज 4 देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुये। जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से आये 180 लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के लिए समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए।
आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, निगरानी विभाग, खान एवं भू-तत्व विभाग, निर्वाचन विभाग, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के मामलों पर सुनवाई हुयी ।
पुलिस के कार्यशैली में नहीं हुआ है सुधार
पूर्वी चंपारण के एक व्यक्ति ने दहेज हत्या मामले पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की शिकायत की तो वहीं अगमकुआं, पटना की दहेज के लिए दर्ज एफ0आई0आर0 पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को मामले पर शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
एक व्यक्ति ने कहा कि मेरी भूमि को कुछ लोगों के द्वारा अतिक्रमित कर लिया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी ने दो बार अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, फिर भी सी०ओ० ने अतिक्रमण नहीं हटवाया। मुख्यमंत्री ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को उचित कार्रवाई का निर्देश दिया।
मुजफ्फरपुर से आए एक बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री से कहा कि उनके बेटे का अपहरण हो गया है। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने अब तक कुछ भी नहीं किया। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव गृह विभाग को कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
रुपसपुर, पटना से आयी एक लड़की ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि मेरे साथ रेप किया गया है। हमने रूपसपुर थाने में केस दर्ज कराया है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही अब आई0ओ0 और थानेदार फोन तक नहीं उठाते हैं। मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अररिया से आए एक युवक ने कहा कि मेरे छोटे भाई की हत्या 2020 में हुई थी। हत्या को अंजाम देने के बाद भी अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए डेढ़ साल से हम दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, मगर कुछ नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को जांचकर न्यायोचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
समस्तीपुर से आयी एक महिला ने कहा कि पांच वर्ष पहले हमने पांच कट्ठा जमीन खरीदी थी लेकिन उस पर दूसरे लोगों ने कब्जा कर लिया है। वहीं बेगूसराय के एक व्यक्ति ने कब्रिस्तान की घेराबंदी को लेकर शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने DGP को फोन कर कहा- तुरंत देखिए
पीड़िता ने कहा कि डीजीपी से भी मुलाकात की। लेकिन वे तो न्याय देने के बदले आरोप लगाने लगे कि लड़कियां ही रेप की जिम्मेदार हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि लड़कियां ही इसके लिए लड़कों को उकसाती हैं। ऐसे में मेरे लिए आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। इस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीजीपी को फोन लगा कर कहा कि यह मामला पटना के नौबतपुर का है। इसे तुरंत देखिए और एक्शन लीजिए।
एक फरियादी ने CM नीतीश कुमार से कहा कि सर बिहार में घूसखोरी काफी बढ़ गई है। घूसखोरी से लोग परेशान हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बात बताइए, क्या समस्या है ? इस पर उस फरियादी ने सीएम नीतीश से कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। प्रशासन कुछ नहीं कर रहा। इस पर मुख्यमंत्री ने फरियादी को राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव के पास भेज दिया।
अपहरण का भी मामला पहुंचा
वहीं, मुजफ्फरपुर से आए बुजुर्ग ने सीएम नीतीश से फरियाद किया कि उनके बेटे का अपहरण हो गया है। लेकिन, पुलिस ने अब तक कुछ भी नहीं किया। इतना ही नहीं पुलिस पैसे की भी मांग कर रही है।
यह शिकायत सुन सीएम नीतीश भौंचक्के रह गए। उन्होंने कहा कि अरे लगाओ, अपर मुख्य सचिव गृह विभाग को। इसके बाद फोन लगाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनके बेटे का अपहरण हो गया है और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह तो आश्चर्यजनक है। कह रहा कि कुछ पैसा भी मांग रहा? इसके तुरंत दिखवाइए।
बिहार में एक बार फिर ब्यूरोक्रेट और नेताओं के बीच नेक्सेस का एक घिनौना मामला सामने आया है हलांकि इस बार इस नेक्सेस का शिकार इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक महिला वकील हुई है जिसका आरोप है कि बिहार के सीनियर आईएस अधिकारी संजीव हंस और झांझारपुर से राजद विधायक रहे गुलाब यादव ने उसके साथ शाररीक शोषण किया है और वो इन दोनों के बच्चे की मां है महिला वकील की माने तो बिहार कैडर के IAS संजीव हंस और राजद के पूर्व विधायक गुलाब यादव ने गैंगरेप किया , गैंगरेप के बाद एक बेटे को जन्म दिया है, उसका पिता कौन है, इसकी जांच करने के लिए DNA टेस्ट किया जाए। महिला ने कहा कि विधायक ने बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया और IAS हंस ने बात करने से ही इनकार कर दिया है।
कोर्ट ने इलाहाबाद एसएसपी को पीड़ित महिला को सुरक्षा देने को कहां है।
कोर्ट ने पीड़िता की याचिका पर सुनवाई शुरु की —-
पीड़ित ने याचिका में कहा है कि फरवरी 2016 को मैं पटना के गर्दनीबाग में रहने वाले एक सीनियर वकील के पास आई थी। यहीं पर गुलाब यादव से परिचय हुआ था, जो उस वक्त झंझारपुर से राजद के विधायक थे। गुलाब ने राज्य महिला आयोग में सदस्य बनाने का झांसा दिया था। मैं गुलाब के आवास पर बायोडाटा लेकर गई थी। आवास में उसने रेप करने की कोशिश की थी। विरोध करने पर पिस्टल के बल पर रेप किया।”
पीड़िता ने विधायक पर केस करने की तैयारी कर ली थी। इसके बाद विधायक ने उसकी मांग में सिंदूर भरकर कहा कि आज से वह दोनों पति-पत्नी हैं। हालांकि, विधायक पहले से शादीशुदा था, पर उसने पीड़िता से कहा कि वह पहली पत्नी को तलाक दे देगा। विधायक ने कहा कि पीड़िता केस न करे।
