Press "Enter" to skip to content

Posts published in “बिहार ब्रेकिंग न्यूज़”

post about बड़ी खबर

बदहाल बिहार का एक और सच शिक्षा के गुणवत में कही खड़ा नहीं उतर रहा है बिहार

बिहार से जुड़ी इन तीन तस्वीरों को गौर से देखिए पहली तस्वीर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर की है इन्हें बिहार बोर्ड की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार एवं नए प्रयोगों के कारण प्राइम मिनिस्टर्स अवार्ड फार एक्सीलेंस इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के लिए चयनित किया गया है। दूसरी तस्वीर पटना वीमेंस कॉलेज के बाहर एक ग्रेजुएट छात्रा प्रियंका गुप्ता द्वारा चाय बेचने की है। और तीसरी तस्वीर पटना के गंगा घाट पर हज़ारों की संख्या में रेलवे-एसएससी की परीक्षा के लिए पढ़ाई कर रहे छात्रों की है।हालांकि इस तरह की तस्वीरे आपको आरा और बक्सर के रेलवे स्टेशन पर भी दिख जाएगा जहां छात्र रेलवे स्टेशन के स्ट्रीट लाइट के नीचे छात्र पढ़ाई करते है ।

अब जरा इन तीनों तस्वीरों के सहारे बिहार को समझने की कोशिश करते हैं। पहली तस्वीर सरकार को स्कूल में पढ़ाई नहीं पढ़ाई होते हुए दिखनी चाहिए ,स्कूल और कांलेज में पढ़ाई हो या ना हो परीक्षा समय पर होते हुए दिखनी चाहिए ।
कोरोना काल में पढ़ाई पूरी तरह ठप रहा सीबीएसई ने तब तक परीक्षा की तिथि घोषित नहीं किया जब तक स्कूल कोर्स पूरा करने का लिखित आश्वासन बोर्ड को नहीं दिया अभी भी 10वीं और 12वीं की परीक्षा शुरु नहीं हुई है ,जिसको देखते हुए जेईई की परीक्षा की तिथि दूसरी बार बढ़ाई गयी है।

लेकिन बिहार बोर्ड का 10वीं और 12वीं के परीक्षा का रिजल्ट आये हुए एक माह होने जा रहा है ऐसा इसी बार नहीं हुआ है पिछली बार भी ऐसे ही बिना पढ़ाई किये हुए परीक्षा लिया गया था । 2016 से आनंद किशोर बिहार बोर्ड के अध्यक्ष है परीक्षा समय पर लेना इनकी उपलब्धि रही है लेकिन बात अगर शिक्षा में गुणवत्ता की करे तो ये बिफर पड़ते हैं, एक बार मैं ही यह सवाल कर दिया था कि आप पटना साइंस कांलेज के छात्र रहे हैं आपके साथ पढ़ने वाले टांप 10 छात्र कहां है, क्या कर रहे हैं एक को तो हमलोग देख ही रहे हैं शेष के बारे में आप जानते ही होगे, लेकिन आज आप जिस बोर्ड के अध्यक्ष हैं उसका टांपर कहां है, क्या कर रहा है ,पढ़ाई के मुकाम में कहां तक पहुंचा है,कोई जानकारी हो तो बताये इस सवाल पे ये गुस्से से लाल हो गये वैसे मुझसे इनकी बनती अच्छी है जब मिलते हैं उलझ ही जाते हैं इसलिए अब फोन से ही बात करना ये ज्यादा पसंद करते हैं पुरस्कार के लिए बधाई लेकिन सवाल तो बनता है इस तरह के पुरस्कार पाने के लिए चयन का आधार क्या है ।

बिहार में इस समय शिक्षा का बजट 38035.93 करोड़ रुपये का है इतनी बड़ी राशी खर्च करने के बावजूद बिहार शिक्षा के क्षेत्र मे कहां खड़ा है इस पर कभी ठंडे दिमाग से सोचिए हम बात आईआईटी ,नीट और यूपीएससी की नहीं कर रहे हैं इन परीक्षाओं में हाल तो यह है कि 2019 आते आते बिहार बोर्ड और बिहार के विश्वविधालय से पढ़ा छात्र गिनती के पांच दस पास कर रहे हैं।

बात बिहार की करे तो 2009 के बाद बिहार सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर बीपीएससी और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा बिहार प्रशासनिक सेवा , बिहार पुलिस सेवा से लेकर सीओ .बीडीओ सहित राज्य सरकार के तमाम विभाग से जुड़े पदाधिकारियों का चयण किया है।

साथ ही बीपीएससी द्वारा बड़े स्तर पर प्रोफेसर की भी बहाली हुई है। 2009 के बाद जो दरोगा, की बहाली हुई है ,प्रोफेसर की बहाली हुई या फिर प्रशासनिक अधिकारियों की बहाली हुई है उस बहाली पर गौर करिएगा तो 2015 आते आते जो स्थिति पहले न्याययिक परीक्षा की होती थी जिसमें यूपी के बहुत सारे छात्र पास करते थे वैसे ही स्थिति बीपीएससी की भी हो गयी है 30 से 35 प्रतिशत छात्र यूपी,हरियाना ,उड़ीसा और झारखंड से आ रहे हैं। प्रोफेसर बहाली में तो राज्य सरकार पहले ही बिहार के विश्वविधालय से पीएचडी करने वाले या फिर बेट पास करने वाले छात्रों को परीक्षा के लिए योग्य माना ही नहीं था, 3300 मे गितनी के पचास भी नहीं हैं जिनकी पूरी पढ़ाई बिहार में हुई हो।

यही हाल बीपीएससी के परिणाम का भी है 64वीं और 65 वीं में मेरा भगीना पास किया है इस वजह से उसके बैंच के लड़कों से मिलने का मौका मिला,नवोदय विधालय ना होता तो समझिए बिहार में पढ़े छात्र किसी काम के नहीं रहता, गितनी के दो चार हैं जिसकी पढ़ाई बिहार के कांलेजों में हुई है जब इन छात्रों से मैं सवाल किया तो उनका कहना था बिहार की पहचान क्या रही है शिक्षा, दस वर्ष पहले तक बिहारी मतलब गणित और साइंस में मास्टर लेकिन आज बिहार की स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा राष्ट्रीय स्तर पर सबसे नीचे स्तर पर पहुंच गया है ।

पहले नोर्थ इस्ट के बच्चे कमजोर माने जाते थे अभी बिहारी बच्चों का हाल उससे भी बूरा है 64वीं बैंच का टांपर एमपी का है और पूरे बैच में बिहार के कांलेज से पढ़ा बच्चा दूर दूर तक दिखायी नहीं दे रहा है चयनित बच्चेअधिकांश इनजीनियरिंग बैग्रांउड के हैं उसमें भी बिहार के इंनजीनियरिग कांलेज से पढ़ा छात्र दो चार भी अभी तक ट्रेनिंग मेंं नहीं मिला है।बीपीएससी के 64वीं और 65 वीं बैच में हरियाणा की लड़की डीएसपी और एसडीओ बनी है उडीसा का कई छात्र है जो बीडीओ और सीओ बना है ,यूपी की तो बात ही छोड़िए ।

ऐसे में बिहार में पढ़े बच्चे प्रियंका गुप्ता की तरह चाय नहीं बेचेगा तो करेगा क्या और ये जो गंगा किनारे या फिर आरा बक्सर के रेलवे स्टेशन पर पढ़ते हुए बच्चों का जो भीड़ दिख रहा है उसे कौन समझाये की जिस स्तर का सवाल परीक्षा में पुछे जा रहे हैं उसकी पढ़ाई ही में कहां खड़ा है ये बच्चों का हाल प्रियंका के चाय बेचने से भी बूरा है पढ़ाई में फिसड्डी जी जान से मेहनक करके राष्ट्रीय लेवल पर पहुंच भी रहा है तो 10 वर्षो से बैंक ,रेलवे और एसएससी में नौकरी आधी से भी कम हो गयी वही भेकेन्सी कब निकलेगी इसका कोई पता नहीं है ये है बिहार का सच इसे देख कर आप मुस्कुरा
सकते हैं ।

बिहार का जामताड़ा बना नवादा, एक साथ 9 साइबर ठग गिरफ्तार

नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवो में जालसाजी का धंधा काफी तेजी से फैल रहा है. हलांकि स्थानीय पुलिस समेत अन्य कई राज्यों की पुलिस क्षेत्र के दर्जनों गांवो में छापेमारी कर प्राथमिकी के नामजद धंधेबाजों की गिरफ्तारी कर अपने साथ ले जा चुकी है. बाबजूद धंधे पर कोई विशेष असर नहीं पड़ रहा है.इसी कड़ी में एसपी डीएस सांवलाराम के निर्देशन में पकरीबरावां एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा के नेतृत्व में थाना क्षेत्र के अपसढ़ बेलदरिया गांव स्थित बगीचे में छापेमारी कर करीब एक दर्जन युवकों को गिरफ्तार कर थाना लाई थी. जबकि मौके पर उपयोग में लाया जा रहा दो दर्जन से अधिक मोबाइल फोन बरामदगी हुई थी.जिसमें जांच के दौरान तीन लोगों को निर्दोष पाते हुए थाने से छोड़ दिया गया। शेष बचे 09 साइबर जालसाजों को जेल भेज दिया गया.

बता दें कि जिले में बढ़ते साइबर क्राइम को समूल नष्ट करने के खातिर नवादा पुलिस ने कमर कस लिया है. जिसके तहत जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के अपसढ़ पंचायत की बेलदरिया गांव के बगीचे में एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस, जिला पुलिस की टीम, काशीचक, शाहपुर ओपी, पकरीबरावां, धमौल ओपी पुलिस की संयुक्त छापेमारी में 09 साइबर ठगों को ठगी का धंधा करते गिरफ्तार किया है. इन ठगों के पास से कुल 25 मोबाईल सेट बरामद किया गया. जिसमें 10 छोटा नोकिया कंपनी का मोबाइल फोन के साथ ही 15 मोबाइल एंड्रॉयड मोबाईल फोन जप्त किया गया है.

पकरीबरावां के पुलिस उपअधीक्षक मुकेश कुमार साहा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि एसपी के निर्देश और मिल रही सूचनाओं के आधार पर पहले वेरिफाई करवाया गया, उसके बाद पुलिसकर्मियों की टीम गठित कर वारिसलीगंज थाना क्षेत्र की अपसढ़ बेलदरिया गांव के बधार स्थित बगीचे में छापेमारी की गई. इस दौरान बगीचे में बैठकर साइबर अपराध से जुड़े जालसाज देश के विभिन्न हिस्सों के लोगो को मोबाईल फोन के माध्यम से राशि ठगते 09 लोगो को गिरफ्तार कर थाना लाया गया. बाद में सघन पूछताछ के क्रम में अपराधियों ने विभिन्न ठगी मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार किया है.

छापेमारी के दौरान गिरफ्तार आरोपियों में अपसढ़ बेलदरिया ग्रामीण हरिश्चन्द्र कुमार, मंगल कुमार, राजेश कुमार, शिवशंकर कुमार, अजित कुमार सभी ग्राम पोस्ट अपसढ़-बेलदरिया तथा शाहपुर ओपी क्षेत्र के संतीश कुमार, हिसुआ के रविया ग्रामीण डब्लू कुमार, मानपुर थाना क्षेत्र के गेवलबिधा निवासी गरीबन चौहान एवं शेखपुरा के अरियरी थाना क्षेत्र के रौदी निवासी गौतम कुमार ने गहन पूछताछ में ठगी के धंधे से जुड़े होने में अपनी संलिप्तता स्वीकार किया. बाद में पुलिस ने थाना कांड संख्या 158/22 दर्ज कर सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है.

 पुलिस द्वारा बताया गया की साइबर ठग देश के विभिन्न प्रदेशों के लोगो का मोबाईल नम्बर एकत्रित कर विभिन्न प्रकार का ईमान देने या जीतने के अलावे कोरोना काल में आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति करने, मोबाइल टावर लगवाने, गैस एजेंसी तथा पेट्रोल पंप आबंटित करवाने, नौकरी लगवाने, परीक्षा में सेटिंग करने आदि का झांसा देकर भोले भाले लोगो से राशि को बैंक खाता में मंगाकर ठगी करते हैं.

चाय बेचनी वाली बिहारन

पटना वीमेंस कॉलेज के बाहर चाय बेचने की शुरुआत करने वाली प्रियंका गुप्ता आजकल मीडिया के लिए हांट केक बनी हुई है एक सप्ताह में जितनी कप चाय नहीं बेच पायी है उससे कही अधिक अभी तक मीडिया को इंटरव्यू दे चुकी है हाल यह है कि वीमेंस कांलेज के रास्ते से गुजरने वाला हर कोई एक नजर उस चाय बेचने वाली को देखना चाहता है वैसे उसका कहना है कि जब देश में इतने सारे चायवाला हैं तो क्यों कोई चायवाली नहीं हो सकती.

उन्होंने कहा, ‘मैंने 2019 में अपना स्नातक किया लेकिन बीते 2 सालों में कोई नौकरी नहीं मिल पाई. जिसके बाद कुछ अलग कर आत्मनिर्भर होने की बात सोची.’

उन्होंने कहा, ‘मेरे ऊपर से अब बेरोजगार का टैग हट गया है. अब खुद से रोजगार पाने वाले का टैग लग गया है.’
गुप्ता ने वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन किया है. वो बिहार के पूर्णिया की रहने वाली हैं.
हालांकि गुप्ता ने जिस अंदाज में अपनी चाय की दुकान की शुरुआत बीते हफ्ते की है, वो सभी का ध्यान खींच रही हैं.

गुप्ता ने पोस्टर में लिखा है- ‘लोग क्या सोचेंगे अगर ये भी हम ही सोचेंगे तो फिर लोग क्या सोचेंगे ‘. वहीं पोस्टर में उन्होंने अपने इस कदम को आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एक पहल बताया है.

ग्राहकों का ध्यान खींचने के लिए उनका टैगलाइन है- पीना ही पड़ेगा. वहीं वो कहती हैं कि सोच मत…चालू कर दे बस.

