Press "Enter" to skip to content

Posts published in “पश्चिम बंगाल”

राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार की 5 समेत 37 सीटों पर महासंग्राम, 16 मार्च को मतदान—सत्ता और विपक्ष के लिए निर्णायक परीक्षा

Rajya Sabha Elections 2026: देश की संसदीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India ने राज्यसभा की 37 रिक्त हो रही सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस सूची में बिहार की 5 अहम सीटें शामिल हैं, जिन पर सियासी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। इन सीटों पर होने वाला चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसद के ऊपरी सदन में आने वाले वर्षों के राजनीतिक समीकरण तय करने वाला निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

अप्रैल 2026 में कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों का चयन न केवल राज्यों की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डालेगा। खासकर बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह चुनाव गठबंधन राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

चुनाव कार्यक्रम: 26 फरवरी से 20 मार्च तक पूरी प्रक्रिया

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 से शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 मार्च तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे।

16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही शाम 5 बजे से मतगणना शुरू कर दी जाएगी। पूरी चुनावी प्रक्रिया 20 मार्च तक संपन्न कर ली जाएगी और इसके बाद नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।

यह समयसीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल की शुरुआत में कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि नई सूची समय रहते जारी हो जाए ताकि संसद के ऊपरी सदन की कार्यवाही प्रभावित न हो।

किन-किन राज्यों में होगा मतदान?

इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें प्रमुख राज्यों की सीटों का विवरण इस प्रकार है:

  • महाराष्ट्र – 7 सीटें
  • तमिलनाडु – 6 सीटें
  • पश्चिम बंगाल – 5 सीटें
  • बिहार – 5 सीटें
  • ओडिशा – 3 सीटें
  • असम – 3 सीटें
  • छत्तीसगढ़ – 2 सीटें
  • हरियाणा – 1 सीट
  • हिमाचल प्रदेश – 1 सीट
  • तेलंगाना – 4 सीटें

महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियों में हाल के वर्षों में हुए बदलाव के कारण यह चुनाव और भी रोचक हो गया है।

बिहार की 5 सीटें क्यों हैं सबसे अहम?

बिहार की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उन पर वर्तमान में वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधित्व है। इन नेताओं का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Harivansh Narayan Singh
  • Upendra Kushwaha
  • Ram Nath Thakur
  • Prem Chand Gupta
  • Amarendra Dhari Singh

इनमें हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति भी हैं। उनका दोबारा चयन होता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी होंगी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा और प्रेम चंद गुप्ता जैसे नेताओं की भूमिका बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रही है।

इन सीटों पर चुनाव का असर सीधे-सीधे बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी महागठबंधन के बीच शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।

महाराष्ट्र में भी दिग्गजों की परीक्षा

महाराष्ट्र की 7 सीटों पर भी चुनाव होने जा रहे हैं। यहां से राष्ट्रीय स्तर के दो बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है:

  • Sharad Pawar
  • Ramdas Athawale

शरद पवार भारतीय राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते हैं। यदि वे पुनः मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। वहीं रामदास अठावले केंद्र सरकार में मंत्री हैं, ऐसे में उनकी सीट भी एनडीए के लिए अहम है।

राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं?

राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। इनका चुनाव संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक करते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली से होता है।

मतलब साफ है—जिस दल या गठबंधन के पास विधानसभा में जितनी अधिक संख्या होगी, उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ऐसे में जहां विधानसभा में संख्या बल का अंतर कम है, वहां जोड़-तोड़, रणनीति और क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

बिहार में संभावित सियासी गणित

बिहार की राजनीति लंबे समय से गठबंधन आधारित रही है। यहां एनडीए और महागठबंधन के बीच सत्ता का संघर्ष चलता रहा है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक सीट के लिए आवश्यक वोटों का गणित बेहद अहम होता है।

यदि किसी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है तो उसे सहयोगी दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव न केवल राजनीतिक ताकत का परीक्षण है, बल्कि गठबंधन की मजबूती का भी पैमाना बनेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 5 सीटों में से कम से कम एक या दो सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

संसद में क्या बदल सकता है समीकरण?

राज्यसभा में बहुमत का गणित अक्सर लोकसभा से अलग होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होता है, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण उसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में क्षेत्रीय दलों का समर्थन लेना पड़ता है।

इन 37 सीटों के चुनाव के बाद राज्यसभा की संरचना में बदलाव संभव है। यदि किसी एक गठबंधन को अपेक्षा से अधिक सीटें मिलती हैं तो वह ऊपरी सदन में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

क्या पुराने चेहरों को मिलेगा दोबारा मौका?

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजनीतिक दल अपने मौजूदा सांसदों को दोबारा अवसर देंगे या नए चेहरों को आगे लाएंगे?

बिहार में सामाजिक और जातीय समीकरणों का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में दल यह देखेंगे कि किस समुदाय को प्रतिनिधित्व देना उनके लिए लाभकारी रहेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी क्षेत्रीय संतुलन और गठबंधन समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत की भूमिका

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों और तमिलनाडु की 6 सीटों पर भी सबकी नजर है। दक्षिण भारत के राज्यों में क्षेत्रीय दलों की मजबूत उपस्थिति के कारण राष्ट्रीय दलों को रणनीतिक गठजोड़ करना पड़ता है।

इन राज्यों के परिणाम संसद में विपक्ष की ताकत को भी प्रभावित कर सकते हैं।

क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मिनी जनादेश’?

राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से न होता हो, लेकिन यह राज्यों की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का प्रतिबिंब जरूर होता है। जिन राज्यों में हाल में सरकार बदली है या गठबंधन टूटे हैं, वहां यह चुनाव सत्ता की स्थिरता का संकेत देगा।

विशेषज्ञ इसे ‘मिनी जनादेश’ इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि इससे यह संकेत मिलेगा कि आने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में राजनीतिक रुझान किस दिशा में जा सकते हैं।

Amit Shah Bengal Visit: मायापुर इस्कॉन मुख्यालय में करेंगे पूजा-अर्चना, भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की 152वीं जयंती में शामिल होंगे गृह मंत्री

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah बुधवार को पश्चिम बंगाल के एक महत्वपूर्ण लेकिन गैर-राजनीतिक दौरे पर आ रहे हैं। इस बार उनका कार्यक्रम पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप का है। वह नदिया जिले के मायापुर स्थित विश्वप्रसिद्ध International Society for Krishna Consciousness (इस्कॉन) के वैश्विक मुख्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में शामिल होंगे। भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया है कि इस यात्रा में किसी भी प्रकार की राजनीतिक सभा, संगठनात्मक बैठक या चुनावी कार्यक्रम शामिल नहीं है।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य की राजनीतिक हलचल तेज है, लेकिन गृह मंत्री का यह कार्यक्रम आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर इस यात्रा को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

दोपहर 1:35 बजे कोलकाता आगमन, बीएसएफ हेलीकॉप्टर से मायापुर प्रस्थान

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अमित शाह दोपहर 1:35 बजे विशेष विमान से कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगे। वहां से वह सीधे बीएसएफ के हेलीकॉप्टर से नदिया जिले के मायापुर के लिए रवाना होंगे। दोपहर 2:25 बजे से शाम 4:25 बजे तक वह इस्कॉन मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे।

करीब दो घंटे के प्रवास के दौरान वह विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे, संतों से मुलाकात करेंगे और आध्यात्मिक नेता की जयंती पर आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वह पुनः हेलीकॉप्टर से कोलकाता एयरपोर्ट लौटेंगे और वहीं से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

मायापुर: इस्कॉन का वैश्विक मुख्यालय और आध्यात्मिक केंद्र

नदिया जिले का मायापुर विश्वभर में गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। यही International Society for Krishna Consciousness (इस्कॉन) का वैश्विक मुख्यालय है, जिसकी स्थापना A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada ने की थी। मायापुर में स्थित भव्य मंदिर परिसर न केवल भारत, बल्कि अमेरिका, यूरोप, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है।

अमित शाह का यह दौरा मायापुर के धार्मिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक रेखांकित करता है। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के कुछ वरिष्ठ नेताओं के भी उनके साथ मौजूद रहने की संभावना है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि सीमित ही है।

शंखभवन और पद्मभवन में विशेष बैठक

सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री सबसे पहले इस्कॉन परिसर स्थित शंखभवन जाएंगे, जहां संतों और वरिष्ठ धार्मिक पदाधिकारियों के साथ उनकी एक विशेष बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद वे पद्मभवन का दौरा करेंगे। इस दौरान संगठन की आध्यात्मिक गतिविधियों, सामाजिक सेवाओं और वैश्विक विस्तार को लेकर चर्चा हो सकती है।

इसके बाद अमित शाह Bhaktisiddhanta Sarasvati Thakur की 152वीं जयंती पर आयोजित मुख्य समारोह में शामिल होंगे। भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रमुख आचार्य थे और इस्कॉन की वैचारिक परंपरा के आधार स्तंभ माने जाते हैं।

स्वामी प्रभुपाद को पुष्पांजलि, मंदिरों में पूजा-अर्चना

मंदिर परिसर में गृह मंत्री A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके साथ ही वे भगवान नरसिंह, चैतन्य महाप्रभु और राधा-माधव के मंदिरों में जाकर विधिवत पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे।

यह कार्यक्रम धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस्कॉन के अनुयायियों के लिए यह अवसर विशेष उत्साह का विषय है, क्योंकि देश के गृह मंत्री स्वयं इस आयोजन में शामिल होकर आध्यात्मिक परंपरा के प्रति सम्मान प्रकट करेंगे।

पहले भी कर चुके हैं बंगाल का दौरा

गौरतलब है कि अमित शाह इससे पहले 31 जनवरी को पश्चिम बंगाल आए थे। उस दौरान उन्होंने उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर स्थित आनंदपुरी मैदान में सभा को संबोधित किया था और बाद में सिलीगुड़ी में कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लिया था। उस दौरे का स्वरूप पूरी तरह राजनीतिक था।

हालांकि इस बार उनके आधिकारिक कार्यक्रम में किसी राजनीतिक गतिविधि का उल्लेख नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह दौरा विशुद्ध रूप से धार्मिक कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है।

नदिया जिला प्रशासन और पुलिस हाई अलर्ट पर

गृह मंत्री के आगमन को देखते हुए नदिया जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और प्रवेश द्वारों पर कड़ी जांच की व्यवस्था की गई है।

राज्य पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड में हैं। वीआईपी मूवमेंट के मद्देनजर यातायात व्यवस्था में भी अस्थायी बदलाव किए जा सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने आम श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है।

ममता बनर्जी का बड़ा आरोप: ‘AI के जरिए 58 लाख वोटरों के नाम काटे’, चुनाव आयोग को बताया ‘टॉर्चर कमीशन’

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो Mamata Banerjee ने चुनावी माहौल के बीच बड़ा राजनीतिक विस्फोट करते हुए Election Commission of India पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मतदाता सूची से 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं और इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने आयोग को “तुगलकी” और “सो कॉल्ड टॉर्चर कमीशन” तक कह डाला।

कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय नबान्न में आयोजित एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र के मूल अधिकारों से खिलवाड़ किया जा रहा है और यह सब एक राजनीतिक एजेंडे के तहत हो रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी Bharatiya Janata Party पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की आईटी सेल से जुड़े लोग तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर मतदाता सूची में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

58 लाख वोटरों के नाम हटाने का आरोप

ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा की आईटी सेल की एक महिला पदाधिकारी ने AI तकनीक का इस्तेमाल कर पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम हटवा दिए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “लोकतंत्र में वोट देने का अधिकार सबसे बड़ा अधिकार है। अगर मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम हटा दिए जाएं, तो यह सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला है।”

हालांकि, इस दावे पर चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह बयान तीखी बहस का विषय बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग Supreme Court of India के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग मतदाताओं को “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” के नाम पर परेशान कर रहा है और वैध दस्तावेजों को भी अस्वीकार कर रहा है।

ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के दौरान राज्य में भारी दबाव और भय का माहौल बना। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के चलते डर और तनाव की वजह से 160 लोगों की जान चली गई।

हालांकि इन मौतों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला” करार दिया।

एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में व्यापक पैमाने पर नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और भाजपा के निर्देश पर की गई।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है, तो राज्य सरकार उन अधिकारियों की रक्षा करेगी। इतना ही नहीं, उन्होंने घोषणा की कि जिन अधिकारियों को आयोग ने डिमोट किया है, उन्हें राज्य सरकार प्रमोशन देगी।

यह बयान अपने आप में असाधारण है और इससे केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका है।

“तुगलकी कांड” और “हिटलरी अत्याचार” जैसे शब्दों का इस्तेमाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने चुनाव आयोग को “सो कॉल्ड टॉर्चर कमीशन” बताते हुए कहा कि वह इसे चुनाव आयोग कहने को तैयार नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “यह तुगलकी कांड है। हिटलरी अत्याचार हो रहे हैं। जनता वोट देकर सरकार चुनती है या कोई आयोग पहले से तय कर देता है कि किसे फायदा पहुंचाना है?”

मुख्यमंत्री के इस बयान से राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।

बिहार और हरियाणा का उदाहरण

ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर बिहार में एसआईआर के दौरान कुछ दस्तावेज मान्य थे, तो वही दस्तावेज पश्चिम बंगाल में अमान्य क्यों कर दिए गए? उन्होंने कहा कि हरियाणा और बिहार में भी इस प्रक्रिया के खिलाफ शिकायतें आई थीं।

उन्होंने कहा, “सच को कोई दबा नहीं सकता। आज नहीं तो कल, सच सामने आएगा।”

बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर: कई प्रमुख चेहरे BJP में शामिल

कोलकाता, 17 फरवरी 2026 : पश्चिम बंगाल में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) से पहले आज राजनीति में बड़ा बदलाव देखा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार को कोलकाता स्थित अपनी पार्टी मुख्यालय में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें कई जाने-माने सार्वजनिक हस्तियों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस कार्यक्रम में बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और पार्टी के राज्य अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

बीजेपी में शामिल हुए प्रमुख चेहरे

  1. दीपांजन चक्रवर्ती
    पूर्व नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडर और देश के पूर्व अंडरकवर एजेंट रहे चक्रवर्ती आज भाजपा में शामिल हुए। उन्हें सुरक्षा और खुफिया मामलों में लंबे अनुभव के लिए जाना जाता है।
  2. बिप्लब बिस्वास
    CRPF (सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स) के पूर्व DSP अधिकारी रहे बिस्वास ने भी आज भाजपा का दामन थामा। उनके जुड़ने से पार्टी को सुरक्षा-सेवा क्षेत्र के समर्थक वोटरों तक पहुंच बढ़ाने की उम्मीद है।
  3. कस्तूरी गोस्वामी
    पश्चिम बंगाल के दिग्गज लेफ्ट-फ्रंट नेता और पूर्व मंत्री खिती गोस्वामी की पुत्री कस्तूरी गोस्वामी ने भी भाजपा में शामिल होकर राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है।

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में विवादित आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर जनता उन्नयन पार्टी (JUP) से जुड़े विधायक हुमायूं कबीर पर निशाना साधा। अधिकारी ने दावा किया कि मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने से पहले कबीर कई दिनों तक बांग्लादेश में थे और उनके बैंक खाते में बांग्लादेश से पैसे आ रहे हैं। उन्होंने इस मामले की गहन जांच कराने की मांग की।

ममता सरकार का मास्टरस्ट्रोक: चुनाव से पहले ‘युवा साथी योजना’ पर उमड़ा जनसैलाब, 1 अप्रैल से हर महीने मिलेंगे 1,500 रुपये

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सरकार द्वारा घोषित ‘युवा साथी योजना’ ने बेरोजगार युवाओं के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। योजना के तहत 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये की नकद सहायता दी जाएगी। रविवार को जैसे ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हुई, राज्य के कई जिलों में सुबह सूरज उगने से पहले ही लंबी कतारें देखने को मिलीं।

योजना को लेकर युवाओं का उत्साह इस बात का संकेत है कि बेरोजगारी का मुद्दा आगामी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। राज्य सरकार ने आलोचनाओं और भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों को देखते हुए अब ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।


जिलों में दिखा अभूतपूर्व उत्साह

रविवार सुबह से ही उत्तर 24 परगना, हुगली, मालदा, मुर्शिदाबाद, बर्धमान और दक्षिण 24 परगना सहित कई जिलों में युवा आवेदन शिविरों के बाहर कतारबद्ध नजर आए। कई स्थानों पर प्रशासन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। युवाओं का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में 1,500 रुपये की मासिक सहायता भी उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी।

सरकार का अनुमान है कि करीब 27.8 लाख युवा इस योजना से लाभान्वित होंगे। यही कारण है कि आवेदन की शुरुआत के साथ ही बड़ी संख्या में लोग पंजीकरण केंद्रों पर पहुंचे।


ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू

भीड़ और राजनीतिक आलोचना के बाद राज्य सरकार ने ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू कर दी है। अब आवेदक घर बैठे भी फॉर्म भर सकते हैं। इसके लिए ‘आमादेर पाड़ा आमादेर समाधान’ पोर्टल https://apas.wb.gov.in/ पर आवेदन किया जा सकता है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा गया है:

  1. बेसिक डिटेल्स भरना
  2. दस्तावेज अपलोड करना
  3. फाइनल सबमिट

फॉर्म सबमिट करने के बाद आवेदकों को उसकी प्रति डाउनलोड कर सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।


किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन के लिए निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक हैं:

  • माध्यमिक (मैट्रिक) या समकक्ष परीक्षा का एडमिट कार्ड
  • माध्यमिक या समकक्ष परीक्षा की मार्कशीट/सर्टिफिकेट
  • आधार कार्ड की प्रति
  • वोटर कार्ड की प्रति
  • बैंक पासबुक का पहला पन्ना
  • एससी/एसटी/ओबीसी प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
  • पासपोर्ट साइज फोटो (पीडीएफ/जेपीजी/पीएनजी फॉर्मेट में)
  • हस्ताक्षर (जेपीजी या पीएनजी फॉर्मेट में)

