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बिहार पुलिस के कार्यशैली में नहीं आया है सुधार आज भी एफआईआर कराने को लेकर भटक रहे हैं लोग

जनता के दरबार मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, 180 लोगों की सुनी समस्याएं, अधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा-निर्देश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज 4 देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुये। जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से आये 180 लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के लिए समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए।

आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, निगरानी विभाग, खान एवं भू-तत्व विभाग, निर्वाचन विभाग, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के मामलों पर सुनवाई हुयी ।

पुलिस के कार्यशैली में नहीं हुआ है सुधार

पूर्वी चंपारण के एक व्यक्ति ने दहेज हत्या मामले पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की शिकायत की तो वहीं अगमकुआं, पटना की दहेज के लिए दर्ज एफ0आई0आर0 पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को मामले पर शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

एक व्यक्ति ने कहा कि मेरी भूमि को कुछ लोगों के द्वारा अतिक्रमित कर लिया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी ने दो बार अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, फिर भी सी०ओ० ने अतिक्रमण नहीं हटवाया। मुख्यमंत्री ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को उचित कार्रवाई का निर्देश दिया।

मुजफ्फरपुर से आए एक बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री से कहा कि उनके बेटे का अपहरण हो गया है। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने अब तक कुछ भी नहीं किया। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव गृह विभाग को कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

रुपसपुर, पटना से आयी एक लड़की ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि मेरे साथ रेप किया गया है। हमने रूपसपुर थाने में केस दर्ज कराया है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही अब आई0ओ0 और थानेदार फोन तक नहीं उठाते हैं। मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक को कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

अररिया से आए एक युवक ने कहा कि मेरे छोटे भाई की हत्या 2020 में हुई थी। हत्या को अंजाम देने के बाद भी अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए डेढ़ साल से हम दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, मगर कुछ नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को जांचकर न्यायोचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

समस्तीपुर से आयी एक महिला ने कहा कि पांच वर्ष पहले हमने पांच कट्ठा जमीन खरीदी थी लेकिन उस पर दूसरे लोगों ने कब्जा कर लिया है। वहीं बेगूसराय के एक व्यक्ति ने कब्रिस्तान की घेराबंदी को लेकर शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई का निर्देश दिया।


मुख्यमंत्री ने DGP को फोन कर कहा- तुरंत देखिए
पीड़िता ने कहा कि डीजीपी से भी मुलाकात की। लेकिन वे तो न्याय देने के बदले आरोप लगाने लगे कि लड़कियां ही रेप की जिम्मेदार हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि लड़कियां ही इसके लिए लड़कों को उकसाती हैं। ऐसे में मेरे लिए आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। इस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीजीपी को फोन लगा कर कहा कि यह मामला पटना के नौबतपुर का है। इसे तुरंत देखिए और एक्शन लीजिए।

एक फरियादी ने CM नीतीश कुमार से कहा कि सर बिहार में घूसखोरी काफी बढ़ गई है। घूसखोरी से लोग परेशान हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बात बताइए, क्या समस्या है ? इस पर उस फरियादी ने सीएम नीतीश से कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। प्रशासन कुछ नहीं कर रहा। इस पर मुख्यमंत्री ने फरियादी को राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव के पास भेज दिया।

अपहरण का भी मामला पहुंचा
वहीं, मुजफ्फरपुर से आए बुजुर्ग ने सीएम नीतीश से फरियाद किया कि उनके बेटे का अपहरण हो गया है। लेकिन, पुलिस ने अब तक कुछ भी नहीं किया। इतना ही नहीं पुलिस पैसे की भी मांग कर रही है।

यह शिकायत सुन सीएम नीतीश भौंचक्के रह गए। उन्होंने कहा कि अरे लगाओ, अपर मुख्य सचिव गृह विभाग को। इसके बाद फोन लगाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनके बेटे का अपहरण हो गया है और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह तो आश्चर्यजनक है। कह रहा कि कुछ पैसा भी मांग रहा? इसके तुरंत दिखवाइए।

बिहार में एक बार फिर ब्यूरोक्रेट और नेताओं के बीच नेक्सेस का एक घिनौना मामला आया सामने

बिहार में एक बार फिर ब्यूरोक्रेट और नेताओं के बीच नेक्सेस का एक घिनौना मामला सामने आया है हलांकि इस बार इस नेक्सेस का शिकार इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक महिला वकील हुई है जिसका आरोप है कि बिहार के सीनियर आईएस अधिकारी संजीव हंस और झांझारपुर से राजद विधायक रहे गुलाब यादव ने उसके साथ शाररीक शोषण किया है और वो इन दोनों के बच्चे की मां है महिला वकील की माने तो बिहार कैडर के IAS संजीव हंस और राजद के पूर्व विधायक गुलाब यादव ने गैंगरेप किया , गैंगरेप के बाद एक बेटे को जन्म दिया है, उसका पिता कौन है, इसकी जांच करने के लिए DNA टेस्ट किया जाए। महिला ने कहा कि विधायक ने बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया और IAS हंस ने बात करने से ही इनकार कर दिया है।

कोर्ट ने इलाहाबाद एसएसपी को पीड़ित महिला को सुरक्षा देने को कहां है।
कोर्ट ने पीड़िता की याचिका पर सुनवाई शुरु की —-
पीड़ित ने याचिका में कहा है कि फरवरी 2016 को मैं पटना के गर्दनीबाग में रहने वाले एक सीनियर वकील के पास आई थी। यहीं पर गुलाब यादव से परिचय हुआ था, जो उस वक्त झंझारपुर से राजद के विधायक थे। गुलाब ने राज्य महिला आयोग में सदस्य बनाने का झांसा दिया था। मैं गुलाब के आवास पर बायोडाटा लेकर गई थी। आवास में उसने रेप करने की कोशिश की थी। विरोध करने पर पिस्टल के बल पर रेप किया।”

पीड़िता ने विधायक पर केस करने की तैयारी कर ली थी। इसके बाद विधायक ने उसकी मांग में सिंदूर भरकर कहा कि आज से वह दोनों पति-पत्नी हैं। हालांकि, विधायक पहले से शादीशुदा था, पर उसने पीड़िता से कहा कि वह पहली पत्नी को तलाक दे देगा। विधायक ने कहा कि पीड़िता केस न करे।

“पुणे के होटल में बुलाकर IAS के साथ किया गैंग रेप”
पीड़िता के मुताबिक, विधायक गुलाब ने एक बार उसे पुणे बुलाया। कहा कि उसका पहली पत्नी से तलाक हो गया है और इसके पेपर्स उसके पास हैं। पीड़िता 8 जुलाई 2017 को पुणे के होटल बेस्टिल में गईं। वहां विधायक ने उसका परिचय IAS संजीव हंस से कराया। दोनों ने लंच के दौरान नशीला पदार्थ खिलाने के बाद उससे गैंग रेप किया। उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया।

पीड़िता ने कहा कि वीडियो मोबाइल पर भेजकर ब्लैकमेल किया जाता था। कहा जाता था कि मुंह खोलने पर इसे वायरल कर दिया जाएगा। जब पीड़िता गर्भवती हो गई तो उसने इसकी जानकारी विधायक को दी। उसने जबरदस्ती गर्भपात की दवा खाने को कहा। गुलाब ने अक्टूबर 2017 में पीड़िता का एडमिशन दिल्ली की जुडिशियल क्लासेस में करा दिया और उसे मुखर्जी नगर स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में ठहराया।

वीडियो की धमकी देकर बार-बार दोनों ने रेप किया”
पीड़िता ने कहा कि गुलाब हमेशा वीडियो वायरल करने का धमकी देता था। 13 फरवरी 2018 को दिल्ली के अशोका होटल में, 14 फरवरी 2018 को दिल्ली के पार्क एवेन्यू होटल में और 27 मार्च 2018 को दिल्ली के ही होटल ली मेरिडियन में गैंग रेप किया। गुलाब के साथ संजीव भी मौजूद रहता था।

“संतान को विधायक ने अपना मानने से इनकार किया, बोला नसबंदी हो चुकी”
महिला ने बताया कि विधायक और IAS दोनों गर्भपात कराने और जान से मारने की धमकी देते थे। इसके बाद पीड़िता मुखर्जीनगर स्थित हॉस्टल खाली करके शालीमार में रूम लेकर रहने लगी। 25 अक्टूबर 2018 को बेटे को जन्म दिया। जब उसने गुलाब को इसकी जानकारी दी तो उसने कहा कि यह उसका बेटा नहीं है। उसकी नसबंदी हो चुकी है। बच्चा IAS हंस का होगा। उधर, IAS हंस ने महिला से बात करने से ही इनकार कर दिया।

कोरोना के कोहराम का असर कल से हाईकोर्ट में होगा आंनलाइन सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में राज्य में कोरोना महामारी से उत्पन्न हुए हालात को गम्भीरता से लेते हुए कल 4 जनवरी,2022 से मुकदमों की ऑनलाइन सुनवाई होगी। इस सम्बन्ध शिवानी कौशिक व अन्य की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा मौखिक जानकारी दी गई कि चूंकि पटना हाई कोर्ट के कुछ जज व कर्मी भी कोरोना से संक्रमित हो गए, इसलिए कल 4 जनवरी, 2022 से पटना हाई कोर्ट में कामकाज ऑनलाइन तौर पर ही किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों का जीवन भी बहुमूल्य है, इसलिए इन बातों को भी ध्यान में रखना होगा। कोर्ट ने पूर्व में भी सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा था कि कोरोना के नए वैरिएंट के मद्देनजर हमें सावधानी बरतने की जरूरत है। कोरोना अभी गया नहीं है।

इसके पूर्व में भी कोर्ट ने राज्य सरकार से कोरोना को लेकर राज्य भर में मुहैया कराई गई सुविधाओं के संबंध में ब्यौरा देने को कहा था।

अगली सुनवाई आगामी 5 जनवरी, 2022 को होगी।

बिहार में हुआ कोरोना विस्फोट, क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बुलाई गयी बैठक।

बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान 500 से अधिक नये कोरोना के संक्रमित पाये गये हैं. इसकी संख्या में पिछले एक सप्ताह से लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. एक दिन में राज्य में इसके प्रसार की संख्या 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है. साथ ही एक दिन में कोरोना का फैलाव 21 जिलों से बढ़कर 26 जिलों में हो गया ।

इस बीच कल 4 जनवरी को कोरोना के बढ़ते फैलाव को देखते आपदा प्रबंधन की विशेष बैठक बुलाई गयी है जिसमें लांक डाउन और कोरोना से निपटने की तैयारी को लेकर विस्तृत चर्चा होगी ।

कोरोना को लेकर कल होगी बैठक

इधर आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान एंटीजन टेस्ट में 14 लोग संक्रमित पाए गए इसमें 3 पुलिसकर्मी भी शामिल है इसकी सूचना आते ही पूरे मुख्यमंत्री सचिवालय में हड़कम्प मच गया है ।

वही आज से प्रशासन सख्ती बरतनी शुरु कर दिया है मास्क चेकिंग और कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए पांच नयी टीमें बनायी गयी हैं. अब इसके लिए जिले में कुल 10 टीमें सक्रिय हो गयी हैं.जिन पांच नयी टीमों का गठन किया गया है, उनमें तीन टीमें बस, टेंपो आदि में मास्क की चेकिंग करेंगी. बिना मास्क के अगर ड्राइवर, खलासी या उसमें बैठे अन्य लोग मिले, तो वाहन को जब्त किया जा सकता है.

कोरोना को लेकर हालात सही नहीं –नीतीश

इसके अतिरिक्त दो टीमें दुकानों पर मास्क चेकिंग अभियान चलायेंगी. उपभोक्ता और दुकानदार को बिना मास्क पाये जाने पर दुकान को सील कर दिया जायेगा. इसके अतिरिक्त पांच मोबाइल टीमें सब्जी मंडी तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मास्क चेकिंग कर दंडात्मक कार्रवाई करेंगी।

वही आज से पूरे बिहार में 15 से 18 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण अभियान शुरु हो गयी है इस बीच सीएम ने कहा कि कोरोना से निपटने को सरकार तैयार है और कल की बैठक में निर्णय लिया जा सकता है ।

दलितों के साथ कुछ रिश्ते ऐसे रहे हैं जो आज भी सामंत और दलित को जोड़े हुए है

नव वर्ष के मौके पर पिछले पांच छह वर्षो से पप्पू मांझी का सुबह सुबह फोन जरूर आता है पप्पू मांझी के साथ एक दौर था जब न्यूज़ में इसके ड्रायविंग का आनंद लेते थे ।पत्रकारों के साथ रहने की वजह से इसकी अच्छी खासी राजनीतिक समझ भी है ।

जीतन राम मांझी के बयान पर क्या सोचता है मांझी समाज


इस बार भी फोन आया लम्बी बातचीत हुई यही पटना के पास का रहने वाला है और इसके इलाके में मुसहर समाज की बड़ी आबादी रहती है ।नव वर्ष की शुभकामना के बाद मैंने पप्पू से पूछा जीतन राम मांझी के बयान को लेकर मांझी समाज क्या सोचता है 9 मिनट के करीब बातचीत हुई है सुनिए जरूर राजनीति समझ में आ जायेंगी। पप्पू पूजा पाठ करने के बाद पंडित के घर पर नहीं खाने को लेकर निराश जरुर है लेकिन इन इलाकों से जुड़ी एक ऐसी परम्परा की चर्चा उन्होंने कि जो हैरान करने वाला था। पालीगंज और विक्रम के इलाके में बेटी की शादी के दौरान घर वाले बारात को भोजन करने से पहले मांझी समाज को विशेष तौर पर आमंत्रित करके भोजन कराता है मैंने पुंछा यह आज भी चल रहा है क्या पप्पू बोला हां सर इस बार भी गये थे भोज खाने गये थे। मतलब समाज में कई ऐसी परम्परा भी रही है जो दलित और खेतिहर समाज को जोड़ने का काम करता रहा है इस तरह के रिश्तों को गहराई से समझने कि जरूरत है क्यों कि दक्षिण भारत में ‘ब्राह्मण के खिलाफ जिस तरह का आंदोलन हुआ उत्तर भारत में आज भी वो स्थिति नहीं है हो सकता है ऐसे ही कुछ रिश्ते रहे हैं जो दक्षिण की तरह उत्तर भारत के समाज को उस स्तर तक उद्वेलित नहीं कर पाया ।