जीतनराम मांझी के पुत्र मंत्री संतोष कुमार सुमन अपने पिता के बातों से नही रखते है इतेफाक

जहानाबाद ।हम पार्टी के नव निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन अपने पिता के बातों से इतेफाक नही रखते है।

आरक्षण और धार्मिक जुलूस को लेकर दिये गए पिता की बातों से अपने को अलग करते हुए कहा कि सबको अपनी अपनी बात रखने का संविधान में अधिकार है उनकी राय अलग है मेरी राय अलग है मंत्री संतोष कुमार सुमन हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार जहानाबाद सर्किट हाउस पहुंचे थे।

जीतन राम मांझी ने क्या कहा था

दरअसल में पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी भगवान राम ,आरक्षण और धार्मिक जुलूस पर प्रतिबंध लगाने सहित कई बयान देकर गठबंधन सरकार में असहज स्थिति लाते रहते है।

जीतनराम मांझी ने हाल में देश मे बढे साम्प्रदायिक तनाव को लेकर धार्मिक जुलूसों पर प्रतिबंध लगाने की मांगकर अपरोक्ष रूप से बीजेपी पर हमला बोला था। मांझी अक्सर NDA की लाइन से अपना स्टैंड रखते हुए राजनीति सरगर्मी बनाए रखते है।

सबको साथ लेकर चलने में रखते है विश्वास

इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी मीडिया के सवाल के जवाब में जीतन राम मांझी के बयान से असहज की स्थिति है पर संतोष कुमार सुमन ने कहा कि संविधान के तहत सबको बोलने का अधिकार है। और यह उनका व्यक्तिगत मामला है, इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते है ।

उन्होंने यह भी कहा कि वे सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखते है । बहरहाल मंत्री संतोष कुमार सुमन जहानाबाद के प्रभारी मंत्री भी है और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनकी बातों के अलग राजनीति निहितार्थ निकाले जा सकते है

2024 से पहले राजनाथ सिंह को निपटाने कि तैयारी तो नहीं है कुंवर सिह की जंयती से राजपूता नेताओं को अलग रखना

महात्मा गांधी को छोड़ दे तो देश के तमाम महापुरुषों को या तो राजनीतिक पार्टियां याद करती हैं या फिर उनके बिरादरी के लोग याद करते हैं। राजनीतिक दल के याद करने के पीछे भी कही ना कही महापुरुषों के सहारे उनके जाति को ही साधना रहता है।
बीजेपी भारतीय राजनीति में वर्षो ले चली आ रही इस नैरेटिव को अमृत महोत्सव कार्यक्रम के सहारे बदलना चाह रही है और प्रयोग के तौर पर बिहार में 23 अप्रैल को वीर कुंवर सिंह की जयंती के मौके पर उनके जन्मस्थली जगदीशपुर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही है ।इस कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेवारी नित्यानंद राय दो दी गयी है ।

कार्यक्रम सफल हो इसके लिए बीजेपी के तमाम विधायक और विधान पार्षद को दो सौ गांड़ी लाने की जिम्मेवारी दी गयी है वही सभी मंत्री को कार्यकर्ता के लाने ले जाने से लेकर ट्रैफिक व्यवस्था बहाल रखने तक की जिम्मेवारी दी गयी है कहा ये जा रहा है कि इस मौके पर तीन लाख तिरंगा फहराया जायेगा ताकी इस सभा का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हो सके उसी स्तर की तैयारी भी चल रही है ।इस मौके पर खास तौर पर राजपूत नेता को अलग रखा गया है और इस कार्यक्रम में अमित शाह मुख्य अतिथि होंगे।

जानकारों का मानना है कि इसके पीछे दो वजह है एक तो बीजेपी जातिगत राजनीति को राष्ट्रवाद के सहारे साधना चाह रही है दूसरा राजनाथ सिंह को 2024 के चुनाव से पहले निष्प्रभावी बनाना

1—रणनीति के तहत राजपूत नेताओं को इस कार्यक्रम से दूर रखा गया है
बिहार में वीर कुंवर सिंह की जयंती राजद ,जदयू और भाजपा तीनों मनाती रही है और उन्हीं की जयंती के सहारे सभी राजनीतिक दल राजपूत वोट को साधने के कोशिश करते रहे हैं लेकिन बीजेपी ने इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा इस तरह से तैयार किया है कि वीर कुंवर सिंह की जयंती बीजेपी मना रही है राजपूत नहीं यह संदेश लोगों के बीच पहुंचे ताकी आने वाले समय में राजपूत के बड़े नेता को उसके अपने विरादरी में राष्ट्रवाद के सहारे नेपथ्य में पहुंचाया जा सके और यही वजह है कि राजनाथ सिंह को इस कार्यक्रम से पूरी तौर पर अलग रखा गया है ,

इतना ही नहीं आर0के0सिंह जो स्थानीय सांसद हैं उन्हें भी मुख्य जिम्मेवारी से दूर रखा गया है, कहा ये जा रहा है कि बीजेपी के इस रणनीति को भापते हुए ही औरंगाबाद सांसद सपरिवार होम कोरेन्टीन हो गये हैं ।कहां ये जा रहा है कि राज्यसभा सांसद गोपाल नारायण सिंह की सक्रियता को नियंत्रित करने के लिए अमित शाह खुद उनके मेडिकल में जाने कि स्वीकृति दिये हैं,इतना ही नहीं आरा ,सासाराम.औरंगाबाद जिले से जो राजपूत विधायक और विधान पार्षद है उन्हें भी इस कार्यक्रम से दूर रखा जा रहा है। भले ही मंच पर राजपूती शान दिखे लेकिन मंच पर राजपूत नेता कम से कम दिखे इसकी कोशिश अभी से ही चल रही है।

2–2024 से पहले राजनाथ सिंह को निपटाने की है तैयारी
बीजेपी की राजनीति पर नजर रखने वाले विद्वानों का मानना है कि भारतीय राजनीति में जाति को नकारा नहीं जा सकता है ,भ्रष्टाचार ,आतंकवाद,हिन्दू मुसलमान और भारत पाकिस्तान के सहारे मोदी और शाह 2014 और 2019 का चुनाव तो जीत लिये लेकिन 2024 में इन मुद्दों पर चुनाव जीतना सम्भव नहीं है ऐसा साफ दिख रहा है ऐसे में 2024 के लोकसभा चुनाव में जाति का नैरेटिव लौट सकता है जो मोदी और शाह को सूट नहीं करता है क्यों कि मोदी के साथ आक्रमक हिन्दू नेता की छवि है लेकिन शाह की ना तो ऐसी छवि है और ना ही वो हिन्दू हैं।

कहा जा रहा है कि एक बार संघ के बैठक में योगी इस मुद्दा को उठा भी चुके हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि देश का अगला पीएम तो अल्पसंख्यक ही बनेगा जिसको लेकर पूरे बैठक में मौजूद लोग योगी के तरफ देखने लगे थे और फिर योगी ने कहा था शाह तो जैन हैं और नरेंद्र भाई की इच्छा है कि शाह उनका उत्तराधिकारी बने ऐसे में देश का अलगा पीएम तो अल्पसंख्यक ही बनेगा ना।

कहा जाता है कि इस बैठक के बाद ही योगी और शाह के बीच दूरिया लगातार बढ़ती चली गयी और योगी के फिर से यूपी के मुख्यमंत्री बनने से शाह को कुछ ज्यादा ही परेशान है। यूपी की राजनीति को करीब से देखने वाले को पता है कि यूपी के चुनाव में किस तरह राजनाथ सिंह योगी के पीछे खड़े थे ।

ये सारा खेल राजनाथ सिंह की घेराबंदी के लिए खेला जा रहा है राजनाथ सिंह जिनके साथ बीजेपी के हिन्दी प्रदेश के अधिकांश बड़े नेता अभी भी खड़े हैं ऐसे में 2024 में गठबंधन की सरकार बनने कि स्थिति बनी तो राजनाथ सिंह मोदी और शाह दोनों के लिए परेशानी खड़े कर सकते हैं फिर राजनाथ सिंह 2024 के लोकसभा चुनाव में मार्गदर्शक मंडल वाली उम्र में भी नहीं पहुंच रहे हैं।

शाह और उनकी टीम राष्ट्रीय स्तर पर राजपूत की राजनीति को कैसे कमजोर किया जा सके इसकी कोशिश यूपी में भी किया और अब बिहार में वीर कुंवर सिंह की जयंती के सहारे करने कि है ऐसा राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है ये कितना सफल होगा या फिर शाह की यह रणनीति बैक फायर करता है यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन इतना तय है कि 2024 का बिसात बिछ चुका है और अभी से ही बीजेपी के अंदर ही शह मात का खेल शुरू हो गया है ।

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में क्या रहा खास

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, 127 लोगों की सुनी समस्यायें, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश

पटना, 18 अप्रैल 2022 मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज 4 देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए। जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे 127 लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के लिए समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए।

आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, पंचायती राज विभाग, ऊर्जा विभाग, पथ निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, जल संसाधन विभाग, उद्योग विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, परिवहन विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, लघु संसाधन विभाग, योजना एवं विकास विभाग, पर्यटन विभाग, भवन निर्माण विभाग, वाणिज्य कर विभाग, सूचना एवं जन संपर्क विभाग, गन्ना (उद्योग) विभाग, विधि विभाग तथा जीविका से संबंधित मामलों पर सुनवाई हुयी।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में रोहतास से आये एक व्यक्ति ने मनरेगा में अनियमितता की शिकायत की। वहीं वैशाली जिले के पातेपुर के एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिलनेवाली सूची में नाम होने के बावजूद उसे आवास नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को जांचकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

शिवहर से पहुंचे एक फरियादी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके महादलित टोला का

सड़क, मुख्य सड़क से नहीं जोड़ा गया है, इसके कारण मुख्य सड़क तक जाने में काफी कठिनाई होती है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। बांका जिले के बेलहर से आए एक बुजुर्ग जे०पी० सेनानी ने कहा कि बिना अनुमति के उनकी जमीन के बीच में तीन बिजली का पोल लगा दिया गया है। थाना में भी कई बार आवेदन देने के बाद भी मामले में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इस मामले की जांचकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

• शिवहर जिले के विश्वम्भरपुर के एक व्यक्ति ने विश्वम्भरपुर पंचायत के वार्ड नंबर-7 के

महादलित टोला में रास्ता निर्माण को लेकर अपनी मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी। वहीं भोजपुर

जिले के गड़हनी के एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण को लेकर

अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को इस पर समुचित कार्रवाई करने का निर्देश

दिया। ●भागलपुर जिले के बिहपुर के एक व्यक्ति ने प्राकृतिक आपदा के कारण अपनी फसल नष्ट होने की शिकायत की और मुआवजे की मांग को लेकर अपनी बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखी। वहीं

बेगूसराय के मसदपुर के एक व्यक्ति ने फैक्ट्री से उत्पन्न प्रदूषण के कारण ग्रामीणों को होने वाली परेशानी के संबंध में शिकायत की मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को जांचकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। फतुहा के एक व्यक्ति ने नगर परिषद् के वार्ड-16 में गंगा घाट निर्माण कार्य कराने के

संबंध में मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखी। वहीं दानापुर से आयी एक महिला ने शिकायत करते हुए कहा कि बरसात के दिनों में जलजमाव की समस्या होने के कारण उन्हें पलायन करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, उद्योग मंत्री श्री शाहनवाज हुसैन, जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, भवन निर्माण मंत्री श्री अशोक चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री रामप्रीत पासवान, पथ निर्माण मंत्री श्री नितिन नवीन, पंचायती राज मंत्री श्री सम्राट चौधरी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्रीमती लेशी सिंह, सहकारिता मंत्री श्री सुबाष सिंह, परिवहन मंत्री श्रीमती शीला कुमारी, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री नीरज कुमार सिंह, लघु जल संसाधन मंत्री श्री संतोष कुमार सुमन, ग्रामीण कार्य मंत्री श्री जयंत राज, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री आमिर सुबहानी, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव / प्रधान सचिव / सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ० एस० सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, पटना के जिलाधिकारी श्री चंद्रशेखर सिंह तथा वरीय पुलिस अधीक्षक श्री मानवजीत सिंह ढिल्लो उपस्थित थे।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम की समाप्ति के पश्चात् मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत की। देश में कोरोना के मामले में हो रही वृद्धि के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कहीं-कहीं से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने की खबर आ रही है। दिल्ली में भी कोरोना के मामले में वृद्धि की खबर आयी है। बिहार में अभी कोरोना के काफी कम मामले हैं लेकिन बाहर में कोरोना के मामले बढ़ने का असर यहां भी पड़ता है क्योंकि लोग एक-दूसरे जगह आते जाते रहते हैं।

राज्य में लगातार कोरोना की जांच कराई जा रही है। यहां इसको लेकर पूरी तरह सतर्कता है और लोगों को भी सतर्क किया जा रहा है ताकि बाहर से आनेवालों की जांच होती रहे। सब लोगों से आग्रह है कि कोरोना की जांच करायें, इसको लेकर सरकार की ओर से पूरी व्यवस्था है। बिहार में कोरोना जांच की दर सर्वाधिक है। देश में दस लाख की आबादी पर जितनी औसत जांच हो रही है उससे ज्यादा जांच बिहार में हो रही है।

कोरोना दूसरे देशों में भी बढ़ा है। बिहार में कोरोना संक्रमण की दर काफी नीचे गया है लेकिन अगर फिर कहीं बढ़ रहा है तो उसके लिए अलर्ट रहने की जरूरत है। हमलोगों के यहां अलर्टनेस है, उसके लिए जो भी जरूरी है किया जाएगा। सिर्फ कोरोना ही नहीं बल्कि भीषण गर्मी के चलते अन्य प्रकार की बीमारियों का भी खतरा है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के द्वारा इस पर नजर रखी जा रही है। हमलोग निरंतर जरूरी जानकारी लेते रहते हैं कि कहां पर किस जगह पर क्या स्थिति है ? सब ध्यान दे रहे हैं। बिहार में कुछ जगहों पर तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया है। पिछले अनेक वर्षों से इस वर्ष तापमान में ज्यादा वृद्धि हुई है इसलिए लोगों को तो सतर्क रखना ही पड़ेगा। हमलोग इसको लेकर पूरे तौर पर अलर्ट है। स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ प्रशासन की तरफ से

