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लंबी है दूरी, ट्रेन में रिजर्वेशन है जरूरी, रात भर काउंटर पर खड़ा रहना मजबूरी

गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल कॉलेज खुलने वाले हैं वही शादी का मौसम भी लगभग खत्म होने को है, ऐसे में घर आए लोग अब अपने काम पर लौटना चाहते हैं। ऐसे में इन दिनों बिहार से बाहर जाने वाली ट्रेनों में कन्फर्म टिकट की मारामारी है। इसके लिए लोग रात में ही लाइन में लग जाते हैं। लेकिन इसके बाद भी उन्हें रिजर्वेशन नहीं मिल पाता है। मजबूरन उन्हें वेटिंग या पेनल्टी भरकर ट्रेन में मुश्किल भरा सफर करना पड़ता है।

जहानाबाद जिले के हज़ारों लोग हैं जिन्हें वापस लौटना है। इसके लिए ट्रेन सस्ता और सुरक्षित ज़रिया है। लेकिन गिनती की कुछ ट्रेन हैं। ट्रेन में टिकट के लिए मारामारी है, रात से ही लग जाते हैं । ट्रेन में रिजर्वेशन के लिए खिड़की आठ बजे सुबह खुलती है। लेकिन सीजन के दिनों में कुछ मिनट में ही ट्रेनें फुल हो रही है। लोग रात आठ या दस बजे से ही खिड़की की लाइन में लग जाते हैं जिससे दूसरे दिन उनका नंबर आगे रहे। आठ से दस घंटे तक लाइन में लगने के बाद भी लोगों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता है।

कुछ लोगों ने बताया कि चार दिन लगातार रात आठ या नौ बजे से लाइन में लगता रहा। हर बार पहला या दूसरा नंबर मिला लेकिन कन्फर्म टिकट नहीं मिला। यही हाल तत्काल टिकट को लेकर भी है। लेकिन इन सबके बीच जो अलग नजारा दिखा वह शायद जहानाबाद में ही है। यहां खुद से ही लोगों ने चार्ट बनाकर और बुकिंग काउंटर के बगल में साट दिया है। एक नंबर से शुरु है लोग आते जा रहे हैं और अपना नाम नीचे की ओर लिखते जा रहे हैं।

भले ही टिकट 1–2 लोगों को मिलेगी लेकिन उम्मीद सबको है। आखिर जाना है तो टिकट तो चहिए, नहीं तो इस भीषण गर्मी में परेशानियों का कोई अंत नहीं होने वाला।

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