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कोरोना के तीसरी लहर को देखते हुए अस्पतालों में बच्चों के लिये बनेंगे 1516 कोविड डेडिकेटेड बेडः मंगल पांडेय

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए बच्चों के लिए बिहार में करीब 1516 कोविड डेडिकेटेड बेड बनाये जाएंगे। इस संदर्भ में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद राज्य स्वास्थ्य समिति ने बीएमआईसीएल को निविदा निकाल आगे की कार्रवाई करने को कहा है, ताकि तय समय पर राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में बेड अधिष्ठापित हो सके। अगले मार्च माह तक कार्य के पूर्ण होने की संभावना है।

श्री पांडेय ने कहा कि कोरोना पीड़ित बच्चों को त्वरित एवं बेहतर इलाज उपलब्ध हो सके इसे ध्यान में रख कर बेड की व्यवस्था की जा रही है। राज्य के सभी जिलों में कोविड डेडिकेटेड बेड लग जाने से आपात स्थिति में कोरोना से ग्रामीण क्षेत्रों के पीड़ित बच्चों का इलाज अपने नजदीकी जिलों में संभव हो सकेगा और आर्थिक बोझ से भी मुक्ति मिलेगी।

माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर कोरोना की रोकथाम और संभावित तीसरी लहर से सामना करने लिए राज्य में सभी आवश्यक तैयारियां पुख्ता करने का निर्देश दिया है, ताकि सही समय पर स्थितियों से निपटा जा सके। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास जारी है।

श्री पांडेय ने कहा कि 30 जिलों में 42-42 बेड और 8 जिलों में 32-32 बेड की व्यवस्था की जाएगी। कुल 1516 बेड में 456 हाइब्रिड आईसीयू बेड होंगे एवं 1060 ऑक्सीजनयुक्त बेड रहेंगे। इनमें कुछ बेड हाई डिपेंडेंसी होंगे।

विभाग संभावित तीसरी लहर के अलावे राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर प्रखंड, अनुमंडल और सदर अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेजों में संसाधनों को बढ़ाने का लगातार कार्य कर रहा है।

कोविड डेडिकेटेड बेड के क्रियाशील होने के बाद इसके संचालन को लेकर भी अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये जाएंगे, ताकि मरीजों को परेशानी न हो ।

सृजन घोटाले का मास्टरमांइड विपिन शर्मा गिरफ्तार।

सृजन घोटाले का मास्टरमाइंड विपिन कुमार शर्मा को ईडी ने गिरफ्तार किया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद घोटाले के कई अहम राज खुलने की उम्मीद है। सृजन घोटाला की किंगपिन स्व. मनोरमा देवी और उसके पुत्र अमित कुमार से विपिन के साथ गहरे रिश्ते रहे हैं। भागलपुर स्थित जीटीएम मॉल में सात दुकान विपिन कुमार और उसकी पत्नी रूबी कुमार के नाम से खरीद हुई है। चार दुकान विपिन के नाम और तीन पत्नी रूबी कुमारी के नाम पर है। इसका भुगतान सृजन महिला विकास समिति के खाते से हुआ है।

SrijanScam

रूबी सृजन घोटाले के एक मामले में पटना एयरपोर्ट से पहले ही गिरफ्तार चुकी है। रूबी कुमारी के नाम गाजियाबाद में आवासीय फ्लैट का भुगतान भी सृजन महिला विकास समिति के खाते से किया गया है। विपिन कुमार तिलकामांझी थाने का रहने वाला है। वह बैंक, सृजन महिला विकास समिति, जिला कल्याण पदाधिकारी, कोषागार पदाधिकारी, भूअर्जन पदाधिकारी के बीच विचौलिये की भूमिका निभाता था। पूर्णिया से तेरह लाख रुपये के चार पहिया वाहन की खरीद भी महिला विकास समिति के खाते से ही की गई थी। इसके अलावा राजधानी पटना के बेलीरोड स्थित गोला रोड में मैजेस्टिक जानकी अपार्टमेंट में फ्लैट नंबर 109 की खरीद भी की है।

विपिन के खिलाफ नौ मामले की जांच
ईडी विपिन कुमार शर्मा के खिलाफ दर्ज सृजन घोटाले के नौ मामले का अनुसंधान कर रही है। सीबीआई इन मामलों में चार्जशीट कर चुकी है। सृजन घोटाला के आरोपियों के खिलाफ ईडी 24 मई 2018 से ही जांच कर रही है। इस केस में ईडी ने पीएमएलए 05/21 दर्ज किया है। एक अन्य आरोपित देवशंकर मिश्रा भी इस मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में है।

अन्य आरोपित भी खोल रहे राज
इससे पहले अकाउंटेंट प्रणव कुमार घोष, जो मनोरमा देवी और सृजन महिला विकास समिति के खाते का लेखा-जोखा रखता था, अभी वे फिलहाल बेऊर जेल में हैं।

ईडी की बड़ी कारवाई रेलवे इंजीनियर की करोड़ो की संपत्ति किया जप्त

ईडी ने बड़ी कारवाई करते हुए रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर चंद्रेश्वर प्रसाद यादव की 3.44 करोड़ की संपत्ति को जब्त कर लिया है। चन्देश्वर यादव के खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था।

ईडी ने रेलवे का स्क्रैप बेचने के मामले में पूर्व रेलवे जमालपुर के तत्कालीन सीनियर सेक्शन इंजीनियर चंद्रेश्वर प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया था।

इसी मामले में मेसर्स श्री महारानी स्टील के मालिक देवेश कुमार को 13 अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अभियुक्तों पर आरोप है कि रेलवे के स्क्रैप (रेल वैगन का पुराना हिस्सा) को मोटी रकम लेकर महारानी स्टील को औने-पौने दाम में बेच दिया था।

इसके कारण रेलवे को लगभग 34 करोड़ रुपये का चूना लगा था। उक्त स्क्रैप के कस्टोडियन तत्कालीन सेक्शन इंजीनियर चंद्रेश्वर प्रसाद यादव ही थे।

इस मामले में कंपनी के फाइनांसर राकेश कुमार ने बताया था कि उक्त स्क्रैप को खरीदने के लिए रेलवे के पदाधिकारियों को मोटी रकम दी गयी थी।इस मामले में सीबीआइ ने भी नौ फरवरी, 2018 को मामला दर्ज किया था और जांच कर रहा है।

ईडी ने इस मामले को 28 फरवरी, 2020 में दर्ज की थी। पूछताछ के बाद तत्कालीन सेक्शन इंजीनियर चंदेश्वर प्रसाद यादव व मेसर्स महारानी स्टील के मालिक देवेश कुमार के नाम सामने आये थे और फिर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा – कन्हैया कुमार

काफी जद्दोजहद के बीच आज कन्हैया कुमार नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गए। उनके साथ गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी भी कांग्रेस से जुड़ गए। पार्टी की सदस्यता लेने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कन्हैया कुमार ने भाजपा और RSS पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश का भविष्य खराब करना चाहते हैं, कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा। आज देश में गांधी की एकता, आंबेडकर की समानता और भगत सिंह के साहस की जरूरत है।
कन्हैया ने कहा कि हमारे देश का नेतृत्व कांग्रेस ही कर सकती है।

कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से लोकतांत्रिक पार्टी है। यह परिवार को छोड़ने के लिए नहीं कहती है। महात्मा गांधी पत्नी के साथ आजादी की लड़ाई लड़े थे। कांग्रेस पार्टी वो पार्टी है, जो गांधी की विरासत को आगे ले जाएगी। सरोजिनी नायडू, आंबेडकर, नेहरू, अशफाक उल्लाह खान, भगत सिंह और मौलाना आजाद के रास्तों पर चलेगी।

यहां समानता और बराबरी कुछ लोगों के लिए सीमित नहीं है। ये भारतीय होने का इतिहास है और इस भारतीय होने के इतिहास को अगर कोई अपने आप में कोई समेटे हुए हैं तो वह देश की सबसे पुरानी पार्टी है।

कन्हैया ने कहा कि मैं कांग्रेस में शामिल हो रहा हूं, क्योंकि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं है, एक विचार है। यह देश की सबसे पुरानी और सबसे लोकतांत्रिक पार्टी है। मैं ‘लोकतांत्रिक’ पर जोर दे रहा हूं… सिर्फ मैं ही नहीं कई लोग सोचते हैं कि देश कांग्रेस के बिना नहीं रह सकता।

मैं कांग्रेस में इसलिए शामिल हो रहा हूं, क्योंकि मुझे ये महसूस होता है कि देश में कुछ लोग सिर्फ लोग नहीं हैं, वे एक सोच हैं। वे देश की सत्ता पर न सिर्फ काबिज हुए हैं, देश की चिंतन परंपरा, संस्कृति, मूल्य, इतिहास, वर्तमान, भविष्य खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस एक बड़े जहाज की तरह है, अगर इसे बचाया जाता है, तो मेरा मानना है कि कई लोगों की आकांक्षाएं, महात्मा गांधी की एकता, भगत सिंह की हिम्मत और बीआर आंबेडकर के समानता के विचार की भी रक्षा की जाएगी। इसलिए शामिल हुआ हूं।

देश के लाखों-करोड़ों नौजवानों को ये लगने लगा है कि अगर कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा। हम कांग्रेस पार्टी में इसलिए शामिल हुए हैं, क्योंकि कांग्रेस गांधी की विरासत को लेकर आगे चलेगी।

जदयू कार्यकारणी की हुई घोषणा पूराने चेहरे पर ही जताया भरोसा

जदयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (JDU President Lalan Singh) ने पार्टी की नई टीम का गठन कर दिया है। इसमें अधिकांश चेहरे पुराने ही हैं।

राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ने केसी त्‍यागी (KC Tyagi) को फिर राष्‍ट्रीय प्रधान महासचिव (Secretary General) की जिम्‍मेदारी सौंपी है। वहीं उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) भी संसदीय दल के अध्‍यक्ष बने रहेंगे।

गोपालगंज के सांसद डा. आलोक कुमार सुमन को कोषाध्‍यक्ष बनाया गया है। टीम में लंबे अरसे बाद 18 सदस्‍यीय टीम में सांसद रामनाथ ठाकुर को महासचिव बनाया गया है।

इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद मो अली अशरफ फातमी, पूर्व विधायक रामसेवक सिंह, बिहार सरकार के मंत्री संजय झा, विधान पार्षद गुलाम रसूल बलियावी, आफाक अहमद खान, प्रवीण सिंह, विधान पार्षद कमरे आलम, हर्षवर्धन सिंह को भी महासचिव बनाया गया है।

कुल नौ महासचिव बनाए गए हैं, जिनमें चार अल्‍पसंख्‍यक हैं। इसके अलावा पांच सचिव बनाए गए हैं। इनमें सांसद आरपी मंडल, पूर्व विधायक विद्यासागर निषाद, रविंद्र प्रसाद सिंह, राज सिंह मान और राजीव रंजन प्रसाद शामिल हैं।

बिहार की राजनीति में बने रहने के लिए कांग्रेस से बेहतर कोई और विकल्प नहीं था ।

कन्हैया कुमार का कांग्रेस में जाना 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान ही तय हो गया था क्यों कि लोकसभा चुनाव के दौरान जिस तरीके से राजद,भाकपा माले और सीपीआई कन्हैया को हराने के लिए घेराबंदी कर रहा था ऐसे में कन्हैया के सामने कांग्रेस में जाने के अलावे कोई विकल्प नहीं बचा था।

1—बिहार में कन्हैया के सामने कांग्रेस से बेहतर कोई विकल्प नहीं था
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस चाहती थी कि कन्हैया बेगूसराय से महागठबंधन के उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़े और इसके लिए अहमद पटेल कई बार लालू प्रसाद से बात किये इतना ही नहीं बीजेपी के विचारधार से असहमति रखने वाले कई बड़ी हस्ती लालू प्रसाद से जेल में जाकर मिले लेकिन राज्यसभा सांसद मनोज झा का वह तर्क भारी पड़ा जिसमें उनका मनना था कि कन्हैया सांसद बन गया तो फिर तेजस्वी के लिए खतरा हो सकता है इतना ही नहीं कन्हैया महागठबंधन का उम्मीदवार ना हो इसके लिए मनोज झा के साथ भाकपा माले और बिहार सीपीआई के नेता भी शामिल थे ।

2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल और लालू प्रसाद के परिवार बीच पूरे लोकसभा चुनाव के दौरान जो दूरियां रही उसकी वजह कही ना कही कन्हैया भी रहा क्यों कि कांग्रेस का मानना था कि कन्हैया के महागठबंधन से बाहर रहने से मोदी के खिलाफ गोलबंदी कमजोर होगी और इसका प्रभाव भी देखने को मिल बिहार की चुनावी राजनीति में पहली बार लोकसभा चुनाव में राजद खाता तक नहीं खोल पाया।

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी सीपीआई भले ही महागठबंधन का हिस्सा रहा लेकिन पूरे चुनाव के दौरान टिकट वितरण से लेकर प्रचार अभियान के तक कन्हैया को कैसे चुनावी प्रक्रिया से अलग रखे इसको लेकर मनोज झा के नेतृत्व में होटल मौर्या में वार रुम बना हुआ था इस खेल में भाकपा माले ,सीपीआई और कांग्रेस के भी कुछ सीनियर नेता शामिल थे ।

चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी के बाद राजद के उम्मीदवारों ने चुनावी सभा कराने के लिए सबसे ज्यादा मांग कन्हैया का ही किया था 90 से अधिक ऐसे राजद के उम्मीदवार थे जो कन्हैया का सभा अपने क्षेत्र में करााना चाह रहा था लेकिन ऐसा नहीं हो सका ।