भी अलर्ट किया गया है। ए०ई०एस० से बचाव के लिए काम किया जा रहा है। लाऊडस्पीकर पर नमाज को लेकर देश के कुछ हिस्सों में जारी विवाद के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से हमें काम करने का मौका मिला है तब से ही आपस में किसी तरह का विवाद न हो, झंझट न हो इसको लेकर हमलोग काम करते रहे हैं। पहले बिहार में कितना विवाद होता था लेकिन हमलोगों ने लोगों में अवेयरनेस लाकर इसको बिल्कुल समाप्त करने की लगातार कोशिश की है जब किसी समुदाय, धर्म के त्योहार का अवसर आता है तो प्रशासन पूरी
तौर पर अलर्ट रहता है ताकि कोई गड़बड़ी न कर सके। एक-एक चीज पर कॉन्सेसनेस है। जिसके मन में जो आता है, बोलते रहता है। हमलोग चाहते हैं कि सभी लोगों में आपस में प्रेम और भाईचारे का भाव रहना चाहिए। कोई भी किसी धर्म को मजहब को माननेवाला है, उसका अपना-अपना तरीका है।

सब लोग अपने-अपने ढंग से अपना त्योहार मनायें लेकिन इसको लेकर के आपस में विवाद नहीं करना चाहिए। ये बहुत जरूरी चीज है। सब अपने-अपने धर्म का मजहब का पालन कीजिए। इसको लेकर कहीं कोई रोक नहीं है। अगर आप सचमुच पूजा में विश्वास करते हैं तो ठीक से पूजा कीजिये। एक-दूसरे से झगड़ा करने का, पूजा करने से कोई संबंध नहीं है। अगर कोई भी किसी कम्युनिटी का है आपस में इस तरह का विवाद करता है तो मान लीजिए उसको धर्म से कोई मतलब नहीं है। इसका मतलब है कि वो सही आदमी नहीं है। यहां पर ऐसा कुछ नहीं है लेकिन कुछ-न-कुछ तो इधर-उधर होता ही रहता है। यहां पर अलर्टनेस है। उसके लिए ज्यादा चिंता मत करिए। हमलोग सबकी इज्जत करते हैं, हमलोग किसी को अपमानित नहीं करते हैं।

कुछ मंत्रियों द्वारा की जा रही बयानबाजी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें इसकी जानकारी नहीं है। अगर आप लोग जानकारी दीजिएगा तो हम उनसे तुरंत पूछ लेंगे। हमारे पास कहीं से कोई जानकारी मिलती है तो तत्काल पूछ लेते हैं। ऐसा कुछ नहीं है, कोई भूल से कुछ बोल दिया हो तो उसकी बात अलग है।

श्री प्रशांत किशोर द्वारा कांग्रेस की जिम्मेदारी संभालने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर मेरी कोई प्रतिक्रिया नहीं है। सबको अपना अधिकार है, राजनैतिक रूप से कोई क्या करना चाहता है, ये उसका अपना अधिकार है। हमसे उनका व्यक्तिगत संबंध रहा है और है भी। वे सबसे पहले भाजपा के साथ थे। फिर हमलोगों के साथ काम किये। अब कहीं और कर रहे हैं यह उनकी अपनी इच्छा है। ऐसे हमारा कोई इंटरफेयरेंस नहीं है और न ही इसमें हमारी कोई प्रतिक्रिया है।

उपचुनाव के नतीजे के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जगह बाइइलेक्शन में हमलोगों की हार हो गई तो ये कोई खास बात नहीं है। इससे पहले दो बाइइलेक्शन हमलोग भी जीते हैं। यह कोई जेनरल इलेक्शन नहीं था। हमलोग तो एन०डी०ए० के उम्मीदवार के प्रचार के लिये गये ही थे, सब लोग प्रचार किये ही थे। वहां क्या हुआ इसकी अभी पूरे तौर पर जानकारी नहीं है कि हार क्यों हुई। आपस में बातचीत करने से इसकी पूरी जानकारी मिलेगी कि मामला क्या था। जनता मालिक है, उसको जो मन करे, उसे वोट दे। इस पर हम कभी कमेंट नहीं करते हैं।

श्री शत्रुघ्न सिंहा के बंगाली बाबू के रूप में लोकसभा उपचुनाव में मिली सफलता के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहारी बाबू और बंगाली बाबू क्या है, सब हिंदूस्तानी बाबू हो जाइये। ये सबसे अच्छा है। इसमें क्या दिक्कत है।

स्पेशल स्टेट्स के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग काम भी करते हैं और बिहार को जो जरूरत रहती है उसके लिये बात भी करते रहते हैं। कौन क्या कॉमेंट देता उससे क्या मतलब। हमलोग जितना बिहार के लिये करते हैं वो आपलोगों को पता है। हमलोग मांग भी करते हैं और बिहार के लिए काम भी करते हैं। इन सब पर ज्यादा चिंता करने की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मौसम को देखते हुए अभी एक- दो महीने लोगों को अलर्ट रहने की जरुरत है। राजनीतिक बातें तो होती ही रहती है, उसका उतना महत्व नहीं है लेकिन लोगों की सर्वोपरि है। सभी लोग स्वस्थ रहें किसी को कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े इसको लेकर हम सभी लोग लगे हुए हैं। मीडियाकर्मी भी लोगों को सचेत करते रहें, यह बहुत जरुरी है। अभी सभी लोगों को सचेत रहने की जरुरत है।

बीजेपी जदयू के गठबंधन तोड़ने का वक्त आ गया है – पूर्व विधान पार्षद रजनीश कुमार

पटना । बेगूसराय खगड़िया विधान परिषद चुनाव में हार का सामना करने वाले एनडीए के भाजपा उम्मीदवार रजनीश कुमार ने भाजपा जदयू के गठबंधन पर सवाल खड़ा करते हुए भाजपा को जदयू से अलग होने का आग्रह किया है।

रजनीश कुमार ने कहा कि गठबंधन का समय चला गया है, भाजपा के शीर्ष नेताओं से आग्रह करते हुए कहा कि जिस तरह से भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में आत्मनिर्भर बना है उसी तरह बिहार में भी भाजपा आत्मनिर्भर बनने के लिए अकेले चलने का काम करें। रजनीश कुमार ने कहा कि बिहार में गठबंधन की सरकार है लेकिन निचले स्तर पर गठबंधन का कोई औचित्य नहीं रह गया है।

बेगूसराय विधान परिषद चुनाव में जदयू की इकाई और विधायक ने खुलेआम एनडीए उम्मीदवार के विरोध में प्रचार किया। भाजपा और जदयू नेतृत्व को सूचना देने के बावजूद जदयू ने साथ नहीं दिया और धोखा देने का काम किया। बिहार में उपचुनाव में भाजपा हमेशा जदयू के साथ रही है लेकिन जदयू हमेशा चुनाव में गठबंधन धर्म का पालन नहीं करती है।

अब समय आ गया है कि गठबंधन को साथ नहीं चल सकते हैं ऐसे में भाजपा नेतृत्व से आग्रह है कि भाजपा को बिहार में मजबूत बनाने के लिए अकेले चलने का समय आ गया है।

बिहार की राजनीति में अभी भी नीतीश फैक्टर प्रभावी है

कल दोपहर टीवी देख रहे थे चैनल पर जगदानंद सिंह के पुत्र के जदयू में शामिल होने कि खबर लाइव चल रही थी और ललन सिंह जगता भाई को नसीहत दे रहे थे ठीक उसी समय टीवी स्क्रीन पर बिग ब्रेकिंग फुल प्लेट खबर ब्रेक होता है नालंदा में नीतीश कुमार के कार्यक्रम में धमाका खबर जैसे ही खत्म हुआ एंगर सीधे बोचहा उप चुनाव में मौजूद अपने रिपोर्टर के पास जाता है, और मतदान का हाल जानना चाहता है रिपोर्टर मुजफ्फरपुर से सटे भूमिहार के सबसे बड़ा गाँव खबरा में मौजूद था रिपोर्टर वोटर से सवाल कर रहे हैं विकास के मुद्दे पर वोट दे रहे हैं या बदलाव के मुद्दे पर वोटर अपना नाम और जाति बोलते हुए कहां कि मैं भूमिहार हूं और राजद को वोट देकर आया हूं बहुत हो गया अपमान अब नहीं चलेगा ।        

ठीक उसी समय दूसरे चैनल पर अखाड़ाघाट से रिपोर्टर लाइव पर था जहां राजपूत मतदाता वोट देकर बाहर निकलता है और कहता है कि मैं राजद को वोट दिया हूं बहुत हो गया हम लोग एनडीए का बंधुवा वोटर नहीं है ।                 

ये सब चल ही रहा था कि मैं मुजफ्फरपुर के बीजेपी के एक बड़े यूथ लीडर को फोन लगा दिया और जैसे ही वो फोन उठाया मेरा सीधा सवाल था क्या देख रहे हैं टीवी पर ,भैया सही देख रहे हैं पता नहीं क्यों यूथ में गजब का गुस्सा है हाल यह है कि तमाम भूमिहार बस्ती में यूथ अभिभावक को घर से निकलने ही नहीं दे रहा है कह रहा है लोकसभा में मोदी को वोट देंगे लेकिन आज आप लोग वोट देने मत जाइए ।

रिजल्ट क्या होगा ,भैया नीतीश के वोटर पर हम लोग लड़ाई में बने हैं बात जीत की तो बहुत मुश्किल है हजार दो हजार से जीत जाये तो बहुत बड़ी बात होगी वैसे हारे तो 15 हजार से ऊपर से हारेंगे ।              

भैया ये लोग मुकेश सहनी को सहनी का नेता बना दिया 75 प्रतिशत सहनी रमई राम के साथ चला गया जो बचा वो राजद और भाजपा में गया है पासवान वोट भी राजद के साथ खड़ा रहा है पचपनिया(अति पिछड़ा) वोटर में भी बिखराव दिख रहा है, बात आगे बढ़ी तो मैंने भी कहां विधान पार्षद के वोट में भी अति पिछड़ा वोटर वर्षो बाद राजद की और जाते हुए मैंने भी देखा।

 तभी ख्याल आया कि अति पिछड़ा वोटर का यह ट्रेड सिर्फ तिरहुत और मिथिलाचंल में ही है या फिर अन्य जगह भी है ,फोन काटा और सीधे औरंगाबाद में उसके पास फोन लगा दिया जो विधान परिषद के चुनाव में छह माह से डटा हुआ था उनसे भी मेरा सवाल यही था कि चुनाव तो जीत गये, पैसा भी बेहिसाब खर्च किये लेकिन जरा ये बताये अति पिछड़ा वोटर का क्या हाल था संतोष भाई पैसा लेने के बाद भी यह वोटर राजद को वोट किया है, मैंने पूछा क्या आपको लगता है कि नीतीश का अति पिछड़ा वोटर भाजपा के साथ सहज नहीं है संतोष भाई सौ फिसड्डी जो भी साथ छोड़ा है वो राजद के साथ गया है और ये साफ दिख रहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री तेजस्वी ही बनेगा संतोष भाई भाजपा का कार्यकर्ता इतना करप्ट हो गया है कि आप सोच नहीं सकते हैं साला एक दर्जन संगठन गांव गांव में खड़ा कर दिया है और सबको पैसा चाहिए गजब हाल है इन लोगों का राजद का कार्यकर्ता अभी भी सतुआ खाकर काम करता है लेकिन हमारे यहां पगला गये इन लोगों को सम्भालते सम्भालते।

 बात चल ही रही थी कि देखते हैं मेरे नालंदा रिपोर्टर का लगातार फोन आ रहा है इनसे विदा लेते हुए नालंदा रिपोर्टर का फोन रिसीभ किये कैसे हुआ क्या हुआ कौन है वो सब बात होने के बाद मैं धीरे से पुछा पटाखा छोड़ने वाला कौन जाति का है सर बनिया है हद है बाढ़ में भी बनिया और यहां भी बनिया ये बनिया सब को क्या हो गया है सर उसके परिवार का किसी भी राजनीतिक दल से उस तरह का जुड़ाव नहीं है लेकिन प्रतिबद्धता बीजेपी के साथ जरुर है , उस लड़के से बात हुई है क्या जी सर कह रहा है कि नीतीश शासन सही तरीके से नहीं चला रहा है इसको मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देना चाहिए वैसे ये भी मानसिक रूप से कमजोर ही लगता है।

वैसे जगतानंद सिंह के बेटे का जदयू में शामिल होना,नीतीश कुमार की सभा में पटाखा छोड़ देना और बोचहा चुनाव में एनडीए के परम्परागत वोटर का गुस्सा होना ये सारी बाते भले ही तात्कालिक लग रहा है लेकिन बिहार की राजनीति फिजा बदल रही है ये भी साफ दिख रहा है ।

करोड़ो का सम्पत्ति धारक निकला जेल अधिकारी रूपक कुमार, सहायक कारा महानिरीक्षक

जेल के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति मामले में छापेमारी मामले में विशेष निगरानी में बड़ा खुलासा किया है रूपक कुमार ने बैंगलोर में हवाई अड्डा के पास आवासीय फ्लैट लिया है और बैंगलोर में इन्होंने जमीन और प्लॉट खरीदने का एग्रीमेंट किया है

झारखंड के देवघर में एक बड़ा आवासीय भूमि का प्लॉट है जिसकी कीमत करोड़ों में है

जमशेदपुर के प्रसिद्ध जगह पर 3 बीएचके का फ्लैट है जिसकी कीमत करोड़ों में है

जमशेदपुर में आवासीय भूमि का प्लॉट भी मिला है

रांची में भी फ़्लैट और जमीन के कागजात मिले हैं

नोएडा में ब्यबसायिक दुकान ली है जिसकी कीमत करोड़ों में है नोएडा में भी आवासीय फ्लैट मिला है

पश्चिम बंगाल में भी करोड़ों के प्लेट और आवासीय जमीन के कागजात मिले हैं

पटना के बिहटा में भी जमीन के कागजात मिले हैं

पटना के लोदीपुर मेरी फ्लैट मिला है जो किराए पर लगा है

रूपक कुमार के आवाज से 62 लाख रुपए से ज्यादा का आभूषण मिला है

निगरानी ने यह भी खुलासा किया है कि रूपक कुमार के घर की तलाशी के दौरान कैदियों के उपयोग के लिए खरीदी गई समान और वस्तुओं का अपने घर में यह प्रयोग करते थे

अभी तक 10 करोड़ से अधिक के चल और अचल संपत्ति के बारे में पता चला है जिसकी जांच की जा रही है यह और भी ज्यादा बढ़ने की संभावना है

विपिन अग्रवाल की हत्या मामले की जांच को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता हुए गोलबंद

नई दिल्ली: आरटीआई का समर्थन करने वाली एक राष्ट्रीय संस्था ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर मांग की है कि आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की हत्या और उसके बाद उनके 14 वर्षीय बेटे की आत्महत्या के मामले में जांच के आदेश दिए जाएं.