ब्राह्मणवाद को लेकर संवाद


वैसे जब से खेती से जुड़े लोगों का आर्थिक स्थिति कमजोर हुआ है गांव के स्तर पर बहुत सारी चीजें बदल गयी है। 50 प्रतिशत भूमि का स्वामित्व बदल गया है 90 प्रतिशत खेतिहर समाज खेती करना छोड़ दिया है ऐसे में खेती की वजह से जो रिश्ता चला आ रहा था उसकी डोर टूट चुकी है गांव का सारा सामाजिक समीकरण बदल गया है ऐसे में अब दलित पिछड़ा और सवर्ण का वो गणित नहीं रहा जिसकी चर्चा फिल्मों और किताबों में कि जाती रही है।
इस पोस्ट के साथ दूसरा संवाद भी टैक है वो संवाद है जीतनराम मांझी के बयान को लेकर ब्राह्मणजाति के युवा क्या सोचते हैं और इसको लेकर शिवानंद तिवारी के साथ जो बहस हुई है जरा आप भी सुनिए बहुत ही रोचक है मुझे लगता है कि ये संवाद आज के बिहार को समझने के लिए काफी है क्यों कि शिवानंद तिवारी उस जातीय राजनीति के साथ रहे हैं जो राजनीति सीधे सीधे ‘ब्राह्मणवादी मानसिकता को चुनौती दिया है शिवानंद तिवारी उस युवक को उसी अंदाज में समझा रहे हैं जिस अंदाज में समाजवादी सोच के लोग कर्पूरी ठाकुर और जेपी के जमाने में समझाते थे ये आपकी जिम्मेवारी है दलितों के प्रति समाज का जो नजरिया है उसको बदलने के लिए आगे आइए ।

कोरोना के कहर पर सरकार के रवैये पर हाईकोर्ट ने जतया एतराज

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना महामारी के नए वेरिएंट के बढ़ते प्रभाव के रोक थाम व नियंत्रित किये जाने के मामले पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने शिवानी कौशिक व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बताने को कहा है कि करोना महामारी के तीसरे लहर के रोकथाम और स्वास्थ्य सेवा की क्या कदम उठाए जा रहे है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार ने बताया कि अगली सुनवाई में राज्य के सभी जिलों के अस्पतालों के सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा बुकलेट के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को नए सिरे से पूरे तथ्यों की जांच कर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।

लेकिन अभी जो ओम्रिकोन नामक नए वेरिएंट के तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति में परिवर्तन हो रहा है।दिल्ली,मुंबई जैसे शहरों से ले कर देश के अन्य भागों में ओम्रिकोन बहुत तेजी से फैल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट व अन्य कई हाई कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई शुरू कर दी गई है।इस स्थिति को देखते हुए पटना हाईकोर्ट में शीघ्र ऑनलाइन सुनवाई होने की संभावना है।
इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामा में राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं में विरोधाभासी तथ्यों के मद्देनजर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई थी।

पिछली ऑन लाइन सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग के अपर प्रधान सचिव ने बताया कि राज्य के सभी जिलों के अस्पतालों से पूरी जानकारियां ले कर उन्हें बुकलेट के रूप में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।

प्रधान अपर स्वास्थ्य सचिव अमृत प्रत्यय ने कोर्ट को बताया था कि बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा समिति के कार्यपालक अधिकारी संजय कुमार के अध्यक्षता में चार सदस्यों की एक टीम गठित किया गया है, जो राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी और उपलब्ध सुविधाओं की जांच कर रहा है।
ज़िला के सभी जिलों के सिविल सर्जनों द्वारा ज़िला के सरकारी अस्पतालों के सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा तथ्यों को जांच कर प्रस्तुत करेंगे।

पिछली सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा था कि कोरोना के नए वैरिएंट के मद्देनजर हमें सावधानी बरतने की जरूरत है।कोरोना का खतरा अभी भी बरकरार है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से कोरोना को लेकर राज्य भर में कराई गई सुविधाओं के संबंध में ब्योरा देने को कहा था। कोर्ट ने विशेष तौर साउथ अफ्रीका में फैले कोविड के नए वैरियंट ओमाइक्रोन के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार को राज्य में ऑक्सीजन के उत्पादन और भंडारण के संबंध में सूचित करने को कहा था।
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने बताया था कि कोर्ट ने उसके पूर्व भी राज्य के राज्य भर में उपलब्ध मेडिकल स्टाफ, दवाइयां, ऑक्सीजन व एम्बुलेंस आदि के संबंध में ब्यौरा तलब किया था।

इस मामले पर 5 जनवरी, 2022 को सुनवाई होगी।

जल्द शुरु होगा पूर्व मध्य रेलवे के निर्मली स्टेशन से आसनपुर कुपहा तक रेल सेवा

पूर्व मध्य रेलवे के निर्मली स्टेशन से आसनपुर कुपहा तक सीआरएस निरीक्षण हो गया है, एक सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार स्पीडी ट्रायल हुआ। उम्मीद है कि जनवरी में 5.96 किलोमीटर इस लंबी रेल लाइन पर जनवरी से परिचालन शुरू हो जाएगा। उधर निर्मली से परसा बसबाड़ी तक 5.88 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का काम लगभग पूर्ण हो चुका है, रेलवे ने संभावना जताई है कि अप्रैल 2022 में झंझारपुर तक ट्रेन दौड़ेगी।

वर्ष 1934 में  कोसी नदी पर बना रेलपुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसी कारण से यह रेलवे ट्रैक 86 साल तक बंद रहा लेकिन अब यह रेलवे का पुल बनकर तैयार हो गया है और जल्द ही इस रेलवे ट्रैक पर रेल सेवाएँ शुरू कर दी जाएँगी।आपको बता दें कि आसनपुर से झंझारपुर तक का रेलवे ट्रैक पूरा क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण रेल विभाग को इस रेलवे ट्रैक को बंद करना पड़ा। लेकिन आज 87 साल बाद इस ट्रैक के वापस से शुरू होने की खबर को सुनकर वहाँ के स्थानीय लोगों में एक ख़ुशी  की लहर दौड़ गयी है।

भूकंप कि वजह से हुई थी क्षति
5 जनवरी 1934 में विनाशकारी भूकंप की वजह से निर्मली से सरायगढ़ के बीच की रेल सेवाओं को बंद करना पड़ा था। दरअसल इस ट्रैक के बीच में एक रेलवे पुल था जो कोसी नदी पर बना हुआ था और भूकंप से यह पुल क्षतिग्रस्त हो गया।क्षतिग्रत होने की वजह से उस ट्रैक के समीप के रेलवे स्टेशन को बंद करना पड़ा।

लोगों को होती थी परेशानी
ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्मली के स्थानीय  लोगों को ट्रेन से सरायगढ़ जाने के लिए दरभंगा, समस्तीपुर, खगडिय़ा, मानसी, सहरसा और सुपौल होते हुए जाना पड़ता था मतलब उन्हें  लगभग 297 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। इसमें लगभग आठ घंटे से अधिक का समय लगता था।परन्तु अब पुल का पुनः निर्माण होने के बाद अब सरायगढ़ जाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।यात्रियों को लगभग 22 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी जिसमें ज्यादा से ज्यादा 30 मिनट का समय लगेगा। कोसी नदी पर बने रेलवे पुल का पुनः निर्माण होने से यात्रियों के समय की बचत होने लगेगी।

निर्मली स्टेशन से किया गया ट्रायल
आपको बता दें कि निर्मली में सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन का ट्रायल हुआ। आशा है कि जनवरी में 5.96 किलोमीटर इस लंबी रेल लाइन पर जनवरी से परिचालन का कार्य  शुरू हो जाएगा। उधर निर्मली से परसा बसबाड़ी तक 5.88 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माणकार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, रेलवे विभाग ने संभावना जताई है कि अप्रैल 2022 में झंझारपुर तक रेल सेवाएँ शुरू कर दी जाएँगी।

अप्रैल तक होगा काम पूरा
बताया जा रहा है कि परसा से बस्बाड़ी तक की 5.88 किलोमीटर की रेलवे लाइन का निरीक्षण करके यह पता चला है कि कुछ ही समय में यह काम पूरा हो जाएगा। इसकी जानकारी सी आर एस को दी जाने बाद फरवरी में इस रेलवे लाइन का पुनः निरीक्षण किया जायेगा और अप्रैल 2022 झंझारपुर-सकरी-दरभंगा भी निर्मली स्टेशन से जुड़ जाएगा।

अटल जी का सपना हुआ पूरा
हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने उस समय लोगों को परेशानी को देखते हुए चिंता जताई और इस परेशानी को दूर करने का निर्णय लिया था।अटल जी ने 6 जून 2003 को इस महासेतु को बनाने की मंजूरी देकर इस सेतु की आधारशिला रखी। उसके बाद आज वह सेतु बनकर तैयार है।इस सेतु को बनाने में कुल 516 करोड़ की लागत आयी है और यह पुल तकरीबन 17 साल बाद बनकर तैयार हुआ है।

भारत से बड़े पैमाने पर कछुआ की हो रही है तस्करी

भारत से बंग्लादेश कछुआ की तस्करी जारी है आरपीएफ ने सोनपुर स्टेशन पर खड़ी 15716 किशनगंज से जाने वाली गरीब नवाज ट्रेन से 537 पीस जिंदा कछुआ बरामद किया। ट्रेन के एस 3 कोच में सीट के नीचे और शौचालय के समीप रखे 20 लावारिस बैग की सूचना यात्रियों ने पुलिस को जांच के दौरान पुलिस को बीच अलग अलग बैग में 537 जिंदा कछुआ मिला पुलिस तत्तकाल इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दिया वन कर्मी अभय कुमार की माने तो बरामद कछुआ सुंदरी प्रजाति का है और ये प्रजाति उत्तरप्रदेश में पाए जाता है। इस प्रजाति के कछुआ को तस्कर इसे बंगाल अथवा बांग्लादेश ले जाते है। इसे खाने के साथ दवा व औषधि में प्रयोग किया जाता है।

निमोनिया से बच्चों में होने वाली मृत्यु को कम करेगा सांसः मंगल पांडेय

निमोनिया से बच्चों में होने वाली मृत्यु को कम करेगा सांसः मंगल पांडेय
चिकित्सकों व स्टाफ नर्स को अलग-अलग बैच में किया जा रहा प्रशिक्षित

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में नवजात शिशुओं एवं बच्चों में निमोनिया से होने वाली मृत्यु को कम करने के प्रति स्वास्थ्य विभाग तत्पर है। इस संबंध में कार्य योजनाओं को मूर्त रुप दिया जा रहा है। सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रालाइज पीनिमोनिया सक्सेसफुल (सांस) कार्यक्रम के तहत निमोनिया को दूर करने का कार्य चल रहा है। इसमें गति लाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को लगातार प्रशिक्षित करने का कार्य जारी है।

श्री पांडेय ने कहा कि राज्य के क्रमशः 14 जिलों अररिया, औरंगाबाद, बांका, बेगुसराय, गया, जमुई, कटिहार, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, नालंदा, नवादा, पूर्णिया, शेखपुरा और सीतामढ़ी में स्वास्थ्यकर्मियों को इस बीमारी की रोकथाम के लिए सांस कार्यक्रम के तहत जिला स्तर पर प्रशिक्षित करने की कार्ययोजना है। इन जिलों में 16 मेडिकल आफिसर एवं 16 स्टॉफ नर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। 31 जनवरी तक निर्धारित लक्ष्य के प्रति अलग-अलग बैचों में यह प्रशिक्षण चलेगा। अररिया में 2 बैच, औरंगाबाद में 3 बैच, बांका में 2, बेगूसराय में 4 समेत अन्य 14 जिलों में अलग-अलग बैच के माध्यम से कुल 36 बैचों में यह प्रशिक्षण चलेगा। सांस कार्यक्रम की शुरुआत 2020 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा की गई थी।
श्री पांडेय ने कहा कि इस अभियान के तहत नवजात शिशुओं एवं बच्चों में निमोनिया नियंत्रण कर मृत्यु को रोकने का लक्ष्य है। 2020-21 एवं चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 में राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण नालंदा चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल पटना में आयोजित किया गया था। इसमें इन जिलों से नामित चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्स को जिला स्तरीय प्रशिक्षक के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

चारो और घोर अंधेरा छाया हुआ है। कही से भी रोशनी दिखायी नहीं दे रही है।

बिहार एक ऐसे चौहारे पर आकर खड़ा है जहां तय नहीं कर पा रहा है कि जाये तो जाये कहा और यही अनिर्णय वाली स्थिति बिहार के बुनियाद को हिला कर रख दिया है ।बिहार की राजनीति को 2007 से देख रहे हैं 2010 के विधानसभा चुनाव में भले ही राजद का सूपड़ा साफ हो गया था लेकिन नेता प्रतिपक्ष के रूप में अब्दुल बारी सिद्दीकी का विधानसभा में दिया गया ।
वह भाषण आज भी मुझे याद है जहां तक मेरी समझ है अब्दुलबारी सिद्दकी का बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष के रुप में दिया गया भाषण और नीतीश कुमार का सिद्दीकी के भाषण पर सरकार का जवाब इतना स्तरीय भाषण बिहार विधानसभा में शायद अब देखने को नहीं ।