वही दूसरी और बीजेपी की पूरी टीम कन्हैया की पीछे पड़ी हुई है ऐसे में कन्हैया को राजनीति में बने रहने के लिए कांग्रेस से बेहतर विकल्प दूसरा कोई नहीं था क्यों कि बिहार में सीपीआई की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है वही राजद और बीजेपी के साथ खड़ी उन ताकतों के सामने सीपीआई आज की तारीख में खड़े होने की स्थिति में नहीं है ऐसे में कन्हैया के सामने कांग्रेस छोड़कर कोई दूसरा विकल्प नहीं था।

2—-कन्हैया के साथ आने से बिहार में कांग्रेस मजबूत होगी
आज कांग्रेस की स्थिति 2014 जैसी नहीं है साथ ही आज की तारीख में राहुल पप्पू वाली छवि से बाहर निकल चुका है वही राष्ट्रीय स्तर पर राहुल यह साबित करने में कामयाब रहा है कि वो नरेन्द्र मोदी से मजबूती के साथ लड़ सकता है फिर भी उन्हें ऐसे युवा चेहरे की जरुरत है जो अपने बल पर कुछ वोट जोड़ सके ।

इस लिहाज से कन्हैया बिहार में भी उपयोगी है खास करके बिहार के यूथ का एक हिस्सा और मुस्लिम अभी भी कन्हैया का दिवाना है वही कन्हैया के आने से बिहार कांग्रेस को एक ऐसा चेहरा मिल जायेंगा जो अपने बल पर पांच से दस हजार लोगों की सभा कर सकता है जिसको सूनने के लिए लोग घर से बाहर निकल सकते हैं ।

3–कन्हैया मीडिया ब्वॉय है
भले ही निगेटिव खबर ही क्यों ना चलाये लेकिन मीडिया को आज भी कन्हैया की जरुरत है कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने की खबर आज सभी चैनल का हेडलाइन है बिहार में सीपीआई दफ्तर में मीडिया सुबह से ही स्टोरी करने में लगी हुई है कि कैसे कन्हैया सीपीआई दफ्तर में आना बंद किया तो जिस कमरे में कन्हैया रहता था वहां से AC निकलवा लिया है।
निगेटिव स्टोरी ही क्यों ना चलाये आज से कन्हैया मीडिया में जगह लेता रहेगा ।

कन्हैया आज कांग्रेस में शामिल होंगे

JNU छात्र संघ के पूर्व आध्यक्ष और CPI का फायरब्रांड नेता कन्हैया कुमार अपने साथ गुजरात विधानसभा के सदस्य जिग्नेश मेवानीअंशुल त्रिवेदी,सुशील और पीयूष रंजन झा आज दोपहर तीन बजे कांग्रेस का हाथ थाम लेंगे।

कन्हैया कुमार दिल्ली के केंद्रीय कार्यालय में कांग्रेस की सदस्यता लेंगे। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद रहेंगी।

कन्हैया CPI के टिकट पर 2019 लोकसभा चुनाव भाजपा के गिरिराज सिंह के खिलाफ बेगूसराय सीट से लड़ा था, हालांकि वे हार गए थे।

सदस्यता से पहले भगत सिंह की प्रतिमा पर करेंगे माल्यार्पण
कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने से पहले कन्हैया कुमार दोपहर 2:30 बजे दिल्ली के ITO स्थित शहीद-ए-आजम भगत सिंह पार्क जाएंगे।

यहां वे भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे। इसके बाद वे कांग्रेस मुख्यालय पहुंचेंगे। कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने से बिहार की राजनीति बदल सकती है ।

कोरोना से लड़ने के लिए यूनीसेफ और बिहार सरकार के बीच हुआ करार

भारत भर में कोविड-19 टीकाकरण अभियान हेतु जापान सरकार द्वारा मुहैया कराई जा रही सहायता के अंतर्गत यूनिसेफ़ द्वारा हासिल किए गए कोल्ड चेन उपकरण (सीसीई) की पहली खेप आज एक प्रतीकात्मक हस्तांतरण समारोह में बिहार सरकार को सौंपी गई. पहली खेप में लगभग बीस हज़ार वैक्सीन कैरियर शामिल हैं।

यूनिसेफ़ इंडिया के उप प्रतिनिधि, यासुमासा किमुरा से वैक्सीन कैरियर ग्रहण करने के उपरांत बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा, “हम यूनिसेफ के ज़रिए कोल्ड चेन उपकरण बिहार की सहायता करने के लिए जापान सरकार के आभारी हैं। बिहार सरकार कोविड-19 से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है और 6 महीने में 6 करोड़ टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

सीसीई से राज्य के टीकाकरण क्षमता में वृद्धि होगी जिससे कोविड-19 टीकाकरण के साथ-साथ बच्चों और महिलाओं के नियमित टीकाकरण को गति मिलेगी।

भारत में जापान सरकार के Ambassador Extraordinary and Plenipotentiary महामहिम सुजुकी सातोशी और यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि डॉ. यासमीन अली हक़ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

पटना में आयोजित कार्यक्रम में प्रत्यय अमृत, अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार और यूनिसेफ़ बिहार की राज्य प्रमुख नफ़ीसा बिन्ते शफ़ीक़ समेत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, बिहार सरकार एवं यूनिसेफ के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

जापान सरकार द्वारा भारत के कोविड-19 महामारी बचाव अभियान की मदद करने के लिए घोषित कुल 93 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि के हिस्से के रूप में बिहार सरकार को 100,000 फ्रीज़ फ़्री वैक्सीन कैरियर, दो वॉक-इन कूलर, तीन वॉक-इन फ्रीज़र, 20 कोल्ड चेन इक्विपमेंट रिपेयर और मेंटेनेंस टूलकिट और 2100 फ्रीज़ टैग (जो एक वैक्सीन फ्रीज प्रिवेंशन मॉनिटरिंग डिवाइस है), मिलेगा।

भारत में जापान के Ambassador Extraordinary and Plenipotentiary महामहिम सातोशी सुजुकी ने कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हमारे संयुक्त प्रयासों से कोविड-19 महामारी के कारण होने वाले विनाशकारी प्रभाव को दूर करने में मदद मिलेगी एवं हमारे संबंधों को और भी अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर मिलेगा।

यूनिसेफ़ इंडिया की प्रतिनिधि डॉ. यासमीन अली हक़ ने कहा, “यूनिसेफ के माध्यम से जापान सरकार द्वारा भारत को सही समय पर यह बड़ी सहायता मिली है जब देश अपने टीकाकरण योग्य आबादी, विशेषकर कमज़ोर वर्ग के लोगों को कोविड टीका लगाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

पूरे भारत में पहले से ही 81 करोड़ से अधिक ख़ुराकें दी जा चुकी हैं और आने वाले दिनों में कोविड-19 टीकाकरण से देश में स्थिति सामान्य करने एवं आपातकालीन सेवाओं की सुरक्षित बहाली में मदद मिलेगी।

सभी स्तरों पर कोल्ड चेन सिस्टम की आपातकालीन क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए जापान सरकार के वित्त पोषण का कोल्ड चेन उपकरण की ख़रीद में निवेश किया जा रहा है ताकि एक प्रभावी कोविड-19 टीकाकरण अभियान के अलावा महिलाओं और बच्चों के नियमित टीकाकरण को लंबी अवधि के लिए मज़बूती मिल सके. इसमें कोल्ड चेन सिस्टम का हिस्सा – वॉक इन कूलर, वॉक इन फ्रीज़र, सोलर डायरेक्ट ड्राइव, फ्रीज़ फ़्री वैक्सीन कैरियर, टूलकिट, फ्रीज़ टैग और वोल्टेज स्टेबलाइज़र्स की ख़रीद और वितरण शामिल होंगे तथा 25 राज्यों में टीकाकरण अभियान में सहायता करेंगे।

पटना शहर स्थित पूराने तलाब को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश ।

पटना के बुद्धा कॉलोनी क्षेत्र के दुज़रा में सरकारी जमीन पर स्थित तालाब के रूप में चिन्हित स्थान को विकसित करने के लिए पटना हाईकोर्ट ने दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

इस जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए पटना के जिलाधिकारी और पटना नगर निगम को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।। यह जनहित याचिका सुभाष कुमार ने इस जनहित याचिका को दायर किया।

कोर्ट ने पटना के डी एम को तीन सदस्यीय एक कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। यह कमेटी स्थिति की जांच कर एक रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुमित कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि लगभग 5 एकड़ 17 कट्ठा में सरकारी भूमि पर पर स्थित तालाब का गैर कानूनी अतिक्रमण किया गया है।

भूमि का अधिग्रहण राजेन्द्र स्मारक के नाम पर तालाब के निर्माण के लिए किया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा इस पर अतिक्रमण कर लिया गया है।

अधिवक्ता सुमित कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने अपने जनहित याचिका के जरिये चहारदीवारी बनाने का भी अनुरोध किया है, लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा तालाब क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने 6 सितंबर, 2021 को पटना के जिलाधिकारी को स्पीड पोस्ट के माध्यम से इस मामले को लेकर पत्र भी लिखा गया है, जिसके जरिये तालाब से अतिक्रमण हटाने और चहारदीवारी का निर्माण करने की बात कही गई है।

याचिकाकर्ता ने तालाब के स्थल का पर जाकर कुछ फोटो लेने का काम भी किया है, जिसे याचिका के साथ कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया गया।अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

कदमकुआं वेंडिंग जोन के निर्माण को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लगायी फटकार

पटना हाईकोर्ट ने कदमकुआं वेंडिंग जोन के निर्माण बंद होने के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बताने को कहा कि कब तक टेंडर निकालने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। डा आशीष कुमार सिन्हा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को ये बताने कहा कि वेडिंग जोन निर्माण कब तक पूरा हो जाएगा।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जानना चाहा था कि राज्य के नगर विकास और आवास विभाग ने इस योजना को कैसे रोक दिया।कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नगर निगम स्वायत्त संस्था हैं,जिसे संवैधानिक दर्जा प्राप्त है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा कि कदमकुआं वेंडिंग जोन के लिए फिर कब टेंडर जारी किया जाएगा और ये कब तक पूरा हो जाएगा।

पटना नगर निगम ने कदमकुआं वेंडिंग जोन के निर्माण रोके जाने के मामले में एक हलफनामा दायर किया।इस हलफनामा में यह बताया गया कि नगर निगम को दो करोड़ रुपए से अधिक का टेंडर जारी करने का अधिकार नहीं है।

साथ ही इस तरह के निर्माण के लिए बुडको से सहमति लेना आवश्यक है।कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि इन सरकारी विभागों ने निगम के टेंडर को कैसे रद्द कर दिया,जबकि नगर निगम संवैधानिक दर्जा प्राप्त स्वायत संस्था हैं।

साथ ही नगर निगम को बुडको की सहमति क्यों लेने की जरूरत है।हाईकोर्ट ने जानना चाहा कि जब नगर निगम स्वायत्त संस्था हैं और उसकी वित्तीय स्वतंत्रता हैं,इन सरकारी विभागों को टेंडर रद्द करने का क्या अधिकार हैं।

अधिवक्ता मयूरी ने याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि इन दोनों सरकारी विभागों न सिर्फ कदमकुआं वेंडिंग जोन परियोजना को रद्द किया,बल्कि आठ अन्य परियोजनाओं को भी रद्द किया है।
इस मामले अगली सुनवाई फिर दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

विपिन तुम्हारी शहादत रंग लायेंगी

संपादक का पत्र आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल के नाम

27–09—2021

स्वर्गीय विपिन अग्रवाल

आरटीआई कार्यकर्ता(हरसिद्धि ,मोतिहारी)

जिस तरीके से तुम भ्रष्टाचार और भूमाफिया के खिलाफ चला रहे अभियान को लेकर सूचना देते रहते थे ठीक उसी तरीके से सीओ के दफ्तर से निकलने के वक्त तुम पर हमला हुआ और मोतिहारी आने के रास्ते में तुम्हारी मौत हो गयी उसकी पल पल की सूचना मुझे मिल रही थी।
तुम्हारी मौत की सूचना मिलते ही मैंने सबसे पहले बिहार के चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय को फोन किया राय जी मोतिहारी में एक आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या हो गयी है उस सूचना के बाद राय जी क्या कर रहे हैं मुझे कोई जानकारी नहीं है ।कुछ बयान जरुर पढ़ने को मिला है वैसे राय जी जब भी मुझसे इस तरह की घटनाओं को लेकर मिलने आये हैं उनमें थोड़ा जातिवादी लगते हैं ।खैर इसके बाद मैंने पुलिस मुख्यालय के सीनियर अधिकारियों को फोन कर तुम्हारे साथ जो घटना घटी छी उसकी सूचना मैंने दी।

तुम्हारा एसपी तो फोन उठाया ही नहीं सुशासन और भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस का दावा नीतीश कुमार जरुर करते हैं उसमें बिहार में अभी सबसे अधिक खड़ा तुम्हारा एसपी ही उतरा है ।हद है लूट मची हुई है तुम्हारे जिले में मुझे तो कोई उम्मीद नहीं है कि इस एसपी के रहते तुमको न्याय मिल पायेगा ।हलाकि मुख्यमंत्री सचिवालय की संक्रियता के बाद तुम्हारा एसपी हरसिद्दि परसो रात को गया था पांच घंटा थाना पर बैठा है लेकिन तुम्हारे परिवार से मिलने शायद नहीं गया है ।