‘नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट टू इंफोर्मेशन’ (एनसीपीआरआई) ने 8 अप्रैल को भेजे पत्र में कहा है कि बिपिन अग्रवाल की सितंबर 2021 में दिन-दहाड़े हत्या की गई थी और हत्यारा अभी भी पुलिस के पकड़ से बाहर है ।

मोतीहारी के हरसिद्धि इलाके के 47 वर्षीय आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की 2012 में 24 सितंबर को अज्ञात मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने सीओ के दफ्तर के सामवे गोली मारकर हत्या कर दी थी. अग्रवाल के परिवार ने हत्या के लिए बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष सहित स्थानीय भू-माफिया को जिम्मेदार ठहराते हुए हमलावरों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

एनसीपीआरआई ने लिखा, उनकी हत्या के बाद परिवार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा था और उनका बड़ा बेटा पुलिस हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए प्रयासरत था.

पत्र में आगे लिखा गया है, पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी न किए जाने से क्षुब्ध होकर बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतीहारी में बेटे ने आत्महत्या करके जान दे दी.

हालांकि, पत्र में बेटे का नाम लिखा है लेकिन द वायर नाम का उल्लेख नहीं कर रहा है क्योंकि वह नाबालिग था.
एनसीपीआरआई ने लिखा, ’24 मार्च 2022 को, (लड़के का नाम) के दादा द्वारा जारी वीडियो के अनुसार, (वह) मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक ज्ञापन सौंपने पुलिस स्टेशन गया था और उसने कथित तौर पर वहां कई घंटों तक वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने की कोशिश में इंतजार किया.’

इसमें आगे कहा गया है कि लड़के के दादा के अनुसार पुलिस परिवार पर यह कहने के लिए दबाव बना रही थी कि उसने निजी कारणों के चलते आत्महत्या की है.

‘बिपिन की हत्या और उनके बेटे की मौत… व्हिसलब्लोअर और उनके परिवारों की रक्षा करने में राज्य मशीनरी की घोर विफलता की ओर इशारा करते हैं. पुलिस और प्रशासन की भूमिका की जांच करने की जरूरत है और सबसे पहले बिपिन अग्रवाल को बचाने और उनकी मृत्यु के बाद मुख्य आरोपी की समयबद्ध तरीके से जांच और मुकदमा चलाने में विफलता के लिए जवाबदेही तय करने की जरूरत है.

संस्था ने यह भी आरोप लगाया है कि राज्य (सरकार) ने न्याय की तलाश में भटकते परिवार की सहायता नहीं की.
संस्था ने पत्र में कहा है, ‘राज्य की उदासीनता का परिणाम (लड़के की) मौत के रूप में निकला. आरटीआई उपोगकर्ताओं पर हमले और उनकी हत्याओं की घटनाएं बिहार में बिना किसी भय के निरंतर जारी हैं.’

पत्र पर प्रमुख आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, निखिल डे, वेंकटेश नायक, पंक्ति जोग, डॉ. शेख, प्रदीप प्रधान, राकेश दुब्बुडू, आशीष रंजन, शैलेश गांधी, अमृता जौहरी, कात्यायनी चामराज, विपुल मुद्गल, भास्कर प्रभु, अजय जांगिड़, करुणा एम., चक्रधर, अभय जॉर्ज, रोली शिवहरे और अशोक कुमार के हस्ताक्षर हैं.

हस्ताक्षरकर्ताओं ने नीतीश कुमार से एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने का आह्वान किया है.
उन्होंने कहा है कि पुलिस और अधिकारियों की भूमिका की ठीक से जांच की जानी चाहिए और परिवार को तुरंत उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए.

एनसीपीआरआई ने बिहार सरकार से राज्य स्तरीय व्हिसलब्लोअर्स सुरक्षा क़ानून अपनाकर व्हिसलब्लोअर को सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की है.

उसने कहा कि क्योंकि केंद्र सरकार 2014 में संसद द्वारा पारित व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने में विफल रही है और अब तक क़ानून के तहत नियमों का ऐलान नहीं किया है, इसलिए जरूरी है कि राज्य सरकार पहल करे।

पुल चोरी मामले का हुआ खुलासा विभाग के इंजीनियर ही था शामिल

बिहार के रोहतास में 60 फुट लंबे लोहे के पुल की चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।जिसमें सिंचाई विभाग के एक कर्मचारी अरविंद और गाड़ी के मालिक चंदन को भी गिरफ्तार किया है। वहीं पुल चोरी में इस्तेमाल किए गए गैस कटर और जेसीबी को भी बरामद कर लिया गया है।

नासरीगंज प्रखंड के आदर्श ग्राम अमियावर का है। आधे दर्जन गांवों को जोड़ने के लिए आरा कैनाल पर ये पुल बना था। रोहतास में 60 फुट लंबा ये ऐतिहासिक पुल करीब 50 साल पुराना था।

पुल की चोरी मामले में पुलिस की माने तो इस चोरी में सासाराम सिंचाई विभाग का एसडीओ राधेश्याम सिंह ही इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड था। चौंकानेवाली बात तो ये रही कि राधेश्याम सिंह ने ही पुल चोरी की घटना की एफआईआर तक दर्ज कराई थी। पूरा मामला नासरीगंज प्रखंड के आदर्श ग्राम अमियावर का है। आधे दर्जन गांवों को जोड़ने के लिए आरा कैनाल पर ये पुल बना था। रोहतास में 60 फुट लंबा ये ऐतिहासिक पुल करीब 50 साल पुराना था।

पुल चोरी मामले का हुआ खुलासा

पूरी साजिश सासाराम में तैनात सोन नहर अवर प्रमंडल, नासरीगंज के SDO राधेश्याम सिंह ने रची थी। राधेश्याम ने इसके लिए पूरी प्लानिंग की थी और एक स्थानीय RJD नेता को भी अपने साथ मिला लिया था, जिससे कोई बवाल न खड़ा हो पाए। ये आरजेडी नेता अमियावर गांव का ही रहनेवाला है और उसका नाम शिव कल्याण भारद्वाज है।

पुलिस ने इस दौरान पुल चोरी कांड में इस्तेमाल किए गए सामान, जिसमें बुलडोजर, पिकअप वैन, 247 किलो लोहा, दो गैस सिलेंडर और दो गैस कटर को भी बरामद किया। पुलिस के मुताबिक RJD नेता शिव कल्याण भारद्वाज ने अपराधियों को संरक्षण देने के बदले SDO से 10 हजार रुपये लिए थे।

इस साजिश के लिए राधेश्याम सिंह ने विभाग के कुछ कर्मचारियों को भी तैयार किया। इसके बाद तय समय पर जेसीबी, कटर वगैरह लेकर ये सब लोग मौके पर पहुंच गए। चुंकि वहां पर मौजूद सभी चोरों ने अपना परिचय सरकारी कर्मचारी और मजदूर के तौर पर दिया इसलिए उन्हें इस पुल को गायब करने में विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। इसके बाद सारा माल लोड कर मौके से सभी आरोपी उड़न छू हो गए।

बिहार के सासाराम में पुल चोरी का अनोखा मामला आया सामने

सासाराम । रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र से एक अजीबोगरीब खबर सामने आई है। जहां चोरों ने लगभग 60 फीट लंबी एक लोहे के पुल को ही चुरा लिया।

बताया जाता है कि जर्जर और परित्यक्त हो चुके नहर पर बने पुल को सिंचाई विभाग के अधिकारी बन कर कुछ लोग आए तथा जेसीबी, गैस कटर से पूरे पुल को काट तथा उखाड़ कर वाहनों पर लाद कर लेते चले गए। जिला के नासरीगंज थाना क्षेत्र के अमियावर में आरा कैनाल नहर पर सन 1972 के आसपास बनाए गए लोहे के पुल को चोरों ने दिनदहाड़े चुरा लिया।

बताया जाता है कि विभागीय अधिकारी बन कर कुछ लोग जेसीबी, पिकअप वान, गैस कटर तथा गाड़ियां लेकर पहुंचे और 3 दिनों में काट काट कर पूरा ब्रीज़ ही गायब कर दिया। सबसे मजे की बात है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी होने का झांसा देकर चोरों ने स्थानीय विभागीय कर्मियों की मदद भी ली और उनकी मौजूदगी में पूरा पुल ही चुरा लिया। आप तस्वीरों में देख सकते हैं किस प्रकार मजदूर लोहे के पुल के मलबे को ले जाकर पिकअप वैन पर लाद रहे हैं।

चोरी की घटना पर क्या कहना है ग्रामीणों का

बता दे की पिछले कई दशक से जर्जर हो जाने के कारण इस लोहे के पुल का लोग उपयोग लोग नहीं कर रहे थे। ऐसे में ग्रामीण स्कूल को हटाने के लिए आवेदन भी दे चुके थे। विभाग ने पुल के बगल में एक कंक्रीट की समानांतर पुल बना दिया था। वैसे भी पुल के लोहे की धीरे-धीरे चोरी हो रही थी। लेकिन पिछले तीन दिनों से धीरे धीरे काट काट कर इस पूरे पुल की चोरी कर ली गई और विभाग तथा ग्रामीण देखते रह गए।

पुल चोरी की जॉच करने एसपी पहुँचा घटना स्थल

लगभग 60 फीट लंबा और 12 फीट ऊंची यह पुल जब पूरी तरह चोरी हो गई, तब जाकर ग्रामीण तथा विभाग को समझ में आया कि वे लोग झांसे में पड़ गए हैं। जिसके बाद विभागीय अधिकारियों ने जाकर थाने में पुल चोरों के खिलाफ केस दर्ज कराया। लेकिन जिस तरह से दिनदहाड़े अपराधियों ने नहर पर बने लोहे का पूरा पुल चुरा लिया। यह कई सवाल खड़े करती है।

चोरी की घटना पर विभाग के अधिकारी और सासाराम के एसपी का क्या कहना है जरा आप भी सूने

चुकी ऐसी कहानी फिल्मों में मिलती है। लेकिन जिस तरह से नटवरलाल बन कर रोहतास के अमियावर में चोरों ने पूरा पुल को ही चुरा लिया। ये मामला कहीं ना कहीं पूरे सिस्टम को शर्मिंदा करती हैं।

बिहार के रिमांड होम में चलता है देह व्यापार -थानेदार

पश्चिमी चंपारण के बैरिया थाने के SHO का एक ऑडियो वायरल हो रहा है. इसमें वह बालिका सुधार गृह की सच्‍चाई को बताने का दावा कर रहे हैं. मामले की जांच में ऑडियो सही पाए जाने पर अब बैरिया थानाध्‍यक्ष को निलंबित कर दिय गया है. बताया जाता है कि पीड़ित ने थानाध्‍यक्ष की बात को टेप कर उसे वायरल कर दिया.बेतिया (पश्चिम चंपारण). बिहार के पश्चिम चंपारण से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है.

बेतिया में बैरिया थानाध्‍यक्ष का एक ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर बालिका सुधार गृह की सच्‍चाई बता रहे हैं. ऑडियो के वायरल होने के बाद मामले की जांच करवाई गई. जांच में ऑडियो सही पाए जाने पर SHO को निलंबित कर दिया गया है.

इस ऑडियो में लड़की को घर ले जाने से इनकार करने वाले परिजनों को आरोपी थानाध्‍यक्ष बालिका सुधार गृह की हकीकत बता रहे हैं. इसमें बैरिया थानाध्‍यक्ष बता रहे हैं कि बाल‍िका सुधार गृह या रिमांड होम में बड़ी-बड़ी गाड़ियों से लोग आते हैं और लड़कियों को ले जाते हैं. उनका यह ऑडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया.।

आरोपी बैरिया एसएचओ की पहचान दुष्‍यंत कुमार के तौर पर हुई है. वायरल ऑडियो में थानाध्‍यक्ष लड़की के परिजनों को नसीहत देते हुए बता रहे हैं कि रिमांड होम में लड़कियों के साथ अनैतिक काम होते हैं. इस ऑडियो के सोशल नेटवर्किंग साइट पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस अधीक्षक को कार्रवाई करनी पड़ी है. दरअसल, बैरिया थाना क्षेत्र के एक गांव से 25 मार्च को एक नाबालिग लड़की का अपहरण हो गया था.

अपहरण का आरोप बैरिया थाना के चौकीदार शम्भू साह के पुत्र सुधीर पर लगा था. परिजनों ने आवेदन दिया तो पुलिस ने आनाकानी करते हुए केस दर्ज नहीं किया. इसके बाद पीड़ित परिवार SP से मिला] तब जाकर मामले में केस दर्ज हुआ. इसके बाद पुलिस ने लड़की को बरामद कर लिया और न्यायालय में उसका बयान भी करवा लिया.।

परिजनों का लड़की को घर ले जाने से इनकार अब लड़की के घरवाले लड़की को अपने साथ नहीं ले जाना चाहते हैं. दूसरी तरफ पुलिस द्वारा जबरन लड़की को उसके घर भेजने के लिए दवाब बनाया जाने लगा. थानाध्यक्ष दुष्यंत कुमार ने पीड़ितों से कहा कि चौकीदार के पुत्र पर आरोप है तो वह चौकीदार का ही पक्ष लेंगे.

