पटना — विधान सभा सदस्या ने कहा संघ महिलाओं को घर मे रखना चाहता है । बिहार विधानसभा में महिलाओ को लेकर संघ प्रमुख के बयान को लेकर हुआ हंगामा।
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राष्ट्रपति पद के लिए नीतीश कुमार के नाम की चर्चा पता नहीं कहाँ से शुरू हुई. भारतीय जनता पार्टी अगर उनको राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाना चाहती हो तो इसमें विपक्ष को क्या एतराज़ हो सकता है !
जहाँ तक विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में उनको पेश करने की बात होती है तो वह मुझे असंभव दिखाई देता है. क्योंकि उस हालत में तो नीतीश कुमार को भारतीय जनता पार्टी से अलग होना होगा. क्या यह मुमकिन है ? यहां याद करें कि नीतीश कुमार की नरेन्द्र मोदी के प्रति क्या धारणा थी और क्या संकल्प लेकर ये उनसे अलग हुए थे ?
आज उन्हीं नरेंद्र मोदी द्वारा सच्चे समाजवादी होने के प्रमाण पत्र को जो व्यक्ति अपने ऊपर उनकी कृपा मानता हो वह भाजपा से अलग हो सकता है ?कोई इसकी कल्पना भी कैसे कर सकता है! इसके अलावा यह भी देखने की बात है कि राष्ट्रपति सेना के तीनों अंगों का सर्वोच्च कमाण्डर होता है.
यह भी विचारणीय है कि सेना का सर्वोच्च कमांडर क्या ऐसा होना चाहिए जो अपने सार्वजनिक जीवन में हर चुनौती के सामने घुटने टेकता आया है ! जो अपने संकल्पों पर टिकता नहीं हो ! ऐसा व्यक्ति संकट के समय हमारी सेना को अनुप्राणित कैसे कर सकता है ! लेखक–शिवानन्द
स्वास्तिक शुभ चिह्न हमारी हजारों वर्ष पुरानी वैदिक सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा है, इसलिए इस पर राजनीति करना अनावश्यक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
धर्मनिरपेक्षता का अर्थ देश के बड़े वर्ग की आस्था, परम्परा और प्रतीक चिह्न से अनादरपूर्वक दूरी बनाना नहीं होता।
हम जब विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलित कर या नारियल फोड़ कर भी करते हैं, तब देश की सांस्कृतिक परम्परा का ही पालन करते हैं, लेकिन फीता काटने की रवायत बंद नहीं की गई है।

बिहार विधानसभा के स्मृति चिह्न में अशोक चक्र के साथ स्वास्तिक चिह्न भी रहे, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
विधानसभा के आधिकारिक लेटरहेड पर भी स्वास्तिक चिन्ह का प्रयोग होता है।
जिनके पास जनहित के मुद्दे नहीं हैं, वे कभी वंदेमातरम् गायन का विरोध करते हैं तो कभी स्वास्तिक चिन्ह का विरोध करने लगते हैं।
इनलोगों को यह भी नहीं मालूम है कि भारत का स्वास्तिक चिन्ह हिटलर के चिन्ह से बिल्कुल भिन्न है।
सदियों से भारत में शुभ अवसरों पर स्वास्तिक चिह्न बनाये जाते रहे हैं, लेकिन जिनकी समझ अपने मनीषियों के ग्रंथों की उपेक्षा और भारत-विरोधी लेखकों की चंद किताबें पढ़ाने से बनी हो, केवल वे ही स्वास्तिक से दुराग्रह प्रकट कर सकते हैं।
बिहार को विशेष राज्य दर्जा को लेकर जारी जदयू द्वारा जारी बयानबाजी के बीच बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पेज के सहारे जदयू पर हमला बोला है और कहां है कि
नीचे दिया गया डाटा यह बताने में सक्षम है कि केंद्र सरकार बिहार का कितना ध्यान रखती है ।
महाराष्ट्र की आबादी बिहार से एक करोड़ ज्यादा है फिर भी बिहार को महाराष्ट्र के मुकाबले 31हजार करोड़ रुपए ज्यादा मिलते हैं ।बंगाल भी बिहार की भांति पिछड़ा राज्य है पर उसके मुकाबले भी बिहार को 21हजार करोड़ रुपए ज्यादा मिलता है ।

दक्षिण भारत के राज्यों की हमेशा शिकायत रहती है कि केंद्र सरकार हमें कम पैसे देती है क्योंकि हमने आबादी को 70 के दशक में ही केंद्र की नीतियों के कारण रोक लिया था । अब केंद्र सरकार इसको अपराध मानती हैं।
जीएसटी से सबसे ज्यादा फायदा बिहार जैसे राज्य को हुआ है । पहले जिस राज्य में उद्योग स्थापित होते थे उनको अलग से कमाई होती थी ।अब इस कमाई का बडा़ हिस्सा उपभोक्ता राज्य में बंटता है जिसके कारण बिहार को 20हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त फायदा हुआ है ।
बिहार को अगर आगे बढ़ाना है तो सरकार को ये लक्ष्य रखने ही होंगे ।

1) बिहार सरकार को हर हालत में उद्योगों को बढ़ावा देना होगा। जब तक हम औद्योगिक नीतियां लाकर नए उद्योगों को बढ़ावा नहीं देंगे तब तक ना हम रोजगार देने में सफल हो पाएंगे और ना हीं बिहार की आय बढ़ेगी। शाहनवाज हुसैन अच्छा प्रयास कर रहे हैं पर पूरे मंत्रिमंडल का सहयोग आवश्यक है।
2) जहां भी संभव हो वहां प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप होनी चाहिए। उद्योग लगाने वालों को विलेन समझने की मानसिकता बिहार को कहीं का नहीं छोड़ेगी । बड़ौदा बस स्टैंड विश्व स्तर का है पर ऊपर की मंजिलों में दुकानें खोलकर सारी राशि की भरपाई कर ली गई और गुजरात सरकार का एक पैसा भी नहीं लगा ।वैसे ही गांधीनगर के पूरे साबरमती फ्रंट का डेवलपमेंट उसीमें एक निश्चित भूमि प्राइवेट हाथों में देकर अनेक पार्क सहित पूरे फ्रंट को विकसित करने का कीमत निकाल लिया गया ।
3) हम 6 वर्षों में भी प्रधानमंत्री जी के दिए हुए पैकेज का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं।अभी भी दस हजार करोड रुपए से ज्यादा बकाया है ।एक छोटा उदाहरण मेरे लोकसभा का रक्सौल हवाई अड्डा है जिसके लिए प्रधानमंत्री पैकेज में ढाई सौ करोड़ रुपए मिल चुके हैं पर बिहार सरकार द्वारा अतिरिक्त जमीन नहीं देने के कारण आज भी यह योजना रुकी हुई है।
प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना में भी बिहार को हजारों करोड़ रुपए मिलने हैं । अगर हमने भूमि उपलब्ध नहीं कराया तो ये किस्से कहानियों की बातें हो जाएंगी।
4) केंद्र सरकार की योजनाओं का समुचित उपयोग करना होगा ।जैसे बिहार सरकार के जल नल योजना में केंद्र की 50% राशि लगी है जिसका इस्तेमाल हम पंचायती राज की अन्य योजनाओं में कर सकते थे और जल नल योजना की राशि सीधे जल संसाधन विभाग से ले सकते थे। पिछले वित्तीय वर्ष में 6 हजार करोड़ की राशि बिहार सरकार को आवंटित की गई थी पर जल नल योजना के मद में हमने यह पैसे नहीं लिए।इस तरह की राशियों का सही उपयोग हमें करना होगा।
5) जनसंख्या नियंत्रण के लिए हमें स्वयं काम करना होगा ।केवल यह सोच कि समाज स्वयं शिक्षा के साथ जनसंख्या को नियंत्रित कर लेगा, के चक्कर मे बहुत ही देर हो जाएगी। आज भी हम जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए कोई अभियान नहीं चला रहे हैं जबकि इसमें भी बिहार पूरे देश में सबसे ज्यादा फिसड्डी है।
6) अगर केरल के अस्पताल 100 बेड जोड़ते हैं तो प्रति हजार व्यक्ति में इसका इजाफा दिखता है। हम 200 बेड भी जोड़ते हैं तो 300 बच्चे पैदा करने के कारण वह नीति आयोग के आंकड़े में कहीं नहीं दिखता और हम अपनी कमी दूर करने के बजाय नीति आयोग की शिकायत करते हैं ।