अभी भी खबर आ रही है कि भूमाफिया तुम्हारे परिवार को धमकी दे रहा है और इस वजह से तुम्हारे पापा चुप्पी साध लिये हैं ।होना ही था ये बिहार है भाई सब कुछ जाति तय करता है आज तुम राजपूत भूमिहार,ब्राह्रण, यादव कोयरी कुर्मी होते तो सोशल मीडिया से लेकर तुम्हारे घर पर नेताओं का ताता लगा रहता। देख रहे हो ना सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया कैसे चुप्पी साधे हुए हैं सुशील मोदी का फोन गया है कि नहीं ,रितू जायसवाल तो गयी थी अब ये भी नेता हो गयी है ।

खैर तुमको कहते थे ना रे मारवाड़ी काहे तुम इस लफरे में पड़ गये हो कोई साथ नहीं देगा सरकार की जमीन है सरकारी अधिकारी उस जमीन पर कब्जा करा रहा है तुम्हारा क्या जा रहा है नहीं सर जान चला जाये होने नहीं देगे देखिए झुठा मुकदमा करवा रहा है फिर भी नहीं ना झुके पेट्रोल पंप सील करवा दिये ना ,जब तक एक एक इंच जमीन खाली नहीं करवा देगे चैन से नहीं बैठेंगे सर तू पागल है जी सर पागल हैं तभी तो लड़ रहे हैं आपका साथ है ना हां जी पूरी साथ है।

हरसिद्दि बाजार और उसके आसपास मुख्य सड़क से सटे बेतिया राज का सैकड़ों एकड़ जमीन है उस सरकारी जमीन के काफी बड़े हिस्से पर अनधिकृत तौर पर मोतिहारी जिले के बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष राजेन्द्र गुप्ता और अजय सिंह सहित दर्जनों बड़े लोग कब्जा कर रखा है उसी को खाली कराने को लेकर विपिन अग्रवाल हाईकोर्ट तक लड़ गया परिणाम यह हुआ कि राजेन्द्र गुप्ता और अजय सिंह को सरकारी जमीन खाली करना पड़ा ।

राजेन्द्र गुप्ता का पेट्रोल पम्प जो सरकार की जमीन का अतिक्रमण करके बनाया गया था विपिन अग्रवाल के कानूनी लड़ाई की वजह से ही प्रशासन को सील करना पड़ा था। यू कहे तो विपिन अग्रवाल के पहल की वजह से सरकार की कोरोड़ो की जमीन अतिक्रमण मुक्त हो सका ।इस दौरान भूमाफिया द्वारा मोटी रकम का भी प्रलोभन दिया इससे बात नहीं बनी तो विपिन अग्रवाल के घर पर हमला हुआ, झूठे मुकदमों मे फंसाया गया इसके बावजूद ये समझौता नहीं किया।
घटना के दिन भी हरसिद्दि के सीओ से सरकारी जमीन के अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन शीघ्र कैसे हो इसको लेकर मिलने गया था और जैसे ही मिलकर बाहर निकला पहले से घात लगाये अपराधियों ने गोली से छलनी कर दिया।

तू तो चला गया लेकिन एक सवाल छोड़ गया है सिस्टम ,समाज ,सरकार और न्याय व्यवस्था को ईमानदारी और ईमानदार लोग पसंद नहीं है ।तुमसे बेहतर ये कौन जानता है कि यहां न्याय पाना कितना कठिन है इसलिए तुमको मारने वालों को सजा मिलेगी या नहीं मिलेगी कहना मुश्किल है ।लेकिन इस पत्र के सहारे एक कोशिश है इस सिस्टम और समाज को आईना दिखाने की। वैसे मुझे पता है जिंदगी फिल्म नहीं है जिसमें हमेशा सुखद अंत होता है सच्चाई यही है तुम्हारे संघर्ष का दुखद अंत हो गया तुम्हारी ये लड़ाई यही ठहर गयी।

कल फिर से उस सरकारी जमीन पर कब्जा होना शुरु हो जायेंगा और तुम्हारे हत्या में शामिल लोग उसी जमीन पर फाइवस्टार होटल बनायेंगा जहां रोज शाम सिस्टम,सरकार ,न्याय व्यवस्था और समाज का महफ़िल जमेगी रंगीन नजारा होगा और इस सब के बीच तुम्हारे संर्घष की गाथा कभी किसी गरीब के जुवान पर बंद कमरे में आ जाये तो बड़ी बात होगी।
तुमको पहले भी हतोत्साहित नहीं करते थे और तुम्हारे जाने के बावजूद भी हतोत्साहित नहीं कर रहे हैं। तुम तो हीरो निकले यार अब देखना यह है कि उसी मोतिहारी की धरती पर गुजरात से गांधी आकर अमर हो गये और उसी मोतिहारी की धरती पर तुम्हारी शहादत क्या रंग लाती है इसका मुझे भी इन्तजार रहेंगा ।

तुम्हारे जाने का मुझे दुख है अब कौन सुबह सुबह फोन करके कहेगा कैसे हैं संतोष सर सुबह सुबह फिर तंग करने के लिए फोन कर दिये ।जहां रहो सिस्टम से लड़ते रहो और मुस्कुराते रहो जाना तो नियति है ।

तुम्हारा संतोष

संतोष सिंह पत्रकार के फेसबुक वाल से लिया गया है

नक्सली उग्रवाद को केंद्र और राज्य को मिलकर लड़ने की जरूरत है ।

वामपंथी उग्रवाद के परिदृश्य के संबंध में आयोजित समीक्षात्मक बैठक मे मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के अभिभाषण का मुख्य बिन्दु ।

बिहार में विगत वर्षो में उग्ररवादी हिसा में गिरावट देखी गई है। नक्सली हिंसा का समाप्त हाेना प्रजातंत्र के सुदृढीकरण तथा समेकित विकास हेतु आवश्यक है। केन्द्र एवं प्रभावित राज्याें की सरकाराें काे इस लक्ष्य के संदर्भ में आगे की रणनीति तैयार करने हेतु इस प्रकार की बैठक नियमित रूप हर वर्ष हाेनी चाहिए।

नक्सली हिंसा देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है और यह विकासोन्मुखी सरकार की नीतियों के सफल क्रियान्वयन में बाधक बनता है। बीते वर्षाें में घटित नक्सली हिंसा की हर घटना ने यही प्रमाणित किया है कि इस संगठन का उद्देश्य गरीबाें का हित करना नहीं है, अपितु अलाेकतांत्रिक और हिंसात्मक तरीकाें का प्रयाेग कर गरीबों काे विकास की मुख्य धारा से वंचित रखना है। इनके कारण गरीब अपने वाजिब हक से तथा क्षेत्र में संचालित विकास याेजनाओं के लाभ, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ, संचार के आधुनिक माध्यमों से दूर हाे जाते हैं परंतु इस तथ्य काे भी नकारा नहीं जा सकता कि ऐसे तत्व एवं इनके प्रभाव से इन संगठनाें में शामिल हुए लोग हमारे समाज एवं देश के ही अंश हैं। नक्सली संगठनाें के नेतृत्व एवं संगठनात्मक क्षमता काे निष्प्रभावी करने के लिए इन क्षेत्राें में समावेशी एवं सामाजिक-आर्थिक विकास की योजनाएं कार्यान्वित करनी हाेगी। हमने पुलिस काे अधिक जवाबदेह और जनता के प्रति संवेदनशील बनाया है। यदि लाेगाें की आस्था हमारी व्यवस्था और कार्यप्रणाली में बढ़ेगी ताे समाज में इसके सकारात्मक परिणाम हाेंगे।

2018 में राज्य में सुरक्षा संबंधी व्यय योजना में अच्छादित जिलों की संख्या 22 से घटकर 16 हो गई तथा पुनः वर्ष 2021 में यह संख्या घटकर केवल 10 ( रोहतास कैमूर गया औरंगाबाद नवादा जमुई लखीसराय मुंगेर बांका बेतिया) रह गई है। वर्ष 2018 में अति उग्रवादी प्रभावित जिलों की संख्या 100 थी जो अब घटकर केवल 3 गया जमुई लखीसराय रह गई है ।अति उग्रवाद प्रभावित जिलों की सूची से औरंगाबाद जिले को हटा दिया गया है। औरंगाबाद झारखंड के अति नक्सल प्रभावित पलामू जिले का सीमावर्ती है और पहाड़ एवं जंगलों से आच्छादित है । औरंगाबाद जिला को अति उग्रवाद प्रभावित जिलों की सूची में पुनः शामिल करने की जरूरत है।

सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक आयाम रखने वाली नक्सली उग्रवाद की समस्या के एक छोटे भाग से पुलिस लड़ सकती है । इस बात को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने न्याय के साथ विकास की समावेशी रणनीति बनाई । विकास से वंचित और भटके हुए लोगों को सामाजिक आर्थिक मुख्यधारा में वापस लाने के लिए गंभीर विकासात्मक पहल किए गए हैं । वर्ष 2006 में पंचायती राज व्यवस्था में और वर्ष 2007 में नगर निकायों के चुनाव में वंचित लोगों को आरक्षण महिलाओं को 50% आरक्षण देकर उन्हें क्षेत्र के विकास के निर्णय लेने का हक दिया गया। सभी थानों में विधि व्यवस्था और अनुसंधान के पृथक्करण किया गया है । कानून का राज एवं भयमुक्त शासन स्थापित करना बिहार सरकार की नीति रही है। सांप्रदायिक सौहार्द्र का वातावरण राज्य के सभी जिलों में कायम है ।

महिला सशक्तिकरण के तहत हमने पुलिस में 35% आरक्षण दिया है और इसी का नतीजा है कि आज बिहार पुलिस में 23% से अधिक संख्या में महिलाओं की है । उल्लेखनीय है कि महिलाओं की कमांडो टीम को विशेष टास्क फोर्स एवं आतंकवाद निरोधक दस्ता में सम्मिलित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है । एक अभिनव पहल के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्र के थारू ,संथाल, उरांव और अन्य अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को लेकर बिहार स्वाभिमान बटालियन का गठन बाल्मीकि नगर पश्चिम चंपारण जिला में किया गया है । राज्य सरकार के इस कदम से बगहा एवं बाल्मीकि नगर के जंगल पहाड़ी क्षेत्रों में नक्सलियों का प्रभाव घटा है।

नक्सली उग्रवाद प्रभावित जिलों में लोगों को समाज के मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चलाई जा रही विभिन्न विकासोनमुखी एवं कल्याण संबंधी योजनाओं का नियमित अनुश्रवण मुख्य सचिव बिहार सरकार के स्तर से किया जाता है । जिसके फलस्वरूप केंद्र सरकार द्वारा संचार व्यवस्था के लिए पहचान किए गए बीएसएनल के ढाई सौ मोबाइल टावर का अधिष्ठापन कार्य राज्य में सबसे पहले पूर्ण कर उन्हें ऊर्जान्वित किया जा चुका है ।विभिन्न विकास मुखी एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दूरस्थ था एवं ग्रामीण इलाकों में पहुंचने से सकारात्मक माहौल बना है ।

जहां एक तरफ घटनाओं में कमी आना प्रसन्नता का विषय है। वही घटनाओं का पूर्णता समाप्त नहीं होना यह इंगित करता है कि नक्सली हिंसा की संभावना अभी भी बनी हुई है। जिसे समूल समाप्त करने की दिशा में अत्यंत सचेत रहते हुए रणनीति बनाकर अभियानों के साथ-साथ समावेशी विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों और में और तीव्रता लाए जाने की आवश्यकता है ।

नक्सली हिंसा से निबटने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव।

1- विशेष आधारभूत संरचना योजना सीआईएस 2021-22 के बाद बंद होने की सूचना मिली है इसे आगे चलाने की आवश्यकता है ।

2- नक्सली हिंसा के विरुद्ध अभियान में यह अत्यंत आवश्यक है कि पुलिस को आधुनिकतम यंत्र एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाए । केंद्र सरकार द्वारा पुलिस अधिकरण योजना के तहत राज्यों को सहयोग किया जाता रहा है ।समय के साथ-साथ इस योजना के स्वरूप एवं आयाम को और विस्तार देने की जरूरत महसूस की जा रही है । इस योजना में केंद्र और राज्य का अनुपात 60:40 रखा गया है । बिहार जैसे सीमित संसाधन वाले राज्य के लिए यह अनुपात 90 : 10 किया जाना चाहिए ।

3- केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नक्सली उग्रवाद से निपटने की राष्ट्रीय नीति के अंतर्गत सुरक्षात्मक कार्यवाहियों के साथ-साथ विकाससोनामुखी कार्यक्रमों को भी अनुसरण किया जा रहा है ।प्रभावित जिलों की विशेष स्थिति के कारण निश्चित ही इस दिशा में संकेतिक पहल करने की आवश्यकता है । हमारा सुझाव होगा कि इन क्षेत्रों के लिए चयनित योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और उन्हें समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त निजी उपलब्ध कराई जाए तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया एवं मापदंडों में संशोधन करने का अधिकार राज्य सरकारों को दिया जाए ।

4- नकली उग्रवाद के विरूद्ध चलाए जा रहे अभियानों में आधुनिक तकनीक का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग आवश्यक हो गया है । आधुनिक हथियार ड्रोन, रोबटिक यंत्र, संचार माध्यमों पर निगरानी आदि तकनीकी सिर्फ सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाती है, संभावित जान के खतरे को भी कम करती है ,जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल और भी बढ़ता है । इसके साथ-साथ प्रत्येक राज्य में हेलीकॉप्टर की तैनाती अवश्यम्भावी रूप से की जाए जो सुरक्षा बलों की गतिशीलता को तो बढ़ाता ही है आवश्यकता पड़ने पर बचाव में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। हम चाहेंगे कि गृह मंत्रालय इस पर पुनर्विचार कर बिहार में अलग से हेलीकॉप्टर की स्थाई तैनाती करें ।

