ऐप में पाठ्यक्रम के सभी वर्गों के लिए वीडियो लेक्चर, इंटरैक्टिव क्विज़ और रीयल‑टाइम प्रश्न उत्तर सत्र शामिल हैं, जिससे छात्रों को घर बैठे ही शिक्षण का पूर्ण लाभ मिल सके।
ऐप का विकास बिहार राज्य शैक्षिक विभाग और निजी टेक कंपनियों के संयुक्त प्रयास से हुआ है। इस परियोजना के तहत, राष्ट्रीय शैक्षिक मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम सामग्री तैयार की गई है और इसे स्थानीय भाषाओं में अनुकूलित किया गया है।
तकनीकी टीम ने उच्च बैंडविड्थ सर्वर और क्लाउड‑आधारित प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग किया है, ताकि 24 घंटे की निरंतर सेवा सुनिश्चित की जा सके। इस पहल के वित्तीय स्रोत में राज्य बजट के अतिरिक्त शैक्षिक विकास कोष और कुछ राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा योजनाओं से प्राप्त अनुदान शामिल हैं।
शुरुआती चरण में, बक्सर सहित 38 जिलों के लगभग 1.2 लाख छात्रों ने इस एप्लिकेशन को डाउनलोड किया है। पहली लाइव सत्र में विज्ञान, गणित और भाषा विषयों के अनुभवी शिक्षक ने प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया, जिसमें छात्र अपने संदेह तुरंत पूछ सके। सत्र के दौरान, शिक्षक ने वास्तविक समय में स्क्रीन शेयर करके समाधान प्रस्तुत किए और छात्रों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। इस प्रकार के इंटरैक्टिव सत्र ने छात्रों के सीखने की गति को तेज किया और शैक्षिक समझ में स्पष्ट सुधार दिखाया।
सत्र समाप्त होने के बाद, छात्रों ने ऐप की उपयोगिता, सामग्री की स्पष्टता और शिक्षक की तत्परता को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कई छात्रों ने बताया कि वे पहले ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में अक्सर तकनीकी गड़बड़ी और उत्तर न मिलने की समस्या से जूझते थे, जबकि ‘बिहार विद्या साथी’ ने इन्हें काफी हद तक हल किया है। शिक्षक भी इस प्लेटफ़ॉर्म को अपनी पहुँच को विस्तारित करने का एक साधन मान रहे हैं, जिससे वे ग्रामीण क्षेत्रों में भी समान स्तर की शिक्षा प्रदान कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि ‘बिहार विद्या साथी’ राज्य के शैक्षिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि हर बच्चा, चाहे वह शहर में हो या दूर के गाँव में, को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। यह ऐप वही माध्यम है जो इस लक्ष्य को साकार करेगा।” उन्होंने यह भी उजागर किया कि यह पहल राष्ट्रीय डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के साथ संरेखित है और इससे बिहार में शैक्षिक असमानताओं को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
बिहार सरकार ने इस पहल के कार्यान्वयन पर निगरानी के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। इस फोर्स में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, आईटी विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं, जो ऐप की तकनीकी स्थिरता, उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया और शैक्षणिक प्रभाव का निरंतर मूल्यांकन करेंगे। फोर्स ने कहा कि अगले तीन महीनों में एप्लिकेशन में नई सुविधाएँ, जैसे कि एआई‑आधारित वैयक्तिकृत अध्ययन योजना और शैक्षिक खेल, जोड़ी जाएँगी।
विद्युत एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख ने कहा कि डिजिटल शिक्षा के विस्तार से बिजली की मांग में भी बढ़ोतरी होगी, इसलिए ग्रामीण इलाकों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को तेज़ किया जा रहा है। इस दिशा में, राज्य ने कई स्कूलों में सौर पैनल स्थापित किए हैं, जिससे ऐप के उपयोग के दौरान निरंतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। आर्थिक विभाग ने इस पहल को राज्य के डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में पहचाना है और कहा कि इससे भविष्य में शैक्षिक तकनीकी स्टार्ट‑अप्स को बढ़ावा मिलेगा।
सामाजिक प्रभाव की दृष्टि से, कई सामाजिक संगठनों ने इस पहल की सराहना की है। उन्होंने बताया कि डिजिटल शिक्षा से लैंगिक अंतर को कम करने में मदद मिलेगी, क्योंकि लड़कियों को घर से ही गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री और ऑनलाइन संसाधनों तक पहुंच मिल सकेगी। इससे विशेष रूप से उन छात्राओं को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें सामाजिक या आर्थिक कारणों से नियमित रूप से स्कूल जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल उपकरण और प्रशिक्षित शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, तो यह पहल लड़कियों की शिक्षा के साथ-साथ उनके आत्मनिर्भरता और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा दे सकती है।
Be First to Comment