7) जब हमने एक अच्छे लक्ष्य के लिए गुजरात की भांति 15 हजार करोड़ रुपए की तिलांजलि दी है तो सरकारी राशि का उपयोग होटल और बस स्टैंड जैसी योजनाओं में सैकड़ों करोड़ खर्च करके भवन निर्माण विभाग को खुश करने के बजाय गरीबों के कल्याणकारी योजनाओं में होना चाहिए। पीपीपी मोड में इन सब चीजों को बनाने से सरकार का एक पैसा भी नहीं लगेगा उल्टे उसकी आमदनी बढ़ेगी। वैसे भी फाइव स्टार होटल बनाना सरकार का काम नहीं है।
2020 में एनडीए सरकार का गठन आत्मनिर्भर बिहार के 7 निश्चय के आधार पर हुआ था । हमें इस मूल मुद्दे से कभी भटकना नहीं चाहिए
MLC चुनाव को लेकर NDA में जारी खींचतान आज खत्म हो गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर NDA की ओर से सीटों का ऐलान किया गया। इससे पहले आज सुबह 11 बजे BJP नेता भूपेंद्र यादव और डिप्टी CM तारकिशोर प्रसाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के घर पहुंचे। उन्होंने एक घंटे तक साथ में बैठक की।
हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद जब वह बाहर निकले तो उन्होंने पत्रकारों से कोई बात नहीं की। वहीं, डिप्टी CM ने बताया, ‘NDA में BJP-JDU के बीच सब ठीक है। दोनों पार्टियों के बीच सहमति पहले से बनी हुई थी। आज भी विचार-विमर्श किया गया।’
24 सीटों पर होना है चुनाव
विधान परिषद की 24 सीटों पर चुनाव होना है। इसको लेकर दोनों पार्टियों के बीच तनातनी चल रही थी। UP में जब से दोनों पार्टियों के बीच सीट का बंटवारा नहीं हुआ तब से दोनों ओर से बयानबाजी जारी है। इसको लेकर सभी की नजर विधान परिषद चुनाव को लेकर NDA के सीट बंटवारे पर थी।
बीजेपी को 12 सीटें
रोहतास
औरंगाबाद
सारण
सीवान
दरभंगा
पूर्वी चंपारण
किसनगंज
कटिहार
सहरसा
गोपालगंज
बेगूसराय
समस्तीपुर
RLJP
वैशाली
JDU की 11 सीटें
पटना
भोजपुर
गया
नालंदा
मुजफ्फरपुर
पश्चिमी चंपारण
सीतामढ़ी
भागलपुर
मुंगेर
नवादा
मधुबनी
मगध विश्वविधालय के कुलपति पर कार्रवाई को लेकर कुलाधिपति सह राज्यपाल फागू चौहान भड़क गये हैं और स्पेशल विजिलेंस यूनिट की कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण मानते हुए कहा है कि यह कानून का उल्लंघन ही नहीं है यह राज्यपाल के अधिकारी क्षेत्र पर हमला है ।राज्यपाल के प्रधान सचिव आर एल चोंगथु ने इसको लेकर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी को पत्र लिख है.


प्रधान सचिव ने पत्र में साफ लिखा है कि विश्विद्यालयों के मामले में सक्षम प्राधिकार कुलाधिपति हैं. ऐसे में कुलाधिपति की अनुमति के बिना विश्वविद्यालयों में स्पेशल विजिलेंस यूनिट की कार्रवाई पूरी तरह से कानून का उल्लंघन है. ऐसे में इस कार्रवाई को तत्काल रोकें।
राजभवन ने यहां तक कहा है कि इस कार्रवाई से विश्विद्यालयों की स्वायत्तता पर कुठाराघात है. प्रधान सचिव के पत्र में साफ है कि यह पत्र भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के सेक्शन 17A में उल्लिखित प्रावधानों का अक्षरशः पालन करने को लेकर लिखा जा रहा है. राजभवन ने कहा है कि ऐसी कार्रवाई से विश्विद्यालयों में अनावश्यक भय का वातावरण बन रहा। इस कार्रवाई से पदाधिकारियों और कर्मचारियों पर मानसिक दवाब भी पड़ रहा है।
मालूम हो कि मगध विश्वविधालय के कुलपति पर 30 करोड़ से अधिक के राशी के गबन का आरोप है और इस मामले में विशेष निगरानी की टीम ने विश्वविधालय से जुड़े कई अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया है और लगातार दबाव के बाद पिछले दिनों ही कुलपति विशेष निगरानी के अधिकारी के सामने उपस्थिति हुए थे ।
वही इस मामले में निगरानी कोर्ट ने कुलपति प्रो राजेंद्र प्रसाद की अग्रिम जमानत रद्द कर चुका है राज्यपाल के इस पत्र से यह साफ हो गया है कि कुलपति मामले में नीतीश कुमार और राज्यपाल के बीच दूरिया बढ़ सकती है ।
आपको एक ऐसी खबर से रुबरु करा रहे हैं जिसे पढ़कर आप हैरान रह जायेंगे । जी हां यूपी विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने मालेगांव कांड के मुख्य आरोपी रमेश चंद्र उपाध्याय को बलिया के बैरिया विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया है, 5 साल पहले मुंबई हाईकोर्ट से मिली थी जमानत ।
2008 में हुए मालेगांव बम धमाके के आरोपी मेजर रमेश चंद्र उपाध्याय मुंबई हाई कोर्ट से जमानत पर है। 5 साल पहले उन्हें कोर्ट ने जमानत दी थी। रमेश चंद्र उपाध्याय 2020 में जदयू में शामिल हुए थे। उन्हें उत्तर प्रदेश के पूर्व सैनिकों की सेल का राज्य संयोजक भी बनाया गया था।
मालेगांव मामले में कथित भूमिका के लिए महाराष्ट्र ATS ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित के साथ रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय को गिरफ्तार किया था। उन्हें 2017 में जमानत पर रिहा किया गया था।
इस मामले पर स्पेशल NIA कोर्ट में ट्रायल जारी है। हालांकि मीडिया में खबर चलने के अब नई लिस्ट में बैरिया विधानसभा को फिलहाल छोड़ दिया गया है। इसकी जगह पर औरैया से मीरा दीवाकर को टिकट दिया गया है।
बिहार में सरकार डवांडोल हैं । गठबंधन के नेता आपस में मुँह लड़ा रहे हैं । नीतीश जी ने मौन साध लिया है. गठबंधन पर उनकी पकड़ पहले जैसी नहीं रही । सरकार पाँच वर्ष की अवधि पुरा कर पाएगी, इस पर लोग संदेह करने लगे हैं ।
सरकार की डवांडोल स्थिति की वजह से प्रशासन भी उहापोह की स्थिति में है. अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है. बाकरगंज जैसे भीड़भाड़ वाले बाज़ार में कल अपराधियों जिस तरह का तांडव मचाया वह इसके पहले राजधानी में कभी नहीं हुआ था ।
आए दिन व्यापारियों को धमका कर उनसे रंगदारी माँगी जा रही है. जो नहीं दबते हैं उनपर गोली चलती है. पटना सरकार की नहीं बल्कि अपराध की राजधानी के रूप में तब्दील होता जा रहा है. नीतीश जी पर शराबबंदी का नशा सवार है. इसके अलावा बाक़ी सबकुछ उपेक्षित है ।
बिहार में भयंकर गैर बराबरी बढ़ी है.उसी अनुपात में ग़रीबी और बेरोज़गारी भी बढ़ी है. लाखों लोग अवैध और अपराध जनित कर्मों से अपना परिवार चला रहे हैं । हर ओर, चाहे जैसे हो, लखपति-करोड़पति बनने की होड़ मची हुई है. दिल्ली और पटना की सरकारों की नीतियों का यह नतीजा है । नीतीश जी की सरकार की विकास नीति ग़रीबी और बेरोज़गारी को दूर करने के बदले बढ़ा रही है. यह विकास नीति ही अपराध को भी बढ़ा रही है. इसीलिए अपराध के ख़िलाफ़ सरकार की सारी कार्रवाइयाँ पानी में लाठी पीटने के समान साबित हो रही हैं ।
लेखक – शिवानंद तिवारी
यूपी चुनाव को लेकर JDU और BJP में गठबंधन को लेकर आरसीपी के पहल के बावजूद बीजेपी से बात नहीं बन पायी और आज JDU ने अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया हालांकि आज आरसीपी प्रेस वार्ता में मौजूद नहीं थे पिछले दिनों प्रेस वार्ता के दौरान ही कहां था कि गठबंधन को लेकर साकारत्मक बातचीत चल रही है और गठबंधन होगा यह तय मानिए ।