5- वर्तमान में बिहार राज्य में 7 . 5 बटालियन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को उपलब्ध कराया गया है । जिसमें सभी बलों की प्रतिनियुक्ति बिहार झारखंड के सीमावर्ती जिलों में की गई है। इन बलों के माध्यम से लगातार अभियान चलाया जा रहा है ।वर्ष 2020 में गृह मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार सीआरपीएफ की दो बटालियन बल बिहार से छत्तीसगढ़ राज्य में भेजी गई है। जिससे बिहार राज्य में प्रतिनियुक्त बलों की संख्या घट गई है। इन बलों के जाने से क्षेत्र में सुरक्षा अंतराल बना है । जिससे अभियान की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है । अत्यंत नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा कैंप का निर्माण प्रस्तावित है , जिसके लिए अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की आवश्यकता है ।अतः मैं गृह मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की इन दोनों बटालियनओं को बिहार में वापस किया जाए।

6- नक्सली हिंसा के विरुद्ध अभियान हेतु यह भी आवश्यक है कि राज्यों के सुरक्षाबलों को गहन प्रशिक्षण देकर उन्हें प्रभावी रूप से दक्ष बनाया जाए । केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में बिहार के लिए अधिक कोटा निर्धारित किया जाए और निशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए ।

7- इस अवसर पर मैं केंद्र सरकार का ध्यान अभियान के लिए प्रतिनियुक्त केंद्रीय सुरक्षाबलों पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति की नीति के की तरफ भी आकृष्ट करना चाहूंगा । आंतरिक सुरक्षा के लिए नक्सली हिंसा वादियों के खिलाफ या लड़ाई राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त लड़ाई है परंतु इन बलों की प्रतिनियुक्ति पर होने वाले खर्च को उठाने का पूरा भार राज्य सरकार के कोष पर पड़ जाता है ।अतः अनुरोध होगा कि इस खर्च का वाहन केंद्र और राज्य को संयुक्त रूप से करना चाहिए । यह मैं यह स्पष्ट कर देना चाहूंगा कि बिहार सरकार केंद्रीय बलों से संबंधित गृह मंत्रालय को किए जाने वाले भुगतान के प्रति सदस्य जाग रही है और वर्तमान में कोई भुगतान लंबित नहीं है ।

नक्सली उग्रवाद के विरुद्ध अभियान केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त दायित्व है अतः इसका आर्थिक भार भी केंद्र और राज्यों के बीच बैठकर वहन किया जाना चाहिए ।

जातीय जनगणना को लेकर बिहार की सियासी पारा चढ़ा बीजेपी समझौते के मूड में नहीं ।

जातीय जनगणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार द्वारा दायर हलफनामा को लेकर बिहार की सियासत में तुफान आ गया है कल नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी यादव इस मामले को लेकर देश के 30 बड़े राजनीतिज्ञों को पत्र लिख कर समर्थन मांगा था ।
वही आज मैदान में खुद नीतीश कूद पड़े हैं नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री की बैठक में भाग लेने पहुंचे नीतीश कुमार ने आज बैठक समाप्ति के बाद बैठक को लेकर पूछे गये सवालों को नजरअंदाज करते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा कि बिहार के सभी दलों के लोगों ने जातीय जनगणना कराने की मांग की है. केंद्र सरकार फिर से ठीक ढ़ंग से इस पर विचार करें।

उन्होंने जातीय जनगणना को देशहित में बताया.मुख्यमंत्री ने केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामा को लेकर कहा कि वे आर्थिक और समाजिक गणना को लेकर है. इसमें जातीय जनगणना को नहीं जोड़िए. सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि मैं चाहता हूं कि केंद्र सरकार इस पर ठीक ढ़ंग से विचार करें और ये देशहित का मामला है।

CM ने कहा कि 2011 में जो जातीय जनगणना हुई थी, वो जातीय जनगणना थी ही नहीं। वो आर्थिक आधारित जातीय जनगणना थी, जिसमें कई गलतियां थीं, इसलिए उसे प्रसारित नहीं किया गया था। केंद्र सरकार अगर सबका विकास चाहती है तो जातीय जनगणना कराए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर एक बार फिर मिलकर सभी बातों को साफ कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम राज्य स्तर पर अपने सभी दलों के साथ एक बार फिर से मीटिंग कर इस पर विचार करेंगे।

नीतीश कुमार के इस बयान के थोड़ी देर बाद ही बिहार बीजेपी के सीनियर नेता सुशील मोदी ने जातीय जनगणना को लेकर नीतीश कुमार के मांग को खारिज करते हुए कहा कि तकनीकी व व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना सम्भव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मगर राज्य अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।

श्री मोदी ने कहा कि 1931 की जातीय जनगणना में 4147 जातियां पाई गई थीं, केंद्र व राज्यों के पिछड़े वर्गों की सूची मिला कर मात्र 5629 जातियां है जबकि 2011 में कराई गई सामाजिक-आर्थिक गणना में एकबारगी जातियों की संख्या बढ़ कर 46 लाख के करीब हो गई। लोगों ने इसमें अपना गोत्र,जाति, उपजाति,उपनाम आदि दर्ज करा दिया। इसलिए जातियों का शुद्ध आंकड़ा प्राप्त करना सम्भव नहीं हो पाया।

यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है, लोगों को कोर्ट के फ़ैसले का इंतजार करना चाहिए या जो राज्य चाहे तो वहां अपना पक्ष रख सकते हैं।

जातीय जनगणना का मामला केवल एक कॉलम जोड़ने का नहीं है। इस बार इलेक्ट्रॉनिक टैब के जरिए गणना होनी है। गणना की प्रक्रिया अमूमन 4 साल पहले शुरू हो जाती है जिनमें पूछे जाने वाले प्रश्न,उनका 16 भाषाओं में अनुवाद, टाइम टेबल व मैन्युअल आदि का काम पूरा किया जा चुका है। अंतिम समय में इसमें किसी प्रकार का बदलाव सम्भव नहीं है।

नीतीश कुमार के बयान के बाद सुशील मोदी का जातीय जनगणना के मांग को पूरी तरह खारिज करने के साथ ही यह तय हो गया कि आने वाले समय में जातीय जनगणना को लेकर बीजेपी और नीतीश के बीच तल्खी बढ़ेगी क्यों कि मांझी और सहनी पहले ही बगावत के मूड में है वही तेजस्वी जिस तरीके से जातीय जनगणना को लेकर नीतीश पर दबाव बना रहे हैं ऐसे में आने वाले समय में बिहार की सियासत किसी और दिशा की और मूड़ जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। क्यों कि नीतीश कुमार जातीय जनगणना को लेकर जितने आगे बढ़ गये वहां से वापसी उनके लिए आत्मघाती हो सकता है ।

इस बीच लालू प्रसाद की बेटी डॉ. रोहिणी आचार्या ने एक ट्टीट करके नीतीश पर सीधे हमला बोला है उन्होंने कहा है कि ‘ बीजेपी का जो यार है.. जातीय जनगणना का विरोधी नीतीश कुमार है’। उन्होंने आगे लिखा है- ‘ भ्रम के जाल में उलझा, नीतीश कुमार कुर्सी का भूखा है।’ डॉ. रोहिणी ने लिखा है कि- ‘ओबीसी समाज के हितों का दुश्मन बीजापी का यार नीतीश कुमार है।’ऐसे में बिहार की सियासी फिजा एक बार फिर गर्माने लगा है ।

जातीय जनगणना की दुहाई देने वाले सुशील मोदी भी पलट गये ।

पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि तकनीकी व व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना सम्भव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मगर राज्य अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।

श्री मोदी ने कहा कि 1931 की जातीय जनगणना में 4147 जातियां पाई गई थीं, केंद्र व राज्यों के पिछड़े वर्गों की सूची मिला कर मात्र 5629 जातियां है जबकि 2011 में कराई गई सामाजिक-आर्थिक गणना में एकबारगी जातियों की संख्या बढ़ कर 46 लाख के करीब हो गई। लोगों ने इसमें अपना गोत्र,जाति, उपजाति,उपनाम आदि दर्ज करा दिया। इसलिए जातियों का शुद्ध आंकड़ा प्राप्त करना सम्भव नहीं हो पाया।

यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है, लोगों को कोर्ट के फ़ैसले का इंतजार करना चाहिए या जो राज्य चाहे तो वहां अपना पक्ष रख सकते हैं।

जातीय जनगणना का मामला केवल एक कॉलम जोड़ने का नहीं है। इस बार इलेक्ट्रॉनिक टैब के जरिए गणना होनी है। गणना की प्रक्रिया अमूमन 4 साल पहले शुरू हो जाती है जिनमें पूछे जाने वाले प्रश्न,उनका 16 भाषाओं में अनुवाद, टाइम टेबल व मैन्युअल आदि का काम पूरा किया जा चुका है। अंतिम समय में इसमें किसी प्रकार का बदलाव सम्भव नहीं है।

राज्यों की अलग-अलग स्थितियां हैं, मसलन 5 राज्यों में OBC है ही नहीं, 4 राज्यों की कोई राजयसूची नहीं है, कुछ राज्यों में अनाथ व गरीब बच्चों को OBC की सूची में शामिल किया गया है। कर्नाटक सरकार ने तो 2015 में जातीय जनगणना कराई थी, मगर आज तक उसके आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जा सके हैं।

1960 में पहला बिहारी यूपीएससी में टाप किया था

UPSC में टाप करने के बाद जिस तरीके से सूबे के मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री और संतरी तक बधाई दे रहे हैं ऐसे में गालिब का एक शायरी याद आ गया ——– हम को मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा है ।

एक दौर था जब पटना विश्वविधालय को ‘ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट’ कहा जाता था स्थापना के शुरुआती दिनों में वकालत और मेडिकल की पढ़ाई के क्षेत्र में देश और दुनिया में पटना विश्वविधालय ने अलग पहचान स्थापित किया बाद के दिनों में रामशरण शर्मा जैसे इतिहासकार की वजह से पटना विश्वविधालय की पहचान इतिहास लेखन के क्षेत्र में अंतराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुआ ।60 के दशक में इस विश्वविधालय की पहचान यूपीएससी के फैक्ट्री के रुप में स्थापित हुआ ।

1960 में जगन्नाथन मुरली बिहार से UPSC के पहले टापर बने। उन्होंने पटना में रहकर ही पढ़ाई की थी और उनके पिता भी आइसीएस (ब्रिटिश काल) थे और तब पटना में पदस्थापित थे।बिहार के दूसरे टांपर छह साल बाद 1966 में पूर्णिया के आभास चटर्जी UPSC टापर बने 1970 में पटना विश्वविधालय के तीन छात्र UPSC में पहला स्थान श्याम शरण दूसरा स्थान अनुराधा मजूमदार और तीसरा स्थान लक्ष्णी चक्रवर्ती प्राप्त की थी बाद में श्याम शरण विदेश सचिव बने थे ।

पटना विश्वविधालय से पढ़े आमिर सुबहानी 1987 में टाप किये थे आमिर सुबहानी पटना विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग से स्नातकोत्तर में गोल्ड मेडलिस्ट थे।आमिर सुबहानी के बाद अभी तक कोई दूसरा पटना विश्वविधालय से पढ़कर UPSC में टाप नहीं किया है।

1988में UPSC में प्रशांत कुमार टापर रहे इनकी प्रारंभिक पढ़ाई पटना में हुई थी। उच्च शिक्षा सेंट स्टीफेंस कालेज, दिल्ली से हुई।1997 में सुनील कुमार बर्णवाल टापर रहे सुनील बर्णवाल की प्रारंभिक शिक्षा भागलपुर में हुई। आइएसएम धनबाद से बीटेक के बाद उन्होंने गेल में भी सेवा दी।

2001 के टापर आलोक रंजन झा ने हिंदू कालेज से स्नातक करने के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एमफिल किया। इनके बाद फिर टापर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा और 20 साल बाद कटिहार के शुभम कुमार यूपीएससी में टाप किया है । शुभम ने बोकारो से 12वीं की। फिर बॉम्बे आईआईटी से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है।

1961 बैच के सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी आइसी कुमार का कहना है कि 1960 से पहले बिहार से करीब 26 आइसीएस थे। इसके बाद 1960 में प्रथम स्थान पर पटना के जगन्नाथन मुरली, पांचवें स्थान पर रामास्वामी और 12वें स्थान पर पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा थे।

1977 बैच के आईपीएस अधिकारी बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद का कहना है कि पटना विश्वविधालय उस समय पढ़ाई के हर क्षेत्र में देश और दुनिया में पहचान स्थापित कर लिया था यूपीएससी को तो मक्का कहा जाता था।हर बैच में 25 से 30 छात्र यूपीएससी करता था ।1980 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे राजवर्धन शर्मा जो 1967 में पटना सांइस कांलेज के छात्र थे उनका कहना था कि फिजिक्स ,अर्थशास्त्र और इतिहास विभाग का टांपर का यूपीएससी तय माना जाता था।

लेकिन आज बिहार के स्कूल कांलेज से पढ़े बच्चों के पास कर्मचारी बनने लाइक भी योग्यता नहीं है पिछले 10 वर्षो का बिहार बोर्ड का टापर का लिस्ट निकाल लीजिए देखिए वो क्या कर रहा है ।
पटना विश्वविधालय में पढ़ने वाले पूर्ववर्ती छात्रों का कहना है कि एक रणनीति के तहत बिहार के नेताओं ने पटना विश्वविधालय को बर्वाद किया है और इस बर्वादी में ताबूत में आखिरी कील इंटरमीडियट की पढ़ाई खत्म करने का निर्णय रहा आज बिहार के बजट की बात करे तो सबसे अधिक राशी 17 प्रतिशत 38035.93 करोड़ रुपये खर्च शिक्षा पर ही हो रहा है परिणाम आपके सामने हैं ।

बिहार में जहां कही से भी उम्मीद की छोटी सी किरणें दिखायी दे रही है उसके निर्माण में बिहार के किसी भी संस्थान को कोई योगदान नहीं है। छात्र,मजदूर ,किसान और व्यापारी जो बिहार का नाम रोशन कर रहा है वो सभी व्यक्तिगत प्रयास से सफलता हासिल किया है ।
चलते चलते–मुद्दतें बीत गयी आज पर
यार-ए-ज़िद्द ना गयी
बंद कर दिए गए दरवाजे
मगर उम्मीद ना गयी !!