“पुणे के होटल में बुलाकर IAS के साथ किया गैंग रेप”
पीड़िता के मुताबिक, विधायक गुलाब ने एक बार उसे पुणे बुलाया। कहा कि उसका पहली पत्नी से तलाक हो गया है और इसके पेपर्स उसके पास हैं। पीड़िता 8 जुलाई 2017 को पुणे के होटल बेस्टिल में गईं। वहां विधायक ने उसका परिचय IAS संजीव हंस से कराया। दोनों ने लंच के दौरान नशीला पदार्थ खिलाने के बाद उससे गैंग रेप किया। उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया।
पीड़िता ने कहा कि वीडियो मोबाइल पर भेजकर ब्लैकमेल किया जाता था। कहा जाता था कि मुंह खोलने पर इसे वायरल कर दिया जाएगा। जब पीड़िता गर्भवती हो गई तो उसने इसकी जानकारी विधायक को दी। उसने जबरदस्ती गर्भपात की दवा खाने को कहा। गुलाब ने अक्टूबर 2017 में पीड़िता का एडमिशन दिल्ली की जुडिशियल क्लासेस में करा दिया और उसे मुखर्जी नगर स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में ठहराया।
वीडियो की धमकी देकर बार-बार दोनों ने रेप किया”
पीड़िता ने कहा कि गुलाब हमेशा वीडियो वायरल करने का धमकी देता था। 13 फरवरी 2018 को दिल्ली के अशोका होटल में, 14 फरवरी 2018 को दिल्ली के पार्क एवेन्यू होटल में और 27 मार्च 2018 को दिल्ली के ही होटल ली मेरिडियन में गैंग रेप किया। गुलाब के साथ संजीव भी मौजूद रहता था।
“संतान को विधायक ने अपना मानने से इनकार किया, बोला नसबंदी हो चुकी”
महिला ने बताया कि विधायक और IAS दोनों गर्भपात कराने और जान से मारने की धमकी देते थे। इसके बाद पीड़िता मुखर्जीनगर स्थित हॉस्टल खाली करके शालीमार में रूम लेकर रहने लगी। 25 अक्टूबर 2018 को बेटे को जन्म दिया। जब उसने गुलाब को इसकी जानकारी दी तो उसने कहा कि यह उसका बेटा नहीं है। उसकी नसबंदी हो चुकी है। बच्चा IAS हंस का होगा। उधर, IAS हंस ने महिला से बात करने से ही इनकार कर दिया।
पटना हाईकोर्ट में राज्य में कोरोना महामारी से उत्पन्न हुए हालात को गम्भीरता से लेते हुए कल 4 जनवरी,2022 से मुकदमों की ऑनलाइन सुनवाई होगी। इस सम्बन्ध शिवानी कौशिक व अन्य की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा मौखिक जानकारी दी गई कि चूंकि पटना हाई कोर्ट के कुछ जज व कर्मी भी कोरोना से संक्रमित हो गए, इसलिए कल 4 जनवरी, 2022 से पटना हाई कोर्ट में कामकाज ऑनलाइन तौर पर ही किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों का जीवन भी बहुमूल्य है, इसलिए इन बातों को भी ध्यान में रखना होगा। कोर्ट ने पूर्व में भी सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा था कि कोरोना के नए वैरिएंट के मद्देनजर हमें सावधानी बरतने की जरूरत है। कोरोना अभी गया नहीं है।
इसके पूर्व में भी कोर्ट ने राज्य सरकार से कोरोना को लेकर राज्य भर में मुहैया कराई गई सुविधाओं के संबंध में ब्यौरा देने को कहा था।
अगली सुनवाई आगामी 5 जनवरी, 2022 को होगी।
बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान 500 से अधिक नये कोरोना के संक्रमित पाये गये हैं. इसकी संख्या में पिछले एक सप्ताह से लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. एक दिन में राज्य में इसके प्रसार की संख्या 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है. साथ ही एक दिन में कोरोना का फैलाव 21 जिलों से बढ़कर 26 जिलों में हो गया ।
इस बीच कल 4 जनवरी को कोरोना के बढ़ते फैलाव को देखते आपदा प्रबंधन की विशेष बैठक बुलाई गयी है जिसमें लांक डाउन और कोरोना से निपटने की तैयारी को लेकर विस्तृत चर्चा होगी ।
इधर आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान एंटीजन टेस्ट में 14 लोग संक्रमित पाए गए इसमें 3 पुलिसकर्मी भी शामिल है इसकी सूचना आते ही पूरे मुख्यमंत्री सचिवालय में हड़कम्प मच गया है ।
वही आज से प्रशासन सख्ती बरतनी शुरु कर दिया है मास्क चेकिंग और कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए पांच नयी टीमें बनायी गयी हैं. अब इसके लिए जिले में कुल 10 टीमें सक्रिय हो गयी हैं.जिन पांच नयी टीमों का गठन किया गया है, उनमें तीन टीमें बस, टेंपो आदि में मास्क की चेकिंग करेंगी. बिना मास्क के अगर ड्राइवर, खलासी या उसमें बैठे अन्य लोग मिले, तो वाहन को जब्त किया जा सकता है.
इसके अतिरिक्त दो टीमें दुकानों पर मास्क चेकिंग अभियान चलायेंगी. उपभोक्ता और दुकानदार को बिना मास्क पाये जाने पर दुकान को सील कर दिया जायेगा. इसके अतिरिक्त पांच मोबाइल टीमें सब्जी मंडी तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मास्क चेकिंग कर दंडात्मक कार्रवाई करेंगी।
वही आज से पूरे बिहार में 15 से 18 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण अभियान शुरु हो गयी है इस बीच सीएम ने कहा कि कोरोना से निपटने को सरकार तैयार है और कल की बैठक में निर्णय लिया जा सकता है ।
नव वर्ष के मौके पर पिछले पांच छह वर्षो से पप्पू मांझी का सुबह सुबह फोन जरूर आता है पप्पू मांझी के साथ एक दौर था जब न्यूज़ में इसके ड्रायविंग का आनंद लेते थे ।पत्रकारों के साथ रहने की वजह से इसकी अच्छी खासी राजनीतिक समझ भी है ।
इस बार भी फोन आया लम्बी बातचीत हुई यही पटना के पास का रहने वाला है और इसके इलाके में मुसहर समाज की बड़ी आबादी रहती है ।नव वर्ष की शुभकामना के बाद मैंने पप्पू से पूछा जीतन राम मांझी के बयान को लेकर मांझी समाज क्या सोचता है 9 मिनट के करीब बातचीत हुई है सुनिए जरूर राजनीति समझ में आ जायेंगी। पप्पू पूजा पाठ करने के बाद पंडित के घर पर नहीं खाने को लेकर निराश जरुर है लेकिन इन इलाकों से जुड़ी एक ऐसी परम्परा की चर्चा उन्होंने कि जो हैरान करने वाला था। पालीगंज और विक्रम के इलाके में बेटी की शादी के दौरान घर वाले बारात को भोजन करने से पहले मांझी समाज को विशेष तौर पर आमंत्रित करके भोजन कराता है मैंने पुंछा यह आज भी चल रहा है क्या पप्पू बोला हां सर इस बार भी गये थे भोज खाने गये थे। मतलब समाज में कई ऐसी परम्परा भी रही है जो दलित और खेतिहर समाज को जोड़ने का काम करता रहा है इस तरह के रिश्तों को गहराई से समझने कि जरूरत है क्यों कि दक्षिण भारत में ‘ब्राह्मण के खिलाफ जिस तरह का आंदोलन हुआ उत्तर भारत में आज भी वो स्थिति नहीं है हो सकता है ऐसे ही कुछ रिश्ते रहे हैं जो दक्षिण की तरह उत्तर भारत के समाज को उस स्तर तक उद्वेलित नहीं कर पाया ।