इसके अलावा, युवा व क्रीड़ा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://sportsandyouth.wb.gov.in/wbyouthservices/news-events से भी फॉर्म डाउनलोड किया जा सकता है। वर्ष 2026 लिंक पर क्लिक कर फॉर्म डाउनलोड करने के बाद संबंधित शिविर में दस्तावेजों के साथ जमा किया जा सकता है।


5,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान

‘युवा साथी योजना’ की घोषणा वर्ष 2026-27 के वोट-ऑन-अकाउंट बजट में की गई थी। इसके लिए 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पहले योजना का लाभ 15 अगस्त से शुरू होना प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसे 1 अप्रैल से लागू करने की घोषणा कर दी गई।

राज्य सरकार का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद युवाओं को आर्थिक सहारा देना उसकी प्राथमिकता है।


क्या बोलीं वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य?

राज्य की वित्त मंत्री Chandrima Bhattacharya ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बकाया राशि रोके जाने के बावजूद राज्य सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि युवाओं को आर्थिक सहायता देना सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रारंभिक सहारा देना है, न कि उन्हें स्थायी रूप से सरकारी सहायता पर निर्भर बनाना।


चुनावी परिदृश्य में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेरोजगारी अब एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है। मुख्य विपक्षी दल Bharatiya Janata Party ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री Narendra Modi मार्च में कोलकाता में एक बड़ी रैली कर सकते हैं। 2021 के बाद पहली बार प्रधानमंत्री की कोलकाता में रैली प्रस्तावित है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष बेरोजगारी और रोजगार सृजन को प्रमुख मुद्दा बनाएगा, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ‘युवा साथी’ जैसी योजनाओं के जरिए युवाओं को साधने की कोशिश करेगी।


‘लक्ष्मी भंडार’ के बाद नया दांव

राज्य सरकार पहले ही ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के जरिए महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता दे रही है, जिसे व्यापक समर्थन मिला था। अब ‘युवा साथी योजना’ को उसी तर्ज पर युवाओं के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया, तो इसका राजनीतिक लाभ भी सत्तारूढ़ दल को मिल सकता है।


युवाओं की उम्मीदें और चुनौतियां

हालांकि 1,500 रुपये की राशि बड़ी नहीं मानी जा सकती, लेकिन बेरोजगार युवाओं के लिए यह सहायता प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कई युवाओं का कहना है कि इससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, आवेदन शुल्क या दैनिक खर्चों में मदद ले सकेंगे।

दूसरी ओर, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नकद सहायता के साथ-साथ स्थायी रोजगार सृजन पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सके।

दुर्गापुर के IQ City Medical College Hospital में द्वितीय वर्ष के छात्र ने की आत्महत्या, हॉस्टल के बाथरूम में मिला शव

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित IQ City Medical College Hospital में शनिवार रात एक दर्दनाक घटना सामने आई। बिहार के पटना निवासी 22 वर्षीय लावण्या प्रताप, जो द्वितीय वर्ष के मेडिकल छात्र थे, हॉस्टल के बाथरूम में फंदे से लटके पाए गए। घटना के बाद पूरे कैंपस में शोक और सनसनी का माहौल है।

सूचना मिलते ही दुर्गापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। एसीपी सुबीर रॉय के अनुसार, अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया गया है और पोस्टमार्टम दुर्गापुर उपजिला अस्पताल में कराया जाएगा। पुलिस सहपाठियों और करीबी दोस्तों से पूछताछ कर रही है।

परीक्षा के दबाव में उठाया कदम?

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्र लगातार परीक्षाओं में असफल हो रहा था और एक भी सेमेस्टर पास नहीं कर पाया था। बताया जा रहा है कि रिजल्ट रिव्यू की प्रक्रिया चल रही थी, जिससे वह मानसिक दबाव में था। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और किसी अन्य कारण की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।

मृतक के पिता अनिल कुमार ने बताया कि बेटे की परीक्षा ठीक नहीं गई थी और संभवतः उसी तनाव में उसने यह कदम उठाया।

कॉलेज प्रशासन की चुप्पी

घटना के बाद कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। छात्र का शव फिलहाल अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। परिवार के दुर्गापुर पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

पहले भी सुर्खियों में रहा कॉलेज

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में इसी कॉलेज की एक प्रथम वर्ष छात्रा के साथ कैंपस के बाहर दुष्कर्म की घटना सामने आई थी, जिसमें कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है।

यह घटना मेडिकल शिक्षा संस्थानों में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और काउंसलिंग सुविधाओं की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत के कारणों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 6 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले, सुरक्षा तंत्र में व्यापक पुनर्संरचना

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य सरकार ने प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला किया है। गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राज्य में छह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। इस फेरबदल को चुनावी तैयारियों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना, खुफिया सूचनाओं का संकलन, संवेदनशील जिलों की निगरानी और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना पुलिस प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन तबादलों का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना, विभिन्न रेंज और जिलों में बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा चुनावी माहौल में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो चुकी हैं और विभिन्न दल चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

चुनाव से पहले प्रशासनिक रणनीति

विधानसभा चुनाव किसी भी राज्य के लिए संवेदनशील समय होता है। इस दौरान राजनीतिक रैलियाँ, जनसभाएँ, रोड शो और प्रचार अभियानों की संख्या बढ़ जाती है। कई क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र हो जाती है, जिससे कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा पुलिस अधिकारियों के तबादले को रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

विशेष रूप से उन अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ दी गई हैं, जिनके पास प्रशासनिक अनुभव, खुफिया तंत्र की समझ और संवेदनशील इलाकों में काम करने का अनुभव है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

राजीव मिश्र को दक्षिण बंगाल की कमान

तबादलों की सूची में सबसे प्रमुख नाम राजीव मिश्र का है। उन्हें एडीजी और आईजीपी (मॉडर्नाइजेशन एंड को-ऑर्डिनेशन) के पद से हटाकर एडीजी व आईजीपी (दक्षिण बंगाल) के पद पर नियुक्त किया गया है।

