पटना हाइकोर्ट में जल्द ही कुछ पाबन्दियों में छूट के साथ पूर्व की तरह काम प्रारम्भ हो जाएगा। कोर्ट सोमवार से गुरुवार तक फिजिकल तथा शुक्रवार को वर्चुअल चलता रहेगा।
मिली जानकारी के तहत हाई कोर्ट परिसर अवस्थित तीन कैंटीन को शर्तो के साथ खोलने की अनुमति दी गई है। वही रेलवे आरक्षण केंद्र पूर्व की तरह सुबह आठ बजे से दोपहर बाद दो बजे तक काम करेगा।
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मौजूदा समय में आरक्षण केंद्र सुबह आठ बजे से पौने दस बजे तक काम कर रहा था ।कोरोना संक्रमण को लेकर जारी एसओपी में थोड़ा बदलाव किया गया है। लेकिन बदलाव के बाद जारी हर दिशा निर्देशों को कड़ाई से पालन करने की जिम्मेवारी हाई कोर्ट के सुरक्षा में लगे पुलिस को दी गई है।
वकील और उनके मुंशी को गेट संख्या दो एंव तीन से प्रवेश करने की अनुमति होंगी ।वही वकील हाई कोर्ट कर्मी एंव अन्य को गेट संख्या तीन से प्रवेश कर सकेंगे।जबकि मुवक्किल पास के द्वारा ही हाई कोर्ट में प्रवेश कर सकेंगे।सभी को हर दिशा निर्देश का पालन करना होगा।
पटना हाईकोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर बाढ़ के एसडीएम द्वारा कई लोगों पर समन जारी किये जाने के मामले पर कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने संतोष ऊर्फ संतोष सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इलेक्शन के समय में आप क्रिमिनल बना देंगे लोगों को…, अगर आपको कोर्ट का समन मिले, तो आप घर जाकर खाना भूल जाइएगा” ।
कोर्ट ने इस मामलें के जांच का जिम्मा सीआईडी को दे दिया है।अगली सुनवाई में कोर्ट ने सीआईडी कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा।
याचिकाकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया है कि मोकामा स्थित समयागढ़ ओपी के एएसआई प्रमोद बिहारी सिंह ने अपने बल का दुरूपयोग कर उन्हें सीआरपीसी की धारा 107 के तहत जारी नोटिस को वारंट का दर्जा देते हुए उस पर गिरफ्तारी का दबाब बनाने लगे ।
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जब याचिकाकर्ता के भाई ने इस पर आपत्ति जताई ,तो पुलिस वाले उनसे गाली गलौज करने लगे। फिर देर रात सैकड़ो की संख्या में पुलिसकर्मियों ने पूरे गाँव पर रेड कर दिया और याचिकाकर्ता के भाई को घसीट कर ले गए और उसे छत की रेलिंग से धक्का दे दिया ।
जब कोर्ट ने जानना चाहा कि आखिर किस आधार पर बाढ़ के एसडीएम द्वारा याचिकाकर्ता एवं अन्य लोगों पर समन जारी किया गया,तो कोर्ट में हाजिर एसडीएम संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए ।
हाईकोर्ट ने एसडीएम के कार्यकलाप पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि “क्या आपने सीआरपीसी की धारा 107 को पढ़ा है ? आप क्या पुलिस के कहने से कुछ भी कर देंगे।अगर ऐसा रहा तो समाज में अराजकता फैलेगी। इस मामले पर अगली सुनवाई 4जनवरी,2023 को होगी।
पटना हाईकोर्ट ने व्यवसायिक जमीन को कथित रूप से अवैध तरीके से बंदोबस्त कर दिये जाने के मामले में कटिहार निगम के पूर्व चीफ कॉउंसलर समेत अन्य को नोटिस जारी किया है।
चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने विभाष चंद्र चौधरी की जनहित याचिका पर वर्चुअल रूप से सुनवाई करते हुए ये आदेश को पारित किया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि ये जमीन वर्ष 2007 से 2016 तक कटिहार नगर निगम क्षेत्र में पड़ता था, जिसकी जांच सीबीआई या भारत सरकार के ईडी से कार्रवाई जानी चाहिए।
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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह व प्रणव झा का कहना है कि ऐसे सभी जमीनों को निगम और जिला प्रशासन को अपने कब्जे में लेना चाहिए। कोर्ट ने पूर्व डिप्टी चीफ काउंसलर मंजूर खान, कटिहार नगर निगम के पूर्व मेयर बिजय सिंह व पूर्व डिप्टी मेयर श्रीमती पुष्पा देवी को भी नोटिस जारी किया है।
आज पटना हाइकोर्ट में जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के समक्ष ऑनलाइन सुनवाई के लिए सौ जमानत याचिकाएं लिस्ट किया गया था। लेकिन वीडिओ कॉन्फ्रेन्सिंग सुनवाई के दौरान इनचार्ज लोक अभियोजक के उपस्थित नहीं रहने के कारण इन जमानत याचिकाओं पर सुनवाई नहीं हो सकी।
इन सौ जमानत याचिकाओं में मात्र दो जमानत याचिकाओं पर ही सुनवाई हो सकी, जिनमें लोक अभियोजक उपस्थित रहे। कोर्ट का मानना था कि बिना सरकारी पक्ष को सुने इन जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करना उपयुक्त नहीं होता।
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कोर्ट ने इसे काफी गम्भीरता से लेते हुए इन सभी जमानत याचिकाओं को 20दिसंबर,2022 को नियमित बेंच के समक्ष रखने का निर्देश दिया।
साथ कोर्ट ने इस आदेश की प्रति महाधिवक्ता को प्रेषित करने का निर्देश दिया, ताकि वे अपने स्तर पर कार्रवाई करें।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने वरीय अधिवक्ता रमाकांत शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को विभिन्न जिलों में भूमि उपलब्धता के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के विधि सचिव को सभी जिलों के ज़िला जज,डी एम और अधिवक्ता एसोसिएशनों के साथ बैठक कर अगली सुनवाई में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने उन्हें इस बैठक के सम्बन्ध में भूमि उपलब्धता के सम्बन्ध में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता बिहार राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य के अदालतों की स्थिति अच्छी नहीं है।उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य में लगभग एक लाख से भी अधिवक्ता अदालतों में कार्य करते है।
लेकिन उनके लिए न तो बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही कार्य करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। उनके लिए पर्याप्त भवन नही है। बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है।
उन्होंने कोर्ट को बताया गया कि वकीलों को बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है। शुद्ध पेय जल,शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती हैं।
उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि अदालतों के भवन के लिए जहां भूमि उपलब्ध भी है,वहां भूमि को स्थानांतरित नहीं किया गया है। जहां भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, वहां कार्य नहीं प्रारम्भ नहीं हो पाया हैं।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध कराई गई है, किंतु अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।कोर्ट ने भूमि उपलब्धता के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है।इस मामलें पर अगली सुनवाई 21दिसंबर,2022 को होगी।
पटना हाईकोर्ट ने एक फैसले में राज्य के प्रारंभिक राजकीयकृत स्कूलों के हेड मास्टरों की नियुक्ति एवं अन्य सेवा शर्तों को निर्धारित करने वाली नई नियमावली को निष्प्रभावी करार देते हुए उसे नियमावली प्रारूप माना है।
जस्टिस पी वी वैजंत्री की खंडपीठ ने अब्दुल बाकी अंसारी की रिट याचिका को निष्पादित कर दिया।
साथ ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि 18 अगस्त, 2021 को जारी की गयी बिहार राजकीकृत प्रारम्भिक स्कूल हेड मास्टर उसकी ( नियुक्ति , स्थानांतरण अनुशासनात्मक कार्यवाही व अन्य सेवा शर्तें) नियमावली को प्रारूप के तौर परकमी उस प्रकाशित करें।