JDU के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि चरणवार उम्मीदवारों की सूची जारी होगी। सूची में जिन इलाकों पहले फेज और दूसरे फेज में पार्टी चुनाव लड़ाना चाहती है वहां के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है।
51 प्रत्याशियों की सूची तैयार
JDU के यूपी प्रभारी केसी त्यागी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह, BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और धर्मेंद्र प्रधान से बात की, लेकिन बात नहीं बनी। नतीजा ये रहा कि JDU को अब अकेले ही चुनावी मैदान में उतरने का फैसला लिया है । पार्टी ने 51 प्रत्याशियों की सूची भी तैयार कर ली है। आज 26 सीटों की पहली सूची जारी हुई है।
निकाय चुनाव के लिए विशेष आयोग शीघ्र गठित करे बिहार सरकार
ट्रिपल टेस्ट के बाद ही पिछड़ा आरक्षण – सुशील कुमार मोदी
- नगर निकाय चुनाव में आरक्षण देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले को देखते हुए बिहार सरकार को तुरंत एक विशेष आयोग का गठन करना चाहिए।
यदि इसमें देर हुई तो अप्रैल-मई में सम्भावित निकाय चुनाव नहीं कराये जा सकेंगे।
- सुप्रीम ने कहा है कि राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष आयोग ट्रिपल टेस्ट के आधार पर यह तय करेगा कि किस नगर निकाय में किस जाति को कितना आरक्षण दिया जाना है।
कोर्ट के इस आदेश का पालन नहीं होने के कारण मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने पर रोक लग चुकी है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने बिहार सरकार के नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर अविलंब कदम उठाने का सुझाव दिया है।
जहाँ शराबबंदी नहीं, उन राज्यों में भी हुई जहरीली शराब से मौत
नालंदा में जहरीली शराब से मरने की घटना अत्यंत दुखद है, लेकिन ऐसी त्रासदी से पूर्ण मद्यनिषेध का कोई संबंध नहीं है।
जिन राज्यों में शराबबंदी लागू नहीं है, वहां अक्सर बिहार से ज्यादा बड़ी घटनाएँ हुईं।
पश्चिम बंगाल में 2011 में जहरीली शराब शराब पीने से 167, महाराष्ट्र में 2015 में 102 और 2019 में यूपी-उत्तराखंड में 108 लोगों की जान गई।
इनमें से किसी राज्य में शराबबंदी लागू नहीं है।
वर्ष 2016 में जब जहरीली शराब पीने से गोपालगंज में 19 लोगों की मौत हुई थी, तब राज्य सरकार ने स्पीडी ट्रायल के जरिये पांच साल के भीतर 13 लोगों को दोषी सिद्ध कराया। इनमें से 9 को फांसी और 4 महिलाओं को उम्र कैद की सजा सुनायी गई।
नालंदा और जहरीली शराब से मौत की सभी घटनाओं में स्पीडी ट्रायल का रास्ता अपना कर ही पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सकता है।
शराबबंदी को लेकर बीजेपी और जदयू अब दो दो हाथ करने के मूड में पिख रहा है बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा शराबबंदी कानून पर सवाल खड़े करने पर जदयू ने भी तीखा प्रहार किया है और जदयू के प्रवक्ता अभिषेक झा ने संजय जायसवाल को अज्ञाणी तक कह दिया माननीय Sanjay Jaiswal जी,
इस देश में जघन्य अपराधों के लिए कड़े कानून हैं लेकिन उसके बावजूद वैसे अपराध होते हैं।
बिहार में सुशासन है और सुशासन में जो भी गलत करेगा, अफसर हो या कोई और, दंडित होगा। सुशासन की सरकार की नीति है ना किसी को फसाना और ना किसी को बचाना।
थोड़ा ज्ञान वर्धन कर लीजिए अध्यक्ष जी,
गोपालगंज में जहरीली शराब कांड एक उदाहरण है जहां जहरीली शराब बेचने वाले लोगों को फांसी तक की सजा हुई है।
पुलिस विभाग के 250 से ज्यादा और एक्साइज डिपार्टमेंट के 10 से ज्यादा लोगों को शराबबंदी कानून में गड़बड़ी करने की वजह से बर्खास्त तक किया गया है और बड़ी संख्या में अधिकारियों पर विभागीय कारवाई चल रही है।
शराबबंदी के पहले चरण में देशी शराब को बंद किया गया। विधान परिषद में आपके सम्मानित नेता सुशील कुमार मोदी जी ने विदेशी शराब को बंद करने की मांग की लिहाजा दूसरे चरण में विदेशी शराब को बंद करके पूर्ण शराबबंदी को लागू किया गया।
यदि स्मरण ना हो तो विधान परिषद की प्रोसिडिंग मंगाकर पढ़ लीजिए।
अपने पूर्व के बयानों को भी जरा ध्यान से पढ़िए जहां आप गठबंधन की जड़ में मट्ठा देने की बात कर रहे थे और आज एक बार फिर से अपने ही गठबंधन की सरकार के विरोध में बोल रहे हैं।
हर आदमी को कुछ बोलने से पहले आत्म अवलोकन करना चाहिए।
सामाजिक कर्तव्य राजनीति से जुड़ा मसला होता है। शराबबंदी के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया में आप भी साझीदार रहे हैं। शराबबंदी के लिए जब सदन के अंदर शपथ लिया गया, सभी दल साथ थे। हाल के दिनों में एनडीए विधायक दल की बैठक में सभी सदस्यों ने दोनों हाथ उठाकर शराब बंदी के पक्ष में अपना समर्थन दिया।
आप अपने दल के प्रदेश अध्यक्ष हैं लेकिन अद्भुत विरोधाभास है कि आप अपने अनुभव से विधायकों को लाभान्वित नहीं करवाते हैं।
आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गांधी मैदान के प्रकाश उत्सव में साफ तौर पर कहा था कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के द्वारा लिया गया शराबबंदी का फैसला साहसिक व सराहनीय है। सभी दलों और संगठनों को इसमें सहयोग करना चाहिए।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी की भावना का सम्मान करते हुए आपने भी शराबबंदी कानून को बनाने की प्रक्रिया में अपना सहयोग दिया लेकिन जहां तक मेरी स्मरण शक्ति है आपको शराबबंदी की आलोचना करने का अधिकार नहीं दिया गया है फिर भी न जाने कौन से ऐसे अज्ञात कारण है जिसके चलते आपके द्वारा आलोचना के ही सुर निकलते हैं।
आलोचना करिए, आपका अधिकार है लेकिन ज्ञान वर्धन भी कीजिए।
अपने संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के रुप में आप दावा करते हैं कि आपका संगठन बूथ आधारित है। हम आपसे अनुरोध करेंगे कि प्रधानमंत्री जी की भावना और आपके विधानमंडल दल के सदस्यों की भावना का सम्मान करते हुए आप संगठन की प्रारंभिक इकाई को शराबबंदी को सफल बनाने का सामाजिक उत्तरदायित्व दें।
माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने हर गांव तक बिजली पहुंचाई है और बिजली के हर खंभे पर शराबबंदी कानून को तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने हेतु टॉल फ्री नंबर जारी किया गया है। अपने प्रारंभिक इकाई के सदस्यों को भी इस टॉल फ्री नंबर का उपयोग करने का निर्देश दें।
आपको हमसे राजनीतिक पीड़ा हो सकती है लेकिन आपसे हाथ जोड़कर अनुरोध है कि जिस तरह आप लोग राजनीतिक कार्यशाला का आयोजन करते हैं उसी तरह शराबबंदी को सफल बनाने हेतु भी कार्यशाला का आयोजन करिए। प्रधानमंत्री जी और अपने दल के विधायकों की भावना का सम्मान करते हुए आप यदि अपनी प्रारंभिक इकाई को भी शराब बंदी के इस अभियान में शामिल होने का निर्देश दीजिएगा तो और अच्छा होगा।
प्रधानमंत्री जी ने सभी संगठन और दलों से शराबबंदी को सफल बनाने के लिए कहा था जिसमें आप लोग भी शामिल थे।
आपको उनकी भावना की कद्र करनी चाहिए, लेकिन आपको आलोचना करने का अधिकार किसने दिया?