आज के युवा पीढ़ी के लिए सिटिजन जर्नलिज्म एक सुनहरा मौका है।

अनिता गौतम
सिटिज़न जर्नलिज़्म, यह सिर्फ शब्द भर नहीं बल्कि व्यक्ति समाज, देश और दुनिया की जरूरत है। इस अंग्रेजी शब्द का मूल अनुवाद संभवतः नागरिक पत्रकारिता हो परंतु अलग अलग आयाम में फिट बैठता यह शब्द आम अवाम की मजबूत आवाज बन चुका है। देश दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और भौगोलिक बदलाव को तकनीक के सहारे अति शीघ्र बहुत बड़े समूह तक पहुचाने का सशक्त माध्यम है यह सिटिज़न जर्नलिज्म।

समय के साथ इस वर्चुअल वर्ल्ड इन्फॉर्मेशन तकनीक में अभी और बदलाव आएंगे परंतु वर्तमान में इस माध्यम की सार्थक भूमिका को हम अपने आस पड़ोस में अनुभव कर सकते हैं।

मीडिया का शुरुआती दौर, जब प्रिंट मीडिया के माध्यम से ख़बरें लोगों तक घटना के अगले दिन या कई दिनों बाद पहुंच पाती थीं। फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आयी और खबरें संकलित और संपादित होकर तस्वीरों और ट्रेंड एंकरों द्वारा कुछ लोगों तक पहुंचने लगीं।

दूरदर्शन से अपना सफर शुरू कर क्रमशः इस खबरों की दुनिया के निरंतर बदलाव का गवाह आज भी एक बहुत बड़ा वर्ग है। टेलीविजन केबल से डेटा केबल तक घूमते हुए आज इस नागरिक पत्रकारिता ने “कर लो दुनिया मुट्ठी में” के तर्ज पर हर किसी को अपने हुनर दिखाने का मंच दे दिया है।

कल तक खबरों के लिए टेलीविजन और अखबार की मोहताज आम आवाम आज खुद खबर बना और परोस रहा है। हर क्षेत्र, राजनीति, अपराध, सिने वर्ल्ड , टेलीविजन की दुनिया या समाज से जुड़ी छोटी बड़ी घटना की जानकारी पलक झपकते लोगों तक पहुँच रही है।

बात चाहे सरकार बनाने की हो, गिराने की हो , चुनावी समीकरण की हो या मत ध्रुवीकरण की, एक क्लिक और खबर पूरी दुनियां में संचारित। जाहिर सी बात है आगे जैसे-जैसे नागरिक पत्रकारिता का दायरा बढ़ेगा इसकी विश्वसनीयता दाव पर लगेगी। सीधे शब्दों में समझे तो बिना किसी तकनीकी पढ़ाई किये स्मार्ट फोन के साथ स्मार्ट बनने की प्रक्रिया में जितनी तेजी से सच फैलेगा उस से कई गुना रफ्तार से झूठ दौड़ेगा। वैसे भी एक पुरानी कहावत है जब तक सत्य बाहर निकलने के लिए अपने जूते तलाशता है, झूठ पूरी दुनिया घूम आता है।

मतलब बिल्कुल सीधा और साफ है कि हर चीज जिसमें अच्छाई होती है उसी में बुराई भी होती है, तो हमें तय करना होगा कि इसके निगेटिव पॉजिटिव प्रभाव को समझने की समझ कैसे विकसित करें?
वर्चुअल मीडिया, सोशल मीडिया के इस वर्ल्ड वाइड वेव ने सिटीजन जर्नलिज्म को एक मंच तो दे दिया है पर इसकी उपयोगिता की जिम्मेवारी हमें तय करनी होगी। इसके बेहतर प्रयोग से समाज और देश सुधार की न सिर्फ दिशा तय करनी होगी बल्कि उसके सकारात्मक प्रभाव पर भी गंभीरता से मंथन करना होगा।

निश्चित रूप से नागरिक पत्रकारिता , किसी भी मीडिया संस्थान से न जुड़कर भी खबरें संचालित करने का अद्भुत मंच है, शर्त यह है कि पत्रकारिता के लिए बने पंच लाइन ‘पत्रकारिता प्रोफेशन नहीं मिशन है।’ को इसमें अपने स्तर से बहाल रखा जाए।
सिक्के के दो पहलू की तरह सिटीजन जर्नलिज्म की भी अपनी ताकत के दो रूप है अच्छाई और बुराई। अगर कभी खबरों की सत्यता तय करने में मुश्किल आये तो हम न सिर्फ निष्पक्ष भाव से समाचार का सृजन करें बल्कि पत्रकारिता के मूल उद्देश्य, जनहित को प्राथमिकता देने का प्रयास करें।

ज्ञातव्य है कि समय के साथ मुख्य धारा की मीडिया में चंद लोगों की मोनोपोली कायम हो रही थी। दिशा निर्देश सत्तारूढ़ पार्टी या खास व्यक्ति के द्वारा प्राप्त होने लगे थे। ऐसी विषम परिस्थितियों में नागरिक पत्रकारिता ने मीडिया के कुछ मुट्ठी भर लोगों के गुरुर को न सिर्फ तोड़ा है बल्कि उनके पूरे किले को ही ध्वस्त कर दिया है। आज इस नागरिक पत्रकारिता की ताकत को ऐसे भी समझा जा सकता है कि कई सारी खबरें सोशल मीडिया पर पहले आती हैं और बाद में सत्यापित और संपादित होकर मुख्य धारा की मीडिया में आती है।

इसके साथ ही अगर बेहतर तरीके से इसके पूरे दिशा निर्देशों का पालन किया जाए और किसी तरह की विवादास्पद सामग्री न परोसी जाए तो इसमें मुद्रीकरण की प्रक्रिया भी है। अर्थात पूरी शर्त के साथ इस मंच को संचालित करने पर पैसे कमाने का साधन भी यहां उपलब्ध है।

इस तरह से देखा जाए तो सही मायने में यह सिटिज़न जर्नलिज्म हर आम और खास को एक बराबर अभिव्यक्ति की आजादी प्रदान करता है। खास लोगों की जिंदगी से प्रेरणा देने एवं उनकी कहानियों के लिए कई प्लेटफॉर्म हैं पर आम अवाम के पास जो अनुभव का खजाना है, उसे साझा करने में मददगार साबित हो रहा है यह मंच।
खाना खजाना, महिला जगत से लेकर बाल विकास तक के पन्नों को अपने में समेटे हुए, यह मंच न सिर्फ किताब बल्कि पूरी लाइब्रेरी है।

नाली गली से लेकर व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने का सबसे प्रभावी जरिया है यह। तस्वीरों, वीडियो और ग्राफिक्स जैसे साक्ष्यों के साथ खबरों की अनोखी दुनिया। अपने पसंद की चीजों को यथा समय खोजने से लेकर फुरसत में खबरों से रूबरू होना, सब संभव हुआ है इस साधन से।

इसकी सबसे बड़ी खामियों में नागरिक पत्रकारिता के नाम पर पीत पत्रकारिता की संभावना बन जाती है। किसी के निजी जीवन की बातें, व्यक्तिगत पहलू या असंसदीय शब्दों का प्रयोग या फिर किसी की मर्यादा भंग करने वाली कहानियों को प्रकाशित करना। साथ ही इस माध्यम का दुरुपयोग सामूहिक रूप से पैसे उगाहने में भी लोग कर रहे हैं। क्राउड फंडिंग के नाम पर तकरीबन भीख मांगने की परंपरा को बढ़ावा मिल रहा है।

इसका सबसे डरावना और वीभत्स प्रयोग है पोर्नोग्राफी। स्त्री से लेकर बच्चों तक के शोषण के रास्ते तैयार करता है। वैसे कुछ कड़े कानून से इस पर रोक लग सकती है। पहले से भी देश में इस तरह के आपत्तिजनक सामग्री को रोकने के लिए कई कानून हैं। धार्मिक उन्माद , धर्मान्ध सामग्री और एक पक्षीय विश्लेषण से भी बचने की आवश्यकता है।

ब्लॉग, वेब पेज, गूगल, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सएप, वी चैट, टिकटाक, सोशल साइट्स और भी न जाने कितने तरीके से अब संचार संभव हो गया है। बहुत हद तक सूचना के अधिकार का विस्तार भी है नागरिक पत्रकारिता, बस जरूरत है भाषा की शुद्धता, तस्वीरों, वीडियो या ग्राफिक्स की प्रामाणिकता और उकसाने वाली खबरों से बचाव के तरीके तलाशने की।
बहरहाल इन सब चुनौतियों के बावजूद सिटिज़न जर्नलिज्म में असीम संभावनाएं है।

सुपर तकनीक के माध्यम से होने वाली इस पत्रकारिता में जरूरत है, थोड़े प्रशिक्षण और कुछ कानूनी दायरे बनाने की। सही मायने में लोकतांत्रिक तरीके से आम आदमी की अभिव्यक्ति का माध्यम बना नागरिक पत्रकारिता का यह मंच अपने आप में अनूठा है।

मुख्य धारा की मीडिया को चुनौती देते इस सिटिज़न जर्नलिज्म यानी नागरिक पत्रकारिता का भविष्य आगे अभी और उज्ज्वल है।

-लेखिका का नाम अनिता गौतम पत्रकार है

20 वर्ष बाद बिहार का कोई लाल यूपीएसपी में टांप किया है।

20 वर्ष बाद बिहार का कोई बेटा यूपीएससी में टांप किया हलाकि शुभम की पढ़ाई लिखाई बिहार में नहीं हुआ है लेकिन परिवार बिहार में ही रहता बिहार के कटिहार के रहने वाले शुभम कुमार कुम्हरी निवासी उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के ब्रांच मैनेजर देवानंद सिंह व पूनम सिंह के पुत्र हैं। उनकी प्रारंभिक से लेकर 10वीं तक की शिक्षा विद्या विहार रेजिडेंशियल स्कूल से हुई। 12वीं की पढ़ाई चिन्मया विद्यालय बोकारो से हुई। उसके बाद उन्होंने IIT बॉम्बे से सिविल इंजीनियरिग किया और फिर उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी। दूसरे प्रयास में 2019 में 209वां रैंक हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने इस साल फिर एग्जाम दिया और टॉप किया है।

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मां पूनम सिंह ने कहा- ‘शुभम पुणे में ट्रेनिंग में हैं। मैं बहुत खुश हूं। मुझे बहुत अच्छा लगा। सभी बच्चे शुभम की तरह तैयारी करें। वन से लेकर 10 तक टॉपर रहा। अभी भी टॉपर है। बचपन से पूछती थीं कि तुम क्या बनोगे तो वह कहता था मैं IAS बनूंगा। मैं उसको कहती थी तुम अच्छा तो पढ़ोगे तो मैं तुम्हें पढ़ाती रहूंगी। वह मुझे हौसला देता रहा’।

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टांपर का पूरा परिवार

शुभम के पिता देवानंद सिंह ने बताया कि उनकी बेटी अंकिता कुमार न्यूक्लियर साइंटिस्ट हैं। वह अभी आरआर कैट में पोस्टेड हैं। संयुक्त परिवार है। देवानंद सिंह के छोटे भाई डॉ. मणि कुमार सिंह पूर्णिमा में एक्वाप्रेशर के डॉक्टर हैं।

वहीं, ऑल इंडिया 7वां रैंक जमुई के प्रवीण कुमार को मिला है। चकाई बाजार निवासी प्रवीण कुमार बरनवाल ने ऑल इंडिया में 7 वां रैंक लाकर चकाई का नाम पूरे देश में रोशन किया है। प्रवीण की सफलता से पूरे चकाई बाजार में जश्न का माहौल है। उसके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ उमड़ रही है। प्रवीण के पिता सीताराम वर्णवाल ने बताया- “वह बचपन से ही मेधावी था। उसकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा जसीडीह स्थित रामकृष्ण विद्यालय से हुई थी। बाद में उसने पटना से CBSE से मैट्रिक एवं इंटर की परीक्षा पास की। उसके बाद कानपुर IIT से पढ़ाई कर दिल्ली में 2 साल से UPSC की तैयारी कर रहा था। उसने दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है।

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प्रवीण की सफलता से उसकी मां वीणा देवी, बड़े भाई धनंजय वर्णवाल, बहन दीक्षा वर्णवाल एवं चाचा रामेश्वर लाल वर्णावाल खुशी से झूम रहे हैं। सीताराम वर्णावाल ने काफी गरीबी में अपने पुत्र प्रवीण को पढ़ाया- लिखाया और आज प्रवीण ने पूरे चकाई का नाम देश स्तर पर ऊंचा किया है।

समस्तीपुर के दिघड़ा निवासी सत्यम गांधी (Satyam Gandhi) ने यूपीएससी में 10वां रैक हासिल किया है । सत्यम गांधी ने राजनीतिक शास्त्र विषय से ग्रेजुएशन किया है ।

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परिणाम के बारे में खबर सुनते ही उनके पैतृक गांव दिघड़ा में जश्न का माहौल है. बता दें कि यूपीएससी ने आज सिविल सेवा का परिणाम जारी किया है, जिसमें 761 अभ्यर्थियों का सेलेक्शन हुआ है ।