दक्षिण बंगाल राज्य का अत्यंत महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से सक्रिय क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में कई संवेदनशील जिले शामिल हैं, जहां चुनाव के दौरान अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होती है। ऐसे में राजीव मिश्र जैसे अनुभवी अधिकारी को यहां की कमान सौंपना प्रशासनिक दृष्टि से अहम निर्णय माना जा रहा है।

मॉडर्नाइजेशन और को-ऑर्डिनेशन जैसे विभाग में काम करने के दौरान उन्होंने पुलिस तंत्र के आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन और विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय पर काम किया है। अब दक्षिण बंगाल की जिम्मेदारी संभालते हुए उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे चुनावी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था को मजबूती से नियंत्रित करेंगे और जिला प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखेंगे।

लक्ष्मी नारायण मीणा बने सीआईडी के एडीजीपी एंड आईजी

एडीजी एंड आईजी (संसोधनागार सेवाएं विभाग) के पद पर कार्यरत लक्ष्मी नारायण मीणा को अब सीआईडी (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) का एडीजी एंड आईजीपी नियुक्त किया गया है।

सीआईडी राज्य की महत्वपूर्ण जांच एजेंसी है, जो गंभीर आपराधिक मामलों, आर्थिक अपराधों, संगठित अपराध और संवेदनशील मामलों की जांच करती है। चुनाव के दौरान फर्जी मतदान, हिंसा, अवैध हथियारों की तस्करी, नकदी और शराब के अवैध वितरण जैसे मामलों पर नजर रखने में सीआईडी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

लक्ष्मी नारायण मीणा का प्रशासनिक अनुभव और जेल प्रशासन (संसोधनागार सेवाएं) में कार्य का अनुभव उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त बनाता है। जेल विभाग में रहते हुए उन्होंने बंदियों के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर काम किया। अब सीआईडी की कमान संभालते हुए वे जांच तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम करेंगे।

मुकेश को इंटेलिजेंस ब्यूरो में नई जिम्मेदारी

मुर्शिदाबाद और जंगीपुर रेंज के आईजीपी के पद पर कार्यरत मुकेश को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में आईजीपी का पदभार सौंपा गया है।

खुफिया तंत्र चुनावी माहौल में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संभावित तनाव, साम्प्रदायिक संवेदनशीलता, राजनीतिक गतिविधियों की निगरानी और बाहरी तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखना आईबी की जिम्मेदारी होती है। मुर्शिदाबाद और जंगीपुर जैसे क्षेत्रों में काम करने का अनुभव मुकेश को संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव देता है।

उनकी नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि चुनाव से पहले खुफिया नेटवर्क को और मजबूत किया जाएगा और किसी भी संभावित अवांछित गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।

सैयद वकार राजा बने मुर्शिदाबाद रेंज के डीआईजी

नदिया और राणाघाट रेंज के डीआईजी सैयद वकार राजा को मुर्शिदाबाद रेंज का डीआईजी नियुक्त किया गया है।

मुर्शिदाबाद जिला राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां चुनाव के दौरान विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है। सैयद वकार राजा को इस क्षेत्र का दायित्व सौंपना प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

नदिया और राणाघाट जैसे क्षेत्रों में काम करने के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई। अब मुर्शिदाबाद रेंज में उनकी प्राथमिकता शांति बनाए रखना, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगी।

जिलों में एसपी स्तर पर अदला-बदली

राज्य सरकार ने जिला स्तर पर भी बदलाव किए हैं।

अमरनाथ के बने जलपाईगुड़ी के एसपी

कृष्णानगर पुलिस जिला के एसपी अमरनाथ के को जलपाईगुड़ी का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। जलपाईगुड़ी उत्तर बंगाल का महत्वपूर्ण जिला है, जहां चुनाव के दौरान सीमावर्ती गतिविधियों और राजनीतिक कार्यक्रमों पर विशेष नजर रखने की आवश्यकता होती है।

वाइ रघुवंशी बने कृष्णानगर पुलिस जिला के एसपी

जलपाईगुड़ी के एसपी वाइ रघुवंशी को कृष्णानगर पुलिस जिला का एसपी बनाया गया है। इस अदला-बदली को प्रशासनिक संतुलन और अनुभव के बेहतर उपयोग के रूप में देखा जा रहा है।

चुनावी परिप्रेक्ष्य में तबादलों का महत्व

इन तबादलों को केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे चुनावी तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव से पहले ऐसे अधिकारियों को बदला जाता है जो लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात हों या जिनकी निष्पक्षता पर प्रश्न उठ सकते हों।

इस तरह के कदमों से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है। राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों का लक्ष्य शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना होता है।

प्रशासनिक संतुलन और क्षेत्रीय रणनीति

तबादलों की सूची पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि बदलाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। दक्षिण बंगाल, मुर्शिदाबाद रेंज, उत्तर बंगाल के जिले और खुफिया विभाग—सभी स्तरों पर पुनर्संरचना की गई है।

इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ने क्षेत्रीय संतुलन, अनुभव और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसी जगहों पर भेजा गया है जहां उनकी विशेषज्ञता का अधिकतम उपयोग हो सके।

पुलिस बल की भूमिका और अपेक्षाएँ

चुनाव के दौरान पुलिस बल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्हें न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखनी होती है, बल्कि आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करना, राजनीतिक रैलियों की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और मतगणना के दौरान सुरक्षा प्रदान करना भी होता है।

वरिष्ठ अधिकारियों की नई नियुक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि राज्य प्रशासन चुनाव को लेकर गंभीर है और सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं चाहता।

बंगाल की ‘वैलेंटाइन दीदी’: चुनाव से पहले भावनात्मक वीडियो के जरिए तृणमूल का सॉफ्ट कैंपेन

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल तेजी से बदल रहा है। इसी बीच सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress (एआईटीसी) ने वैलेंटाइन डे के अवसर पर एक 59 सेकेंड का भावनात्मक वीडियो जारी कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने आधिकारिक हैंडल से यह वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को “बंगाल की वैलेंटाइन दीदी” बताया।