वैसे जब से खेती से जुड़े लोगों का आर्थिक स्थिति कमजोर हुआ है गांव के स्तर पर बहुत सारी चीजें बदल गयी है। 50 प्रतिशत भूमि का स्वामित्व बदल गया है 90 प्रतिशत खेतिहर समाज खेती करना छोड़ दिया है ऐसे में खेती की वजह से जो रिश्ता चला आ रहा था उसकी डोर टूट चुकी है गांव का सारा सामाजिक समीकरण बदल गया है ऐसे में अब दलित पिछड़ा और सवर्ण का वो गणित नहीं रहा जिसकी चर्चा फिल्मों और किताबों में कि जाती रही है।
इस पोस्ट के साथ दूसरा संवाद भी टैक है वो संवाद है जीतनराम मांझी के बयान को लेकर ब्राह्मणजाति के युवा क्या सोचते हैं और इसको लेकर शिवानंद तिवारी के साथ जो बहस हुई है जरा आप भी सुनिए बहुत ही रोचक है मुझे लगता है कि ये संवाद आज के बिहार को समझने के लिए काफी है क्यों कि शिवानंद तिवारी उस जातीय राजनीति के साथ रहे हैं जो राजनीति सीधे सीधे ‘ब्राह्मणवादी मानसिकता को चुनौती दिया है शिवानंद तिवारी उस युवक को उसी अंदाज में समझा रहे हैं जिस अंदाज में समाजवादी सोच के लोग कर्पूरी ठाकुर और जेपी के जमाने में समझाते थे ये आपकी जिम्मेवारी है दलितों के प्रति समाज का जो नजरिया है उसको बदलने के लिए आगे आइए ।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना महामारी के नए वेरिएंट के बढ़ते प्रभाव के रोक थाम व नियंत्रित किये जाने के मामले पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने शिवानी कौशिक व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बताने को कहा है कि करोना महामारी के तीसरे लहर के रोकथाम और स्वास्थ्य सेवा की क्या कदम उठाए जा रहे है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार ने बताया कि अगली सुनवाई में राज्य के सभी जिलों के अस्पतालों के सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा बुकलेट के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को नए सिरे से पूरे तथ्यों की जांच कर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।
लेकिन अभी जो ओम्रिकोन नामक नए वेरिएंट के तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति में परिवर्तन हो रहा है।दिल्ली,मुंबई जैसे शहरों से ले कर देश के अन्य भागों में ओम्रिकोन बहुत तेजी से फैल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट व अन्य कई हाई कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई शुरू कर दी गई है।इस स्थिति को देखते हुए पटना हाईकोर्ट में शीघ्र ऑनलाइन सुनवाई होने की संभावना है।
इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामा में राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं में विरोधाभासी तथ्यों के मद्देनजर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई थी।
पिछली ऑन लाइन सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग के अपर प्रधान सचिव ने बताया कि राज्य के सभी जिलों के अस्पतालों से पूरी जानकारियां ले कर उन्हें बुकलेट के रूप में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।
प्रधान अपर स्वास्थ्य सचिव अमृत प्रत्यय ने कोर्ट को बताया था कि बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा समिति के कार्यपालक अधिकारी संजय कुमार के अध्यक्षता में चार सदस्यों की एक टीम गठित किया गया है, जो राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी और उपलब्ध सुविधाओं की जांच कर रहा है।
ज़िला के सभी जिलों के सिविल सर्जनों द्वारा ज़िला के सरकारी अस्पतालों के सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा तथ्यों को जांच कर प्रस्तुत करेंगे।
पिछली सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा था कि कोरोना के नए वैरिएंट के मद्देनजर हमें सावधानी बरतने की जरूरत है।कोरोना का खतरा अभी भी बरकरार है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से कोरोना को लेकर राज्य भर में कराई गई सुविधाओं के संबंध में ब्योरा देने को कहा था। कोर्ट ने विशेष तौर साउथ अफ्रीका में फैले कोविड के नए वैरियंट ओमाइक्रोन के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार को राज्य में ऑक्सीजन के उत्पादन और भंडारण के संबंध में सूचित करने को कहा था।
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने बताया था कि कोर्ट ने उसके पूर्व भी राज्य के राज्य भर में उपलब्ध मेडिकल स्टाफ, दवाइयां, ऑक्सीजन व एम्बुलेंस आदि के संबंध में ब्यौरा तलब किया था।
इस मामले पर 5 जनवरी, 2022 को सुनवाई होगी।
पूर्व मध्य रेलवे के निर्मली स्टेशन से आसनपुर कुपहा तक सीआरएस निरीक्षण हो गया है, एक सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार स्पीडी ट्रायल हुआ। उम्मीद है कि जनवरी में 5.96 किलोमीटर इस लंबी रेल लाइन पर जनवरी से परिचालन शुरू हो जाएगा। उधर निर्मली से परसा बसबाड़ी तक 5.88 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का काम लगभग पूर्ण हो चुका है, रेलवे ने संभावना जताई है कि अप्रैल 2022 में झंझारपुर तक ट्रेन दौड़ेगी।
वर्ष 1934 में कोसी नदी पर बना रेलपुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसी कारण से यह रेलवे ट्रैक 86 साल तक बंद रहा लेकिन अब यह रेलवे का पुल बनकर तैयार हो गया है और जल्द ही इस रेलवे ट्रैक पर रेल सेवाएँ शुरू कर दी जाएँगी।आपको बता दें कि आसनपुर से झंझारपुर तक का रेलवे ट्रैक पूरा क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण रेल विभाग को इस रेलवे ट्रैक को बंद करना पड़ा। लेकिन आज 87 साल बाद इस ट्रैक के वापस से शुरू होने की खबर को सुनकर वहाँ के स्थानीय लोगों में एक ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है।