शराबबंदी कानून को लेकर बीजेपी का रुख कड़ा होता जा रहा है आज फिर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पोस्ट पर नीतीश कुमार के शराबबंदी कानून पर सवाल खड़े करते हुए सीधे नीतीश पर हमला बोला है ।नालंदा जिले में जहरीली शराब से 11 मौतें हो चुकी हैं।
परसों मुझसे जहरीली शराब पर जदयू प्रवक्ता ने प्रश्न पूछा था। आज मेरा प्रश्न उस दल से है कि क्या इन 11 लोगों के पूरे परिवार को जेल भेजा जाएगा क्योंकि अगर कोई जाकर उनके यहां संतवाना देता तो आपके लिए अपराध है।
अगर शराबबंदी लागू करना है तो सबसे पहले नालंदा प्रशासन द्वारा गलत बयान देने वाले उस बड़े अफसर की गिरफ्तारी होनी चाहिए क्योंकि प्रशासन का काम जिला चलाना होता है ना कि जहरीली शराब से मृत व्यक्तियों को अजीबोगरीब बीमारी से मरने का कारण बताना। यह साफ बताता है कि प्रशासन स्वयं शराब माफिया से मिला हुआ है और उनकी करतूतों को छुपाने का काम कर रहा है।
दूसरे अपराधी वहां के पुलिस वाले हैं जिन्होंने अपने इलाके में शराब की खुलेआम बिक्रि होने दी । 10 वर्ष का कारावास इन पुलिस कर्मियों को होना चाहिए, ना कि इन्हें 2 महीने के लिए सस्पेंड करके नया थाना देना जहां वह यह सब काम चालू रख सकें।
तीसरा सबसे बड़ा अपराधी शराब माफिया है जो शराब की बिक्री विभिन्न स्थानों पर करवाता है। इस को पकड़ना भी बहुत आसान है ।इन्हीं पुलिस कर्मियों से पुलिसिया ढंग से पूछताछ की जाए तो उस माफिया का नाम भी सामने आ जाएगा। शराब बेचने वाले और पीने वाले दोनों को सजा अवश्य होनी चाहिए पर यह उस हाइड्रा की बाहें हैं जिन्हें आप रोज काटेंगे तो रोज उग जाएंगे ।जड़ से खत्म करना है तो प्रशासन ,पुलिस और माफिया की तिकड़ी को समाप्त करना होगा।
भाकपा-माले ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है । आज पटना (Patna) में भाकपा-माले (CPI-ML) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य (Dipankar Bhattacharya) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी घोषणा कि और कहा कि यूपी में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के साथ हमारी बातचीत चल रही है । हमें उम्मीद है कि यहां बीजेपी को शिकस्त देने के लिए एक व्यापक गठबंधन बनेगा ।
उन्होंने कहा कि पांच राज्यों में होने वाला चुनाव काफी महत्वपूर्ण है यूपी, उत्तराखंड व पंजाब में हमारी पार्टी चुनाव लड़ेगी । यूपी में बदलाव दिख रहा है, बिहार में आकर जहां मामला फंसा था और हम जीतते-जीतते रह गए थे, उससे यूपी ने बहुत कुछ सीखा है. उन्होंने कहा कि इस बार बीजेपी को कोई मौका नहीं मिलने वाला है । यहां रोजगार बड़ा मुद्दा है. यूपी में जिस प्रकार से दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों का दमन किया गया और पुलिस राज कायम किया गया, उसके खिलाफ वहां की जनता लोकतंत्र के पक्ष में अपना फैसला सुनाएगी ।
माले महासचिव ने यह भी कहा कि पंजाब के चुनाव में किसान आंदोलन की आवाज सुनी जाएगी । किसानों के मुद्दों के साथ-साथ दलितों, मजदूरों, भूमिहीन गरीबों के सवाल जबरदस्त तरीके से मुद्दे बने हैं । वहां सरकार की ओर से घोषणाएं हुई हैं, लेकिन जमीन पर काम कम हुआ है।
महाराष्ट्र पुलिस ने किया राबड़ी देवी का अपमान, उद्धव ठाकरे से बात करें लालू-सुशील कुमार मोदी
पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति पूरा सम्मान, उनसे किसी मराठी की तुलना अपमान कैसे?
- महाराष्ट्र में भाजपा सोशल मीडिया सेल के प्रभारी ने यदि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे को “मराठी राबड़ी देवी’ कहा और इसे ‘अपमान’ या ‘गाली’ मान कर वहां की पुलिस ने कार्रवाई की, तो राजद को कांग्रेस, शिवसेना और महाराष्ट्र सरकार से अपना विरोध प्रकट करना चाहिए।
ठाकरे सरकार बताये कि बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री का नाम क्या कोई असंसदीय शब्द है?
- भाजपा जानना चाहती है कि क्या महाराष्ट्र पुलिस राबड़ी देवी जी को ऐसी सम्मानित महिला नहीं मानती, जिससे किसी मराठी की तुलना की जा सके ?