वीडियो का केंद्रीय संदेश यह है कि प्यार केवल गुलाब के फूलों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि मुश्किल समय में साथ खड़े होने का नाम है। तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रतीकात्मक संदेश के माध्यम से मुख्यमंत्री की छवि एक संवेदनशील, स्नेही और संरक्षक नेता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वीडियो केवल एक भावनात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि चुनाव से पहले मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

वैलेंटाइन डे का नया राजनीतिक अर्थ

वीडियो की शुरुआत में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाथ में गुलाब लिए नजर आती हैं। वह बच्चियों से मिलती हैं, उन्हें दुलार करती हैं, उनके माथे को चूमती हैं और स्नेह जताती हैं। बैकग्राउंड में एक आवाज सुनाई देती है—“वैलेंटाइन डे का मतलब सिर्फ गुलाब फूल का एक्सचेंज नहीं होता, प्यार का मतलब है आफत-विपत्ति में साथ खड़े होना।”

यह संदेश स्पष्ट रूप से पारंपरिक रोमांटिक अवधारणा से हटकर सामाजिक और राजनीतिक अर्थ गढ़ने की कोशिश करता है। वीडियो में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि मुख्यमंत्री का प्रेम व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक और जन-केन्द्रित है।

मुश्किल घड़ी में साथ: सच्चे प्यार की परिभाषा

वीडियो में अलग-अलग अवसरों के फुटेज शामिल किए गए हैं। कहीं ममता बनर्जी बच्चों को गले लगाती दिखती हैं, तो कहीं किसी महिला के आंसू पोंछती नजर आती हैं। बुजुर्ग महिलाओं के बीच बैठकर संवाद करती हुई उनकी छवियां भी शामिल हैं।

बैकग्राउंड वॉयस कहती है—“मुश्किल घड़ी में किसी का हाथ थाम लेना ही सच्चा प्यार है।” इस कथन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मुख्यमंत्री केवल प्रशासनिक प्रमुख नहीं, बल्कि एक संवेदनशील अभिभावक की तरह जनता के साथ खड़ी रहती हैं।

एक महिला बांग्ला में कहती सुनाई देती है कि “दीदी हमें प्यार करती हैं, वही हमारे बारे में सोचती हैं, और कोई नहीं सोचता।” इस संवाद के माध्यम से वीडियो भावनात्मक जुड़ाव को और गहरा बनाने का प्रयास करता है।

अभिभावक की छवि को मजबूत करने की रणनीति

वीडियो में ममता बनर्जी को सफेद रंग की नीली पाड़ वाली साड़ी में दिखाया गया है—जो उनकी पहचान का स्थायी हिस्सा बन चुकी है। वह लोगों का अभिवादन करती हैं, बच्चों को गोद में उठाती हैं और सहजता से संवाद करती दिखती हैं।

बैकग्राउंड में आवाज आती है कि वह “ऐसी मुख्यमंत्री हैं, जो किसी अभिभावक की तरह हैं।” इस वाक्य के जरिए नेतृत्व को मातृत्व और संरक्षण की भावना से जोड़ा गया है। तृणमूल कांग्रेस ने लंबे समय से “दीदी” की छवि को एक भावनात्मक ब्रांड के रूप में स्थापित किया है, और यह वीडियो उसी ब्रांडिंग को और सुदृढ़ करता है।

परिवार जैसा रिश्ता: राजनीतिक संदेश का विस्तार

वीडियो के अगले हिस्से में कहा गया है कि ममता बनर्जी बंगाल के लोगों को अपने परिवार की तरह प्यार करती हैं। जब भी राज्य पर कोई संकट आता है, वह सबसे पहले लोगों के बीच पहुंचती हैं। प्राकृतिक आपदा हो, सामाजिक संकट हो या व्यक्तिगत त्रासदी—वीडियो यह दिखाने की कोशिश करता है कि मुख्यमंत्री हर परिस्थिति में मौजूद रहती हैं।

तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि यह रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि दिल का रिश्ता है—निःस्वार्थ और अटूट। अंत में वीडियो में संदेश दिया जाता है कि वैलेंटाइन डे के अवसर पर यह बंधन और मजबूत हो।

चुनावी संदर्भ में भावनात्मक अपील

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वीडियो आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बंगाल की राजनीति में व्यक्तित्व-आधारित प्रचार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। तृणमूल कांग्रेस अक्सर ममता बनर्जी की व्यक्तिगत छवि—संघर्षशील, सादगीपूर्ण और जनता के करीब—को अपने अभियान का केंद्र बनाती रही है।

वैलेंटाइन डे जैसे अवसर का इस्तेमाल कर पार्टी ने एक सॉफ्ट इमोशनल कैंपेन की शुरुआत की है। इसमें आक्रामक राजनीतिक भाषणों या विरोधियों पर हमले की जगह भावनात्मक जुड़ाव और संवेदनशीलता पर जोर दिया गया है।

बंगाल : कोलकाता में शुभेंदु अधिकारी का ममता सरकार पर बड़ा हमला; 2.15 करोड़ बेरोजगारी, 51 परियोजनाएं ठप और 10 लाख पद खाली होने का दावा

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उस समय गर्मा गई जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने राजधानी Kolkata में आयोजित एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बेरोजगारी, उद्योगों की स्थिति, महिला सुरक्षा, सरकारी रिक्त पदों, युवाओं की योजनाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे कई मुद्दों को एक साथ उठाते हुए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। यह प्रेस वार्ता राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।

महाशिवरात्रि की शुभकामनाओं से शुरुआत

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत शुभेंदु अधिकारी ने राज्यवासियों को महाशिवरात्रि की अग्रिम शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने कहा कि यह पर्व भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और सनातन परंपराओं का प्रतीक है। इसके बाद उन्होंने सीधे राज्य की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से इतर राज्य के युवाओं और आम नागरिकों के सामने गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां खड़ी हैं, जिन पर सरकार ध्यान नहीं दे रही।