झंझारपुर कोर्ट के जज अविनाश का पावर हुआ सीज फैसले को लेकर उठ रहे थे सवाल

पटना हाईकोर्ट ने मधुबनी जिला के झंझारपुर सिविल कोर्ट के एडीजे (प्रथम) अविनाश कुमार का पावर सीज करने का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट के महानिबंधक की ओर से जारी आदेश में उनके न्यायिक कार्य करने पर रोक लगा दी गई है। हाल के दिनों में एडीजे प्रथम अविनाश कुमार अपने जारी आदेश से काफी चर्चा में रहे हैं।

कभी डीएम-एसपी तो कभी अधिकारियों को ट्रेनिंग में भेजने की बात करते थे। हाल ही में उन्होंने कपड़ा और नाली साफ करने तथा बच्चों को आधा-आधा लीटर दूध पिलाने सहित अन्य आदेश पारित किये थे। हाईकोर्ट प्रशासन ने अब उनके न्यायिक कार्य करने के अधिकार पर अंकुश लगा दिया है।

पटना हाईकोर्ट ने भभुआ (कैमूर) सिविल कोर्ट के एडीजे शिव प्रसाद शुक्ला को निलंबित कर दिया है| उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। साथ ही अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित रहने तक उन्हें बगैर अनुमति के मुख्यालय से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया गया है।

हाईकोर्ट प्रशासन ने बिहार ज्यूडिशियल सर्विस (क्लासिफिकेशन कंट्रोल एंड अपील)-2020 के नियम 6 (1) के तहत कार्रवाई की है। निलंबन से संबंधित आदेश पटना हाईकोर्ट के महानिबंधक ने जारी कर दिया है।

भ्रष्टाचारियों से लड़ते लड़ते हार गया विपिन सरेआम अपराधियों ने गोली से कर दी छलनी

मोतिहारी एसपी के दामन पर लगा एक और दाग जी है सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ आवाज उठाने वाले RTI कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की आवाज को अपराधियों ने हमेशा के लिए खामोश कर दिया । हरसिद्धि के सीओ सहित कई पदाधिकारी और भूमाफिया पर विपिन अग्रवाल की हत्या में शामिल होने का आरोप लग रहा है।

जो खबर आ रही है उसके अनुसार विपिन अग्रवाल घर से अंचल कार्यालय सीओ से मिलने निकला था जहां सरकारी जमीन पर फिर से कब्जा होने कि शिकायत लेकर गया था सीओ से मिलकर जैसे ही बाहर निकला पहले से घात लगाये अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग करना शुरु कर दिया विपिन को चार गोली थी।

घटना की सूचना पर हरसिद्धि थाना पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और विपिन अग्रवाल को मौके से उठाकर मोतिहारी सदर अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था।
घटना के बाबत मृतक के पिता विजय कुमार अग्रवाल ने बताया- ‘बेटे ने हरसिद्धि क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर कई RTI आवेदन दाखिल किया था।

इस कारण 2020 में भी मेरे घर पर अपराधियों ने घर पर धावा बोल गोलीबारी की थी। इसको लेकर स्थानीय थाना और SP को सनहा दिया गया था, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

‘इतना ही नहीं भूमाफिया मेरे बेटे को झुठे मुदकमें फंसा कर तंग करने लगा पूरा प्रशासन भूमाफिया के साथ खड़ा है जबकि सरकारी जमीन की रक्षा के लिए मेरा बेटा प्रशासन से गुहार लगा रहा था लेकिन प्रशासन मेरे बेटे के खिलाफ ही कारवाई करने लगा ।

बिहार के दो जज साहब के फैसले से लोगों में कोर्ट को लेकर नजरिया बदलने लगा है ।

बिहार में इन दोनों न्यायिक सेवा से जुड़े दो पदाधिकारी अपने मानवीय जजमेंट की वजह से सुर्खियों में है ।एक ही बिहार शरीफ कोर्ट के प्रधान न्यायायिक दण्डाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा (Manvendra Mishra)और दूसरे हैं व्यवहार न्यायालय झंझारपुर के एडीजे अविनाश कुमार जिन्होंने अपने फैसले से जता दिया कि सबस कुछ कानून के किताब के अनुसार ही नहीं चलता है।

बिहार में बिहारशरीफ किशोर न्याय परिषद (जेजेबी) के प्रधान जज मानवेन्द्र मिश्र ने सनातन संस्कृति को आधार मान एक फैसला सुनाया है। उन्होंने मिठाई चोरी के आरोपित किशोर को दोष मुक्त करार देते हुए कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी बाललीला हो सकती है तो बालक की मिठाई चोरी को भी अपराध नहीं माना जाना चाहिए। समाज में दोहरा मानदंड नहीं चल सकता। वह भी तब, जब किशोर के पास भोजन न हो।

जज ने मामले में हरनौत के बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी के विरुद्ध कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले में एफआइआर दर्ज ही नहीं करनी चाहिए। सिर्फ थाना की सामान्य डायरी में घटना को दर्ज कर मामले को सुलझाना चाहिए था। जज ने चोरी का आरोप लगाने वाली महिला की अधिवक्ता से सवाल किया कि यदि उस महिला की संतान उसके पर्स से निकाल लेती तो क्या वह अपने ब’चे को भी पुलिस को सौंपकर जेल भिजवा देती।

इसी तरह कुछ दिनों पहले एक मामला इनके सामने आया जिसमें एक नाबालिक लड़की को लेकर एक लड़का फरार हो गया जब वो कोर्ट पहुंचा तो वो लड़की मां बन चुकी थी लड़का पर अपहरण का मामला दर्ज था तीन दिनों में ही सुनवाई पूरी करते हुए फैसला दिया कि हर अपराध के लिए सजा दिया जाना न्याय नहीं होगा। यह सही है कि किशोर ने नाबालिग लड़की को भगाकर ले गया। और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया, जिससे एक बच्ची पैदा हुई।

यह अपराध है। लेकिन, अब उसकी बच्ची जन्म ले चुकी है। बच्ची और उसकी मां को उसके परिजन स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में किशोर को दंडित करके तीन नाबालिगों की जान सांसत में नहीं डाली जा सकती है। किशोर ने भी पत्नी व बच्ची को स्वीकार करते हुए अच्छी तरह से देखभाल कर रहा है। और आगे भी करने का वचन कोर्ट के समक्ष देता है तो यहां पर न्याय के साथ तीन लोगों का हित भी देखना सर्वोत्तम है इसलिए लड़के को अपराध से मुक्त करते हुए अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहने का आदेश दिया ।

इसी तरह बिहार के नालंदा जिले के अस्थावां के एक युवक की नौकरी असम राइफल्स में लग गई थी. उसे मार्च में ज्वाइन करता था, लेकिन 12 साल पहले किए एक जुर्म के चलते उसका करियर शुरू होने से पहले ही मंझधार में फंस गया था. युवक पर 2009 में मारपीट करने का केस दर्ज हुआ था. असम राइफल्स में ज्वाइन करने के लिए कैरेक्टर सर्टिफिकेट की जरूरत थी. कोर्ट ने दोषमुक्त हुए बिना उसे नौकरी मिलना संभव न था पांच दिन में सुनवाई करके उक्त युवक को दोषमुक्त करते हुए एसपी को चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने करने का निर्देश दिया।

इस तरह के कई फैसले की वजह से बिहार शरीफ में इनके न्यायप्रियता की खुब चर्चा हो रही है ।
दूसरे न्यायिक सेवा के अधिकारी व्यवहार न्यायालय झंझारपुर के एडीजे अविनाश कुमार हैं ये भी कई ऐसे फैसले दिये हैं जिसको लेकर खासे चर्चा में हैं तीन दिन पहले गांव की ही महिलाये के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में जेल में बंद लड़के को जमानत देते हुए कहां कि छह माह तक आरोपी गांव की महिलाओं का बिना पैसा लिए हुए छह माह तक कपड़ा धोकर घर पहुंचायेगा, आरोपी गांव का धोबी है ।

इसी तरह मारपीट के एक मामले में जेल में बंद एक आरोपी को जमानत देते हुए निर्देश दिया कि जमानत से छुटने के बाद आरोपी सार्वजनिक स्थलों यथा मंदिर परिसर एवं पार्क में 10 फलदार पौधा लगायेगा और उसकी घेराबंदी करेगा और 30 दिनों के अंदर लगाए गए पौधों का फोटोग्राफ कोर्ट में जमा करे ।

इसी तरह लखनौर आरएस ओपी के मारपीट के एम मामले के दो आरोपित को इस शर्त जमानत दी है कि वह अगले छह माह तक महादलित परिवार के पांच बच्चों को आधा-आधा लीटर दूध मुफ्त में देगा. साथ ही न्यायालय ने दूध देने का प्रमाण पत्र मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य या विधायक से लेकर न्यायालय में जमा करने का निर्देश दिया हैआरोपी के अधिवक्ता परशुराम मिश्रा के अनुसार लखनौर आर एस ओपी क्षेत्र के भगवान कुमार झा द्वारा आरोपी शिवजी मिश्रा एवं अशोक मिश्रा सहित चार पर मारपीट कर चाकू से जख्मी करने का आरोप लगाया था।

अभियुक्तों के बारे में गाय पालने की जानकारी एडीजे को मिली. न्यायालय ने अभियुक्त शिवजी मिश्रा को तीन गाय पालने तथा अशोक मिश्र को दो गाय पालने की जानकारी हुई. यह जानकारी मिलने के बाद एडीजे ने शिवजी मिश्र को तीन महादलित परिवार के बच्चे को आधा आधा लीटर दूध व अशोक मिश्र को दो दलित परिवार के पांच साल से कम उम्र के बच्चे को आधा – आधा लीटर दूध मुफ्त में देने की शर्त पर जमानत दिया।

इस तरह के फैसले को लेकर कानून के जानकार भले ही सवाल खड़े कर रहे हो लेकिन आम लोग जज साहब के इस तरह के फैसले से काफी खुश है ।

हाईकोर्ट ने फिजिकल कोर्ट को लेकर गाइड लाइन जारी किया

पटना हाईकोर्ट में 27 सितम्बर,2021 से सप्ताह में चार दिन फिजिकल कोर्ट और एक दिन ऑन लाइन सुनवाई होगी।स्टैण्डर्ड ओपरेटिंग procedure के तहत कोर्ट परिसर व कोर्ट रूम में प्रवेश के नियम तय किये गए हैं।

पटना हाईकोर्ट के गेट न.1 से जजों के आने जाने की व्यवस्था हैं।जबकि गेट न. 3 से अधिवक्ता,क्लर्क और अन्य लोग वाहन से आ कर पार्किंग स्थल में वाहनों को रखेंगे।इस गेट से पैदल भी अनुमति प्राप्त लोग प्रवेश कर सकेंगे।गेट संख्या 4 से पैदल चलने वाले कोर्ट परिसर में आ सकेंगे।

गेट संख्या 3 पर प्रवेश करने वाले लोगों का थर्मल चेकिंग करने के बाद ही कोर्ट परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।फ्लू,बुखार या खांसी लक्षण वाले व्यक्ति को कोर्ट परिसर में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कोर्ट परिसर और कोर्ट रूम मे उन्हीं अधिवक्ता,क्लर्क और सम्बंधित लोगों को प्रवेश की अनुमति होगी,जिनका केस उस दिन लिस्ट पर रहेगा।

कोर्ट परिसर और रूम मे कोरोना महामारी के रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकार के दिशानिर्देश व नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।मास्क पहनने और सोशल डिस्टेन्स के नियमों को सख्त तरीके से पालन करना होगा।
कोर्ट रूम में फिजिकल सुनवाई के लिए वकील,क्लर्क व अन्य सम्बंधित लोगों को ई पास निर्गत किया जाएगा,जो उसी दिन मामले के फिजिकल सुनवाई के लिए वैध होगा।

तीनो अधिवक्ता संघ के दस दस अधिवक्ता नियमों के पालन की निगरानी करने के लिए मौजूद रहेंगे।
जिन अधिवक्ता के केस सुनवाई के लिए कार्य सूची में होंगे,उन्हें,उनके एक सहयोगी व क्लर्क को कोर्ट परिसर व कोर्ट रूम में प्रवेश की अनुमति होगी।

साथ ही मामले की सुनवाई खत्म होने के बाद सम्बंधित अधिवक्ता,क्लर्क व अन्य लोगों कोर्ट परिसर छोड़ देना होगा।
अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी व अन्य सम्बंधित लोगों के प्रवेश के लिए 15 दिनों के विशेष पास दिया जाएगा,जिसे समय समय पर विस्तारित किया जाएगा।

एक्सरे फिल्म बेचने वाली कंपनी को मिला है घर में नल और जल पहुंचाने का ठेका

उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद की मुश्किलें बढ़ती जा रही है मीडिया में सफाई देने के बावजूद पार्टी और सीएम दोनों संतुष्ट नहीं है क्यों कि यह पहला मामला नहीं है इससे पहले जदयू विधायक गोपाल मंडल इनके भागलपुर जाने को लेकर जो सवाल खड़े किये थे उसकी सच्चाई भी पार्टी के सीनियर नेता और मुख्यमंत्री तक पहुंच गयी है ।

https://2gz.db6.myftpupload.com/the-company-worked-by-ignoring-the-rules/


जदयू विधायक ने उप मुख्यमंत्री पर पैसा उगाही करने का आरोप लगया था साथ ही उप मुख्यमंत्री के सरकारी कार्यक्रम में बेटा के शामिल होने पर भी सवाल खड़े किये थे।
इस बीच सीएम हाउस कटिहार डीएम से इस पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी है वैसे ठेका को लेकर जो तथ्य सामने आ रहा है वो उप मुख्यमंत्री के दावे के साफ विपरीत है ।

https://2gz.db6.myftpupload.com/bihars-politics-with-the-revelations-of-bihar-news-post/