भूकंप कि वजह से हुई थी क्षति
5 जनवरी 1934 में विनाशकारी भूकंप की वजह से निर्मली से सरायगढ़ के बीच की रेल सेवाओं को बंद करना पड़ा था। दरअसल इस ट्रैक के बीच में एक रेलवे पुल था जो कोसी नदी पर बना हुआ था और भूकंप से यह पुल क्षतिग्रस्त हो गया।क्षतिग्रत होने की वजह से उस ट्रैक के समीप के रेलवे स्टेशन को बंद करना पड़ा।
लोगों को होती थी परेशानी
ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्मली के स्थानीय लोगों को ट्रेन से सरायगढ़ जाने के लिए दरभंगा, समस्तीपुर, खगडिय़ा, मानसी, सहरसा और सुपौल होते हुए जाना पड़ता था मतलब उन्हें लगभग 297 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। इसमें लगभग आठ घंटे से अधिक का समय लगता था।परन्तु अब पुल का पुनः निर्माण होने के बाद अब सरायगढ़ जाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।यात्रियों को लगभग 22 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी जिसमें ज्यादा से ज्यादा 30 मिनट का समय लगेगा। कोसी नदी पर बने रेलवे पुल का पुनः निर्माण होने से यात्रियों के समय की बचत होने लगेगी।
निर्मली स्टेशन से किया गया ट्रायल
आपको बता दें कि निर्मली में सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन का ट्रायल हुआ। आशा है कि जनवरी में 5.96 किलोमीटर इस लंबी रेल लाइन पर जनवरी से परिचालन का कार्य शुरू हो जाएगा। उधर निर्मली से परसा बसबाड़ी तक 5.88 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माणकार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, रेलवे विभाग ने संभावना जताई है कि अप्रैल 2022 में झंझारपुर तक रेल सेवाएँ शुरू कर दी जाएँगी।
अप्रैल तक होगा काम पूरा
बताया जा रहा है कि परसा से बस्बाड़ी तक की 5.88 किलोमीटर की रेलवे लाइन का निरीक्षण करके यह पता चला है कि कुछ ही समय में यह काम पूरा हो जाएगा। इसकी जानकारी सी आर एस को दी जाने बाद फरवरी में इस रेलवे लाइन का पुनः निरीक्षण किया जायेगा और अप्रैल 2022 झंझारपुर-सकरी-दरभंगा भी निर्मली स्टेशन से जुड़ जाएगा।
अटल जी का सपना हुआ पूरा
हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने उस समय लोगों को परेशानी को देखते हुए चिंता जताई और इस परेशानी को दूर करने का निर्णय लिया था।अटल जी ने 6 जून 2003 को इस महासेतु को बनाने की मंजूरी देकर इस सेतु की आधारशिला रखी। उसके बाद आज वह सेतु बनकर तैयार है।इस सेतु को बनाने में कुल 516 करोड़ की लागत आयी है और यह पुल तकरीबन 17 साल बाद बनकर तैयार हुआ है।
भारत से बंग्लादेश कछुआ की तस्करी जारी है आरपीएफ ने सोनपुर स्टेशन पर खड़ी 15716 किशनगंज से जाने वाली गरीब नवाज ट्रेन से 537 पीस जिंदा कछुआ बरामद किया। ट्रेन के एस 3 कोच में सीट के नीचे और शौचालय के समीप रखे 20 लावारिस बैग की सूचना यात्रियों ने पुलिस को जांच के दौरान पुलिस को बीच अलग अलग बैग में 537 जिंदा कछुआ मिला पुलिस तत्तकाल इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दिया वन कर्मी अभय कुमार की माने तो बरामद कछुआ सुंदरी प्रजाति का है और ये प्रजाति उत्तरप्रदेश में पाए जाता है। इस प्रजाति के कछुआ को तस्कर इसे बंगाल अथवा बांग्लादेश ले जाते है। इसे खाने के साथ दवा व औषधि में प्रयोग किया जाता है।
निमोनिया से बच्चों में होने वाली मृत्यु को कम करेगा सांसः मंगल पांडेय
चिकित्सकों व स्टाफ नर्स को अलग-अलग बैच में किया जा रहा प्रशिक्षित
पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में नवजात शिशुओं एवं बच्चों में निमोनिया से होने वाली मृत्यु को कम करने के प्रति स्वास्थ्य विभाग तत्पर है। इस संबंध में कार्य योजनाओं को मूर्त रुप दिया जा रहा है। सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रालाइज पीनिमोनिया सक्सेसफुल (सांस) कार्यक्रम के तहत निमोनिया को दूर करने का कार्य चल रहा है। इसमें गति लाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को लगातार प्रशिक्षित करने का कार्य जारी है।
श्री पांडेय ने कहा कि राज्य के क्रमशः 14 जिलों अररिया, औरंगाबाद, बांका, बेगुसराय, गया, जमुई, कटिहार, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, नालंदा, नवादा, पूर्णिया, शेखपुरा और सीतामढ़ी में स्वास्थ्यकर्मियों को इस बीमारी की रोकथाम के लिए सांस कार्यक्रम के तहत जिला स्तर पर प्रशिक्षित करने की कार्ययोजना है। इन जिलों में 16 मेडिकल आफिसर एवं 16 स्टॉफ नर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। 31 जनवरी तक निर्धारित लक्ष्य के प्रति अलग-अलग बैचों में यह प्रशिक्षण चलेगा। अररिया में 2 बैच, औरंगाबाद में 3 बैच, बांका में 2, बेगूसराय में 4 समेत अन्य 14 जिलों में अलग-अलग बैच के माध्यम से कुल 36 बैचों में यह प्रशिक्षण चलेगा। सांस कार्यक्रम की शुरुआत 2020 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा की गई थी।
श्री पांडेय ने कहा कि इस अभियान के तहत नवजात शिशुओं एवं बच्चों में निमोनिया नियंत्रण कर मृत्यु को रोकने का लक्ष्य है। 2020-21 एवं चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण नालंदा चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल पटना में आयोजित किया गया था। इसमें इन जिलों से नामित चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्स को जिला स्तरीय प्रशिक्षक के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
बिहार एक ऐसे चौहारे पर आकर खड़ा है जहां तय नहीं कर पा रहा है कि जाये तो जाये कहा और यही अनिर्णय वाली स्थिति बिहार के बुनियाद को हिला कर रख दिया है ।बिहार की राजनीति को 2007 से देख रहे हैं 2010 के विधानसभा चुनाव में भले ही राजद का सूपड़ा साफ हो गया था लेकिन नेता प्रतिपक्ष के रूप में अब्दुल बारी सिद्दीकी का विधानसभा में दिया गया ।