2.15 करोड़ बेरोजगारी का दावा

सबसे बड़ा आरोप उन्होंने बेरोजगारी को लेकर लगाया। उनका दावा था कि पश्चिम बंगाल में 2 करोड़ 15 लाख लोग बेरोजगार हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल पंजीकृत बेरोजगारों का नहीं बल्कि वास्तविक स्थिति को दर्शाता है, जिसमें शिक्षित युवा, तकनीकी डिग्रीधारी छात्र, पारंपरिक उद्योगों से जुड़े श्रमिक और ग्रामीण क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार सृजन की गति बेहद धीमी है और निजी निवेश लगभग ठप पड़ चुका है। अधिकारी के अनुसार, रोजगार के अवसरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा राज्य छोड़कर अन्य राज्यों में काम की तलाश में जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग एक करोड़ लोग पिछले वर्षों में काम के लिए राज्य से बाहर गए हैं।

51 औद्योगिक परियोजनाएं ठप

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में 51 औद्योगिक और निवेश परियोजनाएं फिलहाल बंद या ठप स्थिति में हैं। उनके अनुसार, निवेशकों का भरोसा सरकार की नीतियों, प्रशासनिक अस्थिरता और कथित भ्रष्टाचार के कारण कमजोर हुआ है।

उन्होंने कहा कि एक समय पश्चिम बंगाल उद्योगों का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज स्थिति यह है कि नई कंपनियां निवेश करने से हिचक रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योगपतियों को अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

युवश्री योजना पर गंभीर सवाल

विपक्ष के नेता ने वर्ष 2013 में शुरू की गई ‘युवा उत्साह परियोजना’, जिसे बाद में ‘युवश्री’ नाम दिया गया, पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि इस योजना के तहत 17 लाख युवाओं ने आवेदन किया था, लेकिन केवल लगभग एक लाख युवाओं को सीमित समय के लिए भत्ता मिला।

उन्होंने कहा कि शेष 16 लाख से अधिक युवा आज भी किसी सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अधिकारी ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया गया और बाद में इसे प्रभावी रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इन 17 लाख आवेदकों की वर्तमान स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे और स्पष्ट करे कि योजना का वास्तविक लाभ किसे मिला।

सरकारी पदों में भारी रिक्तियां

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में सरकारी पदों की स्थिति को भी गंभीर बताया। उनका आरोप था कि लगभग 6 लाख सरकारी पद समाप्त कर दिए गए हैं और करीब 10 लाख पद वर्तमान में खाली हैं।

उन्होंने कहा कि इनमें 3.30 लाख शिक्षक और गैर-शिक्षक पद शामिल हैं। इसके अलावा 1.50 लाख पुलिस कांस्टेबल पदों पर भी नियुक्तियां नहीं की गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

उनके अनुसार, स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि पुलिस बल की कमी के कारण अपराध नियंत्रण पर असर पड़ रहा है।

महिला सुरक्षा का मुद्दा

महिला सुरक्षा के सवाल पर भी उन्होंने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार इन्हें रोकने में असफल रही है।

उन्होंने कुछ हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय मामलों को दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने विशेष रूप से सत्ताधारी दल All India Trinamool Congress के एक कथित मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आरोप गंभीर हैं तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही है। उन्होंने बेरोजगारी, सरकारी भर्तियों और उद्योग निवेश से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के दावे सही हैं तो उसे डेटा के साथ जनता के सामने आना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए आंकड़ों को अस्पष्ट रखा जाता है।

‘चाकरी मांगे बांग्ला’ अभियान

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा के ‘चाकरी मांगे बांग्ला’ अभियान में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अभियान युवाओं की आवाज को मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां रोजगार के अवसर अधिक हैं और निवेश का माहौल बेहतर है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भी बदलाव की जरूरत है ताकि युवाओं को राज्य छोड़कर बाहर न जाना पड़े।

एंटी-इन्कम्बेंसी का दावा

शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि राज्य में एंटी-इन्कम्बेंसी की भावना तेजी से बढ़ रही है। उनके अनुसार, लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही है।

उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनावों में जनता बदलाव का मन बना चुकी है और विपक्ष इस जनभावना को संगठित करने का प्रयास करेगा।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है। विधानसभा चुनावों के बाद भी दोनों दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

विपक्ष का आरोप है कि राज्य में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए राज्य की छवि खराब कर रहा है।

राज्य सरकार की संभावित प्रतिक्रिया

हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए गए आरोपों पर तत्काल सरकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, लेकिन आम तौर पर सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को निराधार बताता रहा है। सरकार का दावा है कि उसने उद्योग, बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण योजनाओं और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है।

राज्य सरकार अक्सर यह भी कहती है कि बेरोजगारी राष्ट्रीय स्तर की समस्या है और केंद्र सरकार की नीतियों का भी राज्यों पर प्रभाव पड़ता है।

बंगाल में SIR: पश्चिम बंगाल में SIR अंतिम चरण में, 32 लाख ‘अनमैप्ड’ नामों की सुनवाई से बढ़ी चुनौती

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। चुनाव आयोग ने 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का लक्ष्य तय किया है, जबकि 21 फरवरी तक सभी आपत्तियों और दावों की सुनवाई पूरी करनी अनिवार्य है।

आयोग के अनुमान के मुताबिक राज्य में करीब 32 लाख नाम ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में हैं, जिनकी जांच और सुनवाई की जानी है। इन मामलों के निस्तारण के लिए ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को दस्तावेजों की गहन पड़ताल करनी पड़ रही है। कई मामलों में दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

एक महीने के भीतर दो बच्चों का जन्म?