वो धार फिर कभी नीतीश कुमार में देखने को नहीं मिला भरे सदन में अब्दुल बारी सिद्दीकी लगभग डेढ़ घंटे तक सरकार के एक एक निर्णय का बखिया उखेरते रहे और पूरा सदन चुपचाप सुनता रहा और इतना ही सारे रिजनल चैनल लाइव चलाता रहा और कल होकर अखबार के मुख्य पेज पर पूरा भाषण छपा था । भाषण के दौरान अब्दुल बारी सिद्दीकी ने एक शब्द का इस्तेमाल किया था रॉयल ब्लड जिसके सहारे नीतीश कुमार पर सीधा आरोप लगाया था कि किस तरीके से राज्य सरकार के नौकरी में और अधिकारियों के पोस्टिंग में कुर्मी जाति को मदद किया जा रहा है, प्रेस दिर्घा में बैठे सारे पत्रकार रॉयल ब्‍लड का मिनिंग क्या होगा इसको लेकर अगल बगल झांकने लगे थे ।

कुछ नहीं बदला है वही नीतीश हैं ,वही जदयू हैं, वही बीजेपी हैं, वही राजद है वही मांझी लेकिन आज बहस किस बात को लेकर हो रही है मैं ब्राह्मण नहीं ब्राह्मणवाद के खिलाफ हूं इस पर डिबेट करने के बजाय लोग सड़क पर उतर गये जीभ काटने पर पुरस्कार का एलान तक कर दिया है एक सप्ताह तक दोनों और से घृणा फैलाने कि पूरी कोशिश हुई गांव गांव में तनाव पैदा हो इसको लेकर गोलबंदी शुरु हो गयी।

ये बिहार का एक नया चेहरा है जहां बहस की कोई गुंजाइश नहीं है बस कैसे एक दूसरे के खिलाफ जहर उगले और समाज में तनाव और द्वेष पैदा हो हर राजनीति दल इसी में लगा हुआ है।

इसका परिणाम क्या हो रहा है मूल मुद्दा जिस पर चर्चा होनी चाहिए था जिसके सहारे सरकार पर दबाव बनाया जा सकता था सबके सब गौण होते जा रहे हैं।

इस प्रदेश में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 27 लोगों की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया, 15 मरीजों की आंखें निकलनी पड़ी विधानसभा चल रहा था लेकिन कही से कोई आवाज सुनाई दिया क्या ,शराबबंदी कानून को लेकर सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का जो बयान आया उस बयान को लेकर कही कोई चर्चा हो रही है क्या, इसी तरह सरकार की जो बहाली नीति है इस पर कोई बात करने को भी तैयार है क्या ,किस तरीके से राज्य सरकार ने बिहार पुलिस और प्रशासनिक सेवा के कैडर को एक रणनीति के तहत खत्म कर दिया इस तरह के कई बुनियादी सवाल है विश्वविधालय में कुलपति के नियुक्ति का ही मामला हो कही कोई चर्चा हो रही है ।

जैसे जातिवादी राजनीति ने बिहार के बुनियाद को हिला दिया था इसी तरह धर्मवादी राजनीति ने बिहार के इमारत को ही गिरा दिया है 30 वर्षो से मानो बिहार एक जगह आकर ठहर सा गया है जहां से तय नहीं कर पा रहा है जाये तो जाये कहां । क्यों कि पूरी व्यवस्था राजनीति को बनाये रखने में लगी हुई है कही से कोई आवाज नहीं उठ रहा है सोशल मीडिया से बदलाव की उम्मीद की जा रही थी लेकिन बुनियादी सवालों के मामले में ये मुख्यधारा की मीडिया से भी आगे निकल गया है । ऐसे में बुनियादी सवालों की और जनता का ध्यान कैसे आकृष्ठ हो इसके लिए बड़े स्तर पर काम करने कि जरुरत नहीं है क्यों कि जिस बुनियाद पर बिहार अभी तक चल रहा था वो अब दरक चुका है ।

समाज सुधार के बगैर विकास अधूरा -नीतीश कुमार

मुजफ्फरपुर में समाज सुधार अभियान में मुख्यमंत्री शामिल हुए
अगर समाज के सुधार के लिए काम नहीं होगा तो विकास का कोई मतलब नहीं रह जाएगा- मुख्यमंत्री
हमलोगों को निरंतर अभियान चलाते रहना है ताकि कोई गड़बड़ी न कर सके- मुख्यमंत्री
आज महिलाओं की जागृति के चलते ही समाज आगे बढ़ रहा है और विकास का भी काम हो रहा है मुख्यमंत्री
पटना, 29 दिसम्बर 2021 :- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज मुजफ्फरपुर के एम0आई0टी0 कैंपस में राज्य में पूर्ण नशामुक्ति, दहेज प्रथा उन्मूलन एवं बाल विवाह मुक्ति हेतु चलाए जा रहे समाज सुधार अभियान में शामिल हुए।
आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में आने के लिए आप सबको धन्यवाद देता हूं और बधाई देता हूं। 5 जीविका दीदियां ने अपने अनुभव को साझा किया उनको बधाई देता हूं। समाज सुधार अभियान का जो हमारा मकसद है आपलोगों को पता है। सिर्फ विकास का काम करेंगे तो उससे काम नहीं चलेगा। आपने 24 नवंबर 2005 से हमलोगों को काम करने का मौका दिया उस समय से आपलोगों की सेवा कर रहा हूं। अगर समाज के सुधार के लिए काम नहीं होगा तो विकास का कोई मतलब नहीं रह जाएगा इसलिए शरुआती दौर से ही हमलोगों ने इस पर काम करना शुरु किया। समाज में जो पीछे रह गये थे, समाज के उन तबकों के उत्थान के लिए हमलोगों ने विशेष ध्यान दिया। चाहे महिला हो, अनुसूचित जाति/जनजाति हो, अल्पसंख्यक हो या अतिपिछड़ा वर्ग के हों, उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष पहल की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुजफ्फरपुर से मेरा विशेष लगाव है। सरकार बनने के बाद जो हमलोगों ने अभियान चलाया और हमेशा हम यहां आते रहे हैं। हमें याद है कि किस प्रकार एक-एक रास्ते पर मुजफ्फरपुर के लोग खड़े रहे। किस प्रकार लोगों का सहयोग और समर्थन मिला। जब से हमें काम करने का मौका मिला, तब से काम कर रहे हैं, आपकी सेवा कर रहे हैं।

मुजफ्फरपुर में काफी काम किये गये हैं। मुजफ्फरपुर से जुड़े जिले सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली हो सबका महत्व है। जब हमने शुरु किया अभियान तो सबसे पहले 2006 में होने वाले पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए हमने एक कानून बनाया, जिसमे तय किया की 50 प्रतिशत का आरक्षण महिलाओं के लिए रहेगा। ऐसा करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना। उसके साथ-साथ महिलाओं के उत्थान के लिए हमलोगों ने कई काम किये। बिहार में उस समय बेहतर ढंग से स्वयं सहायता समूह गठित नहीं था। फिर भी कुछ जगहों पर था।

वर्ष 2006 में मुजफ्फरपुर के 2 जगहों पर जाकर हमने इनके कार्यों को देखा था। स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाएं काम कर रही थीं। उनलोगों से जाकर हमने बात की, जब उनलोगों की बातों को सुना तो मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। हम सोच ही रहे थे कि इसका विस्तार करेंगे। फिर हमने वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेने का भी निर्णय लिया। बाद में जब इसकी बड़े पैमाने पर शुरुआत की तो आपके यहां का जो अनुभव हुआ उसी के आधार पर हमने पूरे बिहार में काम करवाना शुरु कर दिया और उसका हमने नामकरण किया जीविका समूह। उसके बाद उसमें कितनी जागृति आयी है। हमलोगों का 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य था। अब तो 10 लाख के लक्ष्य को भी पूरा कर लिया गया है। 1 करोड़ 27 लाख महिलाएं इससे जुड़ गई हैं। पहले बेटियों को लोग आगे पढ़ा नहीं सकते थे। अपनी बेटियों को पांचवीं क्लास के बाद उसको जो कपड़ा चाहिए था वो देने की स्थिति में नहीं थे। बहुत कम लड़के-लड़की ही आगे पढ़ पाते थे। वर्ष 2007 से हमलोगों ने पोशाक योजना की शुरुआत की। आगे चलकर हमलोगों ने साईकिल योजना की शुरुआत की। आप देख लीजिए कितनी बड़ी संख्या में लड़कियां आगे आने लगी और पढ़ाई करने लगीं। पहले लड़की कम पढ़ती थीं लेकिन पिछले साल मैट्रिक की परीक्षा में लड़कों से 200-300 ज्यादा लड़की पूरे बिहार में परीक्षार्थी थीं। जीविका समूह के माध्यम से महिलाओं में जागृति लायी जा रही है। महिलाएं घर का काम करती थीं, कहीं-कहीं खेतों में भी जाकर काम करती थीं लेकिन उनके बारे में कोई खास ध्यान नहीं था। जब हमलोगों ने काम करना शुरु किया कि महिलाएं भी अगर काम करेंगी तो परिवार की आमदनी बढ़ेगी। उसके बाद लोगों में जागृति बढ़ेगी। जब साइकिल योजना की शुरुआत किया तो कुछ लोगों ने मेरा मजाक उड़ाते हुए कहा कि लड़की साइकिल चलाएगी तो रास्ते में लोग तंग करेगा। हमने कहा था कि एक आदमी की हिम्मत नहीं है कि लड़की साइकिल चलाएगी तो कोई उसको तंग करेगा। उसके बाद लडकों ने भी साइकिल की मांग करना शुरु किया तो उनके लिए दो-तीन साल बाद हमलोगों ने साइकिल योजना की शुरुआत की। सरकारी सेवाओं में भी हमलोगों ने आरक्षण दिया। पुलिस में हमलोगों ने आरक्षण देने का काम किया। पुलिस बल में जितनी महिलाएं अब बिहार में हैं उतना प्रतिशत देश के किसी भी राज्य में पुलिस बल में महिलाओं की संख्या नहीं है। महिलाओं की पढ़ाई, सरकारी सेवाओं में संख्या बढ़ रही है और जो जीविका समूह बनाया तो लोग किस तरह से अपनी आमदनी को बढ़ा रहे हैं और कितना जागृति आ रही है। _मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर जी जब वर्ष 1977 में मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने शराबंदी लागू किया लेकिन दो वर्ष बाद फिर से शराब शुरु कर दिया गया। हमारे मन में शराबबंदी की बात शुरु से थी। हमारे मन में आशंका थी कि शराबबंदी लागू कर पाएंगे कि नहीं। उन्होंने कहा कि हमलोग शराबबंदी को लेकर वर्ष 2011 से अभियान चला रहे हैं। इसको क्रियान्वित करने को लेकर मेरे मन में शंका थी. लेकिन जब वर्ष 2016 में महिलाओं के एक सम्मेलन में मैं गया हुआ था, महिलाओं के विकास की बातें हो रही थीं। जैसे ही हम बोलकर बैठे कि पीछे से महिलाओं ने आवाज लगायी शराब बंद कराईये। उसके बाद वापस हम माइक पर आये और कहा कि अगली बार अगर काम करने का मौका मिलेगा तो शराबबंदी लागू कर देंगे और हमने इसको लागू किया। लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। 1 अप्रैल 2016 को पहले ग्रामीण इलाके में देशी और विदेशी शराब पर हमलोगों ने रोक लगायी, जबकि शहरी इलाकों में विदेशी शराब बंद नहीं किया गया था। शहरों में महिलाएं, लड़कियों, पुरुष वर्ग ने भी शराब के आवंटित दुकानों के खोले जाने पर कड़ा विरोध जताया और दुकानों को खोलने नहीं दिया उसके बाद 5 अप्रैल 2016 को राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई। बहत बड़े पैमाने पर लोगों ने साथ दिया। वर्ष 2016 में सभी जगहों पर महिलाओं के साथ, जीविका दीदियों के साथ हमने बैठक की। निरंतर यह अभियान चल रहा है। जीविका समूह की एक महिला ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा- मेरे पति काम से लौटते थे दारू पीकर आते थे, परिवार में सभी को बुरा लगता था, देखने में खराब लगते थे। अब जब शराबबंदी हो गई तो बाजार से सब्जी, फल लेकर आते हैं और घर में आते हैं तो मुस्कुराते हैं। अब देखने में अच्छे लगते हैं, यह कितना बड़ा परिवर्तन हुआ है। समाज में कुछ लोग गड़बड़ी करने वाले होते हैं चाहे वे किसी भी धर्म के मानने वाले लोग हों। कितना भी अच्छा काम कीजिएगा कुछ लोग तो गड़बड़ी करेंगे ही। लेकिन हमलोगों को अभियान चलाते रहना है। कोई इधर उधर करना चाहे तो कुछ नहीं कर सके। समाज सुधार अभियान जारी रखना है। जैसे हमलोगों ने शराबबंदी लागू करके अभियान चलाया। उसके बाद बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ भी अभियान चलाया। वर्ष 2017 में बड़े पैमाने पर हमलोगों ने अभियान चलाया। आज महिलाएं बाल विवाह, दहेज प्रथा के खिलाफ बोल रही थीं तो जरुरत इस बात की हमलोगों ने महसूस किया कि कुछ न कुछ गड़बड़ करने वाला रहेगा ही इसके लिए हमलोगों को निरंतर अभियान चलाते रहना है। प्रचार-प्रसार करते रहना है। इस बार जो अभियान शुरु किया गया है। हमलोगों ने उसके पहले 18 नवंबर को सारे अधिकारियों के साथ बैठक की थी। अभी तक 75 हजार 300 छापेमारी की गई। शराबबंदी से संबंधित 11 हजार 370 मामले दर्ज किए गए। 13 हजार अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई। 1 लाख 89 हजार लीटर देसी शराब, 3 लाख 24 हजार लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। शराब से जुड़े मामलों में 1 हजार 788 गाड़ियां जब्त की गई। हमलोगों ने कॉल सेंटर बनाया था कि कोई गड़बड़ करे तो सूचित करें आपका नाम नहीं बताया जाएगा और तत्काल कार्रवाई किया जाएगा। कॉल सेंटर में जहां औसतन 70-80 कॉल प्रतिदिन आते थे अब बढ़कर 190 से 200 कॉल आ रहे हैं। महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी जागृति आनी चाहिए। हमने अपने साथियों से भी कहा है कि हमने अभियान की शुरुआत की है, इसका मतलब ये नहीं की जहां जाएंगे वही अभियान है बल्कि इस अभियान को निरंतर जारी रखना है। अगर कोई शादी-विवाह में दहेज लेता है तो आप उसका विरोध कीजिए। वैसी शादी में आप शामिल मत होइये। जब आप शामिल नहीं होंगे तो निश्चित रुप से लोगों को लगेगा कि अगर हम दहेज लेंगे तो निश्चित रुप से विरोध होगा इसलिए इस काम को भी साथ-साथ जारी रखना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी बाल विवाह होता है और बाल विवाह के शिकार कितने लोग होते हैं इसलिए इन सब बातों पर ध्यान देना है कि बच्चों की शादी कोई इस तरह से नहीं करे। उसकी वजह से कितने तरह की परेशानी बढ़ती है, ये सबको मालूम है इसलिए इस अभियान को जारी रखिए। बाल विवाह और दहेज प्रथा कितनी बुरी चीज है। दहेज के चक्कर में कितनी लड़कियों को आत्महत्या करनी पड़ती है। कितने लोगों की हत्या की गई है। महिलाओं की अगर कोई इज्जत नहीं करेगा तो इससे बढ़कर और गलत काम क्या है। हम सभी पुरुष, स्त्री यहां हैं। महिलाओं की देन है कि हमको ये जीवन मिला है। अगर महिला नहीं होती तो आप या कोई और धरती पर नहीं आते, इसलिए किसी को महिला की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। पुरुष-स्त्री समाज के दोनों अंग है, इन दोनों के वगैर समाज का विकास संभव नहीं है। पुरुषों में ये भाव नहीं आना चाहिए कि सब कुछ वही हैं और महिलाएं उनकी फॉलोवर हैं। महिलाओं और लड़कियों के प्रति अच्छी भावना रखें, तभी हम आगे बढ़ पाएंगे। आज महिलाओं की जागृति के चलते ही समाज आगे बढ़ रहा है और विकास का भी काम हो रहा है। हमलोगों को हमेशा शराबबंदी के पक्ष में और बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ निरंतर अभियान चलाना चाहिए ताकि लोगों में जागृति आए। शासन और प्रशासन को एक-एक चीज पर नजर बनाए रखना है। बहुत लोग तो कहते हैं कि शराबबंदी से बाहर का कोई आना नहीं चाहता है तो हमने उनको कह दिया कि कोई अलाउ नहीं है। जिसको पीना है वे यहां नहीं आयें। लोग कह रहे थे कि पर्यटन में कमी आ जाएगी लेकिन हमने बता दिया कि जब शराबबंदी लागू हुई तो बाहर से आने वाले पर्यटकों की संख्या पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ गई है। दो साल से तो कोरोना का दौर चल रहा है। सब सचेत रहिए लेकिन उसके पहले 2019 तक 2 करोड़ से भी ज्यादा लोग यहां आते रहे हैं। चंद लोग हैं, कुछ अपने को विद्वान समझते हैं, उनके मन में फिलिंग होती है उनको हम बताना चाहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया का वर्ष 2016 से 2018 तक सर्वेक्षण कराया और 2018 में ही रिपोर्ट को प्रकाशित किया। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब पीने से दुनिया में 30 लाख लोगों की मृत्यु होती है यानि दुनिया में जितनी मृत्यु हुई उसका 5.3 प्रतिशत मौत शराब पीने से होती है। 20 से 39 आयु वर्ग के लोगों में 13.5 प्रतिशत मृत्यु शराब पीने के कारण होती है। शराब के सेवन से 200 प्रकार की बीमारियां होती हैं, जबकि 18 प्रतिशत लोग शराब पीने से आत्महत्या कर लेते हैं। शराब पीने के कारण 18 प्रतिशत आपसी झगड़े होते हैं। शराब पीने से दुनियाभर में 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। शराब पीना मौलिक अधिकार नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब पीना किसी को मौलिक अधिकार नहीं है। शराब इतनी बुरी चीज है इसके संबंध में विज्ञापन के जरिए भी लोगों को जानकारी दी जा रही है, उस पर भी गौर कीजिएगा। लोगों को इसके प्रति सचेत कीजिए। बापू ने देश को आजाद कराया। शराब के वे कितना खिलाफ थे। आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों से कहते थे-शराब न सिर्फ आदमी का पैसा बल्कि बुद्धि भी हर लेती है। शराब पीने वाला इंसान हैवान हो जाता है। बापू ने कहा था कि अगर एक दिन के लिए भी तानाशाह बन गए तो हम सभी शराब की दुकानों को बंद कर देंगे। बहनों से हम आग्रह करेंगे कि जो शराब पीते हैं, गड़बड़ करता है उनके चारो तरफ खड़ा होकर जमकर नारा लगाईये और सूचना भी दीजिए। जहां बैठिए शराब नहीं पीने के लिए लोगों को प्रेरित कीजिए। आपस में मिल जुलकर रहना है। आपकी सेवा करना ही हमारा काम है। बहनों से उम्मीद है कि जो कोई भी गड़बड़ करेगा, उसके खिलाफ अभियान चलाइयेगा। विकास के साथ समाज सुधार होगा तो समाज, राज्य और देश आगे बढ़ेगा।