राबड़ी देवी का अपमान वह महाराष्ट्र पुलिस कर रही है, जिसने सुशांत सिंह राजपूत के मामले में लीपापोती की और जिस पर 100 करोड़ रुपये महीने की अवैध वसूली के दाग लगे हैं। - राबड़ी देवी से भाजपा के राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं और भले ही उन्होंने कभी बिहार के एक राज्यपाल के प्रति अमर्यादित शब्दों का प्रयोग भी किया हो, लेकिन हमारी पार्टी सदा उनका सम्मान करती है।
यदि हिम्मत है तो लालू प्रसाद इस मुद्दे पर सोनिया गाँधी या उद्धव ठाकरे से बात करें।
राजद बेवजह भाजपा को निशाना बना रहा है।
बिहार में जातीय जनगणना को लेकर बीजेपी और जदयू के बीच दूरियां बढ़ने लगी है आज पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि सर्वदलीय बैठक को लेकर बीजेपी की और से अभी भी सहमति नहीं दी गयी है इस वजह से है तारीख तय नहीं हो पा रही है ।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़कर बाकी दलों ने जातियों की गणना पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
सीएम ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह अपने ‘सहयोगी दल’ को मामले को लटकाने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा रहे और उन्हें ‘सकारात्मक जवाब’ मिलने का विश्वास है।
जातीय जनगणना को लेकर यह तय हुआ था कि केंद्र सरकार अगर जातीय जनगणना नहीं कराती है तो बिहार सरकार जातीय जनगणना खुद करायेंगी और इसके लिए बिहार बीजेपी के नेता सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से भी मुलाकात किये थे लेकिन आज सीएम के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि बीजेपी का केन्द्रीय नेतृत्व फिलहाल जातीय जनगणना कराने को लेकर सहमत नहीं है।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजद इस विषय को लेकर हमलावर हो गया है और नीतीश कुमार हर सीधे सीधे हमला शुरू कर दिया है
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी द्वारा ब्राह्मणों पर दिए गए बयान का मामला गरमाता जा रहा है।
गुरुवार को बयान से आहत ब्राह्मण समाज के लोग पटना स्थित उनके आवास का शुद्धिकरण करने पहुंच गए। घर के अंदर जाने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक लिया। इसके बाद ब्राह्मणों ने उनके आवास के बाहर ही बैठकर सत्यनारायण भगवान की पूजा की। साथ ही बीच सड़क पर दही-चूड़ा का भोज किया।
वही आज गया में जीतन राम मांझी के समर्थन में लोग सड़क पर उतर आए और जमकर बवाल किया यू कहे तो बिहार में दलित बनाम ब्राह्मण धीरे धीरे तूल पकड़ता जा रहा है और ऐसे में कहां जा सकता है कि जीतन राम मांझी जिस उद्देश्य को ध्यान में रख कर बयान दिया था वो उस उद्देश्य में कामयाब होते दिख रहे हैं ।
जीतन राम मांझी कराएंगें ब्राम्हण-पंडित भोज, वैसे ब्राम्हण-पंडित जिन्होने कभी मांस-मदिरा का सेवन नहीं किया,चोरी-डकैती नहीं किया उनको दिया निमंत्रण, अपने सरकारी आवास पर दोपहर 12 बजे कराएंगें ब्राम्हण-पंडित भोज,
HAM प्रवक्ता डॉ दानिश रिजवान ने दी जानकारी
जीतन राम मांझी के बयान पर राम मंदिर का शिलान्यास कर्ता और बीजेपी के कभी दलित चेहरा रहे कामेश्वर चौपाल ने जमकर खरी खोटी सुनाई है उन्होंने कहा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय जीतन राम मांझी जी,ब्राह्मण समाज और राम पर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।उनकी समस्या है कि वह ब्राह्मण को जाति के रूप में और श्रीराम को एक सामान्य मनुष्य के रूप में देखते हैं , ब्राह्मण एक जाति नही, इंस्टिट्यूशन है।
ज्यादातर आंदोलन और बदलाव ब्राह्मणों के नेतृत्व में हुए। इतिहास देखिए, भगवान बुद्ध के शुरुआती शिष्य ब्राह्मण रहे।भगवान महावीर के आचार्य और गणधर भी ब्राह्मण ही थे।हिंदुस्तान में सुधारवादी आंदोलन का नेतृत्व रामानन्दाचार्य ,बसवेश्वर ने किया तो सामाजिक सुधार के लिए राजाराम मोहनराय ,स्वामी दयानन्द सरस्वती, गोविन्द महादेव रानाडे ने ब्राह्मण होते हुए भी ब्राह्मणों के खिलाफ आंदोलन चलाए।देश मे सेकुलर मूवमेंट चलनेवाले गोपालकृष्ण गोखले, गोविन्द वल्लभ पंत,राष्ट्रवादी आंदोलन में वासुदेव बलबन्त फड़के, वीर सावरकर, डॉ हेडगेवार, गोलवलकर और कम्युनिस्ट आंदोलन की अगुवाई करने वाले बी एल जोशी, नामुदारीपाद बहुत से नाम शामिल हैं ।
इसीलिए ब्राह्मण को केवल पुराणपंथी या समाज मे उत्पन्न सभी समस्याओं का जड़ समझना अज्ञानता है। इस प्रकार की ओछि और निम्नस्तरीय चर्चा केवल बौद्धिक दिवालिया पन को ही प्रकट करता है। हर समाज मे वन्दनीय ,पूज्यनीय और प्रेरणा देने वाले श्रेष्ठ और जेष्ठ महापुरुष हुवे हैं उनमें से अच्छाई ग्रहणकर ही हम गौरवशाली समाज की रचना कर सकते हैं।
मैं माननीय Jitan Ram Manjhi जी से पूछना चाहूंगा की आप जिस महामानव बाबा साहब अंबेडकर की कृपा भारतीय संविधान की वजह से आप और हमारे जैसे लोग भारत में सम्मान पा रहे हैं ,उन्होंने कैसे भारतीय संविधान के प्रथम पृष्ठ पर राम दरबार का चित्रण किए हैं ? भारत के राष्टपिता परम् पूज्य बापू ने कैसे भारत के लिए “रामराज्य” की कल्पना किये ? जबकि उनके कथनानुसार राम काल्पनिक हैं !
पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के बयान पर सियासत थमने का नाम ही नहीं ले रहा है शराब, सत्यनारायण पूजा और ब्राह्मणों को लेकर दिया गया उनका बयान सियासी मुद्दा बन गया है। राजद से लेकर कांग्रेस, भाजपा और जदयू ने भी उनके बयान पर आपत्ति जताई। पद की मर्यादा बनाए रखने की बात कही गई। हालांकि, पूर्व सीएम की ओर से सफाई दी गई है कि उन्होंने अपने समाज को लेकर वे शब्द बोले थे। उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
वही शराबबंदी को लेकर दिये गये बयान को लेकर सीएम नीतीश कुमार ने कहां कि एनडीए के बैठक में वो मौजूद थे कुछ समस्या था तो बोलना चाहिए था ना इस तरह का आना सही नहीं है ।
वही सत्यनारायण पूजा और ब्राह्मणों को लेकर दिया दिये गये बयान को लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (RJD Supremo Lalu Prasad Yadav) की पुत्री रोहिणी आचार्य ने भी ट्वीट कर मांझी को सलाह दी है।

ट्वीट कर रोहिणी आचार्य ने मांझी को संबोधित करते हुए लिखा है कि, आप जहां हैं, वह जगह आपके लिए मुफीद नहीं है। आपने जब अपने गर्दन को संघियों और उसके संरक्षकों की गोद में रख दिया है तो फिर रोना किस बात का। रोइए मत। इससे पूर्व एक अन्य ट्वीट में रोहिणी ने लिखा था कि मांझी का बयान शर्मनाक और निंदनीय है। हालांकि उन्होंने समर्थन भी किया था कि ब्राह्मण पंडित दलितों के घर खाना नहीं खाते। खाने के बजाय पैसे लेना पसंद करते हैं। समाज में आज भी छुआछूत इंसानियत पर हावी है।