साथ ही उस पर अगले दो महीने में सार्वजनिक टिप्पणी और सलाह आमन्त्रित कर उस पर पूरे विचार विमर्श कर उस कानून या अंतिम नियमावली तैयार कर अधिसूचित करें।
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याचिकाकर्तागण उर्दू टीईटी परीक्षा में उत्तीर्ण हुए थे और 2021 में जारी की गई इस नियमावली में अनुभव की न्यूनतम 8 वर्ष की अवधि को मनमाना पूर्ण कहते हुए इस हेड मास्टर नियुक्ति नियमावली की संवैधानिकता को चुनौती दिया था।
कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से पूछा था कि 18 अगस्त 2021 को जारी की गई उक्त नियमावली को कानून का दर्जा देने से पहले क्या इसके प्रारूप को प्रकाशित कर सार्वजनिक सलाह आमंत्रित किया गया था या नहीं?
राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि ऐसी कोई प्रक्रिया नही पूरी की गयी थी।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी नियमावली एक बड़े और व्यापक पैमाने के शिक्षक और उनके वर्ग को प्रभावित करेगी। इस तरह के नियम को जारी करने से पहले या उसे कानूनी जामा पहनाने से पहले सरकार को खुले आम लोगों के बीच में उनसे सलाह मशविरा करना चाहिए था ।
इसीलिए हाई कोर्ट ने 18 अगस्त, 2021 को जारी इस नियमावली को बेअसर करार देते हुए इसे ड्राफ्ट रूल का दर्जा दिया है। कानून बनने से पहले कानून का मसविदा जो तैयार होता है, वही दर्जा अब इस नियमावली को तत्काल 2 महीने तक रहेगा।
इस दौरान राज्य के 10 हज़ार से भी अधिक प्रारंभिक स्कूलों जो राजकीयकृत होने के बाद पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर चल रहे हैं ,वहां के हेड मास्टर नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ेगा।
पटना हाइकोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में हो रहे विलम्ब पर गहरी नाराजगी जाहिर की है।प्रतिज्ञा नामक संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
कोर्ट ने मामलें को गम्भीरता से लेते हुए निर्माण कार्य का जायजा लेने के लिए वकीलों की तीन टीम गठित की हैं।अधिवक्ता मनीष कुमार इन टीमों के साथ पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण करेंगे।
इस टीम सदस्य अलग अलग निर्माण कार्यों का निरीक्षण करेंगे।कोर्ट ने निरीक्षण के दौरान वकीलों की सहायता के लिए सम्बंधित जिले के अधिकारीगण मौजूद रहेंगे। ये टीम निरीक्षण करने के बाद अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश करेगी।
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कोर्ट ने कार्य की धीमी गति पर कॉन्ट्रेक्टर को फटकार लगायी।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह से तय समय सीमा के तहत सड़क निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो पायेगा।
गौरतलब है कि इस सड़क निर्माण के तय समय सीमा 31मार्च ,2023 हैं।एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी भी कोर्ट में उपस्थित थे।उन्होंने आश्वास्त किया कि सड़क निर्माण का कार्य में दो तीन माह का विलम्ब हो सकेगा,लेकिन जल्दी पूरा करने का पूरा कोशिश किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि जितने भी आदमी और मशीनों की जरूरत हो,उन्हें इस सड़क निर्माण के कार्य में लगा कर समय पर कार्य पूरा किया जाए।इस मामलें पर अगली सुनवाई 19 दिसम्बर,2022 को की जाएगी।
कोर्ट ने बच्चों और उसके परिवार की पहचान को सार्वजनिक नहीं करने का निर्देश दिया।साथ ही पुलिस अधिकारी या कोई अन्य जो क़ानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने में शामिल पाया जाता है, उसके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई की जाए।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने नाबालिग के माँ की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।
आवेदिका की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पूर्वी चम्पारण के पुलिस ने नाबालिग एंव उसके परिजनों का नाम उजागर कर दिया। एक सोशल मीडिया हाउस ने उसे पूरी खबर बना कर चला दी,जबकि पॉक्सो कानून के तहत किसी का निजता और गोपनीयता बनाए रखने का नियम है ।
इन नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सभी को करना अनिवार्य है, लेकिन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा हैं।प्रक्रियाओं का पालन नहीं किये जाने के परिणामस्वरूप, अपराध के शिकार नाबालिग का नाम उजागर किया जा रहा है।
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उनका कहना था कि पॉक्सो कानून की धारा 23 का उल्लंघन किया जा रहा हैं। मीडिया पीड़िता का पहचान का खुलासा कर समाचार प्रकाशित करने में संयम नहीं दिखा रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ मीडिया भी पोक्सो के प्रावधानों और उसके तहत नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के निर्माण,विकास व सुरक्षा के मामले सुनवाई 15 दिसंबर,2022 को होगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ द्वारा अभिजीत कुमार पाण्डेय की जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।
पिछली सुनवाई में पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में न तो एक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है और ना ही ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है।उन्होंने बताया कि देश के कई बड़े शहरों में अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है,बल्कि छोटे छोटे शहरों में भी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है।
साथ कई शहरों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की सुबिधा उपलब्ध है। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पटना का एयरपोर्ट सुरक्षा के लिहाज से बहुत सही नहीं है।राजगीर,बिहटा और पुनपुन में एयरपोर्ट के विकल्प के रूप में विचार तो हुआ,लेकिन अंततः अंतिम रूप से कोई परिणाम नहीं आया।
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राज्य सरकार की ओर से पक्ष प्रस्तुत करते हुए एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कहा कि याचिकाकर्ता की ये माँग सही नहीं है कि खास जगह ही एयरपोर्ट बने या यात्रा के साधन का कैसे विकास हो।ये नीतिगत विषय होते है,जिस पर सरकार ही विचार कर कार्रवाई कर सकती है।केंद्र सरकार के अधिवक्ता के एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट हो कि नहीं, ये विचार का मुद्दा हो सकता है,लेकिन यात्रा किसी विशेष रूप हो,ये विचार के योग्य नहीं है।
पिछली सुनवाई में रूडी ने कहा था कि गया अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी आज तक कोई अंतर्राष्ट्रीय विमान का परिचालन नहीं हुआ है।अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट होने के बावजूद यहां अंतर्राष्ट्रीय विमान नहीं चलते हैं ।
उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर अपना स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है । पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सभी पक्षों से जानना चाहा था कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट एवं अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट स्थापित करने के लिए क्या क्या अनिवार्यता हैं ?