कार्यक्रम को मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री रामसूरत कुमार, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सह सीतामढ़ी जिले के प्रभारी मंत्री मो0 जमा खान, ग्रामीण कार्य मंत्री सह वैशाली जिले के प्रभारी मंत्री श्री जयंत राज, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, अपर मुख्य सचिव, गृह श्री चैतन्य प्रसाद, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन के अपर मुख्य सचिव श्री के0के0 पाठक ने संबोधित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों पर लगाए गए प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह ने पौधा तथा राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री रामसूरत कुमार ने प्रतीक चिन्ह और अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया। जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री बाला मुरुगन डी0 ने जीविका दीदी श्रीमती गुड़िया देवी द्वारा सुजनी कला निर्मित सम्मान स्वरूप प्रतीक चिन्ह मुख्यमंत्री को भेंट किया।

कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों ने स्वागत गान गाया और कला जत्था के कलाकारों ने नशामुक्ति से संबंधित जागरुकता गीत को प्रस्तुत किया।

सतत् जीविकोपार्जन योजना के तहत 9.41 करोड़ रूपये की राशि मुख्यमंत्री ने जीविका की दीदियों को डमी चेक प्रदान कर किया। स्वयं सहायता समूह को बैंकों द्वारा प्रदत राशि का डमी चेक मुख्यमंत्री ने प्रदान किया। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत 15 जलाशयों के रख रखाव हेतु 18.81 लाख का डमी चेक मुख्यमंत्री ने प्रदान किया।

कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान सतत जीविकोपार्जन योजना की लाभार्थी वैशाली जिले के पोखरैरा गांव निवासी श्रीमती मोडली देवी जो ताड़ी व्यवसाय से जुड़ी हुई थीं। वर्ष 2018 में जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी छोटी-मोटी जरुरतों को पूरा करती रहीं। बाद में सतत् जीविकोपार्जन के तहत इनका चयन हुआ और इन्हें प्रारंभिक निधि प्रदान कर किराना दुकान खुलवाया गया। आज की तारीख में श्रीमती मोईली देवी आर्थिक रुप से मजबूत हो रही हैं। 5 बकरियों को भी इन्होंने पाल रखा है। उन्होंने बताया कि मेरे पति ताड़ी बेचते और पीते थे। मेरे पास पैसे नहीं थे कि मैं उनका इलाज करा सकू। पैसे के अभाव में उनका इलाज नहीं हो सका और उनकी मौत हो गई। मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं। कैसे उनका जीविकोपार्जन चलेगा। फिर जीविका समूह से मैं जुड़ गई और 12 लोगों का हमलोगों ने समूह बनाकर बचत करना शुरु कर दिया। फिर मुझे लगातार सहायता मिलने लगी। 10 रुपये रोज बचाकर माह में 300 रुपए की बचत करती
शिवहर जिले की मोहनपुर की रहने वाली पूजा दीदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दहेज प्रथा के खिलाफ उन्होंने मुहिम छेड़ी और जीविका से जुड़ी सीता दीदी की बेटी की शादी तय हो गई थी लेकिन सीता दीदी दहेज देने में असमर्थ थीं, जबकि लड़के वालों ने दहेज की मांग की। सीता दीदी बहुत दुखी हुई कि मैंने अपनी बेटी को पढ़ाया, लिखाया और ये सोच भी नहीं पायी थी कि इस लायक बनाने के बाद भी दहेज की मांग की जाएगी। साप्ताहिक बैठक में अपने बचत को जब लेकर आयीं तो उन्होंने अपनी बातों को सबके सामने रखा। हम सभी ने मिलकर उनको समझाया कि हम सब आपके साथ हैं। उसके बाद सीता दीदी की थोड़ी हिम्मत बढ़ी। फिर हमलोग मिलकर गए लड़के वाले के घर जाकर हमने कहा कि कोई कमी होगी तो बोलिएगा। सीता दीदी दहेज देने की स्थिति में नहीं हैं। कुछ तो बोलिए, सारी बातें हमने उससे कहीं और कहा कि अगर आप नहीं मानेंगे तो आगे भी हमलोग जाएंगे। दो दिन बाद सीता दीदी को खबर आया और उनकी बेटी की शादी हो गई। आज वे सुखी जीवन जी रही हैं, उनकी बेटी को एक पुत्र भी है।

सीतामढ़ी के अख्ता की रहने वाली रुबिना खातून ने कहा कि जीविका से पहले मैं कुछ नहीं थी। हमलोग शराब पर चर्चा करना शुरु किये। हम देखते थे कि हर घर में अपने पति के शराब पीने से महिलायें परेशान रहती थीं। जब भी उनके पति पीकर आते थे तो अपनी पत्नी के साथ मारपीट करते थे। हमलोग हमेशा सामाजिक मुद्दों पर अपने संगठन में चर्चा किया करते थे। इसके बावजूद हमलोगों की कोई सुनने वाला नहीं था। जब सरकार द्वारा नशामुक्ति अभियान चलाया गया तो इसको लेकर हमलोगों में बहुत जोश और उमंग आया कि अब तो हमारे साथ बिहार सरकार है। उसके बाद हमलोगों की हिम्मत बढ़ी और घर-घर जाकर शराब के खिलाफ लोगों को जागरुक किया, रैलियां निकाली। इसका नतीजा हुआ कि हमारे गांव में लोग शराब बहुत कम पीने लगे। फिर हमलोगों ने पता करना शुरु किया कि जब शराब मिलता नहीं है तो भी लोग कहां से पी रहे हैं। पता चला कि नेपाल से नदी मार्ग से आने वाले दारु को मछली खरीदने के बहाने खरीदकर ले आते हैं। उसके बाद सभी जीविका दीदियों ने नदी किनारे जाकर छिपकर देखा तो पता चला कि जगह-जगह छपा देते थे और पीने वाले एक-एक कर आते थे और पीकर चले आते थे। हमलोग चुप नहीं बैठे और हमलोगों ने टॉल फ्री नंबर पर फोन किया और तुरंत उस पर कार्रवाई हुई और आरोपी जेल चले गए। इसके बाद पता चला कि एक विकलांग घर पर ही दारु बनाते हैं, वे अपने घर में बासी चावल और मीठा से दारु बना रहा है, उसको हमलोगों ने ध्वस्त कर दिया। उसके बाद उनके जीविकोपार्जन के लिए अपने साथ जोड़ा और सतत् जीविकोपार्जन योजना के तहत किराना का दुकान खुलवा दिया गया। जब तक हमलोग जिंदा रहेंगे, सभी दीदियां इस काम को बढ़ाने के लिए चलाते रहेंगे।

मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां की पूनम दीदी पिछले 10 वर्षों से जीविका से जुड़ी हैं। इनके द्वारा लैंगिक असमानता और सामाजिक बदलाव को लेकर वर्षों से कार्य किए जा रहे हैं। इनके द्वारा इनके गांव में कम उम्र में शादी को लेकर विरोध किया गया, जिसमें इनका साथ ग्राम संगठन ने दिया। चुनौतियों का सामना करते हुए शराबबंदी और बाल विवाह को भी इनके द्वारा रोका गया और आज पूरा गांव खुशहाल है। एक दिन हमलोगों की बैठक चल रही थी, वो लड़का आया बोला हम आगे पढ़ाई करना चाहते हैं लेकिन मेरे मम्मी-पापा शादी करना चाहते हैं, कुछ कीजिए ना। बैठक खत्म होने पर उनके घर गए और हमलोगों ने कहा कि आपका लड़का चाह रहा है कि आगे पढ़ाई करे तो आप क्यों शादी कर रहे हैं। उस दिन लाख समझाने पर वे लोग नहीं समझे। अगले दिन 30-40 दीदियों का समूह बनाकर हमलोग उनके घर गए। उनको समझाते हुए हमलोगों ने कहा कि बात से समझ जाईयेगा तो ठीक है वर्ना हमलोग कानूनी कार्रवाई करवा देंगे और आपलोग जेल चले जाइयेगा। उसके बाद उनलोगों ने कहा कि लड़की वाला कैसे समझेगा। फिर लड़की वाले का नंबर लेकर हमलोगों ने बातचीत की। लड़की 16 साल की थी, लड़की का मन भी था कि आगे पढ़ाई करे, जिसको 8वीं तक पढ़ाई कराकर पढ़ाई छुड़ा दिया गया था। लड़की से बात किया तो उसने कहा कि आगे पढ़ना चाहती हूं| आज लड़का इंटर में पढ़ रहा है। बाल विवाह, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा जैसे सामाजिक मुद्दों पर हमलोग साप्ताहिक बैठक कर चर्चा करते हैं। हमलोगों को इतना मान सम्मान मुख्यमंत्री जी ने दी है कि किसी ऑफिस में जाते हैं, स्कूल में जाते हैं तो हमलोगों को सम्मान मिलता है।