दूसरी और आज पूरे दिन मांझी के बयान को लेकर राज्य के अलग अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन चल रहा है वही ब्राह्मण समाज ने आज राज्य मानव अधिकार आयोग में आवेदन दिया है इस आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया है कि एक कार्यक्रम के दौरान राजकीय पूर्व मुख्यमंत्री जी ने ब्राह्मण समाज को गाली दिया है और कानून का उल्लंघन किया है अपने आवेदन समाज ने राज्य मानव अधिकार आयोग से पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई का अनुरोध किया है ।
तेज प्रताप ने जीतन राम मांझी के शराबबंदी पर दिए गए बयान का समर्थन किया है ,तेज प्रताप ने कहा कि समीक्षा बैठक से कोई फायदा नहीं है चारों तरफ शराब बिक रहा है। अधिकारी शराब पी रहे हैं थाना से होम डिलीवरी हो रही है,शराबबंदी को सफल बनाना है तो बॉर्डर को सील करना चाहिए उन्होंने कहां की उत्तर प्रदेश झारखंड और बंगाल के बॉर्डर को सील करना होगा ।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने आज एक बार फिर शराबबंदी को लेकर नीतीश पर हमला बोला है मांझी ने कहा कि बिहार में भले ही पूर्ण शराबबंदी का दावा सरकार कर रही है लेकिन अभी भी राज्य में ये ओपन सीक्रेट है, ये सत्य है कि जो बड़े लोग हैं, जो ठेकेदार हैं, धनवान हैं और रसूख वाले लोग जैसे- आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर रात में शराब पीते है इस कानून में मारा गरीब जा रहा है इसलिए नीतीश कुमार को एक बार फिर से सोचना चाहिए ।
छिटपुट हिंसा को छोड़कर बिहार में पंचायत चुनाव का अंतिम 11वें चरण का चुनाव सम्पन्न हो गया । राज्य के 20 जिलों के 38 प्रखंडों में होने वाले मतदान में 17,286 पदों के लिए 63,718 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। कई जिलों में EVM को लेकर समस्या रही है, वही बूथों पर सुबह की ठंड के कारण वोटर की संख्या कम दिखी।फिर भी अभी तक जो खबर आ रही है उसके अनुसार 62.81 प्रतिशत मतदान हुई इस चरण में भी महिला वोटर पुरुष वोटर से ज्यादा वोट किया है
मतदान में आज क्या खास है –
राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक कुमार का बयान
मतदान शांतिपूर्ण हुआ
कुशेश्वर स्थान में एक बूथ पर हंगामा के बाद मतदान को रद्द कर दिया गया है । इस मामले में 15 लोग गिरफ्तार किए गए हैं
मधेपुरा के आलमनगर की घटना पर आयोग ने कहा कि आपसी बिबाद का मामला है 4 गिरफ्तार हुए है वैशाली में एक बूथ पर बैलेट गलत लगने से चुनाव दुबारा होगा।
Evm 436 बदले गए
अभी तक 100 गिरफ्तार किए गए
13 हजार वोटर बोगस वोटिंग का प्रयास किया
23 सिकायत आयी आज
62,81 प्रतिशत चुनाव हुआ
पुरूष 59,98 प्रतिशत
महिला 65,65 प्रतिशत
मधुबनी में सबसे कम मतदान 53,32 प्रतिशत
मधेपुरा में सबसे ज्यादा मतदान 70,03 प्रतिशत
मुजफ्फरपुर के कटरा प्रखंड में चंगेल पंचायत स्थित बूथ संख्या-143 पर बोगस वोटिंग को लेकर हंगामा हो गया। इससे मतदान कार्य काफी देर तक बाधित हुआ। निवर्तमान मुखिया पति और समर्थकों ने बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के वोटरों से वोट डलवाने का आरोप लगाकर हंगामा किया।
सीतमढ़ी में पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष इंद्राणी देवी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें मतदान के दौरान मतदान केंद्र संख्या 273 और 274 पर मतदाताओं के बीच पर्चे बांटने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
मोतिहारी के रामगढ़वा प्रखंड के मझरिया गांव में बूथ संख्या 122 पर दो प्रत्याशियों में नोकझोक, सेक्टर मजिस्ट्रेट, पकड़ीदायल डीएसपीओ सहित पुलिस बल तैनात। मतदान शांतिपूर्ण जारी।
बेगूसराय में तेघड़ा प्रखंड के बरौनी दो पंचायत के मतदान केंद्र संख्या-58 पर हंगामा कर रहे लोगों पर पुलिस ने बरसाई लाठियां बरसाई।
नालंदा के अस्थावां प्रखण्ड अंतर्गत कैला पंचायत के बूथ संख्या-133 पर हंगामा और रोड़ेबाजी हुई। मौके पर सडीओ, डीएसपी पहुंचने पर हंगामा शांत हुआ।
मुजफ्फरपुर में बोगस वोटिंग की शिकायत पर हंगामा, मतदान कार्य हुआ बाधित।
बिहार पंचायत चुनाव में बायोमीट्रिक पद्धति का प्रयोग देश में पहली बार, बंद हुई बोगस वोटिंग -सुशील कुमार मोदी
बिहार निवार्चन आयोग को आमंत्रित करेगी संसदीय समिति
- बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार पंचायत चुनाव में मतदाताओं के बायोमीट्रिक सत्यापन और ईवीएम मशीन के साथ मतगणना में ओसीआर तकनीक का जो प्रयोग किया, उससे बोगस वोटिंग रोकने और न्यूनतम समय में चुनाव परिणाम की घोषणा करने में बड़ी कामयाबी मिली।
भारत में यह पद्धति पहली बार अपनायी गई और सफल रही। - संसद की विधि, न्याय, कार्मिक एवं लोक शिकायत मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष के नाते मैं बिहार निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को संसदीय समिति के समक्ष नये मतदान प्रयोग की प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित करूँगा।
उसके बाद स्थायी समिति इस संबंध में अपना प्रतिवेदन संसद के पटल पर रखेगी।
- तेलंगाना, गुजरात, पुडुचेरी, हरियाणा और दिल्ली के निर्वाचन अधिकारी पंचायत चुनाव में बिहार के अभिनव प्रयोग का अध्ययन करने यहां आ चुके हैं।
इस तरह मतदान कराने से फर्जी वोटर 15 फीसद तक छँट गए और वास्तविक मतदान औसतन 62 फीसद रहा।
यह प्रयोग भविष्य के चुनावों में अपनाया जा सकता है।
पंचायत चुनाव के 10वें चरण का मतदान जारी है। 34 जिलों की 817 पंचायतों में चुनाव है। सुबह 6 बजे ही मतदाताओं की भीड़ लगनी शुरू हो चुकी है। मतदान के लिए 7257 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, इनमें से 509 नक्सल प्रभावित हैं। शांतिपूर्ण मतदान के लिए पुलिस मुख्यालय की तरफ से लगभग 38 हजार पुलिस पदाधिकारियों और सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।
10वें चरण में कुल 63 लाख 24 हजार 714 मतदाता वोट करने वाले हैं। इनमें 33 लाख 29 हजार 858 पुरुष मतदाता हैं, जबकि 29 लाख 94 हजार 648 महिला मतदाता हैं। वहीं, बांका से वोट करने पहुंचे 70 साल के सुखदेव यादव की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह सीढ़ी पर चढ़ रहे थे। तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ गया।
वहीं, नवादा में महिला वोटर व महिला पुलिसकर्मी के बीच झड़प हो गई। घटना में महिला पुलिसकर्मी का सिर फट गया। मौके से 4 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। वहीं, गया में मतदान कर्मी को शराब के नशे में धुत होकर महिला पुलिस कर्मी से बदतमीजी करना भारी पड़ा। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।
नवादा में महिला वोटर्स से झड़प में घायल महिला पुलिसकर्मी का इलाज करतीं डॉक्टर।