पटना हाइकोर्ट ने वैध प्रमाण पत्र नहीं होने के बावजूद बिहार स्टेट फार्मेसी कॉउन्सिल के सदस्य के लिए चुनाव हेतु वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने के मामलें पर सुनवाई की। इसकी जांच करवाने को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार व फार्मेसी कॉउंसिल से जवाब तलब किया है।
चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुबोध कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि कुछ मामले में तो फार्मासिस्ट के तौर पर निबंधन भी रद्द होता है।
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इसकी वजह से फार्मेसी के हजारों विद्यार्थी वोट के अधिकार से वंचित रह जाते हैं।इस मामलें पर चार सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।
पटना हाइकोर्ट में राज्य के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गो के निर्माण,विकास और मरम्मती से सम्बंधित मामलों पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई की।
कोर्ट ने मुजफ्फरपुर बरौनी राष्ट्रीय राजमार्ग का डीपीआर अब तक नहीं तैयार किये जाने पर राज्य के विकास आयुक्त और एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी को कल तलब किया है।
कोर्ट को जानकारी दी गई कि छपरा सिवान गोपालगंज रोड के निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है।इस राजमार्ग का उदघाटन होना बाकी है।जोगबनी फारबिसगंज एन एच बन चुका है और इस पर वाहनों का आना जाना शुरू हो चुका है।
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पटना बख्तियारपुर एन एच का कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई,लेकिन ये कार्य पूरा नहीं हुआ है।साथ मुंगेर के पास गंगा नदी पर बने पुल के पहुँच पथ के पास तीन हाई पावर ट्रांसमिशन री- लोकेट का मामला है।
स्थानीय निकाय/ नगरपालिका में वार्ड सदस्यों समेत अन्य पदों के लिए राज्य में होने जा रहे चुनाव में आचार संहिता लागू करने के लिए एक जनहित याचिका पटना हाई कोर्ट में दायर की गई है। ये जनहित याचिका शम्भू सिद्धार्थ ने दायर किया है।
इस जनहित याचिका में सरकार, मंत्रियों, विधानसभा व विधान परिषद के सदस्यों समेत अधिकारियों द्वारा सत्ताधारी महागठबंधन से जुड़े उमीदवारों को फायदा पहुंचाने हेतु सत्ता का दुरुपयोग किये जाने की अनुमति नहीं देने की माँग की गई है।
याचिकाकर्ता के वरीय अधिवक्ता एस डी संजय ने बताया कि जनहित याचिका में ये आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार द्वारा सत्ता का दुरुपयोग करते हुए विभिन्न प्रकार के योजनाओं का उदघाटन किया जा रहा है।साथ ही स्थानीय निकाय के चुनाव की घोषणा के बाद भी आचार संहिता का उल्लंघन कर खास वर्ग के लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए योजनाओं की घोषणा और प्रचार – प्रसार किया जा रहा है।
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राजगीर में 27 नवंबर, 2022 को गंगा वाटर सप्लाई स्कीम योजना का उदघाटन,राजकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल का नालंदा जिला में 12 दिसंबर, 2022 को उदघाटन किया गया।साथ ही, 13 दिसंबर, 2022 को मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र वितरण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम कथित रूप से आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए आयोजित किया गया।
इस मामलें में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आदेश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता के वरीय अधिवक्ता एस डी संजय का यह भी कहना है कि एक ओर आदर्श अचार सहिंता का पालन करवाने के लिए टीम का गठन किया गया है, वही दूसरी ओर मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री द्वारा इसका उल्लंघन किया जा रहा है।राज्य चुनाव आयोग आंख बंद करके बैठा हुआ है और आयोग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं कि जा रही है।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की। वरीय अधिवक्ता रमाकांत शर्मा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य के विधि सचिव को विभिन्न जिलों के ज़िला जजों,डी एम व बार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने उन्हें इस बैठक के सम्बन्ध में भूमि उपलब्धता के सन्दर्भ में अगली सुनवाई में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता बिहार राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य के अदालतों की स्थिति अच्छी नहीं है।
वरीय अधिवक्ता शर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य में लगभग एक लाख से भी अधिवक्ता अदालतों में कार्य करते है।लेकिन उनके लिए न तो बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही कार्य करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।भवन की भी काफी कमी है। बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है।
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उन्होंने कोर्ट को बताया गया कि वकीलों को बुनियादी सुविधाओं का काफी अभाव है। शुद्ध पेय जल,शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती हैं।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि अदालतों के भवन के लिए जहां भूमि उपलब्ध भी है,वहां भूमि को स्थानांतरित नहीं किया गया है। जहां भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, वहां कार्य नहीं प्रारम्भ नहीं हो पाया हैं।
कोर्ट ने इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य के विधि सचिव को तलब किया।उन्होंंने कोर्ट को बताया कि इस सम्बन्ध में कार्रवाई की जा रही है।
कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध कराई गई है, किंतु अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।कोर्ट ने भूमि उपलब्धता के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया।
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध धनराशि का उपयोग नहीं होगा,तो अगले वित्तीय वर्ष में ये धनराशि उपलब्ध नहीं हो पाएगी।इस मामलें पर अगली सुनवाई 15दिसंबर,2022 को की जाएगी।
पटना हाइकोर्ट में हर्ष फायरिंग को रोकने हेतु दायर जनहित याचिका की सुनवाई हुई। इस सम्बन्ध में हाईकोर्ट ने राज्य के 11 जिलों के डिस्ट्रिक्ट व सेशन जजों से उनके जिलों में हुए हर्ष फायरिंग की घटनाओं के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसंधान और ट्रायल का रिपोर्ट तलब किया है।
चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना सहित बिहार के 11 जिले के डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज को आदेश दिया था कि वह अपने-अपने जिला में हुए हर्ष फायरिंग की घटनाओं पर दायर मामले की त्वरित अनुसंधान और उस मामले में मुकदमे की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।साथ ही एक समय सीमा के अंदर कार्य योजना तैयार कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में भी पटना, वैशाली ,सुपौल ,पूर्वी और पश्चिम चंपारण, मधेपुरा पूर्णिया ,जमुई ,लखीसराय सहित अन्य जिलों के डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज को निर्देश दिया था कि वे अपने-अपने जिलों के डीएम और एसपी के साथ एक बैठक कर यह समयसीमा को सुनिश्चित करें।