सीतामढ़ी जिले के परसौनी की श्रीमती रिंकु देवी के पति ताड़ी बेचने का काम करते थे। शराबबंदी लागू होने के बाद इनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। पति की मृत्यु होने पर दुखों का पहाड़ टूट गया। इनको सतत् जीविकोपार्जन के तहत लाभान्वित हुई हैं और वे अपना जीवन खुशहालपूर्वक जी रही हैं और अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं।

शराबबंदी को लेकर मुख्यन्याधीश के बयान के समर्थन में आये वकील

कानून बनाने की प्रक्रिया में पर बिना व्यापक विचार विमर्श किए कानून बनाने पर कानून में कमियां रह जाती है।भारत के चीफ जस्टिस पी बी रमना ने इस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार में शराब बंदी कानून लागू करना इसका एक उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि पूरी तरह विचार नहीं कर कानून नहीं बनाने का नतीजा है कि पटना हाई कोर्ट लाखों के तादाद में मुकदमें सुनवाई के लिए लंबित हैं।

पटना वार ने मुख्यन्यायधीश के बयान पर जतायी सहमति


इस मुद्दे पर पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता योगेश चन्द्र वर्मा ने कहा कि कानून बनाने के पूर्व पूरा विचार विमर्श होना चाहिए,सम्बंधित समूह या व्यक्तियों से बात करना जरूरी होता हैं।लेकिन शराबबंदी कानून के मामलें में ऐसा नहीं करने के परिणाम सामने आ रहे हैं।
जहां शराबबंदी से सम्बंधित बड़ी तादाद में मुकदमें कोर्ट
सुनवाई के लिए लंबित हैं, वहीं एक जमानत याचिका की सुनवाई में काफी समय लग रहा हैं।
उन्होंने कहा कि अभी इस कानून पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हैं।जहां एक ओर सरकार को राजस्व की क्षति बड़े पैमाने पर हो रही है,वहीं गैरकानूनी रूप से शराब का कारोबार चल रहा हैं।
इस पर पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने की बुनियादी जिम्मेदारी की जगह शराबबंदी कानून को लागू करने में समय और शक्ति लग रही।उन्होंने कहा कि इसके आम आदमी को जागरूक बनाने की आवश्यकता हैं और साथ ही इसमें परिवार, समाज, मीडिया और सरकार की भूमिका अहम् होगी।

अब जेल अधिकारी के घर परा छापा कोरोड़ो के अवैध सम्पत्ति हुआ बरामद

#Corruption : छपरा के जेल सुपरिटेंडेंट रामाधार सिंह सरकारी नौकरी में रहते हुए करोड़पति बन गए हैं। आरोप है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर ये भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं।

इस बात के ठोस सबूत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम को मिले। जिसके बाद कल ही यानी गुरुवार को इनके खिलाफ पटना में आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया गया।

अब शुक्रवार को निगरानी की टीम ने इनके तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर दी है। गुपचुप तरीके से प्लान वे में निगरानी की अलग-अलग टीम ने आज सुबह 10:30 बजे के बाद छपरा, पटना और गया में एक साथ इस कार्रवाई को शुरू किया।

जीतनराम मांझी को जीभ कांटने वाले बयान पर हाईकोर्ट में याचिका दायर

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के जीभ काटने वाले को 11 लाख रुपये देने के बारे में दिए गए बयान देने वाले गजेंदर झा के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के लिए एक जनहित याचिका पटना हाई कोर्ट में दायर की गई है।यह जनहित याचिका शहजादा कमर खान ने दायर की है।

इस जनहित याचिका में ये कहा गया है कि ये सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि इस प्रकार के बयानों को बढ़ावा नहीं मिले और आइडी तरह के बयान जारी करने वाले के विरूद्ध सख्त कार्रवाई हो।

जनहित याचिका के जरिये ये कहा गया है कि इस तरह का बयान जारी किए जाने से क्या राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के विरुद्ध हिंसा फैलेगा और उनके जीवन पर भी खतरा होगा।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सह हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के चीफ जीतन राम मांझी ने यह स्पष्ट किया है कि उनका बयान ब्राह्मणवाद के विरोध में था न कि ब्राह्मण के।

उनका यह भी कहना था कि वे दलितों के विरुद्ध होने वाले भेदभाव का विरोध करते रहेंगे।उनका राज्य में सम्मान किया जाता है और वे बिहार के एक बड़े दलित चेहरे हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में इस तरह के बयान जारी किए जाने के बाद यह बात राज्य भर में फैल गया है, जिससे शांति भंग हो सकती है।ऐसे हर तरह के मामलें में सख्त कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत हैं।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुयी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1995 के तहत गठित राज्यस्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुयी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1995 के तहत गठित राज्यस्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक

जब से हमें काम करने का मौका मिला है, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के कल्याण के लिये काफी काम किया गया है- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री के निर्देश

• पुलिस महानिदेशक सभी पुलिस अधीक्षकों के साथ लंबित कांडों के अनुसंधान की महीने में कम से कम एक बार नियमित समीक्षा करें ताकि मामलों का निष्पादन तेजी से हो सके।

• पुलिस महानिदेशक विशेष अभियान चलाकर लंबित काण्डों का अनुसंधान कराकर निर्धारित 60 दिन के अन्दर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कराएं।

कनविक्शन रेट बढ़ाने हेतु स्पीडी ट्रायल के लिए विशेष प्रयास करें ताकि समाज के कमजोर वर्ग के सभी व्यक्तियों को ससमय न्याय मिल सके।

जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक जिलों में दर्ज मामलों की समीक्षा करें एवं पीड़ित व्यक्तियों को ससमय मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करायें।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1995 के तहत गठित राज्य स्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठकहुयी। यह बैठक साढ़े चार घंटे से भी अधिक समय तक चली। बैठक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव श्री दिवेश सेहरा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विगत बैठक की कार्यवाही एवं अनुपालन की विस्तृत जानकारी दी। समीक्षा के क्रम में अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, अपर मुख्य सचिव राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग), निदेशक अभियोजन, सचिव, विधि विभाग द्वारा इस संबंध में किए जा रहे कार्यों की बिंदुवार जानकारी दी।

बैठक में पुलिस महानिदेशक के स्तर पर दोष सिद्धि निपटारे के लिये की गयी कार्रवाई, पीड़ित व्यक्तियों को दी जाने वाली राहत एवं पुनर्वास सुविधाओं तथा उनसे जुड़े अन्य मामलों की भी समीक्षा हुई। जिलास्तर पर गठित निगरानी एवं अनुश्रवण समिति के कार्यकलापों की जानकारी, विशेष लोक अभियोजकों के कार्यों की समीक्षा, संबंधित पदाधिकारियों के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित करने के साथ-साथ अन्य कार्यवाही की भी जानकारी दी गयी।

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की बैठक में आप सभी सदस्य शामिल हुए हैं, इसके लिए मैं धन्यवाद देता हूँ। सभी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ( अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़ी अपनी बातें एवं सुझाव रखे हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत जो बातें सामने रखीं गई हैं, उसका एक पक्ष इस अधिनियम के अंतर्गत की जा रही कार्यवाही के संबंध में है तो दूसरा पक्ष अनुसूचित जाति / जनजाति के हित में काम किये जा रहे कार्यों को और बेहतर ढंग से क्रियान्वित करने को लेकर है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग संबंधित विभागों को जनप्रतिनिधियों द्वारा रखी गयी समस्याओं एवं सुझावों से अवगत कराये ताकि उस पर तेजी से अमल हो सके। विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में भी जन प्रतिनिधियों को अवगत करायें।

मुख्यमंत्री ने निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस महानिदेशक सभी पुलिस अधीक्षकों के साथ लंबित कांडों के अनुसंधान की महीने में कम से कम एक बार नियमित समीक्षा करें ताकि मामलों का निष्पादन तेजी से हो सके। पुलिस महानिदेशक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत अधिसूचित कार्यों की समीक्षा करें तथा विशेष अभियान चलाकर लंबित काण्डों का अनुसंधान कराकर निर्धारित 60 दिन के अन्दर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कराएं। कनविक्शन रेट बढ़ाने हेतु स्पीडी ट्रायल के लिए विशेष प्रयास करें ताकि समाज के कमजोर वर्ग के सभी व्यक्तियों को ससमय न्याय मिल सके। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक जिलों में दर्ज मामलों की समीक्षा करें एवं पीड़ित व्यक्तियों को ससमय मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करायें। जिला स्तर पर गठित सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति के कार्यकलापों भी समीक्षा करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष लोक अभियोजकों की कार्य क्षमता की समीक्षा करें और योग्य विशेष लोक अभियोजकों को दायित्व सौंपे ताकि वे न्यायालय में बेहतर ढंग से पक्ष रख सकें। इस अधिनियम के तहत दर्ज कांडों के त्वरित निष्पादन हेतु 9 अनन्य विशेष न्यायालयों के गठन की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूर्ण करें। अनन्य विशेष न्यायालयों में इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की ही सुनवाई हो। अत्याचार होने पर घटना स्थल का निरीक्षण निश्चित रूप से हो। अगर संबंधित अधिकारी ऐसा नहीं करते हैं तो वरीय अधिकारी जाकर स्थल निरीक्षण करें। गृह विभाग एवं विधि विभाग कनविक्शन रेट में सुधार एवं लंबित मामलों में कमी लाने के लिए नियमित अनुश्रवण करे। चिकित्सा जांच प्रतिवेदन ससमय प्राप्त हो, यह सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में कनविक्शन रेट में कमी और स्पीडी ट्रायल में सुधार लाने को लेकर लगातार समीक्षा करें। विधि विभाग यह सुनिश्चित करें किगवाह ससमय कोर्ट पहुंचे और उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न हो। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत जिलास्तर पर अत्याचार के पीड़ित / आश्रितों को राहत अनुदान की स्वीकृति तत्काल दी जाय ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से हमें काम करने का मौका मिला है अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के लिए काफी काम किया गया है। अनुसूचित जाति में से महादलित वर्ग के लिए विशेष काम किया गया। बाद में सभी अनुसूचित जातियों को वह सारी सुविधायें दी गई। सरकार में आने के बाद सर्वे कराने के बाद यह पता चला कि 12.5 प्रतिशत बच्चे-बच्चियां जो स्कूल नहीं जा पाते हैं, उनमें ज्यादातर महादलित एवं अल्पसंख्यक वर्गों से आते हैं। सभी बच्चे-बच्चियों को स्कूल पहुंचाया गया। वर्ष 2008 तक पूरे बिहार में 22,000 स्कूल बनवाये गये। अनुसूचित जाति-जनजातियों के जिन संस्थानों के भवनों की स्थिति ठीक नहीं थी उन्हें अलग से ठीक कराया गया। शिक्षकों की बहाली की गई। पहले अनुसूचित जाति-जनजाति की क्या स्थिति थी सभी जानते हैं। हमलोगों के सरकार में आने के बाद से इस वर्ग के लिए काफी काम किया गया है। आज की बैठक में शामिल सदस्यों ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कल्याण के कार्यों और बेहतर ढंग से क्रियान्वित करने के लिए जो सुझाव दिये, विभाग उस पर भी तेजी से काम करे।

बिहार का एक गांव ऐसा जो अपने हुनर के बल पर देश में बनायी अलग पहचान

पटना से कोई 50 किलोमीटर दूर वैशाली जिले में एक गांव है अकबरपुर मलाही इस गांव के पुरुष और महिलाओं ने अपने हुनर के बल पर देश के नक्शे में अपने गांव का नाम शामिल कराने में कामायाब रहा है ।

तार के पेड़ से छड़ी बनाते गाँव वाले

दरअसल इस गाँव के आधा से अधिक आबादी तार के पेड़ का छड़ी और बैसाखी बना कर पूरे देश मे सप्लाई कर रहा है।गांव के हर घर मे तार के पेड़ का छड़ी बनता है। यह छड़ी बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए वरदान साबित हो रहा है । गाँव के इंदु शर्मा नामक महिला ने इस तार के छड़ी बनाने का काम शुरू किया था और देखते ही देखते पूरा गांव इस धंधा में जुड़ गया। गाँव के लोगो की बात मने तो भारत देश मे यह छड़ी सिर्फ अकबरपुर मलाही गाँव में बनता है।ऐसे तो लकड़ी का छड़ी हर जगह बनता होगा मगर तार के पेड़ का छड़ी सिर्फ अकबरपुर मलाही गाँव मे बनता है।।।

क्या कहना है गाँव वालो का

तार के पेड़ के छड़ी कई नामो से जाना जाता है,नबाब की छड़ी इसमें काफी खूबसूरत होता है।इसके दाम भी ज्यादा है।ऐसे एक छड़ी डेढ़ सौ से लेकर ढाई सौ के बीच बिकता है। छड़ी बनाने का कारोबार में पिछले कई सालों कर रहे अभय शर्मा ने बताया सरकार के तरफ से कोई मदद नही मिलता है।छोटे मोटे प्राईवेट फाइनेंस कर्मी से लोन पर पैसा लेकर यह धंधा को कर रहे है।अगर सरकार मदद करती तो इस उधोग को आगे और बढ़ाया जा सकता है।