अंग्रेजी दैनिक The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके Metiabruz में एक परिवार के दस्तावेजों में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

एसके इरशाद और शेख नौसेद नाम के दो भाइयों की जन्मतिथि में एक महीने से भी कम का अंतर दर्ज है।

  • बड़े भाई की जन्मतिथि: 5 दिसंबर 1990
  • छोटे भाई की जन्मतिथि: 1 जनवरी 1991

SIR के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों में दोनों की उम्र में यह बेहद कम अंतर पाया गया। जांच में परिवार के कुल दस सदस्यों की पहचान हुई है। सभी दस्तावेजों में पिता के रूप में एसके अब्दुल और मां के रूप में मनोवारा बीबी का नाम दर्ज है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि दस बच्चों में से चार की जन्मतिथि 1 जनवरी दर्ज की गई है, जिसने अधिकारियों की शंका और बढ़ा दी है।

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की गहन जांच की जा रही है और संबंधित रिकॉर्ड की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।

जन्म से दो दिन पहले जारी हुआ प्रमाणपत्र

इसी तरह का एक मामला Baranagar (उत्तर 24 परगना) में सामने आया है। यहां एक व्यक्ति का जन्म प्रमाणपत्र उसके जन्म से दो दिन पहले जारी होने का मामला दर्ज हुआ।

जांच में पाया गया कि पपील सरकार द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 6 मार्च 1993 लिखी है, जबकि रजिस्ट्रेशन की तारीख 4 मार्च 1993 दर्ज है — यानी जन्म से दो दिन पहले प्रमाणपत्र जारी हो गया।

इसके अलावा, एक मतदाता को SIR 2002 में पांच वर्ष की आयु में मैप किया गया था, जबकि दूसरा रिकॉर्ड में 13 वर्ष का पाया गया। इस तरह की विसंगतियां सत्यापन प्रक्रिया को और लंबा कर रही हैं।

सत्यापन में लग रहा अतिरिक्त समय

SIR कार्य से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, ऐसे मामलों को सत्यापन के लिए संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के पास भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर अस्पताल अथॉरिटी और अन्य सरकारी अभिलेखों से भी पुष्टि की जाती है।

इन बहु-स्तरीय जांच प्रक्रियाओं के कारण सुनवाई में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। प्रशासन का कहना है कि अंतिम मतदाता सूची जारी करने से पहले सभी संदिग्ध प्रविष्टियों की जांच पूरी करना आवश्यक है, ताकि सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

राज्य में SIR की प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में है। आयोग के सामने चुनौती यह है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी अनमैप्ड नामों और दस्तावेजी विसंगतियों का समाधान कर पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची प्रकाशित की जाए।

तारिक को भाई कहा, रमजान की एडवांस मुबारकबाद दी: ममता बनर्जी का बांग्लादेश चुनाव पर रिएक्शन

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने बांग्लादेश चुनाव के नतीजे आने के बाद तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। साथ ही उन्होंने बांग्लादेश के सभी लोगों को भी शुभकामनाएं दीं। ममता बनर्जी ने रमजान की एडवांस मुबारकबाद भी पेश की।

पश्चिम बंगाल में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; बांग्लादेश में BNP की जीत से सीमा सीटों पर बढ़ी हलचल

पश्चिम बंगाल: भारत–बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में हालिया चुनावी नतीजों के बाद सियासी और सुरक्षा हलकों में हलचल तेज हो गई है। बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी Bangladesh Nationalist Party (BNP) की सीमा से लगे निर्वाचन क्षेत्रों में जीत को लेकर पश्चिम बंगाल में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

राज्य के सीमावर्ती जिलों—जैसे North 24 Parganas, Nadia district, Murshidabad district और Malda district—में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां विशेष निगरानी रख रही हैं।

🔎 क्यों बढ़ी चिंता?

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार की राजनीतिक परिस्थितियों का असर सीमावर्ती भारतीय जिलों पर पड़ सकता है। इन क्षेत्रों में:

  • अवैध घुसपैठ
  • तस्करी (पशु, मादक पदार्थ, नकली नोट)
  • कट्टरपंथी गतिविधियों की आशंका
  • साम्प्रदायिक संवेदनशीलता

जैसे मुद्दे पहले से ही चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक बदलाव के बाद संभावित गतिविधियों को लेकर खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं।

🚨 सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी निगरानी

सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली Border Security Force (BSF) ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गश्त और चौकसी बढ़ा दी है।

सूत्रों के अनुसार:

  • संवेदनशील बॉर्डर पोस्ट पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं
  • नाइट पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है
  • संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं

राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां भी स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में काम कर रही हैं।

🏛️ सियासी प्रतिक्रिया

राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर ठोस रणनीति बनानी चाहिए। वहीं सत्ताधारी दल ने कहा है कि स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है और किसी भी प्रकार की अस्थिरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

📊 सामाजिक और आर्थिक असर

सीमा से जुड़े जिलों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक छोटे व्यापार, कृषि और सीमावर्ती गतिविधियों पर निर्भर करती है। अगर तनाव बढ़ता है तो:

  • स्थानीय व्यापार प्रभावित हो सकता है
  • आवाजाही पर प्रतिबंध लग सकता है
  • सुरक्षा जांच सख्त होने से आम नागरिकों को असुविधा हो सकती है

हालांकि फिलहाल किसी बड़े घटनाक्रम की सूचना नहीं है, लेकिन प्रशासन एहतियाती कदम उठा रहा है।

🔮 आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समन्वय अहम होगा।

पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार की एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, यह राजनीतिक और सुरक्षा समीकरणों पर निर्भर करेगा।

मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद निर्माण की शुरुआत, कुरान पाठ व 1000 काजियों को न्योता

मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में आक्रांता बाबर के नाम पर एक नई मस्जिद के निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है। इस मस्जिद के निर्माण की जिम्मेदारी तृणमूल कांग्रेस की ओर से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने ली है।

बताया जा रहा है कि आज मस्जिद की नींव रखी जाएगी। इस अवसर पर एक बड़े जलसे का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की भागीदारी की उम्मीद जताई जा रही है।

2026 में पोस्ट ऑफिस FD बनी निवेशकों की पहली पसंद, जानिए कैसे बढ़ेगा आपका पैसा

निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की अगुवाई में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा क्षेत्र में बाबरी मस्जिद के निर्माण कार्य की आधारशिला रखी गई। निर्माण स्थल से सामने आए वीडियो में वहां बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और चल रही तैयारियों की गतिविधियां दिखाई दीं।