इस दौरान थानाध्यक्ष ने रिमांड होम की हकीकत बताकर लड़की के घरवावों को डराने का भी प्रयास किया, लेकिन लड़की के परिजन उसे अपने साथ नहीं ले जाना चाहते थे. बताया जाता है कि लड़की के परिजनों ने ही थानाध्यक्ष का ऑडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया.ऑडियो वायरल होते ही एसपी ने मामले की जांच एसडीपीओ सदर मुकुल परिमल पांडेय से करवाई.

जांच में यह मामला सही पाया गया. इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है. दरअसल, जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार लड़का-लड़की आपस में प्रेम करते थे और दोनों घर से भाग गए थे. पुलिस ने लड़की को बरामद कर लिया, लेकिन परिजन उन्‍हें घर नहीं ले जाना चाहते हैं. इस बीच, आरोपी लड़के को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

बीजेपी की स्थापना दिवस आज

बचपन संघ के साथ ,कॉलेज ABVP के साथ और पत्रकारिता का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के नेता और कार्यकर्ता के बीच गुजरा है ।

स्वभाविक है मेरा परिवार बिहार में संघ के स्थापक सदस्यो में एक थे ,काँलेज में ABVP की तरह व्यवस्थित दूसरा कोई छत्र संगठन नहीं था ,पत्रकार बने तो उस समय बीजेपी विपंक्ष में थी,सत्ता और सरकार के खिलाफ कार्यक्रम और आंदोलन करने के मामले में इनका जोड़ा नहीं है ।आंदोलन में लोग जुटे या ना जुटे मीडिया में बेहतर कभर कैसे हो इसके गुर में ये माहिर होते थे ।

इस वजह से बीजेपी का गाँव का कार्यकर्ता हो या फिर राष्ट्रीय नेता हो आप इसके आलोचक ही क्यों ना हो व्यक्तिगत रिश्ता हमेशा बना कर रखते थे ।

हालांकि बीजेपी जब से सत्ता में आयी इनकी मीडिया से पहले जैसी जरुरत नहीं रही फिर मोदी के बाद तो मीडिया से तो ये दुश्मनी साधने लगे ।

लेकिन 40 से उपर वाले इनके नेता और कार्यकर्ता में अभी भी वो भाव बची हुई है ,इन सबों में विपंक्ष में होने का एहसास अभी भी मिटा नहीं है वैसे सोशल मीडिया वाली आक्रमकता फिल्ड में देखने को नहीं मिलता है आंख में पानी है लेकिन पहले जैसा घार अब कार्यकताओं में नहीं है ,चाल चरित्र और चेहरा की बात अब बस कहने के लिए रह गया ।

गाँव को आपकी जरूरत है

बिहार का सुधा राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड कैसे बन गया यह सवाल बार बार मुझे परेशान करता है, पटना आने के बाद इस रहस्य को समझने के लिए कई बार सुधा से जुड़े लोगों से मैं मिला भी लेकिन इस ऊंचाई पर पहुंचने राज वो बता नहीं पाये ।

दरभंगा प्रवास के दौरान दरभंगा बहेड़ी मुख्य मार्ग पर जोरजा एक गांव हैं वहां चैती दुर्गा पूजा पूरे धूमधाम से मनाया जाता है इस गांव से मेरा पुराना रिश्ता रहा है पूजा कमेटी के लोगों ने मुझे पूजा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया दरभंगा जिला घूम ही रहे थे इसी क्रम में जोरजा पहुंच गये पूजा में शामिल होने के बाद वैसे ही बात हो रही थी तो मेरी नजर दुर्गा स्थान के पीछे स्थित बगीचा पर पड़ा गया पता चला बहुत बड़े कृषि वैज्ञानिक हैं। रिटायर होने के बाद पिछले 15 वर्षो से गांव में ही रह रहे हैं इनको दो बेटा है दोनों आईआईटीएन है और अमेरिका में रहता है ये यहां अकेले रहते हैं गांव में पर्यावरण पर काम करते रहते हैं।

चले गये उनसे मिलने एक घंटा का साथ मिला बात चलते चलते पता चला कि 1990 के दशक में डेयरी के क्षेत्र में काम करने वाले कई बड़े बिहार के रहने वाले वैज्ञानिक जो अमूल,राजस्थान और पंजाब हरियाणा डेयरी में काम करते थे उन्हें बिहार सरकार ने बिहार में काम करने के लिए आमंत्रित किया इसी कड़ी में राजस्थान डेयरी से डाँ धीरेन्द्र कुमार सिन्हा बिहार आये और ये फिर अलग अलग राज्यों में डेयरी के फील्ड में काम करने वाले बिहारी का बिहार आने का न्यौता दिया और फिर एक ऐसा टीम तैयार हुआ जिसके बुनियाद पर आज सूधा अमूल को चुनौती दे रहा है इन्होंने दूध का बायप्रोडक्ट पर काफी काम किये साथ ही जिस समय बिहार में दूध काफी होता है उस दूध को पाउडर के रूप में परिणत कैसे किया जाये इस तकनीक को भी बिहार में लाये।

इनके एमडी के कार्यकाल को आज भी सुधा से जुड़े लोग याद करते हैं इन्होंने एक ऐसा चैन खड़ा कर दिया कि आज सुधा की पहचान देश स्तर पर पहुंच गया है ।80 वर्ष इनका उम्र है, बीस और जीना चाहते हैं ताकी अपने गांव को एक ऐसा आदर्श गांव बना सके जिसकी पहचान देश स्तर पर औषधीय और ऑर्गेनिक खेती के रूप में हो सके। ये अपने बगान में बहुत सारे ऐसे फल सब्जी और अनाज पैदा कर रहे हैं जो हमारे फूड चैन से खत्म होते जा रहा है । पोस्ट के साथ कुछ तस्वीर लगा है पहचानिए इसमें से एक बथुआ का साग है जो हमारे आपके खेत में वैसे ही उगता रहता है इनका मानना है कि इससे पोस्टिंग साग दूसरा कोई भी नहीं है इस साग को कोई लगाता नहीं है लेकिन हर किसी के खेत में देखने को मिल जायेगा इस साग के खाने से बहुत सारे बीमारी से बचा जा सकता है ।

ऐसे कई फल , फूल और साग सब्जी इनके बगान में आपको मिल जायेगा जिसे देख आप हैरान रह जायेंगे मुझे लगता है कि ऐसे बिहारी जो पटना ,दिल्ली ,मुंबई में अपार्टमेंट की जिंदगी जी रहे हैं उन्हें गांव लौटना चाहिए क्यों आज भी जितने बिहारी ऊंचाई पर है उनकी पढ़ाई लिखाई और परवरिश कही ना कही किसी ना किसी बिहार के गांव से ही हुआ है गांव को आज आप जैसे लोगों की जरूरत है बिहार में बदलाव की अभी भी अपार सम्भावना है ।

मुम्बई से जयनगर(मधुबनी) आ रही लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस डिरेल हुई; रेलवे ने हेल्पलाइन जारी किया

लोकमान्य तिलक से जयनगर जाने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के पटरी से उतरने का मामला, रेलवे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि किसी की मौत नहीं हुई है 2 लोग घायल हुए हैं रेलवे यात्रियों को खाने के साथ-साथ सभी सुविधा दी जा रही है उन लोगों को वहां से बस से दूसरे रेलवे स्टेशन में भेजा जा रहा है और अन्य ट्रेनों के माध्यम से उन्हें गंतव्य स्थान के लिए भेजा रेलवे ने पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है।

कोई भी परिजन फोन करके जरुरी जानकारी ले सकते हैं….रेलवे यात्रियों को पहुचायेगी उनके घर

HJP- 9771425969
Hajipur- 8252912078, 7033591016
Muzaffarpur- 8252912066
SPJ-8102918596
DBG-9264492779
MBI-9262297168
JYG-9262297170

DY SS COML MMR :- 02591-222269/7987315756(MOB NO)

DY SS COML NKRD :- 0253-2465816

DY SS COML KNW :- 0733-2222252

DY SS COML AK :-07242411029

DY SS COM CSN:-02589-222034

DY SS COML JL:-0257-2229664


दरभंगा में बेखौफ अपराधियों ने दिनदहाड़े गोली मारकर अमेज़न कंपनी की 12 लाख रुपये लूटकर फरार

बेखौफ अपराधियों ने गोली मारकर अमेज़न कंपनी की 12 लाख रुपये की लूट, पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुटी

बिहार में अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि दिनदहाड़े किसी घटना को अंजाम देते हैं और पुलिस मूकदर्शक बनकर देखते रह जाती है। शायद यही कारण है कि एक के बाद एक क्राइम की घटनाओं को अपराधी अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला दरभंगा जिले के लहेरियासराय थाना क्षेत्र का है। जहां अपराधियों ने दिनदहाड़े फ्रेंड्स कॉलोनी के पास अमेज़न कंपनी से रुपया कलेक्ट कर बैंक जा रहे रेडिएंट कंपनी के कैशियर जटाशंकर को गोली मारकर 12 लाख रुपये की लूटकर मौके से फरार हो गया। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।

घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि बहादुरपुर थाना क्षेत्र के बलभद्रपुर नवटोलिया निवासी जटाशंकर चौधरी रेडिएंट कंपनी में कार्यरत थे और अमेज़न कंपनी के कार्यालय से कैश कलेक्ट कर बैंक में जमा करने जा रहे थे। उसी क्रम में पहले से घात लगाये अपराधी ने फ्रेंड्स कॉलोनी के पास जटाशंकर चौधरी को रोककर तबातोड़ फारिंग कर घायल कर दिया और रुपये से भरा बैग लेकर समस्तीपुर की ओर फरार हो गया। जिसके बाद पुलिस ने स्थानीय लोगो की मदद घायल जटाशंकर को इलाज के लिए अस्पताल भेजा। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

वही मौके पर पहुंचे सदर एसडीपीओ कृष्ण नंदन कुमार ने कहा की फ्रेंड्स कॉलोनी के पास जटाशंकर चौधरी नाम के व्यक्ति को अपराधी ने गोली मार दी है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले कि जांच में जुट गई है। वही उन्होंने कहा कि लूट की राशि कितनी है वह अभी कन्फर्म नहीं है। वहीं उन्होंने कहा कि इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे को भी खंगाला जा रहा है। ताकि अपराधी की गिरफ्तार कर मामले का सफल उद्भेदन किया जा सके।

भारतीय लोकतंत्र के अपराधिकरण से धनाढ़यकरण तक का सफर

भारतीय लोकतंत्र के अपराधिकरण से धनाढ्यकरण तक

भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था हमारे आपकी जरूरतों और मूल्यों पर कहां तक खड़ी उतर रही है यह सवाल अब उठने लगा है। आज कल हमारी मुलाकात पंचायती राज व्यवस्था में चुनकर आये प्रतिनिधियों से रोजाना हो रहा है और इस दौरान पंचायत चुनाव का मतलब क्या रह गया है इसको बेहतर तरीके से समझने का मौका भी मिल रहा है।

सुकून देने वाली बात यह है कि अब इसको लेकर चर्चा होनी शुरु हो गयी है कि इस तरीके से चुन कर आये जन प्रतिनिधियों से आप बदलाव की बात कहां तक सोच सकते हैं, संयोग से जिस इलाके में मैं घूम रहा हूं उसी इलाके का मुकेश सहनी भी रहने वाला है। मुकेश सहनी भारतीय लोकतंत्र का वो चेहरा है जो अब हर गांव में मौजूद है और ऐसे लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्व काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है।

1970के दशक में जब लोकतंत्र लोगों की जरूरतों को पूरा करने में फेल होने लगा था तो राजनीति का अपराधीकरण की शुरुआत हुई थी और बिहार में एक दौर ऐसा आया जब जनप्रतिनिधि अपराधियों के सहयोग से मुखिया से लेकर सांसद तक बनने लगे बाद में वही अपराधी जो नेता के लिए बूथ कैप्चर करता था वो खुद बूथ कब्जा कर मुखिया से लेकर सांसद तक बनने लगा।

दो दशक तक बिहार में राजनीति के अपराधीकरण का दौर काफी तेजी से आगे बढ़ा लेकिन 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद धीरे धीरे यह दौर समाप्त होने लगा एक तो अपराधी भी जनता की जरूरतों पर खड़ा नहीं उतर पा रहा था वही कानून व्यवस्था बेहतर होने पर जनता को भी अपराधी से न्याय मांगने की जरुरत कम पड़ने लगी ।

लेकिन इसी दौर बिहार में चुनाव के दौरान पैसे का खेल भी शुरु हुआ और आज स्थिति यह है कि कल तक जो नेता को चुनाव लड़ने के लिए पैसा देता था वो आज खुद चुनावी मैदान में उतर गया है।और यह प्रवृति गांव से लेकर राजधानी तक लगातार बढ़ता जा रहा है इस बार के पंचायत चुनाव में हर गांव में मुकेश सहनी जैसा व्यक्ति जो मुंबई दिल्ली में अकूत संपत्ति अर्जित कर लिया है वो गांव आकर चुनाव लड़ा है और आने वाले समय में विधायक और सांसद का चुनाव लड़ना है इसकी फील्डिंग अभी से ही शुरु कर दिया है ।

ऐसे लोग करता क्या है यह जब आप समझ जाएंगे तो फिर आपको समझ में आ जायेगा कि लोकतंत्र का मतलब क्या है हालांकि इस तरह के पैसे वालो का काम करने का तरीका अलग अलग है लेकिन सभी तरीकों के पीछे जनता की जरूरतों को कैसे पूरा किया जाये और फिर उसका इस्तेमाल चुनाव के दौरान कैसे किया जाये यही रहता है ।

कई ऐसे पैसे वाले है जो घोषित कर चुके हैं कि हमारे विधानसभा क्षेत्र का जो वोटर है अगर बीमार पड़ता है तो उसके दवा में जितना खर्च होगा वो मुहैया कराएगा ,महिलाओं से जुड़ी जितना भी पर्व त्यौहार आयेगा उसमें उस पर्व से जुड़ी सामग्री संभावित विधायक प्रत्याशी द्वारा मुहैया कराया जाता है ,बेटी की शादी है तो विधायक के जो संभावित उम्मीदवार है उनकी ओर से टीवी फ्रिज जैसी सामग्री मुहैया करायी जाती है।