मतदान लाइव अपडेट्स
भोजपुर के बड़हरा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, नूरपुर में मतदान केंद्र के बाहर हंगामा। प्रत्याशी के समर्थक व प्रत्याशी और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच नोकझोंक हो गई। एक दूसरे पर लगा रहे दूसरे को समर्थन करने का आरोप लगाया
गया के मोहनपुर प्रखंड के बैद्यनाथपुर बूथ पर तैनात नशे में धुत दो चुनाव कर्मी गिरफ्तार किए गए। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में शराब पीने की पुष्टि हुई है। हालांकि, चर्चा यह है कि नशे में धुत शराब कर्मी महिला पुलिसकर्मी के कमरे में घुसने की कोशिश कर रहे थे।
लेकिन, इस बात से पुलिस प्रशासन इनकार कर रहा है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि पकड़े गए दोनों चुनाव कर्मी नशे में थे और हंगामा कर रहे थे।
नवादा के रोह इंटर स्कूल मतदान केंद्र पर फोन से वीडियो बनाने से मना करने पर महिला मतदाता और पुलिसकर्मी के बीच झड़प हो गई। घटना में महिला पुलिस कर्मी सुमन कुमारी का सिर फट गया। घायल महिला सिपाही को रोह पीएससी में इलाज कराया गया। मौके से कुल 4 महिला मतदाता को हिरासत में लिया गया।
बांका में मतदान केंद्र पर 70 साल के सुखदेव यादव की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह सीढ़ी पर चढ़ रहे थे। तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ गया।
नालंदा के मिल्कीपर गांव में एक युवक दर्जनों वोटर आई कार्ड के साथ पहुंचा था। त्वरित कार्रवाई में सोहसराय थाना क्षेत्र के महुआ टोला निवासी गुलाम मुस्तफा का पुत्र आदि आलम को 42 वोटर आई कार्ड के साथ हिरासत में लिया गया।
औरंगाबाद में देव प्रखंड के मलहरा गांव के बूथ संख्या 76 पर ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। बूथ पर तनाव बढ़ गया है।
सुबह 6 बजे से ही मतदान केंद्रों पर वोटर्स पहुंचने लगे।
मुजफ्फरपुर के औराई में चौर मे टेंट में बना चलंत बूथ।
10वें चरण के मतदान के साथ इन 18 जिलों में खत्म होगा चुनाव
बिहार पंचायत चुनाव का दसवां चरण का बिहार के 18 जिलों के लिए चुनाव का अंतिम चरण है। 11 चरणों में हो रहे पंचायत चुनाव में आखिरी चरण में 20 जिलों 38 प्रखंड़ों में चुनाव है। इस तरह से दसवें चरण के साथ 18 जिलों में चुनाव होगा। जिन जिलों में 10वें चरण के बाद चुनाव संपन्न होगा।
ये जिले बक्सर, रोहतास, कैमूर, गया, नवादा, औरंगाबाद, जाहानाबाद, अरवल, शिवहर, किशनगंज, शेखपुरा, लखीसराय, अररिया, कटिहार, बांका, जमूई, मुंगेर और खगड़िया हैं।
भोजपुर के बड़हरा प्रखंड की ख्वासपुर में नाव से गंगा नदी पर कर मतदान करने जाते लोग।
वोटिंग के लिए नाव पर पार कर रहे गंगा नदी
10वें चरण का मतदान जारी है। भोजपुर के बड़हरा प्रखंड की ख्वासपुर पंचायत में मतदान केंद्र जाने के लिए ख्वासपुर गांव के लोगों को गंगा नदी पार करना है।
हालांकि, इसको लेकर लोगों में सुबह से ही उत्साह देखा जा रहा है। मतदान केंद्र पहुंचने के लिए नाव पर सवार होकर जा रहे हैं।
भोजपुर में मतदान केंद्र के बाहर लाइन में लगीं महिला मतदाता।
10वें चरण की सीटों पर एक हजार से अधिक अवैध हथियार जब्त
मतदान वाले जिलों में पुलिस की सख्ती जारी है। पुलिस मुख्यालय के मुताबिक चुनावी आचार संहिता लगाए जाने के बाद से अभी तक इन जिलों से एक हजार से अधिक अवैध हथियार पकड़े गए हैं।
5322 व्यक्तियों पर सीसीए के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव दिया गया है वही 3408 के खिलाफ निरोधात्मक प्रस्ताव पारित हुआ है। वाहन चेकिंग के दौरान 10 करोड़ 99 लाख से अधिक जुर्माना वसूला गया है।
12 लाख 61 हजार लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला पुलिस बल के साथ ही होमगार्ड, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस और सैप जवान लगाए गए हैं।
आपको बता दें कि कई जिलों में यह पंचायत चुनाव का आखिरी चरण होगा। राज्य के कुछ जिलों में 11वें चरण में भी चुनाव कराए जाएंगे।
अभी तक क्या खास रहा है
1–जमुई के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत दिग्घी पंचायत के बेलाटांड मध्य विद्यालय के प्रांगण में अज्ञात युवक द्वारा बम फोड़ा गया। घटना में किसी प्रकार के जान माल के नुकसान की खबर नहीं है।
जमुई में ही वार्ड सदस्य के पति की हत्या के विरोध में लक्ष्मीपुर बाजार के करीब कोहबरबा मोड़ पर जाम करने की कोशिश में पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हाथापाई होने की सूचना है।
स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। फिलहाल मुखिया सुलेखा देवी के नेतृत्व में एनएच 333 को कोहबरबा मोड़ के समीप जाम कर दिया गया है।
2—-अररिया के मध्य विद्यालय भगवानपुर के बूथ 184, 185 पर मारपीट व हंगामा को लेकर कुछ देर के लिए मतदान बाधित रहा। एसडीपीओ पुष्कर कुमार, जोनल मजिस्ट्रेट ने जाकर हंगामा शांत किया। कुछ लोग चोटिल हुए हैं।
3— नवादा के रोह इंटर विद्यालय बूथ पर महिला मतदाता और महिला पुलिसकर्मी के बीच झड़प हो गई. इस दौरान महिला पुलिसकर्मी घायल हो गई. जानकारी के अनुसार महिल बूथ पर मोबाइल फोन से वीडियो बना रही थी, मना करने पर महिला पुलिस से उलझ गयी. पुलिस ने मौके से चार महिला मतदाताओं को हिरासत में लिया है
4—आरा के नरगदा में मतदान बूथों पर दो गुटों में झड़प होने की खबर सामने आ रही है. मतदान केंद्र पर जमकर हंगामा हुआ. मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गयी. एक पक्ष का आरोप है कि पुलिस पक्षपात कर रही है।
बिहार में बीजेपी और जदयू के बीच सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है यह विधानसभा सत्र के दौरान खुलकर सामने आ गया आज सदन में जिस तरीके से भ्रष्टाचार और अफरशाही को लेकर बीजेपी विधायक के निशाने पर नीतीश थे उससे यह साफ हो गया कि आने वाले समय में तल्खी और बढ़ेगी।
नीतीश कुमार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे पर सवाल खड़े करते हुए दरभंगा से बीजेपी के विधायक संजय सरावगी ने सवाल किया कि ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता के पास से 70 लाख से अधिक रुपये बरामद होता है लेकिन उस पर कार्यवाही करना तो दूर उसे छुट्टी पर जाने कि इजाजत दे दी जाती है ।
विधायक के इस सवाल पर बिहार विधानसभा के अध्यक्ष ने भी कहा कि ये तो सरकार के साख का सवाल है फिर क्या था सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया और राजद और भाजपा एक साथ भ्रष्ट अभियंता के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग करने लगे।