वह भाषण आज भी मुझे याद है जहां तक मेरी समझ है अब्दुलबारी सिद्दकी का बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष के रुप में दिया गया भाषण और नीतीश कुमार का सिद्दीकी के भाषण पर सरकार का जवाब इतना स्तरीय भाषण बिहार विधानसभा में शायद अब देखने को नहीं ।
वो धार फिर कभी नीतीश कुमार में देखने को नहीं मिला भरे सदन में अब्दुल बारी सिद्दीकी लगभग डेढ़ घंटे तक सरकार के एक एक निर्णय का बखिया उखेरते रहे और पूरा सदन चुपचाप सुनता रहा और इतना ही सारे रिजनल चैनल लाइव चलाता रहा और कल होकर अखबार के मुख्य पेज पर पूरा भाषण छपा था । भाषण के दौरान अब्दुल बारी सिद्दीकी ने एक शब्द का इस्तेमाल किया था रॉयल ब्लड जिसके सहारे नीतीश कुमार पर सीधा आरोप लगाया था कि किस तरीके से राज्य सरकार के नौकरी में और अधिकारियों के पोस्टिंग में कुर्मी जाति को मदद किया जा रहा है, प्रेस दिर्घा में बैठे सारे पत्रकार रॉयल ब्लड का मिनिंग क्या होगा इसको लेकर अगल बगल झांकने लगे थे ।
कुछ नहीं बदला है वही नीतीश हैं ,वही जदयू हैं, वही बीजेपी हैं, वही राजद है वही मांझी लेकिन आज बहस किस बात को लेकर हो रही है मैं ब्राह्मण नहीं ब्राह्मणवाद के खिलाफ हूं इस पर डिबेट करने के बजाय लोग सड़क पर उतर गये जीभ काटने पर पुरस्कार का एलान तक कर दिया है एक सप्ताह तक दोनों और से घृणा फैलाने कि पूरी कोशिश हुई गांव गांव में तनाव पैदा हो इसको लेकर गोलबंदी शुरु हो गयी।
ये बिहार का एक नया चेहरा है जहां बहस की कोई गुंजाइश नहीं है बस कैसे एक दूसरे के खिलाफ जहर उगले और समाज में तनाव और द्वेष पैदा हो हर राजनीति दल इसी में लगा हुआ है।
इसका परिणाम क्या हो रहा है मूल मुद्दा जिस पर चर्चा होनी चाहिए था जिसके सहारे सरकार पर दबाव बनाया जा सकता था सबके सब गौण होते जा रहे हैं।
इस प्रदेश में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 27 लोगों की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया, 15 मरीजों की आंखें निकलनी पड़ी विधानसभा चल रहा था लेकिन कही से कोई आवाज सुनाई दिया क्या ,शराबबंदी कानून को लेकर सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का जो बयान आया उस बयान को लेकर कही कोई चर्चा हो रही है क्या, इसी तरह सरकार की जो बहाली नीति है इस पर कोई बात करने को भी तैयार है क्या ,किस तरीके से राज्य सरकार ने बिहार पुलिस और प्रशासनिक सेवा के कैडर को एक रणनीति के तहत खत्म कर दिया इस तरह के कई बुनियादी सवाल है विश्वविधालय में कुलपति के नियुक्ति का ही मामला हो कही कोई चर्चा हो रही है ।
जैसे जातिवादी राजनीति ने बिहार के बुनियाद को हिला दिया था इसी तरह धर्मवादी राजनीति ने बिहार के इमारत को ही गिरा दिया है 30 वर्षो से मानो बिहार एक जगह आकर ठहर सा गया है जहां से तय नहीं कर पा रहा है जाये तो जाये कहां । क्यों कि पूरी व्यवस्था राजनीति को बनाये रखने में लगी हुई है कही से कोई आवाज नहीं उठ रहा है सोशल मीडिया से बदलाव की उम्मीद की जा रही थी लेकिन बुनियादी सवालों के मामले में ये मुख्यधारा की मीडिया से भी आगे निकल गया है । ऐसे में बुनियादी सवालों की और जनता का ध्यान कैसे आकृष्ठ हो इसके लिए बड़े स्तर पर काम करने कि जरुरत नहीं है क्यों कि जिस बुनियाद पर बिहार अभी तक चल रहा था वो अब दरक चुका है ।
मुजफ्फरपुर में समाज सुधार अभियान में मुख्यमंत्री शामिल हुए
अगर समाज के सुधार के लिए काम नहीं होगा तो विकास का कोई मतलब नहीं रह जाएगा- मुख्यमंत्री
हमलोगों को निरंतर अभियान चलाते रहना है ताकि कोई गड़बड़ी न कर सके- मुख्यमंत्री
आज महिलाओं की जागृति के चलते ही समाज आगे बढ़ रहा है और विकास का भी काम हो रहा है मुख्यमंत्री
पटना, 29 दिसम्बर 2021 :- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज मुजफ्फरपुर के एम0आई0टी0 कैंपस में राज्य में पूर्ण नशामुक्ति, दहेज प्रथा उन्मूलन एवं बाल विवाह मुक्ति हेतु चलाए जा रहे समाज सुधार अभियान में शामिल हुए।
आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में आने के लिए आप सबको धन्यवाद देता हूं और बधाई देता हूं। 5 जीविका दीदियां ने अपने अनुभव को साझा किया उनको बधाई देता हूं। समाज सुधार अभियान का जो हमारा मकसद है आपलोगों को पता है। सिर्फ विकास का काम करेंगे तो उससे काम नहीं चलेगा। आपने 24 नवंबर 2005 से हमलोगों को काम करने का मौका दिया उस समय से आपलोगों की सेवा कर रहा हूं। अगर समाज के सुधार के लिए काम नहीं होगा तो विकास का कोई मतलब नहीं रह जाएगा इसलिए शरुआती दौर से ही हमलोगों ने इस पर काम करना शुरु किया। समाज में जो पीछे रह गये थे, समाज के उन तबकों के उत्थान के लिए हमलोगों ने विशेष ध्यान दिया। चाहे महिला हो, अनुसूचित जाति/जनजाति हो, अल्पसंख्यक हो या अतिपिछड़ा वर्ग के हों, उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष पहल की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुजफ्फरपुर से मेरा विशेष लगाव है। सरकार बनने के बाद जो हमलोगों ने अभियान चलाया और हमेशा हम यहां आते रहे हैं। हमें याद है कि किस प्रकार एक-एक रास्ते पर मुजफ्फरपुर के लोग खड़े रहे। किस प्रकार लोगों का सहयोग और समर्थन मिला। जब से हमें काम करने का मौका मिला, तब से काम कर रहे हैं, आपकी सेवा कर रहे हैं।
मुजफ्फरपुर में काफी काम किये गये हैं। मुजफ्फरपुर से जुड़े जिले सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली हो सबका महत्व है। जब हमने शुरु किया अभियान तो सबसे पहले 2006 में होने वाले पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए हमने एक कानून बनाया, जिसमे तय किया की 50 प्रतिशत का आरक्षण महिलाओं के लिए रहेगा। ऐसा करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना। उसके साथ-साथ महिलाओं के उत्थान के लिए हमलोगों ने कई काम किये। बिहार में उस समय बेहतर ढंग से स्वयं सहायता समूह गठित नहीं था। फिर भी कुछ जगहों पर था।