उनके जिलों में हर्ष फायरिंग पर हुए एफ आई आर के अनुसंधान को एक समय सीमा के भीतर पूरा कर आरोपियों को ट्रायल हेतु भेजा जाए।
वही पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के साथ सुनवाई करते हुए जिला अधिकारी को यह निर्देश दिया गया कि वे सुनिश्चित करें कि हर्ष फायरिंग के आरोपियों के खिलाफ चल रहे ट्रायल की हो सके ,तो रोज़ाना सुनवाई हो और गवाही में विलम्ब नही हो।
हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के तहत में इन सभी जिलों के डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज ने बैठक में क्या क्या निर्णय लिए और इस बैठक कहां तक प्रभावकारी रहा, इस पर भी रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
पटना हाइकोर्ट ने लखीसराय के बालिका विद्यापीठ के पूर्व सचिव स्व. कुमार शरद चन्द्र के चर्चित हत्याकांड की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने उषा शर्मा की याचिका पर सुनवाई करने के बाद आदेश दिया।
कोर्ट ने इससे पूर्व जांच कर रही जांच एजेंसी सीआईडी को आदेश के दो सप्ताह में सारे रिकॉर्ड और कागजात सीबीआई को उपलब्ध कराने का आदेश दिया।
कोर्ट ने सीबीआई के निर्देशक को ये निर्देश दिया कि वे शीघ्र एक योग्य अधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित कर इस मामलें की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराए।इसकी रिपोर्ट सम्बंधित निचली अदालत को सौंपने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि इस हत्याकांड की जांच में पहले आठ साल का विलम्ब हो गया है।इसलिए इस मामलें की जांच त्वरित गति से किये जाने की जरूरत है।
ये घटना 2अगस्त,2014 को घटी थी, जब दो लोग कुमार शरद चन्द्र के घर में घुस कर गोली मार कर हत्या कर दी थी।उनकी पत्नी उषा शर्मा घटना के समय घर में थी।उन्होंने गोली मारने वाले को पहचान भी लिया था।
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इस सम्बन्ध में लखीसराय पुलिस थाने में कांड संख्या 443/ 2014/ दर्ज कराई गई।उनकी हत्या के पीछे बालिका विद्यापीठ के संपत्ति और भूमि का विवाद था।
इस मामलें शम्भू शरण सिंह, श्याम सुंदर प्रसाद और राजेंद्र सिंघानिया को निजी प्रतिवादी बनाया गया।कुछ दिनों की जांच के बाद इस मामलें की जांच का जिम्मा सीआईडी को 2014 में सौंप दिया गया।
लेकिन सीआईडी द्वारा मामलें की जांच में कोई तत्परता नहीं दिखाई गई।2016 से 2019 तक तो केस डायरी भी नहीं लिखी गई।2014 में ये हत्या हुई थी,लेकिन दिसंबर,2022 तक इस मामलें में कोई प्रगति नहीं हुई।चूंकि इस मामलें प्रभावशाली लोग शामिल थे,इसलिए जांच में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पायी।आठ सालों में इस हत्याकांड की जांच नहीं पूरी हुई।
हाईकोर्ट ने इस मामलें को गंभीरता से लेते हुए जांच का सीबीआई को सौंपते हुए सीआईडी को दो सप्ताह के भीतर सारे रिकॉर्ड और कागजात सीबीआई को उपलब्ध कराने को कहा।इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामलें को निष्पादित कर दिया।
चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज किशोर श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
कोर्ट ने इससे पूर्व की सुनवाई में स्पष्ट किया किया था कि अतिक्रमणकारियों को पूरा अतिक्रमित भूमि खाली करनी होगी।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया था कि कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमणकारियों को ये पूरी जमीन को हर हाल में खाली करना होगा।
कोर्ट को भी सहानुभूति है, लेकिन इस सरकारी जमीन को खाली करना होगा। इस मामले में कोर्ट ने पूर्व में ही कोर्ट ने दानापुर के अंचलाधिकारी को अतिक्रमण हटाकर अनुपालन के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया था।
इस नहर बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति को दानापुर के अंचलाधिकारी ने भी स्वीकार किया है। सम्बंधित अंचलाधिकारी ने 5 मई, 2022 को ही कोर्ट को स्वयं बताया था कि अगले चार सप्ताह में कम से कम 70 फीसदी अतिक्रमण को हटा दिया जाएगा।
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सोन नहर प्रमंडल, खगौल, पटना द्वारा अतिक्रमण वाद दायर करने के लिए दानापुर के अंचलाधिकारी को लिखा गया था, लेकिन अभी तक इसे नहीं हटाया गया।
सोन नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता द्वारा दानापुर के अंचलाधिकारी को अतिक्रमणकारियों की सूची भी अंचलाधिकारी को दी गई है।
कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्र में विभागीय मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर किये गए अतिक्रमण को अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध अतिक्रमण वाद दायर कर ठोस अग्रेतर कार्रवाई करने हेतु अनुरोध किया था, ताकि विभागीय भूमि अतिक्रमणकारियों से मुक्त हो सके।
पटना हाइकोर्ट में बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई 14 दिसंबर,2022 को की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ द्वारा आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई पर गहरा असंतोष जाहिर किया था। कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को अबतक की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने का निर्देश दिया था।
याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट ने जो भी आदेश दिया,उस पर राज्य सरकार के द्वारा कोई प्रभावी और ठोस कदम नहीं उठाए गए है।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को पूरी जानकारी देने को कहा था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था।
साथ ही कोर्ट ने इसमें सुधारने के उपाय पर सलाह देने को कहा था।याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने बताया कि नेशनल मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम ही के अंतर्गत राज्य के 38 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम चल रहा हैं।लेकिन इसमें स्टाफ की संख्या नाकाफी ही है। हर जिले में सात सात स्टाफ होने चाहिए।
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उन्होंने बताया था कि राज्य सरकार का दायित्व है कि वह मेन्टल हेल्थ केयर एक्ट के तहत कानून बनाए।साथ ही इसके लिए मूलभूत सुविधाएं और फंड उपलब्ध कराए।लेकिन अबतक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
कोर्ट को ये भी बताया गया था कि सेन्टर ऑफ एक्सलेंस के तहत हर राज्य में मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कॉलेज है।लेकिन बिहार ही एक ऐसा राज्य हैं,जहां मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कोई कालेज नहीं है।
जबकि प्रावधानों के तहत राज्य सरकार का ये दायित्व हैं।पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले फंड में कमी आयी है,क्योंकि फंड का राज्य द्वारा पूरा उपयोग नहीं हो रहा था।
पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि बिहार की आबादी लगभग बारह करोड़ हैं।उसकी तुलना में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ नहीं के बराबर है।