अभी तक अभियंता पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई इसको लेकर विभागीय मंत्री सदन को संतुष्ट नहीं कर पाये और अंत में विधानसभा अध्यक्ष ने एक जांच कमिटी गठित करने की घोषणा कर दी। इसी तरह अफरशाही को लेकर बीजेपी विधायक हमलावर दिखे स्थिति यह हो गयी कि मुख्यमंत्री को खुद आकर जवाब देना पड़ा हालांकि इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश मिश्रा पर काफी तल्ख टिप्पणी कर दिये ।
लेकिन इस सब से इतर कल बीजेपी विधायक दल की बैठक में खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम ने आप्त सचिव के यहां छापेमारी की वजह बताया उसको लेकर बैठक में मौजूद विधायक और मंत्री हैरान रह गये ।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी की और मंत्री जनक राम से पुछा गया कि आपके आप्त सचिव के यहां छापामारी हुई है भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं इस पर मंत्री ने कहा कि बालू टेंडर को लेकर विभाग के अधिकारी एक खास कंपनी को मदद करने को लेकर लगातार दबाव बना रहे थे मैं सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आलोक में टेंडर का दर पिछले टेंडर के दर से बढ़ाने का निर्देश दिया ।
लेकिन इसके लिए विभाग तैयार नहीं था और इसी विवाद की वजह से आप्त सचिव के यहां छापा मारा गया हालांकि मंत्री से जब अधिकारिक तौर पर सवाल किया गया तो यह कहते हुए निकल गये कि आप लोगों से बेहतर कौन जान सकता है वैसे इस मामले में सच्चाई क्या है उससे पार्टी को अवगत करा दिये हैं ।
#बिहारपंचायतचुनाव के 9वें चरण की मतगणना का काम चल रहा है इस चरण में भी मतदाताओं ने पूराने चेहरे से दूरी बनाये रखा साथ ही विधायक और मंत्री के रिश्तेदार को भी हराने से परहेज नहीं किया ।
नौतन प्रखंड के बैकुंठवा पंचायत के बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद की पुत्रवधू रंजीता देवी मुखिया का चुनाव हार गई हैं। बैकुंठवा पंचायत से अफरोज आलम ने रंजीता देवी को हराकर जीत दर्ज की है।
नौतन के जिला परिषद क्षेत्र संख्या 35 से डिप्टी सीएम रेणू देवी के भाई अनिल कुमार उर्फ मंटू हार गए हैं। उन्हें बाल्मीकि नगर सांसद सुनील कुमार के बड़े भाई मनोज कुमार कुशवाहा ने हराया है।
भोजपुर जिले के कोइलवर ब्लॉक से कोइलवर दक्षिण के ब्लॉक संख्या 30 से जिप सदस्य के पद पर चुनाव लड़ रही 24 साल की युवा उम्मीदवार परिधि गुप्ता जिला परिषद के पोस्ट से जीत गई है. परिधि को 11870 वोट मिले है. वहीं दूसरे स्य्हां पर अंजू कुमारी है. जिनको 7151 वोट मिला है।
परिधि कोइलवर के चांदी गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता प्रदीप कुमार गुप्ता रेलवे में सेक्शन इंजीनियर हैं और फिलहाल वाराणसी में पोस्टेड हैं। उनकी मां रेखा देवी पहले जगदीशपुर से जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं।
परिधि ने तमिलनाडु से MBA किया है। इसके बाद साल 2018 में नीदरलैंड की एक कंपनी में बतौर बिजनेस एनालिस्ट काम किया। वो BYJU में भी असोसिएट के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। अब लाखों रुपए के पैकेज छोड़कर गांव की राजनीति में उतरी हैं।
चुनाव परिणाम का अपडेट–
1—-खगड़िया में 22 साल की आकांक्षा मुखिया बन गई हैं। वह बीपीएससी की तैयारी कर रही हैं। सहरसा के सोनबरसा राज विधानसभा के जदयू विधायक रत्नेश सादा के बेटे का मुखिया बनाने के सपना टूट गया। वह तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, मधेपुरा के बिहारीगंज से JDU विधायक निरंजन कुमार मेहता की पत्नी भी मुखिया का चुनाव हार गईं।
भोजपुर जिले के कोइलवर ब्लॉक से कोइलवर दक्षिण के ब्लॉक संख्या 30 से जिप सदस्य के पद पर चुनाव लड़ रही 24 साल की युवा उम्मीदवार परिधि गुप्ता जिला परिषद के पोस्ट से जीत गई है. परिधि को 11870 वोट मिले है. वहीं दूसरे स्य्हां पर अंजू कुमारी है. जिनको 7151 वोट मिला है।
2—सीवान से लकड़ीं नबीगंज प्रखंड की डुमरा पंचायत से ब्रजेश सिंह, ब्लडीहा पंचायत से रमेश राम, भादा खुर्द पंचायत से रिपु देवी, भोपतपुर पंचायत से सरवरी खातून, लखनौरा पंचायत से शहाबुन निशा मुखिया के पद पर विजयी।
3—गोपालगंज बिशुनपुर पक्ष्मी पंचायत के मुखिया प्रत्याशी मुकुंद पासवान विजयी।664 वोट से हुए विजयी।
4—सहरसा के सोनबरसा राज विधानसभा के जदयू विधायक रत्नेश सादा के बेटे का मुखिया बनाने के सपना टूट गया। वह भी खुद के गृह पंचायत से। चुनाव जीतना तो दूर वो मुख्य मुकाबले में भी नहीं आ सके। वह तीसरे स्थान पर रहे।
5—पश्चिम चंपारण के नौतन में बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद की पुत्रवधु रंजीता देवी मुखिया का चुनाव हार गईं हैं। वे बैकुंठवा से चुनाव मैदान में थीं। वहां अफरोज नैयर मुखिया बने हैं। उधर, समस्तीपुर के वारिसनगर की नियारपुर पंचायत के मुखिया प्रत्याशी अरविंद कुमार साह जीते। रहुआ पश्चिमी पंचायत से मुखिया प्रत्याशी वशिष्ठ राउत की जीत।
6—नवादा के हिसुआ की विधायक नीतू कुमारी की दो देवरानी पंचायत चुनाव हार गईं हैं। पूर्व जिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष आभा देवी हिसुआ पश्चिमी सीट से जिला परिषद का चुनाव हारीं।
वहीं छोटी देवरानी प्रियंका कुमारी नरहट पंचायत से मुखिया का चुनाव हारीं। पूर्व में विधायक की सास यहां से मुखिया थीं। मो. एहतेशाम गुड्डू मुखिया निर्वाचित हुए। हिसुआ पश्चिमी से उमेश यादव जीते। यहां से निवर्तमान पार्षद वीरेंद्र सिंह को भी हार का सामना करना पड़ा है।
भोजपुर जिले के कोइलवर ब्लॉक से कोइलवर दक्षिण के ब्लॉक संख्या 30 से जिप सदस्य के पद पर चुनाव लड़ रही 24 साल की युवा उम्मीदवार परिधि गुप्ता जिला परिषद के पोस्ट से जीत गई है. परिधि को 11870 वोट मिले है. वहीं दूसरे स्य्हां पर अंजू कुमारी है. जिनको 7151 वोट मिला है।
#बिहारपंचायतचुनाव – कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पंचायत चुनाव के 9वें चरण की मतगणना सभी 35 जिलों के जिला मुख्यालयों में शुरु हो गयी है । 9वें चरण में 35 जिलों के 875 पंचायतों में वोटिंग 29 नवंबर को हुई थी मतगणना का कार्य आज और कल दो दिनों तक चलेगा ।
97 हजार 878 प्रत्याशियों के भाग्य का होगा फैसला
इस चरण में 97 हजार 878 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। बिहार निर्वाचन आयोग के मुताबिक इस चरण में कुल 26,831 पदों के लिए चुनाव संपन्न हो चुका है।
इसमें ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए 11,883 सीट, ग्राम पंचायत मुखिया पद के लिए 871 सीट, पंचायत समिति सदस्य पद के लिए 1196 सीट, जिला परिषद सदस्य पद के लिए 127 सीट, ग्राम कचहरी पंच पद के लिए 11,883 सीट और ग्राम कचहरी सरपंच पद के लिए 871 सीट शामिल हैं।
9वें चरण में 46 हजार 164 पुरूष और 51 हजार 714 महिला प्रत्याशी हैं। वोटिंग की गणना 1 और 2 दिसंबर को होनी है।