वर्ष 2006 में मुजफ्फरपुर के 2 जगहों पर जाकर हमने इनके कार्यों को देखा था। स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाएं काम कर रही थीं। उनलोगों से जाकर हमने बात की, जब उनलोगों की बातों को सुना तो मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। हम सोच ही रहे थे कि इसका विस्तार करेंगे। फिर हमने वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेने का भी निर्णय लिया। बाद में जब इसकी बड़े पैमाने पर शुरुआत की तो आपके यहां का जो अनुभव हुआ उसी के आधार पर हमने पूरे बिहार में काम करवाना शुरु कर दिया और उसका हमने नामकरण किया जीविका समूह। उसके बाद उसमें कितनी जागृति आयी है। हमलोगों का 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य था। अब तो 10 लाख के लक्ष्य को भी पूरा कर लिया गया है। 1 करोड़ 27 लाख महिलाएं इससे जुड़ गई हैं। पहले बेटियों को लोग आगे पढ़ा नहीं सकते थे। अपनी बेटियों को पांचवीं क्लास के बाद उसको जो कपड़ा चाहिए था वो देने की स्थिति में नहीं थे। बहुत कम लड़के-लड़की ही आगे पढ़ पाते थे। वर्ष 2007 से हमलोगों ने पोशाक योजना की शुरुआत की। आगे चलकर हमलोगों ने साईकिल योजना की शुरुआत की। आप देख लीजिए कितनी बड़ी संख्या में लड़कियां आगे आने लगी और पढ़ाई करने लगीं। पहले लड़की कम पढ़ती थीं लेकिन पिछले साल मैट्रिक की परीक्षा में लड़कों से 200-300 ज्यादा लड़की पूरे बिहार में परीक्षार्थी थीं। जीविका समूह के माध्यम से महिलाओं में जागृति लायी जा रही है। महिलाएं घर का काम करती थीं, कहीं-कहीं खेतों में भी जाकर काम करती थीं लेकिन उनके बारे में कोई खास ध्यान नहीं था। जब हमलोगों ने काम करना शुरु किया कि महिलाएं भी अगर काम करेंगी तो परिवार की आमदनी बढ़ेगी। उसके बाद लोगों में जागृति बढ़ेगी। जब साइकिल योजना की शुरुआत किया तो कुछ लोगों ने मेरा मजाक उड़ाते हुए कहा कि लड़की साइकिल चलाएगी तो रास्ते में लोग तंग करेगा। हमने कहा था कि एक आदमी की हिम्मत नहीं है कि लड़की साइकिल चलाएगी तो कोई उसको तंग करेगा। उसके बाद लडकों ने भी साइकिल की मांग करना शुरु किया तो उनके लिए दो-तीन साल बाद हमलोगों ने साइकिल योजना की शुरुआत की। सरकारी सेवाओं में भी हमलोगों ने आरक्षण दिया। पुलिस में हमलोगों ने आरक्षण देने का काम किया। पुलिस बल में जितनी महिलाएं अब बिहार में हैं उतना प्रतिशत देश के किसी भी राज्य में पुलिस बल में महिलाओं की संख्या नहीं है। महिलाओं की पढ़ाई, सरकारी सेवाओं में संख्या बढ़ रही है और जो जीविका समूह बनाया तो लोग किस तरह से अपनी आमदनी को बढ़ा रहे हैं और कितना जागृति आ रही है। _मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर जी जब वर्ष 1977 में मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने शराबंदी लागू किया लेकिन दो वर्ष बाद फिर से शराब शुरु कर दिया गया। हमारे मन में शराबबंदी की बात शुरु से थी। हमारे मन में आशंका थी कि शराबबंदी लागू कर पाएंगे कि नहीं। उन्होंने कहा कि हमलोग शराबबंदी को लेकर वर्ष 2011 से अभियान चला रहे हैं। इसको क्रियान्वित करने को लेकर मेरे मन में शंका थी. लेकिन जब वर्ष 2016 में महिलाओं के एक सम्मेलन में मैं गया हुआ था, महिलाओं के विकास की बातें हो रही थीं। जैसे ही हम बोलकर बैठे कि पीछे से महिलाओं ने आवाज लगायी शराब बंद कराईये। उसके बाद वापस हम माइक पर आये और कहा कि अगली बार अगर काम करने का मौका मिलेगा तो शराबबंदी लागू कर देंगे और हमने इसको लागू किया। लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। 1 अप्रैल 2016 को पहले ग्रामीण इलाके में देशी और विदेशी शराब पर हमलोगों ने रोक लगायी, जबकि शहरी इलाकों में विदेशी शराब बंद नहीं किया गया था। शहरों में महिलाएं, लड़कियों, पुरुष वर्ग ने भी शराब के आवंटित दुकानों के खोले जाने पर कड़ा विरोध जताया और दुकानों को खोलने नहीं दिया उसके बाद 5 अप्रैल 2016 को राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई। बहत बड़े पैमाने पर लोगों ने साथ दिया। वर्ष 2016 में सभी जगहों पर महिलाओं के साथ, जीविका दीदियों के साथ हमने बैठक की। निरंतर यह अभियान चल रहा है। जीविका समूह की एक महिला ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा- मेरे पति काम से लौटते थे दारू पीकर आते थे, परिवार में सभी को बुरा लगता था, देखने में खराब लगते थे। अब जब शराबबंदी हो गई तो बाजार से सब्जी, फल लेकर आते हैं और घर में आते हैं तो मुस्कुराते हैं। अब देखने में अच्छे लगते हैं, यह कितना बड़ा परिवर्तन हुआ है। समाज में कुछ लोग गड़बड़ी करने वाले होते हैं चाहे वे किसी भी धर्म के मानने वाले लोग हों। कितना भी अच्छा काम कीजिएगा कुछ लोग तो गड़बड़ी करेंगे ही। लेकिन हमलोगों को अभियान चलाते रहना है। कोई इधर उधर करना चाहे तो कुछ नहीं कर सके। समाज सुधार अभियान जारी रखना है। जैसे हमलोगों ने शराबबंदी लागू करके अभियान चलाया। उसके बाद बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ भी अभियान चलाया। वर्ष 2017 में बड़े पैमाने पर हमलोगों ने अभियान चलाया। आज महिलाएं बाल विवाह, दहेज प्रथा के खिलाफ बोल रही थीं तो जरुरत इस बात की हमलोगों ने महसूस किया कि कुछ न कुछ गड़बड़ करने वाला रहेगा ही इसके लिए हमलोगों को निरंतर अभियान चलाते रहना है। प्रचार-प्रसार करते रहना है। इस बार जो अभियान शुरु किया गया है। हमलोगों ने उसके पहले 18 नवंबर को सारे अधिकारियों के साथ बैठक की थी। अभी तक 75 हजार 300 छापेमारी की गई। शराबबंदी से संबंधित 11 हजार 370 मामले दर्ज किए गए। 13 हजार अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई। 