एक्सरे फिल्म बेचने वाली कंपनी को हर घर जल नल लगाने का मिला है ठेका

पटना के जिस दो कंपनी Jeevanshree Infrastructure Pvt limited और Deepkiran Infrastructure Pvt Limited को हर घर नल जल योजना का काम देने को लेकर वबेला मचा है उसमें एक कंपनी Deepkiran Infrastructure Pvt Limited ऐसा है जो एक्सरे फिल्म बेचने का काम करता है उस कंपनी को किसी भी तरह के निर्माण कार्य करने का अनुभव नहीं है।

Deepkiran Infrastructure Pvt Limited 2009 की कंपनी है और 2009 से 2017 तक कंपनी के पास कुछ खास काम नहीं था ।इस कंपनी का शेयर कैपिटल 60 लाख रुपया है जिसमें से 54 लाख 59हजार 603 रुपया कंपनी निर्माण के कुछ ही दिनों बाद पहली वाली कंपनी को लोन दे दिया है।
इस कंपनी को पीएचडी कटिहार ने 2019 में 3 करोड़ 6 लाख रुपया का काम हर घर जल नल योजना के तहत दिया है सरकार किसी भी ऐंजसी को काम देती है तो उस कंपनी के कम से कम तीन वर्ष का आंडिट रिपोर्ट देखना अनिवार्य है।

Deepkiran Infrastructure Pvt Limited कंपनी के तीन वर्षो का आंडिट रिपोर्ट इस तरह है ।
वित्तीय वर्ष ——- 1 अप्रैल 2017—–31 मार्च 2018
इस वर्ष उसका आय है 32 लाख 10 हजार 843 रुपया यह आय एक्सरे फिल्म बेचकर कंपनी को प्राप्त हुआ है ।

वित्तीय वर्ष————1 अप्रैल 2018 से —–31 मार्च 20019

कंपनी को इस दौरान 17 लाख 81 हजार 628 रुपया 10 पैसा का आय हुआ है ये आय भी एक्सरे फिल्म बेचने से और सेल ऑफ गुड्स से 6 लाख 64 हजार 856 रुपया 10 पैसा (यह पैसा हर घर जल नल योजना के तहत मिला है )

वित्तीय वर्ष ————1 अप्रैल 2019 से——31 मार्च 2020
कंपनी को इस दौरान 78 लाख 6800.97 पैसा आय हुआ है यह पैसा सरकारी ठेका से प्राप्त हुआ है इस वर्ष एक्सरे फिल्म से कोई आय नहीं हुआ है।

इन दोनों कंपनी को ही काम मिले इसके लिए नियमों की अनदेखी की गयी है

सरकार किसी भी निजी कपंनी को कोई काम देती है तो उस कंपनी को जितने का ठेका मिला है उसका 5 प्रतिशत राशी विभाग के पास जमा करना पड़ता है, वो बैक गारंटी या फिर किसान विकास पत्र जैसे निवेश का प्रमाण होना चाहिए।


इस कंपनी के पास ऐसा कुछ भी नहीं है। इतना ही नहीं Deepkiran Infrastructure Pvt Limited कंपनी को हर घर जल नल योजना के तहत जो काम मिला है उसमें से उप मुख्यमंत्री के रिश्तेदार को 24 लाख 69428हजार का काम पेटी कॉन्ट्रैक्ट के रुप में दे दिया गया है जबकि नियम है कि इसके लिए पहले आपको विभाग से अनुमति लेना होगा साथ ही कुल काम का 10 प्रतिशत से ज्यादा आप पेटी कॉन्ट्रैक्ट में काम नहीं दे सकते हैं।


वित्तीय वर्ष 2019–2020 में कंपनी जो सरकार का काम किया है उसकी राशी 33 लाख 80 हजार है और 24 लाख 69428हजार रुपया का काम पेटी कॉन्ट्रैक्ट में दे दिया है जो पूरी तौर पर गैर कानूनी है।
इसी तरह से काम करने के दौरान कंपनी के द्वारा सरकार के नियमावली का खुल कर उल्लंघन किया है ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इस कंपनी पर किसी सरपरस्ती है जिसको लेकर पीएचडी इतना मेहरवान है।

आयुष्मान भारत का लक्ष्य बढ़ाया जायेंगा

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तीन वर्ष पूरे होने पर ज्ञान भवन में आयुष्मान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राज्य स्वास्थ्य सुरक्षा समिति द्वारा कार्यक्रम का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत किया गया था। कार्यक्रम का थीम रोग मुक्त, ऋण मुक्त बिहार था, ताकि राज्य की जनता इलाज के खातिर कर्जदार न हो।

इस अवसर पर जहां दो लाभार्थियों ने अपने इलाज के अनुभव साझा किये, वहीं इस योजना के तहत बेहतर काम करने वाले सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को सम्मानित भी किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने समीक्षा मोबाइल एप का शुभारंभ किया और माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ कुशल मार्गदर्शन के लिए माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार जताया।

श्री पांडेय ने आयुष्मान भारत की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि यह योजना लोगों को नया जीवन देने का काम कर रहा है। अस्पताल में हाथ में लिया हुआ गोल्डन कार्ड लाभार्थियों की ताकत होती है। आयुष्मान भारत का तीन वर्षों का सफर काफी चुनौती भरा रहा है। कठिन रास्ते से चलते हुए इस योजना को आगे बढ़ाते रहे हैं।

असफलता के रास्ते ही सफलता की मंजिल पहुंचाता है। कभी चुनौतियों में लड़ने से स्वास्थ्य विभाग पीछे नहीं रहा। आगे आने वाले समय में इसे और गति देते हुए सुलभ और बेहतर बनायेंगे, ताकि लोगों को इस योजना ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। तीन साल में राज्य में इस योजना के तहत तीन लाख लोगों का इलाज किया गया और इस पर लगभग तीन सौ करोड़ खर्च किये गये। 30 फीसदी परिवारों के बीच गोल्डन कार्ड उपलब्ध कराया गया है।

पूरे राज्य में इस योजना के तहत 940 सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल सूचीबद्ध हैं। पूरे देश में 28 हजार अस्पताल सूचीबद्ध हैं, जहां आयुष्मान भारत के लाभार्थी अपना इलाज करा सकते हैं।
श्री पांडेय ने कहा कि पहले लोगों को अपने परिजनों के इलाज के लिए काफी कठिनाई होती थी।

अपने परिजनों का जीवन बचाने के लिए गरीब तबके के लोग कर्ज लेते थे, जेवर और जमीन बेच देते थे, लेकिन अब लोगों को न तो इलाज के लिए ऋण लेना पड़ रहा है और न ही जमीन बेचने की आवश्यकता पड़ रही है। माननीय प्रधानमंत्री की सोच है कि बीमारी के कारण लोगों को ऋण लेना नहीं पड़े। इसलिए उन्होंने गरीबों की पीड़ा को देखते हुए इस योजना के तहत पांच लाख तक निःशुल्क उपचार की व्यवस्था की।

बिहार न्यूज पोस्ट के खुलासे के बाद सामने आये उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद कहा मेरे परिवार के लोग नहीं हैं शामिल

उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने दी टेंडर विवाद को लेकर दी सफाई ।

बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद ने ‘‘हर घर नल का जल‘‘ स्कीम के अंतर्गत कटिहार जिले में कराये गए कार्यों के संबंध में प्रकाशित खबर के विषय में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरे ऊपर लगाया गया आरोप तथ्यहीन एवं बेबुनियाद है
और राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि सात निश्चय के अन्तर्गत क्रियान्वित ‘‘हर घर नल का जल‘‘ बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है एवं इन योजनाओं के क्रियान्वयन में संबंधित विभागों द्वारा सरकार की मार्गनिर्देशिका के मुताबिक क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया गया
है।

उन्होने कहा कि ‘‘हर घर नल का जल‘‘ स्कीम के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आम आवाम को प्रत्येक घरों में नल संयोजन के द्वारा पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। स्कीम की सफलता से घबराहट में विपक्ष अनर्गल प्रलाप कर रहा है।

उप मुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद ने इस मामले में वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जिन दो कंपनी दीपकिरण इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड एवं जीवनश्री इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का जिक्र किया गया है, उन प्रतिष्ठानों अथवा कंपनियों में मेरे परिवार या ससुराल के कोई सदस्य शामिल नहीं हैं।

प्रसांगिक कार्य कटिहार जिला अंतर्गत क्रियान्वित लगभग 2800 स्कीमों में से भवाड़ा पंचायत के 04 वार्डों में सिर्फ चार स्कीम का कार्य मेरे परिवार की श्रीमती पूजा कुमारी द्वारा किया गया है, जिसका कॉन्ट्रैक्ट सरकार की मार्गनिर्देशिका के अनुसार पी.डब्ल्यू.डी. कोड, निविदा प्रक्रिया एवं नियमों के मुताबिक वर्ष 2019 में ही किया गया है।

जैसा कि मैंने जानकारी ली है, उसके अनुसार उपरोक्त कॉन्ट्रैक्ट नवंबर 2019 में हुआ, जिसके अंतर्गत मात्र 01 करोड़ 87 लाख 08 हजार 766 रूपए का कॉन्ट्रैक्ट हुआ। इस कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत दिए गए कार्य भी एक वर्ष पूर्व सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। संबंधित क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति भी किया जा रहा है।

इस संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि बिहार प्रदेश के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के पूर्व प्रसांगिक चारों स्कीमों के कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके थे। ऐसी स्थिति में मैं किस प्रकार डिप्टी सीएम के पदीय प्रभाव का इस्तेमाल कर सकता हूँ ?
प्रकाशित खबर में जिस प्रकार से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर साजिश के तहत पेश किया गया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं इसका प्रतिकार करता हूँ।

बिहार न्यूज पोस्ट के खुलासे से बिहार की राजनीति में आया भूचाल सीएम ने स्थिति स्पष्ट करने को कहां

बिहार न्यूज पोस्ट के खुलासे के बाद बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है सीएम ने नीतीश कुमार ने बीजेपी से उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद मामले में मीडिया में आयी खबर को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है वही इस मामले को लेकर नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी यादव ने यादव सीएम नीतीश कुमार पर जबरदस्त हमला बोला है मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी ने कहा कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए इस मामले मेंं सीएम को पत्र लिखा है जिसमें उप मुख्यमंत्री पर पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों को टेंडर मैनेज करके ठेका दिलाया हैं इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करायी जाये

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साथ ही तेजस्वी ने कहा कि नीतीश की आत्मा बंगाल की खाड़ी में डूब गई है क्या भ्रष्टचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा कहां खो गया है बीजेपी के नेता पर कार्रवाई करने को लेकर क्यों चुप हैं नीतीश कुमार।
वही आज बीजेपी के मंत्री और पार्टी के पदाधिकारी इस मामले पर चुप्पी साध लिया है कहां ये जा रहा है कि इस मामले के सामने आने के बाद पार्टी उप मुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद से दूरी बनाने लगा है ।वही दूसरी और भाकपा माले ने इस मामले को लेकर बड़े आन्दोलन की चेतावनी दिया है ।

मेट्रों प्रोजेक्ट पर काम में आयेगी तेजी रेल डिपो निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण पर लगी मोहर

दो परियोजनाओं की स्वीकृति पटना मेट्रो रेल डिपो निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अब शुरू हो जाएगी। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री रामसूरत कुमार ने 75.945 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। भू-अर्जन निदेषालय जल्द ही इसकी प्रारंभिक अधिसूचना जारी करेगा। भू-अर्जन अधिनियम, 2013 की धारा- 11 ;1द्ध के मुताबिक प्रारंभिक अधिसूचना राजपत्र में, दो दैनिक समाचार पत्रों में, स्थानीय निकायों के सूचना पट्ट पर और सरकारी वेबसाइट पर प्रकाषित कराया जाता है।

घ्यातव्य है कि 50 एकड़ से कम भूमि के अधिग्रहण की मंजूरी जिला पदाधिकारी द्वारा दी जाती है जबकि 50 एकड़ से अधिक भूमि के अधिग्रहण के प्रस्ताव की मंजूरी समुचित सरकार द्वारा दी जाती है। यहां समुचित सरकार का तात्पर्य विभागीय मंत्री से है। पटना मेट्रो बिहार सरकार की एक महात्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके जल्द शुरू होने का मार्ग प्रषस्त हो गया है।

रोहतास और कैमूर जिले के 26 मौजों में चकबंदी का काम पूरा हो गया है। इन मौजों में चकबंदी के काम को डिनोटिफाई कर दिया गया है। यह अनाधिसूचित करने का अधिकार सरकार में है जो वास्तविक मंत्री में निहित होता है। डिनोटिफिकेषन के साथ ही इन मौजों का खतियान और नक्षा संबंधित अंचल को सौंप दिया जाएगा और आगे से उन अंचलों का काम चकबंदी खतियान और नक्षे के आधार पर ही होगा।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने आज ही रोहतास जिले के 22 मौजों में चकबंदी को समाप्त घोषित किया है। इससे पहले उन सभी 28 मौजों की जहां चकबंदी पूरा हो गया था कि गहन जांच उपनिदेष चकबंदी, रोहतास से गहन जांच कराई गई। किंतु 6 मौजों में सुनवाई का काम पूरा नहीं होने और दो मौजे में चक के मुताबिक दखल कब्जा नहीं होने की वजह से कुल 22 राजस्व ग्रामों को ही चकबंदी अधिनियम की धारा 26 ;कद्ध के मुताबिक अनाधिसूचित किया गया है।