इस तार की छड़ी में खास यह है कि यह छड़ी काफी मजबूत होता है और उसकी पकड़ काफी मजबूत होती है वही दूसरे लकड़ी से बना छड़ी पानी बर्दाश्त नहीं करता है वहीं तार से बना यह छड़ी पानी के साथ साथ घुन से भी बचाता है ।

हाईकोर्ट ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डां राजेन्द्र प्रसाद के जन्मस्थली के खस्ताहाल को लेकर दायर याचिका पर हुई सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेइ और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा पर गंभीर रुख अपनाया।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य सरकार से 3 जनवरी,2022 तक जवाब देने का निर्देश दिया है।
साथ ही कोर्ट ने वकीलों की एक तीन सदस्यीय टीम गठित किया है।ये टीम जीरादेइ और वहां स्थित स्मारकों,पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित स्मारकों का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट अगली सुनवाई में देगा।
जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया कि जीरादेई गांव व वहां डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है।याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं नहीं के बराबर है।न तो वहां पहुँचने के सड़क की हालत सही है,न ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति ठीक है।
उन्होंने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण लगातार हालत खराब होती जा रही है।कोर्ट को बताया गया कि पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित उनसे सम्बंधित स्मारकों की दुर्दशा भी साफ दिखती हैं।इस स्थिति में शीघ्र सुधार के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा युद्ध स्तर पर कार्रवाई करने की जरूरत हैं।

डॉ राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर,1884 को सिवान के पास जीरादेई गांव में हुआ था।वे बड़े ही मेधावी छात्र थे।उन्होंने वकालत की डिग्री ले कर कुछ समय तक वकालत की बाद वे भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में अग्रणी नेता रह कर भाग लिया।
भारतीय संविधान की निर्माण कर रही संविधान सभा के वे अध्यक्ष भी रहे।

बाद में भारत के पहले राष्ट्रपति बने।इस पद पर उन्होंने मई,1962 तक कार्य किया।बाद में राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद पटना के सदाकत आश्रम में रहे,जहां 28 फरवरी,1963 को उनकी मृत्यु हुई।
ऐसे महान नेता के स्मृतियों व् स्मारकों की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाना उचित नहीं हैं।इनके स्मृतियों और स्मारकों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 3 जनवरी,2022 को की जाएगी।

सृजन घोटाले से जुड़े अभियुक्त अब अपनी सम्पति नहीं बेच सकते हैं।

सृजन घोटाले से जुड़े अभियुक्तों के खिलाफ ईडी ने बड़ी कार्यवाही की है इस मामले में चार्जशीट सभी अभियुक्तों के अचल संपत्ति की खरीद और बिक्री पर रोक लगा दिया है ।                 

ईडी ने भागलपुर और देश के अन्य हिस्सों में सृजन घोटाले से प्राप्त राशी द्वारा 34 जगहों पर खरीदी गयी जमीन, प्लॉट और फ्लैट काे खरीद और बिक्री पर रोक लगा दिया है । अब उन जमीन, फ्लैट की खरीद-बिक्री नहीं हाे सकेगी। इसके लिए ED के सहायक निदेशक संतोष कुमार मंडल ने जिला अवर निबंधक काे 12 अगस्त 2021 काे पत्र के जरिए इसकी खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए कहा था। ED ने सूची के साथ तीन पन्नों की रिपोर्ट भी भेजी थी।अब इस दिशा में ही जिला अवर निबंधक की ओर से कार्रवाई करते हुए उन सभी प्लॉट व फ्लैट को लॉक करवा दिया है। इनमें सृजन महिला विकास सहयोग समिति की सचिव मनोरमा देवी, उनके बेटे अमित कुमार, प्रणव कुमार, बहु रजनी प्रिया, प्रणय कुमार की पत्नी सीमा कुमारी, परणजीत कुमार लाल की पत्नी अर्चना लाल, दिवाकर कुमार कर्ण की पत्नी कल्पना कर्ण, बिपिन कुमार और जिला नजारत के पूर्व नाजिर अमरेंद्र कुमार यादव की पत्नी पूजा कुमारी के नाम से जमीन व फ्लैट हैं। इसमें ज्यादातर जमीन व प्लॉट सबौर, रानी तालाब स्थित अंगिका विहार अपार्टमेंट, प्राणवती लेन के पास, बेहरपुरा के अलावा खलीफाबाग में भी है।सृजन के घोटालेबाजों ने कहां और कितनी खरीदी जमीन व फ्लैट1. डॉ. प्रणव कुमार, पिता : स्वर्गीय अवधेश कुमारसबौर अराज हल्का नंबर-2: 8804 वर्गफीटजमीन : सबौर मौजा में 12.5 डिसमिल2. पूजा कुमारी, पति : अमरेंद्र कुमार यादवजमीन : कुतुबगंज, मोजाहिदपुर, बरहपुरा प्राणवती लेन, भागलपुर शहर में दाे जगहों पर।3. अर्चना लाल, पति : परणजीत कुमार लालजमीन : सबौर में 5 कट्ठा4. सीमा कुमारी , पति : प्रणय कुमारजमीन : सबौर में 5 कट्ठा5. कल्पना कर्ण, पति- दिवाकर कुमार कर्णजमीन- सबौर में पांच कट्ठा6. अमित कुमार, पिता : स्वर्गीय अवधेश कुमारजमीन : सबौर में 10 कट्ठा, रजंदीपुर मौजा में 88 डिसमिल, फतेहपुर में 4.5 डिसमिल, सबौर में 4.248 डिसमिल, सबौर में 10.90 डिसमिल, सबौर के फतेहपुर में 1240 वर्गफीट, नाथनगर के पुरानी राय में 11.75 डिसमिल।मकान : प्राणवती लेन होल्डिंग नंबर-1 3.908 डिसमिल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड खलीफागाब : 3565 वर्गफीटफ्लैट : रानी तालाब स्थित अंगिका विहार अपार्टमेंट के थर्ड प्लोर पर : 1734 वर्गफीट, अंगिका विहार के ग्राउंड फ्लोर में नंबर एजी-2: 1734 वर्गफीट।7. मनोरमा देवी, पति : स्वर्गीय अवधेश कुमारजमीन : सबौर में एक एकड़ 51 डिसमिल, 15.5 डिसमिल, 5.5 डिसमिल, बरहपुरा में 1440 वर्गफीट, फतेहपुर में 6.746 डिसमिल।फ्लैट : अंगिका विहार के थर्ड फ्लोर में फ्लैट नंबर-ए/3018. रजनी प्रिया, पति : अमित कुमारजमीन : सबौर में 25 डिसमिल, बरहपुरा में 355 वर्गफीट, फतेहपुर में 1240 वर्ग फीट, 1685 वर्ग फीट, 1685 वर्गफीट।फ्लैट : सेंट्रल जेल रोड के सामने वाली गली में कृष्णाधाम अपार्टमेंट में फ्लैट नंबर -3079. अमित व बिपिन कुमार अमित कुमार, पिता : स्वर्गीय अवधेश कुमार और बिपिन कुमार पिता-कार्तिक कुमार।प्लॉट : डीएन सिंह रोड, कोतवाली के पास 1072.5 वर्गफीट।मनोरमा, अमित व रजनी के नाम अंगिका विहार में फ्लैटसृजन महिला विकास सहयोग समिति के पदधारकों ने न केवल जमीन खरीदी, बल्कि सबौर के रानी तालाब स्थित अंगिका विहार और सेंट्रल जेल रोड के सामने की गली में कृष्ण धाम अपार्टमेंट में फ्लैट भी खरीदी। अंगिका विहार अपार्टमेंट में जहां अमित कुमार का थर्ड और ग्राउंड प्लोर में फ्लैट है। वहीं, मनोरमा का फ्लैट भी अंगिका विहार अपार्टमेंट में थर्ड फ्लोर पर है। जबकि रजनी प्रिया के नाम से एक फ्लैट कृष्णाधाम अपार्टमेंट में है।बरहपुरा और बाईपास के पास भी खरीदी थी जमीनसबसे अधिक सरकारी खजाने के लूट के पैसे से मनोरमा देवी और अमित कुमार ने जमीन खरीदी है। सबसे अधिक सबौर में जमीन की खरीद की गई है। इसके अलावा शहर और आसपास के इलाके में भी जमीन खरीदी। इसमें बरहपुरा में ताे काफी जमीन खरीदी। जबकि, नाथनगर में पुरानी सराय में बाइपास के बगल में भी जमीन खरीदी थी। इसके अलावा जिला नजारत के पूर्व नाजिर अमरेंद्र कुमार यादव ने अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम से कुतुबगंज, मोजाहिदपुर, बरहपुरा प्राणवती लेन के अलावा शहर में भी दाे जगहों पर जमीन खरीदी है। इसके अलावा मनोरमा देवी ने केवल सबौर में एक एकड़ 51 डिसमिल जमीन अपने नाम से खरीदी थी। इसके अलावा एक बाजार में डीएन सिंह रोड, कोतवाली के पास अमित कुमार और बिपिन कुमार ने संयुक्त रूप से 1072.5 वर्गीफीट का प्लॉट खरीदा था।

क्या नीचता को रोकने को लेकर जबावदेह नहीं है सरकार

2020 में मेरी बेटी 10वीं की परीक्षा दी थी रिजल्ट आने के एक सप्ताह के बाद बेटी के नामांकन को लेकर जो फोन कॉल आना शुरू हुआ वो अभी तक जारी है कभी देहरादून से जो कभी कटक से तो कभी बेंगलुरु से इस कॉलेज या फिर स्कूल से बोल रहे हैं आप चाहे तो नाम लिखा सकते हैं।                

कोटा के इस कोचिंग संस्थान से बोल रहे हैं आपकी बेटी का रिजल्ट बहुत अच्छा है आईआईटी कम्पीट कर सकती है दो वर्ष के लिए हमारे कोचिंग संस्थान में भेज दीजिए सभी तरह कि सुविधाएं मौजूद हैं दिल्ली के कोचिंग संस्थान से बोल रहे हैं आप अपनी बेटी को कोचिंग के लिए नाम लिखा सकते हैं इससे पहले ऑल इंडिया स्तर पर एक ऑनलाइन टेस्ट होने जा रहा है उसमें पास करने पर कोचिंग के फीस में 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है ना जाने इस तरह के कितने फोन काॅल अभी भी आ रहे हैं मैसेज की तो बात ही छोड़ दीजिए।    

मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था कि मेरा मोबाइल नम्बर इन लोगों के पास कैसे पहुंच गया पता चला बेटी के फर्म भरने के दौरान मैंने अपना नम्बर लिख दिया था मतलब यह नम्बर कही ना कही सीबीएसई  से ऑल ओवर इंडिया के कोचिंग संस्थान और कॉलेज चलाने वाले लोगों के पास पहुंच गया ।                                        

2020 में ही मेरे साथ साइबर क्राइम हुआ था जांच में पता चला कि मेरा मोबाइल नम्बर बैक से ही सार्वजनिक हुआ था बैंक में आज कल हो क्या रहा है बैंक से जुड़े उपभोगता ज्यादा से ज्यादा क्रेंडिट कार्ड ले इसके लिए निजी लोगोंं को बैक आज कल हमार आपका डाटा उपलब्ध करता रहता है जिसमें नम्बर के साथ साथ आपके किस तरह के ग्राहक है वर्ष में कितना लेन देन करते हैं उसकी जानकारी उन लोगों को मिल जाता है फिर वही से वो डाटा साइबर क्राइम से जुड़े अपराधियों के पास पहुंच जाता है इतना ही नहीं मेरे बैंक खाते से जितनी भी राशी निकाली गयी थी वो सारी राशी पश्चिम बंगाल ,उड़ीसा और महाराष्ट्र के साथ साथ दिल्ली के 30 से अधिक खाते में आंन लाइन ट्रान्सफर हुआ था सभी खाते आधार से लिंक था लेकिन जिस व्यक्ति का आधार का इस्तमाल किया गया था उसको पता भी नहीं है कि उसके नाम पर कोई बैंक खाता है और सारे खाते को आंन लाइन ट्रानजेक्सन की सुविधा उपलब्ध है कई स्टेट की पुलिस से हमारी बात हुई कहां रोजाना लाखो ऐसे खाता खोले जा रहा है और एक फ्रोड के बाद खाता बंद हो जाता है इसी तरह इस पूरे घटना में खाते के साथ जो मोबाइल नम्बर लिखा हुआ था या फिर जिस मोबाइल नम्बर से सारा खेल हुआ वो सभी के सभी आधार से लिंक था लेकिन आधार का गलत इस्तमाल हुआ है यह साफ दिख रहा था ।               

रोजाना इस देश में एक लाख से अधिक साइबर फ्रॉड हो रहा है हाई प्रोफाइल मामला रहा तो पुलिस कार्यवाही करती है नहीं तो इस तरह के मुकदमों को पुलिस झांकने तक नहीं जाती है । इस घटना का मैं जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि दो दिन पहले लोकसभा में फर्जी वोटिंग रोकने के लिए एक बिल पास हुआ है सरकार और चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट को आधार से जोड़ने पर फर्जी मतदान को रोका जा सकता है पता नहीं इस बिल के पास होने से फर्जी वोटिंग पर कितना रोक लगेगा क्यों कि फर्जी वोटिंग तो मतदान केन्द्रों पर मौजूद पार्टी के पोलिंग एजेंट या फिर मतदान पदाधिकारी के मिली भगत से ही होता है ।   लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर मंत्री नेता और पदाधिकारी के बारे में टिप्पणी करने पर आप जेल जा सकते हैं लेकिन मेरा डाटा जो लिंक करता है या फिर आधार कार्ड का जो गलत इस्तेमाल करता है उसको लेकर  कठोर कानून क्यों नहीं बन रहा है जबकि आज साइबर फ्रॉड से हर कोई परेशान है मॉल में या किसी भी बड़े दुकान पर अपना मोबाइल नम्बर देना क्यों अनिवार्य है इस पर क्यों नहीं कानून बन रहा है बहुत सारी ऐसी बाते है जिसको लेकर कठोर कानून बनाने कि जरूरत है लेकिन सरकार इस पर चर्चा करने से क्यों बचती है ।