1 लाख 89 हजार लीटर देसी शराब, 3 लाख 24 हजार लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। शराब से जुड़े मामलों में 1 हजार 788 गाड़ियां जब्त की गई। हमलोगों ने कॉल सेंटर बनाया था कि कोई गड़बड़ करे तो सूचित करें आपका नाम नहीं बताया जाएगा और तत्काल कार्रवाई किया जाएगा। कॉल सेंटर में जहां औसतन 70-80 कॉल प्रतिदिन आते थे अब बढ़कर 190 से 200 कॉल आ रहे हैं। महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी जागृति आनी चाहिए। हमने अपने साथियों से भी कहा है कि हमने अभियान की शुरुआत की है, इसका मतलब ये नहीं की जहां जाएंगे वही अभियान है बल्कि इस अभियान को निरंतर जारी रखना है। अगर कोई शादी-विवाह में दहेज लेता है तो आप उसका विरोध कीजिए। वैसी शादी में आप शामिल मत होइये। जब आप शामिल नहीं होंगे तो निश्चित रुप से लोगों को लगेगा कि अगर हम दहेज लेंगे तो निश्चित रुप से विरोध होगा इसलिए इस काम को भी साथ-साथ जारी रखना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी बाल विवाह होता है और बाल विवाह के शिकार कितने लोग होते हैं इसलिए इन सब बातों पर ध्यान देना है कि बच्चों की शादी कोई इस तरह से नहीं करे। उसकी वजह से कितने तरह की परेशानी बढ़ती है, ये सबको मालूम है इसलिए इस अभियान को जारी रखिए। बाल विवाह और दहेज प्रथा कितनी बुरी चीज है। दहेज के चक्कर में कितनी लड़कियों को आत्महत्या करनी पड़ती है। कितने लोगों की हत्या की गई है। महिलाओं की अगर कोई इज्जत नहीं करेगा तो इससे बढ़कर और गलत काम क्या है। हम सभी पुरुष, स्त्री यहां हैं। महिलाओं की देन है कि हमको ये जीवन मिला है। अगर महिला नहीं होती तो आप या कोई और धरती पर नहीं आते, इसलिए किसी को महिला की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। पुरुष-स्त्री समाज के दोनों अंग है, इन दोनों के वगैर समाज का विकास संभव नहीं है। पुरुषों में ये भाव नहीं आना चाहिए कि सब कुछ वही हैं और महिलाएं उनकी फॉलोवर हैं। महिलाओं और लड़कियों के प्रति अच्छी भावना रखें, तभी हम आगे बढ़ पाएंगे। आज महिलाओं की जागृति के चलते ही समाज आगे बढ़ रहा है और विकास का भी काम हो रहा है। हमलोगों को हमेशा शराबबंदी के पक्ष में और बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ निरंतर अभियान चलाना चाहिए ताकि लोगों में जागृति आए। शासन और प्रशासन को एक-एक चीज पर नजर बनाए रखना है। बहुत लोग तो कहते हैं कि शराबबंदी से बाहर का कोई आना नहीं चाहता है तो हमने उनको कह दिया कि कोई अलाउ नहीं है। जिसको पीना है वे यहां नहीं आयें। लोग कह रहे थे कि पर्यटन में कमी आ जाएगी लेकिन हमने बता दिया कि जब शराबबंदी लागू हुई तो बाहर से आने वाले पर्यटकों की संख्या पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ गई है। दो साल से तो कोरोना का दौर चल रहा है। सब सचेत रहिए लेकिन उसके पहले 2019 तक 2 करोड़ से भी ज्यादा लोग यहां आते रहे हैं। चंद लोग हैं, कुछ अपने को विद्वान समझते हैं, उनके मन में फिलिंग होती है उनको हम बताना चाहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया का वर्ष 2016 से 2018 तक सर्वेक्षण कराया और 2018 में ही रिपोर्ट को प्रकाशित किया। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब पीने से दुनिया में 30 लाख लोगों की मृत्यु होती है यानि दुनिया में जितनी मृत्यु हुई उसका 5.3 प्रतिशत मौत शराब पीने से होती है। 20 से 39 आयु वर्ग के लोगों में 13.5 प्रतिशत मृत्यु शराब पीने के कारण होती है। शराब के सेवन से 200 प्रकार की बीमारियां होती हैं, जबकि 18 प्रतिशत लोग शराब पीने से आत्महत्या कर लेते हैं। शराब पीने के कारण 18 प्रतिशत आपसी झगड़े होते हैं। शराब पीने से दुनियाभर में 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। शराब पीना मौलिक अधिकार नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब पीना किसी को मौलिक अधिकार नहीं है। शराब इतनी बुरी चीज है इसके संबंध में विज्ञापन के जरिए भी लोगों को जानकारी दी जा रही है, उस पर भी गौर कीजिएगा। लोगों को इसके प्रति सचेत कीजिए। बापू ने देश को आजाद कराया। शराब के वे कितना खिलाफ थे। आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों से कहते थे-शराब न सिर्फ आदमी का पैसा बल्कि बुद्धि भी हर लेती है। शराब पीने वाला इंसान हैवान हो जाता है। बापू ने कहा था कि अगर एक दिन के लिए भी तानाशाह बन गए तो हम सभी शराब की दुकानों को बंद कर देंगे। बहनों से हम आग्रह करेंगे कि जो शराब पीते हैं, गड़बड़ करता है उनके चारो तरफ खड़ा होकर जमकर नारा लगाईये और सूचना भी दीजिए। जहां बैठिए शराब नहीं पीने के लिए लोगों को प्रेरित कीजिए। आपस में मिल जुलकर रहना है। आपकी सेवा करना ही हमारा काम है। बहनों से उम्मीद है कि जो कोई भी गड़बड़ करेगा, उसके खिलाफ अभियान चलाइयेगा। विकास के साथ समाज सुधार होगा तो समाज, राज्य और देश आगे बढ़ेगा।
कार्यक्रम को मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री रामसूरत कुमार, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सह सीतामढ़ी जिले के प्रभारी मंत्री मो0 जमा खान, ग्रामीण कार्य मंत्री सह वैशाली जिले के प्रभारी मंत्री श्री जयंत राज, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, अपर मुख्य सचिव, गृह श्री चैतन्य प्रसाद, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन के अपर मुख्य सचिव श्री के0के0 पाठक ने संबोधित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों पर लगाए गए प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह ने पौधा तथा राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री रामसूरत कुमार ने प्रतीक चिन्ह और अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया। जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री बाला मुरुगन डी0 ने जीविका दीदी श्रीमती गुड़िया देवी द्वारा सुजनी कला निर्मित सम्मान स्वरूप प्रतीक चिन्ह मुख्यमंत्री को भेंट किया।
कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों ने स्वागत गान गाया और कला जत्था के कलाकारों ने नशामुक्ति से संबंधित जागरुकता गीत को प्रस्तुत किया।