पटना हाइकोर्ट ने मोतिहारी शहर मे अवस्थित मोतीझील के दयनीय रखरखाव और प्रशासनिक उपेक्षा पर गहरा असंतोष जाहिर किया।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता कुमार अमित की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि प्रधान सचिव नगर विकास विभाग, पर्यटन,जल संसाधन, वन विभाग इत्यादि के साथ बैठक कर इस झील को अतिक्रमणमुक्त करने और जीर्णोद्धार कराने की कार्रवाई करें।
अगली सुनवाई में की गई कार्रवाई का रिपोर्ट करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया गया है।अधिवक्ता कुमार अमित ने कोर्ट को बताया कि मोतिहारी शहर में एक रमणीय और प्राकृतिक झील है,जिसे मोतीझील के नाम से जाना जाता है।प्रशासनिक उपेक्षा और लगातार रखरखाव नहीं होने के कारण ये झील अपना अस्तित्व खोता जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि न सिर्फ इस झील क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हुआ है,बल्कि शहर की गंदगी और अस्पतालों का कचरा झील में ही गिराया जाता है।जंगल झाड,लगातार बढ़ते प्रदूषण और कीचड के कारण इसके अस्तित्व पर ही संकट आ गया है।
अधिवक्ता कुमार अमित ने कोर्ट को जानकारी दी कि यहाँ का नगर निगम भी इसकी देख भाल नहीं करता है।प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार इस सुंदर झील का अस्तित्व कर सकता है।
The BiharNews Post : December 8, 2022 पटना हाईकोर्ट ने पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई करते हुए जांच की प्रगति पर असंतोष जाहिर किया। जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई की।
आज की सुनवाई में कोर्ट में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित रही।
कोर्ट ने कहा कि इस मामलें की समग्रता में जांच नहीं किया गया हैं।पुलिस अधिकारियों को विस्तार और गहराई से जांच पड़ताल करने की आवश्यकता है।
अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने बताया कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी खराब हैं।
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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एस आई टी टीम का नेतृत्व करने वाली पुलिस अधिकारी को कोर्ट ने अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने को कहा था।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट भी तलब किया था।
हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।
इस मामले की अगली सुनवाई में 12,जनवरी,2022 को की जाएगी।
The BiharNews Post : December 8, 2022 पटना हाइकोर्ट ने पुलिस के भू माफिया के साथ कथित रूप से मिलीभगत और अवैध रूप से मकान ध्वस्त करने के मामलें पर सुनवाई की। जस्टिस संदीप कुमार ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को घटना की वीडिओ को पेनड्राइव में राज्य सरकार के अधिवक्ता और प्रतिवादियों को देने का निर्देश दिया।
इस मामलें याचिकाकर्ता सजोगा देवी है। इस मामलें पर अगली सुनवाई 20दिसम्बर, 2022 को की जाएगी।
आज कोर्ट में पूर्वी पटना के एस पी, पटना सिटी के सी ओ और अगमकुआं थाना के एस एच ओ के साथ इस घटना में गए पुलिस अधिकारियों कोर्ट में उपस्थित हो कर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
कोर्ट ने कहा कि बिना किसी न्यायिक या अर्ध न्यायिक आदेश के मकान तोड़ा जाना अवैध है।उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह पुलिस कार्रवाई करेगी,तो अराजकता फैलेगी।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अवैध रूप से मकान ध्वस्त करने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब ऐसे ही पुलिस काम करेगी,तो सिविल कोर्ट बंद कर दिया जाए।
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आज कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से इस बात से इंकार किया कि इस घटना में बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया।उन्होंने कोर्ट को घटना की तस्वीरें भी दिखाई गई।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस के मनमाने रवैए पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्या यहाँ भी बुलडोजर चलेगा।पुलिस थाने मे पैसा दे कर मनमाने काम करवाए जा सकते है।क्या सारी ताकत पुलिस को मिल गई है क्या।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि भू माफिया के शह पर याचिकाकर्ता व उसके परिवार वालो के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किया गया है। कोर्ट ने इस प्राथमिकी पर कोई कार्रवाई नहीं करने का आदेश देते हुए उन्हें गिरफ्तार नहीं करने का आदेश दिया।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 दिसंबर,2022 को फिर होगी।
The BiharNews Post : December 7, 2022 पटना हाइकोर्ट ने पटना समाहरणालय बार एसोसिएशन भवन को बिना वैकल्पिक व्यवस्था किये तोड़े जाने के मामलें पर सुनवाई की। उपेंद्र नारायण सिंह की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज्य सरकार को वकीलों के बैठने और कार्य करने की वैकल्पिक व्यवस्था किये जाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इस मामलें पर विशेष रूप से सुनवाई की।
याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि समाहरणालय बार एसोसिएशन भवन को बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किये तोड़े जाना सही नहीं है।
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कोर्ट ने प्रशासन और एसोसिएशन के आपसी सहमति के वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था की जाए।वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने जानकारी दी कि तत्काल विकास भवन में लगभग दो सौ वकीलों के बैठने की व्यवस्था हो रही है।
उन्होंने कहा कि वकीलों के स्टाफ,टाईपिस्ट आदि के लिए भी बैठने और कार्य करने की व्यवस्था किये जाने की आवश्यकता है।वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएँ और आधुनिक डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना चाहिए,ताकि वकील अपना पेशागत कार्य सही तरीके से कर पाये।
रिपोर्ट के मुताबिक महिलायें ऑपरेशन के समय दर्द से कराहती रहीं, लेकिन उसके बाबजूद भी डॉक्टर ने बिना बेहोश किए ही ऑपरेशन कर दिया । इस तरह की लापरवाही से पूरा सिस्टम कटघरे में आ गया है ।
कोर्ट ने प्रशासन और एसोसिएशन को आपसी सहमति से इन मुद्दों को सुलझा कर वकीलों की समस्यायों का निदान निकालने का निर्देश दिया।इसके साथ ही कोर्ट ने इस जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया।
The BiharNews Post : December 7, 2022 खगड़िया । खगड़िया के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी के लिए पहुंची महिलाओं को बिना बेहोशी का इंजेक्शन दिए ही ऑपरेशन करने के मामले पर पटना हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया ।
चीफ जस्टिस संजय क़रोल एवं जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने अखबारों में छपी रिपोर्ट को आधार बनाने हुए इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है ।
रिपोर्ट के मुताबिक महिलायें ऑपरेशन के समय दर्द से कराहती रहीं, लेकिन उसके बाबजूद भी डॉक्टर ने बिना बेहोश किए ही ऑपरेशन कर दिया । इस तरह की लापरवाही से पूरा सिस्टम कटघरे में आ गया है ।