कल संयोग से ऐसे ही एक संभावित विधायक प्रत्याशी के घर पर जाने का मौका मिला गांव में पांच करोड़ का घर जरूर होगा और उसके घर पर पांच छह बड़ी गाड़ी वैसे ही खड़ी थी। गये थे एक वार्ड पार्षद से मिलने लेकिन उसके घर ठीक से बैठने का जगह तक नहीं था ,जैसे ही पहुंचे वो सीधे उसी संभावित विधायक उम्मीदवार के दरवाजे पर लेकर आ गया बाहर कुर्सी सजी हुई थी।

बैठे ही थे कि गांव में आरो का पानी लेकर एक लड़का आ गया उसके ठीक पांच मिनट बाद बढ़िया नास्ता फिर शुद्ध दुध का चाय, चाय खत्म हुआ नही तब तक लौंग इलाइची लेकर खड़ा है पता चला राजनाथ सिंह राधा मोहन सिंह जैसे नेता इनके घर पिछले चुनाव में आये हुए थे। हर दूसरे तीसरे गांव में इस तरह के संभावित प्रत्याशी आपको मिल जायेगा जो पैसा के सहारे वोट की खेती शुरु किये हुए हैंं और यही वजह है कि इस बार पंचायत चुनाव में उम्मीदवार को विधायक और सांसद के चुनाव से भी ज्यादा खर्च पड़ा है और इसका असर बिहार के आने वाले चुनाव में भी देखने को मिलेगा ।

वैसे बातचीत में लोग अब कहने लगे हैंं कि सरकार भी मुफ्त राशन,गैस,घर और शौचालय बना कर वोट खरीदता है तो फिर ऐसे लोगों से मदद लेकर वोट करना कहां से गुनाह है भारतीय लोकतंत्र में यह एक नया बदलाव आया है इसके सहारे लोकतंत्र कहां तक खीचता है ये देखने वाली बात होगी ।

Bihar Breaking News : नीतीश कुमार पर मानसिक रूप से विक्षिप्त शंकर कुमार वर्मा ने जरा थप्पड़

मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान बख्तियारपुर में सुरक्षा घेरा तोड़ मुख्यमंत्री के नजदीक पहुंचने की कोशिश करता युवक को पुलिस ने लिया हिरासत में
युवक से हो रही हैं पूछताछ
युवक के बैकग्राउंड की जानकारी पुलिस ले रही है।

पीएम मोदी से नीतीश की गुलाकात पर तेजस्वी ने साधा निशाना, रीढ़ विहीन है नीतीश

CM योगी के शपथ समारोह की एक तस्वीर वायरल है। मोदी के आगे 145 डिग्री तक झुक आए शख़्स का नाम है नीतीश कुमार। ये वही नीतीश हैं जिन्होंने साल 2013 में मोदी को लेकर NDA(भाजपा) से गठबंधन तोड़ लिया था। अब आगे की कहानी पढ़िए।

जून 2013 में मोदी को BJP की चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाया गया तो इन्हीं नीतीश ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। इसके बाद नीतीश ने खुद को धार्मिक तटस्थता के पैरोकार के रूप में पेश किया।

बिहार भाजपा टीम ने महीनों तैयारी कर बिहार में मोदी की पहली रैली करवाई। नाम था- हुंकार रैली। बड़े बड़े पत्रकार दिल्ली से बिहार निर्यात किए गए। पूरे पटना को मोदी के पोस्टरों से आट दिया गया। इस रैली में मोदी ने नीतीश को ‘मौकापरस्त’ और ‘बगुलाभगत’ तक कहा।

अपनी एक किताब में राजदीप सरदेसाई बताते हैं- कुछ साल पहले एक रात्रि भोज पर मैंने नीतीश से पूछा था कि मोदी के बारे में ऐसा क्या था कि वह इतना आहत हो गए। इस पर नीतीश का जवाब था, ‘यह विचारधारा की लड़ाई है…यह देश सेक्यूलर है और सेक्यूलर रहेगा…कुछ लोगों को यह पता होना चाहिए।

हालाँकि नीतीश Secularism का फ़र्ज़ी यूज करते रहे हैं, गुजरात दंगों के बाद पासवान ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया था। लेकिन तब रेलवे मंत्री नीतीश ने कुछ नहीं किया। बल्कि उन्होंने गुजरात जाकर एक कार्यक्रम में मंच भी साझा किया। उन्होंने मुसलमानों को सिर्फ़ छला है।

2010 में बिहार चुनाव हुए। कुछ पर्सेंट मुस्लिम वोट राजद से शिफ़्ट होकर नीतीश की तरफ़ चले गए। इससे नीतीश की फ़ुल Majority के साथ सरकार आई। वे समझ गए लंबी राजनीति के लिए सबका वोट चाहिए। इसलिए उन्होंने भाजपा गठबंधन में रहते हुए भी मोदी से दूरी बनाना शुरू कर दिया।

नीतीश BJP में जेटली और सुशील मोदी से काम चलाते रहे। साल 2009 का समय था। भाजपा के PM पद के उम्मीदवार थे आडवाणी। भाजपा ने शक्तिप्रदर्शन के लिए लुधियाना में संयुक्त रैली रखी और नीतीश को बुलाया। नीतीश ने आने में अनिच्छा ज़ाहिर की क्योंकि उन्हें मालूम था वहाँ मोदी आएँगे।

जेटली ने उन्हें कहा कि ये आडवाणी का कार्यक्रम है इसलिए उनका होना ज़रूरी है। नीतीश के आडवाणी से अच्छे सम्बन्ध थे। इसलिए वहां जाने के लिए राज़ी हो गए। लेकिन मोदी बड़े राजनीतिक खिलाड़ी हैं। नीतीश के मंच पर पहुंचते ही वे अभिवादन करने के लिए पहुँच गए और नीतीश का हाथ पकड़ लिया।

ये ऐसा सीन था जिसे TV और अख़बारों की हेडलाइनों ने लपक लिया। नीतीश इसपर लाल-पीले हो गए। उन्होंने मोदी के हाथ पकड़ने की घटना को खुद के साथ विश्वासघात कहा। राजदीप की किताब के अनुसार नीतीश ने बाद में जेटली से कहा, ‘आपने अपना वायदा नहीं निभाया। साल 2010 में पटना में, BJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक थी। पूरे पटना में मोदी के बड़े-बडे़ पोस्टर लगाए गए। जिसमें कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए मोदी के योगदान का आभार व्यक्त किया गया था। दरअसल गुजरात सरकार ने बाढ़ पीडितों के लिए 5 करोड़ रुपए दिए थे।

नीतीश ने पटना में आए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को अपने यहां डिनर पर बुलाया हुआ था। नीतीश ने जब समाचार पत्रों में मोदी के दान वाले विज्ञापन देखे तो ग़ुस्सा हो गए। उन्होंने डिनर कार्यक्रम तक रद्द कर दिया। और बाद में दान के पैसे लेने से भी इंकार कर दिया।

इस बात पर मोदी भी गुस्सा हो गए। राजदीप की किताब के अनुसार मोदी ने BJP अध्यक्ष गडकरी से कहा, ‘आप नीतीश को मेरे साथ ऐसा आचरण की अनुमति कैसे दे रहे हैं?’ नीतीश की आत्मकथा लिखने वाले संकर्षण के अनुसार, ‘यह वह दिन था जब नीतीश-मोदी की लड़ाई ने व्यक्तिगत स्तर पर एक भद्दी शक्ल ले ली“।

राजदीप सरदेसाई की किताब के अनुसार- 2010 की घटना पर नीतीश ने अपने एक सहयोगी से कहा ‘हम उनके (मोदी-भाजपा) बगैर भी चल सकते हैं।’

2010 के बाद भाजपा में मोदी का क़द बढ़ने लगा। 2013 तक वे भाजपा के निर्विवादित शीर्ष नेता बन गए। 2013 में नीतीश ने भी BJP गठबंधन से रिश्ता तोड़ लिया।

एक वक्त था, जब सार्वजनिक मंच पर मोदी के गले मिलने पर नीतीश लाल-पीले हो गए और एक वक्त अब है, जब वो ही नीतीश तीर-कमान की तरह मोदी के पैरों में लटक रहे हैं। वे एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं लेकिन आचरण उस राज्यपाल की तरह कर रहे हैं जिसका कार्यकाल PM की दया पर आश्रित होता है।

बाप के हत्यारा को मिल रहा था सरकारी संरक्षण,आहत होकर बेटा ने किया आत्महत्या

मोतिहारी -चर्चित RTI कार्यकर्ता के पुत्र ने की आत्महत्या, न्याय और एसपी के नही मिलने से क्षुब्ध होकर किरोसिन तेल छिड़क लगाई आग, हाई टेंशन तार पर कूद झुलसा

मोतिहारी में अपने पिता आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की हत्या से सदमे में चल रहे पुत्र रोहित कुमार (14 वर्ष) ने आत्महत्या कर जीवनलीला समाप्त कर ली। मोतिहारी के ही एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। रोहित पुलिस की कार्रवाई से नाखुश चल थाम। उसके दादा विजय अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार की सुबह वह एसपी से मिलकर न्याय की गुहार लगाने गया था। उसने बकायदा फोन कर उनसे अनुमति भी ली थी।

लेकिन उससे एसपी नहीं मिलकर अधीनस्थ कर्मी को भेजे। जबकि वह एसपी से ही मिलने की गुहार लगाता रहा। लेकिन काफी जद्दोजहद के बाद भी संतोषजनक जवाब नही मिला। इस कारण सदमे में आकर रोहित ने घर लौटकर आत्महत्या का प्रयास किया। घर के सामने एक तीन मंजिले निजी नर्सिंग होम के छत पर पहले उसने प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए फिर केरोसिन छिड़ककर शरीर मे आग लगाई। और छत से कूदकर बिजली प्रवाहित हाई टेंशन तार पर गिरकर आत्महत्या का प्रयास किया। इसमें वह बुरी तरह झुलस गया।

घटना के तत्काल बाद परिजनों ने आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल के सबसे बड़े पुत्र रोहित को मोतिहारी नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां देर रात रोहित की इलाज के दौरान मौत हो गयी। पहले पति को खोने व अब न्याय के लिए पुत्र को खोने के कारण आरटीआई कार्यकर्ता की पत्नी का रो रो कर बुरा हाल है। बता दें कि हरसिद्धि बाजार निवासी आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की हत्या दबंगों ने इसलिए करवा दी थी कि वे सरकारी जमीन से कब्जा हटाने को लेकर पटना उच्च न्यायालय में आधे दर्जन अतिक्रमणवाद के जनहित मुकदमे लड़ रहे थे।

बीते वर्ष 24 सितंबर को प्रखंड कार्यालय से बाहर निकलने के दौरान विपिन की हत्या गोलियों से भूनकर कर दी गई थी। पुलिस ने घटना में शामिल सुपारी किलर सहित कई को गिरफ्तार कर न्याययिक हिरासत में भेज दिया। वही हत्या में दबंगों व एक राजनेता का नाम सुर्खियों में आया था। जिसपर करवाई नही होने को लेकर दो बार आरटीआई कार्यकर्ता के परिजन सड़क जाम कर व आत्महत्या का प्रयास कर चुके थे। वहीं लोगों में चर्चा है कि जिस सरकारी जमीन पर कब्जा हटाने को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या की गई। उस पर से प्रशासन आजतक अतिक्रमण नहीं हटा सका।

आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल के पिता विजय अग्रवाल ने वीडियो जारी कर बताया कि रोहित गुरुवार को एसपी से मिलने के लिये सुबह में ही एसपी कार्यालय पहुंचा था,जहां एसपी के नही मिलने पर कार्यालय कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। जिसके बाद एसपी रोहित से मिले,लेकिन एसपी की ओर से रोहित को संतोषजनक जबाब नही मिला।

आरटीआई कार्यकर्ता दिवंगत बिपिन अग्रवाल के पिता और आत्महत्या का प्रयास करने वाले रोहित के दादा विजय अग्रवाल ने बताया कि एसपी ने अरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास करने का आश्वासन दिया जबकि हत्या के पांच महीने गुजरने पर हत्या की साजिश करने वालो को गिरफ्तार करने की मांग पर रोहित अड़ा रहा।

इसी कारण नाराज और सदमे में चल रहे रोहित ने फोन कर 15 मिनट में पुलिस कार्रवाई करने नही करने या अस्वाशन नही देने पर आत्महत्या की धमकी दिया था,लेकिन पुलिस की कार्रवाई 15 मिनट में पूरा नही होने पर रोहित ने शरीर मे आग लगा कर नर्सिंग होम के तीन मंजिले छत से कूद पड़ा है। छत से कूदने के पहले रोहित ने प्रशासन के खिलाफ नारे भी लगाया। दादा विजय अग्रवाल ने बताया कि हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नही होने और एसपी के नही मिलनेसे क्षुब्ध रोहित ने यह आत्मघाती कदम उठाया है।

मालूम हो कि 24 सितंबर 2022 को हरसिद्धि प्रखंड कार्यालय से निकलते समय दिनदहाड़े दिन के करीब 12 बजे मिटरसायकिल पर सवार अपराधियो ने गोलियों से भूनकर आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल की हत्या कर दिया था। बताया जाता है कि हत्या के पीछे हरसिद्धि बाजार के करोड़ो रूपये की व्यवसायी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। जिसपर कई बहुमंजिले इमारत और व्यवसायिक प्रतिष्ठान स्थापित है।

सूचना के अधिकार कानून के सहारे इसी कुकृत्य का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल ने किया था,जिसके बाद से ही वह सफेदपोश,माफिया और व्यवसायियों के आखो का किरकिरी बना था। इन्ही कारणों से बिपिन अग्रवाल की हत्या कर दिया गया। हत्या के बाद परिजन न्याय की मांग को लेकर कई बार हरसिद्धि में अरेराज बेतिया सड़क को जाम कर धरना दिया था। पुलिस ने हत्या में शामिल कई अपराधियो को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