सतत् जीविकोपार्जन योजना के तहत 9.41 करोड़ रूपये की राशि मुख्यमंत्री ने जीविका की दीदियों को डमी चेक प्रदान कर किया। स्वयं सहायता समूह को बैंकों द्वारा प्रदत राशि का डमी चेक मुख्यमंत्री ने प्रदान किया। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत 15 जलाशयों के रख रखाव हेतु 18.81 लाख का डमी चेक मुख्यमंत्री ने प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान सतत जीविकोपार्जन योजना की लाभार्थी वैशाली जिले के पोखरैरा गांव निवासी श्रीमती मोडली देवी जो ताड़ी व्यवसाय से जुड़ी हुई थीं। वर्ष 2018 में जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी छोटी-मोटी जरुरतों को पूरा करती रहीं। बाद में सतत् जीविकोपार्जन के तहत इनका चयन हुआ और इन्हें प्रारंभिक निधि प्रदान कर किराना दुकान खुलवाया गया। आज की तारीख में श्रीमती मोईली देवी आर्थिक रुप से मजबूत हो रही हैं। 5 बकरियों को भी इन्होंने पाल रखा है। उन्होंने बताया कि मेरे पति ताड़ी बेचते और पीते थे। मेरे पास पैसे नहीं थे कि मैं उनका इलाज करा सकू। पैसे के अभाव में उनका इलाज नहीं हो सका और उनकी मौत हो गई। मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं। कैसे उनका जीविकोपार्जन चलेगा। फिर जीविका समूह से मैं जुड़ गई और 12 लोगों का हमलोगों ने समूह बनाकर बचत करना शुरु कर दिया। फिर मुझे लगातार सहायता मिलने लगी। 10 रुपये रोज बचाकर माह में 300 रुपए की बचत करती
शिवहर जिले की मोहनपुर की रहने वाली पूजा दीदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दहेज प्रथा के खिलाफ उन्होंने मुहिम छेड़ी और जीविका से जुड़ी सीता दीदी की बेटी की शादी तय हो गई थी लेकिन सीता दीदी दहेज देने में असमर्थ थीं, जबकि लड़के वालों ने दहेज की मांग की। सीता दीदी बहुत दुखी हुई कि मैंने अपनी बेटी को पढ़ाया, लिखाया और ये सोच भी नहीं पायी थी कि इस लायक बनाने के बाद भी दहेज की मांग की जाएगी। साप्ताहिक बैठक में अपने बचत को जब लेकर आयीं तो उन्होंने अपनी बातों को सबके सामने रखा। हम सभी ने मिलकर उनको समझाया कि हम सब आपके साथ हैं। उसके बाद सीता दीदी की थोड़ी हिम्मत बढ़ी। फिर हमलोग मिलकर गए लड़के वाले के घर जाकर हमने कहा कि कोई कमी होगी तो बोलिएगा। सीता दीदी दहेज देने की स्थिति में नहीं हैं। कुछ तो बोलिए, सारी बातें हमने उससे कहीं और कहा कि अगर आप नहीं मानेंगे तो आगे भी हमलोग जाएंगे। दो दिन बाद सीता दीदी को खबर आया और उनकी बेटी की शादी हो गई। आज वे सुखी जीवन जी रही हैं, उनकी बेटी को एक पुत्र भी है।
सीतामढ़ी के अख्ता की रहने वाली रुबिना खातून ने कहा कि जीविका से पहले मैं कुछ नहीं थी। हमलोग शराब पर चर्चा करना शुरु किये। हम देखते थे कि हर घर में अपने पति के शराब पीने से महिलायें परेशान रहती थीं। जब भी उनके पति पीकर आते थे तो अपनी पत्नी के साथ मारपीट करते थे। हमलोग हमेशा सामाजिक मुद्दों पर अपने संगठन में चर्चा किया करते थे। इसके बावजूद हमलोगों की कोई सुनने वाला नहीं था। जब सरकार द्वारा नशामुक्ति अभियान चलाया गया तो इसको लेकर हमलोगों में बहुत जोश और उमंग आया कि अब तो हमारे साथ बिहार सरकार है। उसके बाद हमलोगों की हिम्मत बढ़ी और घर-घर जाकर शराब के खिलाफ लोगों को जागरुक किया, रैलियां निकाली। इसका नतीजा हुआ कि हमारे गांव में लोग शराब बहुत कम पीने लगे। फिर हमलोगों ने पता करना शुरु किया कि जब शराब मिलता नहीं है तो भी लोग कहां से पी रहे हैं। पता चला कि नेपाल से नदी मार्ग से आने वाले दारु को मछली खरीदने के बहाने खरीदकर ले आते हैं। उसके बाद सभी जीविका दीदियों ने नदी किनारे जाकर छिपकर देखा तो पता चला कि जगह-जगह छपा देते थे और पीने वाले एक-एक कर आते थे और पीकर चले आते थे। हमलोग चुप नहीं बैठे और हमलोगों ने टॉल फ्री नंबर पर फोन किया और तुरंत उस पर कार्रवाई हुई और आरोपी जेल चले गए। इसके बाद पता चला कि एक विकलांग घर पर ही दारु बनाते हैं, वे अपने घर में बासी चावल और मीठा से दारु बना रहा है, उसको हमलोगों ने ध्वस्त कर दिया। उसके बाद उनके जीविकोपार्जन के लिए अपने साथ जोड़ा और सतत् जीविकोपार्जन योजना के तहत किराना का दुकान खुलवा दिया गया। जब तक हमलोग जिंदा रहेंगे, सभी दीदियां इस काम को बढ़ाने के लिए चलाते रहेंगे।
मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां की पूनम दीदी पिछले 10 वर्षों से जीविका से जुड़ी हैं। इनके द्वारा लैंगिक असमानता और सामाजिक बदलाव को लेकर वर्षों से कार्य किए जा रहे हैं। इनके द्वारा इनके गांव में कम उम्र में शादी को लेकर विरोध किया गया, जिसमें इनका साथ ग्राम संगठन ने दिया। चुनौतियों का सामना करते हुए शराबबंदी और बाल विवाह को भी इनके द्वारा रोका गया और आज पूरा गांव खुशहाल है। एक दिन हमलोगों की बैठक चल रही थी, वो लड़का आया बोला हम आगे पढ़ाई करना चाहते हैं लेकिन मेरे मम्मी-पापा शादी करना चाहते हैं, कुछ कीजिए ना। बैठक खत्म होने पर उनके घर गए और हमलोगों ने कहा कि आपका लड़का चाह रहा है कि आगे पढ़ाई करे तो आप क्यों शादी कर रहे हैं। उस दिन लाख समझाने पर वे लोग नहीं समझे। अगले दिन 30-40 दीदियों का समूह बनाकर हमलोग उनके घर गए। उनको समझाते हुए हमलोगों ने कहा कि बात से समझ जाईयेगा तो ठीक है वर्ना हमलोग कानूनी कार्रवाई करवा देंगे और आपलोग जेल चले जाइयेगा। उसके बाद उनलोगों ने कहा कि लड़की वाला कैसे समझेगा। फिर लड़की वाले का नंबर लेकर हमलोगों ने बातचीत की। लड़की 16 साल की थी, लड़की का मन भी था कि आगे पढ़ाई करे, जिसको 8वीं तक पढ़ाई कराकर पढ़ाई छुड़ा दिया गया था। लड़की से बात किया तो उसने कहा कि आगे पढ़ना चाहती हूं| आज लड़का इंटर में पढ़ रहा है। बाल विवाह, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा जैसे सामाजिक मुद्दों पर हमलोग साप्ताहिक बैठक कर चर्चा करते हैं। हमलोगों को इतना मान सम्मान मुख्यमंत्री जी ने दी है कि किसी ऑफिस में जाते हैं, स्कूल में जाते हैं तो हमलोगों को सम्मान मिलता है।
सीतामढ़ी जिले के परसौनी की श्रीमती रिंकु देवी के पति ताड़ी बेचने का काम करते थे। शराबबंदी लागू होने के बाद इनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। पति की मृत्यु होने पर दुखों का पहाड़ टूट गया। इनको सतत् जीविकोपार्जन के तहत लाभान्वित हुई हैं और वे अपना जीवन खुशहालपूर्वक जी रही हैं और अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं।