मानवता को ताक पर रखकर महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ हुए इस खिलवाड़ पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए केंद्र ऐवं राज्य सरकार को जवाव तलब किया है । इस मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी ।
The BiharNews Post : December 7, 2022 पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के निर्माण,विकास व सुरक्षा के मामले सुनवाई अधूरी रही।। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की जा रही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में न तो एक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है और ना ही ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है।उन्होंने बताया कि देश के कई बड़े शहरों में अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है,बल्कि छोटे छोटे शहरों में भी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है।
साथ कई शहरों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की सुबिधा उपलब्ध है। पूर्व की सुनवाई में उन्होंने कोर्ट को बताया कि पटना का एयरपोर्ट सुरक्षा के लिहाज से बहुत सही नहीं है।राजगीर,बिहटा और पुनपुन में एयरपोर्ट के विकल्प के रूप में विचार तो हुआ,लेकिन अंततः अंतिम रूप से कोई परिणाम नहीं आया।
राज्य सरकार की ओर से पक्ष प्रस्तुत करते हुए एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कहा कि याचिकाकर्ता की ये माँग सही नहीं है कि खास जगह ही एयरपोर्ट बने या यात्रा के साधन का कैसे विकास हो। ये नीतिगत विषय होते है,जिस पर सरकार ही विचार कर कार्रवाई कर सकती है।
केंद्र सरकार के अधिवक्ता के एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट हो कि नहीं, ये विचार का मुद्दा हो सकता है,लेकिन यात्रा किसी विशेष रूप हो,ये विचार के योग्य नहीं है।
पिछली सुनवाई में रूडी ने कहा था कि गया अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी आज तक कोई अंतर्राष्ट्रीय विमान का परिचालन नहीं हुआ है।अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट होने के बावजूद यहां अंतर्राष्ट्रीय विमान नहीं चलते हैं । राज्य सरकार भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर अपना स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है ।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सभी पक्षों से जानना चाहा था कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट एवं अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट स्थापित करने के लिए क्या क्या अनिवार्यता हैं ?
The BiharNews Post : December 7, 2022 पटना हाईकोर्ट ने पटना के फ्रेजर रोड स्थित तंदूर हट को अवैध रूप से खाली कराने व तोड़े जाने के मामलें पर सुनवाई की।जस्टिस ए अमानुल्लाह की खंडपीठ ने राज्य सरकार व बिहार राज्य वित्त निगम को क्षतिपूर्ति के मामलें पर हलफनामा अगली सुनवाई में दायर करने का निर्देश दिया।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए बिहार राज्य वित्त आयोग को एम डी से बताने को कहा कि इस तरह की कार्रवाई किस अधिकार के तहत किया।कोर्ट ने प्रशासन द्वारा इस तरह की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की।
राज्य सरकार की ओर से तंदूर हट को क्षतिपूर्ति देने की बात कही गई।कोर्ट ने इस सम्बन्ध में अपनी कार्य योजना अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना के जिलाधिकारी और एसएसपी व बिहार स्टेट फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को तलब किया था।
#PatnaHighCourt
वरीय अधिवक्ता एस डी संजय ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि कानून के विरुद्ध जाकर अवैध ढंग से इस कार्य को अंजाम दिया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 4 सितम्बर,2022 को रविवार को छुट्टी के दिन प्रशासन ने तंदूर हट को तोड़ने की कार्रवाई की।
उन्होने कहा कि पटना के जिलाधिकारी व बिहार स्टेट फाइनेंसियल कॉर्पोरेशन द्वारा किसी कानून का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कॉर्पोरेशन को सिविल कोर्ट के समक्ष रेस्टोरेंट को खाली करवाने के लिए जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री सेक्रेटरी के इशारे पर प्रबंध निदेशक द्वारा पटना के जिलाधिकारी को रेस्टोरेंट को खाली करवाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध करवाया गया था।
वरीय अधिवक्ता एस डी संजय का कहना था कि न सिर्फ रेस्टोरेंट को खाली करवाया गया, बल्कि रेस्टोरेंट को भी तोड़ दिया गया।
इस मामले पर अगली सुनवाई आगामी 15 दिसंबर,2022 को की जाएगी।
The BiharNews Post : December 6, 2022 पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पटना समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के निर्माण, विकास, सुरक्षा व नवीनीकरण के मामले पर सुनवाई कल भी जारी रहेगी। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।
पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में न तो एक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है और ना ही ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है। उन्होंने बताया कि देश के कई बड़े शहरों में अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, बल्कि छोटे छोटे शहरों में भी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है। साथ कई शहरों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की सुबिधा उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि पटना का एयरपोर्ट सुरक्षा के लिहाज से बहुत सही नहीं है। राजगीर,बिहटा और पुनपुन में एयरपोर्ट के विकल्प के रूप में विचार तो हुआ,लेकिन अंततः अंतिम रूप से कोई नतीजा नहीं निकला।
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राज्य सरकार की ओर से पक्ष प्रस्तुत करते हुए एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कहा कि याचिकाकर्ता की ये माँग सही नहीं है कि खास जगह ही एयरपोर्ट बने या यात्रा के साधन का कैसे विकास किया जाए।ये नीतिगत विषय होते है,जिस पर सरकार विचार कर कार्रवाई करती है।
केंद्र सरकार के अधिवक्ता के एन सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट हो कि नहीं, ये विचार का मुद्दा हो सकता है,लेकिन यात्रा किसी विशेष रूप हो,ये विचारणीय नहीं है।
पिछली सुनवाई में रूडी ने कहा था कि गया अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी आज तक कोई अंतर्राष्ट्रीय विमान का परिचालन नहीं हुआ है।अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट होने के बावजूद यहां अंतर्राष्ट्रीय विमान नहीं चलते हैं । राज्य सरकार भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर अपना स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है ।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सभी पक्षों से जानना चाहा था कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट एवं अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट स्थापित करने के लिए क्या क्या अनिवार्यता हैं ?