लेकिन परिजन हत्या के पीछे के सफेदपोश,माफिया और व्यवसायियों के गठजोड़ का खुलासा करने और इनकी गिरफ्तारी की मांग पर अड़े है। इन्ही मांगो को लेकर आज रोहित एसपी से मिलने आया था। लेकिन मांगी को पूरा नही होने से सदमे में रोहित ने आत्मघाती कदम उठाया है। और आज उसकी मौत हो गयी ।

बिहार मंत्रिमंडल में बदलाव के संकेत, बीजेपी कोटे के कई मंत्री का कट सकता है पत्ता

बिहार की राजनीतिक गलियारों में चर्चा सरेआम है कि बिहार विधानसभा सत्र के समापन के साथ ही बिहार की राजनीति में बवंडर आना तय है हाल ही में केन्द्रीयमंत्री नित्यानंद राय और नीतीश कुमार की मुलाकात उसी बवंडर को थोड़े समय तक टालने की कवायत मानी जा रही है। हालांकि यूपी में मिली जीत से बीजेपी काफी उत्साहित है लेकिन बीजेपी इस बात को लेकर चिंतित है कि बिहार सरकार के एक वर्ष पूरे होने के बावजूद बीजेपी का कोई भी मंत्री उस तरह का प्रभाव नहीं छोड़ पाया है जिसके सहारे बिहार की राजनीति को साधा जा सके।

ऐसे में सत्र के बाद बिहार मंत्रीमंडल में बीजेपी कोटे के मंत्री में बड़ा बदलाव हो सकता है जिसमें उप मुख्यमंत्री सहित कई मंत्रियों का हटना तय माना जा रहा है ।वही नीतीश कुमार ने मंत्रीमंडल में बदलाव का प्रस्ताव लेकर आये केन्द्रीयमंत्री नित्यानंद राय को दो टूक कह दिया है कि साथ सरकार चलानी है तो बिहार विधानसभा के अध्यक्ष को भी हटाये ,ऐसी खबरें आ रही है कि अध्यक्ष को मंत्रीमंडल में शामिल करने पर विचार चल रही है।

आज दिल्ली में बिहार बीजेपी के सांसदों से पीएम की मुलाकात इसी की एक कड़ी मानी जा रही है क्यों कि बिहार को लेकर ऐसी खबरे आनी शुरु हो गयी है कि नीतीश कुमार बीजेपी और खास करके अमित शाह के कार्यशैली से नराज चल रहे हैं और वो साथ छोड़ने को लेकर सही समय का इन्तजार कर रहे हैं ऐसे में नीतीश कुमार का विकल्प क्या हो सकता है इस पर भी राय-मशविरा हुआ है वैसे बोचहा विधानसभा उप चुनाव में भाजपा सांसद का चिराग पासवान से मिलना इसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा रहा है ।

इस बीच यूपी में मुलायम के परिवार की वापसी नहीं होने पर तेजस्वी नीतीश कुमार को लेकर पहले से मुलायम हुए हैं और शरद पवार और के0 चंद्रशेखर राव द्वारा विपक्षी एकता को लेकर जो कवायत शुरु की गयी है उसमें ममता बनर्जी के शामिल होने की खबर आ रही है।

इसी को देखते हुए राजद राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की सियासी खेल को संभालने के लिए शरद यादव की पार्टी का राजद में विलय करया है ताकि दिल्ली की राजनीति को साधा जा सके और इसके लिए राजद अपने कोटे से शरद यादव को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया है।

इस बीच खबर ये भी आ रही है कि विपक्षी एकता अगर शक्ल लेती है तो नीतीश कुमार चाहेंगे की बिहार में मध्यावधि चुनाव हो और वो भी गुजरात के साथ हो। जदयू जिस तरीके से पंचायत स्तर तक पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिश में लगी है उसको मध्यावधि चुनाव से ही जोड़ कर देखा जा रहा है ।वैसे राष्ट्रपति चुनाव आते आते बहुत कुछ स्पष्ट हो जायेगा ये साफ दिखने लगा है ।

क्यों कि नीतीश कुमार पर जिस तरीके से बीजेपी लगातार दबाव बना रही है ऐसे में बहुत मुश्किल हो रहा है नीतीश कुमार को सरकार चलाना जानकारी यह भी है कि फिल्म कश्मीर फाइल्स को बिहार में टैक्स फ्री होने कि जानकारी उन्हें मीडिया से मिली थी ।

इसी तरह विधानसभा में वंदे मातरम को शामिल करना, फिर जुम्मा की नमाज को लेकर विधानसभा में बेवजह तूल देना ,वही बिहार विधानसभा में बन रहे शताब्दी स्तंभ से अशोक स्तंभ का हटाया जाना जैसे कई मुद्दे हैं जिसको लेकर नीतीश असहज महसूस कर रहे हैं ऐसे में बिहार विधानसभा अध्यक्ष के कार्यशैली को लेकर नीतीश कुमार को सदन में आकर प्रतिकार करना पड़ा उससे नीतीश काफी आहत है ऐसे कई मुद्दे हैं जिसको लेकर नीतीश सहज नहीं है ।

बिहार आज भी देश के आखिरी पंक्ति में खड़ा है

आज बिहार दिवस है और आज ही के दिन 22 मार्च 1912 को बिहार बंगाल से अलग हुआ था कहने को तो आज का दिन बिहार के लिए हर्ष का दिन है लेकिन सवाल यह भी है कि 1912 में बिहार जहां खड़ा था आज बिहार कहां खड़ा है ।

बिहार जब बंगाल से अलग हुआ तो 1917 ई. में पटना विश्वविद्यालय की स्थापना हुई यह भारतीय उपमहाद्वीप का सातवाँ सबसे पुराना स्वतंत्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया था और स्थापना के 25 वर्ष में यह विश्वविद्यालय ‘ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट कहलाने लगा था।

पटना में 1925 में पीएमसीएच की स्थापना हुई और स्थापना के साथ ही इसकी पहचान देश और दुनिया के सबसे अच्छे मेडिकल कॉलेज में होने लगा था।

1947 में बिहार जीडीपी में देश में नम्बर वन पर था आजादी के तुरंत बाद बिहार की अभिशाप माने जाने वाली कोसी नदी के बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए 1958 में बराज बनाया है वही सिंचाई के लिए भीम नगर में बराज बनाया गया और उससे गंडक नहर निकाला गया उसी तरीके से कोसी से कोसी नहर निकाला गया ।

कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए 1903 में पूसा में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी थी आजादी के बाद बरौनी का विकास औधोगिक नगरी के रूप से हुआ लेकिन आज बिहार कहां खड़ा है बिहार का दस में दो व्यक्ति देहारी मजदूरी और छोटे छोटे रोजगार के लिए बिहार से बाहर है ।

बिहार का 90 फीसदी छात्र जो बेहतर कर रहा है वो बिहार से बाहर पढ़ रहा है बिहार की स्कूली शिक्षा और कॉलेज का हाल झारखंड से भी बूरा है ।

बिहार बोर्ड के पिछले 10 वर्षो के टांपर का हाल यह है कि कहीं किसी गांव में परचून का दुकान खोल कर रोजी रोटी कमा रहा है ।

आजादी के समय जो गिना चुना शहर था पटना को छोड़ दे तो किसी भी शहर में बेसिक सुविधा भी नहीं है ।शहरीकरण के क्षेत्र में बिहार देश का सबसे पिछड़ा हुआ राज्य है यही स्थिति रोजगार सृजन और शिक्षा ,स्वास्थ्य का है छोटी सी भी बीमारी हुआ तो दिल्ली जाना ही है। पटना में कुछ बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था जरुर है लेकिन वो भी राष्ट्रीय स्तर के मानक पर खड़ा नहीं उतर रहा है ।

मतलब 1947 में बिहार जहां खड़ा था वहां भी आज बिहार खड़ा नहीं है पिछले 15 वर्षो में बिहार में बहुत कुछ हुआ है गांव गांव में बिजली और सड़क पहुंच गयी है लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य उतना ही दूर हो गया है ।नवीन पटनायक 2000 में ओडिशा के मुख्यमंत्री बने थे उस समय ओडिशा की स्थिति बिहार से भी बूरी थी नीतीश 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने आपदा के मामले में बिहार और ओडिशा लगभग एक जैसा ही राज्य है लेकिन ओडिशा कहां पहुंच गया और बिहार कहां है ।

देश स्तर पर आज भी बिहार वहीं खड़ा है जहां 15 वर्ष पहले खड़ा था, बिहार दिवस के मौके पर हर बिहारी को सोचना चाहिए कि बिहार के आने वाले पीढ़ी के लिए हम लोग क्या छोड़ कर जा रहे हैं वही बिहारी शब्द जिसे गाली के रुप में इस्तेमाल किया जाता है या फिर एक ऐसा बिहार जहां का होना गर्व कहलाये ।

1–बिहार के शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है
सोचिए आज बिहार और बिहारी कहां खड़ा है हमारे हाथ से एक साजिश के तहत शिक्षा छीनी जा रही है एक आसरा था दिल्ली वो भी हाथ से निकल चुका है जेएनयू जहां बिहार का गांव बसता था जहां से बिहारी बच्चे नई उड़ान,भरते थे उस घोंसला को ही उजाड़ दिया गया।

दिल्ली विश्वविद्यालय में सीट कम हो गया आईआईटी और जेई की परीक्षा का स्तर इतना हाई हो गया है वहां बिहार की शिक्षा व्यवस्था दूर दूर तक खड़े नहीं उतर रहा है ।इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की जरूरत है और बिहार से बाहर जो बिहारी हैं इस विषय पर सोचे ।

हालात यह है कि बिहार के पास अब अच्छे शिक्षक भी नहीं है आज पूरे देश में दरभंगा जैसे छोटे से कस्बे से निकल कर फिजिक्स के छात्रों को ‘धर्मग्रंथ’ देने वाला एचसी वर्मा जैसे विद्वान से बात करने कि जरूरत है कि यह कैसे सम्भव है शिक्षा ही एक ऐसा क्षेत्र हैं जहां आज भी बिहारी का जोड़ नहीं है ये बिहारियों के डीएनए में है इसलिए इसे बेहतर करने पर सोचने कि जरुरत है ।

2–कृषि के क्षेत्र में काम करने की जरूरत है

आज बिहारी अपने दम पर अंडा और मछली के क्षेत्र में बड़े बड़े खिलाड़ी को चुनौती दे रहा है ,पांच वर्ष पहले तक जहां गांव गांव के हाट पर आंध्र की मछली मिलती थी, लेकिन आज स्थिति बदल गयी है बिहार की मछली एक बार फिर बिहार से बाहर जाने लगी है।

इसी तरह अंडा जहां आंध्र और पंजाब का एक छत्र राज्य था आज बिहार उसे चुनौती दे रहा है ।दूध के क्षेत्र में तो देश स्तर पर बिहार अमूल को चुनौती देने लगा है।

इसी तरह का काम सब्जी के क्षेत्र में करने की जरूरत है आज उपज का 90 प्रतिशत हिस्सा औने पौने दाम में बेचने को किसान मजबूर है । मक्का ,आलू और लीची के क्षेत्र में देश के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में बिहार एक है लेकिन पॉपकॉर्न बनाने के लिए बिहार का मक्का मुंबई जाता है जहां 20 रुपये किलों का मक्का किस भाव में लेते हैं आपसे बेहतर कौन जानता है।

ऐसा ही हाल आलू का है जिसके उत्पादक किसान हर दूसरे वर्ष आलू सड़क पर फेंकने को मजबूर होता है । गेहूं और चावल के क्षेत्र में भी एक खास तरह का ब्रांड बिहार पैदा करता है लेकिन उसका लाभ दूसरा राज्य उठाता है ।

कृषि ही एक ऐसा क्षेत्र हां जहां रोजगार और किसान के समृद्धि का एक नया दौर लाया जा सकता है जबसे बिहार का किसान कमजोर हुआ है बिहारी डीएनए जो पहचान रही है वो गांव से बाहर निकल ही नहीं पा रहा है जो निकल रहा है वो कही रेरी लगा रहा है या फिर नाइट गार्ड का काम कर रहा है ।

3—पर्यटन और कला संस्कृति के क्षेत्र में काम करने की जरूरत है
कृषि योग्य भूमि की तरह ऊपर वालों ने बिहार को पर्यटन और कला संस्कृति के क्षेत्र में बहुत कुछ दिया है जिसकी बेहतर मार्केटिंग करके बिहार के जीडीपी को ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है ।

क्या नहीं है बिहार में सभी धर्म का आस्था का केन्द्र बिहार है कला और संस्कृति की ही बात करे तो बहुत कुछ है जिसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग की जा सकती है ।

लेकिन इन सब के लिए हम सभी बिहारियोंं को जाति और धर्म के नाम पर जारी सियासत से बाहर हम सब बिहारी है इस नारे के साथ आगे बढ़ना पड़ेगा ।तभी बदलाव सम्भव है लेकिन बिहारी आगे ना बढ़ जाये इसका खतरा पूरे देश के नेता को है इसलिए हमे उलझा कर रखता है इसे भी समझने की जरूरत है ।

पटना हाईकोर्ट ने सीनियर सेकेंडरी एलिजिबिलिटी टेस्ट में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा गलत उत्तर का विकल्प के रूप में देने के मामलें में सुनवाई की

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने नितिन कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को दिया।

कोर्ट ने बिहार परीक्षा समिति को स्पष्ट कर दिया कि सीनियर सेकेंडरी शिक्षक की कोई भी अंतरिम नियुक्ति इस मामलें में कोर्ट के निर्णय पर निर्भर करेगा।

Biharnews

उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रश्न संख्या 4,50,59,85,89 के उत्तरों के विकल्प गलत दिया गया था।ये परीक्षा कंप्यूटर साइंस से सम्बंधित था।

याचिककर्ता की अधिवक्ता रितिका रानी ने बताया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के समक्ष उम्मीद्वार ने 7 गलत विकल्प प्रस्तुत किया, लेकिन समिति ने इन गलतियों को अनदेखा कर दिया।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस प्रकार की गड़बडियां होने के कारण बहुत उम्मीद्वारों का भविष्य खतरे में पड गया है।कंप्यूटर साइंस में 1673 पदों पर नियुक्ति होनी हैं।इस मामलें पर आगे सुनवाई की जाएगी।