मंत्री श्री राम सूरत कुमार ने कहा कि भू-अर्जन का काम सरकार की प्राथमिकता में है। ज्यादा जरूरी परियोजनाओं को उनके द्वारा व्यक्तिगत रूचि लेकर निष्पादित किया जाता है ताकि भू-अर्जन की वजह से किसी परियोजना में विलंब नहीं हो।

पंचायत चुनाव के दौरान मतदान केन्द्रों पर बिना मास्क के पहुंचने पर 50 रुपया भरना पड़ेगा जुर्वाना

उत्तरप्रदेश पंचायत चुनाव के दौरान हुए कोरोना विस्फोट को देखते हुए बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रथम चरण के मतदान से ठीक पहले कोरोना को लेकर कई सख्त आदेश जारी किया है इसमें बिना मास्क लगाये जो वोटर वोट गिराने आयेंगे उन पर 50 रुपया जुर्वाना लगाया जायेंगा।

आयोग ने चुनाव कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वोटरों से भी कोविड प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराये।और इसके लिए आयोग ने वैसे वोटरों पर फाइन लगाने का निर्देश दिया है जो मास्क नही लगाएंगे। हालांकि आयोग की तरफ से सभी बूथों के प्रवेश द्वार पर वैसे वोटरों को मास्क उपलब्ध कराने के निर्देश हैं जो बिना मास्क के वोट डालने पहुंचेंगे। लेकिन मास्क मिलने के बावजूद जो लोग मास्क नाक और मुंह पर लगाये नही दिखें, उन पर प्रशासन फाइन लगाएगा। ये फाइन 50 रुपए का होगा।

साथ ही पंचायत चुनाव में कोरोना पॉजिटिव वोटर भी वोट डाल सकेंगे । राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए अलग से व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। आयोग ने ऐसे वोटरों के लिए टोकन व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। कोविड पॉजिटिव वोटर वोटिग के अंतिम घंटे में मतदान करेंगे।

बूथ पर ऐसे वोटरों के लिए पहले से 100 टोकन होंगे। बूथ पर आनेवाले सभी कोविड पॉजिटिव वोटरों को टोकन नंबर देकर वेटिंग लॉन्ज में बैठने की जगह दी जाएगी । मतदान के आखिरी घंटों में ये अपने टोकन के अनुसार अपना मत डालेंगे। कोविड पॉजिटिव वोटरों के वोटिंग के दौरान बूथ पर मौजूद सभी चुनावकर्मी पीपीई किट में होंगे ।

शरीर का तापमान हुआ ज्यादा तो आखिरी घंटों में डालना होगा वोट कोविड को देखते हुए की गई वोटिंग व्यवस्था में हर बूथ पर थर्मल स्कैनर की व्यवस्था की गई है । बूथ पर प्रवेश के दौरान सभी वोटरों के शरीर का तापमान लिया जाएगा । इस दौरान जिनके शरीर का तापमान ज्यादा होगा , उनका तापमान फिर से आधे घंटे बाद लिया जाएगा । दूसरी बार भी शरीर का तापमान ज्यादा होने पर ऐसे वोटरों को मतदान के आखिरी घंटों में मतदान का करने का मौका दिया जाएगा ।

इस बार पंचायत चुनाव की होगी लाइव वेब कास्टिंग

पंचायत चुनाव 2021 शांतिपूर्ण और निष्पक्ष सम्पन्न हो इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा की तरह ही मतदान और मतगणना की लाइव वेब कास्टिंग होगी। राज्य निर्वाचन आयोग के इस फैसले को राज्य कैबिनेट ने भी मोहर लगा दिया है।

11 चरणों में हो रहे पंचायत चुनाव (Bihar Panchayat Chunav 2021) में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सर्वलान्स पर आयोग काफी भरोसा कर रहे हैं एक और जहां पहली बार मतदाताओं की पहचान के लिए बायोमीट्रिक मशीनों का सहारा लिया जाएगा वही स्ट्रांग रुम में इस तरह के ताले का इस्तमाल किया जा रहा है जिसके खुलने पर जिला से लेकर राज्यनिर्वाचन आयोग तक को सूचना मिल जायेगा।

कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने बताया कि मतदान केंद्रों पर बायोमीट्रिक मशीन लगाने की जिम्मेदारी ब्राडकास्ट इंजीनियरिंग कंसलटेंट इंडिया लि. बेंगलुरू (बीईसीआइएल) को सौंपी गई है। मतदान और मतगणना की लाइव वेबकास्टिंग का कार्य नेशनल इंफोमेटिक सेंटर सर्विस इंक (एनआइसीएसआइ) को सौंपा गया है। बिहार में 11 चरणों में पंचायत चुनाव हो रहे हैं, जिसके लिए करीब 1.13 लाख मतदान केंद्र बनाए जा रहे हैं।

बिहार में पहली बार फिरौती के लिए किसी लड़की का हुआ है अपहरण

बिहार में पहली बार फिरौती के लिए किसी लड़की का अपहरण हुआ है ।अपहरण की खबर मुजफ्फरपुर जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित शेरपुरा गांव से जुड़ा है जहां ठेकेदार चंदन तिवारी की 12 वर्ष की बेटी को बुधवार रात घर के दरवाजे से अपराधियों ने पिस्टल का भय दिखाते हुए अपहरण कर लिया है।

अपहरणकर्ताओं ने टूटी-फूटी अंग्रेजी में पांच लाख रुपए फिरौती वाला पत्र भी फेंका। इसमें लिखा है कि रुपए नहीं देने पर बच्ची की हत्या कर देंगे। घटना के बाद दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही टाउन DSP रामनरेश पासवान और सदर थानेदार सत्येन्द्र मिश्रा मौके पर पहुंचे। फिरौती वाला पत्र ले लिया। इसके बाद ठेकेदार से पूछताछ कर घटना की जानकारी ली।

दरवाजे पर खेल रही थी पल्लवी ठेकेदार ने बताया कि पल्लवी सातवीं कक्षा की छात्र है। वह दरवाजे पर चचेरी बहन के साथ
खेल रही थी। चन्दन तिवारी के पिता प्रमोद तिवारी भी बैठे हुए थे। इसी दौरान दो बाइक से तीन अपराधी पहुंचे। एक ने उतरते ही बच्ची को झट से पकड़कर बाइक पर बैठा लिया और मुंह दाब दिया। इसके बाद पल्लवी की चचेरी बहन को फिरौती वाला पत्र थमाकर कहा कि, जाओ बूढ़े को ये दे दो। इसके बाद वो बच्ची को बाइक से लेकर भाग निकले।

अपहरण की सूचना आसपास के सभी थानेदारों को दी गई। शहर के सभी एग्जिट और इंट्री पॉइंट पर नाकाबंदी कराई गई। बच्ची की तस्वीर भी पुलिस के वॉट्सऐप ग्रुप पर फॉरवर्ड की गई है। पुलिस की एक टीम मनियारी और गायघाट में टोल प्लाजा पर लगे CCTV कैमरे को खंगालने लगी, लेकिन देर रात तक कोई सुराग नहीं मिला।

घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है। लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं।
स्थानीय अनुकूल ने बताया कि यह गांव में पहली घटना है। पल्लवी की मां का रो-रोकर हाल बेहाल है। वह बच्ची के वियोग में बार-बार बेहोश हो रही है। पिता चन्दन तिवारी बताते हैं कि उनका किसी से कोई विवाद नहीं है। जिससे किसी पर घटना को अंजाम देने का शक कर सकें।

पत्र की लिखावट की भी जांच फिरौती वाला पत्र अंग्रेज़ी में है, लेकिन ये जिस तरह से लिखा गया है उससे लग रहा है कि अपहरणकर्ता अच्छी अंग्रेज़ी नहीं जानता है। उसने काफी टूटी फूटी भाषा में पत्र लिखा है। इसे पढ़कर ये समझ में आता है कि पांच लाख फिरौती नहीं देने पर बेटी की हत्या कर देगा। इसमें ये भी लिखा है कि अगर पुलिस को बताया तो भी बेटी की जान से हाथ धोना होगा। पुलिस एक्सपर्ट की मदद से इस पत्र के लिखावट की जांच कराने में जुट गई है।

पुलिस ने पल्लवी की तस्वीर पुलिस ग्रुप में शेयर किया है. देर रात तक बच्ची का सुराग नहीं मिल सका है. परिजन इस घटना से काफी भयभीत है. पल्लवी के पिता व मां का बुरा हाल है. नगर डीएसपी रामनरेश पासवान ने बताया कि मामले की जानकारी होने पर वह खुद पहुंचे हुए है. बच्ची की बरामदगी को लेकर विशेष टीम का गठन किया गया है. मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने की कवायद की जा रही है।

साइबर क्रायम को रोकने को लेकर अमेरिका ने बढ़ाया हाथ

अमेरिकी वाणिज्यदूतावास कोलकाता और कट्स इंटरनेशनल भारत के सूक्ष्म, मध्यम और छोटे व्यवसायों के लिए साइबर खतरों को कम करने के लिए हुआ करार

यूएस कांसुलेट जनरल कोलकाता (U.S. Consulate Kolkata) और कट्स इंटरनेशनल(CUTS International) ने एमएसएमई-डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एमएसएमई-डीआई), रांची (MSME-Development Institute (MSME-DI), Ranchi, और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक) (Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) के सहयोग से रांची में माइक्रो, स्मॉल और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए एक दिवसीय कार्यशाला

का आयोजन किया, उन्हें साइबर सुरक्षा खतरों की पहचान करने, और उनका मुकाबला करने, और अधिक साइबर-लचीला बनने के बारे में ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण से लैस करने के लिए। कार्यशाला में रांची की विभिन्न एमएसएमई इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

विश्व स्तर पर बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ, अधिक से अधिक व्यवसाय धीरे-धीरे व्यवसाय करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधों में लगातार वृद्धि हुई है। मैलवेयर, फ़िशिंग, रैंसमवेयर आदि के माध्यम से साइबर हमले आम हो गए हैं। कैसपर्सकी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, एमएसएमई में खतरों की समझ की कमी और एमएसएमई में साइबर सुरक्षा के महत्व के कारण लगभग 48% एमएसएमई ने डेटा उल्लंघनों का सामना किया है।

अमेरिकन सेंटर कोलकाता के नए निदेशक श्री एड्रियन प्रैट(Adrian Pratt) ने कहा, “अमेरिकी वाणिज्य दूतावास कोलकाता के लिए साइबर सुरक्षा पर कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित करने के लिए “साइबर सेफ ईस्ट इंडिया” नामक इस महत्वपूर्ण परियोजना पर CUTS अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक के साथ साझेदारी करके खुश है ई-व्यवसायों के लिए। यह परियोजना इस क्षेत्र को ई-व्यवसायों के लिए साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे से निपटने में मदद करेगी क्योंकि कई कंपनियां महामारी के दौरान ऑनलाइन हो गई हैं।”

कट्स इंटरनेशनल के नीति विश्लेषक अर्नब गांगुली(Arnab Ganguly) ने कार्यशालामें उल्लेख किया कि COVID-19 महामारी के कारण डिजिटल तकनीकों को अपनाने में तेजी आई है, और कई एमएसएमई साइबर हमलों से निपटने के लिए आवश्यक समझ और सुरक्षा उपायों के बिना ऑनलाइन हो गए, जिससे वे असुरक्षितहो गए। यह देखते हुए कि एमएसएमई भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30% का योगदान करते हैं, साइबर सुरक्षा उल्लंघनों के लिए लचीला बनने और अपने व्यवसायों को स्थायी रूप से विकसित करने के लिए उन्हें ज्ञान और उपकरणों से लैस करना अनिवार्य है।

एस के साहू(S K Sahoo), निदेशक, एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार, ने कहा कि, जहां कोविड-19 महामारी ने एमएसएमई के लिए काफी चुनौतियां पैदा की हैं, वहीं इसने एमएसएमई के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने व्यवसाय का विस्तार करने का अवसर भी पैदा किया है। हालांकि, एमएसएमई के लिए साइबर सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई की कमजोरियां कई कारकों से उपजी हैं, जैसे – साइबर सुरक्षा जोखिमों की समझ की कमी, साइबर सुरक्षा के लिए कम प्राथमिकता, साइबर सुरक्षा के लिए सीमित पूंजी आवंटन, आदि। साइबर सुरक्षा उल्लंघनों का सामना करने पर कैसे प्रतिक्रिया दें उसका आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करके इन अंतरालों को पाटना महत्वपूर्ण है।

सी-डैक(C-DAC, Patna) पटना के निदेशक और केंद्र प्रमुख आदित्य कुमार सिन्हा (Aditya Kumar Sinha) ने बताया कि सीमित जागरूकता और साइबर स्वच्छता के कारण साइबर अपराधों में भारी वृद्धि हुई है। एसएमई के साइबर स्पेस की भेद्यता को देखते हुए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। सी-डैक पटना का लक्ष्य एक राष्ट्रीय संसाधन केंद्र के रूप में काम करना है, ताकि साइबर सुरक्षा के मुद्दों को हल किया जा सके, सुरक्षित, मानक-आधारित प्रौद्योगिकियों और समाधानों के निर्माण, तैनाती और उपयोग में तेजी लाई जा सके।

अगले कदम के रूप में, अक्टूबर, 2021 के दौरान गुवाहाटी में इसी तरह की क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। कार्यशालाओं के बाद, एमएसएमई को साइबर स्पेस को सुरक्षित रूप से नेविगेट करने और साइबर जोखिम कम करने में मदद करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं की साइबर सुरक्षा का एक संग्रह जारी किया जाएगा।