The BiharNews Post : December 6, 2022 पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा परीक्षा समय पर नहीं लेने और छात्रों को डिग्री निर्गत करने में हो रहे विलम्ब पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विवेक राज की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि छात्रों का भविष्य इस तरह से खराब नहीं होना चाहिए।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के सभी सम्बंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने कहा कि तीन -चार सालों से कई पाठ्यक्रमों की परीक्षा नहीं लेना गंभीर मामला है।परीक्षा लेने के बाद भी रिजल्ट प्रकाशित नहीं किया जाना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड होगा।कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों के प्रशासन को निर्धारित समय में परीक्षा ले कर रिजल्ट प्रकाशित करने का निर्देश दिया।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जो कुलपति हलफनामा दायर नहीं करेंगे,उन पर पाँच हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।ये धनराशि उनके व्यक्तिगत वेतन से काटा जाएगा।
#PatnaHighCourt
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शाश्वत ने बताया कि राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों की परीक्षा ली जाती है।एक तो इन विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक सत्र ऐसे भी विलम्ब से चल रहे है।परीक्षाएं भी निर्धारित समय पर नहीं ली जा रही है।
उन्होंने के कोर्ट को बताया कि परीक्षाएं लेने और रिजल्ट देने के बाद भी ये विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को डिग्रियां देने में विलम्ब करते हैं।इससे जहां छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है,वहीं इन छात्रों के भविष्य पर भी बुरा असर पड़ता हैं।
विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश या नौकरियों में डिग्री मांगी जाती हैं।लेकिन डिग्री नहीं होने के कारण उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश या नौकरियों से वंचित रह जाना पड़ता हैं।
इसलिए ये आवश्यक है कि छात्रों को सम्बंधित विश्वविद्यालय प्रशासन समय पर डिग्री उपलब्ध कराएं।इस मामलें पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।
The BiharNews Post : December 5, 2022 पटना हाईकोर्ट ने भागलपुर के चर्चित सैनडिश कमपॉउन्ड क्षेत्र में अनधिकृत रूप से बनाए गए निर्माण के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने जनहित याचिकाकर्ता गोयनका की याचिका पर सुनवाई करते भागलपुर नगर निगम के आयुक्त को की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने भागलपुर नगर निगम के आयुक्त को अगली सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस मामलें पर सुनवाई करते हुए हुए अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगा दिया था।याचिकाकर्ता की अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने बताया कि भागलपुर में ये एक सार्वजानिक पार्क हैं,जहां यहाँ के नागरिक टहलने,खेलने और मनोरंजन के लिए आते है।
उन्होंने कहा कि वे पार्क के सौंदर्यीकरण का समर्थन करती है,लेकिन पार्क के मूल उद्देश्य में परिवर्तन नहीं हो। अधिवक्ता शिल्पी केशरी ने बताया कि कोर्ट ने इस मामलें पर 2004 में भी सुनवाई की थी।कोर्ट ने पार्क के क्षेत्र के भीतर किसी तरह के निर्माण पर रोक लगा दिया था।
#PatnaHighCourt
कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि पार्क का जिस उद्देश्य के बनाया गया है, उसी के लिए उपयोग हो।उन्होंने कोर्ट को बताया कि बाद में प्रशासन ने जन उपयोगी निर्माण के नाम पर कुछ निर्माण कार्य करने की अनुमति कोर्ट से ले ली।
लेकिन बाद में अन्धाधुंध और मनमाने तरीके से निर्माण होने लगे,जिससे इस पार्क का उद्देश्य ही खत्म हो गया।उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि भागलपुर नगर निगम को 29 सितम्बर,2021 को कोर्ट के आदेश को पालन करने के सम्बन्ध में निर्देश दिया जाए।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 15 दिसंबर,2022 को की जाएगी।
The BiharNews Post : December 5, 2022 पटना हाईकोर्ट ने मुज़फ़्फ़रपुर जिला के अंतर्गत राजन साह की 6 वर्षीय पुत्री खुशी कुमारी के चर्चित अपहरण के मामलें के जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है।
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों विरुद्ध विभागीय कार्यवाही के लिए एस एस पी, मुजफ्फरपुर को निर्देश दिया है।
कोर्ट ने सीबीआई को इस मामलें मे यथाशीघ्र कार्रवाई कर अपहृत बालिका को ढूंढने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने एस एस पी, मुजफ्फरपुर को इस मामलें से सभी रिकॉर्ड सीबीआई को सौपने का निर्देश दिया है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई और निर्देशक,सी एफ एस एल,नई दिल्ली को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था।
पूर्व की इस मामलें की सुनवाई के दौरान एसएसपी मुज़फ़्फ़रपुर जयंतकांत ऑनलाइन उपस्थित रहे थे। अपहृता के वकील ओम प्रकाश कुमार ने कोर्ट को बताया कि एसएसपी,मुजफ्फरपुर द्वारा आज़तक सिर्फ कागजी कार्रवाई किया गया है।
उन्होंने बताया कि लगभग 3 महीना से सिर्फ पॉलीग्राफी टेस्ट का बहाना बना कर कोर्ट का समय बर्बाद किया गया।
पिछली सुनवाई मे अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि एक ऑडियो रेकॉर्डिंग है ,जिसमे संदिग्ध राहुल कुमार की आवाज है।वह अपहृत खुशी के बारे में जानता है।इस पर कोर्ट ने आदेश दिया था कि वह ऑडियो क्लिप एस एस पी को दिया जाए। एसएसपी ऑडियो की पुष्टि करके करवाई करें।
#PatnaHighCourt