बिहार दिवस आज पूरा बिहार डूबा बिहार दिवस के रंग में

जियो बिहार … बिहार जिंदाबाद @ 110
नए कैलेंडर और शासनिक प्रक्रिया के हिसाब से हमारा, हम सबका बिहार, 110 साल का हो गया।

वह बिहार, जिसका इतिहास कमोबेश मानव सभ्यता-संस्कृति का इतिहास है; जिसने दुनिया को लोकतंत्र की अवधारणा से वाकिफ कराया; जिसने चंद्रगुप्त-सम्राट अशोक-बुद्ध-महावीर- वाल्मिकी-चाणक्य-आर्यभट्ट-गुरू गोविंद सिंह महाराज जैसे महानतम शख्सियतों के आचार-सिद्धांतों से लेकर नालंदा- विक्रमशिला विश्वविद्यालय के जरिए दुनिया को ज्ञान दिया;

जिसने आजादी से पहले सात समंदर पार कई-कई देश गढ़े; जिसने मोहन दास करमचंद गांधी को महात्मा बनाया; जो जेपी की संपूर्ण क्रांति का स्थल है, जो आज की तारीख में महिला सशक्तीकरण व ऐसे कई बड़े बुनियादी मसलों पर देश-दुनिया को रास्ता दिखा रहा है; जो लोकसेवाओं के बड़े पदधारकों की ‘फैक्ट्री’ कहलाता है;

जो दुबई में बुर्ज खलीफा व लद्दाख की सड़क बनाता है, दिल्ली में ऑटो चलाता है, कोलकाता में ठेला खींचता है और दिल्ली के केंद्रीय मंत्रालय में बैठकर देश चलाने की नीतियां भी बनाता है; और जो अपनी इन्हीं चौतरफा मौजूदगी को इकट्ठे भाव में विशेषकर छठ के पावन मौके पर गर्व के भाव में परोसने की हैसियत पाता है कि ‘मैं सूर्य हूं, सूर्य मुझमें हैं।’

(बहरहाल, सबको बिहार दिवस की बहुत बधाई, शुभकामनाएं).।

लेखक–मधुरेश सिंह

भागलपुर में मौत का आकड़ा 17 तक पहुँचा

शमशान घाट में लगता जा रहा लाशों का अंबार, जहरीली शराब ने कितनों की ले ली आंखों की रौशनी तो कितनों की गई जान, कई मोहल्लों में छाया मातम। शासन अलर्ट मोड में, कहां – बॉर्डर पर रहेगी नाकेबंदी, शराब तस्कर पर नकेल कसने के लिए प्रशासन पूर्णरूपेण है तैयार।

भागलपुर,होली के दौरान पिछले 48 घंटे में भागलपुर जिले के अलग-अलग जगहों में 17 लोगों की संदिग्ध हालत में मौत हो जाने से पूरा प्रशासनीक महकमा सवाल के घेरे में आ गई है । सवाल है आखिर बिहार में जहरीली शराब आ कैसे रही है।वही दुसरी ओर बांका में 12 और मधेपुरा में भी 3 लोगों की इसी तरह जान चली गई। सबों के मौत का सिस्टम एक ही, पहले पेट दर्द फिर उल्टी होना उसके बाद सांस लेने में परेशानी और सिर चकराने लगना उसके बाद मौत। कई परिजनों ने शराब पीने की बात भी बताई।

कोविड के दो साल बाद होली का रंग चढ़ा ही था की पूरे सूबे को फिर से किसी की नजर लग गई। उसका दाग भागलपुर के अलावे कई शहरों को दागदार बना दिया। एक साथ कई लोगों की संदिग्घ मौत प्रशासन के सिस्टम पर सीधे सवाल खड़ा कर रही है। पूरे सूबे में सरेआम चर्चा है कि जहरीली शराब के पीने से ही मौत हो रही है। फिलहाल जांच किया जा रहा है। डीएम सुब्रत सेन और एसएसपी बाबू राम पूरी घटना के बाद अलर्ट हैं। लेकिन एक बात है कि शराब पीने वाला शराब ही नहीं पीता, माँ की खुशी, पत्नी का सुकून, बच्चों के सपने और पिता की प्रतिष्ठा भी पी जाता है। भागलपुर के बरारी शमशान घाट पर जलती लाश जो बयां कर रहा है, वह कोविड काल की याद दिला रहा है।

अब सवाल यह उठता है कि जब पूरे बिहार में शराबबंदी है तो फिर बिहार के हर जिले में शराब आता कहां से है? पूरे बिहार में शराबबंदी के बाबजूद है लोग शराब पीते क्यों हैं?

बिस्मिल्लाह खान की जंयती आज

बिस्मिल्लाह खान जीवन भर तीन चीज़ों को अपने सीने से चिपटाए रहे – गंगा, बनारस और उनके जनम का स्थान बिहार का डुमरांव क़स्बा. कोई कहता कि खां साब चलिए आपके लिए अमेरिका में म्यूजिक स्कूल खोल देते हैं, कोई कहता दिल्ली-बंबई में चल कर रहा जाय, कुछ माल बनाया जाय. वे बालसुलभ भोलेपन में अगले की आँखों में आँखें डाल कर कहते, “”अमाँ यार! गंगा से अलग रहने को तो न कहो!”

शहनाई उनके होंठो से लगते ही आसपास की हवा को प्रेम और करुणा से सराबोर कर देती थी. वह उनकी आत्मा की पाक ज़ुबान थी जिसका होना आसपास के कंकड़-पत्थरों तक की स्मृतियों में दर्ज हो जाता होगा. उस दैवीय स्वर को गंगा किनारे की उस मस्जिद के किसी कंगूरे की नन्ही ढलान में अब भी ढूँढा जा सकता है जहाँ वे हर रोज गंगास्नान के बाद नमाज पढ़ते थे. उसकी लरज़ को बालाजी मंदिर के फर्श के उन चकले पत्थरों की खुरदरी छुअन में महसूस जा सकता है जिन पर बैठकर उन्होंने पचास से भी ज्यादा सालों तक रियाज़ किया.

दोनों इस कदर आपस में घुल गए थे कि ठीक-ठीक कह सकना मुश्किल होगा कि शहनाई बिस्मिलाह थी या बिस्मिलाह शहनाई थे.

और राग की तपस्या ऐसी कि जो उस जुगलबंदी की गिरफ्त में आया फिर जीवनभर मुक्त न हो सका. पत्रकार जावेद नकवी के हवाले से एक वाकया पता लगता है. सन 1978 में दिल्ली में एक ओपन एयर थियेटर में प्रोग्राम चल रहा था. अचानक लाइट चली गई. बेखबर खान साहब तन्मय होकर बजाते रहे. आयोजकों में से किसी एक ने कहीं से एक लालटेन लाकर उनके सामने धर दी. अगले एक घंटे तक वे उसी की झपझपाती रोशनी में शहनाई बजाते रहे. ऑडिएंस खामोशी से सुनती रही. बजाना ख़त्म हुआ, उस्ताद ने आखें खोलीं. बोले – “लाइट तो जला लिए होते भाई!”

बिस्मिलाह खान का चेहरा भारतीय क्लासिकल संगीत का सबसे मुलायम, सबसे निश्छल चेहरा था. चौड़ी मोहरी वाला सफ़ेद पाजामा, गोल गले वाला सफ़ेद कुरता जिसकी जगह गर्मियों में जेब वाली बंडी ले लिया करती, सफ़ेद नेहरू टोपी और मुंह में बीड़ी. बनारस की गलियों में रिक्शे पर यूं सफ़र करते थे गोया रोल्स रॉयस में घूम रहे हों. उनकी सादगी और साफगोई के बेशुमार किस्से सुनने-पढ़ने को मिलते हैं.

जीते जी वैश्विक धरोहर बन गए इस उस्ताद संगीतकार की मौत के कुछ साल बाद यूं हुआ कि उन्हें भारत सरकार द्वारा दिए गए पद्मश्री प्रमाणपत्र को दीमक खा गयी. इसके कुछ साल बाद उनके घर में चोरी हुई. एक कमरे की दराज़ से पांच शहनाइयां चोरी हुईं जिनमें से तीन चांदी की थीं. एक साल बाद पुलिस ने चांदी वाली शहनाइयों को बनारस के एक सुनार के पास से गली-अधगली हालत में हासिल किया. उस्ताद के एक पोते नज़रे हसन ने कुल सत्रह हज़ार रुपये में उन्हें बेच डाला था. स्पेशल टास्क फ़ोर्स द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद अपना जुर्म कबूल करते हुए उसने कहा, “मुझे बाजार में उधार चुकाना था.”

आज उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जन्मदिन पड़ता है. देश-समाज-परम्परा वगैरह बहुत बड़ी बातें हैं. आदमी बनने का थोड़ा-बहुत शऊर सीखना हो तो यूट्यूब वगैरह पर पांच-सात मिनट उनकी बजाई शहनाई सुन लीजिए.

शरद यादव अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का विलय राजद में किया।

Bihar Breaking News : दिल्ली । औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जनता दल में लोकतांत्रिक जनता दल का विलय हो गया। शरद यादव अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का विलय राजद में किया।

शरद यादव जदयू से अलग होकर 2018 में अपनी पार्टी का गठन किया था।

लेकिन 2019 में लोकसभा चुनाव राजद के साथ महागठबंधन में शरद यादव की पार्टी ने लड़ी थी।

इन दिनों शरद यादव बीमार चल रहे हैं।

आज रजधानी दिल्ली में नेताप्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में शरद यादव अपनी पार्टी का विलय राजद में किया।

दिल्ली में नेताप्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, राजद सांसद एडी सिंह, राजद सांसद मीसा भारती, राजद सांसद मनोज झा, राजद नेता श्याम रजक, राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, राजद नेता जय प्रकाश नारायण यादव और राजद नेता शिवानन्द तिवारी मौजूद रहे।

मुजफ्फपुर बालिका गृह मामले से जुड़ी फिल्म बन कर तैयार जल्द होगा रिलीज

मई 2019 में मुंबई से पुलकित मुझसे मिलने पटना आये हुए थे ये बिहार से ही हैं और सुभाष चंद्र बोस और साल 2017 में आई फिल्म ‘मरून’ का ये डायरेकटर कर चुके हैं और मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले से जुड़ी फिल्म बनाने के बारे में मुझसे बातचीत करने आये थे।

इन्होंने कहा कि फिल्म पूरी तौर पर आपके चरित्र पर ही आधारित है और आपकी भूमिका में शाहरुख खान होगे मैं हैरान हो गया पत्रकार फिल्म का मुख्य किरदार मुझे समझ में नहीं आ रहा था, फिर इनसे लम्बी बातचीत हुई और कहां कि इस कांड से जुड़े सभी चरित्र का हम लोगों की टीम ने अध्ययन किया है आप ना होते तो यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाता इसलिए यह फिल्म पूरी तौर पर आप पर ही आधारित है ।

हम लोगों की टीम आपके कार्यों से जुड़े सारे तथ्यों का संकलन कर लिया है और अब मैं आपसे बस सहमति लेने आये हैं।तीन दिनों तक मुजफ्फरपुर बालिका गृह से जुड़े मामले में मैंने किस तरीके से स्टोरी चलना शुरू किया फिर इस दौरान किन किन परेशानियों का सामना करना पड़ा इस विषय पर लम्बी बातचीत हुई। झारखंड विधानसभा चुनाव में टाटा थे उसी दौरान मुझे मुंबई से फोन आया संतोष जी आप कितनी जल्दी मुबंई आ सकते हैं फिल्म को लेकर कुछ औपचारिकता है आपका आना जरुरी है।

21 दिसंबर 2019 को मुंबई पहुंचे वहां शाहरुख खान की कंपनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट (Red Chillies Entertainment)कंपनी से जुड़े लोगों से मुलाकात हुई और फिर मुजफ्फरपुर बालिका गृह से जुड़े पत्रकारिता को लेकर काफी सवाल जवाब हुआ और उसके बाद फिल्म बनाने को लेकर मुझसे सहमति ली गयी।

लेकिन कोरोना के कारण फिल्म बनना शुरू नहीं हुआ फरवरी 2022 में पुलकित जी का फोन आया संतोष जी फिल्म की शूटिंग शुरू हो गयी है शाहरुख खान जी का मसला पता ही होगा और कोरोना फिर कब वापस आ जाए कहना मुश्किल है इसलिए फिल्म में आपका किरदार भूमि पेडनेकर निभाएंगी फिल्म में संजय मिश्रा जी भी है ।

मैं निराश हो गया कहां शाहरुख खान और अब कोई लड़की पत्रकार बन रही है खैर भूमि पेडनेकर का नाम मैं सूना नहीं था अपनी बेटी से पूछे टिया ये भूमि पेडनेकर कौन हीरोइन है वो बोली आप ही की तो चहेती है टॉइलेट – एक प्रेम कथा वाली इतना सुनते ही मैं उछल पड़ा चलो मजा आयेगा मेरी ही तरह वो भी जिद्दी है।

आज पुलकित जी का फोन आया संतोष जी मुंबई आने के लिए तैयार रहिए फिल्म की शूटिंग पूरी हो गयी है एडिटिंग चल रहा है और इसी वर्ष फिल्म रिलीज होगा ।

पुलकित जी ने मुझसे कहां था कि जब तक फिल्म की शूटिंग नहीं हो जाती है तब तक आप इसको पब्लिक नहीं करेंगे, आज वो दिन आ गया है जब इस खबर को सार्वजनिक करते हुए मुझे गर्व महसूस हो रहा है।

फिल्म का नाम है भक्षक और यह फिल्म पूरी तौर पर मेरी भूमिका पर केन्द्रित है तो फिर इन्तजार करिए एक तरफ द कश्मीर फाइल्स है तो दूसरी तरफ भक्षक हिंदुस्तान का दो चेहरा एक चेहरा जो नफरत पैदा करा है तो दूसरा सिस्टम के उस घिनौने सच को उजागर कर रहा है जिसके पीछे पूरा तंत्र खड़ा है।