बिहार में नॉन-इंटरलॉकिंग का काम शुरु होने के कारण 24 से 28 दिसंबर के बीच 22 ट्रेनों का परिचालन रहेंगा प्रभावित

पटना. बिहार में सोनपुर रेल मंडल के कुरसेला व कोसी ब्लॉक हट में नॉन-इंटरलॉकिंग का काम शुरु होने के कारण 24 से 28 दिसंबर के बीच 22 ट्रेनों का परिचालन अलग-अलग तारीख में रद्द किया गया है. इसके अलावा कई ट्रेनों का मार्ग बदला गया है.कटिहार-पटना और पटना-कटिहार 26 दिसंबर को रद्द रहेगी. वहीं बिलासपुर मंडल में नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के कारण पटना-बिलासपुर ट्रेन 26 दिसंबर व बिलासपुर-पटना ट्रेन 24 दिसंबर को रद्द रहेगी।

बिहार में रोजगार के सृजन पर गिरिराज ने दी सफाई


परिवर्तित मार्ग से चलने वाली ट्रेन
25 दिसंबर को 12424 नयी दिल्ली–डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग वाया दानापुर-पटना-मोकामा-किउल-मालदा टाउन के रास्ते, 24 दिसंबर को 15635 ओखा-गुवाहाटी एक्सप्रेस मोकामा-किउल-मालदा टाउन व 26 दिसंबर को 15715 किशनगंज-अजमेर एक्सप्रेस मालदा टाउन-किउल-पटना-पाटलिपुत्र-परमानंदपुर के रास्ते जायेगी.
दोहरीकरण काम से ट्रेनों के परिचालन में किया गया बदलाव
सोनपुर मंडल के हाजीपुर -चकमकरंद स्टेशन के बीच हाजीपुर-बछवारा दोहरीकरण के कारण 23 दिसंबर को पाटलीपुत्र से खुलने वाली गाड़ी संख्या 13206 पाटलीपुत्र-सहरसा एक्सप्रेस व गाड़ी संख्या 13106 बलिया-सियालदह एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग वाया हाजीपुर-मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर-बरौनी होकर चलेगी.
22 दिसंबर को आनंद विहार से खुलने वाली गाड़ी संख्या 20502 आनंद विहार-अगरतला राजधानी एक्सप्रेस दानापुर-पटना-मोकामा-न्यू बरौनी जंक्शन होकर चलेगी.यह ट्रेन पाटलिपुत्र के बजाय पटना जंक्शन पर रुकेगी. वहीं, 23 दिसंबर को पटना से खुलने वाली गाड़ी संख्या 03284 पटना-बरौनी मेमू पैसेंजर का आंशिक समापन व गाड़ी संख्या 03283 बरौनी-पटना मेमू पैसेंजर का आंशिक प्रारंभ हाजीपुर से होगा।

मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

पटना हाईकोर्ट में मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के दौरान कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले में एक जनहित याचिका दायर की गई है। मुकेश कुमार व अन्य के द्वारा दायर ये जनहित याचिका दायर की गई है।
जनहित याचिका में यह माँग की गई कि हाई लेवल कमेटी से जांच करवाई जाए।

इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई लोगों की ऑंखें चली गई।
इस याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार के अधिकारियों को भी एक नियमित अंतराल पर अस्पताल का निरीक्षण करना चाहिए था।
कोर्ट को बताया गया कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही के कारण ही सैकड़ों लोगों को अपनी आँखे गंवानी पड़ी। अस्पताल प्रबंधन व जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की वजह से आंख खोए व्यक्तियों को मुआवजा देने की मांग किया गया है। पीड़ितों को सरकारी अस्पताल में उचित इलाज करवाने को लेकर आदेश देने की भी मांग किया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने बताया कि उक्त अस्पताल को राज्य सरकार व केंद्र सरकार से आर्थिक मदद भी मिली है। 22 नवंबर से 27 नवंबर, 2021 के बीच 330 व्यक्तियों का कैटरेक्ट मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था।

शराबी बेटे के व्यवहारा से तंग एक मां पहुंची थाना दिलायी सजा

बिहार में इन दिनों एक माँ खासे चर्चा में है वजह वो अपने शराबी बेटे के खिलाफ कोर्ट में गवाही दी है और इस गवाही की वजह से कोर्ट ने शराबी बेटे को पांच वर्ष का सजा सुनाया है । मामला आरा शहर के नगर थाना क्षेत्र के शीतल टोला मोहल्ले का है जहां 10 जून 2021 को रामावती देवी ने अपने शराबी बेटे से तंग आकर नगर थाना को फोन कर सूचना दी थी। रामावती का पुत्र आदित्य राज उर्फ बिट्टू शराब के नशे में अपनी मां और पिता के साथ मारपीट कर रहा था। नगर थाना पुलिस ने शराबी बेटे को नशे की हालत में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
पीड़ित मां ने पुलिस से शिकायत की थी कि बेटा शराब के नशे में हमेशा घर पर आकर पैसे छीन लेता था और मारपीट करता रहता था। मां ने यह भी आरोप लगाया था कि बेटा उन्हें जबरन कमरे में बंद कर देता था।एक माह तक जेल में रहने के बाद मां ने बेटे का जमानत करवा कर जेल से बाहर निकलवाया लेकिन बेटे के स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया
इस बीच कोर्ट में स्पीडी ट्रायल के तहत सुनवाई शुरु हुई कोर्ट में भी मां उपस्थित हुई औरअपने बेटे के खिलाफ गवाही दी गवाही के बाद ADJ-4 त्रिभुवन यादव की विशेष एक्साइज अदालत ने सोमवार को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इसमें एक बेटे को उसी की मां द्वारा दर्ज कराई गई FIR के आधार पर चल रहे ट्रायल में 5 साल के सश्रम कारावास के साथ एक लाख रुपए अर्थदंड की सजा दी गई है।
मां के साथ 3 गवाह, बेटे का साथ किसी ने नहीं दिया
लोक अभियोजक राजेश कुमार ने बताया कि ट्रायल में अभियोजन की तरफ से तीन गवाह प्रस्तुत किए गए। इस कांड में अभियुक्त की मां रामावती देवी ने गवाही दी। साथ ही पुलिस की तरफ से मजहर हुसैन तथा अनुसंधानकर्ता नीता कुमारी ने अपना बयान अदालत के समक्ष दर्ज कराया। शराबी बेटे के पक्ष में कोई भी सामने नहीं आया। यहां तक कि दोस्तों ने भी साथ नहीं दिया।
राजेश कुमार के अनुसार रामावती देवी ने पहले अपने बेटे के शराब की लत छुड़ाने की हरसंभव कोशिश की थी। उसे चिकित्सक के पास भी दिखाया, दवा भी कराई। बावजूद इसके बेटे की शराब की लत नहीं छूट सकी। तंग आकर मां ने यह कड़ा फैसला किया।
पहली बार मां ने दिलाई बेटे को सजा
बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद यह पहला मामला है, जिसमें एक मां ने अपने बेटे को 5 साल की सजा दिलाई है। इसमें एक मां ने अपने बेटे को सही दिशा दिखाने के लिए न सिर्फ अदालत की शरण ली, मां के इस निर्णय की बिहार में हर जगह चर्चा हो रही है और कहां जाने लगा है कि रामावती जैसी पांच दस मां और सामने आ जाये तो बिहार में शराबबंदी पूरी तरह से लागू हो जायेंगा हालांकि रामावती सरकार के शराबबंदी कानून के आड़ में जो खेल चल रहा है उसको लेकर दुखी है उनका कहना है कि नीतीश कुमार ने बहुत अच्छा काम किया है शराबबंदी करके लेकिन प्रशासन खुद इस खेल में शामिल है जिस वजह से घर घर शराब पहुंच रहा है ।

बिहारवासियों को फिलहाल ठंड से राहत नहीं गया रहा सबसे सर्द

बिहारवासियों को फिलहाल ठंड से राहत मिलने वाली नहीं है मौसम विभाग की माने तो 25 दिसंबर से पहले मौसम के मिजाज में कोई बदलाव की सम्भावना नहीं है पटना मौसम विज्ञान केंद्र की मानें तो अगले 48 घंटे में राजधानी समेत राज्यभर के तापमान में विशेष गिरावट नहीं आएगी।

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प्रदेशभर में गया सबसे ठंडा रहा। यहां का न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पटना में 7.6 डिग्री, भागलपुर में 9.5 डिग्री, पूर्णिया में 9.7 डिग्री, वाल्मीकीनगर में 8.2 डिग्री, मुजफ्फरपुर में 10.8 डिग्री, छपरा में 10 डिग्री, दरभंगा में 9.6 डिग्री, सुपौल में 10.9 डिग्री दर्ज हुआ।

मौसमी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में सतह से 0.9 किमी ऊपर में उत्तरी एवं उत्तर पश्चिम हवा का प्रवाह बना हुआ है। साथ ही एक चक्रवाती परिसंचरण का क्षेत्र मध्य बिहार व समीपवर्ती पूर्वी यूपी में बना हुआ है जो अब बांग्लादेश के पास है। यह समुद्रतल से 1.5 किमी और 3.1 किमी के बीच विस्तारित है।
उधर, मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्वानुमान जताया है कि अगले 48 घंटे में तापमान में कोई विशेष बदलाव नहीं होगा। वहीं, राज्य में एक से दो जगह कोहरा व धुंध का प्रभाव रहेगा। दक्षिण बिहार में भभुआ, बक्सर, गया, नवादा में शीतलहर की संभावना है, जबकि एक-दो जगहों पर कोल्ड डे भी हो सकता है।
मौसम के मिजाज को देखते हुए फिलहाल स्कूल का समय सुबह 9 बजे से 3.30 तक ही रहेगा ।

हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष को दी राहत कहा नियुक्ति पत्र जारी करे नहीं जो तैयार रहे जेल जाने को

पटना हाई कोर्ट ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर मुजफ्फरपुर ज़िला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष के रवैए पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। जस्टिस पी बी बजन्थरी ने अभिनव कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए ज़िला उपभोक्ता फोरम, मुजफ्फरपुर के अध्यक्ष को याचिकाकर्ता को आज नियुक्ति पत्र देने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र दे कर सभी सम्बंधित रिकॉर्ड 24 दिसम्बर,2021 को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ,तो अध्यक्ष,उपभोक्ता फोरम,मुजफ्फरपुर को अपने जेब से अर्थदंड भरना पड़ेगा, न कि फोरम के द्वारा।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अदालती आदेश का पालन नहीं करने व उपस्थित नहीं होने पर मुजफ्फरपुर ज़िला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष के विरूद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया था।आज मुजफ्फरपुर के एस पी ने उन्हें कोर्ट के समक्ष उपस्थित किया।कोर्ट ने एस पी, मुजफ्फरपुर के कोर्ट में आने पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्या मैंने एस पी को कोर्ट में आने का निर्देश दिया था।

यह मामला इस ज़िला उपभोक्ता फोरम में याचिकाकर्ता की , अनुकम्पा के आधार पर बहाली का था।मुजफ्फरपुर के डीएम की अध्यक्षता में जिला अनुकम्पा नियुक्ति समिति ने याचिकाकर्ता के आवेदन पर मंजूरी देते हुए 2019 में ही उसकी अनुकम्पा बहाली हेतु अनुशंसा वहां के ज़िला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष को कर दिया था ।
पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष को इस मामले में फौरन निर्णय लेकर कोर्ट में जवाब दायर करने का निर्देश दिया था । हाई कोर्ट ने हिदायत दी थी कि पिछले 2 सालों से बहाली के मामले को जिला फोरम अध्यक्ष लटका कर नही रख सकते ।
इसलिए पिछली सुनवाई में ही हाई कोर्ट ने उक्त ज़िला फोरम के अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिया था कि यदि बहाली सम्बन्धित निर्णय 20 दिसम्बर तक कोर्ट में पेश नही हुआ, तो अध्यक्ष महोदय को खुद कोर्ट मेंहाज़िर रहना होगा ।

पिछली सुनवाई में मुजफ्फरफुर ज़िला उपभोक्ता फोरम की ओर से न तो कोई जवाब आया और न ही उसके अध्यक्ष कोर्ट में पेश हुए। नतीजतन, हाई कोर्ट ने अध्यक्ष को अगली सुनवाई के दिन पेश करने हेतु गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश हाई कोर्ट रजिस्ट्री को दिया था।
आज कोर्ट में उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष खुद हाजिर हो कर सफाई दी।लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि याचिकाकर्ता अभिनव कुमार को नियुक्ति पत्र दे कर 24,दिसंबर,2021 को कोर्ट के समक्ष सारे कागजात पेश करें।

इस मामले की अगली सुनवाई 24 दिसम्बर,2021 को होगी ।

क्या यह सच है कि पंचायती राज व्यवस्था भ्रष्टाचार के विकेन्द्रीकरण का जरिया बनकर रह गया है

बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के लागू होने के बाद जब चुनाव की घोषणा हुई तो उस वक्त मैं दरभंगा से ईटीवी के लिए काम कर रहा था ।मैं व्यक्तिगत रूप से काफी उत्साहित था चलो आने वाले समय में गांव वालो की सरकार होगी कुछ बेहतर होगा । ऐसे में जैसे ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई सारी खबरों को छोड़कर पंचायत चुनाव से जुड़ी खबर पर टूट पड़े गजब का जुनून सवार हो गया था एक दिन रात को पूर्व विधायक उमाधर सिंह का फोन आया संतोष जी कहां रहते हैं कुछ अता पता नहीं चल रहा है ,सर पंचायत चुनाव में लगे हुए हैं अरे कहा फस हुए हैं कुछ होने वाला है, कल भेट होगी कुछ जरुरी बात करनी है ।
तीन घंटे तक जबरदस्त बहस हुई वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया पर बहस का सार यही रहा कि वो इस बात पर अड़े रहे कि पंचायती राज व्यवस्था भ्रष्टाचार के विकेन्द्रीकरण के लिए बनाया गया है और मैं अड़ा रहा कि गांव की अपनी सरकार होगी गांव वाले अपने नजरिये से गांव का विकास करेंगे स्कूल और अन्य व्यवस्थाओं पर उनकी पकड़ होगी व्यवस्थाओ में सुधार होगा।
लेकिन तीसरे चुनाव का जो परिणाम आया है उसे देखने के बाद तो ऐसा ही लग रहा जो स्वर्गीय उमाधर सिंह कह रहे थे , पंचायती राज व्यवस्था ने भ्रष्टाचार को गांव गांव तक पहुंचा दिया और अब पंचायत का चुनाव बदलाव के लिए नहीं हो रहा है पैसे के लिए हो रहा है ।बदलाव लाने वाले पचास सौ चेहरे जरुर जीत कर आये हैं लेकिन उनका उद्देश्य भी पंचायत या गांव की मजबूती को लेकर नहीं है ऐसे लोगों का अपना ही उद्देश्य है जिसमें गांव और गांव के लोग कही नहीं है उनकी नजर दिल्ली के उस लुटियन जोन पर है जहां गांव और गरीब की बात के सहारे अपना स्थान बना सके खैर अब विषय वस्तु पर आते हैं 2021 का पंचायत चुनाव का परिणाम की हकीकत क्या है

1—70 फीसदी पुराने चेहरे इस बार चुनाव हार गये
2021 के पंचायत चुनाव का जो परिणाम आया है उसमें मुखिया और वार्ड पार्षद के 80 से 90 प्रतिशत पुराने चेहरे को जनता ने नकार दिया है वही बाकी पदों पर थोड़ी स्थिति बेहतर है । इसके पीछे दो तरह के तर्क सामने आ रहे हैं पहला तर्क है इस बार राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल किया और साथ ही वोकस वोटिंग ना हो इसके लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था की गयी जहां आपके थम्म मिलने के बाद ही वोटिंग कर सकते थे।
इसमें कोई दो मत नहीं है कि राज्य निर्वाचन आयोग के इस व्यवस्था से चुनाव में धांधली नहीं के बराबर हुई है और यही वजह है कि इस बार के चुनाव में अभी तक धांधली के सबसे कम शिकायत आयोग के पास आया है ।
वही दूसरा तर्क यह है कि हर घर जल नल योजना में जिस तरह से गांव गांव में लूट मचा था, उसी का असर रहा कि मुखिया और वार्ड सदस्य बड़ी संख्या में चुनाव हार गये मतलब सरकार के गलत नीति का खामियाजा वोट का चोट के रुप में मुखिया और वार्ड पार्षद को झेलना पड़ा लेकिन जो लोग जीत कर आये हैं वह इन दोनों तर्क को सवालों के घेरे में ला कर खड़ा कर दिया है।

2—चुनाव जीतने वालों में शराब माफिया,ठेकेदार,बाहुबली और धनकुबेर की संख्या 50 प्रतिशत के करीब है

इस बार के पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में ऐसे लोग चुनाव लड़ने बिहार आये जिनका बिहार से बाहर अच्छा खासा बिजनेस और व्यापार था या फिर बड़े कॉरपोरेट हाउस में उच्च पदों पर काम कर रहे थे इसका असर यह हुआ कि अधिकांश पंचायत में मुखिया उम्मीदवार 20 से 25 लाख रुपया तक खर्च किये इतना ही नहीं इस बार वार्ड सदस्य को भी बिना पैसा दिये वोट नहीं मिला है ।पूराने मुखिया के हारने की एक वजह हर घर जल नल योजना जरुर है लेकिन इस योजना में कमाई को देख कर जो नये खेलाड़ी आये वो इतना पैसा खर्च किया है पूराने मुखिया जी कही टिक ही नहीं पाये वही दूसरी और शराबबंदी के आर में पिछले पांच वर्षो के दौरान हर गांव में एक नये वर्ग का उदय हुआ है जिसके पास पैसा है ताकत है यूथ है और यह वर्ग पंचायत चुनाव को सबसे अधिक प्रभावित किया है अभी तक जो सूचना मिली है दो सौ से अधिक मुखिया ऐसे लोग चुनाव जीत कर आये हैं जिनका पति या बेटा शराब के धंधे में जेल में बंद है या फिर फरार चल रहा है ।

3— जिला परिषद अध्यक्ष ,प्रमुख और उप मुखिया तक में बोली चल रही है

इस समय पूरे बिहार में जिला परिषद अध्यक्ष और प्रमुख का चुनाव चल रहा है हाल यह है कि चुनाव जीतने के समय से ही अधिकांश सदस्य बिहार से बाहर नेपाल ,झारखंड ,दिल्ली और कोलकाता में प्रमुख पद के उम्मीदवार का दाल गिला कर रहा है कई जगह जो बोली लगायी गयी है पांच लाख रुपया एक बुलेट मोटरसाइकिल स्थिति यह है कि इस बार उप मुखिया के चुनाव में भी वार्ड सदस्य डिमांड कर रहा है हालांकि जिला परिषद अध्यक्ष और प्रखंड प्रमुख में इस बार राजनीतिक दल ज्यादा सक्रिय दिख रहा है इस वजह से कई जगह पैसे का खेल कि जगह योजना का खेल चल रहा है ये है पंचायती राज का सच है ।फिर निराश होने कि जरूरत नहीं है बहुत सारे युवा चुनाव जीत कर आये हैं बहुत सारे ऐसे लोग भी चुनाव जीत कर आये हैं जिन्हें वोटर वोट के साथ साथ चुनाव लड़ने के लिए चंदा भी दिया है फिर भी पंचायत कैसे मजबूत हो इस पर सोचने कि जरूरत है क्यों कि पंचायत मजबूत नहीं हुआ तो गांव कमजोर होगा और ऐसे में देश कमजोर होगा क्यों कि अभी भी भारत पूरी तौर पर गांव के अर्थ तंत्र पर भी खड़ी है ।

जल्द ही बिहार में बनेगा भारतीय खाध निगम का क्षेत्रीय कार्यालय

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बिहार सरकार द्वारा बुधवार को कैबिनेट में दीघा घाट के पास स्थित भारतीय खाद्य निगम के रीजनल ऑफिस के निर्माण के लिए प्रावधानों में बदलाव को मंजूरी देने पर आभार व्यक्त किया है। इसके साथ ही दीघा घाट के पास भारतीय खाद्य निगम के रीजनल ऑफिस बनने का रास्ता साफ हो गया है।

इस संबंध में केंद्रीय मंत्री श्री चौबे ने बिहार सरकार से आग्रह किया था। हाल ही में केंद्रीय राज्यमंत्री श्री चौबे ने दीघा घाट स्थित प्रस्तावित भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय कार्यालय निर्माण स्थल का भ्रमण किया था। तकनीकी कारणों की वजह से निर्माण का कार्य रुका हुआ था। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के उपरांत अब यह रास्ता साफ हो गया है। दीघा घाट के पास भारतीय खाद्य निगम के कार्यालय भवन और अन्य संरचनात्मक ढांचे के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री चौबे ने हाल ही में निरीक्षण के दौरान यहां पर अन्नपूर्णा भवन बनाने की घोषणा की थी। क्षेत्रीय कार्यालय के साथ गेस्ट हाउस, डिविजनल ऑफिस एवं प्रशिक्षण आदि के लिए भवन आदि यहां पर प्रस्तावित है।

भारतीय कानून प्रक्रियाओं का ग़ुलाम है

पप्पू देव की पुलिस हिरासत में मौत के बाद मचे बवाल के बीच बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने अपने फेसबुक पोस्ट पर एक आलेख पोस्ट किया है जिसमें पुलिस को किस तरीके से काम करना चाहिए इसको लेकर अपना अनुभव शेयर किये हैं ।

भारतीय कानून प्रक्रियाओं का ग़ुलाम है **
जिस युग में मैं जिले का SP हुआ करता था, उस युग में संवाद के दो ही साधन थे, चिट्ठी और लैंडलाइन। मेरी कार्य प्रणाली में आम आदमी के द्वारा चिट्ठी के माध्यम से गुप्त सूचना प्राप्त कर, उसपर कार्यवाई करना निहित था।
कहानी 1989 की है। नालंदा जिले के मुख्यालय, बिहारशरीफ़ में, गैर कानूनी स्पिरिट का भण्डारण और व्यापार मुख्य समस्या थी और मैं वहाँ का पुलिस अधीक्षक। आम आदमी इस अवैध कारोबार और उससे जनित काला धन से ख़ासा परेशान था क्योंकि इसी काले धन से अनेकों प्रकार के अपराध सृजित हो रहे थे। निवारण के लिए वे मुझे बंद लिफ़ाफ़े में, मेरे नाम से चिट्ठी लिखते थे जिसमें अपराध सम्बन्धी विशिष्ट और गुप्त सूचनाएँ रहती थीं। मैं कार्योपयोगी सूचना अपनी डायरी में लिख कर, चिट्ठी फाड़ दिया करता था। पुनः उन सूचनाओं पर कार्यवाई करता था।
एक शहर के विषय में स्पिरिट सम्बन्धी सूचना मिली थी। मैंने थाना अध्यक्ष को बुला कर वह सूचना दी, इस आदेश के साथ कि वे तुरंत रेड कर, बरामदगी करें।
उन्होंने ऐसा ही किया पर कुछ भी बरामद नहीं हुआ। शहर के गणमान्य लोग मुझसे मिल कर अपना विरोध प्रकट करने आए। मुझे आभास हो गया कि यह मामला तूल पकड़ेगा। मैंने अपने थाना के पदाधिकारी को बुला कर हिदायत दी कि दंड प्रक्रिया संहिता और पुलिस मैन्युअल के नियम, जिनका पालन करने के लिए मैं अपने सभी अधीनस्थों को निरंतर प्रेरित करता रहता था, उसका विस्तृत उल्लेख थाना के अभिलेखों में, इस मामले में किया जाए।
मामले ने तूल पकड़ा और तत्कालीन मुख्यमंत्री ने कमिश्नर एवं DIG की संयुक्त जांच बिठा दी। पूरे दो दिन तक गंभीर जांच हुई। सभी गवाहों और दस्तावेज़ों की जांच हुई। लौटने के पूर्व कमिश्नर साहब ने मुझे अलग से बुला कर बताया कि अगर मैंने कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों का पालन नहीं किया होता तो उन्हें मेरे विरुद्ध सख्त कार्रवाई की अनुशंसा करनी पड़ती।
रिपोर्ट में मेरे विरुद्ध कोई अनुशंसा नहीं की गई थी। बताते चलें कि कमिश्नर और DIG साहब दोनों ही ईमानदार एवं सख्त पदाधिकारी में शुमार किए जाते थे।
कानून पुलिस पदाधिकारी का अस्त्र और ढाल, दोनों है।

बिहार कैबिनेट की बैठक में 13 एजेंडो पर लगी मोहर

बिहार कैबिनेट की आखिरी बैठक सम्पन्न हो गयी बैठक में कुल 13 एजेंडो पर मुहर लगी है बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर में आयोजित साल 2021 की आखिरी कैबिनेट बैठक में शिक्षा, पशुपालन, उद्योग और पंचायती राज विभाग के जुड़े निर्णय लिये गये हैं.

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कैबिनेट बैठक में क्या खास रहा

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत बिहार राज्य वक्फ विकास योजना के अंतर्गत अंजुमन इस्लामियां हॉल, मुरादपुर, अशोक राज पथ, पटना वक्फ स्टेट संख्या-2146 के पुनर्निमाण के लिए कार्यकारी एजेंसी बिहार राज्य भवन निगम लिमिटेड, पटना से प्राप्त पुनरीक्षित प्राक्कलन 5064.36 लाख रुपये (पचास करोड़ चौसठ लाख छत्तीस हजार रूपये) की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई.

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कैबिनेट बैठक में क्या खास रहा

48 घंटे के दौरान पटना में दो किन्नर की हुई हत्या आक्रोशित किन्नर ने जमकर किया बवाल

पटना के कंकड़बाग थाना क्षेत्र में एक किन्नर की हत्या के बाद आक्रोशित किन्नरों ने मंगलवार को जमकर बवाल मचाया। कंकड़बाग में श्रीराम हॉस्पिटल के पास सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। किन्नरों ने सड़क पर टायर जलाकर रास्ता बंद कर दिया और अर्द्ध नग्न प्रदर्शन किया। किन्नरों ने कहा कि सोनी की गोली मारकर हत्या की गई है। लेकिन, पुलिस घटना में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर पाई। किन्नरों ने इस दौरान पुलिस के खिलाफ हाय-हाय के नारे भी लगाए।

एएसपी पर किन्नर ने बोला हमला

सुबह 4 बजे हुई घटना
किन्नरों का कहना है कि सोनी किन्नर बर्थ डे पार्टी में प्रोग्राम कर आ रही थी। कंकड़बाग के चिरैया टाड़ पुल के पास उसे किसी ने गोली मार दी। इस घटना में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने घटना के बाद एक्शन नहीं लिया। इससे वह आक्रोशित हो गए और गायत्री मंदिर के पास सड़क जाम कर अर्द्ध नग्न प्रदर्शन करने लगे। किन्नरों का कहना है कि किसी VIP के घर घटना होती तो पूरा प्रशासन गंभीर हो जाता। लेकिन, किन्नर के कारण कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इधर, किन्नरों द‌वारा श्रीराम हॉस्पिटल के पास सड़क पर शव रखकर आग जलाकर प्रदर्शन किया जा रहा है।