लेकिन जो शपथ पत्र एसएसपी के द्वारा हाई कोर्ट में फ़ाइल किया गया था ,उसमे ऑडियो क्लिप का कोई जिक्र नही किया गया।
कोर्ट ने पाया कि इस कांड का उद्भेदन अब एस एस पी, मुज़फ़्फ़रपुर द्वारा नही हो सकता है।कोर्ट ने पिछली सुनवाई में यह भी आदेश दिया था कि 14.10.2022 तक सभी कागजात सीबीआई को मुहैया करवाई जाए।कोर्ट ने सीबीआई के वकील को भी कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था।
यह मामला 16 फरवरी 2021 को 5 साल की खुशी का अपहरण से जुड़ा है। इसका सुराग आज तक नहीं मिला है। खुशी के पिता मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस के कार्यशैली से संतुष्ट नही थे, जिसके कारण खुशी के पिता राजन साह ने पटना हाइकोर्ट में याचिका दायर किया था।ये याचिका अधिवक्ता ओमप्रकाश कुमार ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर किया था।
इसमे याचिकाकर्ता ने मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस के कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बच्ची को जल्द से जल्द ढूंढ़वाने का आग्रह किया था।
दिसम्बर 2, 2022 । पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार के वकीलों की फीस में पिछले 14 सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं होने के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य के चीफ सेक्रेट्री को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता एस एस सुंदरम की जनहित याचिका पर सुनवाई की।
कोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार सहित अन्य राज्य राज्य सरकार के वकीलों की तुलना में यहाँ के सरकारी वकीलों को काफी कम फीस का भुगतान किया जाता है। कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर ऑनलाइन सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि 2 हफ्ते के अंदर इस जनहित याचिका पर विस्तृत जवाब दे।
याचिककर्ता की ओर से पूर्व महाधिवक्ता एवं सीनियर एडवोकेट पी के शाही ने बहस करते हुए कहा कि पटना हाई कोर्ट में ही केंद्र सरकार के वकीलों की जहाँ रोजाना फीस न्यूनतम 9 हज़ार रुपये है, वहाँ बिहार सरकार के वकीलों को इसी हाई कोर्ट में रोजाना अधिकतम फीस रू 2750 से 3750 तक ही है।
वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट को जानकारी दी कि पंजाब व हरियाणा, दिल्ली सहित पड़ोसी राज्य झारखंड और बंगाल में भी वहाँ के सरकारी वकीलों का फीस बिहार के सरकारी वकीलों से ज्यादा है।
#PatnaHighCourt
एडवोकेट विकास कुमार ने कोर्ट को बताया कि केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ( कैट) पटना बेंच में तो मूल वाद पत्र दायर कर उसपे बहस करने वाले केंद्र सरकार के वकीलों को रोजाना हर मामले पर 9 हज़ार रुपये फीस मिलता है।
सबसे दयनीय स्थिति राज्य के सहायक सरकारी वकीलों की है, जिन्हे रोजाना मात्र 1250 रुपये फीस पर ही काम करना पड़ता है।
कोर्ट ने इस मामले को एक गंभीर जनहित याचिका करार देते हुए मुख्य सचिव को शीघ्र प्रभावी कदम उठाने को आदेश दिया है।कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को भी कहा कि हाईकोर्ट के आज के आदेश को फौरन मुख्य सचिव तक प्रेषित करें । बिहार में राज्य सरकारों के वकीलों के फीस में वृद्धि 14 साल पहले बिहार के महाधिवक्ता पी के शाही के ही कार्यकाल में ही हुई थी।
इस मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर,2022 को की जाएगी।।
पटना हाईकोर्ट ने पटना समाहरणालय बार एसोसिएशन भवन को तोड़े जाने के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा देने का निर्देश दिया। उपेंद्र नारायण सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को बताने को कहा कि वकीलों और उनके स्टाफ के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था की जानकारी तलब की।साथ ये भी बताने को कहा कि वकीलों के लिए बन रहे भवन का निर्माण कार्य कब तक पूरा होगा।
वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने बताया कि पटना के जिलाधिकारी ने ये कहा कि वकीलों के बैठने की व्यवस्था विकास भवन में की जा सकती है।इसके लिए कार्रवाई की जा रही है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से वकीलों के लिए आधुनिक और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने को कहा था।वरीय अधिवक्ता योगेश चन्द्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि पटना समाहरणालय बार एसोसिएशन के भवन को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि वकीलों के बैठने और काम करने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।राज्य के विभिन्न बार एसोसिएशन के भवन या तो है ही नहीं या काफी बुरी स्थिति में है।
#PatnaHighCourt
पिछली सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित पटना के प्रमंडलीय आयुक्त ने बताया कि पटना के जिलाधिकारी ने इस सम्बन्ध में बैठक किया।
उस बैठक की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था।इसमें कहा गया कि वकीलों के बैठने के लिए भवन निर्माण किया जाएगा।जबतक वकीलों को बैठने के लिए विकास भवन में बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
कोर्ट ने बिहार राज्य बार कॉउन्सिल और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को राज्य के विभिन्न बार एसोसिएशनों के भवनों की हालत के सम्बन्ध में जानकारी देने को कहा। वरीय अधिवक्ता योगेश चन्द्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि राज्य में वकीलों को बैठने और कार्य करने के लिए न तो उचित व्यवस्था है और न ही भवन हैं।
ऐसे में वकीलों के पेशागत कार्य करने में बहुत कठिनाई होती हैं।
इस मामलें पर अगली सुनवाई 6 दिसम्बर,2022 को की जाएगी।
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